बंटी ने उस से आंखें खोलने को कहा, मगर सुखदेवी हिम्मत नहीं कर सकी. उस के दोबारा कहने पर सुखदेवी ने अपनी पलकें उठाईं और तुरंत झुका लीं. तभी बंटी ने उस की आंखों को चूम लिया. सुखदेवी घबरा गई. उस ने वहां से उठना चाहा. मगर बंटी ने उसे उठने नहीं दिया. वह शर्म के मारे कांपने लगी. उस के होंठों की कंपकंपाहट से बंटी अच्छी तरह वाकिफ था. मगर वह उसी समय अपने प्यार का इजहार कर देना चाहता था.
तभी उस ने सुखदेवी की कलाई पकड़ कर कहा, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता, मैं सचमुच तुम से बहुत प्यार करता हूं.’’
बंटी की बात सुन कर सुखदेवी आश्चर्यचकित रह गई. उस ने बंटी को समझाना चाहा, मगर बंटी अपनी जिद पर ही अड़ा रहा. सुखदेवी ने कहा, ‘‘बंटी, मैं तुम्हारी बहन हूं. हमारा प्यार कोई कैसे स्वीकार करेगा.’’
मगर बंटी ने इन सब बातों को खारिज करते हुए सुखदेवी को अपनी बांहों में समेट लिया और प्यार से उस के होंठों पर अपने प्यार की मोहर लगा दी.
सुखदेवी के लिए यह किसी पुरुष का पहला स्पर्श था, जिस ने उसे मदहोश कर दिया और वह बंटी की बांहों में कसमसाने लगी. सुखदेवी चाह कर भी अपने आप को उस से अलग नहीं कर पा रही थी. कुछ क्षणों तक चले इस प्रेमालाप से सुखदेवी मदमस्त हो गई, तभी अचानक बंटी उस से अलग हो गया. सुखदेवी तड़प उठी. बंटी के स्पर्श से छाया खुमार जल्दी ही उतरने लगा. वह बिना कुछ कहे घर के दरवाजे की तरफ बढ़ी तो पीछे से बंटी ने उसे कई आवाजें लगाईं, मगर सुखदेवी नजरें झुकाए चुपचाप बाहर चली गई.
बंटी घबरा सा गया. उस के दिल में हजारों सवाल सिर उठाने लगे. वह इस दुविधा में फंसा रहा कि सुखदेवी उस का प्यार ठुकरा न दे या फिर ताऊताई से उस की इस हरकत के बारे में न बता दे. इसी सोच में बंटी परेशान रहा, वह पूरी रात सो न सका, बस बिस्तर पर करवटें बदलता रहा.
उधर सुखदेवी का हाल भी बंटी से जुदा न था. वह भी पूरे रास्ते बंटी द्वारा कहे हर लफ्ज के बारे में सोचती रही. घर पहुंच कर वह बिना कुछ खाएपीए अपने बिस्तर पर लेट गई. मगर उस की आंखों में नींद कहां थी.
बंटी का प्यार दस्तक दे चुका था. वह बिस्तर पर पड़ीपड़ी करवटें बदल रही थी. सुखदेवी भी अपनी भावनाओं पर काबू न रख पाई और वह भी बंटी से प्यार कर बैठी. अपने इस फैसले को दिल में लिए सुखदेवी बहुत बेकरारी से सुबह का इंतजार करने में लगी रही.
पूरी रात आंखोंआंखों में कटने के बाद सुखदेवी ने सुबह जल्दीजल्दी घर का सारा काम निपटाया. फिर मां को बता कर बंटी के घर चली गई. सुखदेवी के कदम खुदबखुद आगे बढ़ते जा रहे थे. कभी वह बंटी के प्रेम के बारे में सोचती तो कभी समाज व लोकलाज के बारे में, जाते वक्त कई बार उस ने वापस लौटने की सोची, मगर हिम्मत न जुटा सकी.
वह बंटी के उस जुनून को भी नहीं भुला पा रही थी. क्योंकि कहीं न कहीं उस के दिल में भी बंटी के लिए प्रेम की भावना उछाल मार रही थी. इसी सोचविचार में वह बंटी के घर के दरवाजे पर पहुंच गई लेकिन अंदर जाने की हिम्मत न जुटा सकी. तभी बंटी की नजर उस पर पड़ गई और उसे अंदर जाना ही पड़ा.
उधर बंटी का चेहरा एकदम पीला पड़ा हुआ था. एक रात में ही ऐसा लग रहा था जैसे उस ने कई दिनों से कुछ खायापीया न हो. उस की आंखें लाल थीं, जिस से साफ पता चल रहा था कि वह न तो रात भर सोया है और न ही कुछ खायापीया है.
उस की आंखों को देख कर सुखदेवी समझ गई कि वह बहुत रोया है. सुखदेवी को आभास हो चुका था कि बंटी उस से अटूट प्रेम करता है.
उस ने आते ही बंटी से पूछा कि वह रोया क्यों था? बस फिर क्या था, इतना सुनते ही बंटी की आंखें फिर छलक आईं. उस की आंखों से छलके आसुंओं ने सुखदेवी को इस दुविधा में डाल दिया कि अब उस के मन से समाज की सोच और घर वालों का डर निकल चुका था. वह उस से लिपट गई और उस के चेहरे को चूमने लगी.
उस ने अपने हाथों से बंटी को खाना खिलाया. फिर दोनों एकांत कमरे में बैठ गए. तन्हाई के आलम में बंटी से रहा न गया और उस ने सुखदेवी को अपनी बांहों में भर लिया, सुखदेवी ने विरोध नहीं किया.
सुखदेवी को इस से पहले कभी ऐसे एहसास का अनुभव नहीं हुआ था. बंटी का हर स्पर्श उस की मादकता को और भड़का रहा था. उस दिन बंटी ने सुखदेवी को पूरी तरह पा लिया.
सुखदेवी को भी यह अनुभव आनंदमई लगा. उसे वह सुख प्राप्त हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था. उस दिन के बाद सुखदेवी के मन में भी बंटी के लिए प्यार और बढ़ गया. अब उस के लिए बंटी ही सब कुछ था.
एक बार जिस्मानी ताल्लुकात कायम हुआ तो यह सिलसिला चलता रहा. दोनों घंटोंघंटों बातें करते. दोनों के लिए एकदूसरे के बगैर रहना मुश्किल होता जा रहा था.
एक दिन उन के प्यार का भेद उन के परिजनों के सामने खुला तो कोहराम सा मच गया. दोनों को समझाया गया कि उन के बीच खून का संबंध होने के कारण उन की शादी नहीं हो सकती, लेकिन वे प्रेम दीवाने कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे.
परिजनों के विरोध से दोनों परेशान रहने लगे. इसी बीच बंटी के घर वालों ने उस की शादी बदायूं जनपद के गांव तिमरुवा निवासी एक युवती से तय कर दी. शादी की तारीख तय हुई 26 जून, 2020. इस से सुखदेवी तो परेशान हुई ही बंटी भी बेचैन हो उठा. बेचैनी में वह काफी देर तक सोचता रहा, फिर उस ने फैसला कर लिया कि वह अब अपने प्यार को ले कर कहीं और चला जाएगा, जहां प्यार के दुश्मन उन को रोक न सकें.
अपने फैसले से उस ने सुखदेवी को भी अवगत करा दिया. सुखदेवी भी उस के साथ घर छोड़ कर दूर जाने को तैयार हो गई.
शादी की तारीख से एक दिन पहले 25 जून, 2020 को बंटी सुखदेवी को घर से ले भाग गया. उन के भाग जाने की भनक दोनों के घर वालों को लग गई. उन्होंने तलाशा लेकिन कोई पता नहीं चला.
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बंटी की अजीब सी स्थिति थी. उस का दिमाग चेतनाशून्य हो चला था. मन में तूफान सा मचा हुआ था. यही तूफान सा चल रहा था. बेचैनी का आलम यह था कि कभी बैठ जाता तो कभी उठ कर चहलकदमी करने लगता. अचानक उस का चेहरा कठोर हो गया, जैसे किसीफैसले पर पहुंच गया हो, लगा जैसे उस फैसले के अलावा कुछ हो ही न सकता हो.
बंटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल जिले के थाना धनारी के गांव गढ़ा में रहता था. उस के पिता का नाम बिन्नामी और माता का नाम शीला था. बिन्नामी खेतीकिसानी का काम करते थे.
22 वर्षीय बंटी इंटर पास था. उस के बड़े भाई संदीप का विवाह हो चुका था. बंटी से छोटे 2 भाई तेजपाल और भोलेशंकर के अलावा छोटी बहनें कश्मीरा, सोमवती और राजवती थीं.
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उस के पड़ोस में उस के ताऊ तुलसीदास रहते थे. परिवार में उन की पत्नी रमा देवी और 8 बेटे थे. बेटी एक ही थी सुखदेवी, जो सब भाइयों से छोटी थी.
रिश्ते में बंटी और सुखदेवी तहेरे भाईबहन थे. बचपन से दोनों साथ खेलेघूमे थे. दोनों को एकदूसरे का साथ खूब भाता था. समय के साथ बचपन कब जवानी के प्यार की तरफ बढ़ने लगा, उन को एहसास भी नहीं हुआ.
जवान होती सुखदेवी के सौंदर्य को देखदेख कर बंटी आश्चर्यचकित था. सुखदेवी पर छाए यौवन ने उसे आकर्षक युवती बना दिया था. उस के नयननक्श में अब गजब का आकर्षण पैदा हो गया था.
उस के गालों पर उतरी लाली ने उसे इतना आकर्षक बना दिया था कि बंटी खुद पर काबू न रख सका और उसे पाने को लालायित हो उठा. उस के छरहरे बदन में यौवन की ताजगी, कसक और मादकता थी.
बंटी उस की चाहत में डूबता चला गया. वह भूल गया कि वह उस की तहेरी ही सही, लेकिन बहन है.
एक दिन बंटी जब सुखदेवी के घर गया तो उसे एकटक देखने लगा. सुखदेवी इस से बेखबर अपने काम में व्यस्त थी. जब उस की मां रमा ने उसे आवाज दी, ‘‘ऐ सुखिया, देख बंटी आया है.’’ तो उस का ध्यान बंटी की तरफ गया.
सुखदेवी को भी बंटी पसंद था, मगर उस रूप में नहीं जिस रूप में उसे बंटी देख रहा था और उसे पाने की चाह में तड़पने लगा था.
रमा देवी ने फिर आवाज लगाई. सुखदेवी ने तुरंत एक गिलास पानी और थोड़ा मीठा ला कर बंटी के सामने रख दिया. पानी का गिलास हाथ में पकड़ाते हुए वह बोली, ‘‘क्या हाल हैं जनाब के?’’
बंटी ने उस से पानी का गिलास लिया तो उस का स्पर्श पा कर वह और ज्यादा व्याकुल हो उठा. इधर सुखदेवी ने उस के गालों को खींच कर कहा, ‘‘कहां खो गए जनाब?’’
इस के बाद वह चाय बनाने चली गई. बंटी का पूरा ध्यान सुखदेवी की तरफ ही था, जो किचन में उस के लिए चाय बना रही थी.
वह इस कदर व्याकुल था कि दिल हुआ किचन में जा कर खड़ा हो जाए. जब सुखदेवी चाय ले कर आई तो बंटी की बेचैनी थोड़ी कम हुई.
सुखदेवी ने जब बंटी को चाय दी तो उस ने पुन: उसे छूना चाहा, मगर नाकाम रहा. तभी उस की ताई को कुछ काम याद आ गया और वह उठ कर बाहर चली गईं. इधर बंटी की धड़कनें रेल के इंजन की तरह दौड़ने लगीं. वह घबराने लगा. मगर एक खुशी भी थी कि उस तनहाई में वह सुखदेवी को देख सकता है.
सुखदेवी फिर अपने काम में लग गई, मगर बंटी के कहने पर वह उस के करीब ही चारपाई पर बैठ गई. बंटी का दिल चाह रहा था कि वह उसे अपनी बांहों में भर ले और प्यार करे, मगर झिझक उसे रोक रही थी. वह अपने जज्बातों को काबू कर के उस की बातें सुन रहा था. वह बारबार हंसती तो बंटी के मन में फूल खिल उठे.
थोड़ी ही देर में बंटी को न जाने क्या हुआ, वह उठा और जाने लगा. तभी सुखदेवी ने उस का हाथ पकड़ कर पूछा, ‘‘कहां जा रहे हो?’’
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मगर बंटी ने बिना कुछ कहे अपना हाथ छुड़ाया और वहां से चला गया. सुखदेवी उस से बारबार पूछती रही.
मगर वह रुका नहीं और बिना पीछे देखे चला गया.
उस दिन के बाद बंटी को कुछ अच्छा नहीं लगता था, वह बस सुखदेवी के खयालों में ही खोया रहता था, मगर चाह कर भी वह उस से मन की बात नहीं बता पाता था. उस के मन में पैदा हुई दुविधा ने उसे उलझा रखा था. तहेरी बहन से प्रेम की इच्छा ने उस के दिलोदिमाग को हिला रखा था. मगर सुखदेवी के यौवन का रंग बंटी पर चढ़ चुका था.
एक दिन बंटी घर पर अकेला था और सुखदेवी के खयालों में खोया हुआ था. वह चारपाई पर लेटा ही था, तभी सुखदेवी उस के घर पहुंची और बिना कुछ कहे सीधे अंदर चली गई. बंटी उसे देख कर आश्चर्यचकित रह गया. कुछ देर तक वह उसे देखता रहा. तभी सुखदेवी ने सन्नाटा भंग करते हुए कहा, ‘‘क्या हाल है? क्या मुझे बैठने तक को नहीं कहोगे?’’
‘‘कैसी बात कर रही हो, आओ तुम्हारा ही घर है.’’ बंटी ने कहा तो सुखदेवी वहीं पड़ी चारपाई पर बैठ गई.
सुखदेवी बैठते ही बंटी की ओर देख कर कहने लगी, ‘‘क्या बात है आजकल तुम घर नहीं आते? मुझ से कोई गलती हो गई है कि उस दिन तुम बिना कुछ कहे घर से चले आए.’’
बंटी मूक बैठा बस सुखदेवी को निहारे जा रहा था. सुखदेवी ने जब उसे चुप देखा तो उस के करीब बैठ गई और उस के हाथों को अपने हाथों में ले कर बोली, ‘‘बोलो न क्या हुआ? तुम इतने चुपचुप क्यों हो, क्या कोई बात है जो तुम्हें बुरी लग गई है. मुझे बताओ न, तुम तो हमेशा हंसते थे, मुझ से ढेर सारी बातें करते थे. मगर अब क्या हुआ तुम्हें, इतने खामोश क्यों हो?’’
मगर बंटी एक अलग ही दुविधा में फंसा हुआ था. सुखदेवी की बातें सुन कर वह अचानक उस की ओर घूमा और उसे बड़े गौर से देखने लगा. तभी सुखदेवी ने उस से पूछा कि वह क्या देख रहा है, मगर बंटी जड़वत बना उसे घूरता जा रहा था. सुखदेवी भी उस की निगाहों के एहसास को महसूस कर रही थी, शायद इसलिए वह नजरें झुकाए खामोश बैठी रही.
बंटी उस से प्रेम का इजहार करना चाहता था, मगर इस दुविधा में था कि वह तहेरी बहन है. मगर अंत में प्रेम की जीत हुई. उस ने सुखदेवी के चेहरे को अपने हाथों में ले लिया. बंटी के इस व्यवहार से सुखदेवी थोड़ा घबरा गई. मगर अपनी धड़कनों पर काबू पा कर उस ने अपनी दोनों मुट्ठियों को बहुत जोर से भींचा और आंखें बंद कर लीं.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में बड़े चेहरों में शुमार भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा (Monalisa) जितना फिल्मों में अपने एक्टिंग के लिए पंसद की जाती हैं उससे कहीं ज्यादा वह सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं. यही वजह है की सोशल मीडिया पर उनके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं. अगर उनके इन्स्टाग्राम अकाउंट की बात करें तो इंस्टाग्राम पर उनके 36 लाख से भी ज्यादा फौलोवर्स हैं.
आए दिन भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा (Bhojpuri Actress Monalisa) अपनी हॉट और सेक्सी फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर करती रहती हैं जो उनके फैंस काफी पसंद करते हैं. मोनालिसा (Monalisa) के फैंस उन्हें इतना पसंद करते हैं कि उनकी कोई भी फोटो या वीडियो आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं. हाल ही में मोनालिसा ने अपनी कुछ डांस वीडियो शेयर की है जो की काफी तेजी से वायरल हो रही हैं.
इस वीडियो में मोनालिसा (Monalisa) ‘पहला नशा… पहला खुमार’ (Pehla Nasha… Pehla Khumaar) गाने पर अपनी अदाओं के जलवे बिखेर रही हैं. मोनालिसा की इन अदाओं को देख फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. इस वीडियो में मोनालिसा (Monalisa) ने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी हुई है जिसमें वे बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही हैं. इस वीडियो को देख फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे लगातार अपना प्यार उनकी इस वीडियो पर बरसा रहे हैं.
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Mere Nakhre Ufff…. Tareefan 🤷♀️🤷♀️🤷♀️… #feelkaroreelkaro #dance #song #tareefan #lovedit
इससे पहले भी मोनालिसा (Monalisa) का एक और डांस वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होनें ब्लैक कलर का टॉप और ट्राउसर पहना हुआ है. इस वीडिया में मोनालिसा पंजाबी गाने ‘तारीफां’ (Tareefan) पर डांस कर रही हैं.
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It’s Monday… Don’t Forget To Be Awesome 🤷♀️💓❤️🥰… #monday #blue #pool #side
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बौलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी में मिथिला पेंटिंग के कलाकारों द्वारा तैयार किए गए मास्क के मुरीद हो गए हैं, मगर आश्चर्य की बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री को मधुबनी पेंटिंग्स की तब याद आई जब बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं.
यों बिहार का मिथिला अथवा मधुबनी पेंटिंग पूरे विश्व में मशहूर है. कभी शादीविवाह के दौरान दूल्हादुलहन के कोहबर (सुहागरात का कमरा) में गांव की महिलाएं इस पेंटिंग को बना कर कमरे को सजाती थीं, लेकिन धीरेधीरे यह पेंटिंग लोकप्रिय होती गई और अब तो इस पेंटिंग की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है.
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मोदी राज में बेबस बुनकर
प्रधानमंत्री मोदी के मधुबनी पेंटिंग पर बयान के बाद मधुबनी के राष्ट्रीय जनता दल के विधायक समीर कुमार महासेठ कहते हैं,”देखिए, मोदीजी को अब मधुबनी पेंटिंग और इस कला से जुङे कलाकारों की याद आई तो यह अच्छी बात है. देर आए दुरूस्त आए, लेकिन सचाई यही है कि इस कला के कलाकारों, बुनकरों के लिए केंद्र सरकार ने कुछ भी नहीं किया है. पिछले 15 साल से बिहार की कुरसी संभाले नीतीश सरकार ने तो कोई सुध तक नहीं ली.
“आज भी मधुबनी के सैकड़ों बुनकरों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है और बैंक वाले उन्हें लोन तक नहीं देते.”
समीर बताते हैं,”आज देश के कई जगहों पर मधुबनी पेंटिंग के नाम पर पेंटिंग्स बना कर खूब पैसा बनाया जा रहा है मगर यहीं के लोग, खासकर वे जो इस कला से जन्मजात रूप से जुङे हैं बेरोजगार हैं और बाजार में पहचान बनाने के लिए छटपटा रहे हैं.”
अब जबकि देश में कोरोना कहर बरपा रहा है लोगों के लिए मास्क और सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करना जरूरी हो गया है, घरों की
दीवारों से कागज, फिर कपड़े और खिलौनों के बाद मास्क पर पेंटिंग ने इस कला को नई पहचान जरूर दी है.
मछली, फूलपत्ती, पशुपक्षियों की पेंटिंग वाले सूती कपड़े का 2-3 लेयर वाला मास्क लोगों को खूब लुभा रहा है.
साहब मुश्किल से घर चला पाता हूं
मधुबनी जिले के रहने वाले प्रभात बाबा ऐसे कलाकारों में से एक हैं जो एक दुकान ही मधुबनी पेंटिंग्स की चलाते हैं. दुकान में ग्राहक कम ही आते थे. पर अब वे घर से ही मास्क बनाते हैं. डिमांड बढ़ा तो उन्होंने 3-4 बुनकरों को भी रख लिया है जो कपङों से बने मास्क पर मधुबनी पेंटिंग का काम करते हैं.

प्रभात कहते हैं,”इस काम में मेरे साथ परिवार के अन्य लोग भी सहयोग दे रहे हैं. मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क को लोग बाजार में ₹70 से 100 तक में आसानी से खरीद लेते हैं. इस से कुछ कमाई भी हो जाती है.”
वे बताते हैं,”साहब हम गरीब लोग हैं. हाथों में हुनर है पर सरकार अगर ध्यान दे तो इस कला के माध्यम से लाखों लोगों को रोजगार मिल सकता है.
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“कोरोना से लोग डरे हुए हैं पर इस की वजह से हम आज कुछ कमा भी रहे हैं वरना तो घर चलाना भी मुश्किल होता था.”
वहीं समस्तीपुर के रहने वाले कलाकार अजय कुमार बताते हैं कि एक मास्क तैयार करने में करीब ₹35-50 की लागत आ रही है. एक कलाकार प्रतिदिन 25-30 मास्क तैयार कर लेता है. इस से रोज ₹1-2 हजार की आमदनी जरूर हो जा रही है.
मधुबनी के ही रहने वाले हीरानंद को खुशी है कि वे मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क लगा कर बाहर निकलते हैं.
वे कहते हैं,”मिथिला की अपनी एक खास पहचान है. फिर मधुबनी पेंटिंग का तो जवाब ही नहीं.
“कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क पहन कर बाहर निकलने से संक्रमण का खतरा कम होता है. मैं मधुबनी पेंटिंग वाला खास डिजाइनर मास्क पहनता हूं. इस से मैं मिथिला कल्चर से जुङाव महसूस करता हूं.”

दिल्ली सरकार ने मिथिला को नई पहचान दी है
दिल्ली सरकार में मैथिली भोजपुरी अकादमी के वाइस चेयरमैन, नीरज पाठक ने बताया,”दिल्ली सरकार शुरू से ही, चाहे वह लोकसंगीत हो या फिर लोककला, इस क्षेत्र से जुङे लोगों को तवज्जो देती आई है. सरकार समयसमय पर मैथिलीभोजपुरी गीतसंगीत व कला का आयोजन भी करती आई है और यह आगे भी जारी रहेगा. दिल्ली सरकार हाल ही में कई लोगों को सम्मानित भी कर चुकी है.”
नीरज कहते हैं,”मधुबनी पेंटिंग दुनियाभर में मशहूर है. अब तो विदेशों में भी इस कला को नाम और दाम दोनों मिल रहे हैं.
“मधुबनी पेंटिंग कलाकारों द्वारा बनाए जा रहे मास्क फैशन में शुमार हो चुका है. मास्क की लोकप्रियता से इस काम से जुङे लोगों के लिए न सिर्फ रोजगार के अवसर बढेंगे, बल्कि इस से इस पेंटिंग को नई पहचान मिलेगी.”
चौपट रोजगार बेहाल व्यवसायी
यों नोटबंदी, जीएसटी लागू करने और फिर कोरोनाकाल में लागू लौकडाउन के बाद व्यवसायिक क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है.
एक तो जीएसटी ने व्यवसायियों की कमर तोङ दी व फिर कोरोना वायरस महामारी के बाद बाजार पूरी तरह चौपट हो गया है.
लेकिन सुखद बात यह है कि इसी कोरोनाकाल में मधुबनी पेंटिंग के कलाकारों द्वारा तैयार किए मास्क की बाजार में धूम है.
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पहले से कङकी में जूझ रहे कलाकारों के लिए यह काफी सुखद है कि अब उन के पास नाम और पैसा दोनों है. वैश्विक विपदा यहां के कलाकारों के लिए बङा अवसर बन कर आई है और इस से इस लोककला को भी नई पहचान मिल रही है.
लोकल बाजार से अमेजन तक
मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस की पहुंच आज लोकल बाजार से निकल कर अमेजन तक जा पहुंचा है.

औनलाइन साइट्स पर मौजूद यह मास्क लोकप्रिय हो चुका है और लोग इसे औनलाइन खरीद भी रहे हैं.
उधर, बिहार में चुनाव है और सियासी पार्टियों के नेता व कार्यकर्ता भी मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क में नजर आने लगे हैं.
क्योंकि अब चुनाव है
हाल ही में जब बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क में नजर आए तो उन की देखादेखी लोजपा के नेता भी इन मास्कों को लगा कर घूमते हुए देखे जा रहे हैं.
लोजपा के युवा नेता व रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी इस मास्क में अकसर नजर आने लगे हैं और इतना ही नहीं लोजपा अपने कार्यकर्ताओं के लिए 2 लाख मास्क भी बनवा रही है. लोजपा ने इस बार के चुनाव में नारा दिया है,’बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट.’
राजनीति के जानकार, समाजसेवी अजीत कुमार कहते हैं,”देशदुनिया में लगभग 7 करोङ लोग मैथिली बोलते हैं. दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, पुर्णिया, सहरसा, सुपौल आदि जिलों को मिथिलांचल कहा जाता है और यहां की जनता वोटिंग में निर्णायक भूमिका निभाती है. लिहाजा, राजनीतिक दलों के लोगों को लगता है कि इस से वे यहां की जनता से खास जुङाव महसूस करेंगे.
“वैसे, न सिर्फ मास्क बल्कि मिथिला या मधुबनी पेंटिंग का अपना खास इतिहास भी रहा है. अब तो देश के अलगअलग जगहों पर रहने वाले लोग भी मधुबनी पेंटिंग से खूब नाम कमा रहे हैं.”
मधुबनी पेंटिंग का जवाब नहीं
नोएडा की रहने वाली अर्चना झा इन में से ही एक हैं. उन्होंने पश्चिम बंगाल से फाइन आर्ट्स में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की है.

वे कहती हैं,”मैं झारखंड की रहने वाली हूं लेकिन मधुबनी पेंटिंग से गहरा जुङाव रखती हूं. मेरी मां ने मुझे इस पेंटिंग को करना सिखाया और वे ही मेरी गुरू हैं.
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“मैं शुरू से ही देश के कई शहरों में पेंटिंग प्रदर्शनी लगाती रही हूं और इस वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी औनलाइन प्रदर्शनी कर मैं ने खूब वाहवाही बटोरी है.
“मुझे खुशी है कि अब मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क बाजार में खूब बिक रहे हैं. इस से मिथिला के गरीब बुनकरों को नई पहचान जरूर मिलेगी.”
जो भी हो, बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क की मांग में इजाफा हो गया है और नेता व कार्यकर्ता इसे पहन कर गलीगली घूम रहे हैं, मगर इतना जरूर है कि इस मास्क की धमक से यहां के कलाकारों, बुनकरों का हौसला काफी बुलंद है.
टेलिवीजन इंडस्ट्री के सबसे बड़े रिएलिटी शो बिग बौस सीजन 11 (Bigg Boss 11) की विनर और जानी मानी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) आज अपना 43वां जन्मदिन मना रही हैं. पौपुलर सीरियल भाभीजी घर पर हैं (Bhabhi Ji Ghar Par Hai) में शिल्पा शिंदे ने अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था जो कि लोगों द्वारा काफी पसंद किया गया था.
सीरियल भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी ने अपने भोलेपन से लाखों लोगों के दिल जीते थे तो वहीं उनके किरदार ने फैंस की काफी वाहवाई लूटी थी. आपको बता दें कि शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिसकी हर फोटो हर वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल जाती है. एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) के फैंस उन्हें इस कदर चाहते हैं कि सोशल मीडिया पर उन्हें उनके फैंस का जमकर प्यार मिलता है.
जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) अपने दिए गए बयानों के कारण काफी सुर्खियां बटोरती दिखाई देती हैं जिसकी वजह से उन्हें कॉन्ट्रोवर्सी क्वीन भी कहा जाता है. तो चलिए आज हम आपको शिल्पा के उन कॉन्ट्रोवर्शियल बयानों के बारे में बताते हैं जिन्होनें मीडिया के बीच काफी हड़कंप मचाया है.
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‘बिग बॉस 13’ (Bigg Boss 13) के फिनाले से चंद घंटों पहले ही शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) ने इस बात का खुलासा किया था कि वह सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) को डेट कर चुकी हैं. इस बयान में शिल्पा शिंदे ने सिद्धार्थ शुक्ला पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया था. फैंस का मानना था कि ‘बिग बॉस 13’ के फिनाले की वजह से शिल्पा ने ये बयान दिए हैं.
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बीते साल बॉलीवुड सिंगर मीका सिंह (Mika Singh) को पाकिस्तान में परफॉर्म करने से रोका गया था. ऐसे में शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) ने ये बयान दिया था कि, ‘अगर मुझे मौका मिला तो मैं पाकिस्तान जाकर जरुर परफोर्म करूंगी. किसी का बाप भी मुझे वहां जाने से नहीं रोक सकता.’
बिग बॉस 11 (Bigg Boss 11) के घर में और शो में जाने से पहले भी शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) ने विकास गुप्ता (Vikas Gupta) की पोल पूरी दुनिया के सामने खोल दी थी. ऐसे में घर के अंदर भी कई बार शिल्पा शिंदे ने विकास गुप्ता को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए थे.
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बिग बॉस 11 जीतने के बाद ट्विटर पर शिल्पा शिंदे ने ये दावा किया था कि, ‘मैं अब कभी भी हिना खान (Hina Khan) की शक्ल नहीं देखना चाहूंगी. सबको पता है कि हिना खान ने मेरे साथ कितना बुरा व्यवहार किया है.’
शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) के इन बयानों को देखने के बाद से ये बात तो साफ है कि उनके मन में जो भी आता है वे किसी से भी बिना डरे बोल देती हैं.
टेलिवीजन इंडस्ट्री का सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस (Bigg Boss) का हर सीजन इतना सुपरहिट रहता है कि फैंस को हर सीजन के अंत से ही अगले सीजन का इंतजार होने लगता है. पिछले कुछ दिनों से बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए फैंस के दिलों में काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है और तो और कुछ नाम ऐसे सामने आ रहे हैं जो इस बार बिग बॉस के घर में एंट्री ले सकते हैं और उन नामों में जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin), पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia), नैना सिंह (Naina Singh), अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) जैसे नाम शामिल है.
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इन नामों के साथ एक और नाम सामने आ रहा है जिसे सुन सभी फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से मेकर्स बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) की तैय्यारियों में जुटे हुए हैं और वे हर हाल में इस सीजन को भी पिछले सीजन की ही तरह सुपरहिट बनाना चाहते हैं. खबरों की माने तो बिग बॉस 14 के मेकर्स सब टीवी (Sab TV) के सबसे पौपुलर सीरियल “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) की बेहद एंटरटेनर एक्ट्रेस दयाबेन यानी कि दिशा वकानी (Disha Vakani) को अप्रोच कर रहे हैं.
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#Repost @gokuldham.mahila.mandal ・・・ tmkoc Show ki jaan @dishavakanioffcal
जैसा कि हम सब जानते हैं कि दयाबेन ने मां बनने के बाद से सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को अलविदा कह दिया है. इसी के साथ ही ‘तारक मेहता का उल्का चश्मा’ के मेकर्स ने दिशा वकानी (Disha Vakani) को वापस शो में आने के लिए कई बार अप्रोच किया पर जब से वे मां बनी हैं उन्होनें वापस आने से साफ इंकार कर दिया था तो ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि क्या एक्ट्रेस दिशा वकानी (Disha Vakani) बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के इस ऑफर को एक्सेप्ट करेंगी या नहीं.
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आपको बता दें कि कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी महामारी के चलते कंटेस्टेंट्स को पहले एक हफ्ते क्वारंटीन (Quarantine) में रखने के बाद सितम्बर में ये शो ऑन एयर किया जाने वाला था लेकिन मुंबई में हुई भारी बारिश की वजह से बिग बॉस 14 के सेट पर आई कुछ परेशानियों के कारण इस शो को अब 4 अक्टूबर से ऑन एयर किया जाएगा.
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बेटे अभि को अपने पास बुलाने के लिए उस ने अपने ननदोई राजीव से संपर्क किया. उस ने राजीव को 30 हजार रुपए का लालच देते हुए कहा कि अगर वह उस के बेटे को सुखपाल के पास से ले आए तो उसे 30 हजार रुपए देगी.
लौकडाउन में 30 हजार रुपए मिलने वाली बात सुनते ही राजीव ने सुखपाल को अपने विश्वास में ले कर अभि को साथ लिया और उसे मुरादाबाद पहुंचा दिया.
देश में लौकडाउन लगते ही सभी अपने घरों में कैद हो कर रह गए थे. शहर या गांव सभी जगह कामकाज मिलना बंद हुआ तो सुखपाल खर्च के लिए पैसेपैसे को तरसने लगा. उस ने गांव की जो जमीन बेची थी उस का बाकी पैसा भी मंजू के पास ही था. मंजू से कुछ खर्च के लिए पैसे मिल जाएं यह सोच कर वह हिम्मत कर के गोविंद नगर जा पहुंचा.
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सुखपाल को अचानक घर आया देख पहले तो मंजू उस से बोलने तक को तैयार न थी. लेकिन पता नहीं उस के दिमाग में ऐसा क्या चल रहा था कि जल्द ही वह मोम की तरह पिघल गई. उस ने पति को खाना बना कर दिया. फिर वह उस के साथ गांव आ गई.
गांव आ कर वह सुखपाल के साथ हंसीखुशी से रहने लगी. जब राजीव को सुखपाल के गांव आने वाली बात पता चली तो वह भी उस के घर के चक्कर लगाने लगा. मंजू और राजीव के बीच पहले से ही अवैध संबंध थे. राजीव से मंजू का पुनर्मिलन हुआ तो उस का दिल बागबाग हो उठा.
लौकडाउन के चलते राजीव भी अपनी ससुराल में आ कर पड़ा रहने लगा. उसी दौरान मंजू ने अपने ननदोई को विश्वास में लेते हुए कहा कि अगर वह सुखपाल को अपने बीच से हटाने में उस का साथ दे तो उस की 2 बीघा जमीन बेच कर वह सारे पैसे उसे देगी. तब दोनों के मिलने को रोकनेटोकने वाला कोई नहीं होगा.
मंजू की बात सुनते ही राजीव लालच में आ कर अपने साले को ही मौत की नींद सुलाने के लिए साजिश में शामिल हो गया. राजीव को साथ देने के लिए पक्का कर के मंजू फिर से मुरादाबाद पहुंची. मुरादाबाद जाते ही उस ने राजकुमार को भी अपने लटकेझटके दिखाने के बाद उसे भी मकान का लालच दे कर साजिश में शामिल होने को कहा.
राजकुमार तो पहले ही उस मकान पर निगाहें गड़ाए बैठा था. जिस राह की खोज में वह काफी समय से भटक रहा था, वह राह उसे मंजू ने स्वयं दिखा दी. मंजू ने राजकुमार को गोविंद नगर का मकान और उस के साथ सदा के लिए जीवनयापन करने की पट्टी पढ़ा कर अपनी योजना में शामिल कर लिया.
जब मंजू को पूरा यकीन हो गया कि उस के दोनों दीवाने उस की हर तरफ से सहायता करने को तैयार हैं तो उस ने सुखपाल को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.
राजकुमार से बात करने के बाद वह फिर से सुखपाल के पास गांव आ गई. पति के पास आ कर उस ने प्रेम का नाटक करना शुरू किया.
सुखपाल उस की मंशा को जाने बिना उस की मीठीमीठी बातों में फंस कर उस के साथ बिताए बुरे दिनों को पल भर में भुला बैठा.
इस घटना को अंजाम देने से 5 दिन पहले मंजू ने सुखपाल से अपनी ननद ऊषा देवी के पास जाने की मंशा जाहिर की.
सुखपाल अब किसी भी तरह उस के दिल को कोई ठेस नहीं पहुंचाना चाहता था. इसीलिए वह उसे साथ ले कर अपनी बहन ऊषा के गांव खाईखेड़ा पहुंच गया.
अपनी ननद के पास 4 दिन तक मेहमाननवाजी करते हुए वह सुखपाल को मौत की नींद सुलाने की योजना बनाती रही. लेकिन वह योजना को अंतिम रूप नहीं दे पा रही थी. अपनी ननद के घर से ही उस ने राजकुमार को फोन कर के वहीं पर बुला लिया.
राजकुमार के आते ही ऊषा के घर पर हर रोज दावत होने लगी. राजकुमार ने अपनी शानशौकत दिखाते हुए वहां पर शराब और मीट मछली बनाने खाने में काफी पैसा खर्च कर दिया.
खाना खाने के बाद राजकुमार, राजीव और मंजू को एकांत में ले जा कर सुखपाल को मौत के घाट उतारने की योजना बनाते रहे.
उसी योजनानुसार मंगलवार 14 जुलाई की रात फिर से राजीव के घर पर दावत का प्रोग्राम बना. उस शाम राजकुमार और राजीव ने सुखपाल को जम कर शराब पिलाई. काफी देर तक खानेपीने का प्रोग्राम चलता रहा. जब रात काफी हो गई तो सारे दिन की थकीहारी ऊषा अपने दोनों बच्चों को साथ ले कर मकान की छत पर चली गई.
ऊषा के छत पर जाते ही मौका पा कर मंजू ने राजीव, राजकुमार व सुखपाल से गांव के पास ही बाग में आम खाने की बात कही और रात 11 बजे उन को साथ ले कर घर से निकल गई. आम खाने की बात सुनते ही सुखपाल नशे में धुत होने के बावजूद उन के साथ जाने को तैयार हो गया था.
चारों एक साथ गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर हसनगंज गांव की सीमा में ईट भट्ठे के पास पीपल के पेड़ से लगे कुएं के पास पहुंचे. कुएं की दीवार पर बैठते ही नशे में डूबा सुखपाल फैल गया. उस के नशे से बेहोश होते ही मंजू अपना आपा खो बैठी. उस ने बड़ी ही फुरती से पति के पैर पकड़े और अपने ननदोई राजीव और राजकुमार से धारदार हथियार से बार करने को कहा.
उस समय वैसे भी रात का अंधेरा छाया हुआ था, ऊपर से राजीव और राजकुमार बुरी तरह नशे में धुत थे. मंजू के कहते ही राजीव और राजकुमार कसाई बन सामने बेहोश पड़े सुखपाल पर ताबड़तोड़ प्रहार करने लगे.
सुखपाल पर पहला प्रहार होते ही वह उठ बैठा था. लेकिन उस के बाद तीनों ने उसे दबोच लिया और तेजधार वाले हथियार से उसे काट कर मार डाला. सुखपाल को मौत की नींद सुलाने के बाद तीनों ने उस की गरदन भी काट दी. फिर उस की लाश कुएं में फेंक दी.
लाश को छिपाने के लिए उन्होंने बाग में से पत्ते इकट्ठे किए और उस की लाश के ऊपर डाल दिए. सुखपाल की हत्या करने के बाद तीनों चोरीछिपे घर पर आ कर सो गए. उस समय तक सुखपाल की बहन ऊषा गहरी नींद में सो चुकी थी. उसे कुछ पता नहीं चल पाया था.
सुबह होने पर उस ने मंजू और अपने पति राजीव से भाई सुखपाल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि रात सुखपाल ने कुछ ज्यादा ही पी ली थी. उस के बाद वह सो गया था. लेकिन वह रात में पता नहीं कहां गायब हो गया था.
यह सुनते ही ऊषा ने अपने भाई के साथ किसी अनहोनी होने की आशंका के चलते मंजू से थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा.
इस केस के खुलते ही पुलिस ने मृतक की बीवी मंजू उस के ननदोई प्रेमी राजीव पर भादंवि की धारा 364/302/201 के अंतर्गत केस दर्ज कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.
कहानी लिखे जाने तक इस मामले का तीसरा अभियुक्त राजकुमार पुलिस की पकड़ से बाहर था. मंजू ने अपने पति की जिंदगी के साथ जो खेल खेला उस से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा.
पति की हत्या में गिरफ्तार हुई मंजू के चेहरे पर गम की कोई शिकन तक नहीं थी. उस का कहना था कि उसे पति की हत्या का कोई पछतावा नहीं है.
मंजू ने पुलिस को दोटूक जबाव दिया कि वह जेल से आने के बाद भी दोनों प्रेमियों के साथ रहेगी. उसे अपने बच्चों के भविष्य को ले कर किसी तरह की चिंता नहीं थी, जो अनाथ हो गए थे. उस का बेटा अभि उस की तहेरी दादी गंगा देवी के पास रह रहा था. जबकि उस की बेटी उस की नानी के साथ चली गई थी.
राजीव मंजू से कभीकभी मजाक भी कर लेता था. मंजू उस की बात का बुरा नहीं मानती थी. उसी दौरान राजीव मंजू के सौंदर्य को देख विचलित हो उठा. यही हाल मंजू का भी था. उस के दिल पर ननदोई हावी हुआ तो उस की खुशी चेहरे पर नजर आने लगी. वैसे भी वह अपने पति के साथ अनचाहा रिश्ता रख रही थी.
मंजू पहले से ही खुले गले का कुरता पहनती थी, जिस में से उस के वक्ष झांकते दिखाई देते थे. मंजू जब कभी घर के कामकाज करती तो वह बिना चुन्नी गले में डाले काम पर लग जाती थी. राजीव घर में अकेला होता तो उस की निगाहें उसी के गले पर टिकी रहतीं. मंजू इतनी अंजान नहीं थी कि कुछ समझ न सके. चूंकि वह भी राजीव की भावनाओं से खेलना चाह रही थी, इसलिए हवा देती रही.
एक दिन मंजू घर में अकेली थी. सुखपाल किसी काम से बाहर गया हुआ था. उस का बेटा अभि सोया था. घर में बाथरूम न होने के कारण मंजू घर का दरवाजा बंद कर अंदर चारपाई खड़ी कर नहाने लगी. उस वक्त राजीव घर में मौजूद था. मंजू को नहाते देख उस का दिल बेकाबू हो उठा.
मंजू का वह सैक्सी रूप देख राजीव मदहोश सा हो गया. उस के बाद मंजू पेटीकोट और ब्लाज में ही कमरे के अंदर आ गई. राजीव मंजू के आमंत्रण को समझ चुका था. मौका पाते ही राजीव ने मंजू को अपनी आगोश में समेट लिया. राजीव की बाहों में आ कर मंजू का शरीर ढीला पड़ गया. वह रोमांचित हो कर राजीव के शरीर से चिपक गई.
राजीव ने मंजू को कमरे में पड़ी चारपाई पर लिटा दिया और अपने होंठ उस के होठों पर रख दिए. मंजू जिस प्यार के लिए सालों से छटपटा रही थी, राजीव ने उसे पल भर में दे दिया था.
इस के बाद मंजू दूसरे बच्चे की मां भी बन गई थी. इस बार उस ने एक बच्ची को जन्म दिया था. दोनों के बीच अवैध संबंधों का सिलसिला अनवरत चलता रहा. अपनी पत्नी को भुला कर राजीव ससुराल में पड़ा रहता था. सुखपाल काम में व्यस्त रहता था. इस के बावजूद उसे अपनी बीवी के कारनामों की जानकारी हो गई थी.
सुखपाल ने मंजू को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह उस की एक भी सुनने को तैयार नहीं थी. इस का नतीजा यह हुआ कि दोनों में आए दिन मनमुटाव रहने लगा.
मनमुटाव के चलते मंजू एक दिन सुखपाल से झगड़ा कर के मुरादाबाद शहर के गोविंद नगर में रहने वाली अपनी मौसी के घर चली गई. उस के बाद वह काफी समय तक मौसी के घर ही रही.
इसी दौरान उस की मुलाकात राजकुमार से हुई. राजकुमार उस की मौसी का पड़ोसी था. उस का मौसी के घर पर पहले से ही आनाजाना था. राजकुमार ने मंजू को देखा तो वह उस की खूबसूरती पर मोहित हो गया. एक दिन उस की मौसी ने राजकुमार को उस के पति द्वारा प्रताडि़त करने की सारी दास्तान सुना दी.
राजकुमार के हाथों में मंजू की कमजोर नस आई, तो वह उस का फायदा उठाने की सोचने लगा. एक दिन राजकुमार ने मंजू के सामने सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि उसे कभी भी कोई मदद चाहिए तो वह हर समय तैयार है. राजकुमार भी सुंदरसजीला युवक था. वह भी मंजू के दिल को भाने लगा था.
जब मंजू को अपनी मौसी के घर गए हुए काफी समय हो गया तो सुखपाल उस से मिलने के लिए गोविंद नगर चला गया. काफी दिन बाद सुखपाल के आने से नाराज मंजू उस से सीधे मुंह नहीं बोली.
दोनों के मनमुटाव को देख मंजू की मौसी ने दोनों को आमनेसामने बिठा कर बात की, ताकि उन की समस्या का समाधान हो सके. लेकिन मंजू ने उस के साथ गांव जाने से साफ मना कर दिया.
मंजू ने सुखपाल को सलाह दी कि अगर वह उसे साथ रखना चाहता है तो गांव छोड़ कर मुरादाबाद आ कर बस जाए. मंजू की बात सुनते ही सुखपाल का पारा हाई हो गया. लेकिन वह अपने बच्चों को बहुत ही प्यार करता था. इसलिए कुछ नहीं बोला. उसी दौरान राजकुमार भी वहां आ गया. राजकुमार ने भी मंजू की हां में हां मिलाते हुए सुखपाल को मुरादाबाद आने की सलाह दे डाली.
राजकुमार ने सुखपाल को यह बात भी बता दी थी कि उस की मौसी के पास एक प्लौट बिक रहा है. अगर वह चाहे तो उसे खरीद कर वहां मकान बना कर रह सकता है. राजकुमार जानता था कि सुखपाल राजगीरी का काम जानता है. उस ने सुखपाल को बताया कि गांव में राजगीरी में काफी कम पैसा मिलता है. अगर शहर में काम करेगा तो अच्छी आमदनी होगी.
अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सुखपाल का मन बदल गया. बीवी की चाहत और बच्चों के प्यार को देखते हुए उस ने गांव जाते ही अपने खेत की 6 बीघा जमीन बेच दी. उस ने राजकुमार के घर के पास ही गोविंद नगर में 12 लाख रुपए का बनाबनाया मकान खरीद लिया. फिर वह गांव छोड़ कर बीवीबच्चों के साथ मुरादाबाद के गोविंद नगर में रहने लगा था.
सुखपाल के हाथ में जो हुनर था, वह उस के सहारे कहीं भी पैसा कमा सकता था. मुरादाबाद जाने के बाद वह वहीं पर राजगिरि का काम करने लगा. सुखपाल सुबह काम पर निकल जाता और देर रात तक घर लौटता था. राजकुमार ने मंजू के साथ मौज मस्ती करने के लिए जो जाल फैलाया था, वह उस में कामयाब हो गया था. सुखपाल की गैरमौजूदगी में वह मंजू के पास जाने लगा.
मंजू यह तो पहले ही जानती थी कि उस का पति उस की देह को पढ़ने में पूरी तरह नाकाबिल है. गांव में रहते हुए उस ने अपने शरीर का सुख अपने ननदोई के साथ भोगा था. शहर आ कर उस की मुलाकात राजकुमार से हुई तो उस ने उस के साथ भी अवैध संबंध बना लिए. राजकुमार से अवैध संबंध बनने के बाद वह दुनियादारी को भूल गई.
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राजकुमार चालाक युवक था. उस ने अपनी चालाकी से मंजू को फंसा कर उस की गांव की जमीन बिकवा कर मकान भी खरीदवा दिया था. उस का अगला कदम सुखपाल को अपने रास्ते से हटा कर मंजू को पूरी तरह से अपने कब्जे में करना था. अपनी इस चाहत को पूरा करने के लिए उस ने सुखपाल और मंजू के बीच मतभेद बढ़ाने का काम किया.
राजकुमार ने मंजू को चढ़ा कर सुखपाल के नाम की बाकी जमीन बेचने के लिए उस पर दबाव बनाने को कहा. जिसे सुन कर सुखपाल बिगड़ गया. इसे ले कर मियांबीवी के बीच काफी समय तक मनमुटाव रहा. सुखपाल पत्नी के चरित्र को पूरी तरह से समझ चुका था. लेकिन बच्चों की वजह से वह उस से कुछ नहीं कहता था.
एक दिन सुखपाल सुबहसुबह काम के लिए घर से निकला. लेकिन काम नहीं मिला तो वह जल्दी घर लौट आया. उस वक्त मंजू और राजकुमार दोनों एक ही चारपाई पर पड़े हुए थे.
घर पर राजकुमार को देख कर सुखपाल का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उसे आया देख राजकुमार चुपचाप घर से निकल गया. तब उस ने मंजू को काफी खरीखोटी सुनाई. उस दिन पहली बार सुखपाल को शहर में मकान खरीदने का मतलब समझ आया था.
अपनी बीवी की हकीकत सामने आते ही सुखपाल ने गोविंद नगर, मुरादाबाद का मकान बेचने की बात चलाई. यह बात जब मंजू को पता चली तो उस ने राजकुमार के साथ मिल कर उसे काफी मारापीटा. बीवी के इस व्यवहार से तंग आ कर सुखपाल अपने दोनों बच्चों को साथ ले कर अपने गांव आ गया.
बच्चों के चले जाने के बाद मंजू अकेली पड़ गई. वह बच्चों से मिलने के लिए परेशान रहने लगी. लेकिन बच्चों को वापस लाने का उसे कोई भी रास्ता नहीं सूझ रहा था. गांव से उस की बेटी को उस का मामा अपने साथ अपने गांव ले गया. लेकिन उस का बेटा अभि सुखपाल के पास ही था.
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