खो गई जीनत : अम्मी और अब्बू में किसी हुई जीत

अम्मी और अब्बू की सिर्फ तसवीर ही देखी थी जीनत ने. उन का प्यार कैसा होता है, इस का उसे कोई अहसास ही नहीं था.

अम्मी और अब्बू के एक सड़क हादसे में मारे जाने के बाद मामी और मामू ही जीनत का सहारा थे.

मामू ने जीनत को पढ़ायालिखाया और इस लायक बनाया कि बड़ी हो कर वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके और मामू का सहारा बने.

मामू की माली हालत भी कोई बहुत अच्छी नहीं थी. एक कमरे के मकान के बाहर मामू ने एक छोटा सा खोखा रख रखा था. वे उस में बिसातखाने का सामान रख कर बेचते थे.

जो औरतें सामान खरीदने आ भी जातीं, वे मामू से इतना मोलभाव करतीं कि किसी चीज पर मिलने वाला मुनाफा कम हो जाता और वैसे भी मामू को बाहर की औरतों से बहुत लगाव महसूस होता था और वे चाहते थे कि औरतें उन के खोखे पर

आ कर मामू से बातें करती ही रहें. उन की इसी कमजोरी का फायदा चालाक औरतें खूब उठाती थीं. वे मामू से खूब रसीली बातें करतीं और सामान सस्ते में खरीद लेतीं.

घर में 5 लोग थे. मामू, मामी, उन के 2 बच्चे और एक जीनत. इन सब का खर्च चलाने की जिम्मेदारी जीनत के कंधों पर ही थी, इसीलिए वह शहर के ही एक स्कूल में कंप्यूटर पढ़ाने का काम करने लगी थी.

जीनत के मामू जितने लापरवाह किस्म के थे, मामी उतनी ही सख्त थीं.

‘‘मैं तो कहती हूं कि घर में अगर लड़की हो तो उस पर एक नजर टेढ़ी ही रखनी चाहिए और घर की अंदरूनी बातों में लड़की जात को ज्यादा शामिल नहीं करना चाहिए,’’ मामी ने पड़ोस में रहने वाली शकीला से कहा और शकीला ने भी हां में हां मिलाई.

‘‘हां… सही कहा आप ने और इसीलिए मैं ने अपनी बेटी सलमा का स्कूल जाना बंद करवा दिया है. अब 8वीं जमात तो पास हो ही गई है, आगे की पढ़ाई के लिए लड़कों वाले स्कूल में भेजना पड़ेगा और हम ने तो सुना है

कि वहां लड़का और लड़की एकसाथ बैठते हैं.’’

मामी की इसी सख्ती का नतीजा था कि जीनत ने अपनेआप को बहुत संभाल रखा था और हमेशा ही डरीसहमी सी रहती थी.

इस सहमेपन के साथ जीतेजीते जीनत 30 साल की हो गई थी और अभी तक कुंआरी थी. ऐसा नहीं था कि उस के लिए शादी के पैगाम नहीं आए, पर भला मामू उस की शादी करा देता तो घर के लिए पैसे कौन लाता.

मामूमामी की सोच यही थी कि जीनत इसी घर में ही रहे और पैसे लाती रहे.

मामू और मामी के दोनों बेटे भी अब जवान हो चले थे. उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को भरपूर सम?ाते हुए कुछ पैसे जोड़े, कुछ पैसा बैंक से लोन लिया और अपने अब्बा की बिसातखाने की दुकान को अब एक बढि़या मेकअप  सैंटर में तबदील कर दिया था.

जीनत भी मेहनत से स्कूल में अपनी ड्यूटी पूरी करती और घर आ कर मामी के साथ रसोईघर में मदद करती.

जीनत ने अपनी जवान होती भावनाओं को अच्छी तरह से काबू कर रखा था, पर फिर भी जवानी में किसी की तरफ ?ाकाव होना बड़ा ही लाजिमी होता है और जीनत भी कोई अलग नहीं थी.

‘‘अरे जीनत मैडम… मैं ने एक शायरी लिखी है… जरा इस पर गौर तो फरमाइएगा,’’ जीनत के साथ ही स्कूल में पढ़ाने वाले एक साथी टीचर आफताब ने कहा.

‘‘अजी, आप की शायरी का क्या सुनना… वह तो हमेशा की तरह अच्छी ही होती हैं… हां, अगर आप फिर भी अपनी और तारीफ सुनना चाहते हैं तो सुना सकते हैं.’’

‘‘किसी आशिक के कलेजे को जलाया होगा, तब जा कर खुदा ने सूरज को बनाया होगा.’’

‘‘अरे वाह… क्या बात है… बहुत ही उम्दा… लगता है, सूरज से कुछ ज्यादा ही प्यार है आप को और तभी तो आप ने तखल्लुस भी सूरज ही रखा है.’’

‘‘जी, बिलकुल सही कहा आप ने, इसीलिए मेरा नाम तो आफताब भले ही है, पर मैं चाहता हूं कि अब लोग मुझे सूरज के नाम से ही पुकारें,’’ आफताब ने कहा.

‘‘हां जी… ऐसी बात है तो मैं

आप को सूरज के नाम से ही बुलाऊंगी,’’ जीनत ने कहा.

2 जवां दिलों के बीच प्यार को पनपने के लिए कुछ खास की जरूरत नहीं होती, बस थोड़ा सा अपनापन का पानी, खूबसूरती की खाद और प्यार के फल आने लगते हैं.

आफताब एक सीधासादा लड़का था, जो जिंदगी से जूझ रहा था, फिर भी हमेशा मुसकराता रहता और अपनी जिंदगी के गम को शायरी में कह कर उड़ा दिया करता था. पर माली हालत की बात करें तो आफताब जीनत से तो बेहतर ही था.

इस बार नए साल पर आफताब ने जीनत को एक मोबाइल फोन गिफ्ट कर दिया. जीनत ने बहुत नानुकर की, पर आफताब ने ऐसी दलील दी कि उसे चुप हो जाना पड़ा.

‘‘देखिए मैडम, यह मैं आप को इसलिए गिफ्ट कर रहा हूं, ताकि मैं आप को ह्वाट्सएप पर अपने शेर भेज सकूं और आप उस की अच्छाइयां और कमियां मुझे बताएं, जिस से मुझे और बेहतर शायर बनने में मदद मिल सकेगी. क्या अब भी आप यह मोबाइल नहीं लेंगी?’’

‘‘ठीक है, ठीक है… ले लेती हूं… पर जब मैं अपने घर पर रहूंगी, तब आप फोन नहीं करेंगे… हां, मैसेज में बात जरूर कर सकते हैं.’’

‘‘ठीक है जीनतजी.’’

जीनत और आफताब को एकदूसरे का साथ अच्छा लग रहा था और दोनों ही अपनी आगे की जिंदगी एकदूसरे के साथ गुजरने की बात सोच रहे थे, पर हमेशा ही इनसान का सोचा हुआ कहां होता है?

इतनी जिंदगी गुजरने के बाद एक बात तो जीनत मन ही मन जान चुकी थी कि मामू और मामी उस की शादी जानबूझ कर नहीं करना चाहते और वे लोग यही चाहते हैं कि जीनत उन के लिए बस ऐसे ही पैसे कमाती रहे और वे लोग आराम से मजे करते रहें, इसलिए जीनत इस बाबत मामी से खुद ही बात करने की सोचने लगी.

एक रात को आफताब ने कुछ शायरियां लिख कर जीनत के मोबाइल पर भेजीं और पूछा कि कोई सुधार की गुंजाइश हो तो बताए.

जीनत ने सारी शायरियां पढ़ीं और उन का जवाब भी आफताब को लिख दिया और सो गई. सुबह उठी तो स्कूल के लिए देर हो रही थी, इसलिए जल्दी में जीनत मोबाइल अपने बिस्तर पर ही भूल गई.

‘‘चलो फिर मैं आज तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं,’’ अपनी बाइक की तरफ इशारा करता हुआ आफताब बोला.

जीनत पहले तो हिचकिचाई, क्योंकि गली के नुक्कड़ पर ही तो मामू की दुकान है. बहुत मुमकिन है कि घर के लोग आफताब के साथ उसे देख लें.

‘देख लें तो देख लें, मैं कोई चोरी तो नहीं कर रही. और फिर आज तो मुझे वैसे भी आफताब के बारे में बात करनी ही है,’ ऐसा सोच कर जीनत ने बाइक पर जाने के लिए हां कर दी और आफताब के साथ बैठ कर चल दी.

जीनत कुछ देर बाद घर के सामने पहुंचने वाली थी. उस ने आफताब को उसे वहीं उतार देने को कहा और वह घर तक पैदल ही चली गई.

घर में अंदर का नजारा ही अलग था. मामू, उन का बेटा असलम और मामी एकसाथ बैठे हुए थे. वे जीनत को घूर रहे थे.

‘‘अरे जीनत बेटी… बहुत थक गई होगी,’’ मामू ने कहा.

‘‘हां… मामू… स्कूल में काम ही इतना होता है, थोड़ीबहुत थकान आना तो लाजिमी ही है,’’ जीनत ने कहा.

जीनत का इतना कहना ही था कि मामी बिफर उठीं, ‘‘हां… हां थकान तो आएगी ही, जब देर रात तक किसी दूसरे लड़के से चक्कर चलाया जाएगा.’’

जीनत को तुरंत ही याद आया कि आज वह अपना मोबाइल घर में ही भूल गई थी और इसीलिए मामी ऐसा बोल रही हैं.

‘‘वह मामी, मैं आप से बात करने ही वाली थी… आज,’’ जीनत हकला गई.

‘‘अरे, तू क्या बात करेगी… तू तो चक्कर चला रही है. और वह भी किसी गैरधर्म के लड़के के साथ…’’

‘‘अरे नहीं मामी… वह तो आफताब…’’

‘‘बता कौन है यह सूरज… जो तुझे से अपनी मुहब्बत का इजहार शेरोशायरी से कर रहा है? और जिस का जवाब भी तू खूब वाहवाह कर के दे रही है…

‘‘अरे, मैं कह रही हूं कि हमारी जात में कोई लड़के नहीं रह गए थे, क्या जो तू किसी हिंदू लड़के से…’’

‘‘नहीं मामी… वह सूरज नहीं, आफताब है और हमारे ही धर्म का है… मैं खुद ही आज आप से अपनी शादी के बारे में बात करने वाली थी,’’ जीनत बोलती चली गई.

‘‘अरे, तू दोचार शब्द पढ़ क्या गई है, मुझे ही शब्दों के मतलब समझाने लगी है… और तू समझ क्या रही है, तू किसी भी जात वाले से शादी करने को कहेगी और हम कर देंगे. तुझे ऐसे ही हमारे लिए पैसे कमाने होंगे. भूल जा कि तेरी कभी शादी भी होगी,’’ मामी का पारा चढ़ चुका था.

‘‘शादी तो मैं सूरज से ही करूंगी… और आप सब को बताना चाहूंगी कि मैं सूरज के बच्चे की मां बनने वाली हूं…’’ जीनत ने यह बात सिर्फ इसलिए कह दी थी कि ऐसा सुन कर मामू और मामी का पारा कम हो जाएगा, पर इस बात ने आग में घी डालने का काम किया था.

‘‘आप लोग नहीं मानोगे, तो जबरदस्ती ही सही… देखती हूं कि मुझे कौन रोकता है,’’ जीनत भी अड़ गई थी.

‘‘मैं रोकूंगी तु?ो… नमकहराम… हमारी नाक कटवाती है… महल्ले में हमारा जीना मुश्किल करना चाहती है,’’ मामी चिल्ला रही थीं.

जीनत ने सोचा कि जब बात इतनी बढ़ ही चुकी है, तो आफताब को भी फोन कर के यहीं बुला लेती हूं और इस गरज से उस ने मामी के हाथ से अपना मोबाइल छीन कर आफताब को फोन कर दिया.

‘‘हां… तुम मेरे घर आ जाओ… सब लोग घर पर ही हैं… आमनेसामने बैठ कर बात हो जाएगी.’’

आफताब अभी ज्यादा दूर नहीं गया था, वह तुरंत ही लौट पड़ा.

मामू ने जीनत के विद्रोही सुर देखे तो मामी को शांत कराने लगे.

‘‘ठीक है जीनत… तुम्हारे फैसले को हमारी भी हां है… जैसा तुम चाहो वैसा करो,’’ मामू ने कहा.

पर असलम को काटो तो खून नहीं, उसे यह बात कतई मंजूर नहीं हो पा रही थी कि किसी लड़के को घर बुला कर जीनत खुद ही अपनी शादी की बात करे.

कुछ देर बाद ही आफताब वहां आ गया. अभी उस ने दरवाजे के अंदर पहला कदम रखा ही था कि असलम उसे देख कर भड़क गया.

असलम ने तुरंत ही आफताब का कौलर पकड़ लिए और उस को जमीन पर गिरा कर लातघूंसे चलाने लगा.

आफताब को अचानक इस हमले की उम्म्मीद नहीं थी, इसलिए वह असलम का विरोध नहीं कर सका. अब तो मौका देख कर जीनत के मामू ने भी आफताब को मारना शुरू कर दिया. वे दोनों आफताब को मारते हुए बाहर ले आए, जीनत आफताब को बचाने दौड़ी, तो मामी ने उसे पकड़ लिया.

बाहर महल्ले के लोग जमा होने लगे थे.

‘‘दिनदहाड़े चोरी करने घुसता है. आज तुझे नहीं छोड़ेंगे,’’ असलम चीख रहा था.

एक चोर को पिटता देख कर जमा हुई भीड़ की हथेलियों में भी खुजली होने लगी थी. बिना जाने कि सच क्या है, भीड़ ने भी बेतहाशा आफताब को मारना शुरू कर दिया.

जीनत ने बड़ी कोशिशों से अपनेआप को मामी की गिरफ्त से आजाद किया और आफताब को बचाने दौड़ी.

भीड़ अब भी आफताब को मारे जा रही थी… जीनत आफताब तक पहुंच ही नहीं पा रही थी… वह लगातार चीख रही थी, ‘‘मत मारो इसे… यह चोर नहीं है…’’ पर भीड़ तो खुद ही वकील होती है और खुद ही जज…

इतने में जीनत पिटते हुए आफताब को बचाने की गरज से उस से जा चिपकी, पर गुस्साई भीड़ को वह दिखाई तक न दी और भीड़ लाठीडंडे बरसाती रही. कुछ ही देर बाद जीनत और आफताब के सिर से खून की धारा निकल पड़ी थी और उन दोनों की लाशें एकदूसरे से लिपटी हुई पड़ी थीं. भीड़ ने अपनी ताकत दिखाते हुए इंसाफ कर दिया था.

स्टेटस: ऑटो रिक्शा चालक का संघर्ष

आटोरिकशा चालक रामलाल ने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए खूब मेहनत की, ताकि अमीर लोग उसे गरीब न कह सकें. बेटा बड़ा हो कर इंजीनियर बन गया और अपने बूढ़े मांबाप को छोड़ कर दूसरे शहर चला गया, ताकि उस के स्टेटस में फर्क न आए…

बेचारा रामलाल आटोरिकशा वाला… हर कोई उस से तूतड़ाक से बात करता था. उसे बहुत बुरा लगता था. वह सोचता, ‘मैं गरीब हूं, लेकिन इनसान तो इन के जैसा ही हूं, फिर ये अमीर लोग इस तरह से क्यों बात करते हैं?’ रामलाल ने मन में प्रण कर लिया कि वह अपने बेटे को बड़ा अफसर बनाएगा, ताकि उस से कोई इस तरह बात न करे. इस के लिए रामलाल दिन में आटोरिकशा चलाता, रात में चौकीदारी करता, ताकि बेटे को बड़े स्कूल में  पढ़ा सके.

बेटा पढ़लिख कर इंजीनियर बन गया. उस का बड़ेबड़े लोगों के साथ उठनाबैठना हो गया था. अब उसे पिता के आटोरिकशा चलाने पर शर्म महसूस होती थी. लिहाजा, उस ने दूसरे शहर में अपना ट्रांसफर करा कर वहीं शादी करने का फैसला किया. कुछ समय बाद बेटे ने अपनी मां को फोन किया, ‘‘मां, कल मैं शादी कर रहा हूं. किसी दिन आ कर मैं आप का आशीर्वाद ले जाऊंगा.’’

यह सुन कर मां ने कहा, ‘बेटा, या तो तू यहां आ कर शादी कर ले या फिर हम वहां आ जाते हैं.’ ‘‘मां, वहां सब मुझे जानते हैं कि मैं आटोरिकशा वाले का बेटा हूं. मुझे शर्म आती है.

यहां मुझे कोई नहीं जानता, इसलिए मैं यहीं रहूंगा. आप यहां नहीं आना, क्योंकि यहां मेरा जो स्टेटस है, उस में आप एडजस्ट नहीं कर पाओगे,’’ बेटे ने कह डाला. इसी बीच रामलाल ने फोन ले कर कहा, ‘बेटा, इसी आटोरिकशा वाले ने ही तेरा यह स्टेटस बनाया है.

क्या तुम्हारी खुशियों में हमें शामिल होने का  या तुम्हारी जिंदगी में हमारा कोई हिस्सा नहीं है?’ यह सुन कर बेटे ने कहा, ‘‘पापा, आप ने जो किया वह अपने अहम के लिए किया. जब भी मेरे अच्छे नंबर आते थे, आप सब को बताते फिरते थे. अब मैं जिस शहर और सर्कल में हूं, वह दूसरा है.

यहां सब के मांबाप पहले से ही हैसियत वाले हैं.  ‘‘आप हमारे समाज को तो जानते ही हैं न, जो धर्म, जाति, रंग के साथसाथ बैकग्राउंड से भी बंटा हुआ है. आप ने ही मुझे समझाया था कि मैं मुसलिम और दलितों से दोस्ती नहीं करूं, क्योंकि वे हम जैसे नहीं हैं. आप और मां भी अब मेरे और आप की बहू जैसे नहीं हैं.’’ रामलाल मुंह खोले सुन रहा था और उस के पास जवाब देने लायक बोल नहीं बचे थे.

ख्वाहिश: ‘बांझ’ होने का ठप्पा

ट्रिंग… ट्रिंग… फोन की घंटी बज रही थी. घड़ी में देखा, तो रात के साढ़े 12 बजे थे. इतनी रात में किस का फोन हो सकता है. किसी बुरी आशंका से मन कांप उठा. रिसीवर उठाया तो दूसरी ओर से अशोक की भर्राई हुई आवाज थी, “दीदी शोभा शांत हो गई. वह हम सब को छोड़ कर दिव्यलोक को चली गई.”

कुछ पल को मैं ठगी सी बैठी रही. फोन की आवाज से मेरे पति सुनील भी जाग गए थे. मैं ने उन्हें स्थिति से अवगत कराया. हम ने आपस में सलाह की और फिर मैं ने अशोक को फोन मिलाया, “अशोक, हम जल्दी ही सुबह जयपुर पहुंच जाएंगे, हमारा इंतजार करना.”

सुबह 5 बजे हम दोनों अपनी गाड़ी से जयपुर के लिए रवाना हो गए. दिल्ली से जयपुर पहुंचने में 5 घंटे लगते हैं. वैसे भी सुबहसुबह सड़कें खाली थीं. अत: 4 घंटे में ही पहुंच जाने की आशा थी. रास्तेभर शोभा का खयाल आता रहा.

अतीत की यादें चलचित्र की भांति आंखों के आगे घूमने लगीं.

शोभा मेरे छोटे भाई अशोक की पत्नी थी. वह बहुत मृदुभाषी, कार्यकुशल और खुशमिजाज की थी. याद हो आया वह दिन, जब विवाह के बाद वरवधू का स्वागत करने के लिए मां ने पूजा का थाल मेरे हाथ में पकड़ा दिया. वैसे, बड़ी भाभी का हक बनता था वरवधू को गृहप्रवेश करवाने का. किंतु बड़ी भाभी की तबियत ठीक नहीं थी, वह पेट से थीं और डाक्टर ने उन्हें बेडरेस्ट के लिए कहा हुआ था. अत: आरती का थाल सजा कर मैं ने ही वरवधू को गृहप्रवेश कराया था. बनारसी साड़ी में लिपटी हुई सिमटी सी संकुचित सी खड़ी थी.

अशोक ने उसे मेरा परिचय देते हुए कहा, “ये मेरी बड़ी दीदी हैं, मुझ से 10 साल बड़ी हैं, मेरे लिए मां समान हैं.”

दोनों ने मेरे पैर छुए. मैं ने भी दोनों को प्यार से गले लगा लिया. विवाह के बाद की प्रथाएं संपन्न करवा कर मैं वापस दिल्ली लौट आई.
2 महीने बाद भाभी की जुड़वा बच्चियों हुईं, जिन का नाम सिया और जिया रखा गया.

प्रसव के बाद भाभी बहुत कमजोर हो गई थीं. अत: घर का सारा कार्यभार शोभा ने संभाल लिया. उसे बच्चों से बहुत प्यार था. वह बच्चों का खयाल बहुत उत्साहित हो कर रखती थी.

मां सारी रिपोर्ट विस्तार से मुझे फोन पर बतलाया करती थीं. बच्चों के प्रति शोभा का अपनत्व देख कर भाभी को बहुत अच्छा लगता था.

जब सिया और जिया का नर्सरी स्कूल में दाखिला हुआ तो शोभा उन्हें तैयार करने से ले कर उन के जूते पौलिश करती, उन्हें नाश्ता करवा के टिफिन पैक कर के उन के स्कूल बैग में रख देती और टिफिन पूरा खत्म करना है, यह भी हिदायत दे देती थी. कभीकभी उन को होमवर्क करने में भी वह मदद करती थी. घर में सब सुचारू रूप से चल रहा था.
शोभा के विवाह को 4 वर्ष हो गए थे. मां जब भी मुझे फोन करती थीं, उन की बातों में कुछ बेचैनी का आभास होता था. वे दिल की मरीज थीं. मैं ने जोर दे कर उन की बेचैनी का कारण जानना चाहा, तो उन्होंने बताया, “अब अशोक की शादी को 4 साल हो गए हैं. अगर उस को एक बेटा हो जाता तो मैं पोते का मुंह देख कर दुनिया से जाती.

“न जाने कब मुझे बुला लें,” मैं उन्हें सांत्वना देती रहती थी कि धैर्य रखो. सब ठीक हो जाएगा.

मैं ने मां की इच्छा शोभा तक पहुंचा दी तो वह हंस कर बोली, “दीदी आजकल पोता और पोती में कोई फर्क नहीं होता. सिया और जिया भी तो अपनी हैं. वही मेरे बच्चे हैं,” बच्चों के प्रति उस की आत्मीयता मुझे बहुत अच्छी लगी.

जिस बात का डर था, वही हुआ. अचानक मां को दिल का दौरा पड़ा और पोते की चाहत लिए हुए वे इस दुनिया से चल बसीं.

शोभा के विवाह को 6 वर्ष हो चुके थे. मैं ने लक्ष्य किया कि अब उस के मन में संतान की चाह प्रबल हो रही थी. अशोक ने कई डाक्टरों से संपर्क किया. कुछ डाक्टरी जांच भी हुई, किंतु नतीजा संतोषप्रद नहीं था. मेरे आग्रह पर दोनों दिल्ली भी आए. मेरी जानकार डाक्टर ने रिपोर्ट देख कर यही निष्कर्ष निकाला कि शोभा मां नहीं बन सकती.

अशोक ने सब तरह के उपचार किए, चाहे आयुर्वेदिक हो या होमियोपैथी. यहां तक कि कुछ रिश्तेदारों के कहने पर झाड़फूंक का भी सहारा लिया, किंतु निराश ही होना पड़ा. इस का असर शोभा के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा.
शोभा प्राय: फोन कर के मुझे इधरउधर की बहुत सी खबरें देती रहती थी. उस ने एक घटना का जिक्र किया कि कुछ दिन पहले उस के किसी दूर के रिश्तेदार के यहां पुत्र जन्म का उत्सव था. वहां अशोक और शोभा के साथसाथ बड़े भैयाभाभी भी आमंत्रित थे. वहां पहुंच कर जब शोभा ने नवागत शिशु को पालने में झूलते देखा तो वह अपने को रोक ना पाई और आगे बढ़ कर बच्चे को गोद में उठा लिया. तभी पीछे से बच्चे की दादी ने उस के हाथ से बच्चे को छीन लिया और अपनी बहू को डांटते हुए कहा, “तेरा ध्यान कहां है? देख नहीं रही बच्चे को बांझ ने उठा लिया है.”

शोभा ने बताया कि बड़ी भाभी भी वहीं खड़ी थीं. यह बात बतलाते समय शोभा की आवाज में पीड़ा झलक रही थी. मेरा मन संवेदना से भर उठा.

आशोभा ने बतलाया कि अब सिया और जिया उस के पास नहीं आती हैं. या यों कहिए कि भाभी उन बच्चों को शोभा के पास नहीं आने देतीं. इस का कारण भी वह समझ गई थी.

बांझपन का एहसास शोभा को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा था. मैं अपनी गृहस्थी में बहुत व्यस्त हो गई थी. मेरे दोनों बच्चे विवाह योग्य थे. अगले वर्ष मेरे पति रिटायर होने वाले थे. अतः हम भविष्य की योजनाओं में व्यस्त हो गए थे. कभीकभी मैं शोभा को फोन कर के उन की कुशलक्षेम जान लेती थी.
फिर एक दिन अशोक का फोन आया. बातचीत से लगा कि वह बहुत परेशान है. मैं ने 3-4 दिन के लिए जयपुर का प्रोग्राम बना लिया. फीकी मुसकराहट से शोभा ने स्वागत किया. वह बहुत कमजोर हो गई थी. अशोक उस की स्थिति से बहुत चिंतित हो गया था. मुझे लगा कि ‘बांझ’ शब्द ने उस को भीतर तक आहत कर दिया है. वह बोली, “अब तो सिया और जिया भी मेरे पास नहीं आती.”

मैं ने प्यार से शोभा को अपने पास बैठाया और कहा, “मेरी बात ध्यान से सुनो और समझने की कोशिश करो. मैं चाहती हूं कि तुम किसी नवजात शिशु को गोद ले लो या कुछ अच्छी संस्थाएं हैं, जहां से बच्चे को लिया जा सकता है. ऐसा करने से एक बच्चे का भला हो जाएगा. उसे एक प्यारी मां मिल जाएगी और तुम्हें एक प्यारा बच्चा मिल जाएगा. यह एक नेक कार्य होगा. एक बच्चे का जीवन अच्छा बन जाएगा. तुम चाहो तो इस में मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं.”

लेकिन शोभा ने गंभीरता से उत्तर दिया, “दीदी, मैं अपनी तकदीर तो बदल नहीं सकती. यदि मेरी तकदीर में संतान का सुख लिखा ही नहीं है तो गोद ले कर भी मैं सुखी नहीं रह पाऊंगी,” कुछ रुक कर वह फिर बोली, “दीदी, मैं अपनी कोख से जन्मा बच्चा चाहती हूं, गोद लिया हुआ नहीं.”

वह अपने फैसले पर अडिग थी और मैं उस के फैसले के आगे निरुतर हो गई.

15 दिन बाद अशोक का फोन आया, वह आवाज से बहुत परेशान लग रहा था. उस ने बताया कि शोभा अब अकसर बीमार रहती है. उसे भूख नहीं लगती है और जबरदस्ती कुछ खाती है तो हजम नहीं होता उलटी हो जाती है. मैं ने सलाह दी कि तुरंत डाक्टरी जांच करवाओ. शोभा की तरफ से मुझे चिंता हो गई. अत: अशोक को सहारा देने के मकसद से मैं ने 3-4 दिन का जयपुर जाने का कार्यक्रम बना लिया.

अशोक ने शोभा के सारे टेस्ट करवा लिए थे. मेरे पहुंचने के अगले दिन वह अस्पताल से रिपोर्ट ले आया. वह बहुत उदास था. मेरे पूछने पर उस ने बताया कि शोभा की किडनी में कैंसर है, जो बहुत फैल गया है. अगर एक महीने पहले जांच करवा लेते तो शायद आपरेशन द्वारा किडनी निकाल देते, लेकिन अब तो कैंसर किडनी के बाहर तक फैल गया है. एक और विशेष बात जो डाक्टर ने बतलाई, वह यह कि शोभा प्रेग्नेंट भी है. प्रेगनेंसी की अभी शुरुआत ही है. एक हफ्ते बाद निश्चित तौर पर पता चल पाएगा. अचरज से मेरा मुंह खुला रह गया. समझ नहीं आया कि दुखी होऊं या खुशी मनाऊं.

शोभा ने मेरी और अशोक की बातें सुन ली थीं. वह मुसकराते हुए बोली, “दीदी, अशोक तो यों ही घबरा जाते हैं. मैं सहज में इन का पीछा छोड़ने वाली नहीं हूं और अब तो मुझे जीना ही है. उस की बातें आज भी मेरे कानों में गूंज रही हैं.
बाद में अशोक ने मुझे बतला दिया था कि डाक्टरों के अनुसार गर्भ को गिरा देने में ही बेहतरी है, क्योंकि कैंसर किडनी से बाहर निकल कर फैल रहा है, अगर तुरंत आपरेशन कर के किडनी निकाल भी दें, फिर भी शोभा का जीवन एक वर्ष से अधिक नहीं होगा और अगर गर्भपात नहीं करवाया तो कैंसर के आपरेशन के बाद की थेरेपी से बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है. या तो वह बचेगा ही नहीं और अगर बच भी जाए तो एब्नार्मल भी हो सकता है. अत: डाक्टर की राय में गर्भपात ही उचित होगा.

शोभा ने सबकुछ सुन लिया था. वह खुश नजर आ रही थी. वह बोली, ”दीदी, मुझे यही खुशी है कि अब मुझे कोई बांझ नहीं कहेगा. डाक्टरों का निर्णय ठीक ही है. मेरे जीवन का सूर्य अस्त हो रहा है. मैं बच्चे को देख पाऊंगी या नहीं, पता नहीं. अगर बच्चा बच भी गया और विकलांग हो गया तो और भी दुःख होगा. तसल्ली यही है कि अब मेरे ऊपर से ‘बांझ’ होने का लांछन हट गया. अब मैं शांतिपूर्वक मर सकूंगी.”

सहसा कार एक झटके के साथ रुक गई. सुनील ने ब्रेक मारा था, क्योंकि सामने एक बड़ा सा गड्ढा आ गया था. मेरी विचार श्रृंखला टूट गई. अब हम जयपुर की सीमा में पहुंच गए थे. बाजार के बीच से गुजरते हुए याद आया कि यहां कई बार शोभा के साथ चाट खाने आती थी, फिर खूब शौपिंग कर के हम दोनों शाम तक घर पहुंचते थे. अब तो केवल याद ही बाकी है.

ठीक साढ़े 9 बजे हम घर पहुंच गए. गाड़ी की आवाज सुन कर अशोक बाहर आ गया. सहारा दे कर उस ने गाड़ी से उतारा और मेरे गले से लग कर जोर से रो पड़ा. अंदर पहुंच कर देखा, शोभा का शव भूमि पर रखा था, बड़ी शांत मुख मुद्रा थी जैसे कुछ कहना चाहती हो. मैं अपने को ना रोक सकी और फफक कर रो पड़ी.
वह समाप्त हो गई. 2 दिन बाद बहुत बोझिल मन से हम दोनों वापस लौट आए. रास्तेभर सोचती रही कि समाज के उलाहनों ने शोभा को बहुत चोट पहुंचाई, लेकिन मरने से पहले उसे यह खुशी थी कि वह बांझ नहीं थी, पर बच्चे की ख्वाहिश अधूरी ही रह गई.

Physical Relation : Boss मेरे साथ सैक्स करने की जिद कर रहा है

अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें..

सवाल –

मैं दिल्ली के द्वारका इलाके की रहने वाली हूं और मेरी उम्र 30 साल है. करीब 2 साल पहले ही मेरी शादी हुई है. मेरे पति का खुद का बिजनेस है और मैं एक मल्टीनैशनल कंपनी में जौब करती हूं. मेरे पति काम की वजह से अक्सर रात को देरी से घर आते हैं और औफिस जाने के कारण मैं भी थक कर जल्दी सो जाती हूं तो ऐसे में मेरे पति और मेरे बीच काफी कम ही बातचीत हो पाती है. हाल ही में मेरे औफिस में नए बौस ने ज्वाइन किया है जो दिखने में बहुत हैंडसम और फिट है. वह मुझसे उम्र में 3 साल छोटा है लेकिन उसकी फिजिकल बौडी कमाल की है. मैं उसे मन ही मन पसंद करने लगी थी और शायद वो भी मुझसे कुछ चाह रहा था. देखते ही देखते हम दोनों ने एक दूसरे को अपना नंबर दिया और मैसेज पर रोजाना बात होने लगी. कुछ दिनों से अब बौस मेरे साथ सैक्स करने की जिद कर रहा है और मुझे अपने साथ होटल चलने को कह रहा है. सच कहूं तो उसके साथ सैक्स करने का मेरा भी बहुत मन है लेकिन मुझे डर है कि अगर मेरे पति को इस बारे में पता चल गया तो वे कहीं मुझसे तलाक ना ले लें. मुझे क्या करना चाहिए ?

जवाब –

पति-पत्नी के रिश्ते की डोर बहुत नाजुक होती है और यह डोर सिर्फ विश्वास पर टिकी होती है. जब रिश्ते में विश्वास खत्म हो जाता है तो फिर उस रिश्ते के कोई मायने नहीं रहते. आप जो कर रही हैं या जो सोच रही हैं वे बिल्कुल गलत है. आपके पति काम में बिजी रहते हैं क्यूंकि उनके ऊपर घर चलाने की जिम्मेदारी है और ऐसे में अगर आप किसी दूसरे लड़के के साथ संबंध बना लेंगी तो सोचिए उनके दिल पर क्या बीतेगी ?

अगर आपको अपने पति से कोई शिकायत है तो आप उनके साथ शेयर करें और उन्हें बताएं कि आप उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहती हैं तो उनको अपने काम का साथ साथ आपको भी समय देना चाहिए. आप अपने पति से कहिए कि वे अपने काम से कुछ दिनों की छुट्टी ले लें और आप दोनों एक साथ किसी ट्रिप पर चले जाइए जिससे कि आप दोनों एक दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिता पाएं जो आपने काफी समय से नहीं बिताया है.

आपको अपने औफिस वाले लड़के के साथ सारे संबंधों को खत्म कर देना चाहिए क्यूंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आपका बसा बसाया घर सिर्फ एक गलती की वजह से तहस नहस हो सकता है. एक बार जो घर उजड़ जाते हैं उन्हें बसाने में लोगों की जिंदगी बीत जाती है.

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Sex Mistakes : रात को एकदूसरे के करीब आकर न करें ये 8 गलतियां

क्या औफिस से घर पहुंचने पर आप थक कर चूर हो जाते हैं और आप के पार्टनर का प्यार भरा स्पर्श भी आप में उत्तेजना पैदा नहीं करता? क्या उस के साथ प्यार करना आप को पहाड़ खोदने जैसा लगता है?

जी हां, शाम को थक कर चूर हुए कई कपल्स अकसर घर आ कर अपने पार्टनर से मुंह बिचकाते नजर आते हैं. अगर आप के साथ भी ऐसा होता है तो मुंह बिचकाने से पहले सोचें कि शादी का मतलब यह कतई नहीं है कि रोमांटिक फीलिंग्स ही हवा हो जाएं. प्यार का एहसास उस समय कंप्लीट होता है, जब 2 जिस्म 1 जान बन जाते हैं. तब उन के बीच लव की फीलिंग इतनी होती है कि उन की बौडी भी एकदूसरे को ऐक्सैप्ट कर लेती है और तब वे लव मेकिंग करने लगते हैं.

इस दौरान कपल्स ऐसी कई गलतियां कर बैठते हैं, जिस से वे सैक्स को पूरी तरह ऐंजौय नहीं कर पाते. जानिए कैसे इन गलतियों से बचा जाए और लव मेकिंग से पहले किन बातों का ध्यान रखा जाए, ताकि जोड़ा दुनिया की सब से प्यारी फीलिंग को सम झ पाए और उसे दिल से अपना सके.

डिस्कस करने में हिचकिचाहट

कभीकभी एक पार्टनर अपनी लव मेकिंग को स्पाइसी तो बनाना चाहता है, लेकिन वह अपने पार्टनर से कुछ कहने में हिचकिचाता है. हो सकता है आप के साथ भी ऐसा होता हो. आप मानें या न मानें 90प्रतिशत केसेज में आप का पार्टनर भी नई चीजें करना पसंद करता है, लेकिन आप की ही तरह उसे भी बात करने में हिचकिचाहट या घबराहट होती है.

डिस्कस करने से घबराएं नहीं और यह कोई रूल नहीं है कि मेल पार्टनर ही पहल करे. दोनों में से कोई भी पहल कर सकता है और दर्जनों तरीकों में से किसी एक तरीके को चुन कर पूरे जोश से उसे ट्राई कर सकता है. सैक्स के बारे में डिस्कशन से जोड़े लव मेकिंग तो ऐंजौय करेंगे ही, अपने रिश्तों में मिठास भी लाएंगे.

कनविंस करना न आना

अगर एक पार्टनर थका हुआ है और सैक्स के मूड में नहीं है तो दूसरा कई बार उसे रेडी करने में असफल हो जाता है. एक सच यह भी है कि सैक्स के लिए जब कोई रेडी होता है, तो उस समय उस की बौडी से ऐड्रीनलीन कैमिकल रिलीज होता है, जो प्यार या सैक्स करने की भरपूर ऐनर्जी देता है.

पार्टनर को शाम को मूड में लाने के लिए सुबह 9 से 10 बजे के बीच उसे मैनुअली कई बार बेमतलब छुएं. दिन भर में इस समय टैस्टोस्टेरौन अपने हाई लैवल पर होता है. शाम को बैटर रिजल्ट के लिए आप सैक्सी गारमैंट्स पहनना भी न भूलें. यह उन्हें जरूर पसंद आएगा. ऐसा कर के आप अपनी लव मेकिंग को हमेशा के लिए स्ट्रौंग बना सकेंगे और पार्टनर में दिन भर के काम में थकान के बावजूद सैक्स की इच्छा बनी रहेगी.

जल्दबाजी का चक्कर

तुरंत मजे के चक्कर में कई पुरुष फोरप्ले अवौइड कर देते हैं. उन की कोशिश होती है कि वे जल्द से एक ही बाइट में पूरा सेब खा लें. लेकिन क्या आप को पता है कि फोरप्ले और्गेज्म की ओर बढ़ने में बहुत मदद करता है? अपने पार्टनर के साथ किसिंग, लव बाइट और टच करना आप की लव मेकिंग को ज्यादा मजेदार बनाता है, इसलिए स्पीड कम करिए, पूरा टाइम दीजिए और अपने पार्टनर को छेडि़ए. यह फौर्मूला शर्तिया ही काम करेगा और दोनों का मजा दोगुना हो जाएगा.

अगर आप को लगे कि किसी खास भूमिका में आप के पार्टनर को ज्यादा मजा आ रहा है, तो रुकें और उसे दोबारा करें. जितना ज्यादा आप उसे करेंगे, उतना ज्यादा मजा उसे आएगा और यह आप को भी अच्छा लगेगा. इस ढंग से आप यह गेम खेल कर पार्टनर को पूरे तौर पर सैटिस्फाई कर सकते हैं. इस से प्यार का मजा दोगुना भी हो जाएगा.

पोर्न मूवीज या टौय इस्तेमाल करना

सैक्स के दौरान कई लोगों को लगता है कि पोर्न मूवीज, वीडियो या फिर प्लास्टिक या रबर के टौय से मजा चरम पर पहुंचेगा. ऐसा सोचना या ऐसा करना गलत है. हालांकि टौयज का लव मेकिंग में खास महत्त्व है, लेकिन उन पर निर्भर होना खतरनाक हो सकता है. प्लेजर के लिए बाहरी सोर्स आप को कम मजा देंगे क्योंकि यह तो आप भी नहीं चाहेंगे कि आप के पार्टनर को आप के बजाय किसी सैक्स टौय से प्लेजर मिले.

कपल्स को अपने पार्टनर को सैटिस्फाई करने के लिए बाहरी चीजों के बजाय अपनी बौडी की मदद लेनी चाहिए. सैक्स टौयज को महज स्पाइस के तौर पर इस्तेमाल करें.

और्गेज्म के बारे में गलतफहमी

फीमेल पार्टनर को सैक्स से सैटिस्फाई न कर पाना, कई मेल पार्टनर्स को अपनी तौहीन लगती है, लेकिन उन को सम झने की जरूरत है कि ज्यादातर औरतें सिंपल या नौर्मल सैक्स से और्गेज्म हासिल नहीं कर पाती हैं. अगर पुरुष यह बात सम झ लें तो उन का यह प्रैशर जरूर कम हो जाएगा. अगर स्त्री और्गेज्म तक नहीं पहुंचती है, तो इस से परेशान होने की जरूरत नहीं है. इस के बजाय पुरुष को बड़ी चतुराई के साथ स्त्री को डाउन पोस्चर में ला कर सैटिस्फाई करना चाहिए.

एकसाथ फिनिश करने की कोशिश

पार्टनर्स की एकसाथ फिनिश करने की कोशिश जैसी बातें हवाहवाई हैं. ऐसा होता नहीं है. इस के बजाय एक पार्टनर को पहले सैटिस्फाई करने की कोशिश होनी चहिए. इस में फीमेल पार्टनर पहले सैटिस्फाई हो तो बेहतर. ऐसे में दोनों को खूब मजा आएगा.

हर बार सैट रूटीन से चलना

अगर आप की सारी कसरत कपड़े उतारने और ‘प्लग’ को ‘सौकेट’ में फिट करने की कुछ मिनट की मेहनत तक है, तो यह काफी बासी और सैट रूटीन है. ऐसे में आप की लव मेकिंग चाहे कितनी भी फैंटास्टिक हो कुछ सालों के बाद बोरिंग हो ही जाती है, जिस का आप के रिश्ते पर भी असर पड़ सकता है. आप की लव लाइफ को बचाने का तरीका नए आइडियाज में छिपा है. अगर आप नए टिप्स और नई तकनीकें अपनाते हैं, तो इसे दोनों ऐंजौय करेंगे और आप हर बार प्यार में खो जाना चाहेंगे.

बेमतलब की बातें करना

अगर आप बिस्तर पर रोजाना लड़ाई झगड़े की या नैगेटिव बातें करेंगे, तो उस समय हो सकता है कि आप का मूड सैक्स से हट कर फ्यूचर प्लानिंग या लड़ाई झगड़े की बातें सुनने में रह जाए. अगर ऐसा कुछ करना हो तो बिस्तर

पर जाने के करीब 1 घंटा पहले कर लें. इस के लिए दोनों को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए. दोनों पार्टनर्स की यही कोशिश हो कि वे एकदूसरे के मूड को स्पाइसअप करें और दोनों को चिल रखें, ताकि आप के बीच का प्यार बढ़ता ही जाए.

किसे कहा जाता है Bhojpuri Films की सनी लियोनी

Bhojpuri Films की सनी लियोनी कही जाने वाली सनी सिंह का असली नाम शायद ही कोई जानता हो, क्योंकि सनी लियोनी की तरह दिखने वाली पल्लवी सिंह ने अपना नाम बदल कर sunny singh सनी सिंह जो रख लिया है. उन के चेहरे व बदन की बनावट हूबहू सनी लियोनी से मिलती है इसीलिए उन के फैन उन्हें सनी लियोनी ही कह कर बुलाते हैं.

सनी सिंह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की रहने वाली हैं. उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में ऐक्टिंग की शुरुआत सुपरस्टार पवन सिंह के साथ फिल्म ‘लेके आजा बैंडबाजा ए पवन राजा’ में पवन सिंह की साली के रोल से की थी. वे भोजपुरी फिल्म ‘विधायकजी’, ‘भोजपुरिया राजा’, ‘तीन बुरबक’ समेत उडि़या फिल्म ‘टाइगर’ में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुकी हैं.

SUNNY SINGH से हुई बातचीत के खास अंश:

भोजपुरी फिल्मों में कैसे आना हुआ?

मैं कालेज टाइम से ही थिएटर से जुड़ी रही हूं. स्टेज पर की गई ऐक्टिंग की तारीफ मेरे दोस्तों और रिश्तेदारों ने हमेशा ही की. उन लोगों का कहना था कि मैं एकदम हीरोइन लगती हूं.

इस दौरान एक दोस्त के जरीए मुझे भोजपुरी फिल्मों में ऐक्टिंग करने का औफर मिला. चूंकि मेरा पहले से ही ऐक्टिंग की तरफ रुझान था इसलिए मैं ने इस मौके को गंवाना ठीक नहीं समझा और तुरंत हां कर दी.

यह फिल्म ‘लेके आजा बैंडबाजा ए पवन राजा’ थी जिस में मुझे पहली बार में ही भोजपुरी के सुपरस्टार पवन सिंह के साथ काम करने का मौका मिला था.

आप ने अपना असली नाम पल्लवी सिंह से बदल कर सनी सिंह क्यों रखा?

मैं सनी लियोनी से प्रभावित रही हूं लेकिन मैं ने अपना नाम सनी सिंह खुद ही नहीं रखा. यह नाम मुझे भोजपुरी इंडस्ट्री से ही मिला है क्योंकि भोजपुरी फिल्मों में काम करने के दौरान लोग मुझे असली नाम से न बुला कर सनी लियोनी के नाम से ही बुलाते थे. उन का कहना था कि मैं एकदम सनी लियोनी जैसी लगती हूं, इसलिए मुझे इसी नाम से भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनानी चाहिए.

मैं ने लोगों की मांग पर अपना नाम पल्लवी सिंह से बदल कर सनी सिंह कर लिया और आज यही बदला हुआ नाम मेरी पहचान बन गया है.

आप फिल्मों में आइटम डांस में ज्यादा नजर आती हैं. क्या आप को दूसरी हीरोइनों की तरह लीड रोल वाली फिल्में नहीं मिल रही हैं?

ऐसा बिलकुल नहीं है. मैं ने अभी तक सिर्फ 2 फिल्मों में ही आइटम डांस किया है, जबकि 8 फिल्मों में मैं ने बतौर हीरोइन काम किया है.

पर आप ने सैकंड लीड वाली फिल्में ज्यादा की हैं. क्या वजह रही है कि आप को मेन लीड की फिल्में नहीं मिल रही हैं?

इस की वजह यह रही है कि मैं भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में किसी की मदद के बिना ही आई हूं. इस इंडस्ट्री में मैं ने जो भी मुकाम हासिल किया है वह खुद के हुनर की बदौलत हासिल किया है. ऐसे में खुद को साबित करने के लिए वक्त तो लगता ही है. वैसे, आने वाली कई फिल्मों में मैं लीड रोल में नजर आने वाली हूं. मैं रितेश पांडेय के साथ फिल्म ‘किस में कितना है दम’ कर रही हूं. इस फिल्म में मैं लीड रोल में दिखूंगी.

अगर आप को भोजपुरी फिल्मों में सनी लियोनी की तरह बोल्ड सीन करने का औफर मिले तो खुद को तैयार कर पाएंगी?

सनी लियोनी की तरह तो नहीं लेकिन स्क्रिप्ट की मांग रही तो अभी तक जितना किया है उतना बोल्ड सीन करने में कोई गुरेज नहीं होगी.

सुना है कि आप के परिवार वालों को आप के ऐक्टिंग करने पर एतराज है? ऐसे में फिल्मों में खुद को बनाए रखना कितना मुश्किल रहा?

मैं उत्तर प्रदेश के उस शहर से हूं, जहां तमाम तरह की बंदिशें लगाई जाती हैं. मुझे भी इन्हीं बंदिशों का सामना करना पड़ा. जब मैं ने अपने मातापिता और परिवार वालों को भोजपुरी फिल्मों में काम करने की बात बताई तो मातापिता का कहना था कि फिल्म में काम करने के बजाय नौकरी कर लो. लेकिन फिल्मों में ऐक्टिंग के मेरे रुझान और जुनून को देखते हुए बाद में वे बोले कि ठीक है, पर संभल कर काम करना.

आप की आने वाली फिल्में कौनकौन सी हैं? आप का इन फिल्मों में किस तरह का रोल है?

मेरी कई फिल्में आ रही हैं. इन में ‘गदर 2’, ‘तुम्हीं तो मेरी जान हो राधा’, ‘सुनो ससुरजी 2’, ‘चोर मचाए शोर’ और ‘किस में कितना है दम’ खास हैं.

‘गदर 2’ भारतपाकिस्तान के रिश्तों पर बनी फिल्म है. मैं ने फिल्म ‘चोर मचाए शोर’ में एक मजबूत लड़की का किरदार निभाया है. सुब्बा राव की फिल्म ‘सुनो ससुरजी’ में एक प्रमोशनल गाना किया है.

आप खुद को फिट व बोल्ड बनाए रखने के लिए क्या करती हैं?

अब वह जमाना गया, जब भोजपुरी हीरोइनों का फिगर भरापूरा हुआ करता था और लोग उस तरह की हीरोइनों को पसंद करते थे. अब भोजपुरी में फिट और स्लिम हीरोइनों को ही पसंद किया जाता है, इसलिए मैं अपनी फिटनैस को ले कर काफी सजग रहती हूं.

मैं खुद को फिट बनाए रखने के लिए रोजाना जिम जाती हूं और अपने खानपान का खासा खयाल रखती हूं.

इन Sex Problems की वजह से टूट जाती है शादी

सैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुन कर हम सबके मन में एक अलग सी खुशी की लहर दौड़ने लगती है और दिल खुशनुमा सा होने लगता है. हम सब सैक्स को एंजौय करते हैं और हम सबको लगता है कि सैक्स ऐसा होना चाहिए कि कुछ देर के लिए तो बस ऐसी फीलिंग आए कि हम जन्नत में पहुंच गए हैं. हर इंसान अपनी लाइफ में बहुत बार सोचता है कि वे अपने सैक्स लाइफ को किस तरह से और भी ज्यादा इम्प्रूव कर सकता है.

ऐसा कई बार देखा गया है कि हम सब सैक्स तो करते हैं लेकिन सैक्स को लेकर हमारे मन में कई तरह के विचार आते रहते हैं जैसे कि –
– मैं सैक्स सही से तो कर रहा या कर रही हूं न ?
– मेरा पार्टनर मेरे साथ खुश तो है या नहीं ?
– मैं अपने पार्टनर को अच्छे से सैटिस्फाई कर पा रहा या कर पा रही हूं नहीं ?
– कहीं मेरे अंदर कोई कमी तो नहीं है न ?

ऐसे कई सारे विचार हमारे दिमाग में आए दिन आते हैं जिससे कि हमे डर लगा रहता है कि हमारे सैक्सुअल प्रौब्लम की वजह से हमारा पार्टनर हमें छोड़ तो नहीं देगा. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी सैक्सुअल प्रौब्लम्स और उनके सौल्यूशन्स के बारे में जिससे कि आप अपनी शादी या रिलेशनशिप को टूटने से बचा सकते हैं.

सैक्स टाइमिंग्स

सैक्स टाइमिंग्स को लेकर हमारे मन में कई सारे विचार आते हैं. हर पुरूष को ऐसा लगता है कि उसकी पत्नी या गर्लफ्रेंड चाहती है कि वह लम्बे समय तक सैक्स करते रहें जिससे कि वह सैटिस्फाई हो पाए पर यह गलत है. सैक्स चाहे लम्बे समय तक हो या ना हो पर सैक्स ऐसा होना चाहिए जो आपको और आपके पार्टनर को जन्नत की सैर करा दे. आपको अपने पार्टनर को सिर्फ सैक्स में ही नहीं बल्कि सैक्स से पहले भी सैटिस्फाई करना चाहिए जैसे कि ओरल सैक्स कर के, अपने पार्टनर के नाजुक अंगों को छेड़ कर और अपने पार्टनर की पूरी बौडी पर जमकर किस कर के. ऐसा करने से आपका पार्टनर सैक्स से पहले ही खुद को काफी हद तक सैटिस्फाई फील करेगा.

अगर फिर भी आप को या आप  के पार्टनर लगता है कि आप की सैक्स ड्यूरेशन बहुत ही कम है तो आप को कभी भी खुद से कोई दवाई या स्प्रे जैसा कुछ नहीं लेना चाहिए बल्कि एक अच्छे सैक्स स्पैशलिस्ट से मिलना चाहिए और उससे यह सब डिस्कस करना चाहिए.

लिंग का साइज

विदेशी पोर्न वीडियोज ने हमारे मन एक बात डाल दी है कि लिंग काफी लंबा होगा तभी लड़कियां सैटिस्फाई हो पाएंगी और इसी कारण कई लड़के इंटरनेट से पढ़ कर लिंग लम्बा करने की दवाइयां लेने लग जाते हैं जिस के कई साइड इफैक्ट्स होते हैं. ऐसा करना और ऐसा सोचना काफी हद तक बिल्कुल गलत है. आपका पार्टनर आपके लिंग के साइज से नहीं बल्कि आपकी परफौर्मेंस से सैटिस्फाई होता है.

अगर आपके लिंग का साइज ज्यादा लम्बा नहीं है पर आपकी परफौर्मेंस काफी अच्छी है तो आपके पार्टनर को आप से कभी कोई शिकायत नहीं होगी. अगर फिर भी आप को और आप के पार्टनर को लगता है कि आप के लिंग का साइज काफी छोटा है और ठीक से परफौर्म नहीं कर पा रहा तब आपको जरूर सैक्स स्पैशलिस्ट डौक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

प्री मैच्योर इजैक्यूलेशन

समय से पहले ही अपना स्पर्म लूज़ कर देना या हल्का सा कुछ होते ही पहले ही क्लाइमैक्स तक पहुंच जाने को प्री मैच्योर इजैक्यूलेशन कहा जाता है. प्री मैच्योर इजैक्यूलेशन आजकल काफी कौमन प्रौब्लम है. कई पुरूषों की यही समस्या है कि वह सैक्स करते समय पूरी परफौर्मेंस नहीं दे पाते और समय से पहले से स्पर्म लूज़ कर देते हैं जिससे कि उनकी गर्लफ्रेंड या पत्नी सैटिस्फाई नहीं हो पाती. प्री मैच्योर इजैक्यूलेशन कई चीजों पर डिपैन्ड करता है.

अगर आपको भी ऐसा लगता है कि आप सैक्स के समय अपनी पूरी परफौर्मेंस नहीं दे पा रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द किसी अच्छे डौक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

याद रहे, डौक्टर्स पर जाने से हमें कभी शर्माना नहीं चाहिए और ना ही उनसे कुछ छिपाना चाहिए. सैक्स प्रौब्लम्स डिस्कस करने से किसी की मर्दानगी नहीं घटती बल्कि अगर आपने डौक्टर्स से डिस्कस किए बिना कोई गलत दवाई ले ली तो अपको लेने के देने भी पड़ सकते हैं. बेहतर यही है कि अच्छे स्पैशलिस्ट से संपर्क करें, अकसर ऐसे स्पैशलिस्ट आप की प्रौब्लम को खुद तक ही सीमित रखते हैं. सोसाइटी अब बदल चुकी है ऐसे मामलों में बोलने से वह हिचकती नहीं है और न ही दूसरे का मजाक उड़ाती है.

मौर्निंग Sex के ढेरों हैं फायदें

प्यार करने वालों को कहां पता होता है कि प्यार करने का भी कोई वक्त होता है, उन्हें तो बस प्यार करने से मतलब होता है. आजकल के कपल्स सैक्स को सिर्फ एक प्रोसेस न समझ कर सैक्स को अच्छे से ऐंजौय और पूरी फील के साथ करने में विश्वास रखते हैं और इस के लिए कुछ कपल्स तो पूरी रिसर्च करते हैं कि सैक्स को किस तरफ से ऐंजौय किया जा सकता है.

मौर्निंग सैक्स के हैं बहुत फायदे

कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि सैक्स का वक्त सिर्फ रात का होता है और सोने से पहले सैक्स करना चाहिए पर यह बात पूरी तरह से गलत है. सैक्स को सुबह भी ऐंजौय कर सकते हैं.

पूरे दिन के थके हुए हम जब औफिस या अपने काम से घर आते हैं और खाना खाने के बाद सैक्स करने लगते हैं तो हमारी बौडी में पूरी तरह से ऐनर्जी नहीं रहती कि हम अपने पूरे पोटेंशियल से सैक्स कर पाएं.

तो ज्यादा देर तक कर पाएंगे सैक्स

ऐसे में अगर हम मौर्निंग में उठ कर सैक्स करते हैं तो हमारी बौडी पूरी तरह से चार्ज्ड होती है और हम अपनी पूरी ऐनर्जी के साथ सैक्स कर पाते हैं. रात के अकौर्डिंग सुबह हम देर तक सैक्स कर पाते हैं जिस से कि हमारी सैक्स लाइफ और भी ज्यादा मजेदार बन जाती है.

मौर्निंग सैक्स हमारी बौडी के लिए एक तरह से वर्कआउट का भी काम करता है क्योंकि सैक्स करते समय हम काफी ऐनर्जैटिक होते हैं तो ऐसे में हमारी बौडी का एक अच्छा वर्कआउट भी हो जाता है.

जवान रहने के लिए

नाइट सैक्स की तुलना में मौर्निंग सैक्स एक अच्छा स्ट्रैस रिलीवर माना गया है यानि कि सुबह सैक्स करने से हमारे दिमाग का स्ट्रैस गायब हो जाता है और पूरा दिन खुशहाल रहता है. और तो और मौर्निंग सैक्स हमें ज्यादा समय तक जवान रखता है.

स्टडीज बताती हैं कि मौर्निंग सैक्स हमें जवान दिखने में मदद करता है और इस से हमारा इम्यून सिस्टम भी बूस्ट होता है.

बिस्तर छोड़ने से पहले पत्नी को लें बांहों में

अगर आप ने अभी तक मौर्निंग सैक्स ट्राई नहीं किया है तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं. आप को मौर्निंग सैक्स जरूर ट्राई करना चाहिए और सुबर बिस्तर से उठने से पहले अपनी पत्नी को अपनी बांहों में भर लेना चाहिए जिस से कि आप दोनों सैक्स का एक अलग ही आनंद ले पाएं.

शारीरिक सुख की खातिर पत्नी ने लगा दी पति की जान की कीमत

बिहार के पानापुर, सारण जिले में एक चिकित्सक का शव 4 महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मिला तो इस छोटे से शहर में तब सनसनी फैल गई थी. मौत पर जितनी मुंह उतनी ही बातें होने लगी थीं. मगर 4 महीने बाद जब पुलिसिया तफ्तीश से परदा हटा तो जान कर लोग दंग रह गए. आरोप है कि उस की हत्या खुद उस की बीवी ने ही करवाई थी वह भी सुपारी दे कर.

बेवफा बीवी और साजिश

चिकित्सक के जानकार बताते हैं कि वह अपनी बीवी को बहुत प्यार करता था. बीवी खूबसूरत थी और गदराए हुस्न की मलिका भी. पर वह जितनी खूबसूरत थी उस से कहीं अधिक उस पर शारीरिक भूख हावी था. इस भूख को शांत करने के लिए उसे साथ मिला एक गैर मर्द का और महिला को वह प्रेमी इतना पसंद आने लगा कि उस के साथ ही जीने-मरने की खसम खाने लगी और अपने रास्ते पर अड़ंगा बन रहे अपने ही पति के साथ रच दी उस ने एक खौफनाक साजिश.

इश्क छिपता नहीं जमाने से

उधर चिकित्सक अपनी जिंदगी से संतुष्ट अपने काम में व्यस्त रहता तो इधर बीवी अपने जिस्म सुख के लिए प्रेमी के साथ अलग ही दुनिया में खोई रहती. लेकिन कहते हैं इश्क को लाख छिपा लो एक न एक दिन सब को पता चल ही जाता है, सो चिकित्सक पति ने भी बीवी की इस रासलीला को जान लिया. पहले तो उसे यकीन नहीं हुआ पर लोकलाज की चिंता देख कर उस ने अपनी बीवी को समझाने की भरपूर कोशिश की. पर बीवी पर तो इश्क का भूत सवार था. एक दिन चिकित्सक से उस की जबरदस्त कहासुनी और मारपीट भी हो गई. तब उस ने अपनी बीवी को सुधर जाने की नसीहत भी दी.

बीवी प्रिया (बदला नाम) को यह नागवार गुजरा. वह दुनिया छोङने को तैयार थी पर अपने प्रेमी को नहीं. तब पति को रास्ते से हटाने के लिए उस ने अपने प्रेमी सचिन के साथ मिल कर भयानाक साजिश रची. आरोप है कि प्रेमी सचिन ने अपने 2 अन्य साथियों के साथ मिल कर चिकित्सक शिवकुमार सिंह की हत्या अपनी तथाकथित प्रेमिका के साथ मिल कर दी.

खतरनाक मंसूबे

आरोपी सचिन ने पुलिस को दिए बयान में जो बताया वह काफी खतरनाक है. सचिन ने बताया,”चिकित्सक की बीवी और वह एकदूसरे से प्रेम करते हैं. इस की भनक चिकित्सक को लग गई तो एक दिन उस ने हमारे साथ मारपीट भी की और मुझे भी मारा. हम प्रतिशोध की आग में धधक उठे थे.

“तब हम 1 महीने से उस की हत्या करने की प्लानिंग कर रहे थे. घटना के दिन वह खुद ही चिकित्सक को अपनी बाइक पर बैठा कर पानापुर बाजार स्थित क्लीनिक पर ले जा रहा था. प्लान के अनुसार उसे रसौली गांव में ठिकाने लगाना था.

सैक्‍सी वीडियोज से लाखों रुपया महीना कमाने वाली Sofia Ansari का बेडरूम वीडियो हुआ लीक

टिकटौक स्टार सोफिया अंसारी की अपनी बोल्ड न्यूज को लेकर अकसर सुर्खियों में रहती है. इनकी सैक्‍सी वीडियोज इंटरनेट पर तहलका मचा देती है. सोफिया सोशल मीडिया के तीन प्‍लेटफौर्म्स टिकटौक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर काफी पौपुलर है लेकिन इन्‍हें कई बार कंट्रोवर्सीज का भी सामना करना पड़ा है. साल 2013 में एक कंटेंट क्रिएटर के तौर पर अपनी यात्रा शुरू की जब इन्होंने अपना यूट्यूब चैनल, “सोफिया अंसारी” लौंच  किया. अपने चैनल पर, वे तरहतरह के वीडियो कंटैंट डालने लगी.

डीप नैक ब्‍लाउज का जादू 

सैक्‍सी डीप नेक ब्‍लाउज पहन कर सोफिया ने ढेरों वीडियोज बनाए, इनके लिप-सिंक और डांस वीडियो ने लाखों फैंस का ध्यान इस हसीना की ओर खींचा. आगे चल कर सोफिया अंसारी का करियर सोशल मीडिया प्लेटफौर्म से आगे तब बढ़ा जब उन्होंने मौडलिंग की दुनिया में कदम रखा. साल 2021 में उन्होंने “बिल्लोज़ टाउन” गाने के साथ पंजाबी एंटरटैनमेंट इंडस्‍ट्री की ओर अपने कदम बढ़ाएं, यहां से सोफिया ने काफी पौपुलैरिटी हासिल की. अपने कंटेंट, डांस और बोल्डनेस को लेकर ओर भी मजबूत बनती चली गई. सोफिया ने कई ब्रांड्स  के साथ काम किया है.

गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च हुई सोफिया

अपनी बोल्ड और आकर्षक तस्वीरों व वीडियो के लिए जानी जाने वाली सोफिया एक जानी मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्ट्रेस तो हैं ही, लेकिन एक समय में और आज भी सोफिया अपनी कुछ नई फोटोज और वीडियो को इंटरनेट पर तेजी से वायरल करती है, जिसके कारण वे गूगल पर सर्च की जाने वाली मौडल बनीं है. 

सोफिया अंसारी के इंस्टाग्राम पर 13.4 मिलियन से ज्यादा फौलोअर्स हैं. सोफिया ने वेब सीरीज जैसे फेम हाउस (2020) और वहल नो दरियो (2020) में भी काम किया है. वह अपनी स्विमिंग कौस्ट्यूम में मसालेदार तस्वीरों और वीडियो के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में रहती हैं, जो उनके फैंस को बेहद पसंद आते हैं. अपने फैंस को खुश करने के लिए सोफिया समय समय पर हौट वीडीयो शेयर करती रहती है. स्विम सूट में लोग उन्हे देखना ज्यादा पसंद करते है. इसलिए वे एक से बढ़कर एक स्विमसूट कैरी करती है.

वायरल MMS स्कैंडल में फंसी थी सोफिया

सोफिया अंसारी कई विवादों में रही हैं. एक बार उनका एक प्राइवेट वीडियो लीक होने की खबरें आई थीं. वायरल MMS में उन्हें एक आदमी के साथ दिखाया गया था. हालांकि, उनके फैंस ने इन आरोपों को झूठा और वीडियो को एडिटेड बताया था. तमाम विवादों के बावजूद, सोफिया ने इन मुद्दों को पीछे छोड़ते हुए अपने काम पर फोकस बनाए रखा. 

सोफिया की पौपुलैरिटी का एक बड़ा कारण उनका अपने फैंस से जुड़ने का तरीका है. उनकी पोस्ट्स में न केवल बोल्डनेस होती है, बल्कि वह अपनी बिंदास पर्सनैलिटी को भी दर्शाती हैं. हैं.

सोफिया अंसारी की कुल संपत्ति कितनी?

खबरों  के अनुसार सोफिया अंसारी एक महीने में 5 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर लेती हैं. वैसे उनकी कुल संपत्ति 2 करोड़ रुपये के आसपास है. मौडल और सोशल मीडिया सेंसेशन होने के कारण इनकी कोई फिक्स सैलरी नहीं है. सोफिया की कमाई के अलगअलग सोर्स हैं, जिसमें मौडलिंग, स्पौंसरशिप और ब्रांड पार्टनरशिप भी शामिल है. सोफिया सोशल मीडिया और स्पौन्सरशिप के जरिए सालभर में 90 लाख रुपये तक कमा लेती है.    

सोफिया अंसारी की फेवरेट्स की लिस्ट

पसंदीदा खाना: मटन अखनी बिरयानी, उबले चावल के साथ फिश पैम्फलेट करी, सलाद.

पसंदीदा एक्टर: शाहरुख खान

पसंदीदा एक्ट्रैस: प्रियंका चोपड़ा

पसंदीदा फूल: सफेद गुलाब

पसंदीदा रंग: सफ़ेद

क्या है सोफिया की सक्सेस की वजह? 

सोफिया अंसारी ने न केवल खुद को एक इन्फ्लुएंसर के रूप में स्टेबल किया है, बल्कि वह एक ब्रांड बन चुकी हैं. उनका कंटेंट और सोशल मीडिया पर उनका कंटेंट उन्हें दूसरे इन्फ्लुएंसर्स से अलग बनाता है. उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है उनके फैंस से ईमानदार और खुला रिश्ता है. जो उन्हे ढेरों लाइक्स और कमेंट्स करके अपना प्यार बया करते है.

बताते चले कि सोफियो अपने फैंस को जितना बोल्ड कंटेंट देती है. कई बार वे देसी अवतार में भी अपने फैंस के लिए नजर आती है. उनकी देसी लुक तो लोगों को ओर भी घायल कर देता है. वे हमेशा बिकनी और टौपलेस लुक में ही नहीं, बल्कि इंडियन वियर, सारी और सूट में भी दिखाई देती है. जिनकी वीडियो पर लाखों लाइक्स और कमेंट्स आते है.

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