बेलगाम गौरक्षकों की गुंडई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही देशप्रदेश में भारत की धर्मनिरपेक्ष इमेज की मार्केटिंग करते फिर रहे हों और अपने देश के सामाजिक माहौल को अच्छा करार दे रहे हों, लेकिन देश में कट्टर और हिंसक सांप्रदायिक ताकतों के हमले उन के इस दावे की कलई खोल देते हैं.

हाल के दिनों में देश के जिन राज्यों में उग्र हिंदुत्व का उभार दिखा है, उन में से एक राजस्थान में पिछले दिनों गौरक्षकों ने एक और शख्स की हत्या कर दी. तथाकथित गौरक्षकों ने अलवर जिले के गोपालगढ़ गांव के 35 साला उमर खान को पीटपीट कर मार डाला और उस के साथ ताहिर खान व जावेद को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया.

तकरीबन 6-7 महीने पहले भी राजस्थान में इसी तरह गौरक्षकों ने अपने साथ गाय ले जा रहे पहलू खान की हत्या कर दी थी और उन के बेटों को बुरी तरह घायल कर दिया था.

उमर खान की हत्या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मेवात दौरे के ठीक एक दिन बाद हुई. इस मामले में गोविंदगढ़ थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, उमर खान और ताहिर खान ड्राइवर जावेद के साथ एक पिकअप वैन में 6 गाएं और बछड़े ले कर गहेनकर गांव से आ रहे थे. लेकिन रास्ते में गोपालगढ़ के पास उन्हें 8 लोगों ने घेर लिया और उन पर बंदूकों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया.

हमले में उमर खान की तुरंत मौत हो गई जबकि ताहिर और जावेद को हरियाणा के एक अस्पताल में गंभीर हालत में इलाज के लिए भरती कराया गया. हमलावरों ने उमर खान की लाश 12 किलोमीटर दूर रेलवे ट्रैक पर फेंक दी थी.

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पहलू खान की हत्या की पूरे देश में हुई फजीहत के बाद ऐसा लगा था कि यह सिलसिला थमेगा, ऐसी वारदातें कम होंगी. बीचबीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की अच्छी इमेज पेश करने के लिए गौरक्षकों की बुराई भी करते रहे. उन के रुख से ऐसा लगा था कि गौरक्षक बन कर उग्र भीड़ के तौर पर हमले रुकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री हिंसा रोकने की दिखावटी अपील कर रहे थे. उन की मंसा गौरक्षा के नाम पर हिंसा रोकने की नहीं है. उलटे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साल 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए कट्टर हिंदुत्व की इमेज को और भी धारदार बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं.

केंद्र और वसुंधरा सरकार दोनों ही इस तरह की वारदातों के लिए जिम्मेदार हैं. अल्पसंख्यकों की हिफाजत में नाकाम रहने के घातक नतीजे भी हो सकते हैं. सरकार इस के गंभीर खतरों को जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है और गौरक्षकों का हिंसक खेल जारी है.

खुलेआम घूम रहे हत्यारे

गौरक्षकों के हमले के शिकार पहलू खान ने मरते वक्त जिन 6 लोगों के नाम लिए थे, उन्हें राजस्थान पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है.

मामले की जानकारी के मुताबिक, राजस्थान पुलिस ने दूध का कारोबार करने वाले गौरक्षकों के शिकार किसान पहलू खान द्वारा जिन 6 लोगों के नाम बताए गए थे, उस से संबंधित जांच को बंद कर दिया गया है, क्योंकि इन 6 आरोपियों में से 3 का संबंध हिंदू संगठन से है.

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस वालों समेत गवाहों ने कहा कि आरोपियों में से कोई भी घटना के समय मौजूद नहीं था.

मालूम हो कि लोगों की भीड़ ने पहलू खान पर हमला किया था जिस से उस की मौत हो गई थी.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे आरोप सामने आए हैं कि संदिग्ध गौरक्षकों को बचाने के लिए सरकार का अफसरों पर दबाव है. गौशाला के मुलाजिम के बयान और मोबाइल फोन के रिकौर्ड के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को क्लीन चिट दी है.

गौशाला के कर्मचारी के बयान के मुताबिक, आरोपी नवीन शर्मा, राहुल सैनी, ओम यादव, हुकुम चंद यादव, सुधीर यादव और जगमल यादव उस की गौशाला में थे, जो वारदात वाली जगह से तकरीबन 6 किलोमीटर दूर है.

मालूम हो कि 6-7 महीने पहले पहलू खान जयपुर के हटवाड़ा पशु बाजार से कुछ गायों को हरियाणा के नूह इलाके में ले जा रहा था. इसी दौरान अलवर के नजदीक गौरक्षकों ने पहलू खान पर हमला कर दिया जिस से उस की मौत हो गई.

पहलू खान के पास गाय को ले जाने के दस्तावेज भी थे, फिर भी गौरक्षकों ने उस पर हमला कर दिया.

इस मामले की जांच कर रही अपराध शाखा ने पहलू खान की हत्या की जांच रिपोर्ट अलवर पुलिस को भेज दी है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्याकांड के मामले में आरोपियों की लिस्ट में से 6 लोगों के नाम हटाए जाएं. इस के बाद अलवर पुलिस ने 6 आरोपियों को पकड़ने के लिए किए गए इनाम को भी रद्द कर दिया.

6 लोगों के नाम हटाए जाने पर पहलू खान के परिवार वालों में बेहद नाराजगी है. उन का कहना है कि वारदात के समय जब आरोपियों का नाम ले कर बुलाया जा रहा था, तो फिर आखिर कैसे उन के नाम हटा दिए गए?

इरशाद के बेटे ने इस मसले पर कहा, ‘‘मैं ने हमले के समय ओम, हुकुम, सुधीर और राहुल का नाम पुकारते सुना था. पुलिस दबाव में ऐसा कह रही है. लेकिन हमारी लड़ाई यहां खत्म नहीं होगी. हम आगे भी लड़ेंगे और उन 6 लोगों को कुसूरवार साबित करेंगे.’’

दलित भी हैं गौरक्षकों के शिकार

गाय के नाम पर अब तक तो ज्यादातर मुसलमानों के साथ ही मारपीट होती रही है, लेकिन अब राजस्थान के आदिवासी व दलित समुदाय के लोग भी गौरक्षकों की गुंडागर्दी के शिकार बनने लगे हैं.

डूंगरपुर से तकरीबन 45 किलोमीटर दूर जिले के नारेडा गांव में एक दलित नानूराम की कहानी भी काफी दुखद है. यहां एक हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने नानूराम पर गाय का गोश्त बेचने के आरोप में उसे बुरी तरह पीट दिया जबकि नानूराम एक मजदूर है.

नानूराम बताता है कि वह मजदूरों को जागरूक करता है. गांव के कुछ दबंग लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी. उसे तरहतरह से धमकी दी जाने लगी. 28 नवंबर को गांव में हिंदू संगठन के लोगों ने उस के घर को घेर लिया. उस के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी गई.

उन्होंने नानूराम पर झूठा आरोप लगाया कि वह गाय का गोश्त बेचता है. उस ने जब इस बारे में पुलिस थाने में शिकायत की तो थानेदार ने उलटा उसे ही धमका दिया.

नानूराम का आरोप है कि इस हिंदू संगठन के लोग चाहते हैं कि मजदूर गांव छोड़ दें ताकि वे उन की जमीनों पर कब्जा कर सकें.

गुजरात चुनाव के बाद कांग्रेस का बढ़ता कद

गुजरात चुनावों के 4-5 माह पूर्व पक्का ही लग रहा था कि गुजरात विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 2014 के लोकसभा चुनावों वाला समर्थन पाएगी जिस का अर्थ होता 182 में से 140-160 सीटें. 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस भाजपा से सिर्फ 17 सीटों पर आगे रह पाई थी. इस तरह 2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को 165 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में बहुमत मिला था. इसी को आधार मान कर अमित शाह 160 सीटों पर जीतने का दावा कर रहे थे. अब राहुल गांधी को 83 सीटों पर सफलता मिली और इस तरह राहुल गांधी ने भाजपा से अंदाजे से ज्यादा 60-62 सीटें छीन कर चाहे पूरी जीत हासिल न की हो, यह दर्शा दिया है कि वे कांग्रेस को अब लड़ने के मूड में ला रहे हैं.

कांग्रेस में ऐसे कोई सुर्खाब के पर नहीं लगे हैं कि अगले चुनावों में उस की जीत के बाद देश में उन्नति के घोड़े दौड़ने लगेंगे और सर्वत्र शांति व समृद्धि छा जाएगी. कांग्रेस की मौजूदगी का बस इतना फर्क होगा कि भारतीय जनता पार्टी का परिचित पर अघोषित महंतवादी एजेंडा लागू होने में रुकावटें लगने लगेंगी. आजकल सरकारी फैसलों में हर जगह यह दिख रहा है कि सरकार अपनी वैसी ही मनमानी करती है जैसी मुहूर्त निकालने, कुंडली मिलाने, मंदिरों के दरवाजे खोलने पर दिखती है.

कांग्रेस को जो समर्थन सब जगह मिलना बंद हुआ था वह गुजरात के प्रचार के बाद मिलने लगेगा. पंजाब के कई शहरों के चुनावों में कांग्रेस की जीत और अकालीभाजपा गठबंधन का फिसलना कुछ ऐसा ही दिखाता है. राजस्थान में भी यही दिखा. पहले महाराष्ट्र के नांदेड़ में दिखा था. सोनिया गांधी की शारीरिक कमजोरी का जो नुकसान कांग्रेस को हुआ था अब राहुल गांधी की सक्रियता से कम हो सकता है.

देश को मजबूत विपक्ष इसलिए चाहिए क्योंकि यहां सरकारें आमतौर पर बहुमत पाते ही इंदिरा गांधी मोड में आ जाती हैं. यह उन राज्यों में दिखता रहा है जहां राज्य सरकार किसी छोर्टी पार्टी की हो तो अच्छा बहुमत पाते ही दंभी हो जाती है. जयललिता, मायावती, ममता बनर्जी, कम्यूनिस्ट पार्टियों की सरकारें, शिव सेना की सरकार इस बात के नमूने हैं. बहुमत में आते ही मनमरजी होने लगती है. पैसा बरबाद होने लगता है. अनापशनाप फैसले लिए जाने लगते हैं. जनता की सुनवाई बंद हो जाती है.

भारतीय जनता पार्टी की इस मनमानी पर कांग्रेस रोक लगा सके यही काफी होगा.

वोदका डायरीज : मनोरंजन की बजाय सिर दर्द

एक पुरानी कहावत है कि किसी किताब के मृख्य पृष्ठ को देखकर उसकी अच्छी या बुरी होने का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. यही बात विज्ञापन फिल्म बनाते बनाते फिल्म निर्देशक बने कुशल श्रीवास्तव की मनोवैज्ञानिक रोमांचक फिल्म ‘‘वोदका डायरीज’’ को लेकर कहा जाना चाहिए. इस फिल्म में शराब वाली न वोदका है और न ही कोई रहस्य व रोमांच.

फिल्म की कहानी एसीपी अश्विनी दीक्षित (के के मेनन) से शुरू होती है, जो कि अपनी पत्नी व कवि शिखा दीक्षित (मंदिरा बेदी) के साथ कुछ दिन की छुट्टियां मनाकर वापस मनाली लौट रहे हैं. उन्हे लेने गया उनका सहायक अंकित (शरीब हाशमी) भी उनके साथ ही है. रास्ते में अंकित बताता है कि एसीपी अश्विनी का सच साबित हुआ और अपनी नई किताब के विमोचन के वक्त मारे गए लेखक का मसला सुलझ गया है. के के दीक्षित अपनी ड्यूटी करते हुए भी अपनी पत्नी शिखा की अनदेखी नहीं करते हैं. घर पहुंचते ही अंकित का फोन आता है कि एक लेखिका की हत्या हो गयी है. अश्विनी दीक्षित तुरंत घटनास्थल पर पहुंचते हैं, वहां पर उन्हे सुराग के तौर पर मनाली के एक क्लब वोदका डायरीज का एक वीआईपी पास मिलता है.

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अश्विनी दीक्षित वहां पहुंचते हैं, तो वहां  एक के बाद एक कई हत्याएं होती जाती हैं. हत्यारा अश्विनी की पकड़ से कोसों दूर होता है. अंकित बीच बीच में जोक्स सुनाकर माहौल को संजीदा नहीं होने देता. इधर रोशनी (राइमा सेन), अश्विनी दीक्षित के आस पास घूमती रहती है, वहीं उनकी पत्नी शिखा भी गायब हो चुकी हैं. अब वोदका डायरीज में हुई हत्याओं के हत्यारे की तलाश करने की बजाय अश्विनी दीक्षित अपनी पत्नीशिखा की तलाश में लग जाते हैं. कहानी में कई नए किरदार भी आ जाते हैं. पर कातिल का पता ही नहीं चलता. फिल्म का क्लायमेक्स भी बहुत कनफ्यूज करता है.

जब एक ही फिल्म में कई कहानी और कई किरदार हों, तो उन्हें किसी सटीक अंजाम तक पहुंचाना हर फिल्मकार के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में पहली बार फिल्म निर्देशक बने कुशल श्रीवास्तव के लिए तो सफल होना असंभव ही रहा. फिल्म देखते समय दर्शक भीदुविधाग्रस्त होता रहता है. उसकी समझ में ही नहीं आता कि वास्तव में कहानी क्या है और हो क्या रहा है. फिल्म कभी वर्तमान में तो कभी अतीत में ऐसे हिचकोले लेकर चलती है कि हर कोई कहने लगता है-‘‘हे भगवान कहां फंसा दिया.’’

फिल्म ‘‘वोदका डायरीज’’ की एक वाक्य की कहानी यह है कि एसीपी अश्विनी दीक्षित अपनी पत्नी की मौत का गम भुला नहीं पाए हैं और उन्हे लगता है कि वह कहीं गायब हो गई हैं. तो उनके साथी एक कहानी रचते हैं, जिससे अश्विनी को सच का अहसास कराया जाए, इसलिएअश्विनी को जो हत्याएं हुई लगती हैं, वह हकीकत में हुई ही नहीं हैं. मगर इस सीधी सादी कहानी को कहानीकार व पटकथा लेखक वैभव बाजपेयी तथा निर्देशक कुशल श्रीवास्तव ने इतना घुमा दिया है कि खुद भी इसका सही क्लायमेक्स पेश नहीं कर पाए और फिल्म पूरी तरह से उबाउ व नीरस हो गयी है. फिल्म में ऐसा कुछ नही है जो कि दर्शकों को बांधकर रख सके. यदि अच्छा लेखक इस कहानी को लिखता तो बहुत बेहतरीन फिल्म बन सकती थी. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावित नहीं करता.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो के के मेनन ने एक जटिल किरदार को बड़ी सहजता से निभाया है. इस तरह के किरदार  निभाना हर कलाकार के बस की बात नहीं होती. शरीब हाशमी व राइमा सेन ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है. मंदिरा बेदी महज खूबूसरत गुड़िया ही नजर आती हैं.

फिल्म को अति खूबसूरत लेाकेशनों पर फिल्माया गया है. कैमरामैन मनीष चंद्र भट्ट ने कमाल की कला दिखायी है. फिल्म अपनी लागत वसूल कर पाएगी, इसमें भी संदेह है.

एक घंटे 57 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘वोदका डायरीज’’ का निर्माण विशाल कुकेरजा, कुशल श्रीवास्तव व अतुल पुनेजा सहित छह लोगोंने मिलकर किया है. फिल्म के लेखक वैभव बाजपेयी, निर्देशक कुशल श्रीवास्तव, कैमरामैन मनीष चंद्र भट्ट तथा कलाकार हैं – के के मेनन,मंदिरा बेदी, राइमा सेन, शरीब हाशमी व अन्य.

राजनीति के सामने बेबस सैनिकों को समर्पित ‘टेरर स्ट्राइक’

सिनेमा में आए बदलाव के चलते इन दिनों व्यावसायिक व मसाला फिल्मों की भीड़ में भी कुछ फिल्मकार देश व समाज के लिए उपयोगी फिल्मों के निर्माण में व्यस्त हैं. ऐसी ही एक कश्मीर में सीमा रेखा पर व मनाली में फिल्मायी गयी फिल्म है- ‘‘टेरर स्ट्राइकः बियौंड बाउंड्री’’,जो कि कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में जलवा दिखाने के बाद अब 19 जनवरी को पूरे भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है.

मूलतः झारखंड राज्य के झरिया, धनबाद निवासी और देश के प्रति ईमानदार और सकारात्मक सोच रखने वाले मनोज पांडे इस फिल्म के निर्माता तथा कमल नथानी लेखक व निर्देशक हैं.

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आर्मी पृष्ठभूमि की फिल्म ‘‘टेरर स्ट्राइकः बियौंड बाउंड्री’’ में सीमा पर तैनात जवानों की हालत, उनकी मानसिक स्थिति, उनकी परेशानियों के साथ सैनिको के अंदर की देशभक्ति के जज्बे का भी चित्रण है.  फिल्म में इस बता का भी रेखांकन है कि आतंकवादियों के सामने सीना तानकर खड़े रहने वाले हमारे सैनिक किस तरह व कितना राजनीति व लाल अफसरशाही के सामने बेबस हैं.

फिल्म के निर्माता मनोज पांडे कहते हैं- ‘‘फिल्में समाज का आइना होती है. हम सिनेमा के माध्यम से लोगो को सामाजिक उत्थान और बेहतर जिंदगी का संदेश दे सकते हैं.

‘‘ड्रीमसिटी इंटरटेनमेंट प्रा.लिमिटेड’’ के बैनर तले बनी फिल्म ‘‘टेरर स्ट्राइकः बियौंड बाउंड्री’’ में रजत बेदी, मुकेश तिवारी, जाकिर हुसैन, मनीष वाधवा व तान्या पुरोहित ने अहम किरदार निभाए हैं.

25 नहीं 24 जनवरी को रिलीज होगी ‘पद्मावत’

हाल ही में सोनम कपूर ने हमसे बातचीत करते हुए कहा था कि बौलीवुड में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा है और यह प्रतिस्पर्धा रचनात्मक नहीं है. इसका जीता जागता सबूत अब संजय लीला भंसाली और ‘वायकौम 18’ अपनी फिल्म ‘पद्मावत’ के प्रदर्शन के साथ ही पेश कर रहा है.

अक्षय कुमार, राधिका आप्टे व सोनम कपूर के अभिनय से सजी फिल्म ‘पैडमैन’ 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली है. ‘पैडमैन’ के प्रदर्शन की तारीख एक वर्ष पहले ही घोषित की गयी थी, पर विवादों के चलते ‘पद्मावत’ एक दिसंबर को रिलीज नहीं हो सकी. अब संजय लीला भंसाली व वायकौम 18 ने ‘पद्मावत’ को 25 जनवरी को ‘पैडमैन’ के साथ रिलीज करने की घोषणा की और इस तरह के पोस्टर भी सोशल मीडिया में डाल दिए गए हैं.

मगर सूत्र दावा कर रहे हैं कि ‘वायकौम 18’ और संजय लीला भंसाली ने मन बना लिया है कि वह अपनी फिल्म ‘पद्मावत’ को 25 जनवरी से एक दिन पहले 24 जनवरी की शाम को ही रिलीज कर देंगे. इस तरह वह ‘पैडमैन’ से बाजी मार ले जाएंगे. सूत्रों का दावा है कि संजय लीला भंसाली व ‘वायकाम 18’ ने एक स्ट्रेटजी के तहत 24 जनवरी को फिल्म ‘पद्मावत’ का सिर्फ एक ही शो रखा है. इस शो के लिए टिकट की खास दरें रखी गयी हैं.

सूत्र बताते हैं कि जब 24 जनवरी को ‘पद्मावत’ रिलीज हो जाएगी, तो उसे देखकर दर्शक खुद ब खुद फिल्म की माउथ पब्लिसिटी कर देगा. जिसके परिणाम स्वरुप 25 जनवरी से दर्शक ‘पैडमैन’ की बजाय ‘पद्मावत’ को ही देखना चाहेंगे.

सूत्र बता रहे हैं कि फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर संजय लीला भंसाली, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह व शाहिद कपूर मीडिया से कोई बात नहीं करेंगे. यह कलाकार इस फिल्म का प्रमोसन नहीं करेगे. इस तरह अब वह किसी भी तरह के नए विवाद को पनपने नही देंगे.

जबकि ‘पद्मावत’ की राह आसान नजर नही आ रही है. गुजरात, राजस्थान, हरियाणा व मध्य प्रदेश इन चार राज्यों ने फिल्म ‘पद्मावत’ के रिलीज पर बैन लगा दिया है. तो वहीं महाराष्ट्र और गोवा की पुलिस ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कई तरह की असुरक्षा आदि के संकट का अंदेशा बताकर फिल्म ‘पद्मावत’ को बैन करने की सलाह दी है.

मल्टीप्लैक्स सिनेमाघरो के मालिको ने कहा है कि पुलिस से सुरक्षा का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वह फिल्म को प्रदर्शित करेंगे. उधर करणी सेना के नेताओं ने दिल्ली सहित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास जाकर फिल्म को बैन करने की मांग करने की बात कही है. इतना ही नहीं राजपूत करणी सेना के नेता दावा कर रहे हैं कि वह किसी भी सूरत में ‘पद्मावत’ को प्रदर्शित नहीं होने देंगे. जबकि कुछ राजपूत महिला संगठनों ने ‘पद्मावत’ के प्रदर्शित होने पर जोहर करने की धमकी भी दी है.

कुछ राज्यों द्वारा ‘पद्मावत’ को बैन किए जाने के खिलाफ फिल्म की निर्माण कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी है. सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर क्या कदम उठाता है, यह तो दो चार दिन में सामने आएगा.

अब देखना यह है कि 24 जनवरी तक किस तरह के घटनाक्रम होते हैं और अंततः उंट किस करवट बैठता है.

मिया की फिल्म ‘God, Sex and Truth’ का ट्रेलर रिलीज

सनी लियोनी के बाद अब अमरीकी पोर्न इंडस्‍ट्री का एक और बड़ा नाम मिया मालकोवा बौलीवुड में एंट्री करने जा रही है. बौलीवुड के कौंट्रोवर्शियल फिल्‍ममेकर रामगोपाल वर्मा बहुत ही जल्द मिया मालकोवा को अपनी फिल्‍म से दर्शकों के सामने ला रहे हैं और इस फिल्‍म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है.

मंगलवार सुबह इस फिल्‍म का ट्रेलर रिलीज हुआ जिसे खुद राम गोपाल वर्मा ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है.

इस प्रोजेक्‍ट का ट्रेलर शेयर करते हुए राम गोपाल वर्मा ने ट्वीट किया, ‘यह है ‘गौड सेक्‍स और ट्रूथ’ का ट्रेलर, जिसमें मिया मालकोवा नजर आएंगी. यह मजेदार फिल्‍म गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को सुबह 9 बजे रिलीज होगी.’

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अपने इस प्रोजेक्‍ट के बारे में राम गोपाल वर्मा ने फेसबुक पर एक लंबा-चौड़ा पोस्‍ट लिखा है. उन्‍होंने लिखा है, ‘गौड, सेक्‍स ऐंड ट्रूथ’ न तो कई फिल्‍म है, न शौर्ट फिल्‍म और न कोई सीरीज. यह मिया मालकोवा के सेक्‍स के बारे में अपनी बात रखने और यह उनके लिए कितना जरूरी है, इस बारे में है. मैं एक व्‍यक्ति और फिल्‍ममेकर दोनों के तौर पर गौड, सेक्‍स और ट्रूथ के भीतर की भीतरी परत को वास्‍तविक रूप से प्रस्‍तुत करने में विश्‍वास रखता हूं.’

इससे पहले रामगोपाल वर्मा ने एक ट्वीट कर ये खुलासा किया था कि वो मिया मालकोवा को लेकर एक फिल्म बना रहें हैं जिसके बाद ये खबर सुर्खियों में आ गई थी.

राम गोपाल वर्मा ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा था, ‘हे मिया, गौड, सेक्स ऐंड ट्रुथ करना बहुत ही दिमाग लगाने वाला और शानदार एक्सपीरियंस था. मैंने कभी भी सनी लियोन के साथ शूट नहीं किया है लेकिन ‘गौड, सेक्स ऐंड ट्रुथ’ के दौरान हुए एक्सपीरियंस को मैं कभी नहीं भुला पाऊंगा.’

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मिया मिल्कोवा ने भी अपने ट्विटर एकाउंट पर फिल्म के शूट के बारे में जानकारी दी है. मिया ने ट्वीट किया था भारतीय फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने मेरे साथ यूरोप में ‘गौड, सेक्स ऐंड ट्रुथ’ नाम से वीडियो शूट किया है. सनी लियोन के बाद में दूसरी एडल्ट स्टार हूं जिसने किसी भारतीय फीचर फिल्म मेकर के साथ काम किया है.

रामगोपाल वर्मा की वेब सीरीज ‘गन्स ऐंड थाईस’ भी अपने बोल्ड कंटेंट की वजह से काफी वायरल हुई थी.

श्रेयसी सिंह : शूटिंग में लहराया परचम

बिहार की श्रेयसी सिंह ने 61वीं नैशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीत कर एिक बार फिर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया है. 21 नवंबर, 2017 को दिल्ली में महिलाओं के डबल ट्रैप इवैंट में श्रेयसी सिंह ने मध्य प्रदेश की वर्षा बर्मन को 92-87 पौइंट से हराया.

बिहार के जमुई जिले के छोटे से कसबे गिद्धौर से निकल कर नैशनल और इंटरनैशनल शूटिंग इवैंट में जलवा दिखाने वाली 25 साला श्रेयसी सिंह ने साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत हो तो हर मंजिल को फतेह किया जा सकता है.

‘बिहार की बेटी’ के नाम से मशहूर हो चुकी श्रेयसी सिंह साल 2014 में ग्लास्गो में हुए कौमनवैल्थ गैम्स में वुमन डबल ट्रैप इवैंट में सिल्वर मैडल

जीत कर दमखम दिखा चुकी हैं. वे कौमनवैल्थ गेम्स में मैडल जीतने वाली बिहार की अकेली खिलाड़ी हैं.

श्रेयसी सिंह ने वुमन डबल ट्रैप इवैंट के फाइनल मुकाबले में सिल्वर मैडल पर कब्जा जमाया था. इंगलैंड की चार्टेल केरवुड ने 94 अंक ले कर गोल्ड मैडल जीता था.

श्रेयसी सिंह का कहना है कि कौमनवैल्थ गेम्स से कुछ समय पहले उन्होंने इटली में ट्रेनिंग ली थी, जिस में निशाना लगाने की जम कर प्रैक्टिस की और खुद पर भरोसा भी बढ़ाया.

श्रेयसी सिंह आगे कहती हैं कि उन की मेहनत और लगन के साथ उन के कोच और मैंटर परमजीत सिंह सोढ़ी ने उन के खेल को निखारने और संवारने में कड़ी मेहनत की है.

बिहार के बांका की सांसद रह चुकी पुतुल देवी श्रेयसी सिंह की मां हैं और केंद्रीय मंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह उन के पिता. निशानेबाजी तो मानो श्रेयसी के खून में रचीबसी है, क्योंकि उन के पिता भारतीय निशानेबाजी संघ में अध्यक्ष थे और दादा सुरेंद्र सिंह राष्ट्रीय राइफल संघ के अध्यक्ष रह चुके थे.

घर में खेलखिलाड़ी दोनों का माहौल होने का श्रेयसी सिंह को खूब फायदा मिला और उन्होंने बचपन से ही पढ़ाई के साथ निशानेबाजी में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया था.

श्रेयसी सिंह बताती हैं कि एथेंस ओलिंपिक में सिल्वर मैडल जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से प्रभावित हो कर उन्होंने क्ले इवैंट (ट्रैप ऐंड डबल ट्रैप) को चुना था.

साल 2010 में दिल्ली में हुए कौमनवैल्थ गेम्स में भी श्रेयसी सिंह ने हिस्सा लिया था और शूटिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीता था. इस के अलावा वे सिंगल ट्रैप में छठे और डबल्स ट्रैप इवैंट में 5वें नंबर पर रही थीं.

श्रेयसी सिंह पिछले दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि साल 2009 में जब निशानेबाजी स्कौलरशिप के लिए उन का चयन हुआ था तो लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पिता के रसूख का बेजा इस्तेमाल किया. तब से अब तक दर्जनों इवैंट में गोल्ड, सिल्वर और ब्रौंज मैडल जीत कर श्रेयसी सिंह ने तमाम आरोपों को गलत साबित कर दिया है.

शुरुआती पढ़ाई बिहार से करने के बाद श्रेयसी सिंह ने दिल्ली के हंसराज कालेज से ग्रेजुएशन की. उन्होंने 12वीं क्लास तक की पढ़ाई आरके पुरम के दिल्ली पब्लिक स्कूल से की थी.

पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2007 में दिल्ली की तुगलकाबाद शूटिंग रेंज से निशानेबाजी की ट्रेनिंग लेने की शुरुआत करने के बाद श्रेयसी सिंह ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और लगातार प्रैक्टिस कर खुद को परफैक्ट शूटर बना लिया.

साल 2008 में हुई नैशनल शूटिंग चैंपियनशिप के जूनियर सिंगल ट्रैप इवैंट में गोल्ड मैडल जीत कर उन्होंने अपने इरादे जता दिए थे. उस के बाद तो उन पर मैडल की बरसात ही होने लगी थी.

साल 2009 में फिनलैंड में हुए सिंगल ट्रैप इवैंट में उन्होंने गोल्ड मैडल पर कब्जा जमाया और साल 2012 व 2013 के नैशनल गेम्स में गोल्ड मैडल अपनी झोली में कर लिया था.

अपनी कामयाबी से खुश श्रेयसी सिंह कहती हैं कि आज भी भारतीय समाज में लड़कियों को खेलनेकूदने के लिए ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया जाता है. लड़कियों को सही ट्रेनिंग और मौका दिया जाए तो वे किसी भी मामले में लड़कों से कमतर नहीं हैं.

फिलहाल श्रेयसी सिंह अपने गांव गिद्धौर में राइफल रेंज की शुरुआत करने के सपने को जमीन पर उतारने की कोशिशों में लगी हुई हैं.

अब हो गया शौचालय घोटाला

शौचालय बनाने के लिए मिली रकम की बंदरबांट करने के लिए हर नियमकायदे को ताक पर रख दिया गया. इस के लिए मिले चैक को बैंक ने एनजीओ के खाते में डाल दिया गया.

पीएचईडी यानी लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता विनय कुमार सिन्हा के दस्तखत से ही पैसों का ट्रांसफर एनजीओ के खाते में किया गया. इतना ही नहीं, एडवाइस के साथ लगे 10 चैक बैंक ने एनजीओ के खाते में डाल दिए जबकि सारी रकम शौचालय बनवाने वाले लाभार्थियों के बैंक खातों में जानी थी.

शौचालय की रकम को लूटने के लिए पीएचईडी पूर्वी के तब के कार्यपालक अभियंता और कैशियर ने आरटीजीएस की फाइल में चैक का भुगतान करने के लिए कुछ लाभार्थियों के नाम और उन के बैंक खातों को दिखाया. लेकिन बैंक को भेजी जाने वाली एडवाइस में एनजीओ और दूसरे आदमी का नाम डाल कर रकम का गलत तरीके से भुगतान कर दिया गया.

कैशबुक में मैसर्स सत्यम शिवम कला केंद्र को 16 मई, 2016 को 35 अलगअलग चैकों के जरीए प्रचारप्रसार के सामान के मद में 1 करोड़, 52 लाख, 92 हजार, 176 रुपए दिए गए. इस केंद्र के संचालक महेंद्र कुमार के नाम पर यह रकम पटना के बोरिंग रोड की ओरिएंटल बैंक शाखा में जमा की गई.

इस के अलावा आदि शक्ति सेवा संस्थान के संचालक उदय सिंह और सुमन सिंह के इलाहाबाद बैंक की बिहारशरीफ शाखा और मध्य बिहार ग्रामीण बैंक की कंकड़बाग शाखा में 10 करोड़, 3 लाख, 94 हजार, 442 रुपए डाले गए.

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मां सर्वेश्वरी सेवा संस्थान के संचालक मनोज कुमार, प्रमिला सिंह और बौबी कुमारी के पंजाब नैशनल बैंक की बख्तियारपुर शाखा में 2 करोड़, 14 लाख, 57 हजार, 400 रुपए जमा किए गए.

शिव सेवा संस्थान की संचालिका रीता कुमारी और पीएचईडी की डाटा औपरेटर प्रीति भारती के मध्य बिहार ग्रामीण बैंक की पटना शाखा और पंजाब नैशनल बैंक की दरभंगा शाखा औैर कारपोरेशन बैंक की मनेर शाखा में 9 लाख, 74 हजार रुपए डाले गए. ये सारे भुगतान 1 मई, 2016 से 23 जून, 2016 के बीच किए गए.

14 करोड़, 36 लाख रुपए के इस शौचालय घोटाले का मुख्य आरोपी विनय कुमार सिन्हा है. वह फिलहाल बिहार राज्य जल परिषद गंगा परियोजना अंचल 2 में अधीक्षण अभियंता के तौर पर काम कर रहा है, वहीं दूसरा आरोपी बिटेश्वर प्रसाद सिंह लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण के पटना प्रमंडल पूर्वी में कैशियर है.

घोटालेबाजों ने शौचालय बनाने की रकम को गटकने के लिए फर्जी एनजीओ बना रखे थे. उन एनजीओ के न तो औफिस हैं और न ही कहीं बोर्डबैनर लगे हुए हैं. इस घोटाले में अब तक 14 लोगों के खिलाफ पटना के गांधी मैदान थाने में एफआईआर दर्ज की गई है.

शौचालय घोटाले में गिरफ्तार पीएचईडी के कैशियर बिटेश्वर प्रसाद सिंह को पुलिस ने तेलंगाना में दबोच कर पटना लाने के बाद जब पूछताछ की तो उस ने साफतौर पर कहा कि घोटाले का असली मास्टरमाइंड विनय कुमार सिन्हा है. विनय के दबाव में ही उस ने गलत काम किया.

उसी ने बताया कि विनय का घर राजेंद्र नगर टैलीफोन ऐक्सचेंज के पास है. वह दफ्तर से चैक ले कर घर आता था और विनय के घर पर सभी एनजीओ संचालक भी आते थे. वहीं पर चैक पर दस्तखत होने के बाद रुपयों की बंदरबांट होती थी.

विनय कुमार सिन्हा ने खुद को बचाने के लिए बिटेश्वर के सिर पर घोटाले का आरोप मढ़ दिया था और उस के खिलाफ पटना के गांधी मैदान थाने में केस दर्ज कर दिया था.

31 अक्तूबर, 2017 को दर्ज एफआईआर में विनय ने कहा है कि कैशियर बिटेश्वर प्रसाद सिंह ही घोटाले का मास्टरमाइंड है और उसी ने फर्जी दस्तखत कर शौचालय योजना के करोड़ों रुपयों की गैरकानूनी निकासी की.

एफआईआर में विनय कुमार सिन्हा ने यह भी कहा कि वह 7 जुलाई, 2015 से 1 जुलाई, 2016 तक पीएचईडी में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात था. उस के बाद उस का ट्रांसफर मुजफ्फरपुर में हो गया था. उस ने मुजफ्फरपुर जाने से पहले महकमे का सारा लेखाजोखा बिटेश्वर प्रसाद सिंह को सौंप दिया था.

बिटेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन का खाता एसबीआई की मुख्य शाखा गांधी मैदान में है. पिछले साल उस बैंक के सहायक प्रबंधक शिवकुमार झा को विनय कुमार सिन्हा और उस ने मैनेज किया था. गलत तरीके से चैक पास करने के लिए शिवकुमार झा को 10 लाख रुपए दिए गए थे. फिलहाल बक्सर जिले के भारतीय स्टेट बैंक की गरहथाकलां शाखा में काम कर रहे शिवकुमार झा को 9 नवंबर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

किसी भी सरकारी योजना के लिए एक महीने में 50 लाख रुपए से ज्यादा नहीं देने का नियम है, पर विनय की दबंगई और रुपयों के लालच में बैंक अफसर ने करोड़ों रुपए के चैक जारी किए. घोटालेबाजों ने 23 दिनों में ही निकासी के 14 करोड़ रुपए खर्च कर डाले. 14 करोड़ रुपए की यह रकम सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर करनी थी जिसे 4 एनजीओ और 2 निजी खातों में डाल दिया गया.

पीएचईडी की डाटा औपरेटर प्रीति भारती का मुंह बंद रखने के लिए 2 लाख, 97 हजार रुपए उस के खाते में डाले गए थे. प्रीति का खाता पंजाब नैशनल बैंक की दरभंगा शाखा में है, जिस का अकाउंट नंबर 465000017741 है.

बिटेश्वर प्रसाद सिंह ने पुलिस को बताया है कि एनजीओ के खाते में जितने भी चैक या आरटीजीएस या एनईएफटी के जरीए रकम डाली जाती थी उस में से 80 फीसदी विनय ले लेता था. एनजीओ आदि शक्ति सेवा संस्थान का संचालक विनय कुमार का परिचित है इसलिए उस के खाते में सब से ज्यादा 10 करोड़ रुपए की रकम जमा कराई गई थी.

बिटेश्वर प्रसाद सिंह ने पुलिस के सामने यह भी कबूला कि विनय को 4 करोड़ रुपए और उसे 2 करोड़़ रुपए मिले थे. उस पैसे से दोनों ने दिल्ली और रांची में फ्लैट और जमीन खरीद ली थी. विनय ने लग्जरी कार भी खरीदी थी.

शौचालय बनाने में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद 17 जून, 2016 को शौचालय बनाने की योजना पीएचईडी से छीन कर डीआरडीए को देने का फैसला लिया गया. उस के बाद भी उस समय पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता रहे विनय कुमार ने शौचालय योजना की तमाम फाइलें और कागजात डीआरडीए को नहीं सौंपे.

इस के लिए विनय कुमार को 4 बार नोटिस भेजा गया, पर वह टालमटोल करता रहा. विनय कुमार की इस करतूत की जानकारी महकमे के बाकी अफसरों ने भी कलक्टर को देने की हिम्मत नहीं जुटाई.

बख्तियारपुर के मां सर्वेश्वरी सेवा संस्थान में एक ही परिवार के मांबेटी और बेटी का देवर 3 खास पदों पर बैठे हैं, जबकि एनजीओ के नियम के मुताबिक संस्था के अफसरों के बीच खून का रिश्ता नहीं होना चाहिए. इस संस्थान का गठन साल 2014 में हुआ था. हैरानी की बात है कि 2 साल में ही इस एनजीओ को करोड़ों रुपए के काम मिलने शुरू हो गए थे.

शौचालय योजना की रकम को गटकने के लिए घोटालेबाजों ने 3 हजार ऐसे शौचालय लाभार्थियों की लिस्ट बनाई जिन का कोई स्थायी पता ही नहीं है. यह लिस्ट 10 से 12 जून, 2016 के बीच बनाई गई. जांच दल अब बैंक खातों के आधार पर लाभार्थियों का अतापता लगाने में जुटा हुआ है.

अथमगोला में 343, बख्तियारपुर में 297, दानापुर में 202, दनियावां में 197, बिहटा में 159, बाढ़ में 109, पंडारक में 104, खुसरूपुर में 90, नौबतपुर में 54, फुलवारी में 40, पटना सदर में 38, मोकामा में 28 लाभार्थियों की लिस्ट में पते दर्ज नहीं हैं.

गौरतलब है कि निजी घरेलू शौचालय की एक यूनिट बनाने में 6 हजार, 600 रुपए की लागत आती है. इस में से 3200 रुपए केंद्र सरकार और 2500 रुपए राज्य सरकार मुहैया कराती है. शौचालय बनाने के इच्छुक लोगों को 900 रुपए अपनी जेब से लगाने पड़ते हैं. 5700 रुपए लाभार्थियों के खाते में सीधा ट्रांसफर करना होता है और इसी रकम में घोटाला किया गया.

29 अगस्त को स्वच्छ भारत अभियान की समीक्षा बैठक में कलक्टर को घोटाले की भनक लग चुकी थी. बैठक में खुलासा हुआ कि 1 मई से 23 जून, 2016 के बीच तब के कार्यपालक अभियंता और कैशियर ने तमाम नियमों को ताक पर रख कर 14 करोड़, 38 लाख रुपए की रकम का भुगतान किया है.

उस के बाद कार्यपालक अभियंता और कैशियर को तमाम बहीखाते मुहैया कराने का निर्देश दिया गया, पर वे कई दिनों तक आनाकानी करते रहे. इस के बाद भी जिला प्रशासन ने उन के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई?

गौरतलब है कि 2 अक्तूबर, 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त कराने का टारगेट रखा गया है. सभी राज्यों को 31 अक्तूबर, 2018 तक शौचालय बनाने के टारगेट को पूरा करना है.

इस मामले में देश के सभी राज्यों में बिहार ही सब से फिसड्डी है. टारगेट को पाने के लिए अब 15 महीने में राज्य में एक करोड,़ 40 लाख शौचालय बनवाने होंगे जो दूर की कौड़ी है.

देश में शौचालय बनाने की राष्ट्रीय औसत 67 फीसदी है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 32.5 फीसदी हो कर रेंग रहा है. देश के 192 जिले खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं और उन में बिहार का एक भी जिला नहीं है.

बिहार के पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा का दावा है कि शौचालय बनाना और खुले में शौच पर रोक लगाना सरकार की प्राथमिकता है और इसे हर हाल में तय समयसीमा के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. इस के लिए खास रणनीति के तहत काम शुरू किया गया है. राज्य की एक हजार पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं.

इस साल 4555 पंचायतों में पूरी तरह शौचालय बनाने का काम हो जाएगा. साल 2018-19 में 2529 पंचायतों और 2019-20 में 1240 पंचायतों को पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त कर दिया जाएगा.

तापसी का ब्वायफ्रेंड संग रोमांटिक हौलीडे

भले ही बौलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू सरेआम अपने प्यार का इजहार न करें लेकिन उनके रिश्ते की हकीकत से हर कोई वाकिफ हैं. बैडमिंटन प्लेयर मैथियस बोई और तापसी पिछले चार साल से एक दूसरे को डेट कर रहे हैं. कुछ समय पहले सुनने में आया था कि तापसी का उनके कथित ब्वायफ्रेंड मेथियस बोई से ब्रेकअप हो गया है. खबर थी कि तापसी की जिंदगी में कोई और आ गया है और इसका सारा असर उनके रिलेशन पर पड़ रहा है.

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हालांकि तापसी के करीबी सूत्र के मुताबिक ये सब मात्र अफवाह है. तापसी अभी भी ओलंपिक मेडल विजेता मेथियस बोई को डेट कर रही हैं और दोनों एक-दूसरे को लेकर काफी सीरियस भी हैं.

अपने रिलेशनशिप को लेकर लगातार सुर्खियां बटोर रही तापसी हाल ही में मैथियस के साथ गोवा गई थी. तापसी ने वहां पर अपने ब्वायफ्रेंड के सांथ रोमांटिक हौलीडे मनाया. वह कुछ ही दिन पहले छुट्टी मनाकर मुंबई लौटी हैं. उनकी बहन शगुन भी मैथियस के काफी करीब हैं और वह भी उनके साथ गोवा गई थीं.

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तापसी न्यू ईयर पर अपने ब्वायफ्रेंड के साथ नहीं थीं क्योंकि मैथियस को 1 जनवरी को हुए प्रीमियर बैडमिंटन लीग में शामिल होने के लिए लखनऊ जाना था. अब तापसी न सिर्फ मैथियस, बल्कि उनके परिवारवालों के भी काफी करीब आ गई हैं. सूत्रों की मानें तो जब भी मैथियस के पेरेंट्स मुंबई आते हैं तो व्यस्त होने के बावजूद तापसी वक्त निकालकर उनसे मिलती हैं और उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताती हैं. मैथियस के घरवालों को तापसी बेहद पसंद हैं और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द दोनों अपने रिश्ते को एक नया नाम दे दें. हालांकि तापसी और मैथियस फिलहाल अपने करियर पर फोकस कर रहे हैं.

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बता दें, तापसी पन्नू अब तक बौलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं. तापसी पन्नू बेबी, पिंक, नाम शबाना जैसी बड़ी फिल्मों में काम कर चुकी हैं. वहीं तापसी वरुण धवन के साथ सलमान खान की फिल्म जुड़वा के सीक्वल ‘जुड़वा 2’ में नजर आई थीं. वरुण धवन, तापसी पन्नू और जैकलीन फर्नांडिज स्टारर ये फिल्म ब्लौकबस्टर हिट साबित हुई.

घटिया चुनावी बोल और उन का नासूर

गुजरात चुनाव ने जो घाव चुनावी भाषा पर छोड़े हैं उन का नासूर सालों तक रहेगा. हारजीत किसी की भी हो, शब्द जो दोनों तरफ से बोले गए, गंभीर थे क्योंकि इन्हें बोलने वाले एक तरफ नरेंद्र मोदी और उन के सहयोगी व दूसरी तरफ कांग्रेस के कई नामी नेता थे. सड़कछाप नेता तो हर चुनाव में असभ्य बोल बोलते ही रहते हैं.

सोशल मीडिया ने छोटीछोटी बातों को खूब उछाला. टीवी ऐंकरों ने कागजों से बेबात के मुद्दे निकाल कर इतना दोहराए कि मानो वे कहीं अशोक की लाट पर लिखे शब्द हों. चुनावी भाषणों का स्तर हमेशा ही नीचा होता है पर चूंकि प्रधानमंत्री ने न केवल हर अपशब्द को लपक लिया, बल्कि उस पर और गंद जमा कर वापस फेंक दिया. यह चाहे चुनावी तिकड़म हो, पर यह मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति की तरह व अमेरिकी चुनावों की तरह दुर्गंध छोड़ गई है.

चुनावों में जीत की छटपटाहट लगभग अद्भुत थी और हर नेता तनाव में था. राहुल गांधी ने लगातार आक्रमण कर के और गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स को गब्बर सिंह टैक्स कह कर एक गंभीर मामले को सड़क पर लाने का काम किया तो प्रधानमंत्री ने बेपर की पाकिस्तानी सुपारी की बात कह  डाली और खुद को गुजरात की अस्मिता का इकलौता नमूना घोषित कर डाला. अगर कभी ‘इंदिरा इज इंडिया’ कहा गया तो नरेंद्र मोदी ने खुद नरेंद्र मोदी ही गुजरात है जैसा घोषित कर दिया, जिस की देखादेखी उन के प्रवक्ता संबित पात्रा ने नरेंद्र मोदी को देश का बाप घोषित कर डाला.

गलीछाप औरतों की सी तूतूमैंमैं, जिस में 3 पीढि़यों का इतिहास उधेड़ा गया, विशाल पंडालों और स्क्रीनों से हुईं. गनीमत यह रही कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी का आमनासामना अमेरिकी व यूरोपीय चुनावी परंपरा के अनुसार नहीं हुआ वरना शायद दोनों हाथापाई तक पर उतर आते.

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