इस बोल्ड एक्ट्रेस के साथ रोमांस करते नजर आएंगे प्रियांक शर्मा

बिग बौस के घर में नजर आने वाले प्रियांक शर्मा की फैन फौलोइंग लड़कियों के बीच काफी अच्छी है. प्रियांक अपनी गुडलुकिंग और क्यूट फेस के चलते धीरे धीरे पौपुलर होते जा रहे हैं. उनकी फीमेल फैंस उन्हें कई बार प्रपोज भी कर चुकी हैं. वहीं प्रियांक इन दिनों अपने करियर को संवारने में लगे हुए हैं. प्रियांक जल्द ही एकता कपूर की वेब सीरीज में नजर आने वाले हैं.

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आपको बता दें कि बिग बौस से बाहर आने के बाद विकास गुप्ता ने कहा था कि वह प्रियांक शर्मा को एक वेब सीरीज में कास्ट करेंगे. जिसे एकता कपूर के औनलाइन चैनल ALT बालाजी पर दिखाया जाएगा. अब इस वेब सीरीज में प्रियांक के अपोजिट कास्ट की जाने वाली हीरोइन का नाम सामने आया है.

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एक इंटरव्यू के दौरान विकास गुप्ता ने बताया कि इस वेब सीरीज के लिए वो टीवी एक्ट्रेस और इस साल एशिया की टौप 50 सेक्सिएस्ट महिलाओं में शुमार रही टीवी एक्ट्रेस हर्षिता गौर को लेना चाहते हैं. फिलहाल हर्षिता से इसके लिए बात की जा रही है, लेकिन अभी कुछ फाइनल नहीं हुआ है. अगर सब कुछ सही रहा तो यकीनन ही वे इस वेब सीरीज का हिस्सा होंगी और हर्षिता के साथ प्रियांक शर्मा रोमांस करते नजर आएंगे.

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हाल ही में अर्शी खान की पार्टी के दौरान प्रियांक ने इस खबर को कंफर्म किया है. प्रियांक यहां विकास गुप्ता के साथ नजर आए. उन्होंने कहा कि, मैं एकता मैम का शुक्रगुजार हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिल रहा है और हां विकास गुप्ता का भी धन्यवाद करता हूं.

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बता दें, हर्षिता का नाम इस साल एशिया के ईस्टर्न आई 50 की सेक्सिएस्ट वूमन की लिस्ट में शुमार था. हर्षिता चैनल V के शो साड्डा हक में नजर आ चुकी हैं. सोशल मीडिया पर हर्षिता काफी एक्टिव रहती हैं और वह अपनी बोल्ड फोटोज शेयर करती रहती हैं.

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प्रियांक का यह पहला ड्रामा शो होगा. इससे पहले उन्होंने रियलिटी शोज में ही काम किया है. वह रोडीज, बिग बौस और स्पिलिट्सविला का हिस्सा रह चुके हैं. वहीं हाल ही में प्रियांक ने कहा था कि वो करण जौहर की फिल्म स्टूडेंट औफ द ईयर में नजर नहीं आएंगे.

युवाओं को आकर्षित करने वाली इस सीरीज को विकास गुप्ता बनाएंगे. उनका मानना है कि यह वेब सीरीज हर लिहाज से बड़े स्तर पर बनाई जा रही है. अब देखना ये है कि इस वेब सीरिज में काम करने के बाद प्रियांक का करियर कितना चमकता है.

अपनी ‘हमशक्ल’ से भी छोटे किरदार में नजर आएंगी कैटरीना कैफ

बौलीवुड की हौट एक्ट्रेस में शुमार और फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में दमदार एक्शन सीन से हर दिल पर छा जाने वाली कैटरीना कैफ इन दिनों ‘ठग्स औफ हिंदोस्तां’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. हाल ही में इस फिल्म में उनके द्वारा फिल्माएं जा रहे किरदार का फर्स्ट लुक जारी किया गया था, जिसमें वह काफी हौट दिखाई दे रही थीं. लोगों ने उनके इस लुक को काफी पसंद किया था. लेकिन इसी बीच अब ये खबरें भी तेज हो गई हैं कि अक्सर लीड रोल में नजर आने वाली कैटरीना अब अपनी आने वाली फिल्म ‘ठग्स औफ हिंदोस्तां’ में अपनी हमशक्ल से छोटे किरदार को निभाते नजर आएंगी.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फातिमा को फिल्म इंडस्ट्री में कैटरीना कैफ की हमशक्ल माना जाता है. उनकी कई तस्वीरों में वह हूबहूं कैटरीना जैसी ही नजर आती है.

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खबरों के मुताबिक फिल्म में कैटरीना का रोल काफी छोटा है. उन्हें फिल्म में उनकी को-एक्ट्रेस फातिमा सना शेख, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में उनकी हमशक्ल माना जाता है से भी छोटा किरदार दिया गया है. बता दें कि इस फिल्म में कैटरीना के अलावा एक्टर आमिर खान, अमिताभ बच्चन और फातिमा सना शेख लीड रोल में हैं.

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हाल ही में आमिर खान ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि कैटरीना कैफ इस फिल्म में लीड रोल में नहीं है. इसके बाद से फिल्म में कैटरीना के रोल को लेकर खबरें तेज हो गई हैं. वहीं इस पूरे मामले में कैटरीना का कहना है कि, ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि फिल्म में रोल बड़ा है या छोटा. फिल्म में एक महत्वपूर्ण किरदार में नजर आना अहम होता है, इसलिए कोई भी इस जरा सी बात को लेकर बिना वजह ड्रामा क्रिएट करने की कोशिश ना करें. मैं इस फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़कर काफी खुश हूं. अमिताभ बच्चन, आमिर खान और फातिमा हम सभी इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं. ये फिल्म आमिर और विक्टर की है. वह जब चाहेंगे तब फिल्म से जुड़ी बातों पर से पर्दा उठाएंगे. मैं सब उनपर छोड़ती हूं’.

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जब से इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई है तब से यह फिल्म सुर्खियों में बनी हुई है. ये फिल्म शुरुआत से ही एक्टर्स के लुक को लेकर चर्चा में रही है. पहले आमिर खान का नथ वाला लुक चर्चा में रहा था तो अब कैटरीना की बोल्ड तस्वीरें खबरों में हैं. फिल्म में जैकी श्रौफ और शशांक अरोड़ा भी अहम किरदार में नजर आएंगे. यह फिल्म 8 नवंबर को रिलीज हो सकती है.

एक्ट्रेस नीतू चंद्रा के फटकार के बाद सिदार्थ मल्होत्रा ने मांगी माफी

बौलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा ने भोजपुरी पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है. दरअसल पिछले दिनों अपनी आने वाली फिल्म अय्यारी के प्रमोशन के दौरान भोजपुरी भाषा का अपमान करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया.

एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने भी उन्हें जमकर फटकार लगाई. मामला बिगड़ता देख सिद्धार्थ मल्होत्रा बैकफुट पर आ गए हैं और उन्होंने अपने बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी है. सिद्धार्थ ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘मैं टीवी शो के दौरान नई भाषा बोलने की कोशिश कर रहा था. इस दौरान किसी की भावनाएं आहत हुईं हैं तो उसके लिए माफी चाहता हूं. भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा इरादा नहीं था.’

आपको बता दें कि बिग बौस11 में सिद्धार्थ मल्होत्रा, मनोज बाजपेयी और रकुल प्रीत अपनी फिल्म अय्यारी के प्रमोशन के लिए गए थे. इस दौरान सलमान ने फिल्म के कास्ट को एक टास्क करने दिया. मनोज ने सिद्धार्थ को भोजपुरी में डायलौग बोलने को कहा था. सिद्धार्थ ने डायलौग तो बोल दिया, लेकिन भोजपुरी भाषा की तौहीन कर दी. उन्होंने कहा, बोलते समय टौयलेट की फील आई, लेकिन अच्छा लगा.

भोजपुरी के लिए सिद्धार्थ मल्होत्रा की ये बात नीतू चंद्रा को खफा कर गई. उनके हिसाब से सिद्धार्थ को भाषा की मान-मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था. उन्होंने ट्वीट किया, ‘कोई कैसे किसी नेशनल टीवी पर ऐसा कर सकता है. भोजपुरी एक सम्मानित भाषा है. देशभर में इसे बोलने वाले कई सारे लोग हैं.’ नीतू ने लि‍खा, ‘खुद मनोज बाजपेयी भी बिहार से हैं और भोजपुरी बोलते हैं. ये हमारे देश की प्राचीन भाषाओं में से एक हैं. यहां तक कबीर दास और प्रेमचंद जैसे प्रख्यात साहित्यकारों ने पहले अपनी रचनाएं भोजपुरी में लिखीं.’

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अभी भी ‘‘पद्मावत’’ की राह नहीं हुई है आसान

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावत’’ के प्रदर्शन में अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं, मगर अभी भी इस फिल्म के प्रदर्शन को लेकर राह आसान नजर नही आ रही है. राजपूत संगठनों व करणी सेना के साथ साथ क्षत्रिय संगठनों द्वारा इस विरोध की आग में लगातार घी डालते जाने से मामला लगातार बिगड़ता नजर आ रहा है.

गुजरात के मल्टीप्लैक्स मालिकों ने ‘पद्मावत’ को प्रदर्शित न करने का ऐलान कर दिया है. तो वहीं राजस्थान सरकार के गृहमंत्री ने करणी सेना के नेताओं के साथ बैठक करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनः विचार याचिका दाखिल करने का ऐलान कर दिया है. तो वहीं हरियाणा व मध्यप्रदेश की सरकारें भी ‘पद्मावत’ पर बैन जारी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली हैं.

मध्यप्रदेश सरकार ‘पद्मावत’ पर बैन जारी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही है, तो वहीं मध्यप्रदेश के 150 सिनेमाघरों ने ऐलान किया है कि वह 25 जनवरी को ‘पद्मावत’ का प्रदर्शन करेंगे.

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जबकि रविवार, 21 जनवरी को करणी सेना ने ‘‘पद्मावत’’ के विरोध के नाम पर जमकर लूटपाट की, हंगामा किया. गुजरात में अहमदाबाद शहर के राजहंस सिनेमा घर में करणी सेना के लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की. कई जगहों पर आगजनी की, और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. इससे यह बात भी उभर कर आती है कि राज्य में शांति व्यवस्था बरकरार रखने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है. तो वही हरियाणा के कुरूक्षेत्र के एकमात्र मौल ‘‘केसल मौल’’ में भी तोड़फोड़ की गयी. खैर, अब गुजरात सरकार ने पूरे राज्य में सौ मार्गों पर बसे न चलाने का ऐलान कर दिया है. इससे आम जनता को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है.

दूसरी तरफ संजय लीला भंसाली और ‘‘वायकाम 18’’ ने भले ही सुप्रीम कोर्ट से दरखास्त कर ‘‘पद्मावत’’ पर चार राज्यों द्वारा लगाए गए बैन को हटवा लिया हो, पर अभी तक गुजरात व राजस्थान के वितरकों ने ‘‘पद्मावत’’ को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक अधिकार खरीदने में कोई रूचि नहीं दिखलायी है. इस सूरत में गुजरात व राजस्थान में ‘‘पद्मावत’’ के प्रदर्शित होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है.

मजेदार बात यह है कि संजय लीला भंसाली ने बाकायदा ‘‘करणी सेना’’ के नाम खुला पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वह सभी फिल्म को देखने आएं. पत्र मे लिख है-‘‘फिल्म देखकर आपको एहसास होगा कि इस फिल्म वैसा कुछ नहीं है,जैसी आपकी आशंका है. हमारी फिल्म राजपूत समाज के सम्मान और उसकी बहादुरी को दिखाती है. हमने रानी पद्मावती का चित्रण पूरे सम्मान के साथ किया है.’’ पर करणी सेना ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

इंटरनेट पर खूब पसंद किया जा रहा है ये वीडियो, लाखों ने देखा

अपना टैलेंट दिखाने के लिए आज की युवा पीढ़ी जमकर इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है. आए दिन हमें इंटरनेट पर तरह-तरह के वीडियो देखने को मिलते हैं. चाहे वह डांस से संबंधित हो या फिर किसी और चीज से. इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसा डांस दिखाने जा रहे हैं, जिन्हें दो लड़कों के साथ मिलकर एक लड़की ने शानदार डांस किया है.

नाहगाने पर किया जबरदस्त डांस

Sumit Parihar नाम की एक यू-ट्यूब चैनल द्वारा एक वीडियो इंटरनेट पर अपलोड किया गया है, जो इन दिनों काफी तेजी से देखा जा रहा है. इस वीडियो में एक लड़की दो लड़कों के साथ फेमस पंजाबी पौप सिंगर हार्डी संधु के एक मशहूर गाने ‘नाह’ पर कुछ अपने अंदाज में डांस करती हुई नजर आ रही हैं.

लगभग 3 लाख बार देखा जा चुका है वीडियो

इसी महीने 13 जनवरी को यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को अब तक लगभग 3 लाख बार देखा जा चुका है और काफी सारे कमेंट्स भी आ चुके हैं. इससे साफ पता चलता है कि लोगों द्वारा इस वीडियो को बेहद पसंद किया जा रहा है. गौरतलब है कि इस डांस की कोरियोग्राफी सुमित परिहार द्वारा की गई है.

हार्डी के इस गाने में नोरा आई थीं नजर

बता दें, हार्डी संधु के इस गाने में रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ सीजन 9 की एक्स कंटेस्टेंट रह चुकीं मौडल-एक्ट्रेस नोरा फतेही ने भी जबरदस्त डांस किया है. दर्शकों द्वारा नोरा और हार्डी के इस गाने को काफी पसंद किया जा चुका है. गौरतलब है कि नोरा एक अच्छी डांसर हैं, उनका हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ था. नोरा ने ‘टाइगर जिंदा है’ के ‘स्वैग से स्वागत’ गाने पर डांस कर उसका वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया था, जिसे 32 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा.

मुझे हस्तमैथुन करने की आदत है. सेक्स के दौरान मैं फौरन पस्त हो जाता हूं. बीवी मुझे नामर्द कहती है. मैं क्या करूं.

सवाल
मेरी शादी को 6 साल हो चुके हैं. मुझे हस्तमैथुन करने की आदत है. दिन में 2 बार हस्तमैथुन करता हूं, इस वजह से मेरा अंग पतला, छोटा और टेढ़ा हो गया है. सेक्स के दौरान मैं फौरन पस्त हो जाता हूं. लिहाजा, बीवी मुझे नामर्द कहती है. मैं क्या करूं?

जवाब
जब आप की शादी हो चुकी है, तो हस्तमैथुन करने की क्या जरूरत है? वैसे, हस्तमैथुन करने से अंग के आकारप्रकार में कोई फर्क नहीं पड़ता. आप हस्तमैथुन करना बंद कर दें और अच्छी तरह फोरप्ले कर के हमबिस्तरी करें. ऐसा करने से आप जरूर कामयाब होंगे.

हर चीज के लिए तरसते हैं किसान

किसान देश की रीढ़ हैं. अन्नदाता और भाग्य विधाता हैं. ऐसे जुमले अकसर किसानों को बहलानेफुसलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. कर्ज माफी, फसल बीमा व किसानों की आमदनी दोगुनी करने के ऐलान इसलिए होते हैं ताकि किसानों का वोट बैंक न खिसके. लेकिन हकीकत में किसान हर कदम पर तरसते हैं और उन की हकीकत व बदहाली जगजाहिर है.

किसानों का शोषण कोई नई बात नहीं है. बरसों पहले हिंदी के जानेमाने लेखक मुंशी प्रेमचंद ने अपने दौर में किसानों की बदतर तसवीर दिखाई थी. अपनी लिखी ज्यादातर कहानियों व उपन्यासों में उन्होंने बताया था कि किसानों को किस तरह दमन की चक्की में पीसा जाता है, सामंतवादी और पंडेपुरोहित पिछड़े व गरीब किसानों को कैसे व कितना लूटते और तंग करते हैं.

जातिवाद की देन

दरअसल, हमारे समाज की बनावट व उस की बुनियाद जातियों पर टिकी है. गंवई इलाकों में तो आज भी बहुत से मसलों की जड़ समाज में फैला हुआ वह जातिवाद है जिस का खात्मा होता नजर नहीं आता. समाज का ढांचा जातिवाद के चंगुल में होने का ही नतीजा है कि अगड़े मौज मारते हैं और दलित व पिछड़े हाड़तोड़ मेहनत कर के भी अपने हकों को पाने के लिए तरसते रहते हैं.

अगड़े, अमीर, सेठसाहूकार, जमींदार, मुखिया वगैरह जमीनों के मालिक हैं लेकिन वे सिर्फ हुक्म चलाते हैं. बोआई से कटाई तक के सारे काम वे किसान और मजदूर करते हैं जिन्हें दबा कर नीचे व पीछे रखा जाता है. धर्म, अंधविश्वास व कर्ज की आड़ में उन का शोषण किया जाता है.

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अगड़े व पंडेपुजारी बिना कुछ करेधरे मौज मारने को अपना हक समझते हैं. खूनपसीना बहा कर फसल उगाने का काम किसानों का और सफाई, खिदमत व ताबेदारी को दलितों व पिछड़ों का फर्ज बताया जाता है, ऊपर से हिस्सा, बेगारी, लगान, तकावी, चुंगी, महसूल, मंडी शुल्क, घटतौली, आढ़त व कटौती की आड़ में किसानों को लूटा जाता है.

खेती बनी घाटे का सौदा

सहकारी समितियां व मंडी समितियां किसानों को शोषण से बचाने और सहूलियतें देने की गरज से बनाई गई थीं लेकिन उन में से ज्यादातर पर अगड़ों का कब्जा है और वे भी किसानों को लूटने का अड्डा बन कर रह गई हैं खासकर 80 फीसदी किसान, जो छोटी जोत के, कम पढ़ेलिखे व गरीब हैं, की दिक्कतों का अंत ही नहीं है.

लगातार लागत बढ़ने से किसानों को मुनाफा तो दूर, उपज की वाजिब कीमत भी वक्त पर पूरी नहीं मिलती. ज्यादातर किसानों को खेती से गुजारा करने लायक आमदनी भी नहीं होती. मजबूरन उन्हें खेती व घरखर्च के लिए कर्ज लेना पड़ता है लेकिन माली तंगी के चलते वे उसे वक्त पर अदा नहीं कर पाते. ऊपर से बेहिसाब तकलीफों से तंग आने, कहीं कोई सुनवाई न होने व अपने हकों से बेदखल होने से बहुत से किसान इतने मायूस हो जाते हैं कि आखिर में उन्हें खुदकुशी करने को मजबूर होना पड़ता है.

ऊंट के मुंह में जीरा

किसानों को बाजार की लूट से बचा कर वाजिब कीमत दिलाने के मकसद से सरकार फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है. इस के लिए साल 1965 में कृषि मूल्य आयोग बनाया गया था.

20 साल बाद साल 1985 में उस का नाम बदल कर कृषि मूल्य लागत आयोग कर दिया गया. यह आयोग कुल 25 अहम फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करता है लेकिन किसान इस मोरचे पर भी भेदभाव के शिकार होते हैं.

कृषि उपज की सरकारी कीमतों में बढ़ोतरी न के बराबर होती है. पिछले 10 सालों में गेहूं की सरकारी कीमत तकरीबन 60 से 70 फीसदी व गन्ने की कीमत तकरीबन 80 फीसदी बढ़ी है जबकि सरकारी मुलाजिमों के वेतन भत्तों में 150 से 200 फीसदी व सांसदों के वेतन भत्तों में 400 फीसदी का भारी इजाफा हुआ है. महंगाई के मारे किसान उपज की वाजिब कीमत मांगते हैं लेकिन नक्कारखाने में तूती की आवाज नहीं सुनी जाती.

नतीजतन, किसान अपनी माली जरूरतें पूरी करने के लिए भी तरसते रहते हैं. हालात से तंग आ कर वे जहांतहां धरनाप्रदर्शन करते हैं लेकिन फिर भी किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती, किसानों की आवाज अनसुनी कर दी जाती है. साथ ही मंदसौर की तरह किसानों को लाठीडंडे व गोली खा कर जान भी गंवानी पड़ती है.

कोई रहमोकरम नहीं

किसानों व मजदूरों के शोषण का सिलसिला आज भी बरकरार है क्योंकि सरकारों में हमेशा ही किसान विरोधी लोग हावी रहे हैं. उद्योगव्यापार के मुकाबले किसानों को तरजीह नहीं दी जाती. उन्हें सिर्फ लगान देने वाला गुलाम समझा जाता रहा है. जातिवाद की इस देन के चलते किसान परेशान हो कर अपने हकों व हर चीज को तरसते हैं.

मसलन चीनी मिलों को गन्ना बेच कर किसान हर साल उस की वाजिब कीमत नकद व तुरंत पाने तक के लिए तरस जाते हैं. चीनी मिल मालिक हर साल किसानों को टरकाते हैं. वे गन्ने की कीमत व ब्याज के अरबों रुपए जबरन दबा कर बैठ जाते हैं और भुगतान करने के वक्त सुप्रीम कोर्ट तक चले जाते हैं. यह किसानों पर ज्यादती है.

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर 20 नवंबर, 2017 को किसानों की गन्ना कीमत के तकरीबन 8 अरब, 53 करोड़, 88 लाख रुपए बकाया थे. इस में 23 करोड़, 85 लाख रुपए साल 2015 के, 39 करोड़, 71 लाख रुपए साल 2016 के व सब से ज्यादा 790 करोड़, 32 लाख रुपए साल 2017 के सीजन के बकाया हैं. मतलब, गन्ना किसान अपनी माली जरूरतें पूरी करने के लिए तरस रहे हैं, लगातार एडि़यां घिस रहे हैं लेकिन कोई नहीं सुनता.

देश में गन्ने के कुल रकबे का तकरीबन आधा हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में है. चीनी मिलें गन्ने की कुल पैदावार का तकरीबन आधा हिस्सा ही खरीद पाती हैं इसलिए वहां लाखों किसान अपनी उपज खुद पावर कोल्हू में पेर कर गुड़ बनाते हैं लेकिन वे बिजली पाने को भी तरसते हैं, क्योंकि शहर जगमगाते हैं और गांवों को रोजाना 18 घंटे भी बिजली नहीं मिलती.

जो खेती करे सो मरे

बोआई से कटाई तक सूखा, बाढ़, कीड़े, बीमारी, आग, जानवर व चोरी जैसे जाखिमों के बाद जब फसल पक कर तैयार होती है तो मंडी में दलाल, बिचौलिए, आढ़ती व भ्रष्ट सरकारी मुलाजिम किसानों को चूना लगाने को तैयार रहते हैं. खरीद चाहे गन्ने की हो या गेहूं और धान की, खरीद के सैंटरों पर तौल, हिसाब व भुगतान में गड़बड़ी होना एक आम बात है.

इस मिलीभगत को दूर करने के कारगर इंतजाम नहीं किए जाते. गंवई इलाकों में सही तरीके से प्रचारप्रसार ही नहीं किया जाता. किसानों के फायदे की बातों को जानबूझ कर छिपाया जाता है इसलिए ज्यादातर किसानों को उन्हें दी जाने वाली छूट, सहूलियतों व माली इमदाद की कानोंकान खबर तक नहीं मिल पाती. छुटभैए नेता व भ्रष्ट मुलाजिम हिस्सा बांट लेते हैं और जरूरतमंद किसान देखते रह जाते हैं.

मिसाल के तौर पर उत्तर प्रदेश के सहकारिता, पशुपालन, कृषि, गन्ना व बागबानी के महकमों में अजब हाल हैं. वहां किसी ओहदेदार को यह देखने की फुरसत ही नहीं है कि सरकारी स्कीमों का फायदा बरसों से लगातार व बारबार कुछ खास परिवार ही क्यों हड़प रहे हैं? मिलीभगत से फर्जी बैंक खाते खोल कर भ्रष्ट मुलाजिम गोलमाल कर देते हैं.

पड़ता खराब असर

लूटखसोट व बदइंतजामी की नदी भी ऊपर से नीचे की ओर बहती है इसलिए उस का असर किसानों की सहकारी संस्थाओं पर भी पड़ा है. नतीजतन, अब कारिंदे ही नहीं बल्कि चुने हुए संचालक व सभापति भी इस सब से अछूते नहीं हैं. किसानों की रहनुमाई करने के नाम पर वे भी बहती गंगा में हाथ धोते हैं.

ऐसे नुमाइंदों की भी कमी नहीं है जो भाईभतीजावाद करने, अपना घर भरने व अपना मतलब पूरा करने के लिए नियमकायदों को धता बताते हैं, संस्था व किसानों को चूना लगाते हैं. इन सब गोरखधंधों से जेब चालबाजों की भरती है व माली नुकसान किसानों का होता है. किसानों पर पड़ रही इस मार का नतीजा है कि वे खेतीबारी करना छोड़ रहे हैं.

ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में गेहूं का क्षेत्रफल साल 2013-14 में कुल 304.73 लाख हैक्टेयर था जो साल 2015-16 में घट कर 302.27 लाख हैक्टेयर रह गया. इसी तरह धान का क्षेत्रफल 441.36 लाख हैक्टेयर से घट कर 433.88 हैक्टेयर, गन्ने का क्षेत्रफल 49.93 लाख हैक्टेयर से घट कर 49.53 लाख हैक्टेयर व तिलहनी फसलों का क्षेत्रफल 280.50 लाख हैक्टेयर से घट कर 261.34 लाख हैक्टेयर रह गया है.

अहम फसलों की बोआई का क्षेत्रफल कम होने का सीधा असर कुल पैदावार पर पड़ा है. साल 2013-14 में गेहूं का उत्पादन 958 लाख टन था जो साल 2014-15 में घट कर 935 लाख टन रह गया. इसी तरह धान का उत्पादन 1066 लाख टन से 1043 लाख टन व तिलहन का उत्पादन 327 लाख टन से घट कर 253 लाख टन रह गया.

किसानों के लिए चल रही स्कीमों में रुपया बहाने के बावजूद खेती में तरक्की की तसवीर बहुत धुंधली है. खेती के कचरे का बेहतर इस्तेमाल व उपज प्रोसैसिंग की नई तकनीक, नए बीज व नई मशीनें ज्यादातर किसानों की पहुंच से बाहर हैं इसलिए छोटे किसानों की जिंदगी में बदलाव नहीं दिखता है.

उपाय भी हैं

तालीम, एकजुटता, जागरूकता और तकनीकी ट्रेनिंग की कमी से किसानों को खेती, बागबानी, कोआपरेटिव, डेरी, मंडी, तहसील, चकबंदी वगैरह के दफ्तरों में जराजरा से काम के लिए धक्के खाने पड़ते हैं.

छोटेमोटे कर्ज अदा न करने पर भी हवालात, कुर्की व खेत बिकने तक की नौबत आ जाती है, ट्यूबवैल की बिजली कट जाती है इसलिए किसानों की दशा सुधारने के कारगर उपाय करने जरूरी हैं.

दरअसल, पैसे की तंगी से ज्यादातर किसान जीने, रहने, बच्चों की शादी व पढ़ाई तक के लिए हर चीज को तरसते रहते हैं. आज नेताओं व अफसरों को किसानों के मसले सुलझाने की चिंता, जरूरत व फुरसत नहीं है. अगर आगे भी यही सिलसिला जारी रहा तो किसान व उन के बच्चे खेती से मुंह मोड़ लेंगे तब मुश्किलें बेकाबू हो जाएंगी.

सरकारी, सहकारी व निजी सैक्टर में नए कदम उठाए जा सकते हैं. मसलन किसानों को पराली से बिजली, खाद व कागज की लुगदी वगैरह बनाने, डब्बाबंदी कर के उपज की कीमत बढ़ाने, इंटरक्रौपिंग से जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, खेती की लागत घटाने, प्रति हैक्टेयर उपज बढ़ाने वगैरह की तकनीक सिखाई जाए ताकि खेती का खर्च कम से कम व पैदावार ज्यादा से ज्यादा हो व खेती से किसानों की आमदनी बढ़ सके.

देश की खुशहाली के लिए खेती के सहायक कामधंधों और गांवों में फूड प्रोसैसिंग यूनिटों को बढ़ावा देना लाजिमी है. किसानों को खुद भी अकेले या मिल कर गांवों में छोटेबड़े कारखाने लगाने के लिए आगे आना चाहिए. सरकारों को इस में भरपूर सहूलियतें, छूट, माली इमदाद वगैरह किसानों को देनी चाहिए ताकि किसानों की दिक्कतें कम हो सकें और वे कदमकदम पर हर चीज के लिए तरसने को मजबूर न रहें.

ऐसे निभाएं 2 बीवियों के साथ

यकीन नहीं होता कि यह वही बबलू है जिस ने तकरीबन 14 साल पहले अपनी माशूका पार्वती (बदला हुआ नाम) और उस के घर वालों को खुलेतौर पर धौंस दी थी कि अगर उस की शादी पार्वती से न हुई तो वह खुदकुशी कर लेगा.

बबलू पर मरमिटने वाली पार्वती को तो अपने आशिक की यह अदा पसंद आई थी. साथ ही, उस के घर वाले भी बबलू का जुनून देख कर झुक गए थे और उन्होंने इन दोनों की शादी के बाबत ज्यादा नानुकर नहीं की.

तब बबलू भोपाल के बरखेड़ा में शराब की एक दुकान पर काम करता था और बांका जवान था. पार्वती के घर वालों को इसी बात पर एतराज था कि शराब की दुकान पर काम करने वाला मुलाजिम अच्छा आदमी नहीं हो सकता. वह कोई और गलत काम करे न करे, पर खुद तो जरूर शराबी होगा.

लेकिन बबलू उम्मीद से परे औरों से बेहतर शौहर साबित हुआ. अपनी बीवी का वह पूरा खयाल रखता था और अपने भीतर के आशिक को उस ने मरने नहीं दिया था.

पार्वती भी खुद को खुशकिस्मत समझती थी जो उसे इतना प्यार करने वाला शौहर मिला. दोनों खुश थे. यह खुशी उस वक्त और दोगुनी हो गई जब उन के यहां शादी के 3 साल बाद बेटा और फिर उस के भी 2 साल बाद एक प्यारी सी बेटी हुई.

शादी के बाद ही बबलू को भोपाल के नजदीक बैरसिया की एक शराब की दुकान में काम मिल गया था जिसे शराब बनाने वाली एक नामी कंपनी चलाती थी. बबलू चूंकि मेहनती और ईमानदार सेल्समैन था इसलिए उस की खासी पूछपरख थी. कंपनी के अफसरों की निगाह में वह जल्द ही चढ़ गया था. लिहाजा उसे तरक्की भी मिलने लगी थी और तनख्वाह बढ़ने के साथसाथ दूसरी सहूलियतें भी मिलने लगी थीं.

शादी के बाद 14 साल कब कैसे पंख लगा कर उड़ गए, इस का एहसास पार्वती को नहीं हुआ. हां, बच्चे हो जाने के बाद उस में कुछ बदलाव जरूर आए थे लेकिन बबलू के प्यार के आगे वे बेमानी थे.

काम में लगन और मेहनत के चलते तकरीबन 4 साल पहले कंपनी ने बबलू को मैनेजर बना कर दमोह भेजा तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा. मैनेजरी अपनेआप में एक रुतबे वाली पोस्ट होती है जिसे हासिल करना बबलू का सपना भी था.

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बच्चों की पढ़ाई के चलते बबलू अकेला ही दमोह चला गया था और वहां किराए का मकान ले कर रहने लगा था. पार्वती भी पति की तरक्की से खुश थी.

जब सच सामने आया

बीती 29 नवंबर, 2017 को भोपाल के महिला आयोग में खड़ी पार्वती ने अपनी शिकायत में बताया था कि बबलू ने दमोह जा कर रचना (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की से शादी कर ली है और अब बबलू उस से और बच्चों से कोई वास्ता नहीं रखता.

पार्वती की मानें तो वह खुद हकीकत जानने के लिए दमोह गई थी. वहां उस ने देखा कि बबलू और रचना साथसाथ रहते हैं और उन्होंने शादी भी कर ली है.

इस पर पार्वती ने एतराज जताया तो बजाय शर्मिंदा होने के बबलू ने उसे खूब मारापीटा और यह कहते हुए भगा दिया कि जो करना है सो कर ले.

रचना ने भी पार्वती को दुत्कारते हुए कहा कि अब बबलू उस का शौहर है.

इस पर पार्वती ने कानूनी कार्यवाही करने की बात कही तो रचना भी शेरनी की तरह दहाड़ते हुए बोली, ‘‘जा, पहले हम दोनों की शादी के सुबूत तो हासिल कर ले, फिर कानूनी ज्ञान बघारना.’’

इस पर घबराई और सकपकाई पार्वती ने अपने सासससुर से गुहार लगाई तो उन्होंने भी साफसाफ कह दिया कि अब रचना ही उन की बहू है क्योंकि बेटा उसी को अपनी बीवी मानता है. वे इस में कुछ नहीं कर सकते. पार्वती से नाता तोड़ चुके सासससुर भी अब रचना और बबलू के साथ रहने लगे थे.

इंसाफ के लिए महिला आयोग के दफ्तर में पार्वती आई तो वहां मौजूद अफसरों ने उस की दरख्वास्त यह कहते हुए रख ली कि वे उस के साथ हुई इस ज्यादती पर कार्यवाही करेंगे और जल्द ही पुलिस के जरीए बबलू को भोपाल बुलवाएंगे जिस से पूरी बात का खुलासा हो सके.

खुलासे को बचा क्या

बबलू ने दूसरी शादी कर ली है या फिर बगैर शादी किए ही रचना के साथ शौहर की तरह रह रहा है, इन दोनों बातों में फर्क इतना भर है कि अगर पार्वती अपने शौहर की दूसरी शादी होना साबित कर देती है तो उसे कानूनन सजा हो सकती है और अगर नहीं कर पाती है जिस की कि उम्मीद ज्यादा है तो बबलू का कुछ नहीं बिगड़ना.

यह बात ऐसे मामलों को देखते हुए कतई चर्चा या बहस की नहीं है कि पहली बीवी के रहते कोई मर्द या शौहर दूसरी शादी क्यों करता है. वजह, ऐसा पहले भी इफरात से होता था लेकिन अब उजागर ज्यादा होने लगा है.

दूसरी शादी की वजहें कुछ भी हों पर यह भी साफ है कि मर्द अकसर दूसरी शादी छिपाने में गच्चा खा जाते हैं और दोनों बीवियों को एकसाथ खुश नहीं रख पाते.

दिलचस्प बात यह है कि दूसरी बीवी पहली को अपने शौहर की बीवी नहीं मानती तो दूसरी के बारे में तो यह कहावत लागू होती है कि सौत तो पुतले की भी नहीं सुहाती, फिर जीतीजागती सौतन कैसे कोई बीवी बरदाश्त कर लेगी.

ऐसे में आफत शौहर की आती है जो पहली और दूसरी दोनों के होने के चक्कर में किसी एक को छोड़ने पर मजबूर हो जाता है और वह अकसर पहली ही होती है. इस का यह मतलब नहीं है कि हर मामले में पहली में ही कोई खोट हो, लेकिन इस बात से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि पहली या तो लापरवाह हो जाती है, पहले सी खूबसूरत और जवान नहीं रह जाती या फिर शौहर के जज्बातों की कद्र नहीं कर पाती.

क्या करें ऐसे शौहर

अगर साबित न हो तो दूसरी शादी कतई गुनाह नहीं लेकिन बबलू जैसे शौहर अगर थोड़ी अक्ल और समझदारी से काम लें तो बेवजह के हंगामे और पुलिस व कोर्टकचहरी के पचड़े से बच सकते हैं.

जब ऐसी नौबत आ ही जाए कि पहली बीवी के रहते दूसरी औरत से शादी करनी पड़े तो शौहर की हालत सांपछछूंदर सरीखी हो जाती है. इस से बचने के लिए बेहतर है कि वह दोनों बीवियों समेत बच्चों के बीच ऐसा तालमेल बिठाए कि सांप भी न मरे और लाठी भी न टूटे.

दूसरी शादी के बाद अगर पहली बीवी को सबकुछ सचसच बता दिया जाए तो क्या बात बन सकती है? जाहिर है कि इस सवाल का जवाब हर कोई न में ही देगा. इसी न के डर से शौहर पहली बीवी को सच बताने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते.

यहां बेहतर मिसाल मशहूर फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र की ली जा सकती है जिन्होंने पहली बीवी प्रकाश कौर के रहते दूसरी शादी फिल्म हीरोइन हेमामालिनी से कर ली थी. हालांकि कहा जाता है कि इस बाबत धर्मेंद्र ने इसलाम धर्म कबूल कर लिया था पर आज उन की दोनों बीवियां अपनीअपनी जगह खुश हैं.

अपने दोनों बेटों सनी देओल और बाबी देओल का कैरियर संवारने में धर्मेंद्र ने कोई कसर नहीं छोड़ी तो हेमामालिनी से पैदा हुई बेटियां ईशा और आहना पर भी प्यार लुटाया और उन की जिम्मेदारी से भागे नहीं.

पत्नी और बच्चों को सच बता कर और भरोसे में ले कर बात बन सकती है. आमतौर पर दूसरी शादी पहली शादी के 10-12 साल बाद ही शौहर करते हैं, तब तक पहली पत्नी से हुए बच्चे बड़े होने लगते हैं. उन का हक न मारा जाए, इस बाबत शौहर को चाहिए कि जितना मुमकिन हो दूसरी शादी का राज छिपा कर रखे.

बबलू अगर एहतियात से काम लेता तो शायद पार्वती को इतना गुस्सा नहीं आता. कोई भी औरत धोखा खाने से ज्यादा तिलमलाती है, उलट उस का शौहर अगर खुद अपनी मजबूरी गिड़गिड़ाते हुए उसे बताता है तो वह पसीज कर समझौता करने को तैयार भी हो जाती है.

इस बात को ऋषि कपूर, फराह और राधिका की साल 1986 में आई फिल्म ‘नसीब अपनाअपना’ में बेहतर ढंग से दिखाया गया था. ऋषि कपूर निपट गंवार और बेढंगी रहने वाली राधिका को छोड़ शहर में आ कर तेजतर्रार और स्मार्ट फराह से शादी कर लेता है. जब राधिका शहर आती है तो वह उसी के घर में नौकरानी बन कर रहने लगती है. सिर्फ इसलिए कि पति हरदम उस की आंखों के सामने रहे. शौहर की मजबूरी समझते हुए वह उस की दूसरी शादी पर कोई एतराज नहीं जताती, उलटे उसे बचाने की कोशिश में लगी रहती है.

फिल्म की बात और थी. सच में ऐसी बीवियां मिलना नामुमकिन है, पर ऐसी तो अब भी मिल ही जाती हैं जिन्हें यह समझ आ जाता है कि लड़ाईझगड़े से एक उम्र और हद के बाद कुछ हासिल नहीं होना. शौहर अभी जितना उन के हिस्से में है उस के बाद तो उतना भी नहीं रह पाएगा. पार्वती और बबलू के मामले में यही होने की उम्मीद ज्यादा लग रही है.

बबलू अगर दमोह में रचना के साथ संभल कर रहता तो झगड़े की नौबत ही नहीं आ पाती. एकाध बच्चा दूसरी बीवी से हो जाए तो भी पहली बीवी के तेवर ज्यादा तीखे नहीं रह जाते.

ऐसे में शौहर को चाहिए कि वह पहली बीवी की तरफ से एकदम लापरवाह न हो बल्कि वक्त निकालते हुए उस के साथ भी रहे और खर्च भी बराबर उठाता रहे. कोई ऐसी हरकत उसे नहीं करनी चाहिए जिस से पहली बीवी को उस पर शक हो.

यह हालांकि मुश्किल काम है पर हजारोंलाखों शौहर इसे कामयाबी से कर रहे हैं. भोपाल के नजदीक मंडीदीप की एक फैक्टरी में काम करने वाले देव कुमार (बदला हुआ नाम) की पहली बीवी और उस से हुए बच्चे विदिशा के एक गांव में रहते हैं जबकि दूसरी बीवी भोपाल में उस के साथ रहती है.

तकरीबन 34 साला देव कुमार हर शनिवार और रविवार को गांव जा कर अपनी पहली बीवी के साथ रहते हैं जो उन के मांबाप का खयाल रखती है.

तीजत्योहार पर भी देव कुमार बराबरी से दोनों बीवियों के साथ मनाते हैं. इस साल करवाचौथ पर फोन पर उन्होंने पहली बीवी को बता दिया था कि छुट्टी न मिलने से नहीं आ पाएंगे पर दीवाली की छुट्टी ले रखी है. बाद में दीवाली उन्होंने गांव जा कर मनाई तो किसी ने कोई शिकायत भी नहीं की.

ऐसा कब तक चलेगा? इस सवाल पर देव कुमार का कहना है, ‘‘पता नहीं कब तक, पर मेरी कोशिश यही रहती है कि सबकुछ ऐसे ही चलता रहे.

इस बाबत ऐक्टिंग भी करनी पड़ती है और खर्च भी ज्यादा होता है. पर खुद को जानपहचान वाले लोगों और नातेरिश्तेदारों से छिपाए और बचाए रखना इस से भी बड़ी चुनौती है. इस पर अब तक तो मैं खरा उतरता रहा हूं.’’

देव कुमार नहीं चाहते कि राज खुले और पहली बीवी को दुख हो क्योंकि वे उसे भी चाहते हैं. राज खुलने पर भी वह खास कुछ नहीं कर पाएगी, यह अंदाजा भी उन्हें है. लेकिन अपनी तरफ से वे एहतियात बरतते हैं तो यह उन की खूबी ही कही जाएगी.

पहली बीवी के रहते दूसरी बीवी से निभाना कोई मुश्किल काम नहीं है. इस के लिए 2 जरूरी बातें हैं कि दूसरी खुशीखुशी साथ दे और दोनों के बीच की दूरी ज्यादा से ज्यादा हो.

फंदा न बन जाए दूसरी बीवी

शौहरों को दूसरी शादी करते वक्त यह देखना और जरूरी है कि कहीं दूसरी वाली किसी खुदगर्जी या लालच के चलते तो उस के साथ शादी नहीं कर रही है. इस के अलावा उस का मिजाज समझना भी जरूरी है.

ऐसा इसलिए कि ऐसे मामले भी आएदिन उजागर होते रहते हैं जिन से दूसरी बीवी से भी शौहरों की पटरी ज्यादा नहीं बैठी.

पेशे से भोपाल के वीडियोग्राफर सुरेंद्र सिंह ने 1 अक्तूबर, 2017 को फांसी के फंदे से लटक कर जान दे दी थी. इस की वजह दूसरी बीवी का 2 साल से मायके में रहना था जो बारबार बुलाने पर भी घर नहीं आ रही थी. पहली बीवी की अनदेखी कर के अगर दूसरी के चक्कर में यों बेवक्त जान देनी पड़े तो शादी घाटे का सौदा ही साबित होती है, इसलिए बतौर एहतियात इन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए:

* दूसरी शादी जल्दबाजी और हड़बड़ाहट में नहीं करनी चाहिए.

* दूसरी होने वाली बीवी के गुजरे कल के बारे में जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए.

* यह देख लें कि दूसरी औरत किसी लालच के चलते तो आप से शादी नहीं कर रही. यह भी देख लें कि कहीं आप भी किसी खुदगर्जी या लालच के चलते तो उस से शादी नहीं कर रहे. ऐसे रिश्तों की उम्र ज्यादा नहीं होती.

* दूसरी शादी में भी उम्र का अंतर काफी माने रखता है. उम्र में ज्यादा छोटी और ज्यादा बड़ी बीवी से निभा पाना मुश्किल काम होता है.

* वह सच्चा प्यार करती है या नहीं, इसे मापने का कोई पैमाना नहीं है, फिर भी हर लैवल पर उसे परखना जरूरी है.

* ज्यादा खर्चीली, गुस्सैल या बिगड़ैल औरत से शादी करने से कोई फायदा नहीं होता. महज खूबसूरती और जिस्म का लगाव हो तो दूसरी शादी कामयाब नहीं होती.

* यह जरूरी है कि दोनों बीवियों में से किसी एक को सचाई बता दी जाए जिस से झगड़ा होने पर कोई तो आप के साथ खड़ी हो.

* अगर पहली को नहीं छोड़ सकते तो दूसरी के सामने यह बात साफ कर देनी चाहिए और अपनी आमदनी, जायदाद व पैसों के बाबत भी साफसाफ बता देना चाहिए कि आप किस को कितना हिस्सा देंगे

मैडम तुसाद में सजेगा सनी लियोन का पुतला

भले ही सनी लियोनी की फिल्में बौक्स औफिस पर कुछ खास कमाल न दिखा रही हो. लेकिन उनकी पौपुलैरिटी में कोई कमी नहीं आई है. तभी तो बौलीवुड की हौट एक्ट्रेस में शुमार और पूर्व पौर्न स्टार सनी लियोनी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार चर्चा की वजह उनकी कोई फिल्म या आइटम सौंग नहीं बल्कि कुछ और है. दरअसल, राजधानी दिल्ली के मशूहर मैडम तुसाद म्यूजियम में अब एक्ट्रेस सनी लियोनी का मोम का पुतला भी लगाया जाएगा.

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इसकी पुष्टि उनकी तस्वीरों से हो रही है, जो सोशल मीडिया में वायरल है. इस साल के अंत में सनी लियोनी के मोम के पुतले का लोकार्पण होगा. खुद सनी लियोनी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी है.

इससे पहले इस म्यूजियम में कटरीना कैफ, माधुरी दीक्षित, करीना कपूर खान, सलमान खान, कपिल शर्मा, सचिन तेंदुलकर आदि सितारों के पुतले लगाए गए हैं.

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लंदन से सनी लियोनी के मापन के लिए विशेषज्ञों का एक दल मुंबई आया था. इस दल ने 200 से ज्यादा बार सनी का खास माप लिया, ताकि उनके शरीर जैसा ही पुतला तैयार किया जा सके.

वहीं, सनी ने टि्वटर पर ये जानकारी शेयर की है. उन्होंने कहा कि मैडम तुसाद म्यूजियम की आभारी हूं कि उन्होंने ये फैसला लिया. मैं रोमांचित महसूस कर रही हूं. मेरा मोम का पुतला होना पूरे तरीके से आनंदित करने वाला है.

सनी ने आगे कहा, मापन के दौरान यह पहला अनुभव रहा जब मैंने इतनी लंबी सिटिंग की. मैं पूरी टीम का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी जिसने इसे एक अनूठा और यादगार अनुभव दिया. मैं अब पुतले के रूप में खुद को देखने के लिए उत्सुक हूं. इसका मुझे बेसब्री से इंतजार है.

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मर्लिन एंटरटेनमेंट इंडिया प्राइवेड लिमिटेड के जनरल मैनेजर और निदेशक अंशुल जैन ने कहा, सनी के पुतले की घोषणा करना हमारे लिए भी उत्साहित करने वाला अनुभव है और हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि इसके जरिए उनके लाखों फैन बहुत सारी सेल्फी के साथ कई यादगार लम्हें घर ले जा सकेंगे.

भले ही सनी लियोनी के कामों को लेकर लोग कितनी ही बातें करें लेकिन इसमें किसी को शक नहीं कि सनी लियोनी ने अपनी मेहनत से एक अलग मुकाम बौलीवुड में हासिल कर लिया है और उनकी लोकप्रियता में दिन दूना रात चौगुना इजाफा हुआ है.

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आपको बता दें कि एडल्ट दुनिया की बेताज मल्लिका रह चुकी सनी लियोनी का असली नाम नाम करनजीत कौर वोहरा है. बौलिवुड में आने से पहले सनी पौर्न की दुनिया में व्यस्त थीं. हालांकि सनी का पहले ऐसा कोई इरादा नहीं था और वह नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थीं. 15 साल की थीं सनी, जब उन्होंने जर्मन बेकरी में अपनी पहली नौकरी की.

उन्होंने साल 2010 में बिग बौस सीजन 4 के जरिये भारतीय सरजमीं पर कदम रखा जिसने उनके बौलीवुड में आने के रास्ते खोल दिये. लियोनी को पूजा भट्ट ने अपनी फिल्म ‘जिस्म 2’ से पहला ब्रेक दिया. तमाम हौट और इंटिमेट सींस होने के बावजूद फिल्म फ्लाप हो गयी और सन्नी को कुछ फायदा नहीं हुआ.

फिर सनी की मुलाकात एकता कपूर से हुई जिसने उनके तरक्की के रास्ते खोल दिये. एकता कपूर ने सनी लियोनी की इमेज लोगों के दिमाग में चेंज करने के लिए ‘शूट आउट वडाला’ में उन्हें आयटम गर्ल ‘लैला’ के रूप में पेश किया. इसके बाद मार्च 2014 में रिलीज हुई एकता की ‘रागिनी एमएमएस 2’ जिसने सनी लियोनी को बौलीवुड की बेबीडौल बना दिया.

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