लेखक- रघुनाथ सिंह

दक्षिण नागपुर के हुड़केश्वर रोड इलाके में साधारण आमदनी वाले परिवार रहते हैं. इसी इलाके के सन्मार्ग नगर बांते लेआउट शिव गौरी कौंवैस्ट के पास विजय गोविंदराव पिल्लेवार परिवार समेत रहते थे.

55 साला विजय पिल्लेवार प्रोपर्टी डीलिंग का काम करते थे. कुछ साल पहले तक तो हालात ठीक थे, लेकिन समय का पहिया कुछ ऐसा घूमा कि विजय गोविंदराव पिल्लेवार की माली मामले में हिम्मत हारने लगी. विजय पिल्लेवार इस मामले में खुशनसीब थे कि ‘हम दो हमारे दो’ की तर्ज पर उन का छोटा परिवार था. पत्नी कांताबाई घरेलू औरत थीं. बेटा विक्रांत उर्फ रोहित 26 साल का हो चला था. बेटी अवंती 20 साल की थी.

नागपुर में प्रोपर्टी के धंधे में बरकत का यह आलम रहा कि एक समय में यहां कई लोगों की लौटरी सी लग गई. सामान्य घर वालों के बंगले बन गए. दोपहिया की जगह पर चारपहिया वाहन घर की शान बन गए.

लेकिन, साल 2016 में हवा का एक झोंका सा आया, जिस ने कइयों की खुशियों को झकझोर कर रख दिया. भारत सरकार ने नोटबंदी क्या कराई, कइयों की जिंदगी में पाबंदिया लग गईं. खर्चों के लिए खुले रहने वाले हाथ बंधने से लगे. रुपए का गणित गड़बड़ा गया. दौलत के साथ शोहरत का भी ग्राफ गिरने लगा.

विजय गोविंदराव पिल्लेवार भी उन कई लोगों की कतार में शामिल हो गए, जो मुफलिसी की आहट सुन दबेदबे से रहने लगे. उन की पत्नी कांताबाई की खुशियों पर तो मानो सांप लोट गया था. गर्दिश के दिन आने की चिंता का झटका दिमाग पर लगा, तो उन्होंने खाट पकड़ ली. वे बीमार रहने लगीं.

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