जरा संभलकर, कच्चा रिश्ता है लिव इन रिलेशनशिप

लिव इन आज की बदलती जीवनशैली के अनुरूप युवाओं द्वारा ईजाद किया गया थोड़ा कम आजमाया कौंसैप्ट है. पहले लड़के बाइयों के यहां पड़े रहते थे या फिर उन के भाभियों, कजिनों के साथ संबंध तो होते थे पर वे एक घर में नहीं रहते थे. घर नहीं चलाते थे. लड़के लड़की की कपल्स की तरह साथ रहने की व्यवस्था यानी लिव इन में वैवाहिक जिंदगी की हसरतें तो पूरी होती हैं, एकदूसरे का साथ भी मिलता है पर लंबी जिम्मेदारियां निभाने का कोई वादा नहीं होता. कभी भी अलग हो जाने की आजादी रहती है. यह कौंसैप्ट शादी के लिए तैयार नहीं लोगों को लुभावना नजर आता है, पर अंदर से उतना ही खोखला और अस्थाई तो है ही, पर उस में भी बहुत जिम्मेदारियां भरी पड़ी हैं. शायद यही वजह है कि ज्यादातर लोग खासकर लड़कियां आज भी इसे स्वीकार नहीं कर पातीं.

अधूरेपन की कसक

एक तरह से यह रिश्ता धार्मिक मान्यताओं की जकड़न, सामाजिक रीतिरिवाजों और शोशेबाजी के रंग से दूर है और कानून ने भी इसे कुछ हद तक मान्यता दे दी है. मगर फिर भी इस रिश्ते के अधूरेपन को अनदेखा नहीं किया जा सकता खासकर लड़कियां इस तरह के रिश्ते में कई बार गहरी मानसिक पीड़ा से गुजरती हैं.

दरअसल, लिव इन में रिश्ता जब गहरा होता है और दोनों एकदूसरे के करीब आते हैं, शारीरिक संबंध बनते हैं, तो वह जज्बा लड़की के मन में हमेशा साथ रहने की चाहत को जन्म देता है.

50 मिनट की नजदीकी 50 सालों के साथ की इच्छा में बदलने लगती है. मगर जरूरी नहीं कि लड़का भी इसी रूप में सोचे और जिम्मेदारियां निभाने को तैयार हो जाए.

ज्यादातर मामलों में इस बात पर रिश्ता टूट जाता है और अंतत: शारीरिक प्रेम की बुनियाद पर बना यह रिश्ता उम्र भर की कसक बन कर रह जाता है. कई दफा इस टूटन से उत्पन्न पीड़ा इतनी गहरी होती है कि लड़की स्वयं को खत्म कर लेने जैसा बेवकूफी भरा कदम उठाने को भी तैयार हो जाती है जैसाकि प्रत्यूषा ने किया.

ऐसे रिश्तों में प्यार कम विवाद ज्यादा

इस रिश्ते में लड़केलड़कियों का एकदूसरे पर पूरा हक नहीं होता. वे जौइंट डिसीजन भी नहीं ले सकते. जैसाकि विवाहित दंपती लेते हैं. उदाहरण के लिए संपत्ति या तो लड़के की होती है या फिर लड़की की. दोनों का हक नहीं होता. दूसरे का यह पूछने का हक नहीं कि रुपए किस प्रकार खर्च हो रहे हैं. दोनों अपने रुपए अपने हिसाब से खर्च करते हैं.

इसी वजह से अकसर इन के बीच हक और अधिकार की लड़ाई होती रहती है. इन विवादों का निबटारा सहज नहीं होता. वे प्रयास करते हैं कि प्यार जता कर या आपस में बात कर मसला सुलझाया जाए, मगर अकसर ऐसा हो नहीं पाता, क्योंकि किसी भी रिश्ते को बनाए रखने और 2 लोगों को करीब रखने के लिए जो गुण सब से ज्यादा जरूरी हैं वे हैं, विश्वास, ईमानदारी, पारदर्शिता और आत्मिक निकटता.

इन्हें विकसित करने के लिए समय चाहिए होता है. महज भौतिक या शारीरिक निकटता मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव भी दे, यह जरूरी नहीं. ऐसे खोखले रिश्ते में कड़वाहट का दौर आसानी से खत्म नहीं होता.

जिम्मेदारियों से भागना सिखाता है लिव इन

लिव इन रिलेशनशिप वास्तव में भावनात्मक बंधन के आधार पर साथ रहने का एक व्यक्तिगत और आर्थिक प्रबंध मात्र है. इस में हमेशा के लिए एकदूसरे का साथ देने का कोई वादा नहीं होता, न ही पूरे समाजकानून के आगे इस तरह का कोई अनुबंध ही किया जाता है. इस वजह से पार्टनर्स एकदूसरे पर (लिखित/मौखिक) किसी तरह का कोई दबाव नहीं बना सकते. ऐसा रिश्ता एक तरह से रैंटल ऐग्रीमैंट के समान होता है. यह बड़ी सहजता से बनाया जाता है और जब तक दोनों पक्ष सही व्यवहार करते हैं, एकदूसरे को खुश रखते हैं तभी तक वे साथ होते हैं. इस के विपरीत शादी इस पार्टनरशिप से बहुत ज्यादा गहरी है. यह एक सार्वभौमिक तौर पर किया गया अनुबंध है, जिस के साथ कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं. वस्तुत: शादी न सिर्फ 2 लोगों वरन 2 परिवारों व समुदायों के बीच बनाया गया रिश्ता है, जो उम्र भर के लिए स्वीकार्य है. जीवन में कितने भी दुख, परेशानियां आएं, आपसी बंधन कायम रखने का वादा किया जाता है.

कहा जा सकता है कि जब दिल मिल रहे हों तो रस्मोरिवाज की क्या जरूरत? मगर यहां बात सिर्फ रस्मों की नहीं वरन सामाजिक तौर पर की गई कमिटमैंट की है, सदैव जिम्मेदारियां उठाने की कमिटमैंट, हमेशा साथ निभाने की कमिटमैंट, विवाह में एक डिफरैंट लैवल की कमिटमैंट होती है, इसलिए एक डिफरैंट लैवल की सुरक्षा, आजादी और परिणामस्वरूप डिफरैंट लैवल की खुशी भी प्राप्त होती है. यह उस से बिलकुल अलग है, जो रिश्ता महज तब तक निभाया जाता है जब तक कि परस्पर प्यार और आकर्षण कायम है. बेहतर विकल्प मिलते ही अलग होने का रास्ता खुला होता है. हमेशा इस बात के लिए तैयार रहना पड़ता है कि कभी भी रिश्ता खत्म हो सकता है.

वफा चाहिए तो लिव इन नहीं

जब बात वफा की आती है, तो शादीशुदा पार्टनर इस दृष्टि से काफी लौयल पाए जाते  हैं. 5 सालों के एक अध्ययन के मुताबिक 90% विवाहित महिलाएं पतिव्रता पाई गईं, जबकि लिव इन में रह रहीं सिर्फ 60% महिलाएं ही लौयल निकलीं.

पुरुषों के मामले में स्थिति और भी ज्यादा आश्चर्यजनक रही. 90% विवाहित पुरुष अपनी पत्नी के प्रति वफादार रहे, जबकि लिव इन के मामले में केवल 43% पुरुष.

यही नहीं, लिव इन का प्रकोप यानी प्रीमैरिटल सैक्सुअल ऐटीट्यूड और बिहेवियर शादी के बाद भी नहीं बदलता. यदि एक महिला शादी से पहले किसी पुरुष के साथ रहती है, तो यह काफी हद तक संभव है कि वह शादी के बाद भी अपने पति को धोखा देगी.

अध्ययनों व अनुसंधानों के मुताबिक यदि कोई शख्स शादी से पहले सैक्स का अनुभव करता है, तो इस की संभावना काफी ज्यादा रहती है कि शादी के बाद भी उस के ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स रहेंगे. यह खासतौर पर महिलाओं के लिए ज्यादा सच है.

पेरैंट्स से दूरी

लिव इन में रह रहे लड़केलड़कियों की जिंदगी में सामान्यतया मांबाप का दखल नाममात्र का होता है, क्योंकि इस बाबत उन की सहमति नहीं होती और वे अपने बच्चों से दूरी बना लेते हैं.

यदि वे घर वालों को इस बात की जानकारी नहीं देते, तो ऐसे में इस राज को छिपा कर रखना भी आसान हीं होता. कई तरह के मसले जैसे मांबाप से पैसों की मदद लेना, पार्टनर और उस के सामान को छिपाना जब अभिभावक अचानक मिलने आ रहे हों, लगातार उन की इच्छा के विरुद्ध जाने का अपराधबोध और झूठ बोलना जैसी बहुत सी बातें हैं, जो लिव इन में रहने वालों को बेचैन करती हैं.

विश्वास की कमी

जो शादी से पहले साथ रहते हैं, उन में अकसर अविश्वास का भाव विकसित होता है. परिपक्व प्रेम में गहरा विश्वास होता है कि आप का प्यार सिर्फ आप का है और कोई बीच में नहीं. मगर शादी से पहले ही नजदीकी बना लेने पर व्यक्ति के मन में कई तरह के शक पैदा होने लगते हैं कि कहीं इस की जिंदगी में मुझ से पहले भी तो कोई नहीं रहा या मेरे अलावा भविष्य में किसी और के साथ भी इस के संबंध तो नहीं बन जाएंगे.

इस तरह के अविश्वास और संदेह के भाव गहराने से व्यक्ति धीरेधीरे अपने पार्टनर के प्रति प्यार व सम्मान खोने लगता है जबकि शादीशुदा जिंदगी में विश्वास एक अहम फैक्टर होता है.

– 68% युवाओं का कहना था कि लिव इन प्यार (लव) नहीं वासना (लस्ट) है.

– 72% ने माना कि लिव इन का अंत ब्रेकअप में होता है.

– 36% महिलाओं ने ही इसे अच्छा माना.

– 52% युवा लड़कों ने लिव इन की जिंदगी जीने में रुचि दिखाई.

– 89% अभिभावकों ने कहा कि विवाह से पूर्व सैक्स स्वीकार्य नहीं.

– 51% युवाओं ने ही इसे गलत माना.

यशराज प्रोडक्शंस व औरमैक्स मीडिया द्वारा किए गए ‘शुद्ध देशी इंडिया की रोमांटिक सोच’ सर्वे से प्राप्त आंकड़े.

पहले मजा बाद में सजा

‘‘देश की अदालतों में लिव इन में रहने वाले जोड़ों के मुकदमे दिनबदिन बढ़ रहे हैं. शारीरिक व भौतिक जरूरत के लिए लिव इन में रहना बाद में मुश्किल भी खड़ी कर सकता है. इन मामलों में आमतौर पर शादी का वादा कर के मुकरना, घरेलू हिंसा और यहां तक कि बलात्कार करने तक का संगीन आरोप लगता है. आपसी झगड़े का रूप कईकई बार बेहद आपराधिक हो जाता है. लड़कियां आत्महत्या कर लेती हैं, तो कई मामलों में लड़कियों की हत्या भी कर दी जाती है. हालिया हुई कई वारदातें इस बात का सुबूत हैं.’’

– अवधेश कुमार दुबे, ऐडवोकेट, दिल्ली हाई कोर्ट

 

आसान नहीं रहती जिंदगी

‘‘भारत में शहरी जनसंख्या खुले विचारों की है. उस पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव भी है. आज शिक्षा और नौकरी के कारण युवा बड़ी संख्या में अपने घरों से दूर रह रहे हैं, इसलिए लिव इन रिलेशनशिप का चलन लगातार बढ़ रहा है. आज की पीढ़ी के लिए यह एक अच्छा चलन है, क्योंकि इस में विवाह जितनी जटिलताएं नहीं हैं. इस में मूव इन और मूव आउट काफी आसान है. लेकिन यही इस रिश्ते की सब से बड़ी कमी भी है, क्योंकि इसी के कारण इस रिश्ते में असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य की चिंताएं घर करने लगती हैं. अकसर लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग असुरक्षा, गुस्सा, दुख, भ्रम, अवसाद और भावनात्मक उथलपुथल के शिकार हो जाते हैं.

‘‘भारतीय समाज का तानाबाना ऐसा है कि यहां आज भी लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों पर परिवार और समाज का बहुत अधिक दबाव होता है. थोड़ी उम्र बीतने के बाद हर इनसान अपने जीवन में स्टैबिलिटी चाहता है, अपना परिवार बढ़ाना चाहता है. लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों में बच्चों को जन्म देने, उन्हें समाज, परिवार की मान्यता मिलने और उन के भविष्य को ले कर कई प्रकार की आशंकाएं होती हैं. वे हमेशा इस द्वंद्व में रहते हैं कि परिवार बढ़ाएं या न बढ़ाएं? इन पर हमेशा एक मानसिक दबाव रहता है. इस सब का मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. मानसिक दबाव के कारण

इन लोगों का इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, जो इन्हें बीमारियों का आसान शिकार बनाता है.’’

– डा. गौरव गुप्ता, मनोचिकित्सक

VIDEO : फंकी लेपर्ड नेल आर्ट

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सत्यकथा : सपनों के घर के नाम पर 1000 करोड़ की ठगी

नोएडा के रहने वाले पीयूष तिवारी के खिलाफ न केवल दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित आर्थिक अपराध शाखा, तिलक मार्ग, मयूर विहार, फर्श बाजार, पांडव नगर, आनंद विहार और कृष्णा नगर के थानों में, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि जगहों पर भी जालसाजी के 39 मामले दर्ज हैं.

उस पर आरोप है कि उस ने हजारों लोगों के घर पाने के सपने को चकनाचूर कर दिया था. उन्हें फ्लैट बेचने का झांसा दिया और उन की जमापूंजी हड़प ली. और तो और उस ने एक ही फ्लैट को कई लोगों को बेच डाला.ऐसा कर उस ने 1000 करोड़ की अकूत संपत्ति बनाई और साल 2016 में ही फरार हो गया था. उस पर 50 हजार का ईनाम भी रखा हुआ था.

उसे पकड़ने के लिए बाकायदा दिल्ली में आर्थिक अपराध शाखा ने एंटी आटो थेफ्ट स्क्वायड (एएटीएस) गठित की गई थी. दरअसल, लाजपत नगर, दिल्ली के रहने वाले 60 वर्षीय शरद सूरी ने 3 अप्रैल, 2020 को आर्थिक अपराध शाखा में पीयूष तिवारी समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ जालसाजी की रिपोर्ट लिखवाई थी.
उन लोगों के खिलाफ वैसी ही एक अन्य रिपोर्ट गुरुग्राम के लवली जैन ने भी 20 अप्रैल, 2017 को लिखवाई थी. उन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भादंवि की धारा 420, 409 और 120बी के तहत रिपोर्ट लिखी थी.

सूरी ने नई दिल्ली में मयूर विहार स्थित शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और दिल्ली के ही जसोला में किंडले डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जालसाजी की रिपोर्ट में कुल 9 लोगों पर आरोप लगाया था. उन में मुख्य पीयूष तिवारी और उस की पत्नी शिखा तिवारी थे. शरद सूरी की रिपोर्ट के अनुसार उन का लाजपत नगर में चुनमुन स्टोर प्रा.लि. नाम की एक कंपनी है, जिस में उन के अलावा पत्नी मेकनु सूरी भी डायरेक्टर हैं. बात साल 2011-2012 की है. सूरी दंपति ने प्रौपर्टी में इनवैस्टमेंट की योजना बनाई थी. उन दिनों दिल्ली एनसीआर में कई नए प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था, जहां इनवैस्ट कर कुछ सालों में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता था.

इसी खयाल से सूरी अपने एक जानपहचान के व्यक्ति दीपक भंडारी के माध्यम से नोएडा में सक्रिय कुछ बिल्डरों के संपर्क में आए थे. जनवरी, 2012 में उन की मुलाकात पीयूष तिवारी से हुई. उस ने खुद को शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर बताया. साथ ही दावा किया कि उस के साथ कई कंपनियां जुड़ी हुई हैं, जो सिस्टर कंसर्न के तौर पर हाउसिंग डेवलपिंग के दूसरे प्रोजेक्ट का कामकाज संभालती हैं.

पीयूष ने दावे के साथ यह भी कहा कि रियल एस्टेट में काफी तेजी आने वाली है. इस तरह उस की कंपनी हाउसिंग के बड़े प्रोजेक्ट लाने वाली है, जहां इनवैस्ट करने से कुछ सालों में ही अच्छा रिटर्न मिल जाएगा.
उस ने अपनी बातों से खुद को रियल एस्टेट का न केवल अच्छा जानकार बताया, बल्कि यह भी साबित करने की कोशिश की कि उस की पहुंच भारत सरकार में सीधे वित्त मंत्रालय तक है और वह वहां का एक सलाहकार है.

उसी की सलाह पर होम लोन और टैक्स आदि जैसी सुविधाओं में कई तरह की छूट दी गई है. उस की इसी पहुंच की बदौलत हाउसिंग के प्रोजेक्ट में कोई बाधा नहीं आती है. इस तरह से उस ने 2-3 मीटिंग में ही सूरी को अपनी बातों से प्रभावित कर अच्छा मुनाफा कमाने का लालच भी दे दिया था. और फिर सूरी ने उस के प्रोजेक्ट में इनवैस्ट की डील फाइनल करने के लिए अगली मीटिंग फरवरी 2012 में ही तय कर ली थी.
इस बार की मीटिंग में सूरी की मुलाकात पीयूष तिवारी और उस की पत्नी शिखा तिवारी से हुई. पीयूष ने शिखा को अपनी कंपनी के एक खास डायरेक्टर के रूप परिचय दे कर कहा कि कंपनी का वह औफिशियल कामकाज संभालती है, जबकि वह खुद बाहरी कामकाज देखता है.

शिखा आधुनिक वेशभूषा में एक मौडल की तरह दिखती थी. सुंदर थी. आवाज में मधुरता और मिठास थी. हिंदी अंगरेजी मिला कर धराप्रवाह बोलती थी. सौरी और थैंक्स तो जुबान पर चढ़ा रहता था. जरा सी छींक आने या कुछ गलती हो जाने पर तुरंत सौरी बोल देती थी.किसी भी बात को विस्तार से समझाने लगती थी. बातें मीठीमीठी करती थी. अदाएं काफी लुभावनी थीं. बातोंबातों में अपने रूपरंग का ग्लैमर और सैक्स अपील दर्शा देती थी. कई बार चेयरपरसन की कुरसी पर बैठते हुए या फिर टेबल पर झुक कर कुछ उठाते हुए अपने अंग का प्रदर्शन कर देती थी.

इसी सिलसिले में वह बड़े टेबल पर शीशे के नीचे लगे नक्शे को समझाने के लिए झुक जाती, ताकि उस के स्तन का उभार सामने वाले को दिख जाए. साथ ही कुरसी पर बैठते हुए ऐसे अंगड़ाई लेने लगती थी, मानो काम के बोझ से बेहद थक गई हो.उस रोज सूरी और तिवारी दंपति की मीटिंग कई घंटे चली. लंच भी उन्होंने साथसाथ किया. इस दौरान पीयूष और शिखा ने मिल कर सूरी के मन को अपने अनुसार मोड़ लिया. उन के दिमाग में मोटे मुनाफे का कीड़ा डाल दिया.

कुछ घंटे में ही शिखा ने सूरी को भावनात्मक रूप से अपने कब्जे में ले लिया, जबकि पीयूष ने लंबे समय तक साथ बिजनैस का लालच दिया. तिवारी दंपति ने यहां तक कहा कि उन का संबंध प्रोफेशनल या फाइनैंशियल संबंध से कहीं ऊपर उठ कर ईमादारी की बुनियाद पर टिका रहेगा. उन के साथ जो संबंध
बना है वे उस में कभी भी दरार तक नहीं आने देंगे. कुल मिला कर उस रोज सूरी जहां पीयूष के वादे और लुभावने औफर के साथ मासिक मिलने वाली रकम और मकान मिलने तक पैसे के सुरक्षा की गारंटी के कायल हो गए, वहीं उन्होंने शिखा की सैक्सी अदाओं से अलग तरह के आनंद का अनुभव किया.

उन्होंने कंपनी के साथ कुछ फ्लैट और कामर्शियल प्रोजेक्ट के खरीदने की डील पक्की कर ली.
कुछ दिनों में ही सूरी ने पीयूष की कंपनी और उस से जुड़ी दूसरी कंपनी के जरिए कुल 54 फ्लैट और शुभकामना एडवर्ट टेकहोम्स के नाम से 2 कामर्शियल एरिया के लिए 11 करोड़ 24 लाख 75 हजार 49 रुपए का भुगतान कर दिया.

पूरा पेमेंट उन्होंने बैंक ट्रांसफर और चैक के जरिए किया. सारे प्रोजेक्ट 3 सालों में यानी 2015 तक पूरे हो जाने थे. उन से होने वाले मोटे मुनाफे का सपना देख रहे सूरी को कुछ दिनों बाद ही पीयूष तिवारी ने दोबारा संपर्क किया. उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया. इस बार पीयूष और शिखा के अलावा कंपनी के 2 अन्य डायरेक्टर सतीश कुमार सेठ और विपिन जैन से भी मुलाकात हुई.

इस मीटिंग में पीयूष ने पहले प्रोजेक्ट की कोई चर्चा नहीं की, बल्कि एक नए प्रोजेक्ट की जानकारी दी. एक बार फिर सूरी को मोटे मुनाफे का सपना दिखाया गया. किंडले लौर्ड नाम का वह प्रोजेक्ट किंडले डेवलपर्स प्रा. लि. द्वारा लाया जाने वाला था.इस प्रोजेक्ट में इनवैस्ट करने के लिए पीयूष ने पूरी तरह से ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ मिलने वाले मासिक मुनाफे का वादा किया. साथ ही यह दावा भी किया कि यह प्रोजेक्ट पहले वाले से बड़ा बन जाएगा.

सूरी ने भरोसा कर इस प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले 29 फ्लैट के लिए कुल 8 करोड़ 83 लाख, 75 हजार 50 रुपए का भुगतान कर दिया. इस तरह से कुछ महीने के भीतर ही सूरी ने पीयूष की कंपनी को 20 करोड़ 8 लाख 50 हजार 100 रुपए दे दिए.सूरी की इस पूरे प्रोजेक्ट के संबंध में हमेशा पीयूष तिवारी और शिखा तिवारी से मुलाकातें होती रहीं, लेकिन वह राजीव रंजन से कभी नहीं मिले थे. जबकि राजीव उन की कंपनी का स्टाफ था, जो पेमेंट के बारे में सारा हिसाब रखता था और फोन पर सूरी के स्टाफ से संपर्क में रहता था.
2 सालों तक तो सब कुछ प्रोजेक्ट के प्रोग्राम के अनुरूप चलता रहा, लेकिन 2015 में जब फ्लैट तैयार कर देने का समय आया तब सूरी परेशान हो गए. क्योंकि आने वाले 2-3 सालों में भी फ्लैट मिलने की संभावना नहीं थी.

परेशानी का एक कारण और भी था कि तिवारी दंपति सूरी से कन्नी काटने लगे. यहां तक कि उन का फोन रिसीव करना बंद कर दिया. उन का स्टाफ राजीव रंजन भी लापता हो गया. और तो और, उन्हें मंथली पैसा देने का जो वादा किया गया था, वह भी पूरा नहीं हुआ. क्योंकि 3 सालों में सूरी को एक पैसा नहीं मिला था.
सूरी ने जब पीयूष के नोएडा स्थित औफिस में जा कर पता किया तो वहां उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. कार्यालय में चपरासी के अलावा कोई और नहीं मिला. कुछ दूसरे बायर्स जरूर उन्हें तलाशते हुए मिले.

सूरी का माथा ठनका. उन्हें लगा कहीं वह ठगे तो नहीं गए. इस चिंता में सूरी ने अपने स्तर से कंपनी के दूसरे लोगों के बारे में पता लगाया. कुछ खरीदारों से मिले. उस के बाद तो उन्हें और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली.सूरी को आश्चर्य तब हुआ, जब मालूम हुआ कि जिस फ्लैट के लिए एग्रीमेंट उन के नाम था, उसी के लिए दूसरे लोगों के नाम भी एग्रीमेंट बना हुआ था. यहां तक कि एक मकान 3-4 लोगों को बेचा गया था. वे सारे एग्रीमेंट अलगअलग कंपनियों के जरिए तैयार करवाए गए थे.

इस तरह झांसा देने वालों में पीयूष, शिखा के अलावा राजीव रंजन, विपुल जैन, संजय निझावन, सतीश कुमार सेठ और दिवाकर शर्मा के नाम भी सामने आए. सभी को पीयूष तिवारी ने कंपनी में अलग अलग काम की जिम्मेदारियां दे रखी थीं.पीयूष के औफिस में कई बार चक्कर लगाने के बाद सूरी को एक बार उस के वहां होने की जानकारी मिली. वह वहां गए, लेकिन तब उन्हें सुरक्षा गार्डों ने अंदर जाने ही नहीं दिया. वह वापस लौट आए.

अगले रोज से सूरी के पास अलगअलग नंबरों से धमकी भरे फोन आने लगे. उन्हें धमकी दी गई कि वह औफिस आने और फ्लैट की खोजखबर न करें, वरना उन का पूरा पैसा डूब जाएगा.हद तो तब हो गई, जब पीयूष ने सूरी को एक बार फिर अपने झांसे में ले लिया और फ्लैट मिलने के एवज में 50 लाख रुपए की फिर से मांग कर दी. सूरी को आश्वासन दिया कि इस रकम को चुकाने के बाद उन्हें फ्लैट मिल जाएगा.
मरता क्या न करता, सूरी ने फ्लैट मिलने की उम्मीद में वह रकम भी दे दी. किंतु फ्लैट नहीं मिला और पीयूष ने फोन उठाना बंद कर दिया. यह सब करते हुए 2 साल और निकल गए.

इतना झटका लगने के बाद सूरी पूरी तरह समझ गए थे कि वह ठगे जा चुके हैं. सूरी ने आखिर पुलिस में जाने का निर्णय लिया. इस के लिए पीयूष, शिखा और उस के साथियों से संबंधित कागजात जुटाए. यह सब करते हुए काफी समय लग गया.किंतु जब उन्होंने कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई, तब ईओडब्ल्यू थाने में सभी आरोपियों पर भादंवि की धाराएं 420, 405, 406, 503, 506, 120बी लगा कर उन की खोजबीन शुरू कर दी.

पीयूष पर एफआईआर करने वाले अकेले शरद सूरी नहीं थे, बल्कि उस पर दिल्ली, यूपी और पंजाब में मिला कर कुल 39 मुकदमे दर्ज किए जा चुके थे. सभी मुकदमे धोखाधड़ी के थे, जो 2016 से ले कर 2018 के बीच दर्ज हुए थे.वह 2016 से ही फरार चल रहा था. लेकिन उस की पत्नी शिखा तिवारी जालसाजी के मामले में पुलिस हिरासत में ले ली गई थी. साल 2017 में दर्ज मुकदमे में एक शिकायतकर्ता ने अपने सारे फ्लैट का पूरा विवरण दिया था. उस के बाद ही पीयूष की पत्नी हिरासत में ले ली गई थी.

शरद सूरी द्वारा दर्ज कराए मुकदमे के बाद पीयूष की कंपनी के खिलाफ साल 2020 में जांच में तेजी लाई गई, लेकिन उस में कोई खास सफलता नहीं मिल पाई. पीयूष भी फरार हो गया. संयोग से उसी साल लौकडाउन लगने से उस की खोजबीन नहीं हो पाई. अगले साल अप्रैल, 2021 में दिल्ली पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपए के ईनाम की घोषणा कर दी.

उसे धर दबोचने के लिए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गठित एएटीएस के एसीपी जयपाल सिंह के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई, जिस में एसआई नरेश कुमार और संदीप शामिल थे. उन्हें मार्च 2021 में ही पीयूष तिवारी के मुंबई में होने की सूचना मिली. पता चला कि वह अपने बहनोई के यहां रह रहा था. इस बाबत दिल्ली पुलिस ने पहले मुंबई पुलिस को सूचित करते हुए उन से मदद मांगी.
पुलिस को मालूम हुआ कि पीयूष का बहनोई किसी लिमिटेड कंपनी में सलाहकार वकील था.

टीम ने पीयूष के बहनोई के मकान के आसपास मुखबिर लगा दिए. वहां के लोगों को पीयूष की तसवीरें दिखा कर पूछताछ करने लगी. 2 दिनों तक उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई. कुछ दिनों बाद फिर से लौकडाउन लग गया और दिल्ली पुलिस टीम वापस लौट आई.टीम दोबारा जुलाई में मुंबई गई. वहां पीयूष के एक इलाके में देखे जाने की सूचना मिली. यह जानकारी वहां के एक सिक्योरिटी गार्ड ने दी.
उस ने बताया कि वह कुछ दिनों पहले सिगरेट पीने के लिए उस के पास आ कर बैठ जाता था. बातोंबातों में बताया था कि उस का रेस्टोरेंट का बिजनैस है, लेकिन अब नासिक में प्याज का बिजनैस करने की भी सोच रहा है.

इस जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस तुरंत नासिक गई. नासिक में प्याज की बहुत बड़ी मंडी है. वहां जा कर सादे कपड़ों में पुलिस ने प्याज के छोटेबड़े व्यापारियों को पीयूष की फोटो दिखाई. उन से दिल्ली से आया हुआ उस का दोस्त बताया. साथ ही कहा कि दिल्ली की मंडियों में प्याज सप्लाई के लिए उस से बात करनी है. काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई, इसलिए मिलने के लिए नासिक आ गए.पुलिस टीम को वहां भी निराशा मिली और वह दिल्ली वापस लौट आई. कुछ दिनों के बाद प्याज के एक कारोबारी का दिल्ली पुलिस को फोन आया. उस की सूचना पर दिल्ली पुलिस फिर मुंबई गई. वहां पुलिस को मालूम हुआ कि पीयूष एक रेस्टोरेंट में शाम के समय आता है.

पुलिस टीम उस व्यक्ति द्वारा बताए गए रेस्टोरेंट गई. वहां उस ने 2 दिनों तक सुबह के नाश्ते से ले कर दोपहर के खाना और रात का डिनर तक लिया. इस दौरान रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से बात की और उस की तसवीर दिखा कर उस के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की. एक कर्मचारी ने बताया वह वहां शाम के वक्त ही आता है. उस के बाद पुलिस टीम ने अपना जाल बिछा कर मुंबई पुलिस को भी अलर्ट रहने की सूचना दे दी.देर शाम को पीयूष वहां आया और सीधा रेस्टोरेंट के एक चैंबर में चला गया. एक कर्मचारी ने बताया कि वही उस रेस्टोरेंट का मालिक है. वह रेस्टोरेंट मुंबई के इंदिरानगर थाने में आता है. उस थाने की पुलिस भी रेस्टोरेंट के बाहर पहुंच गई.

दिल्ली पुलिस ने बिना देर किए रेस्टोरेंट के चैंबर में जा कर उसे धर दबोचा. अचानक रेस्टोरेंट में पुलिस को देख कर वह चौंक गया और खुद को उस ने पुनीत बताया. दिल्ली पुलिस ने उस की एक नहीं सुनी और हिरासत में लिया.इस तरह से दिल्ली पुलिस को 11 हजार किलोमीटर के लंबे सफर और भागदौड़ के बाद पीयूष की गिरफ्तारी में सफलता मिल गई. ट्रांजिट रिमांड पर उसे 25 मार्च, 2022 को दिल्ली लाया गया. उस पर लगे आरोपों के बारे में पूछताछ की गई.

पूछताछ के दौरान 42 वर्षीय तिवारी ने खुलासा किया कि वह कामर्स ग्रैजुएट है और करिअर की शुरुआत विज्ञापन क्षेत्र में काम कर की थी. उस में सफलता नहीं मिलने पर उस ने 2011 में एक बिल्डर के रूप में अपना व्यवसाय शुरू किया था. इस के लिए 2018 तक 15-20 शेल कंपनियों के साथ 8 कंपनियां बना ली थीं. इसी के साथ उस ने स्वीकार कर लिया उस ने एक ही फ्लैट कई लोगों को बेच दिया.फ्लैट दिखाने के बाद वह खरीदार से पैसा ले कर फरार हो जाता था. उस का मूल निवास नोएडा के सेक्टर 93बी में ओमेक्स फारेस्ट स्पा, टावर ए में है.

उस ने बताया कि 2016 में उस के घर पर आयकर विभाग की छापेमारी की गई और लगभग 120 करोड़ रुपए जब्त किए गए. तब वह दक्षिण भारत के शहर में जा कर छिप गया था. पुलिस ने पीयूष तिवारी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. द्य
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रणबीर ने किया श्रद्धा कपूर को किस तो फैंस ने दिया ये रिएक्शन

रणबीर कपूर और एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं. जिसकी शूटिंग स्पेन में हो रही है. श्रद्धा कपूर के साथ रोमांस करते नजर आएंगे रणबीर कपूर. इस फिल्म का एक छोटा सा क्लिप वायरल हो गया है.

बता दें कि वायरल हो रही क्लिप में रणबीर कपूर श्रद्धा कपूर को लगातार किस करते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर आते ही इस क्लिप को देखने के बाद से यूजर्स ने धमाल मचाने शुरू कर दिए हैं. इस क्लिप को खूब पसंद भी किया गया है तो वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि प्लीज ऐसे क्लिप को वायरल न करें फिल्म देखने का मन नहीं करेगा.

 

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वायरल हुए वीडियो में रणबीर कपूर श्रद्धा कपूर के इर्द गिर्द दिखाई दे रहे हैं. लोग इस वीडियो को खूब देखना पसंद कर रहे हैं. अगर बात करें रणबीर और श्रद्धा की आने वाली फिल्म की तो यह 8 मार्च 2023 को आएगी. अभी तक इस फिल्म का नाम डिसाइड नहीं हो पाया है और न ही किसी ने इस फिल्म के बारे में खुलकर बात किया है.

इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं डायरेक्टर लव रंजन. जिन्होंने अभी तक कई सारी फिल्मों को बनाया है. जो सुपर हिट भी हुईं है. इसके अलावा रणबीर कपूर की बात करें तो वह जल्द ही आयान मुखर्जी की फिल्म ब्रह्मशास्त्र में नजर आएंगे. जिसमें वह पहली बार अपनी पत्नी आलिया भट्ट के साथ स्क्रिन शेयर करेंगे.

‘पंड्या स्टोर’ की अनीता बनी दुल्हन, जाने कौन है दूल्हा

टीवी की मशहूर सीरियल पांड्या स्टोर की अनीता शादी के बंधन में बंध गई है. अनीता यानी सृष्टि महेश्वरी ने लाल जोड़े में सात फेरे लिए हैं. सृष्टि ने करण वैद्य संग सात फेरे लिए हैं. इस शादी में सृष्टि के साथ साथ उनके परिवार वाले भी शामिल थें.

बता दें कि सृष्टि ने जिस लड़के से शादी किया है वह लड़का पेशे से इंजीनियर है. करण औऱ सृष्टि की शादी जयपूर में हुई है. सोशल मीडिया के जरिए उनकी शादी की खबर मिली जिसे देखने के बाद से लोगों ने खूब सारा प्यार और आशीर्वाद दिया है.

सृष्टि शादी के वक्त लाल रंग के खास जोड़े में नजर आई जिसपर गोल्डन रंग का वर्क किया गया था. इस जोड़े में एक्ट्रेस का लुक काबिले तारीफ है. लोग इनके लुक की खूब तारीफ कर रहे हैं. फूलों की चादर के साथ पांड्या स्टोर की अनीता ने एंट्री किया . फोटो में एक्ट्रेस की सादगी देखने लायक थी.

अनीता की इस फोटो ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खूब खींचा, वहीं सृष्टि महेश्वरी के पति करण वैद्य वरमाला के समय घूटनों पर बैठ गए. वह अपने पति को हंसते हुए जयमाला पहनाती नजर आईं. शेयर किए गए फोटो में सृष्टि महेश्वरी और करण वैद्य एक- दूसरे की आंखों में देखते नजर आएं.

सृष्टि महेश्वरी और करण वैद्य एक -दूसरे के साथ खोए हुए नजर आएं. जिसे देखकर लोगों ने खूब सारा प्यार दिया है.

साथी साथ निभाना – भाग 1 : संजीव ने ऐसा क्या किया कि नेहा की सोच बदल गई

उस शाम नेहा की जेठानी सपना ने अपने पति राजीव के साथ जबरदस्त झगड़ा किया. उन के बीच गालीगलौज भी हुई.

‘‘तुम सविता के साथ अपने संबंध फौरन तोड़ लो, नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगी या तुम्हारा खून कर दूंगी,’’ सपना की इस धमकी को घर के सभी सदस्यों ने बारबार सुना.

नेहा को इस घर में दुलहन बन कर आए अभी 3 महीने ही हुए थे. ऐसे हंगामों से घबरा कर वह कांपने लगी.

उस के पति संजीव और सासससुर ने राजीव व सपना का झगड़ा खत्म कराने का बहुत प्रयास किया, पर वे असफल रहे.

‘‘मुझे इस गलत इंसान के साथ बांधने के तुम सभी दोषी हो,’’ सपना ने उन तीनों को भी झगड़े में लपेटा, ‘‘जब इन की जिंदगी में वह चुड़ैल मौजूद थी, तो मुझे ब्याह कर क्यों लाए? क्यों अंधेरे में रखा मुझे और मेरे घर वालों को? अपनी मौत के लिए मैं तुम सब को भी जिम्मेदार ठहराऊंगी, यह कान खोल कर सुन लो.’’

सपना के इस आखिरी वाक्य ने नेहा के पैरों तले जमीन खिसका दी. संजीव के कमरे में आते ही वह उस से लिपट कर रोने लगी और फिर बोली, ‘‘मुझे यहां बहुत डर लगने लगा है. प्लीज मुझे कुछ समय के लिए अपने मम्मीपापा के पास जाने दो.’’

‘‘भाभी इस वक्त बहुत नाराज हैं. तुम चली जाओगी तो पूरे घर में अफरातफरी मच जाएगी. अभी तुम्हारा मायके जाना ठीक नहीं रहेगा,’’ संजीव ने उसे प्यार से समझाया.

‘‘मैं यहां रही, तो मेरी तबीयत बहुत बिगड़ जाएगी.’’

‘‘जब तुम से कोई कुछ कह नहीं रहा है, तो तुम क्यों डरती हो?’’ संजीव नाराज हो उठा.

नेहा कोई जवाब न दे कर फिर रोने लगी.

उस के रोतेबिलखते चेहरे को देख कर संजीव परेशान हो गया. हार कर वह कुछ दिनों के लिए नेहा को मायके छोड़ आने को राजी हो गया.

उसी रात सपना ने अपने ससुर की नींद की गोलियां खा कर आत्महत्या करने की कोशिश की.

उसे ऐसा करते राजीव ने देख लिया. उस ने फौरन नमकपानी का घोल पिला कर सपना को उलटियां कराईं. उस की जान का खतरा तो टल गया, पर घर के सभी सदस्यों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं.

डरीसहमी नेहा ने तो संजीव के साथ मायके जाने का इंतजार भी नहीं किया. उस ने अपने पिता को फोन पर सारा मामला बताया, तो वे सुबहसुबह खुद ही उसे लेने आ पहुंचे.

नेहा के मायके जाने की बात के लिए अपने मातापिता से इजाजत लेना संजीव के लिए बड़ा मुश्किल काम साबित हुआ.

‘‘इस वक्त उस की जरूरत यहां है. तब तू उसे मायके क्यों भेज रहा है?’’ अपने पिता के इस सवाल का संजीव के पास कोई ठीक जवाब नहीं था.

‘‘मैं उसे 2-3 दिन में वापस ले आऊंगा. अभी उसे जाने दें,’’ संजीव की इस मांग को उस के मातापिता ने बड़ी मुश्किल से स्वीकार किया.

नेहा को विदा करते वक्त संजीव तनाव में था. लेकिन उस की भावनाओं की फिक्र न नेहा ने की, न ही उस के पिता ने. नेहा के पिता तो  गुस्से में थे. किसी से भी ठीक तरह से बोले बिना वे अपनी बेटी को ले कर चले गए.

उन के मनोभावों का पता संजीव को 3 दिन बाद चला जब वह नेहा को वापस  लाने के लिए अपनी ससुराल पहुंचा.

नेहा की मां नीरजा ने संजीव से कहा, ‘‘हम ने बहुत लाड़प्यार से पाला था अपनी नेहा को. इसलिए तुम्हारे घर के खराब माहौल ने उसे डरा दिया.’’

नेहा के पिता राजेंद्र तो एकदम गुस्से से फट पड़े, ‘‘अरे, मारपीट, गालीगलौज करना सभ्य आदमियों की निशानी नहीं. तुम्हारे घर में न आपसी प्रेम है, न इज्जत. मेरी गुडि़या तो डर के कारण मर जाएगी वहां.’’

 

साथी साथ निभाना – भाग 2 : संजीव ने ऐसा क्या किया कि नेहा की सोच बदल गई

‘‘पापा, नेहा को मेरे घर के सभी लोग बहुत प्यार करते हैं. उसे डरनेघबराने की कोई जरूरत नहीं है,’’ संजीव ने दबे स्वर में अपनी बात कही.

‘‘यह कैसा प्यार है तुम्हारी भाभी का, जो कल को तुम्हारे व मेरी बेटी के हाथों में हथकडि़यां पहनवा देगा?’’

‘‘पापा, गुस्से में इंसान बहुत कुछ कह जाता है. सपना भाभी को भी नेहा बहुत पसंद है. वे इस का बुरा कभी नहीं चाहेंगी.’’

‘‘देखो संजीव, जो इंसान आत्महत्या करने की नासमझी कर सकता है, उस से संतुलित व्यवहार की हम कैसे उम्मीद करें?’’

‘‘पापा, हम सब मिल कर भैयाभाभी को प्यार से समझाएंगे. हमारे प्रयासों से समस्या जल्दी हल हो जाएगी.’’

‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता. मैं नहीं चाहता कि मेरी बेटी की खुशियां तुम्हारे भैयाभाभी के कभी समझदार बनने की उम्मीद पर आश्रित रहें.’’

‘‘फिर आप ही बताएं कि आप सब क्या चाहते हैं?’’ संजीव ने पूछा.

‘‘इस समस्या का समाधान यही है कि तुम और नेहा अलग रहने लगो. भावी मुसीबतों से बचने का और कोई रास्ता नहीं है,’’ राजेंद्रजी ने गंभीर लहजे में अपनी राय दी.

‘‘मुझे पता था कि देरसवेर आप यह रास्ता मुझे जरूर सुझाएंगे. लेकिन मेरी एक बात आप सब ध्यान से सुन लें, मैं संयुक्त परिवार में रहना चाहता हूं और रहूंगा. नेहा को उसी घर में  लौटना होगा,’’ संजीव का चेहरा कठोर हो गया.

‘‘मुझे सचमुच वहां बहुत डर लगता है,’’ नेहा ने सहमे हुए अपने मन की बात कही, ‘‘न ठीक से नींद आती है, न कुछ खाया जाता है? मैं वहां लौटना नहीं चाहती हूं.’’

‘‘नेहा, तुम्हें जीवन भर मेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलना चाहिए. अपने मातापिता की बातों में आने के बजाय मेरी इच्छाओं और भावनाओं को ध्यान में रख कर काम करो. मुझे ही नहीं, पूरे घर को तुम्हारी इस वक्त बहुत जरूरत है. प्लीज मेरे साथ चलो,’’ संजीव भावुक हो उठा.

अपनी आदत के अनुरूप नेहा कुछ कहनेसुनने के बजाय रोने लगी. नीरजा उसे चुप कराने लगीं. राजेंद्रजी सिर झुका कर खामोश बैठ गए. संजीव को वहां अपना हमदर्द या शुभचिंतक कोई नहीं लगा.

कुछ देर बाद नेहा अपनी मां के साथ अंदर वाले कमरे में चली गई. संजीव के साथ राजेंद्रजी की ज्यादा बातें नहीं हो सकीं.

‘‘तुम मेरे प्रस्ताव पर ठंडे दिमाग से सोचविचार करना, संजीव. अभी नेहा की

बिगड़ी हालत तुम से छिपी नहीं है. उसे यहां कुछ दिन और रहने दो,’’ राजेंद्रजी की इस पेशकश को सुन संजीव अपने घर अकेला ही लौट गया.

नेहा को वापस न लाने के कारण संजीव को अपने मातापिता से भी जलीकटी बातें सुनने को मिलीं.

गुस्से से भरे संजीव के पिता ने अपने समधी से फोन पर बात की. वे उन्हें खरीखोटी सुनाने से नहीं चूके.

‘‘भाईसाहब, हम पर गुस्सा होने के बजाय अपने घर का माहौल सुधारिए,’’ राजेंद्रजी ने तीखे स्वर में प्रतिक्रिया व्यक्त की, ‘‘नेहा को आदत नहीं है गलत माहौल में रहने की. हम ने कभी सोचा भी न था कि वह ससुराल में इतनी ज्यादा डरीसहमी और दुखी रहेगी.’’

‘‘राजेंद्रजी, समस्याएं हर घर में आतीजाती रहती हैं. मेरी समझ से आप नेहा को हमारे इस कठिनाई के समय में अपने घर पर रख कर भारी भूल कर रहे हैं.’’

‘‘इस वक्त उसे यहां रखना हमारी मजबूरी है, भाईसाहब. जब आप के घर की समस्या सुलझ जाएगी, तो मैं खुद उसे छोड़ जाऊंगा.’’

‘‘देखिए, लड़की के मातापिता उस के ससुराल के मसलों में अपनी टांग अड़ाएं, मैं इसे गलत मानता हूं.’’

‘‘भाईसाहब, बेटी के सुखदुख को नजरअंदाज करना भी उस के मातापिता के लिए संभव नहीं होता.’’

इस बात पर संजीव के पिता ने झटके से फोन काट दिया. उन्हें अपने समधी का व्यवहार मूर्खतापूर्ण और गलत लगा. अपना गुस्सा कम करने को वे कुछ देर के लिए बाहर घूमने चले गए.

सपना ने नींद की गोलियां खा कर आत्महत्या करने की कोशिश की है, यह बात किसी तरह उस के मायके वालों को भी मालूम पड़ गई.

उस के दोनों बड़े भाई राजीव से झगड़ने का मूड बना कर मिलने आए. उन के दबाव के साथसाथ राजीव पर अपने घर वालों का दबाव अलग से पड़ ही रहा था. सभी उस पर सविता से संबंध समाप्त कर लेने के लिए जोर डाल रहे थे.

सविता उस के साथ काम करने वाली शादीशुदा महिला थी. उस का पति सऊदी अरब में नौकरी करता था. अपने पति की अनुपस्थिति में उस ने राजीव को अपने प्रेमजाल में उलझा रखा था.

सब लोगों के दबाव से बचने के लिए राजीव ने झूठ का सहारा लिया. उस ने सविता को अपनी प्रेमिका नहीं, बल्कि सिर्फ अच्छी दोस्त बताया.

‘‘सपना का दिमाग खराब हो गया है. सविता को ले कर इस का शक बेबुनियाद है. मैं किसी भी औरत से हंसबोल लूं तो यह किलस जाती है. इस ने तो आत्महत्या करने का नाटक भर किया है, लेकिन मैं किसी दिन तंग आ कर जरूर रेलगाड़ी के नीचे कट मरूंगा.’’

उन सब के बीच कहासुनी बहुत हुई, मगर समस्या का कोई पुख्ता हल नहीं निकल सका.

संजीव की नाराजगी के चलते नेहा ही उसे रोज फोन करती. बातें करते हुए उसे अपने पति की आवाज में खिंचाव और तनाव साफ महसूस होता.

वह इस कारण वापस ससुराल लौट भी जाती, पर राजेंद्र और नीरजा ने उसे ऐसा करने की इजाजत नहीं दी.

‘‘वहां के संयुक्त परिवार में तुम कभी पनप नहीं पाओगी, नेहा,’’ राजेंद्रजी ने उसे समझाया, ‘‘अपने भैयाभाभी के झगड़ों व तुम्हारे यहां रहने से परेशान हो कर संजीव जरूर अलग रहने का फैसला कर लेगा. तेरे पास पैसा अपनी गृहस्थी अलग बसा लेने के बाद ही जुड़ सकेगा, बेटी.’’

नीरजा ने भी अपनी आपबीती सुना कर नेहा को समझाया कि इस वक्त उस का ससुराल में न लौटना ही उस के भावी हित में है.

एक रात फोन पर बातें करते हुए संजीव ने कुछ उत्तेजित लहजे में नेहा से कहा, ‘‘कल सुबह 11 बजे तुम मुझे नेहरू पार्क के पास मिलो. हम दोनों सविता से मिलने चलेंगे.’’

‘‘हम उस औरत से मिलने जाएंगे, पर क्यों?’’ नेहा चौंकी.

‘‘देखो, राजीव भैया पर उस से अलग होने की बात का मुझे कोई खास असर नहीं दिख रहा है. मेरी समझ से कल रविवार को तुम और मैं सविता की खबर ले कर आते हैं. उसे डराधमका कर, समाज में बेइज्जती का डर दिखा कर, उस के पति को उस की चरित्रहीनता की जानकारी देने का भय दिखा कर हम जरूर उसे भैया से दूर करने में सफल रहेंगे,’’ संजीव की बातों से नेहा का दिल जोर से धड़कने लगा.

 

कुछ महीनों से एक युवती की ओर मेरा अट्रैक्शन बढ़ रहा है लेकिन वह शादीशुदा है, क्या करूं?

सवाल…

मैं 25 वर्षीय युवक हूं. अच्छी जौब है. शुरू से ही मेरा ध्यान कैरियर बनाने में रहा. लड़कियों की तरफ ध्यान नहीं दिया. मगर पिछले कुछ महीनों से मैं ऐसा फील कर रहा हूं कि मेरे औफिस में काम करने वाली युवती की ओर मेरा अट्रैक्शन बढ़ रहा है. जब उस के बारे में पता किया तो पता चला कि वह शादीशुदा है. बावजूद इसके, जब भी हमारी आंखें मिलती हैं तो ऐसा लगता है वह मुझ से प्रेम करती हो. मैं उस से अपने दिल की बात करना चाहता हूं, लेकिन क्या यह सही होगा?

जवाब…

यह आप का सोचना है कि वह युवती भी आप से प्रेम करती है. ख्याली पुलाव मत पकाइए. एक ही औफिस में काम करते हुए आंखें मिलना, बातचीत होना आम बात है इसलिए जब तक वह खुद अपने मुंह से आप से प्रेम का इजहार नहीं करती आप को उस के करीब जाने या प्रेम के इजहार के बारे में नहीं सोचना चाहिए. हो सकता है उस का स्वभाव ही ऐसा हो. आप को जब पता है कि वह शादीशुदा है तो इस का मतलब उस का बसा-बसाया घरपरिवार है. और आप दाल-भात में मूसलमंद की तरह घुसना चाहते हैं. आप यंग हैं, सिंगल हैं, और भी लड़कियां मिल जाएंगी. फिलहाल तो अपने काम में ध्यान दीजिए और आगे बढि़ए.

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मुझे लगता है कि मुझमें संबंध बनाने की कूवत नहीं है क्योंकि…

मेरी पत्नि मेरे साथ नहीं रहती क्या करूं?

सवाल….

मेरी उम्र 23 साल है और मैं एक 30 साल की विधवा से प्यार करता हूं. क्या हमारी शादी हो सकती है?

जवाब…

शादी तो हो सकती है पर 7 साल बड़ी एक विधवा. शादी कर के उसे निभा पाना आसान बात नहीं है. अगर आप की आमदनी ठीकठाक? है और आप समाज का मुकाबला कर सकते हैं तो ही शादी करें. शादी से पहले कुछ दिन साथ रह कर देख लें कि आप का प्यार सिर्फ बातों का ही तो नहीं है. वैसे, अब जब जीवन 60-70 साल तक आराम से चलता है, तब 7 साल का फर्क ज्यादा नहीं है.

कौंट्रासेप्टिव सैक्सुअल : आनंद की चाबी

‘‘नहीं, आज नहीं,’’ अजय ने जैसे ही भारती को अपने करीब खींचने की कोशिश की, भारती ने झट से उसे पीछे धकेल दिया.

‘‘यह क्या है? कुछ समय से देख रहा हूं कि जब भी मैं तुम्हारे पास आना चाहता हूं, तुम कोई न कोई बहाना बना कर दूर भागती हो. क्या अब मुझ में दिलचस्पी खत्म हो गई है?’’ अजय ने क्रोधित स्वर में पूछा.

‘‘मुझे डर लगता है,’’ भारती ने उत्तर दिया.

‘‘2 बच्चे हो गए, अब किस बात का डर लगता है?’’ अजय हैरान था.

‘‘इसीलिए तो डर लगता है कि कहीं फिर से प्रैग्नैंट न हो जाऊं. तुम से कहा था कि मैं औपरेशन करा लेती हूं, पर तुम माने नहीं. तुम गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते, इसलिए मैं किसी किस्म का रिस्क नहीं लेना चाहती हूं.’’

भारती की बात सुन कर अजय दुविधा में पड़ गया कि पत्नी कह तो ठीक रही है, लेकिन वह भी क्या करे? उसे कंडोम का इस्तेमाल करना पसंद नहीं था. उसे लगता था कि इस से सहवास का मजा बिगड़ जाता है, जबकि भारती को लगता था कि अगर वे कोई कौंट्रासेप्टिव इस्तेमाल कर लेंगे तो यौन संबंधों का वह पूरापूरा आनंद उठा सकेगी.

अब सुजाता की ही बात लें. उस का बेटा 8 महीने का ही था कि उसे दोबारा गर्भ ठहर गया. उसे अपने पति व स्वयं पर बहुत क्रोध आया. वह किसी भी हालत में उस बच्चे को जन्म देने की स्थिति में नहीं थी, न मानसिक न शारीरिक रूप से और न ही आर्थिक दृष्टि से. पहले बच्चे के जन्म से पैदा हुई कमजोरी अभी तक बनी हुई थी, उस पर उसे गर्भपात का दर्द झेलना पड़ा. वह शारीरिक व मानसिक तौर पर इतनी टूट गई कि उस ने पति से एक दूरी बना ली, जिस की वजह से उन के रिश्ते में दरार आने लगी. जब पति कंडोम का इस्तेमाल करने को राजी हुए तभी उन के बीच की दूरी खत्म हुई.

प्रैग्नैंसी का डर नहीं रहता

अगर पति या पत्नी दोनों में से एक भी किसी गर्भनिरोधक का प्रयोग करता है, तो महिला के मन में प्रैग्नैंट हो जाने का डर नहीं होता, जिस से वह यौन क्रिया का आनंद उठा पाती है. अगर पत्नी इस क्रिया में खुशी से पति का सहयोग देती है, तो दोनों को ही संतुष्टि मिलती है. अगर इस दौरान पत्नी तनाव में रहे और बेमन से पति की बात माने तो पति का असंतुष्ट रह जाना स्वाभाविक है. गर्भ ठहर जाने के डर से पत्नी का ध्यान उसी ओर लगा रहता है. यही नहीं, उस के बाद भी जब तक उसे मासिकधर्म नहीं हो जाता, वह तनाव में ही जीती है. पति से जितनी दूरी हो सके वह बनाए रखने की कोशिश करती है. वह जानती है कि गर्भवती होने पर बारबार गर्भपात करवाने का झंझट कितना तकलीफदेह होता है. बारबार गर्भपात कराने से उस की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है.

तनावमुक्त संबंध

इंडियाना यूनिवर्सिटी के किसी इंस्टिट्यूट के नए आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश औरतों का मानना है कि गर्भनिरोधक तरीके चाहे वे हारमोनल कौंट्रासेप्टिव हों या कंडोम, यौन संतुष्टि व उस के आनंद में कई गुना बढ़ोतरी कर देते हैं. तनावमुक्त यौन संबंध आपसी रिश्तों में तो उष्मा बनाए ही रखते हैं, साथ ही आनंद की चरम सीमा तक भी पहुंचा देते हैं.

दिल्ली के फोर्टिस एस्कौर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट की सीनियर क्लीनिकल साइकोलौजिस्ट डा. भावना बर्मी के अनुसार, अवरोध या किसी तरह का तनाव या फिर दबाव एक तरह का मनोवैज्ञानिक भय होता है, जिस के चलते हमारा मन ही नहीं, शरीर भी असहज हो जाता है. खासकर यौन संबंधों को ले कर मन व शरीर दोनों को ही ऐसे में कुछ अच्छा नहीं लगता है और तब वे अपने को हर तरह के आनंद से दूर कर लेते हैं. अगर शरीर चाहता भी है तो मन का अवरोध उसे रोक लेता है. तनाव के न होने पर जिस स्थिति को हम ‘कंडीशंड रिफलैक्स औफ द बौडी’ कहते हैं, वह यौन संबंधों को आनंददायक बना देता है. जाहिर सी बात है कि अगर गर्भवती होने या गर्भपात करवाने का तनाव न हो तो महिला उन्मुक्त हो कर यौन संबंधों का आनंद उठा सकती है.

रहती है बेफिक्री

गर्भनिरोधकों का प्रयोग करने से युगल को इस बात का डर नहीं रहता कि उन्हें अनचाही प्रैग्नैंसी का सामना करना पड़ेगा. चूंकि ये कौंट्रासेप्टिव एक सुरक्षाकवच की तरह काम करते हैं, इसलिए सैक्स के दौरान एक बेफिक्री औरत में रहती है, जो उस के हावभाव व पति को दिए जा रहे सहयोग में नजर आती है.

दिल्ली के फोर्टिस एस्कौर्ट्स हौस्पिटल की गाइनेकोलौजिस्ट डा. निशा कपूर कहती हैं, ‘‘इन के इस्तेमाल से औरत के दिमाग में एक सिक्योरिटी से रहती है कि अवांछित प्रैग्नैंसी या गर्भपात से उस का बचाव हो रहा है. इस कारण सैक्सुअल आनंद में बढ़ोतरी होती है और सहवास करने से पहले उसे सोचना नहीं पड़ता या इस से बचने के बहाने नहीं सोचने पड़ते. वैवाहिक जीवन को सुखी व सैक्स जीवन को आनंदमय बनाने के लिए इन का इस्तेमाल किया जा सकता है.’’

कौंट्रासेप्टिव चाहे पति इस्तेमाल करे या पत्नी, यह निर्णय तो उन दोनों का होता है, पर यह सही है कि कौंट्रासेप्टिव सैक्स के आनंद की चाबी होते हैं. सहवास करते समय दोनों के मन में अगर किसी तरह की टैंशन हो तो सिवा मनमुटाव के कोई परिणाम  सामने नहीं आता है. लेकिन बेफिक्री और सहर्ष बनाए गए यौन संबंध वैवाहिक जीवन में तो दरार डालने से बचाते ही हैं, साथ ही सैक्स के आनंद को भी दोगुना कर देते हैं.

अग्निपथ से सिर्फ बंदूकधारी मजदूर बनेंगे

अग्निवीर के पीछे मोदी सरकार का असली मकसद यह है कि इन सिपाहियों को अपनी जनता के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार बड़े पूंजीपतियों के लिए इस दौरान आदिवासी इलाकों में जमीनों पर, खदानों पर कब्जा करेंगे। समुद्र तटों पर कब्जा करेंगे, उस के बाद यह किसानों की जमीनों पर पूंजीपतियों का कब्जा करवाएंगे.
  जाहिर है, जनता इस सब का विरोध करेगी. जनता के विरोध को दबाने के लिए सरकार को बंदूकधारी मजदूर सिपाहियों की जरूरत पड़ेगी. मोदी सरकार इस देश के नौजवान को इस देश की जनता के खिलाफ लड़ाने का प्लान बना रही है. इन सिपाहियों को इस देश के मुसलमानों, दलितों व मजदूरों के खिलाफ भी इस्तेमाल किया जाएगा.
  यह पहले सदियों से किया जा रहा है जब रजवाड़ों और जागीरदारों के यहां लठैत रखे जाते थे जो निहत्थे दलितों और कमजोर पिछड़ों को सताते थे, उनकी उपज छीन लेते थे, बेटियां उठा ले जाते थे. आजादी के बाद यह काम सिर्फ पुलिस कर सकती थी पर अब पुलिस का खर्च भारी पड़ रहा है इसलिए प्राइवेट आर्मियां बनाने के लिए ट्रेनिंग पाए जवान समाज में छुट्टे छोड़े जा रहे हैं.
भगवाइयों  की तानाशाही, क्रूरता और बर्बरता को सरकारी सपोर्ट देने के लिए यह सेना तैयार की जा रही है, वरना अंतर्राष्ट्रीय हालात तो ऐसी नहीं है कि आप को पाकिस्तान बांग्लादेश, बर्मा, भूटान, नेपाल या श्रीलंका से कोई इतना बड़ा खतरा है कि आप की वर्तमान सेना उस से निबटने में कम पड़ रही है, इसलिए आप को इस तरह के नए सिपाही चाहिए.
 नौजवानों को हथियारबंद बनाना, उन्हें राष्ट्रवाद के नाम पर कट्टर बनाना, हिंसक बनाना और अपनी जनता के खिलाफ इस्तेमाल करना, यह फासीवादियों का एक तरीका होता है.संघ प्रायोजित यह सरकार उसी योजना पर काम कर रही है. इस में पैसा जनता का लगेगा और जनता की जायज मांगों को दबाने के लिए हथियारबंद सिपाही खड़े किए जाएंगे. संविधान को रौंदा जाएगा, लोकतंत्र को कुचला जाएगा, मानव अधिकारों का हनन होगा.
 विकास के नाम पर जो पूंजीवाद और कारपोरेटीकरण का दौर नई आर्थिक नीतियां लागू होने के बाद शुरू हुआ है, यह उस का रास्ते को आसान करने की ही चाल है. बच्चों की बड़े पैमाने पर मौत हो रही है, देश के बच्चे भूखे हैं, कुपोषित हैं, माताएं बच्चा पैदा करने में मरे जा रही हैं, देश के दलितआदिवासी कुपोषित हैं, भूखे व बीमार हैं. देश का पैसा उन की हालत सुधारने में खर्च होना चाहिए, स्कूल अस्पताल पर पैसा खर्च होना चाहिए. उस की बजाय आप नये सिपाही फिर उन की खिलाफत के लिए खड़ा करेंगे.
   हमे ऐसा समाज नहीं बनाना जिस में लाखों लोग हथियारबंद हो और बाकी के लोग उन से डरने वाली जनता. हम संविधान के पहले पन्ने पर वर्णित भारत के लोग हैं। गरीब लोग भारत को ऐसे हिंसक देश बनते हुए चुपचाप  देखते रह जाएंगे क्योंकि उन्हें तो मंदिरों की दहलीज साफ करने का काम दे दिया है जहां और कहीं से कमाया पैसा भी चढ़ाना होता है

शहनाज गिल का दुल्हन लुक हुआ वायरल, सिद्धार्थ के फैंस ने सुनाई खरी खोटी

शहनाज गिल एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. शहनाज गिल का एक नया लुक वायरल हो रहा है. जिसमें शहनाज गिल दुल्हन के लुक में नजर आ रही हैं. शहनाज गिल दुल्हन बनकर रैंप पर उतरी जिसे कुछ लोगों ने प्यार दिया है तो वहीं कुछ लोगों  ने उन्हें जमकर सुनाया है.

वैसे देखा जाए तो शहनाज गिल के इस अवतार को खूब पसंद किया जा रहा है. दरअसल रैंप के दौरान शहनाज गिल खूब शरमाते हुए नजर आईं. जिसे लोगों ने खूब पसंद किया है.

 

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दुल्हन बनने के बाद से शहनाज गिल का उत्साह सातवें आसमान पर आ चुका है. जिसे लोगों ने खूब पसंद किया है. शहनाज ने स्टेज पर जमकर ठुमके भी लगाएं हैं. वहीं कुछ फैंस शहनाज गिल को इस लुक में देखकर इमोशनल भी हो गए . वह शहनाज गिल को सिद्धार्थ शुक्ला की दुल्हन के अवतार में देखना चाहते थें.

शहनाज गिल को ऐसे देखकर फैंस को एकबार फिर से सिद्धार्थ शक्ला की याद आ गई तो उन्होंने शहाज गिल को जमकर खरी खोटी सुनाई.फेंस कह रहे हैं कि काश तस्वीर में सिद्धार्थ शुक्ला भी होते. हाल ही में खबर आई थी कि शहनाज गिल सलमान खान कि फिल्म कभी ईद कभी दीवाली से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली है.

बीते कई महीनों से उन्हें ब्रह्मकुारी आश्रम में जा रही थी. अपने दिमाग और मन को शांत करने के लिए. हालांकि अब पहले से ज्यादा शहनाज गिल के हालात में सुधार लग रहे हैं.

 

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