मैंने पैतृक संपत्ति में से अपना हक मांगा तो लोग मुझे लालची समझ रहे हैं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 55 वर्ष है. मायका मेरा संपन्न है. 2 भाई हैंदोनों बहुत अच्छा कमा रहे हैंअपने अलगअलग घरों में रहते हैं. मम्मीपापा दोनों अपनी पैतृक कोठी में रहते थे. दोनों की पिछले वर्ष मृत्यु होने के बाद उस पैतृक कोठी को बेचने की बात उठी.  मैंने उस में अपना हिस्सा मांगा क्योंकि मेरे पति की कोई खास कमाई नहीं है. भाइयों के पास धनदौलतजमीनजायदाद की कमी नहीं है. इसलिए पैतृक संपत्ति में से मैं ने अपना हक मांगा. लेकिन दोनों भाइयों के मुंह बन गए. रिश्तेदारी में मुझे लालची औरत समझा जा रहा है. क्या मैं ने अपना हक मांग कर कोई गलत काम किया है. मुझे अपराधबोधी बनाया जा रहा है. मैं मानसिक यंत्रणा से गुजर रही हूं. बताइएक्या मैं इस से पीछे हट जाऊंअपना हक न लूं?

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जवाब

यह अफसोस की बात है कि हमारे समाज में पैतृक संपत्ति में अपना बराबर का हक मांगने वाली लड़कियों की समाज में लालची स्त्री की छवि बनती हैन कि अपने हक के लिए जागरूक लड़की की. मतलब लड़की सिर्फ अपने हिस्से के हक को मांगने भर से भी लालचीतेजतर्रार और विद्रोही मान ली जाती है जबकि भाई अपनी बहन के आर्थिक हक को मारने के बाद भी लालची नहीं माने जाते. अकसर ही बहनों का हक छीनने का न तो भाइयों को खुद ही कोई अपराधबोध होता है और न ही परिवाररिश्तेदार या समाज ही उन्हें ऐसा महसूस कराने की कोशिश करते हैं. लेकिन यदि संपत्ति में अपना हिस्सा लेने के कारण भाइयों से संबंध खत्म या खराब हो जाएं तो परिवाररिश्तेदार और समाज के लोग अकसर ही इस बात के लिए बहनों को और भी ज्यादा अपराधबोध में डालने की भरपूर कोशिश करते हैं.

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मायके से संबंध खराब होने और रिश्तेदारों में छवि बिगड़ने के डर के चलते ही हिंदू उत्तराधिकार कानून बनने के 13 सालों बाद भी ज्यादातर लड़कियां पैतृक संपत्ति में अपना हक नहीं ले पा रही हैं. समय के साथ लड़कों की सोच में बदलाव होगासो होगा लेकिन इस की पहल लड़कियों को ही करनी होगी क्योंकि खुद चल कर कोई उन का हक देने नहीं आएगा. साथ ही यदि मातापिता बचपन से ही सिर्फ बेटों को ज्यादा अहमियत न दें और लड़कियों को अकसर ही भाइयों की खुशी के लिए कुछ न कुछ त्याग करने को न कहें तो बेटे भी संपत्ति के बंटवारे को बहुत ही सहजता से लेंगे. लेकिन तब तक महिलाओं को मायके से संबंध खराब होने के डर से अपने आर्थिक हकों को नहीं छोड़ना चाहिए. जो संबंध सिर्फ संपत्ति के देने और न देने से ही कमजोर या मजबूत होता हो उस संबंध के खोखलेपन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

बहरहालआप अपराधबोध से ग्रस्त न हों और अपना हक लेने में संकोच न करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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श्यामली- भाग 1: जब श्यामली ने कुछ कर गुजरने की ठानी

‘श्यामली बुटीक’ लखनऊ शहर में किसी परिचय का मुहताज नहीं था. होता भी क्यों, क्योंकि श्यामलीजी के जीवन का मोटो था कि अपने काम में परफैक्शन. इसी लक्ष्य के कारण कुछ वर्षों में ही उन का बुटीक शहर का सब से अच्छा बुटीक बन गया.

श्यामलीजी की मीठी, मधुर आवाज और चेहरे पर खिली मुसकान के साथ कस्टमर की पसंद को समझते हुए समय पर काम पूरा कर के वे उन्हें खुश कर देती थीं.

अब तो उन की बेटी राशि भी फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर के आ गई थी और बुटीक में उन का हाथ बंटा रही थी. बेटा शुभ अमेरिका पढ़ने गया तो वहीं का हो कर रह गया.

सोम उन के बुटीक के मैनेजर बन गए थे. उन के बालों की चांदनी, आंखों में चश्मा और थकती काया उन से रिटायरमैंट का इशारा करती दिखाई देती थी.

रात के 8 बजने वाले थे. श्यामलजी बुटीक बंद करवाने की सोच ही रही थीं कि दौड़तीहांफती वन्या उन के सामने आ कर खड़ी हो गई. फिर बोली, ‘‘मैम, मेरा लहंगा रैडी है?’’

‘हां…हां… आप ट्रायल कर लो, तो मैं फिनिशिंग करवा दूं.’

वन्या ट्रायलरूम में लहंगा पहन कर बाहर आते ही उन से लिपट कर बोली, ‘‘थैंक्यू मैम, आप के हाथ में जादू है.’’

वन्या की मां प्रज्ञा ने अपने बैग से कार्ड निकाला और फिर उन्हें देती हुए बोलीं, ‘‘दी, आप को शादी में जरूर आना है.’’

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श्यामलीजी ने कार्ड को खोल कर देखते हुए कहा, ‘‘वैरी नाइस कार्ड.’’

‘‘7 दिसंबर… वाह जरूरी आऊंगी.’’

7 दिसंबर तारीख देखते ही श्यामलीजी अपने अतीत में खो गईं. पुरानी यादें चलचित्र की तरह उन की आंखों के सामने सजीव हो उठीं…

लखनऊ के पास सुलतानपुर एक छोटा सा शहर है. वे वहां रहती थीं. 3 बहनों और 2 भाइयों में वे सब से बड़ी थीं. पढ़ाई से अधिक सिलाईकढ़ाई में रुचि थी. जब वे छोटी थीं, तभी मां के दुपट्टे या साड़ी से अपनी गुडि़या के लिए तरहतरह के डिजाइनर लहंगे और दूसरी पोशाकें बनाया करती थीं.

ये सब देख कर मां कहतीं कि तुम्हें फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करवा देंगे. बीए पास करने के बाद फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर लिया. पापा को शादी की फिक्र होने लगी थी. उन के पास दहेज देने के लिए बड़ी रकम तो थी नहीं. वे नैट पर लड़कों का प्रोफाइल देखने में लगे रहते थे.

श्यामली का चेहरा गोल था, रंग गेहुंआ, लेकिन कटीले नैननक्श की वे नाजुक सी आकर्षक लड़की थीं. चचंल चितवन और प्यारी सी मुसकराहट सब को आकर्षित कर लेती. वे खाना बहुत अच्छा बनातीं इसलिए अपने पापा की अन्नपूर्णा थीं.

पापा को सोम का प्रोफाइल पसंद आया था. उन्होंने उन का बायोडाटा और छोटा सा फोटो उन के पिता के पास भेज दिया. सोम के पिता का लखनऊ के अमीनाबाद में खूब चलता हुआ बड़ा सा मैडिकल स्टोर था. अच्छाखासा संपन्न परिवार और साथ में इकलौता बेटा तो सोने में सुहागा जैसा था.

सोम के पिता केशवजी के फोन ने उन के घर में खुशियों की हलचल मचा दी. उन्होंने मेल आईडी मांगी. बस फिर शुरू हो गई थी सोम के साथ चैटिंग. सोम की प्यारभरी मीठीमीठी बातों ने श्यामलीजी के दिल के तार झंकृत कर दिए.

जल्दी ही शादी की शहनाइयां बज उठीं. वे अपने मन में सुनहरे भविष्य के रंगबिरंगे सपने संजो कर सोम का हाथ पकड़ कर उन की बड़ी सी कोठी में प्रवेश कर गईं. वे खुशी से फूली नहीं समा रही थीं.

सोम की बांहों के घेरे में सिमट कर वे विश्वास ही नहीं कर पा रहीं थीं कि उन की दुनिया इतनी हसीन भी हो सकती है.

श्यामली सोम के प्यार में डूबी थीं, लेकिन उन का रवैया कुछ समझ नहीं आ रहा था. 1-2 महीनों में उन्हें थोड़ा बहुत इशारा मिल गया कि सोम दुकान पर केवल पैसा लेने जाते और फिर दोस्तों के साथ सिगरेट, शराब और लड़कियों की संगत में ऐश की लाइफ जीने के शौकीन हैं.

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सोम बातबात पर उन्हें डांट देते थे, इसलिए वे उन से डरने लगी थीं. एक शाम सोम ने उन से क्लब चलने के लिए तैयार होने को कहा. वे अपने कमरे में तैयार हो रही थीं. तभी उन्हें सोम की पापा के साथ जोरजोर की कहासुनी की आवाजें सुनाई देने लगीं.

सोम के चेहरे पर तनाव देख कर उन्होंने उन से पूछा भी था कि क्या बात है? पापा क्यों नाराज हो रहे थे? इस पर सोम का जवाब था कि अपने काम से काम रखा करो.

उस दिन श्यामलीजी बड़े मन से तैयार हुई थीं. ब्लैक साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थीं.

ट्रैफिक में फंस जाने के कारण वे लोग क्लब काफी देर से पहुंचे. वहां कौकटेल पार्टी चल रही थी. सैक्सी ड्रैसेज पहनी महिलाओं के हाथ में डिं्रक के गिलास थे. श्यामली घबरा कर सोम के पीछे छिपने लगी थीं. उन के लिए वहां का माहौल एकदम से नया और अजीब सा था.

Manohar Kahaniya: किसी को न मिले ऐसी मां- भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

पंजाब के पटियाला जिले की घनौर तहसील के राजपुरा रोड पर बसे गांव खेड़ी गंडियां में रहने वाले दीदार सिंह के लिए शाम जीवन में अंधकार बन कर आई थी. उन के दोनों बेटे 10 साल का जश्नदीप सिंह और 6 साल का हरनदीप सिंह शाम करीब साढे़ 8 बजे घर के पास ही कोल्डड्रिंक लेने के लिए गए थे.

लेकिन जब वे आधे घंटे तक लौट कर घर नहीं आए तो उन की मां मंजीत कौर को चिंता होने लगी. थोड़ी देर बाद करीब 9 बजे मंजीत कौर के पति दीदार सिंह भी अपनी भांजी को गांव के बाहर बसअड्डे छोड़ कर घर लौटे तो उन्हें दोनों बच्चे घर में दिखाई नहीं दिए.

‘‘मंजीते… ओ मंजीते, जश्न… त हरन किधर हैं? भई दिखाई नहीं दे रहे.’’ दीदार सिंह ने बीवी मंजीत कौर से बच्चों के बारे में पूछा.

‘‘बच्चे तो एक घंटा पहले पास की दुकान से कोल्डड्रिंक खरीदने गए थे. बहुत देर से कोल्डड्रिंक पीने की जिद कर रहे थे, इसलिए मैं ने पैसे दे कर लाने के लिए भेज दिया था.’’ मंजीत कौर ने बताया.

मंजीत कौर को भी चिंता हुई. क्योंकि बच्चों को गए तो बहुत देर हो गई थी अब तक तो उन्हें आ जाना चाहिए था.

वह पति से बोली, ‘‘सुनो जी, मुझे भी अब चिंता हो रही है. पता नहीं बच्चे कहीं खेलने के लिए इधरउधर न निकल जाएं, इसलिए आप बाहर जा कर देख आओ. तब तक मैं किचन का काम निबटा लेती हूं. बच्चे आते ही खाना मांगेंगे.’’

दीदार सिंह को बच्चों के प्रति बीवी की लापरवाही पर गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन मन मसोस कर बड़बड़़ाता हुआ घर के बाहर निकल गया.

दीदार सिंह ने आसपास के सभी लोगों से पूछा, लेकिन कोई भी हरन व जश्न के बारे में ऐसी जानकारी नहीं दे सका, जिस से उन का कुछ पता चलता.

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जब घर आ कर दीदार सिंह ने बताया कि हरन व जश्न गांव में कहीं नहीं मिले तो मंजीत कौर के पांव तले की जमीन खिसक गई. आखिर एक मां के एक नहीं 2-2 बेटे एक साथ रात के ऐसे वक्त लापता हो जाएं तो उस का कलेजा तो फटना ही था.

घर में रोनापीटना शुरू हो गया. रोनापीटना शुरू हुआ तो आसपड़ोस के लोग जमा हो गए. गांवदेहात में अगर किसी के घर परेशानी हो तो पूरा गांव उस परेशानी को दूर करने में जुट जाता है. लिहाजा आधी रात होतेहोते पूरे गांव में हरन व जश्न के लापता होने की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. यह बात 22 जुलाई, 2019 की थी.

गांव के नौजवान और दीदार सिंह के परिवार के लोग टौर्च और मोबाइल की फ्लैश लाइट जला कर गांव के ऐसे हिस्सों में टोली बना कर ढूंढने के लिए निकल पडे़. कुछ लोग करीब 2 किलोमीटर दूर भाखड़ा नहर की तरफ भी बच्चों की तलाश करने चले गए, जहां  आमतौर पर गांव के बच्चे शाम को घूमने टहलने चले जाया करते थे.

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सुबह होते ही परिवार के लोग और गांव वाले खेड़ी गंडियां थाने पहुंच गए. उन्होंने थाने में दोनों बच्चों के लापता होने की सूचना दे कर पुलिस से बच्चों की तलाश करने का अनुरोध किया. पुलिस ने उसी दिन गुमशुदगी दर्ज कर ली.

पुलिस ने बच्चों के फोटो ले कर आसपास के इलाकों में उन के पोस्टर चिपकवा दिए. गुमशुदगी के मामलों में पुलिस आमतौर पर इस से ज्यादा कोई काररवाई करती भी नहीं है. इसी तरह 3 दिन बीत गए, लेकिन बच्चों का कहीं पता नहीं चला. अब दीदार सिंह व गांव वालों का धीरज जवाब देने लगा था.

लिहाजा पहले तो पीडि़त परिवार और सभी गांव वालों ने मिल कर खेड़ी गंडियां के बाहर राजपुरा रोड पर प्रदर्शन कर जाम कर दिया. धरनाप्रदर्शन शुरू होते ही जिले के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गए. इलाके की सांसद परनीत कौर व कांग्रेस के विधायकों ने एसएसपी के ऊपर इस मामले का जल्द  खुलासा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था.

अगले भाग में पढ़ें-  एक बच्चे की मिली लाश

विषबेल- भाग 4: आखिर शर्मिला हर छोटी समस्या को क्यों विकराल बना देती थी

काम करने की आदत शर्मिला को नहीं थी, ससुराल में तो नंदिनी मौसी गरमगरम पका कर थाली हाथ में पकड़ाती थीं. उस पर भी वह मीनमेख निकालती रहती थी, अब मायके में काम करना पड़ा तो पैरोंतले से जमीन खिसकने लगी. नीरा और जया खाना होटल से मंगवाने की राय देतीं. 2-4 बार उस ने मंगवाया भी, लेकिन बजट बिगड़ने लगा, तो हाथ रोकना पड़ा. फिर, नवजात गौरव के लिए दलिया और सूप तो बनाना ही पड़ता था.

शर्मिला से जितना बन पड़ता, घर का काम करती. गौरव को भी संभालती. पिता की छोटी सी दुकान थी. मुट्ठीभर कमाई से क्या खाते क्या निचोड़ते? इतना पैसा नहीं था कि एक नौकर रखा जा सके. अपने रोजमर्रा के खर्चे शर्मिला एटीएम से पैसे निकाल कर पूरे कर लेती थी. जो थोड़ीबहुत रकम बचती, उसे उस की बहनें उड़ा देतीं.

शर्मिला के न दिल को आराम था न शरीर को. एक बार उस के मन में आया कि वापस लौट जाए अपने घर, फिर अहम आड़े आ गया. खुद घर छोड़ कर आई थी, बिन बुलाए जाने का मतलब था समीर के तलवे चाटना और उसे यह कतई मंजूर नहीं था.

इधर, समीर का बुरा हाल था. शर्मिला  झगड़ालू थी, किसी की इज्जत नहीं करती थी, कोई बात ही नहीं मानती थी, फिर भी उस के रहने से घर में चहलपहल रहती थी. कोई बोलने वाला तो था. गौरव के आने के बाद तो घर की सूनी दीवारें भी बोलने लगी थीं.

पुरानी बातें याद कर समीर का सिर भारी हो गया था.

देवयानीजी अब रोज पूछतीं, ‘‘शर्मिला कब आ रही है?’’ समीर हर संभव नियंत्रण करता, लेकिन उस के भीतर का हाहाकार साफ दिखाई दे जाता. पिता सम झाते, ‘‘पतिपत्नी के बीच अहम का कोई प्रश्न ही नहीं उठता. स्नेहवश  झुकना पराजय की स्वीकृति नहीं होती, जा कर बहू को ले आ.’’

शर्मिला ऐसे ही विचारों में खोई थी, तभी उस के पिता कन्हैया लाल ने प्रवेश किया, बोले, ‘‘बेटी, समीर आया था तु झे लेने दुकान पर. अरविंद को लखनऊ से आए हुए 3 महीने हो गए हैं, अब उस की क्लीनिक का शुभारंभ होने वाला है. मैं और जया भी चलेंगे.’’

‘‘जया भी…’’

‘‘हां, सोचता हूं कि अरविंद के साथ जया का रिश्ता पक्का कर दूं, जानापहचाना परिवार है. तू भी वहीं है, तेरे सासससुर और समीर सभी सज्जन हैं. जया खुश रहेगी.’’

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‘‘कहां है समीर?’’

‘‘दुकान पर. तेरी प्रशंसा कर रहा था. उस ने तेरी कोई शिकायत नहीं की. मैं ने अरविंद के साथ जया के रिश्ते की बात की, तो बोला, ‘‘अगर शर्मिला को यह रिश्ता पसंद है तो मैं अरविंद से बात करता हूं.’’

शर्मिला मन ही मन सोच रही थी, ‘‘निहायत बदतमीज, धूर्त और समूचे घर की दुश्मन होने पर भी मेरे ऊपर इतना भरोसा?’’

‘‘मैं गंगा तर जाऊंगी बेटी,’’ शर्मिला की मां ने भी पति का पक्ष लिया.

शर्मिला सोच में पड़ गई.

‘‘यह रहा निमंत्रणपत्र,’’ कन्हैया लाल ने निमंत्रणपत्र आगे बढ़ाया तो शर्मिला निमंत्रणपत्र पढ़ कर अवाक रह गई, ‘‘क्लिनिक का उद्घाटन मेरे करकमलों द्वारा, सरकारी अस्पताल के सिविल सर्जन और मैडिकल कालेज के प्रख्यात प्रोफैसरों को छोड़ कर?

‘‘समीर से कह दीजिए, हम पहली ट्रेन से ही चलेंगे.’’

‘‘लेकिन समीर को भोजन आदि? पहली बार आए हैं.’’

‘‘आप चिंता न करें. बस, मेरी बात जा कर कह दें. हम रास्ते में ही कहीं कुछ खा लेंगे,’’ शर्मिला तैयारी में जुट गई.

सुहागशृंगार से सजी पत्नी को देख

कर समीर सुखद आश्चर्य में डूब

गया, ‘‘शर्मिला?’’

समीर को गौरव थमा कर शर्मिला बोली, ‘‘तुम ने मु झे माफ कर दिया?’’

‘‘मैं तुम से रूठा ही कब था, नाराज तो तुम थीं.’’

‘‘तभी तुम ने अरविंद के आने की मु झे कोई सूचना नहीं दी?’’ उस ने तनिक रूठ कर उलाहना दिया.

‘‘अरविंद तुम्हारा बहुत आदर करता है. वह तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था. इसीलिए अपने क्लीनिक के रेनोवेशन में लगा हुआ था.’’

क्लीनिक के उद्घाटन समारोह के बाद एकांत पाते ही कन्हैया लाल ने शर्मिला को घेरा, ‘‘मैं जया को इसलिए साथ लाया हूं बेटी कि बात अभी पक्की हो जाए.’’

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‘‘पिताजी, आप ने देखा शहर के प्रतिठित लोगों के बीच अरविंद और उस के नौजवान साथी डाक्टरों ने मेरे पैर छू कर मु झ से आशीर्वाद मांगा. विश्वास कीजिए उन क्षणों में मेरी उम्र बढ़ गई और मैं सम झदार हो गई. पिताजी रूप, लावण्य तो कुदरत की देन है, असली सुंदरता तो गुणों और संस्कारों से आती है. अफसोस है कि मां और आप ने मु झे इस अमूल्य धरोहर से वंचित रखा,’’ शर्मिला ने गंभीर स्वर में पिता को उलाहना दिया, ‘‘पिताजी इस घर के लोग बड़े सरलसीधे और सच्चे हैं, आज की दुनियादारी और चालाकी से कोसों दूर.

‘‘मैं इन्हें तिलतिल कर के मार रही थी, किंतु अब इन्हें और मरने नहीं दूंगी. मेरा अरविंद तो एकदम भोला है, हमेशा दूसरों पर निर्भर और विश्वास करने वाला. जया तो उस की जिंदगी में जहर घोल देगी. मैं उस के लिए ऐसी सुंदर, सुशिक्षित और संस्कारी लड़की लाऊंगी, जो अरविंद के जीवन को सुवासित फूलों से भर दे.’’

‘‘यह क्या कह रही है तू शर्मिला?’’

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‘‘हां पिताजी, मैं आप की बेटी हूं मगर बाद में. पहले मैं इस घर की बहू हूं और मेरे लिए जो असंदिग्ध आस्था प्रकट की गई है उस का निर्वाह मैं करूंगी. जया के लिए ऐसा मूर्ख घरबार मिलने में देर नहीं लगेगी जो कन्या के सौंदर्य और शिक्षा के सामने संस्कारों की तलाश नहीं करता. अरविंद के साथ जया की शादी हरगिज नहीं होगी.’’

और शर्मिला की बड़ीबड़ी आंखों में अडिग संकल्प के साथ पानी तैर आया. कन्हैया लाल प्रकाशहीन विद्युत स्तंभ की भांति निश्छल खड़े थे.

MMS लीक होने के बाद भोजपुरी एक्ट्रेस Trishakar Madhu ने फैंस से मांगी मदद, देखें Video

भोजपुरी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस त्रिशाकर मधु इन दिनों अपनी वीडियो को लेकर सुर्खियों में छायी हुई है. दरअसल कुछ दिन पहले एक्ट्रेस का एमएमएस सोशल मीडिया पर लीक हो गया था. और इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें जमकर ट्रोल किया गया.

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने त्रिशाकर मधुर पर आरोप भी लगाए थे. कई लोगों ने ये भी कहा था कि ये एक्ट्रेस का कोई पब्लिसिटी स्टंट है. तो वहीं एक्ट्रेस ने इसे झूठा करार दिया था.  एक इंटरव्यू के अनुसार एक्ट्रेस ने बताया कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. ये वीडियो काफी पुराना है लेकिन इस समय इसे किसने वायरल किया है, मैं खुद नहीं जानती.

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त्रिशाकर मधु एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक्टिव हुई हैं और लगातार अपने फैंस से उन्हें सपोर्ट करने के लिए कह रही हैं. हाल ही में एक वीडियो पोस्ट करते हुए एक्ट्रेस ने लिखा है कि जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते है.

 

त्रिशाकर मधु ने वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते है. बहादुर वो कहलाते है, जो हार निश्चित हो, फिर भी मैदान नहीं छोड़ते. कितना गंदा बोलना है, बोलिए सब एक्सेप्ट है सर झुका कर… क्योंकि समय आपका है.

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बता दें कि त्रिशाकर मधु कई लोकप्रिय भोजपुरी सॉन्ग्स में भी नजर आ चुकी हैं. वह भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के साथ भी काम कर चुकी हैं.

Anupamaa: सौतेले बेटे के साथ जमकर नाची काव्या, देखें Viral Video

मदालसा शर्मा, रुपाली गांगुली और सुधांशु पांडे स्टारर सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) हर हफ्ते TRP चार्ट में टॉप पर बना हुआ है. शो में इन लगातार महाट्विस्ट देखने को मिल रहा है. अनुज कपाड़िया की एंट्री से कहानी में नया मोड़ आ चुका है. अनुज अनुपमा की हर तरह से मदद करना चाहता है तो वहीं वनराज अनुपमा को हर वक्त ताना देते नजर आ रहा है और उसे अनुज से जलन हो रही है.

शो के आने वाले एपिसोड में आप ये भी देखेंगे कि अनुज अनुपमा को अपना बिजनेस पार्टनर बनाएगा तो दूसरी तरफ वनराज कहेगा कि बचपन का क्रश इस उम्र में रंग ला रहा है. इसी बीच काव्या (मदालसा शर्मा) का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आइए बताते हैं इस वीडियो के बारे में.

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मदालसा शर्मा यानी काव्या सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह शो में निगेटिव रोल प्ले करती हैं. वह आए दिन अपनी तस्वीरें व वीडियो शेयर करती रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपना एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है जिसमें वह अपने सौतेले बेटे समर के साथ खूब डांस कर रही हैं.

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‘राधा कैसे न जले’ इस गाने पर काव्या, अनुपमा के बेटे समर के साथ ठुमके लगा रही हैं. काव्या ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, सबसे क्यूट कृष्ण के साथ. शो में काव्या-समर एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं लेकिन रियल लाइफ में ये काफी अच्छे दोस्त हैं. बता दें कि पारस कलनावत समर का किरदार निभाते हैं. वह अनुपमा का फेवरेट बेटा है. दर्शक मां-बेटे की इस जोड़ी को खूब पसंद करते हैं.

Shehnaaz Gill की मां से मिले अभिनव-रूबिना, सिद्धार्थ के जाने के बाद ऐसी हो गई है हालत

सिद्धार्थ शुक्ला ने 2 सितम्बर को दुनिया को अलविदा कह दिया. एक्टर की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है. सिद्धार्थ की मौत से सेलिब्रिटी से लेकर फैंस तक सदमे में है. सिद्धार्थ शुक्ला की बेस्ट फ्रेंड और को-कंटेंस्टेंट शहनाज गिल इस घटना से पूरी तरह टूट गई हैं. इसी बीच रूबिना और अभिनव ने एक्ट्रेस का हाल बताया है. आइए बताते हैं शहनाज गिल की हालत के बारे में.

बिग बॉस ओटीटी में मौत से कुछ दिन पहले ही सिद्धार्थ और शहनाज नजर आए थे. इनकी जोड़ी को फैंस काफी पसंद करते थे. सिद्धार्थ की मौत के बाद शहनाज की तबीयत ज्यादा खराब चल रही थी. वह किसी से बात भी नहीं कर रही थीं. लेकिन अब बताया जा रहा है कि एक्ट्रेस इन दिनों रिकवर कर रही हैं.

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शहनाज की मां से रुबीना दिलाइक और अभिनव शुक्ला मिलने गये थे. खबरों के अनुसार उन्होंने बताया है कि शहनाज की हालत अब ठीक है.एक्ट्रेस की मां ने उन्हें बताया कि सिद्धार्थ की मौत के बाद सब लोग घर में दुखी हैं.

 

रिपोर्ट के मुताबिक अभिनव-रुबिना ने बताया है कि शहनाज गिल अब पहले से बेहतर हैं और उनकी तबीयत में सुधार हो रहा है. अभिनव ने ये भी कहा कि वह इन दिनों रीकवर कर रही हैं.

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अभिनव शुक्ला की वर्कफ्रंट की बात करे तो वह हाल में ही खतरों के खिलाड़ी 11 से बाहर हुए हैं. उन्होंने अभिनव के साथ सना मकबूल भी सेमीफाइनल से बाहर हो गई हैं.

मालिनी के डर्टी गेम का होगा खुलासा? Imlie करेगी आदित्य को माफ!

स्टार प्लस का सीरियल इमली में इन दिनों हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि मालिनी आदित्य की पत्नी का दर्जा पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. और वह अपने प्लान में कामयाब होती नजर आ रही है. तो दूसरी तरफ इमली पूरी तरह टूट गई है. वह आदित्य का घर छोड़ना चाहती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में जबरदस्त ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि इमली घर छोड़कर चली जाएगी. तो वहीं आदित्य काफी दुखी होगा.  वह मालिनी के साथ रात गुजारने को लेकर पछताता नजर आएगा. वह इन सबके लिए खुद को जिम्‍मेदार ठहराएगा. वह बहुत लाचार महसूस करेगा.

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तो दूसरी तरफ मालिनी इमली का जाने से काफी खुश नजर आएगी. वह अपनी मां अनु से इस बारे में बात करेगी और जीत का जश्न मनाएगी. तभी आदित्‍य वहां आ जाएगा और उसे मालिनी पर शक होगा. आदित्‍य मन ही मन फैसला लेगा कि उस रात क्या हुआ था,  उसकी सच्‍चाई का जरूर पता करेगा.

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उस रात की कुछ बातें याद आने लगेंगी मगर वह पूरी तरह से कंफर्म नहीं होगा. ऐसे में वह मालिनी से सच्‍चाई उगलवाने की कोशिश करेगा. लेकिन मालिनी उसे अपनी बातों में उलझाने की कोशिश करेगी. ऐसे में आदित्‍य भड़क जाएगा और गुस्‍से में मालिनी का हाथ मोड़ देगा.

 

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शो में आप ये भी देखेंगे कि आदित्य मालिनी से चिल्‍लाते हुए पूछेगा कि उस रात की सच्‍चाई क्या थी? शो में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अगर मालिनी आदित्य को डर्टी गेम का सच्चाई बताती है तो क्या इमली घर वापस आ जाएगी और आदित्य से उसका रिश्ता फिर से जुड़ जाएगा?

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