लेखक- कृष्णकांत
पद्मजा उस दिन घर पर अकेली गुमसुम बैठी थीं. पति संपत कैंप पर थे तो बेटा उच्च शिक्षा के लिए पड़ोसी प्रदेश में चला गया था और बेटी समीरा शादी कर के अपने ससुराल चली गई. बेटी के रहते पद्मजा को कभी कोई तकलीफ महसूस नहीं हुई. वह बड़ी हो जाने के बाद भी छोटी बच्ची की तरह मां का पल्लू पकड़े, पीछेपीछे घूमती रहती थी. एक अच्छी सहेली की तरह वह घरेलू कामों में पद्मजा का साथ देती थी. यहां तक कि वह एक सयानी लड़की की तरह मां को यह समझाती रहती थी कि किस मौके पर कौन सी साड़ी पहननी है और किस साड़ी पर कौन से गहने अच्छे लगते हैं.
ससुराल जाने के बाद समीरा अपनी सूक्तियां पत्रों द्वारा भेजती रहती जिन्हें पढ़ते समय पद्मजा को ऐसा लगता मानो बेटी सामने ही खड़ी हो.
उस दिन पद्मजा बड़ी बेचैनी से डाकिए की राह देख रही थीं और मन में सोच रही थीं कि जाने क्यों इस बार समीरा को चिट्ठी लिखने में इतनी देर हो गई है. इस बार क्या लिखेगी वह चिट्ठी में? क्या वह मां बन जाने की खुशखबरी तो नहीं देगी? वैसी खबर की गंध मिल जाए तो मैं अगले क्षण ही वहां साड़ी, फल, फूलों के साथ पहुंच जाऊंगी.
तभी डाकिया आया और उन के हाथ में एक चिट्ठी दे गया. पद्मजा की उत्सुकता बढ़ गई.
चिट्ठी खोल कर देखा तो उन के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. कारण, चिट्ठी में केवल 4 ही पंक्तियां लिखी थीं. उन्होंने उन पंक्तियों पर तुरंत नजर दौड़ाई.
‘‘मां,
तुम ने कई बार मेरी घरगृहस्थी के बारे में सवाल किया, लेकिन मैं इसलिए कुछ भी नहीं बोली कि अगर तुम्हें पता चल जाए तो तुम बरदाश्त नहीं कर पाओगी. मां, हम धोखा खा चुके हैं. वह शराबी हैं, जब भी पी कर घर आते हैं, मुझ से झगड़ा करते हैं. कल रात उन्होंने मुझ पर हाथ भी उठाया. अब मैं इस नरक में एक पल भी नहीं रह पाऊंगी. इसलिए सोचा कि इस दुनिया से विदा लेने से पहले तुम्हारे सामने अपना दिल खोलूं, तुम से भी आज्ञा ले लूं. मुझे माफ करो, मां. यह मेरी आखिरी चिट्ठी है. मैं हमेशाहमेशा के लिए चली जा रही हूं, दूर…इस दुनिया से बहुत दूर.
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-समीरा.’’
पद्मजा को लगा मानो उन के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. ऐसा लगा मानो एक भूचाल आया और वह मलबे के नीचे धंसती जा रही हैं.
‘क्या यह सच है? उन के दिल ने खुद से सवाल पूछा, क्योंकि ‘समीरा के लिए जब यह रिश्ता पक्का हुआ था तो वह कितनी खुश थी. समीरा तो फूली न समाई. लेकिन ऐसा कैसे हो गया?’
अतीत की बातें सोच कर पद्मजा का मन बोझिल हो गया. उन की आंखें डबडबाने लगीं.
वह फिर सोचने लगीं कि इस वक्त घर पर मैं अकेली हूं. अब कैसे जाऊं? ट्रेन या बस से जाने पर तो कम से कम 5-6 घंटे लग ही जाएंगे.’ तभी उन के दिमाग में एक उपाय कौंध गया और तुरंत उन्होंने अपने पति के मित्र केशवराव का नंबर मिलाया.
‘‘भैया, मुझे फौरन आप की गाड़ी चाहिए. मुझे अभीअभी खबर मिली है कि समीरा की हालत बहुत खराब है. आप का एहसान कभी नहीं भूलूंगी,’’
केशवराव ने तुरंत ड्राइवर सहित अपनी गाड़ी भेज दी. गाड़ी में बैठते ही पद्मजा ने ड्राइवर से कहा, ‘‘भैया, जरा गाड़ी तेज चलाना.’’
गाड़ी नेशनल हाईवे पर दौड़ रही थी. पीछे वाली सीट पर बैठी पद्मजा का मन बेचैन था. रहरह कर उन्हें अपनी बेटी समीरा की लाश आंखों के सामने प्रत्यक्ष सी होने लगती थी.
कार की रफ्तार के साथ पद्मजा के विचार भी दौड़ रहे थे. उन का अतीत चलचित्र की भांति आंखों के सामने साकार होने लगा.
‘पद्मजा,’ तेरे मुंह में घीशक्कर. ले… लड़के वालों से चिट्ठी मिल गई. उन को तू पसंद आ गई,’ सावित्रम्मा का मन खुशी से नाच उठा.
‘मां, मैं कई बार तुम से कह चुकी हूं कि यह रिश्ता मुझे पसंद नहीं है. मैं ने शशिधर से प्यार किया है. मैं बस, उसी से शादी करूंगी. वरना…’ पद्मजा की आवाज में दृढ़ता थी.
‘चुप, यह क्या बक रही है तू. अगर कोई सुन लेता तो एक तो हम यह रिश्ता खो बैठेंगे और दूसरे तू जिंदगी भर कुंआरी बैठी रहेगी. मुझे सब पता है. शशिधर से तेरी जोड़ी नहीं बनेगी. वह तेरे लायक नहीं. हम तेरे मांबाप हैं. तुझ से ज्यादा हमें तेरी भलाई की चिंता है. हम तेरे दुश्मन थोड़े ही हैं,’ कहती हुई मां सावित्री गुस्से में वहां से चली गईं.
मां की बातों का असर पद्मजा पर बिलकुल नहीं पड़ा, उलटे उस का क्रोध दोगुना हो गया. वह सोचने लगी कि वह मां मां नहीं और वह बाप बाप नहीं जो अपनी संतान की पसंद, नापसंद को न समझे.
वैसे पद्मजा शुरू से ही तुनकमिजाज थी. उस में जोश ज्यादा था. जब भी कोई ऐसी घटना हो जाती थी जो उस के मन के खिलाफ हो, तो तुरंत वह आपे से बाहर हो जाती. वह अगले पल अपने कमरे में जा कर अंदर से दरवाजा बंद कर देती और पिता की नींद की गोलियां मुट्ठी भर ले कर निगल भी लेती थी.
सावित्रम्मा बेटी पद्मजा का स्वभाव अच्छी तरह से जानती थीं. इस से पहले भी एक बार मेडिकल में सीट न मिलने पर उस ने ब्लेड से अपनी एक नस काट दी थी. नतीजा यह हुआ कि उस की जान आफत में पड़ गई. इसी वजह से, सावित्रम्मा अपनी बेटी के व्यवहार पर नजर गड़ाए बैठी थीं. बेटी के अपने कमरे में घुसते ही उस ने यह खबर पति के कान में डाल दी. पतिपत्नी दोनों के बारबार बुलाने पर भी वह बाहर न आई. लाचार हो कर पतिपत्नी ने दरवाजा तोड़ दिया और पद्मजा को अस्पताल में दाखिल कर दिया.
‘पद्मा, यह तुम क्या कह रही हो? तुम्हारी मूर्खता रोजरोज बढ़ती जा रही है. पढ़ीलिखी हो कर तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए.’ संपत बड़ी बेचैनी से पत्नी पद्मजा से बोला.
पद्मजा एकदम बिगड़ गई.
‘हां…पढ़ीलिखी होने की वजह से ही मैं आप से यह पूछ रही हूं. मेरे साथ अन्याय हो तो मैं क्यों बरदाश्त करूं? और कैसे बरदाश्त करूं? मैं पुराणयुग की भोली अबला थोड़े ही हूं कि आप अपनी मनमानी करते रहें, बाहर गुलछर्रे उड़ाएं, ऐश करें और मैं चुपचाप देखती रहूं. आप कभी यह नहीं समझना कि मैं सीतासावित्री के जमाने की हूं और आप की हर भूल को माफ कर दूंगी. आखिर मैं ने क्या भूल की है? क्या अपने पति पर सिर्फ अपना ही हक मानना अपराध है? दूसरी महिलाओं से नाता जोड़ना, उन के चारों ओर चक्कर काटना तो क्या मैं चुपचाप देखती रहूं.’
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‘वैसा पूछना गलत नहीं हो सकता है लेकिन मैं ने वैसा किया कब था? यह सब तेरा वहम है. तेरे दिमाग पर शक का भूत सवार है. वह उठतेबैठते, किसी के साथ मिलते, बात करते मेरा पीछा कर रहा है. तेरी राय में मेरी कोई लेडी स्टेनो नहीं रहनी चाहिए. मेरे दोस्तों की बीवियों से भी मुझे बात नहीं करनी चाहिए… है न.’
‘ऐसा मैं ने थोड़े ही कहा है, जो कुछ मैं ने अपनी आंखों से देखा और कानों से सुना वही तो बता रही हूं. सचाई क्या है, मैं जानती हूं. आप के इस तरह चिल्लाने से सचाई दब नहीं सकती.’
राजनीतिक पत्रकारिता छोड़कर फिल्म निर्माता व निर्देशक बने सुभाष कपूर अब तक ‘फंस गए रे ओबामा’, ‘जौली एलएलबी’, ‘गुड्ड न रंगीला’,’ ‘जौली एलएलबी 2’ जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं. अब वह उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठ भूमि में फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ लेकर आ रहे हैं, जिसका टीजर पोस्टर आज ही वायरल हुआ है .
इस फिल्म की कथा एक ऐसी सशक्त महिला की है, जिसने उन पुरुषों और उस समाज को बर्बाद करने का संकल्प लिया है, जिन्होंने उसे त्यागने, उखाड़ने और हराने की हर संभव कोशिश की.
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फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ में शीर्ष भूमिका रिचा चड्ढा निभा रही हैं .इसके अलावा सौरभ शुक्ला, मानव कौल, अक्षय ओबेराय और शुभृ ज्योति की आम भूमिकाएं हैं.
“ए कांगड़ा टाकीज प्रोडक्शन” की फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर ‘का निर्माण भूषण कुमार, किशन कुमार, नरेंद्र कुमार और डिंपल खरबंदा तथा लेखन व निर्देशन सुभाष कपूर ने किया है. यह फिल्म 22 जनवरी 2021 को देश के सभी सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी.
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बौलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अक्सार अपने फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं.
बता दें कि अनुष्का शर्मा अपनी प्रेग्नेंसी को जमकर एन्जाय कर रही हैं. दरअसल एक्ट्रेस इसकी जानकारी वह खुद सोशल मीडिया पर फैंस को देती हैं. हाल ही में अनुष्का शर्मा ने अपनी इंस्टास्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया है. एक्ट्रेस के इस वीडियो को देखकर आप हैरान रह जाएंगे.
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दरअसल, अनुष्का शर्मा इस वीडियो में ट्रेडमिल पर तेजी से चलती हुईं दिख रही है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. प्रेग्नेंसी में भी अनुष्का ने वर्कआउट करना बंद नहीं किया हैं.
आपको बता दें कि अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने अपनी एक तस्वीर के जरिए फैंस के साथ शेयर किया था कि उनके घर जनवरी 2021 में नन्हा मेहमान आने वाला है. इस तस्वीर में अनुष्का शर्मा ने पहली बार बेबी बंप फ्लान्ट किया था. ये कपल अपने पहले बच्चे के लिए काफी एक्साइटेड हैं.
छोटे पर्दे का मशहूर सीरियल कसौटी जिंदगी पहले सीजन के सीजेन खान (Cezanne Khan) यानि अनुराग बासु काफी मशहूर हुए. इस सीरियल के कारण सीजेन खान ने खूब लोकप्रियता हासिल की थी.
इस सीरियल में सीजेन खान ने अनुराग बासु का किरदार में थे. फैंस ने इनके किरदार को बेहद पसंद किया. अनराग बासु और प्रेरणा (श्वेता तिवारी) की जोड़ी को फैंस ने काफी पसंद किया था.
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लेकिन काफी लम्बे समय से सीजेन खान स्क्रिन से गायब है पर अब वह अपनी पर्सनल लाइफ के चलते फिर से सुर्खियों में छाए हुए हैं. जी हां, अनुराग बासु यानि सीजेन खान को असल जिंदगी में किसी को अपना दिल दे बैठे हैं.
बताया जा रहा है कि सीजेन खान को यूपी की एक लड़की से प्यार हो गया है. साथ ही सीजेन खान ने ये भी कहा है कि वह इसी साल यानि 2021 में ही शादी भी करेंगे.
खबरों के अनुसार सीजेन खान पिछले 3 साल से उस लड़की को डेट कर रहे हैं. सीजेन खान ने अपने रिलेशनशिप के बारे में बात करते हुए कहा है कि ‘वह मेरे लिए बहुत खास है. बीते 3 साल से हम एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं. हम दोनों साथ में बहुत खुश हैं और हम इसी साल शादी भी करने वाले हैं.
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रिपोर्टस के अनुसार सीजेन खान ने अपनी गर्लफ्रेंड का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने पहली मुलाकात से जुड़ी खास बातें शेयर की. उन्होंने बताया कि वह एक कौमन फ्रेंड के जरिए अपनी गर्लफ्रेंड से मिले थे.
वह अमरोहा (उत्तर प्रदेश) में रहती है. हमने साल 2020 में शादी करने की प्लानिंग की थी लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते हमें इस प्लान को आगे बढ़ाना पड़ा था.
1977 लेख टंडन के निर्देशन में एक हिंदी फिल्म ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’प्रदर्शित हुई थी. रामेश्वरी और प्रेम किशन की जोड़ी थी. फिल्म ने सफलता की कई रिकौर्ड तोड़े थे. रमेश को प्रेम किशन रातों-रात स्टार बन गए थे. मगर कुछ ही समय बाद दोनों कलाकार कहां गए किसी को पता नहीं चला. रामेश्वरी ने तो फिर बाद में बौलीवुड को ही अलविदा कह दिया. जबकि प्रेम किशन सीरियलों के निर्माता बन गए और अब उनके बेटे सिद्धार्थ पी मल्होत्रा मशहूर फिल्म निर्देशक है.
बहरहाल अब उसी नाम पर अभय सिन्हा एंड इज माई ट्रिप डाट कौम प्रस्तुत भोजपुरी फिल्म ‘दुल्हिन वही जो पिया मन भाये’ बन रही है, जिसका फर्स्ट लुक 2021 के पहले दिन जारी होते ही वायरल हो गया. इस फिल्म का ट्रेलर भी जल्द ही जारी किया जायेगा. फिल्म में भोजपुरी सुपर स्टार खेसारीलाल यादव, काजल राघवानी, मधु शर्मा और पद्म सिंह मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं. फिल्म के जारी पोस्टर के एक भाग में खेसारीलाल यादव, काजल राघवानी के साथ और दूसरे भाग में मधु शर्मा के साथ नजर आ रहे हैं. फिल्म के फर्स्ट लुक से जाहिर होता है कि यह एक रोमांटिक फिल्म होने के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक फिल्म है.
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फिल्म ‘दुल्हिन वही जो पिया मन भाये’ के निर्माता अभय सिन्हा, प्रशांत जम्मूवाला और समीर अफताब हैं. फिल्म के लेखक, निर्देशक और संगीतकार रजनीश मिश्रा हैं.
लंबे समय बाद रजनीश मिश्रा के निर्देशन में वापसी से कयास लगाए जा रहे हैं 2021 में कुछ नया धमाका होने वाला है.वैसे खेसारीलाल यादव और रजनीश मिश्रा की जोड़ी को भोजपुरी बौक्स औफिस पर पहले भी खूब सराहा गया है.वहीं, फिल्म के निर्माताओं ने बताया कि इस फिल्म की 90 प्रतिशत शूटिंग लंदन में की गई है.बीते साल कोरोना की वजह से फिल्म एक साल आगे चली गई, मगर अब फिल्म भव्य पैमाने पर रिलीज की जायेगी.
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फिल्म ‘दुल्हिन वही जो पिया मन भाये’ के कैमरामैन वासु, सह निर्माता रंजीत सिंह, राम अरोड़ा और मड्ज मूवीज, गीतकार कुंदन प्रीत, प्यावरे लाल यादव, यादव राज, अजीत हलचल और रजनीश मिश्रा हैं.
बौलीवुड के फेमस कपल मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) और अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) इन दिनों गोवा में क्वालिटी टाइम स्पेन्ड कर रहे हैं.
दरअसल इसकी जानकारी मलाइका अरोड़ा ने खुद इंस्टाग्रम पर दी है. एक्ट्रेस ने फैंस के साथ कुछ फोटोज शेयर किया है. इन फोटोज में दोनों नए साल की छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं.
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मलाइका अरोड़ा ने ये तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि कपल अपने नए साल की छुट्टियों को बेहद मजे से एक साथ एन्जाय कर रहे हैं.
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नए साल का जश्न मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर ने गोवा में ही सेलिब्रेट किया था. जिसके बाद कपल ने फैंस को इस बात की जानकारी दी थी कि वे अपना क्वालिटी टाइम स्पेन्ड कर रहे हैं.
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हाल ही में मलाइका अरोड़ा ने अपनी एक बेहद सेंसेशनल तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. जिसमें अदाकारा पूल के पानी से तर-बदर दिख रही हैं.
इन छुट्टियों के दौरान मलाइका अरोड़ा ने अर्जुन कपूर के लिए लजीज खाना बनाया है. जिसकी जानकारी एक्टर ने इस तस्वीर से दी है. ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई है. फैंस इन तस्वीरों को खूब पसंद कर रहे हैं. बताया ये भी जा रहा है कि ये कपल अगले साल शादी के बंधन में बंध सकते हैं.
बिग बौस 14 के कंटेस्टेंट निशांत सिंह मलखानी का एक्सिडेंट हो गया है. बता दें कि निशांत पूरी तरह सुरक्षित हैं. दरअसल वह मुंबई से जैसलमेर जा रहे थे और रास्ते में उनकी गाड़ी टकरा गई.
खबरों के अनुसार निशांत सिंह मलखानी ने बताया कि उन्हें एक खरोंच भी नहीं आई है. पर उनकी गाड़ी की हालत काफी बुरी हो गई है. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार निशांत ने अपने एक्सीडेंट का पूरा किस्सा शेयर किया और कहा कि जब पूरा देश न्यू ईयर सेलिब्रेशन में व्यस्त होने वाला था, उससे एक मिनट पहले ही उनका एक्सिडेंट हुआ.
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बिग बौस फेम निशांत ने ये भी कहा कि किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं, मुझे खरोंच भी नहीं आई है. मैं पूरी तरह से ठीक हूं. लेकिन मेरी गाड़ी पूरी तरह से खराब हो चुकी है, जिसे उठाने के लिए क्रेन को बुलाना पड़ा.
निशांत सिंह ने आगे बताया कि मैं ड्राइव कर रहा था तभी अचानक से गलत साइड पर सामने से गाड़ी को आते देखा. सड़क थोड़ी कम चौड़ी थी और सभी को बचाने के लिए मैंने गाड़ी सड़क के किनारे उतारी. मेरी गाड़ी एक गहरे गड्ढे में जा गिरी.
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लेकिन हम सभी सुरक्षित हैं और किसी को भी चोट नहीं आई है. जिसने हमारी गाड़ी को अपनी गाड़ी से हिट किया था वह वहां से भाग गया. किसी तरह बाद में हम सभी होटल पहुंच सके.
मीडिया से बातचीत के दौरान निशांत ने आगे बताया कि मेरे लिए यह काफी शौकिंग था, क्योंकि एक्सिडेंट 11:59 पर हुआ. एक मिनट पहले जब सभी लोग न्यू ईयर का जश्न मनाने वाले थे.
निशांत ने ये भी बताया कि मैंने कभी रोड ट्रिप नहीं की. जब मेरे पास जैसलमेर का काम आया तो मैंने सोचा कि मैं ड्राइव करके जाऊंगा.
‘‘आस्तीन के सांप, मेरी जिंदगी बरबाद कर देने के बाद अब यहां क्या लेने आए हो?’’
‘‘दीदी वो…’’
‘‘खबरदार जो अपनी गंदी जबान से मुझे दीदी कहा…’’
‘‘दीदी, प्लीज, मेरी बात तो सुनिए. मुझे खुद नहीं पता था कि सुमित साहब के इरादे इतने भयानक हैं.’’
‘‘कब से जानते हो तुम सुमित को?’’
‘‘मैं पहले उन्हीं के आफिस में काम करता था. उन के बारे में बहुत ज्यादा तो नहीं जानता था. बस, इतना पता था कि मालिक की मौत के बाद अब साहब ही कंपनी के कर्ताधर्ता हैं. मालकिन भी उन्हीं के इशारों पर नाचती हैं.
‘‘मैं अकसर आफिस में खाली समय में पुस्तकें पढ़ा करता था. सुमित साहब मेरे इस शौक से वाकिफ थे. उन्होंने मुझे इस के लिए कभी नहीं टोका जिस के लिए मैं उन का शुक्रगुजार था. एक दिन उन्होंने मुझे अकेले में बुलाया और कहा कि मुझे उन का एक काम करना होगा. आफिस में व्यस्तता की वजह से वह अपनी बीवी यानी आप की पर्याप्त मदद नहीं कर पाते जिस से आप काफी तनाव में रहती हैं. वह मुझे आप के कालिज में लगवा देंगे. मुझे धीरेधीरे आप को विश्वास में ले कर घर और विशू की देखभाल का काम संभालना होगा. लेकिन आप को कुछ पता नहीं चलना चाहिए.’’
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‘‘ऐसा क्यों?’’ मधु ने आश्चर्य से पूछा.
‘‘मुझे भी उन की यह बात समझ में नहीं आई थी. इसीलिए मैं ने भी यही सवाल किया था. तब उन्होंने बताया कि आप नौकर या आया रखने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि एक अनजान आदमी से आप को हमेशा घर और विशू की सुरक्षा की चिंता सताती रहेगी. इसलिए मुझे पहले जानेअनजाने आप की मदद कर आप का विश्वास जीतना होगा. इस कार्य में साहब ने मेरी पूरी मदद करने का भरोसा भी दिया क्योंकि वह आप को परेशान नहीं देख सकते थे.
‘‘उस रोज रविवार के दिन जब आप ने मुझे लंच पर साहब से मिलवाने की बात कही थी तो मुझे लगा शायद आज साहब आप के सामने अपने सरप्राइज का खुलासा करेंगे, लेकिन वह तो मेरे आने से पहले ही चले गए थे. सरप्राइज तो उन्होंने मुझे कल बुला कर दिया.
‘‘वह कंपनी की विधवा मालकिन से शादी रचा कर कंपनी के एकछत्र मालिक बनना चाहते हैं लेकिन इस के लिए उन्हें पहले आप से तलाक लेना होगा और इस के लिए उन के पास आप के खिलाफ ठोस साक्ष्य होने चाहिए. आप पर चरित्रहीनता का लांछन लगाने के लिए उन्होंने मुझे मोहरा बनाया. मैं तो यह सोच कर उन के इशारों पर चलता रहा कि एक नेक काम में मैं उन की मदद कर रहा हूं. पर छी, थू है ऐसे आदमी पर जो पैसे के लालच में इतना गिर गया है कि अपनी बीवी के चरित्र पर ही कीचड़ उछाल रहा है.’’
‘‘लेकिन उन्होंने तुम्हें कल क्यों बुलाया?’’
‘‘वह नीच आदमी चाहता है कि सचाई जानने के बाद भी मैं उस के इशारों पर काम करूं. उस ने 50 हजार रुपए निकाल कर मेरे सामने रख दिए और कहा कि वह और भी देने को तैयार है लेकिन मुझे अदालत में उस की हां में हां मिलानी होगी. बयान देना होगा कि आप चरित्रहीन हैं और आप मेरे संग…’’ शरम से मणिकांत ने गरदन झुका ली.
‘‘तो अब तुम क्या…’’ मधु ने थूक गटकते हुए बात अधूरी छोड़ दी.
‘‘मेरा चरित्र उस नीच आदमी के चरित्र जितना सस्ता नहीं है, दीदी,’’ मणिकांत बोला, ‘‘पैसा होते हुए भी और पैसे के लालच में वह इतना गिर गया कि अपनी बीवी के चरित्र का सौदा करने लगा. ऐसा पैसा पा कर भी मैं क्या करूंगा जिस से इनसान इनसान न रहे, हैवान बन जाए. हालांकि बात न मानने पर उस ने मुझे जान से मारने की धमकी दी है पर मैं उसे उस के कुटिल मकसद में कामयाब नहीं होने दूंगा. इस के लिए चाहे मुझे अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े.’’
‘‘तुम्हें अपनी जान देने की जरूरत नहीं है, भाई,’’ मधु भावुक स्वर में बोली, ‘‘मुझे अब न उस आदमी की चाह है और न उस के पैसे की. इसलिए तलाक हो या न हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं अपने विशू को ले कर यहां से बहुत दूर चली जाऊंगी. तुम भी उस की बात मान लो. पैसा सबकुछ तो नहीं होता लेकिन बहुतकुछ होता है. उस पैसे से एक नई जिंदगी शुरू करो.’’
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‘‘थूकता हूं मैं ऐसी नई जिंदगी पर. और आप यह कैसी बहकीबहकी बातें कर रही हैं? अन्याय सहने वाला भी उतना ही दोषी है जितना कि अन्याय करने वाला. दीदी, यह पाठ भी आप ही ने तो मुझे पढ़ाया था. आप कुछ भी करें लेकिन मैं दुनिया को आप के चरित्र की सचाई बता कर रहूंगा और उस चरित्रहीन को समाज के सामने नंगा कर दूंगा.’’
आवेश से तमतमाते मणिकांत की बातों ने मधु को झकझोर कर रख दिया. उस के मानसपटल में बिजली कौंध रही थी और उस में एक ही वाक्य उभरउभर कर आ रहा था. करोड़ों की संपत्ति का स्वामी सुमित इस सद्चरित के स्वामी मणिकांत के सम्मुख कितना दीनहीन है.
लेखक- अनिल के. माथुर
‘‘उफ, इसे भी अभी ही बजना था,’’ आटा सने हाथों से ही मधु ने दरवाजा खोला. सामने मणिकांत खड़ा था, जो उसी के कालिज में लाइब्रेरी का चपरासी था.
‘‘तुम…’’ बात अधूरी छोड़ मधु रोते विशू को उठाने लपकी मगर अपने आटा सने हाथ देख कर ठिठक गई. परिस्थिति को भांपते हुए मणिकांत ने अपने हाथ की पुस्तकें नीचे रखीं और विशू को गोद में उठा कर चुप कराने लगा.
‘‘मैं अभी आई,’’ कह कर मधु हाथ धोने रसोई में चली गई. एक मिनट बाद ही तौलिए से हाथ पोंछते हुए वह फिर कमरे में आई और मणिकांत की गोद से विशू को ले लिया.
‘‘मैडम, आप ये पुस्तकें लाइब्रेरी में ही भूल आई थीं,’’ पुस्तकों की ओर इशारा करते हुए मणिकांत ने कुछ इस तरह से कहा मानो वह अपने आने के मकसद को जाहिर कर रहा हो.
मधु को याद आया कि पुस्तकें ढूंढ़ कर जब वह उन्हें लाइब्रेरियन से अपने नाम इश्यू करवा रही थी तभी उस का मोबाइल बज उठा था. लाइब्रेरी की शांति भंग न हो इसलिए वह बात करती हुई बाहर आ गई थी. पति सुमित का फोन था. वह आफिस के कुछ महत्त्वपूर्ण लोगों को डिनर पर ला रहे थे. मधु को जल्दी
घर पहुंचना था. जल्दबाजी में वह अंदर से पुस्तकें लेना भूल गई और सीधे घर आ गई थी.
‘‘अरे, यह तो मैं कल ले लेती, पर तुम्हें मेरे घर का पता कैसे चला?’’
‘‘जहां चाह वहां राह. किसी से पूछ लिया था. लगता है आप खाना बना रही हैं. बच्चे को तब तक मैं रख लेता हूं,’’ मणिकांत ने विशू को गोद में लेने के लिए दोनों हाथ आगे बढ़ाए तो मधु पीछे हट गई.
‘‘नहीं…नहीं, मैं सब कर लूंगी. मेरा तो यह रोज का काम है. तुम जाओ,’’ दरवाजा बंद कर वह विशू को सुलाने का प्रयास करने लगी. विशू को थपकी देते हाथ मानो उस के दिमाग को भी थपथपा रहे थे.
उस की जिंदगी कितनी भागम- भाग भरी हो गई है. बाई तो बस, बंधाबंधाया काम करती है, बाकी सब तो उसे ही देखना पड़ता है. सुबह जल्दी उठ कर लंच पैक कर सुमित को आफिस रवाना करना, विशू को संभालना, खुद तैयार होना, विशू को रास्ते में क्रेच छोड़ना, कालिज पहुंचना, लौटते समय विशू को लेना, घर पहुंच कर सुबह की बिखरी गृहस्थी समेटना और उबासियां लेते हुए सुमित का इंतजार करना.
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थकेहारे सुमित रात को कभी 10 तो कभी 11 बजे लौटते. कभी खाए और कभी बिना खाए ही सो जाते. मधु जानती थी, प्राइवेट नौकरी में वेतन ज्यादा होता है तो काम भी कस कर लिया जाता है. यद्यपि पहले स्थिति ऐसी नहीं थी. सुमित 8 बजे तक घर लौट आते थे और शाम का खाना दोनों साथ खाते थे. लेकिन जब से सुमित की कंपनी के मालिक की मृत्यु हुई थी और उन की विधवा ने सारा काम संभाला था तब से सुमित की जिम्मेदारियां भी बहुत बढ़ गई थीं और उस ने देरी से आना शुरू कर दिया था.
मधु शिकायत करती तो सुमित लाचारी से कहते, ‘‘क्या करूं डियर, आना तो मैं भी जल्दी चाहता हूं पर मैडम को अभी काम समझने में समय लगेगा. उन्हें बताने में देर हो जाती है.’’
एक विधवा के प्रति सहज सहानुभूति मान कर मधु चुप रह जाती.
शादी से पहले की प्रवक्ता की अपनी नौकरी वह छोड़ना नहीं चाहती थी. उस का पढ़ने का शौक शादी के बाद तक बरकरार था. इसलिए अपनी व्यस्ततम दिनचर्या में से समय निकाल कर वह लाइब्रेरी से पुस्तकें लाती रहती थी और देर रात सुमित का इंतजार करते हुए उन्हें पढ़ती रहती. हालात से अब उस ने समझौता कर लिया था. पर कभीकभी कुछ बेहद जरूरी मौकों पर उसे सुमित की गैरमौजूदगी खलती भी थी.
उस दिन भी वह आटो में गृहस्थी का सारा सामान ले कर 2 घंटे बाद घर लौटी तो थक कर चूर हो चुकी थी. गोद में विशू को लिए उस ने दोनों हाथों में भरे हुए थैले उठाने चाहे तो लगा चक्कर खा कर वहीं न गिर पड़े. तभी जाने कहां से मणिकांत आ टपका था.
तुरतफुरत मणिकांत ने मधु को मय सामान और विशू के घर के अंदर पहुंचा दिया था. शिष्टतावश मधु ने उसे चाय पीने के लिए रोक लिया. वह चाय बनाने रसोई में घुसी तो विशू ने पौटी कर दी. मधु उस के कपड़े बदल कर लाई तब तक देखा मणिकांत 2 प्यालों में चाय सजाए उस का इंतजार कर रहा था.
‘‘अरे, तुम ने क्यों तकलीफ की? मैं तो आ ही रही थी,’’ मधु को संकोच ने आ घेरा था.
‘‘तकलीफ कैसी, मैडम? आप को इतना थका देख कर मैं तो वैसे भी कहने वाला था कि चाय मुझे बनाने दें, पर…’’
‘‘अच्छा, बैठो. चाय पीओ,’’ मधु ने सामने के सोफे की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘अच्छा, तुम इधर कैसे आए?’’
‘‘इधर मेरा कजिन रहता है. उसी से मिलने जा रहा था कि आप दिख गईं,’’ चाय पीते हुए मणिकांत ने पूछा, ‘‘मैडम, साहब कहीं बाहर नौकरी करते हैं?’’
‘‘अरे, नहीं. इसी शहर में हैं पर दफ्तर में बहुत व्यस्त रहते हैं इसलिए घर देर से आते हैं. सबकुछ मुझे ही देखना पड़ता है,’’ मधु कह तो गई पर फिर बात बदलते हुए बोली, ‘‘तुम्हारे घर में कौनकौन हैं?’’
‘‘मांपिताजी हैं, जो गांव में रहते हैं. शादी अभी हुई नहीं है. थोड़ा पढ़ालिखा हूं इसलिए शहर आ कर नौकरी करने लगा. पढ़नेलिखने का शौक है इसलिए पुराने मालिक ने यहां लाइब्रेरी में लगवा दिया,’’ कहते हुए मणिकांत उठ खड़ा हुआ. मधु उसे छोड़ने बाहर आई. उसे वापस उसी दिशा में जाते देख मधु ने टोका, ‘‘तुम अपने कजिन के यहां जाने वाले थे न?’’
‘‘हां…हां. पर आज यहीं बहुत देर हो गई है. फिर कभी चला जाऊंगा.’’
उस का रहस्यमय व्यवहार मधु की समझ में नहीं आ रहा था. उसे तो यह भी शक होने लगा था कि वह अपने कजिन से नहीं बल्कि उसी से मिलने आया था.
रात को मधु ने सुमित को मणिकांत के बारे में सबकुछ बता दिया.
‘‘भई, कमाल है,’’ सुमित बोले, ‘‘एक तो बेचारा तुम्हारी इतनी मदद कर रहा है और तुम हो कि उसी पर शक कर रही हो. खुद ही तो कहती रहती हो कि मैं गृहस्थी और विशू को अकेली ही संभालतेसंभालते थक जाती हूं. कोई हैल्पिंगहैंड नहीं है. अब यदि यह हैल्पिंग- हैंड आ गया है तो अपनी शिकायतों को खत्म कर दो. चाहो तो उसे काम के बदले पैसे दे दिया करो ताकि तुम्हें उस से काम लेने में संकोच न हो.’’
‘‘हूं, यह भी ठीक है,’’ मधु को सुमित की बात जंच गई.
अब मधु गाहेबगाहे मणिकांत की मदद ले लेती. वह तो हर रोज आने को तैयार था पर मधु का रवैया भांप कम ही आता था. हां, जब भी मणिकांत आता मधु के ढेरों काम निबटा जाता. कभी बिना कहे ही शाम को ढेरों सब्जियां ले कर पहुंच जाता. मधु उसे हिसाब से कुछ ज्यादा ही पैसे पकड़ा देती. फिर वह देर तक विशू को खिलाता रहता, तब तक मधु सारे काम निबटा लेती. फिर मधु उसे खाना खिला कर ही भेजती थी.
पैसे लेने में शुरू में तो मणिकांत ने बहुत आनाकानी की पर जब मधु ने धमकी दी कि फिर यहां आने की जरूरत नहीं है तो वह पैसा लेना मान गया. विशू भी अब उस से बहुत हिलमिल गया था. मधु को भी उस की आदत सी पड़ गई थी.
मणिकांत का पढ़ने का शौक भी मधु के माध्यम से पूरा हो जाता था क्योंकि वह लाइब्रेरी से अच्छी पुस्तकें चुनने में उस की मदद करती थी. किसी पुस्तक के बारे में उसे घंटों समझाती. इस तरह अपनी नीरस जिंदगी में अब मधु को कुछ सार नजर आने लगा था.
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