शादी से पहले बेहद जरूरी हैं ये 8 हेल्थ टैस्ट

कई फिल्मों में शादी के लिए कुंडली मिलान बहुत जरूरी बताया जाता है और कुंडली न मिलने पर पक्का रिश्ता भी टूट जाता है, लेकिन अधिकतर देखा गया है कि कुंडली मिला कर की गई शादियों में भी तलाक की दर बहुत अधिक है, इसलिए अब लोगों की सोच बदलने लगी है और उन्हें लगता है कि शादी के लिए कुंडली से ज्यादा जरूरी है कि दोनों एकदूसरे के लायक हों और शारीरिक रूप से फिट हों ताकि शादी के बाद किसी तरह की कोई परेशानी न आए.

शादी से पहले युवकयुवती को एकदूसरे के बारे में सबकुछ पता हो तो आगे चल कर सिचुएशन हैंडिल करने में काफी आसानी रहती है और दोनों एकदूसरे को उस की कमियों के साथ स्वीकारने की हिम्मत रखते हैं तो ऐसा रिश्ता काफी मजबूत बनता है. इसलिए दूल्हादुलहन शादी से पहले कई तरह के मैडिकल टैस्ट कराने से भी नहीं हिचकिचाते. आइए जानें, ये मैडिकल टैस्ट कौन से हैं और कराने क्यों जरूरी हैं :

1. एचआईवी टैस्ट

यदि युवक या युवती में से किसी एक को भी एचआईवी संक्रमण हो तो दूसरे की जिंदगी पूरी तरह से बरबाद हो जाती है. इसलिए शादी से पहले यह टैस्ट करवाना बहुत जरूरी है.  इस में आप की सजगता और समझदारी है.

2. उम्र का परीक्षण

कई बार शादी करने में काफी देर हो जाती है और उम्र अधिक होने के कारण युवतियों में अंडाणु बनने कम हो जाते हैं तथा बच्चे होने में परेशानी आ सकती है. इसलिए यदि बढ़ती उम्र में शादी कर रहे हैं तो टैस्ट जरूर कराएं.

3. प्रजनन क्षमता की जांच जरूरी

जिन कपल्स को शादी के बाद बच्चे पैदा करने में समस्या आती है, उन्हें प्रजनन क्षमता का टैस्ट जरूर कराना चाहिए ताकि पता चल सके कि कमी युवक में है या युवती में. वैसे तो यह टैस्ट शादी से पहले ही होना चाहिए, जिस से पता चल सके कि वे दोनों संतान पैदा करने योग्य हैं भी या नहीं.

4. ओवरी टैस्ट

इस टैस्ट को युवतियां कराती हैं ताकि पता चल सके कि उन्हें मां बनने में कोई मुश्किल तो नहीं है. कई युवतियां इस टैस्ट को कराने में हिचकिचाती हैं कि यदि कोईर् कमी पाई गई तो उन का रिश्ता होना मुश्किल हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है. आज तो मैडिकल साइंस में हर चीज का इलाज है. अच्छा तो यह है कि समय रहते आप को प्रौब्लम के बारे में पता चल जाएगा. यदि टैस्ट सही आया तो आप को वैवाहिक जीवन में कोई तकलीफ नहीं होगी.

5. सीमन टैस्ट

इस टैस्ट में युवकों के वीर्य की जांच होती है कि वह बच्चा पैदा करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है या नहीं और अगर कोई प्रौब्लम है तो उस का इलाज करवा कर पूरी तरह स्वस्थ हुआ जा सकता है. यह टैस्ट इसलिए करवाया जाता है ताकि पहले ही परेशानी के बारे में पता चल जाए और उसी के हिसाब से इलाज करवा कर बंदा शादी के लिए पूरी तरह से परफैक्ट हो जाए.

6. यौन परीक्षण

कुछ बीमारियां संक्रमित होती हैं, जो शारीरिक संपर्क के दौरान बढ़ती हैं. इन बीमारियों को सैक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां कहा जाता है और ये संभोग के बाद पार्टनर को भी बड़ी आसानी से लग जाती हैं. इसलिए ऐसी किसी भी बीमारी से बचने के लिए शादी से पहले ही यह जांच करवा लें ताकि भविष्य में किसी गंभीर बीमारी से पार्टनर और आप दोनों ही बच सकें.

7. ब्लड टैस्ट

ब्लड टैस्ट कराने से पता चल जाता है कि कहीं ब्लड में कोई ऐसी प्रौब्लम तो नहीं है, जिस का सीधा असर होने वाले बच्चे पर पड़ेगा. हीमोफीलिया या थैलेसीमिया ऐसे खतरनाक रोगों में से एक हैं जिन में बच्चा पैदा होते ही मर जाता है. इस में दोनों के ब्लड की जांच कराना आवश्यक है जिस से आर एच फैक्टर की सकारात्मकता व नकारात्मकता का पता चल सके. यह टैस्ट शादी से पहले कराना अतिआवश्यक है.

8. जैनेटिक टैस्ट

इस तरह के टैस्ट को परिवार की मैडिकल हिस्ट्री भी कहा जाता है. इस से जीन के विषय में पता चल जाता है कि आप को जैनेटिक डिजीज है भी या नहीं. इस टैस्ट से आनुवंशिक बीमारियों के बारे में भी पता चल जाता है जो पार्टनर को कभी भी हो सकती हैं.

शराबबंदी को ठेंगा दिखाता नाजायज मतलबी बंधन

प्रदेश में शराबबंदी के बावजूद शराब माफिया, अपराधियों और पुलिस वालों के बीच अनोखा महागठबंधन तैयार हो गया है और वह शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखा रहा है. इस की एक छोटी सी बानगी 11 अक्तूबर, 2017 को देखने को मिली, जब अरवल पुलिस ने शराब का एक कंसाइनमैंट पकड़ा. मामले की जांच के लिए केस को आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू को सौंप दिया गया. ईओयू ने अपना काम शुरू किया. उसे सूचना मिली थी कि 12 अक्तूबर को उसी कंसाइनमैंट की डिलीवरी सीतामढ़ी में होने वाली है. पुलिस ने छापा मारने की तैयारी की. सीतामढ़ी पुलिस को अलर्ट रहने को कहा गया.

इसी बीच रून्नीसैदपुर थाने के दारोगा अवनी भूषण सिंह ने शराब माफिया अजीत राय के मोबाइल फोन पर मैसेज भेजा, ‘अभी रेड होगी.’

उस के बाद दारोगा साहब ने फोन कर के अजीत राय को सावधान रहने की हिदायत भी दी.

अजीत राय पर शराबबंदी कानून तोड़ने समेत हत्या, रंगदारी वसूलने समेत कई केस पहले ही दर्ज हैं. तकरीबन आधा दर्जन मामलों में वह चार्जशीट किया जा चुका है.

दारोगा अवनी भूषण सिंह को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह पहले से ही ईओयू के रडार पर है.

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शराब माफिया को छापामारी की सूचना देने के कुछ ही देर बाद साल 2009 बैच के दारोगा अवनी भूषण सिंह समेत शराब माफिया को दबोच लिया गया.

बिहार में यह इस तरह का पहला मामला है जब ईओयू ने शराब माफिया और पुलिस के गिरोह का भंडाफोड़ किया है.

11 अक्तूबर को ही अरवल जिले के कलेर थाने के थानेदार को शराब के एक कंसाइनमैंट की जानकारी मिली. रात के 8 बज कर 35 मिनट पर थानेदार ने पुलिस टीम के साथ पटनाऔरंगाबाद हाईवे-98 पर एक मिनी ट्रक को रोका.

हरियाणा के रजिस्टे्रशन नंबर वाले उस ट्रक में शराब की 4320 बोतलें लदी हुई थीं. ट्रक पर सवार कुलदीप सिंह और केशव देव को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने बताया कि शराब से लदे इस मिनी ट्रक को हाजीपुर में डिलीवरी देनी थी.

ईओयू की टीम ट्रक के साथ हाजीपुर पहुंची. हाजीपुर पहुंचने के बाद शराब माफिया ने ट्रक को मुजफ्फरपुर चलने को कहा. मुजफ्फरपुर से पहले ही तुर्की ब्लौक के पास एक स्कौर्पियो गाड़ी ने ट्रक को रुकने के लिए कहा. ट्रक के रुकते ही उस में सवार ईओयू की टीम ने स्कौर्पियो में सवार 5 लोगों को दबोच लिया.

गिरफ्तार लोगों के नाम अजीत कुमार, अजय कुमार, सुजीत कुमार, संजीव कुमार और सुरेंद्र कुमार सिंह है. सुरेंद्र दिल्ली का रहने वाला है.

बिहार में शराबबंदी के बाद भी शराब का चोरीछिपे  गैरकानूनी धंधा चल रहा है. जो शराब पीना चाहता है, उस के घर पर शराब की डिलीवरी हो रही है. 500 रुपए की कीमत वाली शराब की बोतल के लिए पियक्कड़ों को डेढ़ से 2 हजार रुपए तक चुकाने पड़ते है. पुलिस ने अब तक शराब के जिन धंधेबाजों को पकड़ा है, उन लोगों ने कबूल किया है कि झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से शराब बिहार पहुंचती रही है.

शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखा कर अपना गैरकानूनी धंधा चलाने के लिए शराब माफिया हर तरह की तिकड़म लड़ा रहे हैं. जब शराब से लदे बड़े ट्रकों को पुलिस ने पकड़ना शुरू किया तो छोटी गाडि़यों में शराब की खेप लाने का काम शुरू कर दिया गया. मिनी ट्रक, कारें, आटोरिकशा यहां तक कि स्कूटी में भर कर भी शराब ढोई जाने लगी है.

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शराब की खेप को बिहार की सीमा के बाहर बड़े पैमाने पर जमा कर के रखा गया है. वहीं से डिमांड के हिसाब से शराब की खेप की होम डिलीवरी की जा रही है.

पहले गोपालगंज जिले के रास्ते गैरकानूनी तरीके से शराब बिहार की सीमा में घुसाई जा रही थी. उस रूट पर जब पुलिस की धरपकड़ तेज हो गई

तो अब अरवलजहानाबाद रूट को शराब माफिया ने अपना सेफ जोन बना लिया है.पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए शराब की खेप को इधरउधर घुमाने के बाद तय अड्डे तक पहुंचाया जाता है. पुलिस की मिलीभगत के बगैर माफिया का काम आसान नहीं हो सकता है.

भोजपुर के एक शराब माफिया को गिरफ्तार करने के बाद जब ईओयू ने उस से पूछताछ की तो उस ने हैरान करने वाली बातें बताईं. उस ने बताया कि पटना से शराब की खेप को वह अपनी बोलेरो गाड़ी में रखता और पटना से भोजपुर के बीच पड़ने वाले हर पुलिस थाने में चढ़ावा चढ़ाता चला जाता था.

एक खेप ले जाने पर उसे थानों में तकरीबन 20 से 25 हजार रुपए चढ़ाने पड़ते थे और एक खेप से उस की कमाई 2 लाख रुपए से ज्यादा की हो जाती थी.

शराब की खेप के तय जगह पर पहुंचने के बाद तुरंत उस की डिलीवरी नहीं की जाती है. इस के लिए 10-15 घंटों का समय लगता है. खेप के पहुंचने के बाद धंधेबाज रेकी करते हैं. वे दूर रह कर उस पर नजर रखते हैं.

हर तरह से निश्चिंत होने के बाद ही शराब की खेप को ठिकाने लगाने का काम शुरू किया जाता है. अगर लोकल पुलिस को दानदक्षिणा दे दी गई होती है तो बेरोकटोक डिलीवरी हो जाती है.

पिछले दिनों अरवलपटना से सटे दानापुर ब्लौक में जब शराब से लदा एक ट्रक पहुंचा तो उसे लेने के लिए कोई भी नहीं पहुंचा. धंधेबाजों को पता चल गया था कि ईओयू ने शराब की खेप को पकड़ने के लिए वहां पहले से ही जाल बिछा रखा था. तकरीबन 12 घंटे के बाद शराब के धंधेबाज जब पूरी तरह से निश्चिंत हो गए कि अब कोई खतरा नहीं है तो वे गाड़ी के पास पहुंचे. पर इतनी सावधानी बरतने के बाद भी वे ईओयू के जाल में फंस गए, क्योंकि ईओयू ने अपनी टीम को बदल दिया था.

पिछले साल 1 अप्रैल से बिहार को पूरी तरह से ‘ड्राई स्टेट’ बनने के बाद ही राज्य के सीमा पार के इलाकों में शराब के कई बाजार सज चुके थे.

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बिहार से सटे नेपाल के इलाकों में तो शराब का धंधा कई गुना बढ़ चुका है, वहीं बिहार से सटे झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल वगैरह राज्यों के बौर्डर पर भी शराब का धंधा फलफूल रहा है.

शराबबंदी के बाद ही कई रिटायर्ड सरकारी अफसरों ने कहा था कि सरकार का यह फैसला तभी कामयाब होगा जब सरकारी अफसर और मुलाजिम पूरी ईमानदारी से सरकार का साथ देंगे. ज्यादातर राज्यों में सरकारी अफसरों और जनता की मदद नहीं मिलने की वजह से शराबबंदी नाकाम साबित हुई है.

रिटायर्ड मुख्य सचिव वीएस दुबे कई मौके पर कहते रहे हैं कि शराब पर पूरी तरह से रोक लगाना सरकार का काफी अच्छा फैसला है. पर यह तभी कामयाब हो सकेगी, जब पुलिस दारोगा और आबकारी दारोगा पर पूरी तरह जवाबदेही डाली जाएगी. गैरकानूनी शराब की तस्करी को रोकने के लिए पड़ोसी राज्यों की सीमा पर ठोस निगरानी तंत्र बनाने होंगे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पता था कि उन के शराबबंदी के फैसले को सब से ज्यादा खतरा पुलिस से ही है, इसलिए उन्होंने हर थाने के थानेदारों से लिखित शपथपत्र ले लिया था कि उन के इलाके में चोरीछिपे शराब बिकते, खरीदते या पीते पाई जाती है तो सीधे थानेदार ही जवाबदेह होंगे.

इस के बावजूद भी पुलिस के कई लोग शराब माफिया और दूसरे अपराधियों के साथ मिल कर शराबबंदी कानून को तोड़ने में लगे हुए हैं.

देशी शराब है सब से बड़ी सिरदर्द

बिहार में शराबबंदी के बाद चोरीछिपे गैरकानूनी तरीके से देशी शराब बनाने और बेचने पर रोक लगाना सरकार के लिए हमेशा मुश्किल रहा है. पिछले अगस्त महीने में गोपालगंज जिले के खजूरबन्नी गांव में देशी शराब पीने की वजह से 17 लोगों की मौत हो गई थी.

शराब पर पाबंदी के बाद भी कोई तगड़ा नैटवर्क है, जो यह जहर बांट रहा है और कानून की धज्जियां उड़ा रहा है. इस गैरकानूनी काम को करने वालों की पीठ पर या तो किसी बड़े नेता का हाथ है या पुलिस के अफसरों मुलाजिमों की मिलीभगत है.

महुआ की चुलाई दारू को बनाने के लिए महुआ और गुड़ को मिला कर सड़ाया जाता है. उसे खुले आकाश के नीचे 2-3 दिनों तक रखा जाता है. उस के बाद से उस में बदबू आनी शुरू हो जाती है. उसे चूल्हे पर रख कर खौलाया जाता है. इस दौरान उस की भाप को ढक कर दूसरे बरतन में चुलाई यानी टपकाई जाती है. वही महुआ दारू का रूप ले लेता है. उस में ज्यादा नशा पैदा करने के लिए नौसादर मिला दिया जाता है. ज्यादा नौसादर मिला देने से महुआ की शराब अकसर जहरीली हो जाती है. वहीं देशी दारू बनाने के लिए चावल और गन्ने के छोआ को मिला कर 3-4 दिनों तक फूलनेसड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब उस में सड़न और बदबू पैदा हो जाती है, तो उसे गरम कर के छान लिया जाता है. उस के बाद उस में स्पिरिट मिला कर देशी दारू बना दी जाती है.

बिहार के उत्पाद मंत्री विजेंद्र यादव कहते हैं कि कुछ लोग शराबबंदी को नाकाम करने में लगे हुए हैं. पर इसे कामयाब बनाने के लिए गांवगांव में शराब के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की मुहिम चलाई जा रही है.

मासूम की बलि, जिसकी कहानी हैरान कर देगी

अशोक कुमार पंजाब के जिला जालंधर के गांव मलको में पत्नी रजनी और 2 बच्चों 7 वर्षीय गुरप्रीत चुंबर उर्फ गोपी एवं 4 वर्षीय मनप्रीत के साथ रहता था. वह कौंप्लेक्स स्थित एक फैक्ट्री में खराद मशीन का मिस्त्री था. फैक्ट्री के लिए वह सुबह 8 बजे घर से निकलता तो रात को लगभग 8 बजे ही घर आता था. उस का बड़ा बेटा गांव के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 2 में पढ़ता था. उसे स्कूल तक पहुंचाने और छुट्टी के बाद घर लाने की जिम्मेदारी रजनी की थी. गुरप्रीत बड़ा ही खूबसूरत, मासूम दिखने वाला हंसमुख स्वभाव का था, इसलिए मोहल्ले के सभी लोग उस से स्नेह रखते थे.

अशोक कुमार के पड़ोस में 2-4 मकान छोड़ कर जीतराम और उस के बेटे राजकुमार का मकान था. जुलाई 2016 के अंतिम सप्ताह में राजकुमार के मकान में मंगतराम पत्नी के साथ किराए पर रहने आया. वह मूलरूप से  फाजलवाल का रहने वाला था.  वह मकान बनाने के ठेके लेता था, इसीलिए गांव के लोग उसे मंगत ठेकेदार कहते थे.

मंगत के बगल वाले कमरे में इंद्रजीत रहता था. वह मंगतराम के साथ ही काम करता था. दोनों साथ ही काम पर जाते थे और साथ ही रात को घर लौटते थे. मंगतराम की पत्नी जानकी हंसमुख और मिलनसार स्वभाव की थी, इसलिए पड़ोस की औरतों से उस की खूब पटती थी.

जानकी शाम को मोहल्ले के बच्चों को घर बुला कर नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाती थी. इस से उस का समय भी कट ही जाता था और बच्चों को भी फायदा होता था. अशोक कुमार का बेटा गुरप्रीत चुंबर भी रोजाना शाम को जानकी के घर ट्यूशन पढ़ने जाने लगा था.

जानकी ने 8 अगस्त, 2016 को मोहल्ले में सब से कह दिया कि वह अपने पति के साथ माता चिंतपूर्णी मंदिर जा रही है. उस के लौटने तक उस का देवर इंद्रजीत बच्चों को ट्यूशन पढ़ाएगा. उस दिन शाम को तय समय पर ट्यूशन पढ़ने के बाद बच्चे घर नहीं पहुंचे तो उन के घर वाले मंगतराम के घर जा पहुंचे. सब ने देखा इंद्रजीत बच्चों को पढ़ा रहा था. उस ने कहा कि थोड़ी देर में वह बच्चों को घर भेज देगा.

15 मिनट बाद सभी बच्चे अपनेअपने घर पहुंच गए, पर गुरप्रीत नहीं आया. रजनी को जब पता चला कि उस के बेटे के अलावा सभी बच्चे ट्यूशन पढ़ कर घर आ गए हैं तो वह मंगतराम के घर गई.

मकान का दरवाजा अंदर से बंद था. दरवाजा खटखटाने पर इंद्रजीत बाहर निकला तो पूछने पर उस ने बताया कि बस 2 प्रश्न रह गए हैं. उन्हें पूरा करने के बाद वह खुद गुरप्रीत को घर पर पहुंचा देगा. उस की बात से संतुष्ट हो कर रजनी घर लौट आई. पर आधे घंटे बाद भी जब गुरप्रीत नहीं आया तो रजनी को चिंता हुई.

वह उसे लेने के लिए बड़बड़ाती हुई घर से निकली कि ऐसी कौन सी पढ़ाई है, जो खत्म नहीं हो रही है. वह फिर से मंगतराम के घर पहुंची तो दरवाजे पर लगा ताला देख कर उस का माथा ठनक गया. उस के मुंह से निकला, ‘अरे ताला डाल कर ये कहां चले गए और मेरा गोपी कहां है?’

रजनी ने घबरा कर शोर मचा दिया तो मोहल्ले के तमाम लोग जमा हो गए. पूछने पर रजनी ने अपने बेटे और इंद्रजीत के गायब हो जाने की बात बता दी. मोहल्ले वाले भी सोच में पड़ गए कि इंद्रजीत बच्चे को ले कर पता नहीं कहां चला गया है? किसी अनहोनी की कल्पना से रजनी का दिल बैठा जा रहा था. उस समय शाम के साढ़े 7 बज रहे थे. मोहल्ले वाले गोपी को इधरउधर खोजने लगे.

एक दुकानदार ने बताया कि करीब सवा 6 बजे के करीब इंद्रजीत गुरप्रीत को ले कर उस की दुकान पर आया था. उस ने गुरप्रीत को 2 चौकलेट और 2 कुरकरे के पैकेट दिलाए थे.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है?’’ रजनी ने कहा, ‘‘सवा 6 बजे से 7 बजे तक मैं ने खुद गुरप्रीत को इंद्रजीत के यहां ट्यूशन पढ़ते देखा था.’’

दुकानदार ने विश्वास दिलाते हुए कहा कि सवा 6 बजे के करीब ही वह दुकान पर आया था. अब रजनी को मामला गड़बड़ नजर लगने लगा. वह सोचने लगी कि जब वह सवा 6 बजे के करीब इंद्रजीत के घर गई थी तो वहां घर में कौन था? लोगों ने कुछ ही देर में गांव का कोनाकोना छान मारा गया, पर गुरप्रीत और इंद्रजीत का कहीं पता नहीं चला. अब रजनी रोने लगी. गांव के एक आदमी ने मंगतराम और जानकी को फोन कर सारी बात बताई. मंगतराम ने कहा कि इस समय वह चिंतपूर्णी माता के मंदिर में है. इसलिए इस मामले में कुछ नहीं कर सकता. बात खत्म कर के उस ने अपना फोन स्विच्ड औफ कर दिया.

संयोग से उस समय अशोक घर पर नहीं था. उस की नाइट ड्यूटी थी. गुरप्रीत को ढूंढतेढूंढते रात के 11 बज गए थे. बेटे के गायब होने की सूचना रजनी ने फोन द्वारा पति को दी तो वह तुरंत घर आ गया और बेटे की खोज में लग गया. जब वह कहीं नहीं मिला तो रात करीब साढ़े 12 बजे मोहल्ले के कुछ लोग पड़ोसी की छत से मंगतराम के घर में पहुंचे.

मकान के अंदर कमरों के दरवाजे खुले हुए थे. एक कमरे का नजारा बड़ा ही रहस्यमयी था. कमरे के बीचोबीच एक हवनकुंड बना था, जिस में अधजली लकडि़यां और हवन सामग्री पड़ी थी. कुछ हवन सामग्री हवनकुंड के बाहर भी पड़ी थी. वहीं एक छुरी, कुछ कटे नींबू, लौंग, जायफल, सिंदूर और किसी जानवर के बाल और 7 हड्डियां पड़ी थीं.

यह सब देख कर सभी हैरान थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब क्या है और गुरप्रीत कहां है? इस के बाद सभी दूसरे कमरे में पहुंचे तो उस कमरे का ज्यादातर सामान गायब था. एक कमरे में एक तख्त पड़ा था और लोहे की एक पुरानी अलमारी रखी थी.

जब उस अलमारी को खोल कर देखा गया तो सभी के होश उड़ गए. अलमारी खुलते ही उस के अंदर रखी गुरप्रीत की लाश फर्श पर गिर पड़ी. अपने जिगर के टुकड़े की हालत देख कर अशोक की चीख निकल गई. लोगों ने लाश उठा कर तख्त पर लिटा दी. मकान का मेनगेट खुलने पर रजनी भी अंदर आ गई थी. बेटे की लाश देख कर वह भी दहाड़े मार कर रोने लगी. फौरन पुलिस को सूचना दी गई.

सूचना मिलते ही थाना लंबड़ा के थानाप्रभारी सरबजीत सिंह टीम के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे थे. घटनास्थल पर पूरा गांव जमा था. थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना डीसीपी और क्राइम इन्वैस्टिगेशन टीम को दे दी थी. गांव वाले बच्चे की हत्या पर उत्तेजित थे. कुछ ही देर में एडिशनल डीसीपी परमिंदर सिंह भंडाल सहित अन्य अधिकारी भी वहां आ गए थे.

एडिशनल डीसीपी भंडाल ने गांव वालों को समझा कर शांत किया और भरोसा दिया कि जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया गया. बरामद सामान और माहौल देख कर साफ लग रहा था कि कमरे में तांत्रिक क्रिया की गई थी. मृतक बच्चे के माथे पर काला तिलक लगा था. गले में फूलों की माला, हाथों पर सिंदूर और गरदन पर खून के निशान थे. लाश को गोटा लगी लाल सुर्ख रंग की चुनरी में लपेट कर अलमारी में रखा गया था. उस के हाथपैर लाल रंग के मौली धागे से बंधे थे. सिर पर किसी भारी चीज के मारने की चोट थी.

अब तक की जांच से स्पष्ट हो गया था कि इंद्रजीत या किसी तांत्रिक ने गुरप्रीत की बलि दी गई थी. बहरहाल मौके की जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज कर कमरे से जरूरी सबूत कब्जे में ले लिए गए. इस के बाद अशोक कुमार के बयानों के आधार पर पुलिस ने इंद्रजीत के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर उस की तलाश शुरू कर दी.

एडिशनल डीसीपी परमिंदर सिंह भंडाल ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अतिरिक्त थानाप्रभारी विजय कुमार, एएसआई गुरमेज सिंह, हैडकांस्टेबल जोगिंदर सिंह, तलविंदर सिंह, कांस्टेबल बलजीत  कुमार, कुलदीप सिंह की एक टीम बनाई बनाई, जिस का निर्देशन थानाप्रभारी सरबजीत सिंह को सौंपा गया.

गांव के लोगों को ले कर ले कर टीम माता चिंतपूर्णी के लिए रवाना हो गई. इस के अलावा थानाप्रभारी ने पूरे शहर में इंद्रजीत की तलाश में मुखबिरों को भी लगा दिया था. सरबजीत सिंह ने क्षेत्र में प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी निकलवा कर देखी. एक फुटेज में इंद्रजीत गुरप्रीत को ले कर जाता दिखाई दिया. उस के हाथ में कुरकुरे के पैकेट थे, एक अन्य फुटेज में इंद्रजीत हैंडबैग ले कर कहीं जा रहा था. शायद यह उस के फरार होने के समय का था.

पुलिस दिनरात इंद्रजीत की तलाश में जुटी थी. माता चिंतपूर्णी गई टीम खाली हाथ लौट आई थी. 4 दिनों बाद मुखबिर ने इंद्रजीत के बारे में पुख्ता सूचना दी. सूचना के आधार पर बस्ती जोधेयाल में दबिश दे कर इंद्रजीत को गिरफ्तार कर लिया गया. वह थका हुआ सा दिखाई दे रहा था.

पूछताछ शुरू करने से पहले ही उस ने अपना अपराध स्वीकार कर के कहा कि उस ने एक ऐसा पाप कर दिया है, जिस की माफी शायद ही उसे मिले. इस के बाद गुरप्रीत की हत्या की उस ने जो कहानी बताई, वह कोई नई नहीं थी. चालाक और शातिर लोग सदियों से दूसरों की कमजोरी का फायदा उठा कर अपना मनचाहा काम करवाते रहे हैं, यह भी उसी का नतीजा थी.

मंगतराम जालंधर में पिछले कई सालों से काम कर रहा था. उस की लगभग 4-5 महीने पहले इंद्रजीत से मुलाकात हुई थी. वह राजमिस्त्री का काम करता था. दोनों की जल्दी ही अच्छी जानपहचान हो गई और उस ने उसे रहने के लिए अपने घर पर जगह दे दी. मंगतराम की पत्नी ने उसे अपना देवर मान लिया और उस का खाना भी वही बनाने लगी. इंद्रजीत को पतिपत्नी ने अपने चक्रव्यूह में फंसा लिया.

इंद्रजीत कपूरथला के गांव रावलपिंडी के एक गरीब परिवार का लड़का था. उस की एक बहन थी जो शादी लायक थी और उस का रिश्ता भी तय हो गया था. 2 महीने बाद उस की शादी होने वाली थी. इंद्रजीत के पिता वृद्ध और कमजोर थे, पर जैसेतैसे वह घर के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम कर लेते थे.

3-4 सौ रुपए रोज की मजदूरी में बहन की शादी करनी असंभव थी. शादी के लिए लाखों रुपए की जरूरत थी, इसलिए इंद्रजीत किसी ऐसे बड़े आदमी या बड़े ठेकेदार की तलाश में था, जो उसे लाखों का कर्ज ब्याज पर दे सके या कोई ठेकेदार उसे लाखों रुपए एडवांस दे सके. वह हर महीने एक मुश्त रकम चुकाता रहेगा. यही एक तरीका था बहन की शादी करने का.

इस बात का पता जब मंगतराम को चला तो एक दिन शाम को उस ने घर पर बोतल मंगवा कर इंद्रजीत के साथ पीते हुए पूछा, ‘‘तुम्हें 2 लाख रुपए की जरूरत है न?’’

‘‘हां,’’ इंद्रजीत बोला, ‘‘बहन की शादी के लिए 2 लाख रुपए जल्द चाहिए.’’

‘‘मैं तुम्हें 2 लाख रुपए दे सकता हूं.’’ मंगतराम ने जाल फेंकते हुए कहा.

‘‘क्या?’’ इंद्रजीत ने कुछ कहना चाहा तो मंगतराम ने उसे रोकते हुए कहा, ‘‘पहले मेरी पूरी बात सुन लो, मैं तुम्हें 2 लाख रुपए बिना ब्याज के दूंगा. मतलब 2 लाख रुपए दे कर वापस भी नहीं लूंगा, पर तुम्हें मेरा एक काम करना होगा.’’

‘‘कौन सा काम?’’ इंद्रजीत ने पूछा तो मंगतराम ने कहा कि शादी के कई साल बीत जाने के बाद भी उस की भाभी को औलाद नहीं हुई है. इस की कोख पर किसी जिन्न का साया है. वह खुद तांत्रिक है. उस ने अपनी तंत्र विद्या से जिन्न का साया हटा दिया है. अब उस से किसी ने कहा है कि वह एक 7 साल के बच्चे की बलि दे तो उस की आत्मा उस की पत्नी की कोख से जन्म ले लेगी.

मंगतराम ने बताया कि उस की पत्नी जानकी ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के चक्कर में पूरा माहौल तैयार कर लिया है. जिस बच्चे की बलि दी जानी है, उसे चुन लिया है. उसे बस उस के कहे अनुसार उस की बलि देनी है.

बच्चे की बलि की बात सुन कर इंद्रजीत एकबारगी घबरा गया. पर जब उस ने अपने घर में झांक कर देखा तो बच्चे की बलि से अधिक उसे अपनी जरूरत बड़ी लगी. काम कैसे करना है, यह सब मंगतराम ने उसे समझा दिया और सामान आदि के लिए 10 हजार रुपए भी दे दिए.

योजना के अनुसार, 7 अगस्त 2016 को जानकी ने मोहल्ले में कह दिया कि वह चिंतपूर्णी मंदिर जा रही है. उसी दिन मंगतराम पत्नी के साथ घर छोड़ कर चला गया. वे चिंतपूर्णी गए या कहीं और इस बात का अभी तक पता नहीं चला है.

बहरहाल अगले दिन योजना के अनुसार इंद्रजीत ने ट्यूशन पढ़ाने के बहाने सभी बच्चों घर बुला लिया. इस के पहले दोपहर को वह बाजार से पूजा की सामग्री ले आया था, जो उसे मंगतराम लिख कर दे गया था.

कुछ देर बाद उस ने सभी बच्चों की छुट्टी कर दी और गुरप्रीत को रोक लिया. गुरप्रीत से उस ने कहा कि वह सब से अच्छा बच्चा है, इसलिए वह उसे इनाम देगा. इनाम के लालच में गुरप्रीत वहीं रुक गया. वह गुरप्रीत को एक दुकान पर ले गया और वहां से उसे चौकलेट और कुरकुरे के पैकेट दिलवा दिए.

दुकान से सामान दिला कर वह गुरप्रीत को घर ले आया और उसे पीने के लिए पानी दिया, जिस में नशे की दवा मिली थी. पानी पीने के कुछ देर बाद गुरप्रीत बेहोश हो गया. इस के पहले कि वह अपना काम शुरू करता, गुरप्रीत को पूछने के लिए उस की मां आ गई.

रजनी को इंद्रजीत ने बहाना बना कर वापस भेज दिया और हवन कुंड में जल्दी से लकडि़यां जला कर मंगतराम द्वारा बताई गई क्रियाएं खत्म कर एक सूआ गुरप्रीत की सांस नली में घुसेड़ कर खून निकाला और बाद में सिर में ईंट मार कर जान ले ली. वह जिंदा न रह जाए, इस के लिए मंगतराम द्वारा बताए तरीके से उस की बलि चढ़ा हत्या कर के उस की लाश एक लाल रंग की चुनरी में लपेट कर अलमारी में रख दी और फरार हो गया.

पुलिस ने इंद्रजीत को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि के दौरान उस की निशानदेही पर सूआ और ईंट बरामद कर ली गई, रिमांड खत्म होने पर उसे फिर से 18 अगस्त, 2016 को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

पुलिस इस बलिकांड के सूत्रधार मंगतराम और उस की पत्नी की सरगर्मी से तलाश कर रही है, पर उन के मिलने की संभावनाएं न के बराबर हैं. इस कांड से इंद्रजीत की बहन की शादी में तो समस्या आएगी, साथ ही रजनी को उस का बेटा गुरप्रीत कभी नहीं मिलेगा. तांत्रिक मंगतराम को औलाद होगी या नहीं? यह तो बाद की बात है, पर उस की इस घटिया सोच और अपराध ने एक मां से उस का बेटा जरूर छीन लिया है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित घटना का नाटकीय रूपांतरण किया गया है.

व्लॉग पर वापसी कर रहे है एल्विश यादव, पुलिस बन जिया को डराया

बिग बॉस ओटीटी2 के विनर रह एल्विश यादव अब सबके दिलों में बस रहे है. लोग उन्हे पहले की तरह व्लॉग बनाते देख रहे है जी हां, एल्विश इन दिनों अपने लगातार एक से एक बढ़कर व्लॉग बना रहे है. ऐसा ही एक व्लॉग उन्होने जिया शंकर को डराने के लिए बनाया.जिसमें वह पुलिस बनकर जिया को हसांते और डारते हुए नजर आ रहे है. ये व्लॉग काफी मजेदार है. जिसे देख हर कोई अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा है.

 

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आपको बता दें, कि एल्विश ने अपना नया व्लॉग अपलोड़ किया है जिसमें एल्विश जिया के साथ प्रैंक करते नजर आ रह है. इस प्रैंक में वो पुलिस वाला बने है और अपनी मम्मी के साथ बैठे है और जिया को कॉल करते है लेकिन जिया उनका कॉल नहीं उठाती है. वह दोबारा कॉल करते है तो भी जिया दोबारा कॉल नहीं उठाती है. फिर एल्विश उन्हे मैसेज करते है कि एसीबी, अजीत कॉल करें.

इसके बाद एल्विश अपने व्लॉग में आवाज बदलकर कहते है कि आपके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है. इसके बाद जिया तुरंत अपना फोन किसी लड़के को पकड़ा देती है इसके बाद वो शख्स  उनसे पूछता है कि क्या शिकायत दर्ज हुई है.तो एल्विश कहते है कि जो शो में एल्विश के पानी में साबुन डाला था उनके खिलाफ शिकायत है. इस पर वह शख्स कहता है कि आप हमारी लीग्ल टीम से बात करिए. तब एल्विश सच्चाई बता देते है कि वह एल्विश बोल रहे है.हालांकि पूरी वीडियो में जिया बेहद डर जाती है.

 

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इसके बाद जिया बहुत जोर-जोर से हंसती है और कहती है कि तू ही होगा. ऐसी हरकत कर रहा है. जिया को हंसते देख एल्विश कहते है कि अब भी हंस रही है. बिग बॉस से बाहर आ गई है तब भी हंस रही है.फिर एल्विश कहते है कि सुबह से कितने कॉल कर लिए तू फोन क्यो नहीं उठाती है. तो जिया जवाब देती है कि वह अनजान नंबर नहीं उठाती है. एल्विश अपने व्लॉग में अपने होने वाली बीवीं को भी जिक्र करते है और अपनी मां से कहते है कि मेरी वाइफ गाली देना जानती हो लेकिन मुझे ना दे बस, मेरे साथ मस्त रहे है ऐसी हो. इस पर एल्विश की मां कहती है कि मैं बहुत गाली देती थी तेरे पापा मेरे साथ बैठ नहीं सकते थे.

बांद्रा में स्पॉट हुई Malaika Arora, टी-शर्ट बनीं मीडिया की लाइमलाइट

बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) हमेशा ही अपनी फिटनेट को लेकर सुर्खियों में बनीं रहती है उनकी फिटनेस वीडियो सोशल मीडिया पर धमाल मचा देती है, उनके हर एक मूव्स का हर कोई दिवाना है. इन्ही के बीच मलाइका अरोड़ा का अर्जुन के साथ ब्रेकअप भी मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है. ऐसे में मलाइका बांद्रा में स्पॉट हुई जहां, उनकी टी-शर्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा और देखते ही देखते उनकी टी-शर्ट मीडिया की लाइमलाइट में आ गई. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. देखने वाले फैंस चिंता में नजर आ रहे है.

 

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आपको बता दें, कि एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा का अर्जुन कपूर के साथ ब्रेकअप हो चुका है. अब अर्जुन फेमेस यूट्यूबर और कॉमेडियन कुशा कपिला को डेट कर रहे है इसी बीच मलाइका की टी-शर्ट चर्चा का विषय बन गई है एक वीडियो में मलाइका अपनी गाड़ी से उतरती है जहां उन्होने व्हाइट कलर का ड्रेस कैरी किया हुआ है इनकी टी-शर्ट को जब ध्यान से देखा तो उसमें लिखा हुआ पाया कि ‘अब अलग होते है’ ये देख उनके फैंस काफी निराश नजर आ रहे है.

 

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बता दें, साल 2019 में अर्जुन और मलाइका ने अपने रिलेशनशिप को ऑफिशियल घोषित किया था, लेकिन अब दोनों साथ नहीं है, उनकी टी-शर्ट भी फैंस का यही बता रही है जिसमें मलाइका काफी स्टंनिंग नजर आ रही है इन तस्वीरों को देख हर कोई उनकी तारीफ कर रहे है एक यूजर ने लिखा कि एक यूजर ने लिखा, “मलाइका इस लुक में बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “क्या आपने सुना है कि मलाइका अरोड़ा का अर्जुन के साथ ब्रेकअप हो गया है.” बता दें कि एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा ‘मूविंग इन विद मलाइका’ में नजर आ चुकी हैं. इस दौरान मलाइका अरोड़ा ने अपने शो में कई सेलेब्स के इंटरव्यू लिए.

अब घुटनों के दर्द में मिलेगा आराम, खानी होगी बस ये देसी चीजें

आम लोगों के मुंह से कई बार ये सुनने को जरुर मिलता है कि उनके घुटनों को दर्द जाता ही नहीं है उम्र के साथ-साथ घुटनों को दर्द भी बढ़ जाता है लेकिन आजकल कम उम्र में भी यही समस्या देखने को बहुत मिल रही है.जिसके कारण हमारा युवा बुढ़ा नजर आने लगा है लेकिन आज हम इस आर्टिकल में इसी समस्या से छुटकारा दिलाने वाले कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे. जिनसे आपका दर्द चुटकियों में भाग जाएगा.

आजकल की लाइफस्टाइल को देखते हुए लोगों का गड़बड़ खानपान, अनियमित रुटीन, आहार में पोषक तत्वों की कमी की वजह से स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है. जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द की समस्या भी अधिक होने लगी है. हालांकि, इससे राहत पाने के लिए लोग डॉक्टर से संपर्क करके दवाएं ले लेते हैं. लेकिन इससे ये दर्द जड़ से नहीं जाता है. इसलिए आज हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बताएंगे जिसका उपयोग करके आप दर्द का निवारण कर सकते हैं.

1. एलोवेरा

एलोवेरा औषधीय गुणों से भरपूर है. इसलिए एलोवेरा घुटने के दर्द में भी काफी सहायक है. ये आपके जोड़ों के दर्द को खींचकर बाहर निकाल देता है और आपको इससे आराम मिलता है. इसके लिए आप एलोवेरा जेल को दर्द वाले हिस्से पर लगाएं. इससे आपको ठंडक मिलेगी और दर्द में भी आराम मिलेगा. एलोवेरा घुटनों की सूजन को भी कम करने में मददगार है.

2. कपूर का तेल

अगर आपको घुटनों का दर्द अधिक परेशान करता है, तो इससे राहत के लिए देसी इलाज में कपूर का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं. कपूर का तेल दर्द से राहत पहुंचाने में बहुत ही असरदार साबित होगा. कपूर का तेल एक चम्मच और इसमें 1 चम्मच नारियल का तेल मिलाएं. फिर इसे गर्म कर लें और तेल ठंडा होने के बाद घुटनों की मालिश करें. कुछ समय बाद आपको आराम मिलेगा.

3. हल्दी

हल्दी शुरू से एंटी-बैक्टीरियल मानी गई है. किसी भी चोट पर हल्दी लगाने से ये अंदरूनी दर्द को खींच लेती है. इसलिए ये घुटनों के दर्द में भी रामबाण देसी दवा है. हल्दी कई सारे औषधीय गुणों से भरपूर होती है. एंटी-इंफ्लेमेटरी होने के कारण ये घुटने के दर्द से तुरंत छुटकारा दिलाती है. आप एक चम्मच हल्दी को सरसों के तेल में हल्का गर्म कर लें. फिर इसे घुटनों में दर्द वाले हिस्से पर लगाएं. इससे आपको घुटने के दर्द से जल्द छुटकारा मिलेगी.

बड़बोला: कैसे हुई विपुल की बहन की शादी

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ठगी का गिफ्ट : ऐसे फोन से रहें सावधान

आशा घर के कामकाज निपटा कर आराम करने के लिए बैडरूम की ओर जा रही थी, तभी उस के सेलफोन की घंटी बज उठी. उस ने काल रिसीव कर जैसे ही ‘हैलो’ कहा, दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘मुबारक हो जी, आप बनी हैं सर्वश्रेष्ठ विजेता.’’

यह सुन कर आशा ने हैरानी से पूछा, ‘‘सर्वश्रेष्ठ विजेता, किस चीज की?’’

जवाब में दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘मैडम, पिछले दिनों हमारी कंपनी की ओर से कुछ सवाल पूछे गए थे. आप ने उन सभी सवालों के जवाब एकदम सही दिए थे, इसलिए आप विजेता बनी हैं.’’

फिर तो आशा खुश हो कर बोली, ‘‘थैंक्यू सर, थैंक्यू वेरी मच.’’

आशा कुछ और कहती, दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘मैडम, आप को हमारी कंपनी की ओर से एक शानदार गिफ्ट दिया जाएगा. वह भी कोई ऐसावैसा नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा कीमती. आप जानना चाहेंगी उस गिफ्ट की कीमत?’’

आशा ही क्या, कोई भी होता, वह हां कह देता. आशा ने भी तुरंत हां कर दिया. इस के बाद फोन करने वाले ने बताया कि उसे दिए जाने वाले गिफ्ट की कीमत करोड़ों में है. गिफ्ट की कीमत सुनते ही आशा के मुंह से ‘अरे वाह, करोड़ों का गिफ्ट’ निकल गया.

करोड़ों की कीमत के गिफ्ट की बात सुन कर आशा कुछ सोच ही रही थी कि फोन करने वाले ने उस का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए कहा, ‘‘मैडम, आप जानती ही होंगी कि विदेश से आए गिफ्ट को पाने के लिए कस्टम और इनकम टैक्स विभाग को टैक्स देना होता है. करोड़ों की कीमत वाले इस गिफ्ट को पाने के लिए भी आप को भी कस्टम ड्यूटी आदि जमा करानी होगी. यह सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आप को गिफ्ट भेजा जाएगा.’’

बात करोड़ों रुपए के गिफ्ट की थी, इसलिए उस की बातों पर विश्वास कर के उस के द्वारा बताए गए बैंक खाते में आशा ने अलगअलग तारीखों पर करीब 3 लाख रुपए जमा करा दिए. काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब कोई गिफ्ट नहीं आया तो आशा का माथा ठनका. उसे लगा कि उस के साथ ठगी हुई है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के सुंदरपुर नेवादा की रहने वाली आशा एक समृद्ध परिवार की महिला थी. उस के पति उम्मेद सिंह सरकारी नौकरी में थे. उन के 2 बेटे हैं, जो दूसरे शहर में रह कर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं. उस का अपना आलीशान मकान है, जिस में 4-5 किराएदार भी रहते हैं. इस तरह महीने की एक मोटी रकम उसे किराए से मिल जाती है.

crime

लेकिन इस घटना के बाद उस की नींद उड़ चुकी थी. उस ने कुछ दिनों तक यह बात अपने पति से छिपाए रखी. थोड़ेबहुत पैसों की बात होती तो शायद वह पति से छिपाए भी रखती, पर बात मोटी रकम की थी, इसलिए अपने साथ हुई ठगी की बात पति को बतानी ही पड़ी.

उम्मेद सिंह ने पत्नी की बेवकूफी पर पहले उसे डांटाफटकारा, उस के बाद उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को देना उचित समझा. इस के बाद वह एसएसपी नितिन तिवारी से मिले और पत्नी के साथ हुई ठगी की बात विस्तार से बता बताई.

वह जहां रहते थे, वह इलाका थाना भेलूपुर के अंतर्गत आता था, इसलिए एसएसपी ने भेलूपुर के थानाप्रभारी को आशा के साथ हुई ठगी की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए. थानाप्रभारी ने आशा की तहरीर पर अज्ञात ठगों के खिलाफ भादंवि की धारा 419, 420, 467, 468, 471 व 66 आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. यह बात 22 मार्च, 2017 की है.

पिछले कुछ दिनों से वाराणसी जिले में इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी थीं. पुलिस एक मामले को सुलझा नहीं पा रही थी कि दूसरा मामला हो जाता था. आशा से बड़ी रकम ठगी गई थी. इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी नितिन तिवारी ने जिले के पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग बुला कर सभी को इस तरह की ठगी करने वालों का पता लगाने के निर्देश दिए.

आशा के साथ हुई ठगी वाले मामले की जांच के लिए भेलूपुरा के थानाप्रभारी के नेतृत्व में एसएसपी ने जो पुलिस टीम बनाई थी, उस ने उस एकाउंट नंबर को आधार बनाते हुए जांच शुरू कर दी, जिस में आशा ने पैसे जमा कराए थे, साथ ही उस फोन नंबर की भी काल डिटेल्स निकलवाई गई, जिस से आशा को फोन किया गया था.

एसएसपी ने क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सैल को भी इस मामले की जांच में लगा दिया था. एसएसपी जांच टीम के संपर्क में रह कर पलपल की रिपोर्ट ले रहे थे और समयसमय पर उचित दिशानिर्देश भी दे रहे थे. इस का नतीजा यह निकला कि पुलिस ने जालसाजों का पता लगा लिया.

इस के बाद पुलिस ने अलगअलग शहरों से 5 जालसाजों को उन के घरों से उठा लिया. जो लोग हिरासत में लिए गए थे, उन में दिल्ली के मसूदपुर का रहने वाला आशीष जानसन, फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश के रसूलपुर गांव का रहने वाला बहादुर सिंह, ग्वालियर के आदर्शनगर का रहने वाला संतोष शर्मा एवं सुरेश तोमर आदि थे.

इन सभी से पूछताछ की गई तो उन्होंने न केवल अपना अपराध स्वीकार कर लिया, बल्कि पुलिस को जालसाजी के तौरतरीके के बारे में भी विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि उन का अपना एक गिरोह है.

गिरोह का सरगना और खास सदस्य फेसबुक, वाट्सऐप, ईमेल जैसे सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिए लोगों से पहले जुड़ते हैं. जिस व्यक्ति को शिकार बनाना होता है, उस से दोस्ती कर के उसे विश्वास में लेते हैं. सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती करने के बाद उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर हासिल कर के उसे ईमेल द्वारा या फोन कर के गिफ्ट या बड़ी रकम जीतने की जानकारी दी जाती थी.

करोड़ों का गिफ्ट या इनाम मिलने के लालच में वह उस व्यक्ति से टैक्स आदि के नाम पर मोटी रकम एकाउंट में जमा करवा लेता है. आशीष ने पुलिस को बताया कि वह लोगों को सोशल मीडिया पर मदद के नाम पर भी ठगने का काम करता था. बच्चों और महिलाओं की मार्मिक फोटो का सहारा ले कर उन्हें किसी आपदा या बीमारी का शिकार बता कर उन के नाम पर रुपए ऐंठता था.

गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई बैंक खातों की पासबुकें, चैकबुकें, अलगअलग फोटो से बनाए गए फरजी पैनकार्ड, मोबाइल और सिमकार्ड समेत अन्य सामान बरामद हुए हैं. पकड़े गए पांचों आरोपियों के बैंक खातों की जांच कराने पर पुलिस को पता चला कि वे अब तक करीब ढाई करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर चुके हैं.

सभी बैंक खातों को सीज करने के साथ पुलिस सभी के पारिवारिक सदस्यों के बैंक एकाउंटों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि उन के मामले में पारिवारिक सदस्यों की क्या भूमिका हो सकती है.

जालसाजों ने बताया कि किसी भी शिकार को फांसने से पहले वह उस की लोकेशन ले कर उस की रेकी करते थे, ताकि उस के रहनसहन से ले कर उस की आर्थिक स्थिति का भी पता लग सके. ऐसे ही उन्होंने आशा की भी रेकी की थी. आशा से पहले इस गिरोह ने वाराणसी सहित देश के कई शहरों में अब तक सैकड़ों लोगों को अपने झांसे में ले कर उन से लाखों रुपए ठगे हैं. उन्होंने बताया कि उन का नेटवर्क देश भर में फैला है.

ठगों के गिरफ्तार होने पर डीआईजी (वाराणसी जोन) ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए 12 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है. एसएसपी ने भी टीम को 5 हजार रुपए का इनाम दिया है.

उन्होंने टीम में शामिल एसआई सुबोध कुमार तोमर, पंकज कुमार शाही, इमरान खान, सिपाही श्यामलाल गुप्ता, सर्विलांस सेल के भीष्म प्रताप सिंह, सुनील चौहान, हिमांशु शुक्ला, पंकज सिंह, अखिलेश सिंह की पीठ भी थपथपाई है.

पकडे़ गए पांचों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ कर उन्हें सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस इस गिरोह के सरगना नाइजीरियन ओबाका को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है. कथा लिखे जाने तक उस की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी.

दूसरी ओर 7 जून, 2017 को वाराणसी जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) श्री महंतलाल की अदालत ने बीएचयू की डा. नूतन सिंह से फेसबुक पर दोस्ती के बाद 10 लाख रुपए की ठगी के मामले में अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े दिल्ली निवासी आरोपी आशीष जानसन की जमानत खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है. ठगी की इस वारदात में विदेशी आरोपी ओबाका भी शामिल है. इस की विवेचना जारी है. ऐसे में जमानत दिए जाने से विवेचना प्रभावित होगी.

वाराणसी पुलिस के हाथ लगे ठग कोई मामूली ठग नहीं हैं. इन का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है, जो लोगों को ठगने के लिए अंतरराष्ट्रीय काल का सहारा ले कर पहले दोस्ती करते हैं. उस के बाद बीमारी आदि के नाम पर मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने की बात कर के पैसे वसूलते हैं. इन के झांसे में कम पढ़ेलिखे लोग ही नहीं, बल्कि समाज के प्रबुद्ध लोग जैसे कि डाक्टर, इंजीनियर आदि भी फंस जाते हैं.

वाराणसी के सुंदरपुर की रहने वाली डा. नूतन सिंह भी बड़ी आसानी से इन के झांसे में फंस गई थीं. उन्हें अंतरराष्ट्रीय काल के जरिए नाइजीरिया निवासी पीसीएस ओबाका ने पहले फेसबुक के माध्यम से दोस्ती की. उस ने डा. नूतन सिंह से संपर्क कर के पत्नी के लिए दवा लिखवाई.

2 महीने बाद उस ने नूतन से कहा कि उस की पत्नी को उन की बताई दवा से बहुत फायदा हुआ है. उस के द्वारा प्रशंसा किए जाने से डा. नूतन को भी न केवल गर्व महसूस हुआ, बल्कि वह उस से फेसबुक और वाट्सऐप के माध्यम से बातें करने लगीं.

इस के बाद डा. नूतन सिंह को अपने जाल में फांस कर उस ने एक बार फिर उन का धन्यवाद दिया. उस ने उन्हें एक बड़ा गिफ्ट देने की पेशकश की, जिसे लेने के लिए नूतन सिंह ने हां कह दिया. फिर बात को आगे बढ़ाते हुए ओबाका ने कहा, ‘‘मैडम, आप को तो पता ही होगा कि विदेशों से सामान मंगाने के लिए कुछ आवश्यक काररवाई पूरी करनी होती है. इसलिए बड़ा गिफ्ट प्राप्त करने से पहले आप को उस का टैक्स आदि अदा करना पड़ेगा.’’

इस के लिए ओबाका ने दिल्ली निवासी अपने साथी आशीष जानसन का एकाउंट नंबर दे दिया. इसी के साथ ओबाका ने डा. नूतन सिंह को पूरी तरह से विश्वास में लेते हुए आशीष जानसन के अलगअलग खातों में लगभग 10 लाख रुपए जमा करवा लिए. बाद में डा. नूतन को जो गिफ्ट पैकेट भेजा गया, उस में कपड़े निकले. जिस की शिकायत उन्होंने पुलिस से की थी.

इस तरह नाइजीरियन पीसीएस ओबाका भारत में रहने वाले अपने दोस्तों के साथ मिल कर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था. कथा लिखे जाने तक ओबाका गिरफ्तार नहीं हो सका था.

– कथा पुलिस व मीडिया सूत्रों पर आधारित

टीनएज में बेहद जरूरी है सेक्स एजुकेशन

युवाओं में भले ही पोर्नोग्राफी देखने का चलन बढ़ रहा हो, पर सेक्स एजुकेशन के नाम पर उन की जानकारी शून्य ही होती है. सेक्स एजुकेशन पोर्नोग्राफी से अलग होती है. इस की जानकारी टीनएज में जरूरी है. इस से लड़कियों को कई तरह की परेशानियों से बचाया जा सकता है.

16 साल की नेहा अपनी मामी के घर आई थी. उस के स्कूल में गरमी की छुट्टियां चल रही थीं. नेहा के मामामामी शहर में एक बड़े घर में रहते थे. घर का काम करने के लिए नौकरचाकर थे. एक दिन नेहा की मामी अपने किसी परिचित से मिलने चली गईं. घर पर नेहा और उस के मामा थे. दोनों टीवी पर एक फिल्म देख रहे थे. इसी बीच नेहा के मामा ने कहा कि आओ तुम्हें एक खेल खिलाते हैं. नेहा कुछ समझ नहीं पाई, लेकिन जो हुआ वह बहुत बुरा और रिश्तों को कलंकित करने वाला था. नेहा को इस का परिणाम पता ही नहीं था. मामा ने नेहा से कहा कि इस बात को वह किसी को न बताए. नेहा भी इस खेल को बुरा खेल समझ कर भूल गई थी.

इस के बाद नेहा का मन मामा के घर में नहीं लगा. कुछ ही दिनों बाद वह वापस अपने घर आ गई. समय बीतने लगा. इसी बीच नेहा की तबीयत कुछ खराब रहने लगी तो मां ने डाक्टर को दिखाया. डाक्टर ने कुछ टैस्ट किए और इस के बाद नेहा की मां को जो कुछ बताया उस पर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ.

डाक्टर ने साफसाफ शब्दों में कह दिया कि नेहा मां बनने वाली है. डाक्टर और उस की मां ने जब नेहा से पूछा तो उस ने बताया कि किस तरह एक दिन मामा ने उस के साथ दुष्कर्म किया.

सेक्स की जानकारी जरूरी

स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सुनीता चंद्रा कहती हैं, ‘‘इस तरह के मामले कोई अचंभे वाली बातें नहीं हैं. ऐसी बहुत सारी घटनाएं हम लोगों के सामने आती हैं, जिन में लड़की को पता ही नहीं चलता है कि उस के साथ क्या हुआ है. इसीलिए इस बात की जरूरत है कि किशोर उम्र में ही लड़की को सेक्स शिक्षा दी जाए. घर में मां और स्कूल में टीचर इस काम को सरलता से कर सकती हैं. मां और टीचर को पता होना चाहिए कि बच्चों को सेक्स की क्या और कितनी शिक्षा देनी चाहिए.’’

डाक्टर सुनीता का कहना है, ‘‘जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, उन से पता चलता है कि कम उम्र में लड़कियों का यौनशोषण उन के रिश्तेदारों या फिर घनिष्ठ दोस्तों द्वारा किया जाता है. इसलिए जरूरी है कि लड़की को 10 से 12 साल की उम्र के बीच यह बता दिया जाए कि सेक्स क्या होता है और यह बहलाफुसला कर किस तरह किया जाता है. लड़कियों को बताया जाना चाहिए कि वे किसी के साथ एकांत में न जाएं. अगर कभी इस तरह की कोई घटना घटती है तो लड़की मां को यह बता दे ताकि मां उस की मदद कर सके.’’

शारीरिक संबंधों में समझदारी

शारीरिक संबंध बनाने से यौनरोग हो सकते हैं, जिन का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. इन बीमारियों में एड्स जैसी जानलेवा लाइलाज बीमारियां भी शामिल हैं. इसलिए पेरैंट्स व टीचर्स को चाहिए कि वे घर व स्कूल में लड़कियों को गर्भनिरोधक गोलियों के बारे मेें बताएं कि इन का उपयोग कैसे और क्यों किया जाता है.

अधिकतर लड़कियों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं हो जाती हैं तो वे या तो मां बन जाती हैं या फिर आत्महत्या कर लेती हैं. उन्हें इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए कि अब इस तरह की गोलियां भी आती हैं, जिन्हें खाने से अनचाहे गर्भ से नजात मिल सकती है. वैसे कई दवाएं अब आसानी से दवा की दुकानों पर भी उपलब्ध हैं. लेकिन दवा लेने से पहले बेहतर होगा कि आप किसी डाक्टर से मिल लें और जो भी पिल्स डाक्टर कहें वही लें.

डाक्टर सुनीता का कहना है कि प्राइवेट अस्पतालों में महिला डाक्टरों द्वारा एक दिन कुछ घंटे किशोरियों की परेशानियों को हल किया जाना चाहिए. यहां परिवार नियोजन की बात होनी चाहिए. स्कूलों को भी समयसमय पर डाक्टरों को साथ ले कर ऐसी चर्चा करानी चाहिए जिस से छात्र और टीचर दोनों को सही जानकारी मिल सके. बढ़ती उम्र की लड़कियों को कंडोम के बारे में बताना जरूरी होता है. यह केवल गर्भ ठहरने से ही नहीं रोकता, बल्कि यौनरोगों से भी बचाव करता है.

पीरियड्स में न घबराएं

किशोर उम्र में सब से बड़ी परेशानी लड़कियों में पीरियड्स को ले कर होती है. आमतौर पर पीरियड्स आने की उम्र 12 से 15 साल के बीच की होती है. अगर इस उम्र में पीरियड्स न आए तो डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

डाक्टर सुनीता का कहना है कि पीरियड में देरी का कारण खानपान में कमी, आनुवंशिक जैसे मां और बहन को अगर पीरियड्स देर से आए होंगे तो उस के साथ भी देरी हो सकती है. कुछ बीमारियों के चलते भी ऐसा होता है. इन बीमारियों में गर्भाशय का न होना, उस का छोटा होना, अंडाशय में कमी होना, क्षय रोग और एनीमिया के कारण भी देरी हो सकती है. डाक्टर से सलाहमशवरा करने के बाद ही पता चलेगा कि सही कारण क्या है.

यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि  कभीकभी लड़की उस समय भी गर्भधारण कर लेती है जब उस के पीरियड्स नहीं होते हैं. डाक्टर सुनीता कहती हैं, ‘‘ऐसा तब होता है जब लड़की का शरीर गर्भधारण के योग्य हो जाता है, लेकिन पीरियड्स किसी कारण से नहीं आते हैं. यह नहीं सोचना चाहिए कि जब तक पीरियड्स नहीं होंगे, गर्भ नहीं ठहर सकता है.

पीरियड्स में कई दूसरी तरह की परेशानियां भी आती हैं. कभीकभी ये समय से शुरू तो हो जाते हैं लेकिन बीच में एकदो माह का गैप भी हो जाता है. शुरुआत में ये नौर्मल होते हैं, लेकिन यह परेशानी बारबार हो तो डाक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है. कभीकभी पीरियड्स का समय तो ठीक होता है, लेकिन यह ज्यादा मात्रा में होते हैं. यदि ध्यान न दिया जाए तो लड़की का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और उस का विकास रुक हो जाता है.

डाक्टर सुनीता कहती हैं कि परेशानी की बात तो यह है कि कुछ लोग अपनी लड़कियों को डाक्टर के पास लाने से घबराते हैं. उन का मानना है कि अविवाहित लड़की की जांच कराने से उस के अंग को नुकसान हो सकता है. जिस से उस का होने वाला पति उस पर शक कर सकता है,  लेकिन अब ऐसा नहीं है. अल्ट्रासाउंड और दूसरे तरीकों से जांच बिना किसी नुकसान के हो सकती है.

बदलते समय के अनुसार करें ड्रैस का चुनाव

टीनएज में शरीर में बदलाव शुरू होता है. इस उम्र से ही सही तरह के इनरवियर का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए. कौटन के इनरवियर पहनने चाहिए. एकदम फिटिंग वाले इनरवियर न पहनें. इस से बौडी के पार्ट की ग्रोथ रुक जाती है.

टीनएज में बौडी को ज्यादा डाइट की जरूरत होती है. ऐसे में शरीरकी जरूरत के हिसाब से डाइट लेनी चाहिए. खाने में जंकफूड से परहेज करें. खाने के साथसाथ ऐक्सरसाइज का भी ध्यान रखें. यह फिटनैस के लिए जरूरी है. फिट बौडी पर हर डै्रस अच्छी लगती है. शरीर की साफसफाई खासकर इनरपार्ट की बहुत जरूरी है. सफाई न होने से फंगस होने की आशंका बढ़ जाती है.

मेरे मम्मीपापा हमेशा एक दूसरे से लड़ते हैं, ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

मेरे मम्मीपापा हमेशा से एकदूसरे से लड़ते आए हैं. पहले मैं कालेज जाता था, तो शाम को घर आ कर अपने कमरे में बंद हो जाया करता था जिस से मुझे उन दोनों की बातें सुननी नहीं पड़ती थीं और न ही झगड़े. जब से हम सभी घर में रहने लगे हैं तब से मुझ से यह रोजरोज का लड़ाईझगड़ा सहा नहीं जा रहा. मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या ऐसा कोई उपाय है जिस से मैं इन दोनों को झगड़ने से रोक सकूं. अगर हाल ऐसा ही रहा तो शायद मैं पागल हो जाऊंगा.

जवाब

यह सही है कि इतना ज्यादा समय घर पर रहना, वह भी इस झगड़े के बीच, बेहद मुश्किल है. लेकिन, इस सिचुएशन से निकलने का तरीका सिर्फ यह है कि आप इस का सामना करें. मम्मीपापा झगड़ा करते हैं तो इस का कोई कारण तो होगा ही. आप को वह कारण पता हो तो उसे सुलझाने की कोशिश कीजिए. ज्यादा कुछ नहीं तो उन्हें समझाइए कि उन के इस तरह झगड़ने के कारण आप की शांति भंग हो रही है जो आप के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है. कोशिश कीजिए कि मम्मी या पापा में से किसी एक के साथ या दोनों के साथ आप थोड़ाबहुत समय बिताएं जिस से उन्हें अपने आपसी झगड़े का ध्यान ही न रहे.

जिस समय वे झगड़ना शुरू करें, आप अपने कमरे में चले जाएं और उन से बात न करें. इस से हो सकता है कि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो और शायद आप को नाराज न करने की गरज से ही वे झगड़ने से खुद को रोकें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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