सत्यकथा: पति बदलने की फितरत

राइटर- मुकेश तिवारी/रणजीत सुर्वे

सुबह का आगाज होते ही शिवनगर में  लोगों की दिनचर्या शुरू हो गई थी. सड़क पर लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी. इसी के साथ हत्या की एक सनसनीखेज घटना ने माहौल में गरमाहट पैदा कर दी. इस की सूचना पुलिस को दी गई तो थानाप्रभारी से ले कर एसपी तक हत्या की सूचना पा कर मौके पर पहुंच गए थे.

दरअसल, 17 नवंबर, 2021 की सुबह जनकगंज थाने के अतंर्गत आने वाले शिवनगर में खबर फैली कि दुष्कर्म के बाद किसी ने बबली कुशवाहा की गला घोंट कर हत्या कर दी है. इस मामले में अफवाह जंगल की आग की तरह इतनी तेजी से फैली कि थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ लग गई.

इस भीड़ में क्षेत्रीय पार्षद से ले कर राजनैतिक दलों के कार्यकर्ता तक शामिल थे, जो इस हत्या को ले कर आपस में कानाफूसी करने में मशगूल थे. लेकिन उन में से किसी में भी इतनी हिम्मत नहीं थी जो मकान मालिक से पूछता कि अचानक किस ने बबली की हत्या कर दी?

इन सभी में इस घटना को ले कर काफी नाराजगी थी. वे सभी बबली के हत्यारे को तत्काल पकड़ने की मांग कर रहे थे. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे थानाप्रभारी ने महिला की हत्या के मामले से पुलिस के आला अधिकारियों को अवगत करा दिया.

इसी सूचना पर थोड़ी देर में एसपी अमित सांघी, एएसपी सतेंद्र सिंह तोमर, सीएसपी आत्माराम शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. मामला दुष्कर्म की आशंका और हत्या का था, पुलिस अफसरों ने सब से पहले बबली के कमरे के बाहर खड़ी भीड़ को हटाया और उस के बाद घटनास्थल का गहनता से निरीक्षण किया.

एएसपी सतेंद्र सिंह तोमर और सीएसपी आत्माराम शर्मा ने जनकगंज थानाप्रभारी संतोष यादव के साथ कमरे के भीतर जा कर सब से पहले चारपाई पर अस्तव्यस्त हालत में पड़े बबली के शव को गौर से देखा तो पता चला कि मृतका की हत्या दुपट्टे से गला घोट कर की गई थी.

मृतका के गले में दुपट्टा कसा हुआ था. कमरे की तलाशी ली तो घटनास्थल पर नमकीन, चिप्स, कंडोम, बीयर की बोतल आदि के खुले पैकेट मिले.

संदिग्ध वस्तुओं को देख कर पुलिस को कुछ संदेह हुआ. इसी के मद्देनजर एक महिला कांस्टेबल को बुला कर बबली के सारे शरीर का निरीक्षण कराया गया. पता चला कि मृतका के शरीर से कीमती जेवर गायब थे.

घटनास्थल के निरीक्षण में सदिग्ध वस्तुएं मिलने से पुलिस टीम के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि बबली और हत्यारे के मध्य यौन संबंध रहे होंगे और किसी बात पर विवाद होने पर हत्यारे ने उस के दुपट्टे से उस का गला घोट दिया होगा.

बबली की हत्या का दुखद समाचार सुन कर उस की मां और भाई भी वहां पहुंच गए थे, उन्होंने बबली के शव को देखा तो पता चला कि उस के कान के बाले, मंगलसूत्र, मोबाइल और 5 हजार रुपए गायब हैं.

चूंकि यह सब कीमती सामान था, इसलिए इस मामले में लूटपाट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था. कुल मिला कर यह मामला काफी उलझा हुआ लग रहा था.

आगे बढ़ने के लिए थानाप्रभारी संतोष यादव ने बारीकी से घटनास्थल पर पड़ी एकएक चीज का जायजा लेना शुरू किया. बबली का अस्तव्यस्त हालत में शव चारपाई पर पड़ा था. शव के निकट ही संदिग्ध वस्तुएं पड़ी हुई थीं.

मृतका के गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था, जिसे देख कर उन्होंने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने दुपट्टे से बबली की हत्या की होगी.

थानाप्रभारी ने क्राइम टीम को फोन कर के घटनास्थल पर बुला लिया था. इस के बाद बबली के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया.

साथ ही घटनास्थल पर मौजूद संदिग्ध वस्तुओं को अपने कब्जे में ले कर संतोष यादव थाने लौट आए और हत्या के इस मामले के खुलासे के लिए एसपी अमित साहनी ने एसपी (सिटी) लश्कर आत्माराम शर्मा के निर्देशन में एक टीम बनाई. टीम में थानाप्रभारी संतोष यादव, एसआई पप्पू यादव आदि को शामिल किया गया.

थानाप्रभारी संतोष यादव ने हत्या की तह में जाने के लिए बबली की मकान मालकिन गीता से भी गहन पूछताछ की. उस ने बताया कि 13 नवंबर को ही बबली ने कमरा किराए पर लिया था.

यहां वह अकेली रहती थी. उस का पति गांव में रहता था. उस से उस की अनबन चल रही थी. बबली की पहली शादी 2003 में लक्ष्मण कुशवाहा से हुई थी. शादी के 8 साल बाद ही उस का पति से तलाक हो गया था. पहले पति से उस के एक बेटी रितिका है. बेटी पहले पति के साथ ही रहती है.

इस के बाद बबली ने 2015 में चीनौर के घरसौंदी में रहने वाले धर्मवीर कुशवाहा से दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन आजादखयालों की बबली की अपने दूसरे पति से भी नहीं बनी और झगड़े होने लगे. जिस वजह से उस ने दूसरे पति को भी छोड़ दिया था. उस का दूसरा पति बेटे कार्तिक के साथ घरसौदी में रहता है.

गीता ने आगे बताया कि सुबह उठने पर जब उन्हें बबली दिखाई नहीं दी तो उन्हें हैरानी हुई. क्योंकि रोजाना वह उन से पहले उठ कर नल पर पानी भरने आ जाती थी. उन की समझ में नहीं आया कि बबली को क्या हो गया, जो आज वह इतनी देर तक सो रही है?

बबली को जगाने के लिए उन्होंने आंगन में खडे़ हो कर कई बार आवाज लगाई. बबली ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो वह उसे जगाने के लिए उस के कमरे के दरवाजे को धकेलते हुए जैसे ही कमरे के भीतर दाखिल हुई, वहां का नजारा देख कर उस के होश उड़ गए.

मकान मालकिन ने बताया कि बबली बिस्तर पर मृत पड़ी थी. उस के गले में दुपट्टा कसा हुआ था और मुंह व नाक से खून बह रहा था. यह देख कर वह चीखती हुई बाहर की तरफ दौड़ी.

उस की चीख सुन कर आसपड़ोस के लोग आ गए. सभी ने कमरे के भीतर जा कर चारपाई पर बबली का शव पड़ा हुआ देखा. मगर किसी की समझ में नहीं आया कि आखिर हत्या किस ने कर दी.

मकान मालकिन के बयान से पुलिस अधिकारियों ने अंदाजा लगाया कि बबली की हत्या करने वाला उस का कोई पूर्व परिचित था. इस की वजह यह थी कि बबली किसी अंजान के लिए दरवाजा नहीं खोलती थी. अत: थानाप्रभारी द्वारा अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 302 भादंवि के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

तहकीकात को गति देने  के लिए संतोष यादव ने सब से पहले साइबर सेल के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से बबली के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की तो पता चला कि एक ही नंबर से बबली के मोबाइल पर बारबार फोन किए गए थे.

शक होने पर उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो पता चला वह मोबाइल नंबर डबरा के रहने वाले प्रेम कुशवाहा का था.

उस का नाम और पता मिल गया तो संतोष यादव की टीम ने पे्रम के घर पर दबिश दी. लेकिन वह घर से गायब मिला. फिर उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया तो उस की लोकेशन मिल गई. पुलिस ने उसे लक्ष्मीगंज सब्जीमंडी के पीछे स्थित संजय नगर से हिरासत में ले लिया.

प्रेम कुशवाहा को जनकगंज थाने ला कर  थानाप्रभारी ने उस से कहा, ‘‘तुम ने सोचा कि तुम से चालाक इस शहर में कोई दूसरा नहीं है. बबली को मार कर इत्मीनान से उस के गहने आदि समेट कर वहां से निकल लिए.’’

सख्ती से पूछताछ की गई तो थोड़ी आनाकानी के बाद उस ने स्वीकार कर लिया कि बबली की गला घोट कर हत्या उसी ने की थी. पे्रम ने हत्या की जो कहानी बताई, वह कुछ इस प्रकार थी—

प्रेम कुशवाहा ने पुलिस को यह भी बताया कि उस की बबली से दोस्ती 5 महीने पहले एक मिस्ड काल के जरिए हुई थी. बबली का मिस्ड काल उस के पास आई तो उस ने पलट कर काल की. इस के बाद हम दोनों में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया.

इस तरह उन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं. फिर जल्दी ही इश्क के मुकाम तक पहुंच कर अवैध संबंधों में बदल गई. उन्हें जब भी मौका मिलता, जिस्म की प्यास बुझा लेते थे.

अपने प्रेमी प्रेम कुशवाहा से सहजता से मिलने के मकसद से बबली ने हाल ही में शिवनगर में गीता शर्मा के मकान में एक कमरा किराए पर लिया था.

16 नवंबर की रात को प्रेम बबली से मुलाकात करने उस के कमरे पर गया था. बातों ही बातों में बबली ने उस से कहा, ‘‘अगर तुम मेरे जिस्म का आनंद लेना चाहते हो तो तुम्हें आज ही 10 हजार रुपया देने होंगे.’’

बबली के मुंह से पैसों की बात सुन कर प्रेम चौंक गया. उस ने उस से कहा कि अभी तो उस के पास पैसे नहीं हैं तो वह कहने लगी कि यदि अभी रुपया नहीं दोगे तो वह रेप के आरोप में उसे आज ही जेल भिजवा देगी.

उन दोनों में इसी बात को ले कर कुछ ज्यादा ही कहासुनी हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि प्रेम को गुस्सा आ गया और उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया.

जाते वक्तपुलिस को गुमराह करने के लिए बबली के कान के बाले, मंगलसूत्र, मोबाइल फोन और उस के पर्स से रुपए निकाल कर वहां से फरार हो गया था, जिस से पुलिस लूट के लिए हत्या मान कर पड़ताल करती रहे.

प्रेम कुशवाहा को क्या पता था कि वह  बबली के जेवर बेच कर मौज करने के बजाए जेल चला जाएगा.

पुलिस ने बबली के प्रेमी की निशानदेही पर बबली के गहने, मोबाइल फोन बरामद कर उसे अदालत में पेश किया तो जज के सामने भी उसने अपना अपराध बिना किसी पछतावे के स्वीकार कर लिया.

प्रेम कुशवाहा को अदालत में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया. भोलाभाला दिखने वाला शातिर हत्यारा प्रेम कुशवाहा अब सलाखों के पीछे है.

जानें क्यों लड़कों के लिए खतरनाक है प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड का बढ़ना

लड़कों को होने वाली काफी बीमारियां ऐसी भी जो होने पर ना सिर्फ दर्द देती है बल्कि अंदर तक तोड़ देती है. एक रिसर्च बताती है की लड़को से जुड़ी गुप्त समस्या की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. एक तरफ बिजी लाइफ स्टाइल है तो दूसरी तरफ उम्र से पहले ही बुढ़ापे की तरह जिंदगी जीने का तरीका. 40 की उम्र के बाद ज्‍यादातर पुरुष प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड में वृद्धि की समस्‍या से परेशान होते हैं. प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी माना जाता है. पौरूष ग्रंथि (Virgin gland) शरीर में कुछ बेहद ही जरूरी क्रिया करती है. जैसे यूरीन के बहाव को कंट्रोल करना और प्रजनन के लिए सीमन बनाना. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह ग्रंथि बढ़ने लगती है. इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता है और इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं. तो अगर आप भी इस समस्या से परेशान है और निजात पाना चाहते हैं तो जाने इस प्रौब्लम का कारण और इसका इलाज…

प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड बढ़ने पर क्या होता है ?

प्रोस्टेट ग्लैंड ज्यादा बढ़ जाने पर कई लक्षण सामने आने लगते हैं जैसे यूरीन रूक-रूक कर आना, पेशाब करते समय दर्द या जलन और यूरीन ट्रेक्ट इन्फेक्शन बार-बार होना. प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने से मरीज बार-बार पेशाब करने जाता है मगर वह यूरीन पास नहीं कर पाता. अगर बार-बार यह परेशानी होती है तो पौरूष ग्रंथि (Virgin gland)  बढ़ने की संभावना हो सकती है. ऐसी अवस्था मरीज के लिए कष्टदायक होती है. उसे समझ नहीं आता कि क्या करना चाहिए.

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प्रोस्‍टेट के ट्रीटमेंट 

दूसरे रोग की तरह प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने का भी इलाज संभव है. ऐसी बहुत सी दवाइयां हैं, जिससे मरीज को काफी आराम महसूस होता है और वह सामान्य दिनचर्या जी सकता है. इसके लिए कुछ अच्छे घरेलू उपाय भी हैं जैसे सीताफल के बीज इस बीमारी में बेहद लाभदायक होते हैं.

सीताफल के कच्चे बीज को अगर हर दिन अपने खाने में इस्तेमाल किया जाए, तो प्रोस्टेट ग्‍लैंड में वृद्धि की समस्या से बचा जा सकता है. इन बीजों में ऐसे ‘प्लांट केमिकल’ मौजूद होते हैं, जो शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं नहीं बन पातीं.

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मददगार है सीताफल  

आयरन, फॉस्फोरस, टि्रप्टोफैन, कॉपर, मैग्नेशियम, मैग्नीज, विटामिन के, प्रोटीन, जरूरी फैटी एसिड और फाइटोस्टेरोल कच्चे सीताफल के बीज में काफी मात्रा में मौजूद होते हैं. ये बीज जिंक के बेहतरीन स्रोतों में से एक माने जाते हैं. हर दिन 60 मिलीग्राम जिंक का सेवन प्रोस्टेट से जूझ रहे मरीजों में बेहद फायदा पहुंचाता है और उनके स्वास्थ्य में भी सुधार करता है. इन बीजों में बीटा-स्टिोसटेरोल भी होता है जो टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टेरोन में बदलने नहीं देता.

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तो इसलिए आप कभी भी प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड में वृद्धि को नजर अंदाज ना करें और इस घरेलू उपाय का इस्तेमाल करके बचाव करें. लेकिन हम आपको ये सलाह जरुर देगें की ये समस्या होने पर किसी अच्छे डाक्टर से  जरुर ट्रीटमेंट कराएं.

कभी-कभी ऐसा भी – भाग 2

मुझ में ज्यादा समझ तो नहीं थी लेकिन यह जरूर पता था कि जिंदगी में शार्टकट कहीं नहीं मारने चाहिए. उन से पहुंच तो आप जरूर जल्दी जाएंगे लेकिन बाद में लगेगा कि जल्दबाजी में गलत ही आ गए. कई बार घर पर भी ए.सी., फ्रिज, वाशिंग मशीन या अन्य किसी सामान की सर्विसिंग के लिए मेकैनिक बुलाओ तो वे भी अब यही कहने लगे हैं कि मैडम, बिल अगर नहीं बनवाएंगी तो थोड़ा कम पड़ जाएगा. बाकी तो फिर कंपनी के जो रेट हैं, वही देने पड़ेंगे.

श्रेयस हमेशा यह रास्ता अपनाने को मना करते हैं. कहते हैं कि थोड़े लालच की वजह से यह शार्टकट ठीक नहीं. अरे, यथोचित ढंग से बिल बनवाओ ताकि कोई समस्या हो तो कंपनी वालों को हड़का तो सको. वह आदमी तो अपनी बात से मुकर भी सकता है, कंपनी छोड़ कर इधरउधर जा भी सकता है मगर कंपनी भाग कर कहां जाएगी. इतना सब सोच कर मैं ने कहा, ‘‘नहीं, आप चालान की रसीद काटिए. मैं पूरा जुर्माना भरूंगी.’’

मेरे इस निर्णय से उन दोनों के चेहरे लटक गए, उन की जेबें जो गरम होने से रह गई थीं. मुझे उन का मायूस चेहरा देख कर वाकई बहुत अच्छा लगा. तभी मन में आया कि इनसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है, जरूरत है अपने पर विश्वास की और पहल करने की.

वैसे तो श्रेयस के साथ के कई अफसर यहां थे और पापा के समय के भी कई अंकल मेरे जानकार थे. चाहती तो किसी को भी फोन कर के हेल्प ले सकती थी लेकिन श्रेयस के पीछे पहली बार घर संभालना पड़ रहा था और अब तो नईनई चुनौतियों का सामना खुद करने में मजा आने लगा था. ये आएदिन की मुश्किलें, मुसीबतें, जब इन्हें खुद हल करती थी तो जो खुशी और संतुष्टि मिलती उस का स्वाद वाकई कुछ और ही होता था.

पूरा जुर्माना अदा कर के आत्म- विश्वास से भरी जब थाने से बाहर निकल रही थी तो देखा कि 2 पुलिस वाले बड़ी बेदर्दी से 2 लड़कों को घसीट कर ला रहे थे. उन में से एक पुलिस वाला चीखता जा रहा था, ‘‘झूठ बोलते हो कि उन मैडम का पर्स तुम ने नहीं झपटा है.’’

‘‘नाक में दम कर रखा है तुम बाइक वालों ने. कभी किसी औरत की चेन तो कभी पर्स. झपट कर बाइक पर भागते हो कि किसी की पकड़ में नहीं आते. आज आए हो जैसेतैसे पकड़ में. तुम बाइक वालों की वजह से पुलिस विभाग बदनाम हो गया है. तुम्हारी वजह से कहीं नारी शक्ति प्रदर्शन किए जा रहे हैं तो कहीं मंत्रीजी के शहर में शांति बनाए रखने के फोन पर फोन आते रहते हैं. बस, अब तुम पकड़ में आए हो, अब देखना कैसे तुम से तुम्हारे पूरे गैंग का भंडाफोड़ हम करते हैं.’’

एक पुलिस वाला बके जा रहा था तो दूसरा कालर से घसीटता हुआ उन्हें थाने के अंदर ले जा रहा था. ऐसा दृश्य मैं ने तो सिर्फ फिल्मों में ही देखा था. डर के मारे मेरी तो घिग्गी ही बंध गई. नजर बचा कर साइड से निकलना चाहती थी कि बड़ी तेजी से आवाज आई, ‘‘मैडम, मैडम, अरे…अरे यह तो वही मैडम हैं…’’

मैं चौंकी कि यहां मुझे जानने वाला कौन आ गया. पीछे मुड़ कर देखा. बड़ी मुश्किल से पुलिस की गिरफ्त से खुद को छुड़ाते हुए वे दोनों लड़के मेरी तरफ लपके. मैं डर कर पीछे हटने लगी. अब जाने यह किस नई मुसीबत में फंस गई.

‘‘मैडम, आप ने हमें पहचाना नहीं,’’ उन में से एक बोला. मुझे देख कर कुछ अजीब सी उम्मीद दिखी उस के चेहरे पर.

‘‘मैं ने…आप को…’’ मैं असमंजस में थी…लग तो रहा था कि जरूर इन दोनों को कहीं देखा है. मगर कहां?

‘‘मैडम, हम वही दोनों हैं जिन्होंने अभी कुछ दिनों पहले आप की गाड़ी की स्टेपनी बदली थी, उस दिन जब बीच रास्ते में…याद आया आप को,’’ अब दूसरे ने मुझे याद दिलाने की कोशिश की.

उन के याद दिलाने पर सब याद आ गया. इस गाड़ी की वजह से मैं एक नहीं, कई बार मुश्किल में फंसी हूं. श्रेयस ने यहां से जाते वक्त कहा भी था, ‘एक ड्राइवर रख देता हूं, तुम्हें आसानी रहेगी. तुम अकेली कहांकहां आतीजाती रहोगी. बाहर के कामों व रास्तों की तुम्हें कुछ जानकारी भी नहीं है.’ मगर तब मैं ने ही यह कह कर मना कर दिया था कि अरे, मुझे ड्राइविंग आती तो है. फिर ड्राइवर की क्या जरूरत है. रोजरोज मुझे कहीं जाना नहीं होता है. कभीकभी की जरूरत के लिए खामखां ही किसी को सारे वक्त सिर पर बिठाए रखूं. लेकिन बाद में लगा कि सिर्फ गाड़ी चलाना आने से ही कुछ नहीं होता. घर से बाहर निकलने पर एक महिला के लिए कई और भी मुसीबतें सामने आती हैं, जैसे आज यह आई और आज से करीब 2 महीने पहले वह आई थी.

उस दिन मेरी गाड़ी का बीच रास्ते में चलतेचलते ही टायर पंक्चर हो गया था. गाड़ी को एक तरफ रोकने के अलावा और कोई चारा नहीं था. बड़ी बेटी को उस की कोचिंग क्लास से लेने जा रही थी कि यह घटना घट गई. उस के फोन पर फोन आ रहे थे और मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करूं. गाड़ी में दूसरी स्टेपनी रखी तो थी लेकिन उसे लगाने वाला कोई चाहिए था. आसपास न कोई मैकेनिक शौप थी और न कोई मददगार. कितनी ही गाडि़यां, टेंपो, आटोरिक्शा आए और देखते हुए चले गए. मुझ में डर, घबराहट और चिंता बढ़ती जा रही थी. उधर, बेटी भी कोचिंग क्लास से बाहर खड़ी मेरा इंतजार कर रही थी. श्रेयस को फोन मिलाया तो वह फिर कहीं व्यस्त थे, सो खीझ कर बोले, ‘अरे, पूरबी, इसीलिए तुम से बोला था कि ड्राइवर रख लेते हैं…अब मैं यहां इतनी दूर से क्या करूं?’ कह कर उन्होंने फोन रख दिया.

काफी समय यों ही खड़ेखड़े निकल गया. तभी 2 लड़के मसीहा बन कर प्रकट हो गए. उन में से एक बाइक से उतर कर बोला, ‘मे आई हेल्प यू, मैडम?’

समझ में ही नहीं आया कि एकाएक क्या जवाब दूं. बस, मुंह से स्वत: ही निकल गया, ‘यस…प्लीज.’ और फिर 10 मिनट में ही दोनों लड़कों ने मेरी समस्या हल कर मुझे इतने बड़े संकट से उबार लिया. मैं तो तब उन दोनों लड़कों की इतनी कृतज्ञ हो गई कि बस, थैंक्स…थैंक्स ही कहती रही. रुंधे गले से आभार व्यक्त करती हुई बोली थी, ‘‘तुम लोगों ने आज मेरी इतनी मदद की है कि लगता है कि इनसानियत और मानवता अभी इस दुनिया में हैं. इतनी देर से अकेली परेशान खड़ी थी मैं. कोई नहीं रुका मेरी मदद को.’’ थोड़ी देर बाद फिर श्रेयस का फोन आया तो उन्हें जब उन लड़कों के बारे में बताया तो वह भी बहुत आभारी हुए उन के. बोले, ‘जहां इस समाज में बुरे लोग हैं तो अच्छे लोगों की भी कमी नहीं है.’

और आज मेरे वे 2 मसीहा, मेरे मददगार इस हालत में थे. पहचानते ही तुरंत उन के पास आ कर बोली, ‘‘अरे, यह सब क्या है? तुम लोग इस हालत में. इंस्पेक्टर साहब, इन्हें क्यों पकड़ रखा है? ये बहुत अच्छे लड़के हैं.’’

‘‘अरे, मैडम, आप को नहीं पता. ये वे बाइक सवार हैं जिन की शिकायतें लेले के आप लोग आएदिन पुलिस थाने आया करते हैं. बमुश्किल आज ये पकड़ में आए हैं. बस, अब इन के संगसंग इन के पूरे गिरोह को भी पकड़ लेंगे और आप लोगों की शिकायतें दूर कर देंगे.’’

इतना बोल कर वे दोनों पुलिस वाले उन्हें खींचते हुए अंदर ले गए. मैं भी उन के पीछेपीछे हो ली.

मुझे अपने साथ खड़ा देख कर वे दोनों मेरी तरफ बड़ी उम्मीद से देखने लगे. फिर बोले, ‘‘मैडम, यकीन कीजिए, हम ने कुछ नहीं किया है. आप को तो पता है कि हम कैसे हैं. उन मैडम का पर्स झपट कर हम से आगे बाइक सवार ले जा रहे थे और उन मैडम ने हमें पकड़वा दिया. हम सचमुच निर्दोष हैं. हमें बचा लीजिए, प्लीज…’’

एक लड़का तो बच्चों की तरह जोरजोर से रोने लगा था. दूसरा बोला, ‘‘इंस्पेक्टर साहब, हम तो वहां से गुजर रहे थे बस. आप ने हमें पकड़ लिया. वे चोर तो भाग निकले. हमें छोड़ दीजिए. हम अच्छे घर के लड़के हैं. हमारे मम्मीपापा को पता चलेगा तो उन पर तो आफत ही आ जाएगी.’’

मर्यादाओं का खून

Holi Special: ये कैसा सौदा- भाग 2

‘‘नहींनहीं, संगीता, यह कोई मजाक नहीं. हम सचमुच तुम्हारी जिया को पूरी कानूनी कार्यवाही के साथ अपनी बेटी बनाना चाहते हैं.’’

संगीता के सामने कीमती कपड़ों और गहनों से लदी एक धनवान औरत आज अपनी झोली फैलाए बैठी थी लेकिन वह न तो उस की खाली झोली भर सकती थी और न ही अपनी झोली पर गुमान ही कर सकती थी. उस की आंखों से आंसू बह चले.

श्रीमती दीक्षित जानती हैं कि उन्होंने एक मां से उस के दिल का टुकड़ा मांगा है लेकिन वे भी क्या करें? अपने सूने जीवन और सूने आंगन में बहार लाने के लिए उन्हें मजबूर हो कर ऐसा फैसला लेना पड़ा है. वरना सालों से वे (दीक्षित दंपती) किसी दूसरे का बच्चा गोद लेने के लिए भी कहां तैयार हो रहे थे. कल जिया को देख कर पता नहीं कैसे उन का मन इस के लिए तैयार हो गया था.

उन्होंने संगीता की गरीबी पर एक भावुकता भरा पैंतरा फेंका, ‘‘संगीता, क्या तुम नहीं चाहोगी कि तुम्हारी बेटी बंगले में पहुंच जाए और राजकुमारी जैसा जीवन जिए?’’

‘‘हम गरीब हैं बीबीजी, हमारे जैसे साधन, वैसे ही सपने. हमें तो सपनों में भी फांके और अभाव ही आते हैं,’’ संगीता अपने आंसू पोंछते हुए बोली.

‘‘इसलिए कहती हूं कि कीमती सपने देखने का एक अवसर मिल रहा है तो उस का लाभ उठा और अपनी छोटी बेटी मेरी झोली में डाल दे,’’ श्रीमती दीक्षित ने फिर अपना पक्ष रखा.

‘‘कोई कितना भी गरीब क्यों न हो बीबीजी, अपनी जरूरत के वक्त गहना, जमीन, बरतन आदि बेचेगा, पर औलाद तो कोई नहीं बेचता न?’’ कहते हुए संगीता उठ कर चल दी.

‘‘ऐसी कोई जल्दी नहीं है संगीता, तू अपने आदमी से भी बात कर, हो सकता है उसे हमारी बात समझ में आ जाए,’’ श्रीमती दीक्षित ने संगीता को रोकते हुए कहा.

‘‘नहीं बीबीजी, मरद से क्या पूछना है? हमारी बेटियां हमारी जिम्मेदारी बेशक हैं, बोझ नहीं हैं. मैं तो कुछ और ही सोच कर आई थी,’’ कहते हुए संगीता तेज कदमों से बाहर निकल गई.

घर पहुंचते ही संगीता रिया और जिया को सीने से चिपटा कर फूटफूट कर रो पड़ी. विक्रम को समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या है. वह कुछ पूछता इस से पहले संगीता ने ही उसे सारी कहानी सुना दी.

सब सुन कर विक्रम को अपनी गरीबी पर झुंझलाहट हुई. फिर भी अपने को संयत कर उस ने संगीता को समझाया कि जब वह अपनी जिया को देने के लिए तैयार ही नहीं है तो कोई क्या कर लेगा. लेकिन मन ही मन वह डर रहा था कि पैसे वालों का क्या भरोसा. कहीं जिया को अगवा कर विदेश ले गए तो वह कहां फरियाद करेगा और कौन सुनेगा उस गरीब की?

वह रात संगीता और विक्रम पर बहुत भारी गुजरी. कितने ही बुरेबुरे खयाल रात भर उन्हें परेशान करते रहे. उन का प्यार और जिया का भविष्य रात भर तराजू में तुलता रहा. रात भर आंखें डबडबाती रहीं, दिल डूबता रहा.

सुबह होते ही दीक्षित साहब ने विक्रम को कोठी पर बुलवाया. बुलावे के नाम पर तिलमिला गया और वहां पहुंचते ही चिल्लाया, ‘‘नहीं दूंगा मैं अपनी बेटी. नहीं चाहता मैं कि मेरी बेटी राजकुमारी सा जीवन जिए. आप इतने ही दयावान हैं तो दुनिया भरी है गरीबों से, अनाथों से, हम पर ही इतनी मेहरबानी क्यों?’’

उस की बात सुन कर दीक्षित दंपती को जरा भी बुरा नहीं लगा. बड़े प्यार से उस का स्वागत किया और उसे अपने बराबर सोफे पर बिठाया. बड़ी सहजता से उन्होंने पूरी बात समझाते हुए अपनी याचना उस के सामने रखी, लेकिन विक्रम बारबार मना ही करता रहा. तब उन्होंने विक्रम के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रख दिया जिसे सुन कर वह हैरान रह गया. उस ने तो पहले इस बारे में कभी सुना ही नहीं था.

दीक्षित दंपती ने विक्रम के सामने संगीता की कोख किराए पर लेने का प्रस्ताव रखा था. विक्रम का चेहरा बता रहा था कि वह कुछ नहीं समझा है तो उन्होंने विक्रम को समझाया कि जैसे आजकल हम जरूरतमंदों को अपना खून, आंखें, दान करते हैं वैसे ही किसी निसंतान दंपती को संतान का सुख देने के लिए कोख का भी दान किया जा सकता है. ऐसे निसंतान मातापिता को किसी की संतान गोद नहीं लेनी पड़ती बल्कि वे अपनी ही संतान पा सकते हैं.

विक्रम तब भी कुछ नहीं समझा तो दीक्षित साहब ने उसे फिर समझाया, ‘‘बस, तुम इतना समझो कि ऐसे में डाक्टरों की मदद से संतान के इच्छुक पिता का बीज किराए की कोख में रोप दिया जाता है जिसे 9 महीने तक गर्भ में रख कर शिशु का रूप देने वाली मां, सैरोगेट मां कहलाती है. हमारी सरकार ने इसे कानूनी तौर पर वैध भी घोषित कर दिया है.’’

इतना ही नहीं उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस दौरान वे संगीता के इलाज, दवाइयों, अस्पताल के खर्च के अलावा उस की खुराक आदि का पूरा खयाल रखेंगे. संगीता भले ही लड़के को जन्म दे या लड़की को उन्हें वह बच्चा स्वीकार्य होगा और वे उसे ले कर विदेश जा बसेंगे. यह सब पूरी लिखापढ़ी और कानूनी कार्यवाही के साथ होगा. संगीता जिस दिन डाक्टरी प्रक्रिया से गुजर कर गर्भवती हो जाएगी उन्हें पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपए दे दिए जाएंगे. उस के बाद बच्चे के जन्म पर उन्हें 2 लाख रुपए और दिए जाएंगे.

दीक्षित साहब ने सबकुछ विक्रम को कुछ इस तरह समझाया कि उस ने संगीता को इस काम के लिए राजी कर लिया. एक परिवार का सूना आंगन बच्चे की किलकारियों से गूंज उठेगा और उन का अपना जीवन अभावों की दलदल से निकल कर खुशियों से भर जाएगा. जल्दी ही पूरी डाक्टरी प्रक्रिया और कागजी कार्यवाही से गुजर कर विक्रम और संगीता अपनी बेटियों के साथ दीक्षित की कोठी के पीछे नौकरोें के क्वार्टर में रहने को आ गए. उन्हें पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपए भी मिल गए थे.

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कभी-कभी ऐसा भी – भाग 1

शौपिंग कर के बाहर आई तो देखा मेरी गाड़ी गायब थी. मेरे तो होश ही उड़ गए कि यह क्या हो गया, गाड़ी कहां गई मेरी? अभी थोड़ी देर पहले यहीं तो पार्क कर के गई थी. आगेपीछे, इधरउधर बदहवास सी मैं ने सब जगह जा कर देखा कि शायद मैं ही जल्दी में सही जगह भूल गई हूं. मगर नहीं, मेरी गाड़ी का तो वहां नामोनिशान भी नहीं था. चूंकि वहां कई और गाडि़यां खड़ी थीं, इसलिए मैं ने भी वहीं एक जगह अपनी गाड़ी लगा दी थी और अंदर बाजार में चली गई थी. बेबसी में मेरी आंखों से आंसू निकल आए.

पिछले साल, जब से श्रेयस का ट्रांसफर गाजियाबाद से गोरखपुर हुआ है और मुझे बच्चों की पढ़ाई की वजह से यहां अकेले रहना पड़ रहा है, जिंदगी का जैसे रुख ही बदल गया है. जिंदगी बहुत बेरंग और मुश्किल लगने लगी है.

श्रेयस उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च सरकारी सेवा में है, सो हमेशा नौकर- चाकर, गाड़ी सभी सुविधाएं मिलती रहीं. कभी कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी. बैठेबिठाए ही एक हुक्म के साथ सब काम हो जाता था. पिछले साल प्रमोशन के साथ जब उन का तबादला हुआ तो उस समय बड़ी बेटी 10वीं कक्षा में थी, सो मैं उस के साथ जा ही नहीं सकती थी और इस साल अब छोटी बेटी 10वीं कक्षा में है. सही माने में तो अब अकेले रहने पर मुझे आटेदाल का भाव पता चल रहा था.

सही में कितना मुश्किल है अकेले रहना, वह भी एक औरत के लिए. जिंदगी की कितनी ही सचाइयां इस 1 साल के दौरान आईना जैसे बन कर मेरे सामने आई थीं.

औरों की तो मुझे पता नहीं, लेकिन मेरे संग तो ऐसा ही था. शादी से पहले भी कभी कुछ नहीं सीख पाई क्योंकि पापा भी उच्च सरकारी नौकरी में थे, सो जहां जाते थे, बस हर दम गार्ड, अर्दली आदि संग ही रहते थे. शादी के बाद श्रेयस के संग भी सब मजे से चलता रहा. मुश्किलें तो अब आ रही हैं अकेले रह के.

मोबाइल फोन से अपनी परेशानी श्रेयस के साथ शेयर करनी चाही तो वह भी एक मीटिंग में थे, सो जल्दी से बोले, ‘‘परेशान मत हो पूरबी. हो सकता है कि नौनपार्किंग की वजह से पुलिस वाले गाड़ी थाने खींच ले गए हों. मिल जाएगी…’’उन से बात कर के थोड़ी हिम्मत तो खैर मिली ही मगर मेरी गाड़ी…मरती क्या न करती. पता कर के जैसेतैसे रिकशा से पास ही के थाने पहुंची. वहां दूर से ही अपनी गाड़ी खड़ी देख कर जान में जान आई.

श्रेयस ने अभी फोन पर समझाया था कि पुलिस वालों से ज्यादा कुछ नहीं बोलना. वे जो जुर्माना, चालान भरने को कहें, चुपचाप भर के अपनी गाड़ी ले आना. मुझे पता है कि अगर उन्होंने जरा भी ऐसावैसा तुम से कह दिया तो तुम्हें सहन नहीं होगा. अपनी इज्जत अपने ही हाथ में है, पूरबी.

दूर रह कर के भी श्रेयस इसी तरह मेरा मनोबल बनाए रखते थे और आज भी उन के शब्दों से मुझ में बहुत हिम्मत आ गई और मैं लपकते हुए अंदर पहुंची. जो थानेदार सा वहां बैठा था उस से बोली, ‘‘मेरी गाड़ी, जो आप यहां ले आए हैं, मैं वापस लेने आई हूं.’’

उस ने पहले मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा, फिर बहुत अजीब ढंग से बोला, ‘‘अच्छा तो वह ‘वेगनार’ आप की है. अरे, मैडमजी, क्यों इधरउधर गाड़ी खड़ी कर देती हैं आप और परेशानी हम लोगों को होती है.’’

मैं तो चुपचाप श्रेयस के कहे मुताबिक शांति से जुर्माना भर कर अपनी गाड़ी ले जाती लेकिन जिस बुरे ढंग से उस ने मुझ से कहा, वह भला मुझे कहां सहन होने वाला था. श्रेयस कितना सही समझते हैं मुझे, क्योंकि बचपन से अब तक मैं जिस माहौल में रही थी ऐसी किसी परिस्थिति से कभी सामना हुआ ही नहीं था. गुस्से से बोली, ‘‘देखा था मैं ने, वहां कोई ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड नहीं था. और भी कई गाडि़यां वहां खड़ी थीं तो उन्हें क्यों नहीं खींच लाए आप लोग. मेरी ही गाड़ी से क्या दुश्मनी है भैया,’’ कहतेकहते अपने गुस्से पर थोड़ा सा नियंत्रण हो गया था मेरा.

इतने में अंदर से एक और पुलिस वाला भी वहां आ पहुंचा. मेरी बात उस ने सुन ली थी. आते ही गुस्से से बोला, ‘‘नो पार्किंग का बोर्ड तो कई बार लगा चुके हैं हम लोग पर आप जैसे लोग ही उसे हटा कर इधरउधर रख देते हैं और फिर आप से भला हमारी क्या दुश्मनी होगी. बस, पुलिस के हाथों जब जो आ जाए. हो सकता है और गाडि़यों में उस वक्त ड्राइवर बैठे हों. खैर, यह तो बताइए कि पेपर्स, लाइसेंस, आर.सी. आदि सब हैं न आप की गाड़ी में. नहीं तो और मुश्किल हो जाएगी. जुर्माना भी ज्यादा भरना पड़ेगा और काररवाई भी लंबी होगी.’’

उस के शब्दों से मैं फिर डर गई मगर ऊपर से बोल्ड हो कर बोली, ‘‘वह सब है. चाहें तो चेक कर लें और जुर्माना बताएं, कितना भरना है.’’

मेरे बोलने के अंदाज से शायद वे दोनों पुलिस वाले समझ गए कि मैं कोई ऊंची चीज हूं. पहले वाला बोला, ‘‘परेशान मत होइए मैडम, ऐसा है कि अगर आप परची कटवाएंगी तो 500 रुपए देने पड़ेंगे और नहीं तो 300 रुपए में ही काम चल जाएगा. आप भी क्या करोगी परची कटा कर. आप 300 रुपए हमें दे जाएं और अपनी गाड़ी ले जाएं.’’

उस की बात सुन कर गुस्सा तो बहुत आ रहा था, मगर मैं अकेली कर भी क्या सकती थी. हर जगह हर कोने में यही सब चल रहा है एक भयंकर बीमारी के रूप में, जिस का कोई इलाज कम से कम अकेले मेरे पास तो नहीं है. 300 रुपए ले कर चालान की परची नहीं काटने वाले ये लोग रुपए अपनीअपनी जेब में ही रख लेंगे.

नशा बिगाड़े दशा – भाग 3 : महेश की हालत कैसी थी

जब पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तफतीश शुरू की, तो वह हैरान रह गई कि सीमा के सिम की आखिरी लोकेशन राजनांदगांव में महेश के भाड़े के कमरे के आसपास थी.

पूछताछ करने के लिए पुलिस महेश को छुईखदान थाने ले गई, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ. लेकिन सीमा के घर वालों को पक्का यकीन था कि सीमा के गायब होने में इसी दारूबाज का हाथ हो सकता है.

सीमा के घर वालों की तसल्ली के लिए पुलिस ने महेश को पकड़ कर लौकअप में डाल दिया. उसे डरायाधमकाया और कुटाई भी की, लेकिन वह कुछ नहीं उगला.

महेश के खिलाफ कोई ठोस सुबूत नहीं मिलने से पुलिस ने उस को इस शर्त पर छोड़ दिया कि वह राजनांदगांव छोड़ कर कहीं नहीं जाएगा और सीमा के मामले में बुलावे पर थाने में तुरंत हाजिर हो जाएगा.

अभी इतनी ही आपबीती महेश के दिमाग से गुजरी थी कि उस के कमरे का सामान खड़कने लगा, बरतन गिरने लगे, खिड़कियां बजने लगीं. इस से उस की तंद्रा टूट गई. उस ने देशी दारू एक गिलास में उड़ेली और बिना पानी मिलाए ही पी गया.

जब शैतानी नशा सिर चढ़ा, तब महेश को लगा कि सीमा उस के सामने ही बैठी है. वह उसे घूर कर गुस्से से बोल रही है, ‘कितनी दारू पीएगा? पीपी कर मर जाएगा, पर गम कम नहीं होगा तेरा.’

महेश ने अपने सिर को जोरदार झटका दे कर दोबारा सामने देखा, तो वहां कोई नहीं था. क्या यह उस का वहम है? नहींनहीं, यह वहम नहीं, बल्कि हकीकत है. अभीअभी उसे देखा है.

महेश डर के मारे कमरे से निकल ही रहा था कि सीमा ने उसे लंगी मार कर गिरा दिया और चीखने लगी, ‘मुझे मारेगा तू… मैं तुझे जिंदा चबा जाऊंगी…’

इस बार सीमा का रूप भयानक हो चुका था. उस के लंबे बाल बिखरे व उलझे हुए थे. हाथों में लंबेलंबे नाखून उग आए थे. दांत इस कदर बाहर निकले हुए थे जैसे पिशाचिनों के निकले रहते हैं. जीभ लपलपाते हुए वह महेश का गला दबा ही रही थी कि वह उनींदे से घबरा कर जाग उठा और ‘नहींनहीं, मुझे मत मार’ कहता हुआ खाट से जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़ा.

महेश के बिस्तर से गिरते ही दरवाजा जोर से खुला, जैसे कोई दरवाजा खोल कर भाग गया हो. वह पसीने से तरबतर हो गया. ख्वाब के बारे में सोचा, तो सोचता ही रह गया. उस की सांस फूल गई और किसी धौंकनी की तरह चलने लगी. आज की रात भी वह सो न सका कि सुबह हो गई.

महेश सुबह दफ्तर गया, तो वहां भी उस के कानों को वही डरावनी आवाजें सुनाई देने लगीं, जो रात को सुनाई दे रही थीं. इस तरह सीमा के कत्ल के बाद उस का लगातार खानापीना, उठनाबैठना, रहनासोना और जीना हराम हो गया. वह जिंदा लाश बन कर रह गया.

रातों की नींद व दिन का चैन रोजाना उड़ जाने से वह बचैनी से एक दिन गिरतेपड़ते पुलिस थाना पहुंचा. खुद को पुलिस के हवाले किया. एक सरकारी वकील के सामने लिखित में जुर्म कबूला और रुंधे गले से सबकुछ उगलने लगा.

यह सुन कर थानेदार के चेहरे पर मुसकान तैर गई. उन्होंने फोन लगाया, ‘‘सीमा बेटी, जहां भी हो, थाने में फौरन पहुंचो, तुम्हारा गुनाहगार थाने में सरैंडर करने आया है.’’

‘‘सीमा… क्या वह जिंदा है?’’ महेश का चेहरा फक्क पड़ गया, मुंह खुला का खुला रह गया. काटो तो खून नहीं जैसी हालत हो गई.

‘‘हां, अब आगे बोलो और क्या बताना चाह रहे हो सीमा की मौत के बारे में?’’ थानेदार ने उस की ओर हिकारत से देख कर कहा.

महेश की हालत सांपछछूंदर सी हो गई, मति चकराने लगी. उसे कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था कि आगे क्या बोले, इसीलिए वह कभी थानेदार की ओर देखता रहा, तो कभी नीचे मुंडी कर अपनेआप को.

इतने में एक स्कूटी थाने में आ कर रुकी. सीमा दनदनाते हुए थानेदार के रूम में जा पहुंची. महेश सीमा को देख कर हैरानी से खड़ा हो गया, ‘‘अरे सीमा, तू…’’

‘हां, मैं सीमा. मैं हूं जिंदा. तू ने तो मुझे मार ही डाला था नीच. पर, मैं उस फरिश्ते बुजुर्ग की मेहरबानी से बच गई, जो उस रात अपने खेत की रखवाली करने के लिए वहां से निकल रहा था.

‘‘मेरे अचानक घर पहुंचने पर मेरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वहां मैं ने अपनी सहेलियों के साथ मिल कर तुझे सताने, डराने और तड़पाने का प्लान बनाया. इस काम में पुलिस ने भी हमारी मदद की.

‘‘तुम्हारे घर का जो ताला तुम्हें खुला मिला था, वह मैं ने अपने भाई की मदद से डुप्लीकेट चाबी का जुगाड़ कर खोला था और तुम्हारे घर में तुम्हें मैं अपनी सहेली के साथ मिल कर डरा रही थी.’’

महेश रंगे हाथ पकड़ में आए अपराधी की तरह सिर झुकाए सब सुनता रहा. उस की दशा ऐसी हो गई थी, जैसे अभी धरती फट पड़े, तो वह उस में समा जाए.

सीमा ने अचानक पैतरा बदला और बोली, ‘‘अब तक तू ने सीमा का प्यार देखा है, अब लातघूंसे देख…’’ और हिम्मती सीमा तैश में महेश की लातघूंसों से इस कदर मरम्मत करने लगी कि वह अधमरा हो गया.

थानेदार ने सीमा से कहा, ‘‘न बेटी, कानून इस को सजा देगा…’’ लेकिन, सीमा के हाथपैर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, जैसे वह पूरी भड़ास अभी उतार देना चाह रही हो. जब वह थक गई, तब उस के ऊपर थूक कर चली गई.

TV की हॉट जोड़ी Jasmin Bhasin और Aly Goni का हो गया है ब्रेकअप?

सलमान खान के रिएलिटी शो बिग बॉस 14 की सबसे हॉट जोड़ी रहे जैस्मिन भसीन और अली गोनी आजकल अपने ब्रेकअप की अफवाहों से सुर्खियों में हैं. Bigg Boss शो के दौरान दोनों ने नैशनल टीवी पर अपने रिश्ते को कबूल किया था . लेकिन जैस्मिन की फैमिली दोनों के रिश्ते को लेकर हमेशा से ही नाखुश रही.

बावजूद इसके शो खत्म होने के बाद भी दोनों को एक साथ देखा गया और जैस्मिन को अली की फैमिली के साथ काफी घुलते मिलते भी स्पॉट किया गया. जैस्मिन और अली की जोड़ी टीवी की हॉट जोड़ी में शामिल हैं,और फैंस उन्हें साथ देखकर काफी खुश भी होते हैं.

लेकिन बीते दिनों एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर बवाल मचाया हुआ है. यह तस्वीर जैस्मिन और उनके क्लोज़ फ्रेंड पूर्वा राणा की हैं. वैलेंटाइन डे के दिन शेयर की गई इस तस्वीर से फैंस यह अंदाज़ा लगा रहे हैं कि जैस्मिन अब अली के साथ रिश्ते में नहीं हैं. तस्वीर के सामने आने के बाद से ही जैस्मिन भसीन और अली गोनी के ब्रेकअप की चर्चा हर तरह हो रही है. इतना ही नहीं इन ब्रेकअप की ख़बरों के बीच अब जेस्मिन भसीन ने सोशल मीडिया पर अजीबोगरीब पोस्ट शेयर करके सभी को चौंका दिया है.

जैस्मिन भसीन ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई पोस्ट शेयर किए हैं. इनमें से एक पोस्ट में लिखा हुआ है, ‘जब आप लोगों के साथ वैसा व्यवहार करते हैं जैसा वह आपके साथ करते हैं, तो वे परेशान हो जाते हैं’. अब जैस्मिन ने यह पोस्ट किसके लिए और क्यूँ डाला वो तो जैस्मिन खुद बता सकती हैं. लेकिन जेसली (Jasly) के फैंस इन दोनों के रिश्ते को लेकर परेशान दिखाई दे रहे हैं और इस पोस्ट के पीछे की  वजह पूछ रहे हैं .

गौर करने वाली बात यह भी है कि जैस्मिन भसीन और अली गोनी ने  बीते कुछ दिनों से एक-दूसरे के साथ कोई भी पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर नहीं किया है .हर मौके पर एक-दूसरे पर प्यार लुटाने वाले अली गोनी और जैस्मिन भसीन ने वैलेंटाइन डे के मौके पर भी कोई खास पोस्ट नहीं शेयर की. उनके फैंस को उनके फोटोज़ और वीडियोज़ का हमेशा इंतज़ार रहता है .

मनोहर कहानियां: सुहागरात की तल्खियां

  शंभु सुमन

25नवंबर, 2021 की दोपहर का समय था. करनाल जिले में तरवाड़ी की पुलिस को नैशनल हाईवे पर गुरुद्वारे के पास खेतों में खून से लथपथ शव पड़े होने की सूचना मिली. खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई तो वास्तव में वहां औंधे मुंह एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली.

शव की हालत और आसपास के माहौल को देख कर हत्या का सहज अंदाजा लगाया जा सकता था. शव के पास आटो स्टार्ट करने वाली रस्सी पड़ी थी. वहीं पर एक मोटरसाइकिल स्टैंड पर खड़ी हुई थी. मोटरसाइकिल की चाबी नीचे जमीन पर मिट्टी में धंसी थी.

खेत में औंधे मुंह पड़े शव से करीब 15 फीट की दूरी पर अंगरेजी शराब की खाली बोतल थी. खाली बोतल के ठीक सामने करीब 10 फीट की दूरी पर बोतल के रैपर भी थे. रैपर और खाली बोतल के ठीक बीच में 2 प्लास्टिक के खाली गिलास और संतरे के ताजे छिलके बिखरे थे.

शराब की बोतल के रैपर से करीब 15 फीट की दूरी पर एक थर्मोकोल की प्लेट और 2 सिलवर के लिफाफे थे. प्लेट पर सब्जी लगी हुई थी. सिलवर के एक लिफाफे में तंदूरी रोटी के जले टुकड़े और दूसरे लिफाफे में सब्जी के दागधब्बे लगे थे.

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एक पुलिसकर्मी ने जब शव को पलट कर सीधा किया, तब उस के सिर और गरदन पर चोट के निशान पाए गए थे. वहां मौजूद लोगों में से जब कोई भी शव की शिनाख्त नहीं कर पाया तो पुलिस ने जरूरी काररवाई कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

शव की शिनाख्त के बाद उस की पहचान करनाल जिले में नीलोखेड़ा में नील नगर निवासी अमनदीप के रूप में हुई. दरअसल, अमनदीप का शव बरामद होने के एक दिन पहले ही उस के पिता गुरदीप सिंह ने उस के लापता होने की सूचना थाने में दर्ज करवाई थी. जैसे ही गुरदीप सिंह को हाईवे पर गुरुद्वारे के पास युवक की लाश पुलिस द्वारा बरामद करने की सूचना मिली तो वह तरवाड़ी थाने पहुंचे. तब पुलिस उन्हें लाश की शिनाख्त के लिए अस्पताल ले गई. गुरदीप ने उस लाश की शिनाख्त अपने बेटे अमनदीप के रूप में की.

28 वर्षीय अमनदीप ग्राफिक डिजाइनर था. वह रोजाना अपने घर से उचाना गांव में स्थित जी लैब में काम करने के लिए जाता था. रोज की तरह 24 नवंबर को वह अपनी ड्यूटी खत्म कर शाम के साढ़े 4 बजे के करीब अपनी बाइक द्वारा लैब से घर के लिए निकला था, लेकिन वह समय पर घर नहीं पहुंच पाया. काफी समय बीत जाने पर भी जब वह घर नहीं आया, तब उस के पिता गुरदीप सिंह ने उस की तलाश शुरू की.

पिता का चिंतित होना स्वाभाविक था, क्योंकि अमनदीप ने लैब से निकलते ही अपने पिता को फोन कर बाजार से कुछ लाने के लिए पूछा था. इस पर उन्होंने कुछ भी लाने से मना करते हुए जल्द संभल कर घर आने को कहा था. उन्होंने हिदायत दी थी कि अंधेरा होने से पहले वह घर आ जाए, क्योंकि सुनसान इलाके में जगहजगह नशेडि़यों का जमघट लगा रहता है और वे लूटपाट करने के लिए घात लगाए बैठे रहते हैं. संयोग से जब वह रात के साढ़े 9 बजे तक घर नहीं लौटा और उस का मोबाइल फोन नाट रीचेबल बताने पर उस की तलाश की गई. गुरदीप सिंह ने इस की जानकारी पुलिस को दी थी.

अगले दिन पोस्टमार्टम हो जाने के बाद पुलिस ने अमनदीप का शव उस के पिता को सौंप दिया. उसी वक्त एक युवक भागता हुआ आया. वह कुछ बोलनेबताने से पहले ही ठिठक गया. तभी सीआईए-2 के इंचार्ज मोहन लाल ने उस से सवाल किया, ‘‘तुम कौन?’’

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‘‘जी, मैं अमनदीप का दोस्त.’’

‘‘अमनदीप का दोस्त. अरे रविंदर का बोल..’’ अमनदीप के पिता भुनभुनाए.

धीमी आवाज को सुन कर मोहन लाल ने पूछा, ‘‘आप ने अभी कोई नाम लिया, कौन है वह… और यह किस का दोस्त है?’’

‘‘नहीं, कुछ नहीं!’’ यह कहते हुए गुरदीप सिंह अपने बेटे के शव के साथ एंबुलेंस में बैठ गए.

रविंदर कौर आई शक के दायरे में

उधर पुलिस आगे की काररवाई में जुट गई. हत्याकांड के खुलासे के लिए एसपी गंगाराम पूनिया ने एक जांच टीम बनाई. जांच टीम घटनास्थल के दृश्य के आधार पर यह भी मान चुकी थी कि अमनदीप की हत्या पूरी तरह से एक साजिश के तहत की गई होगी, जिस में कम से कम 2-3 लोग शामिल हो सकते हैं.

जांच टीम को आश्चर्य अमनदीप की पत्नी रविंदर कौर को ले कर हुआ. इस की वजह यह थी कि वह एक बार भी थाने नहीं आई थी. जिस समय गुरदीप सिंह बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराने आए थे, उस समय भी वह उन के साथ थाने नहीं आई थी और न ही मोर्चरी से लाश सौंपते वक्त.

इस वजह से पुलिस के संदेह की पहली सुई अमनदीप की पत्नी रविंदर कौर की ओर घूम गई थी. उसी रात जांच टीम ने रविंदर को अपनी हिरासत में ले लिया.

गुरदीप सिंह ने पुलिस को बेटे की खोजबीन के लिए कुछ तसवीरें भी दी थीं. उन्हीं में एक तसवीर ऐसी भी थी, जिस में रविंदर कौर एक अन्य युवक के साथ थी, जबकि उस का पति अमनदीप पीछे बच्ची को गोद में लिए खड़़ा था. कई तसवीरों में रविंदर उस युवक के साथ थी, जो विभिन्न आयोजनों, टूरिस्ट जगहों, पार्कों और धार्मिक स्थलों की थीं.

पुलिस ने उस युवक के बारे में गुरदीप सिंह से जानकारी लेनी चाही, लेकिन उन्होंने चिढ़ते हुए कहा कि उस के बारे में रविंदर कौर से ही पूछताछ कर लें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

जांच टीम को उसी वक्त यह बात भी ध्यान में आई कि वही युवक उस समय भी आया था, जब अमनदीप की लाश गुरदीप सिंह को सौंपी जा रही थी. उस समय वह भागता हुआ आया था, लेकिन कब नजर बचा कर वहां निकल गया, पता ही नहीं चला था.

सीआईए इंचार्ज मोहनलाल ने रविंदर को एक फोटो दिखाई. उस में एक फोटो पर अंगुली रखते हुए उन्होंने पूछा, ‘‘तुम्हारी बगल में खड़ा यह लड़का कौन है? कोई रिश्तेदार है?’’

रविदंर कुछ नहीं बोली. चुपचाप बैठी रही. कुछ समय बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन उस के सामने रख कर स्पीकर औन कर दिया. उस पर एक काल की वायस रिकौर्डिंग थी, जो कुछ समय पहले ही आए काल की थी.

फोन से आवाज आने लगी, ‘‘सर, मैं हैडकांस्टेबल बोल रहा हूं. मैं ने उसे पकड़ लिया है, जिस की तसवीर आप ने हमें भेजी थी. उस के साथ एक युवक और पकड़ा गया है. दोनों दिल्ली जाने वाली बस में बैठे थे. आधे घंटे के भीतर उन्हें ले कर मैं थाने आ जाऊंगा.’’

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‘‘तुम ने जिसे पकड़ा है उस का नाम क्या है?’’ मोहनलाल ने पूछा.

‘‘सर, फोटो वाले का नाम सन्नी और दूसरे का नाम कुणाल है.’’ हैडकांस्टेबल बोला.

‘‘ठीक है, दोनों को जितना जल्द हो सके ले कर आओ.’’

उस के बाद फोन से आवाज आनी बंद हो गई. जांच अधिकारी मोबाइल को अपने हाथ में ले ले कर रविंदर को डपटते हुए बोले, ‘‘अब बताओ, सन्नी से तुम्हारा क्या रिश्ता है?’’

सन्नी का नाम आते ही रविंदर के माथे पर पसीने की बूंदें छलक आईं, जबकि सर्दी का मौसम आ चुका था.

जांच अधिकारी ने साथ में खड़ी लेडी कांस्टेबल को एक गिलास पानी लाने को कहा और खुद कमरे का पंखा औन कर दिया, जहां रविंदर से पूछताछ हो रही थी. वह एक केबिननुमा कमरा था. उस में 4-5 लोगों के बैठने की कुरसियों के साथसाथ एक बेंच भी लगा था.

जांच अधिकारी रविंदर के सामने फैली तसवीरों को समेटने लगे. उसी वक्त 2 कांस्टेबल 2 युवकों को पकड़े अंदर घुसे. उन की कमर में रस्सी बंधी थी, जिस का दूसरा सिरा एक कांस्टेबल ने पकड़ रखा था. उन्होंने एक साथ कहा, ‘‘यही दोनों पकड़े गए हैं.’’

‘‘इन में सन्नी कौन है? और दूसरे का नाम तुम ने क्या बताया था?’’ मोहनलाल ने कांस्टेबल से सवाल किया.

‘‘सर, ये सन्नी है. दूसरा वाले का नाम कुणाल है.’’ एक कांस्टेबल ने बताया.

‘‘ठीक है, इन्हें बेंच पर बैठा दो. एक राइटिंग पैड उठाओ और इन के बारे में पूरी जानकारी लिखो. मैं अभी 2 मिनट में आता हूं.’’ यह कहते हुए जांच अधिकारी केबिन से बाहर चले गए.

केबिन में बैठी रविंदर की नजर जब सामने बेंच पर कमर में रस्सी बंधे सन्नी पर पड़ी, तब उस ने सिर झुका लिया. जबकि कुणाल उस की ओर ऐसे देखता रहा, मानो उस से वह कुछ पूछना चाहता हो.

महिला कांस्टेबल पानी का गिलास उस के सामने रखती हुई बोली, ‘‘ये लो पानी पियो, तुम कुछ बोलती क्यों नहीं हो. साहब जो भी सवाल करें, उन का सचसच जवाब दे दो. इसी में तुम्हारी भलाई है.’’

‘‘मैं अब क्या बोलूं? किस के लिए बोलूं? जब पति ही इस दुनिया में नहीं है तो कुछ भी नहीं. कौन होगा मेरा सहारा? बताओ, तुम्हीं बताओ मुझे?’’ इतना कहते हुए रविंदर सुबकने लगी.

उस की आंखों से आंसू बह निकले. उस से अधिक उम्र की लेडी कांस्टेबल रविंदर के सिर पर हाथ रख कर सहलाती हुई बोली, ‘‘देखो, मैं भी औरत हूं, तुम्हारा दर्द समझ सकती हूं. जो हुआ, उसे भूल कर आगे की जिंदगी के बारे में सोचो.’’

‘‘मैं क्या सोचूं, क्या बोलूं… मेरी जिंदगी पहले भी जैसेतैसे चल रही थी और आगे भी वैसी ही रहने वाली है. जिस के साथ जीवन जीने के सपने देखे थे उसे भी तो पकड़ लाए.’’ यह बोलती हुई रविंदर ने सिर झुका कर बैठे सन्नी की ओर इशारा कर दिया.

‘‘अच्छा यही है,’’ लेडी कांस्टेबल के अपनी बात पूरी करने से पहले ही जांच अधिकारी केबिन में एक महिला एसआई के साथ दाखिल हुए.

एक नजर बेंच पर बैठे दोनों युवकों पर डाली, फिर रविंदर की ओर मुड़े, ‘‘हां मैडम, आप को मुझ से कुछ भी बताने से ऐतराज है तब इन के सवालों के जवाब दे दीजिए. पर हां, ध्यान रहे ये थोड़ी कड़क पुलिस वाली हैं.’’ जांच अधिकारी ने साथ आई लेडी एसआई की ओर इशारा किया.

रविंदर ने खोले राज

‘‘सर, इस ने बैठे एक युवक की पहचान कर ली है,’’ लेडी कांस्टेबल बोली.

‘‘शाबाश! यह हुई न बात. ऐसा करो तुम एक डायरी में इस के बारे में सब कुछ नोट करो और मैडम जो उन से सवालजवाब करेंगी, उस की रिकौर्डिंग भी करो. मुझे किसी जरूरी तहकीकात के लिए निकलना है. कल तक अमनदीप की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ जाएगी. उस केस के 2 और लोग पकड़ में आ गए हैं. सोमवार को इन्हें बयानों के साथ कोर्ट में हाजिर कर देंगे.’’

यह कह कर जांच अधिकारी मोहनलाल ने रविंदर और पकड़े गए दोनों युवकों से पूछताछ का काम लेडी एसआई और कांस्टेबल के जिम्मे सौंप दिया.

रविंदर थोड़ी सहज हो चुकी थी. उस ने धीरेधीरे अपने राज खोलने शुरू कर दिए थे. सब कुछ लेडी कांस्टेबल ने लिखना शुरू कर दिया था. उस ने जो बताया, उसी में अमनदीप से ले कर सन्नी और हत्याकांड की सारी बातें थीं. इस तरह से अमनदीप और रविंदर के अलावा सन्नी के साथ संबधों की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

हरियाणा के अंबाला शहर की रहने वाली रविंदर कौर की शादी सन 2016 में करनाल में सानीलोखेड़ी के अमनदीप के साथ हुई थी. इन की शादी के बाद 2 परिवारों की खुशियां एक जरूर हो गई थीं, किंतु रविंदर और अमनदीप की खुशियों का मिलन नहीं हो पाया था.

उन्होंने अरेंज मैरेज को परिवार और समाज के लोगों के बीच सहर्ष स्वीकार कर तो लिया था, लेकिन सुहागरात की सेज पर उन के मन में कई सवाल बने हुए थे. उस दौरान अचानक नवविवाहिता रविंदर ही बोल पड़ी, ‘‘लगता है, आप मुझ से कुछ पूछना चाहते हो?’’

‘‘नहीं तो…’’ शेरवानी के बटन खोलते हुए अमनदीप बोला.

‘‘तो फिर मैं ही पूछ लेती हूं.’’ सिर पर जेवर में उलझी चुन्नी निकालती हुई रविंदर ने कहा.

‘‘आप की पगड़ी खूबसूरत लग रही है. यलो कलर है, अगर पिंक होती तो और भी जंचती.’’ रविंदर ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘तुम्हें पिंक बहुत पसंद है?’’

‘‘मुझे ही क्यों सारी लड़कियों को पसंद होता है पिंक कलर. क्या तुम्हें नहीं पता इस के बारे में?’’ रविंदर बोली.

‘‘मुझे यह सब सोचने का वक्त ही कहां मिलता है. घर से औफिस और औफिस से घर आने में ही काफी समय निकल जाता है. औफिस में भी काम का दबाव बना रहता है.’’ अमनदीप गहरी सांस लेते हुए बोला.

‘‘औफिस में लड़कियां काम नहीं करती हैं क्या? वहां तो लड़कियां एक से एक सजधज कर आती होंगी. उन से भी फैशन, ट्रेंड की बातें होती होंगी, तो फिर…’’

‘‘तो फिर क्या?’’ अमनदीप ने पूछा.

‘‘मेरा मतलब है तुम्हारी कोई लड़की भी दोस्त होगी, कोई गर्लफ्रैंड होगी, जिस से तुम अपने दिल की बात कहते होगे. गिफ्टशिफ्ट देते होगे…’’

‘‘मुझे इन सब चीजों में कभी रुचि नहीं रही है.’’

‘‘इस का मतलब हुआ, आप तो एकदम नीरस किस्म के आदमी हो. मैं तो आप से बिलकुल अलग हूं.’’

‘‘कैसे?’’ अमनदीप ने चौंकते हुए पूछा.

‘‘कैसे क्या, जैसी सभी सुंदर लड़कियों के साथ होता है, मेरे साथ भी हुआ. यही कि मेरे चाहने वाले भी कई थे…’’ रविंदर हंसती हुई बोली.

‘‘कई थे का मतलब?’’ अमनदीप चौंका.

‘‘मतलब यह कि लड़के मुझ से बात करने के लिए आगेपीछे घूमते थे. कइयों ने गिफ्ट दे कर मुझे लुभाने की कोशिश की, लेकिन उन में पसंद आया एक ही. और जब तक मैं उस के दिल की बात समझ पाती, तब तक देर हो चुकी थी,’’ रविंदर बोलती चली गई.

‘‘देर हो चुकी थी क्यों?’’ अमनदीप आगे की बात सुनना चाहता था.

‘‘यही कि मैं यहां आ गई. तुम्हारे सामने हूं. शादी का जोड़ा संभाल रही हूं. कलाइयों की सुहाग चूडि़यां भारी लग रही हैं…’’ रविंदर बोलतेबोलते मायूस हो गई.

‘‘तुम्हारे दिल में जो कुछ बात है बोल दो. मन में कोई बात जमने मत दो.’’

‘‘मैं एक राज की बात बताना चाहती हूं, लेकिन पहले मुझे कसम दो कि उस बारे में किसी से कुछ नहीं कहोगे.’’

‘‘चलो वादा रहा.’’ अमनदीप रविंदर की ओर हाथ बढ़ाते हुए बोला, ‘‘…लेकिन तुम्हें प्यार से घरेलू नाम रिंपी बुलाऊंगा, बुरा तो नहीं लगेगा?’’

‘‘अरे, इस में बुरा लगने वाली बात क्या है. मुझे और अच्छा लगेगा,’’ रविंदर मुसकराती हुई बोली.

इस तरह नवविवाहिताओं की पहली रात कुछ वादेइरादे और गिलेशिकवे को दूर रखने के संकल्प सौगंध के साथ शुरू हुई. नए जीवन की गाड़ी चल पड़ी, लेकिन अमनदीप और रविंदर के दिमाग में एकदूसरे को दूर करने वाला कीड़ा भी कुलबुलता रहा.

उन में पतिपत्नी की तरह प्रेम पनपने के बजाय दिनप्रतिदिन असहजता की भावना भी सिर उठाने लगी थी.जल्द ही रविंदर ने वह बात भी बता दी, जिस बारे में शादी की पहली रात पहेलियां बुझाती हुई अमनदीप से कसम ले ली थी.

दरअसल, रविंदर स्कूल के जमाने के प्रेमी हर्षपाल उर्फ सन्नी को शादी के बाद भी नहीं भूल पाई थी. उस से वह बेइंतहा मोहब्बत करती थी. यह बात उस ने अमनदीप को बता दी थी. इस के बावजूद अमनदीप ने रविंदर को अपना  लिया था. देखते ही देखते दोनों की शादी के 5 साल बीत गए. दोनों एक बेटी के मातापिता भी बन गए.

फिर भी रविंदर के दिल में प्रेमी सन्नी को ले कर दबी हुई आग सुलगती रही. वह प्रेम अगन में सुलगती रही. सन्नी की यादों में खोईखोई सी रहने लगी. जलतीबुझती रही. दिल में सन्नी का प्रेम और उमड़ता रहा.

प्रेमी को हमेशा याद रखने का तरीका ऐसा कि उस ने अपने मोबाइल और सोशल साइट के पासवर्ड में सन्नी की गाड़ी और उस के घर के नंबरों का इस्तेमाल किया था. फोन में अपनी बनाई कोडिंग के जरिए उस का नंवर सेव कर रखा था. जब इच्छा होती, बातें कर या मैसेज भेज कर अपने दिल को सहलासमझा लेती थी.

उस की सन्नी के प्रति समर्पित ये सारी आदतें परिवार में किसी को मालूम नहीं थीं. अमनदीप भी इस से वाकिफ नहीं था. वह सिर्फ इतना जानता था कि सन्नी उस के स्कूल का दोस्त और पुराना प्रेमी है. यहां तक कि रविंदर ने पति को अपने पक्ष में ले कर प्रेमी से मिलवा कर दोस्ती भी करवा दी थी. इस के बाद दोनों पक्के दोस्त बन गए थे.

सन्नी अमनदीप के घर नहीं आता था, लेकिन रविंदर ही उस के साथ समय बिताने का कोई न कोई तरीका निकाल लिया करती थी. छुट्टियों में जब अमनदीप के साथ कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाती थी, तब इस की जानकारी सन्नी को भी दे देती थी.

कई बार तो वह अमनदीप की इच्छा के खिलाफ सन्नी को घूमने वाली जगहों पर साथ ले गई. इस तरह से सन्नी मौके पर अमनदीप के निजी पलों की खुशियों में खलल डालने के लिए हमेशा ही प्रकट हो जाता था.

सन्नी की वजह से गृहस्थी में आ गई कड़वाहट

अमनदीप के प्रति पत्नी प्रेम दर्शाने के लिए रविंदर कौर परिजनों की आंखों में आसानी से धूल झोंक देती थी. इस बारे में परिजनों को रविंदर से कोई शिकायत नहीं थी. वह कोई भी काम अकेले नहीं करती थी.

हर छोटेबड़े काम में अमनदीप को साथ कर लेती थी. अमनदीप के अलावा घर के किसी भी सदस्य को रविंदर कौर पर शक नहीं हुआ. दूसरी तरफ अमनदीप अंदर ही अंदर सन्नी और रविंदर के प्रेम को ले कर चिढ़ता रहता था. वह चाह कर भी उसे नाराज नहीं कर पा रहा था. कई बार ऐसे मौके भी आए, जब अमनदीप ने सन्नी को ले कर नाराजगी भी दिखाई. पत्नी से यहां तक कहा कि उसे भूल जाए अब उन का बच्चा भी है, उस के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.

इस नसीहत का रविंदर पर उल्टा असर होता था. वह उस से झगड़ पड़ती थी. सन्नी की नशे की आदत को ले कर भी अमनदीप चिढ़ता था. जब भी मौका मिलता, रविंदर को ताने मारता था कि उस के दिल में एक नशेड़ी की जगह है, लेकिन उस की नहीं.

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यह बात उस ने सन्नी को भी बताई. उस से सलाह भी मांगी कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए. सन्नी ने उसे सलाह तो नहीं दी, लेकिन अपने मन में एक योजना अवश्य बना ली. रविंदर और सन्नी के प्रेम में अमनदीप बुरी तरह से पिसने लगा था. तनाव में तीनों आ गए थे. उन के मन में एकदूसरे के प्रति अलगअलग किस्म की शिकायतें जबतब फन उठा लेती थीं.

24 नवंबर, 2021 को रविंदर कौर अपनी बहन की शादी में अंबाला में थी. अमनदीप अपने काम की वजह से शादी से जल्दी लौट आया था. सन्नी ने अमनदीप को किसी खास बात के लिए 24 नंवबर की रात को बुलाया था. अमनदीप जब उस के कहने पर सन्नी के पास गया, तब उस ने नशे की हालत में उस से सौरी बोला. सन्नी के साथ उस के 2 दोस्त कुणाल और मनी पेंटर भी थे.

सन्नी अमनदीप से बात करने के लिए हाईवे के बगल के खेत में ले गया. वहां उस ने अमनदीप के दोनों हाथ पकड़ लिए. वह बोला, ‘‘भाई, मैं ने आज तुम से सौरी बोलने को बुलाया है. मैं ने अपनी दूसरी गर्लफ्रैंड से शादी कर ली है. आखिर कब तक रविंदर की यादों में अपनी जिंदगी बरबाद करता. यह बात उसे भी नहीं पता है. मेरे 2 बच्चे भी हैं…’’

यह सब सुन कर अमनदीप अवाक रह गया. कुछ बोलने को ही था कि सन्नी बोला, ‘‘हमारीतुम्हारी यह आखिरी मुलाकात है. चलो थोड़ा साथ पीनेपिलाने का जश्न मनाते हैं.’’ और फिर वे खेत में अंदर चले गए. वहां सन्नी, कुणाल और मनी पेंटर के साथ अमनदीप ने शराब का जश्न मनाया. नशे की हालत में अमनदीप जाने को उठा. चार कदम चला. जेब से मोटरसाइकिल की चाबी निकाली, लेकिन वह वहीं गिर गई.

तभी पीछे से सन्नी के दोस्तों ने अमनदीप के सिर पर हथौड़े से वार कर दिया. अचानक हुए हमले से अमनदीप जमीन पर गिर पड़ा. उस के बाद सन्नी ने आटो स्टार्ट करने वाली रस्सी से अमनदीप का गला घोंट डाला.

पुलिस हिरासत में रविंदर कौर के अलावा सन्नी और कुणाल से हुई पूछताछ में कई बातें सन्नी के बारे में भी मालूम हुईं. और यह भी सबित हो गया कि अमनदीप की हत्या में उस की पत्नी रविंदर कौर भी शामिल थी. रविंदर कौर ने पुलिस को बताया कि उसे अपने पति की मौत का कोई अफसोस नहीं है.

उन से पूछताछ के दरम्यान ही तीसरा फरार आरोपी मनी पेंटर भी गिरफ्तार हो गया. उसे पुलिस छत्तीसगढ़ से पकड़ लाई. पुलिस तीनों आरोपियों को ले कर लुधियाना में अमनदीप की हत्या वाली जगह पर ले गई. वहां हत्या में इस्तेमाल हथौड़ा और चाकू मिल गया.

कानून से बचने के लिए सन्नी ने कई प्रयास किए. यहां तक कि घटनास्थल पर वह 10 नंबर के जूते पहन कर आया, जबकि वह 7 नंबर के जूते पहनता था. वह थाने भी गया. उस ने प्लान बनाया था कि अपने दोस्त के गुम होने की शिकायत दर्ज करवाएगा, लेकिन तब तक अमनदीप का शव बरामद हो चुका था.

सभी आरोपियों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

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