क्या आपको भी होती हैं, सांस फूलने की परेशानी

आए दिन सांस फूलने की शिकायतें सुनने को मिलती हैं. शादीब्याह या किसी छोटेमोटे प्रोग्राम में मौसी, बूआ, ताऊ, चाची या अन्य किसी चिरपरिचित को सांस फूलने की शिकायत करते सुना जाता है. क्या कभी आप ने सोचा कि सांस फूलने के असली कारण क्या हैं.

1. सांस फूलना

सांस फूलने की मुख्य वजह है शरीर को औक्सीजन ठीक से न मिल पाना जिस से फेफड़े पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. ऐसे में फेफड़े औक्सीजन पाने के लिए श्वसन क्रिया की गति को बढ़ा देते हैं जिस को हम सरल भाषा में सांस फूलना कहते हैं. यदि समय रहते सांस फूलने पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस के परिणाम जानलेवा हो सकते हैं.

सांस फूलने के रोकने के 2 उपाय हैं. एक, या तो शरीर की औक्सीजन की मांग पूरी करने के लिए बाहर से अतिरिक्त औक्सीजन दी जाए, दूसरे, शरीर की औक्सीजन की मांग को कम किया जाए.

2. महत्त्वपूर्ण कारण

सांस फूलने के खासकर अपने देश में 2 मुख्य कारण हैं. एक तो ज्यादा मोटापा व दूसरा शरीर में खून यानी लाल कणों की कमी. अगर औक्सीजन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले रक्तकणों यानी हीमोग्लोबिन की कमी है तो औक्सीजन की सप्लाई बाधित होगी.

अपने देश में अधिकांश महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं. काफी संख्या में महिलाएं बच्चेदानी की समस्या व उस से जुड़ी अनावश्यक व अधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) की समस्या से पीडि़त हैं. देश में अधिकतर बच्चों के जन्म के बीच फासला काफी कम होना भी अनीमिया व सांस फूलने की शिकायत का एक बहुत बड़ा कारण है. सांस न फूले, इस के लिए कुपोषण समाप्त करना जरूरी है.

3. मोटापा एक अभिशाप

आजकल लोगों की आरामतलबी बढ़ रही है. नियमित सुबह की सैर व व्यायाम का अभाव, शराब व चरबीयुक्त खा- पदार्थों का भरपूर सेवन ये दोनों बातें शरीर के मोटापे को तेजी से बढ़ा रही हैं. अकसर मोटे लोगों को यह शिकायत करते सुना जाता है कि जरा सी सीढ़ी चढ़ने में सांस फूलती है. मोटापे में जरूरी नहीं कि दिल की बीमारी ही हो. समय रहते यदि कुपोषण खत्म कर दिया जाए व मोटापे को नियंत्रित किया जाए तो सांस फूलने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

4. फेफड़े का रोग, बड़ा कारण

फेफड़े का इन्फैक्शन, जैसे निमोनिया व टीबी सांस फूलने का सब से बड़ा कारण हैं? श्वास नली व उस की शाखाओं में सूजन भी इस का एक कारण है जिसे मैडिकल भाषा में एस्थमैटिक ब्रांकाइटिस कहते हैं. कभीकभी श्वास नली पर किसी गिल्टी या छाती में ट्यूमर का दबाव भी सांस फूलने का कारण बन सकता है. अकसर दुर्घटना में छाती की चोट का सही इलाज न होने पर अंदर

खून या मवाद जमा हो जाता है और उस से फेफड़ों पर दबाव बनता है. इस से अकसर सांस फूलने के साथसाथ खांसी की भी शिकायत रहती है.

स्केलोडरमा नाम की बीमारी फेफड़े को आहत करती है और फेफड़े के अंदरूनी हिस्से में अस्वाभाविक बदलाव आता है. इस से फेफड़े की बाहरी औक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है और जरा सा चलने पर सांस फूलने लगती है.

5. दिल के रोग

यदि आप का दिल कमजोर है यानी पिछले हार्टअटैक के दौरान दिल का कोई हिस्सा बहुत कमजोर या नष्ट हो गया है तो ऐसा कमजोर दिल खून व पानी का साधारण भार भी नहीं उठा पाता और सांस फूलने का कारण बन जाता है. ऊपर से अगर मोटापा भी है, तो स्थिति और भी कष्टकारी हो जाती है.

दायीं तरफ का दिल गंदे खून का स्टोरहाउस है जो धड़कन के साथ शरीर के अंगों से आए गंदे खून को फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिए भेजता है और फिर यह खून दिल के बाएं हिस्से में इकट्ठा होता है और धड़कन के साथ शरीर के अन्य अंगों में जाता है.

अगर किसी को पैदाइशी दिल की बीमारी है और दिल के अंदर शुद्ध व अशुद्ध खून का आपस में सम्मिश्रण होता रहता है, तो जिस्म में नीलापन दिखता है विशेषकर उंगलियां व होंठ प्रभावित होते हैं और साथ ही, सांस फूलने की भी शिकायत रहती है.

6. आवश्यक जांच

वैसे तो अनगिनत जांचें हैं पर कुछ बहुत जरूरी जांचें सांस फूलने के कारण को समझने व उस के इलाज के लिए आवश्यक हैं, जैसे छाती का ऐक्सरे, छाती का एचआर, सीटी, पीएफटी, दिल के लिए डीएसई (डोब्यूटामीन स्ट्रैस ईको), खून की जांच जैसे विटामिन ‘डी’ की मात्रा व ब्लड गैस एनालिसिस आदि.

7. सांस फूलने पर क्या करें

उस अस्पताल में जाएं जहां आवश्यक जांचों की सुविधा हो. संबंधित जांचों के बाद अगर लगे कि सांस फूलने का कारण फेफड़ा है तो किसी छाती रोग विशेषज्ञ व थोरेसिक सर्जन से सलाह लें. यदि फेफड़ा क्षतिग्रस्त है या दबाव में है तो तुरंत सर्जरी करवाएं, आप की जरा सी  लापरवाही दूसरी तरफ के नौर्मल फेफड़े को भी नुकसान पहुंचा सकती है. अगर सांस फूलना दिल की वजह से है तो किसी हृदयरोग विशेषज्ञ या कार्डियोथोरेसिक सर्जन से सलाह लें. किडनी विशेषज्ञ की राय भी लेनी पड़ती है अगर गुरदे के कारण सांस फूल रही है.

8. कुछ खास बातें

यदि आप 20 साल की उम्र से ही रोज 2 घंटे नियमित टहलते हैं और 2 घंटे धूप का सेवन करते हैं तथा धूलधक्कड़ से दूर रहते हैं तो यकीन मानिए आप सांस फूलने की समस्या से काफी हद तक बचे रहेंगे. मोटापा किसी भी हालत में न पनपने दें.

रोज तकरीबन 350 ग्राम सलाद व 350 ग्राम फलों का सेवन करें. प्रोटीन भरपूर मात्रा में लें. पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें. किसी तरह के धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से बचें. शराब न पीएं. अगर आप यह सलाह मानेंगे तो सांस फूलने की तकलीफ ले कर आप को अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.                        –

(लेखक दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ थोरेसिक एवं कार्डियो वैस्कुलर सर्जन हैं.)

अंधविश्वास : बाबाओं का जंजाल, कैसे कटेगा जाल

19 सितंबर, 2015 को जनता की जागरूकता के चलते जयपुर के प्रताप नगर की हल्दीघाटी कालोनी में रहने वाली गरिमा का 9 महीने का बेटा मयंक एक ओझा की काली करतूत का शिकार होने से समय रहते बचा लिया गया.

मयंक का अपहरण उसी की सगी बूआ सावित्री ने किया था, जो बेऔलाद थी. वह एक ओझा से अपना इलाज करा रही थी.

यह महज एक घटना नहीं है. साल 2014 में शीतल का केस अजमेर से जयपुर आया था. वह दिमागी तौर पर बीमार थी. उस समय इलाज अजमेर में ही ‘दरगाह मुर्रान वाले बाबा’ कर रहे थे. शीतल घर पर अजीबो गरीब हरकतें करती थी, मगर जैसे ही बाबा के पास जाती थी, ठीक हो जाती थी.

शीतल के माता पिता बाबा से इलाज तो करा रहे थे, पर सिलसिला बढ़ता देख कर जयपुर भागे. जब शीतल को काउंसलर के सामने बैठाया गया, तो ‘हकीकतेइश्क’ बयान हो गया.

‘दरगाह मुर्रान वाले बाबा’ जवान थे और शीतल उन के प्यार में फंस चुकी थी, पर घर  वालों को कैसे बताए, इसलिए भूतों का सहारा लिया गया. शीतल को यह कौन समझाए कि उस बाबा के चक्कर में न जाने कितनी लड़कियां खुद को बरबाद कर चुकी होंगी.

एक और मामला जयपुर के गंवई इलाके के थाने चाकसू का है. एक दिन कविता के पेट में दर्द उठा, तो पिता झाड़ा लगवाने एक बाबा के पास ले गए.

15-16 साल की कविता पर बाबा मेहरबान हो गए और पिता की कमजोरी पकड़ी ‘शराब’. अब बाबा पिता को शराब और बेटी को झाड़ा लगाने घर पहुंचने लगे. मां ने बाबा की नीयत भांपी और थाने में मामला दर्ज करा कर उसे गिरफ्तार कराया. ये तीनों मामले मीडिया, थाना और जनता के सामने अपराध के रूप में उभर कर आए, पर दिलचस्प बात तो यह है कि हर चार कदम की दूरी पर ऐसे अपराध हो रहे हैं.

साधुओं के झांसे में धार्मिक आस्था में जकड़े परिवारों की छोटी उम्र की लड़कियां आसानी से आ जाती हैं. इन तांत्रिकों का नैटवर्क इतना तगड़ा होता है कि हर कदम पर इन के दूत हैं. ये चौकन्ने ‘दूत’ ही शिकार की कमजोरियां पकड़ते हैं. हर दो कदम पर इस तरह की दुकान चलती है. जयपुर के टोंक रोड के आसपास महज 4-5 किलोमीटर के दायरे में ऐसी 20 जगहें हैं, जहां सुबह सुबह भूत उतारने का काम होता है.

मेहंदीपुर बालाजी में तो अंधविश्वास का ऐसा तांडव देखने को मिलता है कि आम आदमी की रूह कांप जाए. भूतों के इलाज का ऐसा फलता फूलता कारोबार शायद ही कहीं और देखने को मिले. यहां धूप अगरबत्ती के धुएं में घुटते लोग न जाने कितने दिनों से बिना नहाए, बिना खाए घूमते रहते हैं.

किसी को रस्सी से बांध कर रखा गया है, तो किसी को जंजीर से. किसी को उलटा लटका दिया गया है, तो किसी को पेड़ से बांध दिया गया है.

माना जाता है कि मरीज को किसी भी तरह की चोट पहुंचाना ऊपर वाले का प्रसाद है. यहां पर किसी तरह का मानवाधिकार लागू नहीं होता. यहां कोई स्वयंसेवी संस्था भी नजर नहीं आती. यहां पुलिस प्रशासन का जोर नहीं चलता है, क्योंकि सबकुछ धर्म की आड़ में जो होता है.

एक मामला यह भी

‘‘बता तू कौन है, वरना तुझे जला कर भस्म कर दूंगा?’’ मंदिर के पुजारी व बाबा रामकेश ने सुनीता की चोटी पकड़ कर जब उस से पूछा, तो वह दर्द के मारे चीख पड़ी, ‘‘बाबा, मुझे छोड़ दो.’’

सुनीता को दर्द से कराहते देख कर भी बाबा को उस पर जरा भी तरस नहीं आया. वह उसे सोटा मारने लगा, तो वह दर्द से चीखती हुई वहीं औंधे मुंह गिर पड़ी.

उसे गिरता देख बाबा ने उस पर पानी के दोचार छींटे मारे, फिर भी जब वह नहीं उठी, तो बाबा घबरा गया. उस ने अपनी जान बचाने के लिए लोगों से कहा, ‘‘घबराने की कोई बात नहीं, कुछ देर बाद इसे होश आ जाएगा…’’

‘‘अभी आता हूं,’’ कह कर बाबा जो गया, तो लौट कर आया ही नहीं. इधर सुनीता को काफी देर बाद भी होश नहीं आया, तो उसे डाक्टर के पास ले जाया गया. डाक्टर ने सुनीता की नब्ज टटोली, तो पता चला कि वह मर चुकी थी.

सुनीता की मौत की सूचना मिलने पर पुलिस ने लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

पुलिस ने सुनीता के भाई की शिकायत पर आरोपी बाबा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज तो कर लिया, लेकिन भूत भगाने वाला वह पाखंडी बाबा आज भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर है.

एक घटना राजस्थान के पोखरण इलाके की है. पिछले दिनों बिमला के घर वाले उसे ऐसे ही झाड़फूंक वाले बाबा के पास ले गए. बिमला की कहानी भी सुनीता से काफी मिलती जुलती है.

22 साला बिमला की शादी रमेश के साथ हुई थी. शादी के 5 साल बीत जाने के बाद भी जब उसे बच्चा नहीं हुआ, तो उस की सास उसे बाबा के पास ले गई.

बाबा ने बिमला की सास से कहा, ‘‘इसे किसी ने कुछ कर दिया है. इस का अमावस की काली रात में इलाज करना पड़ेगा.’’

औलाद की चाह में बिमला की सास जब अमावस की रात में उसे बाबा के पास ले आई, तो उस ने बिमला की सास को प्रसाद खिला कर बेहोश कर दिया और बिमला के साथ बलात्कार किया.

बेसुध बिमला को जब होश आया, तो अपनेआप को अस्पताल के बिस्तर पर पाया. ऐसी तमाम औरतें अपनी कोख न भर पाने के चलते ऐसे पाखंडी बाबाओं के चक्कर में पड़ जाती हैं.

भूत भगाने के नाम पर फैले पाखंड का शिकार हर धर्म व मजहब का इन्सान होता है. समीना बताती है कि उस की अम्मी उसे एक ऐसे बाबा के पास ले गईं, जिस ने उस के साथ पूरे 6 महीने तक बलात्कार किया. वह चाह कर भी उस का विरोध नहीं कर सकी, क्योंकि बाबा ने उस के पूरे परिवार को अपने वश में कर रखा था.

एक दिन उसे ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के कुछ सदस्य मिले. उस ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई. ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के लोगों ने बाबा का भांड़ा ही नहीं फोड़ा, बल्कि बाबा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा कर उसे जेल की हवा भी खिलाई.

ड्रग्स ऐंड मैजिक ऐक्ट के तहत ऐसे पाखंडी बाबाओं के खिलाफ पुलिस कार्यवाही भी करती है. चाकसू में एक थानाधिकारी रोहिताश देवंदा कहते हैं, ‘‘कानून में ऐसे ठगों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है, पर शिकायतकर्ता को अपने बयान पर टिके रहना चाहिए.’’

महिला उत्थान से जुड़ी एक संस्था की संचालिका कविता कहती हैं, ‘‘औरतों को बाबा और ओझा के चक्कर में पड़ने के बजाय डाक्टरों का सहारा लेना चाहिए.’’

कविता ने एक ऐसी ही घटना के बारे में बताया, ‘‘कोटा जैसे शहर में मीरा नाम की एक औरत भी किसी भूत भगाने वाले बाबा के चक्कर में फंस गई थी. उसे मिर्गी के दौरे पड़ते थे, लेकिन परिवार के लोग उसे प्रेत का साया बता कर उस का इलाज बाबाओं से कराते चले आ रहे थे.’’

पिछले कई सालों से कोटा में जगन्नाथ साइंस सैंटर भूतप्रेत के नाम पर होने वाले पाखंडों का पर्दाफाश करता चला आ रहा है.

इस साइंस सैंटर के सदस्य दूरदराज के गांवों में जा कर इस तरह के अंधविश्वास को वैज्ञानिक आधार पर चुनौती दे कर बाबा और ओझा जैसे लोगों की पोल खोल कार्यक्रम जारी रखे हुए हैं.

डाक्टरों और काउंसलरों का मानना है कि आज हर कोई दुखी है. किसी को बच्चे की कमी, तो किसी को कारोबार में घाटा. कोई इश्क में फंसा है, तो कोई घर में ही अनदेखी का शिकार है, पर दिमागी बीमारी में खासतौर पर 2 वजहें सामने आती हैं. पहली, सैक्स से जुड़ी और दूसरी, अपनों द्वारा अनदेखी.

पहली वजह में कई बातें हो सकती हैं, जैसे पति से खुल कर बात न कर पाना. इस में गैरकुदरती सैक्स करना भी शामिल है.

जाने माने डाक्टर शिव गौतम के मुताबिक, पाली जिले के एक गांव से एक केस उन के पास आया. मैडिकल जांच से पता चला कि पति के करीब आते ही सुधा पर भूत आ जाता था. 70 फीसदी पागलपन की शुरुआत कुछ उन्हीं वजहों से होती है. गंवई माहौल और परिवार की इज्जत के चलते औरतें आखिर अपना बचाव कैसे करें?

वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर गंवई औरतें सैक्स के दौरान पति से पूरा सुख न मिलने की वजह से धीरे धीरे बीमार हो जाती हैं, क्योंकि आज भी भारत के कई इलाकों में पति पत्नी सैक्स को ले कर खुल कर शायद ही बात करते हों. इसी तरह की कमजोरी का फायदा तथाकथित तांत्रिक उठाते हैं.

राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष मयंक सुमन शर्मा के मुताबिक, भूत भगाने के नाम पर बाबाओं के गोरखधंधे को बंद किया जा सकता है. अगर राजस्थान सरकार दूरदराज के गांवों में ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ जैसे संगठनों के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को उन तक पहुंचाए. पर इन अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति वालों के दूतों के भगवाई दुश्मन हैं, जो सत्ता में अपनी पहुंच के चलते धर्म के इस धंधे को बंद नहीं होने देना चाहते हैं.

ये टिप्स अपनाइए और अपनी सेक्स लाइफ को बनाए पहले जैसा खुशहाल

कई बार पतिपत्नी के बीच प्यार में कोई कमी नहीं होती है, फिर भी उन के बीच सेक्स को ले कर समस्या खड़ी हो जाती है. विवाह के शुरू के बरसों में पतिपत्नी के बीच सेक्स संबंधों में जो गरमाहट होती है, वह धीरेधीरे कम हो जाती है. घरेलू जिम्मेदारियां बढ़ने के कारण सेक्स को ले कर उदासीनता आ जाती है. इस की वजह से आपस में दूरी बढ़ने लगती है.

इस समस्या से बाहर आने के लिए पतिपत्नी को एकदूसरे से अपने सेक्स अनुभव शेयर करने चाहिए. अपनी सेक्स अपेक्षाओं पर खुल कर बात करनी चाहिए. इस के अलावा उन कारणों को भी ढूंढ़ें जिन की वजह से साथी सेक्स में रुचि नहीं लेता, फिर उन्हें दूर करने की कोशिश करें. ये कारण हर कपल के अलगअलग होंगे. आप को बस उन्हें दूर करना है, तब आप की सेक्स लाइफ फिर से पहले जैसी खुशहाल हो जाएगी.

1. यह भी एक कारण

उम्र बढ़ने के साथसाथ एक स्त्री कामक्रीड़ा में पहले जैसी दिलचस्पी क्यों नहीं लेती है? अमेरिका में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की पूरी टीम इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने में जुट गई. इस में एक अहम जानकारी सामने आई, जो निश्चित तौर पर एक स्त्री की सेक्स संबंधी दिलचस्पी की पड़ताल करती है. दरअसल, यह सवाल स्त्री की उम्र और सेक्स के रिश्ते से जुड़ा है. कई लोग मानते हैं कि स्त्री की उम्र उस की सेक्स संबंधी दिलचस्पी पर काफी असर डालती है. यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथसाथ एक स्त्री कामक्रीड़ा में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं लेती.

हालांकि शोध से यह बात साफ हो गई कि मध्य आयुवर्ग की महिलाओं में संभोग के प्रति दिलचस्पी होना अथवा न होना सिर्फ बढ़ती उम्र पर निर्भर नहीं करता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन के लाइफपार्टनर का स्वास्थ्य कैसा है? और सेक्स संबंधी गतिविधियों में वे कितनी रुचि लेते हैं.

2. भावनात्मक कारण

आम धारणा के विपरीत शोध में यह पाया गया कि मध्य आयु में भी महिलाएं न सिर्फ सैक्सुअली सक्रिय होती हैं, बल्कि कई मामलों में उन की दिलचस्पी बढ़ती हुई नजर आई. शोध के दौरान जब यह जानने की कोशिश की गई कि जो महिलाएं सेक्स में सक्रिय नहीं हैं उस के पीछे क्या वजह है तो पता चला कि कई भावनात्मक कारणों से उन की सेक्स और अपने पार्टनर में दिलचस्पी खत्म हो चुकी होती है. पार्टनर में दिलचस्पी घटना या किसी प्रकार की अक्षमता का सीधा असर महिलाओं की यौन सक्रियता पर पड़ता है. ऐसी भी महिलाएं हैं, जिन की सेक्स में दिलचस्पी खत्म होने की और भी वजहें हैं. मगर उन की संख्या कम है.

3. उम्र से नहीं है कोई संबंध

इस शोध में मध्य आयुवर्ग की सेक्स संबंधी हर दिलचस्पी को शामिल किया गया था, जिस में हस्तमैथुन भी शामिल था. शोध के दौरान महिलाओं का एक बड़ा वर्ग सैक्सुअल ऐक्टिविटीज में उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा सक्रिय होता पाया गया. शोध से यह स्पष्ट सामने आया कि किसी भी स्त्री की सेक्स संबंधी सक्रियता का उस की उम्र से कोई सीधा संबंध नहीं है. इस आधार पर मनोवैज्ञानिकों और सेक्स सलाहकारों ने कुछ कारण और सुझाव भी रखे:

– ध्यान दें कि आप का पार्टनर किसी दवा के साइड इफैक्ट की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खो सकता है. यदि ऐसा है तो डाक्टर से सलाह लें.

– कई महिलाएं मानसिक दबाव के चलते भी सेक्स में रुचि नहीं लेतीं.

– बच्चों में ज्यादा व्यस्त हो जाने और सामाजिक मान्यताओं के चलते महिलाओं को लगता

है कि सेक्स में बहुत दिलचस्पी लेना उचित नहीं है.

– कई बार बच्चों के हो जाने के बाद महिलाएं अपने शरीर को ले कर असहज हो जाती हैं और हीनभावना का शिकार हो जाती हैं. इस के चलते भी वे सेक्स से जी चुराने लगती हैं.

– बढ़ती उम्र में घरपरिवार और कामकाज की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण वे थकने लगती हैं और सेक्स के लिए उन में पर्याप्त ऐनर्जी नहीं बचती.

– कई महिलाएं अपने पति के साथ एकांत चाहती हैं और ऐसा न होने पर सेक्स के प्रति उन की रुचि घटने लगती है.

– अगर पतिपत्नी के बीच तनाव रहता है और रिश्ता आपस में सही नहीं है तो इस से भी सेक्स लाइफ पर विपरीत असर पड़ता है.

गाइनोकोलौजिस्ट, डाक्टर अंजली वैश के अनुसार कुछ बीमारियां भी होती हैं, जिन की वजह से सेक्स में रुचि कम हो जाती है. ड्रग्स, शराब, धूम्रपान का सेवन करने से भी सेक्स में रुचि कम हो जाती है, डाइबिटीज की बीमारी भी महिलाओं में सेक्स ड्राइव को घटाती है, गर्भावस्था के दौरान और उस के बाद हारमोन चेंज के कारण सेक्स में महिला कम रुचि लेती है, अगर डिप्रैशन की समस्या हो तो हर समय अवसाद में डूबी रहती हैं. वे ऊटपटांग बातें सोचने में ही अपनी सारी ऐनर्जी लगा देती हैं. सेक्स के बारे में सोचने का टाइम ही नहीं मिलता है.

कई महिलाएं बहुत मोटी हो जाती हैं. मोटापे के कारण सेक्स करने में उन्हें काफी दिक्कत होती है. अत: वे सेक्स से बचने लगती हैं.

4. दवा भी कम जिम्मेदार नहीं

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कई ऐसी दवाएं हैं जिन से सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है. सेक्स के लिए जरूरी हारमोंस शरीर की जरूरत व संदेशों को मस्तिष्क तक पहुंचाने वाले तत्त्व डोपामाइन व सैरोटोनिन और सेक्स अंगों के बीच तालमेल बहुत जरूरी होता है. डोपामाइन सेक्स क्रिया को बढ़ाता है और सैरोटोनिन उसे कम करता है. जब दवाएं इन हारमोंस के स्तर में बदलाव लाती हैं तो कामेच्छा में कमी आती है. पेनकिलर, अस्थमा, अल्सर की दवा, हाई ब्लडप्रैशर और हारमोन संबंधी दवा से कामेच्छा में कमी हो सकती है.

मगर यह जरूरी नहीं कि आप की सेक्स लाइफ में अरुचि सिर्फ दवा की वजह से ही हो. इसलिए अगर आप को अपनी सेक्स लाइफ में बदलाव महसूस हो रहा है, तो दवा बंद करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

5. सेक्स में रुचि कैसे पैदा करें

सेक्स में जरूरी है मसाज: जब आप पार्टनर के नाजुक अंगों पर हाथों से हौलेहौले तेल लगा कर मसाज करेंगे तो यह उस के लिए बिलकुल नया अनुभव होगा. तेल आप के और पार्टनर के बीच जो घर्षण पैदा करता है उस से प्यार में बढ़ोतरी होती है और सेक्स की इच्छा जाग उठती है. मसाज एक ऐसी थेरैपी है, जिस से न सिर्फ शरीर को आराम मिलता है, बल्कि अपनी बोरिंग सेक्स लाइफ को भी फिर से पहले जैसी बना सकती हैं.

ऐक्सपैरिमैंट कर सकते हैं: अगर आप का पार्टनर सैक्सुअल ऐक्सपैरिमैंट नहीं करता है या ऐक्सपैरिमैंट करने से बचता है तो फेंटैसी की दुनिया में आप का स्वागत है. अगर आप सेक्स के बारे में अच्छी फेंटैसी कर सकती हैं तो अपने बैडरूम से बाहर निकले बिना आप अपने पार्टनर के साथ जंगल में मंगल कर सकती हैं. आप अपने पार्टनर के साथ जो चाहती हैं उसे फेंटैसी के जरीए महसूस करिए. आप की अपने पार्टनर से सारी शिकायतें दूर हो जाएंगी, क्योंकि आप का पार्टनर आप को खयालों में जो मिल गया है.

बारबार हनीमून मनाएं: सेक्स संबंधों में बोरियत न हो, इस के लिए पतिपत्नी को चाहिए कि हर साल वे हनीमून पर जाएं और इसे वे आपस में घूमने जाना न कह कर हनीमून पर जाना कहें. इस से उन के बीच ऐक्साइटमैंट बना रहता है. जब हनीमून पर जाएं तो एकदूसरे को वहां पहली बार बिताए लमहे याद दिलाएं. इस तरह घूमने और हनीमून के बारे में बात करने पर सेक्स संबंधों की याददाश्त ताजा हो जाएगी.

सेक्स में नयापन लाएं: कहीं ऐसा तो नहीं कि आप के सेक्स करने का एक ही तरीका हो और उस तरीके से आप की पत्नी बोर हो गई हो? अत: उस से इस विषय पर बात करें और सेक्स करने के परंपरागत तरीके छोड़ कर नएनए तरीके अपनाएं. इस से सेक्स संबंधों में एक नयापन आ जाएगा.

अपने साथी को समय दें: शादी के कुछ सालों बाद कुछ जोड़ों को लगता है कि सहवास में उन की रुचि कम होती जा रही है. सहवास उन्हें एक डेली रूटीन जैसा उबाऊ कार्य लगता है. इसलिए सहवास को डेली रूटीन की तरह न लें, बल्कि उसे पूरी तरह ऐंजौय करें. रोज करने के बजाय हफ्ते में भले ही 1 बार करें लेकिन उसे खुल कर जीएं और अपने पार्टनर को एहसास दिलाएं कि ऐसा करना और उस के साथ होना आप के लिए कितना खास है.

सेक्स ऐसा जिसे दोनों ऐंजौय करें: सिर्फ आप अपने मन की बात ही पार्टनर पर न थोपते रहें, बल्कि सेक्स में उस की इच्छा भी जानें और उस का सम्मान करें. जिन तरीकों में आप दोनों कंफर्टेबल हों और ऐंजौय कर सकें, उन्हें अपनाएं.

नियमित करें सेक्स: यह सच है कि तनाव और थकान का पतिपत्नी के यौन जीवन पर बुरा असर पड़ता है. मगर वहीं यह भी सच है कि सेक्स ही आप के जीवन में पैदा होने वाले दबावों और परेशानियों से जूझने का टौनिक बनता है. इसलिए कोशिश करें कि सप्ताह में कम से कम 3 बार संबंध जरूर बनाएं. इस से सेक्स लाइफ में मधुरता बनी रहेगी.

एकदूसरे के प्रति प्यार को बढ़ावा दें : अधिकतर जोड़ों के शादी के बाद कुछ सालों तक संबंध अच्छे रहते हैं, लेकिन जैसेजैसे समय बीतता जाता है वैसे काम व अन्य कारणों से उन के बीच दूरी बढ़ती जाती है, जिस से उन्हें आपस में प्यार करने का मौका नहीं मिलता. इस से उन के बीच सेक्स संबंधों में खटास आने लगती है. वैवाहिक जीवन में उत्पन्न हुई इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक है कि पतिपत्नी आपस में बातचीत करने के लिए कुछ समय निकालें. एकदूसरे से अच्छी बातें करें और एकदूसरे की बातों को सुनें, शिकायतों को दूर करने की कोशिश करें. एकदूसरे का सम्मान करें, इस से सेक्स लाइफ भी काफी बेहतर होगी.

पहल करें: अकसर महिलाएं सेक्स के लिए पहल करने में हिचकिचाती हैं, इसलिए आप द्वारा पहल करने में कोई बुराई नहीं है, बल्कि आप का पहल करना महिला को सुखद एहसास में डुबो देता है. यदि बच्चे छोटे हैं तो सेक्स लाइफ में मुश्किलें तो आती ही हैं और महिलाएं इतनी खुली व रिलैक्स भी नहीं रह पातीं. ऐसे में बच्चों के सोने का इंतजार करने से अच्छा है कि जब मौका मिले प्यार में खो जाएं.

फिटनैस का भी खयाल रखें: अच्छी सेक्स लाइफ के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से फिट रहना भी जरूरी है. इस के लिए बैलेंस्ड डाइट लें. थोड़ीबहुत ऐक्सरसाइज करें. भरपूर नींद लें. सिगरेट, शराब का सेवन न करें.

कल्पना करें: अगर आप को सेक्स करते समय किसी और पुरुष की या फिर किसी बौलीवुड ऐक्टर आदि की कल्पना उत्तेजित करती है और सेक्स का आनंद बढ़ाती है तो ऐसा करें. इस के लिए मन में किसी तरह का अपराधबोध न आने दें. ऐसा करना गलत नहीं है क्योंकि सब का सेक्स करने और उस के बारे में सोचने का तरीका अलग होता है.

फ्रैश मूड में आनंद उठाएं: अगर पतिपत्नी दोनों वर्किंग हैं, व्यस्त हैं, रात को देर से आते हैं, तो उन की सेक्स लाइफ न के बराबर होती है और महिला ऐसे में इसे बोझ की तरह लेती है. इसलिए अगर वह थकी हुई है तो जबरदस्ती न करें. सुबह उठ कर फ्रैश मूड में सेक्स का आनंद उठाएं.

गंदी बातें अच्छी हैं: सेक्स के लिए मूड बनाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है.

आप को लगता है कि कहीं आप की डर्टी टौक्स और डार्क फेंटैसी सुन कर पार्टनर का मूड न बिगड़ जाए, इसलिए आप चाहते हुए भी उन से यह सब शेयर नहीं करते हैं तो जान लें कि ऐसा नहीं है. सच तो यह है कि हर लड़की अपने पार्टनर से ऐसी बातें सुनने के लिए बेकरार रहती है. इसलिए बेझिझक उन से ऐसी बातें करें. जैसे ही आप की बातें शुरू होंगी उन की बेचैनी भी बढ़ती जाएगी.

6. सेक्स लाइफ का अंत नहीं है बच्चे का आना

अगर आप का मानना है कि बच्चे के आने के बाद सेक्स लाइफ खत्म हो जाती है तो जरा रुकिए. दुनिया भर में हो रही स्टडी के मुताबिक मां बनने के कुछ समय बाद कामेच्छा स्वाभाविक रूप से लौट आती है. आमतौर पर बच्चे के जन्म के 6 हफ्ते बाद डाक्टर महिलाओं को सेक्स संबंध बनाने की इजाजत दे देते हैं. लेकिन इतने समय में भी सब महिलाएं सहज नहीं हो पातीं. कई महिलाओं की सेक्स संबंध इच्छा को लौटने में साल भर तक का समय लग जाता है. शुरू में अंतरंग पलों के लिए समय निकालना मुश्किल होता है. लेकिन धीरेधीरे गाड़ी ट्रैक पर लौटने लगती है, इसलिए बच्चे का होना सेक्स पर पूर्णविराम नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है.

रिसर्च बताती है कि बच्चों के जन्म के बाद क्लाइमैक्स की तीव्रता बढ़ जाती है. इस का कारण है नर्व एंडिंग का ज्यादा सैंसिटिव होना.

7. बनाएं पत्नी का मूड ऐसे

– महिलाओं की पीठ काफी सेंसिटिव होती है. थोड़ा सा अंधेरा कीजिए, म्यूजिक प्ले कीजिए और पत्नी की पीठ पर हौलेहौले हाथ फिराते हुए मसाज कीजिए. फिर आगे का जादू खुद ही चल जाएगा.

– पार्टनर के कानों से खेलिए और हौले से कुछ कहिए. एकदम से यह न कहें कि आप का करने का मन है.

– गले में गुदगुदी कीजिए. देखिएगा कुछ ही देर में पत्नी आंहें भर रही होगी.

– फुट मसाज दीजिए. पत्नी के पैरों को सहलाते हुए बताएं कि आप उन से कितना प्यार करते हैं. बस वह एकदम से आप को बांहों में भर लेगी और उस के लिए पत्नी का तुरंत मूड बन जाएगा.

पत्नी की खूनी साजिश

22 अप्रैल, 2017 की रात करीब 2 बजे की बात है. उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला हादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर 1 के रहने वाले देवेंद्र प्रताप सिंह अपने घर में सो रहे थे. अचानक घर की डोलबेल बजी तो वह बड़बड़ाते हुए दरवाजे पर पहुंचे कि इतनी रात को किसे क्या जरूरत पड़ गई? चश्मा ठीक करते हुए उन्होंने दरवाजा खोला तो बाहर पुलिस वालों को देख कर उन्होंने हैरानी से पूछा, ‘‘जी बताइए, क्या बात है?’’

‘‘माफ कीजिए भाईसाहब, बात ही कुछ ऐसी थी कि मुझे आप को तकलीफ देनी पड़ी.’’ सामने खड़े थाना कैंट के इंसपेक्टर ओमहरि वाजपेयी ने कहा.

‘‘जी बताएं, क्या बात है?’’ देवेंद्र प्रताप ने पूछा.

‘‘आप की बहू और बेटा कहां है?’’

‘‘ऊपर अपने कमरे में पोते के साथ सो रहे हैं.’’ देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा.

अब तक परिवार के बाकी लोग भी नीचे आ गए थे. लेकिन न तो देवेंद्र प्रताप सिंह का बेटा विवेक प्रताप सिंह आया था और न ही बहू सुषमा. इंसपेक्टर ओमहरि वाजपेयी ने थोड़ा तल्खी से कहा, ‘‘आप को पता भी है, आप के बेटे विवेक प्रताप सिंह की हत्या कर दी गई है?’’

‘‘क्याऽऽ, आप यह क्या कह रहे हैं इंसपेक्टर साहब?’’ देवेंद्र प्रताप सिंह ने लगभग चीखते हुए कहा, ‘‘वह हम सब के साथ रात का खाना खा कर पत्नी और बेटे के साथ ऊपर वाले कमरे में सोने गया था. अब आप कह रहे हैं कि उस की हत्या हो गई है? ऐसा कैसे हो सकता है, इंसपेक्टर साहब?’’

‘‘आप जो कह रहे हैं, वह भी सही है और मैं जो कह रहा हूं वह भी. आप जरा अपनी बहू को बुलाएंगे?’’ इंसपेक्टर ओमहरि वाजपेयी ने कहा.

इंसपेक्टर ओमहरि वाजपेयी की बातों पर देवेंद्र प्रताप सिंह को बिलकुल यकीन नहीं हुआ था. उन्होंने वहीं से बहू सुषमा को आवाज दी. 3-4 बार बुलाने के बाद ऊपर से सुषमा की आवाज आई. उन्होंने सुषमा को फौरन नीचे आने को कहा. कपड़े संभालती सुषमा नीचे आई तो वहां सब को इस तरह देख कर परेशान हो उठी. उस की यह परेशानी तब और बढ़ गई, जब उस की नजर पुलिस और उन के साथ खड़े एक युवक पर पड़ी. उस युवक को आगे कर के इसंपेक्टर ओमहरि ने कहा, ‘‘सुषमा, तुम इसे पहचानती हो?’’

उस युवक को सुषमा ने ही नहीं, सभी ने पहचान लिया. उस का नाम कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू था. वह सुषमा के मायके का रहने वाला था और अकसर सुषमा से मिलने आता रहता था. सभी उसे हैरानी से देख रहे थे.

सुषमा कुछ नहीं बोली तो इंसपेक्टर ओमहरि वाजपेयी ने कहा, ‘‘तुम नहीं पहचान पा रही हो तो चलो मैं ही इस के बारे में बताए देता हूं. यह तुम्हारा प्रेमी डब्लू है. अभी थोड़ी देर पहले यह तुम्हारे पति की हत्या कर के लाश को मोटरसाइकिल से ठिकाने लगाने के लिए ले जा रहा था, तभी रास्ते में इसे हमारे 2 सिपाही मिल गए. उन्होंने इसे और इस के एक साथी को पकड़ लिया. अब ये कह रहे हैं कि पति को मरवाने में तुम भी शामिल थी?’’

ओमहरि वाजपेयी की बातों पर देवेंद्र प्रताप सिंह को अभी भी विश्वास नहीं हुआ था. वह तेजतेज कदमों से सीढि़यां चढ़ कर बेटे के कमरे में पहुंचे. बैड के एक कोने में 5 साल का आयुष डरासहमा बैठा था. दादा को देख कर वह झट से उठा और उन के सीने से जा चिपका. वह जिस बेटे को खोजने आए थे, वह कमरे में नहीं था. देवेंद्र पोते को ले कर नीचे आ गए. अब साफ हो गया था कि विवेक के साथ अनहोनी घट चुकी थी.

हैरानी की बात यह थी कि विवेक के कमरे के बगल वाले कमरे में उस के चाचा कृष्णप्रताप सिंह और चाची दुर्गा सिंह सोई थीं. हत्या कब और कैसे हुई, उन्हें पता ही नहीं चला था. सभी यह सोच कर हैरान थे कि घर में सब के रहते हुए सुषमा ने इतनी बड़ी घटना को कैसे अंजाम दे दिया? मजे की बात यह थी कि इतना सब होने के बावजूद सुषमा के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी.

सुषमा की खामोशी से साफ हो गया था कि यह सब उस की मरजी से हुआ था. उस के पास अब अपना अपराध स्वीकार कर लेने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं था. उस ने घर वालों के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. सच्चाई जान कर घर में कोहराम मच गया. देवेंद्र प्रताप सिंह के घर से अचानक रोने की आवाजें सुन कर पड़ोसी उन के यहां पहुंचे तो विवेक की हत्या के बारे में सुन कर हैरान रह गए. उन की हैरानी तब और बढ़ गई, जब उन्हें पता चला कि यह काम विवेक की पत्नी सुषमा ने ही कराया था.

पुलिस सुषमा को साथ ले कर थाना कैंट आ गई. कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू और उस के एक साथी राधेश्याम पकड़े जा चुके थे. पता चला कि उस के 2 साथी अनिल मौर्य और सुनील भागने में कामयाब हो गए थे.

ओमहरि वाजपेयी ने रात होने की वजह से सुषमा सिंह को महिला थाने भिजवा दिया. रात में कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू और उस के साथी राधेश्याम मौर्य से पुलिस ने पूछताछ शुरू की. दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

अगले दिन यानी 23 अप्रैल, 2017 की सुबह मृतक विवेक प्रताप सिंह के पिता देवेंद्र प्रताप सिंह ने थाना कैंट में बेटे की हत्या का नामजद मुकदमा 6 लोगों कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू, राधेश्याम मौर्य, अनिल मौर्य, सुनील तेली, सुषमा सिंह और मुकेश गौड़ के खिलाफ दर्ज कराया.

पुलिस ने यह मुकदमा भादंवि की धारा 302, 201, 147, 149 के तहत दर्ज किया था. इस मामले में 3 लोग पकड़े जा चुके थे, बाकी की तलाश में पुलिस निकल पड़ी. पूछताछ में गिरफ्तार किए गए कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू ने विवेक की हत्या की जो कहानी सुनाई थी, वह इस प्रकार थी—

32 साल की सुषमा सिंह मूलरूप से जिला देवरिया के थाना गौरीबाजार के गांव पथरहट के रहने वाले सुरेंद्र बहादुर सिंह की बेटी थी. उन की संतानों में वही सब से बड़ी थी. बात उन दिनों की है, जब सुषमा ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा था. सुषमा काफी खूबसूरत थी, इसलिए उसे जो भी देखता, देखता ही रह जाता. उस के चाहने वालों की संख्या तो बहुत थी, लेकिन वह किसी के दिल की रानी नहीं बन पाई थी. इस मामले में अगर किसी का भाग्य जागा तो वह था कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू.

32 साल का कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू उसी गांव के रहने वाले दीपनारायण सिंह का बेटा था. उन की गांव में तूती बोलती थी. गांव का कोई भी आदमी दीपनारायण से कोई संबंध नहीं रखता था. उस के किसी कामकाज में भी कोई नहीं आताजाता था. डब्लू 18-19 साल का था, तभी वह भी पिता के नक्शेकदम पर चल निकला था. वह भी अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता था.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कामेश्वर सिंह उर्फ डब्लू इंटर तक ही पढ़ पाया था. इस के बाद वह अपराध में डूब गया. जल्दी ही आसपास के ही नहीं, पूरे जिले के लोग उस से खौफ खाने लगे. डब्लू का बड़ा भाई बबलू पुलिस विभाग में सिपाही था. वह शराब पीने का आदी था. उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था.

सन 2010 में गांव के बाहर एक तालाब में पुलिस वर्दी में बबलू की लाश तैरती मिली थी. लोगों का कहना था कि शराब के नशे में वह डूब कर मर गया था. लेकिन डब्लू और उस के घर वालों का मानना था उस की हत्या की गई थी. यह हत्या किसी और ने नहीं, गांव के ही उस के विरोधी रमेश सिंह ने की थी. लेकिन यह बात उन लोगों ने रमेश सिंह से ही नहीं, गांव के भी किसी आदमी से नहीं कही थी.

इस की वजह यह थी कि डब्लू को रमेश सिंह से भाई की मौत का बदला लेना था. इस के लिए उस ने रमेश सिंह से दोस्ती गांठ ली. फिर एक दिन गांव के पास ही वह रमेश सिंह के साथ शराब पीने बैठा. उस ने जानबूझ कर रमेश सिंह को खूब शराब पिलाई.

जब रमेश सिंह नशे में बेकाबू हो गया तो डब्लू ने हंसिए से उस का गला धड़ से अलग कर दिया. इस के बाद रमेश सिंह का कटा सिर लिए वह मां के पास पहुंचा और सिर उन के सामने कर के बोला, ‘‘देखो मां, यही भैया का हत्यारा था. आज मैं ने इस के किए की सजा दे दी. इसे वहां भेज दिया, जहां इसे बहुत पहले पहुंच जाना चाहिए था.’’

यह सन 2011 की बात है.   इस के बाद रमेश सिंह का कटा सिर लिए डब्लू पूरे गांव में घूमा. डब्लू के दुस्साहस को देख कर गांव में दहशत फैल गई. पुलिस उस तक पहुंच पाती, उस से पहले ही वह रमेश सिंह का सिर फेंक कर फरार हो गया. लेकिन पुलिस के चंगुल से वह ज्यादा समय तक नहीं बच पाया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद डब्लू को लगा कि गांव के ही रहने वाले रमेश सिंह के करीबी पूर्व ग्रामप्रधान शातिर बदमाश अरुण सिंह उस की हत्या करवा सकते हैं. फिर क्या था, वह उन्हें ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगा.

25 अप्रैल, 2013 को किसी काम से अरुण सिंह अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे, तभी मचिया चौराहे पर घात लगा कर बैठे डब्लू ने गोलियों से भून डाला. घटनास्थल पर ही उन की मौत हो गई. उस समय तो वह फरार हो गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

बात उस समय की है, जब सुषमा कालेज में पढ़ती थी. संयोग से उसी कालेज में डब्लू भी पढ़ता था. चूंकि दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे, इसलिए कालेज आतेजाते अकसर दोनों की मुलाकात हो जाती थी. सुषमा खूबसूरत तो थी ही, डब्लू भी कम स्मार्ट नहीं था. साथ आनेजाने में ही दोनों में प्यार हो गया. सुषमा डब्लू के आपराधिक कारनामों के बारे में जानती थी, इस के बावजूद उस से प्यार करने लगी.

सुषमा और डब्लू की प्रेमकहानी जल्दी ही गांव वालों के कानों तक पहुंच गई. फिर तो इस की जानकारी सुरेंद्र बहादुर सिंह को भी हो गई. बेटी की इस करतूत से पिता का सिर शरम से झुक गया. उन्होंने सुषमा को डब्लू से मिलने के लिए मना तो किया ही, उस के घर से निकलने पर भी पाबंदी लगा दी. इस का नतीजा यह निकला कि एक दिन वह मांबाप की आंखों में धूल झोंक कर डब्लू के साथ भाग गई. इस के बाद दोनों ने मंदिर में शादी कर ली. यह 7-8 साल पहले की बात है.

सुषमा के भाग जाने से सुरेंद्र बहादुर सिंह की काफी बदनामी हुई. डब्लू आपराधिक प्रवृत्ति का था, इसलिए वह उस का कुछ कर भी नहीं सकते थे. फिर भी उन्होंने पुलिस के साथसाथ बिरादरी की मदद ली. पुलिस और बिरादरी के दबाव में डब्लू ने सुषमा को उस के घर वापस भेज दिया. सुषमा के घर वापस आने के बाद सुरेंद्र बहादुर सिंह ने उस के घर से बाहर जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी.

संयोग से उसी बीच रमेश सिंह की हत्या के आरोप में डब्लू जेल चला गया तो सुरेंद्र बहादुर सिंह ने राहत की सांस ली. डब्लू की जो छवि बन चुकी थी, उस से वह काफी डरे हुए थे. वह जेल चला गया तो उन्होंने इस मौके का फायदा उठाया और आननफानन में सुषमा की शादी गोरखपुर के रहने वाले संपन्न और सभ्य देवेंद्र प्रताप सिंह के बेटे विवेक प्रताप सिंह उर्फ विक्की से कर दी.

यह शादी इतनी जल्दी में हुई थी कि देवेंद्र प्रताप सिंह बहू के बारे में कुछ पता नहीं कर सके. जेल में बंद डब्लू को जब सुषमा की शादी के बारे में पता चला तो वह सुरेंद्र बहादुर सिंह पर बहुत नाराज हुआ. लेकिन वह सुषमा के पिता थे, इसलिए वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था. पर उस ने यह जरूर तय कर लिया था कि वह सुषमा को खुद से अलग नहीं होने देगा. इस के लिए उसे कुछ भी करना पड़े, वह करेगा.

सुषमा ने भले ही विवेक से शादी कर ली थी, लेकिन उस का तन और मन डब्लू को ही समर्पित था. हर घड़ी वह उसी के बारे में सोचती रहती थी. जल्दी ही वह विवेक के बेटे आयुष की मां बन गई. जनवरी, 2013 में जब डब्लू जमानत पर जेल से बाहर आया तो सुषमा से मिलने गोरखपुर स्थित उस की ससुराल पहुंच गया.

डब्लू को देख कर सुषमा बहुत खुश हुई. उस का प्यार उस के लिए फिर जाग उठा. इस के बाद वे किसी न किसी बहाने एकदूसरे से मिलने लगे. फोन पर तो बातें होती ही रहती थीं. उसी बीच 25 अप्रैल, 2013 को डब्लू ने पूर्वप्रधान अरुण सिंह की हत्या कर दी तो वह एक बार फिर जेल चला गया. इस बार वह 5 सालों बाद 18 मार्च, 2017 को जेल से बाहर आया तो एक बार फिर उस का सुषमा से मिलनाजुलना शुरू हो गया.

डब्लू बारबार सुषमा से मिलने आने लगा तो विवेक प्रताप सिंह को पत्नी के चरित्र पर संदेह हो गया. इस के बाद पतिपत्नी में अकसर झगड़ा होने लगा. वह डब्लू को अपने यहां आने से मना करने लगा. लेकिन सुषमा उस की एक नहीं सुनती थी. पत्नी के इस व्यवहार से विवेक काफी परेशान रहने लगा. रोजरोज के झगड़े से बेटा भी परेशान रहता था. डब्लू को ले कर पतिपत्नी में संबंध काफी बिगड़ गए. दोनों के बीच मारपीट भी होने लगी.

सुषमा विवेक की कोई बात नहीं मानती थी. रोजरोज के झगड़े से परेशान विवेक अपने दुख को किसी से न कह कर फेसबुक पर पोस्ट किया करता था. दूसरी ओर सुषमा भी पति से ऊब चुकी थी. अब वह उस से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगी. जब उस ने यह बात डब्लू से कही तो उस ने आश्वासन दिया कि उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है. वह जब चाहेगा, उसे विवेक से छुटकारा दिलवा देगा. उस के बाद दोनों एक साथ रहेंगे.

डब्लू के लिए किसी की जान लेना मुश्किल काम नहीं था. सुषमा के कहने के बाद वह विवेक की हत्या की योजना बनाने लगा. सुषमा भी योजना में शामिल थी. दोनों विवेक की हत्या इस तरह करना चाहते थे कि उन का काम भी हो जाए और उन का बाल भी बांका न हो. यानी वे पकड़े न जाएं. वे विवेक की हत्या को एक्सीडेंट दिखाना चाहते थे. इस के लिए डब्लू ने टाटा सफारी कार की व्यवस्था कर ली थी. यह कार उस के पिता की थी. इस के बाद वे घटना को अंजाम देने का मौका तलाशने लगे.

22-23 मई, 2017 की रात सुषमा सिंह ने योजना के तहत डब्लू को बुला लिया. डब्लू टाटा सफारी कार यूपी52ए के5990 से अपने 3 साथियों राधेश्याम मौर्य, अनिल मौर्य और सुनील तेली के साथ विशुनपुरा पहुंच गया. उन्होंने कार घर से कुछ दूरी पर स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के औफिस के सामने खड़ी कर दी. कार का ड्राइवर अशोक उसी में बैठा था.

डब्लू अपने साथियों के साथ विवेक के घर पहुंचा तो सुषमा दरवाजा खोल कर सभी को बैडरूम में ले गई. बैड पर विवेक बेटे के साथ सो रहा था. विवेक की हत्या के लिए सुषमा ने एक ईंट पहले से ही ला कर कमरे में रख ली थी. कमरे में पहुंचते ही डब्लू ने विवेक का गला दबोच लिया. विवेक छटपटाया तो उस के साथियों ने उसे काबू कर लिया. उन्हीं में से किसी ने सुषमा द्वारा रखी ईंट से सिर पर प्रहार कर के उसे मौत के घाट उतार दिया.

धक्कामुक्की और छीनाझपटी में पिता के बगल में सो रहे आयुष की आंखें खुल गईं. उस ने देखा कि कुछ लोग उस के पापा को पकड़े हैं तो वह चिल्ला उठा. उस के चीखने पर सब डर गए. डब्लू ने उसे डांटा तो उस की आवाज गले में फंस कर रह गई. इस के बाद वह आंखें मूंद कर लेट गया. एक बार सभी ने विवेक को हिलाडुला कर देखा, जब उस के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तो सब समझ गए कि यह मर चुका है.

इस के बाद उन्होंने लाश उठाई और ऊपर से ही नीचे फेंक दी. फिर दबेपांव सीढ़ी से नीचे आ गए. डब्लू ने बरामदे में खड़ी विवेक की मोटरसाइकिल निकाली और खुद चलाने के लिए बैठ गया. जबकि राधेश्याम विवेक की लाश को ले कर इस तरह बैठ गया, जैसे वह बीच में बैठा है. बाकी के उस के 2 साथी अनिल और सुनील पैदल ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के औफिस की ओर चल पड़े. क्योंकि  उन की कार वहीं खड़ी थी.

लेकिन जब वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास पहुंचे तो कार वहां नहीं थी. सभी परेशान हो उठे. दरअसल हुआ यह था कि उन के जाने के कुछ ही देर बाद गश्त करते हुए 2 सिपाही वहां आ पहुंचे थे. उन्होंने आधी रात को कार खड़ी देखी तो ड्राइवर अशोक से पूछताछ करने लगे. घबरा कर ड्राइवर अशोक कार ले कर भाग गया. ड्राइवर डब्लू को फोन करता रहा, लेकिन फोन बंद होने की वजह से बात नहीं हो पाई.

डब्लू के आने पर वहां कार नहीं मिली तो उसे चिंता हुई. वह ड्राइवर को फोन करने ही जा रहा था कि पुलिस चौकी रामगढ़ताल के 2 सिपाही वहां आ पहुंचे. उन्होंने उन से पूछताछ शुरू की तो वे सही जवाब नहीं दे सके. सिपाहियों ने थाना कैंट फोन कर के थानाप्रभारी ओमहरि वाजपेयी को इस की सूचना दे दी.

ओमहरि वाजपेयी मौके पर पहुंचे तो उन्हें मामला संदिग्ध लगा. उन्होंने बीच में बैठे विवेक को हिलाडुला कर देखा तो पता चला कि वह तो लाश है. डब्लू और राधेश्याम से सख्ती से पूछताछ की गई तो विवेक की हत्या का राज खुल गया.

दूसरी ओर जब सभी विवेक की लाश ले कर चले गए तो सुषमा कमरे में फैला खून साफ करने लगी. उस ने जल्दी से चादर और तकिए भी बदल दिए थे. उस ने सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की थी. तब शायद उसे पता नहीं था कि उस ने जो किया है, उस का राज तुरंत ही खुलने वाला है.

आयुष अपने पापा विवेक प्रताप सिंह की हत्या का चश्मदीद गवाह है. उस ने पुलिस को बताया कि जब अंकल लोग उस के पापा को पकड़े हुए थे तो वह चीखा था. तब एक अंकल ने उस का मुंह दबा कर डांट दिया था. उन लोगों ने पापा का गला तो दबाया ही, उन्हें ईंट से भी मारा था.

वे पापा को ले कर चले गए तो मम्मी कमरे में फैला खून साफ करने लगी थीं. वे उसे भी मारना चाहते थे, तब मम्मी ने एक अंकल से कहा था, ‘यह तो तुम्हारा ही बेटा है, इसे मत मारो.’ इस के बाद अंकल ने उसे छोड़ दिया था.

विवेक की लाश उस की मोटरसाइकिल से इसलिए ला रहे थे, ताकि उसे सड़क पर उस की मोटरसाइकिल सहित कहीं फेंक कर यह दिखाया जा सके कि उस की मौत सड़क दुर्घटना में हुई है.

पुलिस ने अनिल और सुनील को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन ड्राइवर अशोक अभी पकड़ा नहीं जा सका है. टाटा सफारी कार बरामद हो चुकी है. पुलिस ने विवेक की हत्या में प्रयुक्त खून से सनी ईंट, खून सने कपड़े आदि भी बरामद कर लिए थे. विवेक की मोटरसाइकिल तो पहले ही बरामद हो चुकी थी.

सारी बरामदगी के बाद पुलिस ने अदालत में सभी को पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मजे की बात यह है कि सुषमा को पति की हत्या का जरा भी अफसोस नहीं है. वह जेल से बाहर आने के बाद अब भी अपने प्रेमी डब्लू के साथ जीवन बिताने के सपने देख रही है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कटरीना कैफ ने मनाया पति विक्की कौशल का बर्थडे, कुछ यूं किया सेलिब्रेट

बॉलीवुड में जब खास कपल की बात होती है तो ऐसा नहीं है कि विक्की कौशल और कटरीना कैफ का नाम ना आता हो ये बॉलीवुड की बेस्ट जोड़ी है जो पर्दे से ज्यादा रीयल लाइफ में फेमस है. आज यही कपल के लिए खास दिन है जी हां, विक्की कौशल का आज 35वां बर्थडे है जिसे कटरीना कैफ ने स्पेशल तरीके से मनाया है.

 

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आपको बता दें, कि विक्की कौशल का 35वां बर्थडे है इस खास मौके पर पत्नी कैटरीना कैफ ने बड़े ही रामोंटिक अंदाज में बर्थडे सेलिब्रेट किया है. सामने आईं इन तस्वीरों में अदाकारा कटरीना कैफ अपने पति विक्की कौशल की बांहों में झूलती हुईं उनके बर्थडे का जश्न मनाती दिखीं. जबकि, दूसरी तस्वीर में विक्की कौशल और कटरीना कैफ रोमांटिक अंदाज में पोज करते दिखे. ये तस्वीर शेयर कर एक्ट्रेस ने लिखा, ‘थोड़ा सा डांस, ढेर सारा प्यार, हैप्पीएस्ट बर्थडे’ यहां देखें सामने आईं कटरीना कैफ और विक्की कौशल की फोटोज.

बता दें, कपल ने साल 2021, दिसंबर के महीने में शादी रचाई थी.दोनों सेलिब्रिटी की ग्रैंड वेडिंग राजस्थान में हुई थी. शादी के बाद ये विक्की कौशल का कैटरीना संग दूसरा बर्थ डे है. ये बॉलीवुड का सबसे प्यारा कपल माना जाता है. इस मौके को खास बनाने में कैटरीना ने कोई कसर नहीं छोड़ी है.

 

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दोनों कपल के वर्क फ्रंट की बात करें तो, आजकल ये विक्की सारा अली के साथ फिल्म जरा हटके जरा बचके के प्रमोशन में जुटे हुए है ये फिल्म 2 जून को रिलीज होने जा रही है. जबकि, इसके बाद वो अपनी बायोग्राफिकल फिल्म सैम बहादुर में बिजी हैं. इसके अलावा एक्टर के हाथ शाहरुख खान की डंकी भी है. जबकि, अदाकारा कटरीना कैफ जल्दी ही सुपरस्टार सलमान खान के साथ फिल्म टाइगर 3 में नजर आएंगी. इसके बाद वो आलिया भट्ट और प्रियंका चोपड़ा संग फरहान अख्तर की फिल्म जी ले जरा में भी बिजी हैं. इस फिल्म को लेकर फैंस के बीच भारी क्रेज है. तो क्या आप इन दोनों सितारों की आने वाली फिल्मों को लेकर एक्साइटेड हैं. अपनी राय हमें कमेंट कर बता सकते हैं.

ब्लैक ड्रेस में यूं डांस करती दिखीं भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा, देखें वीडियो

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है आज उनके कई ढेरों फैंस है जो उन्हे सोशल मीडिया पर फॉलो करते है और उनकी अदाओं के फैन है, इन दिनों मोनालिसा अपने डांस का लेकर चर्चा में बनीं हुई है उनका डांस वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वह बेहद ही हॉट नजर आ रही है.

 

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आपको बता दें, कि मोनालिसा इस वीडियो में ब्लैक ड्रेस में नजर आ रही है. मोनालिसा मस्त मलंग गाने पर डांस कर रही है ब्लैक ड्रैस में मोनालिसा कहर बरसा रही है औऱ हॉट लग रही है एक्ट्रेस ने वीडियो में तरह-तरह क पोज दिए है जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे है ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है साथ ही लोग इस वीडियो पर कमेंट करते नजर आ रहे है. बता दे, इससे पहले मोनलिसा साड़ी में कराया फोटो शूट को लेकर चर्चा में थी, लेकिन इस बार उनका डांस उनको चर्चा में बनाएं हुए है.

 

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बता दे, कि भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है वह समय-समय पर वीडियो-फोटो अपने फैंस के साथ साझा करती रहती है. इतना ही नहीं, उनके डांस के साथ-साथ लोग उनकी एक्टिंग के भी दिवाने है. इन दिनों एक्ट्रेस बेकाबू सीरियल में बीजी चल रही है साथ ही मोनालिसा ने भोजपुरी सिनेमा में पवन सिंह के साथ लेकर खेसारी लाल यादव तक के साथ काम किय़ा है जिनकी फैन फॉलोइंग, यूपी-बिहार तक है.

मौत का खेल खेलने वाला मास्टर

4 मार्च, 2017 की रात लैंडलाइन फोन की घंटी बजी तो नाइट ड्यूटी पर तैनात एसआई सुरेश कसवां ने रिसीवर उठा कर कहा, ‘‘कहिए, हम आप की क्या सेवा कर सकते हैं?’’

‘‘साहब, मैं खेरूवाला से यूनुस खान बोल रहा हूं. मेरे दोस्त जसवंत मेघवाल पर अज्ञात लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया है. साहब, कुछ करिए, उस के साथ महिलाएं और बच्चा भी है.’’ डरेसहमे स्वर में यूनुस खान ने कहा था.

‘‘ठीक है, अपने दोस्त की लोकेशन बताओ, पुलिस हरसंभव मदद करेगी.’’ सुरेश कसवां ने कहा.

यूनुस खान ने लोकेशन बताई तो 5 मिनट में ही सुरेश कसवां सिपाहियों के साथ हाथियांवाला खैरूवाला मार्ग स्थित घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस की गाड़ी को देख कर सरसों के खेत में छिपा एक आदमी भागता हुआ सुरेश कसवां के सामने आ कर खड़ा हो गया. उस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘साहब, हमें बचा लीजिए. वे दोनों मेरे परिवार को खत्म कर देना चाहते हैं. उन्होंने हमारे ऊपर बरछीतलवारों से हमला कर दिया है. मैं तो उन्हें चकमा दे कर भाग आया, पर मेरी सास, पत्नी और बेटा उन के कब्जे में है.’’

इतना कह कर डरेसहमे उस आदमी ने अपने दोनों हाथ जोड़ कर एसआई सुरेश कसवां के सामने किए तो चांदनी रात में उस के हाथों से टपकता हुआ खून उन्हें साफ दिखाई दे गया.

मामला काफी गंभीर था. पुलिस फोर्स के सामने 2 महिलाओं और एक बच्चे की सकुशल बरामदगी चुनौती बन गई. एक पल गंवाए बिना सुरेश कसवां ने उसी मार्ग पर खड़ी कार ढूंढ निकाली, जिस में पीछे की सीट पर 28-29 साल की एक युवती गंभीर हालत में घायल पड़ी थी. अगली सीट पर दो-ढाई साल का एक बच्चा गुमसुम बैठा था. उस की भरी हुई आंखें बता रही थीं कि कुछ देर पहले तक वह जारजार रोया था.

सुरेश कसवां ने घायल युवती की नब्ज टटोली तो उन्हें लगा कि इस की सांसें चल रही हैं. घायल आदमी और युवती को ले कर पुलिस टीम तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, जहां डाक्टरों ने उस घायल युवती की जांच की तो पता चला कि वह मर चुकी है. घायल व्यक्ति को भरती कर के उस का इलाज शुरू कर दिया गया.

यह घटना राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर की सादुल शहर तहसील में 4 मार्च, 2017 की आधी रात को घटी थी. घायल व्यक्ति का नाम जसवंत मेघवाल था और जो महिला मर गई थी, वह उस की पत्नी राजबाला थी. कार में मिला बच्चा उसी का बेटा रुद्र था.

इस के बाद थाना सादुल शहर के थानाप्रभारी भूपेंद्र सोनी के निर्देश पर जसवंत मेघवाल के बयान के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध संख्या 56/17 पर भादंवि की धाराओं 302, 307, 323, 342 हरिजन उत्पीड़न और धारा 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. जसवंत की सास परमेश्वरी का अभी तक कुछ अतापता नहीं था. सुबह उस की तलाश में पुलिस टीम घटनास्थल पर पुन: पहुंची तो सड़क पर खड़ी कार से लगभग 200 मीटर दूर परमेश्वरी का लहूलुहान शव पुलिस को मिल गया. इस के बाद अपनी काररवाई कर पुलिस ने परमेश्वरी और उस की बेटी राजबाला की लाश को पोस्टमार्टम करा कर दोनों शव घर वालों को सौंप दिए गए.

दोनों हत्याओं की जानकारी पा कर श्रीगंगानगर के एसपी राहुल कोटकी सादुल शहर पहुंच गए थे. चूंकि इस मामले में हरिजन एक्ट लगा था, इसलिए इस मामले की जांच डीएसपी दिनेश मीणा को सौंपी गई.

स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करा रहे जसवंत मेघवाल ने अपने बयान में बताया था कि उस ने सालासर बालाजी धाम में बेटे रुद्र मेघवाल का मुंडन कराने की मन्नत मांगी थी. इसीलिए 2 मार्च की सुबह उस ने अपनी सास परमेश्वरी से फोन पर इस बारे में बात की तो उन्होंने चलने के लिए हामी भर दी. तब वह 3 मार्च की रात अपनी कार से सास परमेश्वरी, पत्नी राजबाला और बेटे रुद्र को ले कर निकल पड़ा.

लगभग 10 किलोमीटर चलने पर 2 लोगों ने हाथ का इशारा कर कार रोकने को कहा तो उस की सास ने उन लोगों को अपना परिचित बता कर कार रुकवा दी. उस की सास ने उन दोनों को भी पिछली सीट पर अपने पास बैठा लिया. वह कुछ दूर ही गया था कि उन अज्ञात लोगों ने खंजर निकाला और उस पर तथा उस की पत्नी राजबाला पर हमला कर दिया.

अचानक हुए हमले से वह घबरा गया और ड्राइविंग सीट से कूद कर नजदीक के खेत में जा छिपा. इस के बाद उस ने अपने मित्र यूनुस खान को मोबाइल से फोन कर के इस घटना के बारे में बता कर मदद मांगी.

उस ने रोते हुए कहा था, ‘‘साहब, कुछ दिनों पहले भी मेरी सास ने मुझ पर हमला करवाया था, तब मैं बच गया था. कल रात हुआ हमला भी मेरी सास द्वारा करवाया गया था. वह मेरी जायदाद हड़पने के लिए मुझे मरवाना चाहती थी.’’

जांच अधिकारी दिनेश मीणा ने जसवंत के बयान पर गौर किया तो उन्हें संदेह हुआ. जसवंत हमले को सास की साजिश बता रहा था, जबकि सास खुद मारी गई थी. इस से उन्हें जसवंत के आरोप बेबुनियाद लगे थे. उन की नजर में वही संदिग्ध हो गया. उस के दाहिने हाथ पर मामूली खरोंच थी, जबकि बाएं हाथ पर थोड़ा आड़ेतिरछे गहरे घाव थे.

दिनेश मीणा ने जसवंत के हाथों के जख्मों के बारे में डाक्टरों से राय ली तो उन का संदेह यकीन में बदलने लगा. डाक्टरों का कहना था कि खंजर के वार आड़ेतिरछे थे, जो मात्र बाएं हाथ पर थे. दाहिने हाथ पर मात्र खरोंच के निशान थे. अगर कोई वार करता तो गहरे घाव होते. घावों को देख कर यही लगता है कि खुद ही वार किए गए थे.

दिनेश मीणा ने हमले को जर, जोरू और जमीन के तराजू पर तौला तो उद्देश्य भी सामने आ गया. कत्ल के पीछे परमेश्वरी की बेशकीमती खेती की जमीन थी. राजबाला के कत्ल की वजह उस का अनपढ़, साधारण रंगरूप और फूहड़ होना था. पढ़ालिखा जसवंत राजबाला की मौत के बाद किसी सुंदर पढ़ीलिखी युवती से विवाह करना चाहता था.

दिनेश मीणा ने स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करा रहे जसवंत के पास जा कर पूछा, ‘‘कहो जसवंत, कैसे हो? तुम्हारी तबीयत कैसी है?’’

‘‘साहब, हमलावरों ने अपनी समझ से तो मुझे मार ही डाला था, पर संयोग से मैं बच गया. हाथ में हुए घाव बहुत गहरे हैं. असहनीय पीड़ा हो रही है.’’ जसवंत ने कहा.

‘‘भई, तुम्हारी सास तो बड़ी शातिर निकली. अपने ही दामाद पर हमला करवा दिया. खैर, घबराने की कोई बात नहीं है, 2 दिनों में घाव ठीक हो जाएंगे. पूरा पुलिस विभाग तुम्हारी सुरक्षा में लगा है. मुझे आशंका है कि परमेश्वरी के गुंडे तुम पर यहां भी हमला कर सकते हैं, इसलिए मैं ने तुम्हारी सुरक्षा के लिए यहां गनमैन तैनात कर दिए हैं.’’

दिनेश मीणा ने घायल पड़े जसवंत के चेहरे पर गौर किया तो उन्हें जसवंत के चेहरे पर कुटिल मुसकान तैरती नजर आई. शायद वह सोच रहा था कि उस की समझ व सोच के अनुरूप ही पुलिस ने उस की कहानी पर विश्वास कर लिया है. उस की सुरक्षा की व्यवस्था भी कर दी है.

दूसरी तरफ दिनेश मीणा के होंठों पर भी मुसकराहट तैर रही थी कि पुलिस ने डबल मर्डर के आरोपी जसवंत की खुराफात बेपरदा कर उसे निगरानी में ले लिया है. अगले दिन जसवंत को स्वास्थ्य केंद्र से डिस्चार्ज करा कर थाने लाया गया. दिनेश मीणा ने उस से गंभीरता से पूछताछ की तो आखिर उस ने बिना हीलाहवाली के अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

इस के बाद जसवंत को सादुल शहर के एसीजेएम की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के लिए 8 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. थाने में दर्ज मुकदमे में अज्ञात की जगह जसवंत मेघवाल का नाम दर्ज कर लिया गया था.

रिमांड के दौरान जसवंत मेघवाल से की गई विस्तृत पूछताछ में उस का ऐसा वीभत्स कृत्य सामने आया कि जान कर हर कोई दंग रह गया. उस ने अपनी सास की जमीन हड़पने और अनपढ़ पत्नी से छुटकारा पाने के लिए अपनों के ही खून से हाथ रंग लिए थे. टीवी पर आने वाले आपराधिक धारावाहिकों को देख कर उस ने घटना का तानाबाना बुना था.

सादुल शहर तहसील के 2 गांव अलीपुरा और नूरपुरा आसपास बसे हैं. अलीपुरा में जसवंत रहता था तो नूरपुरा में परमेश्वरी. दोनों गांवों के बीच लगभग 5 किलोमीटर की दूरी है. जसवंत 20 बीघा सिंचित खेती की जमीन का एकलौता मालिक था तो वहीं परमेश्वरी भी 35 बीघा सिंचित खेती की जमीन की मालकिन थी.

दोनों ही परिवार भले ही हरिजन वर्ग से  आते थे, पर दोनों ही परिवारों की गिनती धनाढ्य और रसूखदार परिवारों में होती थी. परमेश्वरी की एकलौती संतान राजबाला थी. लाड़प्यार में पली राजबाला का प्राथमिक शिक्षा के बाद शिक्षा से मोह भंग हो गया था, वहीं जसवंत के दिल में शिक्षा के प्रति गहरा लगाव था. यही वजह थी कि उस ने एमए, बीएड तक की पढ़ाई की थी.

विधवा परमेश्वरी जवान हो चुकी बेटी राजबाला के लिए वर की तलाश में जुटी थी, पर उस की जातिबिरादरी में उस की हैसियत का घर व वर नहीं मिल रहा था. किसी रिश्तेदार ने अलीपुरा निवासी उच्चशिक्षित जसवंत का नाम सुझाया तो यह रिश्ता उसे जंच गया.

बात चली तो राजबाला के अनपढ़ होने की बात कह कर जसवंत नानुकुर करने लगा. पर बिचौलिए रिश्तेदारों ने कार सहित लाखों का दहेज मिलने का लालच दे कर जसवंत को शादी के लिए तैयार कर लिया.

इस के बाद मार्च, 2012 में राजबाला और जसवंत की शादी हो गई. राजबाला के आने के साथ ही जसवंत का घर दहेज में मिले सामान से भर गया था. घर के दालान में खड़ी नईनवेली कार ने तो जसवंत के रुतबे में चारचांद लगा दिया था.

शादी के बाद जसवंत पैरा टीचर के रूप में नियुक्त हो गया तो खेतों को बटाई पर उठा दिया. कार और ठीकठाक पैसा होने की वजह से जसवंत के दोस्तों का दायरा बढ़ गया. कभी दोस्तों को अपने घर पर तो कभी दोस्तों के यहां होने वाली पार्टियों में वह पत्नी के साथ शामिल होता. दोस्तों की बीवियों के सामने उसे अपनी अनपढ़ पत्नी राजबाला फूहड़ नजर आती.

सच्चाई यह थी कि उच्च और शिक्षित समाज की होने वाली पार्टियों में सामंजस्य बिठा पाना राजबाला के बूते में नहीं था. उस का अनपढ़ और फूहड़ होना जसवंत के दिमाग पर हावी होने लगा. अब वह उस से ऊब चुका था, जिस की वजह से घर में रोजरोज किचकिच होने लगी.

उसी बीच राजबाला ने पहली संतान के रूप में बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रुद्र रखा गया. इस के बाद जसवंत राजबाला की उपेक्षा करने लगा. पति के प्यार व अपनत्व से वंचित राजबाला विद्रोही बन गई. उस ने अपनी मां को फोन कर के जसवंत के खिलाफ भर दिया.

कहा जाता है कि राजबाला ने मां से कहा था कि जसवंत किसी बाजारू लड़की के चक्कर में फंस कर न केवल पैसे बरबाद कर रहा है बल्कि उस की गृहस्थी उजाड़ रहा है. यह जान कर परमेश्वरी आगबबूला हो उठी और जसवंत के घर आ धमकी. आते ही उस ने कहा, ‘‘जवाईंराजा, क्यों पराई औरतों के चक्कर में पड़ कर अपना घर उजाड़ रहे हो? तुम यह जो कर रहे हो, ठीक नहीं है.’’

‘‘नहीं मांजी, ऐसी कोई बात नहीं है. जिस ने भी यह कहा है, सरासर झूठ है.’’ सफाई में जसवंत ने कहा.

पति की इस सफाई पर नाराज राजबाला भी बीच में कूद पड़ी. इस के बाद पतिपत्नी में लड़ाई होने लगी. परमेश्वरी भी बेटी का पक्ष ले कर लड़ रही थी.

‘‘मांजी, राजबाला अनपढ़ है, इसलिए मेरी पढ़ाई और रहनसहन को ले कर जलती है. आप इसे समझाने के बजाए मुझ पर ही आरोप लगा रही हैं.’’ मामले को संभालने की कोशिश करते हुए जसवंत ने कहा, ‘‘इस से ब्याह कर के तो मेरा भाग्य ही फूट गया है.’’

‘‘बेटा, यह तो तुम्हें शादी से पहले सोचना चाहिए था. मैं ने तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी.’’ परमेश्वरी ने कहा.

‘‘तुम लोगों ने मेरे साथ धोखा किया है. कार और दहेज का लालज दे कर मुझे फंसा दिया.’’ कह कर जसवंत घर से बाहर निकल गया.

इस झगड़े ने जसवंत का दिमाग खराब कर दिया. अब राजबाला के साथ उस की मां परमेश्वरी भी उस के दिमाग में खटकने लगी. फिर क्या था, खुराफाती और उग्र दिमाग के जसवंत ने मांबेटी का अस्तित्व ही मिटाने का खतरनाक निर्णय ले लिया. अपने इस निर्णय को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उस ने हर पहलू को नफेनुकसान के तराजू पर तौला. इस के बाद किसी पेशेवर बदमाश से दोनों को सुपारी दे कर मरवाने का विचार किया. जसवंत का सोचना था कि अगर वह दोनों को मरवा देता है तो न केवल सुंदर और शिक्षित लड़की से शादी कर सकेगा, बल्कि परमेश्वरी की 35 बीघा बेशकीमती जमीन भी उस के बेटे रुद्र को मिल जाएगी.

अगर वह पकड़ा भी गया तो हत्या के आरोप में होने वाली 18 साल की जेल काटने के बाद बाहर आने पर बाकी की जिंदगी बेशुमार दौलत के सहारे ऐशोआराम से काटेगा. तब तक बालिग होने वाला बेटा रुद्र सोनेचांदी में खेलेगा. जसवंत को लगा कि उस के दोनों हाथों में लड्डू हैं.

महत्त्वाकांक्षी और ऐशोआराम की जिंदगी जीने की चाहत रखने वाला जसवंत अपने इस निर्णय पर बहुत खुश हुआ. उस ने पेशेवर हत्यारे की तलाश शुरू कर दी. काफी दिनों बाद नूरपुर का रहने वाला जसवंत का खास मित्र तुफैल खां मिला तो उस ने कहा, ‘‘अरे जसवंत भैया, बड़े परेशान दिख रहे हो? आज फिर भाभी से झगड़ा हो गया है क्या?’’

‘‘भाई, आप से क्या छिपाना, मांबेटी ने मेरा जीना हराम कर दिया है. मन करता है, आत्महत्या कर लूं. पर बेटे के मोह के आगे बेबस हूं. लगता है, मांबेटी को ही मारना पड़ेगा.’’ जसवंत ने कहा, ‘‘तुफैल भाई, तुम कोई ऐसा आदमी ढूंढो, जो पैसे ले कर मेरा यह काम कर दे.’’

‘‘जसवंत भाई, बहुत ही गंभीर मामला है. फंस गए तो जिंदगी तबाह हो जाएगी. सारी जिंदगी जेल में पड़े रहेंगे.’’

‘‘इतना घबराते क्यों हो, मैं हूं न. फंस भी गए तो पैसा पानी की तरह बहा दूंगा.’’ जसवंत ने कहा.

तुफैल 2 दिनों बाद कीकरवाली निवासी हैदर अली को साथ ले कर जसवंत से मिला. तीनों के बीच पैसों को ले कर बात चली तो हैदर और तुफैल ने 3 लाख रुपए मांगे. जबकि जसवंत एक लाख रुपए देने को तैयार था. आखिर डेढ़ लाख में सौदा तय हो गया. लेकिन उस समय पैसे की व्यवस्था न होने से जसवंत ने डेढ़ लाख रुपए का चैक तुफैल और हैदर को दे दिया. काम होने के बाद जसवंत को नकद पैसे देने थे.

व्यवस्था के लिए हैदर अली ने जसवंत से 20 हजार रुपए लिए. काम कब करना है, यह जसवंत को तय करना था. इस के बाद हनुमानगढ़ की एक दुकान से जसवंत ने 2 खंजर खरीद कर उन की धार तेज करवाई और हैदर अली को सौंप दिए.

इस के बाद जसवंत का ज्यादातर समय टीवी पर चलने वाले आपराधिक धारावाहिकों को देखने में बीतने लगा. जसवंत का सोचना था कि अपराधी अपनी गलती की वजह से पकड़े जाते हैं, पर वह इस तरह काम करेगा कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी.

आखिरकार जसवंत ने पत्नी और सास की हत्या की योजना बना डाली. इस के बाद उस पर खूब सोचाविचारा. उस की नजर में योजना फूलप्रूफ लगी. अपनी इसी योजना के अनुसार, 3 मार्च की सुबह चिकनीचुपड़ी बातें कर के उस ने अपनी सास को सालासर जाने के बहाने अपने घर बुला लिया.

जब सारी तैयारी हो गई तो जसवंत ने फोन कर के तुफैल को रात 10 बजे सालासर जाने की बात बता कर मुख्य सड़क पर काम निपटाने को कह दिया. तय समय पर जसवंत पत्नी राजबाला, सास परमेश्वरी और बेटे रुद्र को ले कर कार से चल पड़ा.

मुख्य सड़क पर मोटरसाइकिल से आए तुफैल और हैदर अली मिल गए. दोनों ने हाथ के इशारे से जसवंत की कार रुकवाई और कार में बैठ गए. कुछ दूर जाने के बाद हैदर और तुफैल ने खंजर निकाल कर परमेश्वरी पर वार किए तो जान बचाने के लिए वह दरवाजा खोल कर कूद पड़ी.

जसवंत ने भी कार रोक दी. तुफैल और हैदर अली ने नीचे उतर कर उस का काम तमाम कर दिया. इस के बाद राजबाला का भी काम तमाम कर दिया गया. दोनों को मार कर जसवंत ने अपने दोस्त युनुस को फोन कर के मनगढं़त कहानी सुना कर पुलिस से मदद की गुहार लगाई.

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने जसवंत के दोनों साथियों तुफैल और हैदर अली को गिरफ्तार कर खंजर, कार और चैक बरामद कर लिया था. रिमांड अवधि समाप्त होने पर तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया गया.

ग्लैमर की चकाचौंध में फंसे जसवंत ने खुद ही अपनी गृहस्थी और जिंदगी बरबाद कर ली, साथ ही 2 भोलेभाले लोगों को भी हत्या जैसे अपराध में जेल भिजवा दिया. आखिर परमेश्वरी के मरने के बाद उस की सारी जायदाद उसे ही मिलनी थी. तीनों आरोपियों का भविष्य अब अदालत का निर्णय ही तय करेगा.?

– कथा पुलिस सूत्रों के आधार पर

स्मार्टफोन और लैपटौप यूजर्स की कौमन बीमारियां

स्मार्टफोन और लैपटौप की अब आदत सी हो गई है, लेकिन क्या आप को पता है कि रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल को अपने से दूर कर देना चाहिए, अन्यथा हैल्थ से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है? यूसीएलए स्कूल औफ मैडिसिन के डाक्टर डैन सीगल के अनुसार, ‘‘रात में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से नींद से जुड़ी कई बीमारियां घेर लेती हैं. गैजेट्स का इस्तेमाल हमारे काम को आसान बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन अगर आप इन्हें जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो कई बीमारियां भी हो सकती हैं.’’

जानिए, गैजेट्स से होने वाली बीमारियों और उन से बचने के तरीकों के बारे में :

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम

 हमारी आंखों की बनावट ऐसी नहीं है कि हम किसी भी एक पौइंट पर घंटों देखते रहें और आंखों को कोई नुकसान न पहुंचे. घंटों कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते रहने से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम हो सकता है. इस में आंखों में थकान, इचिंग, रैडनैस और धुंधला दिखाई देने की समस्या हो सकती है.

क्या करें

आप चाहे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टैबलेट या अन्य किसी भी गैजेट का इस्तेमाल कर रहे हों, उस की डिस्प्ले सैटिंग्स बदलिए. अगर कंप्यूटर में ब्राइटनैस, शार्पनैस या कलर बढ़े हुए हैं तो कम कीजिए. ज्यादा ब्राइट या शार्प स्क्रीन से आंखों पर ज्यादा प्रैशर पड़ता है.

इस के अलावा अगर गैजेट में टैक्स्ट का फौंट साइज बहुत छोटा है तो यूजर्स को लंबे डौक्युमैंट्स पढ़ने में परेशानी होगी. इसलिए अपने गैजेट की डिस्प्ले सैटिंग्स को ऐसे सैट करें कि आंखों को नुकसान कम हो. अगर गैजेट की स्क्रीन एचडी है तो 45% कलर और ब्राइटनैस से भी अच्छी डिस्प्ले क्वालिटी आएगी और आंखों को नुकसान कम होगा.

इन्सोम्निया

गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने में जो सब से अहम बीमारी हो सकती है वह है इन्सोम्निया यानी अनिद्रा. अगर आप जरूरत से ज्यादा गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह आप के लिए इन्सोम्निया की पहली कड़ी साबित हो सकता है.

क्या करें

 20-20-20 का रूल ध्यान में रखें. अगर आप स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि आप ने हर 20 मिनट में आप के 20 फुट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सैकंड तक देखना है. यह एक ट्रिक है जो आंखों की ऐक्सरसाइज का काम करती है. इस से यूजर्स की आंखों को आराम मिलता है और उन की ऐक्सरसाइज भी हो जाती है.

अगर आप को काम में समय का ध्यान नहीं रहता तो विंडोज से लिए ब्रेकटैक या एप्पल मैक के लिए टाइम आउट प्रोग्राम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

टैक्स्चर नैक

टैक्स्चर नैक सिंड्रोम उन लोगों को होता है जो स्मार्टफोन, लैपटौप और टैबलेट्स का इस्तेमाल करते समय गरदन नीचे की ओर झुका कर रखते हैं. अगर यह सिंड्रोम बढ़ गया है तो गरदन की मसल्स इसी पोजिशन को अडौप्ट कर लेंगी और गरदन सीधी करने में परेशानी होगी.

क्या करें

किसी भी गैजेट का इस्तेमाल करने से पहले यह ध्यान रखें कि उस की पोजिशन क्या है. अगर आप कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो मौनिटर कम से कम 20-30 इंच की दूरी पर रखें. अगर स्मार्टफोन या लैपटौप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो गरदन झुकाने की जगह उस की पोजिशन ऐसी रखें जिस से आप की गरदन पर स्ट्रैस न पड़े. टैक्स्टिंग थोड़ी कम कर दें. गरदन पर स्ट्रैस सब से ज्यादा टैक्स्टिंग के कारण ही पड़ता है.

टोस्टेड स्किन सिंड्रोम

 आजकल लैपटौप पर ज्यादा काम करना आम बात हो गई है. अगर आप लैपटौप को जरूरत से ज्यादा अपनी गोद में रखते हैं तो इस से स्किन डिसऔर्डर हो सकता है. लैपटौप से हमेशा गरम हवा निकलती है. ज्यादा इस्तेमाल से स्किन सूख जाती है. अगर आप की स्किन सैंसिटिव है तो उस का कलर बदल जाएगा और खुजली भी हो सकती है.

क्या करें

लैपटौप का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो कूलिंग पैड जरूर ले लें. कूलिंग पैड लैपटौप से निकलने वाली गरमी को ठंडा करता है. बाजार में 200 रुपए से ले कर 1,500 रुपए तक के लैपटौप कूलिंग पैड और कूलिंग टेबल उपलब्ध हैं. अगर कूलिंग पैड नहीं है तो भी तकिए का इस्तेमाल करें या फिर लैपटौप को टेबल पर रख कर इस्तेमाल करें.

सुनने में प्रौब्लम

ईयरफोन का इस्तेमाल आप बहुत ज्यादा करते हैं तो सुनने में दिक्कत हो सकती है. यह आदत परमानैंटली आप के सुनने की क्षमता खराब कर सकती है.

क्या करें

हमेशा म्यूजिक सुनने या कान में हैडफोन लगाए रखने की आदत न पालें और वौल्यूम पर कंट्रोल रखें.

रैडिएशन इफैक्ट

मोबाइल फोन से ऐसा रैडिएशन नहीं आता कि आप को कैंसर हो जाए, लेकिन फिर भी यह हैल्थ से जुड़े कई मामलों में असर डालता है. यह मैंटल स्ट्रैस से ले कर इन्सोम्निया तक कई बीमारियों का कारण बन सकता है.

क्या करें

 फोन साथ में ले कर न सोएं. फोन को ज्यादा देर तक कान के पास न रखें. अगर लंबी बात करनी है तो हैडफोन का इस्तेमाल करें. अगर फोन में सिगनल कम हों तो उसे इस्तेमाल न करें.

स्ट्रैस

आरएसआई या रिपिटेटिव स्ट्रैस इंजरी ज्यादातर उन लोगों को होती है जो कंप्यूटर पर हर दिन घंटों काम करते हैं. इसी के साथ, जो लोग ज्यादा टैक्स्टिंग करते हैं वे भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं. इस इंजरी में हाथों में निशान पड़ जाते हैं. ऐसा अकसर टाइपिंग के समय होता है. जब पंजों के नीचे निशान दिखने लगते हैं.

क्या करें

इस के लिए अपने डिवाइस में ‘वर्कपेस’ नामक सौफ्टवेयर इंस्टौल करें. यह बैकग्राउंड में काम करता है. यह आप को बताता रहेगा कि कितने समय में ब्रेक लेना है और कितनी बार अपना हाथ उठाना है. इस के अलावा, टाइपिंग करते समय सही पौस्चर का होना भी बहुत जरूरी है.

मेरी शादी को 6 महीने हुए हैं, मेरी बीवी को सेक्स करने का मन नहीं करता, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 28 साल का हूं. मेरी बीवी 22 साल की है. शादी को 6 महीने हुए हैं. मेरी बीवी को सेक्स करने का मन नहीं करता. मैं क्या करूं?

जवाब
आप की बीवी को शायद जिस्मानी संबंधों की सही जानकारी नहीं है. आप उसे अकेले में प्यार से सारी बातें बताएं व समझाएं. उस से कहें कि सेक्स करना आप दोनों का हक है और इनसानी जरूरत भी है. धीरेधीरे आप की बीवी इस बात को समझ जाएगी.

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हम सोचते थे कि महिलाएं लंबे समय तक सेक्शुअल गतिविधि चाहती हैं, पर हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि पुरुषों को लगता है कि महिलाएं लंबा सेक्स नहीं चाहतीं.

पीनिस के आकार से लेकर सेक्स के दौरान अपने प्रदर्शन तक-पुरुष होना आसान काम नहीं है. अमेरिका में टार्जन कंडोम द्वारा हाल ही में कराए गए एक सर्वे के नतीजों में सामने आया कि 41 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि वे चाहते हैं कि सेक्स लंबे समय तक चले, जबकि ऐसा चाहनेवाली महिलाओं की संख्या 34 फीसदी ही थी.

अक्सर महिलाएं थोड़े समय के सेक्शुअल इंटरकोर्स से ही खुश रहती हैं, वे इसे लंबा नहीं रखना चाहती हैं, जबकि अधिकतर पुरुष इस प्रक्रिया को लंबा ही रखना चाहते हैं.

म्यूजिशियन गैविन फर्नांडिस स्वीकारते हैं कि वे सेक्स के दौरान अपने प्रदर्शन को लेकर दबाव महसूस करते हैं. ‘‘हमें पता है कि महिलाओं को मल्टीपल ऑर्गैज़्म (कई बार चरम) आ सकते हैं. फिर इस तरह की मान्यताएं भी हैं कि महिलाएं ऑर्गैज़्म का झूठा दिखावा भी करती हैं. ये बातें पुरुषों की मानसिकता को प्रभावित करने के लिए काफ़ी हैं,’’

वे कहते हैं. ‘‘कई बार सेक्शुअल संबंध बनाने के बाद मैं समझ ही नहीं पाता कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड को संतुष्ट कर भी पाया हूं या नहीं. मैं चाहता हूं कि उसे संतुष्ट करने के लिए मैं और लंबे समय तक उसका साथ दे सकूं.’’

आनंद को लंबा रखने की चाहत

गैविन जैसे कई और पुरुष हैं. वर्ष 2009 में मेन्स हेल्थ मैग्ज़ीन द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि सेक्स के दौरान पुरुष 5 से 10 मिनट तक संयम बनाए रख सकते हैं, पर 71 प्रतिशत पुरुष चाहते हैं कि काश वे इससे कहीं अधिक समय तक ऐसा कर पाते.

जरनल औफ सेक्स मेडिसिन द्वारा कराए गए एक अलग अध्ययन के मुताबिक, वह इंटरकोर्स जो 7 से 13 मिनट के भीतर समाप्त हो जाता है, बेहतरीन माना जाता है. ‘‘कई पुरुष इस बात को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं कि वे लंबे समय तक संयम नहीं बनाए रख पाते,’’ कहना है चेन्नई की काउंसलर सुजाता रामकृष्णन का. ‘‘और मैं उन पुरुषों की बात नहीं कर रही हूं, जिन्हें प्रीमैच्योर इजेकुलेशन की समस्या है. सामान्य पुरुष, जिनका सेक्शुअल जीवन अच्छा है, वे भी सेक्स की प्रक्रिया को और लंबा बनाना चाहते हैं. इसकी वजह ये है कि ये पुरुष पौर्न देखते हुए बड़े हुए हैं और सेक्स के बारे में अपनी पिछले पीढ़ी से कहीं ज्यादा बातें करते हैं. ये बातें अब मीडिया में हैं, फिलम्स में हैं, किताबों में भी हैं. आज की महिलाएं भी यह बताने में संकोच महसूस नहीं करतीं कि उन्हें सेक्स के दौरान क्या पसंद है और क्या नापसंद. इस वजह से पुरुषों पर काफी दबाव होता है.’’

फोरप्ले का समय भी तो जोड़िए!

सेक्स एक्सपर्ट डॉ महिंदर वत्स कहते हैं कि यदि कुछ बदलाव किए जाएं तो सेक्स प्रक्रिया को लंबा बनाया जा सकता है. ‘‘हालांकि यूं देखा जाए तो ये बात सिर्फ़ आपकी दिमा़गी सोच पर निर्भर करती है, लेकिन आप सेक्शुअल इंटरकोर्स को थोड़ा लंबा बना सकते हैं,’’ वे कहते हैं. ‘‘क्विकी (झटपट सेक्शुअल संबंध बनाना) अच्छे तो होते हैं, पर हमेशा नहीं. सेक्स को लंबा बनाने के लिए सही समय और अपने शरीर के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है. यही कारण है कि फोरप्ले का महत्व उससे कहीं ज्यादा बढ़ जाता है, जितना कि हम सोचते हैं. यदि सेक्शुल प्रक्रिया को लंबा बनाना चाहते हैं तो फोरप्ले का समय भी लंबा होना चाहिए. और लंबे समय तक चलने वाले फोरप्ले से कभी किसी महिला को शिकायत नहीं होती, बल्कि वे इसका आनंद लेती हैं.’’

ऑर्गैज़्म पर ध्यान देने के बजाए सेक्स के दौरान एक-दूसरे के साथ का आनंद उठाना ज़्यादा महत्वपूर्ण है. आप अलग-अलग सेक्शुअल पोज़ीशन्स अपना सकते हैं. अंतिम, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि इस दौरान पार्टनर्स एक-दूसरे से बातचीत करते रहें. तो अगली बार यदि वे कुछ ऐसा करें, जिससे आपको सुखद अनुभूति हो तो उनकी तारीफ करना बिल्कुल न भूलें.

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