तांत्रिक/सुपर नेचुरल पाॅवर का सच उजागर करती फिल्म ‘‘वाॅयड’’

सुपर नेच्युरल पावर यानी कि तांत्रिक शक्तियों को लेकर कई तरह की बातें की जाती रहती है. बौलीवुड की कई हौरर व सुपर नेच्युरल पावर के इर्द गिर्द बुनी गयी कहानी वाली फिल्मों के माध्यम से इनकी ताकत को पेश करते हुए अंध विश्वास को ही बढ़ावा दिया जाता रहता है. मगर अब तांत्रिक ताकतों या यूं कहें कि सुपर नेच्युरल पावर की हकीकत को बयां करने वाली फिल्म ‘‘वायड’’ यानी कि ‘‘खालीपन’’ लेकर अभिनेता व निर्देशक वैभव गट्टानी आए हैं, जो कि छह मई से ‘‘वीमियो औन डिमांड’ पर उपलब्ध होगी.

सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ने वाले 28 वर्षीय वैभव गट्टानी अपनी पहली प्रयोगधर्मी फिल्म ‘‘वायड’’ के माध्यम से इंसान की जिंदगी में व्याप्त खालीपन को रेखांकित करने के साथ ही इस बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि इंसान तांत्रिक शक्तियों /सुपर नेच्युरल पावर की बदौलत अपने काम को पूरा तो करा सकता है,मगर इसके लिए उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है.

The Void (Trailer) from Mohammad HZ on Vimeo.

96 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘वाइड’ की कहानी के केंद्र में रिया (युवराज्ञी) है, जो कि अपने पति अभिजीत (वैभव गट्टानी) के साथ रहती है. रिया जल्द से जल्द मां बनने को बेताब है. मगर वह मां नहीं बन पा रही है. उसकी इस बीमारी का इलाज मेडिकल साइंस के पास भी नहीं है. तब रिया अपने पति अभिजीत के साथ एक मनोवैज्ञानिक डाक्टर से भी मिलती है, जो उन्हें सुपरनेचुरल ताकत रखने वाली महिला के पास भेजता है. पति अभिजीत की इच्छा के विपरीत रिया उस तांत्रिक /सुपर नेच्युरल शक्ति रखने वाली महिला से मिलती है.

यह तांत्रिक महिला रिया को समझाती है कि वह गर्भवती तो हो जाएगी, मगर इसके बदले में उसे ढेर सारा धन खर्च करने के अलावा भी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. मां बनने के लिए बेताब रिया उस तांत्रिक महिला के सामने घुटने टेक देती है. तांत्रिक महिला, रिया के उपर तांत्रिक क्रिया करती है. रिया गर्भवती हो जाती है, मगर फिर उसे जो कुछ खोना पड़ता है, उसकी वजह से उसे अहसास होता हे कि इससे अच्छा होता कि वह आजीवन बांझ ही रहती. अब रिया को क्या कीमत चुकानी पड़ी, यह जानने के लिए फिल्म देखना ही ठीक रहेगा.

मगर फिल्म देखकर हर दर्शक तांत्रिकों से दूर रहने की कसम जरुर खा लेगा. फिल्म के लेखक, अभिनेता व निर्देशक वैभव गट्टानी कहते हैं- ‘‘वॉइड का अर्थ होता है खालीपन. हर इंसान के जीवन में कहीं न कहीं खालीपन जरुर होता है. इंसान अपने जीवन के खालीपन को भरने के लिए किस हद तक जा सकता है, इसी का चित्रण हमने अपनी इस फिल्म में किया है. हमने एकदम साफ साफ बताया है कि तांत्रिकों के पास आप जाएंगे, तो वह आपका काम कर देंगे, मगर उसके लिए आपको जो कीमत चुकानी पड़ती है, वह आप कभी नहीं चुकाना चाहेंगे. हमने स्पष्ट रूप से यही कहा है कि इंसान को तांत्रिकों से दूर रहना चाहिए.’’

फिल्म में विवेक का किरदार निभाने वाले अभिनेता अपूर्व कुमार कहते हैं-‘‘ फिल्म ‘वॉइड‘ की कहानी इस वक्य पर आधारित है कि एक इंसान मजबूरी में, हताशा और निराशा में बल्कि यूं कहें कि एक उम्मीद में किस हद तक जा सकता है.’’

टैस्टेड ओके- भाग 2: क्या कैरेक्टर टेस्ट में पास हुए विशाल और संजय

रंजना आगे की तरफ झुक कर कंप्यूटर खोलने लगी तो विशाल की नजरें रंजना के उभारों को घूरने लगीं. उसे घूरता देख कर रंजना ने चीयरलीडर की तरह अपने दोनों कूल्हों को ऊपरनीचे डुलाते हुए उस का ध्यान खींचते हुए कहा, ‘‘मिस्टर, वहां नहीं यहां देखिए, स्क्रीन पर.’’

रंजना विशाल को काम समझाने लगी, ‘‘मुझे अपने आउटलेट की डिटेल को इस तरह इकट्ठा करना है, ताकि देख सकूं कि कौन से नंबर, रंग, साइज, कीमत और ब्रांड के प्रोडक्ट हमारे माल में ज्यादा बिक रहे हैं.’’

इसी बीच रंजना ने नोटिस किया कि विशाल बारबार उस की पैंटी को चोरीछिपे देख रहा है, जिस से उसे यकीन हो गया कि जल्द ही वह विशाल को पिघला देगी.

थोड़ी देर बाद रंजना ब्लैक कौफी बना लाई. ब्लैक कौफी तुरंत ही सैक्स का मूड बना देती है.

कौफी को देख कर विशाल ने बुरा मुंह बनाया और बोला, ‘‘कुछ दिन पहले गुरुग्राम में एक घटना हुई थी, जिस में एक औरत ने नशीली कौफी पिला कर एक प्लंबर का रेप कर लिया था.’’

रंजना ने गुस्से से कहा, ‘‘शटअप. मैं कोई मिडिल क्लास लेडी नहीं हूं, बल्कि एक कामयाब बिजनैस वुमन हूं.’’

जितनी देर विशाल रंजना के लैपटौप में मैट्रिक्स को अरेंज करते हुए फार्मूला देता रहा, उतनी देर रंजना बराबर विशाल को क्लू देती रही. गरमी का बहाना कर उस ने शर्ट के ऊपर के 2 बटन खोल लिए. पैरों को एक के ऊपर एक विशाल के सामने ही टेबल तक फैला दिया. उस ने अपने दोनों पैर को इस तरह खोल कर फैला दिया जैसे कह रही हो कि आ जाओ, मुझ में समा जाओ राजा.

रंजना अब एक कैंडी निकाल लाई और उसे विशाल को दिखादिखा कर चूसने लगी. इतनी मेहनत के बाद भी विशाल पर जरा भी असर नहीं हुआ था.

‘‘बड़ा सख्त है,’’ बड़बड़ाते हुए रंजना ने अब जबरदस्ती विशाल के गाल को चूमना और उस के होंठ को चूसना शुरू कर दिया.

यह अब उसे विशाल की जीत नहीं, बल्कि अपनी जवानी की हार लग रही थी.

रंजना ने जबरदस्ती विशाल के हाथों से अपने उभारों को दबवाना शुरू कर दिया, लेकिन विशाल ने एक झटके में रंजना को परे धकेल दिया.

‘‘मैडम सौरी. मैं किसी और को पसंद करता हूं.’’

इस पर रंजना ने बोला, ‘‘अरे, तो कौन सा मैं तुम से सात फेरे लेना चाहती हूं. सब करते हैं, यहांवहां. थोड़ाबहुत. टेक इट ईजी यार. चलता है इतना सब. सत्यवादी बन कर कोई अवार्ड नहीं मिलने वाला तुम्हें.’’

विशाल ने कहा, ‘‘वह मैं नहीं जानता, लेकिन मेरे उसूल अलग हैं, मैं यह सब नहीं कर सकता.’’

रंजना ने कहा, ‘‘ओके.’’

तुरंत ही रंजना लिविंग रूम से बाहर चली गई और कुछ ही देर में सलवारसूट पहन कर वापस आई. 2,000 रुपए के 5 नोट विशाल के मुंह पर मारते हुए उस से चले जाने को कहा. वह बोली, ‘‘मुझे तुम्हारा काम करने का तरीका पसंद नहीं आया. मैं तुम्हें खराब फीडबैक दे दूंगी. जस्ट गैटआउट.’’

विशाल चुपचाप कपड़े ठीक कर बाहर निकल गया. रंजना को अभी भी विशाल के लौट आने का भरोसा था, लेकिन आखिर में नीचे जाती हुई लिफ्ट की आवाज उसे सुनाई दी.

दूसरी तरफ विशाल के रंजना के साथ जाते ही सिमरन शंकर चौक रोड पर बने ओबराय होटल के लिए निकल गई थी, जहां रंजना के होने वाले पति संजय की पेंटिंग एक आर्ट गैलरी में लगी हुई थी.

होटल के मैनेजर ने चोरीचोरी सिमरन की खुली जांघों को देखते हुए अपने स्टाफ से मैडम का स्वागत करने के लिए कहा.

सिमरन ने जल्द ही कोने में खड़े हुए संजय को उस का नाम लगी हुई 2 पेंटिंग से पहचान लिया.

सिमरन ने संजय की पेंटिंग की भरपूर तारीफ की. वह जानती थी कि कलाकार का दिल जीतना है तो उस की कला की तारीफ करो.

सिमरन ने बताया कि वह अपने बंगले के लिए उस की बहुत सारी पेंटिंग खरीद सकती है.

संजय ने रविवार को उस से अपने स्टूडियो में आने को कहा, जिसे सिमरन ने तुरंत ही स्वीकार कर लिया.

अगले दिन सुबह की चाय पर सिमरन ने देखा कि अखबार में संजय की पेंटिंग के साथ उस का फोटो छपा था और संजय की पेंटिंग की तारीफ में ठीक वही बातें लिखी थीं, जो सिमरन ने कही थीं.

विशाल इस बीच किसी हर्बल क्रीम से सिमरन के खुले हिस्सों की मसाज करते हुए उस के नाजुक हिस्सों पर भी छूने लगा था, जिस पर सिमरन ने उसे एक किलर स्माइल दी.

रविवार को सुबह हुड्डा लौनटैनिस कोर्ट में 2 घंटे पसीना बहाने के बाद सिमरन ठीक 8 बजे महीरा बाजार के एक शौपिंग कौंप्लैक्स के बेसमैंट में संजय के बताए पते पर पहुंच गई.

बहुत ही सस्ती जगह थी, लेकिन अंदर से संजय ने अपने थिएटर को बहुत ही आकर्षक बना रखा था. ट्यूबलाइट की रोशनी में एक न्यूड औरत की पेंटिंग बनाते हुए उसे जरा भी होश नहीं था कि सिमरन कमरे में आ चुकी थी और उसे घूर रही थी.

यह वह पल था, जब सिमरन के दिल में संजय के प्रति एक रियल फीलिंग आ गई. उसे रंजना से जलन होने लगी. वह सोचने लगी, ‘रंजना की किस्मत यूनिवर्सिटी के समय से ही अच्छी है. गोयल सर की फेवरेट स्टूडैंट थी और यहां भी उसे उस से अच्छा बौयफ्रैंड मिल गया.’

सिमरन ने खांसी की आवाज की तो चौंक कर संजय ने सिमरन को देखा.

संजय बोला, ‘‘अरे, आप आ गईं. मैं सोच रहा था कि भूल गई होंगी आप.’’

सिमरन ने अपनी चिरपरिचित किलर मुसकराहट देते हुए कहा, ‘‘आप भूलने वाली चीज नहीं हो.’’

सिमरन की मांसल जांघों को ताड़ते हुए संजय ने शर्ट पहनने की कोशिश की, तो सिमरन ने उसे रोकते हुए अपनी पेंटिंग के साथ पोज देने के लिए कहा.

सिमरन अपने आई फोन से उस के फोटो लेने के लिए तरहतरह से खड़ा करने के बहाने उसे रोक रही थी.

सिमरन जानती थी कि अपने भारीभरकम उभारों के चलते वह टैनिस स्कर्ट और टीशर्ट में बहुत ही ग्लैमरस लगती है.

कमरे के बीच में मौडल्स को पोज देने के लिए रखी गई टेबल पर सिमरन इस तरह पैर फैला कर बैठ गई कि संजय चाहे तो तुरंत ही उस में समा जाए.

सिमरन की पैंटी साफ दिखाई दे रही थी. उस पर ‘किस’ के इमोजी बने हुए थे.

एक फूल दो माली

उत्तर प्रदेश की मोहब्बत की नगरी आगरा का एक थाना है एत्माद्दौला. इसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत फाउंड्री नगर स्थित यमुना किनारे सुबह एक युवक का शव पड़ा मिला. देखतेदेखते वहां लोग एकत्र हो गए. इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय मय पुलिस टीम के घटनास्थल पर पहुंच गए. यह बात 22 नवंबर, 2021 की है. थानाप्रभारी देवेंद्र शंकर पांडेय जिस समय वहां पहुंचे, उस समय वहां लोगों की भीड़ जुट चुकी थी. उन्होंने भीड़ को हटाते हुए शव व घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

मृतक युवक की उम्र 25-26 साल के लगभग थी. युवक के शरीर पर चोट के निशान थे. शव देखने से ऐसा लग रहा था कि युवक की मारपीट कर हत्या करने के बाद शव को यहां ला कर फेंका गया था. मृतक की जामातलाशी में उस की जेब से एक लव लैटर (प्रेमपत्र) व डाक्टर की परची मिली. लव लैटर पर मृतक का मोबाइल नंबर भी लिखा था. लेकिन मोबाइल नहीं मिला.

मृतक के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला, जिस से उस की शिनाख्त हो सके. पुलिस ने लोगों से शव की शिनाख्त कराने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई भी शव को पहचान नहीं सका.

थानाप्रभारी ने जानकारी दे कर उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया. मौके की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने शव को मोर्चरी भिजवा दिया.

अब पुलिस के सामने सब से बड़ा प्रश्न युवक की शिनाख्त का था. पुलिस की कोशिश थी कि जल्दी से शव की शिनाख्त हो जाए, ताकि हत्या का राज उजागर हो सके और हत्यारे पकड़े जा सकें.

पुलिस ने लव लैटर पर अंकित मोबाइल नंबर की कालडिटेल्स निकलवाई. इस में कई नंबर मिले. एक नंबर आगरा निवासी मृतक के चाचा भोला का व एक नंबर जीजा अखिलेश कुमार का भी था. 23 नवंबर को पुलिस ने अखिलेश को फोन किया. इस संबंध में पूछताछ करने के बाद उन्हें थाने बुला लिया.

पुलिस ने उन्हें एक युवक का शव यमुना किनारे मिलने की जानकारी दी. बाद में परिजनों ने मोर्चरी जा कर शव की पहचान शाहगंज के नगला मोहन निवासी 25 वर्षीय सनी के रूप में की.

शव की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने 24 नवंबर को शव का पोस्टमार्टम कराया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटना व चोटों से होना आया था. इस से स्पष्ट हो गया कि हत्यारों ने युवक के साथ मारपीट कर गला दबा कर हत्या कर दी थी.

इस के बाद सनी के पिता मुकेश ने एत्माद्दौला थाने में 27 नवंबर को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बेटे को रेखा नाम की एक महिला ने फोन कर पार्टी के बहाने बुलाया था.

इस के बाद अपने साथी के साथ मिल कर हत्या कर दी. साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ला कर यमुना किनारे फेंक दिया. इस संबंध में हत्या, साक्ष्य मिटाने और एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस इस हत्याकांड में साक्ष्य जुटाने के काम में लग गई. पता चला कि मृतक सनी के पिता मुकेश अपनी पत्नी के साथ हरियाणा में रहते हैं. आगरा में उन के बेटे सनी और विक्की रहते थे. सनी के लापता होने की जानकारी मिलने पर वे आगरा आ गए थे.

पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 21 नवंबर की सुबह 11 बजे जब सनी अपने चाचा भोला के साथ बैठा था. तभी उस के मोबाइल पर बोदला निवासी रेखा ने काल की और पार्टी के लिए बोदला बुलाया था.

रेखा ने सनी को अपने साथ मुकेश जाट के भी होने की जानकारी दी थी. फोन आने के बाद सनी चला गया था.

21 नवंबर की शाम 6 बजे सनी ने मुकेश जाट के मोबाइल से अपनी मां से बात की थी. उस ने मां से हालचाल पूछने के बाद बताया था कि वह मुकेश और रेखा के साथ है. कुछ देर में घर आ जाएगा.

उस ने मां को बताया कि उस के मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है. आप भाई व चाचा को यह बात बता देना. दूसरे दिन दोपहर में रेखा सनी के घर पहुंची. उस ने भोला की पत्नी यानी सनी की चाची को सनी का कीपैड वाला मोबाइल दिया.

उस मोबाइल में सिम और चिप नहीं थी. रेखा ने बताया कि सनी सिमकार्ड निकाल कर फैक्ट्री चला गया है. उस से यह मोबाइल घर पर देने को कहा.

जब सनी रात में घर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई. इस पर परिजनों ने फैक्ट्री जा कर सनी को तलाशा. लेकिन उन्हें सनी नहीं मिला.

पुलिस ने पूछताछ करने के साथसाथ अपने तौर पर मामले की छानबीन शुरू की. पुलिस को कुछ लोगों ने बताया कि सनी को मुकेश जाट, रेखा व 2 अन्य युवकों के साथ घटना की शाम आटो में बैठे देखा था. इस पर उन्हें टोका भी था. तब मुकेश ने कहा था कि पार्टी करने जा रहे हैं. इस के बाद वे लोग आटो में बैठ कर चले गए थे.

शक की सुई रेखा पर आ कर टिक गई. फोन लोकेशन के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की. 3 दिसंबर को पुलिस ने टेढ़ी बगिया स्थित अंबेडकर पार्क से महिला रेखा को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उस के पास से एक मोबाइल बरामद किया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट आई.

थाने में उस से कड़ाई से पूछताछ की गई. तब रेखा ने सनी की हत्या का जुर्म कुबूल करते हुए हत्या में शामिल 3 अन्य लोगों के नाम बताए. इन में रेखा का प्रेमी मुकेश जाट के अलावा उस के 2 दोस्त विशाल व पवन राठौर भी शामिल थे.

तब इन में से एक आरोपी विशाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस तरह निकली—

मुकेश जाट मूलरूप से भड़ाका, हाथरस का निवासी है. उस के मातापिता की मौत हो चुकी है. उस की एक बहन है. वह आगरा में नगला जगजीवनराम में रहता है. यहां आ कर आटो चलाने का काम करने लगा. उस की दोस्ती एक साल पहले बोदला निवासी रेखा से हुई थी.

हुआ यह कि रेखा एक जूता फैक्ट्री में काम करती थी. मुकेश अपने आटो से रेखा को उस के घर से फैक्ट्री लाने ले जाने का काम करता था. इस के चलते दोनों में दोस्ती हो गई. जो धीरेधीरे प्यार में बदल गई.

रेखा के पहले पति की मौत हो चुकी थी. पहले पति से 11 साल का एक बेटा है. पहले पति की मौत के बाद रेखा की दूसरी शादी रमेश से हो गई थी. रेखा अपने बेटे के साथ रमेश के साथ रहने लगी.

रेखा मनमौजी थी. वह रमेश का कहना भी नहीं मानती थी. उस के मन में जो आता, वह करती. रमेश रेखा की आदतों से परेशान रहता था. लेकिन चाह कर भी उस से कुछ कह नहीं पाता था.

जिस जूता फैक्ट्री में रेखा काम करती थी, उसी में सनी भी दूसरे विभाग में काम करता था. एक महीने पहले सनी की नजर रेखा पर पड़ गई. चंचल और सुंदर रेखा सनी को भा गई. दोनों एक ही फैक्ट्री में काम करते थे. इसी दौरान दोनों में बातचीत हो जाती थी. इस के बाद दोनों की दोस्ती हो गई.

दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. दोनों घंटों मोबाइल पर एकदूसरे से अपने दिल की बात करने लगे.

घटना से कुछ दिन पहले रेखा के प्रेमी मुकेश जाट ने अपनी प्रेमिका को फोन पर हंसहंस कर बात करते देख लिया. उस के तनबदन में आग लग गई. उस की प्रेमिका इतना हंसहंस कर किस के साथ बात कर रही है.

उस ने रेखा से इस बारे में जब पूछा तो रेखा अंदर ही अंदर डर गई. बात घुमाते हुए उस ने बताया कि उसी की फैक्ट्री में काम करने वाला सनी था, जो उसे बारबार फोन करता है. वह उस से दोस्ती करना चाहता है.

मुकेश रेखा से बहुत प्यार करता था. उस पर पैसा भी बहुत खर्च करता था. उस की हर फरमाइश पूरी करता था. उसे अपनी प्रेमिका के किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते देखना बहुत नागवार गुजरा. उस ने रेखा से कहा कि वह सनी से बात करना बंद कर दे. रेखा ने वायदा किया कि वह सनी से बात नहीं करेगी.

कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा, रेखा ने सनी से बात नहीं की. आग दोनों के दिलों में लगी हुई थी. रेखा और सनी आपस में फिर मिलने और बात करने लगे.

इस पर मुकेश ने रेखा के जरिए सनी को पार्टी के बहाने बोदला बुलवाया. मुकेश ने सनी को रेखा से अपने संबंध की जानकारी दी. मुकेश ने सनी से रेखा से दूर रहने की हिदायत दी. इस पर सनी ने रेखा को छोड़ने से मना कर दिया. इस बात को ले कर दोनों में वादविवाद भी हुआ.

मुकेश को यह बात बहुत बुरी लगी. लेकिन उस ने यह बात जाहिर नहीं होने दी. उस ने मन ही मन सनी को सबक सिखाने का फैसला ले लिया. इस बीच मुकेश ने अपने दोस्त आटो चालक विशाल और पवन राठौर को फोन कर के वहां बुला लिया.

मुकेश ने सनी की रेखा से दोस्ती कराने व इस खुशी में दारू पार्टी देने का झांसा देते हुए अपने दोस्तों के साथ आटो से गोकुल नगर ले गया. वहां सभी ने बैठ कर शराब पी.

सनी को जम कर शराब पिलाई गई. उस समय रात घिर आई थी. इस के बाद आटो से उसे यमुना किनारे सुनसान रास्ते पर ले गए, सनी को ज्यादा नशा हो गया था. इस का फायदा उठाते हुए सनी को आटो से उतार कर मुकेश व उस के दोस्तों ने लातघूंसों से पीटा फिर उस की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश यमुना किनारे फेंक कर सभी लोग फरार हो गए.

सनी की हत्या के आरोप में रेखा व विशाल को 3 दिसंबर, 2021 को जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच शुरू कर दी और अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई.

सनी की हत्या को एक महीना बीत गया था. लेकिन पुलिस के हाथ खाली थे. जबकि नामजद मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट व उस के साथी पवन राठौर को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी थी. इस से मृतक के परिजनों में रोष बढ़ता जा रहा था.

पुलिस ने अन्य हत्यारोपियों मुकेश जाट व पवन राठौर की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश भी दी. लेकिन मुकेश का कोई सुराग नहीं लग रहा था. इस पर पुलिस ने उसपर 25 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया.

25 दिसंबर, 2021 की रात लगभग ढाई बजे पुलिस टेढ़ी बगिया पर चैकिंग कर रही थी. तभी पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली कि सनी हत्याकांड को अंजाम देने वाला मुख्य हत्यारोपी मुकेश जाट शोभा नगर से अपने घर जगजीवनराम नगर बाइक से जा रहा है. इस पर एसओजी टीम को बुला लिया गया.

कुछ देर बाद मुकेश जैसे ही वहां से गुजरा पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन उस ने बाइक की स्पीड बढ़ा दी.

कच्चे रास्ते पर बाइक फिसल गई. पुलिस के घेरने पर मुकेश फायरिंग करने लगा. जवाबी काररवाई में उस के पैर में गोली लगने पर वह घायल हो गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस के कब्जे से तमंचा, 3 कारतूस, 2 खोखा व बाइक बरामद कर ली. घायल मुकेश को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भरती कराया गया.

एसपी (सिटी) विकास कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस में ईनामी मुख्य हत्यारोपी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. पता चला कि मुकेश जाट शातिर वाहन चोर है. उस पर विभिन्न थानों में 15 मुकदमे दर्ज हैं. थाना न्यू आगरा में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में मुकेश वांछित था और 3 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था. उस पर 25 हजार का ईनाम भी घोषित था.

पुलिस पूछताछ में मुकेश जाट ने अपने साथियों के साथ सनी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने बताया कि उस की दोस्ती एक साल से रेखा से थी. बाद में सनी बीच में आ गया.

वह रेखा से दोस्ती करना चाहता था. मुकेश को यह दोस्ती पसंद नहीं थी. उस ने सनी को रेखा से दूर रहने की हिदायत दी लेकिन वह नहीं माना. इस पर अपने 2 दोस्तों की मदद से उस की हत्या कर दी.

फरारी के दौरान मुकेश ने अपने साथी आशीष प्रजापति के साथ एग्रीकल्चर फैक्ट्री फाउंड्री नगर से 16 दिसंबर को बाइक चोरी कर ली थी. रुपए खत्म होने पर वह अपने घर जा रहा था.

एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने सनी हत्याकांड का परदाफाश करते हुए बताया कि हत्याकांड में शामिल रेखा, पवन व मुकेश जाट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि मुकेश जाट के साथी पवन राठौर ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है.

इस प्रकार सनी हत्याकांड के सभी आरोपी जेल जा चुके हैं. सनी अविवाहित था. रेखा चंचल तितली की तरह थी. एक फूल से पराग लेने के बाद दूसरे फूल पर मंडराती थी. इसी के चलते उस ने अपने मोहपाश में सनी को बांध लिया था.

सनी को उस की फितरत की जानकारी नहीं थी. यदि वह दूसरे की प्रेमिका से दोस्ती के चक्कर में पड़ कर उस पर अपना अधिकार नहीं जमाता तो सनी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती.  द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एक लड़के ने मेरी मांग में सिंदूर भरा पर घर वालों के सामने अपनाने से इनकार कर दिय, क्या करूं?

सवाल
मेरी उम्र 19 वर्ष है. मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. उस ने मेरी मांग में सिंदूर भी भर दिया है. मैं भी उसे अपना पति मानने लगी हूं, पर उस ने अपने घर वालों के सामने मुझे अपनाने से इनकार कर दिया है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
आप इमोशनल बन कर इस प्यार को आगे न बढ़ाएं. मांग में सिंदूर भरना, मंदिर में शादी करना. ठीक उसी तरह है जैसे प्यार के वादे करना. असली बात तो मन की है. अगर मन में चाहत है और वह आप को प्यार करता है तो सिंदूर या फिर अन्य किसी तरह की फौरमैलिटी की जरूरत नहीं. वह अपने घर वालों के सामने आप को अपनाने की हिम्मत नहीं कर रहा है, इसलिए आप उस से दूरी बना लें तो ही ठीक है वरना वह आगे भी आप का इमोशनली शोषण करता रहेगा.

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हाय मैं पेट से तो नहीं हो गई..?

44 साला उषा अपनी जवान होती बेटी निशा को देख कर सिहर उठती हैं कि कहीं उसे भी उन की तरह शादी के पहले इश्क के चक्कर में पड़ कर पेट से हो कर उन हालात से न गुजरना पडे़ जिन से वे कई साल पहले हो कर गुजरी थीं.

हुआ यों था कि 20 साल पहले बीए करने के बाद उषा को अपने आशिक राकेश से बच्चा ठहर गया था. खुद के पेट से होने का पता उन्हें 4 महीने बाद चला था. वह भी एक सहेली के टोकने पर जिस से उन्होंने कहा था कि 4 महीने से पीरियड नहीं आ रहे हैं और शरीर में थकान व सुस्ती भी रहती है.

सहेली तुरंत भांप गई और राकेश से उन की हमबिस्तरी के बारे में पूछा तो उन्होंने सचसच बता दिया कि हां, कई बार बगैर कंडोम के भी संबंध बने थे.

सहेली ने एक नर्सिंगहोम जा कर उषा के पेशाब की जांच कराई तो रिजल्ट पौजिटिव आया. इस पर उषा के पैरों तले जमीन खिसकने लगी. शुक्र इस बात का था कि घर में किसी को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ था.

राकेश को जब उन्होंने यह बात बताई तो उस की भी हालत खस्ता हो गई. वह उषा से सच्चा प्यार तो करता था पर 2 बड़ी बहनों की शादी हो जाने तक भाग कर शादी कर लेने का जोखिम नहीं उठा सकता था. इस पर उन दोनों ने तय किया कि सभी झंझटों से बचने के लिए बेहतर है कि बच्चा गिरा दिया जाए.

पर यह कोई हंसीखेल वाली बात नहीं थी. अपने छोटे से शहर में तो जानपहचान के चलते वे बच्चा गिराने की बात सोच ही नहीं सकते थे, इसलिए राकेश नजदीक के बड़े शहर में गया और कई नर्सिंगहोम में बच्चा गिराने की बात कही लेकिन इस में दिक्कत यह थी कि बगैर लड़की की जांच किए कोई इस के लिए तैयार नहीं था.

उषा की दिक्कत यह थी कि उन्हें किसी बड़ी वजह के बिना शहर से बाहर जाने की इजाजत घर वालों से नहीं मिलने वाली थी.

इस दफा भी सहेली ही काम आई जो उषा के घर बहाना बना कर उन्हें इंदौर ले गई और जैसेतैसे एक नर्सिंगहोम वाले को तैयार किया. 3 दिन अस्पताल में रह कर उन्हें इस मुसीबत से छुटकारा मिला मगर इस दौरान जो तकलीफें उन्होंने उठाईं, वे आज तक जेहन में जिंदा हैं.

बाद में उन्होंने घर वालों के कहने पर चुपचाप सुरेंद्र से शादी कर ली और राकेश को हमेशा के लिए भूल गईं.

और जो नहीं भूल पाईं वह सब उषा अपनी बेटी निशा को बता देना चाहती हैं कि अगर प्यार वगैरह के चक्कर में पड़ जाओ तो पेट से होने से कैसे बचना है, जिस से कोई उंगली न उठे.

इस तरह जानें

उषा का जमाना कुछ और था. तब आज जितनी सहूलियतें और साधन नहीं थे जिन से पेट से हो जाने का पता आसानी से चल सके और पता चल जाने पर बच्चा भी आसानी से गिरवाया जा सके.

आमतौर पर कम उम्र की लड़कियां नहीं जानती हैं कि पेट से हो जाने के लक्षण क्या होते हैं और इस से शरीर में क्याक्या बदलाव आते हैं.

पेट से हो जाने का सब से अहम लक्षण है पीरियड का न आना. अगर आशिक से हमबिस्तरी की है और पीरियड आना बंद हो गया है तो शक की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती कि नतीजा आ गया है.

इस नतीजे की तसल्ली के लिए आजकल तरहतरह की प्रैग्नैंसी टैस्ट किट मैडिकल स्टोर पर मिल जाती हैं जिन से मिनटों में हकीकत का पता चल जाता है. इस किट को खरीदने के लिए किसी डाक्टर के परचे की जरूरत नहीं पड़ती है.

किट पर दी गई हिदायतों के मुताबिक जांच करने पर अगर रिजल्ट पौजिटिव आता है तो बगैर देर किए किसी नर्सिंगहोम का रुख करना चाहिए.

आजकल नर्सिंगहोम वाले फोटो, आईडी और उम्र साबित करने वाला सुबूत मांगते हैं जिन्हें साथ ले जाना चाहिए. इस में किसी का डर या झिझक की बात नहीं है क्योंकि बच्चा गिराने की बात प्राइवेट रखी जाती है.

इस के अलावा कुछ और लक्षण भी दिखते हैं, जैसे निप्पल सख्त हो जाना, बारबार पेशाब लगना, शरीर में सुस्ती और थकान के अलावा लगातार सिरदर्द और सुबह उठने पर थकान महसूस होना. सुबह उठने के बाद जी मिचलाना और उबकाई आना भी खास लक्षण हैं. पर ऐसा सभी लड़कियों के साथ हो, यह जरूरी नहीं.

हमारे समाज में कुंआरी मां बनना आज भी अच्छा नहीं माना जाता है और कई वजहों के चलते यह ठीक भी नहीं है इसलिए संबंध बनाते वक्त एहतियात बरतना चाहिए. पार्टनर को कंडोम पहनने के लिए मजबूर करना चाहिए या खुद किसी लेडी डाक्टर से मिल कर औरल पिल्स ले लेनी चाहिए. इन्हें खरीदने में शर्म या देर नहीं करनी चाहिए. वजह, पेट से हो जाने पर मुसीबतें कई गुना बढ़ जाती हैं.

महापुरुष: कौनसा था एहसान

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भोजपुरी सिनेमा में गदराए बदन वाली हीरोइनों का जमाना नहीं रहा- सुनील मांझी

बौलीवुड और दक्षिण भारत की फिल्में अब सिनेमाघरों के अलावा डिजिटल प्लेटफार्म पर भी खूब रिलीज की जा रही हैं. यह बदलाव भोजपुरी सिनेमा में कब तक आएगा?

भोजपुरी का नया दौर साल 2000 के बाद शुरू हुआ, जबकि बौलीवुड और दक्षिण का सिनेमा पहले से मजबूत रहा है, इसलिए दूसरी इंडस्ट्री ने नई चीजों को जल्दी स्वीकार किया. भोजपुरी सिनेमा भी धीरेधीरे बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. वैसे, अब भोजपुरी फिल्में यूट्यूब पर खूब रिलीज की जाने लगी हैं.

ज्यादातर फिल्मों की कहानियां दूसरे की लिखी होती हैं, फिर उस कहानी को अपने मुताबिक ढाल कर एक डायरैक्टर के तौर पर क्याक्या तैयारियां करनी पड़ती हैं?

दूसरे की लिखी कहानियों पर एक डायरैक्टर के तौर पर डायरैक्शन के लिए खुद को तैयार करने के लिए सीन में खुद को ढालना पड़ता है. जो बाद में ऐक्टरों को उन्हीं हालात में ऐक्टिंग करने लिए तैयार कर लेता है.

जब ऐक्टर एक ही सीन के लिए कई बार रीटेक करते हैं, तो क्या आप को गुस्सा आता है?

सीन में कई बार रीटेक होने का मतलब यह नहीं है कि सामने वाले को ऐक्टिंग नहीं आती है, बल्कि वह जितना बेहतर सीन दे पाए, उस के लिए रीटेक करवाना पड़ता है. ऐसे में गुस्सा आने का सवाल ही नहीं है.

कुछ साल पहले तक भोजपुरी सिनेमा में गदराए बदन वाली हीरोइनों को ज्यादा पसंद किया जाता था, पर आज स्लिम और फिट हीरोइनें फिल्मों में ज्यादा नजर आती हैं. यह बदलाव कैसे आया?

दर्शकों का मिजाज समय के हिसाब से बदलता रहता है. भोजपुरी का दर्शक भी अब दूसरी भाषा की फिल्मों की हीरोइनों से भोजपुरी हीरोइनों की तुलना करने लगा है. ऐसे में वह भी स्लिम और फिट हीरोइनों को फिल्मों में देखना चाहता है.

भोजपुरी फिल्मों में अकसर आइटम नंबर होते ही हैं. क्या यह दर्शकों की मांग है या फिल्मों के कामयाब होने के लिए ऐसा किया जाता है?

भोजपुरी फिल्मों में आइटम नंबर होना पहले की फिल्मों के लिए कामयाबी का पैमाना माना जा सकता है, पर अब बन रही फिल्मों में आइटम नंबर का होना फिल्म की कहानी से जुड़ा है, न कि दर्शकों की मांग पर.

टैस्टेड ओके- भाग 1: क्या कैरेक्टर टेस्ट में पास हुए विशाल और संजय

सिमरन और रंजना पूरे 3 साल बाद मिल रही थीं. बीयू से एमबीए फाइनैंस करने के बाद गुरुग्राम में अपना कैरियर सैटल करने में वे दोनों इतना बिजी रहीं कि मिलने की फुरसत ही नहीं मिली.

अब जा कर वे सैटल हुई थीं. सिमरन टैक्नोसौल्यूशन कंपनी में मैनेजर थी, जबकि रंजना मल्टी ब्रांड रिटेल चेन की मार्केटिंग मैनेजर थी.

सिमरन के बियर के गिलास को रंजना ने मना किया, तो सिमरन ने हैरानी से उसे घूरते हुए कहा, ‘‘क्या बकवास है यार… एटीट्यूड मत दिखा… गोयल सर की बर्थडे पार्टी में मैं भी थी. पता है कि तू कितनी बड़ी वाली पियक्कड़ है.’’

रंजना ने हंसते हुए गिलास थाम लिया और बोली, ‘‘वैसे भी बियर थोड़ी न शराब होती है… और सुना सिमरन, शादी, पति, बच्चे का क्या सीन चल रहा है?’’

सिमरन हंसते हुए बोली, ‘‘लिवइन रिलेशनशिप में हूं यार अपने असिस्टैंट के साथ. उम्र में 2 साल छोटा है मुझ से, डाटा ऐनालिस्ट है.’’

‘‘उम्र में 2 साल छोटा और असिस्टैंट,’’ रंजना ने यह कहते हुए सिमरन को बिग चियर्स किया.

रंजना आगे बोली, ‘‘वाह क्या बात है. तुम्हारे शौक ही निराले हैं. यूनिवर्सिटी में भी तुम्हारा जूनियर में ही इंटरैस्ट रहता था. बीकौम औनर्स का अनिकेत याद है, जिस के साथ तुम घूमने चली गई थीं और रात देर होने पर मैटर्न ने जम कर तुम्हारी बैंड बजाई थी?’’

सिमरन ने कहा, ‘‘याद है. वे भी क्या दिन थे यार… टैलीविजन बड़ा हो या छोटा, उन का रिमोट सेम साइज का होता है.’’

इस बात पर उन दोनों ने ठहाके मारते हुए एकदूसरे को ताली दी.

सिमरन ने बात को आगे बढ़ाया, ‘‘डिसाइड नहीं कर पा रही कि लिवइन रिलेशनशिप के साथ शादी करनी चाहिए या नहीं?’’

रंजना ने ड्रिंक को बीच में रोकते हुए कहा, ‘‘सेम प्रौब्लम मेरे साथ भी है. मैं एक पेंटर के साथ कोर्ट में शादी की अर्जी दाखिल कर चुकी हूं. हम साथ में रहते हैं, लेकिन अब अपने परिवार से उसे मिलाने से पहले एक बार उस के कमिटमैंट को टैस्ट करना चाहती हूं.’’

सिमरन बोली, ‘‘वाह, क्या बात है. क्यों न हम एकदूसरे के होने वाले पतियों को टैस्ट करें…’’

रंजना ने हैरान हो कर पूछा, ‘‘मतलब…?’’

सिमरन बोली, ‘‘हम एकदूसरे के पतियों पर लाइन मारते हैं. अगर वे फिसल गए तो हम शादी से मना कर देंगे.’’

इस पर रंजना बोली, ‘‘और अगर हमें एकदूसरे के प्रेमियों से सच्चा वाला प्यार हो गया तो…?’’

सिमरन ने कहा, ‘‘बेवकूफी भरी बातें मत करो. हम कारपोरेट हैं, हमारी कोई बात सच्ची नहीं होती. सब बिजनैस है. फायदे का सौदा जहां हो. वैसे भी सच्चा प्यार सिर्फ किस्सेकहानियों में पाया जाता है. हमारे पैसों पर ऐश करने के लिए, हमारे लग्जरी जिस्म के साथ संबंध बनाने के लिए कोई भी हमें धोखा दे सकता है.’’

रंजना बोली, ‘‘बात तो तेरी सही है. गलत आदमी से शादी हो गई, तो जिंदगी बरबाद समझो अपनी.’’

सिमरन ने कहा, ‘‘ओके डन. करते हैं ऐसा. अगर वे फिसल गए तो हमें मजा मिलेगा और नहीं फिसले तो हमें जीजाजी मिलेंगे.’’

इस बात पर वे दोनों एक बार फिर ठहाके मार कर हंस दीं.

दूसरे दिन तय योजना के मुताबिक रंजना सिमरन के औफिस में बहुत ही टाइट जींस और ढीली शर्ट पहन कर आई थी.

रंजना के बड़ेबड़े नाखून पर नेल्स आर्ट को देख कर सिमरन ने आंख मारते हुए कहा, ‘‘वाहवाह, लगता है अब तुम्हें मास्टरबेट करने की जरूरत नहीं पड़ती है.’’

सिमरन और रंजना बीयू के समता होस्टल में रूममेट रही थीं और एकदूसरे के शौक अच्छी तरह से जानती थीं.

सिमरन ने घंटी बजा कर अपने लिवइन पार्टनर विशाल को अंदर बुलाया और आदेश दिया कि आप मैडम के साथ चले जाइए और इन को रिटेल स्टोर के डैटा को फिल्टर करने में मदद कीजिए.

रंजना अपनी केटीएम मोटरसाइकिल से आई थी. पार्किंग में पहुंच कर उस ने विशाल से मोटरसाइकिल चलाने को कहा.

डीपीजी कालेज रोड पर बनी सिमरन की कंपनी से होंडा चौक, फिर सुभाष चौक होते हुए आर्चीव ड्राइव पर रंजना का फ्लैट 12 किलोमीटर दूर था. केटीएम मोटरसाइकिल को बनाया ही इसलिए गया है कि राइड के दौरान भी प्रेमीप्रेमिका एकदूसरे से अच्छी तरह चिपके रहें.

रंजना कुछ ज्यादा ही खुला बरताव कर रही थी. उस ने अपनी जांघों को विशाल की जांघों से सटा रखा था. उस ने विशाल की पीठ से अपने उभारों को तकरीबन आधा दबा रखा था.

विशाल मोटरसाइकिल को 40 से ज्यादा स्पीड में नहीं चला रहा था, फिर भी रंजना ने तेज भगाने और डर लगने का बहाना बना कर अपने दोनों हाथों से क्रौस बना कर विशाल को आगे की ओर से जकड़ लिया था और अपनी हथेलियों से विशाल के चौड़े सीने को सहला रही थी.

ड्राइव के दौरान ही रंजना ने विशाल की जांघों के बीच अपने काम की तकरीबन हर एक चीज के आकारप्रकार का अंदाजा ले लिया. पैर की पिंडलियों से ले कर कंधों तक रंजना विशाल से इस कदर चिपकी हुई थी कि उन के बीच से हवा भी नहीं गुजर सकती थी.

पूरे रास्ते रंजना को बहुत मजा आया. इस तरीके का करंट उस ने संजय के साथ चिपकते हुए आज तक महसूस नहीं किया था.

महिंद्रा ल्यूमिनेयर के पार्किंग की मंद रोशनी में रंजना ने ध्यान से विशाल को देखा. लिफ्ट में विशाल ने शरमा कर आंखें नीची कर ली थीं, लेकिन रंजना उसे ही ताड़ रही थी. रंजना को सिमरन की किस्मत से जलन हो रही थी.

फ्लैट में पहुंचते ही रंजना विशाल को लिविंग रूम में बैठा कर बाथरूम चली गई. वापस आई तो जींस की जगह तौलिया लपेटे थी. विशाल कंप्यूटर टेबल पर रखा संजय और रंजना का फोटो देख रहा था.

विशाल ने पूछा, ‘‘ये आप के पति हैं?’’

रंजना बोली, ‘‘उन की चिंता छोड़ दो, तुम उन से नहीं मुझ से मिलने आए हो,’’ यह कह कर रंजना ने अपनी कमर पर लिपटे तौलिए को उतार कर फोटो को उस से ढक दिया.

रंजना के गोल, गोरे और चिकने कूल्हे और मांसल जांघें दिखाई देने लगीं, शर्ट के बीच से उस की गुलाबी डोटेड पैंटी भी साफ दिखाई दे रही थी.

महापुरुष- भाग 3: कौनसा था एहसान

रामकुमार खुशीखुशी घर के अंदर गए. लगता था, जैसे वहां खुशी की लहर दौड़ गई थी. कुछ ही देर में वे अपनी पत्नी के साथ उमा का फोटो ले कर आ गए. उमा तो लाजवश कमरे में नहीं आई. उस की मां ने एक डब्बे में कुछ मिठाई गौतम के लिए रख दी. पतिपत्नी अत्यंत स्नेह भरी नजरों से गौतम को देख रहे थे.

अपने कमरे में पहुंचते ही गौतम ने न्यूयार्क के उस विश्वविद्यालय को प्रवेशपत्र और आर्थिक सहायता के लिए फार्म भेजने के लिए लिखा. दिल्ली जाने से पहले वह एक बार और उमा के घर गया. कुछ समय के लिए उन लोगों ने गौतम और उमा को कमरे में अकेला छोड़ दिया था, परंतु दोनों ही शरमाते रहे.

गौतम जब दिल्ली से वापस आया तो रामकुमार ने उसे विभाग में पहुंचते ही अपने कमरे में बुलाया. गौतम ने उन्हें बताया कि मातापिता दोनों ही राजी थे, इस रिश्ते के लिए. परंतु छोटी बहन की शादी से पहले इस बारे में कुछ भी जिक्र नहीं करना चाहते थे.

गौतम के मातापिता की रजामंदी के बाद तो गौतम का उमा के घर आनाजाना और भी बढ़ गया. उस ने जब एक दिन उमा से सिनेमा चलने के लिए कहा तो वह टाल गई. इन्हीं दिनों न्यूयार्क से फार्म आ गया, जो उस ने तुरंत भर कर भेज दिया. रामकुमार ने अपने दोस्त को न्यूयार्क पत्र लिखा और गौतम की अत्यधिक तारीफ और सिफारिश की.

3 महीने प्रतीक्षा करने के पश्चात वह पत्र न्यूयार्क से आया, जिस की गौतम कल्पना किया करता था. उस को पीएच.डी. में प्रवेश और समुचित आर्थिक सहायता मिल गई थी. वह रामकुमार का आभारी था. उन की सिफारिश के बिना उस को यह आर्थिक सहायता कभी न मिल पाती.

गौतम की छोटी बहन का रिश्ता बनारस में हो गया था. शादी 5 महीने बाद तय हुई. गौतम ने उमा को समझाया कि बस 1 साल की ही तो बात है. अगले साल वह शादी करने भारत आएगा और उस को दुलहन बना कर ले जाएगा.

कुछ ही महीने में गौतम न्यूयार्क आ गया. यहां उसे वह विश्वविद्यालय ज्यादा अच्छा न लगा. इधरउधर दौड़धूप कर के उसे न्यूयार्क में ही दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश व आर्थिक सहायता मिल गई.

उमा के 2-3 पत्र आए थे, पर गौतम व्यस्तता के कारण उत्तर भी न दे पाया. जब पिताजी का पत्र आया तो उमा का चेहरा उस की आंखों के सामने नाचने लगा. पिताजी ने लिखा था कि रामकुमार दिल्ली किसी काम से आए थे तो उन से भी मिलने आ गए. पिताजी को समझ में नहीं आया कि उन की कौन सी बेटी की शादी बनारस में तय हुई थी.

उन्होंने लिखा था कि अपनी शादी का जिक्र करने के लिए उसे इतना शरमाने की क्या आवश्यकता थी.

गौतम ने पिताजी को लिख भेजा कि मैं उमा से शादी करने का कभी इच्छुक नहीं था. आप रामकुमार को साफसाफ लिख दें कि यह रिश्ता आप को बिलकुल भी मंजूर नहीं है. उन के यहां के किसी को भी अमेरिका में मुझ से पत्रव्यवहार करने की कोई आवश्यकता नहीं.

गौतम के पिताजी ने वही किया जो उन के पुत्र ने लिखा था. वे अपने बेटे की चाल समझ गए थे. वे बेचारे करते भी क्या.

उन का बेटा उन के हाथ से निकल चुका था. गौतम के पास उमा की तरफ से 2-3 पत्र और आए. एक पत्र रामकुमार का भी आया. उन पत्रों को बिना पढ़े ही उस ने फाड़ कर फेंक दिया था.

पीएच.डी. करने के बाद गौतम शादी करवाने भारत गया और एक बहुत ही सुंदर लड़की को पत्नी के रूप में पा कर अपना जीवन सफल समझने लगा. उस के बाद उस ने शायद ही कभी रामकुमार और उमा के बारे में सोचा हो. उमा का तो शायद खयाल कभी आया भी हो, पर उस की याद को अतीत के गहरे गर्त में ही दफना देना उस ने उचित समझा था.

उस दिन रवि ने गौतम की पुरानी स्मृतियों को झकझोर दिया था. प्रोफेसर गौतम सारी रात उमा के बारे में सोचते रहे कि उस बेचारी ने उन का क्या बिगाड़ा था. रामकुमार के एहसान का उस ने कैसे बदला चुकाया था. इन्हीं सब बातों में उलझे, प्रोफेसर को नींद ने आ घेरा.

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ठक…ठक की आवाज के साथ विभाग की सचिव सिसिल 9 बजे प्रोफेसर के कमरे में ही आई तो उन की निंद्रा टूटी और वे अतीत से निकल कर वर्तमान में आ गए. प्रोफेसर ने उस को रवि के फ्लैट का फोन नंबर पता करने को कहा.

कुछ ही मिनटों बाद सिसिल ने उन्हें रवि का फोन नंबर ला कर दिया. प्रोफेसर ने रवि को फोन मिलाया. सवेरेसवेरे प्रोफेसर का फोन पा कर रवि चौंक गया, ‘‘मैं तुम्हें इसलिए फोन कर रहा हूं कि तुम यहां पर पीएच.डी. के लिए आर्थिक सहायता की चिंता मत करो. मैं इस विश्वविद्यालय में ही भरसक कोशिश कर के तुम्हें सहायता दिलवा दूंगा.’’

रवि को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था. वह धीरे से बोला, ‘‘धन्यवाद… बहुतबहुत धन्यवाद.’’

‘‘बरसों पहले तुम्हारे नानाजी ने मुझ पर बहुत उपकार किया था. उस का बदला तो मैं इस जीवन में कभी नहीं चुका पाऊंगा पर उस उपकार का बोझ भी इस संसार से नहीं ले जा पाऊंगा. तुम्हारी कुछ मदद कर के मेरा कुछ बोझ हलका हो जाएगा,’’ कहने के बाद प्रोफेसर गौतम ने फोन बंद कर दिया.

रवि कुछ देर तक रिसीवर थामे रहा. फिर पेन और कागज निकाल कर अपनी मां को पत्र लिखने लगा.

आदरणीय माताजी,

आप से कभी सुना था कि इस संसार में महापुरुष भी होते हैं परंतु मुझे विश्वास नहीं होता था.

लेकिन अब मुझे यकीन हो गया है कि दूसरों की निस्वार्थ सहायता करने वाले महापुरुष अब भी इस दुनिया में मौजूद हैं. मेरे लिए प्रोफेसर गौतम एक ऐसे ही महापुरुष की तरह हैं. उन्होंने मुझे आर्थिक सहायता दिलवाने का पूरापूरा विश्वास दिलाया है.

प्रोफेसर गौतम बरसों पहले कानपुर में नानाजी के विभाग में ही काम करते थे. उन दिनों कभी शायद आप की भी उन से मुलाकात हुई होगी…

आपका,

रवि

नौकर बीवी- भाग 3: शादी के बाद शीला के साथ क्या हुआ?

एक दिन रमेश की मां ने शांता को किसी बात पर मारने की कोशिश की थी, तो बहादुरी कर उसी पर चढ़ बैठी. शांता ने रमेश से शिकायत की, तो रमेश ने भी उसे मारना चाहा. शांता ने डंडा उठा कर उसे ही पीट डाला.

शांता ने गुस्से में आ कर कपड़ों पर मिट्टी का तेल छिड़क कर कमरे में आग लगा दी. मामला पुलिस में गया. उस दिन दारोगा गांव में आए. उन्हें घटना का पता चला, तो उन्होंने शांता को बुला कर सब बातें पूछ लीं.

शांता ने कई झूठी बातें गढ़ दीं. यह भी कह दिया कि रमेश और उस की मां उस से धंधा कराते हैं. उस की बातें सुन कर उन्होंने रमेश और उस की मां पर मुकदमा चलाने की धमकी दी, पर कुछ लेदे कर मामला शांत हो गया.

उस दिन से शांता को किसी ने मारापीटा तो नहीं, पर उस के साथ अपनेपन का बरताव भी किसी ने नहीं किया. उस का मन घर की जेल से ऊबने लगा.

कुछ दिनों के बाद उस ने पड़ोस के एक लड़के, जो रमेश की मां के मायके का था, को रात में एक बहाने से कमरे में बुलाया और फिर जबरन उसे कपड़े उतार कर सोने को कहा.

शांता ने कहा कि वह सैक्स नहीं करेगा, तो उस पर रेप का चार्ज लगा देगी. शांता की उस से पट गई और वह राजी हो गया कि वह उसे इस घर से अपने साथ ले चलेगा.

4-5 रात के बाद शांता ने रमेश के घर का सारा कपड़ागहना एक गठरी में बांधा और वह उस लड़के के साथ उस की बाइक पर चली गई. वे लोग गांव से बाहर निकल कर थोड़ी दूर ही जा पाए थे कि सामने से कोई आता हुआ दिखाई दिया. वे दोनों एक पुरानी कोठरी में छिप गए, जो एक बाबा की मढ़ई थी. बाबा के कोविड से मरने के चलते वह बेकार पड़ी थी.

थोड़ी देर में दिन निकल आया और लोगों के आनेजाने की आहट आने लगी. शांता और उस के साथी ने कोठरी के किवाड़ बंद कर लिए और दिनभर वहीं रह कर रात को वहां से चलने का निश्चय किया.

इधर शांता के भाग जाने की बात सारे गांव में फैल गई. लोगों ने आसपास बहुत ढूंढ़ा, पर उस का कहीं कोई पता नहीं चला. लोगों की सलाह पर रमेश और उस के पिता ने शांता के भाग जाने और चोरी की रिपोर्ट थाने में लिखा दी.

दारोगाजी ने उन्हें खूब आड़े हाथों लिया, ‘‘खुद ही औरतों को खरीद कर लाते हैं, सताते हैं और भाग जाने पर रिपोर्ट लिखाने आते हैं. औरतों को घर से भगाओ तुम और उन्हें ढूंढ़ने का काम पुलिस करे.’’

रमेश और उस के पिता चुपचाप सब सुनते रहे. फिर हाथ जोड़ कर उन्होंने दारोगाजी से कहा, ‘‘अगर आप शांताको पकड़वा दें, तो हम आप को 10,000 रुपए भेंट देंगे.’’

सब को विश्वास हो गया था कि शांता अकेली नहीं गई है. वह उसी लड़के के साथ भागी है, जो रमेश की मां के मायके से आया था.

शांता और उस का साथी दिनभर कोठरी में मौज करते रहे. लड़का एक दिन खाना लाने गया, तो एक आदमी

ने उसे कोठरी में घुसते हुए देख लिया. वह सम?ा गया कि वह कौन हो सकता है. उस ने यह बात रमेश के घर जा कर कह दी.

रमेश के पिता ने बहुत से आदमियों को ले कर कोठरी घेर ली. भीतर से सांकल बंद थी. अंदर से शांता ने कहा, ‘‘हम इस तरह किवाड़ नहीं खोलेंगे. जब तक पुलिस नहीं आ जाती, तब तक किवाड़ नहीं खुलेंगे. शिकायत तो मैं बनाऊंगी कि तुम ने इस लड़के को मेरे साथ पैसे ले कर भेजा. तुम लोग मुझ से धंधा करवा रहे हो. सुबूत के तौर पर मेरे पास कंडोमों के पैकेट पड़े हैं. मैं तो अपना मैडिकल कराऊंगी.’’

मजबूर हो कर सब लोग सवेरे तक वहां बैठे रहे. पुलिस को खबर हो गई, तो दारोगाजी आ गए. तब शांता ने किवाड़ खोल कर कहा कि वह सब को जेल भेजेगी और उस घर में नहीं जाएगी.

दारोगा ने एक लाख रुपए ले कर मामला सुलटाया और रमेश को कहा कि इस लड़की को घर में ही रख और अपने मातापिता से अलग रह. अगर इसे सताया जाएगा, तो यह भाग जाएगी या केस कर देगी.

दारोगाजी ने रमेश के पिता से कहा, इसलिए शांता को सम?ाबु?ा कर घर भेज दिया गया.

अब रमेश अपने मातापिता से अलग शांता के साथ रहता है. अब वह ध्यान रखता है कि शांता को कोई परेशान न हो. अब वह ‘पैर काटने वाली जूती बदलने’ की बात भूल गया है. शायद अब वह पैर की जूती की कीमत सम?ा गया है. पहले वाली जूती उसे मुफ्त मिल गई थी, इसलिए उस ने उतार फेंकी थी. यह जूती बहुत कीमती है. यह चाहे जितना काटे, पैर से उतारी नहीं जा सकती.

शांता अब रमेश के होने या न होने पर चाहे जिसे बिस्तर पर सोने के लिए बुला लेती है. रमेश कुछ कहता है, तो वह कहती है, ‘‘मुझे तो मर्दों का स्वाद है. सतीसावित्री को तो तुम ने बिना तलाक दिए घर से निकाल रखा है. मैं ने तो यहां बीवी की नौकरी की है. तुम चाहे जो करो, मैं यहीं रहूंगी. यहीं खाऊंगी. यहीं मर्दों को लाऊंगी. हां,

तुम ने मुझे रखा है, तो तुम्हारा खयाल रखूंगी. बोलो, आज रात को खीर खाओगे या हलवा?’’

प्रेमी की खातिर पति को मौत का संदेश: भाग 2

नीलम ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘आ जाओ, मैं तो सुबह से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं.’’

वक्त फिर अपनी गति से आगे बढ़ने लगा. इस में हलचल तो उस समय मची जब रात में लगभग 9 बजे नीलम की मां ने लकी की मां यानी समधिन को फोन कर जमाई के कटला आने के बारे में पूछा. यह सुन कर लकी की मां चौंक गई क्योंकि बेटा तो शाम को ही घर से निकल गया था. और उसे अब तक कटला पहुंच जाना चाहिए था.

लेकिन बेटा अब तक कटला नहीं पहुचा था तो उन का दिल घबराने लगा. क्योंकि इस दौरान खुद नीलम ने भी अपनी सास से बात की और बताया कि लकी का फोन बंद आ रहा है, इसलिए उस से बात नहीं हो पा रही है.

यह सब बात जान कर घबराई मां ने अपने सब रिश्तेदारों को इस बात की सूचना दी, जिस से रात में ही लकी की खोजबीन शुरू हो गई. सुबह तक कोई सफलता नहीं मिलने पर परिजनों ने मेघनगर के टीआई संजय रावत से मिल कर उन्हें लकी के गायब होने की जानकारी देते हुए गुमशुदगी दर्ज करा दी.

इस बीच 5 जून, 2022 की दोपहर मेघनगर टीआई टी.एस. डाबर को थाने की सीमा में पिपलौदा बड़ागांव के जंगल में लकी पांचाल की सिर कुचली लाश मिलने की सूचना मिली. खबर लकी के घर वालों को मिली तो घर में कोहराम मच गया.

लकी के सिर पर गहरी चोट के निशान होने के अलावा उस के गले पर गहरा काला निशान भी था. जिस से पहली ही नजर में मामला हत्या का नजर आया. सूचना पा कर एसडीपीओ बबीता बामनिया और एसपी (झाबुआ) अरविंद तिवारी भी मौके पर पहुंच गए.

अगले दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या का मामला सामने आने पर मेघनगर थाने में हत्या का मामला दर्ज हो गया. मामला दर्ज होते ही एसपी अरविंद तिवारी ने एसडीपीओ बबीता बामनिया के नेतृत्व में एक टीम गठित की. टीम में टीआई (मेघनगर) टी.एस. डाबर, टीआई (थांदला), टीआई (कोतवाली) संजय रावत एवं टीआई (पेटलावद) को शामिल किया गया.

चूंकि पुलिस को पहले ही यह जानकारी मिल चुकी थी कि मृतक 4 जून की शाम को बाइक से गुजरात स्थित अपने ससुराल कटला जाने के लिए निकला था. मगर उस का शव जहां मिला था, वह रास्ता उस रास्ते से काफी दूर था.

मौके से मृतक की बाइक और मोबाइल भी गायब था. इसलिए पुलिस समझ गई कि लकी की हत्या में एक से अधिक हत्यारे शामिल हो सकते हैं.

पुलिस लकी के दोस्तों और दुश्मनों के अलावा पे्रम त्रिकोण की संभावना पर भी काम कर रही थी. दरअसल, लकी की शादी को केवल 4-5 महीने ही हुए थे. इसलिए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता था कि लकी की हत्या के पीछे स्वयं उस का या उस की पत्नी नीलम का पे्रम त्रिकोण हो.

इस रास्ते पर चल कर पुलिस को लकी के पे्रम प्रसंग की कोई जानकारी नहीं मिली, अलबत्ता उस की पत्नी नीलम के बारे में जरूर यह बात सामने आई कि शादी के पहले नीलम का गहरा पे्रम प्रसंग कटला में रहने वाले रोहित राजपूत के साथ था.

इस जानकारी के बाद रोहित की खोजखबर ली गई तो पता चला कि 2 जून, 2022 को रोहित की मां का देहांत हो जाने के कारण वह घर पर ही था.

पुलिस ने उस से पूछताछ की, जिस में उस ने नीलम से पे्रम प्रसंग के बजाए दोस्ती होने की बात स्वीकार की. लेकिन उस का कहना था कि नीलम की शादी हो जाने के बाद वह दोस्ती भी लगभग खत्म हो चुकी थी.

पुलिस ने नीलम और उस के प्रेमी रोहित राजपूत के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर अध्ययन किया.

इस जांच में पता चला कि लकी के मोबाइल पर उस रोज एक ऐसे नंबर से फोन आया था, जिस से उस दिन से पहले उस की कभी बात नहीं हुई थी. जिस जगह पर लकी का शव मिला था, वहां 4 और मोबाइल नंबरों की लोकशन लकी के मोबाइल के साथ मिल रही थी. ये चारों नंबर गुजरात के थे.

पुलिस को मालूम हुआ कि घटना वाले दिन खुद नीलम ने ही फोन कर के उसे कटला बुलाया था.

लेकिन लकी की काल डिटेल्स में घटना वाले दिन नीलम के मोबाइल नंबर पर उस से एक बार भी बात होने की जानकारी नहीं थी. इस का मतलब साफ था कि उस रोज नीलम अपना नंबर छिपा कर किसी और नंबर से बात कर रही थी.

इस नए मोबाइल नंबर की डिटेल्स निकालने के बाद पता चला कि इस नंबर से लकी के अलावा एक और नंबर पर बात की गई थी. और जिस नंबर पर बात की गई थी, वह नंबर उन मोबाइल नंबरों के संपर्क में था, जिन की लोकेशन घटनास्थल की मिल रही थी.

इस से पुलिस समझ गई कि लकी की हत्या में नीलम व उस के पे्रमी रोहित राजपूत का ही हाथ है. इसलिए पुलिस ने एक बार फिर रोहित और नीलम को थाने बुला कर उन के साथ सख्ती से पूछताछ की तो लकी की हत्या का पूरा सच 10 दिन बाद सामने आ गया.

कटला, गुजरात के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नीलम रूप और सौंदर्य के मामले में बहुत ही रईस थी. किशोर उम्र मेें कालोनी के नवयुवकों के दिलों में जगह बनाने वाली नीलम जिस भी गली से गुजरती थी वह गली महकने लगती थी. इसलिए गलीमोहल्ले के कई युवक उस से दोस्ती की इच्छा ले कर उस के घर के आसपास चक्कर लगाते फिरते थे. युवकों की यह दीवानगी उसे अच्छी लगने लगी.

नीलम की नजरों मे उस का सब से बड़ा दीवाना उस के साथ पढ़ने वाला रोहित था, जो स्कूल में हमेशा उस के आगेपीछे बने रहने की कोशिश करता रहता था.

इसलिए उस ने सब को मन ही मन तौला तो दीवानगी के मामले में रोहित का पलड़ा भारी पड़ा. इसलिए धीरेधीरे उस का मन रोहित की तरफ झुकने लगा.

एक दिन रोहित ने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया. किशोर उम्र के प्रेम का अपना एक नशा होता है, इसलिए रोहित और नीलम के दिल एकदूसरे से मिलने के लिए मचलने लगे. कभी स्कूल के सुनसान कोने में तो कभी किसी मंदिर की परिक्रमा में उन की मुलकातें होने लगीं.

बताते हैं कि नीलम की रोहित के साथ पहली बार एकांत में मुलाकात नीलम की एक सहेली के घर में उस वक्त हुई थी, जब उस सहेली के परिवार के दूसरे सभी लोग कटला से बाहर किसी रिश्तेदार के यहां आयोजित सामाजिक समारोह में भाग लेने गए थे.

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