मेरे पति सेक्स के बाद पोर्न देख कर मास्टरबेट करते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं, पर उन की गंदी आदत से परेशान हूं. वे मेरे साथ सेक्स करने के बाद पोर्न फिल्म देख कर मास्टरबेट करते हैं और तो और वे दूसरी औरतों की तरफ भी आकर्षित होते हैं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप की परेशानी बड़ी नहीं है. जब तक आप को ज्यादा दिक्कत न हो, तब तक चुप रहिए. वैसे आप अपने पति को मास्टरबेट करने के नुकसान के बारे में बता सकती हैं. मास्टरबेशन पर हुए कई सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि अक्सर किशोरावस्था या युवावस्‍था में मास्टरबेशन की शुरुआत की सबसे ज्‍यादा संभावना होती है और जब व्यक्ति को एक बार मास्टरबेशन कि लत लग जाती है तो वह मास्टरबेट करने की बार-बार कोशिश करता है.

कई बार व्यक्ति जल्दीबाजी के चक्कर में बहुत तेजी से मास्टरबेट करने लगता है. जिस कारण वीर्य से पहले निकलने वाला तरल पानी उसके लिंग की मांसपेशियों में चला जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति के लिंग में सूजन आने लगती है और तब तक रहती है जब तक वह वापस खून में न मिल जाये.

कई लोग मास्टरबेट करते समय अपने लिंग को बहुत ही मजबूती से जकड़ लेते है और उसे दबाने या मोड़ने लगते है. ऐसा करने से आपको गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा करने से आपके लिंग की मांसपेशियां टूट सकती हैं और पायरोनी नाम की बीमारी भी हो सकती है. इस बीमारी से व्यक्ति का लिंग टेढ़ा हो जाता है.

किसी व्यक्ति द्वारा रोजाना मास्टरबेट करने से उसके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो जाती है. इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है जब व्यक्ति की शादी हो जाती है तब उसके बाद उसके वीर्य में शुक्राणुओं की कमी के कारण वह पिता बनने से भी वंचित रह सकता है.

व्यक्ति मास्टरबेट करते समय हमेशा ही कल्पनाओ में खोया रहता है. इससे उस व्यक्ति कि सेक्स के प्रति चाह में निरंतर बढ़ोतरी होती रहती है. अपनी सेक्स की भूख को शांत करने के लिए वह अवैध संपर्कों की ओर चले जाता है. इससे जाने अनजाने वह कई ऐसी भूल कर देता है जो उसे ज़िन्दगी भर पछतावा देते रहता है. कई बार तो व्यक्ति इससे यौन अपराधो में भी शामिल हो जाता है.

‘स्लीप सेक्स’ बर्बाद न कर दे आपकी जिंदगी

स्लीप सेक्स को मेडिकल भाषा में सेक्सोनोमिया भी कहते हैं जो कि एक सेक्सुअल डिसऑर्डर है. इस बीमारी में इंसान सोते हुए सेक्स करता है. आपको याद होगा कि आपने 2014 में एक स्वीडिश घटना की एक न्यूज पढ़ी या सुनी होगी. जिसमें एक स्वीडिश आदमी को 2014 में रेप के आरोप से बाइज्जत बरी कर दिया गया था. क्योंकि उसके वकील ने कोर्ट में प्रूफ कर दिया था कि वो उस समय नींद में था और उसका दिमाग क्या कर रहा है इसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी. उसके वकील ने कोर्ट को बताया था कि वह इंसान सेक्सोनोमिया का शिकार है औऱ उसने नींद में रेप किया है, इसलिए वह निर्दोष है. जिसके बाद इस घटना की चर्चा पूरी दुनिया में होने लगी.

जहां इस केस के बाद सेक्सोनोमिया पर रिसर्च होने लगी वहीं एक्टिविस्ट इस फैसले का विरोध करने लगे. उनका कहना था कि इससे मुजरिमों को रेप के जुर्म से बचने का आसान वैज्ञानिक रास्ता मिल जाएगा जो एक हद तक सच भी है. आज सेक्सोनोमिया के कारण कई लोगों की वैवाहिक जिंदगी तो खराब हो चुकी है. लेकिन फिर भी भारत में इस पर शायद ही चर्चा हो. तो आइए आज इस लेख के जरिए इस पर चर्चा करना शुरू करते हैं और पता करते हैं कि क्या है सेक्सोनोमिया और कैसे एक इंसान करता है स्लीप सेक्स.

स्लीप सेक्स या सेक्सोनोमिया

स्लीप सेक्स एक भयंकर बीमारी है जो मरीजों के साथ मरीजों के आसपास रहने वालों की जिंदगी बर्बाद कर देता है. जैसे की नींद में चलने की बीमारी होती है वैसे ही ये नींद में सेक्स करने की बीमारी है. इसमें इंसान नींद में सेक्स करने लगता है. कई बार स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि इंसान रेप तक कर देता है और अगली सुबह जब उठता है तो उसे कुछ याद भी नहीं रहता.

सेक्सोनोमिया के एक ऐसे ही मामले के बारे में मिनेसोटा विश्वविद्यालय में प्रफेसर, एमडी, न्यूरोलॉजिस्ट मिशेल क्रेमर बोर्नेमन बताते हैं जिसमें एक वैवाहिक दंपति के सो जाने के बाद पति नींद में मैस्टर्बेट करने लगता था. शुरू में पत्नी ने इसे नजरअंदाज किया लेकिन जब ये ज्यादा हो गया तो दोनों ने डॉक्टर से बात की. डॉक्टर से मिलने के बाद पता चला कि वो ऐसा सेक्सुअल डिसऑर्डर से ग्रस्त होने के कारण करते हैं, जिसे स्लीप सेक्स या सेक्सोम्निया भी कहते हैं.

इस डिसऑर्डर पर 1996 में टोरंटो विश्वविद्यालय के डॉ. कॉलिन शापिरो और डॉ निक ने ओटावा विश्वविद्यालय से डॉ पॉल के साथ मिलकर कनाडा में इस पर एक रिसर्च पेपर तैयार किया. इस रिसर्च पेपर के पब्लिश होने के बाद दुनिया भर में इस पर चर्चा होनी शुरू हो गई. इसका नुकसान ये रहा कि इसके बाद से कई आरोपियों के वकील अपने मुवक्किल को रेप के केस से बचाने के लिए इस डिसऑर्डर का सहारा लेने लगे.

पेरोसोम्निया की स्थिति

स्लीप सेक्स असल में एक पेरोसोम्निया की स्थिति है जिसमें मरीज को ये नहीं पता होता कि वो जगा है या सोया हुआ है. मरीज का दिमाग कन्फ़्यूज़ रहता है. मरीज को देखकर कोई नहीं कह सकता की वो सोया हुआ है. जबकि सच्चाई ये होती है कि मरीज को पता नहीं होता कि वो क्या कर रहा है.

अब भी इस पर दुनिया के शोधकर्ता रिसर्च कर रहे हैं. शोधकर्ता इस बीमारी का कारण पता नहीं कर पा रहे हैं. लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि जिन लोगों को नींद में चलने औऱ बोलने की बीमारी है उनमें सेक्सोनोमिया होने की ज्यादा संभावना है.

शादी के लिए जब कर दी 6 हत्याएं

पंजाब के जिला होशियारपुर का रहने वाला रघुवीर 18 साल का हो चुका था. उस की शादी की बात भी चलने लगी थी, लेकिन शादी के पहले उसे यह साबित करना था कि वह इस के काबिल हो गया है. इस के लिए उसे लूटपाट करने वाले गैंग में शामिल होना था. क्योंकि वह जिस बिरादरी से था, उस में शादी से पहले लूट की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है. दरअसल, रघुवीर बेडि़या जाति से था, जिस में रोजीरोजगार के साधन कम ही होते हैं, जिस की वजह से ज्यादातर पुरुष चोरी और लूट जैसी वारदातें करते हैं. इस के लिए वे गिरोह बना कर अपने इलाके से काफी दूर निकल जाते हैं और लूटपाट करते हैं. ये जिस इलाके में वारदात करने जाते हैं, लोकल लोगों को अपने गिरोह में शामिल कर के ही लूटपाट की वारदात को अंजाम देते हैं.

लूट के दौरान हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से लोकल बदमाश घबराते हैं, जबकि ये जरूरत पड़ने पर ही नहीं, आसपास सनसनी फैलाने और लूट में कोई परेशानी न हो, इस के लिए भी घर के किसी न किसी सदस्य की हत्या जरूर करते हैं. इस का मकसद होता है गिरोह के नए सदस्यों में हिम्मत पैदा करना, जिस से वह लूट के दौरान किसी भी तरह से घबराएं न. गिरोह के वरिष्ठ सदस्य इसे शादी और घरगृहस्थी से भी जोड़ देते हैं.

कहते हैं कि बेडि़यों के गिरोह आज भी कबीला संस्कृति का पालन करते हैं, जिस में हत्या करना कोई कठिन काम नहीं माना जाता. गिरोह के वरिष्ठ लोग अपने नए साथी के मन से डर निकालने के लिए इस तरह का काम करने को उकसाते ही नहीं, बल्कि हर हालत में करवाते हैं. शादी के जोश में इस तरह के अपराध करने के लिए किशोर उम्र के लड़के तैयार भी हो जाते हैं.

गिरोह चलाने वाले यानी गिरोह के सरगनाओं का मानना है कि हत्या जैसी घटना को अंजाम देने के बाद किशोर अपराध के दलदल में इस तरह फंस जाते हैं कि चाह कर भी अपराध के इस दलदल से निकल नहीं पाते. वे दूसरों की पोल भी नहीं खोल सकते. किसी को भी जघन्य अपराधी बनाने के लिए उस के हाथ से हत्या कराना कबीला गिरोहों का मुख्य काम होता था. एक तरह से अपराध के साथ यह कुप्रथा भी थी. इन का यह कृत्य सभ्य समाज के लिए खतरा था.

गिरोह चलाने वाले सरगना को सब से ताकतवर माना जाता है. वह एक दो, नहीं कईकई हत्याएं यानी कम से कम 6 हत्याएं कर चुका होता है. इसी वजह से इन के गिरोह को छैमार गिरोह कहा जाता है.

दरअसल, ये लोग अपना खौफ पैदा करने के लिए भी इस तरह के नाम रख लेते हैं, जिस से कोई लूट का विरोध करने की हिम्मत न कर सके. हिम्मत करने वाले को पता होता है कि उस की हत्या हो सकती है. इस डर से जल्दी कोई लूट का विरोध करने की हिम्मत नहीं कर पाता. अपने नाम का खौफ पैदा करने के बाद ये अपरध करने में सफल रहते हैं.

अपराध कर के ये लोग वह इलाका छोड़ देते हैं. इस के बाद पुलिस के हाथ गिरोह के वही सदस्य लगते हैं, जो नए होते हैं और आमतौर पर वे लोकल लोग होते हैं. चूंकि लोकल अपराधियों को मुख्य अपराधियों के बारे में जानकारी नहीं होती, इसलिए पुलिस कभी भी मुख्य अपराधियों तक पहुंच नहीं पाती.

कुप्रथाएं अपराधी भी बनाती हैं, लखनऊ पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार कर इस बात का परदाफाश कर सब को चौंका दिया है. इस से पता चलता है कि समाज अभी भी कितना पीछे है. लखनऊ पुलिस ने एक ऐसे लुटेरे गिरोह के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर के परदाफाश किया है कि बेडि़या गिरोह के लोग शादी के लिए 6 हत्याएं करते हैं.

पंजाब के उस गिरोह को इसी वजह से ‘छैमार गैंग’ के नाम से जाना जाता है. इस गैंग में शामिल सदस्य अपनी शादी से पहले 6 हत्याएं जरूर करते हैं. पंजाब का यह गिरोह लूट के दौरान विरोध करने पर तुरंत हत्या कर देता है. यह गैंग उत्तर प्रदेश में ही नहीं, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी डकैती डालने का काम करता था.

लखनऊ पुलिस ने पंजाब से आए इस गिरोह के 4 सदस्यों को एसटीएफ के सहयोग से मडियांव थानाक्षेत्र में पकड़ा था. इन के पास से 2 तमंचे, चाकू, नकदी और गहने बरामद किए थे. 3 साल पहले इस गिरोह ने जौनपुर के शाहगंज इलाके में डकैती डाली थी. जौनपुर पुलिस ने इन के 2 सदस्यों पर 2-2 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था.

लखनऊ के एएसपी (ट्रांसगोमती) दुर्गेश कुमार ने बताया कि रात को पुलिस को सूचना मिली थी कि पंजाब के छैमार गिरोह के कुछ डकैत घैला पुल के पास मौजूद हैं. एसटीएफ के एसआई विनय कुमार और इंसपेक्टर मडियांव नागेश मिश्रा ने फोर्स के साथ इन की घेराबंदी की.

पुलिस को देखते ही गिरोह के सदस्यों ने गोली चलाना शुरू कर दिया. जवाबी फायरिंग में वे भागने लगे, लेकिन पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ लिया, जिन की पहचान कदीम उर्फ पहलवान, अली उर्फ हनीफ, मुन्ना उर्फ बग्गा और सलमान उर्फ अजीम के रूप में हुई. इन के पास से जौनपुर में हुई लूट का सामान भी बरामद हुआ.

दरअसल, ये छैमार गिरोह के सदस्य थे. यह छैमार गिरोह पंजाब के बदमाशों द्वारा तैयार किया गया था. ये लोकल अपराधियों को अपने साथ रैकी के लिए रखते थे, जो उस घर की तलाश करते थे, जहां डकैती डालनी होती थी. इस के बाद का काम छैमार गिरोह का होता था.

लोकल अपराधी कत्ल करने में पीछे हट जाता था, जबकि छैमार गिरोह के क्रूर सदस्य लूट के दौरान कत्ल करने से जरा भी नहीं घबराते थे. ये अपना ठिकाना बदलते रहते थे, जिस से इन की शिनाख्त नहीं हो पाती थी.

6 कत्ल करने के बाद डकैत अपनी शादी कर के गृहस्थी बसा सकता था. लूट के पैसे से ये अपना खर्च चलाते थे. दरअसल आज भी बहुत सारे लोग हत्या जैसे अपराध को बाहुबल से जोड़ कर देखते हैं, जिस की वजह से ऐसी प्रथाएं चल पड़ी हैं. अपराधी खुद का दामन बचाने के लिए ऐसी प्रथाओं का हवाला देता है. ये अपने नाम और गैंग का नाम बदल कर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं.

Piles की बीमारी से इस तरह मिलेगा छुटकारा

गुदा के अंदर वौल्व की तरह गद्देनुमा कुशन होते हैं, जो मल को बाहर निकालने या रोकने में सहायक होते हैं. जब इन कुशनों में खराबी आ जाती है, तो इन में खून का प्रवाह बढ़ जाता है और ये मोटे व कमजोर हो जाते हैं. फलस्वरूप, शौच के दौरान खून निकलता है या मलद्वार से ये कुशन फूल कर बाहर निकल आते हैं. इस व्याधि को ही बवासीर कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि कब्ज यानी सूखा मल आने के फलस्वरूप मलद्वार पर अधिक जोर पड़ता है तथा पाइल्स फूल कर बाहर आ जाते हैं. बवासीर की संभावना के कई कारण हो सकते हैं.

क्या हैं कारण

शौच के समय अधिक जोर लगाना, कम रेशेयुक्त भोज्य पदार्थ का सेवन करना, बहुत अधिक समय तक बैठे या खड़े रहना, बहुत अधिक समय तक शौच में बैठे रहना, मोटापा, पुरानी खांसी, अधिक समय तक पतले दस्त लगना, लिवर की खराबी, दस्तावर पदार्थों या एनिमा का अत्यधिक प्रयोग करना, कम पानी पीना और गरिष्ठ भोज्य पदार्थों का अधिक सेवन करना आदि.

1. आनुवंशिक :

एक ही परिवार के सदस्यों को आनुवंशिक गुणों के कारण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में आना.

2. बाह्य संरचना :

पाइल्स साधारणतया जानवरों में नहीं पाए जाते, चूंकि मनुष्य पैर के बल पर सीधा खड़ा रहता है, सो, गुरुत्वाकर्षण बल के कारण शरीर के निचले भाग में कमजोर नसों में अधिक मात्रा में रक्त एकत्रित हो जाता है, जिस से नसें फूल जाती हैं और पाइल्स का कारण बनती हैं.

3. शारीरिक संरचना :

गुदा में पाई जाने वाली नसों को मजबूत मांसपेशियों का सहारा नहीं मिलने के कारण ये नसें फूल जाती हैं और कब्ज के कारण जोर लगता है तो फटने के कारण खून निकलना शुरू हो जाता है.

4. लक्षण पहचानें:

शौच के दौरान बिना दर्द के खून आना, मस्सों का फूलना व शौच के दौरान बाहर आना. मल के साथ चिकने पदार्थ का रिसाव होना व बाहर खुजली होना, खून की लगातार कमी के कारण एनीमिया होना तथा कमजोरी आना व चक्कर आना और भूख नहीं लगना इस के प्रमुख लक्षण हैं.

5. उपाय भी हैं:

यदि हम खानपान में सावधानी बरतें तो बवासीर होने से बचने की संभावना होती है. कब्ज न होने दें, भोजन में अधिक रेशेयुक्त पदार्थों का प्रयोग करें, दोपहर के खाने में कच्ची सब्जियों का सलाद लें, अंकुरित मूंगमोठ का प्रयोग करें, गेहूं का हलका मोटा पिसा व बिना छना आटा खाएं, खाना चबाचबा कर खाएं, रात को गाय के दूध में 8-10 मुनक्का डाल कर उबाल कर खाएं. चाय व कौफी कम पीएं, वजन ज्यादा हो तो कम करें, प्रतिदिन व्यायाम करें और सकारात्मक सोच रखें.

6. इन बातों का रखें ध्यान:

जब भी शौच की जरूरत महसूस हो, तो उसे रोका न जाए. शौच के समय जरूरत से ज्यादा जोर न लगाएं. लंबे समय तक जुलाब न लें. बहुत अधिक समय तक एक ही जगह पर न बैठें. शौच जाने के बाद मलद्वार को पानी से अच्छी तरह साफ करें.

7. एमआईपीएच विधि से इलाज:

एमआईपीएच यानी मिनिमली इनवेजिव प्रौसीजर फौर हेमरोहिड्स. इस विधि में एक विशेष उपकरण, जिसे स्टेपलर कहते हैं, काम में लिया जाता है, जो कि सिर्फ एक ही बार काम में आता है. यह विधि ग्रेड-1, ग्रेड-2 तथा ग्रेड-3, जोकि दूसरी विधि के फेल हो जाने पर काम में ली जा सकती है.

इस विधि में पाइल्स को काट कर उस के ऊपर मलद्वार में 2-3 इंच की खाल कट जाती है, जिस से पाइल्स अपने सामान्य स्थान पर आ जाते हैं. इस विधि को करने में मात्र 20 मिनट लगते हैं, न के बराबर खून निकलता है, तथा दर्द भी कम ही होता है व मरीज को 24 घंटों से पहले छुट्टी दे दी जाती है. व्यक्ति 24-48 घंटों में काम पर जाने लायक हो जाता है. इस विधि द्वारा उपचार करने के बाद फिर से पाइल्स होने की संभावना 2 से 10 प्रतिशत ही रहती है, निर्भर करता है कि सर्जन कितना अनुभवी है.

(लेखक पाइल्स व गुदा रोग विशेषज्ञ हैं.)

मॉर्निंग सैक्स, सारा दिन खुशगवार

कहते हैं यदि दिन की शुरुआत अच्छी हो तो दिन अच्छा गुजरता है. आप चाहें लिवइन में रह रहे हों या शादीशुदा हों सुबहसवेरे पुरुषों का मूड थोड़ा रोमांटिक रहता है. जबकि फीमेल्स के साथ ऐसा नहीं होता. वे सुबहसुबह अपने पार्टनर को सैक्स के लिए मना कर देती हैं. ऐसे में दोनों में हलकीफुलकी तनातनी हो जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौर्निंग सैक्स न सिर्फ लवलाइफ के लिए बढि़या है, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा रहता है.

तो फिर क्यों न सुबहसवेरे अपने शरारती साथी को सैक्स सरप्राइज दे कर खुश कर दिया जाए. सैक्सी सुबह से न सिर्फ साजन का, बल्कि आप का भी सारा दिन खुशगवार गुजरेगा. बस मूड बनाने की जरूरत है.

सांसों में हो ताजगी

रात को सोने से पहले अच्छी तरह ब्रश करना न भूलें. इस के अलावा अपनी साइड टेबल पर घुलने वाली मिंट जरूर रखें ताकि इन्हें सुबह उठने पर मुंह में रख कर फ्रैशनैस महसूस की जा सके वरना मुंह की बदबू सारा मजा किरकिरा कर सकती है.

छुअन का कराएं एहसास

सैक्स की शुरुआत जरा अलग अंदाज में करें. बेहद मद्धिम स्वर में सौफ्ट रोमांटिक गाना लगाएं. जैसे ही पार्टनर कसमसा कर करवटें बदलने लगें उन्हें अपनी कोमल छुअन का एहसास कराएं. उन के लिए यह इशारा काफी होगा. उन की नींद काफूर हो जाएगी और वे आप से लिपटने के लिए आतुर हो उठेगी.

 स्वस्थ रहने के लिए सैक्स जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हफ्ते में 3 बार मौर्निंग सैक्स से हार्टअटैक या स्ट्रोक का खतरा कम होता है. इस से सर्दीजुकाम होने की भी संभावना घटती है और स्किन, बालों और नाखूनों में भी निखार आता है. सुबह का सैक्स दिनभर व्यक्ति को खुश और ऊर्जावान रखने के साथसाथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है.

  कंडोम भी पास रखें?

कंडोम हमेशा पहुंच में रखें. पता नहीं सहलानापुचकारना कब हदें पार कर के समागम में बदलने को उतावला हो जाए. उत्तेजक पलों के बीच उठ कर कंडोम लेने जाने पर सारा मूड औफ हो जाएगा.

प्यार का एहसास

यह जरूरी नहीं है कि रोज सुबहसुबह सैक्स करें ही. एकदूसरे को गुदगुदाना और सहलाना भी काफी मानसिक सुख देता है. एकदूसरे से चिपक कर सहलाने, चूमने का आनंद भी सैक्स आनंद से कतई कम नहीं होता है.

 छेड़छाड़ भी जरूरी

अगर आप किसी दिन बेहद जल्दी में हों तो पिया के गालों पर गहरा चुंबन और उन्हें गुदगुदाना या हलकी चिकोटी काट कर शरारत करते हुए भाग जाना भी उन के मन को भा जाएगा और वे आप के दीवाने हो जाएंगे.

ताजगी भरा सैक्स

जरूरी नहीं कि आप सैक्स बैडरूम में ही करें. बाथरूम में शौवर के नीचे नहाते हुए सैक्स करने का बिलकुल अलग एहसास होगा. पहले एकदूसरे को अच्छी खुशबू वाला बौडी जैल लगाएं, फिर मौसम के अनुसार गरम या ठंडे पानी से नहाते हुए एकदूसरे से लिपट जाएं. फिर जहां मन करे चूमें, सहलाएं और पूरी मस्ती करें. बाथरूम का यह मिलन आप को एक अलग आनंद देगा.

अंधविश्वास की बलिवेदी पर : रूपल क्या बचा पाई इज्जत

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40 की उम्र में बोल्ड अवतार में दिखीं प्रियंका चोपड़ा, फैंस हुए दिवाने

ग्लोबल स्टार बन चुकी प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) इन दिनों अपनी फोटो को लेकर सुर्खियों में छा गई है. हाल ही में एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने फोटोशूट कराया है जिसमें वे बेहद ही बोल्ड और ग्लैमर्स नजर आ रही है इन फोटो के आते ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी है. फोटो में एक्ट्रेस बेहद ही हॉट लग रही है जो कि मैगजीन को लेकर फोटोशूट कराया है.

आपको बता दें, कि हाल ही में प्रियंका चोपड़ा, राघव चढ्ढा और परिणीति चोपड़ा के रोके में शामिल हई थी, जहां उन्होंने बहुत मस्ती की थी, जिसे लेकर एक्ट्रेस चर्चा में बनी हुई थी लेकिन अब प्रियंका अपनी हाल ही में कराए फोटोशूट को लेकर चर्चा में है जिसमें वह बला की खूबसूरत नजर आई है इन फोटो में वो तरह-तरह के पोज देती हुई नजर आ रही है.

 

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एक्ट्रेस ने एक फोटो में ग्रीन क्लर की बैकलेस ड्रेस पहनी है, जिसमें वे बेहद बोल्ड लुक में दिख रही है. जिसे देख फैंस पानी-पानी हो गए है और फोटो को जमकर वायरल कर रहे है. साथ ही एक फोटो में व्हाइट ड्रेस में दिख रही है जो कि ऑफ शोल्डर है उसमें भी एक्ट्रेस ग्लैमर्स लग रही है. एक फोटो में वह लेटी हुई दिख रही है जो कि उनकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रहा है. एक्ट्रेस ग्रीन ड्रेस में घोडे के साथ फोटशूट कराती दिख रही है. इन तस्वीरों की जितनी तारीफें की जाएं, उतनी कम है लोग इन फोटो पर कमेंट बरसाते दिख रहे है.

बता दें, ये फोटो एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की है जिनपर कई फैंस कमेंट कर रहे है ये फोटोशूट नामी मैगजीन के लिए कराया है वही, प्रिंयका के वर्क फ्रंट की बात करें तो, हाल ही में एक्शन सीन मूवी सिटाडेल रीलिज हुई है. जिसमें एक्ट्रेस एक्शन करती हुई नजर आई है.

 

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Cannes 2023 : ग्रीन पंखों वाली ड्रेस में उर्वशी रौतेला की एंट्री, फैंस बोले- तोता !

इन दिनों एंटरटेनमेंट की दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म फेस्टिवल चल रहा है जी हां, हम बात कर रहे है Cannes फिल्म फेस्टिवल की, जहां बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड के कई सितारें शिरकत कर चुके है बॉलीवुड में एश्वर्या राय से लेकर सारा अली खान अबतक रेड कार्पेट पर एंट्री कर चुकी है जहां वहा अपना जलवा बिखेर चुकी है अब मिस यूनिवर्स इंडिया रह चुकी उर्वशी रौतेला(Uravshi Rautela) ने भी ग्रीन ड्रेस में एंट्री मारी है लेकिन इस बार उन्हे ट्रोलर्स का निशाना बनना पडा.

 

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आपको बता दें, कि उर्वशी रौतेला कभी मगरमच्छा वाला नेकलेस तो कभी ब्लू लिपस्टिक लगाकर उर्वशी रौतेला कान्स के रेड कार्पेट पर जमकर लाइमलाइट बटोर रही हैं. अब एक बार फिर उर्वशी रौतेला रेड कार्पेट पर नजर आईं. लेकिन अपने इस लेटेस्ट लुक को लेकर उर्वशी रौतेला सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं. इन तस्वीरों में उर्वशी रौतेला ग्रीन कलर की पंखों से बनीं ड्रेस पहनें नजर आईं, फोटोज में एक्ट्रेस इस स्लीवलेस आउटफिट में बेहद ही हसीन लग रही थीं.

 

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इस आउटफिट के साथ उर्वशी रौतेला ग्रीन कलर का फेदर कैप अपने सिर पर लगाए नजर आईं. फोटो में एक्ट्रेस पैपराजी को पोज देती नजर आ रही हैं. इन तस्वीरों में उर्वशी रौतेला रेड कार्पेट पर अपने हुस्न का जलवा बिखेरती नजर आ रही हैं. फोटो में उर्वशी बेहद ही दिलकश लग रही हैं. इस आउटफिट के साथ उर्वशी रौतेला डायमंड ईयररिंग्स पहनें नजर आईं. फोटो में एक्ट्रेस जबरदस्त अंदाज में पोज देती नजर आ रही हैं. इस तस्वीर में उर्वशी रौतेला एक एंटीक के साथ खड़ी होकर पोज देती नजर आ रही हैं. इस आउटफिट के साथ एक्ट्रेस ने न्यूड मेकअप किया है, जो उनके लुक को कॉम्प्लीमेंट दे रहा है. हालांकि उर्वशी रौतेला अपने इस नए आउटफिट को लेकर ट्रोल्स के निशाने पर आ गई हैं. इन फोटोज के वायरल होने के बाद कोई उर्वशी को तोता बता रहा है तो कोई एक्ट्रेस की तुलना जटायु से कर रहा है.

 

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घर पर कैसे रहें फिट

 कोरोनाकाल में युवाओं की फिटनैस काफी प्रभावित हुई है. जिम बंद हुए तो अधिकतर का शरीर ढीला पड़ता गया. लेकिन अब चिंता की जरूरत नहीं क्योंकि यहां फिटनैस मंत्र जो उपलब्ध है जो आप को बिन जिम के भी फिट रखेगा.

कोरोनाकाल में लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहने की खास हिदायत दी गई है, क्योंकि कोविड-19 का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बड़ी तेजी से फैलता है. जिस के प्रसार का माध्यम छींकने, खांसने, पसीने और बातचीत के आम व्यवहार से हो सकता है.   यही कारण है कि समयसमय पर ऐसी जगहों पर सरकार द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाने की नौबत आई जहां संक्रमण फैलने का अधिक खतरा बना रहता है और उन स्थानों में से एक ‘जिम’ रहा.

जिम फिजिकल फिटनैस के लिहाज से बेहतर जगह होती है, युवा से ले कर बुजुर्ग तक रूटीन ऐक्सरसाइज के लिए ‘जिम’ का प्रयोग करते हैं लेकिन यहां से संक्रमण का खतरा भी बना रहता है. इंडिपैंडेंट यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, जिम में कोरोना का खतरा इसलिए अधिक होता है क्योंकि जिम में लोग पसीने से भरे रहते हैं, जिस से कीटाणुओं के फैलने का अधिक खतरा बना रहता है. इस रिपोर्ट में डा. स्वान का कथन है, ‘‘जिम में नमी होती है, लोग पसीना छोड़ते हैं जिस से संक्रमण फैलने का अधिक खतरा बना रहता है.’’

यही कारण भी है कि जहां कहीं भी लौकडाउन जैसी सिचुएशन आती है तो प्राथमिक तौर पर जिम को बंद करने का आदेश दिया जाता है. लेकिन इन आदेशों से यह समस्या पैदा हुई कि जिम के बंद होने से लोगों की फिटनैस प्रभावित हो गई. इस से हैल्थ पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है. जो लोग जिम जा कर वर्कआउट करते थे वे घर पर रह रहे हैं. जिम जाने वालों में अधिकतर संख्या 18 से 40 वर्ष के युवाओं की होती है.

ऐसे में कुछ मंत्र हैं जिन्हें अपना कर आप घर में सुरक्षित रहते हुए ऐक्सरसाइज करने के साथ खुद को फिट रख सकते हैं और, सही खानपान से खुद की फिटनैस को मैंटेन रख सकते हैं.

वार्मअप : खुद को चुस्त रखने के लिए वार्मअप बहुत जरूरी है. इस के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है. इसलिए सुबहसुबह एक जगह फिर चाहे वह घर की छत हो, बालकनी हो, या रूम ही क्यों न हो, सीधे खड़े रह कर ऊपरनीचे जंप करें. यह जंप ऐसी भी हो सकती है कि पंजे जमीन पर चिपके रहें और एडि़यां ऊपर उठें. फिर सीधे खड़े हो कर दोनों हाथों को कंधे की सीध में रख कर चलाएं. उस के बाद पैरों के घुटने मोड़ कर स्क्वाट करें. आप रस्सीकूद भी कर सकते हैं.

पैदल चलना : पैदल चलना हमेशा शरीर के लिए बेहतर है. व्यक्ति को अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित तौर पर पैदल चलना ही चाहिए. इसलिए रोजाना सुबह आधे घंटे पैदल चल के फिट रहा जा सकता है. आप इस के लिए अपनी कालोनी के इर्दगिर्द ही चक्कर लगा

सकते है, या आसपास के पार्क में हलकीफुलकी रनिंग की जा सकती है. समय का ध्यान रखते हुए ट्रेडमिल एक बेहतर औप्शन है.

पुशअप : सब से पहली और आराम से की जानी वाली ऐक्सरसाइज पुशअप है. इस के लिए किसी प्रकार के इक्विपमैंट की आवश्यकता नहीं होती. यह सब से सामान्य ऐक्सरसाइज है जिसे लोग सब से अधिक करते भी हैं. इसे जरूरत के हिसाब से करें और समयनुसार सैट बढ़ाते रहें. इस से चैस्ट, आर्म्स, शोल्डर, पीठ स्ट्रौंग होती है.

वाल सिट्स : वाल सिट्स ऐक्सरसाइज में पीठ को दीवार पर चिपका देते हैं और फिर दोनों पैरों को कुरसी पर बैठने की पोजिशन में रखते हैं. ये 90 डिग्री होने चाहिए. अब दोनों हाथों को फोल्ड कर के कुछ देर इसी पोजिशन में 30 सैकंड तक रहना होता है. इस से बौडी का बैलेंस बनाया जा सकता है. इस से पेट की चरबी कम होती है, जांघें और हिप्स शेप में आते हैं और कैलोरी बर्न भी होती है.

पुलअप्स : यह अपने ही शरीर के वेट को ऊपर उठाने जैसा है. देखा गया है कि ज्यादातर लोगों से इस ऐक्सरसाइज में रेप्स नहीं लगते हैं क्योंकि वे लोग इस ऐक्सरसाइज को लगाने का सही तरीका नहीं जानते. इस में हाथों को लगभग 28 इंच तक खोलें. जब आप ऊपर की तरफ जाएंगे तो लगभग एक सैकंड तक होल्ड करें. फिर नीचे आएं.

ध्यान रहे, पूरी ऐक्सरसाइज डेढ़ घंटे से ऊपर न हो और फिटनैस का जरूरी मंत्र यह है कि नींद सही समय पर सही घंटों की लें व डाइट पर्याप्त मात्रा में लें.

ऐक्सरसाइज के बाद क्या पिएं

फिटनैस के लिए ऐक्सरसाइज के बाद आप कुछ तरल पिएं तो बेहतर है क्योंकि ऐक्सरसाइज के बाद बौडी को हाइड्रेट रखना फिटनैस का एक जरूरी हिस्सा है.

तरबूज का जूस पिएं : भारी व्यायाम के बाद तरबूज शरीर में उचित हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है. वर्कआउट के दौरान आमतौर पर हमारा शरीर लगभग 2 फीसदी तक पानी की मात्रा पसीने के तौर पर बर्न करता है, जिस की भरपाई करने के लिए तरबूज का जूस अच्छा माध्यम हो सकता है.

नारियल पानी : नारियल का पानी शरीर में पानी की कमी की मात्रा को पूरा करता है.

चेरी का जूस : चेरी में मौजूद एंटीऔक्सिडैंट्स का उ?च्च स्रोत मांसपेशियों को ऊर्जा देता है.

ग्रीन टी : ग्रीन टी शारीरिक थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है.

बहुत से लोग मौसंबी का जूस, गाजर का जूस और अलगअलग शेक, बनाना शेक, मैंगो शेक पीते हैं. स्वादानुसार हर चीज ट्राई की जा सकती है.

मैंने एक लड़के के साथ वह सब कर लिया जो शादी के बाद होना चाहिए था, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं. हम दोनों के बीच नजदीकियां इतनी अधिक बढ़ गईं कि आवेश में आ कर वह सब कर लिया जो शादी के बाद होना चाहिए था. संबंध बनाने के बाद से मैं अपराधबोध से ग्रस्त हूं. मुझे अपनेआप से घृणा होने लगी है. हर समय तनावग्रस्त रहती हूं. लगता है मुझे डिप्रैशन हो जाएगा. कृपया बताएं कि मैं क्या करूं? कैसे अपने दिमाग को संयत रखूं?

जवाब-

अंतरंग पलों में बहक कर आप ने अपने बौयफ्रैंड के साथ संबंध बना लिया. अब उस बात के लिए अपराधबोध होना या तनाव पालना समस्या का हल नहीं है. बेहतर होगा कि आप इस घटना को भूल जाएं और भविष्य में सतर्क रहें. तनाव से बचने के लिए स्वयं को व्यस्त रखें.

नादान उम्र का खेल

राम रहमानपुर गांव सालों से गंगाजमुनी तहजीब की एक मिसाल था. इस गांव में हिंदुओं और मुसलिमों की आबादी तकरीबन बराबर थी. मंदिरमसजिद आसपास थे. होलीदीवाली, दशहरा और ईदबकरीद सब मिलजुल कर मनाते थे. रामरहमानपुर गांव में 2 जमींदारों की हवेलियां आमनेसामने थीं. दोनों जमींदारों की हैसियत बराबर थी और आसपास के गांव में बड़ी इज्जत थी. दोनों परिवारों में कई पीढि़यों से अच्छे संबंध बने हुए थे. त्योहारों में एकदसूरे के यहां आनाजाना, सुखदुख में हमेशा बराबर की साझेदारी रहती थी. ब्रजनंदनलाल की एकलौती बेटी थी, जिस का नाम पुष्पा था. जैसा उस का नाम था, वैसे ही उस के गुण थे. जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता था. उस की उम्र नादान थी. रस्सी कूदना, पिट्ठू खेलना उस के शौक थे. गांव के बड़े झूले पर ऊंचीऊंची पेंगे लेने के लिए वह मशहूर थी.

शौकत अली के एकलौते बेटे का नाम जावेद था. लड़कों की खूबसूरती की वह एक मिसाल था. बड़ों की इज्जत करना और सब से अदब से बात करना उस के खून में था. जावेद के चेहरे पर अभी दाढ़ीमूंछों का निशान तक नहीं था.

जावेद को क्रिकेट खेलने और पतंगबाजी करने का बहुत शौक था. जब कभी जावेद की गेंद या पतंग कट कर ब्रजनंदनलाल की हवेली में चली जाती थी, तो वह बिना झिझक दौड़ कर हवेली में चला जाता और अपनी पतंग या गेंद ढूंढ़ कर ले आता.

पुष्पा कभीकभी जावेद को चिढ़ाने के लिए गेंद या पतंग को छिपा देती थी. दोनों में खूब कहासुनी भी होती थी. आखिर में काफी मिन्नत के बाद ही जावेद को उस की गेंद या पतंग वापस मिल पाती थी. यह अल्हड़पन कुछ समय तक चलता रहा. बड़ेबुजुर्गों को इस खिलवाड़ पर कोई एतराज भी नहीं था.

समय तो किसी के रोकने से रुकता नहीं. पुष्पा अब सयानी हो चली थी और जावेद के चेहरे पर दाढ़ीमूंछ आने लगी थीं. अब जावेद गेंद या पतंग लेने हवेली के अंदर नहीं जाता था, बल्कि हवेली के बाहर से ही आवाज दे देता था.

पुष्पा भी अब बिना झगड़ा किए नजर झुका कर गेंद या पतंग वापस कर देती थी. यह झुकी नजर कब उठी और जावेद के दिल में उतर गई, किसी को पता भी नहीं चला.

अब जावेद और पुष्पा दिल ही दिल में एकदूसरे को चाहने लगे थे. उन्हें अल्हड़ जवानी का प्यार हो गया था.

कहावत है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. गांव में दोनों के प्यार की बातें होने लगीं और बात बड़ेबुजुर्गों तक पहुंची.

मामला गांव के 2 इज्जतदार घरानों का था. इसलिए इस के पहले कि मामला तूल पकड़े, जावेद को आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेज दिया गया. यह सोचा गया कि वक्त के साथ इस अल्हड़ प्यार का बुखार भी उतर जाएगा, पर हुआ इस का उलटा.

जावेद पर पुष्पा के प्यार का रंग पक्का हो गया था. वह सब से छिप कर रात के अंधेरे में पुष्पा से मिलने आने लगा. लुकाछिपी का यह खेल ज्यादा दिन तक नहीं चल सका. उन की रासलीला की चर्चा आसपास के गांवों में भी होने लगी.

आसपास के गांवों की महापंचायत बुलाई गई और यह फैसला लिया गया कि गांव में अमनचैन और धार्मिक भाईचारा बनाए रखने के लिए दोनों को उन की हवेलियों में नजरबंद कर दिया जाए.

ब्रजनंदनलाल और शौकत अली को हिदायत दी गई कि बच्चों पर कड़ी नजर रखें, ताकि यह बात अब आगे न बढ़ने पाए. कड़ी सिक्योरिटी के लिए दोनों हवेलियों पर बंदूकधारी पहरेदार तैनात कर दिए गए.

अब पुष्पा और जावेद अपनी ही हवेलियों में अपने ही परिवार वालों की कैद में थे. कई दिन गुजर गए. दोनों ने खानापीना छोड़ दिया था. आखिरकार दोनों की मांओं का हित अपने बच्चों की हालत देख कर पसीज उठा. उन्होंने जातिधर्म के बंधनों से ऊपर उठ कर घर के बड़ेबुजुर्गों की नजर बचा कर गांव से दूर शहर में घर बसाने के लिए अपने बच्चों को कैद से आजाद कर दिया.

रात के अंधेरे में दोनों अपनी हवेलियों से बाहर निकल कर भागने लगे. ब्रजनंदनलाल और शौकत अली तनाव के कारण अपनी हवेलियों की छतों पर आधी रात बीतने के बाद भी टहल रहे थे. उन दोनों को रात के अंधेरे में 2 साए भागते दिखाई दिए. उन्हें चोर समझ कर दोनों जोर से चिल्लाए, पर वे दोनों साए और तेजी से भागने लगे.

ब्रजनंदनलाल और शौकत अली ने बिना देर किए चिल्लाते हुए आदेश दे दिया, ‘पहरेदारो, गोली चलाओ.’

‘धांयधांय’ गोलियां चल गईं और 2 चीखें एकसाथ सुनाई पड़ीं और फिर सन्नाटा छा गया.

जब उन्होंने पास जा कर देखा, तो सब के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई. पुष्पा और जावेद एकदूसरे का हाथ पकड़े गोलियों से बिंधे पड़े थे. ताजा खून उन के शरीर से निकल कर एक नई प्रेमकहानी लिख रहा था.

आननफानन यह खबर दोनों हवेलियों तक पहुंच गई. पुष्पा और जावेद की मां दौड़ती हुई वहां पहुंच गईं. अपने जिगर के टुकड़ों को इस हाल में देख कर वे दोनों बेहोश हो गईं. होश में आने पर वे रोरो कर बोलीं, ‘अपने जिगर के टुकड़ों का यह हाल देख कर अब हमें भी मौत ही चाहिए.’

ऐसा कह कर उन दोनों ने पास खड़े पहरेदारों से बंदूक छीन कर अपनी छाती में गोली मार ली. यह सब इतनी तेजी से हुआ कि कोई उन को रोक भी नहीं पाया.

यह खबर आग की तरह आसपास के गांवों में पहुंच गई. हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी. सवेरा हुआ, पुलिस आई और पंचनामा किया गया. एक हवेली से 2 जनाजे और दूसरी हवेली से 2 अर्थियां निकलीं और उन के पीछे हजारों की तादाद में भीड़.

अंतिम संस्कार के बाद दोनों परिवार वापस लौटे. दोनों हवेलियों के चिराग गुल हो चुके थे. अब ब्रजनंदनलाल और शौकत अली की जिंदगी में बच्चों की यादों में घुलघुल कर मरना ही बाकी बचा था.

ब्रजनंदनलाल और शौकत अली की निगाहें अचानक एकदसूरे से मिलीं, दोनों एक जगह पर ठिठक कर कुछ देर तक देखते रहे, फिर अचानक दौड़ कर एकदूसरे से लिपट कर रोने लगे.

गहरा दुख अपनों से मिल कर रोने से ही हलका होता है. बरसों का आपस का भाईचारा कब तक उन्हें दूर रख सकता था. शायद दोनों को एहसास हो रहा था कि पुरानी पीढ़ी की सोच में बदलाव की जरूरत है.

दोस्त को गोली मार कर की खुदकुशी

सेना में लांसनायक संतोष कुमार ने मंगलम कालोनी में किराए के मकान में अपने दोस्त रिकेश कुमार सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी. उस के बाद संतोष ने भी गोली मार कर खुदकुशी कर ली.

धायं… धायं… धायं… एक के बाद एक 3 गोलियां चलीं और आसपास के लोगों को कुछ पता ही नहीं चल सका. हैरानी की बात तो यह भी थी कि मकान में रहने वाले मकान मालिक और बाकी किराएदारों को भी गोली चलने की आवाज सुनाई नहीं पड़ी.

24 सितंबर, 2017 को पटना के दानापुर ब्लौक में हुई इस वारदात में किसी ‘तीसरे’ के होने के संकेत ने पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है.

दानापुर थाने के बेली रोड पर बसी मंगलम कालोनी में सेना के 32 साला लांसनायक संतोष कुमार सिंह ने लाइसैंसी राइफल से 22 साला दोस्त रिकेश कुमार सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी और उस के बाद खुद को भी गोली मार ली.

संतोष किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहता था. मकान के आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि हत्या वाले दिन रिकेश कुमार के अलावा एक और आदमी संतोष के घर पर था. किसी ने उस तीसरे शख्स को बाहर निकलते नहीं देखा. पुलिस को उस का कोई अतापता नहीं मिल पा रहा है.

कुछ महीने पहले ही संतोष का तबादला अरुणाचल प्रदेश में हो गया था. उस के बाद दोनों फोन पर ही लंबी बातें किया करते थे. संतोष छुट्टी में घर आता, तो रिकेश से मिलता था.

24 सितंबर, 2017 को संतोष ने रिकेश को फोन कर अपने घर बुलाया. रिकेश ने आने से मना किया और कहा कि घर में काफी काम है. उस के बाद संतोष ने उस से कहा कि उस ने घर पर ही उस के लिए खाना बनवाया हुआ है.

खाने के नाम पर रिकेश ने उस के घर आने के लिए हामी भरी. कुछ देर बाद रिकेश संतोष के घर पहुंच गया और कमरे में बैठ कर टैलीविजन देखने लगा. उसी दौरान वे दोनों बातचीत भी करते रहे. किसी बात को ले कर दोनों में तीखी झड़प शुरू हो गई. कुछ ही देर में संतोष चिल्लाने लगा, पर रिकेश उस की बातों को अनसुना कर टैलीविजन देखता रहा.

संतोष शादीशुदा था और रिकेश की शादी नहीं हुई थी. घर वाले उस के लिए लड़की ढूंढ़ रहे थे.

संतोष कुछ महीने पहले तक बिहार में ही पोस्टैड था. वह बिहार रैजीमैंट के ट्रेनिंग सैंटर में इंस्ट्रक्टर था. रिकेश की भी सेना में सिपाही के पद पर बहाली हुई थी और वह ट्रेनिंग सैंटर में ही ट्रेनिंग ले रहा था. उसी दौरान उस की मुलाकात संतोष से हुई और कुछ ही समय में वे दोनों गहरे दोस्त बन गए.

पुलिस ने उन दोनों के मोबाइल फोन का रिकौर्ड खंगाला, तो दोनों के बीच की बातचीत को सुन कर लगा कि उन की दोस्ती हदें पार कर चुकी थी. दोनों हर तरह की बातें खुल कर किया करते थे.

पुलिस के मुताबिक, रिकेश के एक दोस्त ने बताया कि रिकेश किसी को कुछ बताए बगैर ही बैरक से बाहर निकल गया था. देर तक जब वह बैरक में नहीं पहुंचा, तो उस के साथी जवानों ने रिकेश की मां को फोन कर मामले की जानकारी दी.

रिकेश की मां उस समय भोपाल में थीं. उन्होंने पटना से सटे दानापुर इलाके में रहने वाली अपनी बेटी पिंकी को रिकेश के बारे में पता करने को कहा.

पिंकी अपने पति मनोज को साथ ले कर देर रात संतोष के घर पहुंची. उस ने मकान मालिक राजेंद्र सिंह से संतोष और रिकेश के बारे में पूछा. मकान मालिक ने उन को घर में नहीं घुसने दिया और सुबह आने को कहा.

दूसरे दिन सुबह पिंकी अपने ससुर जगेश्वर सिंह के साथ संतोष के घर पहुंची. पिंकी ने दरवाजा खटखटाया, पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. उस के बाद उस ने जोर से चिल्ला कर आवाज लगाई. काफी कोशिश के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो उस ने मकान मालिक को मामले की जानकारी दी.

मकान मालिक की सहमति के बाद संतोष के मकान का दरवाजा तोड़ा गया. दरवाजा टूटने के बाद जब वे लोग अंदर गए, तो सभी के मुंह से चीखें निकल पड़ीं. कमरे के अंदर संतोष और रिकेश की खून से सनी लाशें पड़ी हुई थीं.

संतोष और रिकेश के परिवार समेत पुलिस भी इस बात से हैरान है कि राइफल की 3 गोलियां चलीं, पर मकान मालिक को उस की आवाज कैसे नहीं सुनाई दी?

हैरानी की बात यह भी है कि मकान में रहने वाले बाकी किराएदारों को भी आवाज नहीं सुनाई पड़ी.

कमरे में संतोष की राइफल के साथ 3 जिंदा कारतूस और 3 खोखे बरामद हुए. कमरे में लगा टैलीविजन चल रहा था. कमरे से पुलिस ने संतोष और रिकेश के मोबाइल फोन बरामद किए.

22 सितंबर को संतोष अपनी बीवी रिंकी देवी और 10 साल के बेटे आयुष को सारण जिले के चकिया थाना के दुरघौली गांव में छोड़ आया था. दुरघौली उस का पुश्तैनी घर है. उस के पिता धर्मदेव सिंह किसान हैं.

रिकेश आरा के दोबाहा गांव का रहने वाला था और उस के पिता का नाम विजय कुमार सिंह है.

रिकेश की बहन पिंकी और बाकी घर वालों ने बताया कि संतोष अपनी बहन से रिकेश की शादी करवाना चाहता था. उस ने अपनी बहन से रिकेश को मिलवाया भी था. उस के बाद रिकेश उस से फोन पर अकसर बातें करने लगा था.

रिकेश के घर वाले संतोष की बहन को पसंद नहीं करते थे और शादी के लिए राजी नहीं हो रहे थे. संतोष लगातार रिकेश पर शादी का दबाव बना रहा था और रिकेश यह कह कर शादी टाल रहा था कि उस के घर वालों को लड़की पसंद नहीं है.

संतोष की बीवी रिंकी देवी का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था. उस ने किसी से किसी तरह का झगड़ा होने की बात से साफ इनकार किया.

संतोष के कमरे में टंगे संतोष और रिकेश के हंसतेमुसकराते कई फोटो देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन दोनों के बीच काफी गहरी दोस्ती थी.

रिकेश का सिर बाथरूम के अंदर था और जिस्म का बाकी हिस्सा कमरे में था. ऐसा लग रहा था कि उसे मारने के बाद उस की लाश को घसीट कर बाथरूम की ओर ले जाया गया था.

रिकेश के पैर के पास ही संतोष की लाश पड़ी हुई थी. उस के पेट के ऊपर राइफल रखी हुई थी और उस की नली के आगे के हिस्से में खून के दाग थे.

रिकेश के शरीर में 2 गोलियों के निशान थे और संतोष की ठुड्डी पर गोली का निशान था. उस के सिर के पिछले हिस्से में काफी गहरा जख्म था.

संतोष के गले में रस्सी भी बंधी हुई थी और उस का दूसरा छोर सीलिंग पंखे से बंधा हुआ था. इस से यह पता चलता है कि संतोष ने पहले गले में फंदा डाल कर पंखे से लटक कर जान देने की कोशिश की होगी. उस में कामयाबी नहीं मिलने के बाद उस ने गोली मार कर खुदकुशी कर ली.

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