सर्द मौसम में सैक्स का लुत्फ उठाने के लिए अपनाएं ये हौट टिप्स

हर मौसम में प्रेमी प्रेमिका के प्यार का अपना अलग ही अंदाज होता है. बारिश के मौसम में, सर्दी के सर्द मौसम में प्रेमीप्रेमिका के बीच रंगीनियत अधिक बढ़ जाती है. सर्दियों की गुलाबी ठंड में दोनों आपस में एकदूसरे की बांहों में गरमाहट का एहसास पाना चाहते हैं. साथ ही, ऐसे में सहवास का मजा और बढ़ जाता है. ‘‘ठंड के मौसम में पशुपक्षी से ले कर इंसान तक सभी ज्यादा से ज्यादा सहवास करने के इच्छुक होते हैं.’’ इसीलिए अपनाएं कुछ हौट टिप्स जिन के माध्यम से आप सैक्स का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं :

गरम बाथ का मजा लें

प्रेमी-प्रेमिका अकसर पिकनिक पर जाते हैं. पिकनिक स्पौट पर बने रूम में बाथटब है तो ठंड के मौसम में हलके गरम पानी का मजा बाथटब में उठा सकते हैं. बाथटब में कुनकुने पानी में चंदन और गुलाब की कुछ बूंदें डालें व बाथरूम को सुगंधित कैंडल से सजा दें. आप का यह तरीका ऐक्साइटमैंट में नया जोश भर देगा. प्यार में नया तरीका व नई उमंग प्रेमीप्रेमिका के संबंधों में ऊर्जा का संचार करेगी.

कैंप फायर का आनंद लें

ठंड के मौसम में कैंप फायर का मजा ही कुछ अलग है. प्रेमीप्रेमिका अकसर ठंड के मौसम में हिल स्टेशन जाते हैं. ऐसे में अलाव जला कर अपने हमदम के साथ बैठ कर आग सेंकने का मजा उठाएं, इस का अलग ही आनंद है. ठंड में यह कैंप फायर दोनों तरफ अलग ही आग लगा देती है. अनोखे अंदाज में प्रेमीप्रेमिका शारीरिक आनंद उठाते हैं.

नृत्य करें

गुलाबी ठंड के मौसम में रोमांटिक गाना बजाएं और स्लो मोशन में प्रेमी-प्रेमिका एकसाथ एकदूसरे की कमर में हाथ डाल कर डांस करें. संगीत की धुन पर आप दोनों के कदम अपनेआप थिरकने लगेंगे. इस से प्यार की तलब और बढ़ेगी. ध्यान रखें कि गाना प्रेमीप्रेमिका की पसंद का हो.

थोड़ी शरारत करें

हलकीफुलकी शरारत से मुहब्बत का इजहार और भी गहरा हो जाता है. प्रेमी-प्रेमिका दोनों एकदूसरे के साथ शरारत और मनुहार करें, छेड़छाड़ करें, एकदूसरे को अचानक बांहों में भर लें, किस करें, साथी को फोर प्ले के लिए तैयार करें. यह छेड़छाड़ प्रेमी-प्रेमिका के रिश्तों को मजबूत बनाएगी.

स्पर्श करें

स्पर्श, अभिव्यक्ति का सब से अच्छा माध्यम माना जाता है. प्रेमी-प्रेमिका एकदूसरे को प्यारभरा स्पर्श दें ताकि ठंड के मौसम में केवल प्यार और सहवास का आनंद उठा सकें.

एक हो जाएं

गुलाबी ठंड का मौसम बेहद हसीन होता है. इस दौरान प्रेमी-प्रेमिका एकदूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारना चाहते हैं. सिंगल ब्लैकफिट का प्रयोग करें. सर्द मौसम सेक्स के लिहाज से सब से उपयुक्त है. इस मौसम में एकदूसरे से दूर रहना प्रेमी-प्रेमिका के लिए असंभव होता है, ऐसे में जब मौका भी हो तो कहने ही क्या, तो आजमाइए ये हौट टिप्स और उठाइए बिंदास प्रेम का लुत्फ.

बदलाव : क्या था छपरा ढाणी का राज

‘‘मारकर आइए या मर कर आइए. मेरे दूध की लाज रखना. टीचरजी, मैं तो एक ही सीख दे कर भेजूं छोरे को,’’ छाती ठोंक कर मेजर जसवंत सिंह राठौड़ की मां सुनंदा देवी उसे बता रही थीं.

राजस्थान के सुदूर इलाके में बसा एक छोटा सा गांव ‘छपरा ढाणी’. अर्पिता की बहाली वहां के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में हुई थी.

कुल जमा 20 बच्चे और वह एकलौती टीचर. ऐसा ठेठ गांव उस ने कभी नहीं देखा था. आगे होने वाली असुविधाओं के बारे में सोच कर एक बार तो उस ने भी इस्तीफा देने की ठान ली थी, पर जल्दी ट्रांसफर का भरोसा पा कर वह मन मसोस कर आ गई थी.

स्कूल क्या था जी, एक टपरा था बस. कच्ची मिट्टी का, खपरैल वाला. एक ही कमरे में 5वीं तक की जमात चलती थी. पहलीदूसरी जमात में

5-5, तीसरीचौथी जमात में कुल 8 और 5वीं जमात में सिर्फ 2 बच्चे थे. आगे की पढ़ाई के लिए पास के ही किसी दूसरे गांव में जाना पड़ता था.

पहला दिन अर्पिता को बहुत नागवार गुजरा. अगले दिन सुबह ही एक बच्चा लोटा भर दूध रख गया. शाम को वह खाना ले कर फिर आया. दौड़ कर वह जाने ही वाला था कि अर्पिता ने उसे पकड़ लिया, ‘‘बच्चे, अपना नाम तो बता कर जाओ.’’

‘‘माधव सिंह.’’

‘‘अच्छा माधव, मुझे अपने गांव की सैर कराओगे?’’

वह पलभर के लिए ठिठका और फिर सिर हिला कर हामी भर दी.

माधव कूदताफांदता आगे बढ़ रहा था. पर, अर्पिता को उस बलुई रेत में चलने का अभ्यास नहीं था. बारबार उस के पैर रेत में धंस जाते थे.

‘‘टीचरजी, वह देखिए. वह रामसा पीर का मंदिर है और ये रहे ऊंचेऊंचे टीबे. यहां हम सब बच्चे राजामंत्री का खेल खेलते हैं.’’

‘‘टीबे…?’’ अर्पिता ने सवालिया नजरों से पूछा.

‘‘जी टीचरजी, जब रेत के ढेर ऊंचे से हो कर जम जाते हैं, उसे टीबा कहते हैं. वह हमारे गांव के राजा साहब की गढ़ी. चलिए, आप को उन का महल दिखाता हूं.’’

गढ़ी के द्वार पर ही राजा साहब मिल गए. इतिहास और फिल्में, टीवी सीरियल वगैरह देख कर अर्पिता के मन में राजा की एक अलग ही इमेज बन गई थी. रेशमी शेरवानी, सिर पर ताज और बगल में तलवार खोंसी हुई. पर ये राजाजी तो बिलकुल साधारण कपड़ों में थे.

‘‘आइए टीचरजी, कोई परेशानी तो नहीं हुई हमारे गांव में? कोई भी दिक्कत हो, तो हमें सेवा का मौका जरूर दें,’’ अधेड़ उम्र पार करते राजाजी की भाषा बड़ी अच्छी थी.

बातोंबातों में उन्होंने बताया कि उन की पढ़ाईलिखाई अमेरिका में ही हुई.

वे खुद अपने महल का कोनाकोना दिखा रहे थे, ‘‘यह अस्तबल कभी घोड़ों से भरा रहता था. अब तो बस एक अंबर घोड़ा बचा है, वह भी बूढ़ा और बीमार रहता है.’’

‘‘अरे भुवन सिंह, कुछ खाया या नहीं इस ने?’’

‘‘जी सरकार, अभीअभी वैद्यजी देख कर गए हैं,’’ हाथ जोड़े भुवन सिंह ने जवाब दिया.

‘‘और इधर की तरफ है पुस्तकालय यानी हमारी लाइब्रेरी.’’

देशविदेश के हर विषय से संबंधित करीने से सजी किताबें. अर्पिता के लिए बहुत अस्वाभाविक सा था. रंगीन  कांच के टुकड़ों की कारीगरी से पूरा महल सजा हुआ था. महीन नक्काशी का काम आज भी उस समय की शानोशौकत का परिचय देता था.

‘‘माधव बेटा, अब तुम टीचरजी को रनिवासे में ले जाओ.’’

परदा प्रथा थी. राजाजी वहीं रुक गए और उसे बच्चे के साथ भीतर भेज दिया.

‘‘रानी मां धोक,’’ बच्चा बोला. साथ ही, अर्पिता ने भी हाथ जोड़ दिए.

रानी साहिबा बेटी के सिर में तेल मलती उठ खड़ी हुईं. इस उम्र में भी उन की खूबसूरती और ओज बरकरार था. हंस कर पास बैठाया और अर्पिता के चेहरे पर हैरानी देख कर बोलीं, ‘‘अब सेवकसेविकाएं तो रहे नहीं,’’ और वे मुसकरा दीं.

‘‘बाई सा, टीचरजी के लिए चाय तो बना लाओ और कुंअर सा से भी कह दो कि टीचरजी के दर्शन कर जाएं.’’

‘‘जी मां सा, अभी कहती हूं.’’

अर्पिता को बड़ी हैरानी हुई. मांबेटी के बीच भी बोली में आज भी वही राजसीपन. रात को वह लेटी तो नींद कोसों दूर थी. गांव के बारे में और

ज्यादा जानने की इच्छा बलवती होती जा रही थी.

अगले दिन माधव फिर आया, तो अर्पिता पूछ बैठी, ‘‘एक बात तो बता कि तेरे पिताजी क्या करते हैं? और यह गांव कितना खालीखाली सा क्यों है? रास्ते में कोई दिखता ही नहीं.’’

‘‘बापू फौज में हैं और बाकी मैं नहीं जानता हूं. आप मेरी दादी सा से पूछ लेना,’’ रात के खाने का न्योता देते हुए माधव बोला और शाम को वह तय समय पर उन्हें लेने आ गया.

मौसम बड़ा सुहावना सा था. मोर ‘पीहूपीहू’ की मधुर आवाज करते पेड़ों पर उड़ रहे थे.

‘‘नमस्ते टीचरजी,’’ माधव की दादी सामने ही इंतजार कर रही थीं. गजभर का घूंघट निकाले माधो की मां ने दूर से ही अपनी ओढ़नी का पल्लू जमीन से छुआया और माथे से लगा कर बोलीं, ‘‘नमस्ते टीचरजी.’’

अर्पिता ने बाहर बनी बैठक की ओर रुख किया, तो दादी बोलीं, ‘‘आप भीतर चलिए टीचरजी. यह बैठक मर्दों के लिए है. बाहर का कोई आदमी भीतर घर में नहीं जाता.’’

अर्पिता को हैरानी हुई, पर वह कुछ न बोली. भीतर पीढ़ा लगा कर उसे बैठाया गया. रसोई में माधव की मां उसी घूंघट के साथ मिट्टी के चूल्हे पर बाजरे की गोलगोल फूलीफूली रोटियां बना रही थीं.

दादी ने थाल परोसा. काचरे की सब्जी, खीचड़ा, देशी घी में डूबी हुई रोटियां और लहसुन की चटनी.

‘‘शुरू करो टीचरजी,’’ उन्होंने खाने के लिए कहा और पास ही बैठ कर पंखा ?ालने लगीं.

‘‘इस गांव में बिजली आधी बार ही रहती है. वैसे, बेटा पिछली बार जब आया था, तब इनवर्टर लगा कर गया था, पर उस की भी बैटरी खत्म हो गई है.’’

आखिर अर्पिता के सब्र का बांध टूट ही गया. उस से रहा न गया, तो पूछ ही लिया, ‘‘कितने बेटे हैं आप के?’’

‘‘टीचरजी, एक तो लड़ाई में खेत रहा. दूसरा अभी बौर्डर पर है.’’

‘‘और आप के पति…?’’

‘‘जी, वे तो कब के शहीद हो गए,’’ दादी ने तसवीर की ओर इशारा किया,  ‘‘घबराओ नहीं, यह तो जवानों की शान है,’’ अर्पिता को दुखी देख कर वे बड़ी सधी आवाज में बोलीं.

‘‘एक बात तो बताइए कि पति और एक बेटा जाने के बावजूद भी आप ने दूसरे बेटे को फौज में भेज दिया… डर नहीं लगता?’’

अर्पिता की यह बात सुन कर दादी उस की नासम?ा पर हंसीं और बोलीं, ‘‘देखो टीचरजी, इस गांव में आप को बूढ़े, बच्चे और औरतों के सिवा कोई न मिलेगा. फौज तो राजपूतों की शान है. हमारे तो खून में ही देश की सेवा लिखी है. या तो दुश्मन की छाती चीर देनी है या खुद मर जाना है. अगर औरतें डरती रह गईं, तो देश की सेवा कौन करेगा…’’

‘‘वह देख रहे हो, मेरे बेटे जसवंत सिंह की पत्नी है. बकरियों के लिए चारापानी से ले कर घर का सारा काम करती है, पर उफ तक नहीं करती. मैं खेत संभालती हूं और साथ ही बाहर का काम. बहूबेटियां हमारे यहां परदे में ही रहती हैं.’’

अर्पिता ने देखा कि माधव की मां घूंघट निकाले अब भी दूधदही के बरतनों में लगी हुई थीं.

‘‘क्या मैं आप की बहू से कुछ देर बात कर सकती हूं?’’ अर्पिता ने पूछा.

‘‘अरे, आप तो हमारे गांव की मेहमान हो टीचरजी. हमारे बच्चों को पढ़ाने के लिए आई हो, शिक्षा देने आई हो. आराम से बात करो,’’ कह कर वे बैठकखाने को ठीक करने चल दीं.

माधव की मां का घूंघट अर्पिता को बेहद खटक रहा था. वह उन का चेहरा देखना चाहती थी.

‘‘मैं खुद एक औरत हूं बहन, मुझ से क्या परदा… आप घूंघट हटा दो.’’

थोड़ा सकुचाते हुए माधव की मां ने घूंघट हटा दिया. भीतर सचमुच की रूपकंवर थीं. अर्पिता उन से बड़े ही नपेतुले अंदाज में बात कर रही थी. लग रहा था कि इंगलिश का अगर कोई शब्द निकल गया, तो शायद वे सम?ा न पाएं.

बातोंबातों में अर्पिता ने पूछा, ‘‘आप थकती नहीं हैं, दिनभर यह चारापानी और घर के काम करतेकरते? पति कितने दिनों बाद घर आ पाते हैं?’’

‘‘टीचरजी, ये तो घर के काम हैं, इन से क्या थकना. हालांकि, सरकार सुविधाएं बहुत देती है, पर नौकरों को देने वाले पैसे अगर हम गरीबों को दे तो कुछ सेवा कर पाएंगे.’’

यह सुन कर अर्पिता को बड़ी हैरानी हुई. इतनी बड़ी सोच और वह भी एक अनपढ़ सी दिखने वाली औरत के मुंह से.

फिर माहौल को हलका करने के अंदाज से अर्पिता ने पूछा, ‘‘क्या आप पूरी जिंदगी ऐसे ही बिता दोगी?’’

और इस बार वाकई में हैरान करने वाला जवाब था, ‘‘मैं ने बीए पास किया है और अब बीऐड कर रही हूं. टीचरजी, सासू मां ने कहा है कि सरकारी नौकरी लगते ही वे मु?ो बाहर भेज देंगी.’’

अर्पिता फिर दादी की ओर मुखातिब हुई, ‘‘और यह परदा प्रथा?’’

‘‘जी, यह तो बस इसी गांव तक है. पुराने समय से चलती आई प्रथा है. बहू को पूरी जिंदगी ऐसे ही थोड़े बैठा कर रखेंगे. उस की अपनी जिंदगी है. आगे बढ़े और खूब तरक्की करे.’’

‘‘टीचरजी, आप को छोड़ आऊं?’’ माधव पूछ रहा था.

अर्पिता ने आदर से दादी को प्रणाम किया और रूपकंवर की ओर एक स्नेह भरी नजर डाल कर अपने घर को चल दी.

विधवा सास की तड़प : सलमान अपने होश कब खो बैठा

माहिरा को बच्चा होने वाला था. उस ने मदद के लिए अपनी मां राबिया को बुला लिया. राबिया को करीब देख कर माहिरा का शौहर सलमान अपने होश खो बैठा. एक रात राबिया और सलमान अकेले में मिले. आगे क्या हुआ?

सलमान की शादी को 7 महीने हो गए थे और वह अपनी बीवी माहिरा के साथ खुशीखुशी दिल्ली में रह रहा था. माहिरा पेट से थी और 3 महीने बाद उस की डिलीवरी होने वाली थी.

सलमान को माहिरा की बड़ी चिंता सता रही थी, क्योंकि उस ने माहिरा से लवमैरिज की थी, जिस वजह से उस के घर वाले उस से नाखुश थे, क्योंकि माहिरा एक अलग बिरादरी से थी. लिहाजा, उन्होंने सलमान और माहिरा से सारे रिश्ते तोड़ लिए थे.

पर, आज जब माहिरा पेट से हुई, तो उस की देखभाल के लिए किसी औरत का होना जरूरी था.

सलमान की कमाई भी कुछ खास न थी, जिस से वह माहिरा की देखभाल के लिए कोई नौकरानी रख लेता, ताकि उसे कुछ आराम मिल सके.

वैसे तो सलमान माहिरा के काम में उस की पूरी मदद करता था, पर ज्योंज्यों माहिरा की डिलीवरी के दिन करीब आ रहे थे, त्योंत्यों सलमान की चिंता भी बढ़ती जा रही थी.

माहिरा ने जब सलमान को परेशान देखा, तो उस ने उस से पूछ ही लिया, ‘‘क्या बात है, आप कुछ परेशान से लग रहे हैं?’’

सलमान ने कहा, ‘‘हां, तुम्हारा ऐसा समय चल रहा है, जिस में तुम्हें आराम की सख्त जरूरत है और साथ ही तुम्हारे साथ किसी औरत का होना भी जरूरी है.

‘‘यही सोच कर मुझे चिंता हो रही है कि मेरे अम्मीअब्बू ने तो हम से नाता तोड़ लिया है, मैं किसे बुलाऊं, जो ऐसे मुश्किल  समय में तुम्हारा साथ दे सके.’’

माहिरा बोली, ‘‘आप टैंशन मत लो. मैं अपनी अम्मी से बात करती हूं, वे जरूर आ जाएंगी. वैसे भी मेरे भाईभाभी के अलावा वहां और कौन है, जिसे अम्मी की जरूरत हो…

‘‘भाभी अपना काम खुद कर लेती हैं. अम्मी दिनभर घर पर खाली ही रहती हैं. उन का भी यहां आ कर मन लग जाएगा और हवापानी भी बदल जाएगा.

‘‘वैसे भी अब्बा की मौत के बाद अम्मी अकेली हो गई थीं. उस  समय अम्मी की उम्र महज 24 साल थी. लोगों ने उन से बहुत कहा था कि दूसरी शादी कर लो, पर उन्होंने हम भाईबहन पर सौतेले बाप का साया न पड़े, इस डर से दूसरी शादी नहीं की.’’

सलमान बोला, ‘‘ठीक है, तुम अपनी अम्मी को कल ही यहां बुला लो, क्योंकि अब तुम्हारी डिलीवरी में भी एक हफ्ता ही बाकी बचा है.’’

माहिरा ने अगले ही दिन अपनी अम्मी को फोन कर दिया और जल्द आने को कहा. माहिरा की अम्मी राबिया अगले ही दिन दिल्ली के लिए रवाना हो गईं. सलमान उन्हें लेने रेलवे स्टेशन चला गया.

राबिया जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुंचीं, तो सलमान उन्हें देख कर दंग रह गया.

जब से सलमान की शादी माहिरा से हुई थी, उस ने एकाध बार ही चलतीफिरती नजरों से उन्हें देखा था, क्योंकि शादी के फौरन बाद ही वह माहिरा को अपने साथ दिल्ली ले आया था.

राबिया का कसीला बदन और ऊंची उठी हुई छाती देख कर ऐसा लगता था, जैसे वे माहिरा की अम्मी नहीं, बल्कि बहन हैं. उन्हें देख कर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि उन की उम्र 45 साल की होगी.

सलमान ने अपनी सास राबिया को आटोरिकशा में बैठाया और घर ले आया.

राबिया अपनी बेटी माहिरा से मिल कर बहुत खुश हुईं. वे दोनों आपस में बातें करने लगीं और सलमान नाश्ते का सामान लेने बाजार चला गया.

4 दिन बाद ही माहिरा को दर्द उठा, तो उसे जल्दी अस्पताल ले जाया गया. काफी कोशिश के बाद भी माहिरा की नौर्मल डिलीवरी नहीं हो पाई.

डाक्टर ने आपरेशन की तैयारी शुरू कर दी और तकरीबन 3 घंटे बाद माहिरा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया, जिसे पा कर सलमान और माहिरा दोनों खुश हो गए.

3 दिन बाद ही माहिरा को डिस्चार्ज भी कर दिया. सलमान उसे ले कर घर आ गया.

अभी माहिरा को आए हुए एक हफ्ता ही गुजरा था कि एक दिन सलमान बाथरूम से नहा कर बाहर निकला. उस ने एक तौलिए से अपनेआप को ढांप रखा था.

सलमान की सास राबिया माहिरा के कमरे से निकल कर किचन में जा रही थीं कि उन की निगाह सलमान के गठीले बदन पर पड़ी. वे सलमान को एकटक निहारती रहीं और एक कातिल मुसकान बिखेरते हुए किचन में चली गईं.

सलमान अपनी सास राबिया की कातिल मुसकान को अच्छी तरह समझ चुका था.

राबिया और माहिरा एक ही जगह सोते थे, क्योंकि माहिरा को किसी भी चीज की जरूरत होती तो राबिया ही देती थीं, साथ ही बच्ची के रोने पर भी वे ही उसे अपनी गोद में उठा कर चुप कराती थीं.

सलमान अलग कमरे में सोता था, ताकि आराम से सुबह काम पर जा सके.

एक रात की बात है. सलमान अपने कमरे में लेटा हुआ था. उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उसे रहरह कर अपनी सास की कातिल मुसकराहट सता रही थी. उधर राबिया भी सलमान को पाने की ललक में करवटें बदल रही थीं.

रात के 2 बज चुके थे. माहिरा और उस की बच्ची गहरी नींद में सो चुके थे, पर राबिया की आंखों से नींद गायब थी. वे पानी लेने के लिए उठीं और किचन की तरफ बढ़ी ही थीं कि अंधेरा होने की वजह से वे सलमान से जा टकराईं.

सलमान ने अपनी सास राबिया को सहारा देते हुए अपने हाथ आगे बढ़ाए, तो उस के हाथ राबिया की उठी हुई कसीली छाती से जा टकराए. राबिया छटपटा गईं और खुद को सलमान के हवाले कर दिया.

सलमान ने अपने कड़क हाथों से राबिया की उठी हुई छाती को सहलाना शुरू कर दिया. राबिया कई साल से मर्द की इस छुअन से काफी दूर थीं और इस से उन की जिस्मानी तड़प जाग उठी.

सलमान ने अपनी सास राबिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, तो राबिया ने भी उस के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. दोनों तरफ आग भड़क चुकी थी.

सलमान ने राबिया को अपनी बांहों में उठाया और अपने कमरे में ले गया.

राबिया भी सलमान की गोद में एक बच्चे की तरह उस से चिपक गईं. सलमान ने बिना समय गंवाए राबिया के कपड़े उतारने शुरू कर दिए.

राबिया का गोरा और कसा हुआ बदन देख सलमान हैरान रह गया. वह राबिया के बदन को चूमने लगा. राबिया भी पूरे जोश के साथ सलमान के बदन को चूमने लगीं. वे पूरी तरह बेकाबू होती नजर आ रही थीं.

वे दोनों एकदूसरे के बदन से खेलते रहे. कुछ ही देर में दोनों चरम सीमा पर पहुंच कर एकदूसरे से अलग हो गए.

एक बार यह सिलसिला शुरू हुआ तो चलता ही रहा. जब भी राबिया और सलमान को मौका मिलता, वे अपने जिस्म की आग को ठंडा कर लेते.

बंद गले का कोट: क्या हुआ था सुनील के साथ

मास्को में गरमी का मौसम था. इस का मतलब यह नहीं कि वहां सूरज अंगारे उगलने लगा था, बल्कि यह कहें कि सूरज अब उगने लगा था, वरना सर्दी में तो वह भी रजाई में दुबका बैठा रहता था. सूरज की गरमी से अब 6 महीने से जमी हुई बर्फ पिघलने लगी थी. कहींकहीं बर्फ के अवशेष अंतिम सांसें गिनते दिखाई देते थे. पेड़ भी अब हरेभरे हो कर झूमने लगे थे, वरना सर्दी में तो वे भी ज्यादातर बर्फ में डूबे रहते थे. कुल मिला कर एक भारतीय की नजर से मौसम सुहावना हो गया था. यानी ओवरकोट, मफलर, टोपी, दस्ताने वगैरा त्याग कर अब सर्दी के सामान्य कपड़ों में घूमाफिरा जा सकता था. रूसी लोग जरूर गरमी के कारण हायहाय करते नजर आते थे. उन के लिए तो 24 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पारा हुआ नहीं कि उन की हालत खराब होने लगती थी और वे पंखे के नीचे जगह ढूंढ़ने लगते थे. बड़े शोरूमों में एयर कंडीशनर भी चलने लगे थे.

सुनील दूतावास में तृतीय सचिव के पद पर आया था. तृतीय सचिव का अर्थ था कि चयन और प्रशिक्षण के बाद यह उस की पहली पोस्टिंग थी, जिस में उसे साल भर देश की भाषा और संस्कृति का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना था और साथ ही दूतावास के कामकाज से भी परिचित होना था. वह आतेजाते मुझे मिल जाता और कहता, ‘‘कहिए, प्रोफेसर साहब, क्या चल रहा है?’’

‘‘सब ठीक है, आप सुनाइए, राजदूत महोदय,’’ मैं जवाब देता.

हम दोनों मुसकानों का आदानप्रदान करते और अपनीअपनी राह लेते. रूस में रहते हुए अपनी भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेमप्रदर्शन के लिए और भारतीयों की अलग पहचान दिखाने के लिए मैं बंद गले का सूट पहनता था. रूसी लोग मेरी पोशाक से बहुत आकर्षित होते थे. वे मुझे देख कर कुछ इशारे वगैरा करने लगते. कुछ लोग मुसकराते और ‘इंदीइंदी’ (भारतीयभारतीय) कहते. कुछ मुझे रोक कर मुझ से हाथ मिलाते. कुछ मेरे साथ खडे़ हो कर फोटो खिंचवाते. कुछ ‘हिंदीरूसी भाईभाई’ गाने लगते. सुनील को भी मेरा सूट पसंद था और वह अकसर उस की तारीफ करता था.

यों पोशाक के मामले में सुनील खुद स्वच्छंद किस्म का जीव था. वह अकसर जींस, स्वेटर वगैरा पहन कर चला आता था. कदकाठी भी उस की छोटी और इकहरी थी. बस, उस के व्यवहार में भारतीय विदेश सेवा का कर्मचारी होने का थोड़ा सा गरूर था.

मैं ने कभी उस की पोशाक वगैरा पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन एक दिन अचानक वह मुझे बंद गले का सूट पहने नजर आया. मुझे लगा कि मेरी पोशाक से प्रभावित हो कर उस ने भी सूट बनवाया है. मुझे खुशी हुई कि मैं ने उसे पोशाक के मामले में प्रेरित किया.

‘‘अरे, आज तो आप पूरे राजदूत नजर आ रहे हैं,’’ मैं ने कहा, ‘‘सूट आप पर बहुत फब रहा है.’’

उस ने पहले तो मुझे संदेह की नजरों से देखा, फिर हलके से ‘धन्यवाद’ कहा और ‘फिर मिलते हैं’ का जुमला हवा में उछाल कर चला गया. मुझे उस का यह व्यवहार बहुत अटपटा लगा. मैं सोचने लगा कि मैं ने ऐसा क्या कह दिया कि वह उखड़ गया. मुझे कुछ समझ नहीं आया. इस पर ज्यादा सोचविचार करना मैं ने व्यर्थ समझा और यह सोच कर संतोष कर लिया कि उसे कोई काम वगैरा होगा, इसलिए जल्दी चला गया.

तभी सामने से हीरा आता दिखाई दिया. वह कौंसुलेट में निजी सहायक के पद पर था.

‘‘क्या बात हो रही थी सुनील से?’’ उस ने शरारतपूर्ण ढंग से पूछा.

‘‘कुछ नहीं,’’ मैं ने बताया, ‘‘पहली बार सूट में दिखा, तो मैं ने तारीफ कर दी और वह मुझे देखता चला गया, मानो मैं ने गाली दे दी हो.’’

‘‘तुम्हें पता नहीं?’’ हीरा ने शंकापूर्वक कहा.

‘‘क्या?’’ मुझे जिज्ञासा होना स्वाभाविक था.

‘‘इस सूट का राज?’’ उस ने कहा.

‘‘सूट का राज? सूट का क्या राज, भई?’’ मैं ने भंवें सिकोड़ते हुए पूछा.

‘‘असल में इसे पिछले हफ्ते मिलित्सिया वाले (पुलिस वाले) ने पकड़ लिया था,’’ उस ने बताया, ‘‘वह बैंक गया था पैसा निकलवाने. बैंक जा रहा था तो उस के 2 साथियों ने भी उसे अपने चेक दे दिए. वह बैंक से निकला तो उस की जेब में 3 हजार डालर थे.

‘‘वह बाहर आ कर टैक्सी पकड़ने ही वाला था कि मिलित्सिया का सिपाही आया और इसे सलाम कर के कहा कि ‘दाक्यूमेत पजालस्ता (कृपया दस्तावेज दिखाइए).’ इस ने फट से अपना राजनयिक पहचानपत्र निकाल कर उसे दिखा दिया. वह बड़ी देर तक पहचानपत्र की जांच करता रहा फिर फोटो से उस का चेहरा मिलाता रहा. इस के बाद इस की जींस और स्वेटर पर गौर करता रहा, और अंत में उस ने अपना निष्कर्ष उसे बताया कि यह पहचानपत्र नकली है.’’

‘‘सुनील को जितनी भी रूसी आती थी, उस का प्रयोग कर के उस ने सिपाही को समझाने की कोशिश की कि पहचानपत्र असली है और वह सचमुच भारतीय दूतावास में तृतीय सचिव है. लेकिन सिपाही मानने के लिए तैयार नहीं था. फिर उस ने कहा कि ‘दिखाओ, जेब में क्या है?’ और जेबें खाली करवा कर 3 हजार डालर अपने कब्जे में ले लिए. अब सुनील घबराया, क्योंकि उसे मालूम था कि मिलित्सिया वाले इस तरह से एशियाई लोगों को लूट कर चल देते हैं और फिर उस की कोई सुनवाई नहीं होती. अगर कोई काररवाई होती भी है तो वह न के बराबर होती है. मिलित्सिया वाले तो 100-50 रूबल तक के लिए यह काम करते हैं, जबकि यहां तो मसला 3 हजार डालर यानी 75 हजार रूबल का था.’’

‘‘उस ने फिर से रूसी में कुछ कहने की कोशिश की लेकिन मिलित्सिया वाला भला अब क्यों सुनता. वह तो इस फिराक में था कि पैसा और पहचानपत्र दोनों ले कर चंपत हो जाए, लेकिन सुनील के भाग्य से तभी वहां मिलित्सिया की गाड़ी आ गई. उस में से 4 सिपाही निकले, जिन में से 2 के हाथों में स्वचालित गन थीं. उन्हें देख कर सुनील को लगा कि शायद अब वह और उस के पैसे बच जाएं.

‘‘वे सिपाही वरिष्ठ थे, इसलिए पहले सिपाही ने उन्हें सैल्यूट कर के उन्हें सारा माजरा बताया और फिर मन मार कर पहचानपत्र और राशि उन के हवाले कर दी और कहा कि उसे शक है कि यह कोई चोरउचक्का है. उन सिपाहियों ने सुनील को ऊपर से नीचे तक 2 बार देखा. मौका देख कर सुनील ने फिर से अपने रूसी ज्ञान का प्रयोग करना चाहा, लेकिन उन्होंने कुछ सुनने में रुचि नहीं ली और आपस में कुछ जोड़तोड़ जैसा करने लगे. इस पर सुनील की अक्ल ने काम किया और उस ने उन्हें अंगरेजी में जोरों से डांटा और कहा कि वह विदेश मंत्रालय में इस बात की सख्त शिकायत करेगा.

‘‘उन्हें अंगरेजी कितनी समझ में आई, यह तो पता नहीं, लेकिन वे कुछ प्रभावित से हुए और उन्होंने सुनील को कार में धकेला और कार चला दी. पहला सिपाही हाथ मलता और वरिष्ठों को गालियां देता वहीं रह गया. अब तो सुनील और भी घबरा गया, क्योंकि अब तक तो सिर्फ पैसा लुटने का डर था, लेकिन अब तो ये सिपाही न जाने कहां ले जाएं और गोली मार कर मास्कवा नदी में फेंक दें. उस का मुंह रोने जैसा हो गया और उस ने कहा कि वह दूतावास में फोन करना चाहता है. इस पर एक सिपाही ने उसे डांट दिया कि चुप बैठे रहो.

‘‘सिपाही उसे ले कर पुलिस स्टेशन आ गए और वहां उन्होंने थाना प्रभारी से कुछ बात की. उस ने भी सुनील का मुआयना किया और शंका से पूछा, ‘आप राजनयिक हैं?’

‘‘सुनील ने अपना परिचय दिया और यह भी बताया कि कैसे उसे परेशान किया गया है, उस के पैसे छीने गए हैं. बेमतलब उसे यहां लाया गया है और वह दूतावास में फोन करना चाहता है.

‘‘प्रभारी ने सामने पड़े फोन की ओर इशारा किया. सुनील ने झट से कौंसुलर को फोन मिलाया. कौंसुलर ने मुझे बुलाया और फिर मैं और कौंसुलर दोनों कार ले कर थाने पहुंचे. हमें देख कर सुनील लगभग रो ही दिया. कौंसुलर ने सिपाहियों को डांटा और कहा कि एक राजनयिक के साथ इस तरह का व्यवहार आप लोगों को शोभा नहीं देता.’’

‘‘इस पर वह अधिकारी काफी देर तक रूसी में बोलता रहा, जिस का मतलब यह था कि अगर यह राजनयिक है तो इसे राजनयिक के ढंग से रहना भी चाहिए और यह कि इस बार तो संयोग से हमारी पैट्रोल वहां पहुंच गई, लेकिन आगे से हम इस तरह के मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकते?

‘‘अब कौंसुलर की नजर सुनील की पोशाक पर गई. उस ने वहीं सब के सामने उसे लताड़ लगाई कि खबरदार जो आगे से जींस में दिखाई दिए. क्या अब मेरे पास यही काम रह गया है कि थाने में आ कर इन लोगों की उलटीसीधी बातें सुनूं और तुम्हें छुड़वाऊं.’’

‘‘हम लोग सुनील को ले कर आ गए. अगले 2 दिन सुनील ने छुट्टी ली और बंद गले का सूट सिलवाया और उसे पहन कर ही दूतावास में आया. मैं ने तो खैर उस का स्टेटमेंट टाइप किया था, इसलिए इतने विस्तार से सब पता है, लेकिन यह बात तो दूतावास के सब लोग जानते हैं,’’ हीरा ने अपनी बात खत्म की.

‘‘तभी…’’ मेरे मुंह से निकला, ‘‘उसे लगा होगा कि मैं भी यह किस्सा जानता हूं और उस का मजाक उड़ा रहा हूं.’’

‘‘अब तो जान गए न,’’ हीरा हंसा और अपने विभाग की ओर बढ़ गया.

मुझे अफसोस हुआ कि सुनील को सूट सिलवाने की प्रेरणा मैं ने नहीं, बल्कि पुलिस वालों ने दी थी.

सैक्स के ये फायदे जानकर मचल उठेंगी महिलाएं

महिलाएं सैक्‍स के दौरान न सिर्फ आंनद का अनुभव करती है बल्कि सेक्‍स से उन्‍हे कई प्रकार के शारीरिक और भावनात्‍मक लाभ भी होते है, सेक्‍स से महिलाओं के शारीरिक सरंचना में भी परिर्वतन आता है. सैक्‍स के दौरान अपने पार्टनर द्वारा मिले शारीरिक और भावनात्‍मक सर्पोट से महिलाओं में आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है. यूं तो महिलाओं में हमेशा सैक्‍स की चाहत होती है, लेकिन मासिक पूरा हो जाने के पांच से सात दिन तक महिलाएं सैक्स के मूड में ज्यादा होती हैं क्योंकि मासिक चक्र पूरा होने के बाद सैक्स वाले हार्मोस सक्रिय हो जाते हैं.

महावारी के पांच से सात दिन में सैक्स करना ज्यादा ही आनंद की अनुभूति कराता है साथ ही इसका लाभ कम से कम 12 दिनों तक रहता है. महावारी के बाद महिलाओं में सैक्स की तीव्र इच्छा जागृत होना स्वाभाविक है, क्योंकि इन दिनों में गर्भधारण की संभावना कम हो जाती. वैसे तो यह शारीरिक जरूरत का एक आम हिस्‍सा है. सैक्स वैवाहिक संबंधों को सुखी बनाता है और भविष्य में दोनों के बीच सैक्स को लेकर दूरियां कभी नहीं आती.

महिलाओं के लिए सैक्स के लाभ

– यह एक शारीरिक व्‍यायाम है जो आपको स्‍वस्‍थ रखता है. जीं हां महिलाओं में सैक्‍स के दौरान से शरीर में कैलोरी का जलन होता है यानी सैक्‍स शरीर का वजन कम करने में मददगार होता है. इससे महिलाओं का वजन कम होता है.

– महिलाओं में सैक्स उन्मुक्ति को बढ़ाता है, और एक अलग ही आनंद का अनुभव कराता है.

– सैक्‍स कई बीमारियों को कम करता है और अन्य बीमारियों के संक्रमण से शरीर की प्रतिरक्षा करता है, और महिलाओं को स्‍वस्थ बनाता हैं.

– सैक्स तनाव को कम करता है और महिलाओं को खुश रखने में मदद करता है.

– महिलाओं में सैक्‍स रक्तचाप को भी कम करता हैा सेक्‍स से रक्‍तचाप नियंत्रित रहता है और कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है.

– सैक्स दिल को मजबूत बनाता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों की संभावना कम होती एक सप्ताह में सैक्स दो बार या दो से अधिक बार सेक्‍स करने से महिलाओं में घातक दिल के दौरे की संभावना उन महिलाओं के तुलना में कम हो जाती है, जो कम सेक्स करती हैा

– सैक्स महिलाओं में आत्मसम्मान को बढ़ाता है.

– सैक्स अंतरंगता और रिश्तों को बेहतर बनाता है. वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाता है.

– सैक्स करने से कई बीमारियों के दर्द से राहत मिल सकती हैं, जैसे गठिया, सिर दर्द इत्‍यादि में सैक्स के बाद कुछ राहत पा सकते हैं.

– सैक्स महिलाओं कैंसर, सिस्‍ट जैसी बीमारियों के भी खतरे को भी कम करता है.

– महिलाओं में सेक्स पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. संभोग के दौरान उनकी पेल्विक मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिससे महिलाओं में यूरीन असंयम का जोखिम कम हो जाता है.

– बेहतर नींद के लिए सैक्स जरूरी है. संभोग के बाद, महिलाओं को बेहतर नींद आती है और स्वास्थ्य लाभ होता है.

बाहुबली नेता Pappu Yadav को बिश्‍नोई गैंग की धमकी, ‘24 दिसंबर से पहले ऊपर पहुंचा देंगे’

Pappu Yadav को एक बार फिर धमकी मिली है. यह धमकी उन्‍हें 18 नवंबर को मिली है. उनको यह धमकी फोन पर दी गई, जो पाकिस्‍तान से किया गया था. इस धमकी में उन्‍हें 24 दिसंबर से पहले ऊपर पहुंचाने की बात की गई है. दरअसल 24 दिसंबर को पप्‍पू यादव का जन्‍म दिन है इसलिए उनको धमकाया गया कि उनको जन्‍मदिन के दिन ही मार दिया जाएगा. धमकी में यह कहा गया कि ऊपर जाकर ही अपना जन्‍मदिन मनाना. उस फोन में पप्‍पू यादव को धमकाते हुए कहा गया कि हमारे साथी ने तुम्‍हें नेपाल से फोन किया था कि तुम भाई से माफी मांग लो लेकिन तुम सुधरने का नाम नहीं ले रहे हो.

Pappu Yadav and Lawrence Bishnoi का मामला

मुंबई में बाबा सिद्दकी की हत्‍या हुई. इसके एक दिन बाद पप्‍पू यादव ने एक ऐसा ट्वीट लिखा जिसने तहलका ही मचा दिया. यह ट्वीट गैंगस्‍टर लौरेंस बिश्‍नोई के खिलाफ किया गया था. लौरेंस के खिलाफ इस तरह का ट्वीट और ऐसी बात करते सलमान खान को भी नहीं देखा गया. पप्‍पू यादव बिहार के पूर्णिया से सांसद हैं. उनकी पहचान एक दबंग बाहुबली नेता की रही है. इस ट्वीट में पप्‍पू ने लिखा था,

“यह देश है या हिजड़ों की फौज एक अपराधी जेल में बैठ चुनौती दे लोगों को मार रहा है,सब मुकदर्शक बने हैं, कभी मूसेवाला, कभी करणी सेना के मुखिया अब एक उद्योगपति राजनेता को मरवा डाला, कानून अनुमति दे तो 24घंटे में इस लारेंस बिश्नोई जैसे दो टके के अपराधी के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दूंगा.”

पप्‍पू यादव के डर की शुरुआत

इसमें कोई शक नहीं कि इस ट्वीट के बाद हंगामा तो होना ही था. हालांकि सोशल मीडिया पर इन वाक्‍यों को शेयर करने के बाद लौरेंस की जम कर वाहवाही हुई, इनके चाहने वालों को ऐसा लग रहा था कि वाकई पप्‍पू यादव एक बाहुबली नेता है. पर इस घटना का एक सप्‍ताह भी नहीं हुआ था कि पप्‍पू यादव का एक वीडियो वायरल हो गया. इस वीडियो में वे एक पत्रकार को जोर से डांटते नजर आ रहे थे. दरअसल, एक प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार ने सांसद पप्‍पू यादव से लौरेंस को लेकर सवाल पूछ लिया था. इस पर पप्‍पू यादव गुस्‍से में लाल पीला होते हुए कहने लगे,”हमने पहले ही कह दिया था कि ये सवाल मत पूछिए. आप ज्यादा तेज मत बनिए. ये सवाल नहीं होगा.” इसके बाद यह खबर तेज हो गई कि पप्‍पू यादव को लौरेंस के गैंग से उनके ट्वीट को लेकर धमका दिया गया है. एक धमकी भरा औडियो भी वायरल हुआ जिसके बारे में कहा गया कि धमकी लौरेंस गैंग की ओर से ही दी गई थी, हालांकि इसकी अभी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हुई है.

धमकी भरे औडियो का अंश , “तुझे बड़ा भाई बनाया, जेल से जैमर बंदकर कांफ्रेंस पर फोन किया. ऊपर से तूने भाई का फोन नहीं उठाया. मजाक समझ रखा है क्या… भाई को ये सिला दिया. शर्मिंदा करवा दिया. बड़े भाई का फर्ज तो निभा देता. तेरे से कुछ मांगा नहीं, फिर ऐसा क्यों किया. भाई से बात करवाऊंगा, मसला सुलझा ले अपना. तेरे सभी ठिकानों की जानकारी भाई के पास है.कच्चा चबा जाऊंगा.” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी औडियो में ठिकानों का भी जिक्र किया गया.

हाेम म‍िनिस्‍टर से मांगी मदद

अब सोशल मीडिया पर भी इस बाहुबली नेता को एक धमकी दी गई है. इस धमकी में कहा गया है कि औकात में रहकर चुपचाप राजनीति करो, ज्यादा इधर उधर तीन-पांच करके टीआरपी कमाने के चक्कर में मत पड़ो. वरना रेस्ट इन पीस (rest in peace) कर दिए जाओगे. यह धमकी किस दिन मिली यह अभी स्‍पष्‍ट नहीं है, लेकिन पप्‍पू यादव ने होममिनिस्‍टर अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा की मांग की है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पप्‍पू यादव ने अपने लिए ‘वाई श्रेणी’ की सुरक्षा बढ़ाकर ‘जेड श्रेणी’ करने की मांग की है. उन्‍होंने अपने पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि वे अपने जीवन में एक बार बिहार विधान सभा सदस्‍य और 6 बार एमपी रह चुके हैं. इस पत्र में उन्‍होंने यह भी लिखा है कि उन्‍होंने बिहार के सीएम, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी इसकी जानकारी दी लेकिन इस पर किसी तरह की सुध नहीं ली गई . एक राजनैतिक व्‍यक्ति होने के कारण मैंने बिश्‍नोई गैंग का विरोध किया, तो मुझे उसकी तरह से धमकी मिलने लगी. उन्‍होंने पत्र में लिखा कि उनके लिए अतिरिक्‍त सुरक्षा की व्‍यवस्‍था की जाए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनकी हत्‍या हो सकती है जिसकी जिम्‍मेदारी केंद्र और बिहार सरकार की होगी. पप्‍पू यादव ने कहा कि उनकी वाई श्रेणी की सुरक्षा को बढ़ा कर जेड श्रेणी का कर दिया जाए.

गैंगस्‍टर हो रहे हैं बेकाबू

बौलीवुड के बाद अब गैंगस्‍टर पौलिटिशियन को खुलेआम धमका रहे हैं, जो चिंताजनक है. सलमान खान, शाहरुख खान, भोजपुरी एक्‍ट्रैस अक्षरा सिंह के बाद अब पौलिटिशियन पप्‍पू यादव को धमकाने की खबरें तेज हो गई है. एक समय था जब दाउद इब्राहीम, छोटा राजन, अबू सलेम की ही तूती बोलती थी, वो भी बौलीवुड तक ही सीमित थी. लेकिन अब लौरेंस बिश्‍नोई ने इस साम्राज्‍य पर कब्‍जा जमा लिया है और देश में ही नहीं विदेशी धरती पर भी अपने डर का सिक्‍का जमाना चाहता है, जो कनाडा में निज्‍जर के मामले में देखने को मिला. इस बार भी जो धमकी पप्‍पू यादव को दी गई है, वह कौल पाकिस्‍तान से आया हुआ बताया जा रहा है. बाबा सिद्दकी, सिद्धू मूसे वाला की हत्‍या कर लौरेंस ने भारत में अपनी दबंगई दिखा दी हैमुंबई में बाबा सिद्दकी की हत्‍या हुई . इसके एक दिन बाद पप्‍पू यादव ने एक ऐसा ट्वीट लिखा जिसने तहलका ही मचा दिया. यह ट्वीट गैंगस्‍टर लौरेंस बिश्‍नोई के खिलाफ किया गया था. लौरेंस के खिलाफ इस तरह का ट्वीट और ऐसी बात करते सलमान खान को भी नहीं देखा गया . पप्‍पू यादव बिहार के पूर्णिया से सांसद हैं. उनकी पहचान एक दबंग बाहुबली नेता की रही है. इस ट्वीट में पप्‍पू ने लिखा था,

“यह देश है या हिजड़ों की फौज एक अपराधी जेल में बैठ चुनौती दे लोगों को मार रहा है,सब मुकदर्शक बने हैं, कभी मूसेवाला, कभी करणी सेना के मुखिया अब एक उद्योगपति राजनेता को मरवा डाला, कानून अनुमति दे तो 24घंटे में इस लारेंस बिश्नोई जैसे दो टके के अपराधी के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दूंगा.”

पप्‍पू यादव के डर की शुरुआत

इसमें कोई शक नहीं कि इस ट्वीट के बाद हंगामा तो होना ही था. हालांकि सोशल मीडिया पर इन वाक्‍यों को शेयर करने के बाद लौरेंस की जम कर वाहवाही हुई, इनके चाहने वालों को ऐसा लग रहा था कि वाकई पप्‍पू यादव एक बाहुबली नेता है. पर इस घटना का एक सप्‍ताह भी नहीं हुआ था कि पप्‍पू यादव का एक वीडियो वायरल हो गया. इस वीडियो में वे एक पत्रकार को जोर से डांटते नजर आ रहे थे. दरअसल, एक प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार ने सांसद पप्‍पू यादव से लौरेंस को लेकर सवाल पूछ लिया था. इस पर पप्‍पू यादव गुस्‍से में लाल पीला होते हुए कहने लगे,”हमने पहले ही कह दिया था कि ये सवाल मत पूछिए. आप ज्यादा तेज मत बनिए. ये सवाल नहीं होगा.” इसके बाद यह खबर तेज हो गई कि पप्‍पू यादव को लौरेंस के गैंग से उनके ट्वीट को लेकर धमका दिया गया है. एक धमकी भरा औडियो भी वायरल हुआ जिसके बारे में कहा गया कि धमकी लौरेंस गैंग की ओर से ही दी गई थी, हालांकि इसकी अभी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हुई है.

धमकी भरे औडियो का अंश , “तुझे बड़ा भाई बनाया, जेल से जैमर बंदकर कांफ्रेंस पर फोन किया. ऊपर से तूने भाई का फोन नहीं उठाया. मजाक समझ रखा है क्या… भाई को ये सिला दिया. शर्मिंदा करवा दिया. बड़े भाई का फर्ज तो निभा देता. तेरे से कुछ मांगा नहीं, फिर ऐसा क्यों किया. भाई से बात करवाऊंगा, मसला सुलझा ले अपना. तेरे सभी ठिकानों की जानकारी भाई के पास है.कच्चा चबा जाऊंगा.” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी औडियो में ठिकानों का भी जिक्र किया गया.

हाेम म‍िनिस्‍टर से मांगी मदद

अब सोशल मीडिया पर भी इस बाहुबली नेता को एक धमकी दी गई है. इस धमकी में कहा गया है कि औकात में रहकर चुपचाप राजनीति करो, ज्यादा इधर उधर तीन-पांच करके टीआरपी कमाने के चक्कर में मत पड़ो. वरना रेस्ट इन पीस (rest in peace) कर दिए जाओगे. यह धमकी किस दिन मिली यह अभी स्‍पष्‍ट नहीं है, लेकिन पप्‍पू यादव ने होममिनिस्‍टर अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा की मांग की है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पप्‍पू यादव ने अपने लिए ‘वाई श्रेणी’ की सुरक्षा बढ़ाकर ‘जेड श्रेणी’ करने की मांग की है. उन्‍होंने अपने पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि वे अपने जीवन में एक बार बिहार विधान सभा सदस्‍य और 6 बार एमपी रह चुके हैं. इस पत्र में उन्‍होंने यह भी लिखा है कि उन्‍होंने बिहार के सीएम, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी इसकी जानकारी दी लेकिन इस पर किसी तरह की सुध नहीं ली गई . एक राजनैतिक व्‍यक्ति होने के कारण मैंने बिश्‍नोई गैंग का विरोध किया, तो मुझे उसकी तरह से धमकी मिलने लगी. उन्‍होंने पत्र में लिखा कि उनके लिए अतिरिक्‍त सुरक्षा की व्‍यवस्‍था की जाए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनकी हत्‍या हो सकती है जिसकी जिम्‍मेदारी केंद्र और बिहार सरकार की होगी. पप्‍पू यादव ने कहा कि उनकी वाई श्रेणी की सुरक्षा को बढ़ा कर जेड श्रेणी का कर दिया जाए.

गैंगस्‍टर हो रहे हैं बेकाबू

बौलीवुड के बाद अब गैंगस्‍टर पौलिटिशियन को खुलेआम धमका रहे हैं, जो चिंताजनक है. सलमान खान, शाहरुख खान, भोजपुरी एक्‍ट्रैस अक्षरा सिंह के बाद अब पौलिटिशियन पप्‍पू यादव को धमकाने की खबरें तेज हो गई है. एक समय था जब दाउद इब्राहीम, छोटा राजन, अबू सलेम की ही तूती बोलती थी, वो भी बौलीवुड तक ही सीमित थी. लेकिन अब लौरेंस बिश्‍नोई ने इस साम्राज्‍य पर कब्‍जा जमा लिया है और देश में ही नहीं विदेशी धरती पर भी अपने डर का सिक्‍का जमाना चाहता है, जो कनाडा में निज्‍जर के मामले में देखने को मिला. इस बार भी जो धमकी पप्‍पू यादव को दी गई है, वह कौल पाकिस्‍तान से आया हुआ बताया जा रहा है. बाबा सिद्दकी, सिद्धू मूसे वाला की हत्‍या कर लौरेंस ने भारत में अपनी दबंगई दिखा दी है

सट्टा और लड़की का फर्जी अपहरण

औनलाइन गेमिंग ने आज के नौजवानों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. इस से न केवल उन का समय बरबाद हो रहा है, बल्कि उन के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है.

उत्तर प्रदेश के झांसी में हाल ही में एक नर्सिंग छात्रा सुनैना (बदला नाम) के औनलाइन गेमिंग में लाखों रुपए गंवाने और फिरौती के लिए अपने अपहरण की झूठी कहानी रचने का अनोखा मामला सामने आया है. जांच करने के बाद पुलिस खुद हैरान रह गई.

यह मामला आज देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है कि किस तरह आज का नौजवान तबका गिरावट की ओर जा रहा है. इस मामले से यह साफ होता है कि औनलाइन गेमिंग की लत कितनी खतरनाक हो सकती है. यह न केवल पैसे के नुकसान की वजह बनती है, बल्कि लोगों को अपराध की ओर भी धकेल सकती है.

औनलाइन गेमिंग की लत के चलते नौजवानों में ये समस्याएं आ रही हैं :

-औनलाइन गेमिंग में नौजवान अपना बहुत सा समय बरबाद कर रहे हैं, जिस से उन की पढ़ाईलिखाई और कैरियर पर बुरा असर पड़ रहा है.

-औनलाइन गेमिंग में नौजवान अपना पैसा बरबाद कर रहे हैं, जिस से उन के परिवार की माली हालत खराब हो रही है.

-औनलाइन गेमिंग की लत से नौजवानों में तनाव और चिंता जैसी दिमागी समस्याएं आ रही हैं.

-औनलाइन गेमिंग की लत नौजवानों को अपराध की ओर धकेल सकती हैं, जैसा कि झांसी के मामले में देखा गया. जब सुनैना इस में बरबाद हो गई तो उस ने अपहरण की झूठी कहानी बना कर के फिरौती लेने की कोशिश की.

क्या है इस का हल

-औनलाइन गेमिंग की लत के विरोध में जागरूकता बढ़ानी चाहिए और नौजवानों को इस के खतरों के बारे में जानकारी देनी चाहिए.

-सरकार को औनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या इस के लिए उम्र सीमा तय करनी चाहिए.

परिवार को औनलाइन गेमिंग की लत से पीड़ित की मदद करनी चाहिए और उन्हें सही दिशा में ले जाना चाहिए.

-सरकार को औनलाइन गेमिंग की लत के प्रति कड़ा ऐक्शन लेना चाहिए और इस के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए.

देशदुनिया में सट्टे की लत के चलते कई लोगों ने झूठी कहानियां गढ़ीं और पकड़े गए. यहां कुछ उदाहरण हैं :

-मुंबई, महाराष्ट्र में एक आदमी ने सट्टे में लाखों रुपए गंवाए. उस ने अपने परिवार को झूठी कहानी सुनाई कि उस का अपहरण हो गया है और फिरौती के लिए 50 लाख रुपए मांगे. पुलिस ने उस की झूठी कहानी का परदाफाश किया और उसे गिरफ्तार किया.

-रायपुर, छत्तीसगढ़ में एक नौजवान ने सट्टे में 20 लाख रुपए गंवाए. उस ने अपने दोस्तों से पैसे उधार लिए और फिर झूठी कहानी गढ़ी कि उस का एक्सीडैंट हो गया है और उसे पैसे की जरूरत है. पुलिस ने उस की झूठी कहानी का परदाफाश किया.

-ढाका, बंगलादेश में एक आदमी ने सट्टे में लाखों रुपए गंवाए. उस ने अपने परिवार को झूठी कहानी सुनाई कि उस का अपहरण हो गया है और फिरौती के लिए 10 लाख रुपए मांगे हैं. पुलिस ने उस की झूठी कहानी का परदाफाश किया और उसे गिरफ्तार कर लिया.

-पाकिस्तान में एक आदमी ने सट्टे में लाखों रुपए गंवाए. उस ने अपने दोस्तों से पैसे उधार लिए और फिर झूठी कहानी गढ़ी कि उस के घर में आग लग गई है और उसे पैसे की जरूरत है. पुलिस ने उस की झूठी कहानी का परदाफाश किया.

इन उदाहरणों से यह साफ होता है कि सट्टे की लत कैसे लोगों को झूठी कहानियां गढ़ने और अपराध की ओर धकेल सकती हैं.

सुनैना की कहानी

उत्तर प्रदेश के झांसी में एक लड़की का मामला आज देशभर में चर्चा का विषय है. वह पहले लाखों रुपए का नुकसान कर बैठी और फिर झूठी अपहरण की कहानी गढ़ने लगी.

दरअसल,सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लड़की को एक अंधेरे कमरे में हाथपैर बंधे हुए दिखाया गया है. वीडियो देख घबराए परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी.

पुलिस के मुताबिक छात्रा ने औनलाइन गेमिंग में तकरीबन ढाई लाख रुपए गंवा दिए फिर इस की भरपाई के लिए उस ने अपने अपहरण की झूठी कहानी रची और अपने पिता को व्हाट्सएप पर काल करवा कर फिरौती की मांग करवाई.

इस मामले में 6 लाख रुपए की फिरौती मांगी जा रही थी .जांच के दौरान पुलिस को छात्रा के पहले दिल्ली में और फिर नोएडा में मौजूद होने की जानकारी मिली. विशेष अभियान समूह और पुलिस की टीम बुधवार, 21 नवंबर, 2024 को नोएडा पहुंची, तो मामले की परत दर परत सामने आई.

झांसी की एसएसपी सुधा सिंह के मुताबिक, टोडी फतेहपुर के रहने वाले बबलू रैकवार ने प्राथमिकी दर्ज करवाई कि नर्सिंग की पढ़ाई कर रही उन की 19 साल की बेटी सुनैना का अपहरण हो गया है और उसे छोड़ने के एवज में 6 लाख रुपए फिरौती मांगी गई है.

सुनैना ने पुलिस को बताया कि उस ने औनलाइन गेमिंग में तकरीबन ढाई लाख रुपए गंवा दिए थे. इस में उस के कुछ दोस्तों का भी पैसा लगा था. इस की भरपाई के लिए उस ने अपने अपहरण की झूठी कहानी रची और अपने पिता को व्हाट्सएप के द्वारा फिरौती की मांग करवाई.

आरोपी छात्रा और साजिश में शामिल उस के 4 दोस्त हृदयेश, प्रियांशु, शिवम और नंदकिशोर को गिरफ्तार कर लिया गया है. पूछताछ के बाद एक मोबाइल फोन बरामद किया गया जिस से फिरौती के लिए फोन किया गया था.

नौजवानों को इस घटना से सबक लेना चाहिए कि झूठ झूठ होता है और आखिरकार पुलिस और कानून से कोई बच नहीं सकता, इसलिए कभी भी झूठी कहानी नहीं बनानी चाहिए. कभी कोई अपराध गलती हो भी जाए तो उसे परिवारजनों के बीच शेयर कर लेना चाहिए और औनलाइन गेमिंग से तोबा कर लेनी चाहिए.

घरवालों ने वाइल्ड कार्ड एंट्री के लिए बनाई रणनीति, BB18 का पारा किया हाई

सलमान खान का शो ‘बिग बौस अठराह’ इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है. ‘बिग बौस’ घरवालों की सिरदर्दी बढ़ाने के लिए नए-नए मास्टर स्ट्रोक खेलता रहा हैं. उस पर वीकेंड का वार, जहां सलमान खान के सामने सबकी पेशी होती है. अब घर में तांडव होने वाला है, क्योंकि तीन वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स की एंट्री हो गई है. शो में लड़ाई-झगड़े और गेम प्लान के अलावा ग्लैमर का खूब तड़का लगने वाला है.

 

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घर में जिनकी बतौर वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई है, उनमें एक्ट्रेस एडिन रोज है, डौक्टर एंड एक्ट्रेस यामिनी मल्होत्रा और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अदिति मिस्त्री शामिल हैं. तीनों की एंट्री का ओफिशियल प्रोमो भी सामने आया था. बता दें कि एडिन रोज ने तो विवियन डीसेना को रेड फ्लैग बताया है. अब शो में कौन किस पर कितना भारी पड़ने वाला है ये आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा, साथ ही न्यू वाइल्ड कार्ड एंट्री के लिए विवियन भी नई रणनीति बनाते नजर आ रहे है.

पहली वाइल्ड कार्ड एंट्री एडिन रोज

एडिन रोज जो पेशे से एक एक्टैस है. एडिन काफी हौट और बोल्ड कंटस्टेंट है जिनकी बिग बौस में एंट्री हुई है. एडिन का जन्म दुबई में हुआ है और वो फिल्म इंड्स्ट्री में नाम बनाने के लिए भारत आई है. इसा साल ‘आई रवि तेजा’ की फिल्म ‘रावणासुर’ में एडिन का स्पेशल डांस नंबर था. इसके बाद से ही वो सुर्खियों में आ गई थी. इंस्टाग्राम पर एक्ट्रैस के 7 लाख से ज्यादा फोलोअर्स है. एडिन काफी एक्टिव एक्ट्रैस भी है.

टीवी एक्ट्रैस है यामिनी मल्होत्रा

बिग बौस के घर में दूसरी वाइल्ड कार्ड एंट्री लेने वाली बोल्ड कंटेस्टेंट है यामिनी. ये बतौर एक एक्ट्रैल है ये पहले भी टीवी पर काम कर चुकी है. वो स्टार प्लस के शो ‘गुम है किसी के प्यार में’  नजर आई थी. उन्होंने शिवानी चौहान नाम का रोल निभाया था. शो में नील भट्ट की बहन के किरदार में दिखी थीं. लेकिन फिर् किसी वजह से उन्होंने शो छोड़ दिया था.

इस सीजन की दूसरी वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंड का नाम है- यामिनी मल्होत्रा. एक्ट्रेस पहले भी टीवी पर काम कर चुकी हैं. वो स्टार प्लस के शो ‘गुम है किसी के प्यार में’ नजर आईं थी. उन्होंने शिवानी चौहान नाम का रोल किया था. शो में नील भट्ट की बहन बहन के किरदार में दिखी थीं, लेकिन फिर उन्होंने शो छोड़ दिया.

टीवी में करियर शुरू करने से पहले यामिनी कई एड में भी कर चुकी हैं. साथ ही पंजाबी म्यूजिक वीडियो में भी काम किया है. एक्ट्रैस को इंस्टाग्राम पर 1 मिलियन लोग फोलो करते हैं. वहीं अपना यूट्यूब चैनल भी है, जहां 76.3 हजार सब्सक्राइबर्स हैं.

तीसरी वाइल्ड कार्ड एंट्री ने लगा दी आग

तीसरी कंटेस्टेंट है अदिति मिस्त्री. जो एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं. अपनी फिटनेस को लेकर अक्सर चर्चा में रहती है. अदिति बिजनेसवुमन भी है, जिन्होंने हाल ही में ओनलाइन आर्ट कोर्स की शुरुआत की है. बौलीवुड एक्टर साहिल खान को डेट कर रही है. दोनों एक वेकेशन पर साथ दिख चुके है. जिसकी फोटोज भी वायरल हो चुकी है. लेकिन एक्ट्रैस ने डेटिंग की खबर को अफवाह बताया था, लेकिन अब बिग बौस में पहुंचने के बाद कितनों के दिलों पर राज करती है और जनता को अपना बनाती है. ये अब शो में धीरे धीरे देखने को मिलेगा.

kartik Aryan Birthday: एक्टर का असली नाम है कार्तिक तिवारी, फोन में मां का नंबर सबसे पहले

बौलीवुड (Bollywood) के यंग और टैलेंट से भरपूर एक्टर कार्तिक आर्यन (Kartik Aryan) का आज जन्मदिन है. 22 नवंबर को कार्तिक अपना बर्थ डे सेलिब्रेट करेंगे. इसी स्पेशल डे को खास बनाने के लिए वे एक दिन पहले ही गोवा पहुंच गए है. 21 नवंबर को देर शाम एक्टर ने गोवा की खूबसूरत व्यू के साथ अपनी फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की है.

 

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कार्तिक आर्यन (Kartik Aryan) अपने बर्थ डे के साथ अपनी फिल्म भूल भूलैया 3 (Bhul Bhooliya 3) की सक्सेस को भी एंजौय कर रहे है. कार्तिक आर्यन की फिल्म की रिलीज हुए आज 22 दिन हो चुके है. तीन हफ्ते के बाद भी फिल्म को जोर शोर से प्रोमोशन चल रहा है.

कार्तिक आर्यन ने कम समय में बौलीवुड को कई हिट फिल्में दी है वो भी सुपर डुपर एक्टिंग के साथ. उनकी एक्टिंग के फैंस दिवाने है, लड़कियों उनके ओटोग्राफ लेने के लिए भीड़ में लाइन लगा कर खड़ी रहती है तो कभी उनके घर के बाहर पहुंच जाती है. कार्तिक की फैन फोलोइंग काफी तगड़ी है. अपनी फिल्मों और एक्टिंग से तो कार्तिक ने सभी का दिल जीता ही है, लेकिन पर्सनल लाइफ को लेकर भी कम सुर्खियों में नहीं रहे है.

कार्तिक के डेटिंग अफेयर्स

कार्तिक आर्यन का पहला अफेयर सारा अली खान के साथ रहा है. दोनों के रिलेशनशिप की खबरे खूब वायरल हुई है. दोनों की गहरी दोस्ती को खबरो में लव एंगल पाया है, हालांकि दोनों के मुंह से ये तो नहीं सुना की दोनो एक दूसरे को डेट कर रहे है, लेकिन जब बात ब्रेकअप पर आ पहुंची तो, दोनों ने खुले शब्दों में नेशनल टीवी शो से इस बात का जिक्र किया है कि दोनों ने ब्रेकअप ले लिया है. कार्तिक आर्यन से कई बार कई शो में इस बात पर आज भी सवाल किया जाता है कि क्या वे सारा अली खान को डेट कर रहे है. तो, कार्तिक साफ शब्दों में या हसंते हुए मीडिया को बताते है कि वे ‘मैं आज सिंगल हूं’. मेरे फोन कौल में पहला नंबर सिर्फ मां का होता है.

बात करें कार्तिक आर्यन के दूसरी डेटिंग की खबरों की तो उनका नाम जह्नावी कपूर के साथ भी जोड़ा गया है. जैसे ही सारा अली खान के साथ डेंटिग पर कार्तिक का विराम लगा वैसे ही जह्नावी कपूर की एंट्री होती है लेकिन इनका रिलेशन भी कभी पब्लिकली सामने नहीं आया है. धीरे धीरे इन सभी अफवाहों पर विराम लग गया. फैंस का कहना है कि सारा और जाह्नवी बाद में कार्तिक की अच्छी दोस्त बन गईं. फिल्हाल, कार्तिक आर्यन सिंगल है और वह लगातार बौलीवुड को ब्लौकबस्टर फिल्में दे रहे हैं.

कार्तिक आर्यन का डेब्यू और जन्म

शानदार एक्टर कार्तिक आर्यन आज अपना 34वां जन्मदिन मना रहे है. इनका जन्म 22 नवंबर 1990 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. कार्तिक आर्यन का असली नाम कार्तिक तिवारी था. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के लिए अपना सरनेम बदल दिया. कार्तिक ने अपने करियर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी. इस फिल्म से उन्हें एक बड़ी पहचान मिली. इसी फिल्म में उनके 5 मिनट के लंबे चौड़े डायलौग को लोगों ने काफी पसंद किया गया था. जिसके बाद कार्तिक सभी यंगस्टर के हिरो बन गए थे. कार्तिक आर्यन बौलीवुड में छा गए.

2024 का बर्थ डे मनाने पहुंचे गोवा

आपको बता दें कि बीते गुरुवार को कार्तिक आर्यन ने अपने ओफिशियल इंस्टाग्राम पर गोवा से अपनी कुछ फोटोज पोस्ट की. इंस्टाग्राम स्टोरी पर उन्होंने गोवा के बीच से एक ग्लास की तस्वीर पोस्ट की और अपने फैंस को बताया कि वह फिलहाल गोवा में हैं. अगली स्टोरी में कार्तिक आर्यन को बीच के किनारे सनसेट की खूबसूरती को निहारते हुए देखा जा सकता है. वे अपने बर्थ डे से पहले गोवां किनारे बीच का मजा लेने पहुंच चुके है. जहां का मौसम और मिजाज कार्तिक का बर्थ डे ओर खास बना देगा.

आज भी कायम है छुआछूत

हाल ही में 3 अक्तूबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जाति पर आधारित भेदभाव रोकने के लिए दायर जनहित याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जेल नियमावली जाति के आधार पर कामों का बंटवारा कर के सीधे भेदभाव करती है. सफाई का काम सिर्फ निचली जाति के कैदियों को देना और खाना बनाने का काम ऊंची जाति वालों को देना आर्टिकल 15 का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल मैन्युअल के उन प्रावधानों को बदलने का निर्देश दिया है, जो जेलों में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह तो साफतौर पर जाहिर करता है कि आजादी के 77 साल बाद भी छुआछूत समाज में ही नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम पर भी बुरी तरह हावी है.

जेलों के अंदर जातिगत भेदभाव आम बात है. जेल में कैदियों की जाति के आधार पर उन्हें काम सौंपा जाता है, जहां दलितों को अकसर साफसफाई जैसे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.

समाज में जातिगत भेदभाव कोई नई बात नहीं है. आएदिन देश के अलगअलग इलाकों में दलितों से छुआछूत रखने और उन पर जोरजुल्म करने की घटनाएं होती रहती हैं.

आज भी गांवकसबों के सामाजिक ढांचे में ऊंची जाति के दबंगों के रसूख और गुंडागर्दी के चलते दलित और पिछड़े तबके के लोग जिल्लतभरी जिंदगी जी रहे हैं.

गांवों में होने वाली शादी में दलितों व पिछडे़ तबके को खुले मैदान में बैठ कर खाना खिलाया जाता है और खाने के बाद अपनी पत्तलें उन्हें खुद उठा कर फेंकनी पड़ती हैं.

टीचर मानकलाल अहिरवार बताते हैं कि गांवों में मजदूरी का काम दलित और कम पढ़ेलिखे पिछड़ों को करना पड़ता है. दबंग परिवार के लोग अपने घर के दीगर कामों के अलावा अनाज बोने से ले कर फसल काटने तक के सारे काम करवाते हैं और बाकी मौकों पर छुआछूत रखते हैं. छुआछूत बनाए रखने में पंडेपुजारी धर्म का डर दिखाते हैं.

25 साल की होनहार लड़की काव्या यों तो गांव में पलीबढ़ी, पर अपनी पढ़ाई के बलबूते वह बैंक में क्लर्क सिलैक्ट हो गई और उस की पोस्टिंग इंदौर में हो गई.

इंदौर में नौकरी करते वह अपने साथ बैंक में काम करने वाले हमउम्र लड़के की तरफ आकर्षित हुई. वह लड़का भी उसे चाहता था.

काव्या ने घर में बिना बताए उस लड़के से शादी कर ली. वह जानती थी कि उस के मातापिता शादी करने की इजाजत हरगिज नहीं देंगे, क्योंकि वह लड़का दलित जाति का था.

देरसवेर इस बात की जानकारी गांव में रहने वाले मातापिता को लग ही गई. इस बात को ले कर वे काफी आगबबूला हो गए और इंदौर पहुंच कर तुरंत ही काव्या को गांव ले आए.

घर में काव्या को दलित लड़के से शादी करने की बात को ले कर इतना टौर्चर किया गया कि उस ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली.

साल 2024 के मार्च महीने में मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से आई इस खबर ने साबित कर दिया है कि समाज में छुआछूत आज भी बदस्तूर जारी है. किस तरह पढ़ेलिखे गांव के मातापिता ने अपने ?ाठे मानसम्मान के लिए अपनी बेटी की खुशियां ही छीन लीं.

गांवकसबों और छोटे शहरों में आज भी लड़की को यह हक नहीं है कि वह अपनी मरजी और पसंद के लड़के से शादी कर सके. दूसरी जाति और धर्म में शादी करने पर परिवार और समाज के बहिष्कार का सामना करना पड़ता है और कई बार तो जान से हाथ भी धोना पड़ता है.

गांवकसबों में छुआछूत का आलम यह है कि दलितों के महल्ले, बसावट अलग हैं. इन के पानी पीने के नल और मंदिर तक अलग हैं. भूल से भी इन्हें ऊंची जाति के लोगों के नल को छूने और उन के मंदिर में घुसने की इजाजत नहीं है.

अपने चुनावी फायदे के लिए केंद्र और राज्य सरकारें दलितों को साधने के लिए भले ही करोड़ों रुपए खर्च कर संत रविदास का मंदिर बनवा रहे हों, लेकिन देश के ग्रामीण अंचलों में आज भी दलितों को छुआछूत का सामना करना पड़ रहा है.

मध्य प्रदेश सरकार गांवकसबों में छुआछूत मिटाने के लिए भले ही ‘स्नेह यात्राएं’ निकाले, गांधी जयंती पर ‘समरसता’ भोज कराए, मगर गरीब और दलितों के लिए सामाजिक समरसता का सपना अभी भी अधूरा है, क्योंकि तमाम कोशिशों के बाद भी आज लोग अपनी छोटी सोच से बाहर नहीं आ पाए हैं.

छुआछूत का एक मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में दलित औरतों के साथ सरकारी नल पर पानी भरने को ले कर पिछले साल सामने आया था.

17 अगस्त, 2023 को छतरपुर जिले के गांव पहरा के गौरिहार थाना क्षेत्र के पहरा चौकी की रहने वाली 2 औरतें गांव में पानी की कमी के चलते एक सरकारी नल पर पानी भरने गई हुई थीं.

यह नल गांव के यादव परिवार के घर के सामने लगा हुआ था. जैसे ही इन उन औरतों ने पानी भरने के लिए बरतन हैंडपंप के नीचे रखा और नल चलाना शुरू किया, तभी वहां मंगल यादव, दंगल यादव और देशराज यादव आ गए और उन के बरतन फेंकते हुए कहा, ‘तुम दलित जाति की हो, तुम ने हमारे इलाके के इस नल को कैसे छुआ? तुम्हारे छूने से नल अशुद्ध हो गया.’

सरकारी नल पर पानी भरने गई दलित औरतों संदीपा और अभिलाषा ने जब उन से मिन्नतें करते हुए कहा, ‘हमारे घर में पानी नहीं है. पानी के बिना खाना भी नहीं बना है, बच्चे भूख से बेचैन हैं.’

इस बात पर हमदर्दी दिखाने के बजाय इन दबंगों ने मारपीट शुरू कर दी. अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत करने पुलिस थाना पहुंची इन दोनों औरतों को पुलिस ने भी दुत्कार दिया.

छुआछूत से जुड़ी यह कोई अकेली घटना नहीं है. मध्य प्रदेश के अलगअलग इलाकों में इस तरह की घटनाएं आएदिन होती रहती हैं. कभी स्कूलों में दलित बच्चों के जूठे बरतन धोने से मना किया जाता है, तो कभी उन्हें धर्मस्थलों पर घुसने नहीं दिया जाता.

छुआछूत से जूझते हैं लोग

60 साल की उम्र पार कर चले लोगों की पीढ़ी ने छुआछूत का जो रूप समाज में देखा था, उसे उन्होंने उस समय के हालात के लिहाज से सहज तरीके से अपना लिया था, मगर मौजूदा दौर की नौजवान पीढ़ी को यह नागवार गुजरता है.

72 वसंत देख चुके डोभी गांव के सालक राम अहिरवार बताते हैं कि आजादी मिलने के बाद देश से अंगरेज भले ही चले गए थे, मगर गांव में रहने वाले ऊंची जाति के जमींदारों का जुल्म कम नहीं हुआ था. दलित तबके का कोई भी इन जमींदारों की हवेली के सामने से गुजरता था, तो अपने पैर के जूतों को सिर पर रख कर निकलता था.

दलितों के बेटों को शादी में घोड़ी पर चढ़ने की मनाही थी. गांव के ऊंची जाति के लोग उन्हें शादीब्याह में बुलाते तो थे, मगर भोजन उन्हें जमीन पर बैठ कर करना होता था और अपनी पत्तल खुद ही फेंकनी पड़ती थी. पीने के लिए घर से पानी भर कर ले जाना पड़ता था.

उस दौर की पीढ़ी को यह बुरा भी नहीं लगता था. वक्त बदलने के साथ जब आज की नौजवान पीढ़ी पढ़लिख कर  पुराने रिवाजों को नहीं मानती, तो टकराव के हालात बनते हैं और दलितों को जोरजुल्म का सामना करना पड़ता है.

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में हर साल दलितों के घुड़चढ़ी करने और बरात में डीजे बजाने पर ?ागड़ा होता है.

पढ़ीलिखी नई पीढ़ी इन दकियानूसी रिवाजों को नहीं मानती. गांवकसबों में आज शादियों में बफे सिस्टम तो लागू हो गया है, मगर दलित समुदाय के लिए अलग काउंटर बनाए जाते हैं, उन्हें ऊंची जाति के लोगों के साथ दावत करने की आजादी आज भी नहीं है.

ऐसा नहीं है कि दलितों से छुआछूत बिना पढ़ेलिखे लोगों या गांवकसबों तक सीमित है, बल्कि पढ़ेलिखे लोग भी इसे बदस्तूर अपना रहे हैं.

2 साल पहले मध्य प्रदेश के एक मंत्री, जो दलित समुदाय से आते थे, भी ऊंची जाति के लोगों से छुआछूत के शिकार हुए थे.

दरअसल, वे मंत्री ठाकुरों के परिवार में मातमपुरसी के लिए गए थे. वहां और भी ऊंची जाति के नेता मौजूद थे. जब खानेपीने की बारी आई, तो ऊंची जाति के दूसरे लोगों को स्टील की थाली में खाना परोसा गया और दलित समुदाय से आने वाले मंत्री को डिस्पोजल थाली परोसी गई थी.

समाज में छुआछूत के लिए धर्म और मनुवादी व्यवस्था भी जिम्मेदार है. मनुवादियों ने अपने फायदे के लिए वर्ण व्यवस्था लागू की. ब्राह्मणों ने अपने को श्रेष्ठ साबित कर समाज को 4 वर्णों में बांटा और शूद्रों को उन के मौलिक अधिकारों से दूर रखा. उन्हें शिक्षा का अधिकार नहीं दिया गया. इस के पीछे की वजह भी यही थी कि ये लोग पढ़लिख कर काबिल न बन सकें. यही वजह रही कि दलितों ने धर्म परिवर्तन का रास्ता अपनाया.

स्कूलकालेज भी नहीं अछूते

राष्ट्र निर्माण की शिक्षा देने वाले सरकारी संस्थान भी छुआछूत को खत्म नहीं कर पा रहे हैं. ‘ऐजूकेशन मौल’ कहे जाने वाले इंगलिश मीडियम प्राइवेट स्कूलों में सरकारी अफसरों और ऊंची जाति के पैसे वाले लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं और सरकारी स्कूलों में गरीब, मजदूर, दलितपिछड़े तबके के बच्चे पढ़ रहे हैं.

सरकारी स्कूलों में दिए जाने वाले मिड डे मील में भी दलित और ऊंची जाति के छात्रछात्राओं के बीच गुटबाजी देखने को मिलती है.

स्कूल में ऊंची जाति के बच्चे दलित और पिछड़ी जाति के बच्चों के साथ भोजन करना पसंद नहीं करते. उन्हें यह सीख अपने घर से तो मिलती ही है, टीचर भी इस खाई को नहीं पाट रहे.

अगर कोई दलित जाति की महिला भोजन बना कर परोसती है, तब भी ऊंची जाति के बच्चे वह भोजन नहीं करते. अगर कोई ऊंची जाति की रसोइया खाना बनाती है, तो वह दलित बच्चों के जूठे बरतन नहीं धोती.

साल 2022 में मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से 50 किलोमीटर दूर चरगवां थाना क्षेत्र से सटे गांव सूखा में दलित बच्चों से सरकारी स्कूल में खाने के बरतन धुलवाए जाने का मामला सामने आया था.

इसी साल गुजरात के मोरबी जिले के एक गांव में प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील का खाना पिछड़े समुदाय के छात्रों ने इसलिए नहीं खाया, क्योंकि यह दलित औरत द्वारा बनाया गया था

मिड डे मील बनाने वाली दलित महिला गरमी की छुट्टियों के बाद जब स्कूल पहुंची, तो प्रिंसिपल ने 100 बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए कहा, लेकिन एससी जाति के केवल 7 बच्चे ही भोजन के लिए पहुंचे. दूसरे दिन प्रिंसिपल ने 50 बच्चों के लिए खाना बनाने को कहा, जिसे सिर्फ दलित बच्चों ने ही खाया.

साल 2023 में कर्नाटक के तुमकुरु जिले से बेहद ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था. सिरा तालुका के नरगोंडानहल्ली सरकारी स्कूल में कुछ बच्चों ने मिड डे मील के भोजन का बहिष्कार कर दिया था, जिस की वजह भी एक दलित महिला द्वारा भोजन पकाया जाना थी.

छुआछूत की समस्या स्कूलों में नासमझ बच्चों के बीच ही नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने वाले टीचरों के बीच भी है. लंच टाइम में ऊंची जाति के टीचर भी दलित जाति के टीचरों के साथ लंच बौक्स शेयर करना पसंद नहीं करते. स्कूल के अलावा दूसरे दफ्तरों में भी उन के साथ जातिगत भेदभाव किया जाता है.

दलित जाति के चपरासी से दफ्तरों में झाड़ू लगाने और शौचालय साफ करने का काम करवाया जाता है, मगर उन के हाथ से खानेपीने की चीज और पानी नहीं मंगाया जाता.

जातियों में बंट गए देवीदेवता

जिस तरह समाज जातियों में बंटा हुआ है, उसी तरह उन्होंने देवीदेवता को भी बांट लिया है. पंडितों ने परशुराम को, कायस्थों ने चित्रगुप्त को, तो यादवों ने कृष्ण को ले लिया. कुशवाहा ने कुश से संबंध जोड़ लिया, कुर्मियों ने लव को पकड़ लिया, तो कहारों ने जरासंध को अपना पूर्वज बता दिया. लोहारों ने विश्वकर्मा के साथ संबंध जोड़ लिया.

दलितों की एक जाति ने वाल्मीकि से अपना नाता जोड़ा, तो एक तबका रैदास को भगवान मानने लगा. कुम्हारों ने अपना संबंध ब्रह्मा से बता दिया. तमाम जातियों को कोई न कोई देवता या कुलदेवता या ऋषि पूर्वज के तौर पर मिल गए.

ऊंची जाति के लोगों से हुई बेइज्जती से छुटकारा पाने का ये इन जातियों का अपना तरीका था. शूद्र और अतिशूद्र होने की बेइज्जती से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने देवीदेवताओं का ढाल बना लिया. यह जाति व्यवस्था से विद्रोह भी था और ऊंची जातियों की तरह बनने की लालसा भी थी.

अमीर ऊंची जाति वालों की होड़ में दलितों ने भी अपनेअपने देवीदेवताओं के मंदिर बना लिए, मगर पुजारी की कुरसी उन की जेब ढीली करने वाले पंडितों के हाथ में ही रही.

‘गुलामगिरी’ किताब से सबक लें सरकार हिंदूमुसलिम का भेद करा कर कट्टरवादी हिंदुत्व की हिमायती तो बनती है, पर हिंदुओं के बीच ही जातिवाद की दीवार तोड़ने और दलितपिछड़े तबके के लोगों पर दबंग हिंदुओं के द्वारा किए जाने वाले जोरजुल्म पर चुप्पी साधे रहती है.

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के पेशे से वकील मनीष अहिरवार कहते हैं कि एक इनसान का दूसरे इनसान के साथ गुलामों सरीखा बरताव करना सभ्यता के सब से शर्मनाक अध्यायों में से एक है. लेकिन अफसोस है कि यह शर्मनाक अध्याय दुनियाभर की तकरीबन सभी सभ्यताओं के इतिहास में दर्ज है. भारत में जाति प्रथा के चलते पैदा हुआ भेदभाव आज तक बना हुआ है.

वे आगे कहते हैं कि एक बार ज्योतिबा फुले की किताब ‘गुलामगिरी’ पढ़ लें, तो उन की आंखों के चश्मे पर पड़ी धूल साफ हो जाएगी. साल 1873 में लिखी गई इस किताब का मकसद दलितपिछड़ों को तार्किक तरीके से ब्राह्मण तबके की उच्चता के ?ाठे दंभ से परिचित कराना था.

इस किताब के जरीए ज्योतिबा फुले ने दलितों को हीनताबोध से बाहर निकल कर इज्जत से जीने के लिए भी प्रेरित किया था. इस माने में यह किताब काफी खास है कि यहां इनसानों में भेद पैदा करने वाली आस्था को तार्किक तरीके से कठघरे में खड़ा किया गया है.

दलितपिछड़ों की हमदर्द बनने का ढोंग करने वाली सरकारें पीडि़त लोगों को केवल मुआवजे का झनझना हाथों में थमा देती हैं. सामाजिक, मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से दलितों का उत्पीड़न कर बाद में केवल मुआवजा दे कर उन के जख्म नहीं भर सकते. ऐसे में किस तरह यह उम्मीद की जा सकती है कि आजादी के

77 साल बाद भी अंबेडकर के संविधान की दुहाई देने वाला भारत छुआछूत से मुक्त हो पाएगा?

जिस तरह किसान आंदोलन ने सरकार की गलत नीतियों का विरोध कर के सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था, उसी तरह दलितपिछड़ों को भी अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट होना होगा.

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