एक बार फिर से : लॉकडाउन के बाद कैसे एक बार फिर क़रीब आए प्रिया और प्रकाश

“हैलो कैसी हो प्रिया ?”

मेरी आवाज में बीते दिनों की कसैली यादों से उपजी नाराजगी के साथसाथ प्रिया के लिए फिक्र भी झलक रही थी. सालों तक खुद को रोकने के बाद आज आखिर मैं ने प्रिया को फोन कर ही लिया था.

दूसरी तरफ से प्रिया ने सिर्फ इतना ही कहा,” ठीक ही हूं प्रकाश.”

हमेशा की तरह हमदोनों के बीच एक अनकही खामोशी पसर गई. मैं ने ही बात आगे बढ़ाई, “सब कैसा चल रहा है ?”

” बस ठीक ही चल रहा है .”

एक बार फिर से खामोशी पसर गई थी.

“तुम मुझ से बात करना नहीं चाहती हो तो बता दो?”

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“ऐसा मैं ने कब कहा? तुम ने फोन किया है तो तुम बात करो. मैं जवाब दे रही हूं न .”

“हां जवाब दे कर अहसान तो कर ही रही हो मुझ पर.” मेरा धैर्य जवाब देने लगा था.

“हां प्रकाश, अहसान ही कर रही हूं. वरना जिस तरह तुम ने मुझे बीच रास्ते छोड़ दिया था उस के बाद तो तुम्हारी आवाज से भी चिढ़ हो जाना स्वाभाविक ही है .”

“चिढ़ तो मुझे भी तुम्हारी बहुत सी बातों से है प्रिया, मगर मैं कह नहीं रहा. और हां, यह जो तुम मुझ पर इल्जाम लगा रही हो न कि मैं ने तुम्हें बीच रास्ते छोड़ दिया तो याद रखना, पहले इल्जाम तुमने लगाए थे मुझ पर. तुम ने कहा था कि मैं अपनी ऑफिस कुलीग के साथ…. जब कि तुम जानती हो यह सच नहीं था. ”

“सच क्या है और झूठ क्या इन बातों की चर्चा न ही करो तो अच्छा है. वरना तुम्हारे ऐसेऐसे चिट्ठे खोल सकती हूं जिन्हें मैं ने कभी कोर्ट में भी नहीं कहा.”

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“कैसे चिट्ठों की बात कर रही हो? कहना क्या चाहती हो?”

“वही जो शायद तुम्हें याद भी न हो. याद करो वह रात जब मुझे अधूरा छोड़ कर तुम अपनी प्रेयसी के एक फोन पर दौड़े चले गए थे. यह भी परवाह नहीं की कि इस तरह मेरे प्यार का तिरस्कार कर तुम्हारा जाना मुझे कितना तोड़ देगा.”

“मैं गया था यह सच है मगर अपनी प्रेयसी के फोन पर नहीं बल्कि उस की मां की कॉल पर. तुम्हें मालूम भी है कि उस दिन अनु की तबीयत खराब थी. उस का भाई भी शहर में नहीं था. तभी तो उस की मां ने मुझे बुला लिया. जानकारी के लिए बता दूं कि मैं वहां मस्ती करने नहीं गया था. अनु को तुरंत अस्पताल ले कर भागा था.”

“हां पूरी दुनिया में अनु के लिए एक तुम ही तो थे. यदि उस का भाई नहीं था तो मैं पूछती हूं ऑफिस के बाकी लोग मर गए थे क्या ? उस के पड़ोस में कोई नहीं था क्या?

“ये बेकार की बातें जिन पर हजारों बार बहस हो चुकी है इन्हें फिर से क्यों निकाल रही हो? तुम जानती हो न वह मेरी दोस्त है .”

“मिस्टर प्रकाश बात दरअसल प्राथमिकता की होती है. तुम्हारी जिंदगी में अपनी बीवी से ज्यादा अहमियत दोस्त की है. बीवी को तो कभी अहमियत दी ही नहीं तुम ने. कभी तुम्हारी मां तुम्हारी प्राथमिकता बन जाती हैं, कभी दोस्त और कभी तुम्हारी बहन जिस ने खुद तो शादी की नहीं लेकिन मेरी गृहस्थी में आग लगाने जरूर आ जाती है.”

“खबरदार प्रिया जो फिर से मेरी बहन को ताने देने शुरू किए तो. तुम्हें पता है न कि वह एक डॉक्टर है और डॉक्टर का दायित्व बहुत अच्छी तरह निभा रही है. शादी करे न करे तुम्हें कमेंट करने का कोई हक नहीं.”

“हां हां मुझे कभी कोई हक दिया ही कहां था तुम ने. न कभी पत्नी का हक दिया और न बहू का. बस घर के काम करते रहो और घुटघुट कर जीते रहो. मेरी जिंदगी की कैसी दुर्गति बना दी तुम ने…”

कहतेकहते प्रिया रोने लगी थी. एक बार फिर से दोनों के बीच खामोशी पसर गई थी.

“प्रिया रो कर क्या जताना चाहती हो? तुम्हें दर्द मिले हैं तो क्या मैं खुश हूं? देख लो इतने बड़े घर में अकेला बैठा हुआ हूं. तुम्हारे पास तो हमारी दोनों बच्चियां हैं मगर मेरे पास वे भी नहीं हैं.” मेरी आवाज में दर्द उभर आया था.

“लेकिन मैं ने तुम्हें कभी बच्चों से मिलने से  रोका तो नहीं न.” प्रिया ने सफाई दी.

“हां तुम ने कभी रोका नहीं और दोनों मुझ से मिलने आ भी जाती थीं. मगर अब लॉकडाउन के चक्कर में उन का चेहरा देखे भी कितने दिन बीत गए.”

चाय बनाते हुए मैं ने माहौल को हल्का करने के गरज से प्रिया को सुनाया, “कामवाली भी नहीं आ रही. बर्तनकपड़े धोना, झाड़ूपोछा लगाना यह सब तो आराम से कर लेता हूं. मगर खाना बनाना मुश्किल हो जाता है. तुम जानती हो न खाना बनाना नहीं जानता मैं. एक चाय और मैगी के सिवा कुछ भी बनाना नहीं आता मुझे. तभी तो ख़ाना बनाने वाली रखी हुई थी. अब हालात ये हैं कि एक तरफ पतीले में चावल चढ़ाता हूं और दूसरी तरफ अपनी गुड़िया से फोन पर सीखसीख कर दाल चढ़ा लेता हूं. सुबह मैगी, दोपहर में दालचावल और रात में फिर से मैगी. यही खुराक खा कर गुजारा कर रहा हूं. ऊपर से आलम यह है कि कभी चावल जल जाते हैं तो कभी दाल कच्ची रह जाती है. ऐसे में तीनों वक्त मेगी का ही सहारा रह जाता है.”

मेरी बातें सुन कर अचानक ही प्रिया खिलखिला कर हंस पड़ी.

“कितनी दफा कहा था तुम्हें कि कुछ किचन का काम भी सीख लो पर नहीं. उस वक्त तो मियां जी के भाव ही अलग थे. अब भोगो. मुझे क्या सुना रहे हो?”

मैं ने अपनी बात जारी रखी,” लॉकडाउन से पहले तो गुड़िया और मिनी को मुझ पर तरस आ जाता था. मेरे पीछे से डुप्लीकेट चाबी से घर में घुस कर हलवा, खीर, कढ़ी जैसी स्वादिष्ट चीजें रख जाया करती थीं. मगर अब केवल व्हाट्सएप पर ही इन चीजों का दर्शन कराती हैं.”

“वैसे तुम्हें बता दूं कि तुम्हारे घर हलवापूरी, खीर वगैरह मैं ही भिजवाती थी. तरस मुझे भी आता है तुम पर.”

“सच प्रिया?”

एक बार फिर हमारे बीच खामोशी की पतली चादर बिछ गई .दोनों की आंखें नम हो रही थीं.

“वैसे सोचने बैठती हूं तो कभीकभी तुम्हारी बहुत सी बातें याद भी आती हैं. तुम्हारा सरप्राइज़ देने का अंदाज, तुम्हारा बच्चों की तरह जिद करना, मचलना, तुम्हारा रात में देर से आना और अपनी बाहों में भर कर सॉरी कहना, तुम्हारा वह मदमस्त सा प्यार, तुम्हारा मुस्कुराना… पर क्या फायदा ? सब खत्म हो गया. तुम ने सब खत्म कर दिया.”

“खत्म मैं ने नहीं तुम ने किया है प्रिया. मैं तो सब कुछ सहेजना चाहता था मगर तुम्हारी शक की कोई दवा नहीं थी. मेरे साथ हर बात पर झगड़ने लगी थी तुम.” मैं ने अपनी बात रखी.

“झगड़े और शक की बात छोड़ो, जिस तरह छोटीछोटी बातों पर तुम मेरे घर वालों तक पहुंच जाते थे, उन की इज्जत की धज्जियां उड़ा देते थे, क्या वह सही था? कोर्ट में भी जिस तरह के आरोप तुम ने मुझ पर लगाए, क्या वे सब सही थे ?”

“सहीगलत सोच कर क्या करना है? बस अपना ख्याल रखो. कहीं न कहीं अभी मैं तुम्हारी खुशियों और सुंदर भविष्य की कामना करता हूं क्यों कि मेरे बच्चों की जिंदगी तुम से जुड़ी हुई है और फिर देखो न तुम से मिले हुए इतने साल हो गए . तलाक के लिए कोर्टकचहरी के चक्कर लगाने में भी हम ने बहुत समय लगाया. मगर आजकल मुझे अजीब सी बेचैनी होने लगी है . तलाक के उन सालों का समय इतना बड़ा नहीं लगा था जितने बड़े लॉकडाउन के ये कुछ दिन लग रहे हैं. दिल कर रहा है कि लौकडाउन के बाद सब से पहले तुम्हें देखूं. पता नहीं क्यों सब कुछ खत्म होने के बाद भी दिल में ऐसी इच्छा क्यों हो रही है.” मैं ने कहा तो प्रिया ने भी अपने दिल का हाल सुनाया.

“कुछ ऐसी ही हालत मेरी भी है प्रकाश. हम दोनों ने कोर्ट में एकदूसरे के खिलाफ कितने जहर उगले. कितने इल्जाम लगाए. मगर कहीं न कहीं मेरा दिल भी तुम से उसी तरह मिलने की आस लगाए बैठा है जैसा झगड़ों के पहले मिला करते थे.”

“मेरा वश चलता तो अपनी जिंदगी की किताब से पुराने झगड़े वाले, तलाक वाले और नोटिस मिलने से ले कर कोर्ट की चक्करबाजी वाले दिन पूरी तरह मिटा देता. केवल वे ही खूबसूरत दिन हमारी जिंदगी में होते जब दोनों बच्चियों के जन्म के बाद हमारे दामन में दुनिया की सारी खुशियां सिमट आई थी.”

“प्रकाश मैं कोशिश करूंगी एक बार फिर से तुम्हारा यह सपना पूरा हो जाए और हम एकदूसरे को देख कर मुंह फेरने के बजाए गले लग जाएं. चलो मैं फोन रखती हूं. तब तक तुम अपनी मैगी बना कर खा लो.”

प्रिया की यह बात सुन कर मैं हंस पड़ा था. दिल में आशा की एक नई किरण चमकी थी. फोन रख कर मैं सुकून से प्रिया की मीठी यादों में खो गया.

जानें क्यों आता है लड़कों के यूरीन में खून

पुरुषों से जुड़ी कुछ बीमारीयां ऐसी भी होती हैं जिसे लेकर ना तो आप जानकारी रखते हैं और इसके होने पर डर के साए में खो जाते है. इन्हीं में से एक हैं पुरुषों की यूरीन में आने वाला खून. यूरीन में खून आने को डौक्टर हेमाट्यूरिया की स्थिति बताते हैं. ये किसी उम्र में हो सकता है और किसी को भी. यह स्थिति अचानक ही आपके सामने आती है शायद यही कारण हैं की पुरुष इस स्थिति को देखकर डर जाते हैं. सोचिए अगर आप सुबह सोकर उठते हैं और अचानक वौशरूम में जाते हैं तो देखते हैं कि आपके यूरीन का रंग लाल हो गया है, जिसे देखकर मन में भय होना स्वभाविक है. इस स्थिति के कारणों का पता लगा पाना शुरुआत में थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि हम खुद इसके कारणों को नहीं पहचान पाते हैं. इसलिए आज हम आपको इस स्थिति से जुड़े कुछ कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं. जिससे आप इस बचाव कर सकते हैं.

यूरीन में होने वाला इंफेक्शन  

इस स्थिति को यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन यानी की यूटीआई भी कहते हैं. यूटीआई यूरीन में खून आने का एक आम कारण है. हालांकि यह महिलाओं में अधिक होता है, लेकिन पुरुष भी स्थिति का शिकार होते हैं. पुरुषों में यूटीआई के जोखिम कारकों में प्रोस्टेट समस्याएं और हालिया कैथीटेराइजेशन शामिल है. यूटीआई तब होता है जब बैक्टीरिया  मूत्रमार्ग में प्रवेश कर जाता है. यह वह ट्यूब है, जो मूत्राशय से मूत्र को शरीर से बाहर निकालती है. अगर यूटीआई किडनी को प्रभावित करता है तो इससे कमर और पीठ में दर्द होता है.

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किडनी और मूत्राशय की पथरी (Bladder stones)…

अगर खून में तरलता बहुत कम और वेस्ट बहुत ज्यादा हो तो वेस्ट यूरीन में कैमिकल के साथ बंध सकता है, जिससे किडनी या मूत्राशय में पथरी हो सकती है. अक्सर, पथरी यूरीन के रास्ते गुजरने में काफी छोटी होती है. बड़ी पथरी किडनी या मूत्राशय में रह जाती है, जो मूत्रमार्ग में कहीं भी अटक सकती है. बड़ी पथरी के आमतौर पर दिखाई देने वाले लक्षण होते हैं.

क्या हे इसके कारण…

  • खून में यूरीन आना
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द होना
  • पेट में बार-बार दर्द होना
  • उल्टी आना
  • यूरीन से जोरदार बदबू आना
  • प्रोस्टेट का बढ़ जाना

प्रोस्टेट किसे कहते है?

प्रोस्टेट एक ग्रंथि है, जो कि पुरुष प्रजनन प्रणाली का एक हिस्सा होती है और वीर्य (Sperm)के उत्पादन में मदद करती है. यह मूत्राशय के नीचे और मलाशय के सामने होती है. प्रोस्टेट बढ़ जाने से मूत्रमार्ग पर दबाव बनता है, जिससे यूरीन करने में दिक्कत होती है. यूरीन करने में ज्यादा दम लगाने से नुकसान पहुंचता है, जिससे रक्तस्राव हो सकता है. इस स्थिति से 51 से 60 साल की उम्र के 50 फीसदी पुरुष परेशान होते हैं.

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किडनी में चोट के कारण

ग्लोमेरुली, किडनी के भीतर की छोटी संरचनाएं हैं, जो रक्त को छानने और साफ करने में मदद करती हैं. ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (जीएन) उन रोगों के समूह के लिए एक शब्द है, जो इन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाती है. जीएन से पीड़ित लोगों में घायल गुर्दे शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को नहीं निकाल पाते. बिना उपचार के जीएन किडनी फेलियर का कारण बन सकता है. युवाओं में लंबे समय तक जीएन रहने से सुनने और देखने की शक्ति प्रभावित होती है और वह दोनों शक्तियां खो भी सकते हैं.

तो ये है वो कारण जिसके चलते यूरीन में खून आमे की समस्या पेदा होती हैं.

सत्यकथा: पैसे वालों का खेल, पत्नियों की अदला बदली

कोट्टायम (केरल)

नए साल में दूसरे रविवार का दिन था. तारीख थी 9 जनवरी. कोट्टायम जिले के करुक्चल थाने में करीब 30 वर्षीया रमन्ना (बदला हुआ नाम) सुबहसुबह अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने आई थी.

उस ने थानाप्रभारी से कहा, ‘‘साहब, मुझे पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करानी है.’’ यह सुनते ही चाय पीते हुए थानाप्रभारी झल्ला गए.

उन्होंने समझा कि कोई घरेलू हिंसा या दहेज आदि का मसला होगा. महिला की आगे की बातें सुनने के बजाय उन्होंने उसे डपट दिया, ‘‘जाओ, घर जाओ और पति या घर के किसी सदस्य को साथ ले कर आना. सुबहसुबह पति से झगड़ कर आ गई हो. समझा दूंगा उसे…’’

रमन्ना वहीं खड़ीखड़ी थानाप्रभारी को चाय पीते देखती रही. थानाप्रभारी फिर बोले, ‘‘समझदार दिखती हो. पढ़ीलिखी भी लगती हो. घरेलू झगड़े को क्यों बाजार में लाना चाहती हो?’’

‘‘साहबजी, आप जो समझ रहे हैं, बात वह नहीं है. किसी लेडी पुलिस से मेरी शिकायत लिखवा दीजिए. ‘भार्या माट्टल’ की शिकायत है.’’

रमन्ना की गंभीरता भरी बातों के साथ मलयाली शब्द भार्या माट्टल सुन कर थानाप्रभारी चौंक गए. इन शब्दों का अर्थ था बीवियों की अदलाबदली. दरअसल, ये 2 शब्द पुलिस के लिए अपराध की गतिविधियों में शामिल थे. भार्या माट्टल यानी वाइफ स्वैपिंग या बीवियों की अदलाबदली.

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उन्होंने महिला को सामने की कुरसी पर बैठने को कहा. उस के बैठने पर पूछा, ‘‘चाय पियोगी, मंगवाऊं?’’

‘‘हां,’’ कहते हुए सिर हिला दिया.

थानाप्रभारी ने कांस्टेबल को आवाज लगाई, ‘‘अरे, सुनो जरा एक कप चाय और लाना. और हां, एसआई मैडम को भी डायरी ले कर बुला लाना.’’

थोड़ी देर में एक लेडी पुलिस सबइंसपेक्टर थानाप्रभारी के पास आ चुकी थीं. चाय की एक प्याली भी महिला के सामने रखी थी. थानाप्रभारी ने उसे पीने के लिए इशारा किया और लेडी एसआई को उस की शिकायत लिखने को कहा. फिर वह कुरसी से उठ खड़े हुए. जातेजाते पूछा, ‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’

‘‘रमन्ना.’’

‘‘टाइटल क्या है?’’

‘‘नायर…रमन्ना नायर.’’

‘‘ठीक है, तुम आराम से चाय पियो और मैडम को पूरी बात बताओ,’’ यह कह कर थानाप्रभारी वहां से चले गए.

थोड़ी देर बाद थानाप्रभारी, लेडी एसआई और दूसरे पुलिसकर्मियों की मीटिंग हुई. तब तक रमन्ना थाने में ही ठहरी रही.

रमन्ना ने जो बात महिला एसआई को बताई थी, वह बड़ी गंभीर थी. सुन कर थानाप्रभारी भी आश्चर्यचकित हो गए थे कि क्या एक पति ऐसा भी कर सकता है.

उन्होंने यह जानकारी डीएसपी (कांगनचेरी) आर. श्रीकुमार को दी तो डीएसपी ने इस मामले में उचित काररवाई करने के निर्देश दिए. थानाप्रभारी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम बनाई. आरोपियों की गिरफ्तारियां भी जरूरी थी, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके.

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मामला बेहद संवेदनशील था. संभ्रांत व्यक्तियों के चरित्र हनन, निजी संबंधों के साथसाथ पार्टनर एक्सचेंज रैकेट के अलावा अननेचुरल सैक्स से भी जुड़ा हुआ था. इसी शिकायत में मैरिटल रेप भी शामिल था.

उल्लेखनीय है कि इस से पहले केरल के कायमकुलम में भी साल 2019 में ऐसा ही मामला सामने आ चुका था. उन दिनों कायमकुलम से 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी. उस वक्त भी गिरफ्तार लोगों में से एक की पत्नी ने ही शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसे पति ने ही 2 लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया था. पति ने उसे दूसरे अजनबियों के साथ सोने के लिए दबाव बनाया था.

रमन्ना द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत भी काफी चौंकाने वाली थी. उस ने पति के खिलाफ शिकायत लिखवाई थी कि वह पति के दबाव में आ कर दूसरे मर्दों के साथ सोने को विवश हो गई थी, जबकि पति के साथ प्रेम विवाह हुआ था.

शिकायत में यह भी कहा कि उस के साथ अप्राकृतिक सैक्स भी किया गया. एक समय में 3 मर्दों के साथ हमबिस्तर होना पड़ा. इसे अनैतिक यौनाचार की भाषा में गु्रप सैक्स कहना ज्यादा सही होगा.

इस तरह से वह पति के अतिरिक्त कुल 9 अलगअलग मर्दों के सैक्स की सामग्री बन चुकी थी. वे सारे मर्द उस के पति के दोस्त थे. रमन्ना ने साफ लहजे में कहा कि पति को इस के बदले में पैसे मिले थे.

कोट्टायम जिले की पुलिस ने मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए तुरंत छापेमारी की योजना बनाई और देखते ही देखते 7 लोगों को धर दबोचा. उस के बाद जो बड़े पैमाने पर सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, वह काफी सनसनीखेज और चौंकाने वाला था. उस की पूरे देश में चर्चा होने लगी.

एक के बाद एक हुई गिरफ्तारियों के बाद एक बड़े सैक्स रैकेट का परदाफाश हुआ, जो सोशल साइट के विभिन्न प्लेटफार्मों के जरिए पतियों के ग्रुप द्वारा चलाए जा रहे थे.

रिपोर्ट के मुताबिक करुक्चल में 7 लोगों को बीवियों की अदलाबदली के आरोप में 9 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया गया था. उन में रमन्ना का पति भी था. गिरफ्तार किए गए लोग केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम के रहने वाले हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक इस रैकेट में बाकायदा वाट्सऐप पर ग्रुप बनाए गए थे, जिस से सैकड़ों लोग जुड़े हुए थे. इसी ग्रुप में आगे की योजना बनाई जाती थी. हैरानी की बात यह भी थी कि इस ग्रुप में केरल के एलीट क्लास के कई लोग भी शामिल थे.

इस पूरे मामले की तहकीकात के बाद चांगनचेरी के डिप्टी एसपी आर. श्रीकुमार ने बताया कि पहले तो वे इन ग्रुप्स में शामिल हो कर एकदूसरे से मिलते थे. बाद में निर्धारित ठिकाने पर सैक्स के लिए जुटते थे. इस के पीछे एक बड़ा रैकेट है. इस में कई और दूसरे लोगों की तलाश भी की जा रही है.

पुलिस के अनुसार महिलाओं सहित भले ही कुछ समान विचारधारा वाले हों, लेकिन कुछ महिलाओं को उन के पतियों ने इस में जबरदस्ती शामिल कर रखा था. गिरफ्तार लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे पहले टेलीग्राम और दूसरे मैसेंजर ग्रुप्स में शामिल होते हैं, और फिर 2 या 3 कपल आपस में मुलाकात करते हैं. इस के बाद महिलाओं की अदलाबदली होती है.

इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने ‘पार्टनर एक्सचेंज रैकट’ की तह में जा कर पता लगाया. पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि ‘पार्टनर एक्सचेंज रैकेट’ के नेटवर्क का मुख्य आधार टेलीग्राम और मैसेंजर ऐप था, जिस में एक गिरोह के 1000 से अधिक कपल बताए जा रहे हैं. उन के द्वारा सैक्स के लिए बड़े स्तर पर महिलाओं की अदलाबदली की जा रही थी.

इस रैकेट में पैसों का भी औनलाइन लेनदेन होता है. कई लोग पैसों के लिए अपनी पत्नियों को सिंगल पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं, जबकि इस सैक्स में 2-3 पुरुष ही होते हैं.

पुलिस को जांच में पता चला कि इस रैकेट में राज्य के हर हिस्से के लोग शामिल थे, जिन में अधिकतर सदस्य धनवान और सुखीसंपन्न थे.

सवाल सामान्य लोगों के जेहन में उठता रहता है कि पत्नियों की अदलाबदली क्यों और कैसे? वाइफ स्वैपिंग का एक पुराना इतिहास बहुपत्नी प्रथा के जमाने से रहा है. किंतु इस ने नए रूपरंग में 80-90 के दशक में एक यौन आनंद के तौर पर पैर पसारना शुरू कर दिया था.

हालांकि इस में संभ्रांत किस्म के कपल ही शामिल हुए. इस के लिए उन्होंने बाकायदा पार्टियों का सहारा लिया. केरल का मामला भी बीवियों की अदलाबदली का ही है, लेकिन इसे पतियों ने कमाई का धंधा बना दिया, जिस में बीवी के नाम पर दूसरी सैक्स वर्कर को भी शामिल कर लिया गया था.

केरल की शिकायतकर्ता महिला रमन्ना की लव मैरिज हुई थी. खुशहाल जिंदगी गुजर रही थी. 2 बच्चे भी हुए. सब कुछ अच्छा चल रहा था. इस बीच पति की गल्फ में नौकरी लगी और वह विदेश चला गया. वहां पति को वाइफ स्वैपिंग के बारे में पता लगा.

जब वापस केरल लौटा तब उस ने इस बारे में अपनी पत्नी को बताया. पत्नी ने इनकार कर दिया, लेकिन पति नहीं माना. उस ने काफी मना किया कि वह किसी और के साथ सैक्स नहीं करेगी, लेकिन पति के दबाव में आ कर ऐसा करने को राजी हो गई. पति द्वारा खुद को मारने की धमकी के इमोशनल ब्लैकमेलिंग के चलते न चाहते हुए भी मान गई.

उस के बाद से पति के दोस्तों के साथ सैक्स करने का सिलसिला शुरू हो गया. इस खेल के शुरू होते ही पति ने उसे डराधमका कर इसे कारोबार बना लिया. विरोध करने पर पति दूसरों के साथ किए गए उस के सैक्स वीडियो परिवार को दिखाने की धमकी दे दी.

एक रोज पानी सिर से ऊपर तब चला गया, जब पति ने एक साथ 3 पुरुषों के साथ सैक्स करने के लिए भेज दिया. अप्राकृतिक सैक्स की पीड़ा से उस का शरीर जितना जख्मी हुआ, उस से कहीं अधिक उस का अंतरमन पीडि़त हो गया. और उस ने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी.

रमन्ना ने यह भी बताया कि उस जैसी कई पत्नियों को उन की इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया, जो आत्महत्या कर सकती हैं. यहां तक कि उन पर ऐसा करने के लिए जबरन दबाव बनाया जाता है.

इस स्तर पर जांच में पुलिस ने भी पाया कि डाक्टरों और वकीलों के अलावा कई पेशेवर इन सोशल मीडिया ग्रुप में शामिल थे और उन्होंने अपनी फरजी पहचान बना रखी थी.

इन में से कई ग्रुप में 5,000 से अधिक सदस्य शामिल थे, जहां से ग्राहक मिलते थे. सभी फेक अकाउंट के साथ जुड़े हुए थे. इन में सिंगल लोगों को दूसरे सदस्यों की पत्नियों को शेयर करने के लिए मोटी रकम देनी पड़ती थी.

केरल के लिए वाइफ स्वैपिंग का मामला कोई नया नहीं है. इस के पहले भी साल 2013 में नेवी अफसरों की पत्नियों की अदलाबदली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे.

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यह घटना साल 2012 की है, जब एक लेफ्टिनेंट की पत्नी ने पति और सीनियर अफसर पर सैक्सुअल-मेंटल हैरेसमेंट और वाइफ स्वैपिंग के गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि बाद में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलने की वजह से मामला शांत पड़ गया था.

दरअसल अपने पति को बचाने के लिए कोई भी महिला किसी और के खिलाफ मुंह नहीं खोल पाती है. लेकिन इस बार के नए मामले में पूरी तरह से एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो चुका था. केरल में यह सब पिछले 3 सालों से चल रहा था.

  एक नजर वाइफ स्वैपिंग पर

वाइफ स्वैपिंग ही बीवियों की अदलाबदली है, जो पतिपत्नी की रजामंदी से होता है. सैक्स के दौरान बीवियां बदलने का चलन गैरकानूनी और गैर सामाजिक हो कर भी छिपे रूप में बना हुआ है.

अब लोगों ने इसे पैसा कमाने का एक जरिया भी बना लिया है. इस में सैक्शुअल रिलेशनशिप बनाने के लिए बीवियों को एक रात या फिर कुछ रातों के लिए अदलाबदली कर लिए जाते हैं.

इसे अपनाने के कई तरीके अपनाए जाते हैं, जिस में लकी ड्रा महत्त्वपूर्ण होता है. इस के लिए कपल एक ही जगह पर जुटते हैं और अपनीअपनी गाडि़यों की चाबी एक जगह डाल देते हैं. फिर अंधेरे में सब एकएक कर चाबी उठाते हैं. ऐसे में हर किसी के हाथ में किसी और की चाबी आ जाती है.

जिसे जो चाबी हाथ लगती है वह उस की बीवी के साथ सैक्स करने के लिए आजाद होता है. इसी तरह से हर व्यक्ति दूसरे की बीवी को ले कर अलगअलग कमरों में चले जाते हैं. कुछ मामले में यह खेल एक ही हाल में एक साथ ग्रुप सैक्स के रूप में भी होता है. मजे की बात यह है इस के लिए बीवियां भी पहले से मन बनाए होती हैं.

इस से जुड़े लोगों का तर्क होता है कि ऐसा कर वे एकदूसरे की सैक्शुअल डिजायर को पूरी करते हैं. कुछ कपल्स का मानना है कि इस से उन के वैवाहिक जीवन की नीरसता में ताजगी वापस आ जाता है. दोनों में इस बात का कोई मलाल नहीं होता है कि दूसरे की पार्टनर के साथ सैक्स कर चुके हैं. इसे वे प्यार के नजरिए से नहीं, बल्कि सैक्स की अनुभूति के रूप में लेते हैं. इसे वैसे लोगों के लिए वरदान कहा जाता है, जो कभी एक वक्त में एक रिलेशन में नहीं रह पाते हैं.

बताया जाता है कि वाइफ स्वैपिंग की शुरुआत 16वीं सदी से बताई जाती है. सब से पहले जौन डी और एडवर्ज केल ने वाइफ स्वैपिंग की थी. ये दोनों ही ब्लैक मैजिक करते थे या कहें खुद को सेल्फ डिक्लेयर्ड स्पिरिट मीडियम बताते थे.

इस स्वैपिंग में जौन की पत्नी जेन प्रेगनेंट भी हो गई थी. अधिकतर पश्चिमी देशों में यह आम बात हो चुकी है. भारत में इसे यौन अपराध की श्रेणी में रखा गया है. खासकर  भारतीय समाज में तो यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है. चाहे आपसी रजामंदी हो या नहीं.

वाइफ स्वैपिंग को यदि एक शादीशुदा महिला की इच्छा के बगैर कराया जाए और एक से अधिक लोगों के साथ संबंध बनाने पर मजबूर किया जाए तो मजबूर कराने वाले लोगों पर आईपीसी की धारा 323, 328, 376, 506 के तहत केस दर्ज किया जाता है.

यदि उत्पीडि़त महिला की आपबीती पुलिस नहीं सुने, तो 156 (3) सीआरपीसी में जुडीशियल मजिस्ट्रैट के सामने एप्लिकेशन दे कर ऊपर दी गई धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए जा सकते हैं.

इस मामले में पति पर रेप की धारा (376 आईपीसी) छोड़ कर बाकी सभी धाराओं में काररवाई की जा सकती है. सारे अपराध गैरजमानती होते हैं और इन अपराधों में महिला के सिर्फ यह कहने पर कि उस के साथ बिना सहमति के जोरजबरदस्ती से संबंध बनाए गए हैं, उस की गिरफ्तारी की जा सकती है.

ऐसे अधिकतर मामलों में यह एक ट्रायल का विषय होता है, जिस में गवाही और क्रौस एग्जामिनेशन के बाद अदालत आरोपियों को सजा दे सकती है, या फिर सजा दे कर बरी भी कर सकती है.

उदाहरण के लिए यदि स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए दंड के संबंध में 328 आईपीसी का इस्तेमाल होता है, जिस में नशीले पेय की मदद से महिला से शारीरिक संबंध स्थापित किया गया हो तो अधिकतम 10 साल तक की सजा और जुरमाना किया जा सकता है.

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इसी तरह से 376डी आईपीसी में गैंगरेप के मामलों में सजा मिलती है. इस कृत्य में शामिल हर व्यक्ति को न्यूनतम 20 साल तक की सजा मिल सकती है.

राहुल तिवारी: वेटर से फिल्म एडिटर…

राइटर- सुनील शर्मा

जब भी फिल्मों की बात होती है, तब आम लोगों का ध्यान स्टार हीरो हीरोइन समेत दूसरे बड़े कलाकारों पर ही रहता है, पर जब कभी किसी फिल्म की समीक्षा की जाती है, तब यह भी देखा जाता है कि अमुक फिल्म के एडिटर ने कैसी काटछांट की है और उस पर फिल्म को उम्दा बनाने का सब से ज्यादा बोझ रहता है, क्योंकि जब कोई फिल्म बनती है तब उस की लंबाई बहुत ज्यादा होती है, पर उसे रोचक कैसे रखना है और किस सीन पर पब्लिक सीटी बजाएगी और किस सीन पर सिर पीट लेगी, इस की पूरी समझ एडिटर को होनी चाहिए.

आज हम आप की मुलाकात एक ऐसे ही फिल्म एडिटर राहुल तिवारी से कराते हैं, जिन की जिंदगी का सफर भी फिल्मी रहा है. एक समय मुंबई में गुजरबसर करने के लिए उन्होंने फिल्म कलाकारों को वेटर के रूप में खाना भी खिलाया है. आज उन्हीं के बीच वे फिल्म की एडिटिंग करते हैं, अपनी अदाकारी का हुनर दिखाते हैं और डायरैक्टर की सीट पर भी बैठते हैं. वे उन लोगों को चुप करा देते हैं, जिन्होंने बचपन में उन्हें ‘नचनिया’ कहा था.

‘नचनिया’ क्यों कहा

राहुल तिवारी का जन्म 2 दिसंबर, 1982 को इलाहाबाद के एक आम परिवार में हुआ था. उन के पिता की एक साधारण सी नौकरी थी. उन की प्राइमरी तक की पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर से हुई थी और आगे 12वीं तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की थी. उन्होंने ग्रेजुएशन पूर्वांचल यूनिवर्सिटी से की थी, पर उन का रझान बचपन से ऐक्टिंग की तरफ रहा था, तभी तो उन्होंने ‘इलाहाबाद उत्तरमध्य सांस्कृतिक केंद्र’ से थिएटर किया था. इस के बाद वे इलाहाबाद आकाशवाणी से जुड़े, जहां वे कवि गोष्ठी, नाटक वगैरह करते थे. राहुल तिवारी ने बताया, ‘‘जब से मैं खुद को जानता हूं, तब से मेरे भीतर सिनेमा को ले कर लगाव है. मुझे फिल्म डायरैक्टर बनना था और अच्छा डायरैक्टर बनने के लिए फिल्म एडिटिंग भी आनी चाहिए. ‘‘मैं ने बचपन में स्कूल का कोई नाटक नहीं छोड़ा. मेरा नाम पहले से ही लिस्ट में शामिल होता था. 26 जनवरी, 15 अगस्त पर मैं भाषण देता था. मैं ने तब परेड को लीड किया. मैं बिगुल और ड्रम अच्छा बजाता था. कहीं न कहीं मेरे भीतर एक कलाकार था. ‘‘पर, उन्हीं दिनों मेरे आसपास के बहुत से लोग मुझे ‘छिछोरा’ और ‘नचनिया’ समझते थे, क्योंकि मैं नाटकों में ऐक्टिंग करता था. मु झे ‘भड़वा’ तक कहा गया. नुक्कड़ नाटकों में रोड पर नाचगाना होता था और अगर कोई मेरा परिचित देख लेता था, तो घर जा कर बता देता था कि आप का लड़का तो ‘भड़वागीरी’ करता है. ऐसी चीजें मुझे दर्द देती थीं. ‘‘पता नहीं क्यों लोगों की नजरों में मैं ‘आवारा’ था. जब मैं ने मुंबई आने की बात की, तब और जब मेरी शादी होने वाली थी, तब भी लोग मुझे ‘आवारा’ ही बोलते थे, जबकि स्कूल में मैं अच्छा छात्र था.’’

मुंबई में वेटरगीरी अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए राहुल तिवारी ने बताया, ‘‘मैं मुंबई आ तो गया था, पर यहां रहना इतना आसान नहीं है. अगर कोई जुगाड़ नहीं है तो बहुत तकलीफ होती है. शुरूशुरू में मैं भूखा रहा, कम खा कर रहा.’’ उन्होंने आगे बताया, ‘‘पहले एक साल तक (साल 2000 में) मैं ने जुहू में एक मिलिटरी क्लब में बतौर वेटर का काम किया. अगर आप को फिल्म इंडस्ट्री में कुछ पाना है, तो साइड वर्क करना पड़ेगा. इसी दौड़ में मैं ने फिल्म एडिटिंग को सीखा. कोई एडिटिंग स्टूडियो वाला पूरे दिन का 10 रुपए दे देता था, कोई सिर्फ खाना खिला देता था और रातभर मैं उस का सीरियल, फिल्म लाइनअप करता था, औडियो मिलाता था, एडिट करता था. ‘‘6-7 साल तक जब तक मैं असिस्टैंट रहा, तब तक बहुत तकलीफ झेली. लोग मुझे पैसे नहीं देते थे, मैं मुंबई के झोंपड़े में रहा, पर हर पल मुझे कुछ पाने की तमन्ना थी, जिसे मैं ने कभी मरने नहीं दिया.’’ धीरेधीरे मिला काम राहुल तिवारी ने अपने अब तक के सफर में बताया, ‘‘मैं ने फिल्म ‘सरकार’ का ट्रेलर एडिट किया था. मैं रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘कंपनी’ का क्रिएटिव डायरैक्टर रहा. मैं ने हीरोइन ऋषिता भट्ट की फिल्म ‘ऐक्स जोन’ एडिट की थी. मैं फिल्म ‘जीनियस’ में एसोसिएट था. मैं ने ‘द लास्ट सेल्समैन’ का ट्रेलर एडिट किया है. ‘रेस 2’ का मैं ने ट्रेलर एडिट किया. ‘जेम्स’, ‘बनारस’ और ‘आमो आखा एक से’ फिल्में की थीं. ‘‘ऐक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की निर्माण की हुई फिल्म ‘मियां कल आना’ को मैं ने एडिट किया था, जिस के डायरैक्टर शमास नवाब सिद्दीकी थे, जिसे ‘कांस फिल्म फैस्टिवल’ में तारीफ मिली थी. मशहूर ईरानी डायरैक्टर माजिद मजीदी ने यह फिल्म देख कर कहा था कि यह तो एडिटर की ही फिल्म है. ‘‘सीरियल ‘भाग्य विधाता’ में मैं ने बतौर विलेन काम किया था. वैब सीरीज ‘ह्यूमन’ में मैं हीरोइन कीर्ति कुल्हारी का पिता बना हूं. अभी अजय देवगन की आने वाली एक फिल्म ‘मैदान’ में मुझे छोटा सा किरदार भी मिला है.’’ एडिटिंग की अहमियत राहुल तिवारी के मुताबिक, ‘‘अच्छा एडिटर जानता है कि उसे कैसे कहानी को, कैसे संवाद को, कैसे सीन को, कैसे कलाकार के काम को तराश कर एडिट करना है, उसे सीन वाइज सजाना है. एडिटर को इन सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. इस काम को करने में उसे पूरी छूट मिलनी चाहिए. ‘‘जहां तक मेरी बात है, तो मैं डायरैक्टर के सामने अपना पक्ष रखता हूं. किस सीन को हटाना है, किस संवाद को रखना है, फिल्म की लंबाई कितनी रहनी चाहिए, इस का ध्यान बहुत ज्यादा रखना पड़ता है. ‘‘अनिल शर्मा की फिल्म ‘जीनियस’ की एडिटिंग में मेरी उन से काफी बहस भी हुई थी कि फिल्म की लंबाई इतनी ज्यादा न हो जाए कि दर्शक बोर फील करें.

अच्छा एडिटर फिल्म को शानदार बना देता है और बुरा एडिटर फिल्म को कूड़ा कर सकता है.’’ कोरोना काल और मुसीबतें राहुल तिवारी ने कोरोना काल का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, ‘‘इस बुरे दौर में यह जरूर समझ में आया कि आप का परिवार और चंद लोग ही अपने होते हैं, जो मुश्किल समय में आप के साथ खड़े होते हैं. सोशल मीडिया पर ‘वैरी गुड’ या ‘नाइस’ का कमैंट कह देने से कोई आप का हमदर्द नहीं हो जाता है. सुखदुख में तो घूमफिर कर 20-25 लोग ही जीवन में आप के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े होते हैं. कोरोना काल में ऐसे ही लोग एकदूसरे का हौसला बढ़ाते दिखे. ‘‘इतना ही नहीं, लोग कोरोना काल में कुदरत से जुड़े और उस की अहमियत को समझ . जब सबकुछ बंद हो गया था, तब पर्यावरण एकदम साफ हो गया था. जहां मैं रहता हूं, वहां पहले चिडि़या के चहचहाने की आवाज नहीं आती थी, लौकडाउन में मैं ने वह सब सुना. ‘‘कोरोना काल में मैं ने सोशल मीडिया के जरीए जरूरतमंद लोगों को बताया कि अगर किसी को भी खानेपीने की कोई दिक्कत हो, तो उसे खाना उपलब्ध करा दिया जाएगा. अपने दोस्तों से भी कहा कि जितना आप से हो सकता है, लोगों की मदद करें. ‘‘दिक्कत यह भी है कि फिल्म इंडस्ट्री वालों को सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिलती है. घर, मैडिकल आदि की बेसिक सुविधा तक नहीं है. जो हमारा तथाकथित बौलीवुड है न, यह चंद स्टारों से नहीं बना है. इस में हजारोंलाखों टैक्नीशियन भी हैं. ‘‘चंद बड़े सितारों को कोरोना से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि उन के पास तो इतना पैसा है कि अगले 50-100 साल भी खत्म न हो. ‘‘उन की कई पीढि़यां जी सकती हैं, लेकिन बाकी जो छोटे कलाकार, लेखक, एडिटर, डायरैक्टर, म्यूजिशियन, आर्ट डायरैक्टर, स्पौटबौय, मेकअपमैन वगैरह बहुत सीमित पैसों में जीवनभर रहते हैं, रोजाना खातेकमाते हैं, जबकि हमारी सरकार उन्हें कोई छोटी सी भी सुविधा नहीं देती है. ‘‘अपने ही एक उदाहरण से बताता हूं कि हाल ही में मैं ने एक वैब सीरीज ‘ह्यूमन’ में अभिनय किया था, जिस के विपुल अमृतलाल शाह डायरैक्टर थे. इस की शूटिंग के लिए मैं मुंबई लोकल ट्रेन से जा रहा था. चूंकि कोरोना में तकरीबन सब बंद था, तो मैं ने अपनी फिल्म एसोसिएशन का कार्ड टिकट कलक्टर को दिखाया और टिकट मांगा तो उस ने टिकट देने से मना कर दिया और मुझ पर हंसा भी कि यह सब क्या है. उस कार्ड की उस ने कोई वैल्यू नहीं समझ‘‘दरअसल, जो हमारी एसोसिएशन है न, वह बहुत ही कमजोर है और हमारी सरकार को इसे इंडस्ट्री का दर्जा देना चाहिए. बौलीवुड समाज को मनोरंजन देता है, लाखों लोगों को रोजगार देता है, अगर समाज से फिल्में छीन ली जाएं, संगीत बंद कर दिया जाए, तो समाज कहीं न कहीं बेरंग हो जाएगा. हम उस में रंग भरते हैं. लिहाजा, हिंदी फिल्मों से जुड़े लोगों को बेसिक सुविधाएं तो सरकार को देनी ही चाहिए.’’ कुछ यादगार पल अपने फिल्मी सफर के कुछ यादगार पलों को याद करते हुए राहुल तिवारी बताते हैं, ‘‘मैं ने फिल्म डायरैक्टर अशोक गायकवाड़ के साथ काम की शुरुआत की थी. उन्होंने ‘दूध का कर्ज’, ‘राजा की आएगी बरात’, ‘इज्जत’ व ‘गैर’ जैसी फिल्मों का डायरैक्शन किया है. वे मेरे गुरु हैं. उन के साथ मेरा बहुत अच्छा समय बीता. ‘‘इस के अलावा फिल्म डायरैक्टर शाहरुख मिर्जा साहब, जिन्होंने ‘सलामी’ फिल्म बनाई थी, से मेरा दोस्ताना संपर्क रहा है. वे मेरे लिए खरीदारी तक करते थे. कपड़े लाते थे. मेरे पैर का नंबर पूछ कर जूता खरीद कर लाते थे. वे अपने बेटे की तरह मुझे चाहते थे. ‘‘वे एक फिल्म कर रहे थे, जिस में महेश भट्ट साहब प्रोड्यूसर थे. एक बार हमें उन के साथ मीटिंग करनी थी. इस के बाद शूटिंग करने के लिए कनाडा जाना था. ‘‘जब महेश भट्ट साहब आए, तो शाहरुख मिर्जा साहब ने मेरा नाम ले कर कमरे में बुलाना चाहा, तो भट्ट साहब ने कहा कि यहां पर हम दोनों के अलावा कोई तीसरा नहीं बैठेगा. उन्हें एकांत चाहिए था. उन्हें खास लोगों के बीच ही बैठना पसंद था. पर शाहरुख मिर्जा साहब ने कहा कि यह मेरा एडिटर है और यह भी बैठेगा और आप को अच्छा लगेगा. ‘‘जब मैं उन के बीच गया, तो भट्ट साहब ने एक बार तो मुझे देखा ही नहीं, फिर धीरेधीरे सीन पर बातें होने लगीं. हालांकि वह फिल्म बन नहीं पाई, क्योंकि शाहरुख मिर्जा साहब का अचानक निधन हो गया था, पर भट्ट साहब से हुई मेरी वह मुलाकात यादगार रही थी. ‘‘ऐसे ही जब मैं जुहू मिलिटरी क्लब में वेटर था, तब मैं ने नाना पाटेकर, आमिर खान और उन के पिता ताहिर हुसैन, शिल्पा शेट्टी, आयशा जुल्का, मिथुन चक्रवर्ती, रमेश सिप्पी, जीपी सिप्पी, जैकी श्रौफ, अनिल कपूर, प्रियंका चोपड़ा, ऐश्वर्या राय के अलावा और भी न जाने कितने कलाकारों को खाना खिलाया था, डांट भी खाई थी. ‘‘फिर उन्हीं लोगों के बीच मैं बतौर एडिटर भी बैठा. वे हैरान हो जाते थे कि एक वेटर अब फिल्म एडिटिंग भी कर रहा है. पर मुझे तो फिल्म इंडस्ट्री में किसी तरह बने रहना था. घर से पैसे नहीं आते थे, क्योंकि मेरे पिताजी उत्तर प्रदेश जल निगम में छोटी सी नौकरी में थे. ‘‘पर, मैं इतना जरूर कहूंगा कि अगर आप को अपना मुकाम हासिल करना है, तो किसी भी काम को करने में हिचक महसूस न करें. मैं शाम को 6 बजे से ले कर रात के साढ़े 12 बजे तक वेटर का काम करता था और दिन में फिल्म इंडस्ट्री में काम मांगता था. ‘‘सच कहूं, तो मेरी यही स्ट्रगल आज मुझे इस मुकाम तक लाई है. अभी तो मुझे बड़ीबड़ी फिल्में बनानी हैं. मैं अपनी फिल्म ‘यूपी’ और ‘अमेरिका कहां है’ को बनाना चाहता हूं. जल्द ही मेरी एक शौर्ट फिल्म ‘राजवीर’ भी रिलीज होने वाली है, जिस में मैं ने क्रिएटिव डायरैक्शन व एडिटिंग तो की ही है, लीड रोल भी मेरा ही है.’’

‘भाभी जी घर पर हैं’ के ‘तिवारी जी’ को पुष्पा अवतार में देखकर भड़की शो की एक्ट्रेस , कर दी पिटाई

And टीवी के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘भाभी जी घर पर हैं ‘ दर्शकों के पसंदीदा शो है. शो के कलाकारों ने अपनी एक्टिंग से दर्शकों के दिल में अपनी एक ख़ास जगह बनाई है. शो के सभी कलाकारों को लोग अब उनके असली नाम से कम उनके कैरेक्टर के नाम से ज्यादा पहचानते हैं. अंगूरी भाभी, अनीता भाभी, विभूती और तिवारी जी से लेकर ‘भाभी जी घर पर हैं’ के सभी किरदार दर्शकों के पसंदीदा हैं. शो में इन सब कलाकारों की जुगलबंदी दर्शकों को हमेशा हंसने पर मजबूर करती है.

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इसी बीच इस शो में तिवारी जी के नाम से फेमस रोहिताश्व गौड़ ने एक फनी वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है ,रोहिताश्व को देखकर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि टीवी के अलावा रियल लाइफ में भी वो काफी एंटरटेनिंग हैं. रोहिताश्व सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और नए नए वीडियो बनाकर शेयर करते रहते हैं. और अब उनका एक और नया वीडियो इंस्टा पर छाया है.

इस वीडियो में रोहिताश्व भाबी जी घर पर है की नई एक्ट्रेस Russa यानि चारूल मलिक के साथ नज़र आ रहे हैं.चारुल मालिक को इस शो से पहले कॉमेडी शो हप्पू की उलटन पलटन में देखा गया था.

वीडियो में तिवारी जी साउथ स्टार अल्लू अर्जुन के कैरेक्टर पुष्पा की एक्टिंग करते हैं तभी वहां से एक्ट्रेस चारूल मलिक गुजरती हैं, तिवारी जी की एक्टिंग देखकर चारुल भड़क जाती हैं ,इतना ही नहीं वो तिवारी जी की पीटने लगती हैं.

आगे वीडियो में रूसा तिवारी जी को यह कहते दिखाई देती हैं ‘अबे अंधे जब से पुष्पा देखकर आया है तब से पागल हो गया है, बेवकूफ…’

रोहिताश्व और चारूल का ये एक फनी वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहा है यही वजह है कि कुछ ही घंटों में इस वीडियो को हजारों लाइक्स मिल चुके है. फैंस रूसा यानी चारु मालिक की एक्टिंग की भी जमकर तारीफ़ कर रहे हैं.

 

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बता दें की रोहिताश्व और चारूल मलिक इंस्टाग्राम पर एक साथ वीडियो बनाते रहते हैं और फैंस इन दोनों के वीडियो को काफी पसंद भी करते हैं. हाल ही में दोनों की एक वीडियो काफी वायरल हुई थी .उस वीडियो में चारुल और रोहिताश्व को घूमर गाने पर फनी स्टाइल में डांस करते हुए देखा गया था.

वचन -भाग -1: जब चिकचिक और शोरशराबे से परेशान हुई निशा

Anita Jain

निशा ने अपने जन्मदिन के अवसर पर हम सब के लिए बढि़या लंच तैयार किया. छक कर भोजन करने के बाद सब आराम करने के लिए जब उठने को हुए तो निशा अचानक भाषण देने वाले अंदाज में उठ कर खड़ी हो गई, ‘‘मैं आप सब से आज कुछ मांगना चाहती हूं,’’ कुछ घबराते, कुछ शरमाते अंदाज में उस ने अपने मन की इच्छा प्रकट की.

हम सब हैरान हो कर उसे देखने लगे. उस का यह व्यवहार उस के शांत, शर्मीले व्यक्तित्व से मेल नहीं खा रहा था. वह करीब 3 महीने पहले मेरी पत्नी बन कर इस घर में आई थी. सब बड़ी उत्सुकता से उस के आगे बोलने का इंतजार करने लगे.

‘‘आप सब लोग मुझ से बड़े हैं और मैं किसी की डांट का, समझाने का, रोकनेटोकने का जरा सा भी बुरा नहीं मानती हूं. मुझे कोई समझाएगा नहीं तो मैं सीखूंगी कैसे?’’ निशा इस अंदाज में बोल रही थी मानो अब रो देगी.

‘‘बहू, तू तो बहुत सुघड़ है. हमें तुझ से कोई शिकायत नहीं. जो तेरे मन में है, तू खुल  कर कह दे,’’ मां ने उस की तारीफ कर उस का हौसला बढ़ाया. पापा ने भी उन का समर्थन किया.

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‘‘बहू, तुम्हारी इच्छा पूरी करने की हम कोशिश करेंगे. क्या चाहती हो तुम?’’

निशा हिचकिचाती सी आगे बोली, ‘‘मेरे कारण जब कभी घर का माहौल खराब होता है तो मैं खुद को शर्म से जमीन में गड़ता महसूस करती हूं. प्लीज…प्लीज, आप सब मुझे ले कर आपस में झगड़ना बिलकुल बंद कर दीजिए…अपने जन्मदिन पर मैं बस यही उपहार मांग रही हूं. मेरी यह बात आप सब को माननी ही पड़ेगी…प्लीज.’’

मां ने उसे रोंआसा होते देखा, तो प्यार भरी डांट लगाने लगीं, ‘‘इस घर में तो सब का गला कुछ ज्यादा जोर से ही फटता है. बहू, तुझे ही आदत डालनी होगी शोर- शराबे में रहने की.’’

‘‘वाह,’’ अपनी आदत के अनुसार पापा मां से उलझने को फौरन तैयार हो गए, ‘‘कितनी आसानी से सारी जिम्मेदारी इस औरत ने बहू पर ही डाल दी है. अरे, सुबह से रात तक चीखतेचिल्लाते तेरा गला नहीं थकता? अब बहू के कहने से ही बदल जा.’’

‘‘मैं ही बस चीखतीचिल्लाती हूं और बाकी सब के मुंह से तो जैसे शहद टपकता है. कोई ऐसी बात होती है घर में जिस में तुम अपनी टांग न अड़ाते हो. हर छोटी से छोटी बात पर क्लेश करने को मैं नहीं तुम तैयार रहते हो,’’ मां ने फौरन आक्रामक रुख अपना लिया.

‘‘तेरी जबान बंद करने का बस यही इलाज है कि 2-4 करारे तमाचे…’’

गुस्से से भर कर मैं ने कहा, ‘‘कहां की बात कहां पहुंचा देते हैं आप दोनों. इस घर की सुखशांति भंग करने के लिए आप दोनों बराबर के जिम्मेदार हैं.’’

‘‘मनोज भैया, आप भी चुप नहीं रह सकते हो,’’ शिखा भी झगड़े में कूद पड़ी, ‘‘इन दोनों को समझाना बेकार है. आप भाभी को ही समझाओ कि इन की कड़वी बात को नजरअंदाज करें.’’

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हम दोनों के बोलते ही मम्मी और पापा अपना झगड़ा भूल गए. उन का गुस्सा हम पर निकलने लगा. मैं तो 2-4 जलीकटी बातें सुन कर चुप हो गया, पर शिखा उन से उलझी रही और झगड़ा बढ़ता गया.

हमारे घर में अकसर ऐसा ही होता है. आपस में उलझने को हम सभी तैयार रहते हैं. चीखनाचिल्लाना सब की आदत है. मूल मुद्दे को भुला कर लड़नेझगड़ने में सब लग जाते हैं.

अचानक निशा की आंखों से बह कर मोटेमोटे आंसू उस के गालों पर लुढ़क आए थे. सब को अपनी तरफ देखते पा कर वह हाथों में मुंह छिपा कर रो पड़ी. मां और शिखा उसे चुप कराने लगीं.

करीब 5 मिनट रोने के बाद निशा ने सिसकियों के बीच अपने दिल का दर्द हमें बताया, ‘‘जैसे आज झगड़ा शुरू हुआ ऐसे ही हमेशा शुरू हो जाता है…मेरी बात किसी ने भी नहीं सुनी…क्या आप सब मेरी एक छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते? मेरी खुशी के लिए मेरे जन्मदिन पर एक छोटा सा वचन नहीं दे सकते?’’

हम सभी ने फटाफट उसे वचन दे दिया कि उस की इच्छा पूरी करने का प्रयास दिल से करेंगे. उस का आंसू बहाना किसी को भी अच्छा नहीं लग रहा था.

निशा ने आखिरकार अपनी मांग हमें बता दी, ‘‘घर का हर काम कर के मुझे खुशी मिलती है. मेरा कोई हाथ बटाए, वह बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन कोई किसी दूसरे को मेरा हाथ बटाने को कहे…सारा काम उसे करने को आदेश दे, यह बात मेरे दिल को दुखाती है. मैं सब से यह वचन लेना चाहती हूं कि कोई किसी दूसरे को मेरा हाथ बटाने को नहीं कहेगा. यह बात खामखा झगड़े का कारण बन जाती है. जिसे मेरी हैल्प करनी हो, खुद करे, किसी और को भलाबुरा कहना आप सब को बंद करना होगा. आप सब को मेरी सौगंध जो आगे कोई किसी से कभी मेरे कारण उलझे.’’

निशा को खुश करने के लिए हम सभी ने फौरन उसे ऐसा वचन दे डाला. वह खुशीखुशी रसोई संभालने चली गई. उस वक्त किसी को जरा भी एहसास नहीं हुआ कि निशा को दिया गया वचन आगे क्या गुल खिलाने वाला था. कुछ देर बाद पापा ने रसोई के सामने से गुजरते हुए देखा कि निशा अकेली ढेर सारे बरतन मांजने में लगी हुई थी.

‘‘शिखा,’’ वह जोर से चिल्लाए, ‘‘रसोई में आ कर बहू के साथ बरतन क्यों नहीं…’’

‘‘पापा, अभीअभी मुझे दिया वचन क्यों भूल रहे हैं आप?’’ निशा ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की, ‘‘पापा, प्लीज, आप दीदी से कुछ मत कहिए.’’

कुछ पलों की बेचैनी व नाराजगी भरी खामोशी के बाद उन्होंने निर्णय लिया, ‘‘ठीक है, मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा, पर तुम्हारे काम में हाथ बटाना तो तेरे हाथ में है. मैं मंजवाता हूं तेरे साथ बरतन.’’

अपने कुरते की बाजुएं ऊपर चढ़ाते हुए वे निशा की बगल में जा खड़े हुए. वे अभी एक तश्तरी पर ही साबुन लगा पाए थे कि मां भागती रसोई में आ पहुंचीं.

‘‘छी…यह क्या कर रहे हो?’’ उन्होंने पापा के हाथों से तश्तरी छीनने की असफल कोशिश की.

मां ने चिढ़ और गुस्से का शिकार हो शिखा को ऊंची आवाज में पुकारा तो निशा ने दबी, घबराई आवाज में उन के सामने भी हाथ जोड़ कर वचन की याद दिला दी.

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