पवन सिंह का गाना हो रहा है ट्रेंड, पतली कमर में नजर आई भोजपुरी एक्ट्रेस Divya Ralhan

भोजपुरी इंडस्ट्री में पवन सिंह (Pawan Singh) एक ऐसा नाम है जो एक्टर के साथ-साथ सिंगर भी है जिनकी गाने की वीडियो काफी ट्रेंड में रहती है और हर गाने की वीडियो में वो किसी ना किसी हॉट एक्ट्रेस के साथ नजर ज़रुर आते है जिससे उनकी गाने की वीडियो सातवें आसमान पर होती है ऐसा इन दिनों उनके गाने की वीडिया ट्रेंड कर रही है. जिसमें भोजपुरी एक्ट्रेस दिव्य रहलान नजर आ रह है वो अपनी पतली कमर के साथ. जिसमें पवन सिंह लट्टू होते हुए नजर आ रहे है अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

 

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आपको बता दें, कि भोजपुरी के सुपरस्टार पवन सिंह  का एक और गाना ‘कमरिया पतरे पतरे’ (Kamariya Patre Patre) इंटरनेट जगत में धमाल मचा रहा है. साल 2022 में पवन सिंह का ये गाना रिलीज हुआ था। उस समय इस सॉन्ग को लोगों ने काफी पसंद किया था. आज भी यूपी-बिहार के लोग पवन सिंह के इस गाने को दिल खोलकर प्यार देते हैं. जैसे ही पवन सिंह का ये गाना बजता है वैसे ही लोग थिरकना शुरू कर देते हैं. इस गाने में पवन सिंह के साथ दिव्या रल्हन (Divya Ralhan) नजर आ रही हैं इस गाने पर दोनों स्टार जमकर डांस करते नजर आ रह है.

 

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दिव्या की पतली कमरिया पर भोजपुरी के स्टार पवन सिंह फिदा हो गए हैं. लोगों को पवन सिंह और दिव्या रल्हन की जोड़ी काफी पसंद आ रही है. यही वजह है कि पवन सिंह के इस गाने को 70 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. बताते चलें कि एक्ट्रेस दिव्या रल्हन का अंदाज काफी कातिलाना है। दिव्या रल्हन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. एक्ट्रेस दिव्या रल्हन के हर पोस्ट पर फैंस प्यार बरसाते हैं.

प्यार का मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं

सिंहपुर निवासी अनीता द्विवेदी सुबह को कुछ महिलाओं के साथ गंगा बैराज  रोड पर मार्निंग वाक पर निकलीं. महिलाओं के साथ वाक करते हुए जब वह हरी चौराहे पर पहुंचीं तो उन्होंने रोड किनारे की झाडि़यों में एक युवती का शव पड़ा देखा. वहीं ठिठक कर उन्होंने साथी महिलाओं को भी बुला लिया.

थोड़ी ही देर में शव देखने वालों की भीड़ जुटने लगी. इसी बीच अनीता द्विवेदी ने मोबाइल फोन से इस की सूचना थाना बिठूर पुलिस को दे दी. यह बात 8 मार्च, 2018 की थी.

सूचना पाते ही बिठूर थानाप्रभारी तुलसी राम पांडेय पुलिस टीम के साथ सिंहपुर स्थित हरी चौराहा पहुंच गए. उस समय वहां भीड़ जुटी थी. भीड़ को हटा कर वह उस जगह पहुंचे, जहां युवती की लाश पड़ी थी. लाश किसी नवविवाहिता की थी. उस के दोनों हाथों में मेंहदी रची थी और कलाइयों में सुहाग चूडि़यां थीं.

उस की उम्र 25 वर्ष के आसपास थी और वह गुलाबी रंग का सूट पहने थी. देखने से ऐसा लग रहा था कि युवती की हत्या कहीं और की गई थी, जिस के बाद शव को गंगा बैराज रोड किनारे फेंक दिया गया था.

चूंकि मामला एक नवविवाहिता की हत्या का था, इसलिए इंसपेक्टर तुलसीराम पांडे ने कत्ल की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी. सूचना पाते ही एसपी (पश्चिम) गौरव ग्रोवर, एसपी (पूर्व) अनुराग आर्या तथा सीओ भगवान सिंह भी वहां आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

इस के बाद मौके पर आई फोरेंसिक टीम ने जांच की. युवती के गले पर कपड़े से कसे जाने के साथसाथ उंगलियों के निशान भी थे, जिस से टीम ने संभावना जताई कि युवती की हत्या गला घोंट कर की गई थी. युवती के सिर में दाईं ओर चोट का निशान तथा शरीर पर आधा दरजन खरोंच के निशान थे. टीम ने फिंगरप्रिंट लिए तथा अन्य साक्ष्य भी जुटाए.

काफी कोशिश के बाद भी युवती के शव की शिनाख्त नहीं हो पाई थी. पुलिस शिनाख्त के लिए लोगों से पूछताछ कर रही थी. इसी बीच भीड़ में से एक युवक आगे आया और शव को झुक कर गौर से देखने लगा. इत्मीनान हो जाने के बाद वह एसपी अनुराग आर्या से बोला, ‘‘साहब यह लाश पूनम की है.’’

‘‘कौन पूनम, पूरी बात बताओ?’’

‘‘साहब, मेरा नाम श्याम मिश्रा है. मैं बैकुंठपुर गांव का रहने वाला हूं. हमारे गांव में शिवशंकर मौर्या रहते हैं. पूनम उन्हीं की बेटी थी.’’

श्याम मिश्रा की बात सुन कर एसपी अनुराग आर्या ने तत्काल पुलिस भेज कर शिवशंकर व उन के घर वालों को बुला लिया. शिवशंकर व उस की पत्नी शिवकांती ने जब बेटी का शव देखा तो वह बिलख पड़े. प्रियंका भी बड़ी बहन पूनम का शव देख कर रोने लगी. पुलिस अधिकारियों ने उन सभी को धैर्य बंधाया और आश्वासन दिया कि पूनम के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा.

शव की शिनाख्त हो जाने के बाद एसपी (पश्चिम) गौरव ग्रोवर ने मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पूनम के शव का पंचनामा भरवा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपत राय चिकित्सालय कानपुर भिजवा दिया. साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से 2 सिपाहियों और एक दरोगा की ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस पर लगा दी.

इस के बाद इंसपेक्टर तुलसी राम पांडे ने शिवशंकर से पूछताछ की तो उस ने बताया कि गांव में उस की किसी से कोई  दुश्मनी नहीं है. न ही जमीन जायदाद का झगड़ा है. उसे नहीं मालूम कि पूनम की हत्या किस ने और क्यों कर दी. चूंकि शिवशंकर ने किसी पर शक नहीं जताया था, इसलिए तुलसीराम पांडे ने शिवशंकर को वादी बना कर धारा 302 आईपीसी के तहत अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसपी (पश्चिम) गौरव ग्रोवर ने सीओ भगवान सिंह के निर्देशन में पूनम की हत्या का राज खोलने के लिए एक सशक्त पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में बिठूर इंसपेक्टर तुलसी राम पांडे, सबइंसपेक्टर देवेंद्र सिंह, संजय मौर्या, राजेश सिंह, सिपाही रघुराज सिंह, देवीशरण सिंह तथा मोहम्मद खालिद को शामिल किया गया.

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पुलिस टीम ने अपनी जांच मृतका के पिता शिवशंकर मौर्या से शुरू की. पुलिस ने मृतका के पिता का विधिवत बयान दर्ज किया. अपने बयान में शिवशंकर ने बताया कि उस ने पूनम की शादी 17 फरवरी, 2018 को सामूहिक विवाह समारोह में उन्नाव जिले के गांव परागी खेड़ा निवसी अंकुश मौर्या के साथ की थी.

20 फरवरी को वह पूनम की चौथी ले आया था, तब से वह मायके में ही थी. 7 मार्च को पूनम दोपहर बाद दवा लेने आस्था नर्सिंगहोम सिंहपुर गई थी. जाते समय वह अपना मोबाइल फोन घर पर ही भूल गई थी. अलबत्ता उस के पास दूसरा मोबाइल था. शाम 6 बजे तक जब वह वापस नहीं आई तो चिंता हुई. उस का मोबाइल भी बंद था.

शादी के पहले पूनम आस्था नर्सिंग होम में काम करती थी, इसलिए हम ने सोचा कि शायद वह वहीं रुक गई होगी, सुबह तक आ जाएगी. लेकिन सुबह उस की मौत की खबर मिली. पूनम घर से जाते वक्त पूरे जेवर पहने हुए थी, जो गायब थे.

शिवशंकर के बयान से पुलिस टीम को शक हुआ कि कहीं पूनम के पति अंकुश ने जेवर हड़प कर उस की हत्या तो नहीं कर दी. पुलिस टीम ने घर में रखा पूनम का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया और परागी खेड़ा निवासी पूनम के पति अंकुश को हिरासत में ले कर पूछताछ की.

अंकुश ने पुलिस को बताया कि पूनम की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है. वह तो पूनम से बहुत प्यार करता था. वह उसे लेने जाने ही वाला था कि उस की मौत की खबर मिल गई.

अंकुश ने पुलिस टीम को एक चौंकाने वाली जानकारी भी दी. उस ने बताया कि पूनम जब ससुराल में थी, तब उस के मोबाइल पर अकसर गोलू नाम के किसी युवक का फोन आता था. देर रात भी वह उस से बातें किया करती थी. पूछने पर पूनम ने बताया था कि गोलू उस का मौसेरा भाई है.

पुलिस टीम ने गोलू के संबंध में शिवशंकर से पूछताछ की तो यह बात गलत निकली कि गोलू पूनम का मौसेरा भाई है. पुलिस टीम ने पूनम के मोबाइल के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह मोबाइल चोरी का है, लेकिन सिम कार्ड नीरज के नाम का है, जो नयापुरवा हिंगूपुर का रहने वाला है. पुलिस ने रात में छापा मार कर नीरज उर्फ गोलू को हिरासत में ले लिया.

थाना बिठूर ला कर जब नीरज उर्फ गोलू से पूनम की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने साफसाफ कहा कि पूनम की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है. लेकिन जब उस से पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की गई तो वह जल्दी ही टूट गया और उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

नीरज ने बताया कि पूनम ने उस के साथ बेवफाई की थी इसीलिए उस ने उसे मौत की नींद सुला दिया. पुलिस टीम ने नीरज की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल दुपट्टा, पूनम का मोबाइल, मय लौकेट के मंगलसूत्र, सोने की अंगूठी, टौप्स, पायल, बिछिया वगैरह बरामद कर लिए.

चूंकि नीरज उर्फ गोलू ने पूनम की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था. अत: पुलिस ने नीरज को हत्या के जुर्म में नामजद कर गिरफ्तार कर लिया. नीरज के बयानों के आधार पर प्रेमिका की बेवफाई की जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस तरह थी.

कानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर है ऐतिहासिक कस्बा बिठूर. इस कस्बे से 2 किलोमीटर दूर एक गांव बैकुंठपुर है. मिलीजुली आबादी वाले इस गांव में शिवशंकर मौर्या अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी शिवकांती के अलावा 2 बेटियां पूनम, प्रियंका तथा एक बेटा अमन था. शिवशंकर लोडर चालक था. मिलने वाले वेतन से ही वह अपने परिवार के भरण पोषण करता था.

भाईबहनों में पूनम सब से बड़ी थी. वह खूबसूरत तो थी ही पर जैसेजैसे जवानी चढ़ी वह उस के बदन को सजाती गई. पूनम की खूबसूरती और निखरती गई. यौवन के फूल खिलते हैं तो उन की मादक महक फिजा में फैलती ही है. ऐसे में भंवरों का फूलों के इर्दगिर्द मंडराना स्वाभाविक है. मनचले भंवरे पूनम के इर्दगिर्द मंडराते तो उसे अच्छा लगता.

पूनम जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में भी तेज थी. उस ने हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी और आगे पढ़ना चाहती थी. लेकिन मातापिता के विरोध की वजह से आगे न पढ़ सकी और मां के घरेलू कामों में हाथ बंटाने लगी. हालांकि पूनम को चौकाचूल्हा पसंद न था, लेकिन मां के दबाव में उसे सब करना पड़ता था.

एक रोज पूनम की मुलाकात सरिता से हुई. सरिता उस की दूर की रिश्तेदार थी और किसी काम से उस के घर आई थी. सरिता सिंहपुर स्थित आस्था नर्सिंग होम में काम करती थी. बातचीत के दौरान पूनम ने सरिता से नौकरी करने की इच्छा जाहिर की तो सरिता उसे नौकरी दिलाने के लिए राजी हो गई.

लेकिन मां ने पूनम को नौकरी करने के लिए साफ मना कर दिया. कुछ माह तक पूनम अपनी मां शिवकांती को नौकरी के लिए मनाती रही लेकिन जब वह नहीं मानी तो पूनम ने अपना निर्णय सुना दिया, ‘‘मां, तुम राजी हो या न हो, अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मैं नौकरी करूंगी.’’

पूनम के निर्णय के आगे शिवकांती को झुकना पड़ा. इस के बाद पूनम आस्था नर्सिंग होम में काम करने लगी. पूनम के गांव से सिंहपुर ज्यादा दूर नहीं था. वहां आनेजाने के साधन भी थे. अत: उसे नर्सिंग होम आनेजाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी. कभीकभी अस्पताल में ज्यादा महिला मरीज होती या प्रसव कराने का मामला होता तो पूनम को रात में भी रुकना पड़ता था. रुकने की खबर वह मोबाइल से घर वालों को दे देती थी.

पूनम को नौकरी करते हुए 2 महीने बीत गए तो उस ने कुछ पैसा बचाने की सोची. इस के लिए बैंक खाता जरूरी था. इसलिए वह बैंक में खाता खुलवाने का प्रयास करने लगी. पूनम जिस आस्था नर्र्सिंग होम में काम करती थी उस के ठीक सामने रोड के उस पार भारतीय स्टेट बैंक की सिंहपुर शाखा थी.

एक रोज वह बैंक पहुंची तो वहां उस की मुलाकात एक हृष्टपुष्ट युवक नीरज उर्फ गोलू से हुई, पहली ही नजर में खूबसूरत पूनम, नीरज के दिल में रच बस गई.

नीरज उर्फ गोलू बिठूर थाने के नयापुरवा (हिंगूपुर) गांव का रहने वाला था. उस के पिता केशव मौर्या मेहनतमजदूरी कर के अपना परिवार चलाते थे. 3 भाईबहनों में नीरज सब से बड़ा था. साधारण पढ़ा लिखा नीरज पेशे से मैकेनिक था.

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बैंक में मनोज नाम के व्यक्ति का जनरेटर लगा था. इस जनरेटर का औपरेटर नीरज था. बिजली चली जाने पर वह जनरेटर चालू करता था. सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उस की ड्यूटी बैंक में रहती थी.

पूनम और नीरज पहली ही मुलाकात में एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. पूनम ने जब नीरज से खाता खुलवाने की बात कही तो उस ने भारतीय स्टेट बैंक की सिंहपुर शाखा में पूनम का खाता खुलवा दिया.

खाता खुला तो पूनम का बैंक में आनाजाना शुरू हो गया. नीरज जब भी पूनम को देखता, मदहोश सा हो जाता था. वह उस से एकांत में मिलने का मौका तलाश करने लगा. पूनम जब बैंक आती तो वह नजरें चुरा कर पूनम को निहारता रहता था.पूनम नीरज की नजरों की भाषा खूब समझती थी. एक दिन जब पूनम आई तो वह उस का हाथ पकड़ कर उसे बैंक के जीने के नीचे ले गया. वहां एकांत था. वहां नीरज ने पूनम का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘पूनम मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं.’’

पूनम खामोश रही तो उस ने अपनी बात दोहराते हुए फिर कहा, ‘‘पूनम, अगर तुम ने मेरे प्यार को स्वीकार नहीं किया तो मैं अपनी जान दे दूंगा. अब एक पल भी तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता.’’

‘‘कैसी बात करते हो नीरज, इस तरह किसी लड़की का हाथ पकड़ना कहां की सभ्यता है?’’ पूनम ने मुस्कराते हुए कहा, ‘‘तुम प्यार करते हो तो यह ठीक है, पर मैं तुम से प्यार नहीं करती.’’ पूनम की मुसकराहट से नीरज की हिम्मत बढ़ गई. उस ने पूनम को अपने आगोश में भर लिया.

पूनम उस के सीने से चिपट कर बोली, ‘‘नीरज, मैं भी तुम से प्यार करती हूं और काफी दिनों से तुम मेरे दिल में बसे हुए हो, मैं चाहती थी कि शुरुआत तुम करो. बताओ, मुझे जीवन के किसी मोड़ पर धोखा तो नहीं दोगे.’’

‘‘तुम मेरे मन में बस गई हो पूनम, भला मैं तुम्हें कैसे धोखा दे सकता हूं. तुम तो मेरी जिंदगी हो.’’

नीरज की ये विश्वास भरी बातें सुन कर पूनम समर्पण की भावना के साथ उस से लिपट गई. धीरेधीरे दोनों का प्यार अमरबेल की तरह बढ़ने लगा. पूनम के दिल में नीरज गहराई तक उतरता चला गया. बैंक के जीने के नीचे का एकांत स्थल उन के मिलने की पसंदीदा जगह बन गया. इस सब के चलते एक दिन दोनों के बीच मर्यादा की सारी दीवारें भी ढह गईं.

उस रोज जैसे ही पूनम अस्पताल की ओर बढ़ी, नीरज बीच रास्ते में उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘शाम 6 बजे बैंक आ जाना. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

पूनम को लगा, जैसे उस का दिल उछल कर सीने से बाहर आ जाएगा. अस्पताल में उस का पूरा दिन बेचैनी से गुजरा. वह सोचती रही कि नीरज ने बुलाया है तो जाना तो पड़ेगा ही. वह खुद भी नीरज से मिलना चाहती थी.

ज्योंज्यों दिन ढलने लगा, पूनम की बेचैनी बढ़ने लगी. मिलने का तयशुदा वक्त आया तो पूनम तेज कदमों से बैंक की ओर बढ़ गई. बैंक के करीब पहुंचते ही नीरज उसे दिख गया. वह बैंक के जीने की सीढि़यों पर बैठा था. तब तक बैंक बंद हो गई थी और सन्नाटा पसरा था. नीरज, पूनम का हाथ पकड़ कर जीने की सीढि़यां चढ़ते हुए छत पर पहुंचा.

वहां घुप अंधेरा था. नीरज ने बिना कुछ कहे सुने उसे बांहों में भर लिया और उस के नाजुक अंगों से खेलने लगा. दोनों ही खुद पर काबू न रख सके और अपनी हसरतें पूरी कर लीं. कुछ देर बाद जब नीरज ने पूनम को खुद से अलग किया तो उस ने महसूस किया कि वह अपना बहुत कुछ खो बैठी है.

वह फफकफफक कर रोने लगी तो नीरज ने उस के आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘पूनम, मैं तुम से प्यार करता हूं. मेरा वादा है कि मैं तुम से ही शादी करूंगा. रोने की जरूरत नहीं है, जो मेरी अमानत थी, वह मैं ने ले ली. वादा करो फिर मिलोगी.’’

पूनम ने नीरज को गहरी नजरों से देखा और उस से फिर मिलने का वादा कर के अपने घर चली गई. इस के बाद पूनम अकसर शाम को नीरज से उसी जगह एकांत में मिलती. नीरज से मिलने के चक्कर में पूनम को घर आने में देर हो जाती थी. मां पूछती तो पूनम बहाना बना देती. लेकिन धीरेधीरे सब कुछ शिवकांती की समझ में आने लगा था. शिवकांती ने अपने पिता शिवशंकर से कहा, ‘‘जल्दी से पूनम के हाथ पीले कर दो, वरना हाथ मलते रह जाओगे. लड़की के पर निकल आए हैं.’’

पत्नी की बात शिवशंकर को सही लगी. वह पूनम के ब्याह के लिए दौड़धूप करने लगा. पूनम को विवाह की जानकारी हुई तो वह घबरा गई. उस ने अपने विवाह की जानकारी नीरज को दे कर कहा, ‘‘गोलू, जल्दी से कोई उपाय खोजो, वरना मैं किसी और की दुलहन बन कर चली जाऊंगी और तुम ताकते रह जाओगे.’’

‘‘ऐसा कभी नहीं होगा पूनम. तुम्हें अपना बनाने का मेरे पास एक उपाय है.’’

‘‘क्या उपाय है?’’ पूनम ने पूछा.

‘‘यही कि तुम मेरे साथ भाग चलो. कहीं जा कर हम दोनों शादी कर लेंगे. इस के बाद कोई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.’’

‘‘ठीक है, मुझे सोचने समझने का मौका दो.’’

फिर एक दिन नीरज की मीठीमीठी बातों में आ कर पूनम घरपरिवार से नाता तोड़ कर सपनों की सजीली दुनिया में जीने के लिए उस के साथ उड़ गई. वह बैंक से पैसा निकाल कर भी अपने साथ ले गई.

इधर देर रात तक जब पूनम घर नहीं पहुंची तो मां शिवकांती को चिंता हुई मां ने उसे तलाश भी किया, लेकिन पूनम का कोई पता न चला. शिवशंकर घर आए तो शिवकांती ने उन्हें बताया कि पूनम अभी तक अस्पताल से नहीं आई है. शिवशंकर ने  आस्था नर्सिंग होम की औपरेटर से बात की.

उस ने बताया कि पूनम आज ड्यूटी पर नहीं आई थी. यह जानकारी पा कर शिवशंकर भौचक्के रह गए. उन्होंने अपने स्तर पर पूनम को सभी जगह तलाश किया, लेकिन उस का कुछ भी पता नहीं चला.

जवान बेटी के भाग जाने से शिवशंकर की बिरादरी व रिश्तेदारों में थूथू होने लगी थी. इसलिए वह पूनम की खोज में जीजान से जुटे थे. 2 दिन बाद शिवशंकर को आस्था नर्सिंग होम की एक महिला कर्मचारी से पता चला कि पूनम की दोस्ती बैक के जनरेटर औपरेशन नीरज से थी. पूनम शायद उसी के साथ गई होगी.

यह अहम जानकारी मिली तो शिवशंकर ने नीरज के संबंध में जानकारी जुटाई. पता चला कि नीरज भी गायब है. शिवशंकर नीरज के गांव नयापुरवा (हिंगूपुर) गए तो उस के घर वालों ने बताया कि नीरज एक सप्ताह के लिए कहीं बाहर घूमने गया है. इस से शिवशंकर को पक्का यकीन हो गया था कि नीरज ही पूनम को बहलाफुसला कर भगा ले गया है. इस पर शिवशंकर ने थाना बिठूर में नीरज के विरुद्ध प्रार्थना पत्र दे कर बेटी की बरामदगी की गुहार लगाई.

पुलिस पूनम को बरामद कर पाती, उस के पहले ही पूनम अपने ननिहाल आजादनगर (कानपुर)  पहुंच गई. उस ने अपने नाना बाबूलाल को बताया कि उस ने अपने प्रेमी नीरज से मंदिर में शादी कर ली है. बाबूलाल ने इस की जानकारी शिवशंकर को दी तो वह पूनम को समझा कर घर ले आए.

इस के बाद घर वालों के दबाव और पुलिस हस्तक्षेप से नीरज और पूनम अलगअलग रहने को राजी हो गए. दरअसल, पुलिस ने जब नीरज को जेल भेजने की धमकी दी तो वह घबरा गया और पुलिस की बात मान ली.

इस घटना के बाद कुछ समय के लिए नीरज और पूनम का मिलनाजुलना बंद हो गया. लेकिन बाद में दोनों चोरीछिपे फिर मिलने लगे. इसी बीच नीरज ने वक्त बेवक्त बात करने के लिए पूनम को एक मोबाइल फोन दे दिया. फोन में सिम उसी के नाम का था.

पूनम को मोबाइल मिला तो दोनों में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. पूनम को जब भी मौका मिलता, वह नीरज से लंबी बातें करती और प्यार की दुहाई देती.

शिवशंकर ने पूनम की अस्पताल वाली नौकरी अब छुड़वा दी थी, इसलिए पूनम घर पर ही रहती थी. शिवकांती भी बेटी पर कड़ी नजर रखने लगी थी. इसी बीच शिवशंकर को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की जानकारी मिली तो उस ने अपनी बेटीपूनम का रजिस्टे्रशन करा दिया. इस योजना के तहत वरवधू को 20 हजार रुपए का चेक, घरगृहस्थी का सामान तथा वधू को आभूषण व वस्त्र दिए जाने का प्रावधान था.

वरवधू का परिचय सम्मेलन हुआ तो शिवशंकर भी अपनी पत्नी शिवकांती व बेटी पूनम को साथ ले कर पहुंचा. शिवशंकर ने उन्नाव जिले के परागी खेड़ा गांव निवासी राजवीर मौर्या के पुत्र अंकुश मौर्या को अपनी बेटी पूनम के लिए पसंद कर लिया.

पूनम और अंकुश ने भी एकदूसरे को देख कर हामी भर दी. 17 फरवरी, 2018 को सामूहिक विवाह में पूनम की शादी अंकुश से हो गई.

शादी के बाद पूनम, अंकुश की दुलहन बन कर ससुराल पहुंच गई. चूंकि पूनम सुंदर थी. उसे जिस ने भी देखा उसी ने उस के रूप सौंदर्य की तारीफ की. अंकुश स्वयं भी सुंदर पत्नी पा कर खुश था. सजीला पति पा कर पूनम भी खुश थी. फिर भी उसे अपने प्रेमी नीरज की रहरह कर याद आ रही थी. सुहागरात को भी वह नीरज को भुला नहीं पाई थी.

ससुराल में पूनम मात्र 3 दिन ही रही. इस बीच नीरज फोन कर के उस से बातें करता रहा. अंकुश ने बारबार फोन आने पर पूनम को टोका तो वह बोली, ‘‘गोलू का फोन आता है. गोलू मेरी मौसी का लड़का है.’’ अंकुश ने सहज ही पूनम की बात पर यकीन कर लिया.

20 फरवरी को शिवशंकर अपनी बेटी पूनम को ससुराल से लिवा लाया. दरअसल परंपरा के हिसाब से नवविवाहिता ससुराल में पहली होली जलती नहीं देख सकती थी. इसी परंपरा की वजह से शिवशंकर होली से 8 दिन पहले ही पूनम को ले आया था. मायके आते ही पूनम स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगी. उस पर किसी तरह की बंदिश नहीं थी.

पूनम के पास मोबाइल फोन पहले से ही था. पहले जब वह अपने पूर्व पे्रेमी नीरज से बात करती थी तो उसी के दिए गए मोबाइल से फोन करती थी. वह नीरज से दिन में कईकई बार बात करती थी. बातचीत के दौरान वह खूब खिलखिला कर हंसती थी और नीरज को शादी करने की सलाह देती थी.

चूंकि पूनम ने नीरज के साथ बेवफाई की थी सो उसे पूनम की खिलखिलाहट और सलाह नागवार लगती थी. वह नफरत से भर उठता था. जैसेजैसे दिन बीतते गए उस की नफरत भी बढ़ती गई. आखिर उस ने पूनम को सबक सिखाने की ठान ली.

7 मार्च, 2018 की दोपहर नीरज ने पूनम  से मीठीमीठी बातें कीं और शाम को मिलने के लिए बैंक बुलाया. दोपहर बाद पूनम ने साज शृंगार किया, फिर मां को बताया कि उस के पेट में दर्द है. वह दवा लेने आस्था नर्सिंग होम सिंहपुर जा रही है. शिवकांती ने उसे जल्दी घर लौट आने की नसीहत दे कर दवा लाने की इजाजत दे दी.

पूनम शाम साढ़े 4 बजे सिंहपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा पहुंची. नीरज वहां जनरेटर के पास कुरसी डाले बैठा था. पूनम के आते ही उस ने कुटिल मुसकान बिखेरी, फिर पूनम को बैंक के बगल से जाने वाले जीने की सीढि़यों पर ले गया. वहां बैठ कर दोनों बातें करने लगे. बातचीत के दौरान नीरज ने पूनम से छेड़छाड़ शुरू की तो उस ने विरोध करते हुए कहा कि अब वह किसी और की अमानत है. लेकिन नीरज नहीं माना और उस ने शारीरिक भूख शांत कर ली.

शारीरिक संबंध बनाने के बाद नीरज ने पूनम पर बेवफाई का आरोप लगाया तो पूनम झगड़ने लगी. फलस्वरूप दोनों में हाथापाई होने लगी. गुस्से में नीरज ने पूनम का सिर जोर से दीवार पर टकरा दिया, जिस से वह बेहोश हो कर गिर पड़ी. यह देख वह बुदबुदाया, ‘‘बेवफा औरत, तू मेरी नहीं हुई तो मैं तुझे किसी और की भी नहीं होने दूंगा. आज मैं तुझे बेवफाई की सजा दे कर रहूंगा.’’ कहते हुए नीरज ने पूनम के गले में उसी का दुपट्टा कस दिया और फिर गला घोंट दिया.

पूनम को मौत के घाट उतारने के बाद नीरज ने उस के शरीर से सारे आभूषण उतारे और मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. इस के बाद वह लाश को सीढि़यों पर ही छोड़ कर चला गया.

लगभग 3 घंटे तक लाश सीढि़यों पर ही पड़ी रही. रात लगभग साढ़े 9 बजे नीरज पुन: बैंक आया. सन्नाटा देख कर उस ने पूनम का शव कंधे पर लाद कर सीढि़यों से उतारा और उसे बाइक पर रख कर गंगा बैराज रोड के किनारे झाडि़यों में फेंक कर फरार हो गया.

इधर जब देर रात तक पूनम दवा ले कर घर नहीं लौटी तो शिवशंकर व उस की पत्नी शिवकांती को चिंता हुई. रातभर दोनों परेशान रहे. दूसरे रोज शिवशंकर पूनम को पता लगाने आस्था नर्सिंगहोम जा ही रहा था कि पुलिस जीप उस के दरवाजे पर आ कर खड़ी हो गई. जीप में बैठे पुलिसकर्मी शिवशंकर व उस की पत्नी शिवकांती को गंगा बैराज स्थित हरी चौराहा ले गए. जहां उन को पूनम की लाश मिली.

शिवशंकर ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो नीरज उर्फ गोलू संदेह के घेरे में आ गया. उसे गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर मृतका पूनम के आभूषण व मोबाइल बरामद करा दिए.

12 मार्च, 2018 को थाना बिठूर पुलिस ने अभियुक्त नीरज उर्फ गोलू को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

नई तकनीक से उम्मीद : तनाव की कमी

मनोहर की शादी को एक हफ्ता हुआ था. वह रात को अपनी नईनवेली दुलहन के पास जाने से कतरा रहा था. इस की वजह थी उस के अंग में तनाव की कमी और वह सैक्स सुख के सागर में गोते नहीं लगा पा रहा था.

मनोहर अकेला ऐसा नहीं है, जो इस तरह की समस्या से जूझ रहा है. दुनियाभर में ऐसे बहुत सारे मर्द हैं, जो अपने अंग में मनचाहे तनाव की कमी के चलते अपने सैक्स पार्टनर के सामने शर्मिंदगी झेलते हैं. इस की सब से बड़ी वजह है कि हम किस तरह से जिंदगी जी रहे हैं.

अगर कोई बीड़ीसिगरेट ज्यादा पीता है, तो उस के अंग में ढीलापन हो सकता है. साथ ही, जो लोग ज्यादा शराब पीते हैं या कोई और नशा करते हैं, वे भी इस समस्या से दोचार हो सकते हैं.

जरूरत से ज्यादा दिमागी तनाव भी सैक्स लाइफ पर बुरा असर डालता है. अपने काम से जुड़े विचारों को बिस्तर पर लाने से मर्द अपने अंग में तनाव की कमी को बढ़ा सकता है. इतना ही नहीं, बढ़ती उम्र भी इस तकलीफ में इजाफा ही करती है.

इस के लक्षण

* शुरुआत में अंग में तनाव पाने में मुश्किल होना.

* सैक्स के लिए पूरे समय तक तनाव बनाए रखने में नाकाम होना.

* प्रवेश के तुरंत बाद तनाव में कमी.

* मनमुताबिक सैक्स न हो पाना.

* सैक्स में दिलचस्पी की कमी.

* आत्मसम्मान में कमी.

* गुस्सा, चिढ़चिढ़ापन, उदासी का होना, खुद को नामर्द महसूस करना.

अंग में तनाव की कमी के मुद्दे पर जब प्लास्टिक, कौस्मैटिक सर्जन और एंड्रोलौजिस्ट डाक्टर अनूप धीर से बात की गई, तो उन्होंने बताया, ‘‘अंग में तनाव की कमी को इंगलिश में ‘इरैक्टाइल डिस्फंक्शन’ कहते हैं. यह ऐसी आम कंडीशन है, जो दुनियाभर में मर्दों को प्रभावित करती है और इस की वजह से उन की जिंदगी की क्वालिटी के साथसाथ रिलेशनशिप भी बिगड़ती है.

‘‘इरैक्टाइल डिस्फंक्शन ऐसी मैडिकल कंडीशन है, जिस में मर्द सैक्स के लिए जरूरी इरैक्शन (तनाव) को हासिल करने या उसे बनाए रखने में नाकाम होता है. यह कई बार किसी शारीरिक या मनोवैज्ञानिक वजह के चलते होता है और आमतौर पर 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को प्रभावित करता है. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है, क्योंकि यह समस्या किसी भी उम्र के मर्दों को अपना शिकार बना सकती है.

‘‘दिक्कत यह है कि इस समस्या से पीडि़त कई लोग शर्मिंदगी या संकोच के चलते इलाज कराने की पहल भी नहीं करते हैं. लिहाजा, उन के रिश्ते लगातार बिगड़ते रहते हैं. पर अगर समस्या है, तो उस का हल भी है.

‘‘हालांकि इरैक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए फास्फोडिस्टेरेज (पीडीई5) 5 इंहिबिटर्स के साथ ओरल फार्मोकोथैरेपी ही अभी तक प्रमुख इलाज मानी जाती रही है, लेकिन इस समस्या का सामना कर रहे मर्दों को बेहतर समाधान देने के लिए नए उपायों की तलाश लगातार जारी है.

‘‘ऐसा ही एक नया उपाय है टौपिकल जैल इरौक्सौन, जो अंग में तनाव की कमी से जूझ रहे मर्दों के लिए अच्छे नतीजे दिला रहा है.

‘‘फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए द्वारा स्वीकृत इरौक्सौन एक ऐसा टौपिकल जैल है, जो इरैक्टाइल की समस्या से जूझ रहे मर्दों के लिए उम्मीद की नई किरण है. इस जैल को सैक्स करने से ठीक पहले अंग के मुख पर सीधे लगा सकते हैं.

‘‘स्टडी से यह बात सामने आई है कि इरौक्सौन का इस्तेमाल करने वाले 65 फीसदी मर्दों ने 10 मिनट के भीतर इरैक्शन महसूस किया और वे सैक्स करने के लिए जरूरी इरैक्शन (तनाव) को बरकरार रख सके.

‘‘फिलहाल इसे एक क्रीम (विटारौस/विरिरेक) के तौर पर भी दिया जाता है, जिस में अंग के सक्रिय भाग पर ऐक्टिव दवा (एल्प्रोस्टेडिल, जो सिंथैटिक प्रोस्टाग्लैंडिन ई1 है) के तौर पर स्किन एन्हान्सर के साथ इस्तेमाल किया जाता है.

‘‘याद रहे कि दिल से जुड़ी बीमारी और डायबिटीज को अंग में तनाव संबंधी दोष का प्रमुख कारण माना जाता है, इसलिए ईडी संबंधी लक्षणों के दिखाई देने पर इन रोगों के लक्षणों पर गौर करें और डाक्टर से मिल कर जरूरी मैडिकल सलाह लें.

‘‘नियमित रूप से अपनी सेहत की जांच करवाएं, ब्लड प्रैशर पर नजर रखें और डायबिटीज की जांच करवाएं, ताकि ईडी के इन संभावित कारणों का पता लगा कर इन का समय पर इलाज किया जा सके.

‘‘इरैक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी) के उपचार के लिए इरौक्सौन नया टौपिकल जैल है, जो अंग में तनाव की समस्या, इस के उपचार और प्रबंधन के तौरतरीकों में क्रांति कर सकता है.

‘‘इरौक्सौन को अमेरिका में स्वीकृति मिल चुकी है और फिलहाल यह ब्रिटेन में भी उपलब्ध है. हालफिलहाल भारत में यह नहीं मिलता है, लेकिन जल्द ही भविष्य में यह उपलब्ध हो सकता है. यह अंग में तनाव लाने में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है.

‘‘इस के अलावा अंग में तनाव लाने का एक और तरीका है, जिसे लिंग प्रत्यारोपण यानी पेनाइल इंप्लांट कहते हैं. यह एक ऐसा उपकरण है, जिसे आपरेशन द्वारा मर्दाना अंग के अंदर रखा जाता है, ताकि कम इरैक्शन वाले मर्दों को सही इरैक्शन मिल सके. ईडी के लिए दूसरे इलाज नाकाम होने के बाद आमतौर पर पेनाइल इंप्लांट की सिफारिश की जाती है.

‘‘पेनाइल इंप्लांट के 2 खास प्रकार हैं, अर्धकठोर और फुलाने लायक. हर तरह का पेनाइल इंप्लांट अलग तरीके से काम करता है और इस के अलगअलग फायदे और नुकसान हैं. यह अंग में तनाव की कमी के लिए आखिरी इलाज माना है. जब दूसरे इलाज खासतौर पर डायबिटीज वाले मर्दों में इलाज नाकाम हो जाते हैं, तब पेनाइल इंप्लांट किया जाता है.

‘‘अंग में तनाव की कमी की समस्या में एक और उम्मीद भरा जो तरीका दिख रहा है, वह शौकवेव थैरेपी है, जहां ईडी में सुधार के लिए अल्ट्रासाउंड तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है.’’

मेरा बच्चा 2 साल का है वह कुछ बोलता नहीं है हमें डर है कि वह गूंगा न हो?

सवाल

मैं एक 26 साल की औरत हूं और एक बच्चे की मां भी. बच्चे की उम्र 2 साल है. पर वह अभी तक कुछ नहीं बोलता है. हर बात इशारे में करता है. हम पतिपत्नी को यह डर सता रहा है कि कहीं यह गूंगा न हो.

जवाब 

अभी हम ने किसी डाक्टर को नहीं दिखाया है. एक पड़ोसन बोल रही है कि बच्चे पर ऊपरी साया है. क्या ऐसा होता है? क्या हमें किसी ओझा से मिलना चाहिए?आमतौर पर बच्चे एक से डेढ़ साल की उम्र में बोलना शुरू कर देते हैं. अगर न करें तो बात चिंता की होती है और आगे चल कर बच्चे और मांबाप दोनों के लिए परेशानी की वजह बनती है.अगर आप इस परेशानी को और बढ़ाना चाहती हैं तो ही ओझा टाइप के किसी आदमी से मिलें और बच्चे के भविष्य की चिंता अगर हो तो तुरंत बच्चे को किसी माहिर डाक्टर को दिखाएं. सही समय पर न बोल पाने वाले बच्चों की बुद्धि कम विकसित होती है. उन्हें इस बाबत ओझाओं, तांत्रिकों और नीमहकीमों के पास ले जाने वाले मांबाप की तो बुद्धि ही भ्रष्ट होती है. फैसला अब आप के हाथ में है.

 

सवाल 

मैं राजस्थान का हूं. मेरी उम्र 45 साल है. मैं अपने परिवार से दूर दिल्ली में नौकरी करता हूं और औरत के प्यार को तरस रहा हूं. पड़ोस में एक औरत मुझ पर डोरे डाल रही है, पर मुझे डर लगता है कि इस उम्र पकड़ा गया तो सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी. पर साथ ही अकेलापन भी मुझे काट खाने को दौड़ता है. इस वजह से मुझे तनाव रहने लगा है. मैं क्या करूं?

 जवाब 

आप डोरे डलवा लें लेकिन संभल कर, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. आमतौर पर तो इज्जत और अकेलेपन की लड़ाई में जीत अकेलेपन की ही होती है, क्योंकि ऐसे मामलों में कामकाजी औरत और मर्द दोनों ही होते हैं. अगर इज्जत का बहुत ज्यादा ही खयाल या दुनिया का लिहाज है, तो बीवी को साथ रहने के लिए बुला लें.दरअसल, आप को तनाव इस बात का है कि गंगाजी सामने बह रही हैं और आप डुबकी नहीं लगा पा रहे. अच्छे तैराक होंगे तो नहा भी लेंगे और डूबेंगे भी नहीं.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें.

मोबाइल नंबर : 08826099608

घर की खूबसूरती के लिए लगाएं ये पौधे, वातावरण भी कर देंगे शुद्ध

सभी चाहते है कि आपका घर खूबसूरत दिखें, इसके लिए ना जानें कितनी डेकोरेशन की चीजे हम लगाते है ऐसे में सबसे खूबसूरत चीज है घरों में लगाएं जाने वाले पौधे. जिनसे घर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते है इतना ही नहीं, घर में शुद्ध वातावरण भी हो जाता है तो अगर आप भी घर की खूबसूरती के लिए पेड़-पौधे लगाना चाहते है तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है, क्योकि इसमें हम आज ये बताएंगे की आप कौन से और किस प्रकार के पौधे लगाएं, जो आपके घर को शुद्ध और खूबसूरत बना दें. साथ ही घर में साकारत्मक ऊर्जा लाने का काम करें है.

फिकस बेंजामिन (Ficus Benjamina)

फिकस बेंजामिन के पत्ते हमेशा हरे रहते हैं और इनकी डिजाइन बहुत ही अनोखी और आकर्षक होती है. ये पौधे घर के किसी भी कोने में लगाए जाते है. चाहे वो लिविंग रूम हो, डाइनिंग एरिया हो या फिर बेडरूम.फिकस बेंजामिन को कम पानी की ज़रूरत होती है और ये धूप भी बहुत अच्छे से सहन कर लेता है. इसलिए इसकी देखभाल आसान होती है.

अंथूरियम (Anthurium)

अंथूरियम के फूल बेहद कलात्मक और अनोखे होते हैं. इनके लाल, गुलाबी, सफेद या क्रीम रंग के फूल घर में रंग भर देते हैं.  यह आसानी से लग जाने वाला पौधा है और इसे घर के किसी भी कोने में चाहे लिविंग रूम हो या फिर डाइनिंग टेबल पर रखा जा सकता है.

कैलेडियम (Caladium)

कैलेडियम के पत्ते बहुत ही आकर्षक और अनोखे पैटर्न वाले होते हैं. इनके पत्तों पर हल्के गुलाबी, सफ़ेद और हरे रंग के डिजाइन होते हैं.यह एक आसानी से लग जाने वाला पौधा है और इसे घर के किसी भी भाग में रखा जा सकता है.

ऑर्किड (Orchids)

ओर्किड अपनी सुंदरता और महक के लिए प्रसिद्ध हैं. ऑर्किड के बहुत से रंग-बिरंगे और सुंदर फूल आते हैं जो घर को सजाने में मदद करते है.

शर्मनाक : जनता की कमाई, ओहदेदारों ने उड़ाई

धर्म के ठेकेदार, भ्रष्ट नेता व घूसखोर अफसर भले ही हर दिन अंधी कमाई करते हों, लेकिन मेहनतकश व ईमानदार लोग गुजारे लायक पैसा भी कड़ी मशक्कत कर के कमा पाते हैं. इस के बावजूद बहुत से कौए, गिद्ध, चील, घुन व दीमक जैसे लोग गाढ़े पसीने की उन की कमाई नोचने में लग जाते हैं. मसलन, धर्म की आड़ में दाढ़ीचोटी वाले, रिश्वत के नाम पर सरकारी अफसर और मुलाजिम व सहूलियतों के नाम पर सरकारें जनता की जेबें हलकी करती रहती हैं.

हालांकि टैक्स के रूप में वसूले गए जनता के पैसे का पूरा व सही इस्तेमाल बेशक जनता को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए होना चाहिए, लेकिन अफसोस यह है कि ऐसा नहीं होता.

कुरसी पर काबिज नेता व अफसर जनता के पैसे को अपना समझते हैं व मनमाने तरीकों से खूब अनापशनाप खर्च करते हैं. दौरों व बैठकों की आड़ में सैरसपाटे, मौजमस्ती करने का चलन कोई नया नहीं है, लेकिन सरकारी फुजूलखर्ची रोकना जरूरी है.

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माले मुफ्त दिले बेरहम

जनता का पैसा सरकारी दफ्तरों और महंगी गाडि़यों वगैरह पर बड़ी बेरहमी से खर्च किया जाता है. सरकारी इमारतों को आलीशान बनाया जाता है. सरकारी महकमे व उन के दफ्तर जनता को काबू करने, उन्हें सहूलियतें देने, नियमकानून चलाने के लिए हैं. उन्हें कामचलाऊ किफायती व सादा होना चाहिए, लेकिन वे सरकारी मंदिर बन रहे हैं. जनता की पीठ पर बेहिसाब बोझ डाल कर मजे लूटना कहां की अक्लमंदी है

जनता के पैसे से तो जनता को ही सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता, इसलिए पैसे की कमी से वक्त पर काम नहीं होता. टूटी सड़कें व पुरानी रेल पटरियां चटकी पड़ी रहती हैं. नदियों व रेलवे स्टेशनों पर पुराने, छोटे व कमजोर पुलों पर अकसर जानलेवा हादसे होते रहते हैं.

पैसे की कमी से एक ओर जनता के फायदे की बहुत सी सरकारी स्कीमें आधीअधूरी रह जाती हैं, वहीं दूसरी ओर जनसेवकों के लिए सरकारी इमारतों में कीमती फर्नीचर, कालीन, परदे वगैरह लगा कर उन्हें सजाया जाता है. इस तरह के खर्चे करना सरकारी खजाने को लुटाना है.

उत्तर प्रदेश की एक मुख्यमंत्री ने अपने विवेकाधीन कोष से 80 करोड़ रुपए बांटे, तो उस से अगले मुख्यमंत्री ने 5 सौ करोड़ रुपए से भी ज्यादा की रकम अपने चहेतों को बांट दी.

अपने राजनीतिक फायदे के लिए जनता के पैसों से धार्मिक यात्राएं कराई जाती हैं. धार्मिक आयोजनों के इश्तिहार दिए जाते हैं. लैपटौप व साइकिलें बांटी जाती हैं. ओहदेदारों की शानोशौकत में कहीं कोई कमी न आए, इस के लिए सरकारी घर व दफ्तर जनता के पैसों से महलों की तरह सजेधजे रहते हैं.

कोई लगाम नहीं

सरकारी कामकाज के नाम पर होने वाले भारीभरकम खर्च को घटाने पर कहीं कोई सख्ती होती नहीं दिखती. उस पर नकेल कसने के उपाय भी सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं, इसलिए वे कारगर होते नहीं दिखते. नतीजतन, जनता से वसूल की गई टैक्स की रकम का एक बड़ा हिस्सा गैरजरूरी खर्चों व भ्रष्टाचार की नदी में बह कर ओहदेदारों के पाले में चला जाता है.

सरकारी अंधेरगर्दी का बड़ा अजब हाल है. बहुत से सरकारी दफ्तर व स्कूल वगैरह खंडहरनुमा इमारतों में चलते हुए दिखते हैं. बरसों तक उन की मरम्मत के लिए रकम मंजूर नहीं होती. सालाना बजट में रखी गई तयशुदा रकम को खर्च करने की गरज से कई बार सरकारी संस्थाओं की अच्छीखासी मजबूत इमारतों को तोड़ कर नए सिरे से बना दिया जाता है. नैनीताल के एक सरकारी ट्रेनिंग सैंटर में यही हुआ था.

सरकारी दफ्तरों में रखरखाव व साजसज्जा के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है, जबकि जनता की मांग वाले बहुत से जरूरी काम पैसे की कमी के चलते रुके रहते हैं. सरकारी महकमों में खरीदबिक्री व काम कराने में कमीशनखोरी आम है. इस में भी हेराफेरी की जाती है. कई काम सिर्फ कागजों पर ही होते हैं.

भ्रष्टाचार के चलते जनता अपने हक से बेदखल है. बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा व सेहत की बुनियादी सहूलियतें बस नाम की हैं.

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बीते दिनों उत्तर प्रदेश में यही हुआ. गोरखपुर के मैडिकल कालेज में भुगतान रुकने से औक्सिजन सप्लाई रुकी और दर्जनों बच्चे मर गए थे, वहीं दूसरी तरफ बीते दिनों ऐलान हुआ था कि अयोध्या में राम की मूर्ति लगेगी. इस के अलावा इलाहाबाद के कुंभ मेले में 5 अरब रुपए खर्च होंगे.

ऐसे खर्चों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. करोड़ों रुपए की लागत से महाराष्ट्र में शिवाजी व गुजरात में सरदार पटेल की ऊंची व महंगी मूर्तियां लगेंगी. सवाल इस बात का है कि खर्च की फेहरिस्त में तरजीह किसे दी जाए  तरक्की व खुशहाली के लिए आखिर क्या जरूरी है और क्या गैरजरूरी है

भाग्य, भगवान, धार्मिक अंधविश्वास व रूढि़यों में जकड़े ज्यादातर लोग यही गलती करते हैं. वे तालीम, सफाई व सेहत वगैरह की अनदेखी कर के मुंडन, तेरहवीं, कथा, कीर्तन व तीर्थयात्राओं के लिए कर्ज लेने में भी नहीं हिचकते, इसलिए देश में गरीबी, गंदगी जैसी समस्याएं मौजूद हैं.

यह है उपाय

कम पढ़ेलिखे लोग जागरूकता की कमी से बेवजह के कामों में पैसा खर्च करें, तो बात समझ में आती है, लेकिन अगर सरकारें भी उसी राह पर चलें, तो हैरत व अफसोस होना लाजिम है.

सरकार चाहे तो क्या काम नहीं हो सकता  मसलन, मोदी सरकार ने पुराने व बेअसर हो चुके बहुत से कानून खत्म कर के अच्छा काम किया है. बहुत से सरकारी महकमों में तो कोई खास काम ही नहीं होता. इसलिए अब वक्त आ गया है कि बेवजह चल रहे बहुत से सरकारी महकमे बंद किए जाएं, ताकि सरकारी खर्च व जनता की पीठ पर लदा टैक्स का बोझ घट सके.

नहीं पसंद आया दर्शकों को ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ का प्रोमो, फैंस हुए आग बबूला

टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है दर्शकों का कभी पसंदीदा शो हुआ करता था , लेकिन अब शो के हालात देख कर फैंस नाराज होते नजर आ रहे है दरअसल, हाल में शो को प्रोमो जारी किया गया है जिसे देख लोग मेकर्स की क्लास लगा रहे है तरह-तरह के कमेंट कर रहे है जिसे साफ जाहिर होता है कि दर्शक शो के एपिसोड़ से परेशान हो रहे है उन्हे शो पसंद नहीं आ रहा है.

आपको बता दे, कि शो का प्रोमो दिखाया गया जिसमें गणेश चतुर्थी के मौके पर अक्षरा मंजरी को ठीक करने की कोशिश करती है. अक्षरा की कोशिश रंग लाएंगी और मंजरी अपने ट्रॉमा से बाहर आ जाएगी. अभिमन्यु इस बात से खुश हो जाएगा और डांस करते वक्त अक्षरा को गले लगा लेगा. वही प्रोमो के साथ अक्षरा और अभिन्यु की फोटो शेयर कर मेकर्स बुरा फंस गए है लोग तरह-तरह के कमेंट करते नजर आ रहे है एक यूजर ने लिखा है कि आपने अक्षरा के कैरेक्टर को बर्बाद कर दिया है. शो देखकर ऐसा लग रहा है कि अक्षरा बिना मर्द के रह नहीं पाती है.

लोगों ने किए नेगेटिव कमेंट

शो में पहले जब अभिमन्यु ने छोड़ा तो वह बस पकड़ कर चली गई और अभिनव के साथ जिंदगी जीने लगी और अब जब अभिनव को गए एक साल भी नहीं हुआ तो वह वापस अभिमन्यु के पास चली गई है. वही दूसरे यूजर ने लिखा कि अभिनव की मौत को एक साल भी नहीं हुआ और शो में अक्षरा -अभिमन्यु के रोमांटिक मूमंट शुरु हो गए. अगर अभिमन्यु और अक्षरा का सीन दिखाना तो लीप ले आते. प्रोगेर्स के नाम पर कुछ भी मत दिखाओ.

 

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दर्शकों हुए खुश

वही कुछ दर्शक ऐसे में है जो अक्षरा -अभिमन्यु को हग करते देख काफी खुश है. वह सोशल मीडिया पर दोनों की रोमांटिक फोटो शेयर कर खुशी जाहिर कर रहे है. एक यूजर ने लिखा कि अभिमन्यु ने अक्षरा को हग किया. कल हग डे होने वाला है.कल के एपिसोड को इंतजार रहेगा. वही, दूसरे यूजर ने लिखा है  कि फाइनली, अक्षरा-अभिमन्यु को नौ महीने बाद एक साथ देखकर अच्छा लगा.

 

शिल्पा शेट्टी ने राज कुंद्रा के बारे में किया ये खुलासा, जाने क्या बोलीं

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी जितना अपनी फिल्मों को लेकर चर्चा में नहीं रहती है उससे कहीं ज्यादा वो अपने फैमिली को लेकर सुर्खिया बंटोरती है. उन्होने हाल में अपने और राज कुंद्रा के रिलेशन को लेकर ढेर सारी बातें कहीं है. कि कैसे उनके पति उन्हे सपोर्ट करते है या उनके काम को लेकर कैसा रिएक्ट करते है.

आपको बता दें, कि शिल्पा शेट्टी की फिल्म सुखी आने वाले दिनों में रीलिज होने वाली है जिसे लेकर शिल्पा शेट्टी जबरदस्त प्रमोशन करने में लगी हुई है. इसी दौरान उन्हे अपने पति संग बॉन्ड को लेकर चर्चा की है साथ ही उनके काम को लेकर उनके पति कैसे रिएक्ट करते है वो भी बताया है शिल्पा ने काफी समय बाद राज कुंद्रा को लेकर बात कही है साथ ही उन्होने ये भी बताया है कि किसी बॉलीवुड इंडस्ट्री के लड़के साथ उन्होने शादी क्यो नहीं रचाई थी.

शिल्पा से पूछा गया कि राज आपकी किस तरह की हैल्प करते है. तो शिल्पा ने जवाब में कहा कि राज आज भी मेरे बेस्ट फ्रैंड है मैने अपने दोस्ट से शादी की है. हम दोनों एक दूसरे से सब शेयर करते है मैं आज काम कर सकती हूं तो सिर्फ राज की वजह से. राज एक प्राउड पति है. राज से शादी करने के बाद में करियर में ओर आगे बढ़ी हूं. उन्होने ही मुझे कहा कि सुखी फिल्म करो. मैं तो इसके लिए तैयार नहीं थी फिर उन्होने ही मनाया.

शादी पर क्या बोली शिल्पा शेट्टी

शिल्पा ने कहा कि मैं इंडस्ट्री में किसी से भी शादी कर सकती थी लेकिन मैं नहीं चाहती थी. मेरी वजह ये है कि अगर आप डायरेक्टर है, प्रोड्यूसर हो या एक्टर हो तो आपको कभी भी फोन आ जाता है और वहा पहुंचना होता है. इसलिए मैंने डिसाइड किया था कि मैं किसी डॉक्टर या एक्टर से शादी नहीं करूंगी. क्योकि दोनों को कहीं भी कॉल आ जाती है.

सुखी फिल्म

सुखी फिल्म की बात करें तो शिल्पा शेट्टी इसमें पंजाबी हाउस वाइफ का किरदान निभा रही है जो फैमिली में ही फंस कर परेशान हो जाती है. इसके बाद वे डिसाइड करती है कि वह स्कूल रीयूनियन में जाएंगी और वह पूरी तरह बदल जाती है. वह वापस अपनी लाइफ जीती है और घर की जिम्मेदारियों के बीच फंस कर फिर भूल जाती है.

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