वर्ष 2021 के लिए 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा: ‘रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट’ को मिला सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार

69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की जूरी ने साल 2021 के विजेताओं की घोषणा कर दी है. घोषणा से पहले, अध्यक्ष और अन्य जूरी सदस्यों ने केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात की और उनके समक्ष पुरस्कारों के लिए किए गए चयन को प्रस्तुत किया. केन्द्रीय मंत्री ने परिश्रम के साथ सभी प्रविष्टियों की जांच करने और पुरस्कारों के लिए सर्वश्रेष्ठ का चयन करने के लिए जूरी को धन्यवाद दिया. बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा, “हर श्रेणी की सभी फिल्मों के बीच बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा थी. मेरी बधाई और शुभकामनाएं विजेताओं के साथ हैं. आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म निर्माता है. हमारे पास दुनिया का कंटेंट हब बनने की क्षमता है. यह हमारा समय है. आज हमारी फिल्मों को दुनिया भर में पहचान मिल रही है, चाहे वह बाफ्टा हो या ऑस्कर.”

जूरी में शामिल रहीं यह शख्सियतें

जूरी में भारतीय सिने-जगत के प्रख्यात फिल्म निर्माता और फिल्मी हस्तियां शामिल थीं. पुरस्कारों की घोषणा केतन मेहता, अध्यक्ष, फीचर फिल्म्स जूरी, वसंत एस साई, अध्यक्ष, गैर-फीचर फिल्म जूरी, यतींद्र मिश्रा, सिनेमा जूरी पर सर्वश्रेष्ठ लेखन द्वारा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव नीरजा शेखर की उपस्थिति में की गई.

इन फिल्मों को मिला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार

सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ को दिया गया है और सृष्टि लखेरा द्वारा निर्देशित ‘एक था गांव’ ने सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार हासिल किया है.

‘द कश्मीर फाइल्स’ को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जबकि ‘आरआरआर’ को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार मिला है.

एक्टिंग का सर्वश्रेठ पुरस्कार

अल्लू अर्जुन ने फिल्म पुष्पा (द राइज पार्ट I) में अपने शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता है, जबकि आलिया भट्ट और कृति सैनन क्रमशः ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार की संयुक्त विजेता बनीं हैं.

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार निखिल महाजन को

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मराठी फिल्म ‘गोदावरी’ के लिए निखिल महाजन को दिया गया. पंकज त्रिपाठी को ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार और पल्लवी जोशी को ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है. पंकज त्रिपाठी ने यह पुरस्कार अपने पिता को समर्पित किया है जिनका हाल में निधन हो गया.

विवेक रंजन अग्निहोत्री के निर्देशन वाली ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने राष्ट्रीय एकीकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार भी जीता. अग्निहोत्री ने कहा कि वह इस पुरस्कार को आतंकवाद के पीड़ितों खासतौर से कश्मीरी हिंदुओं को समर्पित करते हैं.

आरआरआर को मिले छह पुरस्कार

आरआरआर फिल्म के संगीत निर्देशक एम एम कीरावनी ने ‘पुष्पा…’ के संगीत निर्देशक देवी प्रसाद के साथ सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का पुरस्कार साझा किया. एसएस राजमौली द्वारा निर्देशित फिल्म ने दर्शकों को भरपूर मनोरंजन प्रदान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म, काला भैरव को सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक, सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट्स, सर्वश्रेष्ठ एक्शन निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का पुरस्कार भी जीता.

संजय लीला भंसाली को सातवीं बार राष्ट्रीय पुरस्कार है

कमाठीपुरा की ताकतवर और प्रतिष्ठित वेश्या पर संजय लीला भंसाली की भव्य बायोपिक ‘‘गंगूबाई काठियावाड़ी’’ ने पांच पुरुस्कार जीते. आलिया भट्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के अलावा भंसाली ने उत्कर्षिनी वशिष्ठ के साथ सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले लेखक और फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार भी जीता. वशिष्ठ तथा प्रकाश कपाड़िया ने इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक और प्रीतिशील सिंह डिसूजा ने सर्वश्रेष्ठ मेकअप कलाकार का पुरस्कार भी जीता.

भंसाली ने ‘कहा, ‘‘मैं उन सभी लोगों के लिए खुश हूं जिन्होंने पुरस्कार जीते है. अच्छे सिनेमा को पहचान मिलती है और सरकार तथा राष्ट्रीय स्तर पर और सम्मानित जूरी से सराहना मिलने पर हमेशा आपको खुशी मिलती है.’’

संजय लीला भंसाली को सातवीं बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. इसके पहले ‘पद्मावत’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘मैरी कॉम’, ‘देवदास’ और ‘ब्लैक’ के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि आलिया भट्ट को उनके निर्देशन वाली फिल्म के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे बात की है और उन्हें कहा, ‘एक लड़की थी जिसने कहा था, ‘‘सर क्या आप मुझे इस भूमिका के लिए उपयुक्त मानते हैं, मैं नहीं जानती, मैं बहुत घबरायी हुई हूं.’’ अब उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल रहा है और मैंने उनसे कहा, ‘‘ईश्वर का शुक्रिया, आपका पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मेरी फिल्म के लिए है.’’

सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार श्रेया घोषाल को

श्रेया घोषाल ने फिल्म ‘‘इराविन निझाल’’ के लिए अपने गीत ‘‘मायावा छायावा’’ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार जीता. ‘ऑरिजिनल स्क्रीनप्ले’ का पुरस्कार मलयालम फिल्म ‘‘नायट्टू’’ और उसके लेखक शाही कबीर को दिया गया.

मलयालम फिल्म ‘‘मेप्पदियां’’ के निर्देशक को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू (नवोदित) फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार मिला है. जबकि सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार असमी फिल्म ‘‘अनुनाद-द रेजोनेंस’’ को मिला है.

शूजीत सरकार की बायोपिक ‘‘सरदार उधमसिंह’’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के साथ ही सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी (री-रिकॉर्डिंग फाइनल मिक्सिंग), सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम (वस्त्र) डिजाइन का पुरस्कार जीता है.

शूजीत सरकार ने कहा, ‘‘मैं आभारी हूं कि राष्ट्रीय पुरस्कार जूरी ने इसे (फिल्म को) पहचाना, उन्होंने फिल्म को बहुत ज्यादा सम्मान और प्यार दिया है. सरदार उधम जैसे क्रांतिकारी पर फिल्म, जिसमें भगत सिंह और जलियांवाला बाग घटना भी शामिल है और इसे इस तरह पहचान तथा सम्मान मिलता है. हम राष्ट्रीय पुरस्कारों के कारण फिल्मों को याद रखते हैं और हम इन फिल्मों को लंबे वक्त तक भी याद रखते हैं। मैं गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रहा हूं.’’

जूरी को फीचर, नॉन फीचर और बेस्ट राइटिंग ऑन सिनेमा के ऊपर लगभग 430 आवेदन हमें प्राप्त हुए थे. थिएटर में 2022 में प्रदर्शित हुई फिल्मों को 2021 के लिए पुरस्कार दिए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नीरजा शेखर ने कहा, ‘‘नियमों के अनुसार पात्र फिल्में एक जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक सत्यापित और प्रदर्शित की गईं.’’

Bigg Boss17 के लिए चुन लिए है कंटेस्टेंट, टक्कर देने आएंगी सौंदस मौकफिर

इऩ दिनों बिग बॉस का फीवर फैन के सर चढ़ कर बोल रहा है हाल ही बिग बॉस ओटीटी2 खत्म हुआ है जिसकी चर्चाएं अभी भी जारी है वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर सबको पछाड़ते हुए एल्विश यादव ने ओटीटी को खिताब अपने नाम किया है वही पहले रनरअप रहे अभिषेक मल्हान. लेकिन इसी बीच बिग बॉस17 टीवी शो की खबरे तेज हो गई है शो के मेकर्स कंटेस्टेंट ढूंढने शुरु कर दिए है. अब इसी बीच खबर है कि टीवी एक्ट्रेस सौंदस मौकफिर शो में धमाकेदार एंट्री करेंगी.

 

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लेटेस्ट रिपोर्ट्स की माने तो बिग बॉस 17 के लिए सौंदस मौकफिर को अप्रोच किया गया है. जी हां, ‘रोडीज’, ‘स्पिटविला’ और ‘खतरों के खिलाड़ी 13’ से चर्चाओं में आईं अदाकारा सौंदस मौकफिर को ‘बिग बॉस 17’ के लिए निर्माताओं ने चुना गया है. मेकर्स कोशिश में लगे हुए है कि सौंदस इस शो में आए. अगर अदाकार इस शो के लिए हां करती है तो खतरो के खिलाड़ी 17 के फैन को भी इस शो से जोड़ा जाएगा. बता दें, कि एक्ट्रेस लास्ट खतरो के खिलाड़ी17 में नजर आई थी. जहा उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग हो गई. लोगों ने उन्हे खूब स्पोर्ट किया था. अब देखना ये होगा कि क्या सौंदस ये ऑफर एक्सेप्ट करती है की नहीं.

 

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बताते चले कि एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है. वही, बिग बॉस के टीवी वर्जन के अब तक 16 सफल सीजन बीत चुके हैं. अब मेकर्स 17वें सीजन को हिट बनाने की तैयारी में हैं. मिली जानकारी के मुताबिक इस बार बिग बॉस 17 में कपल्स वर्सेज सिंगल्स की थीम रखी जा रही है. इतना ही नहीं, सुनने में तो ये भी आया है कि इस बार शो में कुछ पुराने कंटेस्टेंट्स को भी दोबारा लाए जाने की तैयारी है. अब देखना ये होगा कि आने वाला शो कितना हिट रहेगा.

Gadar 2 की सकीना को नहीं पसंद है ऑनस्क्रीन Kiss करना, ट्रोल हुई एक्ट्रेस

इन दिनों गदर 2 हर सिनेमाघरों में छाई हुई है. फिल्म जबरदस्त कमाई कर रही है अबतक फिल्म 400 करोड़ आकड़ा पार कर चुकी है वही, फिल्म की सक्सेस के बाद अमीषा पटेल कई पार्टी करते हुए नजर आई है सनी देओल भी उनके साथ कई जगह नजर आए है. ऐसे में अमीषा पटेल का इंटरव्यू हुआ जहां उन्होने कई ऐसी बाते कह डाली जिसे लेकर वो सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही है. इस दौरान उन्होने सनी देओल और सलमान खान को लेकर भी जिक्र किया है.

 

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आपको बता दें, कि हाल ही में अमीषा पटेल से पूछा गया है कि वो ऐसा क्या है जो कभी नहीं करना चाहती है तो ऐसे में एक्ट्रेस ने जवाब देते हुए कहा है कि वो ऑनस्क्रीन किसी को किस करने में और इंटीमेट सीन नहीं करना चाहती है या फिर छोटे-छोटे कपड़े पहनने के खिलाफ है. यहां तक की ऑनस्क्रीन किसी को गाली देने में असहज महसूस करती हूं. आगे उन्होने कहा कि जैसे सलमान खान हमेशा कहते है कि वह ऑनस्क्रीन किसी को किस नहीं करेंगे. सनी देओल के भी अपने कुछ आदर्श है.

 

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अमीषा आगे कहती है, कि आपको अपनी हदें तय करनी होगी. आप किस चीज में कंफर्टेबल है.तो मैं हॉट दिखने में नहीं हूं. मै सेक्शुअली इंटीमेट सीन में कंफर्टेबल नहीं हूं, एक ही तरह के कपडे बार-बार पहनने में सहज महसूस नहीं करती हूं. मैं स्क्रीन पर किस करने के भी खिलाफ हूं. लेकिन इन्ही सब बातो को लेकर एक्ट्रेल ट्रोल हो रही है क्योकि फिल्म की रिलीजिंग से पहले अमीषा ने अपने इंस्टाग्राम पर काफी हॉट फोटो शेयर की है. यहां तक कि वह ‘कहो ना प्यार है’ में हॉट सीन दे चुकी है. इसी को लेकर लोग उन्हे ट्रोल कर रहे है.

 

विकट की वासना का ऐसा था खूनी अंजाम

15 मार्च, 2017 की सुबह गोवा के पणजी से करीब 80 किलोमीटर दूर थाना काणकोण पुलिस को किसी ने सूचना दी कि आगोंद और देववांग स्थित कडेंला के जंगल में एक विदेशी युवती का शव पड़ा है. सूचना मिलते ही थाना काणकोण में ड्यूटी पर तैनात इंसपेक्टर फिलोमेनो कोस्ता कुछ सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

लाश की स्थिति देख कर ही लग रहा था कि दुष्कर्म के बाद युवती की हत्या की गई है. मृतका के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. उस की हत्या भी बड़ी बेरहमी से की गई थी. शिनाख्त न हो सके, इस के लिए हत्यारे ने मृतका का चेहरा किसी नुकीली चीज से बिगाड़ दिया था.

इंसपेक्टर फिलोमेनो कोस्ता ने इस घटना की जानकारी अधिकारियों को दे दी थी. यही वजह थी कि वह लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर के लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रहे थे, तभी गोवा के पुलिस उपायुक्त संभी नावरिश के साथ थाना काणकोण के थानाप्रभारी उत्तम राऊत और देसाई भी फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए. फोरैंसिक टीम का काम निपट गया तो सभी ने एक बार फिर घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया.

घटनास्थल पर बीयर की एक टूटी बोतल के अलावा ऐसी कोई भी चीज नहीं मिली थी, जिस से मृतका या हत्यारे के बारे में कुछ पता चलता. उस टूटी हुई बीयर की बोतल में खून लगा था, इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि युवती की हत्या करने के बाद इसी बोतल से उस का चेहरा बिगाड़ा गया था.

घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए गोवा स्थित मैडिकल कालेज भिजवा दिया गया.

घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद थाने लौट कर पुलिस ने विदेशी युवती की हत्या का मामला दर्ज कर लिया और हत्यारे तक पहुंचने के बारे में विचार करने लगी. लेकिन हत्यारे तक तभी पहुंचा जा सकता था, जब उस युवती के बारे में कुछ पता चलता.

विदेशी युवती की लाश का पोस्टमार्टम 2 डाक्टरों के पैनल ने किया. पुलिस का अनुमान था कि मृतका की हत्या और उस के साथ की गई जबरदस्ती में एक से अधिक लोग शामिल रहे होंगे. लेकिन पुलिस का यह अनुमान गलत निकला, क्योंकि पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों और फोरैंसिक टीम की रिपोर्ट के अनुसार, दुष्कर्म और हत्या एक ही आदमी ने की थी. लेकिन वह क्रूरता की सारी हदें पार कर गया था.

विदेशी युवती की हत्या का मामला था, इसलिए पुलिस ने इस मामले को काफी गंभीरता से ही नहीं लिया, बल्कि मामले की जांच में तेजी से जुट भी गई. इस मामले पर पुलिस उपायुक्त संभी नावरिश नजर ही नहीं रखे हुए थे, बल्कि जांच की बागडोर भी खुद ही संभाले हुए थे. उन्होंने थानाप्रभारी उत्तम राऊत और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर जांच की रूपरेखा तैयार की और सभी को विदेशी युवती के बारे में पता लगाने के लिए लगा दिया.

संयोग से युवती के बारे में पता चलने में ज्यादा देर नहीं लगी. पुलिस वालों ने जब समुद्र किनारे आनंद ले रहे विदेशी पर्यटकों से लाश की फोटो दिखा कर पूछताछ की तो कलाई पर बने टैटू को देख कर उस के दोस्तों ने उस की पहचान डेनियल मैकलागलिन के रूप में की. पता चला कि आयरलैंड से होली का त्यौहार मनाने गोवा आई डेनियल मैकलागलिन करीब 18 घंटे से गायब है.

डेनियल मैकलागलिन की हत्या हो चुकी है, यह जान कर उस के दोस्त परेशान हो उठे. जैसे ही डेनियल की हत्या की खबर गोवा में फैली, थोड़ी ही देर में थाना काणकोण के सामने विदेशी पर्यटकों की भीड़ लग गई. इस भीड़ में विदेशी पत्रकार भी थे. विदेशी पर्यटकों की नाराजगी को देखते हुए संभी नावरिश ने आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द हत्यारे को गिरफ्तार कर लेंगे.

इस के बाद कुछ पर्यटक मोमबत्ती और फूलों का गुलदस्ता ले कर डेनियल को श्रद्धांजलि देने घटनास्थल पर भी गए. डेनियल के बारे में पूरी जानकारी मिल गई तो पुलिस ने उस की हत्या की जानकारी उस के घर वालों को दे दी थी. सूचना मिलते ही उस के घर वाले गोवा आ गए और उस की शिनाख्त कर दी.

घर वालों के आने से पुलिस पर हत्यारे की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ गया था. पुलिस का मानना था कि डेनियल की हत्या किसी अपराधी प्रवृत्ति के ही युवक ने की है, इसलिए पुलिस ऐसे युवकों के बारे में पता लगाने लगी. कुछ युवकों को थाने बुला कर पूछताछ भी की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चला.

हत्या के इस मामले में इंसपेक्टर फिलोमेनो कोस्ता कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहे थे. इसलिए पुलिस अधिकारियों ने उन्हें ही इस मामले की जांच सौंप दी. सहयोगियों की मदद से वह उन युवकों के बारे में पता कर रहे थे, जिन की गतिविधियां विदेशी पर्यटकों के बीच संदिग्ध थीं. काफी कोशिश के बाद भी जब वह हत्यारे तक नहीं पहुंच सके तो उन्होंने गोवा और काणकोण के समुद्री किनारे पर बने पबों और रेस्टोरेंटों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर देखी.

उन की यह तकनीक सफल रही और एक फुटेज में उन्हें डेनियल एक युवक के साथ जाती दिखाई दे गई. उस युवक को वह पहचानते थे. उस का नाम विकट भगत था और वह गोवा का शातिर अपराधी था. उस के जिला बदर का मामला जिलाधिकारी के पास विचाराधीन था.

विकट भगत एक शातिर अपराधी था, इसलिए पुलिस को उस तक पहुंचने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. उसे उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह मुंबई जाने की तैयारी कर रहा था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों ने जब उस से विस्तार से पूछताछ की तो डेनियल की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

गोवा का समुद्री किनारा विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है. इस की एक वजह यह भी है कि वहां कोकेन, चरस और एलएसडी जैसी नशे की चीजें आसानी से मिल जाती हैं. शाम होते ही यहां रेव पार्टियां शुरू हो जाती हैं, जो गोवा के वातावरण में रंगीनियां और मदहोशियां घोलती हैं.

इस बात का फायदा यहां के अपराधी प्रवृत्ति के लोग खूब उठाते हैं. अपराधी प्रवृत्ति के लोग विदेशियों की कमजोरी पकड़ कर उन्हें उन के पसंद की चीज उपलब्ध करा कर उन से दोस्ती गांठ लेते हैं. इस के बाद मौका मिलते ही इस का फायदा उठाने से नहीं चूकते. इस में सब से ज्यादा फंसती हैं विदेशी महिलाएं. वे ऐसे लोगों के झांसे में जल्दी आ जाती हैं.

जाल में फंसते ही ये शातिर लोग उन की कमजोरी का पूरा फायदा उठाते हैं. कभीकभी ऐसी महिलाओं को जान भी गंवानी पड़ती है. डेनियल का भी ऐसा ही मामला था. इस के पहले भी इंग्लैंड की रहने वाली 14 साल की स्कारलेट की हत्या हो चुकी थी.

डेनियल का हत्यारा 23 वर्षीय विकट भगत भी ऐसा ही शातिर अपराधी था. वह गोवा की पणजी तहसील के थाना काणकोण का रहने वाला था. स्वस्थ और सुंदर विकट के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिस की वजह से वह ज्यादा पढ़लिख नहीं सका. पिता के पास थोड़ी जमीन थी, उसी पर खेती कर के वह किसी तरह परिवार को पाल रहे थे. जिम्मेदारियों को निभाने के चक्कर में वह बेटे पर ज्यादा ध्यान नहीं दे सके, जिस की वजह से वह आवारा ही नहीं, अपराधी भी बन गया.

अभावग्रस्त और आवारा दोस्तों के साथ रहने की वजह से 13 साल की उम्र में ही विकट अपराध की राह पर चल पड़ा था. अपने कुछ आवारा दोस्तों के साथ वह पूरा दिन गोवा और काणकोण के समुद्री किनारों पर घूमता रहता और विदेशी पर्यटकों की पसंद की चीजें यानी चरस, गांजा, कोकेन, एलएसडी जैसे मादक पदार्थ उपलब्ध कराता.

ऐसे में ही मौका मिलने पर कभीकभी विकट विदेशी पर्यटकों का सामान भी उड़ा देता. उस सामान को बेच कर वह दोस्तों के साथ मौजमजा करता. जैसेजैसे उस की उम्र बढ़ती गई, वैसेवैसे वह शातिर होता गया. वह पढ़ालिखा भले कम था, लेकिन गोवा के माहौल में रहने की वजह से अंगरेजी अच्छी बोल लेता था.

18 साल का होतेहोते विकट शातिर अपराधी बन गया था. अब वह बड़ी आसानी से गोवा आने वाले विदेशी पर्यटकों के बीच अपनी पैठ बना कर अपने वाकचातुर्य से उन का विश्वास जीत लेता था. इस के बाद मौका मिलते ही वह उन के साथ विश्वासघात करने से नहीं चूकता था.

मार्च, 2014 में पहली बार काणकोण पुलिस ने विकट भगत को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह किसी विदेशी पर्यटक के सामान पर हाथ साफ कर रहा था. पूछताछ में उस ने विदेशी पर्यटकों के साथ किए गए बीसों अपराध स्वीकार किए थे. लेकिन ठोस सबूत न होने की वजह से वह अदालत से जल्दी ही बरी हो गया था.

28 वर्षीया डेनियल मेकलागालिन और विकट भगत की मुलाकात नवंबर, 2015 में गोवा में हुई थी. उस समय डेनियल अपने कुछ दोस्तों के साथ गोवा घूमने आई थी. तब गाइड बन कर विकट ने उसे गोवा ही नहीं घुमाया था, बल्कि उस की हर तरह से मदद भी की थी. यही वजह थी कि डेनियल की विकट से गहरी दोस्ती हो गई थी.

जब तक डेनियल गोवा में रही, विकट उस की सेवा में लगा रहा. अपने सेवाभाव से उस ने डेनियल को इस तरह प्रभावित किया कि अपने देश लौट कर भी वह उसे भुला नहीं सकी. खूबसूरत डेनियल मैकलागलिन आयरलैंड की रहने वाली थी. वहां वह एक बार में काम करती थी. जितनी वह तन की गोरी थी, उतनी ही वह मन की भी सुंदर थी.

खूबसूरत डेनियल को गरीबों के प्रति काफी लगाव था. उस से गरीबों का दुख देखा नहीं जाता था. यही वजह थी कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों में दान करती थी. यह बात वहां के अखबारों से सामने आई है.

भारत घूम कर डेनियल अपने देश लौट गई, लेकिन उस का दिल गोवा में ही रह गया था. अपने देश पहुंच कर भी वह गोवा के मनोहारी दृश्यों और समुद्री किनारों को नहीं भूल पाई थी. इस के अलावा विकट भी उस का गहरा दोस्त बन गया था. दोनों फेसबुक और वाट्सऐप पर घंटों चैटिंग करते थे.

3 फरवरी, 2017 को डेनियल एक बार फिर टूरिस्ट वीजा पर अपने दोस्तों के साथ गोवा आई. गोवा आने की सूचना उस ने विकट को पहले ही दे दी थी, इसलिए उस के गोवा पहुंचते ही विकट उस से मिलने पहुंच गया. उस के आने से विकट काफी खुश था.

इस के बाद दोनों गोवा की कई रंगीन रेव पार्टियों में शामिल हुए. डेनियल विकट के साथ घंटों घूमतीफिरती और बातें करती. इस का विकट ने कुछ अलग ही अर्थ निकाला. उसे लगा कि डेनियल उसे प्यार करने लगी है. उस का सोचना था कि विदेशी औरतें दिलफेंक और खुले विचारों की होती हैं. वे सैक्स में किसी तरह का परहेज नहीं करतीं. उस ने डेनियल को भी इसी तरह की समझा.

जबकि डेनियल ऐसी नहीं थी. फिर भी वह डेनियल के पीछे पड़ गया. वह डेनियल को सैक्स के लिए राजी कर पाता, उस के पहले ही होली का त्यौहार आ गया. डेनियल ने भी दोस्तों के साथ होली खेली. उस ने थोड़ी भांग भी खा ली थी. होली खेल कर देह पर लगा रंग समुद्र के पानी में साफ कर रही थी, तभी उसे विकट भगत अपने 4-5 दोस्तों के साथ आता दिखाई दे गया. विकट ने भी डेनियल को देख लिया था. उस समय डेनियल ऐसे कपड़ों में थी कि विकट की नजर उस की देह पर चिपक कर रह गई.

डेनियल को उस स्थिति में देख कर विकट की हवस जाग उठी. मन में तूफान उठा तो वह दोस्तों को भेज कर खुद डेनियल के पास पहुंच गया. उसे देख कर डेनियल पानी से बाहर आ गई. लेकिन उस के बालों से अभी भी पानी टपक रहा था, साथ ही उस के कपड़े भी भीग कर शरीर से चिपके थे, जो विकट के मन में दबी वासना को भड़का रहे थे.

पानी से बाहर आने के बाद डेनियल विकट से बातें करते हुए समुद्र के किनारे धूप में टहलती रही. विकट के मन में क्या चल रहा है, डेनियल को इस बात का आभास नहीं हो सका. उस के कपड़े सूख गए तो वह विकट के साथ जा कर एक रेस्टोरेंट में बैठ गई. खाना खाते हुए वह विकट से बातें करती रही. बातें करते हुए विकट ने डेनियल को एक नई जगह दिखाने को कहा तो वह उस के साथ चलने को राजी हो गई.

इस के बाद वह डेनियल को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर कडेंला के जंगल की ओर चल पड़ा. जंगल में सुनसान जगह पर मोटरसाइकिल रोक कर उस ने डेनियल से शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की तो वह राजी नहीं हुई. यही नहीं, उस ने विकट को आड़े हाथों लेते हुए खूब खरीखोटी भी सुनाई. उस का कहना था कि  वह उस का दोस्त है, इसलिए उसे दोस्त के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए.

लेकिन वासना की आग में अंधे विकट भगत पर डेनियल की बातों का कोई असर नहीं हुआ. वह उस के साथ जबरदस्ती करने लगा. डेनियल ने उस का जम कर विरोध किया. अपने मकसद में कामयाब होते न देख विकट को गुस्सा आ गया. वह डेनियल के साथ मारपीट करने लगा. डेनियल भी उस से भिड़ गई, जिस से विकट को भी चोटें आईं.

आसानी से काबू में आते न देख विकट ने डेनियल का गला पकड़ कर दबा दिया. डेनियल बेहोश कर गिर पड़ी तो विकट ने उस के सारे कपड़े उतार कर अपनी वासना की आग ठंडी की.

डेनियल के साथ जी भर कर मनमानी करने के बाद उसे लगा कि होश में आने के बाद यह उसे पकड़ा सकती है तो उस ने उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस की पहचान न हो सके, उस ने साथ लाई बीयर की बोतल को तोड़ कर उस का चेहरा बिगाड़ दिया. इस के बाद उस का सारा सामान ले कर वापस आ गया. पुलिस ने हत्या के इस मामले को मात्र 36 घंटे में सुलझा लिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे गोवा के मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. आगे की जांच इंसपेक्टर फिलोमेनो कोस्ता कर रहे थे.

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का कारण कहीं सेक्स असंतुष्टि तो नहीं

कुछ अरसा पहले आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में धारा 497 को रद्द कर विवाहेतर संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया. उस समय के सीजेआई दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह से बाहर बनाया गया संबंध एक व्यक्तिगत मुद्दा हो सकता है. यह तलाक का आधार तो बन सकता है, परंतु यह अपराध नहीं है.

देश की शीर्ष अदालत के इस फैसले से बहस छिड़ गई है. समाज में बढ़ रहा व्यभिचार समाज के तानेबाने को तोड़ने का कुत्सित प्रयास तो कर रहा है, लेकिन प्रश्न यह भी उठा रहा है कि आखिर बढ़ते व्यभिचार और विवाहेतर संबंध का कारण क्या है?

मानव सभ्यता के विकास के साथ समाज ने शारीरिक संतुष्टि और सेक्स संबंधों की मर्यादा के लिए विवाह नामक संस्था को सामाजिक मंजूरी दी होगी. विवाह के बाद पति और पत्नी के बीच के सेक्स संबंध शुरू में तो ठीक रहते हैं, परंतु समय के साथ सेक्स के प्रति अरुचि व पार्टनर की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान न दिया जाना कलह के कारण बनते हैं.

आमतौर पर सुखद सेक्स उसी को माना जाता है, जिस में दोनों पार्टनर और्गेज्म पा सकें. यदि पतिपत्नी सेक्स संबंध में एकदूसरे को संतुष्ट कर पाने में सफल होते हैं तो उन के दांपत्य संबंधों की कैमिस्ट्री भी अच्छी रहती है.

राकेश और प्रतिभा की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं. उन की 2 साल की एक बेटी भी है. परंतु बेटी के जन्म के साथ ही प्रतिभा का ध्यान अपनी बेटी में ही रम गया. पति की छोटीछोटी जरूरतों का ध्यान रखने वाली प्रतिभा अब पति के प्रति बेपरवाह सी हो गई है.

कभी रोमांटिक मूड होने पर राकेश जब सेक्स करने की पहल करता है, तो प्रतिभा उसे यह कह कर झिड़क देती है कि तुम्हें तो बस एक ही चीज से मतलब है. इस से राकेश कुंठित हो कर चिड़चिड़ाने लगता. मन मसोस कर अपनी कामेच्छा दबा लेता. धीरेधीरे सेक्स करने की कुंठा से उस के मन में कहीं और शारीरिक संबंध बनाने के खयाल आने लगे. प्रतिभा जैसी अनेक महिलाओं का यही व्यवहार राकेश जैसे पुरुषों को दूसरी महिलाओं के साथ संबंध बनाने को प्रोत्साहित करता है.

जिस तरह स्वादिष्ठ भोजन करने के बाद कुछ और खाने की इच्छा नहीं होती, ठीक उसी तरह सेक्स क्रिया से संतुष्ट पतिपत्नी अन्यत्र सेक्स के लिए नहीं भटकते. दांपत्य जीवन में सुख प्राप्त करने के लिए पतिपत्नी को अपनी सेक्स जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए. सेक्स की पहल आम तौर पर पति द्वारा की जाती है. पत्नी को भी चाहिए कि वह सेक्स की पहल करे. पतिपत्नी में से किसी के भी द्वारा की गई पहल का स्वागत कर, सेक्स संबंध स्थापित कर, एकदूसरे की संतुष्टि का खयाल रख कर विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

बच्चों के जन्म के बाद भी सेक्स के प्रति उदासीन न हों. सेक्स दांपत्य जीवन का मजबूत आधार है. शारीरिक संबंध जितने सुखद होंगे भावनात्मक प्यार उतना ही मधुर होगा. घर में पत्नी के सेक्स के प्रति रूखे व्यवहार के चलते पति अन्यत्र सुख की तलाश में संबंध बना लेता है. कामकाजी पति द्वारा पत्नी को पर्याप्त समय और यौन संतुष्टि न देने से वह भी अन्य पुरुष से शारीरिक संबंध बना लेती है, जिस की परिणति दांपत्य जीवन में तनाव और बिखराव के रूप में देखने को मिलती है.

स्वाभाविक होता है बदलाव

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि संबंधों में यह बदलाव स्वाभाविक है. शादी के शुरू के सालों में पतिपत्नी एकदूसरे के प्रति जो खिंचाव महसूस करते हैं, वह समय के साथ खत्म होता जाता है और तब शुरू होती है रिश्तों में उकताहट.

आर्थिक, पारिवारिक और बच्चों की परेशानियां इस उकताहट को बढ़ावा देती हैं. फिर इस उकताहट को दूर करने के लिए पतिपत्नी बाहर कहीं सुकून तलाशते हैं, जहां उन्हें फिर से अपने वैवाहिक जीवन के शुरू के वर्षों का रोमांच महसूस हो. यहीं से विवाहेतर संबंधों की शुरुआत होती है.

एक रिसर्च से पता चला है कि अलगअलग लोगों में इन संबंधों के अलगअलग कारण हैं. किसी से भावनात्मक जुड़ाव, सेक्स लाइफ से असंतुष्टि, सेक्स से जुड़े कुछ नए अनुभव लेने की लालसा, वक्त के साथ आपसी संबंधों में प्रेम की कमी, अपने पार्टनर की किसी आदत से तंग होना, एकदूसरे को जलाने के लिए ऐसा करना विवाहेतर संबंधों के कारण होते हैं.

महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे की सोच

भारतीय संस्कृति में महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे का व्यवहार आज भी देखने को मिलता है. सामाजिक परंपराओं की गहराई में स्त्री द्वेष छिपा है. ये परंपराएं पीढि़यों से महिलाओं को गुलाम से अधिक कुछ नहीं मानती हैं. उन्हें इस तरह ढाला जाता है कि वे अपने शरीर के आकार से ले कर निजी साजसज्जा तक के लिए अनुमति लें.

जो महिला अपने ढंग से जीने के लिए परंपराओं और वर्जनाओं को तोड़ने का प्रयास करती है उस पर समाज चरित्रहीन होने का कलंक लगा देता है. पति को घर में व्यवस्था, पत्नी का समय व बढि़या तृप्तिदायक खाना, सुखचैन का वातावरण और देह संतुष्टि चाहिए. परंतु पति खुद उस की सुखसुविधाओं और शारीरिक जरूरतों का उतना खयाल नहीं रखता. पत्नी से यह चाह जरूर की जाती है कि वह पति की नैसर्गिक इच्छाएं पूरी करती रहे.

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार विवाहेतर संबंधों को रोकने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. यदि आपसी रिश्ते की गरमाहट कम हो गई है तो रिश्ते को पुराने कपड़े की तरह निकाल कर नए कपड़ों की तरह नए रिश्ते बनाना समस्या का हल नहीं है. अपने पार्टनर को समझाने के कई तरीके हैं. उस से बातचीत कर समस्या को सुलझाया जा सकता है. सेक्स को ले कर की गई बातचीत, सेक्स के नएनए तरीके प्रयोग में ला कर एकदूसरे की शारीरिक संतुष्टि से विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

फोरप्ले से और्गेज्म तक का सफर

एक नामी फैशन मैगजीन के सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं के और्गेज्म यानी चरमसुख को ले कर कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. इस औनलाइन शोध में 18 से 40 साल की आयु वाली 2300 महिलाओं से प्रश्न किए गए, जिन में 67% महिलाओं ने माना कि वे फेक और्गेज्म यानी और्गेज्म होने का नाटक करती हैं. 72% महिलाओं ने माना कि उन का साथी स्खलित होने के बाद उन के और्गेज्म पर ध्यान नहीं देता है. सर्वेक्षण के यह आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में पति और पत्नी अकसर सेक्स संबंधों में और्गेज्म तक नहीं पहुंच पाते हैं.

सेक्स को केवल रात्रिकालीन क्रिया मान कर निबटाने से सहसंतुष्टि नहीं मिलती. जब दोनों पार्टनर को और्गेज्म का सुख मिलेगा तभी सहसंतुष्टि प्राप्त होगी. पत्नी और पति का एकसाथ स्खलित होना और्गेज्म कहलाता है. सुखद सेक्स संबंधों की सफलता में और्गेज्म की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है.

सेक्स को शारीरिक तैयारी के साथसाथ मानसिक तैयारी के साथ भी किया जाना चाहिए. यह पतिपत्नी की आपस की जुगलबंदी से ही मिलता है. सेक्स करने से पहले की गई सेक्स से संबंधित छेड़छाड़ भूमिका बनाने में सहायक होती है. कमरे का वातावरण, बिस्तर की जमावट, अंतर्वस्त्र जैसी छोटीछोटी बातें सेक्स के लिए उद्दीपक का कार्य करती हैं.

सेक्स के दौरान घरपरिवार की समस्याएं बीच में नहीं आनी चाहिए. सेक्स संबंध के दौरान छोटीछोटी बातों को ले कर की जाने वाली शिकायतें संबंध को बोझिल बनातीं और सेक्स के प्रति अरुचि भी उत्पन्न करती हैं. सेक्स के लिए नए स्थान और नए तरीकों का प्रयोग कर संबंध को प्रगाढ़ बनाया जा सकता है. सेक्स की सहसंतुष्टि यकीनन दांपत्य जीवन को सफल बनाने के साथसाथ विवाहेतर संबंध बनाने से रोकने में भी मददगार साबित हो सकती है.

मैं अपने मकान मालिक की बेटी से शादी करना चाहता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 20 साल का नौजवान हूं. मेरे मकान मालिक की एक बेटी है. मैं उसे बहुत पसंद करता हूं और उस से शादी करना चाहता हूं. पर वह लड़की कहती है कि पहले उस के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाऊं, अगर उसे अच्छा लगा तो ही शादी के बारे में सोचेगी. क्या उस की यह डिमांड सही है? मैं क्या करूं?

जवाब

आसान रास्ता तो यह है कि आप उस लड़की की डिमांड पूरी कर दें, जो आप की भी इच्छा होगी. अगर वाकई आप उस से प्यार करते हैं, तो उसे सम झाएं कि जिस्मानी संबंध शादी के बाद बनाना ठीक रहता है और शादी के माने सिर्फ सैक्स नहीं होता, बल्कि यह बहुत गंभीर और जिम्मेदारी वाला रिश्ता है, जिस में 2 लोग जिंदगी का नया सफर शुरू करते हैं. मुमकिन है कि वह आप का इम्तिहान ले रही हो.

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योनि की संवेदनशीलता पर साल 1984 में किए गये अध्ययन में कोलंबिया के शोधकर्ताओं की एक टीम ने 16 वेश्याओं और 32 आम महिलाओं पर टेस्ट किया. हैली, जो एक चिकित्सक और सेक्सोलॉजी की प्रोफेसर थी, उन्होंने यौनकर्मियों को सेक्स के साथ एक विशेष प्रकार का फ्रिक्शन दिया और मारी लाडी, जो एक मनोचिकित्सक थीं उन्होंने आम महिलाओं को सेक्स  के दौरान इस विशेष फ्रिक्शन से दूर रखा. परिणाम यह रहा कि आठ आम महिलाओं कि तुलना में तीन-चौथाई से अधिक वेश्याओं को इस फ्रिक्शन कि वजह से ऑरगम हुआ.

पुरुषों की गंध

अध्ययन के मुताबिक, महिलाओं को डियोडोरेंट लगाने वाले पुरुष आकर्षक नजर आते हैं. ऐसे में यह शोध आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ स्टरलिंग के मनोवैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए 130 महिलाओं और पुरुषों को फोटोग्राफ्स दिखाई और उनसे इन फोटोज के आधार पर मैस्क्यलिनटी और फेमनिनिटी का अंदाजा लगाने को कहा. उसके बाद 239 पुरुषों और महिलाओं को अपोजिट सेक्स की गंध के आधार पर उन्हें जज करने को कहा गया. विशेषज्ञों ने पाया कि महिलाएं, पुरुषों की गंध के प्रति ज्यादा आकर्षित होती हैं. वहीं पुरुषों को भी सुगंध लगाने वाली महिलाएं ज्यादा भाती हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

किडनी को हैल्दी बनाने के लिए अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें

किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह बॉडी से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है. साथ ही यह खून को भी साफ करती है. अगर किडनी खराब हो जाती है, तो इसकी वजह से आपके शरीर में कई गंभीर बीमारियां घर बना लेती हैं. किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आप अपनी डाइट में कुछ फूड्स शामिल कर सकते हैं. इन चीजों को अपनी डेली डाइट का हिस्सा बनाएं, जिससे आप किडनी की समस्या से बच सकते हैं.

  1. ब्लूबेरीज

ब्लूबेरीज खाने के कई फायदे हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट और एंथोसायनिन से भरपूर होती हैं.जो हृदय रोग, मधुमेह और अन्य बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं. इसमें सोडियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम भी कम मात्रा में मौजूद होता है, इसलिए ब्लूबेरीज  किडनी को स्वस्थ रखने के लिए फायदेमंद मानी जाती है.

2. लाल अंगूर

रेड अंगूर फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होते हैं, जो सूजन को कम कर सकते हैं, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बच सकते हैं. लाल अंगूर खाने से आप किडनी की समस्याओं से भी बच सकते हैं.

3. जैतून का तेल

खाना पकाने के लिए जैतून का तेल हेल्दी ऑप्शन है. इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट होती है. जैतून का तेल अन्य तेलों की तुलना में काफी हेल्दी माना जाता है. इसमें कोई फॉस्फोरस या प्रोटीन नहीं होता है. यह आपकी किडनी को सुरक्षित रखता है.

4. पत्तागोभी

पत्तागोभी विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट का समृद्ध स्रोत है. यह सब्जी किडनी और लिवर की बीमारियों से बचाती है. जिन लोगों को मोटापा की समस्या है, वो भी अपनी डाइट में पत्तागोभी शामिल कर सकते हैं.

5. अनार

अनार में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. अगर आप रोजाना अनार के दाने खाते हैं, तो इससे आपकी किडनी हेल्दी रहती हैं.

6. खट्टे फल

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आप अपनी डेली डाइट में नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल शामिल कर सकते हैं.

कमाऊ पत्नी अहमियत कितनी

‘‘हा  उस वाइफ से कहीं ज्यादा, लेकिन मर्दों से कम… इसे आप कुछ भी समझ सकते हैं. मेरी अहमियत, हैसियत, आत्मविश्वास या फिर स्वाभिमान…’’

बैंक में काम करने वाली 30 साल की नेहा की शादी को अभी 5 साल ही हुए हैं. इस दौरान उस ने जो महसूस किया, उसे दोटूक कह तो दिया, लेकिन बात करने के कुछ घंटों बाद फिर फोन कर के बोली, ‘‘अच्छा होगा, अगर आप यही सवाल मेरे पति से भी करें कि उन की नजर में मैं क्या हूं?’’ फिर खिलखिला कर हंसते हुए वह बोली, ‘‘अच्छा, मैं ही बता देती हूं कि उन की नजर में मैं उन के आत्मविश्वास की

एक बहुत बड़ी वजह हूं. उतनी ही जितनी मेरे आत्मविश्वास की वे वजह हैं.’’

हाउस वाइफ बनाम वर्किंग वाइफ पर आएदिन बहस, चर्चाएं और रिसर्च भी होती रही हैं, जिन में कमाऊ पत्नी की हालत हमेशा बेहतर बताई जाती है, जो कि एक हद तक है भी, लेकिन नेहा जैसी स्मार्ट औरतों के लिए दुनिया और समाज से ज्यादा पति का नजरिया माने रखता है.

बकौल नेहा, ‘अगर पति पत्नी को इज्जत देता है, तो दूसरे भी देंगे. और एक अच्छा समझदार पति ऐसा करता भी है.’

नेहा जैसी कई औरतें अगर आज भी समाज में अपनी जगह और हैसियत की रैंकिंग के लिए पति की मुहताज हैं, तो क्या इस की एकलौती वजह उन का कमाऊ होना है? यह बहुत टेढ़ा सा सवाल है, जिस का सीधा जवाब एक और बैंक में काम करने वाली सुप्रिया ही यह कहते हुए देती हैं, ‘‘इस सच को स्वीकारने में संकोच नहीं होना चाहिए.  मेरी मम्मी भी सरकारी विभाग में क्लर्क थीं, जिन्हें कई चीजों को अकसर बेमन से ढोना पड़ता था.

‘‘मसलन, धार्मिक और सामाजिक परंपराएं और रीतिरिवाज. लेकिन इस का यह मतलब नहीं कि वे इस का जिम्मेदार अकेले पापा को मानती थीं. वे अगर दादी के जिंदा रहने तक साड़ी बांध कर औफिस गईं, तो इसे उन्होंने आसानी से स्वीकार लिया था.

‘‘यह 80 के दशक की पत्नी की खूबी थी कि वह कमाऊ होने का कोई सिला पति से नहीं चाहती थी. उस पर यह आरोप भी नहीं लगाया जा सकता कि वह आधुनिक नहीं थी.’’

तो क्या अब जमाना और हालात इतने बदल गए हैं कि कमाऊ पत्नी को बहुत सारे या इतने सारे हक मिल गए हैं कि वह अपने मुताबिक जी सके और तमाम वे फैसले ले सके, जिन में पति की सहमति जरूरी न होती हो?

इस सवाल पर बैंगलुरु के सब से बड़े अस्पताल में बतौर काउंसलर काम कर रही अपूर्वा कहती हैं, ‘‘इस सवाल को उलट दीजिए. हकीकत यह है कि आज के पति भी बिना पत्नी की राय के कोई अहम फैसला नहीं लेते. इसलिए नहीं कि उस में पत्नी की भी आर्थिक भागीदारी होती है, बल्कि इसलिए भी कि एक कामकाजी पत्नी को पढ़ीलिखी होने के नाते यह जानकारी मिल ही जाती है कि कहां पैसा इंवैस्ट करने से बेहतर रिटर्न मिलेगा और बच्चा कब प्लान करना ठीक रहेगा.’’

यहां भी है धर्म का दखल

अपूर्वा के मुताबिक, यह सच है कि समाज अभी भी पितृ सत्तात्मक है, लेकिन कमाऊ पत्नियां इसे दरकाने में कामयाब हो रही हैं. हैरत की बात यह है कि उन में से ज्यादातर को नहीं मालूम कि वे ऐसा क्यों कर रही हैं.

अपनी इस बात के समर्थन में अपूर्वा ने सोशल मीडिया पर आएदिन वायरल होती कुछ पोस्ट भी शेयर की कि कैसे परंपरावादी और कट्टरवादी लोग पतिपत्नी के बीच खाई खोदने का काम कर रहे हैं. ये वे लोग हैं, जो चाहते हैं कि कमाऊ पत्नी को कैसे कमतर साबित कर के उस में हीनता भरें और फिर उसे दबाएं.

ये पोस्ट कितनी शातिराना होती हैं, इस का अंदाजा हर कोई नहीं लगा सकता. ऐसी ही एक पोस्ट में अमेरिका के एक तथाकथित सर्वे का हवाला देते हुए आखिर में कहा गया कि हमारे आधुनिकतावादी भी अमेरिका की तरह दुकानों से या औनलाइन भोजन खरीदने की वकालत कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं. इस वजह से भारत में भी परिवार धीरेधीरे अमेरिकी परिवारों की तरह बरबाद हो रहे हैं.

इसी पोस्ट में अमेरिकी औरतों के अकेलेपन और तलाक वगैरह का आंकड़ों समेत इतना वीभत्स चित्रण किया गया है कि एक बार के लिए कोई भी कमाऊ पत्नी डर सकती है कि क्या फायदा ऐसे पैसे और नौकरी का, जिस से पति, परिवार और बच्चों को सुख न मिले.

ऐसी ही एक पोस्ट में धौंस सी दी गई है कि कम पढ़ीलिखी औरत ही घर बसाने की कला जानती है. पढ़ीलिखी को तो अकसर कोर्टकचहरी के चक्कर काटते देखा है मैं ने.

इस पोस्ट में औरत को सिर पर घूंघट डाले हुए दिखाया गया है, जिस से यह लगे कि जींसटौप पहनने वाली औरतें तलाक ज्यादा लेती और देती हैं. जाहिर है कि जो औरत अपने हक के बारे में जानतीसमझती है, उस का शोषण करना आसान नहीं होता.

ऐसी पोस्टों पर भोपाल के एक सीनियर प्रोफैसर राजेश पटेरिया कहते हैं, ‘‘ऐसी साजिशों से पतिपत्नी दोनों को सावधान रहना होगा, खासतौर से पति को, क्योंकि इस तरह की बातें मर्दों के अहम को सदियों से भड़काती रही हैं, जबकि हर दौर में औरत कमाऊ रही है, लेकिन अब चूंकि उस में पढ़ाईलिखाई के चलते जागरूकता भी आ गई है, तो परिवारों और समाज को तोड़ने का कारोबार करने वाले लोग नए तरीके से इसे अंजाम दे रहे हैं.’’

जरूरत है कमाऊ पत्नी

हालांकि मर्द चाह कर भी ऐसे झांसों में नहीं आ रहे, क्योंकि बढ़ती महंगाई व विलासिता की हद तक सुविधाजनक होती जा रही दुनिया में पतिपत्नी दोनों का कमाऊ होना जरूरी है. अखबारों में छप रहे वैवाहिक विज्ञापनों में अब शायद ही कोई घरेलू और गृह कार्य में दक्ष पत्नी चाहता है.

बात अकेले कमाई की नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक माहौल और एकल होते परिवारों के बढ़ते खर्चों की भी है, जिन्हें किसी एक की कमाई से पूरा नहीं किया जा सकता और अगर कर भी लिया जाए तो बहुत से समझौते उसे करने पड़ते हैं, फिर महंगा फ्लैट, बड़ी कार और बच्चे को महंगे स्कूल में पढ़ाने जैसे ढेरों सपने सपने ही रह जाते हैं.

आर्थिक लिहाज के अलावा निजी संतुष्टि भी कम रोल नहीं निभाती. भोपाल की ही एक सरकारी कर्मचारी 46 साल की सविता कहती हैं, ‘‘कमाऊ पत्नियों में ज्यादा आत्मविश्वास और बेफिक्री होती है. वे घर और दफ्तर की दोहरी लड़ाई कामयाबी से लड़ लेती हैं. उन का भावनात्मक लगाव पति व बच्चों से कम नहीं होता.’’

अब यह मिथक भी धीरेधीरे टूट रहा है कि कमाऊ पत्नी घरपरिवार, बच्चों और पति को मुनासिब वक्त नहीं दे पाती. अब इन सभी को ज्यादा वक्त की जरूरत ही नहीं रही, बल्कि पैसों और सहूलियतों की जरूरत ज्यादा है. डबल इनकम इसे आसानी से पूरा करती है और रिटायरमैंट के बाद की जिंदगी भी सुकून से गुजरती है.

सविता कहती हैं, ‘‘आप देखिए कि देशभर के पर्यटन स्थलों पर बूढ़ों की तादाद नौजवानों से कहीं ज्यादा देखने में आती है. धार्मिक शहर तो उन्हीं से भरे पड़े रहते हैं.’’

यह पीढ़ी तो बस…

जान कर हैरत नहीं होती कि स्कूली पीढ़ी भी कमाऊ पत्नी की जरूरत और अहमियत पर संजीदा है. इस साल 12वीं जमात पास कर कालेज में दाखिला ले चुके नक्षत्र की मानें, तो उन की उम्र का कोई भी लड़का हाउस वाइफ नहीं चाहता. उन की नजर में वह एक बेकार और फालतू साथी साबित होगी, जो बातबात पर फसाद खड़े करेगी, क्योंकि खाली दिमाग वाकई में शैतान का घर होता है और हम एक सुकून भरी जिंदगी की कल्पना करते हैं, जिस में हर जरूरी चीज हो.

इस का मतलब है कि नई जवान होती पीढ़ी के मन में कमाऊ पत्नी को ले कर कोई शक नहीं है, जिस ने आने वाले वक्त की नजाकत को समय रहते भांप लिया है.

लड़कियां भी स्वीकार कर चुकी हैं कि वे अपनी दादीनानी की तरह चूल्हेचौके के झंझट में पड़ कर जिंदगी खराब नहीं करेंगी. उन्हें अगर मौका और तालीम मिली होती, तो वे भी शायद नौकरी ही करतीं. यूपीएससी की तैयारी कर रही 20 साल की अदिति की मानें तो,

‘‘मैं कोई रिस्क उठाना पसंद नहीं करूंगी. वक्त और हालात कैसे भी रहें, काम में पैसा ही आएगा और वैसे भी लड़कियों का अपना पैरों पर खड़े होना अब हर लिहाज से बहुत जरूरी हो चला है.

‘‘इसे रिश्तों से उठता भरोसा नहीं कहा जा सकता, उलटे अब पैसा नजदीकी रिश्तों को और मजबूती दे रहा है, क्योंकि मजबूती देने वाले रिश्तेनाते खुद मजबूती के मुहताज हो चले हैं.

‘‘अगर आप अस्पताल में किसी अपने वाले को देखने गए हैं और आप की जेब में जरूरत पड़ने पर उस की मदद के लिए पैसा नहीं है, तो आप के वहां होने या न होने के कोई माने नहीं. पत्नी कमाऊ हो, तो पति आसानी से किसी अपने की मदद कर सकता है.’’

यह सब अहम कितना

अकसर कमाऊ पत्नियों पर यह आरोप लगता रहता है कि वे अहंकारी होती हैं और बातबात में अपने फैसले थोपती हैं. अदिति इसे गलत बताते हुए कहती है, ‘‘दरअसल, कमाऊ पत्नियों से लोग ज्यादा उम्मीद इन शर्तों के साथ पाल लेते हैं कि वे खामोशी से अपनी कमाई का इस्तेमाल होते देखती रहेंगी, लेकिन ऐसा अब है नहीं. शादी के 3-4 साल बाद जब पतिपत्नी में ट्यूनिंग हो जाती है, तब यह समस्या नहीं रह जाती. शादी के तुरंत बाद कुछ दिनों तक वे एकदूसरे को ले कर आशंकित हो सकते हैं, जो बेहद स्वाभाविक बात है.’’

थोड़े से बचे संयुक्त परिवारों में जरूर सभी कमाऊ सदस्य घर के मुखिया के पास तयशुदा पैसा जमा करते हैं, जिस से वह घरखर्च चलाता है. ऐसे ही एक परिवार की बहू अर्चना जो शिक्षिका हैं, कहती हैं, ‘‘यह व्यवस्था भी बुरी नहीं, क्योंकि बचे पैसों, जो 60 से 70 फीसदी होते हैं, पर पतिपत्नी का हक होता है और इस्तेमाल करने की आजादी भी होती है.

‘‘मैं अपने भतीजे को सोने की चेन दूं, तो पति और ससुराल वालों को कोई एतराज नहीं होता. दिक्कत उन मामलों में हो जाती है, जिन में पति पत्नी की कमाई पर अपना हक जताता है. हालांकि ऐसे पतियों की तादाद कम हो रही है, लेकिन खत्म नहीं हुई है.’’

कुछ दिन पहले दिल्ली में ‘वर्किंग स्त्री’ नाम की जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 70 फीसदी कमाऊ औरतें घरखर्च में सक्रिय योगदान देती हैं. 30 फीसदी औरतें अपनी आधी तनख्वाह घरखर्च में देती हैं.

हालांकि, यह रिपोर्ट एक सामाजिक सच भी उजागर करती है कि भले ही आर्थिक रूप से औरतें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार हैं, लेकिन वित्तीय फैसले वे घर के मर्द सदस्यों की मदद से ही लेती हैं. इस में कोई बुराई नहीं है.

इस से हासिल क्या

पैसा कमाने की औरतों की जिद ने उन्हें घर और समाज में बराबरी का दर्जा तो दिलाया है, पर कुछ फीसदी मामलों में विवाद होते हैं, लेकिन उन्हें ही हवा देने से परिवारतोड़ू गैंग की मंशा पूरी होती है, जिन्हें फर्राटे से कार चलाती लड़कियां संस्कारहीन लगती हैं. क्लब जाती और किटी पार्टी में मशगूल औरतों को वे धर्म से विमुख कहते हैं तो साफ है कि इस से उन का नुकसान हो रहा होता है.

मनपसंद: मेघा ने परिवार के प्रति कौनसा निभाया था फर्ज

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राजनीति के समर में शरद पवार की गुगली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सब से बड़े नेता शरद पवार का राजनीति के मैदान में घातप्रतिघात का दौर चल रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार प्रयास में लगे हुए हैं कि शरद पवार को अपने पक्ष में ले कर देश की राजनीति का मानचित्र ही बदल दें. वहीं दूसरी ओर शरद पवार हैं कि लगातार लाख कोशिशों के बावजूद नरेंद्र मोदी के संजाल में फंसने के बजाय नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक बड़ी लकीर खींचते चले जा रहे हैं, ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में शरद पवार की एक बड़ी भूमिका सामने आने की संभावना दिखाई देने लगी है.

शरद पवार के गृह प्रदेश महाराष्ट्र के साथसाथ देश की सियासत में उठापटक जारी है. इसी उठापटक के बीच खबर आई है कि नैशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार को कैबिनेट मंत्री का पद औफर किया गया है. लेकिन खुद शरद पवार ने इन अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है और जो कहा है, उस से नरेंद्र मोदी के हाथों के तोते उड़ने लगे होंगे.

शरद पवार ने कहा, “मैं नरेंद्र मोदी केबिनेट में आ रहा हूं, इस से वाकिफ नहीं हूं. सीक्रेट मीटिंग की बातें हो रही हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि इस बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. केंद्र सरकार ने मुझे कैबिनेट मंत्री बनने का औफर किया है. इस तरह की बातों में कोई सचाई नहीं है.

“भारत में राजनीतिक माहौल मोदी के पक्ष में नहीं है. केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भाजपा सत्ता में नहीं है. यहां तक कि चंद्रबाबू नायडू भी इंडिया गठबंधन से जुड़ गए हैं. महाराष्ट्र और मध्य

प्रदेश में नरेंद्र मोदी की भाजपा ने सरकारों को अस्थिर किया. दिल्ली, झारखंड, बंगाल और अन्य राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है. देश के लोगों ने यह तय कर लिया है कि उन्हें क्या करना है. इसलिए अब नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि मैं वापस आऊंगा. पवार ने कहा कि भाजपा ने कई राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने का काम किया है.”

सचाई देश को बता दी

देश के महत्वपूर्ण नेताओं में  एक शरद पवार ने बेबाक तरीके से अपनी बात रखी है. शरद पवार ऐसे नेताओं में हैं, जिन की बात देश बड़ी गंभीरता से सुनता है और जो बहुत ही सालदोरिक तथ्य के साथ अपनी बात रखते हैं. सरसावा में जो कुछ कहा है, उसे अगर हम सच मानें, तो नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के रूप में उलटी गिनती शुरू हो गई है.

शरद पवार ने कहा, “मोदी की अगुआई में चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने का काम किया जा रहा है. मणिपुर चीन की सीमा पर है. इस वजह से यह संवेदनशील राज्य है. हमें सचेत रहने की जरूरत है. लेकिन उत्तर भारत में जो हो रहा है, वह चिंताजनक है. पुलिस बलों पर हमला किया गया. दो समुदायों के बीच जहर घोला जा रहा है. नरेंद्र मोदी मणिपुर को ले कर लोकसभा में सिर्फ तीन से चार मिनट ही बोलते हैं.”

इस तरह शरद पवार ने सबकुछ देश को बता दिया है. जो आप सोचतेसमझते हैं और इन बातों में  सचाई भी है. इस तरह उन्होंने एक अलग लाइन खींच दी है. इस सब के बाद विपक्ष के नएनए गठबंधन इंडिया में एक नई ताकत का संचार होना स्वाभाविक है और नरेंद्र मोदी के लिए चिंता का सबब.

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