बेगैरत औरत का खेल: भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

संजय के घर आनेजाने वाले लोगों के बारे में पूछने पर गुड्डू ने बताया कि 2 महीने पहले तक कांशीराम कालोनी की उसी बिल्डिंग में रहने वाले सचिन का संजय के घर काफी आनाजाना था. संजय की पत्नी रेशमा से सचिन के अवैध संबंध थे. लेकिन संजय ने उसे रंगेहाथों पकड़ा, तब से वह अपने अजीजगंज के पुराने घर में रहने लगा था. यह जानकारी पुलिस के लिए बड़े काम की थी.

इंसपेक्टर सिंह ने रेशमा के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस की सचिन से रोज घंटों बातें होने की बात पता चली. यह भी पता चला कि संजय के घर से निकलने के समय पर ही रेशमा ने सचिन को काल भी की थी, शायद संजय के घर से बाहर निकलने की बात बताने के लिए. उस ने सचिन को फोन किया होगा.

साक्ष्य मिले तो इंसपेक्टर सिंह ने सचिन के घर पर दबिश दी, लेकिन वह घर से फरार मिला. 9 दिसंबर, 2020 को दोपहर लगभग 2 बजे इंसपेक्टर प्रवेश सिंह ने चांदापुर तिराहे से सचिन को गिरफ्तार कर लिया. उस के बाद रेशमा को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया. कोतवाली में जब उन दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयां कर दी.

घटना से 2 महीने पहले रंगेहाथों पकड़े जाने के बाद से रेशमा और संजय में अकसर विवाद होने लगा. यहां तक कि संजय ने रेशमा का मोबाइल भी तोड़ दिया था. इस पर सचिन ने उसे बात करने के लिए दूसरा मोबाइल ला कर दे दिया था. सचिन अब कांशीराम कालोनी में नहीं रहता था, लेकिन वहां रोज आताजाता था.

अपने बीच संजय को आया देख कर रेशमा बौखला उठी. वह पति को छोड़ कर सचिन से शादी कर के उस के साथ रहना चाहती थी. इस के लिए रेशमा ने सचिन पर दबाव बनाया कि वह संजय की हत्या कर दे. उस के बाद वह शादी कर के उस के साथ रहने लगेगी. संजय के जीवित रहते यह  संभव नहीं होगा.

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प्रेमिका की सलाह पर अमल करने के लिए सचिन तैयार हो गया. इस के बाद उस ने तमंचे व कारतूस का इंतजाम किया. उस ने एकदो नहीं 4 बार संजय को मारने की कोशिश की थी, लेकिन तमंचा चलाने की उस की हिम्मत नहीं हुई. इस पर रेशमा ने सचिन को धमकी दी कि यदि उस में यह थोड़ा सा काम करने की हिम्मत नहीं है तो वह उसे छोड़ देगी. इस से सचिन ने अगली बार हर हाल में संजय को मारने का वादा किया.

3 दिसंबर को रात साढ़े 11 बजे जब गुड्डू का फोन आया तो संजय बोलेरो से उस से मिलने के लिए निकला. संजय के घर से निकलते ही रेशमा ने सचिन को फोन किया और संजय के घर से निकलने की बात बताई. सचिन उस समय कांशीराम कालोनी में ही था. सचिन के पास बजाज पल्सर बाइक थी.

सचिन संजय को ओवरटेक करते हुए आगे निकला और गोल चक्कर से मुड़ कर वापस आते हुए संजय को रुकने का इशारा किया. उस के इशारे को समझ कर संजय ने गाड़ी रोक दी. संजय ने जैसे ही कार का शीशा नीचे किया. सचिन ने साथ लाए तमंचे से संजय पर फायर कर दिया.

गोली संजय की कनपटी के पास लग कर माथे से निकल गई. गोली लगते ही संजय बाईं ओर लुढ़क गया और उस की मौत हो गई. गोली मारने के बाद सचिन ने तमंचा और 2 कारतूस गर्रा नदी के किनारे फेंक दिए. इस के बाद रेशमा को संजय का काम तमाम होने की बात पता चली तो उस ने भी अपना मोबाइल तोड़ दिया.

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लेकिन दोनों के गुनाह छिप न सके और पकड़े गए. इंसपेक्टर सिंह ने सचिन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, 2 जिंदा कारतूस, पल्सर बाइक नंबर यूपी27यू1043, सचिन का मोबाइल 2 सिम सहित और रेशमा का टूटा मोबाइल एक सिम सहित बरामद कर लिया.

मुकदमे में रेशमा को धारा 120बी का अभियुक्त बना दिया गया. आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी करने के बाद पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बेगैरत औरत का खेल: भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

रेशमा की बात सुन कर सचिन को इस बात का एहसास हो गया कि रेशमा को भी उस से लगाव हो गया है. वह भी उस के सान्निध्य में आना चाहती है. उस ने देर न करते हुए रेशमा को बांहों में भर लिया. रेशमा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि मंदमंद मुसकराने लगी. क्योंकि वह भी यही चाहती थी.

दरअसल, जब से उस ने सचिन को देखा था तब से वह उस के मन को भा गया था. संजय से मिलने वाले सुख की उसे कमी नहीं थी, लेकिन वह उतना उसे पसंद नहीं था जितना सचिन. सचिन के आगे संजय कहीं नहीं ठहरता था.

जब आंखें किसी को देखना पसंद करने लगें तो दिल भी उसे चाहने लगता है. दिल की चाहत में वह बहकती चली गई और सचिन ने भी अपना हाथ बढ़ा कर उसे पाना चाहा तो वह उस के आगोश में जाने से अपने आप को रोक न सकी.

सचिन ने उसे गोद में उठा कर बैड पर लिटाया और उस के दिल के अरमानों को हवा देनी शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में दोनों के निर्वस्त्र शरीर एकदूसरे से गुंथे हुए थे.

उस दिन रेशमा ने मानमर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ कर नाजायज रिश्तों के दलदल में पैर डाले तो उस में धंसती चली गई. अब हर रोज संजय की गैरमौजूदगी में सचिन उस के घर में ही पड़ा रहता और रेशमा भी उस की बांहों का हार बनी रहती.

इस की जानकारी कालोनी के लोगों को भी हो गई. वे तरहतरह की बातें करने लगे. जल्द ही यह बात संजय के कानों तक भी पहुंच गई.

संजय ने जब रेशमा से इस बारे में बात की तो वह संजय से बोली कि सचिन के साथ भाईबहन के रिश्ते के अलावा कोई रिश्ता नहीं है. संजय को पत्नी रेशमा की बात पर यकीन करना ही पड़ा. लेकिन उस के मन से शक का बीज नहीं निकला. फिर एक दिन उस ने अचानक घर पहुंच कर दोनों को रंगेहाथ पकड़ा तो उस ने रेशमा की जम कर पिटाई की.

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रेशमा नाराज हो कर अपने मायके चली गई. बाद में संजय उसे मायके से बुला कर ले आया. पर रेशमा के दिल से सचिन के लिए मोहब्बत कम न हुई.

3/4 दिसंबर, 2020 की रात चौक कोतवाली की अजीजगंज चौकी के इंचार्ज जितेंद्र प्रताप सिंह रात्रि गश्त पर निकले. रात करीब साढ़े 12 बजे आवास विकास कालोनी पावर हाउस के सामने एक बोलेरो खड़ी मिली, जिस में ड्राइविंग सीट पर एक व्यक्ति था जो बाईं ओर लुड़का हुआ था.

जब पास जा कर जांच की तो उस व्यक्ति की कनपटी के पीछे गोली लगने का निशान था. गोली कनपटी से लग कर माथे के पास से निकल गई थी. चौकी इंचार्ज सिंह घायल व्यक्ति को तुरंत जिला अस्पताल ले गए. वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

मृत व्यक्ति की जेब से मिले मोबाइल फोन में सेव नंबरों पर पुलिस ने बात की तो उन्हीं नंबरों में उस की पत्नी रेशमा का फोन नंबर मिल गया. पुलिस ने रेशमा को जिला अस्पताल बुलाया. लाश देख कर रेशमा ने इस की शिनाख्त अपने पति संजय के रूप में की.

चौक थानाप्रभारी प्रवेश सिंह को चौकी इंजार्ज जितेंद्र प्रताप सिंह ने सूचना दे दी थी. सूचना पा कर वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. बोलेरो का निरीक्षण किया तो बाईं ओर खिड़की के पास पायदान पर हत्या में प्रयुक्त गोली पड़ी मिली, जिसे उन्होंने अपने कब्जे में ले लिया.

ड्राइविंग सीट के पास वाली सीट पर खून फैला हुआ था. इस का मतलब यह था कि किसी ने दाईं ओर से ड्राइविंग सीट पर बैठे संजय को गोली मारी थी और गोली काफी नजदीक से मारी गई थी. हत्यारा संजय का परिचित था, जिस के कहने पर या उसे देख कर संजय ने गाड़ी रोक ली होगी. गाड़ी रुकते ही हत्यारे ने तमंचे से संजय पर फायर कर दिया होगा.

इस के बाद जिला अस्पताल जा कर उन्होंने संजय की लाश का निरीक्षण किया. निरीक्षण कर डाक्टरों से बात करने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

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रेशमा से थानाप्रभारी ने पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात साढ़े 11 बजे पति के मोबाइल पर किसी का फोन आया था, जिस के बाद वह बोलेरो ले कर घर से निकल गए थे. इस के बाद क्या हुआ, उसे कुछ नहीं पता.

कोतवाली आ कर इंसपेक्टर प्रवेश सिंह ने रेशमा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

संजय के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो रात साढे़ 11 बजे गुड्डू नाम के व्यक्ति द्वारा काल करने की बात पता चली. गुड््डू संजय का दोस्त था. इंसपेक्टर सिंह ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि एक काम के सिलसिले में उस ने संजय को बुलाया था.

अगले भाग में पढ़ें- अपने बीच संजय को आया देख कर रेशमा बौखला उठी

‘पांडेजी जरा संभलके’ में सतीश रे का नया अवतार, देखें Viral पोस्टर

छपरा, बिहार निवासी छब्बीस वर्षीय यूट्यूबर सतीश रे ने बहुत ही कम समय में डिजिटल स्टार बनने के साथ ही बतौर हास्य अभिनेता अपनी एक अलग पहचान बना ली है. सतीश रे द्वारा निभाए गए ‘ईमानदार शर्मा,‘अल्फा पांडे’ और ‘बबन भोला’ जैसे किरदारों को मिली जबरदस्त शोहरत के चलते ही वह स्टार बने हुए हैं.

उनके शो ‘ईमानदार इंटरव्यू’ के साथ साथ भोजपुरी और बिहारी लहजे में उनके बोलने का अंदाज भी देशभर के युवाओं के बीच अपनी पैठ बना चुका है.

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वास्तव में वर्तमान समय में शहरी जिंदगी पूरी तरह से तनावपूर्ण और कई तरह की जटिलताओं से परिपूर्ण है.ऐसे में कुछ पलों के लिए ही सही पर तनाव मुक्त होने के लिए हर इंसान हंसने-हंसाने की जरूरत काफी महसूस करता है.

सतीश रे हर इंसान की इसी जरुरत को पूरा करने के लिए खास हास्य अंदाज के कार्यकम लेकर आए,जिन्हें काफी शोहरत मिली. अब सतीश रे एक हास्य वेब सीरीज ‘‘पांडेजी जरा संभलके‘’में 17 फरवरी से नजर आने वाले हैं. इस सीरीज की कहानी मनोज पांडे (सतीश रे) नामक एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी प्रेमिका दिबोशी (डॉली चावला) के साथ लिव- इन -रिलेशनशिप में रहता है.

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उसकी ख्वाहिश हमेशा से ही दिबोशी से शादी करने की रही है लेकिन उसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब वह खुद को अपनी बचपन की दोस्त इशिता (कनिका खन्ना) की तरफ आकर्षित पाता है, जिससे वेब सीरीज में हास्य की नई नई परिस्थितियों का निर्माण होता है.

अभिनेता प्रकाश जैस इस सीरीज में सतीश रे के दोस्त नरेश के अहम किरदार में नजर आएंगे. ‘पांडे जी संभलके‘ का निर्माण ‘‘मैत्री फिल्म प्रोडक्शन’’के गनु दादा और अमोल भोसले ने किया है.जबकि इस वेब सीरीज को निर्देशक विनय शांडिल्य और लेखकद्वय निखिल रायबोले औरभूपेंद्रकुमार नंदन हैं.

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‘कॅफे स्टुडिओज’ के बैनर तले बनी सीरीज ‘पांडे जी जरा संभलके‘ 17 फरवरी से Mx प्लेयर पर स्ट्रीम होगी. इस सीरीज का पोस्टर वैलेंटाइन डे के दूसरे दिन जारी होते ही वायरल हो गया.

Bigg Boss 14: फिनाले से पहले एजाज खान ने दिया बड़ा बयान

बिग बॉस 14 के  विनर का नाम कल यानि रविवार को अनाउंसमेंट किया जाएगा. शो के होस्ट सलमान खान इस बात का ऐलान कर देंगे कि बिग बॉस 14 का विनर कौन बनेगा.

फिनाले की रेस में अली गोनी, रुबीना दिलाइक, राहुल वैद्य, राखी सावंत और निक्की तम्बोली हैं. ऐसे में एजाज खान (Eijaz Khan) को उनके फैंस उनको बिग बॉस 14 के फिनाले में काफी मिस कर रहे हैं.

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बिग बॉस 14 फेम एजाज खान को इस बात का दुख है कि वो बिग बॉस 14 फिनाले का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. जी हां, एजाज खान ने खुद इस बात का खुलासा किया है.

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एजाज खान ने कहा है कि  बिग बॉस 14 को छोड़ने की मेरे पास एक वजह थी. बिग बॉस 14 के घर में मेरी जर्नी शानदार रही थी. जिस तरह से मैंने बिग बॉस 14 का गेम खेला था उस हिसाब से मुझे शो के फिनाले में होना चाहिए था.

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खबरों के अनुसार उन्होंने आगे बताया कि मैं खुद को बिग बॉस 14 के फाइनलिस्ट के तौर पर देखता हूं.  मैं बहुत दुखी हूं कि मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा. ये बात कहते हुए एजाज खान काफी इमोशनल हो गए.

आईपीएल नीलामी: खेलखेल में बने करोड़पति

यह बात इंडियन प्रीमियर लीग के खिलाड़ियों की नीलामी पर कतई लागू नहीं होती है. 18 फरवरी, 2021 की नीलामी में तो कम से कम यही पता चला. यकीन न हो तो कृष्णप्पा गौतम की मिसाल ले लीजिए. अब आप पूछेंगे कि ये महाशय कौन हैं? तो जनाब, ये हैं उभरते हुए भारतीय क्रिकेटर, उम्र 32 साल (अभी भी उभर ही रहे हैं) और फिलहाल इंगलैंड के खिलाफ चल रही टैस्ट सीरीज में बतौर नैट गेंदबाज भारतीय टीम के साथ हैं.

कर्नाटक के कृष्णप्पा गौतम वैसे तो स्पिन गेंदबाज हैं, पर वे आलराउंडर बताए जाते हैं. हालांकि उन्होंने अभी तक इंटरनैशनल लैवल का एक भी मैच नहीं खेला है, मतलब वे ‘अनकैप्ड’ खिलाड़ी हैं, पर उन की बोली की रकम आप के होश उड़ा देगी. उन का बेस प्राइज 20 लाख रुपए था, लेकिन बोली ऐसी बढ़ी कि उन्हें चेन्नई वालों ने सवा 9 करोड़ रुपए में खरीदा यानी उन के बेस प्राइज से 46 गुना से भी ज्यादा पैसा मिला.

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अब कृष्णप्पा गौतम कितने अच्छे खिलाड़ी हैं, यह तो आने वाला आईपीएल टूर्नामैंट ही बताएगा, पर जितने में वे बिके हैं, उन का मकसद तो पहले ही पूरा हो गया है, क्योंकि अगर दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो के कथन को ही सही माना जाता तो आईपीएल वाले आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी स्टीव स्मिथ को बहुत ज्यादा महंगा खरीदते, पर ऐसा नहीं हुआ. ट्वैंटी20 में 209 मैच खेलने वाले और 4,500 से ज्यादा रन बनाने वाले स्टीव स्मिथ का बेस प्राइज 2 करोड़ रुपए था, पर वे बिके महज 2 करोड़, 20 लाख रुपए में.

हैरत की बात तो यह थी कि एक और नएनवेले खिलाड़ी शाहरुख खान को भी स्टीव स्मिथ से दोगुनी रकम यानी 5 करोड़, 25 लाख रुपए में खरीदा गया था. तमिलनाडु के शाहरुख खान को उन के बेस प्राइज से 26 गुना ज्यादा कीमत मिली थी.

खिलाड़ियों की यह मंडी इस बार चेन्नई में सजी थी. लोगों में यह जानने की उत्सुकता थी कि क्या कोई खिलाड़ी सब से ज्यादा पैसों में बिक कर नया इतिहास बनाएगा? इस के अलावा सब की नजरें सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर पर भी टिकी थीं कि कौन सी टीम उन्हें खरीदेगी?

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन तेंदुलकर का बेस प्राइज 20 लाख रुपए था और उन्हें मुंबई ने ही 20 लाख रुपए में खरीद लिया. पर वे 5 बार की आईपीएल चैंपियन मुंबई इंडियंस की तरफ से खेल भी पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी. वैसे, लोग चाहेंगे कि वे मैदान पर अपना खेल दिखाएं और अपने पिता से भी ज्यादा नाम कमाएं.

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अब उस खिलाड़ी की बात करते हैं, जिस ने अपनी बोली से बड़ेबड़ों की बोलती बंद कर दी. दक्षिण अफ्रीका के 33 साल के क्रिस मौरिस ने यह कारनामा किया. वे आईपीएल के इतिहास की सब से महंगी बोली पर राजस्थान रौयल्स की टीम में गए. उन का बेस प्राइज 75 लाख रुपए था, पर जब उन पर बोली लगनी शुरू हुई, तो बहुतों की सांसें रुक गईं. उन की 16 करोड़, 25 लाख रुपए में फाइनल बोली लगी.

आलराउंडर क्रिस मौरिस ने 70 आईपीएल मैचों में 23.95 की औसत से 551 रन बनाए हैं और 80 विकेट अपने नाम किए हैं.

इसी तरह न्यूजीलैंड के 26 साल के आलराउंडर काइल जेमिसन ने भी सभी को चौंकाया. उन का बेस प्राइज 75 लाख रुपए था और उन्हें बैंगलोर वालों ने 15 करोड़ रुपए में अपना बनाया.

6 फुट, 8 इंच के काइल जेमिसन बल्ले और गेंद दोनों से ही धमाकेदार प्रदर्शन कर सकते हैं और हाल में ही उन का प्रदर्शन न्यूजीलैंड की टीम की तरफ से शानदार रहा था. यही वजह रही कि कई फ्रैंचाइजी उन को टीम में शामिल करने के लिए भिड़ती दिखाई दीं. वैसे, उन्होंने अभी तक एक भी आईपीएल मैच नहीं खेला है.

इस के अलावा आस्ट्रेलिया के ग्लैन मैक्सवैल सवा 14 करोड़ और जाई रिचर्डसन 14 करोड़ में बिके, जबकि इसी देश के राइली मेरेडिथ की बोली 8 करोड़ में लगी. यहीं के डेनियल क्रिस्टियन के खाते में 4 करोड़, 80 लाख रुपए गए.

अगर भारत के शाहरुख खान (बल्लेबाज) और जाई रिचर्डसन व राइली मेरेडिथ (दोनों गेंदबाज) को छोड़ दें, तो बाकी सभी खिलाड़ी आलराउंडर हैं यानी अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से मैदान पर बराबर कमाल दिखा सकते हैं.

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देखा जाए तो इस बार की नीलामी में बहुतों को उम्मीद से ज्यादा मिला है और एक खिलाड़ी के नजरिए से सोचेंगे तो अच्छी बात है कि क्रिकेट में ही सही भारत में अब खिलाड़ी खूब पैसा कमा रहे हैं. पर इस से खिलाड़ियों पर खेल के मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ जाता है. कृष्णप्पा गौतम को आज कोई नहीं जानता है, पर आने वाले आईपीएल में सब की निगाहें उन्हें ही ढूंढ़ेंगी कि ऐसा क्या है इस खिलाड़ी में जो इस पर 9 करोड़ रुपए का दांव लगाया गया. अगर चल गया तो बल्लेबल्ले, नहीं तो गुमनामी के अंधेरों में जाने में देर नहीं लगेगी.

याद रखिए कि कृष्णप्पा गौतम इस से पहले मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे, लेकिन 2 करोड़ में खरीदे जाने के बावजूद उन्हें मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला था.

Kapil Sharma ने बेटी अनायरा संग शेयर की क्यूट फोटो तो फैंस ने दिया ये रिएक्शन

कॉमेडी किंग कपिल शर्मा (Kapil Sharma) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. आए दिन वह फैंस के साथ फोटोज शेयर करते रहते हैं. हाल ही में वो एक बेटे के पिता बने हैं.

तो इसी बीच कपिल शर्मा ने बेटी अनायरा के साथ एक प्यारी सी तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं.

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इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि प्यारी अनायरा पापा कपिल को कॉपी करती हुई दिखाई दे रही हैं. तस्वीर में कपिल कैमरे को देख हाथ हिला रहे हैं तो अनायरा ने भी सेम टू सेम उसी पोज में नजर आ रही हैं.

 

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इस तस्वीर को काफी कम समय में लाखों से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. सोशल मीडिया पर यूजर्स अनायरा की क्यूटनेस की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई सेलिब्रिटी ने पापा-बेटी की तस्वीर  पर खूब प्यार बरसाया है.

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बता दें कि कपिल शर्मा ने 12 दिसंबर 2018 को गिन्नी चतरथ से शादी की थी और 1 साल बाद अनायरा का जन्म हुआ. अब हाल ही में कपिल और गिन्नी एक प्यारे से बेटे के पेरेंट्स बने थे.

Crime News: बंगला गाड़ी की हसरतें और जेल!

हमारी आज की इस रिपोर्ट में  एक ऐसे शख्स की सच्ची कहानी बयां है, जो बंगला और गाड़ी के ख्वाब देखता है और चोरी करने के बाद जेल के सीखचों में पहुंच जाता है.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बीते दिनों एक दुकान में  बीस लाख से अधिक की चोरी की घटना से सनसनी का माहौल बन गया. और लोग सोचने लगे कि आखिर चोरी करने वाले हैं कौन?

आखिरकार, जब चोरी की इस घटना का खुलासा हुआ तो लोग देखते ही रह गए क्योंकि
घटना का पुलिस ने खुलासा करते हुए मास्टर माइंड एक “सुरक्षागार्ड” को गिरफ्तार किया . जो उसी दुकान में नौकरी करता था. मजे की बात है कि उसके पास से चोरी की पूरी की पूरी रकम भी पुलिस द्वारा बरामद कर ली गई . इस घटनाक्रम के बारे में जिसने भी सुना आश्चर्यचकित हो गया क्योंकि कोई ख्वाब में भी यह नहीं सोच पा रहा था कि एक सुरक्षा गार्ड ही चोरी को अंजाम दे देगा. मगर कुल मिलाकर के इस घटनाक्रम से या एक बार पुनः जाहिर हो गया कि अपना कोई भी कभी भी कर सकता है अतः सावधान….!

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सुरक्षा गार्ड के बड़े बड़े ख्वाब

पुलिस ने हमारे संवाददाता को इस चोरी और घटनाक्रम के संदर्भ में बताया कि दरअसल,सुरक्षागार्ड ने घर बनाने और गाड़ी खरीदने के “लोभ” में आकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था.
महासमुंद जिला के पुलिस कप्तान प्रफुल्ल ठाकुर के मुताबिक  14 फरवरी की रात सरायपाली स्थित किराना दुकान से 6 लाख 79 हजार 200 रुपए और कपड़ा दुकान से 13 लाख 27 हजार 350 रुपए (कुल 20 लाख 6 हजार 550 रुपए ) की चोरी हुई थी.

प्रार्थी दुकानदार द्वारा घटना की शिकायत के बाद टीम गठित कर और सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. इसके आधार पर दुकान में तैनात सुरक्षा गार्ड 22 वर्षीय संजय यादव पुलिसिया जांच में  पूछताछ की गई, तो उसने चोरी करने का अपराध करना स्वीकार कर लिया.

शातिर ने ताले बदल दिए

स्थानी  कंपनी के सुरक्षागार्ड संजय कुमार यादव ने जांच अधिकारी को पूछताछ में बताया कि उसके ख्वाब बचपन से ही ऊंचे ऊंचे थे पढ़ लिख सका नहीं, मगर चाहत हसरतें ऊंची थी घर बनाने और गाड़ी खरीदने के लिए पैसे की जरूरत थी. उसे एहसास था कि 3-4 दिनों से बैंक बंद होने के कारण दुकान की बिक्री की रकम दुकान में ही रखी हुई है. इसी लालच से योजना के तहत एक दिन पहले ही दुकान के गेट में नया ताला-चाबी खरीदकर ताले को बदल दिया और एक चाभी अपने मालिक और एक चाभी अपने पास रख लिया था. चोरी करने के लिए वह दुकान के पीछे से अंदर घुसा और सीसीटीवी से बचने के लिए  पास में पड़े कंम्बल को ओढकर कैश काॅउन्टर में रखे नगदी और ड्राज के अन्दर रखे कैश रकम को पेचकश से तोड़कर निकाल भाग निकला.

Crime News: उधार के पैसे और हत्या

मगर जैसा कि अक्सर होता है कानून के लंबे हाथों में चोर की गिरेबान आ ही जाती है यहां भी पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया और चोरी की पूरी रकम बरामद  आरोपी संजय कुमार यादव के निशानदेही पर उसके पास से बैग में रखे पूरे नगदी 20 लाख 6 हजार 550 रुपए बरामद कर लिया. पुलिस ने मुझे ख्वाब देखने वाली सुरक्षाकर्मी के  पास से घटना में इस्तेमाल पेचकस भी जब्त किया गया है.

त्रिकोण प्रेम: दीपिका का खूनी खेल- भाग 1

सौजन्य-  मनोहर कहानियां

बहकी हुई महिला के कदम अकसर किसी अपराध को जन्म देते हैं. एक पुलिसकर्मी की बेटी दीपिका शुक्ला ने पति बल्ली शुक्ला और 2 बेटियों को छोड़ कर अवनीश शर्मा से शादी कर ली. इस के बाद हिस्ट्रीशीटर और कथित पत्रकार आशू यादव से उस के अनैतिक संबंध हो गए. फिर वह अमित के संपर्क में आई. इस का नतीजा यह हुआ कि…

2जनवरी, 2021 की सुबह धर्मेंद्र नगर, कच्ची बस्ती के कुछ लोग मार्निंग वाक पर निकले तो उन्होंने सीटीआई नहर किनारे सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की बाउंड्री वाल के पास एक

लावारिस कार खड़ी देखी. कार के संबंध में स्थानीय लोगों में चर्चा शुरू हुई, तो लोगों की भीड़ जुट गई. इसी बीच किसी ने थाना बर्रा पुलिस को फोन कर के सूचना दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी हरमीत सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन्होंने कार का बारीकी से निरीक्षण किया. कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी, जिस से अंदर का कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था. कार के पिछले शीशे पर एक स्टिकर चिपका था, जिस पर लिखा था ‘अमर स्तंभ हिंदी दैनिक समाचार पत्र’ आशू यादव संवाददाता.

स्टिकर पर ‘पुलिस’ और मोबाइल नंबर भी लिखा था. हरमीत सिंह ने अनुमान लगाया कि कार किसी पत्रकार की हो सकती है. उन्होंने स्टिकर पर लिखा मोबाइल नंबर मिलाया, लेकिन वह बंद था.

कार के अंदर की स्थिति को जानने के लिए हरमीत सिंह ने कार का पिछला दरवाजा खोला, तो वह सहम गए. पिछली सीट पर एक युवक की लाश पड़ी थी. श्री सिंह ने लावारिस कार से शव बरामद होने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी तो मौके पर एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, एसपी (साउथ) दीपक भूकर तथा सीओ (गोविंद नगर) विकास कुमार पांडेय आ गए. पुलिस अधिकारियोें ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से कार तथा शव का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. उस के शरीर पर चोटों के निशान थे और गले पर रगड़ का निशान था. इस से अनुमान लगाया कि युवक की हत्या रस्सी से गला घोंट कर की गई होगी तथा हत्या से पहले उस के साथ मारपीट की गई होगी. फोरैंसिक टीम ने भी कार से फिंगरप्रिंट लिए तथा अन्य साक्ष्य जुटाए.

कार की तलाशी में शराब की एक खाली बोतल, 4 शिकायती पत्र, 2 माइक, आगे की सीट के नीचे प्लास्टिक बैग में 2 टेडीबियर, कोटी, फोटो लगे कई स्टिकर तथा मृतक की जेब से 300 रुपए नकद बरामद हुए. इस सामान को पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

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अब तक सैकड़ों लोग शव को देख चुके थे, लेकिन कोई उस की पहचान नहीं कर पाया था. जिस से पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि मृतक आसपास का नहीं है. अत: उन्होंने शव की पहचान कराने के लिए कानपुर शहर के सभी थानों को कंट्रोलरूम से अज्ञात की लाश मिलने के संबंध में सूचना प्रसारित करा दी गई.

कुछ देर बाद ही थाना रेलबाजार के थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल को सूचना दी कि उन के थाने में आशू यादव नाम के युवक की गुमशुदगी दर्ज है, जो कथित पत्रकार तथा हिस्ट्रीशीटर है. चूंकि कार में लगे पोस्टर में भी आशू यादव का नाम छपा था, अत: एसपी अग्रवाल ने दधिबल तिवारी को आदेश दिया कि वह आशू के घरवालों को साथ ले कर जल्द ही धर्मेंद्र नगर कच्ची बस्ती स्थित नहर पटरी पर पहुंचें.

लाश की हुई शिनाख्त

आदेश पाते ही दधिबल तिवारी ने आशू यादव के घरवालों को सूचना दी, फिर उन्हें साथ ले कर वहां पहुंच गए. घरवालों ने कार में पड़े शव को देखा तो वे फफक कर रो पड़े. कंचन, शानू, धर्मेंद्र तथा जितेंद्र ने बताया कि शव उन के भाई आशू यादव का है. कार भी उसी की है.

मृतक की बहन शानू व कंचन ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि 31 दिसंबर की रात डेढ़ बजे किसी का फोन आने पर आशू अपनी कार से घर से निकला था, फिर रात को वापस नहीं आया. आशू अपने पास 3 मोबाइल फोन रखता था. सुबह हम लोगों ने उस के तीनों मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तीनों नंबर बंद थे.

इस के बाद हम लोग उस की खोज में जुट गए. चिंता इसलिए भी बढ़ गई कि पहली जनवरी को उस का जन्मदिन था. अपना जन्मदिन वह धूमधाम से मनाता था और दोस्तों को बुलाता था. लेकिन उस का कुछ पता नहीं चल रहा था.

दिन भर खोजने के बाद जब उस का कुछ भी पता नहीं चला तो शाम को थाना रेलबाजार जा कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी.

बहन कंचन ने यह भी बताया कि आशू गले में सोने की जंजीर तथा दोनों हाथों में सोने की 6 अंगूठियां पहने हुआ था. हत्यारों ने उस के तीनों मोबाइल, जंजीर तथा अंगूठियां भी लूट ली हैं.

चूंकि शव की शिनाख्त हो गई थी. अत: पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. आशू यादव की गुमशुदगी थाना रेलबाजार में दर्ज थी, अत: थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने मृतक की बहन कंचन की ओर से भादंवि की धारा 364/302/201/120बी के तहत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने मृतक आशू यादव के भाई धर्मेंद्र यादव से घटना के संबंध में पूछताछ की. पूछताछ में धर्मेंद्र ने बताया कि उस का भाई आशू यादव हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘अमर स्तंभ’ में काम करता था. कुछ समय पहले उस ने क्षेत्रीय पार्षद मधु के पति राजू सोनकर व उन के बेटों के कारनामोें के खिलाफ समाचार छापा था, जिस पर राजू ने झगड़ा किया था और उस के बेटे अति व सोनू सोनकर ने आशू को जान से मारने की घमकी दी थी. आशू की हत्या में इन्हीं लोगों का हाथ है.

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3 टीमें जुटीं जांच में

संदेह के आधार पर पुलिस ने राजू व उस के बेटों से पूछताछ की. लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. अत: पूछताछ के बाद उन्हें थाने से घर भेज दिया. चूंकि मामला एक कथित पत्रकार व हिस्ट्रीशीटर की हत्या का था. अत: एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने के लिए तीन टीमों का गठन किया, जिस की बागडोर एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल व एसपी (साउथ) दीपक भूकर को सौंपी गई.

टीम में इंसपेक्टर (नौबस्ता) सतीश कुमार सिंह, इंसपेक्टर (बर्रा) हरमीत सिंह, इंसपेक्टर (रेलबाजार) दधिबल तिवारी, सीओ (गोविंदनगर) विकास कुमार पांडेय तथा सर्विलांस टीम को शामिल किया गया.

पुलिस की तीनों टीमों ने अलगअलग जांच शुरू की. आशू यादव 31 दिसंबर की रात डेढ़ बजे अपने घर खपरा मोहाल से निकला था और उस के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन 31 दिसंबर की रात 2:37 बजे मसवानपुर की मिली थी.

पुलिस की एक टीम ने खपरा मोहाल से घंटाघर, जरीब चौकी, विजय नगर व मसवानपुर तक रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा दूसरी टीम ने दूसरे रोड की फुटेज को खंगाला, जिस में आशू की कार मसवानपुर जाते समय फजलगंज व विजयनगर चौराहे पर जाते समय तो दिखी पर लौटते समय नहीं दिखी.

स्पष्ट था कि हत्या के बाद हत्यारे आशू की कार को किसी दूसरे रूट से लाए थे और धर्मेंद्र नगर स्थित नहर पटरी पर कार को खड़ा कर दिया था.

इधर सर्विलांस टीम ने मृतक आशू के तीनों मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 31 दिसंबर की देर रात आशू के मोबाइल फोन पर आखिरी काल एक महिला की आई थी. वह महिला सीतापुर में रहने वाली शालिनी थी. पुलिस जब उक्त पते पर पहुंची तो पता चला कि उस फोन का इस्तेमाल मसवानपुर निवासी दीपिका शुक्ला कर रही थी.

टीम ने दीपिका के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह शातिर अपराधी है. शिवली, सचेंडी व कोहना थाने में उस के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं. नकली शराब बनाने व बेचने के जुर्म में वह पति के साथ जेल गई थी और अब जमानत पर है. सर्विलांस टीम ने उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो हिस्ट्रीशीटर अमित गुप्ता के बारे में जानकारी मिली.

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त्रिकोण प्रेम: दीपिका का खूनी खेल- भाग 2

अमित गुप्ता के फोन की डिटेल्स के जरिए टीम को उस के 2 साथियों जूहीलाल कालोनी निवासी किशन वर्मा व सचिन वर्मा की जानकारी मिली. अमित के मोबाइल फोन पर एक मैसेज 31 दिसंबर की रात 2:08 बजे भेजा गया था, जिस में लिखा था- ‘बुला लो भाई उस को, आज हो जाएगा काम.’ जांच से पता चला कि जिस नंबर से मैसेज भेजा गया था, वह किशन का था.

पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस की संयुक्त टीमों ने 3 जनवरी, 2021 की रात 11 बजे किशन वर्मा व सचिन वर्मा के जूही लाल कालोनी स्थित घर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया. उन दोनों को थाना रेलबाजार लाया गया.

थाने में जब किशन व सचिन वर्मा से आशू यादव की हत्या के संबंध में सख्ती से पूछताछ की गई तो वे टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उन दोनों की निशानदेही पर पुलिस टीमों ने मसवानपुर स्थित दीपिका के घर छापा मारा. लेकिन दीपिका और अमित फरार हो चुके थे. दीपिका के घर से पुलिस ने वह रस्सी बरामद कर ली, जिस से आशू का गला घोंटा गया था.

आरोपियों ने खोला राज

पूछताछ में आरोपी किशन वर्मा व सचिन ने बताया कि आशू की हत्या प्रेम त्रिकोण में की गई थी. दीपिका से नाजायज रिश्ता आशू व अमित दोनों का था. अमित को आशू और दीपिका की नजदीकियां पसंद न थीं, इसलिए उस ने दीपिका के साथ मिल कर आशू को मौत की नींद सुला दिया. रुपयों के लालच में उन दोनों ने भी अमित का साथ दिया. हत्या मसवानपुर स्थित दीपिका के घर की गई थी.

4 जनवरी, 2021 को रेलबाजार थाना प्रभारी दधिबल तिवारी ने आशू यादव की हत्या का खुलासा करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, एसपी (साउथ) दीपक भूकर ने पुलिस लाइन सभागार में प्रैसवार्ता की. एसएसपी ने केस का खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपया ईनाम देने की भी घोषणा की.

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चूंकि आशू यादव की हत्या का मुकदमा रेलबाजार थाने में पहले से अज्ञात में दर्ज था. अत: खुलासा होने के बाद थानाप्रभारी दधिबल तिवारी ने इस मामले में 4 आरोपी दीपिका शुक्ला, अमित गुप्ता, किशन वर्मा व सचिन वर्मा को नामजद कर दिया. 2 आरोपी दीपिका व अमित फरार हो गए थे. आरोपियों से पूछताछ में प्रेम त्रिकोण में हुई हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के थाना रेलबाजार अंतर्गत एक मोहल्ला है-खपरा मोहाल. इसी मोहल्ले के मकान नंबर डी-19 में छोटे सिंह यादव रहते थे. उन के परिवार में पत्नी मालती के अलावा 3 बेटे धर्मेंद्र, जितेंद्र, आशू तथा 2 बेटियां शानू व कंचन थीं. छोटे सिंह की जनरल स्टोर की दुकान थी. उसी की आमदनी से परिवार का भरणपोषण होता था.

3 भाइयों में आशू यादव मंझला था. उस का पूरा परिवार आपराधिक प्रवृत्ति का था. आशू का भाई धर्मेंद्र व चाचा बड़े यादव रेलबाजार थाने में हिस्ट्रीशीटर थे. आशू यादव भी अपने घरवालों की राह पर ही चल पड़ा. यद्यपि वह पढ़ालिखा व तेजतर्रार था. आशू ने अपराध जगत से नाता जोड़ा तो उस ने अपने चाचा व भाइयों को भी पीछे छोड़ दिया.

कुछ समय बाद ही उस पर थाना रेलबाजार, छावनी, फीलखाना समेत अन्य थानों में एनडीपीएस ऐक्ट, शस्त्र अधिनियम, गुंडा अधिनियम, रंगदारी, अपहरण समेत अन्य संगीन धाराओं के 10 मुकदमे दर्ज हो गए. रेलबाजार थाने का वह हिस्ट्रीशीटर बन गया.

आशू यादव ने पुलिसकर्मी राकेश कुमार की बेटी ज्योति से लवमैरिज की थी. राकेश कुमार उन दिनों कानपुर शहर के हरवंश मोहाल थाने में तैनात थे. उन का परिवार भी साथ रहता था. इसी दौरान आशू की मुलाकात ज्योति से हुई. दोनों में प्रेम संबंध बने, फिर ज्योति ने घरवालोें की मरजी के खिलाफ आशू से प्रेम विवाह कर लिया. ज्योति के 7 वर्षीय बेटा शुभ तथा 5 वर्षीया बेटी सोनाक्षी है.

हिस्ट्रीशीटर बन गया पत्रकार

आशू यादव बड़े ही शानोशौकत से रहता था. अवैध कमाई से उस ने कार भी खरीद ली थी. आशू शातिर दिमाग था. पुलिस से बचने के लिए उस ने हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘अमर स्तंभ’ में काम करना शुरू कर दिया था. उस ने अपनी कार पर भी अमर स्तंभ का स्टिकर लगा लिया था. शासनप्रशासन के अधिकारियों से वह पत्रकार के रूप में ही मिलता था. पत्रकारिता की आड़ में वह जायजनाजायज काम करने लगा था. धन वसूली भी करता था.

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सन 2019 में आशू यादव किसी मामले में जेल गया तो वहां उस की मुलाकात मोती मोहाल निवासी अमित गुप्ता व कल्याणपुर निवासी अवनीश कुमार शर्मा से हुई. तीनों एक ही बैरक में थे. अमित शातिर अपराधी था. उस ने रुपए व जेवर हड़पने के लिए कल्याणपुर निवासी बुआ बिट्टो, फूफा पवन गुप्ता तथा बिट्टो की सास रानी की हत्या कर दी थी. पकड़े जाने के बाद अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अवनीश कुमार शर्मा नकली शराब बनाने व बेचने के जुर्म में जेल में था. चूंकि तीनों शातिर अपराधी थे, अत: उन के बीच दोस्ती हो गई.

अवनीश शर्मा की ही पत्नी का नाम दीपिका शुक्ला था. वह भी पति के अवैध कारोबार में हाथ बंटाती थी. दीपिका मूलरूप से शिवली थाने के गांव भीखर की रहने वाली थी. उस के पिता अशोक चतुर्वेदी मुंबई पुलिस में हवलदार थे. रिटायर होने के बाद उन की मुजफ्फरनगर में हत्या कर दी गई थी. कुछ दिनों बाद मां की भी मौत हो गई. उस के बाद सन 2002 में दीपिका ने शिवली थाने के बैरी सवाई गांव निवासी बल्ली शुक्ला उर्फ हरीराम शुक्ला से शादी कर ली. बल्ली शुक्ला से दीपिका ने 2 बेटियों को जन्म दिया.

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