बुढ़ापे में जो दिल बारंबार खिसका

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Video: सलमान खान ने किया विक्की कौशल को इग्नोर, देखें वीडियो

इन दिनों IIFA Awards सुर्खियों में है जहां तमाम बॉलीवुड हस्तियां शिरकत कर रही है अबतक सलमान खान से लेकर नोरा फतेही अवार्ड में पहुंच चुकी है. आईफा की धूम हर जगह छाई हुई है. हाल ही में इसे लेकर अबू धाबी में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी रखी गई है जहां कुछ ऐसा वाक्या हुआ कि विक्की कौशल औऱ सलमान खान का वीडियो वायरल हो गया है जिसे देख फैंस सलमान खान को ट्रोल कर रहे है साथ ही, वीडियो को जमकर वायरल हो  रही है.

आपको बता दें, कि आईफा अवार्ड की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान काफी भीड़ जमा हो गई थी, ऐसे में विक्की कौशल अपने फैंस के साथ फोटो क्लिक करा रहे थे, तभी सलमान खान वहा पहुंच गए. विक्की ने सलमान खान से हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया कि सलमान खान ने उन्हे इग्नोर कर दिया और हाथ नहीं मिलाया. इसके बाद सलमान खान के ब़ॉडीगार्ड ने विक्की कौशल को धक्का भी दिया. जिसे लेकर सलमान खान तो कभी विक्की कौशल ट्रोल हो रहे है, ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है लोग इस पर जमकर कमेंट बरसा रहे है.

सोशल मीडिया पर देखते ही देखते ये वीडियो वायरल हो गया है कई यूजर्स इस वीडियो पर तरह-तरह के कमेंट करते नजर आ रहे है.कुछ यूजर्स ने सलमान खान को रुड बताया तो कई ने विक्की कौशल को निशाना बनाया है. एक यूजर ने लिखा कि ‘सलमान भाई से पंगा लेने का असर’, तो कई दूसरे ने लिखा कि ‘सलमान खान किताना बुरा है, इतना रुड क्यो’ तो तीसरे ने लिखा है कि ‘सलमान भाई की कैटरीना ली है तो भुगतना तो पड़ेगा’, एक ने लिखा कि ‘आम शक्ल की वजह से बॉडीगार्ड ने विक्की को आम लोग समझ लिया है’ ऐसे ही लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे है

KKK13: शो से बाहर हुए रोहित रॉय, जानें वजह

इन दिनों खतरों के खिलाड़ी का 13वां सीजन की शुरुआत हो चुकी है शो की शूटिंग कैप टाउन में चल रही है जहां सभी कंटस्टेंट शो को लेकर उत्साहित है शो की एंट्री धमाकेदार हुई है लेकिन शो के कंटेस्टेंट रहे रोहित रॉय को लेकर एक बुरी खबर सामने आई है जी हां, रोहित रॉय शो से बाहर हो गए है उनके बाहर होने की वजह ने उनके फैंस को उदास कर दिया है.

 

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आपको बता दें,कि एक इंटरव्यू में बताया गया है कि रोहित शेट्टी के शो को बीच में ही अलविदा कह रहे है रोहित रॉय. जिनका बाहर होने की वजह है उनके चोट लग जाना. जिसकी वजह से उन्हे शो बीच में छोडकर जाना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक रोहित रॉय एक स्टंट परफोर्म करते हुए चोटिल हो गए.जिसकी वजह से उन्हे आराम करने की सलाह दी गई. ऐसा भी कहा जा रहा है कि उनको रिकवरी  में टाइम लगेगा. केप टाउन से मुबंई वापस भेजा जा रहा है.

 

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मीडिया से कही ये बात

रोहित रॉय शो को लेकर बेहद ही एक्साइटेड थे, उन्होने मीडिया से बात करके बताया कि वो कितना शो को खेलने के लिए उत्साहित है.रोहित ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ‘हां मैं जानता हूं कि स्टंट करते हुए वो कंटस्टेंट का पूरा ध्यान रखते है. वही मुझे भी अपना पूरा ध्यान रखना होगा. मुझे मेरी सुरक्षा का पूरा भरोसा है.चाहे मुझे फिर पहाड़ से छलांग लगानी हो या फिर सांस को रोकना हो.मुझे बचा लिया जाएगा’. बता दें, कि अबतक शो से रुही चतुर्वेदी बाहर हो चुकी है औऱ रोहित रॉय चोट की वजह से शो छोड़ चुके है.

एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी

दिल्ली से लगा नोएडा भले ही हाईटेक सिटी के रूप में विकसित हो रहा है, लेकिन आए दिन होने वाले अपराध इस औद्योगिक नगरी के माथे पर कलंक की तरह हैं. 31 मई, 2017 की सुबह नोएडा के सेक्टर-62 स्थित पौश सोसाइटी शताब्दी रेल विहार को भी एक ऐसे आपराधिक कलंक से दोचार होना पड़ा, जो इस सोसायटी के रहवासियों की कल्पना से भी परे था.

उस दिन सुबहसुबह रेलविहार सोसाइटी के पार्किंग के पास एक युवती खून से लथपथ पड़ी मिली. उस के सिर से काफी खून बह चुका था. सोसाइटी में जिस ने भी सुना सन्न रह गया. जरा सी देर में वहां काफी लोग एकत्र हो गए. आननफानन में कुछ लोग उस युवती को नजदीकी अस्पताल ले गए. लेकिन डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया. वहीं पता चला कि मृतका के सिर में गोली मारी गई थी.

सोसायटी में लोगों की भीड़ लग चुकी थी. उन्हीं में से किसी ने इस वारदात की सूचना थाना सैक्टर-58 को दे दी थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी दिलीप सिंह बिष्ट और सीओ अजय कुमार वहां आ पहुंचे. पुलिस ने मौका मुआयना किया तो वहां पिस्टल का एक खाली कारतूस पड़ा मिला, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने डौग स्क्वायड को भी मौके पर बुलवाया, लेकिन उस से कोई खास मदद नहीं मिली.

अलबत्ता इस बीच मृतका की शिनाख्त जरूर हो गई. उस का नाम अंजली राठौर था. 22 वर्षीया अंजली उर्फ अन्नू मूलरूप से हरियाणा के यमुनानगर निवासी तेजपाल सिंह की बेटी थी और नोएडा के सैक्टर-64 स्थित लावा मोबाइल कंपनी में बतौर इंजीनियर नौकरी करती थी.

अंजली सोसाइटी के एक टावर में तीसरी मंजिल पर बने एक फ्लैट में रूममेट युवतियों के साथ रहती थी. पुलिस ने अंजली के मोबाइल से नंबर तलाश कर उस के घर वालों को इस घटना की सूचना दे दी.

हैरानी की बात यह थी कि इस दुस्साहसिक वारदात का किसी को पता तक नहीं चल सका था. घटना का पता तब चला, जब 7 बजे एक युवती बैंक की कोचिंग क्लास में जाने के लिए निकली. सब से पहले उसी ने अंजली को ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग के पास पड़ी देखा. उसे लगा कि अंजली सीढि़यों से गिरी होगी. इस के बाद ही वहां लोग एकत्र हुए और अंजली को अस्पताल ले गए.

पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि इतनी बड़ी घटना आखिर क्यों और कैसे हुई? जाहिर था हत्यारा बाहर से ही आया होगा. सोसायटी के गेट पर सिक्योरिटी गार्ड रहते थे, वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे. पुलिस ने गार्डों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि सुबह 6 बजे के थोड़ा बाद कंधे पर बैग लटकाए एक युवक आया था और कुछ मिनट बाद ही वापस चला गया था.

उस की गतिविधियों पर कोई शक नहीं हुआ, इसलिए किसी ने भी उसे नहीं रोका. उस ने गेट के रजिसटर में एंट्री भी की थी. पुलिस ने रजिस्टर चैक किया तो उस में सन्नू के नाम से एंट्री थी. युवक का मोबाइल नंबर भी लिखा था. उस नंबर पर काल की गई तो वह स्विच्ड औफ मिला.

पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की रिकौर्डिंग देखनी चाही तो पता चला कि मुख्य गेट के कैमरे का फोकस बिगड़ा हुआ था, जिस की वजह से वह युवक आतेजाते उस की जद में नहीं आ पाया था. अच्छी बात यह थी कि पार्किंग साइड का कैमरा सही था.

उस की रिकौडिंग की जांच की गई तो दो पिलर के बीच की रिकौर्डिंग में दिखाई दिया कि युवती बचाव की मुद्रा में भाग रही थी, जबकि हाथ में हथियार लिए वह युवक उस के पीछे दौड़ रहा था.

युवक के कंधे पर बैग था. इस से यह बात साफ हो गई कि यह वही युवक था, जिस का जिक्र गार्ड ने किया था. कैमरे की रिकौर्डिंग से युवक की पहचान साफ नहीं हो पा रही थी.

इस बीच मृतका के घर वाले और नाते रिश्तेदार भी आ गए थे. उन का रोरो कर बुरा हाल था. पुलिस ने अंजली के शव का पंचनामा कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस यह नहीं समझ पा रही थी कि उस युवक की अंजली से आखिर क्या दुश्मनी रही होगी.

मामला प्रेमप्रसंग का भी लग रहा था, क्योंकि वह युवक अंजली की हत्या के इरादे से ही आया था. अंजली भी अपनी मर्जी से उस से मिलने फ्लैट से नीचे आई थी. पुलिस ने अंजली के घर वालों से पूछताछ की, लेकिन उन से कोई सुराग नहीं मिल सका.

अंजली के मोबाइल की जांच से पता चला कि सुबह उस के मोबाइल पर अश्वनी यादव नाम के किसी युवक की काल आई थी. अश्वनी के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चल सका. पुलिस ने गेट रजिस्टर में लिखे मोबाइल नंबर की जांच कराई तो वह अश्वनी के नाम पर ही निकला. पुलिस ने अंजली के पिता तेजपाल सिंह की तहरीर पर अश्वनी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. बड़ा सवाल यह भी था कि ऐसे कौन से हालात थे कि अश्वनी अंजली का हत्यारा बन गया?

मामला सनसनीखेज भी था और एक इंजीनियर की हत्या का भी. एसएसपी लव कुमार ने अपने अधीनस्थ अफसरों को इस मामले में शीघ्र काररवाई करने के निर्देश दिए. हत्या के खुलासे के लिए एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन कर दिया गया. अगले दिन पुलिस ने अश्वनी व अंजली के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उन के बीच बातें होती रहती थीं.

मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से पुलिस को अश्वनी का पता मिल गया. पता दिल्ली का ही था. पुलिस टीम उस पते पर पहुंची तो जानकारी मिली कि वह पता उस के एक जानने वाले का था, जिस पर उस ने सिमकार्ड लिया था. गनीमत यह रही कि वहां से पुलिस को अश्वनी का पता मिल गया.

वह उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के गांव भावलपुर के रहने वाले शैलेंद्र का बेटा था. उस का मोबाइल भले ही बंद था, लेकिन वारदात के समय और उस के आधे घंटे बाद तक उस की लोकेशन घटनास्थल के आसपास ही थी. इस से यह बात पक्के तौर पर साफ हो गई कि अंजली की हत्या उसी ने की थी.

अगले दिन थानाप्रभारी दिलीप कुमार के नेतृत्व में एक टीम इटावा जा पहुंची. अश्वनी के घर वालों से पूछताछ में पता चला कि वह घटना के बाद घर तो आया था, लेकिन थोड़ी देर रुक कर चला गया था. आशंका थी कि अश्वनी अपने किसी नातेरिश्तेदारों के यहां शरण ले सकता है.

पुलिस ने उस के मोबाइल नंबर हासिल कर के सर्विलांस पर लगा दिए. इस से पुलिस को मोबाइल की लोकेशन के आधार पर अश्वनी के मैनपुरी जिले के गांव अंधियारी में अपने एक रिश्तेदार के यहां छिपे होने की सूचना मिली. पुलिस टीम वहां गई तो 2 जून को वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.

उसे पकड़ कर नोएडा लाया गया. प्राथमिक पूछताछ में ही उस ने अपने जुर्म का इकबाल कर लिया. पुलिस ने उस से विस्तृत पूछताछ की तो एकतरफा प्यार में पड़े एक ऐसे जुनूनी आशिक की कहानी निकल कर सामने आई, जो हर हाल में अंजली को अपना बनाना चाहता था.

दरअसल अंजली और अश्वनी ने पंजाब के जालंधर स्थित लवली यूनिवर्सिटी में एक साथ पढ़ाई की थी. दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी. अश्वनी ने बीसीए किया था, जबकि अंजली ने बीटेक. सन 2016 में दोनों ने अपना कोर्स पूरा किया. बीटेक करते ही अंजली की नौकरी लावा कंपनी में लग गई.

दूसरी ओर अश्वनी के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी. उस के पिता साधारण किसान थे. उन्होंने मुश्किलों से बेटे को पढ़ाया था और उसे अच्छा इंसान बनाना चाहते थे. यह बात अलग थी कि काफी प्रयासों के बाद भी जब उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली तो उस ने दिल्ली के लाजपतनगर में कपड़े के एक शोरूम में काम करना शुरू कर दिया. वह और अंजली फोन पर बातें किया करते थे. अश्वनी उस का अच्छा दोस्त था, लिहाजा वह उसे अच्छी नौकरी के लिए प्रयास करते रहने की सलाह देती थी.

अंजली को उस की फिक्र है, यह बात अश्वनी को गुदगुदाती थी. वह अपने कैरियर से ज्यादा अंजली के बारे में सोचता रहता था. जबकि अंजली अपनी नई नौकरी से खुश थी और मन लगा कर काम कर रही थी. अंजली को इस की खबर भी नहीं थी कि अश्वनी उसे एकतरफा प्यार करता है. हालांकि कई बार बातों और इशारों में उस ने अंजली के सामने जाहिर करने का प्रयास तो किया था, लेकिन वह समझ नहीं सकी. अश्वनी मन की बात खुल कर इसलिए नहीं कह पाता था कि कहीं अंजली नाराज हो कर उस से दूर न हो जाए.

अंजली के कुछ शुभचिंतक छात्रछात्राओं को पता चला कि अश्वनी उसे एकतरफा प्यार करता है तो उन्होंने उसे उस से सावधान रहने को कहा. बहरहाल, समय अपनी गति से चलता रहा. काम की व्यस्तता में अब अंजली की अश्वनी से बातचीत कम होने लगी.

इसी साल जनवरी, 2017 में अश्वनी की नौकरी छूट गई, जिस के बाद वह अपने गांव चला गया. गांव जा कर उस का दिमाग और भी खाली हो गया. उस ने अपने दिल की बात अंजली को बता कर उसे हासिल करने की सोची. उस ने फोन पर अंजली से प्यारभरी बातें कीं तो उस ने उसे समझा दिया, ‘‘अश्विनी, मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती हूं, इस से ज्यादा कुछ नहीं.’’

इस से अश्वनी को झटका लगा. अंजली से उस की बातचीत पहले ही कम हो गई थी. जब किसी इंसान की अपेक्षाओं को चोट पहुंचती है तो कई बार गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं और इंसान बातों का मतलब अपने हिसाब से खोजने लगता है. अश्वनी के साथ भी ऐसा ही हुआ. उसे लगा कि अंजली का नोएडा में किसी युवक से प्रेमप्रसंग चल रहा है, इसलिए अब वह उस से बात नहीं करती. यह सोच कर उस के सिर पर अंजली को पाने का फितूर सवार हो गया. उस के दिल में अंजली के लिए इतना प्यार था कि उस के बिना वह जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता था. अंजली के व्यवहार से उसे लगा कि वह अपने नए प्रेमी के चक्कर में उस से दूर हो रही है, इसलिए वह उस प्रेमी को ही रास्ते से हटा देगा.

लेकिन परेशानी यह थी कि वह अंजली के किसी प्रेमी को नहीं जानता था. ऐसी स्थिति में यह जानकारी अंजली ही दे सकती थी. उस ने सोच लिया कि वह नोएडा जा कर अंजली के प्रेमी को तो रास्ते से हटाएगा ही, साथ ही अंजली के सामने भी अपने प्यार का खुल कर इजहार करेगा.

अश्वनी के ही गांव का उस का एक दोस्त था विपुल. उस ने विपुल को सारी बातें बताईं तो वह दोस्ती की खातिर उस का साथ देने को तैयार हो गया. विपुल ने आपराधिक किस्म के एक व्यक्ति कोरा से संपर्क कर के एक सप्ताह के लिए 3 हजार रुपए में किराए पर .32 बोर की पिस्टल ले ली. उस ने अंजली को भी फोन कर दिया कि वह उस से मिलने के लिए आएगा.

30 मई को वह अपने दोस्त के साथ नोएडा पहुंच गया. उस ने अंजली को फोन किया और उस से मिलने की जिद की तो औफिस टाइम के बाद उस ने उसे सोसाइटी में आ कर मिलने को कहा. करीब 8 बजे वह सोसाइटी में उस से मिलने आ गया. दोनों के बीच काफी देर तक बातें हुईं.

अश्वनी ने उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘मैं तुम से प्यार करता हूं अंजली. यही बात तुम्हें समझाना चाहता हूं, लेकिन तुम समझने को तैयार नहीं हो.’’

बदले में अंजली ने हलके गुस्से का इजहार किया, ‘‘क्योंकि तुम ऐसी बात समझाना चाहते हो, जो मैं समझना नहीं चाहती. मेरे सामने कैरियर है अश्वनी. तुम्हें भी इन बातों को छोड़ कर अपना ध्यान अपने कैरियर पर लगाना चाहिए.’’

‘‘दिल को समझाना इतना आसान होता तो मैं कब का संभल गया होता, लेकिन मेरे लिए यह मुमकिन नहीं है. मैं ने दिल से तुम्हें चाहा है.’’ गंभीरता से कही गई उस की बातें सुन कर अंजली हैरान रह गई.

‘‘मैं तुम्हें किस तरह समझाऊं अश्वनी? प्लीज, ऐसी बातों को भूल जाओ. तुम ऐसे ही रहे तो मैं तुम से दोस्ती भी नहीं रख पाऊंगी.’’

अश्वनी को अंजली की एकएक बात कांटे की तरह चुभ रही थी. मन ही मन उस ने जो ढेरों ख्वाब सजाए थे, वे कांच की तरह टूट रहे थे. उसे पक्का यकीन हो गया था कि अंजली जरूर किसी के प्यार में पड़ी है.

‘‘अच्छा, मैं तुम्हें एक रात और सोचने का मौका देता हूं. अच्छी तरह सोच कर सुबह जवाब दे देना, साथ ही अपने जवाब से पहले मुझे उस लड़के का नाम भी बता देना, जिस से तुम प्यार करती हो.’’

अंजली को चूंकि इस मुद्दे पर कुछ सोचना ही नहीं था, इसलिए उस ने पीछा छुड़ाने के लिए कहा, ‘‘अच्छा ठीक है, अब जाओ.’’  इस के बाद वह चला गया.

रात उस ने एक गेस्टहाउस में करवटें बदल कर बिताईं. उस की जिंदगी का एक ही उद्देश्य था अंजली को प्यार के लिए तैयार करना और उस के साथ दुनिया बसाना. दिन निकलते ही 6 बज कर 5 मिनट पर उस ने अंजली को फोन मिला कर कहा, ‘‘मैं आ रहा हूं अंजली.’’

‘‘क्या करोगे आ कर. मैं निर्णय ले चुकी हूं.’’

‘‘क्या?’’ उस ने उत्सुकता से पूछा तो अंजली ने बेरुखी से जवाब दिया, ‘‘यही कि तुम्हें अपने कैरियर पर ध्यान देना चाहिए. एक और बात, मैं तुम से दोस्ती नहीं रखना चाहती.’’

कहने के साथ ही अंजली ने फोन काट दिया तो अश्वनी तड़प उठा. फिर भी उस ने सोसायटी जाने की ठान ली. वह खतरनाक इरादा बना चुका था कि अंजली से आखिरी बार बात जरूर करेगा और अगर उस ने अब भी इनकार किया तो वह उसे गोली मार कर खुद को भी खत्म कर लेगा.

इसी इरादे के साथ वह शताब्दी रेलविहार सोसायटी पहुंच गया. उस का दोस्त विपुल बाहर ही खड़ा रहा. सोसायटी के गेट पर एंट्री रजिस्टर में उस ने सन्नू नाम से एंट्री की और अंदर चला गया. यह उस के घर का नाम था. उस ने अंजली को फोन कर के आखिरी बार नीचे आ कर मिलने को कहा. वह नीचे आ गई. दोनों पार्किंग में सीढि़यों के पास खड़े हो गए.

‘‘तुम किसी और से प्यार करती हो अंजली? मुझे अपने उस प्रेमी का नाम बता दो. मैं उसे खत्म कर दूंगा, ताकि तुम मेरी हो सको.’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है अश्वनी. प्लीज, तुम जाओ. और हां, आइंदा मुझे परेशान करने की कोशिश मत करना.’’

अंजली की बात सुन कर अश्वनी बुरी तरह हताश हो गया. उस की हालत हारे हुए जुआरी जैसी हो गई.

‘‘नहीं, मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं. उस का नाम बता दो और मेरा दिल मत तोड़ो.’’ उस ने कठोर लहजे में जिद की तो अंजली ने भी वैसा ही रुख अपनाया, ‘‘क्या बकवास कर रहे हो तुम. मुझे कोई बात नहीं करनी.’’

यह सुनते ही अश्वनी गुस्से में बोला, ‘‘बात तो तुम्हें करनी होगी.’’ गुस्से से तिलमिलाते हुए उस ने बैग से पिस्टल निकाल कर अंजली पर तान दी, ‘‘आज मैं तुम्हारा किस्सा ही खत्म कर दूंगा. तुम मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं हो सकती.’’

उस के खतरनाक इरादे भांप कर अंजली के पैरों तले से जमीन खिसक गई. वह जल्दी में बोली, ‘‘तुम पागल हो गए हो अश्वनी?’’

‘‘हां, मैं पागल हो गया हूं.’’

स्थिति ऐसी बन गई थी कि एकाएक अंजली की समझ में कुछ नहीं आया. कुछ नहीं सूझा तो वह मुड़ कर तेजी से भागी और एक पिलर की आड़ में छिपने की कोशिश करने लगी. अश्वनी भी उस के पीछे दौड़ा और उस के सिर को टारगेट बना कर उस पर गोली चला दी. गोली लगते ही अंजली गिर पड़ी. कुछ ही देर में उस ने दम तोड़ दिया. इस के बाद अश्वनी ने खुद की कनपटी पर पिस्टल तान कर ट्रिगर दबाया, लेकिन गोली नहीं चली. इस पर पिस्टल बैग में रख कर वह वहां से निकल गया.

रास्ते में उस ने सैक्टर-62 स्थित बी ब्लाक की झाडि़यों में पिस्टल फेंक दी. अपना मोबाइल भी उस ने स्विच्ड औफ कर दिया. वह और उस का दोस्त वहां से औटो पकड़ कर सीधे आनंद विहार बसअड्डे पहुंचे और बस से गांव चले गए.

अश्वनी को पता था कि पुलिस उस की तलाश जरूर करेगी, इसलिए वह अपने रिश्तेदारों के यहां छिप कर घूमता रहा. घर वालों से वह दूसरे नंबरों से बात करता था. आखिर वह पुलिस की पकड़ में आ ही गया. पुलिस ने उस की निशानदेही पर 2 कारतूस सहित हत्या में प्रयुक्त .32 बोर की पिस्टल बरामद कर ली.

3 जून को पुलिस अधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर के पत्रकारों को उस की करतूत बताई और उसी दिन उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

अश्वनी की जिद व जुनून ने दोस्ती के रिश्ते को भयानक अंजाम पर पहुंचा दिया. 2 लोगों के बीच दोस्ती हो जाना कोई बात नहीं, लेकिन अश्वनी की उग्र प्रवृत्ति ने अंजली को असमय मौत दे कर उस के परिवार को तो गम दिया ही, साथ ही उस ने उस के खून से हाथ रंग कर अपना भविष्य भी चौपट कर लिया. अश्वनी ने हसरतों को लगाम दे कर विवेक से काम लिया होता या अंजली उस के सनकी मिजाज को भांप गई होती तो शायद ऐसी नौबत कभी न आती.

कथा लिखे जाने तक अश्वनी की जमानत नहीं हो सकी थी. अश्वनी का दोस्त विपुल फरार है. पुलिस उस की तलाश कर रही है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मैंने अपनी दोस्त को डांस करते हुए किस कर दिया, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल-

मेरी एक दोस्त है जिस का मेरे घर पिछले 3 सालों से आनाजाना है. हम दोनों की उम्र 19 साल है. मैं एक लड़का हूं बावजूद इस के मेरे घरवालों ने कभी हमारे रिश्ते पर सवाल नहीं उठाया. अब हुआ यों कि वह और मैं हमारे एग्जाम के एक दिन पहले मेरे कमरे में पढ़ रहे थे. घर पर मम्मी थीं जो नीचे कमरे में टीवी देख रही थीं. मैं ने यों ही उस के साथ डांस करने की इच्छा जताई और उस ने हां कह दिया.

स्लो सौंग पर हम ने डांस किया और मैं ने उसे किस कर दिया जिस पर उस ने एतराज नहीं किया. पर उस किस के बाद हमारे बीच उस दिन से रिलेटेड कोई बात नहीं हुई और अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि करूं तो करूं क्या. अब यह दोस्ती है, दोस्ती से कुछ ज्यादा है या कुछ भी नहीं है, मेरी समझ से बाहर होता जा रहा है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब-

इस उम्र में अकसर ही ऐसा होता है और सिचुएशन औक्वर्ड हो जाती है. आप पहले तो अपनी फीलिंग्स को ले कर क्लियर हो जाइए. अगर आप को अपनी दोस्त के प्रति दोस्ती से ज्यादा कोई फीलिंग नहीं है तो उसे साफसाफ बता दीजिए. इन बातों से भाग कर केवल सिचुएशन कौंप्लिकेटेड ही होगी, सुलझेगी नहीं. यदि फीलिंग्स हैं तब भी साफसाफ कह दीजिए. अपनी दोस्त से मिलिए, उस से कहिए कि उस दिन जो कुछ हुआ आप उस बारे में बात करना चाहते हैं.

मन में जो हो, कह दीजिए. यदि उस के और आप के विचार इस विषय पर मेल खाते हों तब तो सब सही है, नहीं तो सोचसमझ कर ही कोई कदम उठाएं. यह न सोचें कि फीलिंग्स के चक्कर में कहीं दोस्ती खराब न हो जाए क्योंकि दोस्ती पर इन सब चीजों का असर पड़ता ही पड़ता है. हां, हो सके तो आमनेसामने बैठ कर ही बात करें, मैसेज पर नहीं.

धर्म के धंधेबाजों की देन बाल विवाह

भारत में 20 से 49 साल की उम्र की तकरीबन 27 फीसदी औरतें ऐसी हैं, जिन की शादी 15 साल से कम उम्र में हुई. वहीं 31 फीसदी औरतें ऐसी?हैं, जिन की शादी 15 से 18 साल की उम्र के बीच हुई.

भारत में शादी की औसत उम्र 19 साल है. गरीब औरतों के मुकाबले अमीर व ऊंचे घराने की औरतें तकरीबन 4 साल बाद शादी करती हैं. लड़कियां जायदाद नहीं हैं. उन्हें अपने भविष्य को चुनने का हक है. जब वे ऐसा करेंगी, तो इस से सभी को फायदा होगा.

अपनी बेटी के लिए काबिल वर तलाशने, दहेज के लिए मोटी रकम जुटाने और धार्मिक परंपराओं के दबाव के अलावा और भी कई वजहें हैं, जिन से ज्यादातर भारतीय मातापिता अपनी बेटी को बोझ समझते?हैं.

बन रहे हैं गैरजिम्मेदार

हमारे देश की आबादी का एक बड़ा तबका अभी भी बेटेबेटियों की शादी कम उम्र में ही कर देता है. इस से नाबालिग जोड़े समय से पहले ही मांबाप बन जाते हैं और चूल्हाचौका व बच्चों में उलझ कर रह जाते हैं. ऐसी लड़कियां 15 साल की उम्र में मां व 30 से 35 साल की उम्र में दादीनानी बन जाती हैं.

राजस्थान में?टोंक जिले की मालपुरा तहसील की डिग्गी धर्मशाला में बाल विवाह का ऐसा ही मामला सामने आया, जिस में सरकारी अफसरों समेत लोकल विधायक, पंचायत समिति के प्रधान व सरपंचों ने न केवल जम कर खाना खाया, बल्कि नाबालिग वरवधू जोड़े को आशीर्वाद भी दिया.

यह शादी कोई आम शादी नहीं थी, बल्कि नाबालिग बच्चों की शादी का?

बड़ा विवाह सम्मेलन था, जिस में लड़केलड़कियों की उम्र 8 से 16 साल थी. लेकिन सरकार के झंडाबरदारों, समाज के ठेकेदारों व जनता के पैरोकारों को यह सब दिखाई नहीं दिया.

पता चला कि मंदिर, धर्मशाला, पंडों, समाज के ठेकेदारों व लोकल प्रशासन की मिलीभगत से यह बाल विवाह सम्मेलन खुल्लमखुल्ला हुआ. कानून की हत्या पर कोई भगवाधारी देश को बचाने नहीं आया. आशीर्वाद देने वालों में ज्यादातर तिलक लगाए घूम रहे थे.

इस तरह के किसी मामले को जब ज्यादा तूल दिया जाता है या राजनीतिक रंग दिया जाता है, तो कभीकभार एकाध मामले में कुसूरवारों पर हलकी कार्यवाही कर पुलिस प्रशासन चादर तान कर सो जाता है. जो विरोध करता है, उसे हिंदू विरोधी कह कर डराया जाता है.

जाहिर है, लोगों की दिलचस्पी इस बुराई को खत्म करने में कम तमाशा करने में ज्यादा रहती है. यह तमाशा खड़ा करने वाले खास तरह के लोगों का मकसद सिर्फ शोहरत पाना रहता है.

यह है वजह

पिछले साल समाज कल्याण विभाग, जयपुर ने ‘बचपन बचाओ’ नामक एक गैरसरकारी संगठन की मदद से प्रदेश की राजधानी जयपुर से सटे देहाती इलाकों में एक सर्वे कराया था.

छोटी उम्र में ही ब्याही गई औरतों पर किए गए इस सर्वे से पता चला कि जयपुर जैसे तरक्कीपसंद व रोजगार देने वाले शहर के नजदीक बसे होने के बावजूद ये औरतें गरीबी व पिछडे़पन और पंडों के लगातार प्रचारप्रसार की वजह से इस दलदल से बाहर नहीं निकल पा रही हैं.

इस की सब से बड़ी वजह है, कम उम्र में शादी. शादी होने के बाद ये औरतें कई बच्चों की मां बन गईं और उन को पालने व ज्यादा खर्च के गोरखधंधे में उलझ कर रह गईं.

गंवई इलाकों के परिवारों में 65 फीसदी लड़कियों की शादी विवाह के लिए बनाई गई कानूनी उम्र के पहले ही हो गई. पर कहीं देशभक्ति के नाम पर कोई जुलूस नहीं निकले, बयान नहीं दिए गए.

80 फीसदी मांबाप को कहा जाता है कि अपने बच्चों की जल्दी शादी करो और अपनी जिंदगी की सब से बड़ी जिम्मेदारी से?छुटकारा पाओ.

85 फीसदी मांबाप मानते हैं कि उन्हें अपनी लड़की की शादी की चिंता तभी से सताने लग गई?थी, जब वह 8 से 10 साल की थी.

75 फीसदी औरतें जल्दी शादी व फिर जल्दीजल्दी बच्चे पैदा होने की वजह से खून की कमी से पीडि़त हो जाती हैं. मां बनने के बाद मां व बच्चे की सब से ज्यादा मृत्युदर भी इन्हीं इलाकों में है.

बच्चा होने के समय मृत्युदर का आंकड़ा भले ही शहरी इलाकों में सौ में से 2 हो, लेकिन इन गंवई इलाकों में यह आंकड़ा प्रति सौ में से 10 से 12 तक है.

मांबाप अपने बच्चों के सुनहरे कल के बारे में नहीं सोच पाते और इस तरह उन के बच्चे भी इसी गोरखधंधे में फंसे रहते हैं.

50 फीसदी बच्चे हाईस्कूल से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते?हैं. कम पढ़ेलिखे होने की वजह से तरक्की की तमाम सुविधाएं मिलने के बावजूद ये उस का फायदा नहीं उठा पाते और पिछड़ जाते?हैं.

सामने आया घिनौना रूप

महज 13 साल की मासूम बच्ची सीमा के साथ जयपुर शहर से सटे कसबे चाकसू में हुआ हादसा बाल विवाह के एक घिनौने व शर्मनाक पहलू का एहसास कराता है.

एक छोटी सी बाल उम्र, जो लड़कियों के खेलनेखाने, पढ़ने व सेहत बनाने की होती है, इस उम्र में ही सीमा को तमाम तरह की हिंसा का शिकार होना पड़ा.

मासूम सीमा के तथाकथित 26 साला पति द्वारा उस के मुंह में कपड़ा ठूंस कर उसे बैल्ट से मारापीटा जाता?था और उस के साथ जबरन सैक्स संबंध बनाया जाता था.

यह मामला तब सामने आया, जब सीमा की मां कमला जयपुर के गांधी नगर महिला थाने में महिला सुरक्षा व सलाह केंद्र पर शिकायत ले कर गईं.

कमला की शिकायत के मुताबिक, सीमा की शादी उस समय कर दी गई?थी, जब वह ठीक से चलना भी नहीं सीख पाई थी.

जब सीमा की सास की बीमारी के चलते मौत हो गई, तो तीसरे की बैठक के दिन सीमा को ससुराल भेजना पड़ा. तीसरे की बैठक व 12वें की रस्म के बीच सीमा के पति ने इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया.

पंडेपुरोहित जिम्मेदार

बाल विवाह को ले कर ऐसा नहीं है कि शहरी और देहाती इलाकों में जागरूकता न हो या लोगों को मालूम न हो कि यह कानूनन जुर्म है. दरअसल, धार्मिक लिहाज से अंधविश्वासी लोग इतने बेखौफ रहते हैं कि वे जानतेबूझते हुए भी किसी की परवाह नहीं करते. शादी के पंडाल में बैठा पंडित उन के लिए बड़े सहारे और ढाल का काम करता है.

जिन जगहों पर बच्चों की शादी रुकवाई जाती है, वहां आज तक यह सुनने में नहीं आया कि शादी करा रहे पंडे के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर कोई कार्यवाही की गई हो.

देश में सालभर जो तीजत्योहार मनाए जाते हैं और धार्मिक जलसे होते हैं, वे भी इस खास मकसद से कराए जाते हैं कि ज्यादा से?ज्यादा लोग देवीदेवताओं की लीलाएं देख कर पैसा चढ़ाएं.

रामलीला हो या कृष्णलीला, इन में?भगवान के बालरूप की शादी मंच पर जरूर दिखाई जाती है. छोटे बच्चे जब भगवान का रूप धरे शादी करते नजर आते हैं, तो शारदा ऐक्ट जैसे कानूनों पर तरस ही खाया जा सकता है.

ऐसी कोई बंदिश नहीं है कि जो इस हरकत को रोके, जिस में किरदार छोटे बच्चे होते हैं, लेकिन वे माथे पर मुकुट और शरीर पर भगवानों जैसे कपड़े पहने होते हैं.

लोग भगवान बने इन बच्चों के पैर छू कर अपनी अंधश्रद्धा जाहिर कर लीलाओं की शादियों पर मुहर लगा देते हैं, जो बाल विवाह की कुप्रथा को बढ़ावा देने वाली साबित होती हैं. इस से यह संदेशा जाता है कि जब भगवान बचपन में शादी कर सकते हैं, तो आम बच्चों की शादी क्यों नहीं की जा सकती?

अभी भी ज्यादातर लोग दिमागी तौर पर धार्मिक रीतिरिवाजों व पाखंडों के गुलाम हैं. उन्हें बरगलाए रखने के लिए राम व कृष्ण की लीलाएं हर जगह बिना नागा की जाती हैं.

इन लीलाओं में भगवान बने बच्चों की शादी का नाटक चूंकि कानूनन गुनाह नहीं है, न ही इस पर कोई एतराज जताता है, इसलिए देश में बाल विवाह के माहौल का बना रहना हैरत की बात नहीं है.

जयपुर के एक कसबे कोटखावदा में रामलीला हुई. इस धार्मिक जलसे में रामसीता विवाह की लीला को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया गया था. कम उम्र का एक लड़का राम बना था, तो उसी के उम्र की एक लड़की ने सीता का रोल निभाया था. राम व सीता बने बच्चों के दोस्त भी इस शादी में शामिल हुए थे.

इस शादी को देखने के लिए वहां हजारों लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा कि धर्म की आड़ में मंच से बाल विवाह को बढ़ावा दिया जा रहा है. पंडेपुजारी तो लोगों को उकसाने में लगे रहते हैं.

एक भी मिसाल ऐसी नहीं मिलती, जिस में किसी पंडे ने बाल विवाह को रोकने की कोशिश की हो, जबकि जब कभी इन के हकों पर लाठी पड़ती है, तो तिलमिलाए पंडेपुरोहित सड़क पर आ कर प्रदर्शन, विरोध व नारेबाजी करने से नहीं चूकते. राज्य व केंद्र सरकार हिंदू धर्म और देशभक्ति को एक मान कर कहर ढाने लगती हैं.

इस तबके की हमेशा ही यह कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों की शादियां हों, जिस से उन्हें दक्षिणा मिलती रहे. इस के लिए यजमानों को वे हमेशा धर्म की मिसालें दिया करते हैं कि रामकृष्ण की शादी कम उम्र में ही हुई थी.

पंडों को इन बातों से कोई वास्ता नहीं रहता कि वे समाज का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं. उन्हें तो अपनी जेब भरने से मतलब रहता है, इसलिए भागवत, रामायण व पुराणों का हवाला दे कर वे यह जताया करते हैं कि बाल विवाहों को ले कर मचा विरोध बकवास है, यह तो पुराने समय से ही चली आ रही सनातन परंपरा है.

सीधे तौर पर भले ही कोई पंडितपुरोहित किसी से यह न कहे कि कम उम्र में अपने बच्चों की शादी कर दो, लेकिन सचाई यह है कि यह तबका लोगों के बीच इस तरह का माहौल बनाता है कि कम पढ़ेलिखे व गंवई इलाके के लोग अपने बच्चों की छोटी उम्र में ही शादी करने के लिए चिंतित हो उठते हैं.

दरअसल, पुरोहित तबके द्वारा बारबार बोले जाने वाले कुछ जुमलों से ऐसा होता है. मसलन, लड़की तो पराया धन होती है यानी यह आप पर एक तरह का कर्ज है, इसलिए जितना जल्दी हो सके, इस कर्ज को उतारो. जमाने की हवा लगने से बच्चे बिगड़ जाते हैं, इसलिए लंगर डाल दो यानी शादी कर दो, तो जिम्मेदारी का भाव आ जाएगा.

पुरोहित तबका लोगों के दिलोदिमाग में बच्चों की शादी को इतना बड़ा काम बना कर भर देता है कि उन्हें बच्चों की शादी जिंदगी की एक बड़ी कामयाबी लगने लगती है. धर्म के ये धंधेबाज कहते हैं कि अगर लड़की का कन्यादान पिता अपनी गोद पर बैठा कर करता है, तो वह 10 हजार कुएं बनवाने के बराबर पुण्य का हकदार है. इस के बाद अगर लड़की रजस्वला हो जाती है, तो उस की शादी के समय पिता उसे बगल में बैठा कर कन्यादान करता है, तो उस का फल कम हो जाता है.

कन्या की शादी कच्ची उम्र में करने से पिता को 10 हजार कुएं बनवाने का फल मिलता है या नहीं, इसे तो आज तक कोई नहीं देख पाया, लेकिन उस मासूम बच्ची की जिंदगी जरूर बदतर हो जाती है. उसे तो जीतेजी कुएं में धकेल दिया जाता है.

कई इलाकों में तो यह भी देखा गया है कि अगर किसी शख्स के लड़की नहीं है, तो वह किसी दूसरे की लड़की का कन्यादान करते हैं, क्योंकि दूसरे की बेटी का कन्यादान करने वालों को गंगा स्नान का फल मिलता है. पंडित इस सफेद झूठ को लोगों के मन में बिठाते रहते हैं.

हो सख्त कार्यवाही

बाल विवाह रोकने की मुहिम चलनी चाहिए, मगर उस की दिशा पंडेपुजारियों की मोटी गरदन तक होनी चाहिए. यह हर कोई जानता है कि बगैर पंडे के शादी नहीं होती. लेकिन बाल विवाहों की कानूनी कार्यवाही में शादी कराने वाले इस गिरोह को एक तरह से छूट ही मिली हुई है.

पंडों के साथ कानूनन सख्ती की जाए कि अगर उन्होंने धोखे से भी किसी बच्चे की शादी कराई, तो कानूनी गाज उस पर ही गिरेगी, तो बात बन सकती है.

दूल्हादुलहन की उम्र कितनी है, इस पर पंडे मुंह नहीं खोलते, सवाल जजमान से दक्षिणा पाने का जो है. खामी यह है कि जरूरत पड़ने पर पंडे उम्र के मामले में यह कह कर चुप हो जाते हैं कि हमें क्या मालूम. धूर्ततता की ऐसी मिसाल शायद ही कहीं मिले.

मुहिम पंडों के साथसाथ बचपन को बहकाने वाली धार्मिक लीलाओं और फुटपाथी धार्मिक किताबों के खिलाफ भी चलनी चाहिए. ऐसे धार्मिक आयोजनों पर कानूनी बंदिश लगाना जरूरी है, जिन में बच्चों की शादी भगवान बना कर की जाती है.

कम्मो डार्लिंग : इच्छाओं के भंवरजाल में कमली

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‘खतरों के खिलाड़ी’ का 13वां सीजन शुरु हुआ, ये कंटेस्टेंट हुई शो से बाहर

इन दिनों खतरों के खिलाड़ी 13वां सीजन (Khatron ke khiladi) मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है शो की शूटिंग शुरु हो चुकी है शो की शूटिंग कैप्टाउन में चल रही है जहां शों की शरुआत बड़े ही धमाकेदार अंदाज में हुई है. हालांकि कई ऐसे कंटेस्टेंट है जो शो के पहले हफ्ते में ही शो से बाहर हो चुके है. अबतक शो में रूही चतुर्वेदी का पत्ता कट चुका है वो पहले ही हफ्तें में शो से बाहर हो चुकी है.लेकिन अभी इस बात की पुष्टी होना बाकि है.

आपको बता दें, कि रुही चतुर्वेदी (Ruhi Chaturvedi) के साथ-साथ ओर भी कंटेस्टेंट जो कई सीजन के पहले हफ्ते में ही बाहर हो गए थे. एरिका पैकर्ड ‘खतरों के खिलाड़ी 12’ से पहले सप्ताह में ही बाहर हो गई थीं. उन्होंने इंटरव्यू में कहा था कि मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मैं पहले हफ्ते में ही बाहर हो जाऊंगी. विशाल आदित्य सिंह ‘खतरों के खिलाड़ी 11’ से पहले हफ्ते में ही बाहर हो गए थे. बता दें कि उन्होंने रोहित शेट्टी के शो के साथ-साथ ‘बिग बॉस 13’ में भी हाथ आजमाया था. भोजपुरी सिनेमा की क्वीन रानी चटर्जी ने ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ में हाथ आजमाया था. लेकिन पहले हफ्ते में ही रानी चटर्जी को हार का मुंह देख बाहर निकलना पड़ा था.

अविका गोर ने डेली सोप के साथ-साथ टीवी सीरियल्स में भी हाथ आजमाया है. लेकिन एक्ट्रेस को ‘खतरों के खिलाड़ी 9’ से पहले हफ्ते में ही बाहर जाना पड़ा था. ‘पंड्या स्टोर’ की धरा यानी शाइनी दोशी भी ‘खतरों के खिलाड़ी 8’ में हाथ आजमा चुकी हैं. लेकिन पहले हफ्ते में ही उन्हं बाहर का रास्ता देखना पड़ा था. टीवी एक्टर हिमांशू मल्होत्रा ने कई रिएलिटी शो में हाथ आजमाया है. वह ‘खतरों के खिलाड़ी 7’ में नजर आए थे, लेकिन उनका सफर पहले हफ्ते में ही खत्म हो गया था. सना खान टीवी और बॉलीवुड की जानी-मानी हसीना हैं. उन्होंने ‘खतरों के खिलाड़ी 6’ में कदम रखा था. लेकिन स्टंट न कर पाने के कारण वह पहले हफ्ते में ही शो से बाहर हो गई थीं. पूजा गोर ने ‘प्रतिज्ञा’ के जरिए लाखों लोगों का दिल जीता था. वह ‘खतरों के खिलाड़ी 5’ में नजर आई थीं. लेकिन पहले हफ्ते में ही उन्हें शो से बाहर होना पड़ा था.

The Kerala Story एक्ट्रेस अदा शर्मा की कॉन्टैक्ट लिस्ट हुई लीक, मिल रही है धमकियां

इन दिनों ‘द केरल स्टोरी’ की फेम एक्ट्रेस अदा शर्मा (Adah Sharma) मुसीबत में आ गई है. जी हां फिल्म में उनकी धमाकेदार एक्टिंग के लिए कई लोग तारीफ कर रहें है तो कई उन्हे ट्रोल करते दिख रहे है लेकिन ये मामला इतना आगे बढ़ गया है कि एक्ट्रेस की कॉन्टैक्ट लिस्ट ही लीक कर दी गई है. जिसपर कार्यवाही अभी चल रही है.

 

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आपको बता दे, कि ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म 5 मई को सभी सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसकी स्टोरी करेल के लोगों के धर्मांतरण को लेकर थी. फिल्म तो सिनेमाघरों में जमकर कमाई करती दिख रही है अबतक 200 करोड़ तक कमाई कर चुकी है लेकिन फिल्म की लीड एक्ट्रेस को ट्रोल करने के साथ-साथ उनकी कॉन्टैक्ट लीस्ट को लीक कर दिया गया है. इंस्टाग्राम पर ‘jhamunda_bolte’ नाम के यूजर ने लीक किया है. इसके साथ ही अदा शर्मा का नया कॉन्टैक्ट नंबर लीक करने की धमकी दी है. हालांकि, ये इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवेट हो गया है लेकिन तब तक ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. वहीं, अदा शर्मा के फैंस मुंबई साइबर सेल से इस यूजर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी कर रहे हैं. हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अदा शर्मा का कोई रिएक्शन नहीं आया है.

 

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गौरतलब है कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की एक्ट्रेस सोनिया बलानी को भी फिल्म के रिलीज होने के बाद उनके किरदार को लेकर धमकी मिली थी. अब अदा शर्मा के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है. बताते चलें कि सुदीप्तो सेन के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में केरल की लड़कियों के धर्मांतरण की कहानी को दिखाया गया है. फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें अदा शर्मा, योगिता बिहानी, सिद्धि इदनानी और सोनिया बालानी महत्वपूर्ण भूमिका में है.

प्यार की आड़ में जिस्म से खेलते प्रेमी

विशाल और नीतू एक ही कालेज में पढ़ते हैं. दोनों के बीच दोस्ती हुई जो प्रेम संबंधों में बदल गई. शुरुआत में दोनों लुकछिप कर मिलते थे, फिर खुलेआम मिलने लगे. होटल, रैस्तरां में जाना और मौजमस्ती करने से उन्हें कोई परहेज नहीं था.

पुरुष सैक्स के मामले में बड़ा अधीर या उतावला रहता है. इस के लिए वह शादी होने तक का इंतजार नहीं करता. यही बात विशाल पर भी लागू हुई. उस ने शादी का वादा कर के नीतू के साथ शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए. परिणामस्वरूप नीतू प्रैग्नैंट हो गई.

जब नीतू ने प्रैग्नैंट होने की खबर विशाल को दी तो उस के पैरोंतले जमीन खिसक गई. उस के होश उड़ गए. उस ने खुशी जाहिर करने के बजाय उस से गर्भपात कराने को कहा. नीतू ने कहा कि वह गर्भपात नहीं कराएगी बल्कि वह उस से शीघ्र शादी कर ले.

विशाल ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं अपने पेरैंट्स से बात करूंगा.’’

उस ने पेरैंट्स से बात किए बगैर नीतू से कह दिया कि पेरैंट्स को शादी से आपत्ति है. सो, वह उस से शादी करने में असमर्थ है तथा बच्चे को पिता के रूप में अपना नाम नहीं दे सकता है. अब गर्भपात कराना ही एकमात्र हल है.

जब विशाल नीतू को गर्भपात के लिए डाक्टर के पास ले गया तो डाक्टर ने कहा कि इतने समय के पश्चात कानून गर्भपात करने की इजाजत नहीं देता क्योंकि इस से नीतू की जान को खतरा हो सकता है. विशाल ने नीतू से किनारा कर उसे अपने हाल पर छोड़ दिया.

यह तो केवल एक उदाहरण मात्र है. आएदिन प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ फिजिकल रिलेशनशिप बनाते हैं और फिर उसे म?ाधार में छोड़ देते हैं. शादी का वादा तो करते हैं लेकिन शादी करते नहीं. ऐसे में प्रेमिका को या तो गर्भपात कराना होता है या बिनब्याही मां बनना पड़ता है, बहुत बार तो आत्महत्या करने की नौबत आ जाती है. अगर उस ने जिंदा रहने का फैसला किया है तो ऐसी स्थिति में प्रेमिका को अपमान सहना पड़ता है.

प्रेमी अगर शारीरिक संबंध के लिए इतना ही उतावला है तो पहले शादी क्यों नहीं करता. शादी के बाद वह चाहे जितनी बार उस से फिजिकल रिलेशन बनाए, किस ने रोका है. लेकिन प्रेमिका को बहलाफुसला कर या शादी का ?ांसा दे कर वादाखिलाफी करना कहां तक उचित है?

कुछ लड़के तो लड़कियों से दोस्ती या प्यार का नाटक करते हैं और उन के जिस्म व जज्बातों से खेलते हैं. शुरू से ही उन के मन में पाप होता है. वे अपनी प्रेमिका के समक्ष ऐसे पेश आते हैं जैसे उस से हद दरजे का प्यार करते हैं और उस के बगैर जी नहीं सकते. उसे अपने प्यार का वास्ता दे कर शारीरिक संबंधों का मजा लेते हैं और फिर एक दिन दूध में से मक्खी की भांति अपने जीवन से निकाल फेंकते हैं. ऐसे में प्रेमिका अपने को ठगी हुई महसूस करती है.

लड़कों का क्या, वे तो मौजमस्ती कर के पल्ला ?ाड़ लेते हैं. उन का तो कुछ बिगड़ता नहीं है, जो कुछ बिगड़ता है वह लड़कियों का ही बिगड़ता है. वे न घर की रहती हैं न घाट की. उन की जिंदगी नर्क बन जाती है.

आमतौर पर कोई भी लड़की शादी के पूर्व प्रेमी के साथ शारीरिक संबंध बनाना नहीं चाहती. वह चाहती है कि शादी तक प्रेमी केवल उस से प्यार करे, जिस्म से नहीं. लेकिन प्रेमी है कि उसे ?ांसे में ले कर संबंध बना ही लेता है.

यदि कोई युवक अपनी प्रेमिका से सच्चा प्यार करता है तो उस के साथ एक निश्चित और मर्यादित दूरी बनाए रखनी चाहिए. प्रेमिका को भी चाहिए कि वह उसे शारीरिक संबंध बनाने से सख्ती से रोके. अन्यथा संकट में पड़ते देर नहीं लगेगी.

काश, लड़कियां प्यार और शारीरिक संबंध में अंतर सम?ा पातीं. प्यार दिल से होता है, जिस्म से नहीं. प्रेमी को अपना शरीर तभी सौंपना चाहिए जब वह शादी कर उस का पति बन जाए.

जो लड़कियां शादी के पूर्व गर्भवती हो जाती हैं, उन के मातापिता की भी काफी बदनामी होती है. लोग तरहतरह की बातें करते हैं. अपने प्रेमी के साथ संबंध बनाने से पूर्व अपने परिवार की बदनामी के बारे में सोच लेना चाहिए.

जो लड़की शादी के पूर्व गर्भपात करा चुकी हो अथवा बच्चे को जन्म दे चुकी हो, उस की समाज में इतनी बदनामी हो जाती है कि कोई भी उस से शादी करने को तैयार नहीं होता क्योंकि आज भी समाज में किसी लड़की का शादी के पूर्व गर्भवती होना स्वीकार्य नहीं है. लड़की स्वयं भी ताउम्र अपराधबोध से ग्रसित रहती है. हमारे समाज में यौन संबंधों को विवाह के बाद ही अनुमति मिलती है.

लड़कियों को चाहिए कि वे प्रेमी के ?ांसे में न आएं. उन से किसी एकांत, होटल आदि में न मिलें. इस से उन्हें संबंध बनाने का मौका नहीं मिलेगा. युवतियां नासम?ा बच्चियां नहीं हैं. उन्हें अपना भलाबुरा पता होता है. इस के बावजूद यदि वे आग में कूदती हैं तो इस के लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं.

लड़कियों को यह जान लेना चाहिए कि प्रेम संबंधों में अपनी सीमाएं तय करने का आप को पूरा अधिकार है. इसलिए वे प्रेमी के बहकावेफुसलावे में न आएं और कहें कि अगर सच्चा प्यार है तो शारीरिक संबंध के लिए मजबूर न करें.

लड़कियों के साथ सैक्स करने के लिए लड़के दबाव डालने के लिए कहते हैं, ‘‘अपने प्यार को प्रमाणित करो.’’ इस का एक ही उत्तर है कि मैं यह नहीं करना चाहती. इस पर भी यदि लड़का न माने तो उस से नाता तोड़ दें. इस से आप को ?ाठे प्रेमी से छुटकारा मिल जाएगा.

आजकल शादी का ?ांसा दे कर लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने के प्रकरण काफी बढ़ गए हैं. पुलिस और न्यायालय में ऐसे प्रकरणों की भरमार है. इस की नौबत ही न आए यदि लड़की संबंध बनाने से ही इनकार कर दे. बाद में पछताने से क्या होगा? यदि कथित प्रेमी को सजा मिल भी गई तो उस से आप का खोया हुआ कौमार्य और प्रतिष्ठा तो वापस नहीं आ जाएगी. इसलिए लड़कियों की सम?ादारी इसी में है कि वे शादी से पूर्व शारीरिक संबंध बनाने से बचें.

प्रेम प्रकट करने या लगाव जताने के और भी कई तरीके हैं जिन में संभोग की जरूरत नहीं होती. जैसे, प्रेमी प्रेमिका द्वारा एकदूसरे का हाथ अपने हाथ में लेना, बांहों में भरना, चूमना, स्पर्श करना आदि.

कई बार लड़के संभोग के लिए दबाव बनाते हैं कि एक बार ऐसा करने से कुछ नहीं होगा. लेकिन एक बार का यह संभोग जी का जंजाल बन सकता है. गर्भधारण के लिए एक बार किया गया संभोग ही काफी है.

इन सब के बावजूद यदि शारीरिक संबंध बनाना चाहती हैं तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे बगैर कंडोम संभोग न करें. आजकल तो लड़कियों के लिए भी कंडोम आने लगे हैं जिन का इस्तेमाल कर के वे अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं.

यदि बगैर कंडोम के संभोग किया गया हो या संभोग के दौरान वह फट गया हो तो गर्भ ठहरने की आशंका प्रबल हो जाती है. इस स्थिति में 72 घंटों के भीतर डाक्टर की सलाह पर आप गर्भनिरोधक गोलियों की

2 गोलियां ले लें और पहली खुराक लेने के 12 घंटों के बाद फिर 2 गोलियां लें. गोलियां जितनी जल्दी ली जाएं उतना अच्छा होता है. लेकिन ये गोलियां अपने मन से न लें.

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