विधायक को जवाब : निशा किस वारदात से डरी हुई थी- भाग 1

निशा दोपहर की वारदात से बहुत ज्यादा डरी हुई थी, पर उस में बहुत हिम्मत बाकी थी. वह उदास सी कच्चे मकान की तीसरी मंजिल पर पलंग पर लेटी हुई थी. उसे हलका बुखार था. माथा दर्द से फटा जा रहा था. कभीकभी तो निशा अपने दोनों हाथों से सिर को इस तरह पकड़ लेती मानो उसे दबा कर निचोड़ देना चाहती हो. उस के बाल इधरउधर बिखर गए थे. वह बहुत बेचैन थी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. अचानक निशा ने अपने दिल की आवाज सुनी, ‘निशा, तू इस शहरगांव, देश को छोड़ दे,’ और उस ने मरने की ठान ली. उस का चेहरा धीरेधीरे सख्त होने लगा. अचानक वह उठ कर बैठ गई. मगर जैसे ही उस ने उठना चाहा, बगल वाले टूटे पलंग पर लेटे पिता पर उस की नजर पड़ गई.

निशा ने जब गौर से पिता की नंगी पीठ देखी, तो उस के कानों में एमएलए कृपाल सिंह के आदमियों के डंडों की सरसराहट और पिता की चीखें गूंजने लगीं. उसे लगा मानो एमएलए की धमकी भरी तेज आवाज से उस का घर चरमरा कर गिर पड़ेगा. उस की आंखों से आंसू बहने लगे. वह अपने दोनों हाथों से चेहरा छिपा कर रोने लगी. निशा और राजन एकसाथ कोचिंग क्लासों में मिले थे. निशा के पास कुछ नहीं था, पर उस के हर ऐग्जाम में 98 फीसदी मार्क्स आते थे. राजन ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया. राजन पहले मौजमस्ती वाला लड़का था, पर निशा के पढ़ाने पर कोचिंग के मौक टैस्टों में अब वह भी 90 फीसदी मार्क्स लाने लगा था. मार्क्स ही नहीं मिले, दिल भी मिले और बदन भी. अब दोनों को अलग करना मुश्किल था. अचानक निशा के दिल ने फिर आवाज दी, ‘धीरज रखो निशा, सब ठीक हो जाएगा. अगर तुम भाग जाओगी तो पिता का क्या होगा? उस राजन का क्या होगा, जो तुम्हारे प्यार में अपना सबकुछ छोड़ने को तैयार है? तुम्हारे प्यार को ही वह अपनी मंजिल मानता है.

और जब तुम ही नहीं रहोगी तो वह कहां जाएगा? तब शायद वह भी मर जाएगा.’ राजन की बातें निशा के कानों में गूंजने लगीं, ‘नहीं निशा, तुम्हें कुछ नहीं होगा. मुझ पर यकीन करो. मैं इस ऊंचनीच की दीवार को तोड़ कर एक दिन इस सारी बस्ती की क्या सारे शहर के सामने तेरी मांग में सिंदूर भरूंगा. मरने की बात मत करो. अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो मैं खुद को आग लगा दूंगा.’ निशा बड़बड़ाने लगी, ‘‘मुझे कुछ नहीं होगा राजन… मैं तुम्हारे साथ हूं… मैं भी लड़ूंगी इस समाज से भी, पुलिस से भी, मैं भी लड़ूंगी…’’ अचानक निशा ने देखा कि उस के पिता उसी की तरफ आ रहे हैं. वह आंखें बंद कर के सोने का नाटक करने लगी. मगर पिता तो पिता होता है, वे बेटी की हर हरकत को भांप चुके थे. वे उस के टूटे से पलंग पर बैठ गए. उस के गालों पर आंसू देख कर पहले तो सहमे, फिर प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरते हुए बोले, ‘‘तेरा बाप हूं… तेरी हालत को मैं जानता हूं. मगर मैं ऐसा बाप हूं,

जो तेरी इच्छा को जानते हुए भी तेरे लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूं. मैं बेसहारा हूं. ‘‘बेटी, मेढ़क अगर चांद के पास जाना चाहे तो वह फुदकफुदक कर जान दे देगा, फिर भी वह चांद तक नहीं पहुंच पाएगा. हम उसी मेढ़क की तरह हैं. बेटी, भूल जा राजन को. ‘‘मैं मानता हूं कि प्यार करना कोई जुर्म नहीं है. मगर तुम्हारा सब से बड़ा जुर्म यह है कि तुम मेरी बेटी हो… एक हरिजन की बेटी. राजन इस इलाके के एमएलए के बेटे हैं, राजपूत खानदान के एकलौते वारिस हैं. वे ऊंची जाति वाले लोग हम हरिजनों को अपने आंगन में बैठा कर खाना तक नहीं खिलाते… अपना बेटा कहां से देंगे? ‘‘यह दुनिया फूलों की सेज नहीं है बेटी, बहुत कांटे हैं इस में. अपनी जिंदगी बचा लो, भूल जाओ राजन को. पोंछ लो आंसू… पत्थर आंसुओं से कभी नहीं पिघला करते. पत्थरों से सिर टकराने से अपना ही सिर फूटता है बेटी.’’ निशा जो अब तक चुप थी, फफक कर रो पड़ी. उस ने अपने पिता के सीने में अपना चेहरा छिपा लिया. कुछ देर तक बापबेटी एकदूसरे की बांहों में सुबकते रहे. फिर किसी तरह अपनेआप को संभालते हुए पिता बोले, ‘‘बेटी, इतना याद रखो कि हम हरिजन हैं… छोटी जाति के हैं. तुम…’’ बात को बीच में ही काटते हुए निशा बोली, ‘‘मगर बापू, आज जमाना बदल गया है. आप भी जानते हो और राजन भी जानता है कि यह कच्ची बस्ती का मकान हम जल्दी छोड़ देंगे. मुझे जरा इंजीनियरिंग करने दो, मैं लाखों कमाऊंगी. अब कोई हमारे रास्ते को जाति के नाम पर नहीं रोक सकता.

‘‘पर जब मेरे नंबर पता चलते हैं, तो चकरा जाते हैं, इसीलिए राजन इस फर्क को नहीं मानता.’’ ‘‘मैं जानता हूं बेटी, राजन का दिल साफ है. मगर जातपांत और ऊंचनीच की दीवारों को तोड़ना आसान नहीं है. विधायक कृपाल सिंह और वह भी सत्ताकद पार्टी का, किसी भी शर्त पर एक हरिजन की बेटी को अपनी बहू बनाना कबूल नहीं करेगा. यह बात दूसरी है कि वोट मांगने वह घरों में घुसता हो, पर बहू मांगने इस मकान में कभी नहीं आएगा.’’ कुछ देर बाद पिता उठे और अपने पलंग पर जा कर लेट गए. निशा चुपचाप बुत बनी वहीं बैठी रही. उसे कुछ सूझ नहीं रहा था. एक तरफ राजन का प्यार था, तो वहीं दूसरी तरफ जातपांत की दीवार थी. आखिर वह क्या करे? धीरे से निशा भी लेट गई और राजन के बारे में सोचने लगी. राजन तो दिल का राजा था. आज के जमाने में ऊंचनीच और जातपांत को न मानने वाला वह नौजवान सचमुच दिल का बादशाह था. यही वजह थी कि एक हरिजन की बेटी को वह अपना दिल दे बैठा था. उसे उस के कुछ दोस्तों ने कहा था कि नंबरों पर मत जा, औकात देख. निशा को एक दिन की बात याद आ गई, जब राजन उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर शहर से काफी दूर निकल गया था.

मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी निशा ने राजन को कस कर पकड़ा हुआ था कि कहीं वह गिर न जाए. कभीकभी राजन जब अचानक ब्रेक लगा देता, तो निशा पूरी तरह उस पर झुक जाती. तब शरमाते हुए वह सिर्फ इतना ही कह पाती, ‘ठीक से चलाओ न.’ जब दोनों काफी दूर निकल आए तो निशा से नहीं रहा गया और पूछ बैठी कि वे कहां जा रहे हैं? मगर राजन मुसकरा कर बारबार अनसुनी कर देता. आखिर निशा अचानक जोर से बोली, ‘गाड़ी रोकिए.’ राजन मोटरसाइकिल रोक कर निशा की तरफ मुड़ा और मुसकराते हुए बोला कि वह एक रिजौर्ट में पूरा दिन बिताने ले जा रहा?है. पहले तो वह मना करती रही, मगर राजन की बात को ठुकरा नहीं पाई थी. वह निशा को पहली बार इतने शानदार रिजौर्ट में ले कर आया था. निशा ने छक कर खाया. दोनों ने बाद में एक कमरे में पूरा दिन बिताया. राजन निशा की गोद में सिर रख कर लेट गया. तब निशा प्यार से उस के माथे पर हाथ फेरते हुए बोली थी, ‘थक गए क्या?’ राजन भी निशा की आंखों में झांकते हुए प्यार से बोला था,

‘नहीं निशा, इस समय मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे मुझे दुनियाभर की खुशियां मिल गई हैं.’ निशा कुछ नहीं बोली, तो राजन ने कहा, ‘चुप क्यों हो?’ ‘डरती हूं.’ ‘क्यों?’ हिचकिचाते हुए निशा ने कहा, ‘आप विधायक के बेटे, ऊंची जाति के…’ ‘और तुम एक हरिजन की बेटी… यही कहना चाहती हो न तुम?’ राजन थोड़े गुस्से से बोला था. निशा खामोश ही रही. फिर बड़े प्यार से राजन ने अपने दोनों हाथों से उस का चेहरा सामने करते हुए कहा, ‘मैं तुम से कितनी बार कह चुका हूं कि इस तरह की बातें मत किया करो. मैं जो कुछ भी हूं सिर्फ तुम्हारा हूं और तुम मेरी होने वाली पत्नी हो.

मैं तो इतना ही जानता हूं कि अगर तुम नहीं तो मैं भी नहीं.’ निशा अपने बीते हुए दिनों में खोई हुई थी कि अचानक पीछे की छोटी सी खिड़की से कोई कूदा. वह डर गई. घबराते हुए वह पलंग से उठने लगी. फिर जैसे ही बोलने के लिए उस ने मुंह खोलना चाहा, उस साए ने उस का मुंह बंद कर दिया और धीरे से कहा, ‘‘मैं हूं निशा, राजन, तुम्हारा राजन.’’ निशा राजन की बांहों में समा गई. उस के सीने में अपना चेहरा छिपा कर सुबकने लगी. राजन ने उस के बालों पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘मुझे सब मालूम हो गया निशा, लेकिन अब सब ठीक हो जाएगा.

MTV Rodies 19: प्रिंस नरूला और गौतम गुलाटी के बीच हुई लड़ाई, वीडियो वायरल

इन दिनों एमटीवी का शो रोडीज 19: कर्म या कांड खूब सुर्खियां बटोर रहा है.शो पहले ही रिया चक्रवती की वापसी से चर्चा में बना हुआ था, लेकिन अब एक चौकाने वाला वीडियो सामने आया है जिसे देख शो के चर्चे ओर ज्यादा हो रहे है दरअसल, वायरल वीडियो में प्रिंस नरूला और गौतम गुलाटी लड़ते नजर आ रहे है वही, सोनू सूद उन्हे बचाते नजर आ रहे है.

 

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आपको बता दें, कि प्रिंस नरूला और गौतम गुलाटी का लड़ाई का वीडियो एमटीवी इंडिया पर पोस्ट किया गया है जिसमें दोनों के बीच झड़प होती दिख रही है.वही रिया चक्रवती कुर्सी पर बैठी हुई नजर आ रही है.दोनों के बीच पहले बहस होती है फिर धक्का मुक्की शुरु हो जाती है.तभी बीच-बचाव के लिए सोनू सूद आते है फिर कुछ टीम मेंबर्स बचाने के लिए आते है.ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.सोशल मीडिया यूजर्स इस पर रिएक्ट करते दिख रहे है. कुछ गौतम को सही बता रहे है तो कुछ प्रिंस को सही बता रहे है. इतना ही नही, कुछ इससे स्क्रिप्टिड भी बता रहे है.

 

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ये वीडियो एमटीवी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर मौजूद है. इस वीडियो को शेयर कर कैप्शन में लिखा है कि -सॉरी लेकिन इस वीकेंड पर बवाल होगा. बता दें, रोडीज को 19वां सीजन लगातार चर्चा में बना रहता है.इस शो को शनिवार-रविवार , शाम 7 बजे एमटीवी और जियो सिनेमा पर देख सकते है.

नहीं करना चाहती है गदर 3 में अमीषा पटेल एक्टिंग! बताई ये वजह

गदर के बाद गदर 2 का रिस्पॉन्स अच्छा देखने को मिला है लोगों को फिल्म काफी पसंद आई है. इसलिए अबतक फिल्म 400 करोड़ का आकाड़ा पार कर चुकी है. फिल्म में तारा और सकीना को सक्रीन पर देख लोग काफी खुश हुए लेकिन इसकी सक्सेस के बाद जब अमीषा से गदर 3 के लिए पूछा गया तो उन्होने साफ इंकार कर दिया.

 

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हाल ही में अमीषा पटेल ने एक इंटरव्यू दिया जहां उनसे गदर 3 के बारे में कई सवाल किए गए. उन्होने कहा फैंस की भूख पूरी नही हुई वो सकीना और तारा को ओर देखना चाहते है.इस बार हमे एक्टर होने पर नि: स्वार्थ काम करना पड़ा.ऐसे में तारा और स्कीना को फिल्म पीछे रखा गया क्योकि हम कुछ अलग फिल्म बना रहे थे. फर्स्ट हाफ मेरा था बाकि तारा का था. हमे वरिष्ठ एक्टर होने के नाते कोई एतराज नहीं था.

 

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आपको बता दें, कि आगे जह अमीषा पटेल से पूछा गया कि वह गदर 3 करना चाहेगी तो उन्होने साफ इंकार कर दिया और कहा कि गदर3 में अगर उनका स्क्रीनटाइम कम रहा था तो वही नहीं करेंगी. मैं अपने फैंस को निराश नहीं कर सकती हूं. मुझे पता है कि फैंस को लगा है कि उन्हे हम कम दिखाई दिए है इसलिए उन्हे हम वो दिखाएंगे जो वो देखना चाहते है. आखिरकार, वो लोग तारा और सकीना के लिए ही सिनेमाघर आते है.आप केट विंसलेट और लियोनार्डो डी के बिना टाइटैनिक नहीं बना सकते है यही वजह है कि एनआरआई आडियंस ने पार्ट2 को पहले पार्ट की तरह नहीं देखा.

जाने वे संकेत, जिनसे आप जान सकती हैं कि आपका मेल पार्टनर वर्जिन है या नहीं

आज के समय में लड़के हो या लड़की अधिकतर शादी से पहले ही सेक्स के बारे में जानने की चाह रखते हुए पोर्न वीडियो देखना पसंद करने लगते है ऐसे में उन्हें थोड़ी बहुत जानकारी हासिल हो जाती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की उन्हें सेक्स का अनुभव है असल में सेक्स का अनुभव सेक्स करने से ही आता है। अब ऐसे में आप कैसे जान सकती है कि आपका मेल पार्टनर वर्जिन है या नहीं। सबसे पहले आप ये जान लें की वर्जिनिटी परखने का कोई टेस्ट नहीं है।

आमतौर पर लड़कियों के मामले में लोगो की राय बनी होती है कि लड़की का यदि हाइमन टुटा हुआ है तो इसका मतलब वो लड़की वर्जिन नहीं है मतलब वो पहले भी सेक्स कर चुकी है और कई बार ऐसी गलत फहमी के चलते रिश्ते भी टूट जाते हैं लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार हाइमन योनि के पास एक छेद के रूप में होता है। ऐसा भी संभव नहीं है कि यह हर लड़की में हो कई बार जन्म के समय लगभग 10-15 प्रतिशत लड़कियों के शरीर में हाइमन नहीं होता है।

इसलिए हाइमन टूटने से कौमार्य खोने का कोई मतलब ही नहीं बनता है। यहां तक कि यह हाइमन कई बार साइकिलिंग करते समय ,अधिक वजन उठाने से या टम्पून बदलते समय भी टूट जाता है। लेकिन यदि बात करें लड़को की वर्जिनिटी कि तो इसके लिए कोई शारारिक या कोई जाँच का तरीका नहीं है लेकिन आप कुछ संकेतो के जरिए जान सकती हैं कि आपका पार्टनर आपसे पहले भी किसी और के साथ सेक्स कर चुका है। तो चलिए जानते हैं ऐसे संकेतों के बारे में।

घबराहट, एंग्जायटी और शर्माना

90% पुरुषों और महिलाओं को पहली बार सेक्स करने के दौरान परफॉर्मेंस एंग्जाइटी होती है।जिसका कारण उनका सेक्स के प्रति अति-उत्तेजना है जो घबराहट को बढ़ाता है। यदि आपका साथी आपके साथ सेक्स तो करना चाहता है लेकिन आपको छूने से भी घबरा रहा है तो यह संकेत है कि यह उसका फर्स्ट टाइम सेक्स अपील है।

कंडोम का इस्तेमाल सही से ना कर पाना

जिस पुरुष को कंडोम के इस्तेमाल का कोई ज्ञान ना हो । और उसका इस्तेमाल कर पाना मुश्किल हो रहा हो तो, हो सकता है कि यह उसका पहला चांस हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसने कभी सेक्स ना किया हो। हो सकता है कि उसने पहले सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग ही न करा हो।

चुंबन और फोरप्ले की समझ ना होना

किसी के बीच संबंध बनाने से पहले सबसे पहला कदम किस से ही जुडा होता है वर्जिन लड़का सही तरिके से अपनी पार्टनर को चुंबन कर पाने में भी असहज होता है बल्कि जो पहले भी सेक्स कर चुके होते है वो स्मूच या सीधे लिपलॉक किस करने के लिए उत्तेजित होते हैं।

वहीं सेक्स में फोरप्ले का बहुत बड़ा रोल होता है क्योंकि फोरप्ले से लड़के व लड़की दोनों को सुखद सेक्स करने के लिए प्रेरित करता है। जिसे सेक्स के अनुभव होगा वो पहले फोरप्ले जरूर करना चाहेगा साथ ही उसे बेहतर सेक्स मूव्स की जानकारी होगी जिस के जरिए वो लड़की को अच्छे से संतुष्ट करने की कोशिश करेगा लेकिन जो पहली बार सेक्स कर रहा है उसे सही जानकारी नहीं होती है और वह फोरप्ले न करके सेक्स करने की जल्दी में होता है।

योनि सेक्स में परेशानी व जल्दी डिस्चार्ज होंना

पहली बार संबंध बनाने वाले लड़के को बढ़ती हुई कामोत्तेजना के कारण जल्दी डिस्चार्ज होने कि सम्भावना होती है। वहीं योनि सेक्स करते समय सही जगह पर इंटरकोस करने में उन्हें परेशानी आती है जबकि पहले सेक्स कर चुके लड़के को अनुभव होता है। जिससे उन्हें इंटरकोस करने में समस्या नहीं होती।

फर्जी फाइनैंस कंपनियों से रहें सावधान

मथुरा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला विश्वेंद्र सिंह पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करतेकरते थक चुका था. आखिरकार उस ने हार मान कर अपना खुद का कारोबार शुरू करने की ठानी.

इस के लिए विश्वेंद्र सिंह को पैसों की जरूरत थी. इस वजह से उस ने कई बैंकों से लोन लेने के लिए बातचीत की. लेकिन उसे वहां भी निराशा ही हाथ लगी, क्योंकि इस के लिए उसे बैंक में सिक्योरिटी के रूप में अचल संपत्ति या गारंटर की जरूरत थी, लेकिन उस की बेरोजगारी के चलते कोई भी उस का गारंटर बनने को तैयार नहीं था.

एक दिन विश्वेंद्र सिंह की अखबार पढ़ते हुए उस में छपे एक इश्तिहार पर नजर पड़ी. ‘गारैंटैड लोन, वह भी मात्र 2 घंटे में. नो फाइल चार्ज. नो गारंटर. खर्चा लोन पास होने के बाद.’

इसी तरह का एक इश्तिहार और था, जिस में मार्कशीट पर किसी भी कारोबार के लिए लोन देने की बात लिखी थी.

विश्वेंद्र सिंह को इसी तरह के तमाम इश्तिहार उस अखबार में दिखाई पड़े, जिन में 10 लाख से ले कर करोड़ रुपए तक लोन देने की बात की गई थी. उस ने उस अखबार में दी गई मेरठ की एक फाइनैंस कंपनी, जिस का नाम सिक्योर इंडिया सर्विसेज लिमिटेड और पता अबू प्लाजा लेन का था, को फोन किया.

वहां से फोन रिसीव करने वाले शख्स ने उसे बहुत आसान शर्तों पर लोन देने की बात कही. इस के लिए विश्वेंद्र सिंह को मेरठ बुलाया गया.

crime

विश्वेंद्र सिंह जब उस लोन कंपनी के दफ्तर में पहुंचा, तो उस से पहले से बताए गए डौक्यूमैंट की फोटोकौपी व उस का फोटो जमा करवा कर 5 लाख रुपए के लोन की फाइल तैयार की गई और उस लोन की कुल रकम की सिक्योरिटी मनी के रूप में उस से 30 हजार रुपए मांगे गए.

इस पर विश्वेंद्र सिंह चौंका और बोला कि इश्तिहार में तो किसी भी तरह की गारंटी या प्रोसैसिंग फीस लेने की बात नहीं की गई थी, तो फिर यह कैसी गारंटी मनी?

इस पर उस लोन कंपनी की तरफ से कहा गया कि वे उसे 5 लाख रुपए बिना किसी गारंटर के दे रहे हैं और वह 30 हजार रुपए सिक्योरिटी मनी के रूप में नहीं दे सकता.

इस के बाद विश्वेंद्र सिंह 30 हजार रुपए देने को तैयार हो गया और उस ने उस कंपनी के खाते में 10 हजार रुपए जमा करा दिए और बाकी के पैसे उस ने नकद जमा किए. इस के एवज में उसे बिना कंपनी का नामपता लिखी एक रसीद थमा दी गई.

इस के बाद सादा कागज पर एक एग्रीमैंट करवाया गया, जिस में यह लिखा गया था कि स्थानीय तहसीलदार से जांच कराने के बाद ही उसे लोन देने की बात की गई थी.

उस एग्रीमैंट में यह भी लिखा था कि तहसीलदार की रिपोर्ट अगर उस के पक्ष में होगी, तभी यह लोन दिया जाएगा.

इस एग्रीमैंट के बाद विश्वेंद्र सिंह घर चला आया और वह लोन की रकम मिलने का इंतजार करता रहा, लेकिन जब 3 महीने बीत जाने पर भी कंपनी के लोगों ने उस से संपर्क नहीं किया, तो वह सीधे कंपनी के दफ्तर गया और लोन न मिलने की बात कही.

इस पर कंपनी की तरफ से उसे यह कहा गया कि तहसीलदार ने उस के पक्ष में रिपोर्ट नहीं लगाई है, इसलिए अब उसे लोन नहीं दिया जा सकता है.

जब विश्वेंद्र सिंह ने तहसीलदार की रिपोर्ट देखने के लिए मांगी, तो उसे यह कर मना कर दिया गया कि यह गोपनीय रिपोर्ट होती है. हम इसे नहीं दिखा सकते.

इस के बाद विश्वेंद्र सिंह ने सिक्योरिटी मनी के अपने 30 हजार रुपए वापस मांगे, तो उसे भी कंपनी ने यह कर मना कर दिया वह रकम वापस नहीं की जा सकती है.

इस तरह की फर्जी लोन कंपनियों से ठगे जाने का मामला सिर्फ बेरोजगार विश्वेंद्र सिंह का नहीं है, बल्कि हर रोज आसान तरीके से ऐसे लोन लेने के चक्कर में हजारों बेरोजगार ठगी के शिकार होते हैं.

ऐसे पहचानें फर्जी कंपनी

आसान शर्तों पर लोन देने का झांसा देने वाली इश्तिहार कंपनियां ज्यादातर मामलों में फर्जी ही होती हैं, जो भोलेभाले बेरोजगार लोगों को लोन देने के नाम पर शिकार बनाती हैं.

ऐसे में अगर आप को आसान शर्तों पर लोन देने का दावा करता कोई इश्तिहार दिख जाए, तो यह समझ लेना चाहिए कि यह महज ठगी करने वाली कंपनी ही होगी, क्योंकि कोई भी कंपनी बिना अपने रुपए की वापसी की गारंटी जांच की पड़ताल किए किसी को भी लोन नहीं देती है.

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फर्जी लोन कंपनियों की पहचान के मसले पर पंजाब नैशनल बैंक में मार्केटिंग अफसर अभिषेक पांडेय का कहना है कि कोई भी फाइनैंस कंपनी शुरू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी व सिडबी जैसे वित्तीय संस्थानों से लाइसैंस लेना पड़ता है.

ये संस्थाएं लाइसैंस देने के पहले खुलने वाली फाइनैंस कंपनी की कई तरीके से जांचपड़ताल करती हैं.

मानकों पर खरी पाए जाने पर उस कंपनी के लोन कैटीगरी को तय किया जाता है कि वह किस तरह का लोन देना चाहती है. इस में  घर का लोन, गाड़ी के लिए लोन, कारोबार वगैरह की अलगअलग कैटीगरी तय की जाती है.

अभिषेक पांडेय के मुताबिक, कोई भी लोन देने वाली कंपनी एक फीसदी  सालाना के न्यूनतम ब्याज पर कर्ज दे कर नहीं चलाई जा सकती है, वह भी कर्ज वापसी के लिए बिना किसी छानबीन व गारंटी के तो यह एकदम मुश्किल है. अगर कोई कंपनी इस तरह के लोन देने का दावा करती है, तो वह धोखाधड़ी व ठगी के मकसद से ही ऐसा कर रही होती है.

इन से ही लें लोन

अगर आप बेरोजगार हैं और किसी तरह का लोन लेना चाहते हैं, तो इस के लिए बैंक व फाइनैंस कंपनी से ही आप का लोन लेना ज्यादा अच्छा होता है.

एक वित्तीय सलाहकार मनमोहन श्रीवास्तव के मुताबिक, लोन देने के पहले बैंकों द्वारा लोन लेने वाले के पते की छानबीन कर पूरी गारंटी के साथ ही लोन दिया जाता है.

बैंक द्वारा लोन के लिए सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक ही फीस ली जाती है. अगर आप किसी कारोबार के लिए लोन ले रहे हैं, तो बैंक उस के लिए उस कारोबार का प्रोजैक्ट मांगता है. उस प्रोजैक्ट रिपोर्ट के संतुष्ट होने के बाद ही लोन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है.

मनमोहन श्रीवास्तव का आगे कहना है कि बैंक द्वारा जो ब्याज की रकम ली जाती है, वह इश्तिहारी लोन कंपनियों के बजाय ज्यादा तो होती है, लेकिन यह भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक ही तय होती है, जिस में धोखाधड़ी का कोई डर नहीं होता है.

उन का कहना है कि अगर अखबारों में आसान शर्तों पर लोन देने के इश्तिहार दिखाई दें, तो उस पर ध्यान न दे कर बैंकों से लोन लेने की कोशिश करें. इस लोन को हासिल करने में भले ही समय लगे, लेकिन इस में आप की जेब का पैसा डूबने का डर नहीं रहता है.

मेरे बौयफ्रैंड ने मुझसे ब्रेकअप कर लिया, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 26 वर्षीय युवती हूं. बौयफ्रैंड के साथ ढाई साल से रिलेशनशिप चल रहा था कि एक दिन आ कर वह  बोला कि वह मुझसे शादी नहीं कर सकता क्योंकि उस की मां को मैं पसंद नहीं हूं. वजह यह बताई कि मैं शांत नेचर की हूं और उन की फैमिली में फिट नहीं बैठूंगी. मैं क्या करूं, मेरा स्वभाव ही इंट्रोवर्ट है. फिर भी मैं ने बौयफ्रैंड को समझाने की कोशिश की कि मैं उस की खातिर अपने को बदलने की पूरी कोशिश करूंगी. लेकिन उस ने मुझसे ब्रेकअप कर लिया. मैं बहुत अपसेट हो गई हूं. भीतर से टूट गई हूं क्योंकि मैं उस से बहुत प्यार करती हूं. उस के जैसा दोबारा शायद ही मुझे कोई मिले. लगता है लाइफ में कुछ नहीं बचा. क्या करूं? कहीं अपने साथ कुछ गलत न कर बैठूं.

जवाब

सब से पहले तो अपने को बेचारी मत बनाइए. ऐसा बौयफ्रैंड जो आप के लिए अपने घरवालों के आगे स्टैंड नहीं ले सकता, वह आप का पूरी जिंदगी क्या साथ देगा. वजह भी ऐसी बेतुकी, कि गले नहीं उतरती. सब का अपनाअपना स्वभाव होता है. लेकिन परिवार में आ कर सब एकदूसरे से एडजस्ट कर ही लेते हैं. और फिर ज्यादा जरूरी बात है, कपल का एकदूसरे को समझना. फैमिली तो आगे की बात है. ससुराल में हर लड़की को कुछ न कुछ एडजस्ट करना होता ही है और कुछ ससुराल वालों को. ताली दोनों हाथ से बजती है.
बौयफ्रैंड की मां ने आप को रिजैक्ट किया, उस की वजह कुछ और भी हो सकती है, जो हो सकता है आप का बौयफ्रैंड छिपा रहा हो. खैर, हमारी राय तो यह है कि जो बौयफ्रैंड बेतुकी वजह से और मां के कहने पर एक ?झटके में ब्रेकअप कर ले उस से आप आगे क्या उम्मीद रखेंगी.

देखिए, कहना आसान है कि उसे भूल जाने की कोशिश करें. लेकिन कोशिश तो करनी ही पड़ेगी. जब उसे आप की परवा नहीं तो आप क्यों उस के पीछे अपनी जिंदगी बेजार कर रही हैं. वह आप को डिजर्व नहीं करता. दिल से प्यार करने वाली मुश्किल से मिलती है, शायद आप के बौयफ्रैंड को इस बात का अंदाजा नहीं.

फिलहाल, अब आप खुद को मजबूत बनाएं. जिंदगी में आगे बढि़ए, अपने को दूसरे कामों में बिजी रखिए. दोस्तों के साथ घूमनेफिरने जाइए. बहुतकुछ नया देखनेसुनने को मिलेगा. दिल का बोझ कम होगा. सोच का दायरा बढ़ेगा. जिंदगी की राह पर हिम्मत से चलती रहिए, अपनेआप रास्ते मिलते जाएंगे.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

अंदरूनी बीमारियां और अंधविश्वास का जाल

मर्दों के बजाय औरतों के नाजुक अंगों की बनावट इस तरह की होती है, जिन में बीमारियों वाले कीटाणु आसानी से दाखिल हो सकते हैं. इस की वजह से उन में तमाम तरह की बीमारियां देखने को मिलती हैं.

ये बीमारियां मर्दऔरत के असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने, असुरक्षित बच्चा जनने, माहवारी के दौरान गंदे कपड़े का इस्तेमाल करने व अंगों की साफसफाई न रखने की वजह से होती हैं.

इस से औरतों के अंगों पर घाव होना, सैक्स संबंध बनाते समय खून का बहना व तेज दर्द, पेशाब में जलन व दर्द, अंग के आसपास खुजली होना, जांघों में गांठें होना व अंग से बदबूदार तरल जैसी चीज निकलने व मर्दों के अंग पर दाने, खुजली, घाव जैसी समस्याओं से दोचार होना पड़ता है.

अगर इन का समय से डाक्टरी इलाज न कराया जाए तो औरतों में बांझपन, एचआईवी एड्स, गर्भाशय में गांठ व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां जन्म ले सकती हैं.

अकसर औरतों में होने वाली अंदरूनी बीमारियों में वे समय से इलाज न करा कर झाड़फूंक जैसे अंधविश्वासों में पड़ कर शारीरिक, माली व दिमागी शोषण का शिकार हो जाती हैं.

12वीं जमात तक पढ़ी शीला को कुछ दिनों से पेड़ू में दर्द की शिकायत थी. इस के बाद उस के अंग के आसपास दाने निकलने शुरू हो गए और फिर बदबूदार पानी बहने लगा.

शीला ने अपनी  यह समस्या पड़ोस की एक औरत को बताई, तो उस ने बताया कि उसे किसी बुरी आत्मा के साए ने जकड़ लिया है. एक तांत्रिक बाबा हैं, जो उस की इस समस्या का हल कर सकते हैं.

शीला बाबा के पास पहुंची, तो बाबा ने बताया कि उस के ऊपर किसी चुड़ैल का साया है, जिस की वजह से उसे यह समस्या हो रही है.

शीला ने बाबा से अपनी इस समस्या का उपाय पूछा, तो बाबा ने कहा कि इस के लिए अनुष्ठान करना पड़ेगा, जिस पर तकरीबन 20 हजार रुपए का खर्च आएगा.

शीला ने अपने पति को बिना बताए उस बाबा को 20 हजार रुपए दे दिए और झाड़फूंक कराना शुरू कर दिया. लेकिन जब 2 महीने बीतने के बाद भी शीला की समस्या घटने के बजाय और बढ़ गई, तो उस ने अपने पति को यह बात बताई.

शीला का पति पढ़ालिखा था. उस ने शीला को समझाबुझा कर एक लेडी डाक्टर को दिखाया, तो डाक्टर ने शीला को अंग की बीमारी बताई.

उस डाक्टर ने शीला और उस के पति का एकसाथ इलाज किया और शीला कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो गई.

इस सिलसिले में डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अकसर मर्दऔरत द्वारा असुरक्षित सैक्स संबंध बनाने की वजह से अंग में इंफैक्शन की शिकायत हो जाती है. यह समस्या औरत से मर्द में या मर्द से औरत में फैलने की वजह बनती है.

अंग में इंफैक्शन की वजह से औरत में पेशाब करते समय दर्द या जलन की तकलीफ बढ़ जाती है. इस के अलावा संबंध बनाते समय औरत को तेज दर्द होता है, वहीं मर्दों में अंग से स्राव, अंडकोषों में दर्द, अंग पर दाने व पेशाब करते समय दर्द व जलन की समस्या देखने को मिलती है.

ये सभी समस्याएं इंफैक्शन की वजह से होती हैं, न कि भूतपे्रत या टोनेटोटके की वजह से. ऐसे में इन बीमारयों का इलाज झाड़फूंक से कराना कभीकभी जानलेवा भी साबित हो जाता है.

अगर किसी औरत या मर्द में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें अपने नजदीकी अस्पताल में जा कर जरूर डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए.

बांझपन में झाड़फूंक

अकसर औरतों में बच्चा न होने की समस्या देखने को मिलती है, जो कई वजह से होती है. अगर औरत की बच्चेदानी में किसी तरह की गांठ हो या उसे किसी तरह का इंफैक्शन हो, तो बच्चा पैदा होने में यह वजह रुकावट बनती है. ऐसे में बहुत सी औरतें बच्चा पाने की लालसा में झाड़फूंक करने वाले बाबाओं के पास चली जाती हैं, जहां उन्हें बच्चा तो नहीं पैदा होता है, बल्कि बाबाओं द्वारा माली व शारीरिक शोषण जरूर झेलना पड़ जाता है.

कभीकभी पाखंडी बाबाओं द्वारा बच्चा पैदा करने के नाम पर झाड़फूंक करने की आड़ में औरतों की इज्जत भी लूट ली जाती है, जिस के चलते कभीकभी उन के बच्चा ठहर जाता है. औरतें ये बातें इसलिए छिपा जाती हैं, क्योंकि उन्हें बांझपन के ताने से छुटकारा मिल जाता है.

ऐसे तमाम मामले सामने आते रहते हैं, जिन में झाड़फूंक करने वाले पाखंडी बाबाओं द्वारा औरतों की इज्जत लूटने की वारदातें सामने आती हैं. बाद में पोल खुलने पर इन बाबाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ती है.

डाक्टर प्रीति मिश्रा के मुताबिक, अकसर किशोरावस्था से ही नाजुक अंगों की साफसफाई न करने की वजह से औरतों के अंग में इंफैक्शन हो जाता है, जो उन में बच्चा न पैदा होने की समस्या को जन्म देता है. इस हालत में औरतों को चाहिए कि वे अपने परिवार के लोगों के साथ बातचीत कर के किसी अच्छे डाक्टर को अपनी समस्या बताएं.

बांझपन आज के दौर में शाप नहीं रहा है, बल्कि इस का समय से इलाज कराने से औरतें आसानी से मां बन सकती हैं. अगर किसी औरत या मर्द की बच्चा पैदा करने की कूवत में किसी तरह की कमी होती है, तो पतिपत्नी आपसी रजामंदी से टैस्ट ट्यूब बेबी या किराए की कोख से भी औलाद का सुख ले सकते हैं.

एचआईवी का खतरा

सामाजिक संस्था ‘गौतम बुद्ध जागृति समिति’ के सचिव श्रीधर पांडेय का कहना है कि अकसर औरत या मर्द में से किसी एक के अंग में होने वाला इंफैक्शन उस के साथ सैक्स करने की वजह से दूसरे साथी में चला जाता है, जिसे एसटीडी यानी यौन संचारी रोग के नाम से जाना जाता है. यह बीमारी मर्द व औरत द्वारा मुख मैथुन या गुदा मैथुन, संक्रमित अंगों को आपस में रगड़ने की वजह से होती है.

इस के अलावा मर्द का इंफैक्शन वाला वीर्य जब औरत के अंग में जाता है, तो मर्द की बीमारी औरत को भी लग जाती है. इस हालत में इलाज की जगह बाबाओं से झाड़फूंक कराना न केवल घातक साबित होता है, बल्कि समय से इलाज न होने से औरत और मर्द में एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

श्रीधर पांडेय का आगे कहना है कि उन की संस्था नोएडा, उत्तर प्रदेश में एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से एचआईवी एड्स से बचाव को ले कर जागरूकता का काम कर रही है. इस दौरान वे तमाम ऐसे एचआईवी पीडि़तों से मिले, जो पहले अंग के इंफैक्शन से पीडि़त थे और झाड़फूंक व इलाज में देरी होने की वजह से इन का यह इंफैक्शन एचआईवी में बदल गया.

इस तरह के लोगों में औरतों की तादाद सब से ज्यादा थी, क्योंकि औरतें अकसर अपनी बीमारी का इलाज डाक्टर से कराने के बजाय झाड़फूंक में ज्यादा विश्वास रखती हैं, जिस की वजह से उन को इस तरह की घातक बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

डाक्टर मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि अगर औरत या मर्द के अंगों में किसी तरह की खुजली, दाने या घाव दिखाई पड़ते हैं, तो इस का समय रहते इलाज शुरू कर देना चाहिए, जिस से बीमारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है. अगर यह समस्या औरत या मर्द में से किसी एक को है, तो उस दौरान दोनों को आपस में संबंध बनाने से बचना चाहिए या सैक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए.

अंग के इंफैक्शन में साफसफाई का खास खयाल रखना चाहिए. साथ ही, किसी तरह के अंधविश्वास से दूरी बना कर रखने में ही भलाई होती है.

डाक्टर प्रीति मिश्रा कहती हैं कि औरतों में सैक्स संबंधी बीमारियों के नतीजे ज्यादा घातक होते हैं, जिस से वे तनाव का भी शिकार होती हैं. ऐसे में वे झाड़फूंक के अंधविश्वास में आसानी से पड़ जाती हैं.

अगर किसी औरत में अंग के इंफैक्शन के लक्षण दिखाई दें, तो उसे अपनी समस्या अपने पति व परिवार वालों को बिना संकोच के बतानी चाहिए, जिस का समय रहते इलाज किया जा सके.

डाक्टर प्रीति मिश्रा आगे बताती हैं कि अकसर अंग में इंफैक्शन की वजह से पैदा होने वाला बच्चा या तो समय से पहले पैदा हो जाता है या बेहद कमजोर व अंधा भी हो सकता है. मां में इंफैक्शन की वजह से उस के बच्चे को निमोनिया जैसी बीमारियां भी आसानी से जकड़ लेती हैं.

अगर कोई औरत अपने अंदरूनी अंग में इंफैक्शन से पीडि़त है, तो उस के पेट में लंबे समय तक दर्द बना रह सकता है. उस के गर्भाशय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी जन्म ले सकती है. एचआईवी होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

ऐसे में आज के जमाने में हर शख्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह विज्ञान के तर्कों पर चलते हुए समय पर अपना इलाज कराए, न कि पाखंडी बाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपनी जान जोखिम में डाले.

सेक्स रिश्तों के लिए कितना जरूरी

रिया और राहुल की नई शादी हुई थी पर राहुल पर काम का प्रेशर ज्यादा होने से वो रिया को वक़्त ही नहीं दे पा रहा था अक्सर उसे शहर से बाहर जाना पड़ता था संयुक्त परिवार होने के कारण रिया को भी ऑफिस और घर मे पूरा सामंजस्य बिठाना पड़ रहा था ऐसे में उनमें अक़्सर झगड़े होने लगे थे और नौबत यहाँ तक आ गयी कि रिया गुस्से में अपने मायके चली गई तब राहुल के एक दोस्त के कहने पर दोनों मैरिज कॉउंसलर के पास गए.

उसने दोनों का पक्ष सुनने के बाद दोनों से एक छोटा दो 3 दिन का ट्रिप प्लान करने की सलाह दी जहाँ सिर्फ वो दोनों हों और वहाँ से लौटकर मिलने को कहा.लौटकर आने तक दोनों का झगड़ा सुलझ गया था अब उन्हें उस कॉउंसलर के पास जाने की जरूरत ही नहीं थी.प्रश्न ये है कि इन तीन चार दिनों में उन दोनों के बीच क्या बदल गया ?

इसका सीधा सा जवाब है कि पति पत्नी का संबंध भले ही आत्मा से जुड़ा बँधन है फिर भी शारीरिक अंतरंगता इस रिश्ते के लिए बेहद महत्वपूर्ण है . जब भी इस रिश्ते में सेक्स की कमी होती है तो कहीं न कहीं अलगाव पनपने लगता है. चूँकि हम भारतीय समाज मे रहते हैं जहाँ पर इस विषय पर चर्चा करना आज भी वर्जित है ऐसे में इस बात को समझना और भी मुश्किल हो जाता है.जबकि ये एक स्वाभाविक ज़रूरत है जिसकी पूर्ति होना आवश्यक है.पति पत्नी के संबंधों की मजबूती के लिए इसके अलावा भी बहुत सी बातें जरूरी हैं पर इस पहलू को नज़रअंदाज़ तो कतई नहीं किया जा सकता है.

हर किसी के जीवन में कभी न कभी ये प्रश्न खड़ा होता है कि क्या शारिरिक संबंधों का शादी के रिश्ते में होना जरूरी है इसके बिना क्या ये रिश्ता खत्म हो जाएगा ? सवाल लाज़मी है जवाब भी उतना ही आसान .जी हाँ ये बहुत ही जरूरी है आपसी तालमेल के लिए.

इसी तरह सुमि और रजत की अरेंज्ड मैरिज हुई थी पर कुछ ही दिनों में दोनों में बात बात पर लड़ाइयाँ होने लगीं बात इतनी बढ़ी कि दोनों में बोलचाल बन्द हो गई .फिर किसी के कहने पर वो दोनों एक कॉउंसलर के पास गए दोनों से बात करके उसने उन्हें जो समस्या बताई उस से दोनों ही सहमत थे .असल में बात ये थी कि नई शादी के कुछ महीनों तो सब नया सा था तो दोनों को अच्छा लगता था फिर धीरे धीरे एक जैसा सब चलने से दोनों को ही सब उबाऊ लगने लगा जिसका सीधा असर उनके आपसी संबंधों पर पड़ने लगा.

रजत की इच्छा रहती कि कभी सुमि भी पहल करे ऐसा न होने पर वो एक मशीन की तरह एक ही ढर्रे पर यंत्रवत सब करता इस से न उसे संतुष्टि होती न ही सुमि को इसके उलट सुमि चाहती कि रजत उसे पहले खूब प्यार करे उसके बाद सेक्स की शुरुवात हो पर संकोच वश कह नही पाती इसके कारण दोनों के रिश्ते में परेशानी खड़ी हो गई .कुल मिलाकर बात ये है कि पति पत्नी के रिश्ते में मानसिक जुड़ाव जितना ज़रूरी है उस से भी ज़्यादा जरूरी है शारीरिक संबंधों का तालमेल वरना रिश्ते की गाड़ी को पटरी से उतरते देर नहीं लगती.इस बात को लेकर हर व्यक्ति का अपना नज़रिया होता है परंतु एक बात तय है कि ये प्यार जताने का एक तरीका है जब दो लोग एक दूसरे पर पूरा भरोसा कायम कर लेते हैं तभी आगे बढ़ते हैं .भारतीय समाज मे शादी के बाद ही शारीरिक संबंधों को जायज़ माना जाता है परंतु लिव इन के नए कॉन्सेप्ट ने इस सोच को काफी हद तक प्रभावित किया है.ऐसे में ये जानना बेहद आवश्यक हो जाता है कि किसी भी रिश्ते की सफलता के लिए शारीरिक संबंधों की भूमिका क्या होती है.

तनाव को दूर करने में कारगर

इस बात को लेकर कई शोध हुए हैं जिनमे ये बताया गया है कि सेक्स से मानसिक तनाव कम होता है.ऐसे में ये तनाव कम करने में मदद करता है और छोटे मोटे आपसी विवाद सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

आपसी सामंजस्य

किसी भी कपल की सेक्सुअल लाइफ ये पता लगता है कि उनकी आपसी साझेदारी और समझ का स्तर क्या है.किसी भी कपल की सेक्स लाइफ उनके बीच विश्वास का प्रतीक होती है.

असुरक्षा की भावना से मुक्ति

सेक्स रिश्ते में एक विश्वास क़ायम करता है जिस से एक दूसरे से दूर रहने पर भी साथ होने का अहसास बना रहता है .एक दूसरे को खो देने की जो असुरक्षा मन मे होती है उस भावना को ये दूर करता है.

प्यार जताने का तरीका

ये प्यार जताने का एक कारगर तरीका होता है. अंतरंग संबंध जितने मजबूत और स्वस्थ्य होते हैं रिश्ता भी उतना ही मजबूत होता है. जिन रिश्तों में सेक्स की कमी होती है अक्सर उन रिश्तों में तनाव होता है या कभी कभी तो अलगाव की स्थितियाँ भी निर्मित हो जाती हैं.

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

एक शोध में ये बात सामने आई है कि रोज एक बार सेक्स करने वाले लोग सेक्स से परहेज रखने वालों से ज़्यादा स्वस्थ्य और लंबा जीवन जीते हैं.सेक्स के दौरान शरीर से जो हार्मोन निकलते हैं वो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं.इस दौरान एक मिनट में लगभग पाँच कैलोरी खर्च होती है जिसके कारण ये व्यायाम जैसा लाभ देता है.

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