ऐप्स से करें ‘पीरियड्स लौक’

आज की भागदौड़भरी जिंदगी को अगर पासवर्ड भरी लाइफ कहा जाए तो गलत नहीं होगा. हम अपने जीमेल, फेसबुक, फोन, एटीएम पिन व कई तरह के अन्य पासवर्ड्स को याद रखने में इतना ज्यादा ध्यान देते हैं कि अपनी हर महीने की सब से महत्त्वपूर्ण डेट को ही भूल जाते हैं. जी हां, हम पीरियड्स डेट के बारे में बात कर रहे हैं. अधिकांश युवतियों को अपनी पीरियड्स डेट्स याद नहीं होतीं, वे अंदाज से तारीख बताती हैं. अगर इस महीने की बता भी दें तो पिछले महीने की तारीख नहीं बता पातीं. तारीख याद नहीं रहने की वजह से कई बार उन्हें छोटी छोटी प्रौब्लम्स से भी गुजरना पड़ता है.

लेकिन अब आप को पीरियड्स की तारीख याद रखने की जरूरत नहीं. आप का एक टच आप की पीरियड्स डेट को लौक कर के आप को टैंशन फ्री रखेगा. आप सोच रही होंगी भला कैसे, तो कुछ ऐसे कि आप अपना मोबाइल तो हमेशा अपने पास रखती होंगी. बस, अपने फोन में पीरियड ट्रैकर ऐप्स डाउनलोड कर तारीख याद रखने के झंझट से छुटकारा पा कर अपने पीरियड्स को हैप्पी पीरियड्स बनाइए.

पीरियड ट्रैकर ऐप्स केवल ऐंड्रौयड फोन में ही नहीं चलते बल्कि आईफोन में भी डाउनलोड किए जा सकते हैं. कुछ में एक साधारण सा कलेंडर होता है जबकि कुछ में सर्विकल म्यूकस और शरीर के तापमान को भी मापा जा सकता है. ये ऐप्स केवल पीरियड्स की तारीख ही नहीं बताते बल्कि इन से आप अपनी प्रैग्नैंसी भी प्लान कर सकती हैं. ये ऐप्स आप को बताते हैं कि आप कब कंसीव कर सकती हैं, कब फर्टिलिटी ज्यादा होती है, कब संबंध बनाने से बचना चाहिए. इस में आप पीरियड्स के दौरान होने वाले शारीरिक बदलाव व फीलिंग्स के नोट्स भी तैयार कर सकती हैं.

ये हैं कुछ पीरियड्स ट्रैकर ऐप्स

पीरियड ट्रैकर लाइट

यह फ्री ऐप है जिसे आप अपने फोन के प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकती हैं. इस ऐप की खास बात यह है कि इस का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है. इस में बस आप को अपने पीरियड के पहले और आखिरी दिन एक क्लिक करना होगा. इस के बाद ऐप आप को इस डाली गई सूचना के आधार पर यह बताता है कि आप का पीरियड साइकिल कितने दिन का होगा, महीने के किन दिनों में कंसीव करने की संभावना अधिक होगी साथ ही रिमाइंडर आप को बताता रहता है कि किस तारीख को आप का पीरियड आने वाला है.

पिंक पैड

यह ऐप पीरियड ट्रैकर होने के साथसाथ महिलाओं से जुड़े कई विषयों पर जरूरी जानकारी भी देता है. इस पीरियड ट्रैकर में पूरी दुनिया की महिलाओं द्वारा लिखे गए पोस्ट भी मिलेंगे, जो फैशन, ब्यूटी और हैल्थ जैसे विषयों पर होते हैं. इस ऐप की खास बात यह है कि इस में पीरियड का काउंटडाउन आप की होम स्क्रीम पर दिखाई देता है जिस से आप को ऐप ओपन कर के यह देखने की भी जरूरत नहीं कि पीरियड्स में कितने दिन बाकी हैं.

क्लू

यह ऐप काफी आकर्षक तरीके से डिजाइन किया गया है. इस में आप को अपने पीरियड की तारीख और सर्कल के बारे में लिखना होता है. कुछ महिलाओं में यह सर्कल 28 दिन का होता है तो कुछ में 30 दिन का. यह ऐप इस सूचना का इस्तेमाल कर आप को अगले महीने की पीरियड तारीख और अंडोत्सर्ग के बारे में बताता है. इस ऐप में आप अपने मूड व शारीरिक बदलाव व हार्मोनल लक्षण के बारे में एक कस्टम टैग भी बना सकती हैं. इस में आप कब सैक्स किया और गर्भ निरोधक दवाओं को खाने का रिमाइंडर भी लगा सकती हैं.

मंथली साइकल्स

इस का इस्तेमाल कर आप आसानी से अपने पीरियड्स को मौनिटर व मैनेज कर सकती हैं. इस कलेंडर में मैंस्ट्रुअल सर्कल को हाईलाइट करने के लिए कलर डौट्स का इस्तेमाल किया जाता है.

साइकल्स

यह ऐप उन महिलाओं के लिए उपयोगी है जो मूड और अन्य लक्षणों को ट्रैक नहीं करना चाहतीं, सिर्फ यह जानना चाहती हैं कि कब उन का पीरियड आने वाला है.

इस के अलावा माई साइकल्स, पी लौग, फर्टिलिटी फ्रैंड मोबाइल, लव साइकल्स मैंस्ट्रुअल कलेंडर, किंडरा, आई पीरियड, पीरियड फ्री कई ऐप्स हैं जिन्हें डाउनलोड कर के पीरियड्स डेट को लौक किया जा सकता है.

पीरियड ट्रैकर ऐप्स के फायदे

  • इन ऐप्स में आप की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाता है.
  • जो महिलाएं कंसीव करना चाहती हैं उन्हें यह ऐप महीने के सब से फर्टाइल दिनों की जानकारी देता रहता है, साथ ही जो अपनी प्रैग्नैंसी टालना चाहती हैं उन्हें भी पता चलता है कि कब संबंध बनाना सुरक्षित
  • नहीं है.
  • इस के रिमाइंडर से पता चलता है कि पीरियड्स में कितने दिन बचे हैं, जिस से आप को पैड व हैल्थ हाईजीन प्रौडक्ट्स कैरी करने में आसानी होती है.
  • आप को अपने मैंस्ट्रुअल सर्कल के बारे में पता चलता रहता है. अगर कभी पीरियड्स संबंधी कोई समस्या होती है तो आप को अपने पिछले सारे रिकौर्ड्स डाक्टर को बताने में आसानी होती है.

इन ऐप्स की सहायता से आप ट्रैक कर सकती हैं कि आप का पीरियड सर्कल नौर्मल चल रहा है या नहीं.

रिहाई: अनवार मियां के जाल में फंसी अजीजा का क्या हुआ?

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आखिर क्यो कंगना को थप्पड़ मारना चाहती है ये पाकिस्तानी एक्ट्रेस?

बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत जितना अपनी फिल्मो को लेकर चर्चा में रहती है उसे कही ज्यादा वह अपने बेबाक बोल के लिए जानी जाती है. उनका हर मुद्दे पर खुलकर बात करना कई लोगों को पसंद आती है तो कई लोग उन्हे इसी चीज के लिए ट्रोल भी करते है. ऐसा ही इस बार उनके पाकिस्तान के खिलाफ बोलने पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस नौशीन शाह उन्हे थप्पड़ मारने की बात करती हुई नजर आई है.

 

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आपको बता दें, कि इन दिनों पाकिस्तानी एक्ट्रेस नौशीन शाह का बयान चर्चा में है उन्होने खुद एक्ट्रेस कंगना रनौत को थप्पड़ मारने की बात कही है उनके लिए तारीफ भी करती नजर आई है दरअसल, नौशीन शाह मोमिन साकिब के चैट शो में हद कर दी में पहुंची. जहां उनसे पूछा गया कि आप किस बॉलीवुड एक्ट्रेस से मिलना चाहेगी तो उन्होने कहा कि कंगना रनौत से मिलना चाहूंगी. और मिलकर उन्हे थप्पड़ मारना चाहती हूं. नौशीन कहती है कि कंगना जिस तरह मेरे देश के बारे में बकवास करती है. जिस तरह वो पाकिस्तानी आर्मी के बारे में बकवास करती है. मैं उनके साहस को सलाम करती हूं.

 

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नौशीन आगे कहती है, उनके पास कोई नॉलेज नहीं है लेकिन देश के बारे में बात करती हैं.वो भी किसी और के देश के बारें में बोलती है. अपने देश पर फोकस करो, एक्टिंग पर फोकस करो, डायरेक्शन में फोकस करो. अपने विवादों पर फोकस करो और अपने बॉयफ्रेंड पर फोकस करो.और भी बहुत कुछ. तुम्हे कैसा पता कि पाकिस्तान के लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता है. तुम्हे पाकिस्तान आर्मी के बारे में क्या पता है.

कंगना की एक्टिंग की तारीफ

नौशीन इन सब बातो के अलावा कहती है कि कंगना की एक्टिंग काफी अच्छी है साथ ही उन्हे एक्सट्रीमिस्ट भी कहती है. बात कंगना रनौत की प्रोजेक्ट की करें, तो उनकी चंद्रमुखी 2 के अलावा इमरजेंसी भी है इमरजेंसी में कंगना रनौत इंदिरा गांधी के रोल में नजर आएंगी. उन्होने ही फिल्म का निर्देशन किया है. वही चंद्रमुखी 2, 19 सितंबर को रीलिज होगी.

एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए एल्विश यादव, फैंस हुए खुश – देखे वीडियो

बिग बॉस ओटीटी 2 के विनर एल्विश यादव इन दिनों सुर्खियों में बने हुए है फेमस यूट्यूबर एल्विश की एक झलक पाने के लिए फैंस बेताब रहते है ऐसे में उन्हे एयरपोर्ट पर स्प़ॉट किया गया है जहां उनके फैंस का तांता लग गया है, उनके स्टाइल की हर कोई तारीफ करने लगा. लोग उनपर खूब प्यार बरसाते नजर आए. देखने वाले उनपर कमेंट करने लगे.

 

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आपको बता दें, कि एल्विश यादव गुरुवार को मुंबई में एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए हैं. एल्विश यादव को देखते ही पैपराजी से लेकर उनके फैंस उनकी एक झलक के लिए बेताब दिखे. एल्विश यादव को पैपराजी ने अपने कैमरे में कैद किया. इसके बाद एल्विश यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.

एल्विश यादव को पैपराजी ने अपने कैमरे में कैद किया. इसके बाद एल्विश यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. एल्विश यादव को लेकर एक फैन ने लिखा है, ‘राव साहब का कोई मुकाबला नहीं हैं.’ एक फैन ने लिखा है, ‘एल्विश यादव भाई डाउन टू अर्थ हैं.’ एल्विश यादव जब ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ के घर में थे तभी काफी चर्चा में रहते थे. एल्विश यादव ने ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली थी.

 

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एल्विश यादव जब ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ के घर में थे तभी काफी चर्चा में रहते थे. एल्विश यादव ने ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में वाइल्ड कार्ड एंट्री ली थी. एल्विश यादव अपने यूट्यूब वीडियोज से काफी अच्छी कमाई करते हैं. एल्विश यादव महीने का करीब 15 लाख रुपये कमाते हैं और उनकी नेटवर्थ करीब 40 करोड़ रुपये है.

कुत्ते-बिल्लियों को चुमते है तो हो जाइए सावधान, जा सकती है जान

आज कल के दौर में कुत्ते और बिल्लियों को पालने को चलन काफी बढ़ रहा है लोग घर में पालतू जानवर रखना बेहद पसंद करते है लेकिन कई जानवरों से इतना घुल-मिल जाते है कि उन्हे चुमने तक लग जाते है लेकिन ऐसा करना कितना ठीक है या नहीं, ये आज हम आपको बताएंगे क्योकि ऐसा करना आपको बीमार कर सकता है. शरीर में कई तरह के रोग पैदा कर सकता है लेकिन ये सिर्फ उन लोगों के लिए है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है या कोई महिला प्रेग्नेंट है तो वो अपने पालतू जानकर को किस ना करें.

क्योकि माना जाता है कि कुत्ते के मुंह और लार में कैप्नोसाइटोफागा बैक्टीरिया रहते हैं, जो करीबी संपर्क या काटने से लोगों में फैल सकता है. अधिकांश लोग बीमार नहीं पड़ेंगे, लेकिन ये बैक्टीरिया कभी-कभी कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोगों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिसके कारण गंभीर बीमारी हो सकती है और किसी किसी स्थिति में मौत भी हो सकती है.

बिल्लियां कभी-कभी काटने और खरोंच से भी संक्रमण फैला सकती हैं. कुत्ते और बिल्लियां दोनों मेथिसिलिन-प्रतिरोधी जीवाणु स्टैफिलोकोकस ऑरियस (एमआरएसए) के भंडार हैं, पालतू जानवरों के साथ करीबी संपर्क को जूनोटिक संचरण के लिए एक अहम जोखिम कारक के रूप में पहचाना जाता है.

पालतू जानवरों से कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?

जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोगों को जूनोटिक रोग या जूनोज कहा जाता है. साथ रहने वाले जानवरों के 70 से ज्यादा कीटाणु लोगों में फैल सकते हैं.

  • कभी-कभी, पालतू जानवर जिसमें जूनोटिक कीटाणु होता है वह बीमार लग सकता है. लेकिन अक्सर कोई दिखाई देने वाला लक्षण नहीं होता, जिससे आपके लिए संक्रमित होने का जोखिम बढ़ जाता है, क्योंकि आपको अपने पालतू जानवर में कीटाणु के होने का शक नहीं होता.
  • जूनोज सीधे पालतू जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है, जैसे लार, शारीरिक तरल पदार्थ और मल के संपर्क के जरिए, या अप्रत्यक्ष रूप से, जैसे दूषित बिस्तर, मिट्टी, भोजन या पानी के संपर्क के जरिए.
  • स्टडी से पता चलता है कि पालतू जानवरों से जुड़े जूनोज का प्रसार कम है. हालांकि, संक्रमणों की असल संख्या को कम करके आंका गया है क्योंकि कई जूनोज सूचित करने योग्य नहीं हैं, या उनके कई एक्सपोजर रास्ते या सामान्य लक्षण हो सकते हैं.

पैसों पर टिकी मोहब्बत का यही अंजाम होना था

पुरानी दिल्ली स्थित जामा मसजिद के पास सड़क के किनारे दाहिनी ओर कई मध्यम दर्जे के होटल हैं, जिन में दूरदराज से जामा मसजिद देखने आए लोग ठहरते हैं. इन्हीं होटलों में एक है अलदानिश, जिस के मैनेजर सोहेल अहमद हैं.  19 नवंबर, 2016 को वह होटल के रिसेप्शन पर बैठे अपनी ड्यूटी कर रहे थे, तभी साढ़े 11 बजे एक लड़का एक लड़की के साथ उन के पास आया. दोनों काफी खुश लग रहे थे. लड़के ने साथ आई लड़की को अपनी पत्नी बताते हुए कहा कि वह जामा मसजिद देखने आया है. उसे एक दिन के लिए एक कमरा चाहिए. सोहेल ने लड़के का नामपता पूछ कर रजिस्टर में नोट किया. उस के बाद आईडी मांगी तो उस ने जेब से अपना आधार कार्ड निकाल कर उन के सामने काउंटर पर रख दिया. आधार कार्ड उसी का था. उस का नाम आजम और पता राजीव बस्ती, कैप्टननगर, पानीपत, हरियाणा था. इस के बाद सोहेल ने सर्विस बौय मोहम्मद मिनहाज को बुला कर आजम को कमरा नंबर 203 देखने के लिए भेज दिया.

थोड़ी देर बाद अकेले ही वापस आ कर आजम ने कहा कि कमरा उसे पसंद है. इस के बाद अन्य औपचारिकताएं पूरी कर के सोहेल ने कमरा नंबर-203 उस के नाम से बुक कर दिया. कमरे का किराया 12 सौ रुपए जमा कर के आजम वापस कमरे में चला गया. सोहेल ने रुपए और आधार कार्ड अपनी दराज में रख लिया. करीब 2 घंटे बाद आजम मैनेजर सोहेल के पास आया और अपना आधार कार्ड मांगते हुए कहा कि उसे उस की फोटो कौपी करानी है. सोहेल ने आधार कार्ड दे दिया तो वह तेजी से बाहर निकल गया. उस के जाने के थोड़ी देर बाद मोहम्मद मिनहाज किसी काम से कमरा नंबर 203 में गया तो उस ने वहां जो देखा, सन्न रह गया.

मिनहाज भाग कर नीचे आया और मैनेजर सोहेल अहमद के पास जा कर बोला, ‘‘कमरा नंबर 203 के बाथरूम में लड़की की लाश पड़ी है. शायद उस के साथ जो आदमी आया था, उस ने उसे मार दिया है.’’ यह सुन कर सोहेल परेशान हो उठा. उस ने तुरंत होटल के मालिक इसलामुद्दीन के बेटे दानिश को फोन कर के सारी बात बताई. दानिश होटल आने के बजाय सीधे थोड़ी दूर स्थित जामा मसजिद पुलिस चौकी पर पहुंचा और चौकीइंचार्ज मोहम्मद इनाम को सारी बात बता दी. चौकीइंचार्ज इनाम चौकी में मौजूद सिपाहियों को ले कर होटल जा पहुंचे. लाश का सरसरी तौर पर निरीक्षण करने के बाद उन्होंने हत्याकांड की सूचना थाना जामा मसजिद के थानाप्रभारी अनिल बेरीवाल को दे दी.

सूचना मिलते ही अनिल बेरीवाल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल से ही उन्होंने इस घटना की सूचना  उच्चाधिकारियों को दे दी थी. अतिरिक्त थानाप्रभारी धन सिंह सांगवान भी सूचना पा कर होटल पहुंच गए थे. थोड़ी देर में सैंट्रल डिस्ट्रिक की क्राइम टीम तथा एफएसएल टीम भी पहुंच गई थी. लाश का सिर बाथरूम में टौयलेट पौट के ऊपर तथा पैर दरवाजे की तरफ थे. गरदन पर चोट के निशान थे. लगता था हत्या गला दबा कर की गई थी. एफएसएल टीम ने अपना काम निपटा लिया तो अनिल बेरीवाल ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जयप्रकाश नारायण अस्पताल भिजवा दिया. होटल से लौट कर पुलिस टीम ने अपराध संख्या 135/2016 पर हत्या के इस मुकदमे को अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर मामले की जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी धन सिंह सांगवान को सौंप दी गई. धन सिंह सांगवान ने होटल के मैनेजर सोहेल अहमद को थाने बुला कर पूछताछ की तो उस ने हत्या का शक मृतका के शौहर आजम पर जताया. आजम अपना आधार कार्ड भले ही साथ ले गया था, लेकिन उस में दर्ज उस का पता मैनेजर ने अपने रजिस्टर में लिख लिया था. उस का मोबाइल नंबर भी लिखा हुआ था.

आजम का पता धन सिंह को मिल ही गया था. उन्होंने उसे गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में एसआई धर्मवीर, हैडकांस्टेबल नीरज तथा कुछ अन्य लोगों को शामिल किया. अगले दिन सुबह 8 बजे वह अपनी टीम के साथ होटल के रजिस्टर में लिखे पते पर पहुंचे तो पता चला कि आजम पहले वहां एक कमरा किराए पर ले कर रहता था. लेकिन अब वह अपनी अम्मी समीना, अब्बा मोहम्मद सलीम के साथ राजीव कालोनी के मकान नंबर-1109/10 (गंदा नाला के निकट) रहता है. इस के बाद धन सिंह वहां पहुंचे तो वह घर में सोता हुआ मिल गया. उसे जगाया गया तो दिल्ली पुलिस को देख कर उस के हाथपांव फूल गए. पुलिस पहचान के लिए अलदानिश होटल के सर्विस बौय मिनहाज को साथ ले कर आई थी. आजम को देखते ही उस ने कहा, ‘‘साहब, यही आदमी उस औरत के साथ होटल में आया था.’’ मुजरिम के पकड़े जाने से धन सिंह सांगवान ने राहत की सांस ली. आजम ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. उस ने मृतका का नाम शबनम बताया. वह कभी उस के पड़ोस में रहने वाले अलादिया की पत्नी थी. लेकिन इस समय वह दिल्ली में रहता था. धन सिंह ने आजम से अलादिया का फोन नंबर ले कर उसे फोन किया कि उस की पत्नी दुर्घटना में घायल हो गई है, वह दिल्ली के थाना जामा मसजिद पहुंच जाए. धन सिंह आजम को ले कर दिल्ली आ गए. वह थाने पहुंचे तो मृतका का शौहर अलादिया उन का इंतजार कर रहा था. उसे जयप्रकाश नारायण अस्पताल ले जाया गया तो उस ने मृतका की लाश की शिनाख्त अपनी पत्नी शबनम के रूप में कर दी.

अगले दिन शबनम की लाश का पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि उस की मौत दम घुटने से हुई थी. आजम को अगले दिन तीसहजारी कोर्ट में पेश कर के पूछताछ के लिए एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान आजम ने शबनम का मोबाइल (बिना सिम का), अपना मोबाइल और श्मशान घर की छत पर फेंका गया शबनम का पर्स बरामद करा दिया. पूछताछ में उस ने शबनम की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

सोनिया उर्फ शबनम जिला शामली के गांव कुडाना के रहने वाले रामनरेश की बेटी थी. 2 बेटों पर एकलौती होने की वजह से सोनिया को कुछ ज्यादा ही लाडप्यार मिला, जिस से वह स्वच्छंद हो गई. लेकिन उस के कदम बहकते, उस के पहले ही रामनरेश ने सन 2009 में उस की शादी उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद के लोनी के रहने वाले करण के साथ कर दी. शुरूशुरू  में तो सब ठीक रहा, लेकिन जब घरगृहस्थी का बोझ सोनिया पर पड़ा तो वह परेशान रहने लगी. करण की आमदनी उतनी नहीं थी, जितने उस के खर्चे थे. करण उस की फरमाइशें पूरी नहीं कर पाता था. सोनिया ने देखा कि करण उस के मन की मुरादें पूरी नहीं कर पा रहा है तो जल्दी ही उस का मन उस से भर गया.

करण और सोनिया के बीच मनमुटाव रहने लगा. कोई न कोई बहाना बना कर सोनिया अकसर कुडाना आ जाती. उसी बीच बस से आनेजाने में उस की मुलाकात बस कंडक्टर अलादिया से हुई. वह गाजियाबाद का रहने वाला था. वह सोनिया की सुंदरता पर मर मिटा. उसे खुश करने के लिए अलादिया उस की हर मांग पूरी करने लगा. इस का नतीजा यह निकला कि एक दिन सोनिया अलादिया के साथ भाग गई. अलादिया सोनिया को ले कर सोनीपत पहुंचा और वहां कैप्टननगर में किराए का कमरा ले कर रहने लगा. कुछ दिनों बाद अलादिया ने सोनिया के साथ निकाह कर लिया और उस का  नाम शबनम रख दिया. सोनिया की इस हरकत से नाराज हो कर ससुराल वालों ने ही नहीं, मायके वालों ने भी उस से रिश्ता खत्म कर लिया. सोनिया उर्फ शबनम अलादिया के साथ खुश थी. उसे खुश रखने के लिए अलादिया उस की हर बात मानता था और उस के सारे नाजनखरे उठाता था. चूंकि अलादिया बस कंडक्टर था, इसलिए वह सुबह घर से निकलता तो देर रात को ही घर वापस आता था. दिन भर शबनम अकेली रहती थी. उस के पड़ोस में आजम भी अकेला ही रहता था. उस के अम्मीअब्बू राजीव कालोनी में गंदा नाला के निकट रहते थे.

वह शबनम का हमउम्र था. शबनम उसे बहुत अच्छी लगती थी, इसलिए कोई न कोई बहाना बना कर वह उस से बातें करने की कोशिश करता था. वह एक कबाड़ी के यहां काम करता था, जहां से उसे 9 हजार रुपए वेतन मिलता था.

चूंकि आजम अकेला ही रहता था. इसलिए सारे पैसे खुद पर खर्च करता था. लेकिन इधर शबनम पर दिल आया तो वह उस के लिए खानेपीने की चीजें ही नहीं, गिफ्ट भी लाने लगा. फिर तो जल्दी ही दोनों के बीच अवैधसंबंध बन गए. चूंकि अलादिया दिन भर घर से बाहर रहता था, इसलिए आजम को शबनम से मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी. लेकिन इस तरह की बातें कहां छिपी रहती हैं. शबनम और आजम के संबंधों की जानकारी अलादिया को हो गई. उस ने इस बारे में शबनम से पूछा तो उस ने कहा कि कभीकभार आजम उस से मिलने घर आ जाता है, लेकिन उस से उस के संबंध ऐसे नहीं हैं, जिसे गलत कहा जा सके. अलादिया समझ गया कि शबनम आजम से अपने अवैध संबंधों को स्वीकार तो करेगी नहीं, इसलिए उसे दोनों को चोरीछिपे पकड़ना होगा. कुछ दिनों बाद एक दिन अलादिया काम पर जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन काम पर गया नहीं. 3-4 घंटे इधरउधर समय गुजार कर वह दोपहर को अचानक घर पहुंचा तो देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है. उस ने शबनम को आवाज लगाई तो थोड़ी देर में शबनम ने दरवाजा खोला. उस समय उस के कपड़े तो अस्तव्यस्त थे ही, चेहरे का भी रंग उड़ा हुआ था.

शबनम की हालत देख कर अलादिया को अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि अंदर क्या हो रहा था. वह उसी बारे में सोच रहा था कि अंदर से सिर झुकाए आजम निकला. अलादिया ने उसे रोक कर खूब खरीखोटी सुनाई और अपने घर आने पर सख्त पाबंदी लगा दी. कुछ कहे बगैर आजम चुपचाप चला गया.

उस के जाने के बाद अलादिया ने शबनम की जम कर खबर ली. शबनम ने माफी मांगते हुए फिर कभी आजम से न मिलने की कसम खाई. इस के बाद कुछ दिनों तक तो शबनम आजम से दूरी बनाए रही, लेकिन जब उस ने देखा कि अलादिया को उस पर विश्वास हो गया है तो वह फिर लोगों की नजरें बचा कर आजम से घर से बाहर मिलने लगी. आजम शबनम को फोन कर के कहीं बाहर बुला लेता और वहीं दोनों तन की प्यास बुझा कर घर वापस लौट आते. शबनम को खुश करने के लिए आजम उस की हर मांग पूरी करता था. आजम और शबनम भले ही चोरीछिपे घर से बाहर मिलते थे, लेकिन अलादिया को उन की मुलाकातों का पता चल ही जाता था.

परेशान हो कर अलादिया शबनम के साथ पानीपत छोड़ कर दिल्ली आ गया और बदरपुर में किराए क  कमरा ले कर रहने लगा. उस का सोचना था कि इतनी दूर आ कर शबनम और आजम का मिलनाजुलना नहीं हो पाएगा. लेकिन उन के बीच संबंध उसी तरह बने रहे. मोबाइल द्वारा दोनों के बीच बातचीत होती ही रहती थी. मौका मिलते ही शबनम आजम को फोन कर देती थी और जहां दोनों को मिलना होता था, आजम वहां आ जाता था. इस के बाद किसी होटल में कमरा ले कर दोनों मिल लेते थे. शबनम जब भी आजम से मिलने आती थी, वह उस के लिए कोई न कोई गिफ्ट ले कर आता था, उसे नकद रुपए भी देता था.

19 नवंबर को शबनम ने फोन कर के आजम को दिल्ली के महाराणा प्रताप बसअड्डे पर बुलाया. आजम पानीपत से चल कर करीब 10 बजे बसअड्डे पर पहुंचा तो शबनम उसे वहां इंतजार करती मिली. वहां से दोनों जामा मस्जिद के पास स्थित होटल अलदानिश पहुंचे और मौजमस्ती के लिए किराए पर कमरा ले  लिया. पहले दोनों ने जी भरकर मौजमस्ती की. उस के बाद दोनों बातें करने लगे. शबनम ने आजम से 10 हजार रुपए मांगे. आजम ने कहा कि इस समय उस के पास इतने रुपए नहीं हैं तो शबनम को गुस्सा आ गया और उस ने आव देखा न ताव, एक करारा थप्पड़ आजम के गाल पर जड़ दिया. शबनम के हाथ से थप्पड़ खा कर आजम को भी गुस्सा आ गया. शबनम की इस हरकत का बदला लेने के लिए आगेपीछे की सोचे बगैर आजम कूद कर उस के सीने पर सवार हो गया और दोनों हाथों से गला पकड़ कर दबा दिया. पलभर में ही शबनम ने दम तोड़ दिया.

शबनम की हत्या करने के बाद आजम ने लाश को उठाया और उसे बाथरूम की फर्श पर लिटा कर उस का पर्स और मोबाइल फोन ले कर होटल के रिसैप्शन पर पहुंचा. वहां बैठे होटल के मैनेजर सोहेल अहमद से अपना आधार कार्ड फोटोस्टेट कराने के बहाने ले कर वह फरार हो गया. बसअड्डे से उस ने  पानीपत जाने वाली बस पकड़ी और अपने घर पहुंच गया. थोड़ी देर बाद उस ने शबनम का खाली पर्स कालोनी में बने श्मशान घर की छत पर फेंक दिया. शबनम के मोबाइल फोन से उस का सिम निकाल कर बाहर फेंक दिया और मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. उस ने सोचा था कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी, लेकिन घटना के अगले ही दिन दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

23 नवंबर को रिमांड की अवधि समाप्त होने पर उसे फिर से तीसहजारी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरी चाची अक्सर अपने कमरे में रहती है उन्हें देखकर लगता है वो खुश नहीं हैं, मैं क्या करूं ?

सवाल

मेरे चाचाचाची की अभी कुछ समय पहले ही शादी हुई है. मेरी उम्र 19 वर्ष है और मेरे चाचाचाची की उम्र यही कुछ 26-27 के आसपास है. मुझे अपनी चाची को देख कर लगता है जैसे वे खुश नहीं हैं और हमेशा उदास रहती हैं. मैं कालेज जाती हूं, वापस आती हूं तो अपने कमरे में ही रहती हूं जिस कारण कभी चाची से घुलीमिली भी नहीं. समझ नहीं आता उन से कैसे पूछूं कि क्या परेशानी है?

जवाब

आप की और आप की चाची की उम्र में कुछ ज्यादा फर्क नहीं है, आप चाहें तो उन से हिलनेमिलने की कोशिश कर सकती हैं. आप का और उन का व्यवहार एकदूसरे से अलग हो सकता है, व्यक्तित्व अलग हो सकता है मगर इस का मतलब यह नहीं कि आप उन्हें परेशान देख कर भी चुप बैठी रहें, यह तो   नैतिक भी नहीं होगा. आप उन्हें समय देने की कोशिश कीजिए. यदि वे आप को बता दें कि उन्हें किस बात से परेशानी है और उस में आप उन की मदद कर सकें तो इस से बेहतर क्या होगा.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

कोमल हाथों में हथियार आखिर कैसे आए

‘‘मैं तब फर्स्ट ईयर में पढ़ती थी. जयपुर के महेश नगर इलाके से शाम तकरीबन साढ़े 6 बजे मैं पैदल ही घर से ट्यूशन के लिए निकली. आगे जहां लोगों की कम चहल पहल थी वहां पहुंची, तो मैं ने देखा कि सामने एक आदमी मुझे इशारा कर रहा था. वह साइन लैंग्वेज में कुछ कह रहा था. मैं ने पलट कर पीछे देखा तो एक अन्य आदमी भी मुझे फौलो करता नजर आया.

‘‘जब तक मैं समझ पाती कि दोनों एक दूसरे से मेरे बारे में ही बात कर रहे हैं, तब तक उन दोनों ने आ कर मुझे जकड़ लिया और करीब 20 कदम दूर खड़ी एक कार तक घसीटते हुए ले गए. जब वे मुझे कार में धकेल रहे थे तो मैं ने उसी समय एक व्यक्ति को किक मार कर नीचे गिरा दिया और कार से बाहर निकल गई. ऐसे में कार में बैठे 3 और बदमाश मुझे पकड़ कर वहीं मारपीट करने लगे.

‘‘मारपीट व छीना झपटी के दौरान मेरा बैग नीचे गिर गया और उस में रखा चाकू बाहर आ गया. उन लोगों की नजर चाकू पर नहीं पड़ी, लेकिन मैंने बैग के बाहर गिरे चाकू को देख लिया था. ऐसे में उन की मार खाकर मैं ने सड़क पर गिरने का नाटक किया और चाकू उठा कर हिम्मत से उन की तरफ लहरा दिया. मेरे हाथ में चाकू देख कर वे सकपका गए और एकदम पीछे हट गए. मैं मौका देख कर वहां से भाग निकली.

‘‘इस घटनाक्रम को वहां दूर खड़े 8-10 लोग देख रहे थे. मुझे भागता देख उन्हें सारा माजरा समझ आ गया और वे तुरंत कार के पास आ कर बदमाशों से सवाल जवाब करने लगे और मामला गड़बड़ देख उन्होंने बदमाशों की धुनाई करनी शुरू कर दी. उन लोगों की मदद से मैं घर पहुंची. घर पहुंच कर मैंने पेरैंट्स को सारी बातें बताईं और परिजनों के साथ थाने गई, जिस से पुलिस ने आगे की तहकीकात शुरू की.’’

जयपुर के महेश नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली माधवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आगे बताया, ‘‘दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद मैं ने अपने बैग में चाकू रखना शुरू कर दिया था. मैं अपनी ओर से सभी युवतियों को यह कहना चाहती हूं कि स्प्रे, मिर्च पाउडर व चाकू जैसी चीजें हर युवती को खुद की हिफाजत के लिए अपने पास जरूर रखनी चाहिए.’’

सभ्य समाज में हथियारों का कोई काम नहीं है. यह जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है कि वह समाज के लोगों में भरोसा और माहौल में शांति बनाए रखे, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा. भरोसा इस कदर उठ चुका है कि युवतियां अपने बचाव के लिए हथियार रखने को मजबूर हैं. युवतियां बदमाशों के खिलाफ अपने कोमल हाथों में हथियार थाम रही हैं.

दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद लाखों लोगों के विरोध और अपराधियों को सख्त सजा देने की मांग के बाद भी समाज के उन लोगों की सोच पर इन सब का कोई असर नहीं हुआ, जो युवतियों को महज शारीरिक हवस को पूरा करने की नजर से देखते हैं. आज भी देशभर में रोज दर्जनों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां युवतियों का अपहरण कर बलात्कार किया जा रहा है. बढ़ते अपराध पर रोक लगाने में नाकामी से भी अब युवतियां हताश हो चुकी हैं. ऐसे में वे खुद की हिफाजत के लिए खुद आगे आने व हथियार उठाने को मजबूर हैं.

समाज में तेजी से आ रहे इस बदलाव को देखते हुए क्या अब यह समझ लेना चाहिए कि युवतियों को अपनी हिफाजत के लिए खुद ही हथियार उठाने होंगे? अगर ऐसा है तो देश में पुलिस का क्या काम है? क्या युवतियों के पास हथियार उठाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है? युवतियां हथियार न उठाएं, तो खुद की हिफाजत के लिए क्या करें?

गौरतलब है कि दिल्ली में हुए गैंगरेप हादसे के बाद युवतियों ने हथियार रखने की जरूरत पर जोर दिया है. आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो जयपुर में 2011 से कमिश्नरेट लागू होने के बाद से अब तक 2,368 महिलाएं आर्म लाइसैंस के लिए अप्लाई कर चुकी हैं, जिन में से 648 को लाइसैंस मिल भी चुका है. वहीं देश के दूसरे शहरों में भी आर्म लाइसैंस के लिए अप्लाई करने वाली महिलाओं की तादाद में पिछले 2-3 साल में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

सैल्फ डिफैंस ट्रेनर रिचा गौड़ बताती हैं कि पिछले 2 साल में मार्शल आर्ट व कराटे में युवतियों की भागीदारी 70 फीसदी तक बढ़ी है. मैं राजस्थान पुलिस एकेडमी समेत कई शिक्षण संस्थानों में युवतियों को सैल्फ डिफैंस की ट्रेनिंग दे रही हूं. हम कुल 4 युवतियों ने मिल कर सैल्फ डिफैंस ट्रेनिंग की शुरुआत की थी, आज हमारे ग्रुप से 65 युवतियां जुड़ी हुई हैं, जो ट्रेनर के रूप में युवतियों को ट्रेनिंग दे रही हैं.

जयपुर की पुलिस अफसर शिल्पा चौधरी का कहना है, ‘‘खुद की रक्षा के लिए हथियार से ज्यादा आत्मविश्वास की जरूरत होती है. युवतियों को सैल्फ प्रोटैक्शन के लिए खुद को तैयार करना है, तो उन्हें सैल्फ डिफैंस ट्रेनिंग लेनी चाहिए. कराटे और मार्शल आर्ट सीखना चाहिए, ताकि मुसीबत के समय वे खुद की रक्षा कर सकें. पर मालूम रहे कि 4 इंच से बड़ा चाकू या कोई हथियार रखना गैरकानूनी है.’’

पिस्टल शूटर राजश्री चूड़ावत का कहना है, ‘‘शूटर होने के कारण मेरा सैल्फ कौन्फिडैंस हमेशा बेहतर रहता है. हालांकि जिस पिस्टल से हम शूट करते हैं, वह पिस्टल बदमाशों पर फायर करने के काम नहीं आती, लेकिन फिर भी कहीं अकेले जाते हैं तो मन में सुरक्षा की भावना रहती है. कम से कम इस पिस्टल से बदमाशों को डराने का काम तो किया ही जा सकता है. हालांकि अभी तक कोई ऐसा हादसा मेरे साथ नहीं हुआ कि पिस्टल दिखाने की जरूरत पड़ी हो, लेकिन कभी ऐसा मौका पड़ेगा तो मैं चूकूंगी नहीं. कहीं भी रेप जैसे मामले सामने आते हैं, तो मेरा खून खौल उठता है. हालिया हालात को देखते हुए युवतियों के लिए सैल्फ प्रोटैक्शन बहुत जरूरी है.’’

इस मामले में रिटायर जिला और सैशन जज अजय कुमार सिन्हा का कहना है, ‘‘सरकार और पुलिस प्रशासन युवतियों को सुरक्षा देने में नाकामयाब हैं. यही वजह है कि युवतियों को आज कोमल हाथों में हथियार थामने पर मजबूर होना पड़ रहा है. युवतियों का पुलिस प्रशासन से भरोसा उठ रहा है. मेरा मानना है कि हथियार रखने के बजाय युवतियों को सैल्फ डिफैंस की ट्रेनिंग लेनी चाहिए.’’

राजस्थान यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफैसर सोहन शर्मा का कहना है कि युवतियों को समाज में हमेशा से ही सभ्य, शालीन और शांत स्वभाव का माना जाता रहा है, लेकिन अब आने वाले समय में यह सोच बदल जाएगी. इस का जिम्मेदार भी समाज खुद ही होगा. घर के बाहर ही नहीं, घर के भीतर भी युवतियां सुरक्षित नहीं हैं. तमाम तरह के रिश्ते भी आज के दौर में तारतार हो रहे हैं. ऐसे में युवतियां खुद की हिफाजत के लिए हथियार उठाने को विवश हो रही हैं.

उम्र के साथ ऐसे बदलता है सेक्स बिहेवियर

शादीशुदा जिंदगी में दूरियां बढ़ाने में सेक्स का भी अहम रोल होता है. अगर परिवार कोर्ट में आए विवादों की जड़ में जाएं तो पता चलता है कि ज्यादातर झगड़ों की शुरुआत इसी को ले कर होती है. बच्चों के बड़े होने पर पतिपत्नी को एकांत नहीं मिल पाता. ऐसे में धीरेधीरे पतिपत्नी में मनमुटाव रहने लगता है, जो कई बार बड़े झगड़े का रूप भी ले लेता है. इस से तलाक की नौबत भी आ जाती है. विवाहेतर संबंध भी कई बार इसी वजह से बनते हैं.

मनोचिकित्सक डाक्टर मधु पाठक कहती हैं, ‘‘उम्र के हिसाब से पति और पत्नी के सेक्स का गणित अलगअलग होता है. यही अंतर कई बार उन में दूरियां बढ़ाने का काम करता है. पतिपत्नी के सेक्स संबंधों में तालमेल को समझने के लिए इस गणित को समझना जरूरी होता है. इसी वजह से पतिपत्नी में सेक्स की इच्छा कम अथवा ज्यादा होती है. पत्नियां इसे न समझ कर यह मान लेती हैं कि उन के पति का कहीं चक्कर चल रहा है. यही सोच उन के वैवाहिक जीवन में जहर घोलने का काम करती है. अगर उम्र को 10-10 साल के गु्रपटाइम में बांध कर देखा जाए तो यह बात आसानी से समझ आ सकती है.’’

शादी के पहले

आजकल शादी की औसत उम्र लड़कियों के लिए 25 से 35 के बीच हो गई है. दूसरी ओर खानपान और बदलते परिवेश में लड़केलड़कियों को 15 साल की उम्र में ही सेक्स का ज्ञान होने लगता है. 15 से 30 साल की आयुवर्ग की लड़कियों में नियमित पीरियड्स होने लगते हैं, जिस से उन में हारमोनल बदलाव होने लगते हैं. ऐसे में उन के अंदर सेक्स की इच्छा बढ़ने लगती है. वे इस इच्छा को पूरी तरह से दबाने का प्रयास करती हैं. उन पर सामाजिक और घरेलू दबाव तो होता ही है, कैरियर और शादी के लिए सही लड़के की तलाश भी मन पर हावी रहती है. ऐसे में सेक्स कहीं दब सा जाता है.

इसी आयुवर्ग के लड़कों में सेक्स के लिए जोश भरा होता है. कुछ नया करने की इच्छा मन पर हावी रहती है. उन की सेहत अच्छी होती है. वे हर तरह से फिट होते हैं. ऐसे में शादी, रिलेशनशिप का खयाल उन में नई ऊर्जा भर देता है. वे सेक्स के लिए तैयार रहते हैं, जबकि लड़कियां इस उम्र में अपनी इच्छाओं को दबाने में लगी रहती हैं.

30 के पार बदल जाते हैं हालात

महिलाओं की स्थिति: 30 के बाद शादी हो जाने के बाद महिलाओं में शादीशुदा रिलेशनशिप बन जाने से सेक्स को ले कर कोई परेशानी नहीं होती है. वे और्गेज्म हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार होती हैं. महिलाएं कैरियर बनाने के दबाव में नहीं होती. घरपरिवार में भी ज्यादा जिम्मेदारी नहीं होती. ऐसे में सेक्स की उन की इच्छा पूरी तरह से बलवती रहती है. बच्चों के होने से शरीर में तमाम तरह के बदलाव आते हैं, जिन के चलते महिलाओं को अपने अंदर के सेक्सभाव को समझने में आसानी होती है. वे बेफिक्र अंदाज में संबंधों का स्वागत करने को तैयार रहती हैं.

पुरुषों की स्थिति: उम्र के इसी दौर में पति तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रहा होता है. शादी के बाद बच्चों और परिवार पर होने वाला खर्च, कैरियर में ग्रोथ आदि मन पर हावी होने लगता है, जिस के चलते वह खुद को थका सा महसूस करने लगते हैं. यही वह दौर होता है जिस में ज्यादातर पति नशा करने लगते हैं. ऐसे में सेक्स की इच्छा कम हो जाती है.

महिला रोग विशेषज्ञा, डाक्टर सुनीता चंद्रा कहती हैं, ‘‘हमारे पास बांझपन को दूर करने के लिए जितनी भी महिलाएं आती हैं उन में से आधी महिलाओं में बांझपन का कारण उन के पतियों में शुक्राणुओं की सही क्वालिटी का न होना होता है. इस का बड़ा कारण पति का मानसिक तनाव और काम का बोझ होता है. इस के कारण वे पत्नी के साथ सही तरह से सेक्स संबंध स्थापित नहीं कर पाते.’’

नौटी 40 एट

40 के बाद की आयुसीमा एक बार फिर शारीरिक बदलाव की चौखट पर खड़ी होती है. महिलाओं में इस उम्र में हारमोन लैवल कम होना शुरू हो जाता है. उन में सेक्स की इच्छा दोबारा जाग्रत होने लगती है. कई महिलाएं अपने को बच्चों की जिम्मेदारियों से मुक्त पाती हैं, जिस की वजह से सेक्स की इच्छा बढ़ने लगती है. मगर यह बदलाव उन्हीं औरतों में दिखता है जो पूरी तरह से स्वस्थ रहती हैं. जो महिलाएं किसी बीमारी का शिकार या बेडौल होती हैं, वे सेक्स संबंधों से बचने का प्रयास करती हैं.

40 प्लस का यह समय पुरुषों के लिए भी नए बदलाव लाता है. उन का कैरियर सैटल हो चुका होता है. वे इस समय को अपने अनुरूप महसूस करने लगते हैं. जो पुरुष सेहतमंद होते हैं, बीमारियों से दूर होते हैं वे पहले से ज्यादा टाइम और ऐनर्जी फील करने लगते हैं. उन के लिए सेक्स में नयापन लाने के विचार तेजी से बढ़ने लगते हैं.

50 के बाद महिलाओं में पीरियड्स का बोझ खत्म हो जाता है. वे सेक्स के प्रति अच्छा फील करने लगती हैं. इस के बाद भी उन के मन में तमाम तरह के सवाल आ जाते हैं. बच्चों के बड़े होने का सवाल मन पर हावी रहता है. हारमोनल चेंज के कारण बौडी फिट नहीं रहती. घुटने की बीमारियां होने लगती हैं. इन परेशानियों के बीच सेक्स की इच्छा दब जाती है.

इस उम्र के पुरुषों में भी ब्लडप्रैशर, डायबिटीज, कोलैस्ट्रौल जैसी बीमारियां और इन को दूर करने में प्रयोग होने वाली दवाएं सेक्स की इच्छा को दबा देती हैं. बौडी का यह सेक्स गणित ही पतिपत्नी के बीच सेक्स संबंधों में दूरी का सब से बड़ा कारण होता है.

डाक्टर मधु पाठक कहती हैं, ‘‘ऐसे में जरूरत इस बात की होती है कि सेक्स के इस गणित को मन पर हावी न होने दें ताकि सेक्स जीवन को सही तरह से चलाया जा सके.’’

रिलेशनशिप में सेक्स का अपना अलग महत्त्व होता है. हमारे समाज में सेक्स पर बात करने को बुरा माना जाता है, जिस के चलते वैवाहिक जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आने लगती हैं. इन का दवाओं में इलाज तलाश करने के बजाय अगर बातचीत कर के हल निकाला जाए तो समस्या आसानी से दूर हो सकती है. लड़कालड़की सही मानो में विवाह के बाद ही सेक्स लाइफ का आनंद ले पाते हैं. जरूरत इस बात की होती है कि दोनों एक मानसिक लैवल पर चीजों को देखें और एकदूसरे को सहयोग करें. इस से आपसी दूरियां कम करने और वैवाहिक जीवन को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलती है.

ऐसा भी होता है

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