(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)
पता चला कि राममेहर ने कुछ समय पहले ही एक करोड़ 41 लाख रुपए की 4 बीमा पौलिसियां कराई थीं. उन बीमा पौलिसियों में उस ने पत्नी संतोष को नौमिनी बनाया था.
यह बात भी सामने आई कि लौकडाउन में उस की फैक्ट्री का कामकाज ठप हो गया था. फिर उस ने इतनी बड़ी रकम की पौलिसियां क्यों कराई?
इस के अलावा उस के मोबाइल की काल डिटेल्स में उस की एक महिला मित्र का पता चला. उस महिला मित्र से पूछताछ के बाद राममेहर के जीवित होने और उस की साजिश का पता चला गया. राममेहर ने बीमा पौलिसियों का पैसा हड़पने और कर्जदारों से छुटकारा पाने के लिए अपनी मौत का ड्रामा रचा था.
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राममेहर जीवित मिल गया और उस के नाटक से भी परदा उठ गया, लेकिन एक सवाल यह रह गया कि कार में जो शव मिला था, वह किस का था? हिसार के एसपी लोकेंद्र सिंह के अनुसार शव डाटा गांव के ही राममेहर उर्फ रमलू का था.
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के बाद राममेहर की साजिश की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस तरह थी—
राममेहर को व्यापार में घाटा हो रहा था. लौकडाउन में व्यापार बिलकुल ही ठप हो गया था. उस पर एकडेढ़ करोड़ रुपए का कर्ज भी था. उस ने पीएनबी और एचडीएफसी बैंक से पर्सनल लोन भी लिया था. वह शराब पीता था और उस की कई महिलाओं से दोस्ती भी थी. इन महिला मित्रों पर भी वह काफी पैसा खर्च करता था.
पैसे के लिए परेशान था
खर्चों के हिसाब से आमदनी नहीं होने से वह परेशान रहने लगा था. उस ने एकदो बार आत्महत्या करने की भी सोची. बाद में उस ने बीमा क्लेम हड़पने और कर्जदारों से छुटकारा पाने के लिए खुद को मृत घोषित करने की साजिश रची. इस साजिश के तहत उस ने इसी साल जुलाई में एक करोड़ 41 लाख रुपए की 4 बीमा पौलिसियां कराईं.
साजिश के तहत मारने के लिए उस ने अपने ही गांव के राममेहर उर्फ रमलू को चुना. गरीब रमलू डफली बजागा कर परिवार की गुजरबसर करता था. रमलू के परिवार में उस की बीवी और बूढ़ी मां के अलावा 3 बेटे और 3 बेटियां थीं. रमलू में शराब पीने की बुरी लत थी. वह गाबजा कर आसपास के गांवों में अनाज मांगने के लिए निकल जाता, तो कभी एकदो दिन बाद और कभी तीनचार दिन बाद घर लौटता था. इसलिए परिवार वाले उस की ज्यादा चिंता नहीं करते थे.
राममेहर ने 6 अक्टूबर को बैंक से 10 लाख 90 हजार रुपए निकलवाए. इस में से उस ने साढ़े 4 लाख रुपए एक महिला मित्र सुनीता को नकद दिए. कुछ रकम उस ने दूसरी महिला मित्र के बैंक खाते में जमा करा दी.
गरीब रमलू बना निशाना
राममेहर को उस दिन शाम को रमलू गांव के बाहर शराब पीते हुए मिल गया. उसे देख कर राममेहर की आंखें चमक गईं. उस ने घर पर फोन कर कहा कि वह हिसार जा रहा है. घर फोन करने के बाद राममेहर ने रमलू को अपनी कार में बैठा लिया. फिर उस ने शराब खरीदी.
कार को भाटलामहजद की सुनसान सड़क पर खड़ी कर दोनों शराब पीते रहे. कार की ड्राइविंग सीट पर राममेहर बैठा था, उस के पास वाली सीट पर रमलू. राममेहर ने खुद कम शराब पी. रमलू को वह रात तक शराब पिलाता रहा.
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रमलू जब शराब के नशे में पूरी तरह बेसुध हो गया, तो उस ने उसे गला दबा कर मार डाला. फिर उस ने अपनी कार के फ्यूल टैंक से डीजल निकाला. डीजल निकालने के लिए उस ने पहले से ही कार में पतली पाइप रखी हुई थी. रमलू और कार पर डीजल छिड़क कर उस ने आग लगा दी.
उस ने जलती हुई कार को एकदो मिनट तक देखा. इस के बाद पैदल ही ढाणी कुतुबपुर के लिए चल दिया. रास्ते में उस ने अपने बेटे और भांजे को घबराई हुई आवाज में फोन पर झूठी सूचना दे कर कहा कि उसे कुछ बदमाशों ने घेर लिया है.
ढाणी कुतुबपुर में पहले से ही उस की एक महिला मित्र की कार तैयार खड़ी थी. वह उस कार से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के लिए रवाना हो गया.
7 अक्टूबर की रात में वह बिलासपुर पहुंच गया. वहां वह अपने एक परिचित के पास रुका. परिचित से उस ने कहा कि वह बिलासपुर में जमीन खरीदना चाहता है, इसलिए आया है. इस बीच, उस ने अपने नए मोबाइल नंबरों से अपनी महिला मित्रों से संपर्क बनाए रखा.
पुलिस ने इस मामले में 12 अक्टूबर को राममेहर की महिला मित्र सुनीता को गिरफ्तार कर लिया. हांसी की जगदीश कालोनी की रहने वाली सुनीता 4 साल पहले तक राममेहर की फैक्ट्री में काम करती थी. इसी दौरान वह राममेहर के संपर्क में आई थी. रमलू को जला कर मारने का पता चलने पर पुलिस ने इस मामले में एससीएसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दीं.
बाद में पुलिस ने राममेहर की दूसरी महिला मित्र रानी को भी इस मामले में गिरफ्तार कर लिया. वह रानी की कार से ही बिलासपुर गया था. उस ने वारदात वाले दिन रानी के खाते में करीब पांच लाख रुपए जमा कराए थे. रानी के खाते की चैकबुक व एटीएम कार्ड राममेहर के पास थे. उस की योजना थी कि खुद को मृत घोषित करने के बाद जरूरत पड़ने पर वह उस के खाते से पैसे निकाल लेगा.
राममेहर की असलियत उजागर होने के बाद उस की पत्नी संतोष न तो खुद को सुहागन कह पा रही है और न ही विधवा. राममेहर ने अपनी मौत का ड्रामा रच कर संतोष की सुहाग की सारी निशानियां मिटा दीं. उस के बेटेबेटियां भी पिता की करतूत से हैरान हैं. 70 साल का बूढ़ा पिता टेकचंद कहता है ‘हमारे ऐसे करम थे जो ऐसा कपूत पैदा हुआ. उस ने तो जिंदगी भर का बट्टा लगा दिया.’
राममेहर के लालच में रमलू बेमौत मारा गया. उस के घर में अब आंसू, लाचारी और बेबसी है. रमलू गाबजा कर परिवार पालता था. अब उस की पत्नी कृष्णा और 6 बच्चों का गुजारा कैसे होगा, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा. कृष्णा पर रमलू के छोटे भाई की स्वर्गवासी पत्नी के 5 बच्चों के पालनपोषण की जिम्मेदारी भी आ गई है.
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रमलू इस घटना से 2 दिन पहले गांव से गया था, वह वापस घर नहीं लौटा, तो घर वालों ने ज्यादा चिंता नहीं की, क्योंकि वह पहले भी कई बार 3-4 दिनों में लौटा था. राममेहर से पूछताछ के बाद पुलिस जब रमलू के घर पहुंची, तो सचाई का पता चलने पर उस के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. कार में जला शव रमलू का ही था, इस की पुष्टि के लिए पुलिस डीएनए जांच करा रही है.
(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)
रात को वह हिसार से अपने गांव डाटा लौट रहे थे, तभी रास्ते में 2 बाइक और एक कार में सवार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और रकम लूटने के बाद उन्हें कार में जिंदा जला दिया. हांसी पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूटपाट और हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.
सवाल मुंह बाए खड़े थे
पुलिस ने जांच शुरू की तो कई तरह के अनसुलझे सवाल सामने आए. पहला तो यही कि लुटेरों को राममेहर के पास मोटी रकम होने की सूचना कैसे मिली? दूसरे हिसार में वह किनकिन लोगों से मिले थे? क्या उन से पैसों का लेनदेन भी किया था? एक महत्त्वपूर्ण सवाल यह भी था कि कार किस ज्वलनशील पदार्थ से जलाई गई थी?
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राममेहर का शव ड्राइवर के पास वाली सीट पर मिला था, एक सवाल यह भी था कि कार में क्या कोई दूसरा व्यक्ति भी था? और यह भी कि वह हिसार से अपने गांव डाटा सीधे रास्ते से जाने के बजाय लिंक रोड से क्यों जा रहे थे?
हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस ने राममेहर के मोबाइल की कालडिटेल्स निकलवाई. वारदात स्थल के आसपास 6 अक्तूबर की रात उस इलाके में एक्टिव रहे मोबाइल नंबरों का पता लगाया गया. मौकाएवारदात का सीन भी रिक्रिएट किया गया. कार में मिला शव राममेहर का ही है, इस की पुष्टि के लिए डीएनए जांच कराने का फैसला किया गया.
राममेहर ने हांसी में बैंक से जब रकम निकलवाई थी, तब उन के साथ और आसपास कौन लोग थे, इस का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई. बैंक से राममेहर के खाते की डिटेल्स भी निकलवाई गई.
राममेहर के परिवार के बारे में पुलिस को पता चला कि वह 7 बहनों के इकलौते भाई और सब से छोटे थे. उन की मां की एक साल पहले मृत्यु हो गई थी. परिवार में उस के पिता टेकचंद, पत्नी संतोष, 2 बेटियां और एक बेटा आशीष था.
दसवीं तक पढ़े राममेहर के पास करीब 15 एकड़ जमीन थी. वह खेतीबाड़ी के साथ व्यापार भी करते थे. पहले उन की डिस्पोजल की फैक्ट्री हांसी में बरवाला बाइपास पर थी.
करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने वह फैक्ट्री बंद कर दी और बरवाला रोड पर ही डिस्पोजल आइटम्स के कच्चे माल की फैक्ट्री शुरू की. उन का माल हरियाणा के अलावा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में भी जाता था.
राममेहर की मौत से डाटा और उस के आसपास के गांवों में रहने वाले लोग हैरान थे. हैरानी इस बात की थी कि उस इलाके में पहले कभी ऐसी वारदात न तो सुनी गई थी और न ही देखी गई थी. राममेहर की किसी से रंजिश या दुश्मनी होने की बात भी सामने नहीं आई.
राममेहर की मौत से उन के घर ही नहीं पूरे गांव में मातम छा गया था. सहारे की लाठी टूटने से बूढ़े पिता टेकचंद की आंखें पथरा गई थीं. पत्नी संतोष बेहोश और बेटियां बेसुध हो गई थीं. इस जघन्य वारदात से हिसार और हांसी के व्यापारियों में भी आक्रोश था.
अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को अपनी जांच का दायरा बढ़ाना पड़ा. तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों से विभिन्न सवालों के जवाब खोजने के लिए पुलिस अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई.
सीन औफ क्राइम यूनिट के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि शव राममेहर का है या नहीं, इस का पता डीएनए जांच से ही चलेगा. उन्हें जिंदा जलाया या मार कर, यह हिस्टोपैथोलाजी जांच से साफ हो सकता था. जिस ज्वलनशील पदार्थ से कार को जलाया गया, वह पेट्रोलडीजल या कोई कैमिकल था?
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राममेहर का शव जिस सीट पर मिला था, वह पीछे की तरफ झुकी हुई थी. इस से इस बात की संभावना थी कि उन्हें कार से बाहर खींचने का प्रयास किया गया होगा, वह बाहर नहीं निकले तो उन्हें मारपीट कर मार डाला गया या अधमरा कर छोड़ दिया और फिर ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जला दिया गया.
एक सवाल यह भी उठा कि बदमाश अगर चलती कार को रोकने की कोशिश करते तो दुर्घटना होती, लेकिन मौके पर इस के सबूत नहीं मिले. इस से अंदेशा हुआ कि किसी परिचित ने कार को रुकवा कर वारदात को अंजाम दिया होगा.
आखिर सामने आ ही गई सच्चाई
जांचपड़ताल में कुछ ऐसे सबूत सामने आए कि पुलिस अफसर भी चौंक गए. करीब 11 लाख रुपए लूट कर राममेहर को कार में जिंदा जलाने की सचाई का पुलिस ने वारदात के करीब 65 घंटे बाद ही पता लगा लिया.
राममेहर घटनास्थल से 1300 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से जीवित मिल गया. हिसार पुलिस उसे बिलासपुर से गिरफ्तार कर हांसी ले आई.
राममेहर से की गई पूछताछ और सबूतों के आधार पर उस की साजिश से परदा उठ गया. राममेहर ने ऐसी खौफनाक साजिश क्यों रची, यह कहानी बताने से पहले यह जानना जरूरी है कि पुलिस उस तक पहुंची कैसे?
जांचपड़ताल में पुलिस को कार पर कोई खरोंच तक नहीं मिली थी. कार सड़क किनारे खड़ी थी, हैंड ब्रेक लगे थे. इस से साफ हो गया कि कार को इत्मीनान से रोका गया था. सड़क पर कार दौड़ाने का कोई सबूत नहीं मिला. कार सड़क के बीच नहीं साइड में खड़ी थी.
आसपास दूसरी कार और बाइक के टायरों के निशान नहीं मिले थे. अगर किसी को अनहोनी का खतरा हो तो वह गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा नहीं करेगा और हैंडब्रेक तो बिल्कुल नहीं लगाएगा. कार को अंदर व बाहर एकसाथ कैमिकल डाल कर जलाया गया था ना कि कार में आग फैली थी.
पुलिस को मौके पर कार से राममेहर का मोबाइल नहीं मिला था, जबकि उस की अंतिम लोकेशन उसी जगह की थी. कंकाल बन चुका शव कार के ड्राइवर के पास वाली सीट पर था. बेटे और भांजे के पास राममेहर का फोन रात सवा 11 बजे आया था, लेकिन उन्होंने पुलिस को सूचना रात 12 बज कर 5 मिनट पर दी गई थी. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कोई भी नहीं मिला, बाद में घरवाले जब मौके पर पहुंचे, तो कहा कि वे रास्ता भटक गए थे.
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आमतौर पर ऐसे मामलों में अवैध संबंध, बीमा क्लेम या अन्य किसी निजी स्वार्थ के लिए षडयंत्र रच कर खुद की मौत साबित करने की कोशिश की जाती है. इन्हीं सब बातों से शक उभरा, तो पुलिस ने गहराई से छानबीन की.
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आशीष की सूचना पर पुलिस रात के सन्नाटे में तलाश करते हुए जब भाटलामहजद रोड पर पहुंची, तो दूर से ही कुछ जलता हुआ नजर आया. पास जा कर देखा, सड़क किनारे खड़ी एक इंडिगो कार जल रही थी. कार से हल्की लपटें अभी भी उठ रही थीं.
सड़क पर घुप अंधेरा था. कोई वाहन आजा नहीं रहा था. वैसे भी इस रोड पर रात के समय इक्कादुक्का वाहन ही गुजरते हैं. पुलिस वालों ने मोबाइल की टार्च जला कर देखा. कार में आगे ड्राइवर के पास वाली सीट पर एक आदमी बैठा था. वह भी जल चुका था. लपटें उठने के कारण कार का गेट नहीं खुल रहा था.
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कार के आसपास कोई नहीं था. पुलिस वालों ने आवाज लगाई, कोई है? लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आवाज रात के सन्नाटे में गुम हो गई.
मौके के हालात से लग रहा था कि कार में कोई आदमी जिंदा जल गया है. अनुमान लगाया गया कि कार में करीब एक घंटा पहले आग लगी होगी, क्योंकि जब पुलिस पहुंची, तब तक लपटें कम हो गई थीं लेकिन पूरी तरह बुझी नहीं थी. यह बात 6 अक्टूबर की रात करीब सवा 12 बजे की है.
हरियाणा के हिसार जिले में एक शहर है हांसी. कार हांसी से करीब 17 किलोमीटर दूर भाटलामजहद रोड पर जलती हुई मिली थी. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही थी कि कार में कौन है और उस के साथ क्या हादसा हुआ है? तभी एक गाड़ी से कुछ लोग वहां आए. उन्होंने गाड़ी से उतर कर कार को देखा. कार में एक आदमी को जिंदा जला हुआ देख वे लोग रोने लगे.
रोतेसुबकते हुए एक युवक ने पुलिस को बताया कि उस का नाम आशीष है. उस ने ही पुलिस को फोन किया था.
आशीष ने आगे बताया कि वह पास के ही डाटा गांव का रहने वाला है. उस के पिता राममेहर जागलान की बरवाला रोड बाइपास पर डिस्पोजल आइटम्स के कच्चे माल की फैक्ट्री है.
पापा सुबह घर से कारोबार के सिलसिले में गए थे. उन के पास करीब 11 लाख रुपए थे. पैसे उन्होंने दिन में बैंक से निकलवाए थे. रात करीब सवा 11 बजे उन का फोन आया. फोन पर घबराई हुई आवाज में उन्होंने कहा कि महजदभाटला के बीच में कुछ गुंडों ने उन्हें घेर लिया है. ये लोग मुझ से पैसे छीन रहे हैं. जल्दी आ जाओ. ये मुझे मार डालेंगे.
आशीष ने बताया कि पापा ने मुझे फोन करने के बाद गगनखेड़ी के रहने वाले मेरी बुआ के लड़के विकास को भी काल कर यही बात कही थी. इस पर हम घर वालों के साथ गाड़ी से पापा को तलाश करने गांव से चल दिए थे. रास्ते में हम ने पुलिस को सूचना दी. राममेहर के भांजे विकास ने पुलिस को बताया कि मामा ने रात को मोबाइल पर काल कर कहा था कि बदमाश 2 मोटर साइकिल और एक गाड़ी में हैं.
लुटेरों का काम था?
आशीष व उस के घरवालों की बातों और मौके के हालात से मोटे तौर पर यह माना गया कि रात के समय राममेहर को कार में अकेले जाते देख कर बदमाशों ने लूटने की कोशिश की होगी. राममेहर ने लुटेरों का विरोध किया होगा. इसलिए उन्होंने राममेहर को कार में ही जिंदा जला दिया.
पुलिस ने आशीष से बदमाशों के बारे में पूछा, लेकिन कुछ पता होता तो वह बताता. पुलिस ने उस से राममेहर की किसी से दुश्मनी के बारे में पूछा, लेकिन आशीष को इस के बारे में भी कुछ पता नहीं था. बहरहाल, पुलिस को बदमाशों के बारे में कुछ पता नहीं चल सका.
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हैरत की बात यह थी कि भाटलामहजद रोड पर पहले कभी इस तरह की कोई बड़ी वारदात नहीं हुई थी. आमतौर पर लूटपाट करने वाले मारपीट या हथियार से हमला कर जान लेते हैं, लेकिन जिंदा जलाने की घटना बिलकुल अनोखी थी.
फिर भी पुलिस ने राममेहर के बेटे आशीष और दूसरे लोगों से फौरी तौर पर पूछताछ की, लेकिन पुलिस को ऐसी कोई बात पता नहीं चली, जिस से बदमाशों का सुराग मिल पाता.
आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था. रात के अंधेरे में उस समय ज्यादा कुछ हो भी नहीं सकता था. इसलिए पुलिस ने एक कांस्टेबल को मौके पर छोड़ दिया और राममेहर के घर वालों को सांत्वना दे कर घर भेज दिया.
अगले दिन 7 अक्तूबर की सुबह पुलिस मौके पर पहुंच कर इस मामले की जांचपड़ताल में जुट गई. राममेहर के घर वाले भी वहां आ गए. कार की आग पूरी तरह बुझ चुकी थी. कार में आगे की सीट पर अधजले इंसान का कंकाल पड़ा था.
कंकाल के पास ही हनुमान जी का एक लौकेट मिला. लौकेट देख कर आशीष और दूसरे लोगों ने कहा कि यह राममेहर का है. इस से माना गया कि कार में जिंदा जलाया गया इंसान राममेहर था.
व्यापक छानबीन
वारदात खौफनाक थी, इसलिए एसपी लोकेंद्र सिंह सहित हिसार पुलिस के दूसरे अफसरों ने भी मौकामुआयना किया. सदर थाना पुलिस, एफएसएल, सीआईए, सायबर सेल और भाटला चौकी पुलिस ने अलगअलग एंगलों से जांच शुरू की.
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अग्रोहा के मेडिकल कालेज भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद शव राममेहर के घरवालों को सौंप दिया गया. उन्होंने उसी दिन गांव में शव की अंत्येष्टि कर दी.
जली हुई कार में पुलिस को राममेहर का मोबाइल नहीं मिला. यह भी पता नहीं चला कि मोबाइल जल गया या बदमाश ले गए. दूसरी भी ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से बदमाशों का पता चलता.
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घर वालों से पूछताछ के आधार पर पुलिस को पता चला कि राममेहर ने 6 अक्तूबर को हांसी के एक्सिस बैंक से 10 लाख 90 हजार रुपए निकलवाए थे. उस दिन वह शाम करीब 5 बजे फैक्ट्री से व्यापार के सिलसिले में हिसार जाने के लिए निकले थे. उन्होंने शाम को घर फोन कर कहा था कि रात को देर से घर आएंगे.
छत्तीसगढ़ अपने वनांचल एवं आदिवासी बाहुल्य होने के कारण दुनिया में पिछड़ेपन का एक नजीर माना जाता है. यहां अंधविश्वास, पिछड़ापन लिए हुए परंपराएं शराब के कारण होती हत्याएं कुछ ऐसी बातें हैं जो छत्तीसगढ़ को एक ऐसी छवि के रूप में प्रस्तुत करती है मानो यह विकास के, आधुनिकता के बहुत पीछे पीछे चल रहा है. कुछ मायने में यह सच भी है, यहां के अनेक जिले ऐसे हैं जो आदिवासी बाहुल्य हैं यहां जंगल हैं और लोग बेहद गरीबी में जी रहे हैं. शिक्षा से कोसों दूर, विकास से कोसों दूर. ऐसे में सरकार कि जो जिम्मेदारी बनती है उससे वह कोसों दूर है. यहां घर-घर शराब बनती है और लोग शराब पीकर अपनी जिंदगी बर्बाद करते दिखाई देते हैं यही कारण है कि यहां अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं और सरकार इसे रोक पाने में नाकाम सिद्ध हुई है.
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हाल ही में छत्तीसगढ़ के जशपुर में बहुपत्नी के फेर में फंसे एक शख्स ने शराब के नशे में छोटी सी बात पर अपनी एक पत्नी की हत्या कर दी और बचाव के लिए उसे फांसी पर लटका दिया. अपने आप को चतुर समझने वाले इस शख्स के गिरेबान पर अंततः कानून की पकड़ यह एहसास कराती है कि कानून से बड़ा कोई नहीं और कोई कितनी ही चालाकी कर ले अपराध करके बच नहीं सकता.
जशपुर जिले के थाना बगीचा में दिनांक 26 अगस्त 2020 को प्रार्थी कपिल राम निवासी हेठ गम्हरिया के द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उसकी पत्नी ने 25-26 अगस्त के रात्रि फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है. पुलिस ने इस शिकायत पर जिस पर से मर्ग इंटिमेशन कायम कर जांच में लिया गया. मगर आगे चलकर डॉ के द्वारा पीएम रिपोर्ट में मृतिका विमला बाई का मृत्यु होमीसायडल ओर नाक मुंह को दबाकर हत्या करना लेख किया तो पुलिस ने जांच को गति दी गवाहों का कथन लिया गया जिसमें मृतिका विमला कपिल की दूसरी पत्नी थी दोनों शराब पीकर आए दिन लड़ाई झगडा करते रहते थे. कपिल अपनी दूसरी पत्नी के चरित्र पर शंका करता था.
साड़ी मुंह में दाब, कर दी हत्या
घटना के दिन दोनों शराब पीकर लड़ाई झगड़ा करते रहे थे. बाद में नाराज होकर विमला बिना बताए अपने बेटे दिलीप के यहां जा रही थी जिसको इसका लड़का विजय रात में अपने सौतेला बाप के घर छोड़ के आया जहां पर घर के अंदर कमरा में विमला सोने गई व वही कमरा से सटे दरवाजा के पास कपिल सोया था, रात में नशा उतरने से बिना बताए विमला के कहीं चले जाने के बात पर वाद विवाद कर चरित्र पर शंका करने लगा और साड़ी से पत्नी के मुंह को दबाकर उसी साड़ी से म्यार में गला में बांधकर टांग दिया व पुलिस को चकमा देने के लिए आत्महत्या का स्वरूप देने का प्रयास किया. मगर कहते हैं ना कि अपराधी लाख चतुराई करें कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता. यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ जांच पड़ताल में अंततः पुलिस ने आरोपी को धर दबोचा और अपराध क्रमांक 179/20 धारा 302, 201आईपीसी कायम कर अपराध सबूत पाए जाने से गिरफ्तार कर जेल के सीखचों में डाल दिया.
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शराब है अपराध की जड़…
छत्तीसगढ़ में गरीबी और अशिक्षा का कारण शराब एक महत्वपूर्ण कड़ी है. सरकार की आदिवासियों को शराब पीने की छूट उन्हें अपराध के अंधेरे गर्त में ढकेल रही है. ऐसे अनेक अनेक उदाहरण आए दिन घटित होते रहते हैं और सुर्ख़ियों में रहते हैं. इसका मूल कारण शराब होता है जिसके सेवन करने के बाद नशे के अतिरेक में हत्या जैसे अपराध घटित हो जाते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता शिव दास महंत कहते हैं कि छत्तीसगढ़ को अगर अपराध मुक्त और विकास मुखी बनाना है तो सरकार को यहां शराबबंदी करनी चाहिए.
अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल के अनुसार अधिकांश हत्याओ के परि पार्श्व में शराब मूल कारण होता है अतः लोगों में यह जागरूकता आनी चाहिए कि शराब हमारे पतन का कारण है इसका सेवन हम ना करें.
सुबहसुबह खाली सड़क मिलने की वजह से रैमचो की टैक्सी घंटे से पहले ही घर पहुंच गई. रैमचो गाड़ी से उतरे, साथ में उन का छोटा बेटा संकल्प उर्फ सैम भी था. मालती ने दरवाजा खोला था.
‘‘अरे भैया, बताया नहीं कि सैम भी साथ है,’’ वह पैर छूने को झुकी.
‘‘नीचे झुक सैम, तेरे सिर तक तो चाची का हाथ भी नहीं जा रहा, कितना लंबा हो गया तू, दाढ़ीमूंछ वाला, चाची के बगैर शादी भी कर डाली. हिंदी समझ आ रही है कि भूल गया. फोर्थ स्टैंडर्ड में था जब तू विदेश गया था.’’ रैमचो की मुसकराते हुए बात सुनती हुई मालती प्यार से उन्हें अंदर ले आई.
‘‘कहां है श्याम, अभी सो ही रहा है?’’ तभी पूजा की घंटी सुनाई दी, ‘‘ओह, तो यह अभी तक बिलकुल वैसा ही है. सुबहशाम डेढ़ घंटे पूजापाठ, जरा भी नहीं बदला,’’ वे सोफे पर आराम से बैठ गए. सैम भी उन के पास ही बैठ कर अचरज से घर में जगहजगह सजे देवीदेवताओं के पोस्टर, कलैंडर देख रहा था.
‘‘स्टें्रज पा, आई रिमैंबर अ लिटिल सैम एज बिफोर,’’ संकल्प बोला.
‘‘वाह भैया, इतने सालों बाद दर्शन दिए,’’ श्यामाचरण पैर छूने को झुके तो रैमचो ने उन्हें बीच में ही रोक लिया, ‘‘इतनी पूजापाठ के बाद आया है, कहांकहां से घूम कर आ रहे इन जूतों को हाथ लगा कर तू अपवित्र नहीं हो जाएगा,’’ कह कर वे मुसकराए.
‘‘बदल जा श्याम, अपना जीवन तो यों ही पूजापाठ में निकाल दिया, अब बच्चों की तो सोच, उन्हें जमाने के साथ बढ़ने दे. इतने सालों बाद भी न घर में कोई चेंज देख रहा हूं न तुझ में,’’ उन्होंने उस के पीले कुरते व पीले टीके की ओर इशारा किया, ‘‘इन सब में दिमाग व समय खपाने से अच्छा है अपने काम में दिमाग लगा और किताबें पढ़, नौलेज बढ़ा. आज की टैक्नोलौजी समझ, सिविल कोर्ट का लौयर है तो हाईकोर्ट का लौयर बनने की सोच. कैसे रहता है तू, मेरा तो दम घुटता है यहां.’’
भतीजे संकल्प के गले लग कर श्यामाचरण नीची निगाहें किए हुए बैठ गए. चुपचाप बड़े भाई की बातें सुनने के अलावा उन के पास चारा न था. संकल्प अंदर सब देखता, याद करता. सब को सोता देख, उठ कर चाची के पास किचन में पहुंच गया और उन के साथ नाश्ता उठा कर बाहर ले आया.
‘‘अरे, बच्चों को उठा दिया होता. क्षितिज और पल्लवी तो उठ गए होंगे. बहू को इतना तो होश रहना चाहिए कि घर में कोई आया हुआ है, यह क्या तरीका है,’’ पांचों उंगलियों में अंगूठी पहने हाथ को सोफे पर मारा था श्यामाचरण ने.
‘‘और तुम्हारा क्या तरीका है, बेटी या बहू के लिए कोई सभ्य व्यक्ति ऐसे बात करता है?’’ उन्होंने चाय का कप उठाते, श्याम को देखते हुए पूछा. आज बड़े दिनों बाद बडे़ भैया श्याम की क्लास ले रहे थे, मालती मन ही मन मुसकराई.
‘‘कोई नहीं, अभी संकल्प ने ही सब को उठा दिया और सब से मिल भी लिया, सभी आ ही रहे हैं, रात को देर में सोए थे. उन को मालूम कहां भैया लोगों के आने का. उठ गए हैं, आते ही होंगे, सब को जाना भी है,’’ मालती ने बताया.
रैमचो को 2 बजे कौन्फ्रैंस में पहुंचना था. सो, सब के साथ मनपसंद नाश्ता करने लगे, ‘‘अब तुम भी आ जाओ, मालती बेटा.’’
‘‘आप लोग नाश्ता कीजिए, भैया, मेरा तो आज करवाचौथ का व्रत है,’’ वह भैया की लाई पेस्ट्री प्लेट में लगा कर ले आई थी.
‘‘लो बीपी रहता है न तुम्हारा, व्रत का क्या मतलब? पहले भी मना कर चुका हूं, जो हालत इस ने तुम्हारी कर रखी है, इस से पहले चली जाओगी.’’ दक्ष, मम्मी के लिए प्लेट ला…श्याम, घबरा मत, तेरी हैल्थ की केयर रखना इस का काम है और वह बखूबी करती है. तू खुद अपना भी खयाल रख और इस का भी. शशि ने तो व्रत कभी नहीं रखा, फिर भी सुहागन मरी न, मैं जिंदा हूं अभी भी. दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है, तू वहीं अटका हुआ है और सब को अटका रखा है. भगवान को मानता है तो कुछ उस पर भी छोड़ दे. अपनी कारगुजारी क्यों करने लगता है.’’
दक्ष प्लेट ले आया तो रैमचो ने खुद लगा कर प्लेट मालती को थमा दी. ‘‘जी भैया,’’ उस ने श्याम को देखा जो सिर झुकाए अच्छे बच्चे की तरह चुपचाप खाए जा रहे थे. भैया को टालने का साहस उस में भी न था, वह खाने लगी.
‘‘पेस्ट्री कैसी लगी बच्चो? श्याम तू तो लेगा नहीं, धर्म भ्रष्ट हो जाएगा तेरा, पर सोनाक्षीपल्लवी तुम लोग तो लो या फिर तुम्हारा भी धर्म…कौन सी पढ़ाई की है. आज के जमाने में. चलो, उठाओ जल्दीजल्दी. इन सब बातों से कुछ नहीं होता. गूगल कैसे यूज करते हो तुम सब, मैडिसन कैसेकैसे बनती हैं, कभी पढ़ा है? कुछ करना है अपने भगवान के लिए तो अच्छे आदमी बनो जो अपने साथ दूसरों का भी भला करें, बिना लौजिक के ढकोसले वाले हिपोक्रेट पाखंडी नहीं. अब जल्दी सब अपनी प्लेट खत्म करो, फिर तुम्हारे गिफ्ट दिखाता हूं,’’ वे मुसकराए.
‘‘मेरे लिए क्या लाए, बड़े पापा,’’ दक्ष ने अपनी प्लेट सब से पहले साफ कर संकल्प से धीरे से पूछा था, तो उस ने भी मुसकरा कर धीरे से कहा, ‘‘सरप्राइज.’’
नाश्ते के बाद रैमचो ने अपना बैग खोला, सब के लिए कोई न कोई गिफ्ट था. ‘‘श्याम इस बार अपना यह पुराना टाइपराइटर मेरे सामने फेंकेगा, लैपटौप तेरे लिए है. अब की बार किसी और को नहीं देगा. दक्ष बेटे के लिए टैबलेट. सोनाक्षी बेटा, इधर आओ, तुम्हारे लिए यह नोटबुक. पल्लवी और मालती के लिए स्मार्टफोन हैं. अब बच गया क्षितिज, तो यह लेटैस्ट म्यूजिकप्लेयर विद वायरलैस हैडफोन फौर यू, माय बौय.’’
‘‘अरे, ग्रेट बड़े पापा, मैं सोच ही रहा था नया लेने की, थैंक्यू.’’
‘‘थैंक्यूवैंक्यू छोड़ो, अब लैपटौप को कैसे इस्तेमाल करना है, यह पापा को सिखाना तुम्हारी जिम्मेदारी है. श्याम, अभी संकल्प तुम्हें सब बता देगा, बैठो उस के साथ, देखो, कितना ईजी है. और हां, अब तुम लोग अपनेअपने काम पर जाने की तैयारी करो, शाम को फिर मिलेंगे.’’
सुबह की पूजा जल्दी के मारे अधूरी रह गई तो श्यामाचरण ने राधे महाराज को शुद्धि का उपाय करने के लिए बुलाया. रैमचो ने यह सब सुन लिया था. महाराज का चक्कर अभी भी चल रहा है, अगली जेनरेशन में भी सुपर्स्टिशन का वायरस डालेगा, कुछ करता हूं. उस ने ठान लिया.
10 बजे राधे महाराज आ गए.
‘‘नमस्ते महाराज, पहचाना,’’ रैमचो ने मुसकराते हुए पूछा.
‘‘काहे नहीं, बड़े यजमान, कई वर्षों बाद देख रहा हूं.’’
‘‘यह बताइए कि लोगों को बेवकूफ बना कर कब तक अपना परिवार पालोगे. अपने बच्चों को यही सब सिखाएंगे तो वे औरों की तरह कैसे आगे बढ़ेंगे, पढ़ेंगे? क्या आप नहीं चाहते कि वे बढ़ें?’’ रैमचो ने स्पष्टतौर पर कह दिया.
पंडितजी सकपका गए, ‘‘मतबल?’’
‘‘महाराजजी, मतलब तो सही बोल नहीं रहे. मंत्र कितना सही बोलते होंगे. कुछ मंत्रों के अर्थ मैं मालती बहू से पहले ही जान चुका हूं. आप जानते हैं, जो हम ऐसे कह सकते हैं उस से क्या अलग है मंत्रों में? पुण्य मिलते बैकुंठ जाते आप में से या आप के पूर्वजों में से किसी ने किसी को देखा है या बस, सुना ही सुना है?’’
‘‘नहीं, यजमान, पुरखों से सुनते आ रहे हैं. पूजा, हवन, दोष निवारण की हम तो बस परिपाटी चलाए जा रहे हैं. सच कहूं तो यजमानों के डर और खुशी का लाभ उठाते हैं हम पंडित लोग. बुरा लगता है, भगवान से क्षमा भी मांगते हैं इस के लिए. परिवार का पेट भी तो पालना है, यजमान. हम और कुछ तो जानते नहीं, और ज्यादा पढ़ेलिखे भी नहीं.’’ राधे महाराज यह सब बोलने के बाद पछताने लगे कि गलती से मुंह से सच निकल गया.
एक नहीं, ऐसी अनेक घटनाएं व पूजा आएदिन घर में होती रहतीं, जिन में श्यामाचरण के अनुसार राधे महाराज की उपस्थिति अनिवार्य हो जाती. राधे महाराज से पहले उन के पिता किशन महाराज, श्यामाचरण के पिता विद्याचरण के जमाने से घर के पुरोहित हुआ करते थे. जरा भी कहीं धर्म के कामों में ऊंचनीच न हो जाए, विवाह, बच्चे का जन्म, अन्नप्राशन, मुंडन कुछ भी हो, वे ही संपन्न करवाते, आशीष देते और थैले भरभर कर दक्षिणा ले जाते.
इधर, राधे महाराज ने शुभमुहूर्त और शुभघड़ी के चक्कर में श्यामाचरण को कुछ ज्यादा ही उलझा लिया था. कारण मालती को साफ पता था, बढ़ते खर्च के साथ बढ़ता उन का लालच, जिसे श्यामाचरण अंधभक्ति में देख नहीं पाते. कभी समझाने का प्रयत्न भी करती तो यही जवाब मिलता, ‘‘तुम तो निरी नास्तिक हो मालती, नरक में भी जगह नहीं मिलेगी तुम को, मैं कहे दे रहा हूं. पूजापाठ कुछ करना नहीं, न व्रतउपवास, न नियमधरम से मंदिरों में दर्शन करना. घर में जो मुसीबत आती है वह तुम्हारी वजह से. चार अक्षर ज्यादा पढ़लिख गई तो धर्मकर्म को कुछ समझना ही नहीं.
‘‘तुम्हारी देखादेखी बच्चे भी उलटापुलटा सीख गए. घबराओ मत, बैकुंठ कभी नहीं मिलेगा तुम्हें. घर की सेवा, समाजसेवा करने का स्वांग बेकार है. अपने से ईश्वर की सेवा करते मैं ने तुम्हें कभी देखा नहीं, कड़ाहे में तली जाओगी, तब पता चलेगा,’’ कहते हुए आधे दर्जन कलावे वाले हाथ से गुरुवार हुआ तो गुरुवार के पीले कपड़ों में सजेधजे श्यामाचरण, हलदीचंदन का टीका माथे पर सजा लेते. उन के हर दिन का नियम से पालन उन के कपड़ों और टीके के रंग में झलकता.
‘‘नरक भी नहीं मिलेगा, कभी कहते हो कड़ाहे में तली जाऊंगी, कभी बैकुंठ नहीं मिलेगा, फिर पाताल लोेक में जाऊंगी क्या? जहां सीता मैया समा गई थीं. अब मेरे लिए वही बचा रह गया…’’ उस की हंसी छूट जाती. मुंह में आंचल दबा कर वह हंसी रोकने की कोशिश करती. कभीकभी उसे गुस्सा भी आता कि दिमाग है तो तर्क के साथ क्यों नहीं मानते कुछ भी. कौआ कान ले गया, सब दौड़ पडे़, अपने कानों को किसी ने हाथ ही नहीं लगा कर देखना चाहा, वही वाली बात हो गई. अब कुछ तो करना चाहिए कि यह सब बंद हो सके. पर कैसे?
वह सोचने लगी कि क्षितिज का सीडीएस का इंटरव्यू भी तो उन के इसी शुभमुहूर्त के चक्कर में छूट गया था. उस की बरात ले कर ट्रेन से पटना के लिए निकलने वाले थे हम सब, तब भी घर से मुहूर्त के कारण इतनी देर से स्टेशन पहुंचे कि गाड़ी ही छूट गई. किस तरह फिर बस का इंतजाम किया गया था. सब उसी में लदेफंदे हाईस्पीड में समय से पटना पहुंचे थे, पर श्यामजी की तो लीला निराली है, तब भी यही समझ आया कि सही मुहूर्त में चले थे, इसलिए कोई हादसा होने से बच गया. फिर पूजा भी इस के लिए करवाई, कमाल है.
नया केस लेंगे तो पूजा, जीते तो सत्यनारायण कथा, हारे तो दोष निवारण, शांतिपाठ हवन. पता नहीं वह कौन सी आस्था है. या तो सब अपने उस देवता पर छोड़ दो या फिर सपोर्ट ही करना है उसे, तो धार्मिक कर्मकांडों की चमचागीरी से नहीं, बल्कि उसे ध्यान में रख कर अपने प्रयास से कर सकते हो. तो वही क्यों न करो. पर अब कौन समझाए इन्हें कितनी बार तो कह चुकी.
करवाचौथ की पूजा के लिए मेरी जगह वे उत्साहित रहते हैं. मांजी के कारण यह व्रत रखे जा रही हूं. पिछले वर्ष ही तो उन का निधन हो गया, पर श्यामजी को कैसे समझाऊं कि मुझे इस में भी विश्वास नहीं. कह दूं तो बहुत बुरा मान जाएंगे. औरत के व्रत से आदमी की उम्र का क्या संबंध? हां, स्वादिष्ठ, पौष्टिक व संतुलित भोजन खिलाने, साफसफाई रखने और घर को व्यवस्थित व खुशहाल रखने से अवश्य हो सकता है, जिस का मैं जीजान से खयाल रखती हूं. बस, अंधविश्वास में उन का साथ दे कर खुश नहीं कर पाती, न स्वयं खुश हो पाती.
‘‘चलो, कोई तो पूजा करती हो अपने से, साल में एक बार. घर की औरत के पूजाव्रत से पूरे घर को पुण्य मिलता है, सुहागन मरोगी तो सीधा बैकुंठ जाओगी.’’ दुनियाभर को जतातेफिरते श्यामाचरण के लिए आज मालती ने भी व्रत रखा है, उन की इज्जत बढ़ जाती. अपने से ढेर सारे फलफलाहारी, फेनीवेनी, पूजासामग्री, उपहार, साड़ी, चूड़ी, आल्ता, बिंदी सब ले आते. सरगई का इंतजाम करना जैसे उन्हीं की जिम्मेदारी हो, इस समझ का मैं क्या करूं? रात की पूजा करवाने के लिए राधे पंडित को खास निमंत्रण भी दे आए होंगे.
सरगई के लिए 3 बजे उठा दिया श्यामाचरण ने.
‘‘खापी लो अच्छी तरह से मालती, पूजा से पहले व्रत भंग नहीं होना चाहिए.’’ वह सोते से अनमनी सी घबरा कर उठ बैठी थी कि क्या हो गया. उस ने देखा श्यामजी उसे जगा कर, फिर चैन से खर्राटे भरने लगे. यह प्यार है या बैकुंठ का डर? पागलों की तरह इतनी सुबह तो मुझ से कभी खाया न गया, भूखा रहना है तो पूरे दिन का खाना मिस करो न.
हिंदुओं का करवा, मुसलमानों का रोजा सब यही कि दो समय का भोजन एकसाथ ही ठूंस लो कि फिर पूजा से पहले न भूख लगेगी न प्यास, यह भी क्या बात हुई अकलमंदी की. नींद तो उचट चुकी थी, वह सोचे जा रही थी. तभी फोन की घंटी बजी. इस समय कौन हो सकता है? श्यामजी की नाक अभी भी बज रही थी, सो, फोन उसी ने उठा लिया.
‘‘हैलो, कौन?’’
‘‘ओ मालती, मैं रैमचो, तुम्हारा डाक्टर भैया, अभी आस्ट्रेलिया से इंडिया पहुंचा हूं.’’
‘‘नमस्ते भैया, इतने सालों बाद, अचानक,’’ मालती खुशी से बोली, ससुराल में यही जेठ थे जिन से उन के विचार मेल खाते थे.
‘‘हां, कौन्फ्रैंस है यहां, सब से मिलना भी हो जाएगा और सब ठीक हैं न?
1 घंटे में घर पहुंच रहा हूं.’’
‘आज 5 सालों बाद डाक्टर भैया घर आ रहे हैं. अम्मा के निधन पर भी नहीं आ सके थे. भाभी का लास्ट स्टेज का कैंसर ट्रीटमैंट चल रहा था, उसी में वे चल भी बसीं. 3 लड़के ही हैं भैया के, तीनों शादीशुदा, वैल सैटल्ड. कोई चिंता नहीं अब, डाक्टरी और समाजसेवा में ही अपना जीवन समर्पित कर रखा है उन्होंने. वह बच्चों को प्रेरणा के लिए उन का अकसर उदाहरण देती है,’ यह सब सोचते हुए मालती फटाफट नहाधो कर आई. फिर श्यामजी को उठा कर भैया के आने के बारे में बताया.
‘‘रामचरण भैया, अचानक…’’
‘‘नहीं, रैमचो भैया. मैं उन की पसंद का नाश्ता तैयार करने जा रही हूं, आप भी जल्दी से तैयार हो जाओ,’’ उस ने हंसते हुए कहा और किचन की ओर बढ़ गई.
श्यामाचरण उठे तो सरगई को वैसे ही पड़ा देख कर बड़बड़ाए थे. खाया नहीं महारानी ने, बेहोश होंगी तो यही होगा, मैं ने ही जबरदस्ती व्रत रखवाया है. भैया तो मुझे छोड़ेंगे नहीं. जब तक यहां थे, मालती की हिमायत, वकालत करते थे हमेशा. मांबाबूजी और दादी से कई बार बहस होती रहती धर्म संस्कारों, रीतिरिवाजों को ले कर कि आप लोग तो आगे बढ़ना ही नहीं चाहते. तभी तो एक दिन अपने परिवार को ले कर भाग लिए आस्टे्रलिया, वहीं बस गए और रामचरण से रैमचो बन गए. अपनी धरती, अपने परिवार को छोड़ कर, उन के बारे में सोचते हुए श्यामाचरण नहाधो कर जल्दीजल्दी नित्य पूजा समाप्त करने में जुट गए.
बाथरूम में नहाते हुए लगातार श्यामाचरण की कंपकंपाती स्वरलहरी गूंज रही थी. उन की पत्नी मालती उन के कोर्ट जाने की तैयारी में जुटी कभी इधर तो कभी उधर आजा रही थी. श्यामाचरण अपनी दीवानी कचहरी में भगत वकील नाम से मशहूर थे. मालती ने पूजा के बरतन धोपोंछ कर आसन के पास रख दिए, प्रैस किए कपड़े बैड पर रख दिए, टेबल पर जल्दीजल्दी नाश्ता लगा रही थी. मंत्रपाठ खत्म होते ही श्यामाचरण का, ‘देर हो रही है’ का चिल्लाना शुरू हो जाता. मुहूर्त पर ही उन्हें कोर्ट भी निकलना होता. आज 9 बज कर 36 मिनट का मुहूर्त पंडितजी ने बतलाया था. श्यामाचरण जब तक कोर्ट नहीं जाते, घर में तब तक अफरातफरी मची रहती. लौटने पर वे पंडित की बतलाई घड़ी पर ही घर में कदम रखते.
बड़ा बेटा क्षितिज और बहू पल्लवी, बेटी सोनम और छोटा बेटा दक्ष सभी उन की इस पुरानी दकियानूसी आदत से परेशान रहते, पर उन का यह मानना था कि वे ऐसा कर के बैकुंठधाम जाने के लिए अपने सारे दरवाजे खोलते जा रहे हैं.
यों तो श्यामाचरण चारों धाम की यात्रा भी कर आए थे और आसपास के सारे मंदिरों के दर्शन भी कर चुके थे, फिर भी सारे काम ठीकठाक होते रहें और कहीं कोई अनर्थ न हो जाए, इस आशंका से वे हर कदम फूंकफूंक कर रखते और घर वालों को भी डांटतेडपटते रहते कि वे भी उन के जैसे विधिविधानों का पालन किया करें.
‘‘अम्मा, अब तो हद ही हो गई, आज भी पापाजी की वजह से मेरा पेपर छूटतेछूटते बचा. अब से मैं उन के साथ नहीं जाऊंगा, बड़ी मुश्किल से मुझे परीक्षा में बैठने दिया गया, पिं्रसिपल से माफी मांगनी पड़ी कि आगे से ऐसा कभी नहीं होगा,’’ दक्ष पैंसिलबौक्स बिस्तर पर पटक कर गुस्से में जूते के फीते खोलने लगा और बोलता रहा, ‘‘फिर मुझे राधे महाराज वाले मंदिर ले गए, शुभमुहूर्त के चक्कर में उन्होंने जबरदस्ती 10 मिनट तक मुझे बिठाए रखा कि परीक्षा अच्छी होगी. जब परीक्षा ही नहीं दे पाता तो क्या खाक अच्छी होती. उस राधे महाराज का तो किसी दिन, दोस्तों से घेर कर बैंड बजा दूंगा.’’
‘‘ऐसा नहीं कहते दक्ष,’’ मालती ने उसे रोका, उसे दक्ष के कहने के ढंग पर हंसी भी आ रही थी. श्यामाचरण के अंधभक्ति आचरण और पंडित राधे महाराज की लोलुप पंडिताई ने, जो थोड़ीबहुत पूजा वह पहले करती थी, उस से भी उसे विमुख कर दिया. लेकिन चूंकि पत्नी थी, इसलिए वह उन का सीधा विरोध नहीं कर पा रही थी. मन तो बच्चों के साथ उस का भी कुछ यही करता इस महाराज के लिए जो बस अपना उल्लू सीधा कर पैसे बटोरे जा रहा है.
सोनाक्षी, क्षितिज और पल्लवी सब अपनीअपनी जगह इन मुहूर्त व कर्मकांड के ढकोसलों से परेशान थे. सोनाक्षी को महाराज के कहने पर अच्छा वर पाने के लिए जबरदस्ती 72 सोमवार के व्रत रखने पड़ रहे थे. पता नहीं कौन सा ग्रहदोष बता कर पूजा व उपवास करवाए जा रहे थे. सोमवार के दिन कालेज में उस की अच्छी खिंचाई होती.
‘अरे भई, सोनाक्षी को पढ़ाई के लिए अब क्यों मेहनत करनी है, इस की लाइफ तो इस के व्रतों को सैट करनी है. पढ़लिख कर भी क्या करना है, बढि़या मुंडा मिलेगा इसे. अपन लोगों का तो कोई चांस ही नहीं,’ सब ठिठोली करते, ठठा कर हंस पड़ते.
बड़ा बेटा क्षितिज भी धार्मिक ढकोसलों से परेशान था. एक दिन उस ने छत की टंकी में गिरी बिल्ली को जब तक निकाला तब तक वह मर ही गई. श्यामाचरण ने सारा घर सिर पर उठा लिया, ‘‘अनर्थ, घोर अनर्थ, बड़ा पाप हो गया. नरक में जाएंगे सब इस के कारण,’’ उन्होंने फौरन राधे महाराज को फोन खड़खड़ा दिया. राधे पंडित को तो लूटने का मौका मिलना चाहिए, वे तुरंत सेवा में हाजिर हो गए.
‘‘मैं यह क्या सुन रहा हूं. यजमान से ऐसा पाप कैसे हो गया, मंदिर में अब कम से कम सवा किलो चांदी की बिल्ली चढ़ानी पड़ेगी. 12 पंडितों को बुला कर 7 दिनों तक लगातार मंत्रोच्चारहवन तथा भोजन कराना पड़ेगा, फिर घर के सभी सदस्य गंगास्नान कर के आएंगे, तभी जा कर शुद्धि हो पाएगी. बैकुंठ धाम जाना है तो यजमान, यह सब करना ही पड़ेगा,’’ राधे महाराज ने पूजाहवन के लिए सामग्री की अपनी लंबी लिस्ट थमा दी. उस में सारे पंडितों को वे कपड़ेलत्ते शामिल करने से भी नहीं चूके थे. क्षितिज को बड़ा क्रोध आ रहा था. एक तो पैसे की बरबादी, उस पर औफिस से जबरदस्ती छुट्टी लेने का चक्कर. औफिस में कारण बताए भी तो क्या. जिस को बताएगा, वह मजाक बनाएगा.
‘‘मैं तो इतनी छुट्टी नहीं ले सकता. आज रविवार है, फिर पूरा एक हफ्ते का चक्कर. हवन के बाद सब के साथ एक दिन भले ही चांदी की बिल्ली मंदिर में चढ़ा कर गंगास्नान कर आऊं, वह भी सवा किलो की नहीं, केवल नाम की, पापाजी की तसल्ली के लिए,’’ क्षितिज खीझ कर बोला.
‘‘पापाजी इस के लिए मानेंगे कैसे? सब की बोलती तो उन के सामने बंद हो जाती है. अम्माजी ही चाहें तो कुछ कर सकती हैं,’’ पल्लवी अपने बेटे किशमिश को साबुन लगाती हुई बोली. 4 साल का शरारती किशमिश श्यामाचरण की नकल करते हुए खुश हो, कूदकूद कर अपने ऊपर पानी डालने लगा.
‘‘तिपतिप, हलहल दंदे…हलहल दंदे,’’ वह उछलकूद मचा रहा था, पल्लवी भी गीली हो गई.
‘‘ठहर जा बदमाश, दादाजी की नकल करता है, अम्माजी देखो, आप ही नहला सकती हो इसे,’’ पल्लवी ने आवाज लगाई.
‘‘अम्माजी, आप ही इस शैतान को नहला सकती हैं और इन के पापा की समस्या भी आप ही सुलझा सकेंगी, देखिए, कल से मुंह लटकाए खड़े हैं,’’ मालती के आने पर पल्लवी मुसकराई और कार्यभार उन्हें सौंप कर अलग हट गई.
‘‘सीधी सी बात है, पंडित पैसों के लालच में यह सब पाखंड करते हैं. कुछ पैसे उन्हें अलग से थमा दो, कुछ नए उपाय ये झट निकाल लेंगे. न तुम्हें छुट्टी लेनी पड़ेगी, न कुछ. तुम्हारी जगह तुम्हारे रूमाल से भी वे काम चला लेंगे. इतने लालची होते हैं ये पंडित.
मैं सब जानती हूं पर सवा किलो की चांदी की बिल्ली की तो बात पापाजी के मन में बचपन से ही धंसी है, मानेंगे नहीं, दान करेंगे ही वरना उन के लिए बैकुंठ धाम के कपाट बंद नहीं हो जाएंगे?’’ वह हंसी, फिर बोली, ‘‘मैं तो 30 सालों से इन का फुतूर देख रही हूं. मांजी थीं, सो पहले वे कुछ जोर न दे सकीं वरना उस वक्त की मैं संस्कृत में एमए हूं, क्या इतना भी नहीं जानती थी कि ये पंडित क्या और कितना सही मंत्र पढ़ते हैं, अर्थ का अनर्थ और अर्थ भी क्या, देवताओं के काल्पनिक रूप, शक्ति, कार्यों का गुणगान. फिर हमें यह दे दो, वह दे दो. हमारा कल्याण करो. बस, खुद कुछ न करो. खाली ईश्वर से डिमांड. बस, यही सब बकवास. अच्छा हुआ जो संस्कृत पढ़ ली, आंखें खुल गईं मेरी, वरना धर्म से डर कर इन व्यर्थ के ढकोसलों में ही पड़ी रहती,’’ मालती किशमिश को नहला कर उसे तौलिये से पोंछती मुसकरा रही थी.
पल्लवी मालती को बड़े ध्यान से सुन रही थी. सोच रही थी कि आज की पीढ़ी का होने पर भी अपने धर्म के विरोध में कुछ कहने का इतना साहस उस में नहीं था जितना अम्माजी बेधड़क कह गईं. मैं ने एमबीए किया हुआ है, जौब भी करती हूं पर धर्म का एक डर मेरे अंदर भी कहीं बैठा हुआ है. सोनाक्षी भी कालेज में है. उस ने 72 सोमवार के व्रत केवल पापाजी के डर से नहीं रखे, बल्कि खुद अपने भविष्य के डर से भी, अपने विश्वास से रखे हैं.
‘‘अम्मा, आप ही राधे महाराज से बात कर लीजिए,’’ क्षितिज बोला.
‘‘मैं करूंगी तो उन्हें शर्म आएगी लेने में, उन से उम्र में मैं काफी बड़ी हूं. क्षितिज, तुम ही अपनी तरफ से बात कर लेना, यही ठीक रहेगा.’’
‘‘ठीक है अम्मा, आज ही शाम को बात कर लूंगा वरना हफ्तेभर की छुट्टी की अरजी दी तो औफिस वाले मुझे सीधा ही बैकुंठ भेज देंगे,’’ कह कर क्षितिज मुसकराया.