जिस गाने ने खेसारी को बनाया भोजपुरी स्‍टार, अब उस नाम से बनी फिल्‍म

साल 2016 में भोजपुरी इंडस्‍ट्री में एक गाना खूब वायरल हुआ था, जिसने सुपर स्‍टार खेसारीलाल यादव के स्‍टारडम को तेजी से आगे बढ़ाया था. अब उसी गाने के नाम से एक फिल्‍म आ रही है, जिसका फर्स्‍ट लुक आउट कर दिया गया है. गाने के बोल थे ‘सइयां अरब गइलें ना’, जिस पर अब फिल्‍म बनकर तैयार है.

फिल्‍म ‘सइयां अरब गइलें ना’ का फर्स्‍ट लुक काफी अच्छा है, जिसमें खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी की चिर परिचित जोड़ी नजर आ रही है. इनकी केमेस्‍ट्री के साथ अरब की ऊंची मीनारें पोस्‍टर की खूबसूरती को और भी निखारने वाली है.

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अभय सिन्‍हा और ईज माय ट्रिप डॉ कॉम प्रस्‍तुत व टनाटन टॉकीज के एसोसिएशन से बनी फिल्‍म ‘सइयां अरब गइलें ना’ की शूटिंग दुबई, मुंबई और गुजरात के मनोरम लोकेशन पर हुई है. यह भोजपुरी सिने इंडस्‍ट्री की पहली फिल्‍म है, जिसकी शूटिंग लार्ज स्‍केल पर दुबई में की गई है. यशी वीजन प्रोडक्‍शन की इस फिल्‍म से खेसारीलाल यादव को काफी उम्‍मीदें हैं. उनका कहना है कि जनता ने जिस तरह से सालों पहले उनके गाने ‘सइयां अरब गइलें ना’ को प्‍यार दिया था, उससे कहीं ज्‍यादा उनकी इस फिल्‍म को दें. फिल्‍म को प्रेमांशु रंजन ने निर्देशित किया है. प्रोड्यूसर अभय सिन्‍हा, प्रशांत जम्‍मूवाला और अर्पणा शाह हैं.

फिल्‍म ‘सइयां अरब गइलें ना’ की कास्टिंग को लेकर प्रोड्यूसर अभय सिन्‍हा ने कहा कि यह फिल्‍म हर एंगल से बेहद महत्‍वपूर्ण और इंटरटेनिंग होगी. मजबूत पटकथा पर बनी इस फिल्‍म की कास्टिंग भी बेहतरीन है. फिल्‍म में खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी के अलावा शुभी शर्मा, सूर्या द्विवद्वी, एहसान खान, अशोक पांडेय, श्रद्धा नवल, सोनू पांडेय, ब्रिजेश त्रिपाठी भी मुख्‍य भूमिका में हैं. तो मिस जम्‍मू रह‍ चुकीं अनारा स्‍पेशल एपीयरेंस भी खास होगा.

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वहीं, फिल्‍म की म्‍यूजिक, एक्‍शन, कोरियोग्राफी को अद्भुत बताते हुए प्रोड्यूसर प्रशांत जम्‍मूवाला ने कहा कि ‘सइयां अरब गइलें ना’ के संगीतकार ओम झा हैं. गीतकार श्‍याम देहाती, आजाद सिंह, अजीत हलचल और यादव राज हैं. कहानी, स्‍क्रीनप्‍ले और डायलॉग मनोज कुशवाहा का है. पीआरओ रंजन सिन्‍हा-सर्वेश कश्यप  हैं. कोरियोग्राफर कानू मुखर्जी और संजय कोर्वे हैं. एक्‍शन आर पी यादव का है. उन्‍होंने कहा कि जब सिनेमाघर ऑनलॉक होगा, तब यह फिल्‍म रिलीज होगी. हमें पूरा उम्‍मीद है कि फिल्‍म ब्‍लॉक बस्‍टर होगी और कई कीर्तिमान स्‍थापित भी करेगी.

भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने जन्मदिन के मौके पर किया ये नेक काम

अभिनय, गायन और नृत्य में महारत रखने वाली भोजपुरी अदाकारा अक्षरा सिंह को जन्मदिन के मौके पर  फैंस और शुभचिंतकों ने बधाई दी, वहीं अक्षरा सिंह ने अपने जन्मदिन पर कोरोना महामारी की वजह से अपने इस खास दिन को अलग तरह मनाया.

अक्षरा सिंह ने अपने जन्मदिन पर वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के बिरना लखन सेन गांव के एक बच्चे की शिक्षा व दीक्षा की जिम्मेदारी उठाने का फैसला लिया.इसके लिए वह इस बच्चे को हर माह पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद करती रहेंगी.अक्षरा ने इसी बच्चे के साथ केक भी काटा.मौके पर समाजसेवी विकास सिंह बड़हियावाले व गांव के अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे.

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आपको बता दें कि बिरना लखन सेन निवासी रामाशीष मांझी का निधन बीते दिनों हो गया था, जिसके बाद उनका 7 वर्षीय पुत्र अनाथ हो गया.अक्षरा को जब इसकी जानकारी नारायणपुर बुजुर्ग पंचायत की मुखिया कुमारी रुमझुम के माध्यम से मिली,तो उन्होंने अपने खास दिन को यादगार बनाने के लिए एक बच्घ्चे की पढ़ाई व लिखाई का प्रबंध करने का फैसला लिया.

इसको लेकर अक्षरा सिंह ने कहा-‘‘समाज ने मुझे बहुत कुछ दिया है.अब मेरी बारी थी तो,जब मुझे इस बच्चे के बारे में नारायणपुर बुजुर्ग पंचायत की मुखिया कुमारी रुमझुम के माध्यम से खबर मिली,तो मुझे लगा कि मुझे इसके लिए कुछ करना चाहिए.फिर मैंने इस बच्चे को साक्षर करने के बारे में सोचा और आज मैं बिरना लखन सेन गांव खास तौर पर इस बच्चे के लिए आई हूं.यह मेरे लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है कि आज मेरा जन्मदिन है, जिसे मैं सादगी से सेलिब्रेट करना चाहती थी.लेकिन अब मुझे आज लग रहा है कि इससे अच्छा जन्मदिन मैंने कभी सेलिब्रेट नहीं किया.इस बच्चे की मदद से मुझे सुकून मिला है.मैं अपने फैंस,अभिभावक और शुभचिंतकों को भी धन्यवाद देती हूं.’’

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मलयालम रोमांचक फिल्म‘‘ अंजाम पथिरा’’का रिलायंस इंटरटेनमेंट कर रहा है हिंदी रीमेक

‘‘आशिक उस्मान प्रोडक्शंस’’ द्वारा निर्मित तथा मिथुन मैनुअल थॉमस के लेखन और निर्देशन में बनी मलयालम फिल्म ‘‘अंजाम पथिरा’’ने काफी अच्छी सफलता दर्ज करायी थी,अब उसी का हिंदी रीमेक बनने जा रहा है,जिसके निर्माण के लिए ‘आशिक उस्मान प्रोडक्शंस’ के साथ ‘रिलायंस इंटरटनमेंट’ और ए पी इंटरनेशनल ने हाथ मिलाया है.

‘आशिक उस्मान प्रोडक्शंस’ भारत का पहला प्रोडक्शन हाउस है, जिसने ‘‘कोविड 19’’महामारी के दौरान ‘लव’ नामक फीचर फिल्म की शूटिंग की,जो जल्द प्रदर्शित होगी.

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मलयालम फिल्म‘‘अंजाम पथिरा’’ की कहानी एक सीरियल किलर के इर्द-गिर्द घूमती है.यह उसके अंदर का क्रोध है,जो पुलिस कर्मियों को निर्दयता से हत्या कर रहा है.बॉक्स-ऑफिस पर सफल इस फिल्म की आकर्षक कहानी के साथ साथ कुंचको बोबन,शराफ यू धीन, उन्नीमाया प्रसाद, जिनु जोसेफ और श्रीनाथ खासी के अभिनय की फिल्म आलोचकों ने काफी तारीफ की थी.

मलयालम फिल्म‘‘अंजाम पथिरा’’ के हिंदी रीमेक की चर्चा करते हुए रिलायंस एंटरटेनमेंट के ग्रुप सीईओ शिवाशीष सरकार कहते हैं-‘‘यह एक ऐसी रोमांचक फिल्म है,जो आपको सीट से बांधकर रखती है.हम देश और दुनिया भर के दर्शकों के लिए इसा फिल्म का रीमेक बनाने को लेकर खुश हैं!”

‘‘आशिक उस्मान प्रोडक्शंस’’ के मैनेजिंग पार्टनर आशिक उस्मान ने कहा-‘‘ फिल्म ‘अंजाम पथिरा’ एक रीवेटिंग सायको मर्डर थ्रिलर है. मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि यह साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर थी.और मैं इस फिल्म के हिंदी रीमेक के लिए रिलायंस एंटरटेनमेंट और एपी इंटरनेशनल के साथ जुड़कर खुश हूं. ”

एपी इंटरनेशनल के मैनेजिंग पार्टनर संजय वाधवा ने कहा, ‘‘हम इस मणि को फिल्म जगत से लेकर दुनिया के दर्शकों के लिए प्रदर्शित कर खुश हैं.‘‘

‘‘रिलायंस ग्रुप’’की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘‘रिलायंस इंटरटेनमेंट’’फिल्म,टेलीविजन, डिजिटल और गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट के निर्माण और वितरण में लगी हुई है.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलायंस एंटरटेनमेंट ने 2009 से प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता और निर्देशक, स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ ड्रीमवर्क्स स्टूडियोज के निर्माण में और उसके बाद एंबलिन पार्टनर्स के साथ भागीदारी की है.इस रिश्ते ने द हेल्प, वॉर हॉर्स, लिंकन, द हंड्रेड फुट जर्नी, द गर्ल ऑन द ट्रेन, ए डॉग्स पर्पस, ब्रिज ऑफ स्पाइज, द पोस्ट, 2019 गोल्डन ग्लोब्स और ऑस्कर विजेता फिल्म, ग्रीन बुक और कई सफल फिल्मों का निर्माण किया है.2020 अकादमी पुरस्कार नामित और गोल्डन ग्लोब्स विजेता 1917.

1958 में स्थापित एपी इंटरनेशनल,तमिल और मलयालम फिल्मों के निर्माण में कार्यरत तमिलनाडु और केरल के निजी स्टूडियो में से एक है.एपी इंटरनेशनल अब तक दक्षिण भारत में रजनीकांत, कमल हासन, अजित कुमार, विजय, सूर्या जैसे सुपरस्टार और मणिरत्नम, शंकर, गौतम मेनन, के.एस. जैसे प्रसिद्ध कलाकारों व फिल्म निर्माताओं के साथ काम कर चुका है.

जबकि 2013 से दक्षिण भारत में कार्यरत‘‘आशिक उस्मान प्रोडक्शंस’’अब तक ‘अंजाम पथिरा’, ‘काली’,‘चंद्रेतन एवेद्या’,‘वर्नैथिल आशंका’और ‘अल्लू रामेंद्रन’जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का निर्माण कर चुकी है.

30 लाख भी गए, बेटा भी : भाग 3

मीडिया के तीखे सवालों के आगे पुलिस अधिकारी बेबस नजर आए. चूंकि अपहर्ताओं ने अपहरण और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, अत: थाना बर्रा पुलिस ने पहले से दर्ज अपहरण के मामले में राहुल यादव का नाम हटा दिया और उसी क्राइम नंबर पर भादंवि की धारा 364/302/201/120बी के तहत कुलदीप गोस्वामी, नीलू सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, रामजी शुक्ला तथा प्रीति शर्मा के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली. उन्हेें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस जांच तथा अभियुक्तों के बयानों से पैसे के लिए दोस्ती का कत्ल करने की घटना प्रकाश में आई.

कानपुर शहर के बर्रा भाग 5 में रहने वाला संजीत यादव नौबस्ता स्थित धनवंतरि अस्पताल के पैथालौजी विभाग में काम करता था. उसी के साथ कुलदीप गोस्वामी तथा ज्ञानेंद्र सिंह काम करते थे. कुलदीप का दोस्त नीलू सिंह था, जबकि ज्ञानेंद्र का दोस्त रामजी शुक्ला था. सभी में खूब पटती थी और सप्ताह में एक बार बीयर पार्टी होती थी.

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दोस्तों के बीच संजीत धनवान होने का बखान करता था. उस ने दोस्तों को बताया था कि उस के 2 ट्रक चलते हैं, 2 कार हैं, गांव में जमीनमकान है. नौकरी तो वह समय काटने के लिए करता है. जल्द ही अपनी पैथालौजी खोल लेगा.

संजीत का दोस्त ज्ञानेंद्र सिंह दबौली में रहता था. उस के पिता श्रीकृष्ण यादव धनाढ्य थे. उस ने पिता से अस्पताल खोलने के लिए पूंजी लगाने का अनुरोध किया था. लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया था. बीएससी नर्सिंग पास ज्ञानेंद्र सिंह महत्त्वाकांक्षी था. वह अमीर बनना चाहता था. पर 10-12 हजार की नौकरी से अमीर नहीं बना जा सकता था. यद्यपि वह ठाटबाट से रहता था. कार से आताजाता था.

जनवरी 2020 में कुलदीप और ज्ञानेंद्र सिंह ने धनवंतरि अस्पताल से नौकरी छोड़ दी. ज्ञानेंद्र सिंह संविदा पर हैलट अस्पताल में काम करने लगा जबकि कुलदीप स्वरूपनगर में डा. एस.के. कटियार के यहां नौकरी करने लगा.

कुलदीप सरायमीता पनकी में रहता था. उस के पिता प्रेम गोस्वामी किराए की गाड़ी चलाते थे. उस की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी.

कुलदीप की दोस्ती सचेंडी के गज्जापुरवा निवासी नीलू सिंह से थी. वह फरजी काम करता था. उस की मां की मौत हो चुकी थी और पिता चंद्रप्रकाश सरिया मिल में काम करते थे. 3 भाइयों में वह दूसरे नंबर का था.

नीलू की एक महिला मित्र थी प्रीति शर्मा. वह हनुमान पार्क कौशलपुरी की रहने वाली थी. उस ने अपने पति को छोड़ दिया था और पनकी में अपनी मां सिम्मी के साथ रहने लगी थी. नीलू सिंह का उस के घर आनाजाना था. वह अपनी अवैध कमाई उसी पर खर्च करता था. उस ने कुलदीप से भी उस की दोस्ती करा दी थी.

ज्ञानेंद्र सिंह का दोस्त रामजी शुक्ला अंबेडकर नगर (गुजैनी) में रहता था. वह तेजतर्रार और अपराधी प्रवृत्ति का था. उस के पिता योगेश शुक्ला फैक्ट्रीकर्मी थे. छोटा भाई श्यामजी है. दोनों भाइयों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था, जिस से क्षेत्र में उन का दबदबा था. ज्ञानेंद्र सिंह ने उस से दबंगई की वजह से ही दोस्ती की थी.

ज्ञानेन्द्र सिंह को 2 टीवी सीरियल सावधान इंडिया और क्राइम पैट्रोल बेहद पसंद थे. इन सीरियलों को देख कर उस ने अपहरण कर फिरौती वसूलने की योजना बनाई.

इस योजना में उस ने कुलदीप, रामजी शुक्ला, नीलू सिंह व उस की प्रेमिका प्रीति शर्मा को शामिल किया. प्रीति को 3 लाख रुपए देने का लालच दिया गया.

एक रोज सब ने सिर से सिर जोड़ कर माथापच्ची की तो संजीत यादव के अपहरण और फिरौती की बात तय हुई. क्योंकि उस के बताए अनुसार संजीत धनवान था.

योजना के तहत नीलू सिंह ने महिला मित्र प्रीति शर्मा के साथ जा कर 15 जून को रतनलाल नगर में ब्रोकर रवींद्र तिवारी की मार्फत 15 हजार रुपया मासिक किराए पर सुनील श्रीवास्तव का मकान ले लिया. मकान किराए पर लेते समय प्रीति को उस ने अपनी पत्नी बताया था. इस मकान में प्रीति अपनी मां सिम्मी के साथ रहने लगी.

नीलू ने ही फरजी आईडी पर 6 सिम और 4 चाइनीज मोबाइल खरीदे और ज्ञानेंद्र को दे दिए. ज्ञानेंद्र ने चारों मोबाइल आपस में बांट लिए. ये मोबाइल अपहरण में इस्तेमाल करने के लिए थे.

इधर ज्ञानेंद्र सिंह ने संजीत को बेहोश करने के लिए नशे के इंजेक्शन, मुंह पर लगाने के लिए टेप तथा नींद की गोलियां हैलट अस्पताल के सामने मैडिकल स्टोर से खरीदीं. मैडिकल स्टोर के कर्मचारी ज्ञानेंद्र को जानते थे इसलिए उन्होंने डाक्टर का पर्चा नहीं मांगा. ज्ञानेंद्र ने इस सामान को बैग में सुरक्षित कर कार में रख लिया.

22 जून की शाम 7बज कर 47 मिनट पर ज्ञानेंद्र सिंह ने संजीत को फोन कर के बताया कि आज उस का जन्मदिन है, पार्टी करने चलते हैं. पार्टी के नाम पर संजीत तैयार हो गया. इस के बाद दोनों का फोन पर संपर्क बना रहा. ज्ञानेंद्र अपनी फोर्ड फीगो कार ले कर शिवाजी पुलिया नौबस्ता के पास खड़ा हो गया. उस समय कार में ज्ञानेंद्र के अलावा कुलदीप, नीलू तथा रामजी शुक्ला मौजूद थे. कुछ देर बाद संजीत आया तो इन लोगों ने उसे कार में बिठा लिया.

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कार में ही उन लोगों ने संजीत को शराब पिलाई. उसी में नशीली गोलियां मिला दी गई थीं. बेहोश होेने पर ये लोग उसे रतनलाल नगर स्थित किराए वाले मकान पर ले आए. यहां प्रीति पहले से मौजूद थी. उसी ने दरवाजा खोला. कमरे में ला कर इन लोगों ने संजीत के हाथपैर बांधे, मुंह पर टेप लगाया और नशीला इंजेक्शन लगा दिया. इस के बाद बारीबारी से सब उस की निगरानी करने लगे.

26 जून की रात 10 बजे खाना खाते वक्त संजीत ने भागने का प्रयास किया और गेट तक पहुंच गया. लेकिन नीलू सिंह ने उसे दबोच लिया. इस के बाद ज्ञानेंद्र, कुलदीप व रामजी शुक्ला आ गए. सभी ने मिल कर संजीत का गला घोंट दिया. फिर शव को बोरी में भर कर, कार की डिक्की में रखा और सवेरा होने के पहले ही पांडव नदी में फेंक आए. फिर नीलू को छोड़ कर सब अपनेअपने घर चले गए.

संजीत की हत्या के बाद अपहर्त्ताओं ने फिरौती के लिए फोन किया और 30 लाख रुपए की मांग की. 13 जुलाई को उन्होंने फिरौती की रकम ले भी ली. अपहर्त्ताओं ने पुलिस से बचने का भरसक प्रयास किया, लेकिन बच नहीं पाए और पकड़े गए.

इधर संजीत की हत्या की खबर प्रिंट मीडिया में छपी और टीवी चैनलों में दिखाई जाने लगी तो राजनीतिक भूचाल आ गया. सपा, बसपा व कांग्रेस के बड़े नेता प्रदेश की कानूनव्यवस्था पर सवाल खड़े करने लगे तो सीएम योगी तिलमिला उठे.

मुख्यमंत्री ने आईजी मोहित अग्रवाल से संजीत प्रकरण की जानकारी जुटाई, साथ ही पुलिस की भूमिका की भी जानकारी ली. इस के बाद उन्होंने लापरवाह पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने का फरमान जारी कर दिया.

एसएसपी दिनेश कुमार पी का भी तबादला झांसी कर दिया गया. शासन के आदेश पर एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता, डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता, पूर्व बर्रा थानाप्रभारी रणजीत राय, चौकी प्रभारी राजेश कुमार, दरोगा योगेंद्र सिंह, सिपाही अवधेश, भारती, दिशू, विनोद कुमार, सौरभ, मनीष और शिव प्रताप को सस्पेंड कर दिया गया.

लेकिन मृतक संजीत की बहन रुचि ने मीडिया से रूबरू हो कर कहा कि सस्पेंड पुलिसकर्मियों की लापरवाही से उस के भाई की हत्या हो गई. इसलिए ये पुलिसकर्मी उतने ही दोषी हैं, जितने अपहर्त्ता. उस की शासन से मांग कि केवल निलंबन से काम नहीं चलेगा. उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए.

25 जुलाई, 2020 को थाना बर्रा पुलिस ने अभियुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, कुलदीप गोस्वामी, नीलू सिंह, रामजी शुक्ला तथा प्रीति शर्मा को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

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कथा संकलन तक पुलिस न तो शव बरामद कर सकी थी और न ही नोटों भरा बैग. बैग बरामदगी तथा जांच हेतु पुलिस हेडक्वार्टर से एडीजी वी.पी. जोगदंड को भेजा गया. उन्होंने जांच शुरू कर दी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

30 लाख भी गए, बेटा भी : भाग 2

चमन सिंह के परिवार को तो अपहर्त्ताओं के फोन का इंतजार था ही, पुलिस भी इंतजार कर रही थी. लेकिन अपहर्त्ताओं का फोन आया 12 जुलाई को. चमन सिंह ने उन्हें बता दिया कि रकम तैयार कर ली गई है. इस पर उन्होंने कहा कि 30 लाख की रकम बैग में भर कर तैयार रखो. जल्दी ही बता दिया जाएगा कि रकम कहां और कैसे देनी है.

रुचि ने यह बात भी एसपी अपर्णा गुप्ता को बता दी. उन्होंने पूरी टीम को सादे कपड़ों में तैयार रहने के लिए अलर्ट कर दिया.  लेकिन उस दिन अपहर्त्ताओं का फोन नहीं आया. उन का फोन आया 13 जुलाई की दोपहर में.

अपहर्त्ताओं ने चमन सिंह से कहा कि शाम 5 बजे रकम का बैग ले कर वह गुजैनी हाइवे के फ्लाईओवर पर पहुंच जाएं. फ्लाईओवर से बैग नीचे फेंकना है. वे लोग पुल के नीचे रहेंगे. रकम मिलते ही संजीत को छोड़ दिया जाएगा. यह बात भी एसपी अपर्णा गुप्ता को बता दी गई. उन्होंने पुलिस टीम को तैयार रहने का आदेश दे दिया.

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ठीक 6 बजे पुलिस की 2 गाडि़यां फ्लाईओवर पर पहुंच गईं. एक गाड़ी में पुलिस जवानों के साथ अपर्णा गुप्ता थीं और दूसरी में सहयोगियों के साथ थानाप्रभारी रणजीत राय थे.

तभी रकम का बैग ले कर चमन सिंह मोटरसाइकिल से वहां पहुंच गया. मोटरसाइकिल खड़ी कर के उस ने नीचे झांका. तभी अपहर्त्ताओं का फोन आ गया कि चंद कदम आगे जा कर बैग नीचे फेंक दो. चमन सिंह ने बैग नीचे फेंक दिया तो अपहर्त्ताओं का फिर फोन आया. उन्होंने कहा कि थोड़ा आगे जा कर हनुमान मंदिर है, वहीं पहुंचो. संजीत मिल जाएगा.

इस बीच पुलिस की निगाहें चमन सिंह पर ही जमी थीं. जैसे ही उस ने बैग फेंका, पुलिस अपहर्त्ताओं को पकड़ने के लिए दौड़ी, लेकिन नीचे जाने का रास्ता लंबा था. पुलिस के वहां पहुंचने तक अपहर्त्ता बैग ले कर भाग गए थे. उधर चमन सिंह आंखों में आस समेटे मंदिर पर पहुंचा. लेकिन संजीत वहां नहीं मिला. पुलिस औपरेशन पूरी तरह फेल रहा.

चमन सिंह का परिवार अवाक रह गया. जैसेतैसे जुटाई 30 लाख की रकम तो गई ही, बेटा भी नहीं मिला. इस पर रुचि पिता के साथ जा कर आईजी मोहित अग्रवाल से मिली. रुचि ने पूरी बात आईजी को बताई. साथ ही संदेह भी व्यक्त किया कि पुलिस अपहर्त्ताओं से मिली हुई थी. संभव है पैसों का बैग भी पुलिस के ही पास हो.

चमन सिंह और रुचि की शिकायत पर आईजी मोहित अग्रवाल उसी समय थाना बर्रा पहुंचे. उन्होंने थानाप्रभारी रणजीत राय से पूछताछ की. उन की बातों से संतुष्ट न होने पर उन्होंने रणजीत राय को सस्पेंड कर के हरमीत सिंह को थानाप्रभारी नियुक्त कर दिया.

इंसपेक्टर हरमीत सिंह ने क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीम की मदद से जांच प्रारंभ की. उन्होंने पहले अपहृत संजीत के परिवार वालों से पूछताछ की, फिर संजीत के मोबाइल नंबर को खंगाला, जिस से पता चला अपहरण वाले दिन यानी 22 जून को संजीत के मोबाइल फोन पर एक नंबर से 5 काल आई थीं. 2 बार काल करने वाले ने बात की थी और 3 बार संजीत ने उसी नंबर पर बात की थी.

रात पौने 8  बजे संजीत की उस नंबर पर आखिरी बार बात हुई थी. पौने 9 बजे संजीत का मोबाइल और संदिग्ध नंबर के मोबाइल का स्विच्ड औफ हो गया था. फिरौती के लिए अलग नंबर प्रयोग किया गया था. उस नंबर से 22 बार काल की गई थी.

इस जानकारी के बाद पुलिस टीम ने सिम बेचने वाले दुकानदार का पता लगाया तो पता चला उस की सिम कार्ड की दुकान चकरपुर में हैं. पुलिस ने उसे उठा कर कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने 6 सिम कार्ड बेचने की बात कही.

सर्विलांस टीम ने सभी मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवानी शुरू की. साथ ही उन नंबरों को लिसनिंग पर भी लगा दिया. इस के बाद पुलिस ने धनवंतरि अस्पताल की पैथालौजी के 2 कर्मचारियों को हिरासत में लिया. उन में से एक की संदिग्ध नंबर पर बात हुई थी.

उस कर्मचारी से सख्ती से पूछताछ की गई तो पता चला, वह संदिग्ध नंबर कुलदीप गोस्वामी का था, जो कुछ माह पहले धनवंतरि अस्पताल में काम करता था. लौकडाउन में विवाद होने पर उस ने नौकरी छोड़ दी थी. कुलदीप गोस्वामी पुलिस की रडार पर आया तो उस की तलाश शुरू की गई.

23 जुलाई, 2020 की सुबह 10 बजे थानाप्रभारी हरमीत सिंह को सूचना मिली कि कुलदीप गोस्वामी अपने साथियों के साथ अंबेडकर नगर के पटेल चौक पर मौजूद है.

इस सूचना पर हरमीत सिंह क्राइम ब्रांच की टीम के साथ पटेल चौक पहुंच गए. पुलिस को देख कर एक युवती और 4 युवक भागने लगे. लेकिन क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी कर युवती सहित 4 युवकों को गिरफ्तार कर लिया और सुरक्षा की दृष्टि से थाना बर्रा न ले जा कर सीओ औफिस गोविंद नगर ले आए.

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उन से पूछताछ की गई तो युवकों ने अपना नाम कुलदीप गोस्वामी, नीलू सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह और रामजी शुक्ला बताया. युवती ने अपना नाम प्रीति शर्मा बताया. पकड़े गए सभी युवक थे. उन की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच थी. पकड़े गए युवकों से जब संजीत यादव के अपहरण के संबंध में पूछा गया तो सब ने मौन धारण कर लिया और एकदूसरे का मुंह ताकने लगे. इस पर उन्हें तराशा गया, आखिर उन्होंने जुबान खोली और बताया कि संजीत अब इस दुनिया में नही है.

इन लोगों ने आगे बताया कि अपहरण के 4 दिन बाद उस की हत्या कर दी थी. फिर उस के शव को बोरी में भर कर पांडव नदी में फेंक दिया था. यह सुनते ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह के होश उड़ गए. उन्होंने सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी.

सूचना पाते ही आईजी मोहित अग्रवाल, एसएसपी दिनेश कुमार पी, तथा एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता आ गईं. पुलिस अधिकारियों ने अपहर्ताओं से पूछताछ की, फिर शव बरामदगी के लिए फ्लड कंपनी बटालियन की 6 बोट तथा 35 गोताखोरों को बुला कर उन्हें पांडव नदी में उतारा गया. गोताखोरों ने 30 किलोमीटर तक शव को तलाशा, लेकिन शव बरामद नहीं हो सका.

इधर अपहर्ताओं की निशानदेही पर पुलिस ने सड़क किनारे झाड़ी में छिपाई गई संजीत की मोटरसाइकिल, अपहरण व हत्या में प्रयुक्त कार, कार में रखा बैग तथा 4 मोबाइल फोन बरामद किए. पुलिस अब तक फिरौती के 30 लाख रुपए बरामद नहीं कर पाई थी. इस बाबत अपहर्ताओं से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि पुलिस के डर से वे नोटों से भरा बैग नहीं ले जा पाए थे.

अब सवाल था, जब नोटों से भरा बैग अपहर्ताओं ने नहीं उठाया, तो बैग क्या पुलिस ने गायब कर दिया.

पुलिस अधिकारियों को डर था कि हत्या की खबर फैलते ही बर्रा क्षेत्र में सनसनी फैल जाएगी. लोग सड़क पर उपद्रव मचाएंगे. नेता आग में घी डालने का काम करेंगे, अत: पुलिस अधिकारियों ने पहले क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की, फिर रात 11 बजे चमन सिंह के घर जा कर अपहर्ताओं के पकड़े जाने तथा संजीत की हत्या कर शव को पांडव नदी में बहाने की जानकारी दी.

संजीत की हत्या की खबर सुन कर घर में कोहराम मच गया. चमन सिंह, कुसुमा और रुचि चीखनेचिल्लाने लगी. उन की चीखपुकार सुन कर रात के सन्नाटे में मोहल्ले के लोग घरों से निकल आए.

देखते ही देखते सैकड़ों की भीड़ चमन सिंह के घर आ पहुंची. हत्या की जानकारी मिलने पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा. मांबेटी की चीखों से महिलाएं द्रवित हो उठीं. रुचि पुलिस अधिकारियों के पैर पकड़ कर बोली, ‘‘आप लोग, जिंदा तो मेरे भाई को ला नहीं पाए, कम से कम मुर्दा ही ला दो. ताकि आखिरी बार उसे राखी बांध सकूं.’’ उस की इस बात पर पुलिस अधिकारी द्रवित हो गए. उन्होंने रुचि को धैर्य बंधाया.

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24 जुलाई, 2020 की सुबह 11 बजे आईजी मोहित अग्रवाल तथा एसएसपी दिनेश कुमार पी ने पुलिस लाइन सभागार में प्रैस वार्ता बुलाई और अपहर्ताओं को प्रिंट तथा इलेक्ट्रौनिक मीडिया के सामने पेश कर संजीत के अपहरण और हत्या का खुलासा कर दिया.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

30 लाख भी गए, बेटा भी : भाग 1

कानपुर दक्षिण में काफी बड़े क्षेत्र में फैला एक बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है बर्रा. बड़े क्षेत्र को देखते हुए इसे कई भागों में बांटा गया है. चमन सिंह यादव अपने परिवार के साथ इसी बर्रा क्षेत्र के बर्रा 5 की एलआईजी कालोनी में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी कुसुमा देवी के अलावा एक बेटा था संजीत और एक बेटी रुचि यादव.

चमन सिंह एक फैक्ट्री में काम करते थे. वह धनवान तो नहीं थे, पर घर में किसी चीज की कमी भी नहीं थी. चमन सिंह मृदुभाषी थे सो अड़ोसीपड़ोसी सभी से मिलजुल कर रहते थे.

चमन सिंह खुद तो ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई थी. बेटी रुचि डीबीएस कालेज गोविंद नगर से बीएससी कर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी, जबकि बेटे संजीत ने बीएससी नर्सिंग कर रखा था. वह नौबस्ता स्थित धनवंतरि अस्पताल के पैथोलौजी विभाग में बतौर लैब टेक्नीशियन कार्यरत था. उस का काम था मरीजों के खून का नमूना जांच हेतु एकत्र करना. फिर उसे जांच के लिए पैथोलौजी लैब ले जाना और जांच रिपोर्ट लाना.

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चमन सिंह की बेटी रुचि जौब की तलाश में थी, चमन सिंह बेटी का ब्याह कर देना चाहते थे. इस में उन की पत्नी कुसुमा की भी सहमति थी. इसी कवायद में चमन सिंह को रुचि के लिए राहुल यादव पसंद आ गया. राहुल बर्रा विश्व बैंक कालोनी में रहता था. उस के पिता राजेंद्र यादव पीएसी में तैनात थे. राहुल पसंद आया तो उन्होंने बेटी का रिश्ता तय कर दिया.

रिश्ता तय हुआ तो चमन सिंह बेटी की शादी की तैयारी में जुट गए. उन्होंने बेटी के लिए जेवरात बनवा लिए तथा कैश का भी इंतजाम कर लिया. संजीत का सपना था कि वह अपनी बहन को कार से ससुराल भेजेगा. कार खरीदने के लिए उस ने बैंक से 2 लाख का कर्ज भी ले लिया था.

रुचि की शादी की तैयारियां चल ही रही थीं कि इसी बीच चमन सिंह को पता चला कि राहुल रुचि के लिए ठीक लड़का नहीं है.

चमन सिंह ने अपने स्तर से पता लगाया तो बात सच निकली. इस के बाद उन्होंने पत्नी व बच्चों के साथ इस गंभीर समस्या पर विचारविमर्श किया और रुचि के भविष्य को देखते हुए रिश्ता तोड़ दिया.

रिश्ता टूटने से राहुल और उस के घर वाले बौखला गए. राहुल, रुचि के पिता व भाई को मनाने में जुट गया, परंतु बात नहीं बनी.

हर रोज की तरह 22 जून, 2020 को भी संजीत अस्पताल गया, लेकिन जब वह रात 10 बजे तक वापस घर नहीं आया, तब चमन सिंह व उस की पत्नी कुसुमा को चिंता हुई.

दरअसल संजीत रात 9 बजे तक हर हाल में घर आ जाता था. कभी उसे अस्पताल में रुकना होता था या कहीं और जाना होता तो वह अपनी मां या बहन को फोन कर के बता देता था.

10 बज गए थे. न वह आया था, न ही फोन पर बताया था. ताज्जुब की बात यह थी कि उस का मोबाइल फोन भी बंद था.

ज्योंज्यों समय बीतता रहा था, चमन सिंह, उन की पत्नी कुसुमा और बेटी रुचि की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. रुचि ने संजीत के अस्पताल फोन किया तो पता चला वह 7 बजे ही अस्पताल से चला गया था. पैथोलाजी लैब वह गया ही नहीं था. रुचि ने भाई के दोस्तों जिन्हें वह जानती थी, सब को फोन किया, कोई जानकारी नहीं मिली.

मां बेटी और पिता रात भर फोन पर फोन करते रहे, लेकिन कहीं से भी संजीत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. सुबह का उजाला फैला तो पूरी कालोनी में संजीत के लापता होने की खबर फैल गई. पड़ोसी सांत्वना देने घर पहुंचने लगे. चमन सिंह ने कुछ खास पड़ोसियों से विचारविमर्श किया फिर बेटी रुचि को साथ ले कर जनता नगर पुलिस चौकी पहुंच गए.

उस समय चौकी इंचार्ज राजेश कुमार चौकी पर मौजूद थे. चमन सिंह ने उन्हें एकलौते बेटे संजीत के लापता होने की जानकारी दी. साथ ही अपहरण की आशंका भी जताई. राजेश कुमार ने चमन सिंह से तहरीर ले ली, फिर पूछा, ‘‘तुम्हारी किसी से दुश्मनी या जमीन वगैरह की रंजिश तो नहीं है. संजीत का लेनदेन में किसी से झगड़ाफसाद तो नहीं हुआ था.’’

‘‘सर, हम सीधेसादे लोग हैं. हमारी या बेटे संजीत की न तो किसी से रंजिश है, न ही लेनदेन का झगड़ा है.’’

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ चौकीप्रभारी राजेश कुमार ने पूछा.

‘‘हां सर, मुझे राहुल यादव पर शक है.’’ चमन सिंह ने बताया.

‘‘वजह बताओ?’’ राजेश कुमार ने अचकचा कर पूछा.

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‘‘सर, राहुल यादव, विश्व बैंक कालोनी बर्रा में रहता है. उस के पिता पीएसी में तथा चाचा मैनपुरी में दरोगा है. राहुल के साथ मैं ने अपनी बेटी रुचि का विवाह तय किया था. लेकिन कुछ कारणों से हम ने रिश्ता तोड़ दिया था. रिश्ता टूटने से राहुल बौखला गया. मुझे शक है कि इसी बौखलाहट में उस ने संजीत का अपहरण किया है.’’

‘‘ठीक है, तुम जाओ. मैं इस मामले को देखता हूं.’’ कह कर राजेश कुमार ने चमन सिंह को टरका दिया. उन्होंने न तो गुमशुदगी दर्ज की और न ही किसी से कोई पूछताछ की.

24 जून की सुबह 10 बजे चमन सिंह आशंका जताते हुए राहुल के खिलाफ नामजद तहरीर ले कर चौकी पहुंचे. तहरीर पढ़ते ही चौकीप्रभारी राजेश कुमार भड़क उठे, ‘‘तुम्हारा बेटा गर्लफ्रैंड के साथ मौजमस्ती करने गया होगा. किसी पर गलत आरोप लगाओगे तो भुगतना पड़ेगा. गलत होने पर मैं तुम्हारे खिलाफ मानहानि का मुकदमा लिख दूंगा, समझे.’’

चमन सिंह समझ गए कि यहां कोई काररवाई संभव नहीं है. अत: वह थाना बर्रा जा कर थानाप्रभारी रणजीत राय से मिले. उन्होंने उन्हें जनता नगर चौकी में दी गई तहरीर के आधार पर गुमशुदगी दर्ज न करने की बात बताई. इस पर वह नाराज होते हुए बोले, ‘‘हथेली पर सरसों मत उगाओ. तुम्हारा बेटा मिल जाएगा.’’

थाने से निराशा हाथ लगी तो चमन सिंह डीएसपी (गोविंद नगर) मनोज कुमार गुप्ता और एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता से मिले और अपनी परेशानी बताई. लेकिन जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों ने भी उस के आंसुओं को नजरअंदाज कर दिया.

दरअसल, पुलिस यह मान रही थी कि संजीत मौजमस्ती करने कहीं चला गया है. अगर उस का अपहरण हुआ होता तो अब तक फिरौती के लिए फोन आ गया होता.

पुलिस की खुमारी तब टूटी जब 29 जून को फिरौती के लिए अपहर्त्ताओं का फोन आया. उन्होंने संजीत को सहीसलामत लौटाने के लिए 30 लाख रुपए मांगे थे. चमन सिंह ने यह बात पुलिस को बताई. पुलिस ने उन्हें रुपयों का इंतजाम करने को कहा.

एक साधारण परिवार के लिए 30 लाख रुपए का इंतजाम करना आसान नहीं था. लेकिन सवाल एकलौते बेटे का था. चमन सिंह ने बेटी रुचि की शादी के लिए जो रकम सहेज कर रखी थी, वह और बेटी की शादी के लिए बनवाए गए जेवर बेच कर पैसा एकत्र किया. पर 30 लाख की रकम पूरी नहीं हो पाई. इस पर उन्होंने गांव की जमीन और मकान बेच दिया.

पैसा एकत्र हो गया तो चमन सिंह ने यह बात पुलिस को बता दी. इस बीच अपहर्त्ताओं  के फोन पर फोन आ रहे थे. उन का कहना था कि चाहे जैसे भी हो, 30 लाख रुपए जमा कर लो, बेटा अमित मिल जाएगा.

रुचि हर रोज सारी बात पुलिस को बता रही थी. इस बीच संजीत के अपहरण को 3 हफ्ते बीत गए थे. इसे पुलिस की कमजोरी ही कहा जाएगा कि वह अपहर्त्ताओं का नंबर तक ट्रेस नहीं कर पाई थी.

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रकम का इंतजाम हो जाने पर यह बात पुलिस को बता दी गई. इस पर एसपी (साउथ) अपर्णा गुप्ता ने अपहर्त्ताओं को रंगेहाथों पकड़ने के लिए योजना तैयार की. इस के लिए क्राइम ब्रांच की टीम और सर्विलांस टीम को भी साथ लिया गया.

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30 लाख भी गए, बेटा भी

Bigg Boss 14 में नजर आएंगी ‘इश्कबाज’ फेम मानसी श्रीवास्तव, इंटर्व्यू के दौरान कही ये बात

टेलिवीजन इंडस्ट्री का सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस (Bigg Boss) का हर सीजन इतना सुपरहिट रहता है कि फैंस को हर सीजन के अंत से ही अगले सीजन का इंतजार होने लगता है. पिछले कुछ दिनों से बिग बॉस सीजन 14 (Bigg Boss 14) के लिए फैंस के दिलों में काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है और तो और कुछ नाम ऐसे सामने आ रहे हैं जो इस बार बिग बॉस के घर में एंट्री ले सकते हैं और उन नामों में जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin), पवित्रा पुनिया (Pavitra Punia), नैना सिंह (Naina Singh), अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande), दिशा वकानी (Disha Vakani) जैसे नाम शामिल है.

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हालांकि बिग बॉस सीजन 14 के मेकर्स द्वारा किसी भी कंटेस्टेंट का नाम बाहर नहीं आया है लेकिन इतना तय है कि मेकर्स पूरे जोरों शोरों से बिग बॉस सीजन 14 को सुपरहिट बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाले. आपको बता दें कि बिग बॉस 14 के कंटेस्टेंट्स की लिस्ट में एक नाम और जुड़ने जा रहा है और वो नाम है स्टार प्लस के पौपुलर सीरियल ‘इश्कबाज’ (Ishqbaaz) की एक्ट्रेस मानसी श्रीवास्तव (Mansi Srivastava) का.

जी हां खबरों की माने तो बिग बॉस 14 (Bigg Boss 14) के मेकर्स ने एक्ट्रेस मानसी श्रीवास्तव (Mansi Srivastava) को अप्रोच किया है और इस बात का खुलासा और किसी ने नहीं बल्कि खुद एक्ट्रेस ने ही एक इंटर्व्यू के दौरान किया है. इंटर्व्यू के चलते एक्ट्रेस ने बताया कि, ‘मेरी अभी मेकर्स के साथ बात चल रही है. मैंने अब तक केवल एक बार ही ‘बिग बॉस 14′ के मेकर्स से बात की है. अभी तक कुछ फाइनल नहीं हो सका है.’

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आपको बता दें कि मानसी श्रीवास्तव (Mansi Srivastava) टेलिवीजन की बेहद ही खूबसूरत और बोल्ड एकट्रेसेस में से एक हैं. वे आए दिन अपनी खूबसूरत फोटोज अपने सोशल मीडिया प्लेटफोर्मस पर फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं जिन्हें उनके फैंस भी खूब पसंद करते हैं. यही कारण है कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6 लाख से भी ज्यादा फौलोवर्स हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि किस तरह मानसी श्रीवास्तव अपनी खूबसूरती के जलवे बिग बॉस 14 के घर में बिखेरेंगी.

 

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Goodmorning to everyone except my #periodcramps ! 😭😩😵

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सम्मान की खातिर : भाग 3

पहली जुलाई को गढ़ा गांव के जंगल में देवराज उर्फ दानवीर के यूकेलिप्टस के बाग में बंटी और सुखदेवी की लाशें शीशम के एक पतले  से पेड़ पर लटकी मिलीं. गांव के कुछ लड़के उधर गए तो उन्होंने लाशें देखीं. लड़कों ने यह जानकारी दोनों के घर वालों को दे दी.

सूचना पा कर बंटी के घर वाले और गांव के लोग तो पहुंच गए, लेकिन सुखदेवी के घर वाले वहां नहीं पहुंचे. संबंधित थाना धनारी को घटना की सूचना दे दी गई. सूचना पा कर इंसपेक्टर सतेंद्र भड़ाना कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी की सूचना पर एएसपी आलोक जायसवाल और सीओ (गुन्नौर) डा. के.के. सरोज भी वहां पहुंच गए.

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सुखदेवी और बंटी की लाशें एक ही पेड़ से लटकी हुई थीं. सुखदेवी के गले में हरे रंग के दुपट्टे का फंदा था तो बंटी के गले में प्लास्टिक की रस्सी का. दोनों के चेहरे तेजाब जैसे किसी पदार्थ से झुलसे हुए थे. प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का था, लेकिन दोनों के चेहरे झुलसे होने से हत्या का शक भी जताया जा रहा था.

पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद मृतक बंटी के पिता बिन्नामी से आवश्यक पूछताछ की. फिर इंसपेक्टर सतेंद्र भड़ाना को दिशानिर्देश दे कर दोनों अधिकारी चले गए. इस के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का सही कारण नहीं आ पाया. 7 जुलाई, 2020 को सुखदेवी के भाई कुलदीप उर्फ सूखा का शव गढ़ा के जंगल में नीम के पेड़ से लटका मिला. उसी जगह जहां सुखदेवी और बंटी के शव मिले थे.

थानाप्रभारी सतेंद्र भड़ाना तत्काल पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे. सीओ के.के. सरोज भी फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए.

कुलदीप का शव प्लास्टिक की रस्सी से लटका हुआ था और उस का चेहरा भी तेजाब से झुलसा हुआ लग रहा था. लाश का निरीक्षण करने पर पता चला कि तीनों की मौत का तरीका एक जैसा ही था. मुआयना करने के बाद पुलिस को इस मामले में भी हत्या की साजिश नजर आ रही थी.

पहले बंटी व सुखदेवी की मौत और अब सुखदेवी के भाई कुलदीप की मौत आत्महत्या नहीं हो सकती थी. हां, इसे आत्महत्या का रूप दे कर गुमराह करने का प्रयास जरूर किया था.

कुलदीप के घर वालों से पूछताछ की गई तो पता चला कि कुलदीप 25 जून से ही लापता था. लेकिन सुखदेवी और बंटी की मौत के बाद घर वाले पुलिस के पास जाने से डर रहे थे, इसलिए पुलिस तक सूचना नहीं पहुंची.

गढ़ा गांव में 3 हत्याओं के बाद एसपी यमुना प्रसाद एक्शन में आए. उन्होंने इंसपेक्टर सतेंद्र भड़ाना को जल्दी से जल्दी केस का खुलासा करने के निर्देश दिए.

मृतक बंटी के पिता बिन्नामी की तहरीर पर इंसपेक्टर भड़ाना ने अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302/201/34 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

इस के बाद थानाप्रभारी ने सुखदेवी के घर वालों से पूछताछ की तो सुखदेवी का भाई विनीत उर्फ लाला और किशोरी घर से गायब मिले. पुलिस ने दोनों की तलाश की तो गढ़ा के जंगल से दोनों को हिरासत में ले लिया.

उन से पूछताछ की गई तो इन 3 हत्याओं का परदाफाश हो गया. उन से पूछताछ में कई और लोगों के शामिल होने का पता चला. इस के बाद पुलिस ने गढ़ा गांव के ही जगपाल यादव उर्फ मुल्लाजी और श्योराज को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में सभी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और घटना के बारे में विस्तार से बता दिया.

पता चला कि सुखदेवी और बंटी के घर से लापता हो जाने के बाद उन के घर वाले काफी परेशान थे. जबकि बंटी सुखदेवी के साथ अपने गन्ने के खेत में छिप गया था. गांव के जगपाल यादव उर्फ मुल्लाजी ने 26 जून को उन्हें देख लिया. उस ने दोनों के खेत में छिपे होने की बात सुखदेवी के भाई विनीत उर्फ लाला को बता दी.

विनीत ने यह बात अपने भाई किशोरी और गांव के श्योराज को बताई. समाज में बदनामी के डर से विनीत ने जगपाल से अपनी बहन सुखदेवी और बंटी को मारने की बात कही और बदले में ढाई लाख रुपया देने को कहा. जगपाल पेशे से अपराधी था, इसलिए वह हत्या करने को तैयार हो गया.

विनीत ने उसे ढाई लाख रुपए ला कर दे दिए. इस के बाद योजना बना कर रात 11 बजे चारों बंटी के खेत में पहुंचे. वे शराब और तेजाब की बोतल साथ ले गए थे.

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वहां पहुंच कर चारों ने बंटी और सुखदेवी को दबोच लिया. श्योराज ने बंटी को जबरदस्ती शराब पिलाई. फिर श्योराज पास में ही जगपाल के ट्यूबवेल पर पड़े छप्पर में लगी प्लास्टिक की रस्सी निकाल लाया.

इस के बाद सुखदेवी के गले को उसी के हरे रंग के दुपट्टे से और बंटी के गले को प्लास्टिक की रस्सी से घोंट कर मार डाला.

इसी बीच विनीत का छोटा भाई 25 वर्षीय कुलदीप उर्फ सूखा वहां आ गया. उस ने उन लोगों को दोनों हत्याएं करते देख लिया.

विनीत ने उसे समझाबुझा कर वहां से वापस घर भेज दिया. इस के बाद वे लोग दोनों की लाशों को कुछ दूरी पर देवराज यादव उर्फ दानवीर के यूकेलिप्टस के बाग में ले गए. वहां दोनों की लाशों को दुपट्टे व रस्सी की मदद से शीशम के पेड़ पर लटका दिया. इस के बाद उन की पहचान मिटाने के लिए दोनों के चेहरों पर तेजाब डाल दिया गया.

कुलदीप को दौरे पड़ते थे, उन दौरों की वजह से उस का दिमाग सही नहीं था, उस पर भरोसा करना गलत था. वह घटना का लगातार विरोध भी कर रहा था. इस पर चारों लोगों ने योजना बनाई कि कुलदीप को भी मार दिया जाए, नहीं तो वह उन लोगों का भेद खोल देगा.

2 जुलाई, 2020 को विनीत और उस के तीनों साथी कुलदीप को बहाने से रात को जंगल में ले गए. वहां गांव के नेकपाल यादव के खेत में कुलदीप का गला पीले रंग के दुपट्टे से घोंट कर उस की हत्या कर दी और दुपट्टे से बांध कर उस की लाश को नीम के पेड़ पर लटका दिया. उस के चेहरे पर भी तेजाब डाल दिया गया. फिर निश्चिंत हो कर सब घर लौट आए.

कुलदीप की हत्या उन के लिए बड़ी गलती साबित हुई.

थानाप्रभारी सतेंद्र भड़ाना ने अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या के एवज में दिए गए ढाई लाख रुपए, शराब के खाली पव्वे और तेजाब की खाली बोतल बरामद कर ली.

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आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी करने के बाद चारों अभियुक्तों विनीत उर्फ लाला, किशोरी, जगपाल और श्योराज को न्यायालय में पेश किया गया, वहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरे पति और उनके दोस्त चाहते हैं कि वे एक दूसरे की बीवी के साथ सेक्स करें, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं बैंक में कार्यरत हूं. मेरा विवाह 6 महीने पहले हुआ है. 4 माह से मायके में हूं. कारण, मैं ने पति की एक अनैतिक बात नहीं मानी, जिस कारण वे मुझ से नाराज हैं. शादी के बाद हम इन के एक नवविवाहित दोस्त दंपती के साथ हनीमून पर गए थे. वहां ये दोनों दोस्त चाहते थे कि एक दूसरे की बीवी के साथ सेक्स करें. दोस्त की बीवी इस के लिए सहमत थी, पर मुझे ऐतराज था. अत: मैंने इस के लिए साफ इनकार कर दिया. हनीमून के बाद हम घर लौट आए. यहां आ कर भी पति ने अपनी जिद नहीं छोड़ी. इस बात को ले कर काफी कलह हुई और मैं अपने मायके लौट आई. क्या मुझे पति से तलाक मिल सकता है?

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जवाब

आप के पति की मांग अनुचित है, पर इस के लिए आप को घर छोड़ने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी. यौन आनंद के लिए युवा इस तरह के प्रयोग अकसर करते हैं. आप यदि वास्तव में इस प्रयोग को परंपरा के विरुद्ध मानती हैं तो छोड़ दें पर इस की वजह से तलाक की नौबत आ जाए, यह भी गलत होगा.

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