Winter Romance Special: जोशीला इश्क हर उम्र में

होली की शुरुआत कहां से हुई थी, इस सवाल के जवाब में ज्यादातर लोग यही कहेंगे कि मथुरावृंदावन या फिर बरसाना से हुई होगी, लेकिन कम ही लोग उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का नाम लेंगे.

धार्मिक किस्सेकहानियों के मुताबिक, होली मनाने की शुरुआत हरदोई से हुई थी, जिस का राजा हिरण्यकश्यप था, जो भगवान विष्णु से बैर रखता था. इसी बिना पर कहा और माना जाता है कि हरदोई का पुराना नाम हरिद्रोही था.

हिरण्यकश्यप का बेटा भक्त प्रहलाद था, जिस की होली की कहानी हर कोई जानता है. यहां का प्रहलाद कुंड होली की कहानी के लिए ही मशहूर है.

मौजूदा समय में हरदोई की गिनती यहां 400 से भी ज्यादा चावल मिलें होने के बाद भी न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि देशभर के पिछड़े जिलों में शुमार होती है. यहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा दलितपिछड़े तबकों का है, जिन में से एक जाति राठौर भी है, जो अपनेआप को राजपूत मानती है. यह और बात है कि राठौरों के पास बहुत ज्यादा जमीनजायदाद नहीं है, वे कामचलाऊ पैसे वाले हैं.

दिल का मामला

प्रहलाद की कहानी की तरह तो नहीं रहेगी, लेकिन हरदोई के लोग इस प्रेमकहानी को मुद्दत तक नहीं भुला पाएंगे, जो दिलचस्प होने के साथसाथ थोड़ी चिंतनीय भी है. यह बढ़ती उम्र के जोशीले इश्क की ताजातरीन दास्तान है.

हरदोई के लखीमपुर खीरी का एक छोटा सा गांव है सुहौना, जहां 50 साला रामनिवास राठौर रहता था. पेशे से ड्राइवर रामनिवास की जिंदगी का एक बड़ा मकसद जवान होती एकलौती बेटी चांदनी के हाथ पीले कर देना था, जिसे उस ने मां बन कर भी पाला था. अब से तकरीबन 15 साल पहले रामनिवास की बीवी की मौत हो गई थी, तब से उस की जिंदगी में एक खालीपन आ गया था.

मासूम चांदनी का मुंह देखदेख कर जी रहे इस शख्स ने दूसरी शादी नहीं की थी, क्योंकि सौतेली मां के जुल्मोसितम के कई किस्से उस ने सुन रखे थे.

रामनिवास ने लंबा वक्त बिना औरत के गुजार दिया, तो सिर्फ बेटी की खातिर जो अपनेआप में बड़ी बात है, नहीं तो आलम तो यह है कि इधर पहली बीवी की चिता की आग ठंडी नहीं होती और उधर मर्द ?ाट से बैंड, बाजा और बरात के साथ दूसरी बीवी ले आता है.

इस काम में समाज और नातेरिश्तेदार न केवल उस की मदद करते हैं, बल्कि औरत के होने के फायदे और जरूरत भी गिनाते हुए एक तरह से उकसाते रहते हैं. लेकिन रामनिवास ने किसी की सलाह पर कान नहीं दिए और अकेला ही चांदनी की परवरिश करता रहा.

बेटी के बालिग होते ही घरवर की तलाश शुरू हो गई, जो इसी साल मई महीने में खत्म भी हो गई. मुबारकपुर गांव के आशाराम राठौर का बेटा शिवम रामनिवास को चांदनी के लिए ठीक लगा. बातचीत शुरू हुई और रिश्ता तय भी हो गया.

आशाराम राठौर राजमिस्त्री था, जिस की आमदनी भी ठीकठाक थी और लड़के पर कोई खास घरेलू जिम्मेदारी भी नहीं थी, सो रामनिवास को लगा कि चांदनी इस घर में रानी की तरह रहेगी. बात पक्की हुई और 29 मई, 2023 को दोनों की शादी भी हो गई.

रिश्ते और लेनदेन समेत शादी से ताल्लुक रखती कई बातों को निभाने के लिए रामनिवास को बारबार मुबारकपुर जाना पड़ता था, जहां समधी आशाराम कम और समधिन आशारानी ज्यादा मिलती थी, क्योंकि आशाराम को अपने काम के सिलसिले में अकसर बाहर रहना पड़ता था.

शादी के बाद भी रामनिवास राठौर का आनाजाना बेटी की ससुराल लगा रहा, तो लोगों ने यही सोचा कि बेटी के बिना अकेले बाप का दिल नहीं लगता होगा. आखिर मां का प्यार भी तो उसी ने दिया है, इसलिए चला आता होगा बेटी को देखने, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी.

रामनिवास का दिल अपनी 45 साला समधिन आशारानी पर ही आ गया था जो देखने में काफी शोख और स्मार्ट थी और बनठन कर रहती थी. सालों से औरत और उस के प्यार समेत जिस्म को भी तरस रहे रामनिवास का दिल अपने

काबू में नहीं रहा और दीनदुनिया, नातेरिश्तेदारी और ऊंचनीच सब भूलभाल कर एक दिन वह आशारानी से अपने प्यार का इजहार कर बैठा.

आग तो इधर भी लगी थी

प्यार का इजहार तो खानापूरी भर थी, क्योंकि आशारानी की हालत भी रामनिवास की हालत से कम जुदा नहीं थी. वह खुद भी अपने समधी को दिल दे बैठी थी. दोनों घंटों बैठ कर न जाने क्याक्या बतियाते रहते थे. अपने दिल का हाल कमउम्र प्रेमियों की तरह सुनाते और सुनते रहते थे. इस से उन के इश्क में और जोश भरता जा रहा था.

इसी जोश में कब वे मन के साथसाथ तन से भी एक हो गए, इस का उन्हें भी पता नहीं चला. लेकिन यह एहसास दोनों को हो गया था कि अब वे एकदूजे के बगैर नहीं रह सकते.

रामनिवास राठौर का तो समझ आता है कि उस का हाल बेहाल इसलिए था कि पत्नी की मौत के बाद कोई औरत उस की न केवल जिंदगी में, बल्कि दिल तक भी शिद्दत से आई थी, लेकिन आशारानी के बारे में इतना ही सोचा और कहा जा सकता है कि पति की अनदेखी ने उसे तनहा सा कर दिया था.

रामनिवास के जिंदगी में आते ही उस के अंदर की जवान लड़की फिर जिंदा हो गई थी और प्यार में भी पड़ गई थी. जब वे दोनों हर लिहाज से एक हो गए, तो आगे की प्लानिंग भी बनाने लगे, जिस में रोड़े ही रोड़े थे.

नातेरिश्ते, समाज, बेटा, बहू, पति, बेटी, दामाद इन सब की अनदेखी कर प्यार की मंजिल शादी तक पहुंच जाना दोनों के लिए आसान नहीं था. हां, इतना जरूर उन्हें सम?ा आ गया था कि प्यार के आगे सबकुछ बेकार है और यों चोरीछिपे से मिलना ज्यादा नहीं चलना, क्योंकि उन की बढ़ती नजदीकियां, मेलमुलाकातें और खिलते चेहरे लोगों को चुभने लगे थे, उंगलियां भी उठने लगी थीं.

ये उठती उंगलियां तो वे मरोड़ नहीं सकते थे. लिहाजा, दोनों ने इन की पहुंच से बहुत दूर जाने का फैसला यह सोचते हुए ले लिया कि अब हम अपनी नई जिंदगी शुरू करेंगे. जिसे जो सोचना हो  सोचे और जिसे जो करना हो करे.

यही फैसला वे कमउम्र जोशीले प्रेमी भी करते हैं, जिन का प्यार घर, परिवार, समाज और दुनिया को रास नहीं आता, पर इस मामले में बात इस माने में अलग थी कि सवाल दोनों की औलादों का भी था, जिस का जवाब इन्होंने यही निकाला कि कहां दुनियाभर की औलादें इश्क में पड़ने के बाद मांबाप की इज्जत का खयाल करती हैं या दुनियाजमाने का लिहाज करती हैं, तो हम क्यों करें.

23 सितंबर, 2023 इस तारीख को दोनों चोरीछिपे, लेकिन पूरा प्लान बना कर बस से दिल्ली भाग गए और वहां रहने लगे. रामनिवास अपनी जमापूंजी साथ लाया था, तो आशारानी भी जेवर साथ ले गई थी. ठीक वैसे ही जैसे हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है कि लड़की आशिक के साथ घर से भागने से पहले जेवर और कपड़ेलत्ते भी समेट ले जाती है.

दोनों साथ भागे हैं, यह अंदाजा किसी को नहीं था, लेकिन इन के बीच प्यार का चक्कर चल रहा है यह बात कइयों को मालूम थी. जबतब दोनों गांवों में चटकारे ले कर इस लवस्टोरी की चर्चा भी होती रहती थी.

आशाराम ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई, लेकिन बाद में उसे मालूम हुआ कि 23 सितंबर से ही समधी रामनिवास भी गायब हैं, तो इस जोशीले इश्क का राज खुला, जिसे दबाए रखने के अलावा किसी के पास कोई और रास्ता नहीं था.

हालांकि रामनिवास के भी 23 सितंबर से गायब होने की खबर आशाराम ने पुलिस को दे दी थी और पुलिस दोनों को ढूंढ़ने में जुट गई थी.

22 अक्तूबर, 2023 इस दिन पुलिस को खबर मिली कि शाहजहांपुरसीतापुर रेलवे ट्रैक पर 2 लाशें पड़ी हैं. जांच में दोनों के नाम और पहचान मोबाइल फोन और आधारकार्ड के जरीए उजागर हुए, तो इस इश्क की दास्तान भी खुल कर सामने आ गई. यह मान लिया गया कि ये दोनों बदनामी से डर गए थे, इसलिए इन्होंने रेल से कट कर खुदकुशी कर ली. बात एक हद तक सच भी थी, लेकिन पूरा सच शायद ही कभी लोगों को समझ आए.

रामनिवास और आशारानी

17 अक्तूबर, 2023 को दिल्ली से वापस आ गए थे. इस के बाद 4 दिन क्याक्या हुआ, इस का अंदाजा यही लगाया गया कि परिवार और समाज ने इन के इश्क पर रजामंदी की मुहर नहीं लगाई, जिस से इन का जोश हवा हो गया और कोई रास्ता न देख दोनों ने साथ मरने की खाई कसम निभा ली.

दोनों चाहते तो साथ जीने का वादा भी निभा सकते थे, लेकिन इस के लिए हिम्मत उन के पास नहीं बची थी, क्योंकि ये समाज के नियम बदल कर जीना चाहते थे. हालांकि दिल्ली में दोनों ने शानदार एक महीना साथ गुजारा और खूब और जानदार प्यार एकदूसरे को किया, पर जब पैसे खत्म होने लगे और सब्र टूटने लगा, तो वापसी ही इन्हें बेहतर रास्ता लगा.

समाज एक बार फिर जीत गया और प्यार हार गया, यह कहते हुए इस कहानी का खात्मा करना अधूरी बात होगी, जिस में प्यार नाम के जज्बे का बारीकी से जिक्र नहीं होगा.

जज्बा भी और जोश भी

आमतौर पर माना यह जाता है कि जोशीला इश्क कमउम्र के कुंआरे लड़कालड़की ही करते हैं, लेकिन रामनिवास और आशारानी जैसे प्रेमी इस सोच को तोड़ देते हैं, जिन से समाज और धर्म के बनाए नियमों और कायदेकानूनों पर अमल करने की उम्मीद जिम्मेदारी की हद तक की जाती है.

‘न उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन…’ गाने की तर्ज पर इन का बेपरवाह इश्क भी अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता है, लेकिन बीच में दुनिया और उस के उसूल आ जाते हैं तो ये भी नौजवान प्रेमियों की तरह एकसाथ फांसी के

फंदे पर ल जाते हैं, ट्रेन की पटरियों के नीचे बिछ जाते हैं या फिर जहर खा कर एकदूसरे की बांहों में दम तोड़ देते हैं. यह इश्क भी जोश से लबरेज होता है, जिस के लिए तन से तन का मिलन  ही सबकुछ नहीं होता. ये भी एकदूसरे के मन में हमेशा के लिए समा जाना चाहते हैं. प्यार की नई इबारत लिखते ये प्रेमी खुद फना हो जाते हैं और एक मिसाल छोड़ जाते हैं कि कब प्यार के बारे में लोग दरियादिली दिखाते हुए उसे मंजूरी देंगे और जब जवाब हमेशा की तरह न में मिलता है, तो हताश और निराश नाकाम प्रेमी दुनिया ही छोड़ने का रिवाज निभा जाते हैं. शायद ही नहीं, बल्कि तय है कि इन के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.

हरदोई के नाम के मुताबिक रामनिवास और आशारानी ने द्रोह तो किया था, लेकिन हरि से नहीं, बल्कि हर उस दस्तूर के खिलाफ किया था, जो इन के रास्ते में ब्रेकर बन कर खड़ा था. इन के जज्बे और जोश को कोई सलाम करे न करे, लेकिन नजरअंदाज करने की हालत में भी नहीं कहा जा सकता.

बंद किताब : अभिषेक की चाहत

‘‘तुम…’’

‘‘मुझे अभिषेक कहते हैं.’’

‘‘कैसे आए?’’

‘‘मुझे एक बीमारी है.’’

‘‘कैसी बीमारी?’’

‘‘पहले भीतर आने को तो कहो.’’

‘‘आओ, अब बताओ कैसी बीमारी?’’

‘‘किसी को मुसीबत में देख कर मैं अपनेआप को रोक नहीं पाता.’’

‘‘मैं तो किसी मुसीबत में नहीं हूं.’’

‘‘क्या तुम्हारे पति बीमार नहीं हैं?’’

‘‘तुम्हें कैसे पता चला?’’

‘‘मैं अस्पताल में बतौर कंपाउंडर काम करता हूं.’’

‘‘मैं ने तो उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम में दिखाया था.’’

‘‘वह बात भी मैं जानता हूं.’’

‘‘कैसे?’’

‘‘तुम ने सर्जन राजेश से अपने पति को दिखाया था न?’’

‘‘हां.’’

‘‘उन्होंने तुम्हारी मदद करने के लिए मुझे फोन किया था.’’

‘‘तुम्हें क्यों?’’

‘‘उन्हें मेरी काबिलीयत और ईमानदारी पर भरोसा है. वे हर केस में मुझे ही बुलाते हैं.’’

‘‘खैर, तुम असली बात पर आओ.’’

‘‘मैं यह कहने आया था कि यही मौका है, जब तुम अपने पति से छुटकारा पा सकती हो.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘बनो मत. मैं ने जोकुछ कहा है, वह तुम्हारे ही मन की बात है. तुम्हारी उम्र इस समय 30 साल से ज्यादा नहीं है, जबकि तुम्हारे पति 60 से ऊपर के हैं. औरत को सिर्फ दौलत ही नहीं चाहिए, उस की कुछ जिस्मानी जरूरतें भी होती हैं, जो तुम्हारे बूढ़े प्रोफैसर कभी पूरी नहीं कर सके.

‘‘10 साल पहले किन हालात में तुम्हारी शादी हुई थी, वह भी मैं जानता हूं. उस समय तुम 20 साल की थीं और प्रोफैसर साहब 50 के थे. शादी से ले कर आज तक मैं ने तुम्हारी आंखों में खुशी नहीं देखी है. तुम्हारी हर मुसकराहट में मजबूरी होती है.’’

‘‘वह तो अपनाअपना नसीब है.’’

‘‘देखो, नसीब, किस्मत, भाग्य का कोई मतलब नहीं होता. 2 विश्व युद्ध हुए, जिन में करोड़ों आदमी मार दिए गए. इस देश ने 4 युद्ध झेले हैं. उन में भी लाखों लोग मारे गए. बंगलादेश की आजादी की लड़ाई में 20 लाख बेगुनाह लोगों की हत्याएं हुईं. क्या यह मान लिया जाए कि सब की किस्मत

खराब थी?

‘‘उन में से हजारों तो भगवान पर भरोसा करने वाले भी होंगे, लेकिन कोई भगवान या खुदा उन्हें बचाने नहीं आया. इसलिए इन बातों को भूल जाओ. ये बातें सिर्फ कहने और सुनने में अच्छी लगती हैं. मैं सिर्फ 25 हजार रुपए लूंगा और बड़ी सफाई से तुम्हारे बूढ़े पति को रास्ते से हटा दूंगा.’’

अभिषेक की बातें सुन कर रत्ना चीख पड़ी, ‘‘चले जाओ यहां से. दोबारा अपना मुंह मत दिखाना. तुम ने यह कैसे सोच लिया कि मैं इतनी नीचता पर उतर आऊंगी?’’

‘‘अभी जाता हूं, लेकिन 2 दिन के बाद फिर आऊंगा. शायद तब तक मेरी बात तुम्हारी समझ में आ जाए,’’ इतना कह कर अभिषेक लौट गया.

रत्ना अपने बैडरूम में जा कर फफकफफक कर रोने लगी. अभिषेक ने जोकुछ कहा था, वह बिलकुल सही था.

रत्ना को ताज्जुब हो रहा था कि वह उस के बारे में इतनी सारी बातें कैसे जानता था. हो सकता है कि उस का कोई दोस्त रत्ना के कालेज में पढ़ता रहा हो, क्योंकि वह तो रत्ना के साथ कालेज में था नहीं. वह उस की कालोनी में भी नहीं रहता था.

रत्ना के पति बीमारी के पहले रोज सुबह टहलने जाया करते थे. हो सकता है कि अभिषेक भी उन के साथ टहलने जाता रहा हो. वहीं उस का उस के पति से परिचय हुआ हो और उन्होंने ही ये सारी बातें उसे बता दी हों. उस के लिए अभिषेक इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाना चाहता है. आखिर यह तो एक तरह की हत्या ही हुई. बात खुल भी सकती है. कहीं अभिषेक का यह पेशा तो नहीं है? बेमेल शादी केवल उसी की तो नहीं हुई है. इस तरह के बहुत सारे मामले हैं. अभिषेक के चेहरे से तो ऐसा नहीं लगता कि वह अपराधी किस्म का आदमी है. कहीं उस के दिल में उस के लिए प्यार तो नहीं पैदा हो गया है.

रत्ना को किसी भी तरह के सुख की कमी नहीं थी. प्रोफैसर साहब अच्छीखासी तनख्वाह पाते थे. उस के लिए काफीकुछ कर रखा था. 5 कमरों का मकान, 3 लाख के जेवर, 5 लाख बैंक बैलेंस, सबकुछ उस के हाथ में था. 50 हजार रुपए सालाना तो प्रोफैसर साहब की किताबों की रौयल्टी आती थी. इन सब बातों के बावजूद रत्ना को जिस्मानी सुख कभी नहीं मिल सका. प्रोफैसर साहब की पहली बीवी बिना किसी बालबच्चे के मरी थी. रत्ना को भी कोई बच्चा नहीं था. कसबाई माहौल में पलीबढ़ी रत्ना पति को मारने का कलंक अपने सिर लेने की हिम्मत नहीं कर सकती थी.

रत्ना ने अभिषेक से चले जाने के लिए कह तो दिया था, लेकिन बाद में उसे लगने लगा था कि उस की बात को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता था. रत्ना अपनेआप को तोलने लगी थी कि 2 दिन के बाद अभिषेक आएगा, तो वह उस को क्या जवाब देगी. इस योजना में शामिल होने की उस की हिम्मत नहीं हो पा रही थी.

अभिषेक अपने वादे के मुताबिक 2 दिन बाद आया. इस बार रत्ना उसे चले जाने को नहीं कह सकी. उस की आवाज में पहले वाली कठोरता भी नहीं थी. रत्ना को देखते ही अभिषेक मुसकराया, ‘‘हां बताओ, तुम ने क्या सोचा?’’

‘‘कहीं बात खुल गई तो…’’

‘‘वह सब मेरे ऊपर छोड़ दो. मैं सारी बातें इतनी खूबसूरती के साथ करूंगा कि किसी को भी पता नहीं चलेगा. हां, इस काम के लिए 10 हजार रुपए बतौर पेशगी देनी होगी. यह मत समझो कि यह मेरा पेशा है. मैं यह सब तुम्हारे लिए करूंगा.’’

‘‘मेरे लिए क्यों?’’

‘‘सही बात यह है कि मैं तुम्हें  पिछले 15 साल से जानता हूं. तुम्हारे पिता ने मुझे प्राइमरी स्कूल में पढ़ाया था. मैं जानता हूं कि किन मजबूरियों में गुरुजी ने तुम्हारी शादी इस बूढ़े प्रोफैसर से की थी.’’

‘‘मेरी इज्जत तो इन्हीं की वजह से है. इन के न रहने पर तो मैं बिलकुल अकेली हो जाऊंगी.’’

‘‘जब से तुम्हारी शादी हुई है, तभी से तुम अकेली हो गई रत्ना, और आज तक अकेली हो.’’

‘‘मुझे भीतर से बहुत डर लग रहा है.’’

‘‘तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है. अगर भेद खुल भी जाता है, तो मैं सबकुछ अपने ऊपर ले लूंगा, तुम्हारा नाम कहीं भी नहीं आने पाएगा. मैं तुम्हें सुखी देखना चाहता हूं रत्ना. मेरा और कोई दूसरा मकसद नहीं है.’’

‘‘तो ठीक है, तुम्हें पेशगी के रुपए मिल जाएंगे,’’ कह कर रत्ना भीतर गई और 10 हजार रुपए की एक गड्डी ला कर अभिषेक के हाथों पर रख दी. रुपए ले कर अभिषेक वापस लौट गया.

तय समय पर रत्ना के पति को नर्सिंग होम में भरती करवा दिया गया. सभी तरह की जांच होने के बाद प्रोफैसर साहब का आपरेशन किया गया, जो पूरी तरह से कामयाब रहा. बाद में उन्हें खून चढ़ाया जाना था. अभिषेक सर्जन राजेश की पूरी मदद करता रहा. डाक्टर साहब आपरेशन के बाद अपने बंगले पर चले गए थे. खून चढ़ाने वगैरह की सारी जिम्मेदारी अभिषेक पर थी. सारा इंतजाम कर के अभिषेक अपनी जगह पर आ कर बैठ गया था. रत्ना भी पास ही कुरसी पर बैठी हुई थी. अभिषेक ने उसे आराम करने को कह दिया था.

रत्ना ने आंखें मूंद ली थीं, पर उस के भीतर उथलपुथल मची हुई थी. उस का दिमाग तेजी से काम कर रहा था. दिमाग में अनेकअनेक तरह के विचार पैदा हो रहे थे. अभिषेक ड्रिप में बूंदबूंद गिर कर प्रोफैसर के शरीर में जाते हुए खून को देख रहा था. अचानक वह उठा. अब तक रात काफी गहरी हो गई थी. वह मरीज के पास आया और ड्रिप से शरीर में जाते हुए खून को तेज करना चाहा, ताकि प्रोफैसर का कमजोर दिल उसे बरदाश्त न कर सके. तभी अचानक रत्ना झटके से अपनी सीट से उठी और उस ने अभिषेक को वैसा करने से रोक दिया.

वह उसे ले कर एकांत में गई और फुसफुसा कर कहा, ‘‘तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे, रुपए भले ही अपने पास रख लो. मैं अपने पति को मौत के पहले मरते नहीं देख सकती. जैसे इतने साल उन के साथ गुजारे हैं, बाकी समय भी गुजर जाएगा.’’ अभिषेक ने उस की आंखों में झांका. थोड़ी देर तक वह चुप रहा, फिर बोला, ‘‘तुम बड़ी कमजोर हो रत्ना. तुम जैसी औरतों की यही कमजोरी है. जिंदगीभर घुटघुट कर मरती रहेंगी, पर उस से उबरने का कोई उपाय नहीं करेंगी. खैर, जैसी तुम्हारी मरजी,’’ इतना कह कर अभिषेक ने पेशगी के रुपए उसे वापस कर दिए. इस के बाद वह आगे कहने लगा, ‘‘जिस बात को मैं ने इतने सालों से छिपा रखा था, आज उसे साफसाफ कहना पड़ रहा है.

‘‘रत्ना, जिस दिन मैं ने तुम्हें देखा था, उसी दिन से तुम्हें ले कर मेरे दिल में प्यार फूट पड़ा था, जो आज बढ़तेबढ़ते यहां तक पहुंच गया है. ‘‘इस बात को मैं कभी तुम से कह नहीं पाया. प्यार शादी में ही बदल जाए, ऐसा मैं ने कभी नहीं माना.

‘‘मैं उम्मीद में था कि तुम अपनी बेमेल शादी के खिलाफ एक न एक दिन बगावत करोगी. मेरी भावनाओं को खुदबखुद समझ जाओगी या मैं ही हिम्मत कर के तुम से अपनी बात कह दूंगा.

‘‘इसी जद्दोजेहद में मैं ने 15 साल गुजार दिए. आज तक मैं तुम्हारा ही इंतजार करता रहा. जब बरदाश्त की हद हो गई, तब मौका पा कर तुम्हारे पति को खत्म करने की योजना बना डाली. रुपए की बात मैं ने बीच में इसलिए रखी थी कि तुम मेरी भावनाओं को समझ न सको.

‘‘तुम ने इस घिनौने काम में मेरी मदद न कर मुझे एक अपराध से बचा लिया. वैसे, मैं तुम्हारे लिए जेल भी जाने को तैयार था, फांसी का फंदा भी चूमने को तैयार था.

‘‘मैं तुम्हें तिलतिल मरते हुए नहीं देख सकता था रत्ना, इसलिए मैं ने इतना बड़ा कदम उठाने का फैसला लिया था.’’

अपनी बात कह कर अभिषेक ने चुप्पी साध ली. रत्ना उसे एकटक देखती रह गई.

Top 15 bedtime stories for adults in Hindi एडल्ट बेडटाइम स्टोरी हिन्दी में

Top 15 bedtime stories for adults in Hindi. आज हम आपके लिए लेकर आए है कुछ ऐसी स्टोरी जिन्हे आप सोते समय पढ़कर कहानियों को लुत्फ उठा पाएंगे. इन कहानियों से जुड़कर आप कई नई जानकारियां भी हासिल कर पाएंगे साथ ही इन कहानियों से खुद को जोड़ पाएंगे. तो पढ़े  Hindi adults bedtime stories.

1. कुंआरी ख्वाहिशें-भाग 1 : हवस के चक्रव्यूह में फंसी गीता

‘‘गीता, ओ गीता. कहां है यार, मैं लेट हो रहा हूं औफिस के लिए. जल्दी चल… तुझे कालेज छोड़ने के चक्कर में मैं रोज लेट हो जाता हूं.’’

‘‘आ रही हूं भाई, तैयार तो होने दो, कितनी आफत मचा कर रखते हो हर रोज सुबह…’’

‘‘और तू… मैं हर रोज तेरी वजह से लेट हो जाता हूं. पता नहीं, क्या लीपापोती करती रहती है. भूतनी बन जाती है.’’

इतने में गीता तैयार हो कर कमरे से बाहर आई, ‘‘देखो न मां, आप की परी जैसी बेटी को एक लंगूर भूतनी कह रहा है… आप ने भी न मां, क्या मेरे गले में मुसीबत डाल दी है. मैं अपनेआप कालेज नहीं जा सकती क्या? मैं अब छोटी बच्ची नहीं हूं, जो मुझे हर वक्त सहारे की जरूरत पड़े.’’

मां ने कहा, ‘‘तू तो मेरी परी है. यह जब तक तेरे साथ न लड़े, इसे खाना हजम नहीं होता. और अब तू बड़ी हो गई है, इसलिए तुझे सहारे की जरूरत है. जमाना बहुत खराब है बच्चे, इसलिए तो कालेज जाते हुए तुझे भाई छोड़ता जाता है और वापसी में पापा लेने आते हैं. अब जा जल्दी से, भाई कब से तेरा इंतजार कर रहा है.’’

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2. अधूरी प्यास – भाग 1: नव्या पर लगा हवस का चसका bedtime adult story

चढ़ती हुई बेल… कैसी दीवानी होती है… नयानया जोबन, अल्हड़पन, बदहवास सी, बस अपनी मस्ती में सरसराती हुई छुईमुई सी हिलोरें लेती है… जिस का सहारा मिल गया, उसी से लिपट जाती है.ऐसा ही तो नव्या के साथ हो रहा था. अभीअभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था मानो एक नशा सा चढ़ने लगा था. एक खुमारी सी…

आईने में खुद को कईकई बार देखना, उभरते अंगों को देख कर मुसकराना और अकेले में उभारों को हलके से छूना और मस्त हो जाना. नहीं संभाल पा रही थी वह अपनी भावनाओं को, अब तो बस वह समा जाना चाहती थी किसी की मजबूत बांहों में, जहां उस के हर अंग पर पा सके वह किसी का चुंबन और सैक्स की गहराई का मजा ले सके.‘‘नव्या, यह क्या तू हर समय आईने के सामने खड़ी रहती है… स्कूल नहीं जाना है क्या? इम्तिहान सिर पर हैं…’’

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3. नाइट फ्लाइट :ऋचा से बात करने में क्यों कतरा रहा था यशbedtime story for adult

मुंबई का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा. अभी शाम के 5 भी  नहीं बजे थे. यश की फ्लाइट रात के 8 बजे की थी. वह लंबी यात्रा में किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता था. सो, एयरपोर्ट जल्दी ही आ गया था. उस ने टैक्सी से अपना सामान उतार कर ट्रौली पर रखा. हवाईअड्डे पर काफी भीड़ थी. वह मन ही मन सोच रहा था, आजकल हवाई यात्रा करने वालों की कमी नहीं है. यश ने अपना पासपोर्ट और टिकट दिखा कर अंदर प्रवेश किया.

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4. हुस्न का बदला : कहानी शीला के जज्बात कीbedtime story for adult

शीला की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या न करे. पिछले एक महीने से वह परेशान थी. कालेज बंद होने वाले थे. प्रदीप सैमेस्टर का इम्तिहान देने के बाद यह कह कर गया था, ‘मैं तुम्हें पैसों का इंतजाम कर के 1-2 दिन बाद दे दूंगा. तुम निश्चिंत रहो. घबराने की कोई बात नहीं.’

‘पर है कहां वह?’ यह सवाल शीला को परेशान कर रहा था. उस की और प्रदीप की पहचान को अभी सालभर भी नहीं हुआ था कि उस ने उस से शादी का वादा कर उस के साथ… ‘शीला, तुम आज भी मेरी हो, कल भी मेरी रहोगी. मुझ से डरने की क्या जरूरत है? क्या मुझ पर तुम्हें भरोसा नहीं है?’ प्रदीप ने ऐसा कहा था.

‘तुम पर तो मुझे पूरा भरोसा है प्रदीप,’ शीला ने जवाब दिया था.

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5. तेरी देहरी : जब अनुभा ने पार की हदbedtime adult story

क्लासरूम से बाहर निकलते ही अनुभा ने अनुभव से कहा, ‘‘अरे अनुभव, कैमिस्ट्री मेरी समझ में नहीं आ रही है. क्या तुम मेरे कमरे पर आ कर मुझे समझा सकते हो?’’

‘‘हां, लेकिन छुट्टी के दिन ही आ पाऊंगा.’’

‘‘ठीक है. तुम मेरा मोबाइल नंबर ले लो और अपना नंबर दे दो. मैं इस रविवार को तुम्हारा इंतजार करूंगी. मेरा कमरा नीलम टौकीज के पास ही है. वहां पहुंच कर मुझे फोन कर देना. मैं तुम्हें ले लूंगी.’’

रविवार को अनुभव अनुभा के घर में पहुंचा. अनुभा ने बताया कि उस के साथ एक लड़की और रहती है. वह कंप्यूटर का कोर्स कर रही है. अभी वह अपने गांव गई है.

अनुभव ने अनुभा से कहा कि वह कैमिस्ट्री की किताब निकाले और जो समझ में न आया है वह पूछ ले. अनुभा ने किताब निकाली और बहुत देर तक दोनों सूत्र हल करते रहे.

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6. प्यार असफल है तुम नहींBedtime adult story

एक हार्ट केयर हौस्पिटल के शुभारंभ का आमंत्रण कार्ड कोरियर से आया था. मानसी ने पढ़ कर उसे काव्य के हाथ में दे दिया. काव्य ने उसे पढना शुरू किया और अतीत में खोता चला गया…

उस ने रक्षित का दरवाजा खटखटाया. वह उस का बचपन का दोस्त था. बाद में दोनों कालेज अलगअलग होने के कारण बहुत ही मुश्किल से मिलते थे. काव्य इंजीनियरिंग कर रहा था और रक्षित डाक्टरी की पढ़ाई. आज काव्य अपने मामा के यहां शादी में अहमदाबाद आया हुआ था, तो सोचा कि अपने खास दोस्त रक्षित से मिल लूं, क्योंकि शादी का फंक्शन शाम को होना था. अभी दोपहर के 3-4 घंटे दोस्त के साथ गुजार लूं. जीभर कर मस्ती करेंगे और ढेर सारी बातें करेंगे. वह रक्षित को सरप्राइज देना चाहता था.

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7. अकेलापन: क्यों दर्द झेल रही थी सरोजbedtime adult story

राजेश पिछले शनिवार को अपने घर गए थे लेकिन तेज बुखार के कारण वह सोमवार को वापस नहीं लौटे. आज का पूरा दिन उन्होंने मेरे साथ गुजारने का वादा किया था. अपने जन्मदिन पर उन से न मिल कर मेरा मन सचमुच बहुत दुखी होता.

राजेश को अपने प्रेमी के रूप में स्वीकार किए मुझे करीब 2 साल बीत चुके हैं. उन के दोनों बेटों सोनू और मोनू व पत्नी सरोज से आज मैं पहली बार मिलूंगी.

राजेश के घर जाने से एक दिन पहले हमारे बीच जो वार्तालाप हुआ था वह रास्ते भर मेरे जेहन में गूंजता रहा.

‘मैं शादी कर के घर बसाना चाहती हूं…मां बनना चाहती हूं,’ उन की बांहों के घेरे में कैद होने के बाद मैं ने भावुक स्वर में अपने दिल की इच्छा उन से जाहिर की थी.

‘कोई उपयुक्त साथी ढूंढ़ लिया है?’ उन्होंने मुझे शरारती अंदाज में मुसकराते हुए छेड़ा.

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8. मेरी डोर कोई खींचे : रचना की कहानीbedtime adult story

ट्रक से सामान उतरवातेउतरवाते रचना थक कर चूर हो गई थी. यों तो यह पैकर्स वालों की जिम्मेदारी थी, फिर भी अपने जीवनभर की बसीबसाई गृहस्थी को यों एक ट्रक में समाते देखना और फिर भागते हुए ट्रक में उस का हिचकोले लेना, यह सब झेलना भी कोईर् कम धैर्य का काम नहीं था. उस का मन तब तक ट्रक में ही अटका रहा था जब तक वह सहीसलामत अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच गया था. खैर, रचना के लिए यह कोई नया तजरबा नहीं था. तबादले का दंश तो वह अपने पिता के साथ बचपन से ही झेलती आ रही थी. हां, इसे दंश कहना ही उचित होगा क्योंकि इस की तकलीफ तो वही जानता है जो इसे भुगतता है. रचना को यह बिलकुल पसंद नहीं था क्योंकि स्थानांतरण से होने वाले दुष्परिणामों से वह भलीभांति परिचित थी.

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9. अनकहा प्यार: एक दूजे के लिएbedtime adult story

मुक्ता और महत्त्व की मुलाकात औफिस जाने के दौरान एक बस में हुई थी, फिर उन का मेलजोल बढ़ने लगा. एक दिन तेज बारिश के समय महत्त्व ने मुक्ता को औफिस न जाने को कहा और अपनी बाइक पर उसे घुमाने ले गया. आगे क्या हुआ? कालेकाले बादलों ने आसमान में डेरा डाल दिया. मुक्ता तेजी से लौन की तरफ दौड़ी सूखे हुए कपड़ों को हटाने के लिए. बूंदों ने झमाझम बरसना शुरू कर दिया.

कपड़े उतारतेउतारते मुक्ता काफी भीग चुकी थी. अंदर आते ही उस ने छींकना शुरू कर दिया.

मां बड़बड़ाते हुए बोलीं, ‘‘मुक्ता, मैं ने तुझ से कितनी बार कहा है कि भीगा मत कर, लेकिन तू मानती ही नहीं.’’ मुक्ता ने शांत भाव से कहा, ‘‘मां, आप सो रही थीं, इसलिए मैं खुद ही चली गई. मां, अगर आप जातीं, तो आप भी तो भीग जातीं न.’’ मां दुलारते हुए बोलीं, ‘‘मेरी बेटी मां को इतना प्यार करती है…’’

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10. सबसे हसीन वह: भाग 1bedtime adult story

इन दिनों अनुजा की स्थिति ‘कहां फंस गई मैं’ वाली थी. कहीं ऐसा भी होता है भला? वह अपनेआप में कसमसा रही थी.

ऊपर से बर्फ का ढेला बनी बैठी थी और भीतर उस के ज्वालामुखी दहक रहा था. ‘क्या मेरे मातापिता तब अंधेबहरे थे? क्या वे इतने निष्ठुर हैं? अगर नहीं, तो बिना परखे ऐसे लड़के से क्यों बांध दिया मु झे जो किसी अन्य की खातिर मु झे छोड़ भागा है, जाने कहां? अभी तो अपनी सुहागरात तक भी नहीं हुई है. जाने कहां भटक रहा होगा. फिर, पता नहीं वह लौटेगा भी या नहीं.’

उस की विचारशृंखला में इसी तरह के सैकड़ों सवाल उमड़तेघुमड़ते रहे थे. और वह इन सवालों को  झेल भी रही थी.  झेल क्या रही थी, तड़प रही थी वह तो.

लेकिन जब उसे उस के घर से भाग जाने के कारण की जानकारी हुई, झटका लगा था उसे. उस की बाट जोहने में 15 दिन कब निकल गए. क्या बीती होगी उस पर, कोई तो पूछे उस से आ कर.

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11. ऊंच नीच की दीवार : दिनेश और सरिता की रिजर्व्ड लवस्टोरीbedtime adult story

‘‘बाबूजी…’’

‘‘क्या बात है सुभाष?’’

‘‘दिनेश उस दलित लड़की से शादी कर रहा है,’’ सुभाष ने धीरे से कहा.

‘‘क्या कहा, दिनेश उसी दलित लड़की से शादी कर रहा है…’’ पिता भवानीराम गुस्से से आगबबूला हो उठे.

वे आगे बोले, ‘‘हमारे समाज में क्या लड़कियों की कमी है, जो वह एक दलित लड़की से शादी करने पर तुला है? अब मेरी समझ में आया कि उसे नौकरी वाली लड़की क्यों चाहिए थी.’’

‘‘यह भी सुना है कि वह दलित परिवार बहुत पैसे वाला है,’’ सुभाष ने जब यह बात कही, तब भवानीराम कुछ सोच कर बोले, ‘‘पैसे वाला हुआ तो क्या हुआ? क्या दिनेश उस के पैसे से शादी कर रहा है? कौन है वह लड़की?’’

‘‘उसी के स्कूल की कोई सरिता है?’’ सुभाष ने जवाब दिया.

‘‘देखो सुभाष, तुम अपने छोटे भाई दिनेश को समझाओ.’’

‘‘बाबूजी, मैं तो समझा चुका हूं, मगर वह तो उसी के साथ शादी करने का मन बना चुका है,’’ सुभाष ने जब यह बात कही, तब भवानीराम सोच में पड़ गए. वे दिनेश को शादी करने से कैसे रोकें? चूंकि उन के लिए यह जाति की लड़ाई है और इस लड़ाई में उन का अहं आड़े आ रहा है.

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12. मर्यादा- स्वाति को फ्लर्टिंग करना क्यों अच्छा लगता थाBedtime adult story

रात के 12 बज रहे थे, लेकिन स्वाति की आंखों में नींद नहीं थी. वह करवटें बदल रही थी. उस की बगल में लेटा पति वरुण गहरी नींद में खर्राटे भर रहा था. स्वाति दिन भर की थकान के बाद भी सो नहीं पा रही थी. आज का घटनाक्रम बारबार उस की आंखों में घूम रहा था. आज ऐसा कुछ हुआ कि वह कांप कर रह गई. जिसे वह सिर्फ खेल समझती थी वह कितना गंभीर हो सकता है, उसे इस बात का भान नहीं था. वह मर्दों से हलकाफुलका मजाक और फ्लर्टिंग को सामान्य बात समझती थी. स्वाति अपनी फ्रैंड्स और रिश्तेदारों से कहती थी कि उस की मार्केट में इतनी जानपहचान है कि कोई भी सामान उसे स्पैशल डिस्काउंट पर मिलता है.

13. छल: आशिक की मारी रोमाbedtime adult story

रोमा सारे घरों का काम जल्दीजल्दी निबटा कर तेज कदमों से भाग ही रही थी कि वनिता ने आवाज लगाई, ‘‘अरी ओ रोमा… नाश्ता तो करती जा. मैं ने तेरे लिए ही निकाल कर रखा है.’’‘‘रख दीजिए बीबीजी, मैं शाम को आ कर खा लूंगी. अभी बहुत जरूरी काम से जा रही हूं,’’ कहते हुए रोमा सरपट दौड़ गई. रोमा यहां सोसाइटी के कुछ घरों में झाड़ूपोंछा, बरतन, साफसफाई का काम करती थी. इस समय वह इतनी तेजी से अपने प्रेमी रौनी से मिलने जा रही थी. रौनी बगल वाली सोसाइटी में मिस्टर मेहरा के यहां ड्राइवर था.

पिछले 2 साल से रोमा और रौनी में गहरी जानपहचान हो गई थी. वे दोनों अगलबगल की सोसाइटी में काम करते थे और एक दिन आतेजाते उन की निगाहें टकरा गईं. फिर देखते ही देखते उन के बीच प्यार की शहनाई बज उठी.जवानी की दहलीज पर अभीअभी कदम रखने वाली रोमा पूर्णमासी के चांद की तरह बेहद ही खूबसूरत और मादक लगती थी.

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14. पराकाष्ठा- भाग 1: एक विज्ञापन ने कैसे बदली साक्षी की जिंदगीbedtime adult story

आज भी मुखपृष्ठ की सुर्खियों पर नजर दौड़ाने के पश्चात वह भीतरी पृष्ठों को देखने लगी. लघु विज्ञापन तथा वर/वधू चाहिए, पढ़ने में साक्षी को सदा से ही आनंद आता है.

कालिज के जमाने में वह ऐसे विज्ञापन पढ़ने के बाद अखबार में से उन्हें काट कर अपनी सहेलियों को दिखाती थी और हंसीठट्ठा करती थी.

शहर के समाचार देखने के बाद साक्षी की नजर वैवाहिक विज्ञापन पर पड़ी जिसे बाक्स में मोटे अक्षरों के साथ प्रकाशित किया गया था, ‘30 वर्षीय नौकरीपेशा, तलाकशुदा, 1 वर्षीय बेटे के पिता के लिए आवश्यकता है सुघड़, सुशील, पढ़ीलिखी कन्या की. गृहकार्य में दक्ष, पति की भावनाओं, संवेदनाओं के प्रति आदर रखने वाली, समझौतावादी व उदार दृष्टिकोण वाली को प्राथमिकता. शीघ्र संपर्र्ककरें…’

साक्षी के पूरे शरीर में झुरझुरी सी होने लगी, ‘कहीं यह विज्ञापन सुदीप ने ही तो नहीं दिया? मजमून पढ़ कर तो यही लगता है. लेकिन वह तलाकशुदा कहां है? अभी तो उन के बीच तलाक हुआ ही नहीं है. हां, तलाक की बात 2-4 बार उठी जरूर है.

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15. वे तीन शब्द: क्या आरोही को अपना हमसफर बना पाया आदित्य ?bedtime adult story

दीवाली की उस रात कुछ ऐसा हुआ कि जितना शोर घर के बाहर मच रहा था उतना ही शोर मेरे मन में भी मच रहा था. मुझे आज खुद पर यकीन नहीं हो रहा था. क्या मैं वही आदित्य हूं, जो कल था… कल तक सब ठीक था… फिर आज क्यों मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था… आज मैं अपनी ही नजरों में गुनाहगार हो गया था. किसी ने सही कहा है, ‘आप दूसरे की नजर में दोषी हो कर जी सकते हैं, लेकिन अपनी नजर में गिर कर कभी नहीं जी सकते.’

मुझे आज भी आरोही से उतना ही प्यार था जितना कल था, लेकिन मैं ने फिर भी उस का दिल तोड़ दिया. मैं आज बहुत बड़ी कशमकश में गुजर रहा हूं.

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हुस्न के जाल में फंसा कर युवती ने ऐंठ लिए लाखों रूपए

Lovecrime मध्य प्रदेश की बहुचर्चित हनी ट्रैप का मामला अभी शांत भी नहीं पङा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़े कारोबारी को अपने हुस्न के जाल में फांस कर लाखों रूपए की ठगी करने वाली एक युवती को पुलिस ने गिरफ्तार कर सनसनी फैला दी है.

पुलिस ने युवती के पास से लाखों रूपए कैश और एक महंगी लग्जरी कार बरामद की है.

ऐशोआराम की जिंदगी जीने की चाहत रखने वाली इस युवती ने रायपुर के एक बड़े हार्डवेयर कारोबारी से पहले तो फेसबुक पर दोस्ती की और बाद में शारीरिक संबंध बना कर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.

खतरनाक इरादे

पुलिस के अनुसार ललिता (बदला हुआ नाम) ने छत्तीसगढ़ के बड़े हार्डवेयर कारोबारी, जो शादीशुदा था को अपने जाल फंसाने के लिए फेसबुक पर दोस्ती की, मोबाइल नंबर दिए और व्हाट्सऐप पर चैटिंग शुरू कर दी। युवती ने खुद को मैडिकल स्टूडैंट बताया और गाढ़ी दोस्ती कर ली जबकि युवती डैंटल कालेज की ड्रौप आउट स्टूडैंट थी.

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मैडिकल की पढाई छोङ जल्दी ही अमीर बनने और ऐशोआराम की जिंदगी जीने के लिए उस ने अपने बेपनाह खूबसूरती और हुस्न का जाल बिछाना शुरू कर दिया.

फिल्म देख कर इरादा बदला

मैडिकल की पढाई के दौरान युवती ने जब फिल्म ‘हेट स्टोरी’ देखी तो तभी उस ने अपने इरादों को खतरनाक बना लिया था.

उस ने कारोबारी आदमी से दोस्ती कर शारीरिक संबंध बनाए और हिडेन कैमरे से एमएमएस बना कर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और और धीरेधीरे 1 करोङ 35 लाख से अधिक रूपए ऐंठ लिए.

कारोबारी पैसे देने के लिए जब भी मना करता आरोपी युवती पुलिस में जाने की धमकी देती. युवती के इस अपराध में उस के 3 और दोस्त भी साथ देते थे.

बरबाद हो गया कारोबारी

अचानक से इतने बङी रकम देने के बाद कारोबारी की हालत पतली हो गई और धंधा चौपट होने लगा. वह युवती के सामने कई बार गिङगिङाया, छोङ देने के लिए  हाथपैर जोङे पर इतना पैसा लेने के बावजूद भी युवती ने अपना इरादा बदला नहीं, उलटे 50 लाख रूपए की और मांग कर डाली.

तंग आ कर कारोबारी ने रायपुर के पंडारी थाने में पुलिस को सब सचसच बता दिया और खुद को बरबाद होने से बचाने की गुहार लगाई.

पुलिस ने बिछाया जाल

बदहाली में डूबे कारोबारी से युवती ने 50 लाख रूपए मांगे तो वह देने को तैयार हो गया। इस पेमेंट को देने के लिए उस ने युवती को रेलवे क्रासिंग पर बुलाया, जहां पहले से ही सादी वरदी में पुलिस वाले तैयार थे.

युवती के आते ही पुलिस ने रंगेहाथ पैसे लेते उसे धर दबोचा और न्यायालय में पेश किया, जहां न्यायालय ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.

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पुलिस अब युवती के इस अपराध में साथ देने वाले उन 3 कथित बौयफ्रैंड को भी ढूंढ़ रही है.

बुरी बला है अधिक लालच

सुनियोजित अपराध में कामयाब होने और लाखों रूपए ऐंठने के बाद युवती महंगी चीजों को खरीदने और महंगे होटलों में रहने का आदी हो गई थी.

वह पेशेवर अपराधी की तरह कारोबारी से पेश आने लगी थी. मगर एक बङी गलती उसे पुलिस के हत्थे चढ़ने से बचा न सकी. गलती थी हद से अधिक लालच और महिला शरीर का गलत इस्तेमाल.

वह जानती थी कि वह एक औरत है और भारतीय कानून और समाज पहले एक औरत की सुनते हैं. इसी का फायदा उठा कर उस ने उस कारोबारी से करोङ से अधिक रूपए वसूल लिए पर कहते हैं न कि ‘लालच बुरी बला है’ और इसी लालच की वजह से अब वह जेल की सलाखों के पीछे न जाने कब तक रहेगी.

आप भी सतर्क रहें

फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया पर ठगी के मामले बढते जा रहे हैं और इस में सब से अधिक हनी ट्रैप से सतर्क रहने की जरूरत है.

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इसलिए बेहतर तो यही है कि सोशल मीडिया पर न तो अधिक भरोसा करें और न ही किसी अनजान महिला/पुरूष से दोस्ती ही.

एक लाइक या एक क्लिक कब आप की जिंदगी को बदल कर आप को बदनाम और बदहाली की कगार पर ला खङा करेगा कुछ कहा नहीं जा सकता. एक छोटी सी गलती आप का भरापूरा परिवार और हंसतीखेलती जिंदगी को तबाह न कर पाए इस के लिए पहले से ही सावधान रहें, सतर्क रहें.

कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां

महिला सिपाही का प्यार क्या कभी पूरा हो पाया

महिला सिपाही की खून से लथपथ लाश फर्श पर पड़ी थी. किसी ने बिस्तर से चादर उठा कर लाश के ऊपर डाल दी थी. पते की बात यह थी कि उस का पति कमरे या आसपास कहीं नजर नहीं आ रहा था.

बिस्तर पर महिला सिपाही की वरदी और एक बैग पड़ा हुआ था. नीचे फर्श पर एक मीटर के इर्दगिर्द में सिंदूर बिखरा पड़ा था. वरदी पर लगी नेमप्लेट से मृतका का नाम शोभा कुमारी पता चला. और तो और वरदी के पास ही 2 कट्टे (तमंचे) पड़े थे, जबकि नीचे फर्श पर एक कारतूस का खोखा पड़ा था.

पुलिस ने इसी से अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इसी कट्टे से गोली मार कर इस की हत्या की होगी. पुलिस ने दोनों कट्टे और फायरशुदा खोखा अपने कब्जे में ले लिया.

20 अक्तूबर, 2023 की सुबह के 10 बज रहे थे. पटना में स्टेशन रोड पर स्थित होटल मीनाक्षी के कमरा नंबर-305 के मुसाफिर संजय कुमार अपना कमरा चेकआउट करने के लिए तैयार थे.

उन्होंने रिसैप्शन पर फोन कर के मैनेजर को बता दिया था कि एक बार आ कर वह कमरा चैक कर लें, वह रूम छोड़ रहे हैं. मैनेजर विकास ने कहा कि परेशान न हों, मैं अपने कर्मचारी को कमरे में भेज रहा हूं. वह चैक कर लेगा. फिलहाल थोड़ी देर के लिए कमरे से कहीं जाइएगा मत.

कुछ देर बाद कुछ सोच कर मैनेजर विकास कुमार किसी और को न भेज कर खुद ही कमरा चैकआउट करने तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर-305 की ओर लिफ्ट में सवार हो कर पहुंचा, जहां लिफ्ट थी. वहां से कमरा नंबर-305 करीब 5 मीटर दूर पश्चिम की ओर था. वहां गैलरी से हो कर जाना होता था. उस गैलरी से हो कर मैनेजर जब आगे बढ़ा तो देखा कमरा नंबर-303 का दरवाजा अधखुला था.

भीतर कोई हलचल होती न देख कर मैनेजर विकास कुमार को कुछ शक हुआ तो वह कमरे में दाखिल हुआ. कमरे में महिला सिपाही की नग्नावस्था में खून से सनी लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. उस की वरदी बिस्तर पर पड़ी थी.

होटल मीनाक्षी स्टेशन रोड स्थित कोतवाली थाने में पड़ता है. मैनेजर विकास ने फोन कर के घटना की सूचना कोतवाली थाने के इंसपेक्टर कौशलेंद्र सिंह को दे दी थी. घटना की सूचना मिलते ही वह आननफानन में कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पहुंच कर इंसपेक्टर सिंह ने सब से पहले कमरे का मुआयना किया.

किस ने की सिपाही की हत्या

पता चला कि कमरा 19 अक्तूबर को किसी गजेंद्र कुमार यादव ने अपने और अपनी पत्नी शोभा कुमारी के नाम पर बुक कराया था, जो जहानाबाद जिले के काको थानाक्षेत्र के दमुआ गांव का निवासी था.

इस के बाद इंसपेक्टर सिंह ने जिले के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी दे दी थी. घटना की सूचना पा कर एसपी (सिटी) वैभव शर्मा, डीएसपी (कानून व्यवस्था) कृष्ण मुरारी प्रसाद मौके पर पहुंच गए थे. मौके से मृतका का पति गजेंद्र फरार था. इस से यही अनुमान लगाया जा रहा था कि घटना को अंजाम देने में उसी का हाथ होगा.

पुलिस ने काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवा दिया और अज्ञात हत्यारे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और गजेंद्र की तलाश के लिए एक पुलिस टीम गठित कर के जहानाबाद भेज दी. खोजबीन करती हुई पटना पुलिस 22 अक्तूबर, 2023 को काको थाने पहुंची. काको थानेदार अजीत कुमार के साथ आरोपी गजेंद्र के घर दमुआ में दबिश दी. गजेंद्र घर पर नहीं मिला.

बताते चलें कि गजेंद्र यादव के पिता रामाशीष यादव पहले गांव के चौकीदार थे. उन को कैंसर हो गया था. वे ज्यादातर बेडरेस्ट पर रहते थे.

रामाशीष ने बताया, ”साहब, वह मेरे लिए कैंसर की दवा लेने के लिए 17 अक्तूबर को दिल्ली चला गया था और दवा ले कर 1-2 दिन में आ जाएगा.’

पुलिस ने बताया कि वह अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद फरार है. पुलिस द्वारा बहू की हत्या की जानकारी मिलते ही घर में कोहराम मच गया. घर में रोनाधोना शुरू हो गया.

पुलिस ने पकड़ी गजेंद्र की दुखती नस

फिलहाल गजेंद्र के न मिलने पर पटना पुलिस जहानाबाद से पटना खाली हाथ वापस लौट आई, लेकिन काको थाने को उस पर कड़ी नजर रखने को कह दिया.

करीब सप्ताह भर बाद यानी 28 अक्तूबर, 2023 को पुलिस ने कैंसर से पीडि़त पिता को हिरासत में ले लिया. पिता को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर ले जाने की सूचना किसी तरह गजेंद्र तक पहुंच गई तो उस ने 30 अक्तूबर, 2023 को जहानाबाद की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

आरोपी गजेंद्र के आत्मसमर्पण करने की सूचना मिलते ही पहली नवंबर, 2023 को पटना पुलिस टीम जहानाबाद के लिए रवाना हो गई और आरोपी गजेंद्र को अदालत के सामने पेश कर उसे ट्रांजिट रिमांड पर ले कर वहां से पटना के लिए वापस रवाना हो गई. 2 घंटे तक चली कड़ी पूछताछ में आरोपी गजेंद्र ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

 

पुलिस द्वारा पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस से यही पता चलता है कि शोभा ने अपने हाथों खुद ही अपनी बदनसीबी की दर्दनाक पटकथा लिखी थी, जो इस तरह थी—

इस तरह हुआ गजेंद्र को शोभा से प्यार

30 वर्षीय गजेंद्र यादव मूलरूप से बिहार के जहानाबाद जिले के काको थानाक्षेत्र के गांव दमुआ का रहने वाला था. अपने 2 भाइयों में गजेंद्र बड़ा था. जितना पढऩे में गजेंद्र अव्वल था, उतना ही अपने अच्छे व्यवहार से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में महारथी था.

अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उस ने घर से कुछ दूर कुर्था मोहल्ले में कोचिंग सेंटर खोल दिया. उस समय उस की उम्र 23-24 साल के आसपास रही होगी. उस का कोचिंग सेंटर चल निकला. बच्चों को वह मैथ और साइंस की कोचिंग देता था.

उस के कोचिंग सेंटर में मोहल्ले के अनेक लड़के लड़कियां कोचिंग के लिए आने लगे. शोभा भी गजेंद्र की कोचिंग सेंटर में आती थी. यह बात साल 2018 के आसपास की थी. उसी दौरान उसे शोभा से प्यार हो गया.

गजेंद्र जैसे प्रेमी को पा कर शोभा बहुत खुश थी और उस से शादी करने के लिए तैयार हो गई थी. एक दिन समय देख कर गजेंद्र ने अपने पिता से अपने और शोभा के रिश्ते की जानकारी दे कर शादी करने की अपनी इच्छा जाहिर की तो उन्होंने इजाजत दे दी. लेकिन उस के सामने एक शर्त यह रखी कि शादी के बाद पत्नी को ले कर यहां पुश्तैनी मकान में नहीं रहोगे.

गजेंद्र ने अपने प्यार को पाने के लिए पिता की इस शर्त पर अपनी स्वीकृति की मोहर लगा दी और शोभा से कोर्ट मैरिज कर के शहर में किराए का कमरा ले कर उस के साथ रहने लगा.

गजेंद्र का किस ने और क्यों किया अपहरण

गजेंद्र के पिता रामाशीष यादव की ऐसा करने के पीछे एक बड़ी और खास वजह थी. दरअसल, जब गजेंद्र 13 साल का था तो उस का अपहरण हो गया था. अपहरण एक लड़की के पिता ने किया था अपनी बेटी से शादी करने के लिए. बिहार में आज भी यह प्रचलन जारी है कि लोग अच्छे परिवार के लड़के का अपहरण कर अपनी बेटी के साथ जबरन उस की शादी कर देते हैं.

गजेंद्र की भी जबरन शादी करा दी गई थी. शादी कराने के बाद लड़की के घर वालों ने उसे उस के घर तक पहुंचा दिया था. समाज के रीतिरिवाजों को मानने वाले रामाशीष ने भी इस शादी पर मोहर लगा दी थी और लड़की को बहू का दरजा दे दिया था, जबकि गजेंद्र के दिल को इस घटना से ठेस पहुंची थी. उसे पत्नी नहीं स्वीकार किया था. इस से उस के पिता काफी नाराज रहते थे.

इस बात को ले कर बापबेटे के बीच काफी रस्साकशी भी चलती रही. बाद के दिनों में गजेंद्र और उस की पत्नी के बीच तलाक हो गया था. तलाक के बाद दोनों अलगअलग हो गए थे.

शोभा अतिमहत्त्वाकांक्षी युवती थी. गजेंद्र उस की महत्त्वाकांक्षाओं को अच्छी तरह पहचानता था. इसी बीच गजेंद्र एक बेटी का पिता बना. बेटी के आने से घर में खुशहाली आ गई.

उन दिनों बिहार में पुलिस की बड़ी पैमाने पर वैकेंसी निकली थी. गजेंद्र ने पत्नी शोभा को अप्लाई करा दिया. उस की मेहनत से बिहार पुलिस में वह भरती हो गई. इस के लिए गजेंद्र ने अपने हिस्से की 5 बीघा जमीन भी बेच दी थी. अपना कारोबार और अपना जीवन सब कुछ दांव पर लगा दिया था.

उस का सोचना था कि उस की भी प्राइवेट जौब है. अगर दोनों में से किसी एक की भी सरकारी नौकरी हो जाए तो जीवन सरल हो जाएगा. यही सोच कर उस ने पत्नी को नौकरी के लिए प्रेरित किया था.

शोभा की टे्रनिंग पटना में हो रही थी.  बेटी दादा दादी के पास रहती थी. उसे जब ट्रेनिंग से थोड़ा वक्त मिलता तो 1-2 दिन के लिए बेटी से मिलने जहानाबाद स्थित घर आ जाया करती थी या फिर गजेंद्र ही पत्नी से मिलने पटना चला जाया करता था.

 

ट्रेनिंग के दौरान ही शोभा को वहीं पर एसएसबी की तैयारी कर रहे धीरज से प्यार हो गया. यह घटना से करीब एक साल पहले की बात है. शोभा अपने परिवार के प्रति अति लापरवाह होती जा रही थी. शोभा की ये बातें पता नहीं क्यों गजेंद्र को अजीब लग रही थीं. वह सोचता कि ऐसी कौन सी मां होगी जो अपने बच्चे से मिलने तक के लिए वक्त नहीं निकाल सकती.

बात पहली जुलाई, 2023 की है. गजेंद्र किसी काम से पटना आया था. उस ने यह बात पत्नी को नहीं बताई थी. दोपहर के वक्त गजेंद्र ने देखा एक बाइक पर किसी युवक के साथ उस की पत्नी कहीं जा रही थी. जिस युवक के साथ वह जा रही थी, उस का न तो गजेंद्र के साथ कोई रिश्ता था और न ही वह उस कोई रिश्तेदार ही था. यह देख उस का माथा ठनक गया.

शोभा के इस कदम से गजेंद्र डिप्रेशन में चला गया और बुझाबुझा सा रहने लगा. गजेंद्र इस कदर डिप्रेशन में चला गया था कि खुद को अकेला समझने लगा था. गजेंद्र डिप्रेशन से बिलकुल टूट चुका था. अब उस में पत्नी की बेवफाई का दर्द सहने की क्षमता रह नहीं गई थी, इसलिए वह जल्द से जल्द किसी नतीजे पर पहुंच जाना चाहता था.

इसी बीच गजेंद्र ने एक खतरनाक फैसला ले लिया था कि अगर शोभा मेरी नहीं हुई तो उसे किसी और की भी नहीं होने देगा. उसे मरना ही होगा.

अक्तूबर के महीने में दुर्गा पूजा थी. टे्रनिंग के दौरान शोभा की ड्यूटी कोतवाली क्षेत्र में लगी थी. यह बात गजेंद्र को पता चल चुकी थी. 17 अक्तूबर, 2023 को गजेंद्र पिता के कैंसर की दवा लेने के लिए जहानाबाद से दिल्ली के लिए निकला, लेकिन दिल्ली जाने के बजाय वह पटना आ गया. बेटी को उस ने छोटे भाई की जिम्मेदारी पर छोड़ दिया था.

होटल में दोनों के बीच क्या हुआ

19 अक्तूबर को वह पटना आ गया. पटना में उस ने स्टेशन रोड पर मीनाक्षी होटल में एक कमरा पतिपत्नी के नाम बुक कराया. उसे ठहरने के लिए कमरा नंबर-303 मिला. उस के पास एक पिट्ठू बैग था. उस में एक जोड़ी कपड़ा रखे थे. उन्हीं कपड़ों के बीच लोडेड 2 देसी तमंचे रख लिए थे.

रात में जब वह घूमफिर कर होटल लौटा तो 9 बजे के करीब उस ने पत्नी शोभा को फोन किया और उस का हालचाल लिया. उस ने उस से कहा कि वह स्टेशन रोड के होटल में ठहरा हुआ है. थोड़ी ही देर के लिए होटल में आ जाए. पति के कई बार आग्रह पर शोभा ने सुबह मिलने के लिए कह दिया.

अगली सुबह 8 बजे शोभा होटल पहुंची. उस समय गजेंद्र पूरी तरह तैयार हो चुका था और बैग से दोनों तमंचे निकाल कर कमर में खोंस लिए थे. शोभा कमरे में जैसे ही घुसी उसे बिना सिंदूर के देख उस का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद छिड़ गया.

गजेंद्र अपने साथ सिंदूर की डिबिया भी ले कर गया था. वह अपने हाथों से पत्नी की मांग में सिंदूर भरना चाहता था, लेकिन शोभा तैयार नहीं हुई और दोनों के बीच हाथापाई होने लगी. इसी दौरान गजेंद्र के हाथ से सिंदूर की डिबिया छूट कर नीचे फर्श पर जा गिरी और सिंदूर फर्श पर बिखर गया.

यह देख कर तो गजेंद्र एकदम पागल सा हो गया. उस ने आव देखा न ताव, कमर में खोंस रखा कट्टा निकाला और उस के सीने पर गोली मार दिया. गोली लगते ही शोभा नीचे फर्श पर जा गिरी और काल के गाल में समा गई.

इस के बाद उस ने दोनों असलहे बिस्तर पर रख दिए और पत्नी की वरदी उस के जिस्म से उतार कर बैड पर रख दी. फिर कमरे से 9 बज कर 32 मिनट पर बड़े आराम से अपना बैग ले कर दिल्ली के लिए रवाना हो गया.

गजेंद्र से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. कथा लिखने तक पुलिस गजेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश करने की तैयारी में थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

‘बिग बौस 18’ में चाहत पांडे मचाती है गंदगी, क्या ऐसे जीत पाएंगी ऐक्ट्रैस ट्रौफी!

‘बिग बौस 18’(Bigg Boss18) इन दिनों धमाकेदार चल रहा है, लेकिन पहले कभी किसी सीजन में वह सब देखने को नहीं मिला, जो इस शो में दिख रहा है. शो में हर दिन एक तरफ दोस्ती, एक तरफ प्यार तो नजर आ रहा है, लेकिन साथ ही घमासान भी तगड़ा मचा हुआ है. शो में हर एक कंटैस्टैंट अपने पर खरा उतर रहा है. विवियन डीसेन, रजत दलाल, चाहत पांडे, चुप दरांग, जैसे कंटैस्टैंट औनस्क्रीन ज्यादा दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अगर शो में कोई कंटैस्टैंट घर वालों को सब से ज्यादा परेशान कर रहा है या हट कर दिख रहा है, तो वह है चाहत पांडे.

 

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चाहत पांडे (Chaht pandey) घर में गंदगी मचाती, वह घटिया है जैसी बातें सब घर वाले कहते दिखाई दे रहे हैं. बता दें कि चाहत का इस शो में एक ही दोस्त रजत दलाल है जिस से वह अपनी सारी बातें करती है. उस के आगे कभी रोती हुई दिखाई देती है, तो कभी हंसती हुई. लेकिन बीते ऐपिसोड में चाहत का अलग ही चेहरा नजर आया. उस की झड़प विवियन डीसेन से हुई.

विवियन डीसेन से चाहत की झड़प

दोनों डे वन से शो में सिर्फ लड़ रहे हैं. कई बार चाहत विवियन को खरीखोटी सुनाती हुई नजर आई है, तो कभी विवियन चाहत पर अपनी भड़ास निकालता हुआ दिख जाता है. लेकिन बीते दिन शो में विवियन डीसेना और अविनाश मिश्रा मिल कर चाहत पांडे से बुरी तरह लड़ रहे हैं और इस दौरान चाहत और विवियन एकदूसरे के लिए कई बुरी बातें बोलते हैं.

अविनाश ने चाहत पांडे को कहा ‘गंवार’

चाहत पांडे शो में शुरू से विवियन डीसने से लड़ रही है, इस के बाद एक ऐपिसोड में चाहत अविनाश से भी गंदी हरकतें करती हुई नजर आई. अविनाश जब बरतन धोने में लगे हुए थे तो चाहत ने कहा कि चाटचाट कर धोया करो. फिर अविनाश चाहत को बोलता है कि ‘तुम गंवार हो’. इस पर सलमान खान भी गुस्सा हुए थे.

टीवी की मशहूर बहू है चाहत पांडे

सलमान खान के फेमस शो में दिखने वाली चाहत पांडे एक टीवी शो में चर्चित बहू का रोल निभा चुकी है. जो लोग टीवी सीरियल्स देखते होंगे वे चाहत को पहचानते होंगे, लेकिन काफी सारे ऐसे लोग भी होंगे जो उस के बारे में नहीं जानते होंगे.

चाहत पांडे अपनी खूबसूरती के साथसाथ विवादों को ले कर भी खूब चर्चा में रहती है. वह शो में जितनी सादगी के साथ दिख रही है, रिएल लाइफ में काफी बोल्ड है. उस के लुक्स, उस के स्टाइल्स काफी अच्छे हैं.

विवादो से घिरी है एक्टैस चाहत पांडे

चाहत पांडे ने साल 2016 में ‘पवित्र बंधन’ शो से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा था. तब उस की उम्र सिर्फ 17 साल थी. ‘बिग बौस 18’ के मंच पर चढ़ते समय चाहत ने बताया कि वह एक छोटे शहर से आती है।और बहुत ही सिपंल लाइफ जीती है. उस के पास अपनी कार तक नहीं है, बावजूद इस के कि वह ‘हमारी बहू सिल्क’, ‘ऐसी दीवानी देखी नहीं कहीं’, ‘नथ जेवर या जजीर’ जैसे कई टीवी शोज का हिस्सा रही है.

Winter Romance Special: कंडोम है तो प्यार है

तकरीबन हर किसी के साथ कभी न कभी यह जरूर हुआ होगा कि अगर कोई गाना हम सुबह गुनगुनाने लगते हैं, तो फिर सारा दिन बेवजह उसे कहीं भी, कभी भी गाने लग जाते हैं. फिर वह गाना दर्द भरा हो या रोमांटिक. हंसीमजाक से लबरेज हो या फूहड़ ही सही.

एक दिन यही 23 साल की नई ब्याहता बिंदिया के साथ हुआ. दिसंबर महीने में दिल्ली के संजय कुमार के साथ उस की शादी हुई थी. हनीमून पीरियड की खुमारी चल रही थी. सुबहसुबह रेडियो पर हिंदी फिल्म ‘राजा बाबू’ का गाना ‘सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे, जाड़े में बलमा प्यारा लगे…’ सुन लिया.

बस, फिर क्या था. बिंदिया पूरे घर में यही गाना गुनगुनाती फिरती रही. बीच में सासससुर का ध्यान आ जाता, तो शरमा कर आवाज थोड़ी मंदी कर लेती, पर रात तक उस की जबान पर यही गाना चढ़ा रहा.

रात को बिंदिया के बलमा संजय कुमार घर आए, तो बिंदिया के गाने को ‘न्योता’ सम?ा कर ठिठुरती रात में उलटे पैर कैमिस्ट की दुकान पर जा पहुंचे और खुशबूदार कंडोम का एक बड़ा पैकेट खरीद लिया. फिर रातभर बलमा ने अपनी बिंदिया को साबित कर दिया कि जाड़े में बलमा क्यों प्यारा लगता है. खुशबूदार कंडोम ने उन दोनों की वह रात महका दी थी.

बिंदिया और संजय तो शादीशुदा हैं, पर अब तो शादी से पहले भी प्रेमीप्रेमिका में सैक्स होना कोई बड़ी बात नहीं है. लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े तो धड़ल्ले से जिस्मानी रिश्ता बनाते हैं, पर अनचाहे पेट से बचने के लिए वे कंडोम का इस्तेमाल बिंदास हो कर करते हैं. चूंकि सर्दियों में बिस्तर की रजाई में प्यार की गरमाहट ज्यादा महसूस होती है, तो कंडोम की खपत भी बढ़ जाती है.

दुनियाभर में प्यार करने वाले कंडोम का इस्तेमाल करने से झिझकते नहीं हैं. जरमन औनलाइन प्लेटफार्म स्टेटिस्टा के एक सर्वे के मुताबिक, साल 2021 में कंडोम के इस्तेमाल में ब्राजील सब से आगे था, जिस के लिए कहा जाता था कि वहां 65 फीसदी लोग कंडोम का इस्तेमाल कर रहे थे. इस के बाद दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों का नाम शामिल था.

वैसे, चीन में सब से ज्यादा कंडोम बिकते हैं. यूरोमौनिटर के मुताबिक, साल 2020 में चीन में तकरीबन 2.3 बिलियन यूनिट कंडोम बेचे गए थे. अमेरिका की एक मार्केटिंग रिसर्च कंपनी एसी नीलसन के मुताबिक, भारत में कंडोम का बाजार साल 2020 में तकरीबन 180 मिलियन डौलर का था. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत में कंडोम की बिक्री में भी इजाफा हुआ है.

भारत में कंडोम की बिक्री बढ़ने की एक वजह और भी है कि अब कैमिस्ट पर खुशबूदार, डौटेड, पतलेमोटे यानी तरहतरह के कंडोम बिकते दिख जाते हैं. इन में से खुशबूदार और डौटेड कंडोम का बाजार ज्यादा गरम रहता है और सर्दियों में प्यार करने वाले जोड़े ‘रबड़ के इस साथी’ पर पूरा भरोसा जताते हैं.

वैसे तो भारत में सरकारी अस्पतालों या डिस्पैंसरी वगैरह में साधारण कंडोम मुफ्त में भी मिल जाता है, पर ब्रांडेड कंडोम के छोटे पैकेट 10 रुपए से लेकर 50-60 रुपए तक में मिल जाते हैं. ब्रांड के हिसाब से कीमत कमज्यादा हो सकती है. पर कंडोम की कीमत पर मत जाइए, यह जो प्यार का लुत्फ बढ़ा देता है, उस बात को दिमाग में बिठा लीजिए. यह कई तरह की सैक्स बीमारियों जैसे एचआईवी, एड्स, सिफलिस, इंफैक्शन वगैरह से तो बचाता ही है, बच्चा न हो इस में भी प्यार के दौरान दीवार बन कर अड़ जाता है, बस थोड़ी सी सावधानी बरतनी पड़ती है.

इतना ही नहीं, कंडोम का फायदा या खासीयत है कि यह कई प्रकार के फ्लेवर और अलगअलग बनावट का होता है जैसे रिब्ड कंडोम. इस की बाहरी सतह पर उभरी हुई धारियां होती हैं, जो जोश को बढ़ाता है. ऐसे ही कई तरह के अलग तरह के कंडोम हैं, जिन की अपनीअपनी क्वालिटी है.

कंडोम की यह पतली रबड़ पार्टनर के बीच दिलचस्पी बढ़ाने का काम करती है. जैसे कंडोम पार्टनर को एकदूसरे के प्रति संतुष्ट करता है और उन खास यादगार को बनाने में मदद करता है.

कंडोम के बारे में हम आप के कान में एक बात बताना चाहते हैं कि इस को कैमिस्ट से खरीदने के लिए डाक्टर के परचे की जरूरत नहीं पड़ती है. दुकान पर जाइए, शान से कंडोम मांगिए, जेब में रखिए और सीधा अपने पार्टनर के पहलू में जा बैठिए.

और हां, आप के पार्टनर को कैसा कंडोम पसंद है, यह जरूर जान लीजिए. फिर बिस्तर पर प्यार का मजा उठाइए. अच्छा बलमा बनना है कि नहीं?

मेरी भाभी मुझ पर आरोप लगाती हैं कि मेरे और भैया के बीच गलत संबंध हैं, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं अविवाहित युवती हूं. माता पिता नहीं हैं. मैं भाई भाभी के साथ रहती हूं. समस्या यह है कि मेरी भाभी मुझ पर आरोप लगाती हैं कि मेरे और भैया के बीच गलत संबंध हैं. मुझे उन का यह आरोप बहुत परेशान करता है. समझ नहीं आता कि भैया से इस बारे में बात करूं या नहीं, सलाह दें.

जवाब

लगता है आप की भाभी को आप का उन के साथ रहना अखरता है. वे आप के प्रति अपनी व आप के भैया के जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसा आरोप लगा रही है. भाई से अपनी शादी कराने के लिए कहें. जैसा भी पति मिले, उस के साथ शादी करने को हां कह दें. यह क्लेश सब को भारी पड़ सकता है.

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झारखंड राज्य का एक शहर है हजारीबाग. यह कुदरत की गोद में बसा छोटा सा, पर बहुत खूबसूरत शहर है. पहाड़ियों से घिरा, हरेभरे घने जंगल, झील, कोयले की खानें इस की खासीयत हैं. हजारीबाग के पास ही में डैम और नैशनल पार्क भी हैं. यह शहर अभी हाल में ही रेल मार्ग से जुड़ा है, पर अभी भी नाम के लिए 1-2 ट्रेनें ही इस लाइन पर चलती हैं. शायद इसी वजह से इस शहर ने अपने कुदरती खूबसूरती बरकरार रखी है.

सोमेन हजारीबाग में फौरैस्ट अफसर थे. उन दिनों हजारीबाग में उतनी सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए उन की बीवी संध्या अपने मायके कोलकाता में ही रहती थी.

दरअसल, शादी के बाद कुछ महीनों तक वे दोनों फौरैस्ट अफसर के शानदार बंगले में रहते थे. जब संध्या मां बनने वाली थी, सोमेन ने उसे कोलकाता भेज दिया था. उन्हें एक बेटी हुई थी. वह बहुत खूबसूरत थी, रिया नाम था उस का. सोमेन हजारीबाग में अकेले रहते थे. बीचबीच में वे कोलकाता जाते रहते थे.

हजारीबाग के बंगले के आउट हाउस में एक आदिवासी जोड़ा रहता था. लक्ष्मी सोमेन के घर का सारा काम करती थी. उन का खाना भी वही बनाती थी. उस का मर्द फूलन निकम्मा था. वह बंगले की बागबानी करता था और सारा दिन हंडि़या पी कर नशे में पड़ा रहता था.

एक दिन दोपहर बाद लक्ष्मी काम करने आई थी. वह रोज शाम तक सारा काम खत्म कर के रात को खाना टेबल पर सजा कर चली जाती थी.

उस दिन मौसम बहुत खराब था. घने बादल छाए हुए थे. मूसलाधार बारिश हो रही थी. दिन में ही रात जैसा अंधेरा हो गया था.

अपने आउट हाउस में बंगले तक दौड़ कर आने में ही लक्ष्मी भीग गई थी. सोमेन ने दरवाजा खोला. उस की गीली साड़ी और ब्लाउज के अंदर से उस के सुडौल उभार साफ दिख रहे थे.

सोमेन ने लक्ष्मी को एक पुराना तौलिया दे कर बदन सुखाने को कहा, फिर उसे बैडरूम में ही चाय लाने को कहा. बिजली तो गुल थी. उन्होंने लैंप जला रखा था.

थोड़ी देर में लक्ष्मी चाय ले कर आई. चाय टेबल पर रखने के लिए जब वह झुकी, तो उस का पल्लू सरक कर नीचे जा गिरा और उस के उभार और उजागर हो गए.

सोमेन की सांसें तेज हो गईं और उन्हें लगा कि कनपटी गरम हो रही है. लक्ष्मी अपना पल्लू संभाल चुकी थी. फिर भी सोमेन उसे लगातार देखे जा रहे थे.

यों देखे जाने से लक्ष्मी को लगा कि जैसे उस के कपड़े उतारे जा रहे हैं. इतने में सोमेन की ताकतवर बाजुओं ने उस की कमर को अपनी गिरफ्त में लेते हुए अपनी ओर खींचा.

लक्ष्मी भी रोमांचित हो उठी. उसे मरियल पियक्कड़ पति से ऐसा मजा नहीं मिला था. उस ने कोई विरोध नहीं किया और दोनों एकदूसरे में खो गए.

इस घटना के कुछ महीने बाद सोमेन ने अपनी पत्नी और बेटी रिया को रांची बुला लिया. हजारीबाग से रांची अपनी गाड़ी से 2 ढाई घंटे में पहुंच जाते हैं.

सोमेन ने उन के लिए रांची में एक फ्लैट ले रखा था. उन के प्रमोशन की बात चल रही थी. प्रमोशन के बाद उन का ट्रांसफर रांची भी हो सकता है, ऐसा संकेत उन्हें डिपार्टमैंट से मिल चुका था.

इधर लक्ष्मी भी पेट से हो गई थी. इस के पहले उसे कोई औलाद न थी. लक्ष्मी के एक बेटा हुआ. नाकनक्श से तो साधारण ही था, पर रंग उस का गोरा था. आमतौर पर आदिवासियों के बच्चे ऐसे नहीं होते हैं.

अभी तक सोमेन हजारीबाग में ही थे. वे मन ही मन यह सोचते थे कि कहीं यह बेटा उन्हीं का तो नहीं है. उन्हें पता था कि लक्ष्मी की शादी हुए 6 साल हो चुके थे, पर वह पहली बार मां बनी थी.

सोमेन को तकरीबन डेढ़ साल बाद प्रमोशन और ट्रांसफर और्डर मिला. तब तक लक्ष्मी का बेटा गोपाल भी डेढ़ साल का हो चुका था.

हजारीबाग से जाने के पहले लक्ष्मी ने सोमेन से अकेले में कहा, ‘‘बाबूजी, आप से एक बात कहना चाहती हूं.’’

‘‘हां, कहो,’’ सोमेन ने कहा.

‘‘गोपाल आप का ही खून है.’’

सोमेन बोले, ‘‘यह तो मैं यकीनी तौर पर नहीं मान सकता हूं. जो भी हो, पर तुम मुझ से चाहती क्या हो?’’

‘‘बाबूजी, मैं बेटे की कसम खा कर कहती हूं, गोपाल आप का ही खून है.’’

‘‘ठीक है. बोलो, तुम कहना क्या चाहती हो?’’

‘‘ज्यादा कुछ नहीं. बस, यह भी पढ़लिख कर अच्छा इनसान बने. मैं किसी से कुछ नहीं बोलूंगी. आप इतना भरोसा तो मुझ पर कर सकते हैं,’’ लक्ष्मी बोली.

‘‘ठीक है. तुम लोगों के बच्चों का तो हर जगह आसानी से रिजर्वेशन कोटे में दाखिला हो ही जाता है. फिर भी मुझ से कोई मदद चाहिए तो बोलना.’’

इस के बाद सोमेन रांची चले गए. समय बीतता गया. सोमेन की बेटी रिया 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गई थी.

बीचबीच में इंस्पैक्शन के लिए सोमेन को हजारीबाग जाना पड़ता था. वे वहीं आ कर बंगले में ठहरते थे. लक्ष्मी भी उन से मिला करती थी. उस ने सोमेन से कहा था कि गोपाल भी 10वीं क्लास के बाद दिल्ली के अच्छे स्कूल और कालेज में पढ़ना चाहता है. उसे कुछ माली मदद की जरूरत पड़ सकती है.

सोमेन ने उसे मदद करने का भरोसा दिलाया था. गोपाल अब बड़ा हो गया था. वे उसे देख कर खुश हुए. शक्ल तो मां की थी, पर रंग गोरा था. छरहरे बदन का साधारण, पर आकर्षक लड़का था. उस के नंबर भी अच्छे आते थे.

रिया के दिल्ली जाने के एक साल बाद गोपाल ने भी दिल्ली के उसी स्कूल में दाखिला ले लिया. सोमेन ने गोपाल की 12वीं जमात तक की पढ़ाई के लिए रुपए उस के बैंक में जमा करवा दिए थे.

रिया गोपाल से एक साल सीनियर थी. पर एक राज्य का होने के चलते दोनों में परिचय हो गया. छुट्टियों में ट्रेन में अकसर आनाजाना साथ ही होता था. गोपाल और रिया दोनों का इरादा डाक्टर बनने का था.

रिया ने 12वीं के बाद कुछ मैडिकल कालेज के लिए अलगअलग टैस्ट दिए, पर वह कहीं भी पास नहीं कर सकी थी. तब उस ने एक साल कोचिंग ले कर अगले साल मैडिकल टैस्ट देने की सोची. वहीं दिल्ली के अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट में कोचिंग शुरू की.

अगले साल गोपाल और रिया दोनों ने मैडिकल कालेज में दाखिले के लिए टैस्ट दिए. इस बार दोनों को कामयाबी मिली थी. गोपाल के नंबर कुछ कम थे, पर रिजर्वेशन कोटे में तो उस का दाखिला होना तय था.

गोपाल और रिया दोनों ने बीएचयू मैडिकल कालेज में दाखिला लिया. सोमेन गोपाल की पढ़ाई का भी खर्च उठा रहे थे. अब दोनों की क्लास भी साथ होती थी. आपस में मिलनाजुलना भी ज्यादा हो गया था. छुट्टियों में भी साथ ही घर आते थे.

वहां से शेयर टैक्सी से हजारीबाग जाना आसान था. हजारीबाग के लिए कोई अलग ट्रेन नहीं थी. जब कभी सोमेन रिया को लेने रांची स्टेशन जाते थे, तो वे गोपाल को भी बिठा लेते थे और अगर सोमेन को औफिशियल टूर में हजारीबाग जाना पड़ता था, तो गोपाल को वे साथ ले जाते थे. इस तरह समय बीतता गया और गोपाल व रिया अब काफी नजदीक आ गए थे. वे एकदूसरे से प्यार करने लगे थे.

गोपाल और रिया दोनों असलियत से अनजान थे. दोनों के मातापिता भी उन की प्रेम कहानी से वाकिफ नहीं थे. उन्होंने पढ़ाई के बाद अपना घर बसाने का सपना देख रखा था. साढ़े 4 साल बाद दोनों ने अपनी एमबीबीएस पूरी कर ली. आगे उसी कालेज में दोनों ने एक साल की इंटर्नशिप भी पूरी की.

रिया काफी समझदार थी. उस की शादी के लिए रिश्ते आने लगे, पर उस ने मना कर दिया और कहा कि अभी वह डाक्टरी में पोस्ट ग्रेजुएशन करेगी.

लक्ष्मी कुछ दिनों से बीमार चल रही थी. इसी बीच सोमेन भी हजारीबाग में थे. उस ने सोमेन से कहा, ‘‘बाबूजी, मेरा अब कोई ठिकाना नहीं है. आप गोपाल का खयाल रखेंगे?’’

सोमेन ने समझाते हुए कहा, ‘‘अब गोपाल समझदार डाक्टर बन चुका है. वह अपने पैरों पर खड़ा है. फिर भी उसे मेरी जरूरत हुई, तो मैं जरूर मदद करूंगा.’’

कुछ दिनों बाद ही लक्ष्मी की मौत हो गई.

गोपाल और रिया दोनों ने मैडिकल में पोस्ट ग्रैजुएशन का इम्तिहान दिया था. वे तो बीएचयू में पीजी करना चाहते थे, पर वहां उन्हें सीट नहीं मिली. दोनों को रांची मैडिकल कालेज आना पड़ा.

उन में प्रेम तो जरूर था, पर दोनों में से किसी ने भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया था. दोनों ने तय किया कि जब तक उन की शादी नहीं होती, इस प्यार को प्यार ही रहने दिया जाए.

रिया की मां संध्या ने एक दिन उस से कहा, ‘‘तुम्हारे लिए अच्छेअच्छे घरों से रिश्ते आ रहे हैं. तुम पोस्ट ग्रेजुएशन करते हुए भी शादी कर सकती हो. बहुत से लड़केलड़कियां ऐसा करते हैं.’’

रिया बोली, ‘‘करते होंगे, पर मैं नहीं करूंगी. मुझ से बिना पूछे शादी की बात भी मत चलाना.’’

‘‘क्यों? तुझे कोई लड़का पसंद है, तो बोल न?’’

‘‘हां, ऐसा ही समझो. पर अभी हम दोनों पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहे हैं. शादी की जल्दी किसी को भी नहीं है. पापा को भी बता देना.’’

संध्या ने कोई जवाब नहीं दिया. इसी बीच एक बार सोमेन के दोस्त ने उन्हें खबर दी कि उस ने रिया और गोपाल को एकसाथ सिनेमाघर से निकलते देखा है.

इस के कुछ ही दिनों बाद संध्या के रिश्ते के एक भाई ने बताया कि उस ने गोपाल और रिया को रैस्टौरैंट में लंच करते देखा है.

सोमेन ने अपनी पत्नी संध्या से कहा, ‘‘रिया और गोपाल दोनों को कई बार सिनेमाघर या होटल में साथ देखा गया है. उसे समझाओ कि उस के लिए अच्छे घरों से रिश्ते आ रहे हैं. सिर्फ उस के हां कहने की देरी है.’’

संध्या बोली, ‘‘रिया ने मुझे बताया था कि वह गोपाल से प्यार करती है.’’

सोमेन चौंक पड़े और बोले, ‘‘क्या? रिया और गोपाल? यह तो बिलकुल भी नहीं हो सकता.’’

अगले दिन सोमेन ने रिया से कहा, ‘‘बेटी, तेरे रिश्ते के लिए काफी अच्छे औफर हैं. तू जिस से बोलेगी, हम आगे बात करेंगे’’

रिया ने कहा, ‘‘पापा, मैं बहुत दिनों से सोच रही थी कि आप को बताऊं कि मैं और गोपाल एकदूसरे को चाहते हैं. मैं ने मम्मी को बताया भी था कि पीजी पूरा कर के मैं शादी करूंगी.’’

‘‘बेटी, कहां गोपाल और कहां तुम? उस से तुम्हारी शादी नहीं हो सकती, उसे भूल जाओ. अपनी जाति के अच्छे रिश्ते तुम्हारे सामने हैं.’’

‘‘पापा, हम दोनों पिछले 5 सालों से एकदूसरे को चाहते हैं. आखिर उस में क्या कमी है?’’

‘‘वह एक आदिवासी है और हम ऊंची जाति के शहरी लोग हैं.’’

‘‘पापा, आजकल यह जातपांत, ऊंचनीच नहीं देखते. गोपाल भी एक अच्छा डाक्टर है और उस से भी पहले बहुत नेक इनसान है.’’

सोमेन ने गरज कर कहा, ‘‘मैं बारबार तुम्हें मना कर रहा हूं… तुम समझती क्यों नहीं हो?’’

‘‘पापा, मैं ने भी गोपाल को वचन दिया है कि मैं शादी उसी से करूंगी.’’

उसी समय संध्या भी वहां आ गई और बोली, ‘‘अगर रिया गोपाल को इतना ही चाहती है, तो उस से शादी करने में क्या दिक्कत है? मुझे तो गोपाल में कोई कमी नहीं दिखती है.’’

सोमेन चिल्ला कर बोले, ‘‘मेरे जीतेजी यह शादी नहीं हो सकती. मैं तो कहूंगा कि मेरे मरने के बाद भी ऐसा नहीं करना. तुम लोगों को मेरी कसम.’’

रिया बोली, ‘‘ठीक है, मैं शादी ही नहीं करूंगी. तब तो आप खुश हो जाएंगे.’’

सोमेन बोले, ‘‘नहीं बेटी, तुझे शादीशुदा देख कर मुझे बेहद खुशी होगी. पर तू गोपाल से शादी करने की जिद छोड़ दे.’’

‘‘पापा, मैं ने आप की एक बात मान ली. मैं गोपाल को भूल जाऊंगी. परंतु आप भी मेरी एक बात मान लें, मुझे किसी और से शादी करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे.’’

ये बातें फिलहाल यहीं रुक गईं. रात में संध्या ने पति सोमेन से पूछा, ‘‘क्या आप बेटी को खुश नहीं देखना चाहते हैं? आखिर गोपाल में क्या कमी है?’’

सोमेन ने कहा, ‘‘गोपाल में कोई कमी नहीं है. उस के आदिवासी होने पर भी मुझे कोई एतराज नहीं है. वह सभी तरह से अच्छा लड़का है, फिर भी…’’

रिया को नींद नहीं आ रही थी. वह भी बगल के कमरे में उन की बातें सुन रही थी. वह अपने कमरे से बाहर आई और पापा से बोली, ‘‘फिर भी क्या…? जब गोपाल में कोई कमी नहीं है, फिर आप की यह जिद बेमानी है.’’

सोमेन बोले, ‘‘मैं नहीं चाहता कि तेरी शादी गोपाल से हो.’’

‘‘नहीं पापा, आखिर आप के न चाहने की कोई तो ठोस वजह होनी चाहिए. आप प्लीज मुझे बताएं, आप को मेरी कसम. अगर कोई ऐसी वजह है, तो मैं खुद ही पीछे हट जाऊंगी. प्लीज, मुझे बताएं.’’

सोमेन बहुत घबरा उठे. उन को पसीना छूटने लगा. पसीना पोंछ कर अपनेआप को संभालते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह शादी इसलिए नहीं हो सकती, क्योंकि…’’

वे बोल नहीं पा रहे थे, तो संध्या ने उन की पीठ सहलाते हुए उन को हिम्मत दी और कहा, ‘‘हां बोलिए आप, क्योंकि… क्या?’’

सोमेन बोले, ‘‘तो लो सुनो. यह शादी नहीं हो सकती है, क्योंकि गोपाल रिया का छोटा भाई है.

‘‘जब मैं हजारीबाग में अकेला रहता था, तब मुझ से यह भूल हो गई थी.’’

रिया और संध्या को काटो तो खून नहीं. दोनों हैरानी से सोमेन को देख रही थीं. रिया की आंखों से आंसू गिरने लगे. कुछ देर बाद वह सहज हुई और अपने कमरे में चली गई.

रात में ही उस ने गोपाल को फोन कर के कहा, ‘‘गोपाल, क्या तुम मुझ से सच्चा प्यार करते हो?’’

गोपाल बोला, ‘क्या इतनी रात गए यही पूछने के लिए फोन किया है?’

‘‘तुम ने सुना होगा कि प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं है, इस में कभी खोना भी पड़ता है.’’

गोपाल ने कहा, ‘हां, सुना तो है.’’

‘‘अगर यह सही है, तो तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी. बोलो मानोगे?’’ रिया बोली.

गोपाल बोला, ‘यह कैसी बात कर रही हो आज? तुम्हारी हर जायज बात मैं मानूंगा.’

‘‘तो सुनो. बात बिलकुल जायज है, पर मैं इस की कोई वजह नहीं बता सकती हूं और न ही तुम पूछोगे. ठीक है?’’

‘ठीक है, नहीं पूछूंगा. अब बताओ तो सही.’

रिया बोली, ‘‘हम दोनों की शादी नहीं हो सकती. यह बिलकुल भी मुमकिन नहीं है. वजह जायज है और जैसा कि मैं ने पहले ही कहा है कि वजह न मैं बता सकती हूं, न तुम पूछना कभी.’’

गोपाल ने पूछा, ‘तो क्या हमारा प्यार झूठा था?’

रिया बोली, ‘‘प्यार सच्चा है, पर याद करो, हम ने तय किया था कि शादी नहीं होने तक हमारा प्यार ‘अधूरा प्यार’ रहेगा. बस, यही समझ लो.

‘‘अब तुम कहीं भी शादी कर लो, पर मेरातुम्हारा साथ बना रहेगा और तुम चाहोगे भी तो भी मैं कभी भी तुम्हारे घर आ धमकूंगी,’’ इतना कह कर रिया ने फोन रख दिया.

इंसाफ हम करेंगे :क्यो टूटा माही का दिल

माही बेहाल पड़ी थी. रहरह कर शरीर में दर्द उभर रहा था. पूरे शरीर पर मारपीट के निशान पड़ चुके थे. माही का पति निहाल सिंह शराब पीने के बाद बिलकुल जानवर बन जाता था, फिर तो उसे यह भी ध्यान नहीं रहता था कि उस के बच्चे अब बड़े हो चुके हैं. जब कभी उस की बेटी रूबी मां को बचाने आती तो वह भी पिट जाती.

2 दिन पहले जब निहाल सिंह शराब पी कर घर में गालियां देने लगा, तो माही ने उसे सम?ाया, ‘बस करो, अब खाना खा लो. सुबह काम पर भी जाना है.’

निहाल सिंह चीखते हुए बोला, ‘अब तुम रोकोगी मुझे. अभी बताता हूं तुझे,’ फिर तो उस का हाथ न थमा. आखिर रूबी दोनों के बीच में आ गई और उस का हाथ पकड़ कर झटकते हुए बोली, ‘पापा, अब बस कीजिए. गलती तो आप की है, मम्मी को क्यों मार रहे हो?’

इस के बाद रूबी ने मां को उठाया और दूसरे कमरे में ले गई. उस के जख्मों पर दवा लगाई और बोली, ‘मम्मी, बहुत हो गया अब. पापा नहीं सुधरेंगे.’

दर्द सहती माही बोली, ‘हां रूबी, मैं भी अब थक चुकी हूं. मुझे समझ में आ चुका है. अब मैं इन्हें कभी माफ नहीं करूंगी. तुम बुलाओ पुलिस को, अब मैं दूंगी इन के खिलाफ बयान.’

रूबी ने झूट से पुलिस का नंबर डायल किया और सारी घटना बता दी.

माही और निहाल सिंह की लव मैरिज हुई थी. घर वालों के खिलाफ जा कर माही ने निहाल सिंह का हाथ थामा था. दोनों भारत से यूरोप आ कर बस गए थे.

माही ने जब काम करना चाहा तो निहाल सिंह ने उस से कहा, ‘तुम घर संभालो, मैं बाहर संभालता हूं.’

कुछ समय तो बहुत अच्छा बीता, मगर धीरेधीरे माही को महसूस होने लगा कि निहाल सिंह का स्वभाव बदलता जा रहा है. काम से आते ही वह शराब पीने लग जाता. तब तक बच्चे भी हो चुके थे.

निहाल सिंह अब छोटीछोटी बातों में भी माही पर शक करने लगा था. जब कभी काम का लोड बढ़ जाता, वह झल्ला कर कहता, ‘मुझ से नहीं होता इतना काम, मैं नहीं उठा सकता इतना बोझ.’

अगर माही नौकरी करने को कहती, तो वह उसे पीटने लगता. बच्चे डरते हुए मां के पीछे छिप जाते थे. वह अब थोड़े बड़े भी हो गए थे. उन का स्कूल में दाखिला कराना जरूरी हो गया था. खर्चा बढ़ गया था, तो माही ने निहाल सिंह को किसी तरह नौकरी के लिए मना लिया. वह घर का सारा काम निबटा कर ही नौकरी पर जाती और वापस आते ही बच्चों और घर को देखती.

निहाल सिंह का मन करता तो माही को प्यार करता नहीं, तो आधी रात को उसे मारपीट कर कमरे से बाहर निकाल देता. इतना सबकुछ होने के बावजूद माही निहाल सिंह का पूरा ध्यान रखती. हर काम समय से करती. सुबह उठते ही सब से पहले उस का टिफिन तैयार करती. किसी तरह उस ने निहाल सिंह को मना कर बच्चों को साथ वाले बड़े शहरों में पढ़ने के लिए भेज दिया था, ताकि वे दोनों पढ़लिख कर अच्छी नौकरियों पर लग सकें.

1-2 बार ऐसे ही किसी बात पर गुस्सा हो कर निहाल सिंह ने माही को आधी रात में घर से बाहर निकाल दिया था. माही की मौसी का बेटा इसी शहर में रहता था. वह उसे फोन करती और वह उसे ले कर अपने घर चला जाता.

फिर उस ने माही को सम?ाया कि ऐसे तो यह कभी नहीं सुधरेगा, तुम कब तक इस की मारपीट बरदाश्त करोगी. उस ने खुद ही पुलिस में उस की रिपोर्ट लिखवा दी.

जब पुलिस निहाल सिंह को घर से उठा कर ले गई, तब माही डर गई और उस ने भाई को रिपोर्ट वापस लेने के लिए मना लिया. जब ऐसा 2-3 बार हुआ, तो वह भी पीछे हट गया.

माही को पता था कि निहाल सिंह गुस्सैल है, पर उस के बच्चों का पिता है. वह भले ही अब उसे पहले जैसा प्यार नहीं करता, मगर वह उस के लिए तो आज भी वही उस का प्यार है.

तभी एक दिन निहाल सिंह काम से आते वक्त अपने साथ एक जवान औरत को घर ले आया. माही ने उसे देखते ही निहाल सिंह से उस के बारे में पूछा कि यह कौन है तो उस ने बताया, ‘यह प्रीति है. इस का पति मेरे साथ काम करता था. ज्यादा शराब पीने से वह मर गया. मैं इस की मदद कर रहा हूं, क्योंकि उस के बीमा और पैंशन के बारे में इसे कुछ नहीं पता.’

माही भोली थी. वह बोली, ‘अच्छा है. आप इन की मदद कर रहे हो, वरना कौन बेगाने देश में किसी की मदद करता है.’

अब तो जब भी प्रीति का फोन आता, निहाल सिंह भागाभागा उस के पास पहुंच जाता.

एक दिन माही काम से जल्दी लौट आई, तो घर का दरवाजा खोलते ही बैडरूम से किसी के हंसने की आवाज आई. अंदर अंधेरा था. बिजली का स्विच औन करते ही माही की आंखें खुली रह गईं, जब उस ने उन दोनों को बैड पर देखा. शर्मिंदा होने के बजाय वे दोनों हंसने लगे. इस के बाद तो उस के सामने ही सबकुछ चलने लगा.

माही का दिल टूट चुका था. उस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उसे इस तरह धोखा देगा.

एक दिन माही को पास बिठा कर निहाल सिंह बोला, ‘तू हां करे, तो मैं इसे भी साथ रख लूं.’ माही चुप रही. उस ने पक्का मन बना लिया कि अब वह उस के साथ नहीं रहेगी.

बच्चे पढ़लिख कर अब अच्छी नौकरियों पर लग चुके थे. सिर्फ छुट्टियों में ही घर आते थे. वह मां को अपने साथ चलने को कहते, मगर वह जानती थी कि निहाल सिंह बीमारी का शिकार है. उस के खानेपीने का ध्यान उस ने ही रखना है, इसलिए वह सबकुछ बरदाश्त कर के भी उसी के साथ रह रही थी.

आजकल छुट्टियों में रूबी घर आई हुई थी. कल की हुई मारपीट के बाद माही ने रूबी को निहाल सिंह और प्रीति के संबंधों के बारे में भी बता दिया.

रूबी को अपने पिता पर बहुत गुस्सा आ रहा था. उस ने अपने पिता के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी थी.

थोड़ी ही देर में पुलिस आ गई. रूबी और माही ने बयान दे दिया. माही की चोटें उस के साथ हुए जुल्म की साफ गवाही दे रही थी. माही ने यह भी बताया कि जब वह पेट से थी तो निहाल सिंह ने उसे बहुत बार पीटा था. रिपोर्ट को मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने माही की चोटों के फोटो भी खींच कर साथ लगा दिए.

पुलिस निहाल सिंह को साथ ले गई. वहां 2 दिन उसे हिरासत में रखा. फिर उस को चेतावनी दे कर छोड़ दिया गया कि वह माही के आसपास भी नहीं फटकेगा. अगर उस ने माही को तंग किया, तो उस पर कार्यवाही की जाएगी और 2 साल की जेल भी हो सकती है. उसे एक अलग घर में रहने के लिए कहा गया.

निहाल सिंह फोन कर के बारबार माही से माफी मांगने लगा. उसे पता था, माही का दिल पिघल जाता है. वह उसे अब भी प्यार करती है. मगर रूबी ने मां को साफसाफ कह दिया, ‘मम्मी इस बार अगर तुम ने पापा को माफ किया, तो मैं कभी आप से बात नहीं करूंगी.’

माही ने निहाल सिंह का फोन उठाना भी बंद कर दिया. रूबी पिता को फोन पर धमकी देते हुए बोली, ‘आज के बाद अगर आप ने मम्मी को फोन किया, तो पुलिस आप को 2 साल के लिए जेल में डाल देगी.

‘मम्मी अब अकेली नहीं हैं. आज तक जो आप ने उन के साथ किया, उस के लिए हम तीनों आप से कोई रिश्ता नहीं रखेंगे. आज तक जो बेइज्जती मम्मी की हुई है, उस की सजा तो आप को भुगतनी पड़ेगी. मम्मी को उन के बच्चे इंसाफ दिलवाएंगे.’

पहले निहाल सिंह गिड़गिड़ाया, फिर बेशर्मी से बोला, ‘मैं भी तुम लोगों से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता. आज तक मैं ने तुम दोनों की पढ़ाई पर जो खर्चा किया वह मुझे वापस चाहिए.’

यह सुनते ही रूबी की आंखों में आंसू आ गए, उस का पिता इतना गिर सकता है उस ने कभी नहीं सोचा था, मगर फिर भी वह हिम्मत कर अपने आंसुओं को साफ करते हुए बोली, ‘पापा, कोई बात नहीं. हमारी नौकरी लग चुकी है. हम दोनों हर महीने आप को खर्चा भेज दिया करेंगे, पर अब मम्मी की और बेइज्जती बरदाश्त नहीं करेंगे,’ कहते हुए रूबी ने फोन रख दिया और माही को अपने गले से लगा लिया.

बेहद जरूरी है सैक्सुअल हाइजीन, जानें कैसे

स्वस्थ जीवन जीने के लिए जितना जरूरी बेसिक हाइजीन है उतना ही जरूरी सेक्सुअल हाइजीन है. आज भी हमारे देश में प्राइवेट पार्ट के हैल्थ और सेक्सुअल हाइजीन के बारे में उतनी गंभीरता से बातें नहीं बताई जाती, जितनी की बेसिक हाइजीन के बारे में, पर क्या आपको पता है सैक्सुअल हाइजीन को इग्नोर करने से कई तरह के गंभीर इंफैक्शन और सैक्सुअल प्रौब्लम हो सकती है. सैक्सुअल प्रौब्लम क्यों होती है और इसे रोकने के उपाय क्या हैं इस बारे में बता रही हैं कोलंबिया एशिया हौस्पिटल, गुड़गांव की कंसलटेंट औब्सटेट्रिक्स और गाइनेकोलौजिस्ट डाक्टर रितु सेठी.

क्यों होता है इंफैक्शन

एक सर्वे के अनुसार लगभग 93% शादीशुदा महिलाएं सेक्सुअल हाइजीन का खयाल नहीं रखती, दिल्ली, मुंबई और बैंगलुरू जैसे बड़े शहरों में एक सर्वे के मुताबिक 45% महिलाएं सामान्य वैजाइनल प्रौब्लम से ग्रसित हैं. लेकिन वे इसे चुपचाप सहती हैं. इस विषाय को किसी से शेयर नहीं करतीं, क्योंकि वे इंटिमेट हाइजीन को इतना महत्त्वपूर्ण ही नहीं समझती. दरअसल महिलाओं को इस बात का एहसास व समझ ही नहीं कि सेक्सुअल हाइजीन का सीधा संबंध सेक्सुअल इंफैक्शन से होता है और इस की कई वजह है.

सेक्सुअल इंफैक्शन की वजह महिलाओं में जागरूकता की कमी

महिलाओं में सैक्सुअल हाइजीन की जानकारी न होने की सब से बड़ी वजह हमारा सामाजिक ढांचा, जागरूकता व सर्तकता की कमी है. भारत में प्राइवेट पार्ट पर बात करने से लोग झिझकते हैं. यहां तक कि इस बारे में अपने डाक्टर्स से भी बात करने से कतराते हैं. सर्तकता और जागरूकता की कमी के चलते ही आज भी पढ़ीलिखी महिलाएं वैजाइनल हैल्थ व हाइजीन को अनदेखा कर रही है और कई गंभीर यौन रोग का शिकार हो रही हैं. जिस का परिणाम वैजाइना में गंध, खुजली और बैक्टीरियल इंफैक्शन आदि हो जाते हैं.

हाइजीन का ध्यान न देना

प्रकृति ने महिलाओं के वैजाइनल की संरचना कुछ ऐसे की है कि हाइजीन का ध्यान न रखने से वो इंफैक्शन के संपर्क में जल्दी आ जाती हैं जिस के कारण, यूरिन में जलन, फिजिकल रिलेशन बनाने के दौरान योनि में तेज जलन व दर्द, जैसी समस्याओं से हर महिला ग्रसित होती है.

वैजाइना और एनस का आसपास होना

महिलाओं में यूरिन इंफैक्शन की सब से बड़ी वजह उन के वैजाइना और (मलद्वार) एनस के बीच मामूली अंतर होना है अधिकांश महिलाओं में मलत्याग के बाद मल को साफ करने की प्रक्रिया बहुत गलत होती है, जिस से मल का टुकड़ा उन की योनि तक पहुंचना बेहद आसान हो जाता है और ऐसा अकसर होता है इसलिए मल के योनि तक पहुंचने का महिलाओं को पता ही नहीं चलता लेकिन इस के प्रभाव से वो इंफैक्शन का शिकार हो जाती हैं. लेकिन शायद ही महिलाएं इस के प्रति सचेत होती हैं. मल को साफ करने के लिए हाथ को आगे की तरफ न कर के पीछे की तरफ कर के मल की सफाई करें. वैजाइनल की क्लीनिंग का भी खास ध्यान रखें.

इनर वियर का साफ ना होना

महिलाएं अपनी पैंटी की साफसफाई की हमेशा से ही उपेक्षा करती हैं, जो यूरिन इंफैक्शन का कारण होती है. पैंटी का अंदरूनी हिस्सा, संक्रमित ल्यूकोरिया आदि के कारण संक्रमित हो जाता है जिस से पैंटी प्रदूषित रहती है. बाद में इसी पैंटी के जरिए योनि मार्ग से इंफैशन देखने में आता है.

पीरियड के समय सफाई न होना

खास कर पीरियड्स के दौरान अपनी पैंटी की साफसफाई का खास ध्यान न रखना, भी इंफैक्शन की वजह है, जिस से योनि से दुर्गंध युक्त पानी निकलना, प्रदर रोग, योनि व पेशाब में जलन खुजली एक बड़ी वजह हो जाती है.

सैक्सुअल हाइजीन को प्रभावित करने वाले कारक

महिलाओं में सेक्सुअल हाइजीन, हारमोनल परिवर्तन, पीरियड्स टाइम, बीमारी, प्रैगनैंसी, फिजिकल एक्टीविटीज और पैंटी पहनने के प्रकार से प्रभावित होती है. पीरियड्स के दौरान लंबे समय तक एक ही पैड का प्रयोग करने से इंफैक्शन और गंध हो जाती है.

सैक्स लाइफ को प्रभावित करते हारमोनल चेंजेज

महिलाओं में हारमोनल चेंजेज और खराब स्वास्थ्य के दौरान वैजाइनल डिसचार्ज होता है. जिस से योनि में गीलापन होता है और यही गीलापन ईचिंग का कारण होता है. इस के अलावा प्रैगनैंसी और डिलीवरी के दौरान वैजाइना की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं जो सेक्सुअल हाइजीन को प्रभावित करती है.

महिलाओं में सेक्सुअल हाइजीन की कमी उन की सेक्स लाइफ को खत्म कर देती है.

हाइजीन पर ध्यान देने वाली खास बातें

महिलाओं में प्राइवेट हाइजीन के मूल मुद्दों को अकसर ही नजरअंदाज कर दिया जाता रहा पर हैल्दी रहने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

  1. सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल के समय हमेशा सचेत रहे हमेशा टौयलेट जाते समय फ्लश जरूर करें.
  2. पैंटी की सफाई किसी अच्छे डिटरजैंट से करें ताकि वह अच्छी तरह से साफ हो जाए.
  3. पैंटी को हमेशा सीधी दिशा में धूप में ही सुखाएं ताकि उस का अंदरूनी हिस्सा धूल, मिट्टी आदि से प्रदूषित न हो सके.
  4. रोज पहनने वाली पैंटी पर आयरन जरूर चलाएं. आयरन की गरमी से बैक्टीरिया का पूरी तरह से अंत हो जाता है और पैंटी इंफैक्शन से मुक्त हो जाती है.
  5. पीरियड्स के दौरान अपने पैड्स को 6 घंटे के अंतराल पर बदलें इसी समय इंफैक्शन होने का ज्यादा डर होता है.
  6. हमेशा लाईट कलर की पैंटी का प्रयोग करें व्हाइट कलर की पैंटी बेस्ट है इस में थोड़ी भी गंदगी साफ पता चलती है.
  7. पैंटी को डिटर्जेंट से धोने के बाद एक बार डिटौल व ऐंटीसैप्टिक की कुछ बूंदें डाल कर पानी में जरूर साफ करें इस से पैंटी बैक्टीरिया मुक्त हो जाती है और आप को फंगल या ऐसे किसी अन्य संक्रमण से बचाती है.
  8. सिंथेटिक की बजाए कौटन की पैंटी का प्रयोग करें और अपनी पैंटी को हर 3 महीने में चेंज जरूर करें.
  9. एक्सरसाइज के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें नमी के कारण उस में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है.
  10. वैजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ करें.
  11. किसी भी सूरत में टैलकम पाउडर का इस्तेमाल न करें विशेष तौर पर निजी अंगों पर क्योंकि इस से ओवेरियन कैंसर होने की रिपोर्ट्स सामने आ रही है.
  12. बहुत ज्यादा टाइट पैंटी न पहनें.
  13. अपनी पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं उसे अलग से साफ करें.

महिलाओं के आवश्यक टैस्ट

नियमित तौर पर स्वास्थ्य जांच कराना भी बहुत जरूरी है, जिस से जीवनशैली संबंधी बीमारियों की जांच कर उन की रोकथाम की जा सके और साथ ही पैप स्मीयर्स जैसे महत्त्वपूर्ण टेस्ट भी हो सके, जिन्हें यौन संबंधों के कारण होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए किया जाता है, क्योंकि लंबी अवधि में ये बीमारियां सर्वाइकल कैंसर की वजह भी बन सकती हैं. सेक्सुअल तौर पर बेहद सक्रिय महिलाओं को ये जांच अवश्य कराने की सलाह देनी चाहिए.

कम उम्र में ही महिलाओं की जांच जीवनशैली संबंधी बीमारियों के लिए भी हो जानी चाहिए जैसे डायबिटीज. क्योंकि इस का महिलाओं की फर्टिलिटी पर प्रभाव पड़ता है और अगर इस की जांच सही समय पर नहीं हो तो यह महिलाओं के जीवन को युवा उम्र में ही प्रभावित कर सकती है. ऐसी स्थितियों की वजह से लंबी अवधि में महिला और उस के साथी के यौन स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है.

सैक्सुअल हैल्थ के लिए जरूरी है सेफ सैक्स

अक्सर शर्म और झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर बात नहीं करती लेकिन आप की सेहत आप के हाथ है. सेक्स के दौरान अपने पार्टनर से कंडोम यूज करने को कहें जिस से कई तरह के गंभीर व जानलेवा यौन संक्रमणों से बचा जा सकता है.

सेक्सुअल हैल्थ के लिए बैलैंस्ड डाइट बहुत जरूरी है. ये इंफैक्शन से बचाता है. यदि वैजाइनल ड्रायनैस है तो सोया प्रोडक्ट्स का अधिक इस्तेमाल करें क्योंकि इस में एस्ट्रोजन का एक प्रकार पाया जाता है जो नेचुरल लूब्रिकेशन को बढ़ाता है इस के साथ एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है.

ये सभी बातें महिलाओं के सेक्सुअल जीवन को बहुत प्रभावित करती हैं क्योंकि बारबार फंगल इंफैक्शन होने से फिजिकल रिलेशन के दौरान अत्यधिक दर्द और सूखापन हो जाता है जिस से महिलाएं इंटरकोर्स करने से कतराने लगती हैं इसलिए अगर इस की मूल वजह को सुधार दिया जाए और लड़कियों को युवा उम्र से ही अपनी साफसफाई रखने की बात सिखाई जाए तो इस से बेहद तेजी से बढ़ते यौन बीमारियों के मामले नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. मूल मुद्दों की जानकारी के अभाव के कारण ही अकसर लड़कियों में यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्रमार्ग) के इंफैक्शन हो जाते हैं और जेनिरी-यूरिनरी सिस्टम में भी फंगल इंफैक्शन हो जाता है. इसलिए जितनी जल्दी हो इस का खास ध्यान रखें.

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