Bigg Boss OTT2 की हुई रीयूनियन पार्टी, पूजा भट्ट और एल्विश यादव ने की खूब मस्ती

टीवी पर रियलटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 ने खूब धमाल मचाया था, सभी कंटेस्टेंट ने शो में चार चांद लगा दिए थे. जिससे शो की टीआरपी भी हिट रही थी. वही शो के बाद भी शो के कंटेस्टेंट की चर्चाएं खूब होती रहती है कोई ना कोई सुर्खियों में बने रहते है और मीडिया की लाइमलाइट में रहते है. अब इन दिनों बिग बॉस की रीयूनियन पार्टी हुई है जहां सभी कंटेस्टेंट एक साथ नजर आए है वही शो में महफील जमाने के लिए पूजा भट्ट ने शैंपियन की बोतल खोली और फलक नाज ने अंदर का नजारा दिखाया है.

 

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आपको बता दें, कि मीडिया को खुश करने के लिए रीयूनियन पार्टी हुई. जहां सभी अलग-अलग अंदाज में देखने को मिले. हालांकि कई कंटेस्टेंट नजर नहीं आए. सबसे पहले फलक नाज और अविनाश सचदेवा ने ग्रैंड एंट्री ली. फलक लॉन्ग गाउन में काफी सुदंर लग रही थी.

 

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अविनाश भी वन सेट आउटफिट में कमाल लग रहे है. इसके अलावा पार्टी में एल्विश यादव पूजा भट्ट संग मस्ती करते नजर आएं. वही फलक नाज और बेबिका ध्रुवे झुमते नजर आए. एल्विश यादव ने अपने स्वैग के साथ एंट्री ली. वह अपने सिंपल अंदाज में दिखें. एल्विश ने मीडिया को ढेर सारे पोज दिए.

 

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पूजा भट्ट और बेबिका ध्रुवे की दोस्ती पार्टी में भी देखने को मिली. दोनों रेड कलर के आउटफिट में नजर आई. दोनों की ट्विनिंग लोगों को खूब पसंद आई. वही पूजा ने दोस्ती ना खत्म होने की बात कही.पार्टी में पलक पुरसवानी और अकांक्षी पुरी टीवी की दुनिया की नई दोस्ती बन गई. दोनों ने अपनी दोस्ती को लेकर बात कही.

 

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पलक पुरसवानी पिंक कलर के आउटफिट में नजर आई. एक्ट्रेस ने वीडियो में खुलासा किया कि उन्हे एक गिफ्ट मिला है.इस पार्टी में आशिका भाटिया ने भी शिरकत की ब्लैक ड्रेस में बेहद खूबसूरत दिख रही थी. फलक नाज ने अपनी एक वीडियो में अंदर का पूरा नजारा दिखाया. हालांकि पार्टी में कुछ कंटेस्टेंट नही आए थे, जिसमें अभिषेक मल्हान, जिया शंकर और मनीषा रानी नजर नहीं आएं.

 

कातिल लुक देती दिखीं Ameesha Patel, नेकलेस पर टिकी सबकी निगाहें

बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल इन दिनों अपनी फिल्म गरद 2 की सक्सेस को लेकर काफी सुर्खियों में है फिल्म ने अब तक 500 करोड़ का आकाड़ा पार कर लिया है इस फिल्म का दूसरा पार्ट पूरें 22 साल बाद पर्दे पर आया है. जिसे दर्शको का खूब प्यार मिला है. साथ ही सनी देओल और अमीषा पटेल की जोड़ी लंबे समय बाद देखने को दर्शकों मिला. अब हाल ही में अमीषा पटेल मुबंई में स्पॉट हुई जहां उन्होने मीडिया की लाइमलाइट चुरा ली. अमीषा यहां ऑफ शोल्डर में नजर आई. जिसे देख फैंस खूब तारीफे कर रहे है.

 

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आपको बता दें, कि एक्ट्रेस क्रील कलर के गुउन में दिखीं. जो कि ऑफ शॉल्डर था. इसके साथ उन्होने ज्वैलरी कैरी की हुई थी. जिसपर सबकी निगाहें टिकी हुई थी. लोग उनकी ड्रेसिंग लुक और ज्वैलरी पर नजरे टिकाएं हुए थे.इस आउटफिट में एक्ट्रेस बेहद ही खूबसूरत नजर आ रही थी. अमीषा ने बालों को पोनी बनाई हुई थी. इस तस्वीर में अमीषा बेहद ही प्यारी लग रही थी. अमीषा के इस लुक की सभी तारफें कर रहे है.

 

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बता दें कि अमीषा पटेल और सनी देओल की फिल्म ‘गदर 2’ कमाई के मामले में प्रभास की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बाहुबलि 2’ का भी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है और ऐसा करके यह फिल्म सेकंड हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बन चुकी है. बात अमीषा पटेल की करें, तो एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, वह अक्सर अपने फोटोज और वीडियोज अक्सर फैंस के साथ साझा करती नजर आ जाती हैं. इंस्टाग्राम पर एक्ट्रेस को 5.3 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं.

हर गली में शराबी फिल्में चसका लगाएं, सरकारें चुप्पी साध जाएं

साल 2013 में एक फिल्म आई थी ‘ये जवानी है दीवानी’. रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की इस फिल्म में 4 जवान दोस्तों की जिंदगी पर फोकस किया गया था, जिस में महंगी डैस्टिनेशन शादी को बड़े जोरशोर से दिखाया गया था.

साथ ही, उस शादी में शराब पानी से ज्यादा परोसी गई थी.फिल्म के हर दूसरे सीन में कोई न कोई शराब का गिलास हाथ में लिए खड़ा होता है और किसी को इस बात से परहेज नहीं था कि मर्द शराब पी रहा है या औरत. बूआ, चाचा, मामा और भानजेभतीजी सब नशे के आगोश में थे.

ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी शराब कंपनी ने फिल्म में पैसा लगाया हो.साल 1984 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘शराबी’ में तो एक गाना ही था कि जहां ‘चार यार मिल जाएं वहीं रात हो गुलजार…’ इस फिल्म का हीरो शराबी का किरदार निभा रहा था.

जब वही ऐसा गाना गाएगा, तो समझ जाइए कि शराब ही रात गुलजार करने का एकलौता सहारा होगी. उस की कार की डिक्की में ही बार बना हुआ था, जिस में शराब की बोतलें सजी थीं.और तो और, फिल्म ‘दबंग’ में पुलिस चुलबुल पांडे का किरदार निभा रहे सलमान खान ‘हम का पीनी है, पीनी है, पीनी…’ कहते हुए जरा भी नहीं झिझकते हैं.

खाकी वरदीधारी सिर पर बोतल धर कर बेहूदगी से मटक रहे होते हैं.शराब के गाने पर तो हनी सिंह ने हद ही कर दी. ‘चार बोतल वोडका, काम मेरा रोज का…’ गा कर उन्होंने नई पीढ़ी को जता दिया कि शराब किस तरह हमारी जिंदगी में घुस चुकी है.

कव्वाली हो या गजल, रैप हो या दुख भरा गीत या फिर शादी के डीजे पर बजने वाले गाना, शराब का गुणगान इस तरह करते नजर आ रहे हैं, जैसे किसी ने अगर शराब नहीं पी है तो उसे जीने का सलीका ही नहीं आया है.

फिल्मों में काम करने वाले सैलेब्रिटी असल जिंदगी में भी शराब के चसके से दूर नहीं रह पाते हैं. इन की पार्टियों में शराब की खूब खपत होती है. रात को बहुत से फिल्म कलाकार नशे में झूमते कैमरे में कैद होते देखे गए हैं.

अब तो उन के बच्चे भी ऐसी स्टार पार्टियों में शराब के शौकीन होते जा रहे हैं. संजय दत्त, रणबीर कपूर, मनीषा कोइराला, सुष्मिता सेन ने तो कबूल किया हुआ है कि एक समय वे सब शराब की गिरफ्त में रह चुके हैं.

शराब को इस तरह ग्लैमराइज कर के फिल्म वाले तो करोड़ों रुपए कमा लेते हैं, पर ऐसी फिल्में देख कर शराब पीने वाले आम लोगों खासकर नई पीढ़ी का जिस तरह बेड़ा गर्क हो रहा है, वह चिंता की बात है. हमारे देश में शराब की खपत इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इस तस्करी हद पर है. एक बानगी देखिए :

* अगस्त, 2023. पंजाब से गुजरात शराब ले जाते एक ट्रक को अहमदाबाद हाईवे पर पकड़ा गया. ट्रक से 940 कार्टन शराब जब्त करने के साथसाथ 2 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया. उस शराब की कीमत तकरीबन एक करोड़ रुपए आंकी गई. ट्रक में बुरादा भर कर उस के भीतर शराब छिपाई गई थी.

* अगस्त, 2023. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की पुलिस ने भारी मात्रा में विदेशी शराब से लदे एक ट्रक को जब्त किया. इस दौरान ट्रक का मालिक और ड्राइवर भी गिरफ्तार हुआ. जब्त ट्रक समेत शराब की कीमत सवा करोड़ रुपए बताई गई.

* जुलाई, 2023. पुलिस और स्पैशल टास्क फोर्स ने हरियाणा से तस्करी कर बिहार जा रहे एक ट्रक से गैरकानूनी शराब पकड़ी. पुलिस ने तस्करों को भी गिरफ्तार किया. कीटनाशक दवाओं के नीचे शराब की पेटियां भरी हुई थीं. इन चंद खबरों से अंदाजा हो जाता है कि भारत में शराब की इतनी ज्यादा खपत है कि यहां शराब की तस्करी धड़ल्ले से होती है.

आंकड़ों की बात मानें, तो एक स्वैच्छिक संगठन कंज्यूमर वौइस के मुताबिक, भारत में प्रति व्यक्ति शराब (42 फीसदी से ज्यादा अलकोहल) की खपत 13.5 लिटर सालाना है, जो दुनिया में सब से ज्यादा है.एक और रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में तकरीबन 16 करोड़ लोग अलकोहल का सेवन करते हैं. इन में 95 फीसदी मर्द हैं, जिन की उम्र 18 से 49 साल के बीच है.

एक सर्वे कंपनी क्रिसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में 5 राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के लोग देश में बिकी कुल शराब का तकरीबन 45 फीसदी सेवन कर गए थे.सरकार को टैक्स से मतलबदिक्कत यह है कि ‘शराब है खराब’ की बात तो हर कोई जानता है, इस के बावजूद भारत में इस सामाजिक बुराई की खपत में पिछले कुछ साल में (साल 2010 और साल 2017 के बीच) 38 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई थी.

एक तरफ शराब से मिलने वाले मुनाफे से सरकार अपना खजाना भरने में बिजी है, वहीं दूसरी तरफ घर नशे की इस आफत से टूट रहे हैं, खत्म हो रहे हैं, पर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है.सरकार के रेवैन्यू कलैक्शन में 10 से 15 फीसदी तक की हिस्सेदारी शराब की बिक्री से मिलने वाले टैक्स की होती है.

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों के टैक्स रेवैन्यू में तो 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी शराब की है.मार्चअप्रैल, 2020 में कोरोना की वजह से जब लौकडाउन लगा तो शराब की दुकानें भी बंद कर दी गई थीं.

इस से सरकारों को बहुत नुकसान हुआ था. लेकिन जब शराब की दुकानें फिर खुलीं तो एक दिन में ही सरकारों ने खूब कमाई की.‘आज तक’ की एक खबर के मुताबिक, अकेले उत्तर प्रदेश में एक दिन में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की शराब बिकी थी.

वहीं, महाराष्ट्र सरकार को भी एक दिन में 11 करोड़ रुपए से ज्यादा का रेवैन्यू मिला, जबकि दिल्ली सरकार ने हफ्तेभर में 235 करोड़ रुपए की शराब बेच दी थी.परिवार होते बरबाद‘शराब की लत’ ये 3 ऐसे भयावह शब्द हैं, जो हर तीसरे घर को लीलते दिख रहे हैं.

चूंकि शराब पीने का चसका कम उम्र में लग जाता है और चढ़ती जवानी में ही यह लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है. लिहाजा, यह शराबी के साथसाथ उस के परिवार को भी तबाह कर देती है.‘अमर उजाला’ अखबार में साल 2020 में पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में शराब के कहर पर एक रिपोर्ट छपी थी.

उस में बड़ी गंभीर जानकारी दी गई थी कि एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल यूनिवर्सिटी के शिक्षा संकाय ने 2 साल पहले उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के एक इलाके में शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक दशा पर एक रिसर्च कराई थी.

इस में बेहद चौंकाने वाली बात यह थी कि पुरुषों की औसतन मृत्यु आयु 37.5 साल (सामान्य मृत्यु आयु 50 साल से ऊपर को छोड़ कर) आई थी.इस की वजह शराब से बीमारी लगना थी. यूनिवर्सिटी के गैस्ट टीचर आशु रौलेट ने चमोली के जोशीमठ इलाके में परिवारों के सामाजिक लैवल की स्टडी की थी, जिस में पिछले 25 सालों में 50 फीसदी लोगों की मौत घर में बनाए जाने वाली कच्ची शराब से हुई थी.किसी घर में शराब के सेवन से 35 साल में, तो किसी घर में 40 साल में घर के कमाऊ सदस्य की मौत हो गई थी.

इस वर्ग में सिर्फ 3 फीसदी ही ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं. 21 फीसदी ने प्राइमरी और 18 फीसदी ने मिडिल के बाद पढ़ाई छोड़ दी. शराब पीने से कमाऊ सदस्य की अचानक मौत ने इन की पढ़ाई छुड़ा दी. माली हालत बिगड़ने पर बच्चों को पढ़ाई छोड़ कर मजबूरन कोई रोजगार करना पड़ा.ये हालात सिर्फ तथाकथित ‘देवभूमि उत्तराखंड’ के ही नहीं हैं, कमोबेश भारत के हर राज्य में शराब ने अपनी जानलेवा जड़ें जमाई हुई हैं.

शर्म और दुख की बात तो यह है कि देश की तमाम सरकारें इस दानव की ‘होम डिलीवरी’ कराने पर आमादा दिखती हैं, जबकि शराब की लत एक ऐसी बुराई है, जो न सिर्फ पीने वाले पर ही असर डालती है, बल्कि हत्या, रेप, खुदकुशी या मोटरगाड़ी हादसों की एक बड़ी वजह है. इस ‘बेहया नशे’ की खासीयत यह है कि यह हर तबके को अपने में डुबो कर उस का दम घोंट देने की ताकत रखती है.

साइकोलौजिस्ट तबके ने अपनी स्टडी में पाया है कि शराबी के खून में अलकोहल की मात्रा एक फीसदी हो जाती है, तो उसे मदहोश समझा जाता है. 12 फीसदी मात्रा होने पर शराबी की चालढाल बदल या बिगड़ जाती है, जबकि यही मात्रा 15 फीसदी होने के बाद हद से ज्यादा मदहोश हो जाता है. ऐसे लोग अपनी जिंदगी की बाजी हार चुके होते हैं.

उन की सामाजिक इज्जत की धज्जियां उड़ चुकी होती हैं और उन पर हमेशा डर हावी रहता है.सरकार मंदिरों में उलझी हैपिछले 10 साल से इस देश में एक ही समस्या रह गई है कि किस तरह यह हिंदू राष्ट्र बन जाए. इस के लिए हर गलीमहल्ले में मंदिरों की बाढ़ सी आ गई है, जहां औरतों का जमावड़ा लगा रहता है.

दावा किया जाता है कि मंदिर लोगों की जिंदगी सुधार रहे हैं, पर जो औरतें उन में सिर नवाती फिरती हैं, उन्हीं के घर शराब से बरबाद हो रहे हैं, पर मजाल है कि कहीं कोई सुनवाई हो रही हो. पंडेपुजारी इन्हीं औरतों से व्रतउपवास के नाम पर पैसे तो बटोर लेते हैं, पर शराब से जुड़ी उन की समस्या पर मुंह से दो कड़े बोल नहीं फूटते हैं.

सरकार अगर यह मानती है कि पंडे समाजसुधारक होते हैं, तो वह क्यों नहीं उन्हें शराबबंदी के काम में लगाती है? क्यों नहीं पुजारी घरघर जाएं और शराबियों को शराब से दूर रहने की बात कहें? फिर देखते हैं कि ऊपर वाले के इन नुमाइंदों की शराबी कितनी सुनते हैं.याद रखिए कि शराब ऐसा नशा है, जो लोगों को धीरेधीरे अपनी चपेट में लेता है.

यह पैसे, सेहत, सामाजिक इज्जत के साथसाथ जिंदगी पर भी वार करता है. इस सब के बावजूद इस ‘डायन’ से पीछा छुड़ाया जा सकता है, बस कुछ बातों को गांठ बांध कर रखना होता है, जैसे :* आप अपने शराब छोड़ने के फैसले के बारे में अपने परिवार और दोस्तों को जरूर बताएं और उन से यह कहने में कतई न झिझकें कि वे आप पर नजर रखें.

कभी शराब पीने की ललक उठे तो वे आप को सपोर्ट करें कि इस से बचा जाए.* अपनेआप को बिजी रखें. ऐसे काम करें, जिन में आप को शारीरिक मेहनत करनी पड़े. ऐसा करने से आप तंदुरुस्त रहेंगे. आप को अच्छी नींद भी आएगी.

* अपने शराबी दोस्तों की संगत से बचें. उन के शराब पीने के समय उन के पास कतई न जाएं.* शराब छोड़ने के पहले 2-3 हफ्ते के दौरान आप को शराब के आकर्षण से बचना होगा. आप घर पर रखी बोतलें फेंक दें और उन जगहों पर न जाएं, जहां आप बैठ कर शराब पीते थे.

* आप उन सारी बातों की लिस्ट बनाएं, जो आप को शराब पीने के लिए उकसाती हैं. उन्हें करने से बचें.

* अपनी सेहत सुधारने के साथसाथ परिवार को भी देखें कि आप के इस बुराई से दूर होने पर उन्हें कितनी दिमागी राहत मिलती है.शराब सेहत से ज्यादा गरीब के पैसे को चूसती है. इस तबके में इतना सोचनेसमझने की ताकत नहीं होती है कि जिस फिल्म को वह मनोरंजन के नजरिए से देखता है, वहां कोई हीरो शराब को हीरो बना कर पेश करे, तो वह गरीब भी यह मान लेता है कि ‘अंगूर की बेटी’ इतनी भी नुकसानदेह नहीं है.

धीरेधीरे वह शराब पीता है और फिर बाद में शराब उसे पीती है. उसे तन, मन और धन से कंगाल कर देती है.रहीसही कसर वर्तमान सरकार के नएनए बनते मंदिर पूरी कर रहे हैं. वहां से मोक्ष का रास्ता तो मिलने की गारंटी है, पर किसी शराबी का नशा छुड़ाने का कोई उपाय नहीं बताया जाता है.

पढ़ाई के बीच में नौकरी करना कितना सही और गलत, सलाह दीजिए?

सवाल

मैं 21 साल का एक कुंआरा लड़का हूं. मैं पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा हूं. मैं गरीब घर से हूं और मेरी जाति भी निचली है. चूंकि परिवार में कमाने वाले सिर्फ पिता हैं और उन की तनख्वाह बहुत ज्यादा नहीं है, तो मुझ पर भी दबाव रहता है कि मैं कोई नौकरी कर लूं. पर पढ़ाई के बीच नौकरी करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही है. लेकिन कोई दूसरा रास्ता भी नहीं सूझ रहा है. इस बात से मुझे तनाव रहने लगा है. सलाह दीजिए कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

दुनियाभर के कामयाब लोगों में से ज्यादातर ने कम उम्र से ही दोहरी जिम्मेदारी निभाई है. उन्होंने गरीबी और अभावों के सामने घुटने नहीं टेके, बल्कि उन से लड़ाई लड़ कर उन्हें जीता है. आप उन लोगों की जिंदगी से सबक लेते हुए उन पर अमल करें. इसे तनाव नहीं, बल्कि एक चैलेंज समझ कर कोई नौकरी कर लें और पढ़ाई भी जारी रखें. पिता की जिम्मेदारी में हाथ बंटाएं और साथ ही कैरियर भी बनाएं.

सवाल 

मेरी उम्र 24 साल है. मैं एक गरीब घर की लड़की हूं और एक छोटे से कसबे में रहती हूं. मुझे एक ब्यूटी पार्लर में नौकरी मिल रही है, पर उस ब्यूटी पार्लर को चलाने वाली चाहती है कि मैं सजधज कर कम कपड़े पहन कर ब्यूटी पार्लर के बाहर खड़ी रहूं, ताकि लोगों की नजर मुझ पर पड़े. उस का मानना है कि ऐसा करने से ब्यूटी पार्लर का मुफ्त में प्रचार हो जाएगा, पर जब मैं बाहर खड़ी होती हूं तो मनचले मुझ पर गंदे कमैंट करते हैं, वे मेरा रेट पूछते हैं, जिस से मुझे बड़ी कोफ्त होती है और मेरा पूरा दिन तनाव भरा रहता है. मुझे नौकरी की बहुत ज्यादा जरूरत है, पर मैं अपनी इस समस्या का समाधान कैसे करूं?

जवाब

ब्यूटी पार्लर समेत ग्लैमर के दूसरे कारोबारों में इस तरह की नुमाइश आम बात है. आप की पैसों की जरूरत अगर बिना कुछ दिए पूरी हो रही है तो कोफ्त क्यों? यह बात हमारे गले नहीं उतर रही कि आप को सैक्सी गुडि़या बना कर कालगर्ल की तरह ब्यूटी पार्लर के बाहर खड़ा किया जाता होगा. हां, ब्यूटी पार्लर के अंदर जरूर मालकिन के मुताबिक ड्रैस, जिसे यूनिफौर्म कहना बेहतर होगा, सभी को पहननी पड़ती है. जो लोग रेट पूछें, आप उन्हें पूरी विनम्रता से ब्यूटी पार्लर की खूबियां बताएं, तो उन की गलतफहमी दूर हो जाएगी.

ज्यादा तनाव होता हो, तो आप यह नौकरी छोड़ भी सकती हैं, लेकिन इस से बड़े शोषण वाली नौकरी या काम मिला तो क्या करेंगी? जरा सोचें.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें.

मोबाइल नंबर : 08826099608

सैक्स ऐजुकेशन का कमाल खुशहाल रहें नौनिहाल

यह बेहद आसान होता जा रहा है कि गलत समझ या बिना समझ के बच्चे सैक्स से जुड़ी कुंठा में फंस जाते हैं और बहुत बार कुछ ऐसा करने पर मजबूर हो जाते हैं, जो उन्हें मानसिक तनाव में धकेल देता है. दूसरी ओर बहुत से बच्चे किसी घटिया इनसान द्वारा काफी देर तक अपने साथ होने वाले बुरे बरताव को बरदाश्त करते रहते हैं.

इसी सब्जैक्ट पर बनी एक बेहतरीन फिल्म ‘ओएमजी 2’ आप को यह समझाती है कि इस मुद्दे पर बात करना और इस के साथ ऐजूकेशन सिस्टम में सैक्स ऐजूकेशन पर बात करना कितना जरूरी है.

बातबात पर लोग बच्चों में अपराधबोध पैदा करते हैं. बच्चों को यह तो बताया जाता है कि वह गलत है, पर यह नहीं बताया जाता कि सही क्या है? बिना यह समझे कि उन्हें सही और गलत समझाएगा कौन.

बढ़ते अपराधों के बीच सुधार पर कोई भी काम को छोड़ आजकल अधिकतर लोग पौक्सो ऐक्ट लगा कर ज्यादातर बच्चों को अपराधी बना कर जेल में डाल देना चाहते हैं.

‘ओएमजी-2’ इन सभी सवालों पर बात करती एक उम्दा फिल्म है, जिसे पूरे परिवार के साथ देखना चाहिए. मगर ‘ओएमजी-2’ एडल्ट सर्टिफिकेट के साथ रिलीज हुई है. सैंसर बोर्ड ने ऐसा करने से पहले क्या सोचा होगा, यह समझना मुश्किल है, जबकि फिल्म अपनेआप में यह जवाब देती है कि समाज ने कैसे इस सब्जैक्ट पर बात करने को भी टैबू बना दिया है.

हमें यह समझना होगा कि बच्चे पर सवाल उठाने की जगह उसे समझना और सही शिक्षा देना समाज के लिए ज्यादा कारगर होगा. ऐसे सब्जैक्ट पर अगर कोई फिल्म आती है तो वह हमारे समाज की जरूरतों को सही दिशा में दिखाने की कोशिश करती है.

दरअसल, भारत में सैक्स ऐजूकेशन की शुरुआत होने के बाद भी इस पर बहुत काम करना बाकी है. आज भी बच्चो में इस सब्जैक्ट की समझ बहुत ज्यादा नहीं बढ़ पाई है, जिस की बड़ी वजह इस पर परिवार, समाज और सभी स्कूलों में अभी भी बच्चों के साथ खुल कर बातचीत नहीं होती है और न ही उन की जरूरतों को समझने की कोशिश ही की जा रही है.

जिस तरह औरतों और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में सामाजिक रूप से हमें यह समझने की जरूरत है कि यह हो क्यों रहा है? एनसीआरबी की साल 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित कुल 1,49,404 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि साल 2021 में 1,28,531 मामले दर्ज किए गए, जो 16.2 फीसदी की बढ़ोतरी है.

किसी बच्चे के खिलाफ हर तीसरा अपराध पौक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था, वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर (प्रति 1 लाख जनसंख्या पर घटनाओं की संख्या) में बढ़ोतरी हुई है और साल 2022 में 4,28,278 मामले दर्ज किए थे.

बैन हल नहीं एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बच्चे कम उम्र में ही पोर्नोग्राफी के संपर्क में आ रहे हैं. पहली बार पोर्नोग्राफी के संपर्क में आने की औसत उम्र 13 साल है. पोर्न साइटों को ब्लौक करने की कोशिशों के बावजूद इस में बढ़ोतरी जारी है और ऐसे बैन ने अनजाने में ही बच्चों की जिज्ञासा बढ़ा दी है.

माहिरों की मानें, तो जो बच्चे पारिवारिक टूट का शिकार ज्यादा होते हैं, उन में पोर्नोग्राफी की लत लगने का खतरा ज्यादा होता है.

इस के अलावा खराब पारिवारिक माहौल बच्चों को पोर्न की लत की ओर ले जाने में खास रोल निभाता है.

अपने ही कर रहे जुल्म इस के अलावा ये बच्चे किसी भी अनहोनी का आसान शिकार भी होते हैं. जो लोग बच्चों को टारगेट करना चाहते हैं, वे ऐसे मौकों का फायदा उठाने में पीछे नहीं हटते हैं, जहां कोई बच्चा पारिवारिक टूट का शिकार हो रहा हो या वह किसी मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, जिसे उस के आसपास के करीबी लोग अनदेखा कर रहे हों.

हम सब बहुत सी ऐसी खबरें पढ़ते हैं, जिन में बच्चों को गलत तरीके से बहला कर कोई उन के साथ शोषण करता है या उन में पोर्नोग्राफी की लत लगा कर उन का वीडियो बना कर वायरल कर देता है और यह सब होना कोई भी बच्चा जिंदगीभर भूल नहीं पाता है.

क्यों जरूरी है सैक्स ऐजूकेशन

साल 2007 में भारत सरकार ने किशोर शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस का लगातार विरोध होता रहा था. कुछ राज्यों ने तो इस पर बैन लगा दिया था. इस के बावजूद भी यह कार्यक्रम कुछ चुनिंदा सरकारी और निजी स्कूलों में लागू किया गया.

हालांकि अब यह समझने की जरूरत है कि इस सब्जैक्ट से हिचकिचाने से काम नहीं चलेगा. अगर बच्चों को सही यौन शिक्षा नहीं दी गई, तो लिंग से जुड़ी हिंसा, गैरबराबरी, अनचाहा गर्भधारण, एचआईवी और दूसरे यौन संचारित संक्रमण बढ़ते जाएंगे और उन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में जरूरी है कि स्कूल में सिर्फ टीचर ही नहीं,बल्कि मातापिता भी झिझक को दूर रख कर अपने बच्चे से इस सब्जैक्ट पर बात करें.

जब बचपन से जवानी में कदम रखते हैं, तो बहुत से नौजवानों को रिश्तों और सैक्स के बारे में भ्रमित और गलत जानकारी होती है. इसी वजह से पुख्ता जानकारी की मांग बढ़ी है, जो उन्हें एक अच्छी जिंदगी के लिए तैयार करता है.

लिहाजा, यह जरूरी है कि परिवार और समाज के साथ स्कूलों में बच्चों के लिए उन की उम्र के मुताबिक शैक्षिक सामग्री तैयार करने और पाठ्यक्रम के साथ नौजवानों को शामिल किया जाए.

कुछ नागरिक समाज और संगठनों ने इस क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है. उन की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें स्कूलों में सभी श्रेणियों के छात्रों और शिक्षकों के साथ काम करने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए. अगर उन्हें समयसमय पर ब्रीफिंग मिले और कार्यशालाओं से गुजरना पड़े, तो वे ज्यादा असरदार होंगे.

इस के साथ ही यह याद रखने की भी जरूरत है कि भारत साल 1994 में जनसंख्या और विकास पर संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का एक हस्ताक्षरकर्ता देश होने के नाते उस के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के रूप में किशोरों और नौजवानों के लिए मुफ्त और अनिवार्य सैक्स ऐजूकेशन देने के लिए बाध्य है.

अपने शरीर और उस की जरूरतों को समझने के लिए अगर किसी बच्चे को उचित ऐजूकेशन दी जाए, तो वह अपनी बीवी, मां, बहन, बेटी, प्रेमिका को बेहतर समझ पाएगा. जिस हिसाब से बच्चों को मोबाइल और इंटरनैट पर गलत जानकारी और पोर्न देखने को मिल जाता है, अगर वहीं स्कूलों में सही जानकारी दी जाए तो क्या गलत है?

इंसान को लुटेरा बना सकती है शाहखर्ची

29 दिसंबर, 2016 की रात उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना निगोहां के गांव मदाखेड़ा के देशी शराब के ठेके पर कुछ लोग बैठे शराब पी रहे थे. रात गहराई तो शराब पीने वाले वे लोग ठेके से थोड़ी दूरी पर जा कर खड़े हो गए. इस की वजह यह थी कि वे शराब के ठेके के पास चलने वाली कैंटीन में चोरी करना चाहते थे. वे अकसर यहां शराब पीने आते थे. इस से उन्हें पता था कि कैंटीन में पैसा रखा रहता है. दरअसल, नया साल आने वाला था, इसलिए उन लोगों को मौजमस्ती और शाहखर्ची के लिए पैसों की जरूरत थी. इस के लिए उन्हें कैंटीन में चोरी करने से बेहतर कोई दूसरा उपाय नजर नहीं आ रहा था. शराब का यह ठेका सिसेंडी निवासी राजेश कुमार जायसवाल की पत्नी सरिता जायसवाल के नाम था.

28 साल का मनीष कुमार अपने परिवार के गुजरबसर के लिए ठेके के पास कैंटीन चलाता था. उस की कैंटीन में शराब के साथ पीने के लिए पानी, कोल्डड्रिंक और नमकीन बिस्कुट वगैरह मिलता था. दिन भर जो बिक्री होती थी, वह मनीष के पास कैंटीन में ही रखी रहती थी. रायबरेली जिले के रहने वाले राजनारायण, कल्लू, चुन्नीलाल और चंदन अकसर यहां आ कर शराब पीते थे. पैसों के लिए ये इलाके में चोरी और लूटपाट करते थे. इन सभी को शान से रहने की आदत थी. इन्हें महंगी गाडि़यों में घूमने और ब्रांडेड कपड़े पहनने का शौक था.

रायबरेली जिले के थाना बछरावां के रहने वाले राजनारायण और चंदन बापबेटे थे. बेरोजगारी और महंगे शौक ने दोनों को एक साथ अपराध करने के लिए विवश कर दिया था. गिरोह बना कर ये इलाके में पत्तल और दोने बेचते थे.

इस के जरिए ये पता कर लेते थे कि किस घर या दुकान में रकम मिल सकती है. ये सभी ज्यादातर बड़ी दुकानों, शोरूम और दूसरी जगहों को ही निशाना बनाते थे. गांव और आसपास की बाजारों में अभी भी लोग बैंकों में पैसा रखने के बजाए घर पर ही रखते हैं. दिसंबर महीने में नोटबंदी के चलते बैंकों में पैसा जमा कराना मुश्किल हो गया था, इसलिए कैंटीन चलाने वाले मनीष ने भी बिक्री के पैसों को कैंटीन में ही रखा हुआ था.

यह बात लुटेरे गिरोह को पता चल गई थी, इसलिए 29 दिसंबर को शराब पीने के बाद इन लोगों ने वहां चोरी की योजना बना डाली थी. रात में मनीष सो गया तो ये सभी चोरी करने के लिए कैंटीन में घुसे. चोरी करते समय बदमाशों ने इस बात का पूरा खयाल रखा कि किसी तरह का कोई शोरशराबा न हो.

इस के बावजूद कैंटीन में रखा एक बरतन गिर गया, जिस की आवाज सुन कर मनीष जाग गया. उस के जागने से चोरी करने वाले परेशान हो उठे. उन्हें पकड़े जाने का भय सताने लगा. बचने के लिए उन्होंने मनीष के सिर पर लोहे का सरिया मार दिया, जिस से वह बेहोश हो कर गिर गया.

उस के सिर से खून बहने लगा. इस के बाद लुटेरे नकदी और सामान लूट कर भाग गए. सुबह शराब के ठेके का सेल्समैन पहुंचा तो उस ने मनीष को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. मनीष के शरीर से खून ज्यादा बह चुका था, इसलिए उसे बचाया नहीं जा सका.

उस की मौत की सूचना थाना निगोहां पुलिस को दी गई तो पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ चोरी और हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी. इंसपेक्टर ओमवीर सिंह ने मामले की जानकारी लखनऊ की एसएसपी मंजिल सैनी को दी तो उन्होंने इस मामले की जांच में क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया.

एसपी क्राइम डा. सुजय कुमार की अगुवाई में गठित टीम में से सर्विलांस सेल के प्रभारी अक्षय कुमार और इंसपेक्टर क्राइम उदय प्रताप सिंह ने मामले की छानबीन शुरू कर दी. पुलिस के लिए सब से मुश्किल काम यह था कि घटना का कोई चश्मदीद नहीं था. यह पूरी तरह से ब्लाइंड मर्डर था. ऐसे में पूरा दारोमदार सर्विलांस टीम पर था.

निगोहां पुलिस और क्राइम ब्रांच ने कुछ संदिग्ध लोगों को निशाने पर लिया. उन की जानकारी सर्विलांस टीम को दी. इस तरह कड़ी से कड़ी जुड़ने लगी. आखिर में पुलिस के हत्थे रायबरेली जिले का यह लुटेरा गिरोह लग गया. अब जरूरत थी घटना के बारे में उन से कबूल करवाना.

दरअसल, लुटेरे आपस में फोन पर बातें कर रहे थे, उसी से पुलिस को उन के द्वारा की गई वारदात का पता तो चल ही गया था, यह भी पता चल गया था कि वे निगोहां के टिकरा गांव के पास बने सामुदायिक मिलन केंद्र पर एकत्र होंगे.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर के 6 जनवरी को इस गिरोह को पकड़ लिया था. पुलिस को इस गिरोह के पास से 35 हजार रुपए नकद और 10 मोबाइल फोन मिले थे. पुलिस ने गिरोह के सदस्यों से वह सरिया भी बरामद कर लिया था, जिस से मनीष की हत्या की गई थी.

पूछताछ में इस गिरोह ने बताया था कि निगोहां के ही बाबूखेड़ा गांव में रामू के घर 15 अक्तूबर को हुई चोरी भी इन्हीं लोगों ने की थी. दरअसल 29 दिसंबर की रात इस गिरोह ने सब से पहले पत्तेखेड़ा और मदाखेड़ा गांव में चोरी का प्रयास किया था, पर सफल नहीं हो सके थे.

ऐसे में ये शराब के ठेके पर पहुंचे, जहां कैंटीन में इन लोगों ने पैसा देखा तो लूट की योजना बना डाली. लूट के दौरान आवाज होने से ये लोग बचने के लिए मनीष को मारने पर मजबूर हो गए. पुलिस की इस सफलता के लिए एसएसपी मंजिल सैनी और एसपी क्राइम डा. संजय कुमार ने पुलिस टीम को बधाई दी है.

एसआई अक्षय कुमार ने बताया कि यह गिरोह पहले अपने टारगेट को चुनता था, उस के बाद चोरी करता था. उस दिन 2 जगहों पर असफल होने के बाद ये कैंटीन में चोरी करने को मजबूर हो गए. इन्हें किसी भी तरह से पैसा हासिल करना था, इसलिए ये समझ नहीं पाए कि कैंटीन में कोई सोया हुआ है. इन्हें लगता था कि कैंटीन में कोई होगा नहीं. इंसपेक्टर ओमवीर सिंह का कहना था कि इस गिरोह के पकड़े जाने के बाद इलाके में होने वाली चोरियां रोकी जा सकेंगी?

ये 5 रुटीन आपकी स्किन को बनाएंगे बेहद ही खूबसूरत, चेहरा करेगा ग्लो

लड़कियां अपनी स्किन को लेकर काफी परेशान रहती है किसी स्किन ड्राई होती है, किसी की बेजान नजर आती है और ऐसे में आप परेशान हो जाती है कि अपनी स्किन को कैसे ठीक करें. किस तरह चहरे पर चमक पाई जाएं, तो इसके लिए आज हम कुछ ऐसे ही तरीके लेकर आएं है जिससे आप अपनी स्किन को ग्लोईंग बना सकती है. साथ ही स्पॉट लेस बना सकती है. इशके साथ ही कुछ नुस्खों से आपकी स्किन डिहाईड्रेट भी होगी. जिससे आपका चेहरा चमक उठेगा और बेहद खूबसूरत नजर आएंगी.

रोज आप एक खट्टा फल जरूर खाएं, जैसे-सेब, संतरा, अनार, अंगूर, आम, कीवी आदि. इसमें मौजूद विटामिन सी आपकी स्किन को ग्लोइंग बनाने का काम करता है.

आप दिन की शुरूआत एक गिलास गुनगुने पानी के साथ करें. इससे आपके शरीर में जमा टॉक्सिन्स मल मूत्र के सहारे बाहर आ जाते हैं, जिससे चेहरे पर निखार आता है.

अपने चेहरे को बेसन से धोएं. इससे स्किन में जमी डेड स्किन बाहर आ जाएगी. वहीं, आप रोज रात में सोने से पहले अपने चेहरे को कच्चे दूध से मसाज दीजिए. यह भी स्किन की सेहत के लिए अच्छा होता है. आप शरीर में कोलेजन की भरपाई के लिए हड्डी का शोरबा, चिकन, मछली, अंडे का सफेद भाग खा सकते हैं.

एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं जो त्वचा हाइड्रेट करने में मदद कर सकते हैं. एलोवेरा जेल को सीधे त्वचा पर लगाएं, 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गरम पानी से धो लीजिए. इस रेमेडी को हफ्ते में 2-3 बार करिए.

नारियल का तेल त्वचा को मॉइस्चराइज़ और पोषण देने के लिए जाना जाता है. सोने से पहले थोड़ी मात्रा में नारियल तेल लीजिए फिर इससे मालिश करिए चेहरे को. इसे रात भर लगा रहने दें और सुबह गरम पानी से धो लें.

काले घोड़े की नाल: आखिर क्या था काले घोड़े की नाल का रहस्य ?

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54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए पंजीकरण शुरू

नई दिल्ली: 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के लिए प्रतिनिधि पंजीकरण शुरू होने के साथ ही देश में सबसे बड़े फिल्म और मनोरंजन समारोह की उलटी गिनती शुरू हो गई है. यह महोत्सव 20 से 28 नवंबर, 2023 तक गोवा में होगा. वार्षिक फिल्म महोत्सव में भारत और दुनिया भर से सिनेमा के सबसे बड़े दिग्गज एक छत के नीचे जमा होते हैं, साथ ही युवा प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने के लिए मंच भी उपलब्ध होता है. इस तरह अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए कला, फिल्मों और संस्कृति की संयुक्त ऊर्जा और जोश का जश्न मनाया जाता है.

भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम लिमिटेड (एनएफडीसी), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारतीय फिल्म उद्योग के माध्यम से एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) तथा गोवा राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित कर रहा है. इस कार्यक्रम में भारतीय और विश्व सिनेमा का सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन किया जाएगा.

आईएफएफआई विभिन्न वर्गों में भारतीय और विश्व सिनेमा के विविध चयन की व्यवस्था करता है. अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता (15 प्रशंसित फीचर फिल्मों का चयन), आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी मेडल पुरस्कार के लिए प्रतियोगिता, एक निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फीचर फिल्म के लिए प्रतियोगिता, सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड यानी आईएफएफआई का दुनिया भर से अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्मों का आधिकारिक चयन, भारतीय पैनोरमा यानी विभिन्न भारतीय भाषाओं में सिनेमाई, विषयगत और सौंदर्य उत्कृष्टता की फीचर और गैर-फीचर फिल्मों का संग्रह, फेस्टिवल कैलिडोस्कोप यानी दिग्गजों की असाधारण फिल्मों का वर्गीकरण, उभरती प्रतिभाओं के काम, अन्य फिल्मोत्सवों की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्में) कुछ ऐसे अनुभाग हैं जो भारतीय और विश्व सिनेमा को प्रदर्शित करते हैं. कंट्री फोकस, एनिमेशन, वृत्तचित्र और गोवा फिल्म्स जैसी भारतीय और विदेशी फिल्मों के विशेष क्यूरेटेड पैकेज भी प्रदर्शित किए गए हैं. गाला प्रीमियर, दैनिक रेड कार्पेट कार्यक्रम और समारोह उत्सव का आकर्षण बढ़ाते हैं.

स्क्रीनिंग के अलावा, आईएफएफआई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समुदाय की 200 से अधिक प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा आयोजित कार्यशालाओं, मास्टरक्लास, आपसी संवाद सत्र और पैनल चर्चा की प्रस्तुति करता है.

यहाँ से करें शुल्क भुगतान क्र पंजीकरण

54वें आईएफएफआई के लिए प्रतिनिधि पंजीकरण निम्नलिखित श्रेणियों के लिए iffigoa.org के माध्यम से किया जा सकता है.प्रतिनिधि सिनेप्रेमी 1000/- रुपये और जीएसटी का भुगतान कर पंजीकरण कर सकते हैं. जबकि प्रतिनिधि प्रोफेशनल 1000/- रुपये और जीएसटी और प्रतिनिधि छात्र बिना किसी पंजीकरण शुल्क के प्रतिभाग करने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं,

‘फिल्म बाजार’ के लिए भी पंजीकरण

54वें आईएफएफआई के साथ-साथ एनएफडीसी द्वारा आयोजित ‘फिल्म बाजार’ के 17वें संस्करण का भी पंजीकरण शुरू हो गया है. यह ‘फिल्म बाजार’ दक्षिण एशिया के सबसे बड़े वैश्विक सिनेबाजार के रूप में कार्य करता है, जो दक्षिण एशियाई और अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्मकारों, निर्माताओं, बिक्री एजेंटों और उत्सव प्रोग्रामरों के बीच रचनात्मक और वित्तीय सहयोग की सुविधा प्रदान करता है. फिल्म बाज़ार के लिए प्रतिनिधि पंजीकरण filmbazaarindia.com पर उपलब्ध है.

54वें आईएफएफआई के लिए मीडिया पंजीकरण शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा, जिससे पत्रकारों और मीडिया प्रोफेशनलो को इस सिनेमाई कार्यक्रम तक पहुंच मिलेगी.

Bigg Boss ott2 की कंटेस्टेंट बेबिका ध्रुवे को मिली पूजा भट्ट-विक्रम भट्ट की फिल्म

रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी2 की कंटेस्टेंट रही पूज भट्ट और बेबिका ध्रुवे (Bebika Dhurve) खूब चर्चा में रही. दोनों की दोस्ती ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. ऑनस्क्रीन लोगों को इनकी दोस्ती काफी पसंद आई थी इनकी दोस्ती शो के बाद भी देखने को मिली. दोनों साथ में वेकेशन के लिए गए. जहां की तस्वीरें लोगों को खूब पसंद आई. वही, बेबिका ध्रुवे को पूजा भट्ट की दोस्ती ने ही नया प्रोजेक्ट दिलाया है. पूजा भट्ट और विक्रम भट्ट की आने फिल्म में नजर आ सकती है जिसकी जानकारी खुद बेबिका ध्रुवे ने अपना एक पोस्ट शेयर करके दी है.

 

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आपको बता दें, कि बेबिका धुर्वे ने सोशल मीडिया पर कुछ फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वह पूजा भट्ट के चाचा और निर्देशक विक्रम भट्ट के साथ नजर आ रही हैं. ये फोटो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस दौरान वह सामने बैठे शख्स को कुछ बता भी रही हैं. हालांकि, उस व्यक्ति का चेहरा तो नजर नहीं आ रहा, लेकिन लग रहा है कि सामने पूजा भट्ट ही बैठी हुई हैं. इन फोटोज के साथ बेबिका ने कैप्शन में लिखा, ‘आज का दिन ही शानदार था. मुझे विक्रम भट्ट, महेश भट्ट और पूजा भट्ट की हथेली की रेखाएं देखने का मौका मिला.’ इन फोटोज के बीच पूजा भट्ट ने भी अपनी इंस्टा स्टोरी पर नई फिल्म का ऐलान कर दिया है. ऐसे में माना ज रहा है कि पूजा भट्ट और विक्रम भट्ट की नई फिल्म में बेबिका धुर्वे को कास्ट किया गया है.

 

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बिग बॉस ओटीटी 2 के बाद से लोग बेबिका ध्रुवे को जानने लगे है बेबिका ने अपनी पहचना इसी रिएलियी शो से बनाई है और उन्हे यही से खास दोस्त पूजा भट्ट भी मिली है. एक फैन ने लिखा, ‘मिल गई, मिल गई, बबीता जी को फिल्म मिल गई.’ वहीं एक यूजर ने लिखा, ‘मैं तो बिल्कुल भी इंतजार नहीं कर पा रहा हूं.आखिर क्या प्रोजेक्ट है बता दीजिए न.’ वहीं ढेर सारी यूजर्स ने बेबिका के लिए खुशी जताई. कुछ लोगों ने बेबिका को ट्रोल भी किया है. हालांकि, फैंस अब सिर्फ पूजा भट्ट या बेबिका की तरफ से ऑफिशियल अनाउंसमेंट का इंतजार कर रहे हैं.

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