उजली परछाइयां: क्या अंबर और धरा का मिलन हुआ?

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किरन रिजिजू : न्यायपालिका मजबूत केंद्र कमजोर

एक कहावत बन गई है -” आर एस एस और भाजपा कभी कच्ची गोटिया नहीं खेलते.” प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के स्नेह पात्र देश के कानून मंत्री किरण रिजिजू के मामले में देश में यही प्रतिक्रिया आई है कि नरेंद्र दामोदरदास मोदी की सरकार के संपूर्ण कार्यकाल की यह घटना अपने आप में अनोखी और अलग है .

कानून मंत्री के रूप में किरन रिजिजू जिस तरह कुछ ज्यादा सक्रिय थे वह अपने आप में एक इतिहास है. न्यायपालिका से टकराव लेकर उन्होंने जिस तरह भाजपा की नीतियों को आगे बढ़ाया वह तो शाबाशी के लायक था मगर मिल गया दंड!

संपूर्ण घटनाक्रम को देखा जाए तो देश हित में यह अच्छा हुआ है. यह संदेश चला गया है कि न्यायपालिका नरेंद्र दामोदरदास मोदी के शासन में भी सर्वोच्च स्थान रखती है अन्यथा जिस तरह देश के कानून मंत्री के रूप में किरण रिजिजू ने खुलकर घेरा बंदी की थी वह सीधे-सीधे सरकार और न्यायपालिका और केंद्र के टकराव को दर्शाती थी. ऐसा महसूस होता था मानो किरण रिजिजू जो बोल रहे हैं वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति से ही क्योंकि इसी तरह उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी बीच-बीच में शिगूफा छोड़ते रहते है . यही कारण है कि एक मामला भी अवमानना का उच्चतम न्यायालय में दर्ज हो कर चल रहा है. ऐसे में अचानक कानून मंत्री को पद से हटाना यह संदेश देता है कि देश की नरेंद्र मोदी सरकार न्यायालय का सम्मान करती है और किसी भी तरह टकराव का संदेश नहीं देना चाहती. यह सकारात्मकता देश के लिए एक अच्छा संदेश लेकर आया है. क्योंकि आर एस एस की भावनाओं को अमलीजामा पहनाने वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने अगर यू-टर्न लिया है तो यह देश हित में माना जा सकता है. इसके साथ ही हम एक बड़ा यक्ष प्रश्न भी उठाने जा रहे हैं जो आज देश के सामने है नरेंद्र मोदी सरकार जल्दी से बैकफुट पर नहीं जाती अपनी किसी भी गलती को मानने को तैयार नहीं होती अपने विशिष्ट सहयोगी की गलती को भी मानने को तैयार नहीं होती और न ही आसानी से यू टर्न लेती है इसका सबसे ज्वलंत मामला है दिल्ली के जंतर मंतर में बैठी महिला पहलवान बेटियों का जो कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण सिंह का इस्तीफा और कार्रवाई के लिए लंबे समय से आंदोलनरत हैं मगर केंद्र सरकार मानो आंखें मूंदकर बैठी हुई है. ऐसे में किरण रिजिजू का कानून मंत्री से इस्तीफा लेकर मंत्रालय बदल देना एक बड़ी घटना है जो संकेत देती है कि अगर नरेंद्र दामोदरदास मोदी ऐसा नहीं करते तो आने वाले समय में मुसीबत बढ़ जाती और नरेंद्र मोदी सरकार को जवाब देना भी मुश्किल पड़ जाता.

केंद्र का यूं टर्न और देश हित

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अप्रत्याशित रूप से बड़ा बदलाव करते हुए किरेन रिजिजू से कानून मंत्रालय वापस ले लिया. उनकी जगह अब अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है.

दरअसल,अब यह कहा जा रहा है यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने में देरी, न्यायपालिका से सार्वजनिक टकराव ऐसी कई चीजें थीं, जिसे लेकर प्रधानमंत्री उनके लिए नाराज थे. केंद्र सरकार कॉमन सिविल कोड को लेकर गंभीर है. इसे लेकर कई बैठकें भी हो चुकी हैं. बीजेपी शासित राज्यों में इसे लागू भी किया जा रहा है. इस कानून को देशव्यापी लागू करने का जिम्मा कानून मंत्रालय को सौंपा गया था जिसमें लगातार देरी हो रही थी. माना जा रहा है कि इस बात को लेकर प्रधानमंत्री काफी नाराज थे. यही नाराजगी किरन रिजिजू को भुगतना पड़ी.

कहा जा जा रहा है कि न्यायपालिका और कानून मंत्री के बीच सार्वजनिक टकराव और क़ानून मंत्री के न्यायपालिका को लेकर दिये गए बयानों से सरकार में “उच्च स्तर” पर नाराजगी थी. सरकार नहीं चाहती थी कि न्यायपालिका के साथ टकराव सार्वजनिक रूप से दिखे. मगर यह भी सच है कि इसे बहुत पहले ही नरेंद्र मोदी सरकार को रोक देना चाहिए था.

दरअसल, तकरीबन डेढ़ महीने पहले कानून मंत्री के न्याय पालिका को लेकर दिए गए एक सार्वजनिक बयान ने “सरकार” को नाराज कर दिया . तब ही तय हो गया था कि किरण रिजिजू को कानून मंत्रालय से हटाया जाएगा, लेकिन कर्नाटक चुनाव को वजह से रिजिजू को कुछ दिनों का जीवन दान मिल गया था.
15 दिन पहले ये तय हो गया था कि कर्नाटक चुनाव के बाद किरण रिजिजू से कानून मंत्रालय ले लिए जाएगा. अब, रिजिजू को भू-विज्ञान मंत्रालय दिया गया है. अब कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कानून मंत्री के रूप में किरण रिजिजू ने जो क्षति पहुंचाने का काम किया है उसके बरक्स उन्हें कोई भी दूसरा मंत्रालय नहीं दिया जाना चाहिए था. जिससे यह संदेश जाता कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के खिलाफ बुलंदी के साथ कानून मंत्री के रूप में प्रदर्शन करने वाले किरण रिजिजू को दंड मिला है. कपिल सिब्बल से लेकर की अनेक कानून विदो ने किरण रिजिजू की आलोचना की है जो जायज कही जाएगी. मगर हमारा सवाल यह है कि कानून मंत्री का पद तो ले लिया गया मकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का क्या होगा. क्या सरकार उन पर भी कोई एक्शन ले सकने की स्थिति में है.

भोजपुरी गानों पर किली पॉल का ऐसा एक्सप्रेशन, फैंस ने की तारीफें

भोजपुरी सिंगर पवन सिंह अपने गानों के लिए जानें जाते है जिनके गानें बेहद ही मशहूर है अब इन्ही के गानों पर कंटेट क्रिएटर किली पॉल ने एख वीडियो साझा किया है जिसमें वो भोजपुरी गाना गाते हुए नजर आ रहे है साथ ही उनकी बहन निमा पॉल भी नजर आ रही है. ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इसपर जमकर कमेंट बरसा रहे है.

 

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आपको बता दें, कि किली पॉल और निमा पॉल आपस में भाई बहन है वो हिन्दी औऱ साउथ की कई भाषाओं में वीडियो बनाते रहते है जिसके बाद वो भारत में मशहूर हो गए है. बता दें, कि किली पॉल तंजानिया के रहने वाले है दोनों भारत की कई भाषाओं में वीडियो बना चुके है जिसमें वो सिर्फ लिंप सिंक करते हुए दिखाई देखते है उनकी इन वीडियो में लाखों-करोड़ों लोग लाइक करते है, लेकिन ये पहली दफा है जब इन्होंने भोजपुरी सिंगर पवन सिंह का गाना ‘ राजा जी के दिलावा’  पर अपना वीडियो साझा किया है. इस गाने में पवन सिंह के साथ शिवानी सिंह है.

 

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बता दें, कि पवन सिंह का गाना 30 अप्रैल को रिलीज किया गया जिसके बाद दो हफ्तों में इस गाने पर 19 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देख लिया है.ये गाना यूट्यूब पर सातवें नंबर पर ट्रेंड कर रहा है.अब इसी ट्रेंडिग गाने पर किली पॉल ने वीडियो बनाया है जो कि जमकर वायरल हो रहा है.किली पॉल और निमा पॉल ने जिस तरह इस गानें पर लिप सिंक किया है उससे लगता ही नहीं है कि उन्हे भोजपुरी नहीं आती होगी. ऐसा लग रहा है कि वो भोजपुरी में परफेक्ट है. फैंस किली पॉल के इस वीडियो को काफी पसंद कर रहे है.

यूजर्स ने किए कमेंट

कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने कहा है कि ‘क्या एक्टिंग किए है सर, मस्त दिल खुश हो गया, भोजपुरी गाने पर देखकर अच्छा लगता है’, दूसरे ने लिखा ‘आवा हो कभी बिहार में’, तो तीसरें ने लिखा ‘किली पॉल की लिपसिंक बेस्ट है’, तो किसी ने लिखा है कि ‘इतनी सुंदरता से आप भोजपुरी गाने पर रील बनाकर मेरे भोजपुरी समाज का सिर गर्व से अधिक ऊंचा कर दिए है’.

अनुष्का शर्मा ने बिना हेलमेट की बाइक राइड, बनीं ट्रोलर्स का निशाना

बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा आज की पहचान की मोहताज नहीं है हर गली, हर रोड़ पर अनुष्का के ढेरों फैंस है जो उन्हे पसंद करते है अनुष्का शर्मा अपनें काम को लेकर तो चर्चा में रहती ही है साथ ही, अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में रहती है. ऐसा ही अब अनुष्का शर्मा सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई है जब उन्होंने बाइक राइड की है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

 

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आपको बता दें, कि अनुष्का शर्मा कभी अपने पोस्ट को लेकर सुर्खियों में रहती है तो कभी आईपीएल में नजर आती है. लेकिन इन दिनों चर्चा में आऩे की वजह कुछ ओर ही है, उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है वीडियो में वो अपने बॉडीगार्ड के साथ बाइक पर नजर आ रही है उन्होंने आखों पर चश्मा लगा रखा है साथ ही पैंट-शर्ट कैरी की हुई है. अनुष्का शर्मा का ये वीडियो को उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है.

 

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अनुष्का शर्मा का ये वीडियो आते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. अनुष्का शर्मा की इस वीडियो पर यूजर्स जमकर कमेंट करते हुए नजर आ रहे हैं. अनुष्का शर्मा की इस वीडियो पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘न मैडम ने हेलमेट पहना है, न ही उनके बॉडीगार्ड ने. इसके अलावा कई यूजर्स ने अनुष्का शर्मा की ड्रेस पर जमकर कमेंट किए. यूजर्स ने कमेंट कर अनुष्का शर्मा की ड्रेस को म्युनिसिपालिटी की यूनिफॉर्म बताया.

तांत्रिक की हैवानियत के शिकार दो मासूम

देश की राजधानी दिल्ली के जामियानगर में स्थित है जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी. उर्दू में जामिया का मतलब है यूनिवर्सिटी और मिलिया का मतलब है मिल्लत यानी समूह. ब्रिटिश शासन में स्थापित इस यूनिवर्सिटी को एक साल पहले भारत की बेस्ट यूनिवर्सिटी सर्वे में 8वां स्थान हासिल हुआ था.

इस यूनिवर्सिटी में देश के अलगअलग हिस्सों से छात्र तालीम हासिल करने आते हैं. युवा सद्दाम और बाबर उर्फ हैदर ने भी एक साल पहले यहां पढ़ने के लिए दाखिला लिया था. दोनों ही पढ़ने में होशियार थे.

सद्दाम और बाबर उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ के थाना मुंडाली के गांव जिसौरा के रहने वाले थे. उन के गांव के कुछ और लड़के यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे, इस लिहाज से उन्हें वहां दाखिला ले कर रहने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी. 19 साल के बाबर और 18 साल के सद्दाम के पिता मोहम्मद मुन्नर और कलवा गांव के आर्थिक रूप से समृद्ध किसानों में थे.

वे चाहते थे कि बच्चे तालीम से ऊंचा दर्जा हासिल करें. बाबर डौक्टर बनना चाहता था और सद्दाम इंजीनियर. साप्ताहिक अवकाश पर सद्दाम और बाबर अपने घर आ जाया करते थे. 8 अप्रैल, 2017 को दोनों गांव आए थे. अगले दिन रविवार था. छुट्टी का पूरा दिन घर में बिता कर 10 तारीख की दोपहर करीब 3 बजे दोनों घर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे.

दोनों के ही परिवारों में अच्छे संबंध थे. ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि वे दोनों दिल्ली एक साथ गए थे, बल्कि हर बार वे इसी तरह आतेजाते थे. हर बार दोनों दिल्ली पहुंच कर घर वालों को फोन कर के कमरे पर पहुंचने की बात बता देते थे.

लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ तो दोनों के ही घर वालों को चिंता हुई. यह चिंता इस बात से और भी बढ़ गई थी कि दोनों के मोबाइल स्विच्ड औफ बता रहे थे. हौस्टल में उन के साथ रहने वाले लड़कों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दोनों वहां पहुंचे ही नहीं हैं.

बाबर और सद्दाम को ज्यादा से ज्यादा 3 घंटे में अपने कमरे पर पहुंच जाना चाहिए था. देर रात तक दोनों कमरे पर नहीं पहुंचे तो आखिर कहां लापता हो गए. जब सद्दाम और बाबर के बारे में कुछ नहीं पता चला तो रात में ही उन के घर वाले दिल्ली पहुंच गए.

रास्ते में भी वे पूछताछ करते रहे कि कहीं कोई दुर्घटना तो नहीं हुई थी. लेकिन ऐसा कुछ पता नहीं चला. थकहार कर वे लौट गए. नातेरिश्तेदारों से भी पता किया गया, लेकिन कुछ पता नहीं चला. अगले दिन भी किसी की चिंता कम नहीं हुई, क्योंकि दोनों के मोबाइल अभी तक बंद थे.

सभी को रहरह कर अनहोनी की आशंका सता रही थी. कोई नहीं जानता था कि आखिर दोनों के साथ हुआ क्या है? दिन के 11 बज रहे थे, बाबर के पिता मुन्नर के पास फोन आया. मोबाइल स्क्रीन पर नंबर बाबर का ही दिखाई दिया था, इसलिए उन्होंने तुरंत फोन रिसीव किया, ‘‘हैलो बेटा, कहां हो तुम?’’

उन्हें झटका तब लगा, जब दूसरी ओर से बाबर के बजाय किसी अन्य की गुर्राहट भरी आवाज उभरी, ‘‘ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है मियां, बाबर हमारे कब्जे में है.’’

गुर्राहट भरी आवाज सुन कर मुन्नर के पैरों तले से जमीन खिसक गई. डरते हुए उन्होंने पूछा, ‘‘तुम कौन बोल रहे हो भाई?’’

‘‘यह जान कर तुम क्या करोगे? बस इतना समझ लो कि हम अच्छे लोग नहीं हैं. तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में हैं. उसे सकुशल वापस पाना चाहते हो तो फटाफट 80 लाख रुपयों का इंतजाम कर लो. अगर ऐसा नहीं किया तो अंजाम भुगतने को तैयार रहो.’’

‘‘लेकिन…’’ मुन्नर ने कुछ कहना चाहा तो फोन करने वाले ने सख्त लहजे में कहा, ‘‘हमें ज्यादा सवाल सुनने की आदत नहीं है. रकम भी हम ने सोचसमझ कर मांगी है. अब यह तुम्हें तय करना है कि बेटा चाहिए या दौलत?’’

इस के बाद एक लंबी सांस ले कर फोन करने वाले ने आगे कहा, ‘‘और हां, किसी तरह की चालाकी करने की कोशिश मत करना, वरना बेटा नहीं, उस के शरीर के टुकड़े मिलेंगे. तुम रकम का इंतजाम करो, हम तुम्हें दोबारा फोन करेंगे.’’

इतना कह कर उस ने फोन काट दिया. फोन करने वाला कौन था? यह तो वह नहीं जानते थे, लेकिन उस की बातों में ऐसी धमक थी, जिस ने मुन्नर को अंदर तक दहला कर रख दिया था. वह समझ गए कि सद्दाम और बाबर का फिरौती के लिए किसी ने अपहरण कर लिया है.

मुन्नर सद्दाम के पिता से मिलने उन के घर पहुंचे तो वह सिर थामे बैठे थे. क्योंकि तब तक उन के पास भी 80 लाख रुपए की फिरौती के लिए उन के बेटे के ही मोबाइल से फोन आ चुका था. घर वालों ने मोबाइल नंबरों पर पलट कर फोन करने की कोशिश की, लेकिन वे स्विच्ड औफ हो चुके थे. घर वालों ने देर किए बगैर इस की सूचना पुलिस को देना उचित समझा.

बाबर और सद्दाम के पिता कुछ लोगों को साथ ले कर एसपी (देहात) श्रवण कुमार सिंह से जा कर मिले और उन्हें घटना के बारे में बताया. श्रवण कुमार सिंह के आदेश पर थाना मुंडाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ दोनों छात्रों सद्दाम और बाबर के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस तुरंत काररवाई में लग गई. थानाप्रभारी अजब सिंह ने तुरंत इस मामले की जांच शुरू कर दी.

एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ ने श्रवण कुमार सिंह के निर्देशन और सीओ विनोद सिरोही के नेतृत्व में पुलिस टीमें गठित कर अपहरण के खुलासे के लिए लगा दीं. विनोद सिरोही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले भी तैनात रहे हैं, इसलिए अपराध और अपराधियों पर उन की गहरी पकड़ थी. अगले दिन एक पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई, जहां दोनों छात्रों के साथियों अब्दुल कादिर और मेहरात से पूछताछ की गई.

लेकिन उन से कोई सुराग नहीं मिला. इस बीच पुलिस ने दोनों छात्रों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स और अंतिम लोकेशन हासिल कर ली थी. मोबाइल नंबरों के रिकौर्ड के अनुसार, सद्दाम और बाबर की लापता होने वाले दिन की अंतिम लोकेशन नोएडा शहर की पाई गई थी. फिरौती के लिए जो फोन किए गए थे, वे नोएडा से ही किए गए थे.

अपहर्त्ताओं तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास मोबाइल ही एकमात्र जरिया था. अपहर्त्ता काफी चालाक थे. वे बात करने के लिए सद्दाम और बाबर के ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस टीमें संदिग्ध स्थानों के लिए रवाना हो गई थीं.

12 अप्रैल की सुबह अपहर्त्ता ने मुन्नर को एक बार फिर फोन किया. इस बार फोन किसी अन्य नंबर से किया गया था. उस ने सीधे मतलब की बात कही, ‘‘रकम तैयार रखना, डील होते ही तुम्हारे बच्चों को छोड़ दिया जाएगा.’’

‘‘हम तैयार हैं, बताओ रकम कहां पहुंचानी है?’’

‘‘इस बारे में हम तुम्हें दोपहर को फोन कर के बताएंगे.’’ कह कर अपहर्त्ता ने फोन काट दिया.

यह नंबर भी पुलिस को दे दिया गया था. 4 दिन बीत चुके थे, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. अपहर्त्ता फोन कर के तुरंत मोबाइल फोन बंद कर देते थे, इसलिए पुलिस को उन की सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही थी. लेकिन यह जरूर पता चल गया था कि मोबाइल फोन से जो फोन किए जा रहे हैं, वे नोएडा के सैक्टर-63 से किए जा रहे हैं.

पुलिस ने बाबर के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स खंगाली तो उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उस की लापता होने से पहले बातें हुई थीं. उस नंबर के बारे में पता किया गया तो वह नंबर नोएडा के छिजारसी गांव के रहने वाले मौलाना अयूब का निकला. उस के बारे में पता किया गया तो पता चला कि वह एक मदरसे में बच्चों को दीनी तालीम दिया करता था, साथ ही वह तंत्रमंत्र भी करता था.

अयूब उसी जिसौरा गांव का रहने वाला था, जहां के बाबर और सद्दाम रहने वाले थे. कुछ सालों पहले अयूब नोएडा जा कर बस गया था. उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर चैक की गई तो पता चला कि उस का संपर्क हैदर नामक एक युवक से था.

इस के बाद पुलिस ने हैदर के बारे में पता किया तो पता चला कि वह भी जिसौरा गांव का ही रहने वाला था. वह गाजियाबाद में टैंपो चलाता था. खास बात यह थी कि अयूब और हैदर की लोकेशन सद्दाम और बाबर के लापता होने वाली शाम को एक साथ थी.

इन सभी तथ्यों के हाथ में आने से पुलिस समझ गई कि दोनों छात्रों के लापता होने के तार अयूब और हैदर से जुड़े हुए हैं. युवकों के बारे में पता न चलने से गांव के लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी. इस बात की जानकारी होने पर सीओ विनोद सिरोही ने गांव जा कर लोगों की नाराजगी को शांत कर के उन्हें पुलिस की काररवाई से अवगत कराया.

15 अप्रैल को एक पुलिस टीम अयूब की तलाश में निकल पड़ी. छिजारसी गांव नोएडा के सैक्टर-63 में ही आता था. पुलिस टीम ने नोएडा पुलिस की मदद से उसे हिरासत में ले लिया. पहले तो उस ने धर्म का डर दिखा कर पुलिस को धमकाने की कोशिश की, लेकिन सबूतों के आगे उस ने हथियार डाल दिए.

पुलिस दोनों लड़कों को सकुशल बरामद करना चाहती थी. जब अयूब से उन के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘साहब, वे दोनों अब नहीं हैं.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मुझे माफ कर दीजिए साहब, मैं ने और हैदर ने उन की हत्या कर के शव फेंक दिए हैं.’’

अयूब की हैवानियत भरी बातें सुन कर पुलिस सकते में आ गई. पुलिस ने लाशों के बारे में पूछा तो उस ने बताया, ‘‘हम ने दोनों लाशें ले जा कर गाजियाबाद जिले की डासना-मसूरी नहर में फेंक दी थीं.’’

पुलिस अयूब को ले कर तुरंत वहां पहुंची, जहां उन्होंने लाशें फेंकी थीं. उस की निशानदेही पर पुलिस ने झाडि़यों में अटकी सद्दाम और बाबर की लाशें बरामद कर लीं. उन के घर वालों को इस बात की सूचना दी गई तो उन के यहां कोहराम मच गया. मौके पर पहुंच कर उन्होंने लाशों की शिनाख्त कर दी.

पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. हत्या की बात से जिसौरा गांव में तनाव फैल गया, जिस की वजह से गांव में पुलिस बल तैनात करना पड़ा. पुलिस ने दूसरे आरोपी हैदर की तलाश शुरू की, लेकिन वह हाथ नहीं आया.

पुलिस ने अयूब से विस्तार से पूछताछ की तो दोनों लड़कों की हत्या की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह चौंकाने वाली थी. धर्म की आड़ में कमाई के लिए ढोंग रचने वाले अयूब के चेहरे से तो नकाब उतरा ही, साथ ही हैदर की भी हकीकत खुल गई.

हैदर ने अपनी प्रेमिका से बाबर को दूर करने के लिए मौत की ऐसी खौफनाक साजिश रची, जिस में अयूब भी शामिल हो गया था. तंत्रमंत्र पर बाबर का नासमझी भरा अंधविश्वास उसे मौत की चौखट तक ले गया. उसी के साथ निर्दोष सद्दाम भी मारा गया. इस तरह नासमझी में 2 घरों के चिराग बुझ गए.

दरअसल, टैंपो चालक हैदर का गांव की ही एक लड़की से प्रेमप्रसंग चल रहा था. दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था कि उसी बीच हैदर को पता चला कि उस की प्रेमिका का बाबर से भी चक्कर चल रहा है. इस से उस का दिमाग घूम गया. उस ने अपने स्तर से इस बारे में पता किया तो बात सच निकली.

हैदर को यह बात काफी नागवार गुजरी. उस ने अपनी प्रेमिका को भी समझाया और बाबर को भी. उस का सोचना था कि दोनों अब कभी बात नहीं करेंगे, लेकिन उस की यह खुशफहमी जल्द ही खत्म हो गई, जब उसे पता चला कि उस की बातों का दोनों पर कोई असर नहीं हुआ है. हैदर लड़की पर अपना हक समझने लगा था. उसे यह कतई मंजूर नहीं था कि वह किसी और से बातें करे, इसलिए एक दिन उस ने बाबर को समझाते हुए कहा, ‘‘बाबर, मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी होने वाली बीवी से बात करो.’’

‘‘तुम क्या उस से निकाह करने वाले हो?’’

‘‘हां.’’

‘‘तो फिर मुझे रोकने से अच्छा है कि उसे समझाओ. अब मुझ से कोई बात करेगा तो मैं भला कैसे मना कर सकता हूं.’’

‘‘जो भी हो, मैं तुम्हें समझा रहा हूं. अगर तुम नहीं माने तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.’’ हैदर ने धमकी भरे लहजे में कहा तो दोनों में बहस हो गई.

दूसरी ओर हैदर ने प्रेमिका से बात की तो वह मुकर गई. हैदर उस पर भरोसा करता था. उस का अहित करने की वह सोच भी नहीं सकता था. वक्त के साथ हैदर के दिमाग में यह बात घर कर गई कि हो न हो, उस की प्रेमिका को बाबर ही अपने जाल में फंसा रहा हो. उसे इस बात का भी डर सता रहा था कि अगर उस ने कुछ नहीं किया तो उसे एक दिन प्रेमिका से हाथ धोना पड़ेगा.

ठंडे दिमाग से सोचा जाए तो किसी भी मसले का हल निकल आता है, लेकिन हैदर ऐसी फितरत का इंसान नहीं था. कई दिनों की दिमागी उधेड़बुन के बाद उस ने बाबर को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.

बाबर की बातें तांत्रिक अयूब से भी हुआ करती थीं. इस बात की जानकारी हैदर को थी. अयूब से उस के भी अच्छे रिश्ते थे. उस की प्रेमिका की बातें कई बार अयूब ने ही उसे बताई थीं, इसलिए हैदर ने अयूब के जरिए ही बाबर को रास्ते से हटाने की सोची.

मौलाना अयूब लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाने का ढोंग करता था, धर्म की आड़ में तंत्रमंत्र के बल पर सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाने का दावा करता था. अंधविश्वासियों की चूंकि समाज में कोई कमी नहीं है, इसलिए उस का यह धंधा ठीकठाक चल रहा था. एक दिन हैदर अयूब के पास पहुंचा. अयूब ने आने की वजह पूछी तो उस ने कहा, ‘‘अयूब भाई, मैं एक काम में आप की मदद चाहता हूं.’’

‘‘कैसी मदद?’’

‘‘एक लड़के को रास्ते से हटाना है. इस काम में तुम मेरी बेहतर मदद कर सकते हो.’’

‘‘कैसी बात कर रहे हो हैदर मियां?’’ हैदर की बात सुन कर अयूब एकदम से चौंका तो हैदर ने हंसते हुए कहा, ‘‘इस में इतना चौंकने की क्या बात है? कब तक तुम लोगों के लिए ताबीज बना कर हजार, 5 सौ रुपए कमाते रहोगे. मैं तुम्हें 10 लाख रुपए के साथ एक प्लौट भी दिला दूंगा. मैं जानता हूं कि तुम किराए पर रहते हो. ऐसे में तो तुम अपना घर बनाने से रहे. सोच लो, मौका बारबार नहीं आता.’’

हैदर की इस बात पर अयूब सोच में डूब गया. उस का दिया लालच वाकई मोटा था. थोड़ी ही देर में अयूब धर्म और इंसानियत को भूल गया. उस ने साथ देने का वादा किया तो हैदर ने उसे बाबर का नाम बता दिया.

‘‘तुम उसे क्यों मारना चाहते हो?’’

‘‘वह मेरी प्रेमिका को हथियाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए उस का मरना जरूरी है.’’

इस के बाद हैदर और अयूब ने बाबर की हत्या कर उस के घर वालों से फिरौती वसूलने की योजना बनाई. इसी योजना के तहत अयूब ने 9 अप्रैल की शाम बाबर को फोन किया, ‘‘बाबर, मेरे पास एक ऐसी आयतों की ताबीज है, जिस लड़की का भी नाम ले कर पहनोगे, वह हमेशा के लिए तुम्हारी दीवानी हो जाएगी.’’

‘‘सच?’’

‘‘हां, अगर तुम्हें वह ताबीज चाहिए तो मैं तुम्हें वह ताबीज दे सकता हूं. लेकिन एक शर्त होगी.’’

‘‘क्या?’’ बाबर ने उत्सुकता से पूछा तो उस ने राजदाराना अंदाज में कहा, ‘‘इस के बारे में तुम किसी से जिक्र नहीं करोगे. एक बात और, उसे मेरे पास आ कर ही लेना होगा.’’

‘‘ठीक है, मैं गांव आया हूं. मुझे कल जामिया जाना है. तुम्हारे पास से होता हुआ चला जाऊंगा.’’

बाबर आने के लिए तैयार हुआ तो अयूब ने यह बात हैदर को बता दी. अगले दिन शाम के वक्त बाबर अपने साथी सद्दाम के साथ छिजारसी पहुंचा. हैदर वहां पहले से ही मौजूद था. हैदर को देख कर हालांकि बाबर को झटका लगा, लेकिन उस ने उस के साथ दोस्ताना व्यवहार करते हुए कहा, ‘‘हैदर, तुम यहां..?’’

‘‘मैं अयूब भाई से यूं ही मिलने चला आया था.’’ हैदर ने कहा.

बाबर उम्र के लिहाज से इतना समझदार नहीं था कि उन की चाल को समझ पाता. सद्दाम सिर्फ दोस्ती की वजह से उस के साथ आया था. कुछ देर की बातचीत के बाद अयूब ने बाबर और सद्दाम को कोल्डड्रिंक पीने के लिए दी. कोल्डड्रिंक पी कर दोनों बेहोश हो गए. अयूब ने उस में पहले से ही नशीली दवा मिला रखी थी.

बाबर और सद्दाम के बेहोश होते ही हैदर और अयूब ने मिल कर उन की गला दबा कर हत्या कर दी. तब तक रात हो चुकी थी. उन के मोबाइल उन्होंने स्विच औफ कर दिए. इस के बाद दोनों की लाशों को चादरों में बांध कर टैंपो में रखा और गाजियाबाद के मसूरी की ओर चल पड़े.

रास्ते में कई जगह उन्हें पीसीआर वैन और पुलिस की गाडि़यां मिलीं, लेकिन संयोग से टैंपो को किसी ने चैक नहीं किया. मसूरी नहर की पटरी पर सुनसान जगह देख कर हैदर ने टैंपो रोका. इस के बाद दोनों ने मिल कर लाशों को नहर में फेंक दिया. लेकिन जल्दबाजी में लाशें झाडि़यों में अटक गई थीं, जबकि उन्होंने सोचा था कि लाशें नहर में बह गई होंगी. अंधेरा होने की वजह से वे देख नहीं सके थे.

लाशों को ठिकाने लगा कर दोनों छिजारसी चले गए. अगले दिन अयूब ने आवाज बदल कर बारीबारी से बाबर और सद्दाम के घर वालों को फिरौती के लिए फोन कर के मोबाइल बंद कर दिए. हैदर को लगा कि बारबार उन के नंबर इस्तेमाल करना ठीक नहीं है, इसलिए वह फर्जी पते पर नया सिमकार्ड खरीद लाया, जिस से बाद में दोनों लड़कों के घर वालों को फोन किए जाते रहे.

हैदर और अयूब को पूरी उम्मीद थी कि अपने बेटों के बदले घर वाले फिरौती जरूर देंगे, जिस से उन की किस्मत बदल जाएगी. लेकिन उन की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई थी.

विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने अयूब को अदालत में मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर के जेल भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद बाबर और सद्दाम के शवों को घर वालों के हवाले कर दिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों की मौत गला दबाने से हुई थी. गमगीन माहौल में दोनों लड़कों के शवों को पुलिस की मौजूदगी में दफना दिया गया.

20 अप्रैल को पुलिस ने फरार चल रहे हैदर को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने भी अपना गुनाह कबूल कर लिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे भी अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. हैदर ने जो कदम उठाया, वह कोई नासमझी नहीं, बल्कि जानबूझ कर उठाया गया सरासर गलत कदम था. 2 युवाओं की जान ले कर वह खुद भी नहीं बच सका.

वहीं धर्म का पाठ पढ़ाने वाले अयूब ने भी लालच में आ कर गलत राह पकड़ ली. जबकि उस ने हैदर को समझा कर सही राह दिखाई होती तो शायद यह नौबत न आती. लालच में आ कर वह खुद भी 2 हत्याओं का गुनहगार बन गया. कथा लिखे जाने तक दोनों आरोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस उन के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सेक्स की शुरुआत में मेरी बीवी साथ देती है, पर बाद में सुस्त हो जाती है, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल
मैं 30 साल का हूं और मेरी बीवी 26 साल की है. हमबिस्तरी की शुरुआत में तो वह साथ देती है, पर बाद में सुस्त हो जाती है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
बीवी से बात करने में संकोच की जरूरत नहीं है. उसे समझाएं कि जब वह हमबिस्तरी में खुल कर हिस्सा लेगी, तभी पूरा लुत्फ आएगा. आप फोर प्ले कर के पहले बीवी को पूरी तरह गरम कर लिया करें, उस के बाद हमबिस्तरी करेंगे, तो यकीनन वह सुस्त नहीं पड़ेगी.

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सेक्स के बारे में बात करने से चाहे आप कितना भी कतराएं, यकीन मानिए इसमें डूब जाने जितना मज़ा किसी और में नहीं. फिर चाहे आप बौयफ्रेंड के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहती हों या फिर शादी के बाद की पहली रात हो, यह एहसास बहुत खास होता है. लेकिन पहली बार की घबराहट भी उतनी ही होती है, जितना की उत्साह.

दोस्तों के बीच टौयलेट जोक्स और लूज टौक करने में आप अव्वल हैं. फिल्म हो या टीवी, बेड सीन्स देखने में बड़ा मजा आता है. मगर जब खुदकी बारी आई तो टांय टांय फिस्स. आप तो कागज की शेर निकलीं. इतना घबराएंगी तो जीत कैसे हासिल होगी. सेक्स है कोई रौकेट सांइस नहीं. आइए जानते हैं कि वो कौन सी 10 बातें हैं, जिनका ध्यान पहली बार सेक्स करते समय जरूर रखना चाहिए.

कम्फर्टेबल हों तभी बढ़ें आगे

पहला मिलन हमेशा रहता है याद यह जुमला बहुतों से सुना होगा और इससे जुड़ी कई कहानियां भी. कहानियों पर न जाएं. व्यावहारिक होकर सोचें कि क्या वाकई पहली बार सेक्स करना इतना रोमांचित करने वाला होता है! बेशक हो सकता है बशर्ते, पूरी तैयारी के साथ यह कदम उठाया जाए. जब कान्फिडेंट होंगी तभी इसका आनंद ले पाएंगी. क्या मैं इसके लिए तैयार हूं? यह सवाल उतना ही अहम है, जितना आपका सांस लेना. बौयफ्रेंड हो या पति, सोच समझकर, कम्फर्टेबल होने पर ही आगे बढ़ें.

महकी महकी हों आप

चर्चित सेक्सोलौजिस्ट डा. प्रकाश कोठारी की सलाह है, “साथ तभी महकेगा जब आप खुशबू से सराबोर होंगे. कोई अच्छी फ्रेगरैंस लगाएं, क्योंकि सुगंध का आपके मन मस्तिष्क पर बहुत असर पड़ता है. किसी को परफ्यूम पसंद आता है, तो किसी को शरीर की गंध उत्तेजित करती है.” खूशबू आप दोनों को एक दूसरे की ओर आकर्षित करने के साथ साथ एक दूसरे के सामने सहज भी बनाएगी.

उत्साह पर तनाव हावी न होने दें

क्या पहली बार में दर्द होगा? डा. कोठारी के मुताबिक़, यह एक मिथक है. पहली बार की उत्सुकता और घबराहट इतनी ज्यादा होती है कि हल्की सी छुअन भी हमारे पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर देती है. क्या होगा, क्या नहीं, इस घबराहट में हमारे नर्व्स भी तनाव में आ जाते हैं. दूसरा हम अपने प्राइवेट पार्ट्स को भी कसकर बंद कर लेते हैं, क्योंकि हम सहज नहीं होते. इसलिए प्रवेश करने में काफी दिक्कत होती है. और हम मान बैठते हैं कि पहली बार में दर्द होता है. आप जितनी ज्यादा सहज और तनाव मुक्त रहेंगी, उतना ज्यादा बेहतर होगा आपका अनुभव.

आर्गैज्म की राह न ताकें

हो सकता है पहली बार में आपको आर्गैज्म न मिले, तो घबराएं नहीं. क्योंकि शुरुआत में हमें पता ही नहीं होता, कि किस तरह से हमें आर्गैज्म मिलेगा. अलग अलग पोजिशन्स ट्राई करें. कई शोध तो यह भी कहते हैं कि लड़कियों को इंटरकोर्स से पूरा सुख या आर्गैज्म मिलता ही नहीं है. इसकी परवाह न करें, केवल उस पल का आनंद उठाएं.

ड्रेसिंग का भी रखें ख्याल

कपड़ों की भी अहम भूमिका होती है. इसलिए अपने पार्टनर की पसंद का या आकर्षक ड्रेसिंग ज़रूर करें. खुदको मेंटेन रखें, ताकि आप कान्फिडेंट महसूस कर सकें. यह बात लड़कों पर भी लागू होती है. दाढ़ी मूंछ ट्रिम करना न भूलें. किस करते समय सोचिए आपकी पार्टनर का क्या हाल होगा? सेक्सी कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं कि कुछ ऐसा पहन लें, जिसमें आप सहज ही न हों. ज्यादा मेकअप करने से भी बचें.

बातचीत है सेक्स की पहली सीढ़ी

जी हां, बातचीत. इसे सेक्स का चार अक्षरों का पर्यायवाची कहा जाता है. यानी बातचीत से ही सेक्स की शुरुआत होती है. इसे संभोग यूं ही नहीं कहा जाता. संभोग यानी सम भोग. जहां दोनों मिलकर इसका बराबर आनंद उठाते हैं. जहां कोई एक्स्पर्ट या नौसिखिया नहीं है. पहली बार सेक्स कर रहे हैं, इसलिए घबराहट थोड़ी होगी. बात करें, धीरे धीरे हिचक कम होगी. बातों बातों में एक दूसरे का हाथ पकड़ लें. धीरे धीरे फोरप्ले की ओर बढ़ें. हो सकता है शुरुआत करने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन सेक्स कोई अछूता विषय नहीं है. यह आपकी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है, यह बात भूले नहीं. हो सके तो एक दो दिन पहले से ही सेक्स के बारे में बातें करना शुरू कर दें. सेक्स के दौरान अपने पार्टनर को बताएं कि शरीर के किस हिस्से में आप सबसे ज्यादा उत्तेजना महसूस करती हैं और उनसे भी यही सवाल करें.

फोरप्ले है अहम

यह समझ लें, जो मज़ा सफ़र में है, वो मंजिल में नहीं. जल्दबाजी की तो आप चोटिल भी हो सकती हैं, इसलिए अपने प्राइवेट पार्ट में नैचुरल लूब्रिकेशन आने दें. और यह तभी संभव है जब आप और आपका पार्टनर फोरप्ले को खुलकर एन्जौय कर पाएंगे. फोरप्ले जितना लंबा चलेगा आप उतना कम्फर्टेबल महसूस करते जाएंगे. दरअस्ल, स्पर्श से हमारे मस्तिष्क में औक्सिटोसिन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है. इसे रिलीज़ होने दें और फोरप्ले से सेक्स की शुरुआत करें.

कंडोम पहनना न भूलें

एक दूसरे में खोने का अर्थ यह नहीं कि आप लापरवाही करें. माना कि पहली बार करने की हड़बड़ाहट में यह ग़लती सबसे आम है. लेकिन यह गलती जोखिम भरी है. महिलाओं के लिए विशेष कंडोम बनाए गए हैं. मेडिकल स्टोर्स में यह उपलब्ध हैं. पहले से ही प्रैक्टिस करें, ताकि उस दिन आपका मजा किरकिरा न हो. यदि आपकी बजाय आपका पार्टनर प्रोटेक्शन इस्तेमाल करनेवाले हैं, तो उन्हें याद दिलाना न भूलें.

बाहरी लूब्रिकेशन से गुरेज न करें

पहली बार में घबराहट की वजह से कई बार लूब्रिकेशन ठीक तरह से नहीं निकलता. इसलिए आप कृत्रिम लूब्रिकेशन्स का विकल्प चुन सकती हैं. पेट्रोलियम जेली से लेकर नारियल तेल तक ऐसे कई सुरक्षित विकल्प हैं, जो आपके घर में आसानी से उपलब्ध होंगे. इसके अलावा बाजार में भी कई तरह के लूब्रिकेंट्स हैं, जिन्हें आप खरीद सकती हैं.

सेफ्टी का रखें ध्यान

सुरक्षा बहुत जरूरी है. ऐसी जगह ढूंढ़ें, जो पूरी तरह सेफ हो. यदि शादी से पहले सेक्स के बारे में सोच रही हैं तो किसी होटल या दोस्त के घर न जाएं. पार्टनर या आपका घर सबसे सुरक्षित जगह है. यदि आप जगह को लेकर असहज रहेंगी, तो आपका पूरा ध्यान सेक्स पर नहीं होगा. डर आपको सफल भी नहीं होने देगा. बेडरूम में कैंडल्स हों तो कहना ही क्या. फूलों से घर को महकाएं, ताकि सहजता बढ़े.

पहली बार इन पोजिशन्स को आज़माएं

मिशनरीः यह सबसे बुनियादी और आसानी से की जा सकनेवाली  पोजिशन है.

साइड बाय साइड पोजिशनः इस  पोजिशन में पुरुष को आसानी से प्रवेश करने का मौका मिलेगा और आप भी कम्फर्टेबल रहेंगी.

गर्ल औन टौपः यदि आप सहज हों, तो इस पोजिशन को भी चुन सकती हैं. यह पोजिशन आपके पार्टनर को जल्दी उत्तेजित महसूस कराएगी और नियंत्रण भी आपके हाथों में होगा.

पीरियड के 2 दिन पहले क्यों होता है दर्द

अकसर लड़कियों को पीरियड से पहले या पीरियड के दौरान असहनीय दर्द होता है, जिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इस से निबटने के लिए जरूरी है कि पहले जान लिया जाए कि दर्द की वजह क्या है.

पीरियड के दौरान दर्द होने से कोई भी लड़की बहुत ज्यादा अनकंफर्टेबल फील कर सकती है या वह बहुत कमजोर भी हो सकती है. पीएमएस यानी प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसे शब्द कभीकभी मजाक में उपयोग किए जाते हैं. पीएमएस में होने वाली सूजन, सिरदर्द, बदनदर्द, ऐंठन और थकान लड़कियों के लिए दर्दनाक स्थिति बना देती है. इस के अलावा और भी गंभीर कंडीशन, जैसे प्रीमैंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिस्और्डर यानी पीएमडीडी भी हो सकती है जो प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम की तरह  है लेकिन पीरियड आने के एक हफ्ते या दो हफ्ते पहले गंभीर चिड़चिड़ापन, डिप्रैशन या एंग्जाइटी का कारण बन सकता है. आमतौर पर लक्षण पीरियड्स शुरू होने के 2 से 3 दिन बाद तक रहते हैं. लेकिन पहले 1-2 दिन बहुत दर्द वाले हो सकते हैं. यह प्रोस्टाग्लैंडीन नामक एक हार्मोन संबंधी पदार्थ के कारण होता है जिस से दर्द और सूजन के कारण गर्भाशय की मांसपेशियों में कौन्ट्रैक्शन होता है. ज्यादा गंभीर मैंस्ट्रुअल कै्रम्प होना प्रोस्टाग्लैंडीन के हाई लैवल का संकेत दे सकता है.

बीएमजे पब्लिशिंग ग्रुप, यूके द्वारा प्रकाशित क्लीनिकल एविडैंस हैंडबुक के अनुसार, 20 फीसदी महिलाओं में क्रैम्प, मतली, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं जबकि कई अन्य ने इमोशनल कंट्रोल और कंसन्ट्रेशन में कमी देखी. एंडोमेट्रियोसिस सोसाइटी इंडिया के आंकड़े सु?ाते हैं कि 2.5 करोड़ से अधिक महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से पीडि़त हैं. यह एक क्रोनिक कंडीशन होती है जिस में पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होता है, जिसे चिकित्सकीय रूप से डिसमेनोरिया कहा जाता है.

दिल का दौरा पड़ने के बावजूद काम करने वाले किसी व्यक्ति की कल्पना करें. पीरियड में दर्द होना उस से भी बुरा हो सकता है. कालेज औफ यूनिवर्सिटी, लंदन की रिसर्च के अनुमान के अनुसार, 68 फीसदी से अधिक महिलाएं भारत में गंभीर पीरियड से संबंधित लक्षण, जैसे ऐंठन, थकान, सूजन व ऐंठन का अनुभव करती हैं और इन में से 49 फीसदी थकावट महसूस करती हैं. लगभग 28 फीसदी महिलाओं को अपने पीरियड्स के दौरान सूजन का अनुभव होता है.

पीरियड्स में होने वाले दर्द को समझते

हार्मोन जारी करने पर गर्भाशय की ऐंठन के कारण महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दर्द का अनुभव होता है. प्रोस्टाग्लैंडीन गर्भाशय में मांसपेशियों के कौन्ट्रैक्शन के प्रोसैस को शुरू करता है. यह दर, जिस में कौन्ट्रैक्शन होता है, उपयोग न की गई यूट्रीन लाइनिंग की शेडिंग को निर्धारित करता है कि शरीर से बाहर खून के साथ क्लौट्स भी निकलेंगे. डिसमेनोरिया कुछ बीमारियों का संकेत भी दे सकता है जैसे-

पौलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी पीसीओडी मासिकधर्म में होने वाली बीमारियों में सब से आम बीमारी है. यह महिलाओं में निष्क्रिय लाइफस्टाइल के कारण बढ़ रहे हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है. यह शरीर में पुरुष हार्मोन का प्रोडक्शन बढ़ाता है और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को बाधित करता है.

गर्भाशय फाइब्रौएड – हालांकि ये नेचर में सौम्य होते हैं, लेकिन ये असहनीय लक्षण पैदा कर सकते हैं, जैसे असामान्य यूट्रीन ब्लीडिंग, डिस्पेर्यूनिया, पेल्विक पेन, मूत्राशय या मलाशय पर प्रतिरोधी प्रभाव और बां?ापन की समस्या. अन्य बीमारियां जो पीरियड्स के दौरान दर्द पैदा कर सकती हैं वे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी), एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस हैं.

क्या पीरियड के दर्द का इलाज किया जा सकता है?

हां, हलके मासिकधर्म के क्रैम्प का इलाज ओवर द काउंटर (ओटीसी) दवाओं के साथ किया जा सकता है, जबकि ज्यादा गंभीर क्रैम्प के लिए नौनस्टेरौइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स की जरूरत होगी. यह सुनिश्चित करें कि दवा दर्द शुरू होने से पहले लें. एक्सरसाइज करना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ब्लड फ्लो और एंडोर्फिन दोनों के प्रोडक्शन को बढ़ाती है, जो प्रोस्टाग्लैंडीन और रिजल्टंट दर्द को कम कर सकता है.

मासिकधर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 70 फीसदी रिप्रोडक्टिव संबंधी बीमारियां खराब मासिकधर्म की स्वच्छता के कारण होती हैं. ओरल गर्भनिरोधक गोलियों के माध्यम से ट्रीटमैंट किसी भी ओवेरियन हार्मोन लैवल के असंतुलन को ठीक कर सकता है. ताजे भोजन, फलों और सब्जियों को ज्यादा खाएं, धूम्रपान, शराब और कैफीन का सेवन करने से बचें, नमक व चीनी के सेवन को भी कम करें और 30 मिनट के लिए रोज एक्सरसाइज करें.

पीरियड हौलिडे, रोज के कामों में साथ देना और हम कुछ ऐसी ही मदद कर के एक महिला को पीरियड के दिनों में राहत पहुंचा सकते हैं.

(लेखिका सीड्स औफ इनोसैंस एंड जेनेस्ंिट्रग्स लैब की फाउंडर व आईवीएफ एक्सपर्ट हैं)

कहीं आप भी तो नहीं करते उन खास पलों में ये गलतियां

सेक्स कोई ऐसी चीज नहीं जिसके लिए मैन्यूअल बनाया जाए, लेकिन हां इसमें कुछ ऐसी चीजें जरूर होती हैं जिनसे बचा जाना चाहिए. अकसर लोग सेक्स के दौरान कुछ गलतियां करते हैं, जिनसे बचकर सेक्स के अनुभव को और भी यादगार बनाया जा सकता है. आइए जानें कुछ ऐसी गलतियां जो लोग अकसर बिस्तर पर करते हैं.

1. फोरप्ले ना करना  

इंटरकोर्स से पहले फोरप्ले ना करने की गलती सबसे ज्यादा की जाती है. अकसर पुरुष उत्तेजित होकर सीधा इंटरकोर्स करने लगते हैं जिसके कारण महिला साथी को काफी परेशानी होती है.

2. साथी का मूड ना पूछना

एक बिजी दिन के बाद हो सकता है आपके साथी का मन सेक्स का ना हो या हो सकता है आपकी महिला साथी पीरियड के दर्द से गुजर रही हो ऐसे में सेक्स के बारे में सोचना उनके लिए मुश्किल होता है. जबरन सेक्स करना महिला के मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कष्टदायक होता है. उनकी इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए. (यह बात पुरुषों पर भी लागू होती है)

3. चुपचाप रहना

सेक्स के दौरान की जाने वाली कुछ बेहद आम गलतियों में से एक है चुप रहना. माना कि उन हसीन लम्हों में कुछ बोलना मुश्किल होता है लेकिन चुप रहना या कोई रिस्पोंस ना देना संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है. सेक्स के दौरान अगर आप अपने साथी का साथ दें तो उन लम्हों का आनंद और भी ज्यादा उठाया जा सकता है.

4. नए प्रयोग से इंकार

यह गलती अकसर शादी-शुदा कपल्स के साथ आती है. शादी के बाद लोग सेक्स को एक मजबूरी मान बैठते हैं जो ऐसे में वह क्रिएटिव होने से दूर भागते हैं. अगर आप मानते हैं कि आपको यह काम करना ही है तो क्यों ना उसे करने के दूसरे तरीकों को आजमाएं जाएं?

5. शर्माना और खुलकर इच्छाओं को ना बताना

शर्माना और अपनी इच्छाओं को जाहिर ना करना एक और बड़ी गलती है जो सेक्स के दौरान लोग अमूमन करते हैं. ऐसा कर आप सिर्फ अपने रोमांच को ही कम करते हैं. अगर आपको किसी खास बॉडी पार्ट पर सहलाना या किस करना पसंद है तो इसे अपने साथी को अवश्य बताएं. यह आपको जल्दी ऑर्गेज्म तक पहुंचने में मदद कर सकता है.

6. इधर-उधर की बातें

सेक्स के दौरान इधर-उधर की बातें करना एक और ऐसी चीज है जो महिलाओं से हो जाती है. सेक्स के दौरान यहां-वहां या रोजमर्रा की बातें पुरुष साथी के मूड को खराब कर देती हैं.

7. सेक्स के बाद सीधे सो जाना

सेक्स के बाद सीधे सो जाना तो जैसे शादीशुदा जोड़ों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलती है जिससे बचना चाहिए. सेक्स के बाद सीधे सो जाना या बिस्तर से उठ जाना साथी को एक गलत संदेश देता है. कोशिश करनी चाहिए कि सेक्स के बाद साथी के साथ कुछ देर बिताएं और अपने जज्बात उसके सामने रखें.

8. उपरोक्त गलतियों के अलावा सेक्स के दौरान की जाने कुछ अन्य गलतियां निम्न हैं:

* प्राइवेट पार्ट्स को स्पर्श करने से कतराना

* अपना पूरा वजन साथी पर लाद देना

* क्लाइमैक्स काफी जल्द या काफी देर से आना

* क्लाइमैक्स से पहले साथी को ना बताना

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अगर आप भी करते हैं सेक्स करना अवौएड, तो सकते हैं ये नुकसान

हमारे देश में सेक्स को ले कर इतनी हायतोबा मचाई जाती है मानो इस की बात करने पर प्रतिबंध हो. पोंगापंथी और धर्म के ठेकेदार सेक्स को गंदा काम बताते फिरते हैं. यह अलग बात है कि कई मुल्लामौलवी, बाबा और पादरी सैक्सुअल हैरासमैंट और रेप के मामलों में पकड़े जा चुके हैं.

सच यह है कि सेक्स एक शारीरिक जरूरत है, जो बेहद स्वाभाविक और प्राकृतिक है. लेकिन धर्म के ठेकेदारों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों और नकली बाबाओं द्वारा दिए गए उलटेसीधे प्रवचनों से प्रभावित हो कर भारतीय महिलाएं सेक्स को एक अधार्मिक क्रिया समझने लगती हैं और खुलेमन से इस का आनंद उठाने के बजाय इस से कतराने लगती हैं.

पति के लाख मनाने और समझाने के बावजूद वे उस का साथ देने और सेक्स का आनंद उठाने के लिए तैयार नहीं होतीं. कभी व्रतत्योहार का बहाना बना कर, तो कभी तबीयत खराब होने का बहाना बना कर ये महिलाएं ‘अपवित्र’ होने से बचती रहती हैं. लेकिन चिकित्सक, मनोविज्ञानी, व्यवहार विशेषज्ञ और समाजशास्त्री इस प्रवृत्ति को तन और मन की सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं.

पीरियड्स में बढ़ सकता है दर्द : आमतौर पर महिलाओं के मैन्सट्रुअल साइकिल के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है. लेकिन जो महिलाएं सैक्सुअल लाइफ को एंजौय नहीं करतीं उन में यह दर्द ज्यादा हो सकता है.

सेक्स ऐक्सपर्ट डा. लारेज स्ट्रीचर का कहना है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से मैन्स्ट्रुअल क्रैंप में काफी कमी आ सकती है. यूट्रस एक मांसपेशी है जिस में सेक्स और्गेज्म के दौरान सिकुड़न होती है. इस से रक्तस्राव बेहद आसानी से हो जाता है और स्राव के समय होने वाले दर्द से महिलाओं को काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है. इस के साथ ही, यौन आनंद से एंडौर्फिन का स्राव होता है जो दर्द को कम करने में सहायक होता है.

वैजाइना की दीवार हो सकती है कमजोर : सेक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर बताती हैं, ‘‘खुद को सेक्स से वंचित रखने वाली महिलाओं में वैजाइना की वाल धीरेधीरे कमजोर यानी पतली होने लगती है. विशेषरूप से मीनोपौज की उम्र में पहुंच चुकी महिलाएं जब सेक्स से दूरी बढ़ाती हैं तो उन में यह समस्या अधिक होती है.’’

वे कहती हैं, ‘‘नियमित सेक्स करते रहने से वैजाइना की वाल लचीली रहती है और ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता जबकि कभीकभी सेक्स करने में यह दर्द काफी ज्यादा महसूस हो सकता है. नौर्थ अमेरिकन मीनोपौज सोसायटी ने भी मीनोपौज के दौर से गुजरने वाली महिलाओं को नियमित पैनेट्रेटिव सेक्स करने की सलाह दी है.

बढ़ सकता है स्ट्रैस : जगजाहिर है कि सेक्स से तन और मन में आनंद की अनुभूति होती है. इस से दिमाग में खुशी के हार्मोन एंडौर्फिन व औक्सीटोसीन उत्सर्जित होते हैं. स्कौटलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया है कि  सेक्स से दूर रहने वाले लोेग पब्लिक स्पीकिंग या ऐसी दूसरी स्टै्रसफुल सिचुएशन को आसानी से हैंडल नहीं कर पाते, जबकि महीने में कम से कम 2 बार सेक्स करने वाले लोग इस में आसानी महसूस करते हैं. नियमित सेक्स करने की आदत को हैल्थ ऐक्सपर्ट स्ट्रैस बस्टर मानते हैं, सेक्स न करने वाले लोगों का ब्लडप्रैशर स्ट्रैस की सिचुएशन में काफी बढ़ जाता है.

पुरुषों में बढ़ सकती है प्रोस्टैट कैंसर की संभावना : हैल्थ ऐक्सपर्ट का मानना है कि जो पुरुष नियमित रूप से सेक्स नहीं करते उन में प्रोस्टैट कैंसर की संभावना बढ़ सकती है. सेक्स करने से प्रोस्टैट को सुरक्षा देने वाले कैमिकल्स रिलीज होते हैं. अमेरिकन यूरोलौजिकल एसोसिएशन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से यौनसंबंध बनाने वाले पुरुषों में प्रोस्टैट कैंसर होने की संभावना 20 फीसदी तक कम हो जाती है क्योंकि समयसमय पर वीर्य स्खलन होने से प्रोस्टैट में मौजूद हानिकारक तत्त्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं.

संबंधों के प्रति आ सकता है असुरक्षा का भाव : जिन पतिपत्नी में सैक्सुअल संबंध लगभग खत्म हो जाते हैं उन में आपसी नजदीकी, माधुर्य और अपनापन भी कम होने लगता है. साथ ही, पति और पत्नी के मन में एकदूसरे के प्रति अविश्वास की भावना भी आ सकती है जिस से रिलेशनशिप में इनसिक्योरिटी का भाव आता है.

‘सेविंग योर मैरिज बिफोर इट स्टार्ट्स’ की लेखिका एवं मनोविज्ञानी लेस पैरोट कहती हैं, ‘‘सेक्स न करने से शरीर में औक्सीटोसिन व दूसरे बौंडिंग हार्मोन का लैवल कम होने लगता है. पति और पत्नी के मन में अपराधबोध की भावना आती है, सैल्फ एस्टीम में कमी आती है. साथ ही, मन में हमेशा संदेह रहता है कि कहीं आप अपनी सेक्स की जरूरत के लिए किसी दूसरे के संपर्क में तो नहीं. हालांकि, इस का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि बिना सेक्स के पतिपत्नी खुश रह ही नहीं सकते. उन्हें आपस में चुंबन लेना, हाथ पकड़ना, एकदूसरे को सहलाना आदि जारी रखने चाहिए.

बढ़ता है सर्दीजुकाम का खतरा : पैनसिलवानिया की विलकेस बौरे यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने अपने शोध में पाया कि जो लोग हफ्ते में एक या दो बार सेक्स करते हैं, उन में एंटीबौडीज का उत्पादन 30 फीसदी तक बढ़ जाता है. ये एंटीबौडीज तरहतरह के वायरस आदि के खिलाफ लड़ने में हमारे शरीर के डिफैंस सिस्टम की मदद करते हैं. सेक्स को इम्यूनिटी सिस्टम इंप्रूव करने वाला भी माना गया है.

यौनेच्छा में कमी आने लगती है : जब आप सेक्स से कतराने लगते हैं या इस की आदत धीरेधीरे छूटती जाती है तो आप की यौनेच्छा खुदबखुद कम होने लगती है. सेक्स थेरैपिस्ट सारी कूपर कहती हैं, ‘‘एक वक्त ऐसा आता है जब आप सेक्स करना चाह कर भी सेक्स नहीं कर पाते. सेक्स शारीरिक प्रक्रिया से ज्यादा एक मानसिक प्रक्रिया है. आदत छूटने या नियमित इस का उपभोग न करने पर आप का मन सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता. जब तक मन तैयार नहीं होता, तो तन का साथ देने का सवाल ही नही.

पुरुषों में इरैक्टाइल डिसफंक्शन : उपरोक्त कारण की वजह से पुरुषों में यौनांग सेक्स के लिए तैयार नहीं हो पाता, यानी यौनांग में कठोरता नहीं आ पाती जिसे हैल्थ ऐक्सपर्ट इरैक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं.

अमेरिकी मैडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों का यौनांग एक मांसपेशी है. जैसे हमारे शरीर की अन्य मांसपेशियों को नियमित ऐक्सरसाइज की जरूरत है, ठीक उसी तरह इस का भी नियमित इस्तेमाल जरूरी है, वरना इस में शिथिलता आने लगती है. कुछ वैज्ञानिकों ने सरल भाषा में इसे ‘यूज इट आर लूज इट’ कह कर समझाया है.

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