‘बिग बौस 13’ के घर में मचा घमासान, लेकिन ‘मालकिन’ अमीषा हैं जिम में बिजी

बौलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल इन दिनों कलर्स टी.वी के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 13 से जुड़ी हुई हैं. बीते दिनों अमीषा ने बिग बौस के घर में सलमान खान और घरवालों के साथ काफी अच्छा समय बिताया था. ऐसा देखने में आया है कि अमीषा इस बार घर की मालकिन की भूमिका निभा रही हैं और समय समय पर वे घरवालों का हाल चाल पूंछने व घरवालों पर अपना हुक्म चलाने आ जाती हैं. लेकिन इस समय जहां एक तरफ बिग बौस के घर में कंटेस्टेंट के बीच गरमा-गरमी का माहौल बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ घर की मालकिन अमीषा इन सब से बेखबर जिम में पसीना बहाने में लगी हुई हैं.

बीज़ी स्कैड्यूल से टाइम निकाल कर दे रही हैं बौडी पर ध्यान…

 

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Pull downs 💖💖💖🌈🌈🌈💪🏾💪🏾🤛🏻🤛🏻🤙🏻🤙🏻 @klinton81 @unitedstrength

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ये भी पढ़ें- सपना चौधरी ने साड़ी में शेयर की अपनी ऐसी फोटो, सोशल मीडिया पर हुईं वायरल

काफी समय से अमीषा पटेल बिग बौस में घरवालों से रूबरू नहीं हो पा रहीं और इसका कारण हैं उनका फिटनेस फ्रीक होना. इन दिनों अमीषा काफी जोश से जिम में एक्सरसाइज़ करती दिखाई दे रहीं हैं. अमीषा अपने बीज़ी स्कैड्यूल से टाइम निकाल कर अपनी बौडी पर ध्यान दे रहीं हैं.

इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की फोटोज और वीडियोज…

 

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Warm ups 💖💖💖

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बीते दिनों अमीषा ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी कुछ फोटोज शेयर की थी जिससे इस बात का खुलासा हो गया था कि वे इन दिनों बिना कुछ सोचे समझे लगकर अपनी बौडी पर ध्यान दे रही हैं. इन फोटोज में अमीषा हेवी वर्कआउट करती नजर आ रही हैं. फोटोज के साथ साथ उन्होनें एक्सरसाइज़ करते हुए अपनी कुछ वीडियो भी शेयर की जिसमें वे अपने जिम कोच के साथ वर्कआउट कर रही हैं.

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नए ही रूप में आएंगी नजर…

 

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Another day .. another gym session .. push ups 💪🏾💪🏾 .. @klinton81 @unitedstrength 💖🌈

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इन वीडियोज को देख ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वे अपने कोच की बात और तरीके काफी अच्छे से अपना रही हैं. वे अपने कोच के कहने के अनुसार ही सारी एक्सरसाइज़ कर रही हैं. इन वीडियोज के देख ऐसा लग रही है कि अगली बार बिग बौस में रह रहे घरवालों को अमीषा का एक अलग ही रूप देखने को मिलेगा.

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बता दें, अमीषा पटेल ने कई सुपरहिट फिल्में की हैं जैसे कि ‘कहो ना… प्यार है’, ‘गदर-एक प्रेम कथा’, ‘भूल भुलैया’, आदि. और इतना ही नहीं अमीषा पटेल ने अपनी बहतरीन एक्टिंग के चलते कई अवार्डस भी जीते हैं जिन अवार्डस में से एक नाम ‘फिल्मफेयर स्पेशन परफोर्मेंस अवार्ड’ है. अब देखना ये होगा कि कब बिग बौस 13 की मालकिन दोबारा घर में नजर आएंगी.

सपना चौधरी ने साड़ी में शेयर की अपनी ऐसी फोटो, सोशल मीडिया पर हुईं वायरल

हरियाणा की क्वीन सपना चौधरी आज कल सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. सपना अपनी ग्लैमरस और हौट फोटोज शेयर कर सोशल मीडिया पर गदर मचा रही हैं. सिंपल और सूट सलवार में दिखने वालीं सपना अब काफी ग्लैमरस हो गई हैं. अब हाल ही में सपना ने अपनी कुछ नई तस्वीरें शेयर की हैं.

साड़ी में भी दिखा हौट अवतार…

इन तस्वीरों में सपना ने भले ही साड़ी पहनी हुई है, लेकिन इसमें भी वो बेहद हौट लग रही हैं. सपना ने ब्राउन कलर की साड़ी पहनी हुई है. सपना ने इसके साथ ही अपने बैक की फोटो शेयर की है जिसमें वो अपना बैक टैटू फ्लौंट करती नजर आ रही हैं. सपना की ये फोटो शेयर होते ही तेजी से वायरल हो रही है.

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ट्रांसपेरेंट टौप पहनें शेयर की थी फोटो…

इससे पहले सपना ने ट्रांसपेरेंट टौप पहने अपनी कुछ फोटोज शेयर की थीं. सपना इन फोटोज में काफी हौट लग रही थीं. वैसे सपना के इस ग्लैमरस अवतार को फैन्स से मिक्स रिस्पौंन्स मिल रहे हैं. कुछ को सपना का ये हौट अवतार पसंद आ रहा है तो कुछ का कहना है कि वो सिर्फ सूट सलवार में अच्छी लगती हैं.

बौडी पर देनें लगी हैं ज्यादा ध्यान…

सपना अब अपनी बौडी का काफी ध्यान रख रही हैं. वो खुद को फिट रखने के लिए जिम भी जाती हैं. वो वर्कआउट करते हुए अपनी फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं.

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स्टेज परफौर्मेंस देना नहीं भूलतीं…

सपना भले ही आज कितनी बड़ी स्टार हो गई हैं, लेकिन वो अभी भी स्टेज परफौर्मेंस देती रहती हैं. हाल ही में सपना ने जबरदस्त स्टेज परफौर्मेंस दी जिसके वीडियोज भी वायरल हो रहे हैं. वीडियो में सपना ने रेड कलर का सूट पहना हुआ है. सपना जितना जबरदस्त डांस कर रही हैं उतने ही शानदार उनके एक्स्प्रेशन हैं. सपना का डांस देखने खूब भीड़ आई थी.

वैसे सपना की पौपुलैरिटी बिग बौस शो में आने के बाद से मिली है. सपना भले ही ये शो नहीं जीत पाईं लेकिन इस शो के बाद से उनकी पौपुलैरिटी काफी बढ़ गई थी.

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बिग बौस के इस विनर को अपने स्टाइल की वजह से मिल चुके हैं कई अवार्डस, देखें लुक्स

छोटे पर्दे के मशहूर एक्टर्स में से एक गौतम गुलाटी अपनी एक्टिंग और लुक्स को लेकर फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. गौतम ने साल 2014 में "स्टाइलिश मेल इन ए रिएलिटी शो" और 2015 में "मोस्ट स्टाइलिश मेल इन ए रिएलिटी सीरीज़" का खिताब जीता था. गौतम गुलाटी के बारे में ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि उनके लुक्स के चर्चे लड़कियों में काफी पौपुलर है. तो आज हम आपको बताएंगे गौतम गुलाटी के कुछ ऐसे लुक्स जिसे देख आप उनहें फौलो करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे.

गौतम गुलाटी का फंकी लुक…

 

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आज के जमाने में हर कोई अपने कपड़ों से लेकर हेयरस्टाइल तक फंकी दिखना चाहता है. तो अगर आपको भी है फंकी दिखने का शौंक तो जरूर ट्राय करें गौतम का ये फंकी लुक. इस लुक में गौतम ने डार्क ब्लू कलर की जींस के साथ ब्लैक कलर की टी-शर्ट और उसके ऊपर कार्गो प्रिंटेड जैकेट पहनी हुई है. इस लुक में वे काफी डैशिंग नजर आ रहे हैं.

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गौतम गुलाटी का फिल्मफेयर लुक…

 

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#Repost @filmfare with @get_repost ・・・ @welcometogauthamcity looked Uber cool at the #TAATG2019 last night. Outfit: @bharat_reshma

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आजकल हर कोई अपने लुक्स से सबको इम्प्रेस करना चाहता है और खास तौर पर जब बात फिल्मफेयर फंक्शन की आती है. इस लुक में गौतम ने ब्लैक प्लेन टी-शर्ट के ऊपर ब्राउन कलर का कोट और सेम कलर का ट्राउसर पहना हुआ है. इस लुक के साथ उन्होनें ब्लैक फोर्मल शूज पहने हुए हैं जो काफी सूट कर रहे हैं. आप भी गौतम का ये लुक अपने किसी भी फंक्शन में ट्राय कर सबको इम्प्रेस कर सकते हैं.

फाइन लुक…

 

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Wearing @amishilondon Photography @yosscinematic

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इस फाइन लुक में गौतम ने व्हाइट कलर की प्लेन टी-शर्ट के ऊपर ब्लैक लौंग जैकेट और साथ ही लाइट ब्लू कलर की जींस पहनी हुई है. इस लुक में गौतम काफी स्मार्ट लग रहे हैं तो अगर आप चाहते हैं गौतम जैसे स्मार्ट दिखना तो जरूर ट्राय करें ये लुक.

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कैसुअल लुक…

 

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Love kids❤️ Wearing my Dusted Red Velvet Soon on www.StyledByGG.com @styledbygg9 Quality matters✌

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इस कैसुअल लुक में गौतम गुलाटी ने ब्लू फेडिड जींस के साथ ब्लैक प्लेन टी-शर्ट और उसके ऊपर उन्होनें रेड चैक प्रिंटेड शर्ट पहनी हुई है. इस लुक के साथ उन्होनें ब्लैक बूट पहन रखे हैं जो काफी सूट कर रहे हैं. गौतम का ये लुक आप अपनी डेली रूटीन में कैरी कर सकते हैं और साथ ही ये लुक आप अपने कौलेज में भी ट्राय कर सकते हैं.

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बता दें, गौतम गुलाटी कलर्स टी.वी के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 8 के विनर रह चुके हैं. गौतम छोटे पर्दे के साथ साथ बड़े पर्दे पर भी अपनी अदाकारी दिखा चुके हैं. उन्होनें टी.वी. सीरियल्स, रिएलिटी शो के साथ कई फिल्में भी की है.

जमीन से बेदखल होते गरीब और आदिवासी

देश के कुदरती संसाधनों यानी जल, जंगल, जमीन पर सभी नागरिकों का समान हक है. कहने को यह बात बड़ी अच्छी लगती है, मगर असलियत में हो क्या रहा है, इस समझने के लिए हाल ही में राजस्थान में घटे 2 मामले काफी हैं:

मामला 1

झुंझुनूं के गुढ़ा उदयपुरवाटी गांव में 25 सदस्यों की वन विभाग की टीम बाबूलाल सैनी के घर में पहुंचती है और घर को हटाने की तैयारी करती है.

बाबूलाल का यहां टीनशैड का पुश्तैनी मकान है, जो उसे अपने बापदादा से विरासत में मिला है.

जोरआजमाइश के बीच बाबूलाल खुद को तेल डाल कर आग के हवाले कर देता है. गंभीर हालत में वह झुंझुनूं के एक अस्पताल से होते हुए जयपुर अस्पताल में भरती हो जाता है.

बाबूलाल का भाई मोतीलाल कहता है कि उन को पहले कोई कानूनी नोटिस नहीं दिया गया.

मामला 2

नागौर के राउसर की बंजारा बस्ती को हटाने के लिए जेसीबी समेत भारी पुलिस व प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचता है. जेसीबी चला कर कच्चेपक्के मकानों को तोड़ दिया जाता है.

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इस दौरान बस्ती के तमाम लोगों व प्रशासनिक अमले के बीच झड़प शुरू हो जाती है. नतीजतन, जेसीबी चालक के सिर पर चोट लगने से उस की मौके पर ही मौत हो जाती है.

इस देश में विकास के नाम पर 14 राज्यों में करोड़ों आदिवासियों को उन जमीनों से खदेड़ कर फेंका गया है, जिन पर वे सैकड़ों साल से रह रहे थे.

हाल ही में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में 10 आदिवासियों को भी गुंडों ने इसीलिए मार दिया था.

राजस्थान में पिछले दिनों शेखावटी इलाके में एक किसान ने खुद पर तेल छिड़क कर इसलिए आग लगा ली थी, क्योंकि 3 पीढ़ी जिस जमीन पर रहती आई थीं, उस को अवैध कब्जा बता कर प्रशासन तोड़ने पहुंच गया था.

नागौर में 25 अगस्त, 2019 को जिस बस्ती वालों को उजाड़ा गया, उन के उस पते पर वोटर आईडी कार्ड, आधारकार्ड बने हुए थे. बिजली विभाग के दिए कनैक्शन थे. ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत सरकार ने शौचालय बनवाए थे.

मतलब, उस पते पर हर वह दस्तावेज बना हुआ था, जो भारत के नागरिक के पास होता है, फिर यह गैरकानूनी कब्जा कैसे हो गया? अगर यह गैरकानूनी कब्जा था तो गांव के सरपंच, पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, डीएम, बिजली विभाग के एईएन, बीडीओ वगैरह इस के जिम्मेदार व कुसूरवार हैं.

बात सिर्फ यह नहीं है कि यह अवैध कब्जा था, बल्कि असल बात भूमाफिया व अधिकारियों की मिलीभगत की है. नागौर शहर की आधी से ज्यादा सरकारी जमीन पर भूमाफिया का कब्जा है और उस को हटाने का कोर्ट का आदेश भी है, मगर अधिकारी उन का हरमुमकिन बचाव कर रहे हैं, क्योंकि बात हिस्सेदारी की है.

आजादी से पहले इस देश में हर नागरिक को सरकारी जमीन पर रहने का हक था. आजादी के बाद हुई पहली पैमाइश में जहांजहां भी लोग स्थायी रूप से रह रहे थे, उसे आबादी भूमि दर्ज कर के तत्कालीन स्थायी आवास करने वाली जनसंख्या को आवास का अधिकार तो दे दिया, पर इन दिनों घुमक्कड़ रह कर जिंदगी बिताने वाली बंजारा, गाडि़या लोहार, बागरिया, कंजर, नाथ, जोगी, सपेरा जैसी अनेक जातियों को आवास के लिए किसी न किसी सरकारी जमीन पर ही बसना पड़ा.

लोकतंत्र में लोक जब जातिधर्म में बिखर जाता है, तो गुंडेमवाली जोरजुल्म करने लग जाते हैं. विधायकों, सांसदों, मंत्रियों की जमीनों की जांच की जाए तो 99 फीसदी के फार्महाउस, बंगले गैरकानूनी कब्जे की जमीन पर मिलेंगे.

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राजस्थान का ही हाल देखा जाए तो आधी आबादी वन भूमि, गोचर, पहाड़ी, पड़त, बंजर वगैरह इलाकों में रहती है और हजारों सालों से रह रही है. आजादी के बाद भूसुधार अधिनियम लागू करना था, मगर तत्कालीन राजारजवाड़ों से निकले नेताओं की हठ के चलते ठीक से लागू नहीं हो पाया.

निजी कंपनियों को ये ही जमीनें कौडि़यों के भाव में दी जा रही हैं. जगहजगह भूमाफिया ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है, जिस में नेताओं का संरक्षण व हिस्सेदारी शामिल है.

आजादी के बाद राजस्थान के तत्कालीन किसान नेताओं ने टेनेंसी ऐक्ट के जरीए किसानों को खेती वाली जमीन का मालिक जरूर बना दिया, मगर उन के घरों के संबंध में ठोस कानून नहीं बन पाए.

वजह यह है कि मुख्यधारा से कटी भारत के वनों पर आश्रित एक बड़ी आबादी को देश की सर्वोच्च अदालत में अपना आशियाना बचाने की लड़ाई लड़नी पड़ रही है.

हाल ही में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने वनों पर आश्रित आदिवासी समुदायों को अतिक्रमणकारी घोषित करते हुए वनभूमि से बेदखल करने का फरमान सुनाया था.

संसद में 18 दिसंबर, 2006 को अनुसूचित जाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 सर्वसम्मति से पास किया गया था. एक साल बाद 31 दिसंबर, 2007 को इसे लागू करने की अधिसूचना जारी की गई थी.

इस से पहले भारत में वनों के संबंध में साल 1876 से साल 1927 के बीच पास किए गए भारतीय वन कानूनों के प्रावधानों को ही लागू किया जाता था. एक लंबे वक्त तक साल 1927 का वन कानून ही भारत का वन कानून रहा.

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हालांकि ऐसे किसी भी कानून का पर्यावरण और वन सरंक्षण से कोई सरोकार नहीं था, लेकिन फिर भी पर्यावरण और वन संरक्षण के नाम पर जहांतहां इस का बेजा इस्तेमाल किया जाता रहा. भारत सरकार की टाइगर टास्क फोर्स ने भी यह माना है कि वन संरक्षण के नाम पर गैरकानूनी और असंवैधानिक रूप से जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है.

बौलीवुड एक्ट्रेसेस को मात देने के लिए तैयार हैं बिग बौस की ये कंटेस्टेंट, कराया ऐसा फोटोशूट

स्टार प्लस के खासा पौपुलर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में अक्षरा का रोल अदा करने वाली एक्ट्रेस हिना खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की वजह से ही वे अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. देखा जाए तो यह समय हिना खान के लिए उनका गोल्डन पीरियड है और वे एक के बाद एक सफलता की सीढियां चड़ती जा रही हैं.

बौलीवुड एक्ट्रेस को टक्कर दे सकती हैं हिना खान…

 

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हाल ही में हिना खान ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फैंस के साथ अपना एक फोटोशूट शेयर किया है जिसमें वे काफी हौट नजर आ रही हैं. वैसे तो हिना खान अपने हर फोटोशूट की वजह से चर्चा का विषय बन ही जाती हैं लेकिन उनकी इस फोटोज को देख कर ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि वे अपने लुक्स से किसी भी बौलीवुड एक्ट्रेस को टक्कर दे सकती हैं.

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लगातार लाइक्स और कमेंट्स की बरसात कर रहे हैं फैंस…

 

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इन फोटोज में हिना खान की अदाएं देख कोई भी अपने होश खो सकता है. हिना का हर फोटोशूट इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल होता है और उनकी हर फोटो पर उनके फैंस जमकर प्यार बरसाते हैं. हिना की इन फोटोज पर भी उनके फैंस लगातार लाइक्स और कमेंट्स की बरसात कर उनकी तारीफ करने में लगे हुए हैं.

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कैप्शन में की अपने फिगर की तारीफ…

 

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Any idiot can drive a straight line, But it takes an expert to handle these curves 😉😉😉 📸 @rishabhkphotography

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इस फोटोशूट में हिना खान नें रेड कलर का वन पीस कैरी किया हुआ है और ऊपर से उनकी अदाएं सचमुच कहर बरसा रही हैं. इन फोटोज के शेयर करते हुए हिना ने अपने फिगर की तारीफ करते हुए कैप्शन में लिखा कि,- “Any idiot can drive a straight line, But it takes an expert to handle these curves.”

साल 2020 में दो फिल्मो में आएंगी नजर…

बता दें, हाल ही में हिना खान बिग बौस सीजन 13 में एक गेस्ट के रूप में दिखाई दी थीं जहां उन्होनें सलमान खान और बाकी घरवालों के साथ समय बिताया. हिना खान साल 2020 में दो फिल्मो में नजर आने वाली हैं जिसमें से एक फिल्म का नाम है ‘हैक्ड’ और दूसरी फिल्म का नाम है ‘द कंट्री औफ ब्लाइंड’ तो अब देखने वाली बात ये होगी कि, क्या हिना खान बड़े पर्दे पर भी अपने जलवे बिखेरने में कामयाब हो पाएंगी या नही.

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फैशन के मामले में किसी से कम नहीं बिग बौस 13 के कंटेस्टेंट पारस छाबड़ा, देखे फोटोज

एम.टी.वी स्प्लिट्सविला फेम पारस छाबड़ा इस दिनों बिग बौस के घर में सबको खूब एंटरटेन कर रहे हैं. पारस एक एक्टर होने के साथ साथ एक बहतरीन मौडल भी हैं. देखते ही देखते पारस ने खुद की इतनी जबरदस्त फैन फौलोविंग हासिल कर ली है और इस फैन फौलोविंग का एकमात्र कारण है उनके लुक्स. पारस छाबड़ा मौडल होने की वजह से काफी ट्रेंडी हैं और अपने लुक्स के मामले में काफी पौपुलर भी. तो आज हम आपके दिखाएंगे पारस छाबड़ा के कुछ लक्स जिसे देख आप ट्राय करने पर मजबूर हो जाएंगे.

ब्लैक चैक लुक…

पारस छाबड़ा का ये लुक काफी ट्रेंडी है. चैक के ट्रेंड ने आज भी लोगों के दिलों में अपनी अलग ही जगह बनाई हुई है तो अगर आप भी हैं चैक पहनने के शौकीन तो जरूर ट्राय करें पारस छाबड़ा का ये ब्लैक चैक लुक. इस लुक में पारस ने व्हाइट राउंड नैक टी शर्ट के ऊपर ब्लैक चैक ब्लेजर और सेम डिजाइन का ही ट्राउसर पहना हुआ है.

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कैसुअल लुक…

पारस छाबड़ा ने अपने इस कैसुअल लुक में ग्रीन कलर की टी शर्ट और साथ ही ब्लू ‘rugged’ जींस पहनी हुई है. पारस का ये लुक काफी कूल दिखाई दे रहे हैं तो अगर आप भी चाहता हैं सबसे कूल दिखना तो जरूर ट्राय करें ये लुक अपने कौलेज या इंस्टीट्यूट में और करें इस लुक से अपनी क्रश को इम्प्रेस.

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लाइनिंग शर्ट…

आजकल लाइनिंग शर्ट काफी ट्रेंड में है और इसी ट्रेड को फौलो करते हुए पारस छाबड़ा ने अपना एक लुक शेयर किया है जिसमें वे वाकई एक मौडल नजर आ रहे हैं. इस लुक में पारस ने यैल्लो और ब्लैक लाइनिंग वाली शर्ट और उसके साथ ब्लू ‘rugged’ जींस पहनी हुई है. आप भी पारस छाबड़ा का ये लुक ट्राय कर किसी को भी इम्प्रेस कर सकते हैं.

फंकी लुक…

आज के जमाने में हर कोई अपने कपड़ों से लेकर हेयरस्टाइल तक फंकी दिखना चाहता है. तो अगर आपको भी है फंकी दिखने का शौंक तो जरूर ट्राय करें पारस छाबड़ा का ये फंकी लुक. इस लुक में पारस ने व्हाइट प्लेन टी शर्ट के ऊपर ब्लैक एंड व्हाइट चैक जैकेट और सेम डिजाइन का जोगर पहना हुआ है. इस लुक में पारस काफी फंकी और कूल दिखाई दे रहे हैं.

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बता दें, पारस छाबड़ा इस दिनों बिग बौस सीजन 13 में दिखाई दे रहे हैं. पारस ने इंडस्ट्री में आने की शुरूआत 2012 में स्प्लिट्सविला सीजन 5 से की थी और पारस उस शो के विनर भी रहे थे. उसके बाद पारस ने बौलीवुड में फिल्म ‘मिडसमर मिडनाइट मुंबई’ से डेब्यू किया था. फिर उन्होने कई सीरियल्स में अपनी भूमिका निभाई.

भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा ने ब्लैक बिकिनी में दिखाया जलवा, देखें हौट फोटोज

125 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में करने वाली एक्ट्रेस मोनालिसा एक बार फिर अपने नए फोटोशूट को लेकर चर्चा का विषय बन गई हैं. हाल ही में मोनालिसा ने अपने फैंस के साथ अपना एक बिकिनी फोटोशूट शेयर किया है जिसमें वे सचमुच किसी अप्सरा से कम नही लग रहीं. मोनालिसा अक्सर अपनी फोटोज अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया के जरिए शेयर करती रहती हैं और फैंस भी उनकी हर फोटो पर जमकर प्यार बरसाते हैं.

मोनालिसा ने पहनीं पोल्का डौट्स वाली बिकिनी…

 

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Each New Day Has A Different Shape To It … You Just Roll With It… #goodmorning #newday #freshstart #feelings #waterbaby #throwback

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मोनालिसा की एक्टिंग के अलावा उनका बोल्ड और हौट अंदाज फैंस को बेहद पसंद आता है और इसी के चलते मोनालिसा ने एक बार फिर अपना हौट अवतार फैंस के साथ शेयर किया है. मोनालिसा ने अपनी इन फोटोज में पोल्का डौट्स वाली बिकिनी पहने नजर आ रही हैं. स्वीमिंग पूल में पोल्का डौट्स वाली बिकिनी पहने मोनालिसा एक जलपरी जैसी लग रही हैं.

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हर बार की तरह ये फोटोज भी हुईं वायरल…

 

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Sometimes A Game Comes At Just The Right Moment In Life …. #metime #peace #serene

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खबरों की मानें तो यह फोटोज पुरानी हैं लेकिन फिर भी मोनालिसा के फैंस उनके इस अंदाज को बेहद पसंद कर रहे हैं. हर बार की तरह मोनालिसा की ये फोटोज भी काफी वायरल होती दिखाई दे रही हैं और उनके इस अंदाज ने उनके फैंस के दिलों में हलचल पैदा कर दी है. वैसे ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि उनका ये अंदाज देख जो उनके फैन नहीं हैं उनको भी मोनालिसा से प्यार हो सकता है.

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कैप्शन में लिखा “#waterbaby”…

 

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Each New Day Has A Different Shape To It … You Just Roll With It… #goodmorning #newday #freshstart #feelings #waterbaby #throwback

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अपनी बिकिनी फोटो शेयर करते हुए मोनालिसा ने कैप्शन में लिखा कि,- “Each New Day Has A Different Shape To It … You Just Roll With It…” और साथ ही उन्होनें एक हैशटैग में लिखा- “#waterbaby”. उनके इस हैशटैग से साफ पता चलता है कि उनहें पानी में रहना काफी पसंद है और मोनालिसा द्वारा दिए गए इन पोज़ से भी पता चलता है कि वे काफी अच्छी तरह से स्विमिंग करना जानती हैं.

‘बिग बौस’ सीजन 10 में भी लिया था हिस्सा…

बता दें, मोनालिसा ने अबतक 125 से ज्यादा भोजपुरी फिल्मों के साथ कई और भाषाओं में भी फिल्में की हैं जैसे कि, हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, आदि. और साथ ही मोनालिसा ने कलर्स टी.वी. के सबसे बड़े रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ सीजन 10 में भी भाग लिया था और दर्शको को काफी एंटरटेन किया था. फिलहाल वे स्टार प्लस के सीरियल ‘नज़र’ में मोहाना का किरदार निभाती दिखाई दे रही हैं.

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क्या मंजिल तक पहुंच पाएगी ‘स्वाभिमान से संविधान यात्रा’

दलितों के सिर पर इन दिनों आरक्षण के छिन जाने का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है. कुछ का अंदाजा है कि भाजपा पहले राम मंदिर बनाने को प्राथमिकता देगी, जबकि कुछ को डर है कि वह पहले आरक्षण खत्म करेगी और उस के तुरंत बाद ही राम मंदिर का काम होगा जिस से संभावित दलित विद्रोह और हिंसा का रुख राम की तरफ मोड़ कर उसे ठंडा किया जा सके.

पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण को ले कर अपनी मंशा यह कहते हुए जाहिर की थी कि आरक्षण विरोधी और समर्थकों को शांति के माहौल में बैठ कर इस मसले पर बातचीत करनी चाहिए, मतलब, ऐसी बहस जिस पर हल्ला मचेगा और यही भगवा खेमा चाहता है.

यह बातचीत हालांकि एकतरफा ही सही, सोशल मीडिया पर लगातार तूल पकड़ रही है जिस में सवर्ण भारी पड़ रहे हैं और इस की अपनी कई वजहें भी हैं.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार दलित बड़े पैमाने पर भाजपा की तरफ झुके थे तो इस की एक बड़ी वजह बतौर प्रधानमंत्री पेश किए गए खुद नरेंद्र मोदी का उस तेली साहू जाति का होना था जिस की गिनती और हैसियत आज भी दलितों सरीखी ही है.

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तब लोगों खासतौर से दलितों को लगा था कि भाजपा केवल सवर्णों की नहीं, बल्कि उन की भी पार्टी है जो उस ने तकरीबन एक दलित चेहरा पेश किया.

इस के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने दलित प्रेम का अपना दिखावा जारी रखा और तरहतरह के ड्रामे किए, जिन में उस के बड़े नेताओं का दलितों के घर जा कर उन के साथ खाना खाना और दलित संतों के साथ कुंभ स्नान प्रमुख थे.

इस का फायदा उसे मिला भी और दलित उसे वोट करते रहे. साल 2019 के चुनाव में आरक्षण मुद्दा बनता लेकिन बालाकोट एयर स्ट्राइक की सुनामी उसे बहा ले गई और राष्ट्रवाद के नाम पर सभी लोगों ने नरेंद्र मोदी को दोबारा चुना.

3 तलाक और कश्मीर में मनमानी थोपने के बाद जैसे ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण का मुद्दा उठाया तो दलित समुदाय बेचैन हो गया, क्योंकि अब राजनीति में उस का कोई माईबाप नहीं है और बसपा प्रमुख मायावती भी भाजपा के सुर में सुर मिला रही हैं.

पिछले 5 साल में भाजपा तकनीकी तौर पर दलितों को दो फाड़ कर चुकी है और ज्यादातर नामी दलित नेता उस की गोद में खेल रहे हैं, जिन्होंने उस की असलियत भांपते हुए इस साजिश का हिस्सा बने रहने से इनकार कर दिया, उन्हें दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल फेंकने में भी भाजपा ने देर नहीं की. इन में सावित्री फुले और उदित राज के नाम प्रमुख हैं.

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कांग्रेस का दांव

इधर कांग्रेसी खेमे को यह अच्छी तरह समझ आ रहा है कि उस की खिसकती जमीन की अहम वजह परंपरागत वोटों का उस से दूर हो जाना है जिन में मुसलमानों से भी पहले दलितों का नंबर आता है.

अब कांग्रेस भूल सुधारते हुए फिर दलितों को अपने पाले में लाने के लिए ‘स्वाभिमान से संविधान’ नाम की यात्रा निकालने जा रही है. इस बाबत उस का फोकस हालफिलहाल 3 राज्यों हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव हैं.

कुछ दिन पहले ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के नेताओं से मुलाकात कर इस यात्रा को हरी झंडी दे दी है जिस के तहत फिर से दलितों को कांग्रेस से जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर कोशिशें की जाएंगी.

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के मुखिया नितिन राऊत की मानें, तो ‘स्वाभिमान से संविधान यात्रा’ के तहत हरेक विधानसभा में एक कोऔर्डिनेटर नियुक्त किया जाएगा जो अपनी विधानसभा में इस यात्रा को आयोजित करेगा.

दलितों को लुभाने का यह दांव कितना कामयाब हो पाएगा, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे, लेकिन कांग्रेस की एक बड़ी मुश्किल यह है कि उस के पास भी बड़े और जमीनी दलित नेताओं का टोटा है.

इधर सोशल मीडिया पर भगवा खेमा लगातार यह कह रहा है कि छुआछूत और जातिगत भेदभाव समेत दलितों को सताने के मामले अब कम ही होते हैं. फसाद या बैर की असल जड़ तो आरक्षण है जिस के चलते दलित अपनी काबिलीयत नहीं दिखा पा रहे हैं. सवर्ण तो चाहते हैं कि दलित युवा अपनी काबिलीयत के दम पर आगे आ कर हिंदुत्व की मुख्यधारा से जुड़ें, उन का इस मैदान में स्वागत है.

यह कतई हैरानी की बात नहीं है कि मुट्ठीभर दलित युवा इसे एक चुनौती के रूप में ले रहे हैं और ये वे दलित हैं, जिन्हें अपने ही समुदाय के लोगों की बदहाली की असलियत और इतिहास समेत भविष्य का भी पता नहीं.

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ये लोग भरे पेट हैं, शहरी हैं और यह मान बैठे हैं कि पूरा दलित समुदाय ही उन्हीं की तरह है जिसे आरक्षण की बैसाखी फेंक देनी चाहिए.

यही दलित युवा भाजपा की ताकत हैं जो आरक्षण खत्म होने पर तटस्थ रह कर अपने ही समाज की बरबादी में योगदान देंगे, क्योंकि सवर्ण उन्हें गले लगा कर बराबरी का दर्जा देते हैं. उन के लिए यह साजिश भरी बराबरी ही ऊपर वाले का प्रसाद है.

बारीकी से गौर किया जाए तो भाजपा दलितों को बहलाफुसला कर आरक्षण छोड़ने पर राजी करने की भी कोशिश कर रही है और वही धौंस भी दे रही है जो 3 तलाक और धारा 370 के मुद्दों पर मुसलमानों को दी थी कि यह कोई बदला या ज्यादती नहीं, बल्कि तुम्हारे भले की ही बात है.

अगर सीधे से नहीं मानोगे तो यह काम दूसरे तरीकों से भी किया जा सकता है, लेकिन भाईचारा और भलाई इसी में है कि सहमत हो जाओ.

अब ऐसे में अगर कांग्रेस की यात्रा हवाहवाई बातों और सीबीएससी की बढ़ी हुई फीस जैसे कमजोर मुद्दों में सिमट कर रह गई तो लगता नहीं कि वह मंजिल तक पहुंच पाएगी.

सर्विलांस: पुलिस का मारक हथियार

मोबाइल क्रांति ने पुलिस को ऐसा हथियार दे दिया है, जिसे वह कभी खोना नहीं चाहेगी. छोटेबड़े अपराधों की गुत्थी सुलझाने में सर्विलांस का रोल बेहद अहम हो गया है. निगरानी करने और अपराधी तक पहुंचने में इस से बड़ा जरीया कोई दूसरा नहीं है.

वैसे, सर्विलांस को लोगों की निजता में सेंध मान कर विरोध का डंका भी पिटता रहा है कि कानून व सिक्योरिटी के नाम पर पुलिस कब और किस की निगरानी शुरू कर दे, इस बात को कोई नहीं जानता. लेकिन पुलिस न केवल डकैती, हत्या, लूट, अपहरण व दूसरे अपराधों को इस से सुलझाती है, बल्कि अपराधी इलैक्ट्रोनिक सुबूतों के चलते सजा से भी नहीं बच पाते हैं.

क्या है सर्विलांस

आम भाषा में मोबाइल फोन को सैल्युलर फोन व वायरलैस फोन भी कहा जाता है. यह एक इलैक्ट्रोनिक यंत्र है. अपराधियों तक इस की पहुंच आसान हो जाती है. उन की लोकेशन को ट्रेस करने में सब से अहम रोल सर्विलांस का होता है. किसी अपराधी की इलैक्ट्रोनिक तकनीक के जरीए निगरानी करना ही सर्विलांस कहा जाता है.

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80-90 के दशक तक पुलिस अपनी जांच के लिए मुखबिरों पर निर्भर रहती थी, लेकिन साल 1998 में आपसी संचार के लिए मोबाइल कंपनियों के आने के साथ ही अपराधियों ने वारदातों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. पुलिस ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए और सर्विलांस का दौर शुरू हो गया.

इस से निगरानी और अपराध की जांच का तरीका बदल गया. कई बड़ी वारदातों को सर्विलांस के जरीए आसानी से सुलझाया गया, तो यह पुलिस के लिए मारक हथियार साबित हुआ. इस के बाद पुलिस वालों को सर्विलांस के लिए ट्रेनिंग दी जाने लगी.

सर्विलांस ऐसे करता काम

किसी भी अपराध के होने पर सब से पहले पुलिस पीडि़त व संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबरों की मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों से काल की डिटेल निकलवाती है. इस से कई तरह की जानकारियां मिल जाती हैं यानी कब, कहां व किस से बात की गई. इस के जरीए काल या एसएमएस के समय का पता लगा लिया जाता है.

सभी मोबाइल कंपनियां ऐसा डाटा महफूज रखती हैं. इन कंपनी के मेन स्विचिंग सैंटर (एमसीए) में यह सब डाटा जमा रहता है. सिक्योरिटी संबंधी नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है. इतना ही नहीं, वारदात के वक्त कौन कहा था, इस का भी पता चल जाता है.

अगर इस से भी बात नहीं बनती है, तो पुलिस वारदात वाले इलाके के उन सभी मोबाइल नंबरों का पता लगा लेती है जो उस वक्त मोबाइल टावर के संपर्क में थे. यह जरूरी नहीं कि काल की जाए, बिना काल के भी मोबाइल की सक्रियता का पता लगाया जा सकता है.

दरअसल, नैटवर्क सबस्टेशन के मुख्य भाग पब्लिक स्विचिंग टैलीफोन नैटवर्क (पीसीटीएन) की तरंगें मोबाइल फोन पर लगातार पड़ती रहती हैं जिन के जरीए नैटवर्क की तारतम्यता बनी रहती है. वौइस चैनल लिंक का काम टावर ही करता है. ट्रांसीवर के जरीए काल का लेनादेना होता है. डाटा से पता चल जाता है कि किस वक्त कितने मोबाइल टावर के संपर्क में थे. वारदात से पहले या बाद के सक्रिय मोबाइल फोन पर खास नजर होती है.

इस के बाद संदिग्ध नंबरों की निशानदेही कर ली जाती है. यह पता किया जाता है कि नंबर को किस आदमी के एड्रैस प्रूफ पर कंपनी ने अलौट किया है. हालांकि पुलिस के लिए यह काम कई बार भूसे के ढेर से सूई निकालने के समान होता है. हजारों नंबरों में से संदिग्ध नंबरों को ढूंढ़ना आसान काम नहीं होता है. ऐक्सपर्ट इस में दिनरात एक करते हैं. नामपता निकलवा कर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाती है.

पुलिस से बचने के लिए बहुत से अपराधी गलत नामपते पर मोबाइल सिमकार्ड खरीदते हैं. नियमों की सख्ती के बाद अब सिमकार्ड खरीदना इतना आसान नहीं रहा. सरकार ने इस के लिए सख्त गाइडलाइंस बना दी हैं.

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सर्विलांस के दूसरे चरण में पुलिस के सर्विलांस ऐक्सपर्ट की टीम संदिग्ध नंबर को ट्रेस कर उसे सर्विलांस पर लगा देती है. सर्विलांस पर लगने के बाद वह कहां आताजाता है, इस का पता पुलिस को चलता रहता है. संभावित ठिकानों और उस की गतिविधियों समेत 6 तरह के खास बिंदुओं से पुलिस अनजान नहीं होती. पुलिस उन के मोबाइल पर हर आनेजाने वाली काल सुनती है. उस की लोकेशन को आसानी से ट्रेस कर अपराधियों तक पहुंच जाती है.

इलैक्ट्रोनिक सुबूतों को झुठलाना किसी के लिए आसान भी नहीं होता. अपराधी शातिराना अंदाज दिखा कर कई बार सब्सक्राइबर आइडैंटिफाई मौड्यूल (सिमकार्ड) बदल लेते हैं, पर हर मोबाइल का अपना इंटरनैशनल मोबाइल इक्यूपमैंट आइडैंटिटी (आईएमईआई) नंबर होता है. सिमकार्ड के बदलते ही उस की इंफोर्मेशन सेवा देने वाली कंपनी तक पहुंच जाती है.

इतना ही नहीं, यह भी पता लगा लिया जाता है कि किस मोबाइल पर कब और कितने नंबरों का इस्तेमाल किया गया. सारा डाटा मिलने पर अपराधियों तक पुलिस की पहुंच हो जाती है.

मोबाइल कंपनियां इस काम में पुलिस को भरपूर सहयोग करती हैं. भारत सरकार द्वारा इस संबंध में सभी मोबाइल कंपनियों को नियमावली दी गई?है. पुलिस को चकमा देने के लिए अपराधी इस में भी हथकंडे अपनाते हैं. वे सिमकार्ड के साथ मोबाइल भी बदलते रहते हैं.

सर्विलांस अपराध और अपराधी दोनों पर ही लगाम लगाता है. मोबाइल फोन चोरी होने की दशा में आईएमईआई नंबर के जरीए ही पुलिस मोबाइल को खोजती है. यह एक ऐसी पहचान है, जिसे किसी भी दशा में मिटाया नहीं जा सकता.

बच नहीं पाते अपराधी

देश के बड़े मामलों की बात करें, तो संसद पर आतंकी हमला, शिवानी भटनागर हत्याकांड व फिरौती के लिए किए गए अपहरण के बड़े मामलों में पुलिस सर्विलांस के जरीए ही खुलासे व गिरफ्तारियां करने में कामयाब रही.

शिवानी भटनागर हत्याकांड में काल डिटेल के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची. संसद हमले में जांच एजेंसी ने पाया कि आतंकवादियों का प्लान पहले से बनाया हुआ था.

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सर्विलांस की उपयोगिता को नकारने वाला कोई नहीं है. पुलिस के लिए यह किसी संजीवनी से कम नहीं है. ट्रेनिंग के दौरान पुलिस वालों को अब ट्रेनिंग सैंटरों में ऐसी तमाम तकनीकों का पाठ भी पढ़ाया जाता है.

मोबाइल के जरीए होने वाले अपराध में अपराधियों के खिलाफ अदालत में सुबूत पेश करना आसान होता है. उन्हें झुठलाना आसान नहीं होता है.

संसद हमले में फैसला देते हुए कोर्ट ने आतंकवादियों से संबंधित मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर व काल डिटेल को अहम सुबूत माना था. सुबूतों के तौर पर मोबाइल व सिमकार्ड की फोरैंसिक ऐक्सपर्ट से जांच भी कराती है, ताकि सुबूत मजबूत हो सकें.

सीमित है अधिकार

ग्लोबल वैब इंडैक्स के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 88.6 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास मोबाइल हैं. 70 फीसदी से ज्यादा आबादी मोबाइल उपभोक्ता हैं.

ये आंकड़े साल 2014 के हैं. यह तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. वर्तमान दौर में 10 में से 3 लोगों के पास मोबाइल फोन हैं.

लेकिन किसी के व्यापारिक हितों, निजी जिंदगी में ताकझांक व राजनीतिक दुश्मनी के चलते मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेना तकनीक के साथसाथ अधिकारों का गलत इस्तेमाल है. पकड़े जाने पर ऐसे पुलिस वालों को सजा देने का नियम है. इस के लिए बने ऐक्ट व संविधान के अनुच्छेद पुलिस को इस की इजाजत नहीं देते.

पुलिस को देश के किसी भी नागरिक का मोबाइल टेप करने का अधिकार नहीं होता. इंटरनल सिक्योरिटी ऐक्ट, पोस्ट ऐंड टैलीग्राफ ऐक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के जरीए आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों के नंबर पुलिस सर्विलांस पर ले सकती है. इस के लिए भी आला अफसरों व शासन की इजाजत लिया जाना अनिवार्य होता है. मोबाइल फोन सेवादाता कंपनी को लिखित प्रस्ताव देना होता है और उचित कारण भी बताया जाता है.

मोबाइल कंपनियां इस के बाद जरूरी डाटा मुहैया कराने के साथ ही उपभोक्ता के मोबाइल के सिगनल पुलिस के मोबाइल पर डायवर्ट कर देती हैं. एक बार नंबर के सर्विलांस पर लगने के बाद न सिर्फ रोजाना की उस की लोकेशन मिल जाती है, बल्कि उस के मोबाइल पर आनेजाने वाली काल को सुनने के साथ टेप भी किया जा सकता है.

निगरानी रखना भी जरूरी

आतंक और अपराध से दोदो हाथ करते देश में सरकार का सैंट्रल मौंनिटरिंग सिस्टम, खुफिया एजेंसियां, सुरक्षा एजेंसियां व पुलिस की विभिन्न यूनिट ला ऐंड और्डर व सुरक्षा के चलते शक होने पर निगरानी करती रहती हैं. उन्हें चंद औपचारिकताओं के बाद यह अधिकार है.

सुरक्षा और गोपनीयता के मद्देनजर इस तकनीक को विस्तृत रूप से और आंकड़ों को उजागर नहीं किया जा सकता. एजेंसियों के ऐसा करते रहने से कई बार बड़ी वारदातों के साथ देश भी खतरों से बचता है.

एक इलैक्ट्रोनिक जासूस हमारे इर्दगिर्द होता है. कई बार पुलिस वाले अपने पद का गलत इस्तेमाल कर किसी के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाने के साथ ही फोन टैप कर लेते हैं. इस तरह के चंद मामले सामने आने के बाद अब यह इतना आसान नहीं है. अब उचित कारण बता कर इस की इजाजत बड़े अफसरों से लेनी होती है. गंभीर मामलों में सरकार इस की इजाजत देती है. प्राइवेसी के मद्देनजर सख्त गाइडलाइंस हैं.

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हाईटैक होगी देश की पुलिस

भारतीय पुलिस को ज्यादा से ज्यादा हाईटैक बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं. देश में क्राइम कंट्रोल टैकिंग नैटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) लागू करने की योजना है. इस सिस्टम के सक्रिय होते ही अपराधियों को पकड़ना पुलिस के लिए और भी ज्यादा आसान हो जाएगा.

इस योजना के जरीए देश के सभी थाने इंटरनैट के जरीए आपस में जुड़ जाएंगे. किसी अपराधी का पूरा प्रोफाइल औनलाइन मिलने के साथ ही उस की गतिविधियों पर तीखी नजर रखने ब्योरा आपस में लिया व दिया जा सकेगा.

कुछ राज्यों में यह योजना शुरू भी हो चुकी है. उत्तराखंड के सभी थाने सीसीटीएनएस से लैस हैं. उत्तर प्रदेश में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा है.

अफसरों की राय

ला ऐंड और्डर व राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी तंत्र को सक्रिय रहना ही पड़ता है. तकनीक के विकास में हम दावे से कह सकते हैं कि पुलिस हाईटैक हो चुकी है. सर्विलांस पुलिस के लिए निश्चित ही अब एक बड़ा हथियार है.

-जीएन गोस्वामी, पूर्व आईजी उत्तराखंड पुलिस.

संचार क्रांति के दौर में अपराधियों से लड़ने के लिए तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत करने के लिए पुलिस वालों को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है.

पुलिस का काम हर हाल में जनता की सुरक्षा करना है. किसी तरह से नियमों का उल्लंघन न हो, इस बात का भी खास खयाल रखा जाता है.

-रमित शर्मा, आईजी उत्तर प्रदेश पुलिस.

हम गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक ही काम करते हैं. समयसमय पर इस बाबत विभाग को निर्देश भी मिलते रहते हैं. गंभीर मामलों में उचित जांचपड़ताल कर के पुलिस को सहयोग किया जाता है. सर्विलांस की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं होती.

-आशीष घोष, अफसर, बीएसएनएल.

किसी शख्स को लगता है कि पुलिस व मोबाइल कंपनी द्वारा उस के निजी अधिकारों का हनन हो रहा है, तो वह कानूनी लड़ाई लड़ सकता है. सर्विलांस की पुष्टि होने पर वह शख्स कोर्ट के अलावा मानवाधिकार आयोग भी जा सकता है.

-राजेश कुमार दुबे, वकील इलाहाबाद हाईकोर्ट.

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‘साहो’ की इस एक्ट्रेस ने की सगाई की अनाउंसमेंट, KISS करते हुए शेयर की रोमांटिक फोटो

बौलीवुड इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस एवलिन शर्मा काफी समय से अपनी लव लाइफ को लेकर काफी चर्चा में थीं. खबरों के अनुसार एवलिन औस्ट्रेलियन डेंटल सर्जन और व्यवसायी डौक्टर तुशान भिंडी को डेट कर रही थीं तो वहीं बीते दिन अपने औफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस रिलेशन का खुलाया किया है. उन्होनें अपनी और तुशान की एक फोटो इंस्टाग्राम उकाउंट पर शेयर कर कैप्शन में लिखा- “Yessss!!!”

किस करते हुए शेयर की फोटो…

 

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Yessss!!! 🥰💍🥳😍🤩

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एवलिन शर्मा और तुशान भिंडी इस फोटो में एक क्रूज़ में एक दूसरे को किस करते नजर आ रहे हैं. एवलिन के इस एक शब्द के कैप्शन ने उनके फैंस के सारे सवालों के जवाब दे डाले जो कि उनकी लव लाइफ से जुड़े थे. एवलिन ने इस फोटो में फ्लावर प्रिंटेड गाउन पहना हुआ है जो कि काफी सुंगर लग रहा है.

बौलीवुड अंदाज में किया था प्रोपोज…

 

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💐 #flowerchild

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खबरों की मानें तो तुशान भिंडी ने एवलिन शर्मा को एक खूबसूरत फिल्मी स्टाइल में प्रोपोज किया था जिसका खुलासा एवलिन ने एक इंटरव्यू में किया था. एवलिन ने बताया कि,- ‘तुषान और मैं सिडनी के पौपुलर हार्बर ब्रिज पर गए थे. वहां पर उन्होंने रोमांटिक अंदाज में घुटनों के बल बैठकर एक स्पेशल नोट सुनाते हुए मुझे प्रपोज किया था. जब वो मुझे प्रपोज कर रहे थे तब गिटारिस्ट इस दौरान हमारे लिए गिटार बजा रहा था और गिटारिस्ट उस समय मेरा फेवरिट सौन्ग प्ले कर रहा था.’

जल्द ही करेंगे शादी की डेट अनाउंस…

इसके आगे एवलिन शर्मा ने बताये कि,- ‘ये सब कुछ किसी सपने के सच होने जैसा था. तुषान मुझे अच्छी तरह जानते हैं और समझते हैं कि मुझे क्या पसंद है और क्या नहीं. उस दौरान उनका प्रपोजल परफेक्ट था.’ एवलिन शर्मा और तुशान भिंडी बहुत ही जल्द शादी के बंधन के बंधने जा रहे हैं पर अभी दोनों मे से किसी ने भी शादी की डेट अनाउंस नहीं की है.

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बता दें, एवलिन शर्मा की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है सिडनी और खबरों के अनुसार एवलिन शादी के बाद सिडनी में ही शिफ्ट होने का प्लैन कर रही हैं.  हाल ही में वे साउथ के सुपर स्टार प्रभास के साथ फिल्म ‘साहो’ में भी नजर आई थीं.

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