सहकर्मी करने लगे जब “ब्लेक मेल” 

जब पुरुष और महिला  साथ साथ काम करते हैं तब दोनों को जहां एक तरफ सकारात्मक भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, माननीय संबंधों की शुरुआत होती है. वही किन्हीं  हालातों में नकारात्मक घटनाएं भी हमें देखने को मिलती है. जो आगे बड़े अपराधों का रूप ले लेती है और लोगों का जीवन बर्बाद कर देती है. अक्सर हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि महिला व पुरुष काम करते करते एक दूसरे के बारे में कुछ ऐसा जान जाते हैं या हासिल कर लेते हैं जो अगर सार्वजनिक कर दिया जाए तो उनके निजी जीवन, सामाजिक जीवन पर गाज बन गिर पड़ता है.

अक्सर इस मामले में महिलाएं प्रताड़ित होती रही हैं. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी एक ऐसी ही घटना इन दिनों सुर्खियों में है जहां एक ही स्कूल में पढ़ा रहे पुरुष व महिला शिक्षक के बीच मामला ब्लैक मेलिंग यानी  भय दोहन तक पहुंच गया.

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राजधानी रायपुर  के टिकरापारा पुलिस ने महिला शिक्षिका को भयदोहन  करने के आरोप में एक शिक्षक को गिरफ्तार किया है. महिला टीचर का बयान  है कि एक दफे भ्रमण  के दौरान शिक्षक ने उसके साथ अपने मोबाइल मे सेल्फी ली थी,  आगे चल कर उसी फोटो को वायरल करने की धमकी देकर अनाप शनाप रुपये  की मांग  करने  लगा था. हजारों रूपए देने के बाद भी कई सालों से  सिलसिलेवार ब्लैकमेल करता रहा . मगर जब पानी सर से ऊपर चढ़ने लगा  तो महिला ने  सहकर्मी शिक्षक की तथाकथित कहानी  अपने परिजनों को बताई  उनका संबल मिलने पर महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक सुरेंद्र टंडन को अपनी गिरफ्त में लेकर सलाखों के पीछे डाल दिया है.

भयदोहन का सच!

शिक्षक के भय दोहन सारी सच्ची कहानी सिलसिलेवार कुछ इस तरह है  जिसे टिकरापारा  थाना प्रभारी व जांच अधिकारी याकूब मेमन बताते है- आरोपी शिक्षक सुरेंद्र टंडन डुंडा स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ है. पीड़िता महिला शिक्षिका भी पहले उसी स्कूल में पदस्थ थी. इसी दरमियान  उनकी जान पहचान हुई और  सोशल मीडिया पर  बातचीत होने लगी. इसी बीच एक दिन शिक्षक सहयोगी शिक्षिका को अपने साथ घूमाने ले गया. जब वो साथ में घूम रहे थे, तभी फोन में शिक्षक ने महिला शिक्षिका के साथ कुछ  सेल्फी ली थी.इसी सेल्फी को शिक्षक सोशल मीडिया में डालकर वायरल कर देने और पूरी बात उसके पति को बता देने की धमकी देता रहता  था. यही नही ब्लैकमेल कर वह महिला से 70 हजार रुपए वसूल  चुका था. पिछले कई दिनों से शिक्षिका इसी बात को लेकर परेशान रह रही थी. पत्नी के परेशान होने की वजह पतिदेव  ने पूछ ली. तब पति के संबल पर पत्नी में थाने में पहुंच अपनी फरियाद प्रस्तुत की और अंततः सहकर्मी शिक्षक को जेल के सीखचों में पहुंचा दिया गया.

दोनों पक्षों की समझदारी

यहां यह बताना बेहद जरूरी है कि आज जब महिला और पुरुष साथ-साथ कदम पर कदम मिलाकर हर एक जगह संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. शिक्षक के रूप में, दफ्तरों में, शासकीय कार्यालयों में, निजी संस्थानों में ऐसे में पुरुष एवं महिला दोनों को लिए यह आवश्यक है कि अपनी मर्यादा का पालन करें.

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इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल कहते हैं- साथ साथ काम करते हुए पुरुष और महिला दोनों में समझदारी की परम आवश्यकता है.अगर कोई एक पक्ष बहकता है तो दूसरा पक्ष उसे संभाल सकता है. मगर दोनों ही पक्ष अर्थात पुरुष और महिला सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो आगे चलकर अपराध का घटित होना तय है.

राजनीति का डीएनए : भाग 2

पिछले अंक में आप ने पढ़ा:

रूपमती बिस्तर पर अपने प्रेमी सूरजभान के साथ थी कि उस के पति अवध ने देख लिया. खुद को फंसती देख कर रूपमती ने सूरजभान पर इज्जत लूटने का इलजाम लगाया और अवध के सामने रोते हुए बताया कि सूरजभान उस के बेहूदा फोटो से उसे ब्लैकमेल कर रहा है.

अब पढ़िए आगे…

अवध चुप रहा, तो रूपमती ने फिर कहा ‘‘देखोजी, वह बहुत बड़ा आदमी है. तुम उसे कुछ कर दोगे, तो तुम्हें जेल हो जाएगी. फिर तो पूरा गांव मुझ अकेली के साथ न जाने क्याक्या करेगा. फिर तुम क्या करोगे? माफ करना सब से बड़ा धर्म है. तुम कल मेरे साथ चलना. वह फोटो भी देगा और माफी भी मांगेगा. खत्म करो बात.’’

अवध छोटा किसान था. उस में इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वह गांव के सरपंच के बेटे का कुछ नुकसान भी कर सके. पुलिस और कोर्टकचहरी के नाम से उस की जान सूखती थी.

अवध ने कहा, ‘‘ठीक है. अगर फोटो वापस कर के वह माफी मांग लेता है, तो हम उसे माफ कर देंगे. और हम कर भी क्या सकते हैं?’’

रूपमती अवध की तरफ से निश्चिंत हो गई. उस ने सूरजभान को भी समझा दिया था कि शांति से मामला हल हो जाए, इसी में तीनों की भलाई है.

रूपमती पति और प्रेमी को आमनेसामने कर के देखना चाहती थी कि क्या नतीजा होता है. अगर वे दोनों अपनी मर्दानगी के घमंड में एकदूसरे पर हमला करते हैं, तो उस के हिसाब से वह अपनी कहानी आगे बढ़ाने के लिए तैयार रखेगी. पति मरता है, तो कहानी यह होगी कि सूरजभान ने उस की इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश की. पति ने विरोध किया, तो सूरजभान ने उस की हत्या कर दी. बाद में भले ही वह सूरजभान से बड़ी रकम ले कर कोर्ट में उस का बचाव कर दे.

अगर प्रेमी मरता है, तो सच है कि सूरजभान ने उस के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की. पति ने पत्नी की इज्जत बचाने के लिए बलात्कारी की हत्या कर दी. अपनी तरफ से रूपमती ने सब ठीकठाक करने की कोशिश की, बाकी किस के दिल में क्या छिपा है, वह तो समय ही बताएगा.

रूपमती, उस का पति अवध और सूरजभान आमनेसामने थे. सूरजभान ने माफी मांगते हुए फोटो लौटाया और कहा, ‘‘भैया, धन्य भाग्य आप के, जो आप को ऐसी चरित्रवान और पतिव्रता पत्नी मिली.’’

अवध ने भी कह दिया, ‘‘गलती सब से हो जाती है. तुम ने गलती मान ली. हम ने माफ किया.’’

रूपमती फोटो ले कर वापस आ गई. बिगड़ी बात संभल गई. मामला खत्म. रूपमती खुश हो गई. अब वह बहुत सावधानी से सूरजभान से मिलती थी.

वैसे, रूपमती और अवध अकेले रहते थे. रूपमती की एक ननद थी, जिस की शादी काफी दूर शहर में हो चुकी थी. उस के सासससुर बहुत पहले ही नहीं रहे थे. शादी के 8 साल बाद भी उस के कोई औलाद नहीं हुई. अवध मातापिता द्वारा छोड़ी खेतीबारी देखता था. इसी से उस की गुजरबसर चलती थी.

औलाद न होने का दोष तो औरत पर ही लगता है. रूपमती अपना इलाज करा चुकी थी. डाक्टरों ने उस में कोई कमी नहीं बताई थी. जब डाक्टर ने कहा कि अपने पति का भी चैकअप कराओ, तो अवध की मर्दानगी को ठेस पहुंची. उस का कहना था कि बच्चा न होना औरतों की कमी है. आदमी तो बीज डालता है. बीज में भी कहीं दोष होता है भला. औरत जमीन है. हां, जमीन बंजर हो सकती है.

अवध शराबी था. वह रूपमती को बहुत चाहता था, लेकिन कभीकभी शराब के नशे में वह उसे बांझ कह देता और वंश चलाने के लिए दूसरी शादी करने की बात भी कर देता था.

रूपमती को यह बात बहुत बुरी लगती थी कि जिस में उस का दोष नहीं है, उस की सजा उसे क्यों मिले? फिर देहाती औरतों की सोच भी वही. जब रूपमती उन के आगे अपना दुखड़ा रोती, तो एक दिन एक औरत ने कह दिया कि वंशहीन होने से अवध की शराब की लत बढ़ती जा रही है. इस से पहले कि वह नशा कर के सब खेतीबारी बेच दे, अच्छा है कि औलाद के लिए तुम कोई सहारा खोजो.

इसी खोज में रूपमती सूरजभान से जुड़ गई. सूरजभान ने संबंध तो बना लिया, पर यह कह कर डरा भी दिया कि अगर बच्चा हमारे ऊपर गया, तो पूरे गांव में यह बात छिपी नहीं रहेगी.

सूरजभान गांव के जमींदार का बेटा था. उस के मातापिता के पास बहुत सारे खेत थे. वह शादीशुदा था. उस की पत्नी अनुपमा खूबसूरत थी. एक बच्चा भी

था. सासससुर ने अपनी बड़ी हवेली में एक हिस्सा बेटे और बहू को अलग से दे रखा था.

सूरजभान का बेटा गांव के ही स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ता था. सूरजभान का एक नौकर था दारा. वह नौकर के साथसाथ सूरजभान का खास आदमी भी था. वह अखाड़े में कुश्ती लड़ता था.

6 फुट का नौकर दारा खेतीकिसानी से ले कर घरेलू कामकाज सब देखता था. उस का पूरा खर्च सूरजभान और उस का परिवार उठाता था.

सूरजभान के पिता ने हवेली के सब से बाहर का एक कमरा नौकर दारा को दे रखा था, ताकि जब चाहे जरूरत पर उसे घर के काम के लिए बुलाया जा सके. सूरजभान गांव में कहीं भी आताजाता, तो दारा को अपने साथ सिक्योरिटी गार्ड की तरह ले जाता.

बड़े आदमी का बेटा होने के चलते सूरजभान में कुछ बुराइयां भी थीं. मसलन, वह जुआ खेलता था, शराब पीता था वगैरह.

सूरजभान ने नौकर दारा को यह काम भी सौंपा था कि अवध जब बाहर जाए, तो वह उस का पीछा करे. अवध के लौटने से पहले की सूचना भी दे, ताकि अगर वह रूपमती के साथ हो, तो संभल जाए. इस तरह दारा को भी रूपमती और सूरजभान के संबंधों की खबर थी.

एक दिन सूरजभान ने रूपमती से पूछा, ‘‘तुम्हारे पति को काबू में करने का कोई तो हल होगा?’’

‘‘है क्यों नहीं.’’

‘‘तो बताओ?’’

‘‘शराब.’’

2 नशेबाज जिगरी दोस्त से भी बढ़ कर होते हैं और शराब की लत लगने पर शराबी कुछ भी कर सकता है.

‘‘मिल गया हल,’’ सूरजभान ने खुश होते हुए कहा.

‘‘लेकिन, वह तुम्हारे साथ क्यों शराब पीएगा?’’ रूपमती ने पूछा.

‘‘शराब की लत ऐसी है कि वह सब भूल कर न केवल मेरे साथ पी लेगा, बल्कि अपने घर भी ला कर पिलाएगा, खासकर जब मैं उसे पिलाऊंगा और पिलाता ही रहूंगा.’’

रूपमती को भला क्या एतराज हो सकता था. अगर ऐसा कोई रास्ता निकलता है, तो उसे मंजूर है, जिस में पति ही उस के प्रेमी को घर लाए.

शराब की जिस दुकान पर अवध जाता था, उसी पर सूरजभान ने भी जाना शुरू कर दिया. पहलेपहले तो अवध ने उसे घूर कर देखा, कोई बात नहीं की. सूरजभान के नमस्ते करने पर अवध ने बेरुखी दिखाई, लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि अवध के पास पैसे नहीं थे. शराब की लत के चलते वह शराब की दुकान पर पहुंच गया. शराब की बोतल लेने के बाद उस ने कहा, ‘‘मैं यहां हमेशा आता हूं, आज उधार दे दो.’’

शराब बेचने वाले ने कहा, ‘‘यह सरकारी दुकान है. यहां उधार नहीं मिल सकता.’’

इस बात पर अवध बिगड़ गया, तभी सूरजभान ने आ कर कहा, ‘‘भैया को शराब के लिए मना मत किया करो. पैसे मैं दिए देता हूं.’’

‘‘लेकिन, तुम पैसे क्यों दोगे?’’ अवध ने पूछा.

‘‘भाई माना है. एक गांव के जो हैं,’’ सूरजभान ने कहा.

शराब की तलब मिटाने के चलते अवध पिछला सब भूल कर सूरजभान को अपना सचमुच का भाई मानने लगा.

जब शराब का नशा हावी हो जाता कि अवध से चलते नहीं बनता, तो सूरजभान उसे घर छोड़ने जाने लगा.

एक दिन सूरजभान ने घर छोड़ा, तो नशे में अवध ने कहा, ‘‘हर बार बाहर से चले जाते हो. इसे अपना ही घर समझो. चलो, कुछ खा लेते हैं.’’

सूरजभान ने कहा, ‘‘भैया, घर पहुंचने में देर हो जाएगी. रात हो रही है, फिर कभी सही.’’

‘‘नहीं, रोज यही कहते हो. देर हो जाए तो यहीं रुक जाना. मोबाइल फोन से घर पर बता दो कि अपने दोस्त के यहां रुक गए हो…’’ फिर अवध ने रूपमती को आवाज दी, ‘‘कुछ बनाओ. मेरा दोस्त, मेरा भाई आया है.’’

रूपमती को तो मनचाही मुराद मिल गई. जिस प्रेमी से छिपछिप कर मिलना पड़ता था, उसे उस का पति घर ले कर आ रहा है. खापी कर अवध तो नशे में सोता, तो सीधा अगले दिन के 10-11 बजे ही उठता. इस बीच रूपमती और सूरजभान का मधुर मिलन हो जाता और सुबह जल्दी उठ कर वह अपने घर चला जाता.

सूरजभान की पत्नी अनुपमा गुस्से की आग में जल रही थी. उस का पति महीनों से रातरात भर गायब रहता था.

ससुर से शिकायत करने पर भी अनुपमा को यही जवाब मिला कि पतिपत्नी के बीच में हम क्या बोल सकते हैं. काम पर आतेजाते उस की नजर नौकर दारा पर पड़ती रहती. उस के कसे हुए शरीर, ऊंची कदकाठी, कसरती बदन को देख कर अनुपमा के बदन में चींटियां सी रेंगने लगतीं.

एक दिन अनुपमा ने दारा को बुला कर कहा, ‘‘तुम केवल मेरे पति के नौकर नहीं हो, बल्कि इस पूरे परिवार के भरोसेमंद हो. पूरे परिवार के प्रति तुम्हारी जिम्मेदारी है.’’

‘‘जी मालकिन,’’ दारा ने सिर झुका कर कहा.

‘‘तो बताओ कि तुम्हारे मालिक कहां और किस के पास आतेजाते हैं? उन की रातें कहां गुजरती हैं? क्या तुम्हें अपनी छोटी मालकिन का जरा भी खयाल नहीं है?’’ अनुपमा ने अपनेपन की मिश्री घोलते हुए कहा.

‘‘मालकिन, अगर मालिक को पता चल गया कि मैं ने आप को उन के बारे में जानकारी दी है, तो वे मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे,’’ दारा ने अपनी मजबूरी जताई.

‘‘तुम निश्चिंत रहो. तुम्हारा नाम नहीं आएगा,’’ अनुपमा ने अपना पल्लू गिराते हुए कहा, ‘‘इधर देखो. मैं भी औरत हूं. मेरी भी कुछ जरूरतें हैं.’’

दारा ने अपनी मालकिन को पहली बार ब्लाउज में देखा था. पेट से ले कर कमर तक बदन की दूधिया चमक से दारा का मन चकाचौंध हो रहा था. उस के शरीर में तनाव आने लगा.

‘‘सुनो दारा, मालिक वही जो मालिकन के साथ रहे. तुम भी मालिक बन सकते हो. लेकिन तुम्हें कुछ करना होगा,’’ अनुपमा ने अपने शरीर का जाल दारा पर फेंका.

‘‘आप का हुक्म सिरआंखों पर. आप जो कहेंगी, आज से दारा वही करेगा,’’ दारा ने कहा.

‘‘तो सुनो, उस कलमुंही का कुछ ऐसा इंतजाम करो कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे,’’ अनुपमा ने कहा.

दारा के सामने मालकिन का दूधिया शरीर घूम रहा था. सब से पहले उस ने रूपमती के पति अवध को खत्म करने की योजना बनाई.

– क्रमश :

राजनीति का डीएनए : भाग 1

अचानक अवध वापस आ गया. रूपमती दरवाजा बंद करना भूल गई थी. वह बिस्तर पर अपने प्रेमी के साथ थी. वह रंगे हाथों पकड़ी गई थी. पलभर के लिए तो उसे लगा कि मौत का फरिश्ता सामने खड़ा है, लेकिन वह औरत ही क्या, जो चालबाज न हो. रूपमती चीखनेचिल्लाने लगी. प्रेमी के ऊपर से हट कर वह अपने कपड़े ले कर अवध की तरफ ऐसे दौड़ी मानो अवध की गैरहाजिरी में उस की पत्नी के साथ जबरदस्ती हो रही थी.

प्रेमी जान बचाने के लिए भागा और अवध अपनी पत्नी के साथ रेप करने वाले को मारने के लिए दौड़ा. जैसा रूपमती साबित करना चाहती थी, अवध को वैसा ही लगा. जब रूपमती ने देखा कि अवध कुल्हाड़ी उठा कर प्रेमी की तरफ दौड़ने को हुआ है, तो उस के अंदर की प्रेमिका ने प्रेमी को बचाने की सोची.

रूपमती ने अवध को रोकते हुए कहा, ‘‘मत जाओ उस के पीछे. आप की जान को खतरा हो सकता है. उस के पास तमंचा है. आप को कुछ हो गया, तो मेरा क्या होगा?’’ तमंचे का नाम सुन कर अवध रुक गया. वैसे भी वह गुस्से में दौड़ा था. कदकाठी में सामने वाला उस से दोगुना ताकतवर था और उस के पास तमंचा भी था.

रूपमती ने जल्दीजल्दी कपड़े पहने. खुद को उस ने संभाला, फिर अवध से लिपट कर कहने लगी, ‘‘अच्छा हुआ कि आप आ गए. आज अगर आप न आते, तो मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहती.’’ अवध अभी भी गुस्से में था. रूपमती उस के सीने से चिपटी हुई यह जानना चाहती थी कि वह क्या सोच रहा है? कहीं उसे उस पर शक तो नहीं हुआ है?

अवध ने कहा, ‘‘लेकिन, तुम तो उस के ऊपर थीं.’’ रूपमती घबरा गई. उसे इसी बात का डर था. लेकिन औरतें तो फरिश्तों को भी बेवकूफ बना सकती हैं, फिर उसे तो एक मर्द को, वह भी अपने पति को बेवकूफ बनाना था.

सब से पहले रूपमती ने रोना शुरू किया. औरत वही जो बातबात पर आंसू बहा सके, सिसकसिसक कर रो सके. उस के रोने से जो पिघल सके, उसी को पति कहते हैं. अवध पिघला भी. उस ने कहा, ‘‘देखो, मैं ठीक समय पर आ गया और वह भाग गया. तुम्हारी इज्जत बच गई. अब रोने की क्या बात है?’’

‘‘आप मुझ पर शक तो नहीं कर रहे हैं?’’ रूपमती ने रोते हुए पूछा. ‘‘नहीं, मैं सिर्फ पूछ रहा हूं,’’ अवध ने उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा.

रूपमती समझ गई कि सिर पर हाथ फेरने का मतलब है अवध को उस पर यकीन है, लेकिन जो सीन अवध ने अपनी आंखों से देखा है, उसे झुठलाना है. पहले रूपमती ने सोचा कि कहे, ‘उस आदमी ने मुझे दबोच कर अपनी ताकत से जबरदस्ती करते हुए ऊपर किया, फिर वह मुझे नीचे करने वाला ही था कि आप आ गए.’

लेकिन जल्दी ही रूपमती ने सोचा कि अगर अवध ने ज्यादा पूछताछ की, तो वह कब तक अपने झूठ में पैबंद लगाती रहेगी. कब तक झूठ को झूठ से सिलती रहेगी. लिहाजा, उस ने रोतेसिसकते एक लंबी कहानी सुनानी शुरू की, ‘‘आज से 6 महीने पहले जब आप शहर में फसल बेचने गए थे, तब मैं कुएं से पानी लेने गई थी. दिन ढल चुका था. ‘‘मैं ने सोचा कि अंधेरे में अकेले जाना ठीक नहीं होगा, लेकिन तभी दरवाजा खुला होने से न जाने कैसे एक सूअर अंदर आ गया. मैं ने उसे भगाया और घर साफ करने के लिए घड़े का पानी डाल दिया. अब घर में एक बूंद पानी नहीं था.

‘‘मैं ने सोचा कि रात में पीने के लिए पानी की जरूरत पड़ सकती है. क्यों न एक घड़ा पानी ले आऊं. ‘‘मैं पानी लेने पनघट पहुंची. वहां पर उस समय कोई नहीं था. तभी वह

आ धमका. उस ने बताया कि मेरा नाम ठाकुर सूरजभान है और मैं गांव

के सरपंच का बेटा हूं. ‘‘वह मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. उस ने मेरी इच्छा के खिलाफ मेरे कपड़े उतार डाले. मैं दौड़ते हुए कुएं के पास पहुंच गई.

‘‘मैं ने रो कर कहा कि अगर मेरे साथ जबरदस्ती की, तो मैं कुएं में कूद कर अपनी जान दे दूंगी. उस ने डर कर कहा कि अरे, तुम तो पतिव्रता औरत हो. आज के जमाने में तुम जैसी सती औरतें भी हैं, यह तो मैं ने सोचा ही नहीं था. ‘‘लेकिन तभी उस ने कैमरा निकाल कर मेरे फोटो खींच लिए और माफी मांग कर चला गया.

‘‘मैं डरी हुई थी. जान और इज्जत तो बच गई, पर फोटो के बारे में याद ही नहीं रहा. ‘‘दूसरे दिन मैं हिम्मत कर के उस के घर पहुंची और कहा कि तुम ने मेरे जो फोटो खींचे हैं, वे वापस कर दो, नहीं तो मैं बड़े ठाकुर और गांव वालों को बता दूंगी. थाने में रिपोर्ट लिखाऊंगी.

‘‘उस ने डरते हुए कहा कि मैं फोटो तुम्हें दे दूंगा, पर अभी तुम जाओ. वैसे भी चीखनेचिल्लाने से तुम्हारी ही बदनामी होगी और सब बिना कपड़ों की तुम्हारे फोटो देखेंगे, तो अच्छा नहीं लगेगा. मैं तुम्हारे पति की गैरहाजिरी में तुम्हें फोटो दे जाऊंगा. ‘‘आप 2 दिन की कह कर गए थे. मैं ने ही उसे खबर पहुंचाई कि मेरे पति घर पर नहीं हैं. फोटो ला कर दो.

‘‘सूरजभान फोटो ले कर आया, लेकिन मुझे अकेला देख उस के अंदर का शैतान जाग उठा. उस ने फिर मेरे कपड़े उतारने की कोशिश की और मुझे नीचे पटका. ‘‘मैं ने पूरी ताकत लगाई. खुद को छुड़ाने के चक्कर में मैं ने उसे धक्का दिया. वह नीचे हुआ और मैं उस के ऊपर आ गई. अभी मैं उठ कर भागने ही वाली थी कि आप आ गए…’’

रूपमती ने अवध की तरफ रोते हुए देखा. उसे लगा कि उस के ऊपर उठने वाले सवाल का जवाब अवध को मिल गया था और उस का निशाना बिलकुल सही था, क्योंकि अवध उस के सिर पर प्यार से दिलासा भरा हाथ फिरा रहा था. अवध ने कहा, ‘‘मुझे इस बात की खुशी है कि तुम ने पनघट पर अकेले बिना कपड़ों के हो कर भी जान पर खेल कर अपनी इज्जत बचाई और आज मैं आ गया. तुम्हारा दामन दागदार नहीं हुआ.’’

रूपमती ने बनावटी गुस्से से कहा, ‘‘आप क्या सोचते हैं कि मैं उसे कामयाब होने देती? मैं ने नीचे तो गिरा ही दिया था बदमाश को. उस के बाद उठ कर कुल्हाड़ी से उस की गरदन काट देती. और अगर कहीं वह कामयाब हो जाता, तो तुम्हारी रूपमती खुदकुशी कर लेती.’’

‘‘तुम ने मुझे बताया नहीं. अकेले इतना सबकुछ सहती रही…’’ अवध ने रूपमती के माथे को चूमते हुए कहा, ‘‘मैं बड़े ठाकुर, गांव वालों और पुलिस से बात करूंगा. तुम्हें डरने की जरा भी जरूरत नहीं है. जब तुम इतना सब कर सकती हो, तो मैं भी पति होने के नाते सूरजभान को सजा दिला सकता हूं. वे फोटो लाना मेरा काम है,’’ अवध ने कहा. ‘‘नहीं, ऐसा मत करना. मेरी बदनामी होगी. मैं जी नहीं पाऊंगी. आप के कुछ करने से पहले वह मेरे फोटो गांव वालों को दिखा कर मुझे बदनाम कर देगा.

‘‘पुलिस के पास जाने से क्या होगा? वह लेदे कर छूट जाएगा. इस से अच्छा तो यह है कि आप मुझे जहर ला कर दे दें. मैं मर जाऊं, फिर आप जो चाहे करें,’’ रूपमती रोतेरोते अवध के पैरों पर गिर पड़ी. ‘‘तो क्या मैं हाथ पर हाथ धरे बैठा रहूं? कुछ न करूं?’’ अवध ने कहा, ‘‘तुम्हारी इज्जत, तुम्हारे फोटो लेने वाले को मैं यों ही छोड़ दूं?’’

‘‘मैं ने ऐसा कब कहा? लेकिन हमें चालाकी से काम लेना होगा. गुस्से में बात बिगड़ सकती है,’’ रूपमती ने अवध की आंखों में झांक कर कहा. ‘‘तो तुम्हीं कहो कि क्या किया जाए?’’ अवध ने हथियार डालने वाले अंदाज में पूछा.

‘‘आप सिर्फ अपनी रूपमती पर भरोसा बनाए रखिए. मुझ से उतना ही प्यार कीजिए, जितना करते आए हैं,’’ कह कर रूपमती अवध से लिपट गई. अवध ने भी उसे अपने सीने से लगा लिया. अगले दिन गांव के बाहर सुनसान हरेभरे खेत में सूरजभान और रूपमती एकदूसरे से लिपटे हुए थे.

सूरजभान ने कहा ‘‘तुम तो पूरी गिरगिट निकलीं.’’ ‘‘ऐसी हालत में और क्या करती? वह 2 दिन की कह कर गया था. मुझे क्या पता था कि वह अचानक आ जाएगा. तुम ने अंदर से कुंडी बंद करने का मौका भी नहीं दिया था…’’ रूपमती ने सूरजभान के बालों को सहलाते हुए कहा, ‘‘मुझे कहानी बनानी पड़ी. तुम भागते हुए मेरे कुछ फोटो खींचो. कहानी के हिसाब से मुझे तुम से अपने वे फोटो हासिल करने हैं. तुम से फोटो ले कर मैं उसे दिखा कर फोटो फाड़ दूंगी, तभी मेरी कहानी पूरी होगी.’’

सूरजभान ने कैमरे से उस के कुछ फोटो लेते हुए कहा, ‘‘लेकिन आज नहीं मिल पाएंगे. 1-2 दिन लगेंगे.’’ ‘‘ठीक है, लेकिन सावधान रहना. फोटो मिलने के बाद वह मेरी इज्जत लूटने वाले के खिलाफ कुछ भी कर सकता है,’’ रूपमती ने हिदायत दी.

‘‘तुम चिंता मत करो. मैं निबट लूंगा,’’ सूरजभान ने कहा. रूपमती ने वापस जाते समय मन ही मन कहा, ‘मैं क्यों चिंता करूं. तुम मरो या वह मरे, मुझे क्या?

‘लेकिन हां, अवध को अचानक नहीं आना चाहिए था. उस के आने से मेरी मुश्किलें बढ़ गईं. सबकुछ ठीकठाक चल रहा था. सूरजभान को भी ध्यान रखना चाहिए था. इतनी जल्दबाजी ठीक नही. अब भुगतें दोनों. ‘मुझे तो दोनों चाहिए थे. मिल भी रहे थे, पर अब दोनों का आमनासामना हो गया है, तो कितना भी समझाओ, मानेंगे थोड़े ही.’

घर आने पर रूपमती ने अवध से कहा, ‘‘सूरजभान का कहना है कि मैं फोटो तुम्हारे पति को माफी मांग कर दूंगा. शराब के नशे में मुझ से गलती हो गई. इज्जत लूटने की कोशिश में कामयाब तो हुआ नहीं, सो चाहे वे जीजा बन कर माफ कर दें. मैं राखी बंधवाने को तैयार हूं. चाहे अपना छोटा भाई समझ कर भाई की पहली गलती को यह सोच कर माफ कर दें कि देवरभाभी के बीच मजाक चल रहा था.’’

किडनैपिंग के 15 दिन : भाग 1

फिरोजाबाद जिले के थाना दक्षिण के अंतर्गत एक मोहल्ला है राजपूताना. यहीं के निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद अकरम अंसारी पेशे से वकील हैं. वह 3 फरवरी, 2020 को आगरा के बोदला निवासी अपने रिश्तेदार की बीमार बेटी को देखने के लिए आगरा के श्रीराम अस्पताल गए थे.

बीमार बेटी को देखने के बाद वकील अकरम अंसारी घर जाने के लिए शाम के समय अस्पताल से निकले. चूंकि उन्हें बस अड्डे से बस पकड़नी थी, इसलिए बस अड्डा तक जाने के लिए उन के साढ़ू फैज अंसारी ने उन्हें कारगिल चौराहे से एक आटो में बैठा दिया था, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे.

परिजन सारी रात बेचैनी से अकरम अंसारी का इंतजार करते रहे. बारबार वह अकरम को फोन मिला रहे थे, लेकिन उन का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. इस से घरवालों की चिंता बढ़ रही थी. अगली सुबह अकरम के भाई असलम उन्हें तलाशने के लिए आगरा पहुंचे.

वहां पता चला कि साढ़ू फैज अंसारी ने उन्हें बस अड्डा जाने वाले एक आटो में बैठा दिया था. वहां से वह कहां गए, किसी को पता नहीं. इस के बाद असलम ने भाई को रिश्तेदारी व अन्य परिचितों के यहां तलाशा. लेकिन अकरम कहीं नहीं मिले. तब असलम ने आगरा के थाना सिकंदरा में भाई की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

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दूसरे दिन बुधवार को दोपहर डेढ़ बजे वकील अकरम के छोटे भाई असलम के पास एक फोन आया. फोन करने वाले ने कहा, ‘‘अकरम हमारे कब्जे में है. अगर उस की सलामती चाहते हो तो 50 लाख रुपए का इंतजाम कर लो. फिरौती की रकम कहां पहुंचानी है, इस बारे में फिर से फोन कर के बताएंगे और अगर, पुलिस को बताया तो ठीक नहीं होगा.’’

इस पर असलम ने कहा, ‘‘इतनी बड़ी रकम उन के पास नहीं है.’’

इस पर अपहर्त्ताओं ने कहा, ‘‘हमें पता है कि तुम्हारे 4 मकान हैं. इसलिए रुपयों का इंतजाम कर लो.’’ इस के बाद फोन कट गया.

फिरौती मांगने से असलम का परिवार दहशत में आ गया. असलम ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी. इस पर सिकंदरा के थानाप्रभारी ने तुरंत अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के बाद उन्होंने एक पुलिस टीम को अकरम की बरामदगी के लिए लगा दिया.

वकील अकरम अंसारी का फिरौती के लिए आगरा से अपहरण करने का समाचार जब समाचारपत्रों के अलावा न्यूज चैनलों पर आया तो अधिवक्ताओं ने उन की बरामदगी के लिए पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया.

मामला एक वकील का था, इसलिए पुलिस की 10 टीमें जांच में जुट गईं. इन टीमों का निर्देशन एसएसपी बबलू कुमार स्वयं कर रहे थे. जिस मोबाइल नंबर से असलम के पास फोन आया था सर्विलांस टीम उस की भी जांच में जुट गई.

कई दिन बाद भी जब पुलिस एडवोकेट अकरम के बारे में कोई सुराग नहीं लगा पाई तो 7 फरवरी को फिरोजाबाद सदर तहसील के अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए वकील अकरम अंसारी की शीघ्र बरामदगी की मांग की. धीरेधीरे यह आग जनपद की तहसील शिकोहाबाद, जसराना, सिरसागंज के साथ ही आगरा के अधिवक्ताओं में भी फैल गई.

अकरम की बरामदगी न होने से परिजनों में दिनप्रतिदिन बेचैनी बढ़ रही थी. पिता आरिफ अंसारी और मां सरकरा बेगम सीने पर पत्थर रख कर बच्चों को तसल्ली दे रहे थे. अकरम की पत्नी रूबी उर्फ रुकैया अपने दोनों बच्चों के पूछने पर कहती कि पापा दिल्ली रिश्तेदारी में गए हैं, जल्दी आ जाएंगे.

पुराने किडनैपरों की हुई तलाश

उधर पुलिस ने 100 ऐसे बदमाशों की सूची बनाई जो अपहरण के मामलों में पिछले 5 सालों में जेल जा चुके थे. यह बदमाश आगरा, धालपुर, भरतपुर, फिरोजाबाद और इटावा के थे. इन पर काम करने के बाद 10 गिरोह चुने गए. इन के मोबाइल नंबर हासिल किए गए. 3 गिरोह पर पुलिस का शक था लेकिन तीनों ही उस समय मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं कर रहे थे.

इस पर पुलिस पूरी तरह अपने मुखबिरों पर आश्रित हो गई. एसएसपी बबलू कुमार और एसपी (सिटी) बोत्रे रोहन प्रमोद लगातार पुलिस टीमों से संपर्क बनाए हुए थे.

शासन से भी इस मामले में पुलिस से लगातार अपडेट लिया जा रहा था. पुलिस के आला अधिकारी भी पत्रकारों को कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं थे. सिर्फ यही जवाब दिया जा रहा था कि जल्द ही कोई न कोई ठोस सुराग मिलने की उम्मीद है.

अपहृत वकील अकरम के छोटे भाई असलम और मुकर्रम घटना के बाद से ही आगरा में डेरा डाले थे. जैसेजैसे एकएक कर दिन बीत रहे थे परिवार की दहशत बढ़ती जा रही थी.

उग्र हो गया आंदोलन

उधर, अधिवक्ताओं का आंदोलन जोर पकड़ रहा था. आगरा व फिरोजाबाद जनपद के अधिवक्ताओं में अपहृत वकील के 12वें दिन भी बरामद न होने से आक्रोश बढ़ गया था. उन्होंने विरोध में हड़ताल शुरू कर दी थी.

पुलिस दिनरात अपहृत वकील की तलाश में जुटी थी. आगरा में 24 फरवरी, 2020 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताजमहल देखने आने वाले थे. उन के आगमन से पूर्व तैयारियों का जायजा लेने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा के दौरे पर आ रहे थे. पुलिस जानती थी कि अधिवक्ता मुख्यमंत्री से मिल कर इस मामले को जरूर उठाएंगे. इसलिए पुलिस के हाथपैर फूल रहे थे. इस बीच पुलिस टीमों ने बाह और धौलपुर के बीहड़ों में डेरा डाल रखा था.

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उधर अपहृत वकील के भाई असलम के मोबाइल पर अपहर्त्ताओं ने अलगअलग नंबरों व स्थानों से 4 बार फिरौती की काल कर के संपर्क किया. इस दौरान परिजन पुलिस के संपर्क में रहे. काल आने से पुलिस को बदमाशों की पहचान सुनिश्चित हो गई. लेकिन अपहृत की सकुशल बरामदगी को ले कर पुलिस फूंकफूंक कर कदम रख रही थी. बदमाशों ने जो 50 लाख फिरौती मांगी, उसे कम कर के वह 15 लाख पर आ गए. उन्होंने परिजनों से कह दिया कि इतनी भी रकम नहीं मिली तो वह अकरम को मार देंगे.

अपहृत अकरम को सकुशल छुड़वाने के लिए पुलिस ने परिजनों के साथ मजबूत योजना बनाई. 16 फरवरी को अपहर्त्ताओं का फोन आने के बाद अकरम के परिजन बदमाशों के बताए गए स्थान आगरा में सिकंदरा स्थित गुरुद्वारे के पास पैसे ले कर पहुंच गए. बदमाशों ने उन से पहचान के लिए अपनी गाड़ी पर झंडा लगाने को कहा था.

भाई असलम अपने दोस्त के साथ किराए की गाड़ी पर झंडा लगा कर पहुंचा. तभी बदमाशों ने कहा कि बाड़ी कस्बा आ जाओ. वहां पहुंचे तो बदमाश लगातार काल कर के अलगअलग जगह बुलाते गए. करौली मार्ग पर आने के बाद उन्होंने कहा कि सिगरेट के 2 पैकेट ले कर आना.

इस के बाद उन्होंने भरतपुर जनपद के गढ़ी भासला क्षेत्र के जंगल में स्थित भैरों बाबा के मंदिर पर रुपयों का बैग रखने को कहा. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरा सी भी चालाकी की या पुलिस को बताया तो अपने भाई को जिंदा नहीं देख सकोगे. वह लोग शाम 6 बजे बताए गए स्थान पर रुपयों से भरा बैग रख कर वापस आ गए. इस बीच पुलिस योजनाबद्ध तरीके से वहां मौजूद रही. बदमाशों ने परिजनों से सोमवार, 17 फरवरी को अधिवक्ता अकरम को गुरुद्वारा पर छोड़ने का वादा किया.

जंजीरों से बांध रखा था अकरम को

फिरौती देने के बाद पुलिस टीम सक्रिय हो गई. पुलिस बैग उठाने वाले के पीछे लग गई. इतना ही नहीं, पुलिस ने कस्बा बाड़ी स्थित वह मकान भी पहचान लिया, जिस में अपहर्त्ता नोटों से भरा बैग ले कर गया था. मकान चिह्नित करने के बाद पुलिस ने रात लगभग 8 बजे उस मकान पर दबिश दे कर अपहृत अधिवक्ता अकरम को सकुशल बरामद कर लिया. अपहर्त्ताओं ने उन्हें जंजीरों से बांध कर रखा था.

पुलिस ने मकान से 3 अपहर्त्ताओं 56 वर्षीय गैंग लीडर उग्रसैन निवासी कस्बा बाड़ी, धौलपुर, लाखन गुर्जर निवासी सूखे का पुरा, थाना कंचनपुरा, धौलपुर के अलावा सुरेंद्र गुर्जर निवासी कुआंखेड़ा, बिहारी का पुरा, थाना सदर, धौलपुर शामिल को हिरासत में ले लिया. उन की निशानदेही पर पुलिस ने राकेश व उस के भाई मुकेश निवासी जमूहरा, थाना बाड़ी, धौलपुर के साथ उग्रसैन की पत्नी उर्मिला को भी गिरफ्तार कर लिया.

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राकेश व मुकेश दोनों उग्रसैन के साले हैं. फिरौती के लिए फोन लाखन करता था. लाखन पर 7-8 मुकदमे चल रहे हैं. उग्रसेन व सुरेंद्र गुर्जर पर भी कई मुकदमे हैं. इन में अपहरण व जानलेवा हमले शामिल हैं.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

किडनैपिंग के 15 दिन : भाग 2

सुरेंद्र गुर्जर पूर्व में राजस्थान के केशव और हनुमंत गिरोह में काम कर चुका है. उस के साथ उग्रसैन और लाखन भी थे. यह मध्य प्रदेश और आगरा में अपहरण कर फिरौती वसूल चुके हैं. गिरोह ने पहले आगरा के सदर क्षेत्र में दंत चिकित्सक का अपहरण कर मोटी फिरौती वसूली थी.

अधिवक्ता अकरम अंसारी की सकुशल बरामदगी की जानकारी जैसे ही उन के परिजनों को मिली तो पूरे परिवार की आंखें खुशी से छलछला उठीं. उन के आवास पर लोगों ने खुशी में आतिशबाजी की. पुलिस अधिकारी पूरे दिन अकरम से पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेते रहे. 25 फरवरी को अकरम के घर आते ही मां ने उन्हें गले से लगा लिया. बच्चे भी उन से लिपट गए. अकरम ने बताया कि वह मौत के मुंह से निकल कर आए हैं.

26 फरवरी, 2020 को पुलिस लाइन में एडीजी अजय आनंद ने प्रैसवार्ता आयोजित कर इस सनसनीखेज अपहरण कांड का परदाफाश किया. उन्होंने बताया कि एसएसपी बबलू कुमार के निर्देशन में फूलप्रूफ औपरेशन चला कर पुलिसकर्मियों की 10 टीमें बनाई गई थीं. जिस में सीओ (कोतवाली) चमन सिंह चावड़ा, सर्विलांस टीम प्रभारी नरेंद्र कुमार, इंसपेक्टर कमलेश सिंह, अरविंद कुमार, अनुज कुमार, अजय कौश्ड्डाल, राजकमल, बैजनाथ सिंह, उमेश त्रिपाठी, एसआई राजकुमार गिरि, कुलदीप दीक्षित अरुण कुमार बालियान, सुशील कुमार, हैड कांस्टेबल आदेश त्रिपाठी, कांस्टेबल अजीत, प्रशांत, करन, विवेक, राजकुमार, अरुण कुमार, आशुतोष त्रिपाठी, रविंद्र, प्रमेश आदि शामिल थे.

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पुलिस ने अधिवक्ता को सकुशल बरामद करने के साथ 5 अपहर्त्ताओं व एक महिला को गिरफ्तार कर फिरौती की रकम, जो 15 लाख बता कर केवल साढ़े 12 लाख बैग में रखी थी, भी बरामद कर ली. एडीजी ने बताया कि अपहृत को 2-3 दिन पहले बरामद कर सकते थे. लेकिन उन की सकुशल बरामदगी के लिए इंतजार करना पड़ा.

अलगअलग हुलिया बनाए पुलिस ने

टीमों के साथ सीओ, एसपी, एसएसपी, तक ने बीहड़ में डेरा डाला. अपहर्त्ताओं की नजर से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ अपना हुलिया बदला, बल्कि बकरी चराने से ले कर खेतों में मजदूर बन कर काम किया. पुलिस ने फिरौती के लिए फोन करने वाले की आवाज भी रिकौर्ड की. वह आवाज मुखबिरों को सुनाई गई. इस के बाद ही पुलिस को सुराग मिला.

पुलिस ने 40 घंटे के औपरेशन के बाद अधिवक्ता अकरम अंसारी को मुक्त करा लिया. इस औपरेशन का नाम ‘अकरम मुक्ति’ रखा गया था. पुलिसकर्मी कोड वर्ड बांकेबिहारी और वंदेमातरम में एकदूसरे से बात करते थे.

बदमाशों ने फिरौती के लिए 4 बार फोन किया था. पहली काल 5 फरवरी को भरतपुर के रूपवास से की गई, इस के लिए सिम खेरागढ़ से ली गई थी. दूसरी काल 8 फरवरी को की गई, जबकि 12 व 15 फरवरी की काल कस्बा बाड़ी से की गई थीं. काल करने के लिए हर बार नया मोबाइल और नया सिम खरीदा गया था.

इस के साथ ही हर बार अपहर्त्ता लोकेशन भी बदलते रहे थे. उन्होंने कहा कि पुलिस ने न सिर्फ अधिवक्ता अकरम अंसारी को सकुशल बरामद किया बल्कि 5 अपहर्त्ताओं और एक महिला को गिरफ्तार कर उन से फिरौती की वसूली गई रकम साढ़े 12 लाख भी बरामद कर ली. पुलिस ने बैग में रखी यह रकम 15 लाख बताई थी. डीजीपी ने टीम के इस कार्य की सराहना की. इस संबंध में अपहरण की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार थी—

राजस्थान के गुर्जर गैंग ने बीच आगरा शहर से अधिवक्ता अकरम अंसारी का अपहरण किया था. दरअसल 3 फरवरी, 2020 को अकरम को उन के साढ़ू ने फिरोजाबाद जाने के लिए एक आटो में बैठा दिया था. अकरम सिकंदरा स्थित आईएसबीटी पर उतरे लेकिन वहां फिरोजाबाद जाने के लिए कोई बस नहीं मिली.

जब बस नहीं मिली तब अकरम दूसरे आटो से भगवान टाकीज पहुंच कर बस का इंतजार करने लगे. वहां पर आगरा आने व जाने वाली बसें रुकती हैं. शाम 7.20  बजे एक बोलेरो उन के पास आ कर रुकी और ड्राइवर ने पूछा, ‘‘कहां जाओगे?’’

अकरम ने फिरोजाबाद जाने की बात कही तो ड्राइवर ने कहा, ‘‘हां, फिरोजाबाद ही जा रहे हैं.’’ उस समय उस बोलेरो में चालक के अलावा 3 लोग और बैठे थे. उस गाड़ी में अकरम के बैठते ही ड्राइवर चलने लगा तो अकरम ने कहा कि और सवारियां ले लो तो चालक ने कहा कि आगे से ले लेंगे.

10-12 मिनट गाड़ी चलने के बाद अचानक बगल में यात्री के रूप में बैठे बदमाश ने अकरम को सीट के नीचे गिरा कर दबोच लिया और धमकी दी कि यदि चिल्लाया तो गोली मार देंगे. इस के साथ ही उन के ऊपर कपड़ा डाल दिया. बदमाश कह रहे थे यदि तू वीरेंद्र नहीं हुआ तो हम तुझे छोड़ देंगे. अपहर्त्ता ये बात इसलिए कह रहे थे ताकि वह शोर न मचाए. उन्होंने अकरम की आंखों पर पट्टी भी बांध दी.

गाड़ी चलती रही. रात 11 बजे अपहर्त्ता अधिवक्ता अकरम को एक सुनसान जगह पर ले गए. वहां एक घर में उन्हें रखा गया. यह घर धौलपुर के बाड़ी कस्बे में था. वहां 2-3 कमरे थे. पैरों में जंजीर बांध कर उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया. आंखों पर पट्टी बांधने के साथ ही अकरम के मुंह पर टेप भी लगा दिया. उन का मोबाइल उन लोगों ने गाड़ी में ही छीन लिया था. कमरे पर ही बदमाशों ने अकरम से उस के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद दूसरे दिन फिरौती के लिए परिजनों को फोन किया था.

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कमरे में ही चटाई पर अकरम सोते थे. रात में सोने के लिए एक हलकी रजाई दी गई थी. 24 घंटे 2 युवक पहरेदारी पर रहते थे. रात में एक बदमाश भी पास में ही दूसरी चटाई पर सोता था. कई दिन बीत गए. बदमाश बीचबीच में आ कर उन्हें धमका जाते थे. कहते कि तेरे परिवार के लोग फिरौती की रकम नहीं दे पा रहे हैं, हम तुझे मार देंगे.

हालात देख कर बचना था मुश्किल

वहां जिस तरह का माहौल चल रहा था इस से अकरम को लग रहा था कि वह अपहर्त्ताओं के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाएंगे. उन्हें डर था कि परिजन अपहर्त्ताओं की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे. उन का अब घर जाना मुश्किल होगा. बदमाश खाने के लिए कभी रोटी सब्जी तो कभी रोटी दाल देते थे. अकरम रात को ही खाना खाते थे. 15 दिन तक अकरम को नहाने नहीं दिया गया.

मकान में एक महिला और उस का पति था. मकान में आगे व पीछे दरवाजे थे. आगे के दरवाजे पर ताला लगा रहता था. अन्य लोग मकान के पीछे के दरवाजे से आतेजाते थे. अकरम ने बताया कि बदमाशों ने उन के साथ मारपीट नहीं की.

अकरम हर दिन यही दुआ करते थे कि पुलिस उन्हें कब छुड़ाएगी? दहशत की वजह से नींद भी नहीं आती थी. जैसेजैसे दिन निकलते जा रहे थे, उम्मीद भी कम होती जा रही थी. मगर, रविवार 23 फरवरी की रात को पुलिस आई और अकरम को मुक्त करा लिया. अपनी दास्ता बयां करतेकरते अकरम की आंखें भर आई थीं.

पुलिस लाइन में अकरम के भाई मोउज्जम, असलम, मोहम्मद सोहेल, मुकर्रम और पिता आरिफ अंसारी आए थे. भाइयों ने अकरम को गले लगा लिया. परिवार से मिल कर अकरम की खुशी का ठिकाना नहीं था. पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता के दौरान अकरम ने पुलिस अधिकारियों को मिठाई खिलाई और उन को धन्यवाद दिया.

पुलिस ने बताया कि धौलपुर के बीहड़ में अपहर्त्ताओं के 25 गैंग सक्रिय हैं. यह गैंग शिकार को बीहड़ में पकड़ कर ले जाने के बाद फिरौती वसूलते हैं. पुलिस ने सौ से ज्यादा गैंग के बारे में पड़ताल की.

इन में 25 गैंग के सक्रिय होने के बारे में पता चला. इन में गब्बर, केशव, रामविलास, भरत, धर्मेंद्र, लुक्का, मुकेश ठाकुर गैंग विशेष रूप से सक्रिय हैं.

यह गैंग अलगअलग तरीके से फिरौती के लिए अपहरण की वारदात को अंजाम देते हैं. इन के खिलाफ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अनेक मुकदमे दर्ज हैं.

अपहृत वकील को अपहर्त्ताओं के चंगुल से मुक्त कराने वाली पुलिस टीम को एडीजी अजय आनंद ने पुरस्कृत कर सम्मानित किया. पुलिस ने सारी काररवाई पूरी कर गिरफ्तार अपहर्त्ताओं को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है

Bhojpuri एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का हॉट साड़ी लुक हुआ वायरल, नए गाने की भी कर रही हैं तैयारी

भोजपुरी इंडस्ट्री की मशहूर अदाकार अक्षरा सिंह (Akshara Singh) का जलवा पर्दे से लेकर सोशल मीडिया पर छाया रहता है. उनका यह जलवा लॉकडाउन के बीच भी खूब देखने को मिल रहा है. तभी तो जब अक्षरा ने साड़ी वाली एक तस्वीर सोशल मीडिया में शेयर की, उनके फैंस की निगाहें थम गई. अक्षरा ने साड़ी वाले लुक की कई तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें वह बेहद हसीन दिखाई दे रही हैं.

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इतना ही नही जब पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में हैं और भारत में लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है. सिनेमा इंडस्ट्री भी थम सी गई है. ऐसे हालात में अक्षरा सिंह ने हाथ पर हाथ धर का बैठे रहना स्वीकार नही किया, बल्कि वह लगातार एक के बाद एक काम करती जा रही हैं. इसी के साथ वह लॉकडाउन के नियमों का पालन भी कर रही हैं

लाॅक डाउन शुरू होने के बाद अक्षरा सिंह ने कुछ संगीत एलबम निकालने शुरू किए, जिन्हे काफी पसंद किया गया. अब अक्षरा सिंह नए संगीत एलबम की तैयारी में जुट गई हैं, जिसका वीडियो उन्होंने अपने सोशल मीडिया में शेयर किया है. इस वीडियो में वह अपने नए अलबम के लिए रियाज करती नजर आयीं हैं. यह वीडियो काम के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है. जब पूरा भोजपुरी जगत अपने घर में है, तब भी अक्षरा सिंह की जीवटता उन्हें अपने फैंस के बीच लगातार लाकर खड़ी कर देती है.

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अक्षरा सिंह (Akshara Singh) की सबसे बड़ी की खासियत यह है कि वह अपना काम इमानदारी के साथ बखूबी पूरा करने के साथ साथ सामाजिक कार्यों को भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पूरा कर रही हैं. कोरोना के वैश्विक संकट के दौरान वह लोगों को इससे बचने के लिए जागरूक करती नजर आ चुकी हैं. वह लोगों को हाथ धोने के सही तरीके भी बता चुकी हैं.

इतना ही नही सड़क पर पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों और जरूरत मंद लोगों को मास्क व सेनेटाइजर भी बांटती रहती है.अक्षरा सिंह की यही खूबी उन्हें दूसरे फिल्म कलाकारो से अलग पहचान दिलाती है.अपनी अदाओं की वजह से अक्षरा इंस्टाग्राम के साथ ही टिक टौक (Tik Tok) पर भी काफी फेमस हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 1.3 और टिक टौक पर भी लाखों फौलोअर्स हैं. वह टिक टौक (Tik Tok) पर खूब वीडियो बनाती है. अक्षरा सिंह भोजपुरी की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं.

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शहनाज गिल के फैंस ने लगाया माहिरा शर्मा पर ऐसा इल्जाम, उठाना चाहती हैं सख्त कदम

टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़ रिएलिटी शो बिग बौस का सीजन 13 (Bigg Boss 13) इतना सफल रहा कि उसने सभी सीजन के मुकाबले सबसे ज्यादा पौपुलैरिटी हासिल की. इस सीजन का हर कंटेस्टेंट लगातार सुर्खियों में बना रहा और तो और शो को खतम हुए काफी समय हो गया है लेकिन आज भी इस सीजन के कंटेस्टेंट किसी ना किसी वजह से चर्चाओं का कारण बन ही जाते हैं.

 

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“I collect smiles, and then I give them away.”❤️😍

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बिग बौस (Bigg Boss) सीजन 13 की एंटरटेनर और पंजाब की कैटरीना कैफ कहे जाने वाली कंटेस्टेंट शहनाज गिल (Shehnaz Gill) इस समय अपने फैंस के दिलों पर राज कर रही है. जी हां, शहनाज गिल ने अपने अनोखे अंदाज से अपनी इतनी अच्छी फैन फौलोविंग हासिल कर ली है कि अब उनके फैंस उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन पाते.

 

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❤️

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जैसा कि हमने बिग बौस सीजन 13 में देखा कि कंटेस्टेंट माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) और शहनाज गिल (Shehnaz Gill) की ज्यादा बनी नहीं तो वहीं अब असल जिंदगी में भी ये दोनो कंटेस्टेंट्स आपस में भिड़ते दिखाई दे रहे हैं. दरअसल शहनाज गिल के फैंस ने माहिरा शर्मा पर ये आरोप लगाया है कि माहिरा ने शहनाज का फैन पेज (Fan Page) खरीदने की कोशिश की है.

 

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Stay focused and extra sparkly 💫

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एक इंटरव्यू के दौरान माहिरा शर्मा (Mahira Sharma) ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि,- ‘ये सब कुछ दिनों पहले ही शुरु हुआ है और मुझे सोशल मीडिया के जरिए ही इस बात का पता चला है. कुछ छोटे यूट्यूबर्स के साथ कई लोगों ने रिपोर्ट बनाई है कि मैंने शहनाज गिल के फैन पेज को खरीदने की कोशिश की है. वो लोग मुझे ऐसी खबरों में टैग भी कर रहे हैं. शुरुआत में मैंने सोचा कि इसे नजरअंदाज करुं लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है. पहली बात तो उनके पास कोई सबूत नहीं है. भला मैं किसी के फैन पेज को क्यों खरीदूंगी? इस अफवाह के जरिए मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. वो मुझे लगातार ट्रोल कर रहे हैं और ये किसी खास वजह के चलते हो रहा है. मुझे नहीं पता है कि इन सबके पीछे कौन है?’

 

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If u want , we can watch the moon 💎

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माहिरा शर्मा का ऐसा बयान सुनने के बाद ऐसा लग रहा है कि माहिरा शहनाज के फैंस के खिलाफ सख्त कदम भी उठा सकती हैं. आपको बता दें, माहिरा ने इस बारे में आगे बात करते हुए कहा कि, ‘अगर मुझे पैसे खर्च करने होंगे तो मैं अपनी टीम पर करुंगी जो मेरा सोशल मीडिया अकाउंट संभालते हैं. मैं नैगेटिव पब्लिसिटी नहीं चाहती हूं. मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव भी नहीं रहती हूं तो किसी के फैन पेज को खरीदने का सवाल ही नहीं पैदा नहीं होता है. मैं अपने फैंस से खुश हूं और मुझे उन पर गर्व है, वो ना तो किसी को गाली देते हैं और ना ही किसी को ट्रोल करते हैं.’

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Bhojpuri एक्ट्रेस काजल राघवानी की ये Photos देख उड़ जाएंगे आपके होश

भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेसेस में से एक काजल राघवानी (Kajal Raghwani) अपने फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. काजन राघवानी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और इसी के साथ ही वे अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं. काजन अब तक कई भोजपुरी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं और ना सिर्फ भोजपुरी फिल्में बल्कि काजल राघवानी (Kajal Raghwani) के म्यूजिक वीडियोज भी काफी वायरल होते रहते हैं.

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काजन राघवानी ना सिर्फ अपनी एक्टिंग के लिए फेमस है बल्कि वे अपने फैंशन और अपने बोल्ड लुक्स की वजह से भी काफी पौपुलर हैं. काजल के फैंस उनके हर लुक को काफी प्यार देते हैं और साथ ही उनकी तारीफ करते नहीं थकते. आज हम आपको दिखाएंगे काजल राघवानी (Kajal Raghwani) के कुछ ऐसे साड़ी लुक्स जिन्हें देख आप भी काजल को पसंद करने लगेंगे.

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काजल राघवानी को साड़ी पहनने का काफी शौंक है और इस बात का अंदाजा उनकी फोटोज देख कर ही लगाया जा सकता है. अब इसी फोटो की बात करें तो काजल ने इस फोटो में पिंक कलर की साड़ी पहन रखी है और साथ ही अपने फेस पर सन शेड्स लगा रखे हैं. पिंक कलर की साड़ी और सन शेड्स में काजल काफी खूबसूरत लग रही हैं.

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शूटिंग के दौरान भी काजल अपनी फोटोज क्लिक करना बिल्कुल नहीं भूलती. इस फोटो में उन्होनें ब्लैक रेड कलर की साड़ी और तो और मांग में सिंदूर भी लगाया हुआ है जिससे की साफ पता चल रहा है कि ये फोटो किसी शूटिंग की ही है.

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आपको बता दें, कि काजल राघवानी ने अब तक 30 से भी ज्यादा भोजपुरी फिल्मों में काम किया है और इस दौरान उन्होनें भोजपुरी के सुपस्टार खेसारी लाल यादव (Khesarilal Yadav) के साथ भी स्क्रीन शेयर की है.

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ना सिर्फ खेसारी लाल यादव बल्कि दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal Yadav) उर्फ निरहुआ (Nirhua) के साथ भी उनकी जोड़ी काफी हिट रही है. फैंस ने काजन राघवानी के हर लुक, हर किरदार को पसंद किया है और उनपर बेहद प्यार बरसाया है.

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संबंधों की टेढ़ी लकीर

उत्तर प्रदेश का शहर फिरोजाबाद चूड़ी उद्योग के रूप में पूरे विश्व में जाना जाता है. इस शहर के
लाइनपार इलाके की लेबर कालोनी में 42 वर्षीय दिलीप शर्मा अपनी पत्नी आरती और बेटी के साथ रहता था. निहायत सीधासादा और मेहनती दिलीप एक चूड़ी कारखाने में काम करता था. इस से उस के परिवार की ठीक से गुजरबसर हो जाती थी.

30 दिसंबर, 2018 को वह रोजाना की तरह खाना खाने के बाद रात करीब 10 बजे टहलने के लिए घर से निकला. पति के जाते समय आरती ने कहा कि सर्दी हो रही है जल्दी घर आ जाना. इस बीच आरती लिहाफ ओढ़ कर बिस्तर पर लेट गई. लिहाफ की गर्माहट में उसे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला.
अचानक आरती की आंखें खुलीं तो देखा पति बिस्तर पर नहीं है. दिलीप को टहलने गए हुए काफी देर हो चुकी थी. उस के घर न लौटने पर उसे चिंता हुई. उस ने फोन कर यह बात अपने जेठ अनिल शर्मा को बता दी. अनिल भाजपा का यूथ अध्यक्ष था. वह शहर की ही नई बस्ती में रहता था.

देर रात तक दिलीप के घर नहीं लौटने पर भाई व उस के परिवार के लोग चिंतित हो गए. उन्होंने मिल कर रात में ही दिलीप की तलाश शुरू कर दी. रात ढाई बजे तक वे उसे इधरउधर खोजते रहे. लेकिन उस का कोई पता नहीं चला.

अगले दिन सुबह लगभग साढे़ 7 बजे कुछ लोगों ने लेबर कालोनी के पीछे रेलवे लाइन के किनारे एक युवक की खून से सनी लाश पड़ी देखी. उन्होंने इस की सूचना जीआरपी और थाना लाइनपार को दे दी. सूचना मिलने पर फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन से जीआरपी पुलिस वहां पहुंच गई. कुछ देर बाद थाना लाइन पार के थानाप्रभारी संजय सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने रेलवे लाइनों के पास पड़ी युवक की लाश का निरीक्षण किया तो उस के शरीर पर किसी नुकीले हथियार के घाव मिले. हत्यारों ने उस के गुप्तांग के साथ हाथ की उंगली भी काट दी थी. पुलिस ने जब मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो पैंट की जेब से उस का आधार कार्ड मिला. इस से उस की पहचान दिलीप शर्मा पुत्र रामप्रकाश शर्मा, निवासी लेबर कालोनी फिरोजाबाद के रूप में हुई.

पुलिस ने यह सूचना दिलीप के घर भिजवाई तो रोतेबिलखते उस के घर वाले लाइन किनारे पहुंच गए. घर वालों ने उस की शिनाख्त दिलीप शर्मा के रूप में की. चूंकि मामला भाजपा कार्यकर्ता के भाई की हत्या का था. इसलिए स्थानीय विधायक से ले कर पार्टी के कई पदाधिकारी वहां पहुंच गए.

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सूचना मिलने पर एसपी (सिटी) राजेश कुमार सिंह, सीओ (सदर) अजय सिंह चौहान भी वहां आ गए. जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया.

पुलिस ने जब मृतक के घर वालों से बातचीत की तो भाई ललित शर्मा ने पुरानी रंजिश के चलते 5 लोगों राजू, पवन, हरिओम निवासी नई बस्ती, फिरोजाबाद, डब्बू उर्फ दीनदयाल और गोपाल निवासी बीमलपुर, जनपद इटावा पर शक जताया. पुलिस ने ललित शर्मा की तरफ से इन 5 लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 147, 148, 149, 302 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी. ललित शर्मा ने भाई की हत्या की वजह रंजिश बताई थी. जबकि लाश का मुआयना कर पुलिस को मामला अवैध संबंधों का लग रहा था. नामजद आरोपियों के बारे में कोई सूचना नहीं मिल रही थी, इसलिए पुलिस ने दूसरे एंगल से केस की जांच शुरू कर दी.

सदर विधायक मनीष असीजा ने केस का जल्द खुलासा करने के लिए एसएसपी सचिंद्र पटेल से भी मुलाकात की. दिलीप की हत्या का मामला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. एसएसपी ने केस खोलने के लिए तेजतर्रार पुलिस कर्मियों के अलावा सर्विलांस टीम को भी लगा दिया था. एसएसपी सचिंद्र पटेल खुद इस केस का सुपरविजन कर रहे थे.

पुलिस ने दिलीप की पत्नी आरती के मोबाइल को भी खंगाला. उस के फोन नंबर की काल डिटेल्स से एक नंबर शक के दायरे में आया, जिस पर सब से ज्यादा बातें होती थीं. जब पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया तो हैरानी और बढ़ गई.

जांच में वह नंबर जिला मैनपुरी के गांव रामपुरा कुर्रा निवासी गौरव का निकला. पुलिस ने गौरव की जांच की तो जानकारी मिली कि गौरव आरती की मैनपुरी में रहने वाली बुआ की ननद का बेटा है, जो रिश्ते में आरती का भाई लगता है.

पुलिस को यह भी पता चला कि गौरव का दिलीप के घर काफी आनाजाना था. लेकिन रिश्ता भाईबहन का होने के चलते पुलिस पूरी तरह संतुष्ट होना चाहती थी. इस के लिए पुलिस ने आरती की निगरानी बढ़ा दी. साथ ही वह आरती और गौरव की गहराई से जांच करने लगी. जांच में पुलिस को पता चला कि मृतक दिलीप की पत्नी आरती के गौरव से अवैध संबंध थे.

थानाप्रभारी (लाइनपार) संजय सिंह को 15 जनवरी, 2019 की सुबह मुखबिर से सूचना मिली कि आरती और उस का प्रेमी गौरव कहीं भागने की फिराक में रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं.

इस सूचना पर थानाप्रभारी संजय सिंह कांस्टेबल प्रदीप कुमार, शिवप्रकाश व महिला कांस्टेबल प्रभादेवी को ले कर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए. मुखबिर की सूचना सही निकली. आरती व गौरव रेलवे स्टेशन पर बुकिंग विंडो के पास मिल गए.

पुलिस दोनों को ले कर थाने आ गई. थानाप्रभारी ने आरती व गौरव से पूछताछ की. दोनों पुलिस को कुछ भी बताने को तैयार नहीं थे. चूंकि पुलिस के पास इन के खिलाफ ठोस सबूत थे, इसलिए उन से सख्ती से पूछताछ की. साथ ही उन्हें कालडिटेल्स भी दिखाई.

अंतत: गौरव ने स्वीकार कर लिया कि उस के आरती से अवैध संबंध हैं. दिलीप की हत्या क्यों की गई, इस बारे में दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने हत्या की जो कहानी बताई इस प्रकार निकली—

करीब 9 साल पहले दिलीप शर्मा की शादी फिरोजाबाद जनपद के कस्बा आसफावाद की रहने वाली आरती के साथ हुई थी. दिलीप और आरती की उम्र में काफी अंतर था. दूसरी ओर शादी से पहले से ही गौरव के साथ आरती के शारीरिक संबंध बन गए थे, जो शादी के बाद भी बने रहे.

आरती ने पति को बता रखा था कि गौरव उस का भाई है, इस के बावजूद दिलीप यही सोचता था कि आखिर वह उस के घर डेरा क्यों डाले रहता है. उस ने बातों ही बातों में कई बार गौरव को टोका भी था पर गौरव पर इस का कोई फर्क नहीं पड़ा था.

पति के ज्यादा टोकाटाकी करने पर आरती समझ गई कि अब दिलीप को उन पर शक हो गया है. इस बात को ले कर दिलीप ने एक दिन घर में काफी हंगामा भी किया.

तब आरती ने अपनी सफाई में कहा, ‘‘यह मेरा भाई है, कभीकभी घर आ जाता है तो इस में गलत क्या है?’’ इस पर दिलीप शांत हो गया. उस ने सोचा कि आरती जो कह रही है हो सकता है सच हो और वह जो सोच रहा है, वह गलत हो.

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अब आरती कोई ऐसा उपाय खोजने लगी कि किसी न किसी बहाने से गौरव वहां रहता रहे. लिहाजा उस ने एक दिन गौरव से कहा, ‘‘देखो गौरव तुम्हारे बिना मेरा यहां बिलकुल भी मन नहीं लगता. ऐसा करो कि तुम अपने जीजा से कह कर यहीं कोई नौकरी कर लो. इस से हमें मिलने में भी आसानी रहेगी.’’

एक दिन बातोंबातों में गौरव ने दिलीप से कह दिया, ‘‘जीजाजी, मेरे लायक कोई काम हो तो दिलवा दो.’’
दिलीप ने कहा कि वह कोशिश करेगा. दिलीप के सामने ही गौरव कई बार आरती से हंसीमजाक करता था. भाईबहन होने के नाते दिलीप ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

लेकिन एक दिन किसी काम से दिलीप अचानक घर आ गया. उस समय गौरव और आरती दुनिया से बेखबर एकदूसरे में समाए हुए थे. उन्हें आपत्तिजनक स्थिति में देख कर दिलीप सन्न रह गया.

उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भाईबहन के बीच ऐसा नाजायज रिश्ता भी होगा. उस का खून खौल उठा. वह चीखा तो दोनों के होश उड़ गए. इस बीच गौरव तेजी से वहां से भाग गया.

दिलीप ने गुस्से में पत्नी की पिटाई कर दी और हिदायत दी कि यदि उस ने गौरव को दोबारा घर में देख लिया तो परिणाम अच्छा नहीं होगा. आरती ने माफी मांग कर बात खत्म कर दी.

अब दिलीप पत्नी पर निगाह रखने लगा. वह बिना बताए कभी भी घर आ जाता था. इस से आरती परेशान हो उठी. क्योंकि अब उसे गौरव से मिलने का मौका नहीं मिल पा रहा था. एक दिन पति के शहर से बाहर जाने पर आरती ने गौरव को फोन कर बुला लिया.

आरती ने गौरव को बताया, ‘‘गौरव, अब दिलीप हम लोगों को कभी मिलने नहीं देगा. लेकिन मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. वह जबतब मेरी पिटाई कर देता है. अब हमें कुछ करना पड़ेगा, नहीं तो यह पीटपीट कर मेरी जान ही ले लेगा.’’

गौरव कुछ सोचते हुए बोला, ‘‘बताओ, इस का उपाय क्या है?’’

‘‘करना क्या है, इसे रास्ते से हटाना पड़ेगा, नहीं तो वह हम दोनों को जुदा कर देगा.’’ आरती ने कहा.

‘‘ठीक है इस का इंतजाम कर लेंगे.’’ गौरव ने भरोसा दिया.

इस के बाद आरती और गौरव ने दिलीप को ठिकाने लगाने की योजना बना ली. योजना के अनुसार 30 दिसंबर, 2018 को आरती ने फोन पर गौरव को बुला लिया.

दिलीप खाना खाने के बाद करीब 10 बजे रोज की तरह टहलने के लिए निकला. योजना के अनुसार गौरव उसे वहीं मिल गया.

दिलीप गौरव से खुंदक खाए हुए था, लिहाजा उस ने दिलीप के पैर पकड़ कर उस से माफी मांग ली. दिलीप शांत हो गया. गौरव उसे अपनी बातों में उलझा कर लेबर कालोनी के पीछे रेलवे ट्रैक के पास ले गया. इस बीच योजना के अनुसार दिलीप के पीछेपीछे आरती भी वहां पहुंच गई.

मौका देखते ही गौरव ने आरती के सामने ही दिलीप पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए. जान बचने के लिए दिलीप ने जब भागने की कोशिश की तो आरती ने उस के बाल पकड़ कर गिरा दिया. ट्रेनों की आवाजाही में दिलीप की चीख गुम हो गई.

हत्या के बाद घटना को दूसरा रूप देने के लिए गौरव ने उस का लिंग और हाथ की अंगुली भी काट ली. उस की लाश वहीं रेलवे लाइन के पास डालने के बाद गौरव मैनपुरी भाग गया जबकि आरती अपने घर चली गई.

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आरती और गौरव से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल छुरी और हत्या के वक्त पहने हुए दस्ताने बरामद कर लिए.उन से पूछताछ के बाद पुलिस जब उन्हें जेल ले कर जा रही थी तो आरती रोने लगी. वह बोली, ‘‘हम दोनों को जेल में साथसाथ ही रखना. हम अलग नहीं रह पाएंगे.’’
आरती ने जिस के साथ सात फेरे लिए साजिश के तहत उसे ही अपने प्रेमी के साथ मिल कर मौत की नींद सुला दिया. एक सीधासादा पति अपनी पत्नी के अवैध संबंधों की भेंट चढ़ गया. आरती और गौरव ने भाईबहन के रिश्ते को कलंकित कर दिया.

साथ ही अपना बसाबसाया घर भी उजाड़ लिया. आरती के इस कृत्य से उस की बेटी को मांबाप का प्यार नहीं मिल सकेगा. फिलहाल ननिहाल वाले उसे अपने साथ ले गए.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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