मेरी बेटी मेरा अभिमान

आज के युग में लड़कियां लड़कों से कंधा मिला कर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. आंध्र प्रदेश पुलिस के सर्किल इंसपेक्टर श्यामसुंदर की बेटी वाई. जेस्सी प्रशांति अपनी मेहनत और लगन से डीएसपी बनीं.

एक समय था, जब हर पिता चाहता था कि उस का बेटा उस की जिम्मेदारी संभाले. उस की अपेक्षा अधिक से अधिक ऊंचाई हासिल करे. उस के क्षेत्र में उस से भी बहुत आगे निकल जाए. पर अब समय बदल गया है. आज पिता केवल अपने बेटे के लिए ही नहीं, अपनी बेटी के लिए भी यही उम्मीद करने लगा है. इक्कीसवीं सदी में महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत दिखाई है. इस के पीछे इसी तरह के उम्दा विचार रखने वाले पिताओं की ही अहम भूमिका है.

यह पिता की लगन और इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि आज उस पिता के लिए इस से अधिक खुशी और गर्व की बात क्या होगी कि उस की बेटी उसी के नक्शेकदम पर चल कर न केवल कामयाबी हासिल कर रही है, बल्कि उस से भी एक कदम आगे निकल रही है. ऐसा ही कुछ जनवरी महीने में  आंध्र प्रदेश में पुलिस विभाग में देखने को मिला.

आंध्र प्रदेश में पुलिस विभाग में सीआई के पद पद पर तैनात श्यामसुंदर ने जब अपनी डीएसपी बेटी को सैल्यूट किया तो गर्व से उन का सीना चौड़ा हो गया. इस के बाद दिल को छू लेने वाली यह तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने उसे हाथोंहाथ लिया.

3 जनवरी, 2021 को आंध्र प्रदेश पुलिस ने तिरुपति में पुलिस ड्यूटी मीट 2021 का आयोजन किया था, जिस का उद्घाटन डीजीपी गौतम सवांग ने किया था. इसी कार्यक्रम में भाग लेने आई पुलिस अफसर बेटी को देख कर सीआई पिता भावुक हो उठे थे.

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वाई. जेस्सी प्रशांति 2018 बैच की राज्य लोक सेवा आयोग की पुलिस अधिकारी हैं. इस समय वह आंध्र प्रदेश के जिला गुंटूर दक्षिण (शहर) में डीएसपी के पद पर तैनात हैं. तिरुपति में आयोजित पुलिस ड्यूटी मीट 2021 में प्रशांति की भी ड्यूटी लगी हुई थी. प्रशांति के पिता श्यामसुंदर तिरुपति कल्याणी डेम के नजदीक स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में सीआई हैं.सीआई श्यामसुंदर की भी ड्यूटी पुलिस ड्यूटी मीट में लगी थी.

पुलिस ड्यूटी मीट में बेटी को ड्यूटी करते देख सीआई श्यामसुंदर चौंके. बेटी को डीएसपी की वरदी में देख कर वह बहुत खुश हुए, साथ ही गौरवान्वित भी. सीआई श्यामसुंदर ने अन्य पुलिस अफसरों के साथ डीएसपी बेटी को सैल्यूट तो किया ही, साथ ही यह भी कहा कि ‘नमस्ते मैडम’. जवाब में डीएसपी बेटी प्रशांति ने भी पिता को सैल्यूट करने के साथ आशीर्वाद भी लिया. वहां आए पुलिसकर्मी बापबेटी को इस तरह सैल्यूट करते देख भावुक हो उठे.

यह सब ऐसे ही नहीं संभव हुआ. इस के पीछे आंध्र प्रदेश के रहने वाले और पुलिस विभाग में नौकरी करने वाले श्यामसुंदर की इच्छाशक्ति थी. उन के घर जब बेटी का जन्म हुआ तो वह उदास या निराश होने के बजाय बहुत खुश हुए. उन्होंने उसी समय तय कर लिया कि वह बेटी को खूब पढ़ालिखा कर आगे बढ़ाएंगे. वह अपनी बेटी वाई. जेस्सी प्रशांति को अकसर राउंड पर जाते समय साथ ले जाते थे.

उस समय वह बेटी को गर्व से अपने कार्य और फर्ज के बारे में समझाते. पिता को मिलती सलामियां देख कर भविष्य में उस के लिए भी ये पल आए, इस तरह का सपना प्रशांति के बालमन में बैठ गया. वह समझ गईं कि पुलिस वरदी को कितना मान और सम्मान मिलता है. इस के अलावा लोगों की सेवा करने का मौका मिलता है. इन्हीं सब चीजों ने प्रशांति को पुलिस सेवा की ओर आकर्षित किया. यानी पिता ही बेटी के रोल मौडल बने.

12वीं में अच्छे नंबर आने की वजह से प्रशांति को इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला मिल गया. फिर भी उन के दिल में अपने पिता की तरह पुलिस की नौकरी कर के देश और जनता की सेवा करने की भावना बनी रही. अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रशांति सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने लगीं.

जब बेटी की इच्छा की जानकारी श्यामसुंदर को हुई तो इस क्षेत्र में महिला कर्मचारी के रूप में बेटी के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में उसे बताया. शुरुआत में श्यामसुंदर का मन थोड़ा हिचका, परंतु तुरंत ही उन्होंने अपना मन बदला, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि उन की बेटी किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है.

उस के बाद तो बेटी का सपना पिता का भी सपना बन गया. हमेशा बेटी की इच्छा पूरी करने और बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले पिता प्रशांति को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के उस के विचार को प्रोत्साहित करने लगे. खूब मेहनत और तैयारी के बाद प्रशांति ने सन 2018 में आंध्र प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन ग्रुप एक की परीक्षा पास कर ली.

इस के बाद आंध्र प्रदेश के पुलिस विभाग में डीएसपी के रूप में प्रशांति का चयन हो गया. अपने ही विभाग में उच्च अधिकारी के रूप में बेटी की नियुक्ति हो जाए, इस से विशेष और गर्व की बात एक पिता के लिए और क्या हो सकती थी.

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अपनी बेटी के लिए गर्व का अनुभव करने वाले पिता श्यामसुंदर का कहना है कि उन की बेटी उन्हीं के विभाग में उच्च अधिकारी है. उस ने यह जो उच्च स्थान प्राप्त किया है, वह उस की मेहनत का फल एवं मांबाप का आशीर्वाद है. प्रशांति का भी यही मानना है. प्रशांति का कहना है, ‘आई होल्ड हाई रैंक, बट इन लाइफ माई फादर होल्ड्स हायर रैंक…’

फिलहाल वाई. जेस्सी प्रशांति पिता के आदर्शों का अनुसरण करते हुए अपना कार्यभार बखूबी निभा रही हैं. वह गुंटूर जिले में डीएसपी के पद पर तैनात हैं. जबकि उन के पिता श्यामसुंदर तिरुपति कल्याणी डेम के नजदीक के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में सर्किल इंसपेक्टर के रूप में अपना फर्ज निभा रहे हैं.

पिता और पुत्री एक ही विभाग में काम करते हैं, फिर भी इस के पहले एक बार भी औन ड्यूटी एकदूसरे के आमनेसामने नहीं हुए थे. पिछले 26 सालों से पुलिस विभाग की सेवा में लगातार जुड़े श्यामसुंदर की इच्छा थी कि उन के रिटायर होने के पहले उन्हें बेटी के साथ काम करने का मौका मिले.

56 वर्षीय श्यामसुंदर की इच्छा पूरी करने वाला अविस्मरणीय क्षण आया 2021 के जनवरी की 4 से 7 तारीख के दौरान जब पहली ‘आईजीएनआईटीई’ पुलिस मीट का आयोजन किया गया, जिस में राज्य भर के पुलिस विभाग में सेवा देने वाले कर्मचारियों को शामिल होना था. इस में वाई. जेस्सी प्रशांति की ड्यूटी वहां की व्यवस्था देखने में लगी थी. उस में अन्य कर्मचारियों के साथ भाग लेने श्यामसुंदर भी आए थे.

उन्होंने सफलतापूर्वक ड्यूटी कर रही अपनी बेटी प्रशांति को देखा. पुलिस विभाग का एक प्रोटोकाल होता है कि जब भी ड्यूटी पर अपने से बड़ा अधिकारी सामने आ जाता है तो निश्चित ही उस अधिकारी को आदर सहित सैल्यूट करना होता है. उसी प्रोटोकाल के अनुसार अन्य कर्मचारी प्रशांति को सैल्यूट कर रहे थे. उन्हीं के साथ श्यामसुंदर ने भी गर्व से डीएसपी बेटी प्रशांति को सैल्यूट किया.

उस समय उन के चेहरे पर अपनी बेटी के इस मुकाम पर पहुंचने का अपार संतोष झलक रहा था. अपने पिता को सैल्यूट करते देख प्रशांति थोड़ा सकुचाई. उन्होंने पिता से कहा भी कि वह उसे सैल्यूट न करें. पिता का सीना तो अपनी ही बेटी को अपने अधिकारी के रूप में देख कर गज भर का हो चुका था. उन्होंने एक अधिकारी की तरह उसे सम्मान देते हुए सैल्यूट करते हुए कहा, ‘नमस्ते मैडम.’

इस के बाद बेटी ने भी पिता के इस कृत्य का आदर करते हुए उन के सम्मान में सैल्यूट किया. इस धन्य पल के जो साक्षी बने, वे पिता और पुत्री के इस सम्मानयुक्त संबंध को सम्मान के साथ देखते रहे.

तमाम लोगों ने इस ऐतिहासिक पल को कैमरे में कैद कर लिया, जिस में अपनी बेटी को सैल्यूट करते पिता के चेहरे की खुशी और गर्व साफ झलक रहा था. उस फोटो को आंध्र प्रदेश पुलिस डिपार्टमेंट ने ट्विटर पर डालते हुए लिखा, ‘आंध्र प्रदेश पुलिस फर्स्ट ड्यूटी मीट ब्रिंग्स ए फैमिली टुगेदर.’

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कैमरे में कैद आंध्र प्रदेश पुलिस की पितापुत्री की यह अद्भुत तसवीर सचमुच प्रेरणादायक है, जो तमाम पिताओं को अपनी बेटियों के सपने पूरा करने और बेटियों को इस स्थान तक पहुंचने का आह्वान करती है. जिस से पिता बेटी पर गर्व का अनुभव कर सकें और कह सकें—मेरी बेटी मेरा अभिमान.

आंखें- भाग 1: ट्रायल रूम में ड्रेस बदलती श्वेता की तस्वीरें क्या हो गईं वायरल

‘‘इस अलबम में ऐसा क्या है कि तुम इसे अपने पास रखे रहते हो?’’ विनोद ने अपने साथी सुरेश के हाथ में पोर्नोग्राफी का अलबम देख कर कहा.

‘‘टाइम पास करने और आंखें सेंकने के लिए क्या यह बुरा है?’’

‘‘बारबार एक ही चेहरा और शरीर देख कर कब तक दिल भरता है?’’

‘‘तब क्या करें? किसी गांव में नदी किनारे जा कर नहा रही महिलाओं का लाइव शो देखें?’’ सुरेश ने कहा.

‘‘लाइव शो…’’ कह कर विनोद खामोश हो गया.

‘‘क्या हुआ? क्या कोई अम्मां याद आ गई?’’

‘‘नहीं, अम्मां तो नहीं याद आई. मैं सोच यह रहा हूं कि यहां दर्जनों लेडीज रोज आती हैं. क्या लाइव शो यहां नहीं हो सकता?’’

‘‘अरे यहां लेडीज कपड़े खरीदने आती हैं या लाइव शो करने?’’

दोपहर का वक्त था. इस बड़े शोरूम का स्टाफ खाना खाने गया हुआ था. विनोद और सुरेश इस बड़े शो रूम में सेल्समैन थे. इन की सोचसमझ बिगड़े युवाओं जैसी थी. खाली समय में आपस में भद्दे मजाक करना, अश्लील किताबें पढ़ना और ब्लू फिल्में व पोर्नोग्राफी का अलबम रखना इन के शौक थे.

लाइव शो शब्द सुरेश के दिमाग में घूम रहा था. रात को शोरूम बंद होने के बाद वह अपने दोस्त सिकंदर, जो तसवीरों और शीशों की फिटिंग की दुकान चलाता था, के पास पहुंचा.

ड्रिंक का दौर शुरू हुआ. फिर सुरेश में उस से कहा, ‘‘सिकंदर, कई कारों में काले शीशे होते हैं, जिन के एक तरफ से ही दिखता है. क्या कोई ऐसा मिरर भी होता है जिस में दोनों तरफ से दिखता हो?’’

‘‘हां, होता है. उसे टू वे मिरर कहते हैं. क्या बात है?’’

‘‘मैं फोटो का अलबम देखतेदेखते बोर हो गया हूं. अब लाइव शो देखने का इरादा है.’’

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सुरेश की बात सुन कर सिकंदर हंस पड़ा. अगले 2 दिनों के बाद सिकंदर शोरूम के ट्रायल रूम में लगे मिरर का माप ले आया. फिर 2 दिन बाद जब मैनेजर और अन्य स्टाफ खाना खाने गया हुआ था, वह साधारण मिरर हटा कर टू वे मिरर फिट कर आया. एक प्लाईवुड से ढक कर टू वे मिरर की सचाई भी छिपा दी.

फिर यह सिलसिला चल पड़ा कि जब भी कोई खूबसूरत युवती ड्रैस ट्रायल या चेंज करने के लिए आती, विनोद या सुरेश चुपचाप ट्रायल रूम के साथ लगे स्टोर रूम में चले जाते और प्लाईवुड हटा न्यूड बौडी का नजारा करते.

‘‘क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इस लाइव शो को कैमरे में भी कैद कर लिया जाए?’’ विनोद के इस सवाल पर सुरेश मुसकराया.

अगले दिन उस के एक फोटोग्राफर मित्र ने एक कैमरा स्टोररूम में फिट कर दिया. अब विनोद और सुरेश कभी लाइव शो देखते तो कभी फोटो भी खींच लेते.

काफी दिन यह सिलसिला चलता रहा. गंदे दिमाग में घटिया विचार पनपते ही हैं, इसलिए विनोद और सुरेश यह सोचने लगे कि जिन की फोटो खींचते हैं उन को ब्लैकमेल कर पैसा भी कमाया जा सकता है.

उन के द्वारा बहुत से लोगों के फोटो खींचे गए थे, जिन में से एक श्वेता भी थी. श्वेता एक मल्टीनैशनल कंपनी में अच्छे पद पर काम करती थी. उस के पति प्रशांत भी एक बड़ी कंपनी में मैनेजर थे, इसलिए घर में रुपएपैसे की आमद खूब थी. श्वेता द्वारा फैशन परिधान अकसर खरीदे जाते थे और कुछ दिन इस्तेमाल होने के बाद रिटायर कर दिए जाते थे. कौन सा परिधान कब खरीदा और उसे कितना पहना था श्वेता को कभी याद नहीं रहता था.

आज वह जल्दी घर आ गई थी. अभी बैठी ही थी कि कालबैल बजी. दरवाजा खोला तो देखा सामने कूरियर कंपनी का डिलिवर बौय था. श्वेता ने यंत्रचालित ढंग से साइन किया तो वह लड़का एक लिफाफा दे कर चला गया. श्वेता ने लिफाफा खोला तो अंदर पोस्टकार्ड साइज के 2 फोटो थे. उन्हें देखते ही वह जड़ हो गई.

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एक फोटोग्राफ में वह कपड़े उतार कर खड़ी थी, तो दूसरे में झुकती हुई एक परिधान पहन रही थी. फोटो काफी नजदीक से खींचे गए थे. लेकिन कब खींचे थे, किस ने खींचे थे पता नहीं चल रहा था.

चेहरा तो उसी का था यह तो स्पष्ट था, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं था कि किसी दूसरी युवती के शरीर पर उस का चेहरा चिपका दिया गया हो?

तभी कालबैल बजी. उस ने फुरती से लिफाफे में फोटो डाल कर इधरउधर देखा. कहां छिपाए यह लिफाफा वह सोच ही रही थी कि उसे अपना ब्रीफकेस याद आया. लिफाफा उस में डाल उस ने उसे सोफे के पीछे डाल दिया.

फिर की होल से देखा तो बाहर उस के पति प्रशांत खड़े मंदमंद मुसकरा रहे थे. दरवाजा खुलते ही अंदर आए और दरवाजा बंद कर के पत्नी को बांहों में भर लिया.

‘‘श्वेता डार्लिंग, क्या बात है, सो रही थीं क्या?’’

श्वेता बेहद मिलनसार और खुले स्वभाव की थी. पति से बहुत प्यार करती थी और प्यार का भरपूर प्रतिकार देती थी. मगर आज खामोश थी.

‘‘क्या बात है, तबीयत तो ठीक है न?’’

‘‘जरा सिर भारी है. आप आज इतनी जल्दी कैसे आ गए?’’

‘‘कंपनी के टूर पर गया था. काम जल्दी निबट गया इसलिए सीधा घर आ गया. चाय पियोगी? तुम आराम करो मैं किचन संभाल लूंगा.’’

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प्रशांत किचन में चला गया. तभी श्वेता का मोबाइल बज उठा. एक अनजान नंबर स्क्रीन पर उभरा. क्या पता उसी फोटो भेजने वाले का नंबर हो सोचते हुए श्वेता ने मोबाइल का स्विच औफ कर दिया.

तभी प्रशांत ट्रे में चाय और टोस्ट ले आए.

‘‘श्वेता यह सिर दर्द की गोली ले लो और टोस्ट खा लो. चाय भी पी लो. आज किचन का जिम्मा मेरा.’’

ट्रे थमा प्रशांत किचन में चले गए. इतने प्यारे पति को बताऊं या न बताऊं यह सोचते हुए श्वेता ने सिरदर्द की गोली बैड के नीचे डाल दी और टोस्ट चाय में भिगो कर खा लिया. फिर चाय पी और लेट गई. समस्या का क्या समाधान हो सकता है? यह सोचतेसोचते कब आंख लग गई पता ही नहीं चला. आंखें खुली तो देखा पास ही लेटे प्रशांत पुस्तक में डूबे थे.

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सौजन्य- सत्यकथा

राजस्थान के भरतपुर जिले और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की सीमाएं एकदूसरे से सटी हुई हैं. इसी सीमा पर भरतपुर जिले की ग्राम पंचायत जाटौली रथभान का गांव कोलीपुरा बसा हुआ है. इसी साल 21 मार्च की बात है. पौ फट गई थी, लेकिन सूरज निकलने में अभी देर थी. कुछ लोग खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी उन्होंने कोलीपुरा गांव के पास एक खेत में एक युवक का शव पड़ा देखा. कुछ लोगों ने शव के पास जा कर देखा. वहां शराब की बोतल, गिलास, नमकीन और पानी के पाउच पड़े थे.

खेत में लाश मिलने की बात जल्दी ही आसपास के गांवों में फैल गई. इस के बाद कोलीपुरा समेत दूसरे गांवों के लोग भी मौके पर जमा हो गए. किसी गांव वाले ने पुलिस को इस की सूचना दे दी. सूचना मिलने पर भरतपुर जिले की चिकसाना थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई.

पुलिस ने लाश का मुआयना किया. करीब 25 साल के उस युवक की कनपटी पर गोली लगी हुई थी. लग रहा था कि उसे नजदीक से गोली मारी गई थी. पुलिस ने वहां इकट्ठा लोगों से मृतक युवक के बारे में पूछताछ की. लोगों ने शव देख कर उस की शिनाख्त कर ली. उस का नाम जितेंद्र उर्फ टल्लड़ था. वह मथुरा जिले के ओल गांव के रहने वाले नत्थी सिंह का बेटा था.

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कोलीपुरा गांव में जिस जगह जितेंद्र की लाश मिली थी, वह जगह उस के गांव से करीब दोढाई किलोमीटर ही दूर थी. उस जगह से कुछ ही दूरी पर शराब का ठेका भी था. पुलिस ने मौके पर मौजद कोलीपुरा गांव के लोगों से पूछताछ की. इस में पता चला कि एक दिन पहले यानी 20 मार्च की शाम को 7-8 बजे के आसपास गांव वालों ने 3-4 युवकों को उस जगह देखा था.

गांव वालों से पूछताछ में जो बातें पता चलीं, उस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि जितेंद्र अपने दोस्तों के साथ रात में खाली खेत में शराब पी रहा होगा. इस दौरान किसी बात पर उन दोस्तों में झगड़ा हो गया होगा. झगड़े में ही किसी ने उसे गोली मार दी होगी. गोली पास से मारी गई, जो उस की आंख के नीचे कनपटी पर धंस गई.

लाश की शिनाख्त हो गई थी. मृतक जितेंद्र का गांव भी वहां से ज्यादा दूर नहीं था. इसलिए थानाप्रभारी ने एक सिपाही ओल गांव भेज कर उस के घर वालों को मौके पर बुला लिया. घर वालों ने लाश की शिनाख्त जितेंद्र के रूप में कर दी. उन्होंने पुलिस को बताया कि जितेंद्र कल शाम को आसपास घूमने जाने की बात कह कर घर से निकला था. इस के बाद वह रात को घर नहीं लौटा. रात को उस की तलाश भी की, लेकिन पता नहीं चला.

पुलिस ने जितेंद्र के घर वालों से जरूरी पूछताछ की. इस के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दी. पोस्टमार्टम कराने के बाद उसी दिन पुलिस ने लाश जितेंद्र के घर वालों को दे दी.

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एकलौते जवान बेटे जितेंद्र की लाश देख कर उस की मां गीता दहाड़े मार कर रोने लगी. जितेंद्र की मौत से दुखी दोनों बहनों और बहनोइयों की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. जवान मौत का गम तो पूरे गांव को था. फिर वे तो घर के लोग थे. उन का रोना, विलाप करना स्वाभाविक था.

मृतक के चाचा राधाचरण ने जितेंद्र की हत्या का मामला भरतपुर जिले के चिकसाना पुलिस थाने में दर्ज करा दिया. थानाप्रभारी रामनाथ सिंह गुर्जर ने इस मामले की जांच खुद अपने हाथ में

ले ली. मृतक जितेंद्र के पिता नत्थी सिंह की मौत हो चुकी थी. जितेंद्र शादीशुदा था. करीब 9 महीने पहले उस की शादी ज्योति से हुई थी. ज्योति के साथ वह खुश था. पतिपत्नी में किसी तरह की कोई अनबन नहीं थी. दोनों का दांपत्य जीवन सुखी था.

परिवार में केवल 2 ही प्राणी थे. जितेंद्र की मां गीता और उस की पत्नी ज्योति. पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ की, लेकिन न तो कातिलों के बारे में कुछ पता चला और न ही कत्ल के कारण का राज सामने आया.

पुलिस ने ओल गांव के लोगों से भी पूछताछ की, लेकिन कोई खास बात पता नहीं चली. यह बात जरूर पता चली कि जितेंद्र के घर उस की 2 शादीशुदा बहनों और बहनोइयों का आनाजाना रहता था. पुलिस ने दोनों बहनोइयों विपिन और सुनील से भी पूछताछ की, लेकिन जितेंद्र की हत्या के बारे में ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिस से कातिलों तक पहुंचा जा सके.

जांचपड़ताल में मृतक जितेंद्र की किसी से दुश्मनी या खराब चालचलन की बात भी सामने नहीं आई. यह पता चला कि जितेंद्र शराब पीने का आदी था. शराब पी कर वह घर में क्लेश और अपनी मां से मारपीट करता था.

जितेंद्र के घर वालों और गांव वालों से पूछताछ में कोई बात पता नहीं चलने पर पुलिस ने ओल गांव से कोलीपुरा तक 2 किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने का फैसला किया.

सीसीटीवी फुटेज में एक पलसर बाइक पुलिस के संदेह के दायरे में आई. पुलिस ने नंबरों के आधार पर इस बाइक के मालिक का पता लगाया. इस के बाद पुलिस ने महेंद्र ठाकुर को पकड़ा. वह मथुरा जिले के फरह थानांतर्गत परखम गांव का रहने वाला है. सख्ती से पूछताछ में महेंद्र ठाकुर ने जितेंद्र की हत्या का राज उगल दिया. उस ने जो बताया, उस से पुलिस को भी एक बार तो भरोसा नहीं हुआ कि कोई मां भी अपने बेटे को मरवा सकती है.

अगले भाग में पढ़ें- जितेंद्र के मन में अपनी मां के लिए हीनभावना बढ़ती गई

Pawan Singh बॉलीवुड में मीत ब्रदर्स के साथ मचाएंगे धमाल, पढ़ें खबर

भोजपुरी भाषी दर्शकों का निरंतर अपनी गायकी व अभिनय से मनेारजन करते आ रहे हरदिल अजीज अभिनेता व गायक पवन सिंह बौलीवुड के मशहूर संगीतकार सलीम सुलेमान के साथ धमाल मचाने के बाद अब ‘गल बन गयी’,‘चीटिया कलाईयाँ, छमछम फेम संगीतकार मीत ब्रदर्स के निर्देशन में गाना गाएंगे.

सूत्रों की माने तो मीत ब्रदर्स ने पवन सिंह के लिए गाने की धुन भी तैयार कर चुके हैं. अब केवल कोरोना महमारी के चलते लगे हुए लॉकडाउन के खत्म होने का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है. लाॅकडाउन खत्म होने के बाद पवन सिंह आरा,बिहार से मुंबई आकर इस गीत को अपनी आवाज में स्वरबद्ध करने वाले हैं.

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सूत्रों का दावा है कि इस गाने में पवन सिंह के साथ बौलीवुड की एक सुपर हॉट अभिनेत्री भी नजर आने वाली हैं. ज्ञातब्य है कि भोजपुरी जगत के चर्चित गायक व अभिनेता पवन सिंह फिलहाल बिहार के आरा जिले में अपने गाँव में हैं, जहां बीते वर्ष उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपने घर में म्यूजिक स्टूडियो बनवाया था, जहां अभी वह अपने गानों की रिकॉर्डिंग में लगे रहते हैं और वह शीघ्र ही आसपास के जगहों पर उन गानों का फिल्मांकन भी करने वाले हैं.लेकिन इससे बड़ी खबर ये है कि पवन का इंतजार मुंबई में सिर्फ मीत ब्रदर्स को ही नहीं, सलीम सुलेमान को भी है, जिन्होंने पवन सिंह को लेकर अपने दूसरे गाने की भी तैयारी पूरी कर ली.

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इतना ही नही बौलीवुड गायक व संगीतकार पायल देव के साथ भी पवन सिंह का एक पंजाबी गाना जल्द आने वाला है.पायल देव पवन सिंह के साथ इससे पहले सलीम सुलेमान के होली सॉन्ग ‘बबुनी तेरे रंग’ में कर चुकी हैं, जो गाना देशभर में लोगों के बीच खूब पसंद किया गया.यह गाना उस समय ट्रेंड भी कर रहा था.अब जब वह मीत ब्रदर्स के लिए गाने करेंगें,तो एक बार फिर से भोजपुरी ही नहीं, पूरे बौलीवुड की नजर पवन और मीत ब्रदर्स के इस नए गाने पर होगी.

पापा की लाडली Hina Khan बनीं मां का सहारा, शेयर की इमोशनल तस्वीर

मशहूर एक्ट्रेस हिना खान (Hina Khan) के पिता का निधन कुछ दिन पहले ही हुआ. और इस घटना से वह बुरी तरह टूट गई. अब वह आए दिन अपने पिता को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती हैं. अब उन्होंने कुछ फोटोज और वीडियो शेयर कर सोशल मीडिया पर सभी का ध्यान खींच लिया है.

हिना खान इन तस्वीरों में अपनी मां के साथ दिखाई दे रही हैं. इन फोटोज में एक्ट्रेस  पिता के निधन के बाद अपनी मां को दिलासा देती नजर आ रही हैं.

 

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इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि एकट्रेस अपनी मां के लिए प्यार जता रही हैं और उन्हें दिलासा देती हुई नजर आ रही हैं. हिना खान (Hina Khan) ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि  ‘मां, तेरी खुशी मेरी ख्वाहिश, तेरी हिफाजत मेरा हक, मैं कोई थेरेपिस्ट नहीं हूं मां, लेकिन मैं वादा करती हूं कि मैं आपका ध्यान रखूंगी. आपके आंसुओं को पोंछ आपकी बातें सुनूंगी. हमेशा..’

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इन तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक्ट्रेस हिना खान अपनी मां से घंटों बातें करती हुई नजर आ रही है. फैंस को एक्ट्रेस की ये तस्वीर काफी पसंद आ रही है.

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विराट के वादे का मान रखने के लिए चौहान हाउस छोड़ेगी सई, आएगा नया ट्विस्ट

स्टार प्लस का ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी एक नया मोड़ ले रही है. चौहान हाउस में जबसे सई आई है, घर का पूरा माहौल बदल चुका है. एक तरफ विराट ने ठान लिया है कि वह सई का साथ कभी नहीं छोड़ेगा तो दूसरी तरफ पाखी उन दोनों को अलग करने के लिए नया प्लान बनाती नजर आ रही है. और इस बार पाखी ने कुछ ऐसा प्लान किया है, सई और विराट अलग हो जाएंगे? तो आइए बताते हैं, शो के नए ट्विस्ट के बारे में.

शो के लेटेस्ट ट्रैक में खूब हंगामा होने वाला है. सीरियल में दिखाया जा रहा है कि पाखी ने भवानी के साथ हाथ मिलाकर सई  को चौहान हाउस से आउट करने के लिए जबरदस्त प्लान बनाया है. दूसरी ओर विराट, सई के करीब आते हुए दिखाई दे रहा है. वहीं अब पाखी को लग रहा है कि सबकुछ हाथ से निकलता जा रहा है. ऐसे में पाखी विराट के पास जाती है और उसका वादा याद दिलाती है.

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पाखी याद दिलाती है कि विराट ने उससे वादा किया था, जो जगह उसकी है, वो कोई भी नहीं लेगा. विराट पाखी से वादा करता है कि वो कभी भी किसी से प्यार नहीं करेगा. पाखी विराट को एक-एक बात याद दिलाती है और उसे उसकी ही नजरों में गिराने की कोशिश करती है.

 

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शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि पाखी और विराट की बातों को सई सुन लेगी और वो विराट को इन सवालों के बीच घिरा देखकर परेशान हो जाएगी. आप ये भी देखेंगे कि सई चाहेगी कि विराट पाखी से वादा निभा सके. इसलिए वह चौहान हाउस को छोड़ने का फैसला लेगी.

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तो वहीं विराट सई को हर तरह से समझाने की कोशिश करेगा लेकिन सई उसकी एक भी नहीं सुनेगी. अब शो के नये एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाखी की ये चाल कामयाब होगी? सई-विराट अलग हो जाएंगे?

क्षमादान- भाग 3: आखिर मां क्षितिज की पत्नी से क्यों माफी मांगी?

जन्मदिन के अगले ही दिन क्षितिज ने बड़े नाटकीय अंदाज में उस के सामने विवाह प्रस्ताव रख दिया था.

‘तुम होश में तो हो, क्षितिज? तुम मुझ से कम से कम 3 वर्ष छोटे हो. तुम्हारे मातापिता क्या सोचेंगे?’

‘मातापिता नहीं हैं, भैयाभाभी हैं और उन्हें मैं अच्छी तरह जानता हूं. मैं मना लूंगा उन्हें. तुम अपनी बात कहो.’

‘मुझे तो लगता है कि हम मित्र ही बने रहें तो ठीक है.’

‘नहीं, यह ठीक नहीं है. पिछले 2 सालों में हर पल मुझे यही लगता रहा है कि तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है,’ क्षितिज ने स्पष्ट किया था.

प्राची ने अपनी मां और पिताजी को जब इस विवाह प्रस्ताव के बारे में बताया तो मां देर तक हंसती रही थीं. उन की ठहाकेदार हंसी देख कर प्राची भौचक रह गई थी.

‘इस में इतना हंसने की क्या बात है, मां?’ वह पूछ बैठी थी.

‘हंसने की नहीं तो क्या रोने की बात है? तुम्हें क्या लगता है, वह तुम से विवाह करेगा? तुम्हीं कह रही हो कि वह तुम से 3 साल छोटा है.’

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‘क्षितिज इन सब बातों को नहीं मानता.’

‘हां, वह क्यों मानेगा. वह तो तुम्हारे मोटे वेतन के लिए विवाह कर ही लेगा पर यह विवाह चलेगा कितने दिन?’

‘क्या कह रही हो मां, क्षितिज की कमाई मुझ से कम नहीं है, और क्षितिज आयु के अंतर को खास महत्त्व नहीं देता.’

‘तो फिर देर किस बात की है. जाओ, जा कर शान से विवाह रचाओ, मातापिता की चिंता तो तुम्हें है नहीं.’

‘मुझे तो इस प्रस्ताव में कोई बुराई नजर नहीं आती,’ नीरज बाबू ने कहा.

‘तुम्हें दीनदुनिया की कुछ खबर भी है? लोग कितने स्वार्थी हो गए हैं?’ मां ने यह कह कर पापा को चुप करा दिया था.

क्षितिज नहीं माना. लगभग 6 माह तक दोनों के बीच तर्कवितर्क चलते रहे थे. आखिर दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया था, लेकिन विवाह कर प्राची के घर जाने पर दोनों का ऐसा स्वागत होगा, यह क्षितिज तो क्या प्राची ने भी नहीं सोचा था.

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जाने अभी और कितनी देर तक प्राची अतीत के विचारों में खोई रहती अगर क्षितिज ने झकझोर कर उस की तंद्रा भंग न की होती.

‘‘क्या हुआ? सो गई थीं क्या? लीजिए, गरमागरम कौफी,’’ क्षितिज ने जिस नाटकीय अंदाज में कौफी का प्याला प्राची की ओर बढ़ाया उसे देख कर वह हंस पड़ी.

‘‘तुम कौफी बना रहे थे? मुझ से क्यों नहीं कहा. मैं भी अच्छी कौफी बना लेती हूं.’’

‘‘क्यों, मेरी कौफी अच्छी नहीं बनी क्या?’’

‘‘नहीं, कौफी तो अच्छी है, पर तुम्हारे घर पहली कौफी मुझे बनानी चाहिए थी,’’ प्राची शर्माते हुए बोली.

‘‘सुनो, हमारी बहस में तो यह कौफी ठंडी हो जाएगी. यह कौफी खत्म कर के जल्दी से तैयार हो जाओ. आज हम खाना बाहर खाएंगे. हां, लौट कर गांव जाने की तैयारी भी हमें करनी है. भैयाभाभी को मैं ने अपने विवाह की सूचना दी तो उन्होंने तुरंत गांव आने का आदेश दे दिया.’’

‘‘ठीक है, जो आज्ञा महाराज. कौफी समाप्त होते ही आप की आज्ञा का अक्षरश: पालन किया जाएगा,’’ प्राची भी उतने ही नाटकीय स्वर में बोली थी.

दूसरे ही क्षण दरवाजे की घंटी बजी और दरवाजा खोलते ही सामने प्राची और क्षितिज के सहयोगी खड़े थे.

‘बधाई हो’ के स्वर से सारा फ्लैट गूंज उठा था और फिर दूसरे ही क्षण उलाहनों का सिलसिला शुरू हो गया.

‘‘वह तो मनोहर और ऋचा ने तुम्हारे विवाह का राज खोल दिया वरना तुम तो इतनी बड़ी बात को हजम कर गए थे,’’ विशाल ने शिकायत की थी.

‘‘आज हम नहीं टलने वाले. आज तो हमें शानदार पार्टी चाहिए,’’ सभी समवेत स्वर में बोले थे.

‘‘पार्टी तो अवश्य मिलेगी पर आज नहीं, आज तो मुंह मीठा कीजिए,’’ प्राची और क्षितिज ने अनुनय की थी.

उन के विदा लेते ही दरवाजा बंद कर प्राची जैसे ही मुड़ी कि घंटी फिर बज उठी. इस बार दरवाजा खोला तो सामने राजा, प्रवीण, निधि और वीणा खड़े थे.

‘‘दीदी, जीवन के इतने महत्त्वपूर्ण क्षण में आप ने हमें कैसे भुला दिया?’’ प्रवीण साथ लाए कुछ उपहार प्राची को थमाते हुए बोला था. राजा, निधि और वीणा ने भी दोनों को बधाई दी थी.

‘‘हम सब आप दोनों को लेने आए हैं. पापा ने बुलावा भेजा है. आप तो जानती हैं, वह खुद यहां नहीं आ सकते,’’ राजा ने आग्रह किया था.

‘‘भैया, हम दोनों आशीर्वाद लेने घर गए थे, पर मां ने तो हमें श्राप ही दे डाला,’’ प्राची यह कहते रो पड़ी थी.

‘‘मां का श्राप भी कभी फलीभूत होता है, दीदी? शब्दों पर मत जाओ, उन के मन में तो आप के लिए लबालब प्यार भरा है.’’

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प्राची और क्षितिज जब घर पहुंचे तो सारा घर बिजली की रोशनी में जगमगा रहा था. व्हील चेयर पर बैठे नीरज बाबू ने प्राची और क्षितिज को गले से लगा लिया था.

‘‘यह क्या, प्राची? घर आ कर पापा से मिले बिना चली गई. इस दिन को देखने के लिए तो मेरी आंखें तरस रही थीं.’’

प्राची कुछ कहती इस से पहले ही यह मिलन पारिवारिक बहस में बदल गया था. कोई फिर से विधि विधान के साथ विवाह के पक्ष में था तो कोई बड़ी सी दावत के. आखिर निर्णय मां पर छोड़ दिया गया.

‘‘सब से पहले तो क्षितिज बेटा, तुम अपने भैयाभाभी को आमंत्रित करो और उन की इच्छानुसार ही आगे का कार्यक्रम होगा,’’ मां ने यह कह कर अपना मौन तोड़ा. प्राची को आशीर्वाद देते हुए मां की आंखें भर आईं और स्वर रुंध गया था.

‘‘हो सके तो तुम दोनों मुझे क्षमा कर देना,’’

Crime Story: जेठ के चक्कर में पति की हत्या- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

मनमोहन दास जिला कामरूप मेट्रो, असम के रहने वाले थे. उन के 2 बेटे थे. बड़ा तपन और छोटा उत्तम. उत्तम ने रूपा से लवमैरिज की थी. रूपा उन महिलाओं की तरह थी, जो कभी एक मर्द के पल्ले से बंध कर नहीं रहतीं.

उत्तम से लव मैरिज के बाद रूपा को अहसास हुआ कि उस ने गलत और ठंडे व्यक्ति से शादी की है. रूपा चाहती थी कि उसे पति रात भर बांहों में भर कर मथता रहे. मगर उत्तम में इतना दमखम नहीं था.

ऐसे में जब कई महीनों तक भी रूपा के बदन की आग मंद नहीं पड़ी तब उस के कदम बहक गए. उस ने घर में ही अपने जेठ तपन दास पर ध्यान देना शुरू कर दिया. तपन उस से उम्र में 10 साल बड़ा था, मगर वह था गबरू. हृष्टपुष्ट तपन ने छोटे भाई की पत्नी रूपा को अपनी तरफ ताकते व मूक आमंत्रण देते देखा तो वह आशय समझ गया.

एक रोज घर में जब कोई नहीं था तो तपन ने रूपा को अपनी मजबूत बांहों में भर लिया. रूपा ने कुछ प्रतिक्रिया नहीं की, तो तपन का हौसला बढ़ गया. वह उसे बिस्तर पर ले गया. तब दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं.

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वैसे तो रूपा तपन की बहू लगती थी. मगर उन दोनों ने जेठ बहू के रिश्ते को कलंकित कर के एक नया रिश्ता बना लिया था, अवैध संबंधों का रिश्ता. एक बार दोनों के बीच की मर्यादा रेखा टूटी तो वे अकसर मौका निकाल कर हसरतें पूरी करते रहे.

तपन उदयपुर, राजस्थान स्थित एक कंपनी में नौकरी करता था. वह छुट्टी पर घर आता तो रूपा के इर्दगिर्द ही मंडराता रहता था. दोनों एकदूसरे से खुश थे. मगर कभीकभार उन का मन होने पर भी उत्तम के होने की वजह से संबंध नहीं बना पाते थे. ऐसे में उन्हें उत्तम राह का कांटा दिखने लगा.

उत्तम दास वहीं कामरूप में ही काम करता था. कई साल तक रूपा और तपन के बीच यह खेल चोरीछिपे चलता रहा. घरपरिवार में किसी को भनक तक नहीं लगी थी.

तपन की उम्र 50 वर्ष की हो गई थी फिर भी वह बिस्तर का अच्छा खिलाड़ी था. रूपा ने तय कर लिया कि वह उत्तम को रास्ते से हटवा कर उस की पैतृक संपत्ति एवं इंश्योरेंस के पैसे से तपन के साथ ताउम्र मौज करेगी.

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उस ने अपनी योजना प्रेमी जेठ तपन को बताई तो वह बहुत खुश हुआ. वह भी यही चाहता था. सन 2020 में कोरोना के कारण कामधंधा बंद हो गया था. तपन उदयपुर से अपने घर कामरूप लौट आया.

जब कामधंधा शुरू होने वाला था तब तपन ने अपने भाई उत्तम से कहा, ‘‘उत्तम, यहां काम नहीं है. मैं ने तेरे लिए उदयपुर स्थित अपनी कंपनी में बात की है. तुम वहां जा कर साइट देख लो. पसंद आए तो वहीं काम करना.’’

उत्तम को बड़े भाई की बात बात जंच गई. वह अगले दिन ही उदयपुर के लिए निकल पड़ा. तपन ने इस से पहले रूपा के साथ मिल कर उत्तम की कहानी खत्म करने की योजना बना ली थी.

रूपा ने तपन को साढ़े 12 लाख रुपए दे कर कहा था कि पति जिंदा नहीं लौटना चाहिए. तपन अपने भाई से मोबाइल के जरिए कांटैक्ट में रहा. तपन ने उदयपुर में अपनी पहचान के राकेश लोहार को फोन कर के कहा, ‘‘एक आदमी जयपुर आ रहा है. उसे गाड़ी में ले जा कर उस का काम तमाम कर देना. तुम्हें साढ़े 12 लाख रुपए दे दूंगा.’’

‘‘ठीक है तपन भाई. उस का मोबाइल नंबर दे दो. मैं मिलता हूं और उस का खेल खत्म कर दूंगा.’’ राकेश लोहार ने भरोसा दिया.

राकेश लोहार ने उत्तम का मोबाइल नंबर ले लिया. राकेश ने अपने 4 साथियों सुरेंद्र, संजय, अजय व जयवर्द्धन को पूरी बात बता कर कहा कि एक दिन में

2-2 लाख रुपए मिलेंगे. राकेश ने खुद साढ़े 4 लाख रुपए रखे.

सब दोस्त गाड़ी ले कर जयपुर पहुंच गए. मोबाइल पर उत्तम से संपर्क कर उसे गाड़ी में बिठा लिया. उधर तपन भी असम से फ्लाइट पकड़ कर उदयपुर आ गया. ये लोग जयपुर से उदयपुर तक मौका नहीं मिलने के कारण उत्तम को मार नहीं सके. ये लोग उदयपुर आ गए. उन से तपन भी आ मिला. इस के बाद शराब में नींद की गोलियां डाल कर उत्तम को रास्ते में ही पिला कर नींद की आगोश में पहुंचा दिया.

अगले भाग में पढ़ें- उत्तम का मृत्यु प्रमाणपत्र बन पाया या नहीं

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