Romantic Story: आवारा बादल – क्या हो पाया इला और व्योम का मिलन

Romantic Story: फाल्गुन अपने रंग धरती पर बिखेरता हुआ, चपलता से गुलाल से गालों को आरक्त करता हुआ, चंचलता से पानी की फुहारों से लोगों के दिलों और उमंगों को भिगोता हुआ चला गया. सेमल के लालनारंगी फूलों से लदे पेड़ और अलगअलग रंगों में यहांवहां से झांकते बोगेनवेलिया के झाड़, हर ओर मानो रंग ही रंग बिखरे हुए थे.

फाल्गुन जातेजाते गरमियों के आने का संकेत भी कर गया. हालांकि उस समय भी धूप के तीखेपन में कोई कमी नहीं थी, पर सुबहशाम तो प्लेजेंट ही रहते थे, लेकिन जातेजाते वह अपने साथ रंगों की मस्ती तो ले ही गया, साथ ही मौसम की गुनगुनाहट भी.

‘‘उफ, यह गरमी, आई सिंपली हेट इट,’’ माथे पर आए पसीने को दुपट्टे से पोंछते हुए इला ने अपने गौगल्स आंखों पर सटा दिए, ‘‘लगता है हर समय या तो छतरी ले कर निकलना होगा या फिर एसी कार में जाना पड़ेगा,’’ कहतेकहते वह खुद ही हंस पड़ी.

‘‘तो मैडम, यह काम क्या इस बंदे को करना होगा कि रोज सुबह आप के घर से निकलने से पहले फोन कर के आप को छतरी रखने के लिए याद दिलाए या फिर खुद ही छतरी ले कर आप की सेवा में हाजिर होना पड़ेगा,’’ व्योम चलतेचलते ठहर गया था.

उस की बात सुन इला को भी हंसी आ गई.

‘‘ज्यादा स्टाइल मारने के बजाय कुछ ठंडा पिला दो तो बेहतर होगा.’’

‘‘क्या लोगी? कोल्ड कौफी या कोल्ड ड्रिंक?’’

‘‘कोल्ड कौफी मिल जाए तो मजा आ जाए,’’ इला चहकी.

‘‘आजकल पहले जैसा तो रहा नहीं कि कोल्ड कौफी कुछ सलैक्टेड आउटलेट्स पर ही मिले. अब तो किसी भी फूड कोर्ट में मिल जाती है. यहीं किसी फूड कोर्ट में बैठते हैं,’’ व्योम बोला.

अब तक दोनों राजीव चौक मैट्रो स्टेशन पर पहुंच चुके थे. भीड़भाड़ और धक्कामुक्की यहां रोज की बात हो गई है. चाहे सुबह हो, दोपहर, शाम या रात, लोगों की आवाजाही में कोई कमी नजर नहीं आती है.

‘‘जहां जाओ हर तरफ शोर और भीड़ ही नजर आती है. पहले ही क्या कम पौल्यूशन था जो अब नौयज पौल्यूशन भी झेलना पड़ता है,’’ इला ने कुरसी पर बैठते हुए कहा.

‘‘अच्छा है यहां एसी है,’’ व्योम मासूम सा चेहरा बना कर बोला, जिसे देख इला जोर से हंस पड़ी, ‘‘उड़ा लो मजाक मेरा, जैसे कि मुझे ही गरमी लगती है.’’

‘‘मैडम गरमी का मौसम है तो गरमी ही लगेगी. अब बिन मौसम बरसात तो आने से रही,’’ व्योम ने कोल्ड कौफी का सिप लेते हुए कहा. उसे इला को छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था.

‘‘छेड़ लो बच्चू, कभी तो मेरी बारी भी आएगी,’’ इला ने बनावटी गुस्सा दिखाया.

‘‘बंदे को छेड़ने का पूरा अधिकार है. आखिर प्यार जो करता है और वह भी जीजान से.’’

व्योम की बात से सहमत इला ने सहमति में सिर हिलाया. 2 साल पहले हुई उन की मुलाकात उन के जीवन में प्यार के इतने सतरंगी रंग भर देगी, तब कहां सोचा था उन्होंने. बस, अब तो दोनों को इंतजार है तो एक अच्छी सी नौकरी का. फिर तो तुरंत शादी के बंधन में बंध जाएंगे. व्योेम एमबीए कर चुका था और इला मार्केटिंग के फील्ड में जाना चाहती थी.

‘‘चलो, अब जल्दी करो, पहले ही बहुत देर हो गई है. मां डांटेंगीं कि रोजरोज आखिर व्योम से मिलने क्यों जाना है,’’ इला उठते हुए बोली.

दोनों ग्रीन पार्क स्टेशन से निकल कर बाहर आए ही थे कि वहां बारिश हो रही थी.

‘‘अरे, यह क्या, पीछे तो कहीं भी बारिश नहीं थी. फिर यहां कैसे हो गई? लगता है मौसम भी आज हम पर मेहरबान है, जो बिन मौसम की बारिश से एकदम सुहावना हो गया है,’’ इला हैरान थी.

‘‘मुझे तो लगता है कि दो आवारा बादल के टुकड़े होंगे जो प्यार के नशे की खुमारी में आसमान में टकराए होंगे और बारिश की कुछ बूंदें आ गई होंगी, वरना केवल तुम्हारे ही इलाके में बारिश न हुई होती. जैसे ही उन के नशे की खुमारी उतरेगी, दोनों कहीं दूर छिटक जाएंगे और बस, बारिश भी गायब हो जाएगी,’’ आसमान को देखता हुआ व्योम कुछ शायराना अंदाज में बोला.

‘‘तुम भी किसी आवारा बादल की तरह मुझे छोड़ कर तो नहीं चले जाओगे. कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे प्यार की खुमारी भी एक दिन उतर जाए और तुम भी मुझ से छिटक कर कहीं दूर चले जाओ,’’ इला की गंभीर आवाज में एक दर्द छिपा था. शायद उस अनजाने भय की निशानी था जो हर प्यार करने वाले के दिल में कहीं न कहीं छिपा होता है.

‘‘कैसी बातें कर रही हो? आखिर तुम सोच भी कैसे लेती हो ऐसा? मैं क्यों जाऊंगा तुम्हें छोड़ कर,’’ व्योम भी भावुक हो गया था, ‘‘मेरा प्यार इतना खोखला नहीं है. मैं खुद इसे साबित नहीं करना चाहता, पर कभी मन में शक आए तो आजमा लेना.’’

‘‘मैं तो मजाक कर रही थी,’’ इला ने व्योम का हाथ कस कर थामते हुए कहा. जब से वह उस की जिंदगी में आया था, उसे लगने लगा था कि हर चीज बहुत खूबसूरत हो गई है. कितना परफैक्ट इंसान है वह. प्यार, सम्मान देने के साथसाथ उसे बखूबी समझता भी है. बिना कुछ कहे भी जब कोई आप की बात समझ जाए तो वही प्यार कहलाता है.

इला को एक कंपनी में मार्केटिंग ऐग्जीक्यूटिव का जौब मिल गया और व्योम का विदेश से औफर आया, लेकिन वह इला से दूर नहीं जाना चाहता था. इला के बहुत समझाने पर वह मान गया और सिंगापुर चला गया. दोनों ने तय किया था कि 6 महीने बाद जब दोनों अपनीअपनी नौकरी में सैट हो जाएंगे, तभी शादी करेंगे. फोन, मैसेज और वैबकैम पर रोज उन की बात होती और अपने दिल का सारा हाल एकदूसरे से कहने के बाद ही उन्हें चैन आता.

इला कंपनी के एक नए प्रोडक्ट की पब्लिसिटी के लिए जयपुर गई थी, क्योंकि उसी मार्केट में उन्हें उस प्रोडक्ट को प्रमोट करना था. वहां से वापस आते हुए वह बहुत उत्साहित थी, क्योंकि उसे बहुत अच्छा रिस्पौंस मिला था और उस ने फोन पर यह बात व्योम को बता भी दी थी. अब एक प्रमोशन उस का ड्यू हो गया था. लेकिन उसे नहीं पता था कि नियति उस की खुशियों के चटकीले रंगों में काले, स्याह रंग उड़ेलने वाली है.

रात का समय था, न जाने कैसे ड्राइवर का बैलेंस बिगड़ा और उन की कार एक ट्रक से टकरा गई. ड्राइवर की तो तभी मौत हो गई. लेकिन हफ्ते बाद जब उसे होश आया तो पता चला कि उसे सिर पर गहरी चोट आई थी और उस की आवाज ही चली गई थी.

धुंधला सा कुछ याद आ रहा था कि वह व्योम से बात कर रही थी कि तभी सामने आते ट्रक को देख उसे लगा था कि शायद वह व्योम से आखिरी बार बात कर रही है और वह चिल्ला कर ड्राइवर को सचेत करना ही चाहती थी कि आवाज ही नहीं निकली थी. सबकुछ खत्म हो चुका था उस के लिए.

परिवार के लोग इसी बात से खुश थे कि इला सकुशल थी. उस की जान बच गई थी, पर वह जो हर पल व्योम से बात करने को लालायित रहती थी, नियति से खफा थी, जिस ने उस की आवाज छीन कर व्योम को भी उस से छीन लिया था.

‘‘तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि व्योम अब तुम्हें नहीं अपनाएगा? वह तुम से प्यार करता है, बहुत प्यार करता है, बेटी. उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा,’’ मां ने लाख समझाया पर इला का दर्द उस की आंखों से लगातार बहता रहता. वह केवल लिख कर ही सब से बात करती. उस ने सब से कह दिया था कि व्योम को इस बारे में कुछ न बताया जाए और न ही वह अब उस से कौंटैक्ट रखना चाहती थी.

‘‘अपने प्यार पर इतना ही भरोसा है तुझे?’’ उस की फ्रैंड रमा ने जब सवाल किया तो इला ने लिखा, ‘अपने प्यार पर तो मुझे बहुत भरोसा है, पर मैं आधीअधूरी इला जो अपनी बात तक किसी को कह न सके, उसे सौंपना नहीं चाहती. वह एक परफैक्ट इंसान है, उसे परफैक्ट ही मिलना चाहिए सबकुछ.’

व्योम ने बहुत बार उस से मिलने की कोशिश की, फोन किया, मैसेज भेजे, चैट पर इन्वाइट किया, पर इला की तो जैसे आवाज के साथसाथ भावनाएं भी मौन हो गई थीं. अपने सपनों को उस ने चुप्पी के तालों के पीछे कैद कर दिया था. उस की आवाज पर कितना फिदा था व्योम. कैसी अजीब विडंबना है न जीवन की, जो चीज सब से प्यारी थी उस से वही छिन गई थी.

3-4 महीने बाद व्योम के साथ उस का संपर्क बिलकुल ही टूट गया. व्योम ने फोन करने बंद कर दिए थे. ऐसा ही तो चाहती थी वह, फिर क्यों उसे बुरा लगता था. कई बार सोचती कि आखिर व्योम भी किसी आवारा बादल की तरह ही निकला जिस के प्यार के नशे की खुमारी उस के एक ऐक्सिडैंट के साथ उतर गई.

वक्त गुजरने के साथ इला ने अपने को संभाल लिया. उस ने साइन लैंग्वेज सीख ली और मूकबधिरों के एक संस्थान में नौकरी कर ली. वक्त तो गुजर जाता था उस का, पर व्योम का प्यार जबतब टीस बन कर उभर आता था. उसे समझ ही नहीं आता था कि उस ने व्योम को बिना कुछ कहनेसुनने का मौका दिए उस के प्यार का अपमान किया था या व्योम ने उसे छला था. जब भी बारिश आती तो आवारा बादल का खयाल उसे आ जाता.

वह मौल में शौपिंग कर रही थी, लगा कोई उस का पीछा कर रहा है. कोई जानीपहचानी आहट, एक परिचित सी खुशबू और दिल के तारों को छूता कोई संगीत सा उसे अपने कानों में बजता महसूस हुआ.

ऐस्केलेटर पर ही पीछे मुड़ कर देखा. चटकीले रंगों में मानो फूल ही फूल हर ओर बिखरते महसूस हुए. जल्दीजल्दी वहां से कदम बढ़ाने लगी, मानो उस परिचय के बंधन से छूट कर भाग जाना चाहती हो. अचानक उस का हाथ कस कर पकड़ लिया उस ने.

ओह, इस छुअन के लिए पूरे एक बरस से तरस रही है वह. मन में असंख्य प्रश्न और तरंगें बहने लगीं. पर कहे तो कैसे कहे वह? लब हिले भी तो वह सच जान जाएगा तब…हाथ छुड़ाना चाहा, पर नाकामयाब रही.

भरपूर नजरों से व्योम ने इला को देखा. प्यार था उस की आंखों में…वही प्यार जो पहले इला को उस की आंखों में दिखता था.

‘‘कैसी हो,’’ व्योम ने हाथों के इशारे से पूछा, ‘‘मुझे बस इतना ही समझा. एक बार भी मेरे प्यार पर भरोसा करने का मन नहीं हुआ तुम्हारा?’’ अनगिनत प्रश्न व्योम पूछ रहा था, पर यह क्या, वह तो साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहा था.

अवाक थी इला, ‘‘तुम बोल क्यों नहीं रहे हो,’’ उस ने इशारे से पूछा.

‘‘क्योंकि तुम नहीं बोल सकती. तुम ने कैसे सोच लिया कि तुम्हारी आवाज चली गई तो मैं तुम्हें प्यार करना छोड़ दूंगा. मैं कोई आवारा बादल नहीं. जब तुम्हारे मुझ से कौंटैक्ट न रखने की वजह पता चली तो मैं ने ठान लिया कि मैं भी अपना प्यार साबित कर के ही रहूंगा. बस, तब से साइन लैंग्वेज सीख रहा था. अब जब मुझे आ गई तो तुम्हारे सामने आ गया.’’

उस के बाद इशारों में ही दोनों घंटों शिकवेशिकायतें करते रहे. इला के आंसू बहे जा रहे थे. उस के आंसू पोंछते हुए व्योम बोला, ‘‘लगता है दो आवारा बादल इस बार तुम्हारी आंखों से बरस रहे हैं.’’

व्योम के सीने से लगते हुए इला को लगा कि व्योम वह बादल है जो जब आसमान में उड़ता है तो बारिश को तरसती धरती उस की बूंदों से भीग जी उठती है.

Funny Hindi Story: दूल्हे का घोड़ा रस्म अदायगी का रोड़ा

Funny Story, लेखक – राकेश सोहम

मुझे बचपन से ब्याहबरातों में जाने का शौक है. गुड्डेगुडि़यों की शादी से ले कर अपनी बरात भी हंस कर ‘अटैंड’ की है. पर हाय, बचपन के दिनों की वह शादी जो कभी नहीं भूलती.

टिल्लू के बड़े भाई की बरात 2 ट्रैक्टर में लद कर एक छोटे से गांव में पहुंची थी. पूरे 2 घंटे धूल भरी पगडंडियों से हिचकोले खाते हुए जब गांव पहुंचे, तो पहचानना मुश्किल था कि कौन दूल्हा है और कौन बराती. सभी धूल में सने एक से दिखाई पड़ते थे.

दूल्हे के गले में खींचतान कर लटकाई हुई टाई गले में झूलते सांप सी जान पड़ती थी. औरतों की गोद में
खेलते नदान बराती उसे देख कर भाग खड़े होते.

गांव में बरातियों का स्वागत मीठे पानी में खाने वाले रंग को घोल कर किया गया.

बरातियों के स्वागत के बाद जब रस्म अदायगी का समय आया तो घोड़ा भी मौजूद न था. वहां के एकलौते घोड़ा मालिक ने बताया कि उस के पास एक ही घोड़ा है, जो शाम से लापता है. कहीं खेत में घास चरने निकल गया है.

सवाल था कि उसे खोजेगा कौन? गांव में लाइट नहीं थी. घुप अंधेरे में चलना दूभर था, उधर पंडितजी जोर डाल रहे थे कि दूल्हे का घोड़े पर बैठना शुभ होता है. दूल्हा घोड़े पर नहीं चढ़ेगा तो अशुभ हो जाएगा.

हमारी मित्र मंडली बड़े जोश में थी. एक मित्र कहने लगे कि शादी में हमारे रहते अशुभ कैसे हो सकता है, इसलिए हम घोड़ा मालिक के घर गए औए उसे खूब धमकाया, पर वह बेचारा मजबूर था.

आखिर जवानी के जोश से भरे हम मित्रों ने पांडवों की तरह स्वर्ग से एरावत उतारने की ठानी. लालटेन के सहारे अंधेरे खेतों में निकल पड़े घोड़े को ढूंढ़ने. एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद हम सब ने उसे धर दबोचा.

घोड़े को खींचतान कर उस के मालिक के घर तक ले गए. सभी ने उसे फिर धमकाया. वह घबरा गया. उस ने डर के मारे एक बड़ा सा कांच की कढ़ाई वाला दुशाला घोड़े की पीठ पर चढ़ा दिया और हाथ जोड़ कर नतमस्तक हो गया. हम ने उस की टिमटिमाती लालटेन लौटा दी.

हमारी मित्र मंडली सजेधजे घोड़े को ले कर रस्म अदायगी के लिए पहुंची, तो सभी खुश हो गए. गैस बत्ती की रोशनी में दूल्हा घोड़ी चढ़ा.

दूल्हा 6 फुट से भी लंबा गबरू जवान था. घोड़े पर बैठने से उस के दोनों पैर जमीन को छूते थे. हालात यों थे कि दूल्हा अपने दोनों पैर जमीन पर ठीक से टिका ले तो घोड़ा नीचे से निकल भागे. देखने वालों का समझना मुश्किल था कि घोड़ा सामान्य कद से ज्यादा छोटा है या दूल्हा ज्यादा लंबा.

बरात लगी और रस्म अदायगी के बाद मित्र मंडली घोड़े को ले कर उस के मालिक के घर तक आई, लेकिन उस के आंगन में लंबेतगड़े घोड़े को देख कर सभी चौंक गए.

तभी घोड़े के मालिक की पत्नी उलाहना देते हुए बाहर आई और चिल्ला कर बोली, ‘‘कहां चले गए थे? रमुआ कब से आ कर खड़ा है. बरात में नहीं जाना है क्या? पेशगी लिए हो. रमुआ को ले जाओ, वरना शादी का मुहूर्त निकल जाएगा.’’

घोड़े का मालिक पोल खुल जाने के डर से हाथपैर जोड़ने लगा.

दरअसल, हमारी मित्र मंडली जिसे घोड़ा समझ कर पकड़ कर लाई थी, वह एक खच्चर था. अंधेरा होने और हमारी मित्र मंडली के डर से घोड़े के मालिक ने चुप्पी साध ली थी और असलियत नहीं बताई.

News Story: नक्सली सफाया और चांदी का दर्द

News Story: ‘आपरेशन सिंदूर’ के नाम पर भगवाधारी गैंग के मार्किट में मचाए गए उत्पात को अब अनामिका भुला चुकी थी. उस चांदनी रात में विजय और अनामिका ने छत पर खूब प्यार बरसाया था. तब बातोंबातों में अनामिका ने विजय से पूछा था, ‘‘तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?’’

‘‘अचानक से यह सवाल क्यों? तुम जानती हो कि मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं,’’ विजय ने अनामिका के बालों में हाथ फेरते हुए कहा.

‘‘कहने में और करने में बड़ा फर्क होता है जनाब. क्या मेरे लिए सरकार से भी पंगा सकते हो?’’ अनामिका बोली.

‘‘अब हम दोनों के बीच में सरकार कहां से आ गई?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘जैसे उस दिन मंजू आंटी और उन लफंगों के बीच मैं आ गई थी, जो देशभक्ति के नाम पर मार्किट में लूट मचा रहे थे,’’ अनामिका ने कहा.

‘‘तुम पहेलियां मत बुझाओ. जो बात है साफसाफ कहो,’’ विजय थोड़ा चिढ़ गया था.

‘‘समय आने पर सब पता चल जाएगा. ‘तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं’… अपनी इस बात पर कायम
रहना बस,’’ अनामिका थोड़ा सीरियस हो कर बोली.

इस बात को कुछ दिन बीत गए थे. एक शाम को अनामिका ने विजय को फोन किया, ‘‘अभी कहां हो?’’

‘घर पर. क्या हुआ? सब ठीक?’ विजय ने पूछा.

‘‘मेरे लिए कुछ भी करने का वक्त आ गया है. मैं थोड़ी देर में तुम्हारे घर आ रही हूं,’’ इतना कह कर अनामिका ने फोन काट दिया.

विजय को कुछ समझ नहीं आया. वह अनामिका के आने का इंतजार करने लगा.

‘‘किस का फोन था?’’ विजय की मम्मी ने पूछा.

विजय का ध्यान टूटा, तो वह बोला, ‘‘अनामिका का. बड़ी अजीब सी बात कर रही थी.’’

‘‘अजीब सी… क्या मतलब?’’ पापा ने विजय से पूछा.

‘‘बोल रही थी कि थोड़ी देर में घर आ रही है. पर पूरी बात नहीं बताई,’’ विजय ने कहा.

‘‘अरे, ऐसे ही बोल दिया होगा. काफी दिनों से आई नहीं है. शरारत कर रही होगी,’’ विजय की बहन सुधा
ने कहा.

‘‘दीदी, आप तो अनामिका को जानती हो न. अभी तो उस के मन में कुछ और ही चल रहा है,’’ विजय ने चिंतित हो कर कहा.

2 घंटे बाद अनामिका विजय के घर पर थी. उस के साथ एक लड़की थी, जिस के पास एक पुराना सा पिट्ठू बैग था.

सांवले रंग की उस लड़की के नैननक्श बड़े तीखे थे. उम्र होगी तकरीबन 20 साल. देह की मजबूत और दरमियाने कद की.

सब लोग ड्राइंगरूम में बैठे थे. बिना कुछ बोले. टेबल पर रखी चाय भी ठंडी हो रही थी. विजय अनामिका की ओर देख रहा था, मानो पूछ रहा हो कि यह लड़की कौन है और तुम ने इस का पहले कभी जिक्र क्यों नहीं किया?

इतने में विजय के पापा ने चुप्पी तोड़ी, ‘‘अरे भई, चाय ठंडी हो रही है. पीनी भी है या सिर्फ देख कर ही स्वाद लेना है… अनामिका बेटा, तुम कैसी हो? इस बच्ची से तो हमारा परिचय कराओ…’’

अनामिका मुसकराई और चाय का कप उठाते हुए बोली, ‘‘अंकल, यह चांदी है. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा इलाके के एक आदिवासी गांव में रहती है. मेरी एक सहेली की छोटी बहन है… मुझे आप सब की मदद चाहिए.’’

विजय और उस के परिवार वालों को सम?ा नहीं आ रहा था कि अनामिका क्या कहना चाहती है.
थोड़ी देर के बाद विजय ने पूछ ही लिया, ‘‘किस तरह की मदद?’’

‘‘आप लोगों को कुछ दिन के लिए चांदी को अपने घर पनाह देनी होगी. यह मेरे पास नहीं रह सकती. पर यहां एकदम महफूज रहेगी,’’ अनामिका बोली.

यह सुन कर सब को लगा कि मामला कुछ गड़बड़ है. विजय के पापा ने माहौल को हलका करते हुए कहा, ‘‘बिलकुल पनाह मिलेगी. पर यह मामला क्या है, वह तो हमें बताओ?’’

‘‘अंकल, चांदी नक्सली इलाके से है. आजकल सरकार नक्सलियों का सफाया कर रही है. यह भी सुरक्षाबलों की हिटलिस्ट में है. यह किसी तरह पहले रायपुर पहुंची और वहां से यहां दिल्ली आ गई. मैं इसे अपने पास नहीं रख सकती,’’ अनामिका ने कहा.

विजय समझ गया कि अनामिका उस रात को चांदी का ही जिक्र करना चाह रही थी. पर यह फैसला वह अकेला नहीं ले सकता था. उस ने अपने मम्मीपापा की तरफ देखा.

‘‘देखो अनामिका, हमें तुम पर पूरा भरोसा है. चांदी जितने दिन चाहे यहां रह सकती है. हम इस की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं,’’ विजय की मम्मी ने कहा.

‘‘पर आंटी, यह जिस जगह से आई है, इस पर खुफिया विभाग की नजर भी हो सकती है. फिर आप पासपड़ोस में क्या कहोगे कि यह कौन है?’’ अनामिका ने सवाल किया.

‘‘यहां इस का नाम बिंदिया होगा. जब भी कोई बाहर वाला इस से पूछेगा तो यह सिर्फ इतना कहेगी कि हमारे यहां मेड है. 24 घंटे हमारे साथ रहती है. बाकी हम संभाल लेंगे. इसे चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. कोई इस का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा,’’ विजय की बहन सुधा ने कहा.

इतना सुन कर चांदी के चेहरे पर हलकी सी मुसकान आ गई. उस ने अनामिका की तरफ देखा. अनामिका भी हंसने लगी.

‘‘हंस क्यों रही हो? हम ने कुछ गलत कह दिया क्या?’’ विजय के पापा बोले.

अनामिका से पहले चांदी ने कहा, ‘‘अंकल, आप लोगों ने जो फैसला लिया है, उस से मुझे बड़ी राहत मिली है. मैं जितने दिन यहां रहूंगी, आप सब की सेवा करूंगी. आप ने मुझे बिंदिया नाम दिया है, जो बहुत अच्छा है.

‘‘जहां तक मेरा बाल बांका होने की बात है, तो आप चिंता मत कीजिए. जब तक मैं यहां हूं, कोई आप का बाल बांका नहीं कर पाएगा. मैं ने कराटे की ट्रेनिंग ली हुई है और मुझे चाकू चलाने से ले कर बंदूक चलाना भी आता है,’’ चांदी ने कहा.

‘‘फिर तो तुम हम सब की बौडीगार्ड हो,’’ विजय ने इतना कहा, तो सब हंसने लगे.

‘‘अच्छा अंकल, अब मैं चलती हूं. बीचबीच में यहां आती रहूंगी. चांदी, इसे अपना ही घर समझो. बाहर वालों
से थोड़ा सतर्क रहना. ज्यादातर घर पर ही रहना,’’ अनामिका बोली.

‘‘ठीक है दीदी. मैं आप को कभी भी शर्मिंदा होने का मौका नहीं दूंगी,’’ चांदी ने कहा.

इस बात को एक हफ्ता बीत गया था. टैलीविजन पर नक्सलियों से जुड़ी खूब खबरें आ रही थीं. रात का खाना खा कर सब बातें कर रहे थे.

विजय के पापा ने चांदी से सवाल किया, ‘‘क्या वाकई सरकार नक्सलियों का सफाया कर देगी?’’

चांदी कुछ देर चुप रही, फिर बोली, ‘‘यह पूरा सच नहीं है. मामला बहुत ज्यादा पेचीदा है.’’

‘‘पर 21 मई को तो सरकार ने कई नक्सलियों का सफाया किया था और उन में से एक तो डेढ़ करोड़ के इनाम वाला खतरनाक नक्सली था. यह सब क्या मामला था?’’ विजय ने चांदी को कुरेदते हुए पूछा.

चांदी एक फीकी मुसकान के साथ बोली, ‘‘अच्छा तो तुम छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले वाले कांड की बात कर रहे हो…’’

‘‘हां, बताओ वहां क्या हुआ था?’’ विजय ने कहा.

‘‘खबरों के मुताबिक, अबूझमाड़ के जंगल में सुरक्षाबलों ने तथाकथित 27 नक्सलियों को मार गिराया था. मारे गए नक्सलियों में डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली बसवा राजू भी शामिल था. यह मुठभेड़ दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिले की सरहद पर हुई थी.

‘‘पुलिस को सूचना मिली थी कि अबूझमाड़ के बोटेर इलाके में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो सदस्य और नक्सल संगठन का महासचिव बसवा राजू मौजूद था. इसी आधार पर फोर्स को रवाना किया गया था. वहां पहुंचते ही जवानों पर नक्सलियों ने फायरिंग कर दी. सुरक्षाबलों के इस आपरेशन को प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ी कामयाबी बताया है.

‘‘इस के पहले पुलिस ने 7 दिन पहले ही प्रैस कौंफ्रैंस कर कर्रेगुट्टा आपरेशन की जानकारी दी थी. छत्तीसगढ़तेलंगाना बौर्डर पर कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक चले एक आपरेशन में 31 नक्सलियों को मार गिराया था.

‘‘नक्सल सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में तकरीबन 40 सालों में हिडमा ही एकलौता ऐसा नक्सली है, जिसे संगठन की टौप-2 टीम (सैंट्रल कमेटी) में जगह मिली है. वह भी तब जब नक्सल संगठन में अंदरूनी
कलह चली और नक्सलियों को सिर्फ ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की बात उठने लगी.

‘‘वहीं, डिविजनल कमेटी मैंबर के पद से देवा बारसे का प्रमोशन कर उसे दंडकारण्य स्पैशल जोनल कमेटी मैंबर के कैडर में शामिल कर कमांडर बनाया गया.

‘‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त, 2024 और दिसंबर, 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे. वे यहां अलगअलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने अलगअलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें. हिंसा करोगे तो हमारे जवान निबटेंगे.

‘‘वहीं उन्होंने एक डैडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च, 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा. उन के डैडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन काफी तेज हो गए हैं,’’ चांदी ने पूरी खबर सुनाई.

‘‘गृह मंत्री अमित शाह ने तो 21 मई के हमले के बाद मिली कामयाबी को बहुत बड़ी उपलब्धि बताया है कहा है कि जल्दी ही हम देश से नक्सलवाद खत्म कर देंगे,’’ विजय ने चांदी से कहा.

इस पर चांदी बोली, ‘‘मु?ो पता है कि इस मामले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है.

‘‘छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक आपरेशन में हमारे सुरक्षाबलों ने 27 खतरनाक माओवादियों को मार गिराया है, जिन में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव, शीर्ष नेता और नक्सल आंदोलन की रीढ़ नंबाला केशव राव उर्फ बसवा राजू भी शामिल है.

‘‘अमित शाह ने आगे कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के 3 दशकों में यह पहली बार है कि हमारे सुरक्षाबलों द्वारा एक महासचिव स्तर के नेता को मार गिराया गया है. मैं इस बड़ी सफलता के लिए हमारे बहादुर सुरक्षाबलों और एजेंसियों की सराहना करता हूं. यह बताते हुए भी खुशी हो रही है कि आपरेशन ब्लैक फौरैस्ट के पूरा होने के बाद, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. मोदी सरकार 31 मार्च, 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए संकल्पित है.’’

‘‘तो इस में बुराई क्या है… देश के दुश्मनों का तो सफाया होना ही चाहिए,’’ विजय ने खुल कर बोला.

‘‘तुम्हें नक्सलवाद के बारे में कुछ नहीं पता. जो लोग सरकार की गलत नीतियों के शिकार होते हैं, तब बंदूक उठा लेते हैं. अपनी जान बचाने की खातिर गांव का एक 15 साल का बच्चा भी बंदूक चलाना सीख जाता है.

‘‘छत्तीसगढ़ राज्य घने जंगलों और पहाडि़यों से घिरा हुआ है. यहां के आदिवासी समाज में सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी है.

‘‘विजय बाबू, आप तो जानते ही होंगे कि इस राज्य में बड़ी तादाद में आदिवासी रहते हैं, जिन के साथ अकसर भेदभाव से भरा बरताव किया जाना है. आदिवासियों की जमीनें कोयले की खदानों में बदल दी जाती हैं और विकास परियोजनाओं के लिए ले ली जाती हैं, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा या रहने के लिए दूसरी जगह नहीं मिलती है, जबकि उन की पारंपरिक आजीविका के साधन छीन लिए जाते हैं और वे अपनी सांस्कृतिक पहचान खोने लगते हैं.

‘‘कोढ़ पर खाज यह है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी जरूरतों की भारी कमी है. पढ़ाईलिखाई, सेहत, पीने का पानी और रोजगार जैसी जरूरी सेवाएं यहां के लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं. कई गांवों में स्कूल और अस्पतालों की हालत खराब है और टीचरों व डाक्टरों की भारी कमी है.

‘‘बेरोजगारी और गरीबी के चलते लोग अपने परिवारों को पालने में नाकाम रहते हैं. उन्हें लगता है कि सरकार उन की समस्याओं को हल करने में नाकाम रही है.’’

‘‘समस्याएं तो हर जगह हैं, पर इस का मतलब यह तो नहीं कि लोग बंदूक उठा कर देश के ही खिलाफ हो जाएं?’’ विजय की बहन सुधा ने सवाल किया.

‘‘दीदी, यहां देश की राजधानी में बैठ कर ऐसे सवाल करना बड़ा आसान है, पर जमीनी हकीकत बड़ी ही भयावह है. गांव में हमारे साथ जो बीतती है, उस पर तो कभी खबर ही नहीं बन पाती है.

‘‘यह खबर तो बाहर आ जाती है कि नक्सली औरतों और लड़कियों के साथ सैक्स संबंध बनाते हैं और उन्हें अपने ग्रुप में शामिल कर लेते हैं, पर जब प्रशासन के लोग हमारा शोषण करते हैं, तो उस का हिसाब कौन रखेगा. सुरक्षाबलों की बुरी नजर से हम नहीं बच पाती हैं.

‘‘मैं हूं नक्सली विचारधारा की और मुझे पता है कि आज नहीं तो कल मुझ पर गाज गिरेगी ही, पर मेरे बाद और कोई हथियार नहीं उठाएगा, इस की गारंटी कौन लेगा? क्या सरकार नक्सलियों को खत्म कर के इस सोच को भी मार देगी कि अब किसी के साथ नाइंसाफी नहीं होगी?’’ इतना कह कर चांदी खामोश हो गई. उस की आंखें मानो पथरा गई थीं. उसे उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी.

कमरे में अब सन्नाटा पसरा हुआ था. विजय, उस के मातापिता और बहन सब चुप थे. उन के पास चांदी के किसी सवाल का कोई जवाब नहीं था.

Family Story: दूसरा विवाह – विकास शादी क्यों नहीं करना चाहता था?

Family Story: अपने दूसरे विवाह के बाद, विकास पहली बार जब मेरे घर आया तो मैं उसे देखती रह गई थी. उस का व्यक्तित्व ही बदल गया था. उस के गालों के गड्ढे भर गए थे. आंखों पर मोटा चश्मा, जो किसी चश्मे वाले मास्टरजी के कार्टून वाले चेहरे पर लगा होता है वैसे ही उस की नाक पर टिका रहता था लेकिन अब वही चश्मा व्यवस्थित तरीके से लगा होने के कारण उस के चेहरे की शोभा बढ़ा रहा था. कपड़ों की तरफ भी जो उस का लापरवाही भरा दृष्टिकोण रहता था उस में भी बहुत परिवर्तन दिखा. पहले के विपरीत उस ने कपड़े और सलीके से पहने हुए थे. लग रहा था जैसे किसी के सधे हाथों ने उस के पूरे व्यक्तित्व को ही संवार दिया हो. उस के चेहरे से खुशी छलकी पड़ रही थी.

मैं उसे देखते ही अपने पास बैठाते हुए खुशी से बोली, ‘‘वाह, विकास, तुम तो बिलकुल बदल गए. बड़ा अच्छा लग रहा है तुम्हें देख कर. शादी कर के तुम ने बहुत अच्छा किया. तुम्हारा घर बस गया. आखिर कितने दिन तुम ममता का इंतजार करते. अच्छा हुआ तुम्हें उस से छुटकारा मिल गया.’’

उस के लिए चाय बनातेबनाते, मैं मन ही मन सोचने लगी कि इस लड़के ने कितना झेला है. पूरे 8 साल अपनी पहली पत्नी ममता का मायके से लौटने का इंतजार करता रहा. लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही कि वह नहीं आएगी. विकास को ही अपना परिवार, जिस में उस की मां और एक कुंआरी बहन थी, को छोड़ कर उस के साथ रहना होगा.

विकास के छोटे से घर में उन सब के साथ रहना उस को अच्छा नहीं लगता था. ममता की अपनी मां का घर बहुत बड़ा था. विकास ने उसे बहुत समझाया कि बहन का विवाह करने के बाद वह बड़ा घर ले लेगा. लेकिन ममता को अपने सुख के सामने कुछ भी दिखाई ही नहीं पड़ता था. उस के मायके वालों ने भी उसे कभी समझाने की कोशिश नहीं की. विकास ने ममता की अनुचित मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन ससुराल में जा कर ममता को समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अंत में वही हुआ, दोनों का तलाक हो गया. उन 8 सालों में हम ने विकास को तिलतिल मरते देखा था. वह मेरे बेटे रवि का सहकर्मी था. अकसर वह हमारे घर आ जाता था. मैं ने उस को कई बार समझाया कि वह अब पत्नी ममता का इंतजार न करे और तलाक ले ले. लेकिन वह कहता कि वह ममता को तलाक नहीं देगा, ममता को पहल करनी है तो करे. ममता को जब यह विश्वास हो गया कि विकास उस की शर्त कदापि पूरी नहीं करेगा तो उस ने विकास से अलग होने का फैसला ले लिया.

चाय पीते हुए मैं ने विकास से उस की नई पत्नी के बारे में पूछा तो उस ने बताया, ‘‘आंटी, मैं तो शादी करना ही नहीं चाहता था, लेकिन मां और बहन की जिद के आगे मुझे झुकना पड़ा. आप को पता है कि उमा जिस से मैं ने शादी की है, वह एक स्कूल में टीचर है. उस के 2 बच्चे, एक लड़का और एक लड़की हैं. लड़का 12 साल का और लड़की 16 साल की है. उमा भी शादी नहीं करना चाहती थी. उमा के मांबाप तो उसे समझा कर थक गए थे, लेकिन अपने बच्चों की जिद के आगे उस ने शादी करना स्वीकार किया. जब उन बच्चों ने मुझे अपने पापा के रूप में पसंद किया, तभी हमारा विवाह हुआ. ‘‘मेरी होने वाली बेटी ने विवाह से पहले, मुझ से कई सवाल किए, पहला कि मैं उस के पहले पापा की तरह उन से मारपीट तो नहीं करूंगा. दूसरा, मुझे शराब पीने की आदत तो नहीं है? जब उसे तसल्ली हो गई तब उस ने मुझे पापा के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की. मैं ने भी उन को बताया कि मेरे ऊपर जिम्मेदारी है, मैं उन को उतनी सुखसुविधाएं तो नहीं दे पाऊंगा, जो वर्तमान समय में उन्हें अपने नाना के घर में मिल रही हैं. मैं ने अभी बात भी पूरी नहीं की कि मेरी बेटी बोली कि उसे कुछ नहीं चाहिए, बस, पापा चाहिए. मुझे पलेपलाए बच्चे मिल गए और उन्हें पापा मिल गए.

‘‘मेरा तो कोई बच्चा है नहीं, अब इस उम्र में ऐसा सुख मिल जाए तो और क्या चाहिए. उमा भी यह सोच कर धन्य है कि उस को एक जीवनसाथी मिल गया और उस के बच्चों को पापा मिल गए. अब घर, घर लगता है. बच्चे जब मुझे पापा कहते हैं तो मेरा सीना गर्व से फूल जाता है. एक बार मेरी बेटी ने मेरे जन्मदिन पर एक नोट लिख कर मेरे तकिए के नीचे रख दिया. उस में लिखा था, ‘दुनिया के बैस्ट पापा’. उसे पढ़ कर मुझे लगा कि मेरा जीवन ही सार्थक हो गया है.’’

उस ने एक ही सांस में अपने मन के उद्गार मेरे सामने व्यक्त कर दिए. ऐसा करते हुए उस के चेहरे की चमक देखने लायक थी. बातबात में जब वह बड़े आत्मविश्वास के साथ ‘मेरी बेटी’ शब्द इस्तेमाल कर रहा था, उस समय मैं सोच रही थी कि कितनी खुश होगी वह लड़की, लोग तो अपनी पैदा की हुई बेटी को भी इतना प्यार नहीं करते. मैं ने कहा, ‘‘सच में, तुम ने एक औरत और उस के बच्चों को अपना नाम दे कर उन का जीवन खुशियों से भर दिया. एक तरह से उन का नया जन्म हो गया है. तुम ने इतना बड़ा काम किया है कि जिस की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है. तुम्हें घर बसाने वाली पत्नी के साथ पापा कहने वाले बच्चे भी मिल गए. मुझे तुम पर गर्व है. कभी परिवार सहित जरूर आना.’’ उस ने मोबाइल पर सब की फोटो दिखाई और दिखाते समय उस के चेहरे के हावभाव से ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह कोई नैशनल लैवल का मैडल जीत कर आया है और दिखा रहा है.

‘‘चलता हूं, आंटीजी, बेटी को स्कूल से लेने जाना है. वह मेरा इंतजार कर रही होगी. अगली बार सब को ले कर आऊंगा…’’ और झुकते हुए मेरे पांव छू कर दरवाजे की ओर वह चल दिया. मैं उसे विदा कर के सोच में पड़ गई कि समय के साथ लोगों की सोच में कितना सकारात्मक परिवर्तन आ गया है. पहले परित्यक्ता और विधवा औरतों को कितनी हेय दृष्टि से देखा जाता था, जैसे उन्होंने ही कोई अपराध किया हो. पहली बात तो उन के पुनर्विवाह के लिए समाज आज्ञा ही नहीं देता था और किसी तरह हो भी जाता तो, विवाह के बाद भी ससुराल वाले उन को मन से स्वीकार नहीं करते थे. अच्छी बात यह है कि अब बच्चे ही अपनी मां को उन के जीवन के खालीपन को भरने के लिए उन्हें दूसरे विवाह के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जैसा कि विकास के साथ घटित हुआ है. यह सब देख कर मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई और आज की युवा पीढ़ी की सोच को मैं ने मन ही मन नमन करते हुए आत्मसंतुष्टि का अनुभव किया.

Social Awareness: जब अचानक आ जाए गिरफ्तारी का वारंट

Social Awareness: एक दौर ऐसा था जब किसी के घर के आगे खाकी वरदीधारी का दिख जाना पड़ोसियों तक को डरा देता था. लोग अपने घरों में घुस जाते थे और सोचते थे कि किसी तरह यह बला टले. पुलिस भी बहुत कम ही किसी की गिरफ्तारी का वारंट ले कर उस के घर पर दस्तक देती थी.

पर अब जमाना बदल चुका है. आज के दौर में पुलिस किसी के खिलाफ कभी भी कोर्ट से गिरफ्तारी का वारंट ले कर घर पर धमक सकती है. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि पहले मुकदमे कम होते थे, तो लोगों को उन की जानकारी होती थी. तब वे इस के लिए पहले से तैयार होते थे. तब आपसी रंजिश या जमीनजायदाद के ही मुकदमे ज्यादा कायम होते थे.

लेकिन आज का दौर सोशल मीडिया का दौर है. कोई भी आप की टिप्पणी से आहत हो सकता है, जिस से वह पुलिस या कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकता है, जिस के बाद पुलिस वारंट ले कर आ सकती है.

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 72 के तहत अदालत किसी शख्स के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है. जमानती गिरफ्तारी वारंट के तहत कोई शख्स अदालत के सामने एक तय समय पर हाजिर हो कर जमानतदारों के साथ जमानत बौंड भर सकता है. इस के बाद अदालत तय करती है कि वारंटी को छोड़ा जा सकता है या उस को जेल भेजा जाना है.

गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट

इस तरह का वारंट आमतौर पर गंभीर अपराधों के लिए जारी किया जाता है और यह भी मान लिया जाता है कि शायद आरोपी फरार हो सकता है. बीएनएसए की धारा 74 और 75 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को ताकत देती है कि वह किसी भी फरार अपराधी, घोषित अपराधी या किसी ऐसे शख्स की गिरफ्तारी के लिए अपने स्थानीय अधिकार क्षेत्र के भीतर वारंट जारी करने का निर्देश दे सकती है, जिस पर गैरजमानती अपराध का आरोप है और वह गिरफ्तारी से बच रहा है.

बीएनएसएस की धारा 78 गिरफ्तार शख्स के हकों की हिफाजत करती है, जिस के तहत पुलिस के लिए गिरफ्तार किए गए शख्स को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना बहुत जरूरी है.

पर जब गिरफ्तारी का वारंट आ जाए, तो क्या करना चाहिए? सब से पहले तो शांत रहें, तुरंत पुलिस के साथ सहयोग करें और एक वकील से सलाह लें. वकील आप को कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दे सकता है और आप के हकों की हिफाजत कर सकता है.

वकील वारंट की सामग्री को समझने में मदद करेगा. वकील से वारंट में लगाए गए आरोप, गिरफ्तारी की वजह और संभावित सजा के बारे में पता चल सकेगा. वकील लगाए गए आरोपों से बचाव में मदद करेगा. वह अदालत में दलीलें पेश कर सकता है. आप के हकों की हिफाजत कर सकता है.

कई बार लोग वारंट लेने से इनकार करते हैं. उस को नष्ट करने का काम करते हैं. यह करना ठीक नहीं होता है. इस से मुश्किलें कम होने की जगह और बढ़ सकती हैं.

अचानक वांरट का पता चले तो वकील के साथ अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों से सलाह करें. अपने हालात को ठीक से परखें. अगर आप को लगता है कि आप के खिलाफ वारंट गलत है या अन्यायपूर्ण है, तो अपने वकील के साथ सलाह करें. अगर वारंट सही है और आप को जमानत के लिए कोर्ट के सामने पेश होना है, तो अपने लिए जरूरी जमानतदार ले कर जाएं. जमानत लेने के पूरे कागजात तैयार रखें, जिस से अचानक भागदौड़ न करनी पड़े.

Bihar Politics: वोटों के लिए मंदिरमंदिर जाते प्रशांत किशोर

Bihar Politics: बिहार में अब एक नए देवता का आगमन हुआ है. नेताओं को चुनाव लड़ने की सलाह देने वाले प्रशांत किशोर ने अपनी एक अलग पार्टी बना ली है जन सुराज पार्टी और वे गांवगांव घूम रहे हैं. उन का कहना है कि वे वोट नहीं मांग रहे, बल्कि वे तो यह बता रहे हैं कि गरीबी से कैसे निकला जाए. उन का कहना है कि बिहार ने पहले 40 साल कांग्रेस को जिताया, फिर लालू प्रसाद यादव को महाराजा मान कर बैठाया और अब नीतीश कुमार अलटीपलटी मार कर बिहार पर राज कर रहे हैं पर बिहार सुधरा नहीं है.

अब वे कहते हैं कि आप बिहारी उन के कहे मुताबिक वोट देंगे तो बिहार में पढ़ाई व नौकरियां टपकना शुरू हो जाएंगी. इसी तरह के वादे पहले वे पार्टियों को बरगलाने के लिए कर चुके हैं कि उन के कहे मुताबिक चुनाव लड़ा गया तो जीत पक्की ही है.

प्रशांत किशोर ब्राह्मण हैं और वे यह नहीं कहेंगे, भूल कर भी, कि बिहार की गरीबी की वजह पोंगापंथी, पाखंडबाजों का राज रहा है जो जाति के नाम पर मंदिरों को अमीर करते रहे हैं. बिहार में अयोध्या और तिरुपति जैसे विशाल मंदिर नहीं हैं पर वहां जितना पैसा लोग पूजापाठ पर करते हैं और कहीं नहीं करते क्योंकि वहां के जमींदारों ने जम कर धर्म बेचा है.

लालू प्रसाद यादव ने निचली जातियों की बात की पर उन्हें कभी पूजापाठ के जंजाल से नहीं निकाला. वे खुद तिरुमला मंदिर में पत्नी के साथ गए थे. देवघर में बैजनाथ मंदिर में मई, 2025 को भोलेनाथ की पूजा करने पहुंचे थे. वहां उन्होंने यह भी कहा कि बाबा का आशीर्वाद पाने के बाद उन्हें जनता का आशीर्वाद चुनाव में मिलेगा. 22 मई को एकमा के बिशनपुर कला गांव में उन्होंने गोपेश्वर बाबा के मंदिर की देहरी पर सिर झुकाया और कहा कि अब बिहार की जनता जाग चुकी है.

इस से पहले सितंबर, 2024 में उन्होंने पूर्णिया में पूरणदेवी को पूजाअर्चना की और बिहार के लिए आशीर्वाद मांगा जिस का कोरा मतलब है कि वे अपनी चुनावी जीत चाहते थे.

प्रशांत किशोर हों या दूसरे नेता जब तक धर्म से चिपके रहेंगे, सत्ता में चाहे आ जाएं, बिहार का उद्धार नहीं कर सकेंगे. बिहार की कमजोरी की वजह अधपढ़ों की बढ़ती गिनती है जो सर्टिफिकेट या डिगरी तो ले लेते हैं पर हर काम पूरा करने के लिए भरोसा पूजापाठ पर करते हैं. कोई भी नेता उन्हें इस दलदल से निकालने की कोशिश तक नहीं करता. जरूरत से ज्यादा समझदार प्रशांत किशोर भी उसी गिनती में आ गए हैं.

Bollywood Latest News: अथिया शेट्टी का बजाया बैंड

अथिया शेट्टी ऐक्टर सुनील शेट्टी की बेटी हैं. उन्होंने साल 2015 में सलमान खान की फिल्म ‘हीरो’ में सूरज पंचोली के साथ अपनी शुरुआत की थी, पर फिल्म और अथिया दोनों को दर्शकों ने नकार दिया था. इस के 4 साल बाद साल 2019 में अथिया फिल्म ‘मोतीचूर चकनाचूर’ में आखिरी बार दिखी थीं और अब सुनील शेट्टी ने बताया कि अथिया अब और फिल्में नहीं करेंगी. महज 3 फिल्में करने के बाद ही उन्होंने ऐक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है.

सुनील शेट्टी के इतना कहने पर सोशल मीडिया पर लोगों ने यह कह कर अथिया शेट्टी का मजाक बनाना शुरू कर दिया कि वे बड़ी मुश्किल से बौलीवुड में आई थीं और कभी ऐक्टिंग कर ही नहीं पाईं.

फिल्म ‘इक्कीस’ में जमेगी जोड़ी

अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने साल 2023 में नैटफ्लिक्स की फिल्म ‘द आर्चीज’ से अपना बौलीवुड डैब्यू किया था, जो कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. अब वही अगस्त्य नंदा श्रीराम राघवन की फिल्म ‘इक्कीस’ में काम करेंगे, जो 1971 के भारतपाकिस्तान युद्ध पर बनी है. इस फिल्म में अगस्त्य नंदा ‘परमवीर चक्र’ विजेता अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाएंगे, जिन्होंने इस युद्ध में शानदार हिम्मत दिखाई थी.

फिल्म ‘इक्कीस’ से अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया भी बौलीवुड में कदम रखने जा रही हैं. उन के साथ फिल्म में धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत भी होंगे.

अनु अग्रवाल ने खोले अंडरवर्ल्ड के राज

साल 1990 की म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म ‘आशिकी’ से रातोंरात मशहूर हुईं अनु अग्रवाल ने काफी समय से हिंदी फिल्मों से दूरी बनाई हुई है, पर हाल ही में उन्होंने 90 के दशक में बौलीवुड और अंडरवर्ल्ड के बीच के संबंधों के बारे में खुल कर बात की.

अपने दिए एक इंटरव्यू में अनु अग्रवाल ने बताया कि सारा पैसा अंडरवर्ल्ड से आता था. 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से बड़ी गहराई से जुड़ा हुआ था. उस दौर में ज्यादातर फिल्मों का लेखाजोखा औफ द रिकौर्ड सौदों के जरीए किया जाता था, जिस में कथिततौर पर दाऊद इब्राहिम जैसे लोग सारा कंट्रोल रखते थे.

अनु अग्रवाल ने फिल्म ‘आशिकी’ के बाद ‘गजब तमाशा’ और ‘किंग अंकल’ जैसी कई फिल्मों में काम किया था.

धनुष बनेंगे ‘मिसाइलमैन’

भारत के ‘मिसाइलमैन’ कहे जाने वाले देश के 11वें राष्ट्रपति डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी पर एक फिल्म बनने जा रही है, जिस में उन का किरदार साउथ इंडियन फिल्मों के मैगास्टार धनुष निभाने वाले हैं और इस फिल्म का डायरैक्शन ओम राउत करेंगे.

धनुष ने साल 2013 में हिंदी फिल्म ‘रांझणा’ से बौलीवुड में कदम रखा था, जिस में उन की हीरोइन अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर थीं. फिर धनुष हिंदी फिल्म ‘शमिताभ’ में नजर आए थे और इस के बाद वे अक्षय कुमार और सारा अली खान की फिल्म ‘अतरंगी रे’ में भी दिखाई दिए थे.

Love Marriage: मैं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ भाग कर शादी करना चाहता हूं

Love Marriage: अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें.

सवाल –

मैं इंजीनियरिंग का स्टूडैंट हूं, कालेज की एक लड़की से प्यार हो गया है. वह भी मुझे बेहद प्यार करती है और हम दोनों भाग कर शादी करना चाहते हैं, क्योंकि हमारे परिवार वाले लव मैरिज के फेवर में नहीं हैं. तो ऐसे में हमारा भाग कर शादी करने का निर्णय सही है?

जवाब –

वैसे तो तुम्हारी पसंद की शादी के लिए परिवार वाले राजी हो जाएं तो इस से बढि़या क्या हो सकता है पर कई कोशिशों के बावजूद नहीं मान रहे तो यह दिक्कत वाली बात तो है. खैर, आप अभी इंजीनियरिंग के स्टूडैंट हैं, मुश्किल से आप की उम्र 20-22 साल की होगी. इस उम्र में शादी के लिए सोचना गलत नहीं पर अभी आप पढ़ रहे हैं और भविष्य दांव पर है. इस समय अगर आप भाग कर शादी करने की सोच रहे हैं तो यह नई मुसीबत को पैदा करने जैसा है जिस में न रहने का ठिकाना न खर्चे चलाने का.

आप भले ही एकदूसरे से बहुत प्यार करें लेकिन इस प्यार के कारण अगर आप का कैरियर इफैक्ट होता है तो आप के रिश्ते पर भी इस का असर पड़ेगा. आप पर बड़ी जिम्मेदारी आ जाएगी और जो पढ़ाई कर रहे हैं उस में रुकावट आ जाएगी. वैसे भी, शादी एक बड़ा फैसला है जिसे थोड़ा सोचसमझ कर और पूरी मैच्योरिटी से लिया जाना चाहिए.

अभी आप अपनी स्टडी पूरी कर के अच्छी जौब में सैटल हों और जब आप यह समझने लगें कि अब आप अकेले परिवार की जिम्मेदारी निभा सकते हैं, तब किसी बड़े को बीच में रख कर ठोस निर्णय लें. शायद तब परिवार वाले भी आप की पसंद और आप की इच्छा पर सीरियस होंगे और मान जाएंगे.

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