उलझन- भाग 2 : कनिका की मां प्रेरणा किसे देख कर थी हैरान?

यद्यपि कपिल ने कई बार प्रेरणा से बात करने की कोशिश की पर संकोच ने हर बार प्रेरणा को आगे बढ़ने से रोक दिया. कभी रास्ते में आतेजाते अगर कपिल पे्ररणा के करीब आता भी तो प्रेरणा का दिल तेजी से धड़कने लगता और तुरंत वह वहां से चली जाती. जोरजबरदस्ती कपिल को भी पसंद नहीं थी.

प्रेरणा की अल्हड़ जवानी के हसीन खयालों में कपिल ही कपिल समाया था. सारीसारी रात वह कपिल के बारे में सोचती और उस की बांहों में झूलने की तमन्ना अकसर उस के दिल में रहती थी पर कपिल के करीब जाने का साहस प्रेरणा में न था. स्वभाव से संकोची प्रेरणा बस सपनों में ही कपिल को छू पाती थी.

वह होली की सुबह थी. चारोें तरफ गुलाल ही गुलाल बिखर रहा था. लाल, पीला, नीला, हरा…रंग अपनेआप में चमक रहे थे. सभी अपनेअपने दोस्तों को रंग में नहलाने में जुटे हुए थे. इस कालोनी की सब से अच्छी बात यह थी कि सारे त्योहार सब लोग मिलजुल कर मनाते थे. होली के त्योहार की तो बात ही अलग है. जिस ने ज्यादा नानुकर की वह टोली का शिकार बन जाता और रंगों से भरे ड्रम में डुबो दिया जाता.

प्रेरणा अपनी टोली के साथ होली खेलने में मशगूल थी तभी प्रेरणा की मां ने उसे आवाज दे कर कहा था :

‘प्रेरणा, ऊपर छत पर कपड़े सूख रहे हैं, जा और उतार कर नीचे ले आ, नहीं तो कोई भी पड़ोस का बच्चा रंग फेंक कर कपड़े खराब कर देगा.’

प्रेरणा फौरन छत की ओर भागी. जैसे ही उस ने मां की साड़ी को तार से उतारना शुरू किया कि किसी ने पीछे से आ कर उस के चेहरे को लाल गुलाल से रंग दिया.

प्रेरणा ने घबरा कर पीछे मुड़ कर देखा तो कपिल को रंग से भरे हाथों के साथ पाया. एक क्षण को प्रेरणा घबरा गई. कपिल का पहला स्पर्श…वह भी इस तरह.

‘‘यह क्या किया तुम ने? मेरा सारा चेहरा…’’ पे्ररणा कुछ और बोलती इस से पहले कपिल ने गुनगुनाना शुरू कर दिया…

‘‘होली क्या है, रंगों का त्योहार…बुरा न मानो…’’

कपिल की आंखों को देख कर लग रहा था कि आज वह प्रेरणा को नहीं छोड़ेगा.

‘‘क्या हो गया है तुम्हें? भांगवांग खा कर आए हो…’’ घबराई हुई प्रेरणा बोली.

‘‘नहीं, प्रेरणा, ऐसा कुछ नहीं है. मैं तो बस…’’ प्रेरणा का इस तरह का रिऐक्शन देख कर एक बार तो कपिल घबरा गया था.

पर आज कपिल पर होली का रंग खूब चढ़ा हुआ था. तार पर सूखती साड़ी का एक कोना पकड़ेपकड़े कब वह प्रेरणा के पीछे आ गया इस का एहसास प्रेरणा को अपने होंठों पर पड़ती कपिल की गरम सांसों से हुआ.

इतने नजदीक आए कपिल से दूर जाना आज प्रेरणा को भी गवारा नहीं था. साड़ी लपेटतेलपेटते कपिल और प्रेरणा एकदूसरे के अंदर समाए जा रहे थे.

कपिल के हाथ प्रेरणा के कंधे से उतर कर उस की कमर तक आ रहे थे…इस का एहसास उस को हो रहा था. लेकिन उन्हें रोकने की चेष्टा वह नहीं कर रही थी.

कपिल के बदन पर लगे होली के रंग धीरेधीरे प्रेरणा के बदन पर चढ़ते जा रहे थे. साड़ी में लिपटेलिपटे दोनों के बदन का रंग अब एक हो चला था.

शारीरिक संबंध चाहे पहली बार हो या बारबार, प्रेमीप्रेमिका के लिए रसपूर्ण ही होता है. जब तक प्रेरणा कपिल से बचती थी तभी तक बचती भी रही थी पर अब तो दोनों ही एक होने का मौका ढूंढ़ते थे और मौका उन्हें मिल भी जाता था. सच ही है जहां चाह होती है वहां राह भी मिल जाती है.

पर इस प्रेमकथा का अंत इस तरह होगा, यह दोनों ने नहीं सोचा था.

कपिल और प्रेरणा की लाख दुहाई देने पर भी कपिल की रूढि़वादी दादी उन के विवाह के लिए न मानीं और दोनों प्रेमी जुदा हो गए. घर वालों के खिलाफ जाना दोनों के बस की बात नहीं थी. 2 घर की छतों से शुरू हुई सालों पुरानी इस प्रेम कहानी का अंत भी दोनों छतों के किनारों पर हो गया था.

सुगंध – भाग 1 : क्या राजीव को पता चली रिश्तों की अहमियत

अ पने दोस्त राजीव चोपड़ा को दिल का दौरा पड़ने की खबर सुन कर मेरे मन में पहला विचार उभरा कि अपनी जिंदगी में हमेशा अव्वल आने की दौड़ में बेतहाशा भाग रहा मेरा यार आखिर जबरदस्त ठोकर खा ही गया.

रात को क्लिनिक कुछ जल्दी बंद कर के मैं उस से मिलने नर्सिंग होम पहुंच गया. ड्यूटी पर उपस्थित डाक्टर से यह जान कर कि वह खतरे से बाहर है, मेरे दिल ने बड़ी राहत महसूस की थी.

मुझे देख कर चोपड़ा मुसकराया और छेड़ता हुआ बोला, ‘‘अच्छा किया जो मुझ से मिलने आ गया पर तुझे तो इस मुलाकात की कोई फीस नहीं दूंगा, डाक्टर.’’

‘‘लगता है खूब चूना लगा रहे हैं मेरे करोड़पति यार को ये नर्सिंग होम वाले,’’ मैं ने उस का हाथ प्यार से थामा और पास पड़े स्टूल पर बैठ गया.

‘‘इस नर्सिंग होम के मालिक डाक्टर जैन को यह जमीन मैं ने ही दिलाई थी. इस ने तब जो कमीशन दिया था, वह लगता है अब सूद समेत वसूल कर के रहेगा.’’

‘‘यार, कुएं से 1 बालटी पानी कम हो जाने की क्यों चिंता कर रहा है?’’

‘‘जरा सा दर्द उठा था छाती में और ये लोग 20-30 हजार का बिल कम से कम बना कर रहेंगे. पर मैं भी कम नहीं हूं. मेरी देखभाल में जरा सी कमी हुई नहीं कि मैं इन पर चढ़ जाता हूं. मुझ से सारा स्टाफ डरता है…’’

दिल का दौरा पड़ जाने के बावजूद चोपड़ा के व्यवहार में खास बदलाव नहीं आया था. वह अब भी गुस्सैल और अहंकारी इनसान ही था. अपने दिल के दौरे की चर्चा भी वह इस अंदाज में कर रहा था मानो उसे कोई मैडल मिला हो.

कुछ देर के बाद मैं ने पूछा, ‘‘नवीन और शिखा कब आए थे?’’

अपने बेटेबहू का नाम सुन कर चोपड़ा चिढ़े से अंदाज में बोला, ‘‘नवीन सुबहशाम चक्कर लगा जाता है. शिखा को मैं ने ही यहां आने से मना किया है.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘अरे, उसे देख कर मेरा ब्लड प्रेशर जो गड़बड़ा जाता है.’’

‘‘अब तो सब भुला कर उसे अपना ले, यार. गुस्सा, चिढ़, नाराजगी, नफरत और शिकायतें…ये सब दिल को नुकसान पहुंचाने वाली भावनाएं हैं.’’

‘‘ये सब छोड़…और कोई दूसरी बात कर,’’ उस की आवाज रूखी और कठोर हो गई.

कुछ पलों तक खामोश रहने के बाद मैं ने उसे याद दिलाया, ‘‘तेरे भतीजे विवेक की शादी में बस 2 सप्ताह रह गए हैं. जल्दी से ठीक हो जा मेरा हाथ बंटाने के लिए.’’

‘‘जिंदा बचा रहा तो जरूर शामिल हूंगा तेरे बेटे की शादी में,’’ यह डायलाग बोलते हुए यों तो वह मुसकरा रहा था, पर उस क्षण मैं ने उस की आंखों में डर, चिंता और दयनीयता के भाव पढ़े थे.

नर्सिंग होम से लौटते हुए रास्ते भर मैं उसी के बारे में सोचता रहा था.

हम दोनों का बचपन एक ही महल्ले में साथ गुजरा था. स्कूल में 12वीं तक की शिक्षा भी  साथ ली थी. फिर मैं मेडिकल कालिज में प्रवेश पा गया और वह बी.एससी. करने लगा.

पढ़ाई से ज्यादा उस का मन कालिज की राजनीति में लगता. विश्वविद्यालय के चुनावों में हर बार वह किसी न किसी महत्त्वपूर्ण पद पर रहा. अपनी छात्र राजनीति में दिलचस्पी के चलते उस ने एलएल.बी. भी की.

‘लोग कहते हैं कि कोई अस्पताल या कोर्ट के चक्कर में कभी न फंसे. देख, तू डाक्टर बन गया है और मैं वकील. भविष्य में मैं तुझ से ज्यादा अमीर बन कर दिखाऊंगा, डाक्टर. क्योंकि दौलत पढ़ाई के बल पर नहीं बल्कि चतुराई से कमाई जाती है,’ उस की इस तरह की डींगें मैं हमेशा सुनता आया था.

उस की वकालत ठीक नहीं चली तो वह प्रापर्टी डीलर बन गया. इस लाइन में उस ने सचमुच तगड़ी कमाई की. मैं साधारण सा जनरल प्रेक्टिशनर था. मुझ से बहुत पहले उस के पास कार और बंगला हो गए.

 

खेसारी लाल का नया गाना हुआ लॉच, वीडियो देख हो जाएंगे इमोशनल

भोजपुरी इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर खेसारी लाल यादव आए दिन चर्चा में बने रहते हैं, खेसारी लाल यादव का नया गाना लॉच हो गया है. जिसमें वह शानदार परफॉर्मेंस देते नजर आ रहे हैं. 26 अगस्त के दिन खेसारी लाल यादव ने अपना नया गाना रिलीज कर दिया है. जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

इस गाने को अभी तक 356,990 व्यूज मिल चुका है. इस गाने में खेसारी लाल यादव काफी ज्यादा दुखी नजर आ रहे हैं. बता दें कि इस गाने को खुद खेसारी लाल यादव ने ही गाया है. इसके बोल अनुपम पांडे ने लिखे हैं. इस गाने में म्यूजिक विनायक पांडे ने दिया है.

टीसीरिज के यूट्यूब पर लॉच किया गया है. इस गाने के व्यूज को देखने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि इस गाने को लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

वैसे भी भोजपुरी के स्टार खेसारी लाल यादव को लोग खूब पसंद करते हैं. खेसारी लाल यादव लोगों के पसंदीदा कलाकारों में से एक हैं. खेसारी लाल यादव का फिल्मी कैरियर काफी ज्यादा सफल रहा है. उन्होंने कई सारे सुपर हिट फिल्मों में काम किया है. खेसारी लाल यादव हर फिल्म में एक नया कहनी होता है जिसे दर्शक देखऩा पसंद करते हैं.

हरियाणा में हुआ सोनाली फोगाट का अंतिम संस्कार, बेटी का रो- रोकर बुरा हाल

मशहूर टीकटॉकर और बिग बॉस 14 की स्टार रही सोनाली फोगाट का बीते 23 अगस्त को निधन हो गया है. सोनाली फोगाट के जाने से सभी लोग सदमें में हैं. बता दें कि कुछ सालों पहले सोनाली के पति का निधन हो गया था.

जिसके बाद से वह अपनी बेटी के साथ अकेली रह रही थी, अब सोनाली भी अपनी बेटी को अकेला छोड़कर जा चुकी हैं. बता दें कि सोनाली की बेटी ने उन्हें आग दिया है. सोनाली की मौत गोवा में  हुई थी जहां से उनके शव को हरियाणा में लाया गया .

सोनाली की बेटी के साथ- साथ उनका पूरा परिवार रोता बिलखता नजर आय़ा. सोनाली फोगाट की 15 साल की बेटी यशोधरा ने अपनी मां के शव को कंधा दिया.

फोटो में यशोधरा मां को कंधा देने के दौरान रोती बिलखती नजर आईं, सोनाली  फोगाट का अंतिम संस्कार हरियाणा के हिसार के श्मशान घाट में किया गया. सोनाली के अंतिम संस्कार कि सारी प्रक्रिया उनकी बेटी निभाती नजर आईं.

Sonali Phogat

15 वर्ष की यशोधरा ने ही अपनी मां को मुखअग्नि दी थी, जिससे जुड़ी फोटो लोगों का खूब ध्यान खींच रही है.

बता दें कि सोनाली फोगाट की बेटी यशोधरा ने अपने मां के लिए न्याय की मांग की हैं, उन्होंने बताया है कि सोनाली के साथ जिसने भी ऐसा किया है उसे सजा तो आवश्य मिलनी चाहिए. सोनाली के साथ गोवा में सांगवान और सुखविंदर वासी भी पहुंचे थें. जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

बता दें कि सोनाली अपनी बेटी यशोधरा के बहुत ज्यादा करीब थी. यशोधरा अपनी मां को बहुत मिस करने लगी हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक ये सबकुछ हुआ कैसे.

लूट का जरिया बन रही टैक्नोलौजी !

टैक्नोलौजी गरीबों, कम पढ़ेलिखे नौजवानों, बेचारों, बेरोजगारों को कैसे पूरी तरह लूट का जरिया बनती जा रही है, इस का सब से बड़ा नमूना है एप्प के जरिए फलफूल रहा व्यापार. इस में एप्प में चलाई जा रही टैक्सी सॢवसें, फूड डिलीवरी सॄवसें, दवाओं को घरघर पहुंचाने की सॢवसें, मेडिकल टेस्ट कराने की सॢवसें, ब्यूचोलियों, कारपेंटरों, इलैक्ट्रिशियनों की सॢवसें शामिल हो चुकी हैं. अपने खुद के नाम से सेवा देने वालों की कमी होती जा रही है और एयर कंडीशंड आफिसों में कंप्यूटरों के आगे बैठे लोग जमीन पर तपती धूप और कड़ाके की ठंड में काम कर रहे लोगों को चूस रहे हैं क्योंकि उन के पास मोबाइल से हर हाथ पहुंचने वाली टैक्नोलौजी है.

इन सेवाओं को देने वालों ने अपने यूनियनों को बनाने की कोशिश शुरू की है हालांकि यह 1857 की अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की तरह बेमतलब की साबित होगी क्योंकि इन के पास न टैक्नौलौजी न स्ट्रेरेजी.

दुनिया भर में वह गरीब रहेगा जो नई टैक्नीक को नहीं अपनाएगा और नई टैक्नीक की जानकारी अब इसी मंहगी कर दी गई है कि केवल अमीरों के बच्चे ही जा सकते हैं. ये गरीब पहले छोटी दुकानों में या छोटे खोखों में काम करते थे, अब बड़ी, कईकई देशों में फैली कंपनियों के जरिए काम कर रहे हैं क्योंकि कंपनी के पास टैक्नोलौजी है. वे ग्राहकों, उत्पादकों और डिलिवरी करने वालों सब को लूट सकते हैं.

फूड डिलिवरी का एक नमूना इन बिग सेवा देने वालों की मीङ्क्षटग में बताया गया. इन्हें इंसैङ्क्षटव दिया गया कि यदि एक दिन में 23 डिलिवरी करेंगे तो एक्स्ट्रा पैसे मिलेंगे पर कंप्यूटर सिस्टम सेवा बनाया कि वह 20 आर्डरों के बाद नया आर्डर देगा ही नहीं. केवल छुट्टियों और त्यौहार के साल में 10-95 दिन यह एक्स्ट्रा कमाई हो सकती है.

टेक्नोलौजी के जरिए इन बिग सेवा देने वाली कंपनियों ने कोने की किराने की दुकान का धंधा कम कर दिया, पलंबर को बेकार कर दिया, कैमिस्ट खाली रहने लगा, रेस्ट्राओं का बिजनैस कम हो गया, क्लाउड  किचन चल गईं जिस में किचन का नाम है पर रेस्ट्रा है ही नहीं. इन सब की जान डिलिवरी देने वाले, मेडिकल सैंपल लेने वाले, ब्यूटिशियन, जिम, कारपैंटरी की सेवा देने वाले हैं पर न वे दाम तय करते हैं, न क्वालिटी, टैक्नोजौली कंपनी और ग्राहक के बीच में फंस कर रह गए हैं. मोटर साइकलों पर ये घुड़संवार सैनिकों की वह लाइन है जिस पर लड़ाइयां जीती जाती हैं पर मरते सब से ज्यादा इन्हीं में से हैं.

टैक्नोलौजी बुरी नहीं होती पर आमतौर पर हर युग में टैक्नोलौजी का इजाद करने वाले या कंट्रोल करने वालों के राज किया है और उन से काम कराते वाले फक्कड़ गरीब बने रहे हैं. आज अमेजन की डिलिवरी हो, स्वीगी का फूड पार्सल या 1 एमजी की वलड टेङ्क्षस्टग, जो ग्राहक के संपर्क में आता है उसे न सामान के बारे में काम आता है, न खाने के बारे में न टेङ्क्षस्टग की कला के बारे में उबर या ओला वाला ड्राइवर कंपनी की टैक्नोलौजी के दिए गए रूप पर चल कर ग्राहक लेता है और उसी टैक्नोलौजी के बताए रास्ते पर चल कर पहुंचाता है, उसे कंपनी क्या देगी, यह कंपनी की मर्जी है.

बिग सिस्टम ने ‘मैं ने इसे बनाया’ बड़ी तसल्ली का हक हरेक कामगार से छीन लिया है. यह जलन बेबस है, लाचार है.

जीजा के प्यार का रस : भाग 2

चंचल और हसीन सोनम को रोकनेटोकने वाला अब कोई नहीं था. पति के जाते ही वह बनसंवर कर घर के बाहर ताकझांक करने लगती. हालांकि वह 2 बेटियों की मां बन चुकी थी. लेकिन उस की उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था.

सोनम के घर कमलेश का आनाजाना था. वह सोनम की फुफेरी बहन दीपिका का पति था. कमलेश मूलरूप से महाराजगंज (रायबरेली) का रहने वाला था, लेकिन कानपुर शहर में रानीगंज (काकादेव) मोहल्ले में रहता था. वह शटरिंग का काम करता था.

कमलेश और सोनम का रिश्ता जीजासाली का था. इस नाते वह सोनम से हंसीमजाक व छेड़छाड़ भी कर लेता था. सोनम उस की हंसीमजाक का बुरा नहीं मानती थी, बल्कि वह खुद भी उस से छेड़छाड़ व मजाक करती थी.सोनम को कमलेश की लच्छेदार बातें भी बहुत पसंद आती थीं, इसलिए वह भी उस से खूब बतियाती थी. दरअसल, दोनों के दिलों में एकदूसरे के प्रति चाहत पैदा हो गई थी. कमलेश जब भी उस के रूपसौंदर्य की तारीफ करता था तो सोनम के शरीर में अलग तरह की तरंगे उठने लगती थीं.

2 बच्चों की मां बनने के बाद सोनम के रूपलावण्य में और भी निखार आ गया था. उस का गदराया यौवन और भी रसीला हो गया था. झील सी गहरी आंखों में मादकता छलकती थी. संतरे की फांकों जैसे अधरों में ‘शहद जैसा द्रव्य’ समा गया था. सुराहीदार गरदन के नीचे नुकीले शिखर किसी को भी आकर्षित करने के लिए पर्याप्त थे. उस की नागिन सी लहराती काली चोटी सदैव नितंबों को चूमती
रहती थी.

घर आतेजाते कमलेश अकसर सोनम के रूपलावण्य की तारीफ करता था. किसी मर्द के मुंह से अपनी तारीफ सुनना हर औरत की सब से बड़ी कमजोरी होती है. सोनम से भी रहा नहीं गया.
कमलेश ने एक रोज उस के हुस्न और जिस्म की तारीफ की तो वह फूल कर गदगद हो गई. फिर वह बुझे मन से बोली, ‘‘ऐसी खूबसूरती किस काम की, जिस की तरफ पति ध्यान ही न दे.’’
कमलेश को सोनम की किसी ऐसी ही कमजोर नस की तलाश थी. जैसे ही उस ने अपने पति की बेरुखी का बखान किया, कमलेश ने उस का हाथ थाम लिया, ‘‘तुम चिंता क्यों करती हो, हीरे की परख जौहरी ही करता है. आज से तुम्हारे दुख मेरे हैं और मेरी सारी खुशियां तुम्हारी.’’

कमलेश की लच्छेदार बातों ने सोनम का मन मोह लिया. वह उस की बातों और उस के व्यक्तित्व की पूरी तरह कायल हो गई. अंदर ही अंदर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. आखिर में मन बेकाबू होने लगा तो सोनम ने कांपते होंठों से कहा, ‘‘अब तुम जाओ, उस के आने का समय हो गया है. कल दोपहर में आना. मैं इंतजार करूंगी.’’

कमलेश ने वह रात करवटें बदलते काटी. सारी रात वह सोनम के खयालों में डूबा रहा. सुबह वह देर से जागा. दोपहर होतेहोते वह सजसंवर कर सोनम के घर जा पहुंचा. सोनम उसी का इंतजार कर रही थी. उस ने उस दिन खुद को कुछ विशेष ढंग से सजायासंवारा था. कमलेश ने पहुंचते ही सोनम को अपनी बांहों में समेट लिया, ‘‘आज तो तुम इंद्र की परी लग रही हो, जी चाहता है नजर न हटाऊं.’’
‘‘थोड़ा सब्र से काम लो जीजाजी. इतनी बेसब्री ठीक नहीं होती,’’ सोनम ने मुसकरा कर कहा, ‘‘कम से कम दरवाजा भीतर से बंद कर लो, वरना किसी आनेजाने वाले की नजर पड़ गई तो हंगामा बरप जाएगा.’’

कमलेश ने फौरन घर का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया. फिर बेकरार कमलेश ने सोनम को गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया. सोनम ने भी कस कर उसे जकड़ लिया. कमलेश की गर्म बांहों में गजब का जोश था. आनंद का मोती पाने के लिए वह सोनम के शबाब के सागर में गहरे उतरता चला गया.

जीजा के जोश से सोनम निहाल हो गई. उस ने भी जीजा का उत्साह बढ़ाते हुए अपना बदन उस से रगड़ना शुरू कर दिया. कमलेश का तूफान जब थमा तो सोनम के चेहरे पर असीम तृप्ति थी. सोनम ने कभी पति से ऐसी संतुष्टि नहीं पाई थी, जैसी जीजा से पाई.

सोनम से नशीला सुख पा कर कमलेश फूला नहीं समा रहा था. सोनम भी सैक्स का साथी पा कर खुश थी. बस, उस रोज से दोनों के बीच वासना का खेल अकसर खेला जाने लगा. अब कमलेश अकसर सोनम से मिलन करने आने लगा. सोनम के लिए अब पति का कोई महत्त्व नहीं
रह गया, क्योंकि सैक्स का साथी जीजा बन गया.

सोनम के पति सर्वेश और कमलेश में खूब पटती थी. रविवार के दिन जब सर्वेश की दुकान बंद रहती तो कमलेश शराब की बोतल ले कर सर्वेश के घर आ जाता फिर दोनों की महफिल जमती. सोनम भी उन का साथ देती.
कमलेश सोनम से खुल कर हंसीमजाक करता. जीजासाली का रिश्ता था, अत: सर्वेश ने कभी आपत्ति नहीं की. मजाकमजाक में कमलेश रिश्ते की हद भी पार कर जाता, लेकिन सर्वेश खुल कर उस का विरोध नहीं कर सका.

साढ़ू के नाजुक रिश्ते की उस ने हमेशा मर्यादा बनाए रखने की कोशिश की थी. लेकिन सोनम थी कि उसे जरा भी इस की परवाह नहीं थी. वह खुल कर कमलेश के उल्टेसीधे मजाकों के जवाब देती और उस से घुलमिल कर तरहतरह की बातें करती.सर्वेश ने कई बार सोनम को उस की हरकतों के लिए आगाह किया, लेकिन वह हर बार सर्वेश को अपनी लागीलिपटी बातों से फुसला लेती.

सुगंध – भाग 2 : क्या राजीव को पता चली रिश्तों की अहमियत

हमारी दोस्ती की नींव मजबूत थी इसलिए दिलों का प्यार तो बना रहा पर मिलनाजुलना काफी कम हो गया. उस का जिन लोगों के साथ उठनाबैठना था, वे सब खानेपीने वाले लोग थे. उस तरह की सोहबत को मैं ठीक नहीं मानता था और इसीलिए हम कम मिलते.

हम दोनों की शादी साथसाथ हुई और इत्तफाक से पहले बेटी और फिर बेटा भी हम दोनों के घर कुछ ही आगेपीछे जन्मे.

चोपड़ा ने 3 साल पहले अपनी बेटी की शादी एक बड़े उद्योगपति खानदान में अपनी दौलत के बल पर की. मेरी बेटी ने अपने सहयोगी डाक्टर के साथ प्रेम विवाह किया. उस की शादी में मैं ने चोपड़ा की बेटी की शादी में आए खर्चे का शायद 10वां हिस्सा ही लगाया होगा.

रुपए को अपना भगवान मानने वाले चोपड़ा का बेटा नवीन कालिज में आने तक एक बिगड़ा हुआ नौजवान बन गया था. उस की मेरे बेटे विवेक से अच्छी दोस्ती थी क्योंकि उस की मां सविता मेरी पत्नी मीनाक्षी की सब से अच्छी सहेली थी. इन दोनों नौजवानों की दोस्ती की मजबूत नींव भी बचपन में ही पड़ गई थी.

‘नवीन गलत राह पर चल रहा है,’ मेरी ऐसी सलाह पर चोपड़ा ने कभी ध्यान नहीं दिया था.

‘बाप की दौलत पर बेटा क्यों न ऐश करे? तू भी विवेक के साथ दिनरात की टोकाटाकी वाला व्यवहार मत किया कर, डाक्टर. अगर वह पढ़ाई में पिछड़ भी गया तो कोई फिक्र नहीं. उसे कोई अच्छा बिजनेस मैं शुरू करा दूंगा,’’ अपनी ऐसी दलीलों से वह मुझे खीज कर चुप हो जाने को मजबूर कर देता.

आज इस करोड़पति इनसान का इकलौता बेटा 2 कमरों के एक साधारण से किराए वाले फ्लैट में अपनी पत्नी शिखा के साथ रह रहा था. नर्सिंग होम से सीधे घर न जा कर मैं उसी के फ्लैट पर पहुंचा.

नवीन और शिखा दोनों मेरी बहुत इज्जत करते थे. इन दोनों ने प्रेम विवाह किया था. साधारण से घर की बेटी को चोपड़ा ने अपनी बहू बनाने से साफ मना कर दिया, तो इन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली थी.

चोपड़ा की नाराजगी को नजरअंदाज करते हुए मैं ने इन दोनों का साथ दिया था. इसी कारण ये दोनों मुझे भरपूर सम्मान देते थे.

चोपड़ा को दिल का दौरा पड़ने की चर्चा शुरू हुई, तो नवीन उत्तेजित लहजे में बोला, ‘‘चाचाजी, यह तो होना ही था.’’ रोजरोज की शराब और दौलत कमाने के जनून के चलते उन्हें दिल का दौरा कैसे न पड़ता?

‘‘और इस बीमार हालत में भी उन का घमंडी व्यवहार जरा भी नहीं बदला है. शिखा उन से मिलने पहुंची तो उसे डांट कर कमरे से बाहर निकाल दिया. उन के जैसा खुंदकी और अकड़ू इनसान शायद ही दूसरा हो.’’

‘‘बेटे, बड़ों की बातों का बुरा नहीं मानते और ऐसे कठिन समय में तो उन्हें अकेलापन मत महसूस होने दो. वह दिल का बुरा नहीं है,’’ मैं उन्हें देर तक ऐसी बातें समझाने के बाद जब वहां से उठा तो मन बड़ा भारी सा हो रहा था.

चोपड़ा ने यों तो नवीन को पूरी स्वतंत्रता से ऐश करने की छूट हमेशा दी, पर जब दोनों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई तो बाप ने बेटे को दबा कर अपनी चलानी चाही थी.

जिस घटना ने नवीन के जीवन की दिशा को बदला, वह लगभग 3 साल पहले घटी थी.

उस दिन मेरे बेटे विवेक का जन्मदिन था. नवीन उसे नए मोबाइल फोन का उपहार देने के लिए अपने साथ बाजार ले गया.

वहां दौलत की अकड़ से बिगडे़ नवीन की 1 फोन पर नीयत खराब हो गई. विवेक के लिए फोन खरीदने के बाद जब दोनों बाहर निकलने के लिए आए तो शोरूम के सुरक्षा अधिकारी ने उसे रंगेहाथों पकड़ जेब से चोरी का मोबाइल बरामद कर लिया.

‘गलती से फोन जेब में रह गया है. मैं ऐसे 10 फोन खरीद सकता हूं. मुझे चोर कहने की तुम सब हिम्मत कैसे कर रहे हो,’ गुस्से से भरे नवीन ने ऐसा आक्रामक रुख अपनाया, पर वे लोग डरे नहीं.

मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया जब नवीन ने सुरक्षा अधिकारी पर तैश में आ कर हाथ छोड़ दिया.

उन लोगों ने पहले जम कर नवीन की पिटाई की और फिर पुलिस बुला ली. बीचबचाव करने का प्रयास कर रहे विवेक की कमीज भी इस हाथापाई में फट गई थी.

पुलिस दोनों को थाने ले आई. वहीं पर चोपड़ा और मैं भी पहुंचे. मैं सारा मामला रफादफा करना चाहता था क्योंकि विवेक ने सारी सचाई मुझ से अकेले में बता दी थी, लेकिन चोपड़ा गुस्से से पागल हो रहा था. उस के मुंह से निकल रही गालियों व धमकियों के चलते मामला बिगड़ता जा रहा था.

उस शोरूम का मालिक भी रुतबेदार आदमी था. वह चोपड़ा की अमीरी से प्रभावित हुए बिना पुलिस केस बनाने पर तुल गया.

एक अच्छी बात यह थी कि थाने का इंचार्ज मुझे जानता था. उस के परिवार के लोग मेरे दवाखाने पर छोटीबड़ी बीमारियों का इलाज कराने आते थे.

उस की आंखों में मेरे लिए शर्मलिहाज के भाव न होते तो उस दिन बात बिगड़ती ही चली जाती. वह चोपड़ा जैसे घमंडी और बदतमीज इनसान को सही सबक सिखाने के लिए शोरूम के मालिक का साथ जरूर देता, पर मेरे कारण उस ने दोनों पक्षों को समझौता करने के लिए मजबूर कर दिया.

हां, इतना उस ने जरूर किया कि उस के इशारे पर 2 सिपाहियों ने अकेले में नवीन की पिटाई जरूर की.

‘बाप की दौलत का तुझे ऐसा घमंड है कि पुलिस का खौफ भी तेरे मन से उठ गया है. आज चोरी की है, कल रेप और मर्डर करेगा. कम से कम इतना तो पुलिस की आवभगत का स्वाद इस बार चख जा कि कल को ज्यादा बड़ा अपराध करने से पहले तू दो बार जरूर सोचे.’

मेरे बेटे की मौजूदगी में उन 2 पुलिस वालों ने नवीन के मन में पुलिस का डर पैदा करने के लिए उस की अच्छीखासी धुनाई की थी.

गे संबंधों का लव ट्रायएंगल

मैं एक लड़की से प्यार करता हूं और मुझे इस बात का एहसास तब नहीं हुआ जब वह मेरी दोस्त थी, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं एक लड़की से प्यार करता हूं. मुझे इस बात का एहसास तब नहीं हुआ जब वह मेरी दोस्त थी. अब वह और मैं दोस्त नहीं हैं. अब हम एकदूसरे से बात भी नहीं करते. हम कुछ समय पहले अच्छे दोस्त थे. कोचिंग में साथ बैठते और साथ घूमतेफिरते थे. एक दिन बातोंबातों में उस ने बताया कि वह मुझ से प्यार करने लगी है. मैं रैडी नहीं था.

मैं समझ नहीं पाया था कुछ. जब मैंने उसे बताया कि मैं ऐसा कुछ फील नहीं करता तो उस ने कहा था कि उसे यह सब जान कर तकलीफ हुई है. मैं तब भी कुछ सम झ नहीं पाया. वह मुझ से नजरें चुराने लगी और हमारा बात करना भी कम होता गया. वह अब मेरे साथ नहीं बैठती, न ही बात करती है. मैं उसे वापस कैसे पाऊं?

जवाब-

अगर आप को लगता है कि अब भी उस के मन में आप के लिए फीलिंग्स हैं तो देर मत कीजिए. उस के पास जाइए और अपने मन की बात कह दीजिए. वह आप से अब भी प्यार करती होगी तो आप की फीलिंग्स जान कर खुशी से भर जाएगी. आप दोनों के बीच की यह दूरी  झट खत्म हो जाएगी. बस, अपने मन की बात कहने में  झिझकिए मत.

प्यार जब एकतरफा हो तो तकलीफ देता है लेकिन अगर दोतरफा हो और तब भी आप एकसाथ न हों तो इस से बुरा भला क्या होगा. आप एक बार उसे तकलीफ दे चुके हैं जिस से हो सकता है वह अब तक न उबरी हो. अब आप के पास सबकुछ ठीक करने का मौका है तो उसे यों सोचते रहने में जाया मत कीजिए.

क्या स्पर्म से पुरुषों में ताकत बढ़ती है, पढ़ें पूरी खबर

लेखक- ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

आलोक के सासससुर व मातापिता परेशान हो गए. आलोक की बीवी उस के घर आने को तैयार नहीं थी. उसे बहुत समझाया, मगर वह मानी नहीं. इस की पूरी पड़ताल की गई. तब सचाई का पता चला कि आलोक अपनी बीवी के साथ हमबिस्तरी करने से दूर भागता था, इस कारण उस की बीवी उस के पास रहना नहीं चाहती थी.

आलोक के दोस्तों से बात करने पर पता चला कि आलोक अपनी ताकत नहीं खोना चाहता था. इस कारण वह अपनी बीवी से दूर भागता था.

उस का कहना था, ‘‘वीर्य बहुत कीमती होता है. उसे नष्ट नहीं करना चाहिए. इस के संग्रह से ताकत बढ़ती है.’’ यह जान कर आलोक के मातापिता ने अपना सिर पीट लिया.

ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जिन में हमें इस बात का पता चलता है कि यह भ्रम कितनी व्यापकता से फैला हुआ है, इस भ्रम की वजह से कई खुशहाल परिवार उजड़ जाते हैं. इन उजड़े हुए अधिकांश परिवारों के व्यक्तियों का मानना होता है कि वीर्य संगृहीत किया जा सकता है. क्या इस के संग्रह से ताकत आती है? क्या वाकई यह भ्रम है या यह हकीकत है. हम यहां इस को समझने का प्रयास करते हैं.

आलोक के मातापिता समझदार थे. वे आलोक को डाक्टर के पास ले गए. डाक्टर यह सुन कर मुसकराया. उन्होंने आलोक से कहा, ‘‘तुम्हारी तरह यह भ्रम कइयों को होता है.’’

डाक्टर ने आलोक को कई उदाहरण दे कर समझाया तब उस की समझ में आया कि उस ने वास्तव में एक भ्रम पाल रखा था, जिस के कारण उस का परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया था. उस के परिवार और उस की खुशहाल जिंदगी को डाक्टर साहब और उस के मातापिता ने अपनी सूझबूझ से बचा लिया. नतीजतन, वह आज अपनी बीवी और 2 बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहा है.

शरीर विज्ञान और प्राकृतिक विज्ञान के अपने नियम हैं. उन के अपने सिद्धांत हैं. वे उन्हीं का पालन करते हैं. नियम कहता है कि वीर्य को संगृहीत नहीं किया जा सकता है. जिस तरह एक भरे हुए गिलास में और पानी नहीं भरा जा सकता है वैसे ही वीर्यग्रंथि में एक सीमा के बाद और वीर्य नहीं भरा जा सकता है. यदि शरीर में वीर्य बनना जारी रहा तो वह किसी न किसी तरह शरीर से बाहर निकल जाता है.

वीर्य का गुणधर्म है बहना

वीर्य शरीर से बहने और बाहर निकलने के लिए शरीर में बनता है. वह किसी न किसी तरह बहेगा ही. यदि आप हमबिस्तरी कर के पत्नी के साथ आनंददायक तरीके से बहा दें तो ठीक से बह जाएगा, यदि ऐसा नहीं करोगे तो वह स्वप्नदोष के जरिए बह कर निकल जाएगा.

वीर्य का कार्य प्रजनन चक्र को पूरा करना होता है. बस, वहीं उस का कार्य और वही उस की उम्र होती है. उस में उपस्थित शुक्राणु औरत के शरीर में जाने और वहां अंडाणु से मिल कर शिशु उत्पन्न करने के लिए ही बनते हैं. उन की उम्र 2 से 3 दिन के लगभग होती है. यदि उस दौरान उन का उपयोग कर लिया जाए तो वे अपना कार्य कर लेते हैं अन्यथा वे मृत हो जाते हैं.

मृत शुक्राणु अन्य शुक्राणु को मारने का काम भी करते हैं. इसलिए इस को जितना बहाया जाए, शरीर में उतने स्वस्थ शुक्राणु पैदा होते हैं. शरीर मृत शुक्राणुओं को शरीर से बाहर निकालता रहता है. इस से शरीर की क्रिया बाधित नहीं होती है.

शरीर को ताकत यानी ऊर्जा वसा और कार्बोहाइड्रेट से मिलती है. हम शरीर की मांसपेशियों को जितना मजबूत करेंगे, हम उतने ताकतवर होते जाएंगे. यही शरीर का गुणधर्म है. इसी वजह से शारीरिक मेहनत करने वाला 40 किलो का एक हम्माल 100 किलोग्राम की बोरी उठा लेता है जबकि 100 किलोग्राम का एक व्यक्ति 40 किलोग्राम की बोरी नहीं उठा पाता. इसलिए यह सोचना कि वीर्य संग्रह से ताकत आती है, कोरा भ्रम है.

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