सत्यकथा: छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी साइबर ठगी

Writer  —सुरेशचंद्र रोहरा 

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का एक छोटा सा नगर है अभनपुर. यहां अशोक कुमार साहू वार्ड

नंबर 15, बड़े उरला में अपने छोटे से परिवार के साथ  रहते थे. वह 31 जुलाई, 2021 सुबह घर के निकट स्थित एटीएम में जा कर कुछ पैसे निकालने लगे. और जब उन के हाथ में परची आई तो वह दंग रह गए. उन्होंने देखा कि उन के अकाउंट में लगभग 65 लाख रुपए की रकम की जगह सिर्फ एक लाख रुपए ही शेष बचे हुए हैं.

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उन्होंने परची को फिर गौर से देखा और घबरा कर इधरउधर देखने लगे. उन के हिसाब से उन के भारतीय स्टेट बैंक अभनपुर के अकाउंट में लगभग 65 लाख रुपए की रकम होनी चाहिए थी मगर परची में तो एक लाख बैलेंस दिखा रहा था. वह पसीनापसीना हो गए. जल्दीजल्दी घर पहुंचे और छोटे बेटे राजेश को आवाज दी, ‘‘बेटा आओ, देखो तो यह क्या है?’’

उन का बड़ा बेटा किशोर साहू का हाल ही में कोरोना से संक्रमित हो कर निधन हो गया था. अब पतिपत्नी और बेटे राजेश व उस की पत्नी और एक बच्चा ही उन का परिवार था. राजेश ने पिता की आवाज सुनी तो पास आ गया और पूछा, ‘‘क्या हो गया है पापा?’’

घबराए पसीने से लथपथ अशोक कुमार साहू ने परची बेटे राजेश को देते हुए कहा, ‘‘बेटा, देखो. बैंक में कुछ गड़बड़ हो गई है, देखो, इस में तो एक लाख रुपए के आसपास ही बैलेंस बता रहा है, लगता है हम बरबाद हो गए.’’

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राजेश ने परची को गौर से देखा तो वह भी आश्चर्यचकित रह गया. मगर उस ने पिता को धैर्य बंधाते हुए कहा, ‘‘कभीकभी बैंक में कोई गलती हो जाती है, मैं बैंक जा कर के पता कर आता हूं कि मामला क्या है.’’

‘‘हांहां बेटा, तुम चले जाओ. बल्कि रुको, मैं भी साथ चलता हूं. मुझे जब तक इस का सच पता नहीं चलेगा, मुझे चैन ही नहीं आएगा, चलो मैं चलता हूं.’’

राजेश साहू अपने पिता अशोक कुमार साहू जोकि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल में पर्यवेक्षक औडिटर के रूप में लगभग 40 साल की नौकरी के बाद हाल ही में रिटायर हुए थे को ले कर के स्टेट बैंक औफ इंडिया की शाखा मेन रोड अभनपुर की ओर बढ़ चला. राजेश ने देखा पिता अभी भी बहुत घबराए हुए हैं. उस ने पिता को आश्वस्त किया, मगर अशोक कुमार साहू का पूरा ध्यान अपने बैंक अकाउंट को ले कर के चिंता में था.

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वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि इतने सारे रुपए होने के बाद जोकि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने इसी अकाउंट में जमा करवा रखे थे, कहां गायब हो गए.

राजेश पिता के साथ जब बैंक पहुंचा और वहां बैंक मैनेजर से मिल कर एटीएम से निकली परची दिखा कर के बैंक बैलेंस की जानकारी ली, जवाब सुन कर तो मानो अशोक कुमार साहू और राजेश साहू को काठ मार गया.

मैनेजर एस.के. शर्मा ने उन्हें बताया कि आप के अकाउंट में अब लगभग एक लाख रुपए की राशि शेष है और लगभग 2 माह पहले 64 लाख रुपए से अधिक की राशि आप के एकाउंट में थी. इस बीच लगातार 2 लाख रुपए से ले कर के 50 हजार रुपए की राशि तक 25 दफा अलगअलग तारीखों को औनलाइन निकाली गई है.

उन्होंने राजेश साहू को स्टेटमेंट निकाल कर के हाथ में थमा दिया, जिस के अनुसार 63,33,439 रुपए उन के एकाउंट से छूमंतर हो चुके थे.

यह सब देखसमझ कर राजेश साहू हतप्रभ रह गया, वहीं अशोक कुमार साहू सिर पकड़ कर बैठ गए और रोआंसा हो कर के बैंक मैनेजर से बोले, ‘‘सर, हम ने कोई भी रुपया का लेनदेन नहीं किया है, मेरे अकाउंट से लाखों रुपए पता नहीं किस ने निकाल लिया है, मैं तो बरबाद हो गया. आप इस पर कुछ काररवाई करिए.’’

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इस पर स्टेट बैंक मैनेजर ने विनम्रतापूर्वक कहा, ‘‘अगर आप को लगता है कि आप के साथ किसी ने गलत तरीके से बैंक से पैसे निकलवा लिए हैं तो अब आप के सामने एक ही विकल्प बचता है, आप हमें एक पत्र लिख कर दे दीजिए. और आज ही पुलिस में जा कर के अपनी कंप्लेंट करिए.’’

इस पर अशोक कुमार साहू भड़क गए और चिल्ला कर के कहने लगे, ‘‘यह कैसा बैंक है और कैसी व्यवस्था है. हम ने भी 40 साल विद्युत मंडल में नौकरी की है, मैं औडिटर था, मगर एक रुपए भी इधरउधर कभी नहीं होता था. और आज बैंक में मेरे लाखों रुपए किसी ने निकाल लिए और मुझे खबर भी नहीं हुई.’’

भारतीय स्टेट बैंक मैनेजर  शर्मा ने उन्हें शांत करते हुए बैठाया पानी पिलाया और विनम्रतापूर्वक कहा, ‘‘साहूजी, अब जो हो गया, उस का रोना छोड़ कर आगे की सुध लीजिए.

आप चिंता बिल्कुल मत करिए अगर आप ने पैसे नहीं निकाले हैं तो आप के सारे पैसे यह समझिए कि सुरक्षित बैंक में रखे हुए हैं और जो भी कहीं चूक या गलती हुई है अथवा फ्रौड हुआ है तो पुलिस उन को पकड़ कर जेल में डाल देगी. आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए.’’

सुन कर के अशोक कुमार साहू को ढांढस बंधाया और वे बेटे राजेश के साथ थाना अभनपुर पहुंचे, जहां अपने कक्ष में इंसपेक्टर बोधन साहू प्रतिदिन का कार्य संपादित कर रहे थे.

अशोक कुमार साहू और राजेश ने उन के कक्ष में अनुमति ले कर प्रवेश किया और सामने की कुरसियों पर बैठ गए. बोधन साहू ने बुजुर्गवार अशोक कुमार साहू की ओर देखा और कहा, ‘‘बताइए, आप लोगों का कैसे आना हुआ है?’’

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इस पर राजेश साहू ने कहा, ‘‘सर, मेरा नाम राजेश कुमार साहू है और यह मेरे पिता अशोक कुमार साहू हैं जोकि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल में औडिटर के पद पर कार्यरत थे. मार्च 2021 में आप रिटायर हुए हैं. सेवानिवृत्ति के बाद लगभग 65 लाख रुपए स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा में इन्होंने जमा किए थे, जो अचानक गायब हो गए हैं. हम लोग अभी बैंक मैनेजर से भी मिले हैं और वहां अपनी कंप्लेंट लिखवाई है, हम आप के पास भी कंप्लेंट के लिए आए हुए हैं.’’

63 लाख रुपए के बड़ी रकम की ठगी की बात सुन कर के बोधन साहू के कान खड़े हो गए. उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए अशोक कुमार साहू से कहा, ‘‘आप लोग सारी घटना एक कागज पर लिख कर के दीजिए. मैं एफआईआर दर्ज करवाता हूं. आप लोग निश्चिंत रहें. जल्द से जल्द आप अपराधियों को जेल की हवा खाते देखेंगे.’’

राजेश ने नगर निरीक्षक बोधन साहू के कक्ष में बैठेबैठे ही एक तहरीर लिखी और अपनी सारी स्थिति को अवगत कराते हुए पुलिस अधिकारियों से यह आग्रह किया कि इस मामले पर संज्ञान लिया जाए और अपराधियों को पकड़ लिया जाए.

अभनपुर थाने में  एफआईआर दर्ज होने के बाद बोधन साहू ने अपने उच्च अधिकारी एडिशनल एसपी लखन पटले से बातचीत कर के उन्हें साइबर क्राइम की इस संपूर्ण घटना से अवगत कराया.

63 लाख रुपए गायब होने की खबर सुन कर लखन पटले ने उन्हें निर्देश दिया कि मामला अभनपुर पुलिस और साइबर क्राइम शाखा के साथ मिल कर के डिटेक्ट करें और बीचबीच में मेरे समक्ष प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

रायपुर पुलिस के एसएसपी अजय यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभनपुर थाने के जांच अधिकारी बोधन साहू और साइबर क्राइम शाखा के वीरेंद्र चंद्रा को इस मामले की जांच का प्रभार देते हुए 12 सदस्यीय टीम बनाई, जिसे इस मामले को जल्द से जल्द हल करने का आदेश दिया गया.

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अशोक कुमार साहू ने पुलिस को बताया कि 31 मार्च, 2021 को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के परीक्षण पर्यवेक्षक पद से रिटायर हुआ हूं. इसी दरमियान अप्रैल में बड़े बेटे किशोर कुमार साहू की अचानक मृत्यु हो गई. इसी अवसाद के समय में उन के पास एक काल आई थी, जिस के बाद से उन के साथ यह ठगी का कारनामा अंजाम दिया गया है.

अशोक कुमार साहू ने बताया कि 17 जून को एक अज्ञात व्यक्ति का काल आया. उस ने कहा, ‘‘हैलो, क्या आप अशोक साहू बोल रहे हैं?’’

अशोक कुमार साहू ने कहा, ‘‘जी हां, मैं अशोक कुमार ही बोल रहा हूं.’’

दूसरी तरफ से कहा गया, ‘‘मैं भारतीय स्टेट बैंक अभनपुर से फूल दास बोल रहा हूं. सर, आप के बेटे किशोर साहू की मृत्यु हो गई है. आप के बेटे की कोरोना से हुई मृत्यु के कारण भारत सरकार की योजना अंतर्गत 5 लाख रुपए मिलेंगे.’’

यह सुन कर अशोक कुमार साहू खुश हो गए. बोले, ‘‘ऐसा है तो बताइए, मैं यह रकम कैसे पा सकता हूं? बैंक आ जाऊं?’’

‘‘नहींनहीं, आप को बैंक आने की अभी जरूरत नहीं है, यहां तो बहुत भीड़ रहती है जब समय आएगा हम आप को स्वयं बुला लेंगे. अब तो मोबाइल में बड़ी सुविधा है, बात भी हो सकती है. और ओटीपी भी हम पूछ सकते हैं. इसलिए आप घर में आराम से रहें, वैसे भी कोरोना वायरस चल रहा है.’’

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यह सुनकर के अशोक कुमार साहू को महसूस हुआ कि फूल दास सही कह रहा है अभी करोना काल में कहीं भी बाहर जाना उचित नहीं है. और जब घर बैठे काम हो रहा है तो भला घर से क्यों निकलूं.

फूल दास ने बड़े ही मधुर आवाज में कहा, ‘‘साहूजी आप बहुत सज्जन आदमी लगते  हैं क्या करते हैं आप?’’

‘‘मैं अब तो रिटायर हो गया हूं. वैसे विद्युत मंडल में मैं औडिटर हुआ करता था.’’ उन्होंने बड़े गर्व के साथ बताया.

‘‘अरे वाह! आप तो बहुत ही पढ़ेलिखे सम्मानित व्यक्ति नजर आते हैं, औडिटर का पद तो बहुत ही सम्मान का है. यह सुन कर के हमारी निगाह में आप का सम्मान और भी बढ़ गया है हमारे लिए आप रेस्पेक्टेड परसन हैं.’’

इस तरह की मीठी बातें कर के फूल दास ने अशोक कुमार साहू को अपने शीशे में उतार लिया. और बातोंबातों में ओटीपी नंबर भी ले लिया.

फूल दास ने अशोक कुमार साहू से कहा कि बहुत जल्द आप को अपने अकाउंट में 5 लाख रुपए घर बैठे ही अकाउंट में मिल जाएंगे, यह मेरी जिम्मेदारी है. बस आप, मैं जैसे ही काल करूं, आप फोन रिसीव कर लिया करें.’’

अशोक कुमार साहू ने उस की बात से सहमति व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘हां, आप हमें सहयोग करते रहें.’’

अशोक कुमार साहू के बेटे किशोर साहू की कोरोना वायरस के कारण मौत हो गई थी, स्वयं भी बुजुर्ग हो गए थे और कुछ दिनों बाद कोरोना पौजिटिव हो गए थे. इस बीच लगातार काल आता, वह बात करते और ओटीपी बता दिया करते. फूल दास आश्वस्त करता, शीघ्र ही आप के खाते में 5 लाख रुपए आ जाएंगे.

इस बीच अशोक कुमार साहू कोरोना कोविड-19 से लंबे समय तक परेशान रहे और उन का सब कुछ अस्तव्यस्त हो गया. इधर देखते ही देखते उन के खाते से छोटीछोटी रकम कर के लाखों रुपए ट्रांसफर कर दिए गए. जिस की उन को भनक तक नहीं लगी.

साइबर ठगी के इस मामले में बी.एम. साहू और वीरेंद्र चंद्रा की टीम ने जब जांच को आगे बढ़ाई तो उन्हें यह जान कर बहुत आश्चर्य हुआ कि जो पैसे अशोक कुमार साहू के अकाउंट से निकाले गए थे, वे दूसरे अकाउंट से तीसरे फिर चौथे फिर पांचवें से छठवें अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए थे.

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उन्हें यह समझते देर नहीं लगी थी कि उन का ट्रांजैक्शन साइबर क्राइम के शातिर ठगों ने किया है. जांच में यह तथ्य भी सामने आता चला गया कि सारी ठगी का खेल जामताड़ा, झारखंड से चलता रहा है.

पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर 12 साइबर क्राइम एक्सपर्ट और पुलिस अधिकारियों की एक टीम आरोपियों को पकड़ने के लिए जामताड़ा के लिए 8 अगस्त, 2021 को रायपुर से रवाना हुई.

जामताड़ा के एसपी कार्यालय में आमद देने के बाद बी.एम. साहू ने जिले के उच्च अधिकारियों को लाखों रुपए के साइबर क्राइम की जानकारी दी और आरोपियों तक पहुंचने के लिए सहयोग की गुजारिश की तो पुलिस अधिकारियों ने अपनी एक टीम बना कर के उन के साथ लगा दी.

पुलिस टीम ने जब जांच आगे बढ़ाई तो यह तथ्य सामने आया कि जामताड़ा के नारायणपुर मौलीडीह गांव के फूल दास, अशोक दास, दुलाल दास इन 3 लोगों का हाथ है.

पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछाया, मगर वे लोग गायब हो जाते थे. उन के रहनसहन को देख कर के जांच अधिकारी बी.एम. साहू, वीरेंद्र चंद्रा और टीम के सदस्य आश्चर्यचकित थे.

इन में फूल दास और दुलाल दास दोनों सगे भाई हैं जिन्हें उन के भव्य आवास से  आखिरकार 10 अगस्त की रात हिरासत में ले लिया गया. उसी रात अशोक दास को भी झारखंड पुलिस की मदद से हिरासत में ले लिया गया.

इस तरह अंतत: बड़ी मशक्कत के बाद तीनों कथित आरोपियों को ले कर के छत्तीसगढ़ पुलिस जिला जामताड़ा से रायपुर, छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुई.

छत्तीसगढ़ प्रदेश की सब से बड़ी साइबर ठगी के इस मामले में सब से महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस ठगी में 221 सिम कार्ड आरोपियों ने इस्तेमाल किए, जोकि पश्चिम बंगाल से लाए गए थे.

वहीं एक सब से बड़ी कमी भारतीय स्टेट बैंक की भी उजागर हो गई. जबजब पैसे अशोक कुमार साहू के अकाउंट से ट्रांसफर हुए तो उन के अकाउंट में आखिरकार पैसे ट्रांसफर की सूचना का मैसेज क्यों नहीं आया.

कहां गड़बड़ हुई. पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय हो गया कि क्या बैंक का कोई कर्मचारी इस मामले में संलिप्त तो नहीं है.

अभनपुर जिला रायपुर की पुलिस ने 11 अगस्त को रायपुर में एक प्रैस कौन्फ्रैंस करते हुए मीडिया के समक्ष केस का खुलासा किया. एडिशनल एसपी लखन पटले ने मीडिया से रूबरू हो कर बताया कि 63,33,439 रुपए के बड़े ठगी के चैलेंजिंग मामले में पुलिस को किस तरह सफलता हासिल की है और आरोपियों को शीघ्र ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा.

पुलिस ने आरोपियों का इकबालिया बयान दर्ज किया है, जिस में उन्होंने बताया है कि किस तरह वे लोगों को भरमा कर के मीठी बातें करते थे. अपना संबंध बनाने के बाद उन्हें लालच देते हुए लाखों रुपए अकाउंट में  भिजवाने की बात कहते थे और ओटीपी ले लिया करते थे. और दूसरी तरफ अपने  अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर लिया करते थे.

पुलिस ने धारा 420,120बी भादंवि के तहत 11 अगस्त 2021 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर के रिमांड पर लिया.

महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि ठगी के शिकार अशोक कुमार साहू को इस कथा के लिखे जाने तक एक रुपए भी वापस नहीं मिला था, क्योंकि यह एक लंबी प्रक्रिया है. आरोपियों के पास से सिर्फ लगभग 30 हजार रुपए ही बरामद हुए हैं.

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अब सवाल यह है कि 63 लाख रुपए की बड़ी रकम आखिर अशोक कुमार साहू को किस तरह मिल पाएगी और मिल भी पाएगी या फिर कानून की लंबी लड़ाई और इंतजार में वे परेशान हलकान रहेंगे.

मगर, अशोक कुमार साहू और उन के बेटे राजेश साहू को यह संतोष है कि उन के साथ ठगी करने वाले आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए और एक न एक दिन, उन्हें उन का पैसा मिलेगा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में बैंक मैनेजर का नाम काल्पनिक है.

मैं जिस लड़की से प्यार करता हूँ वो काफी बोल्ड है ,क्या शादी के बाद वो मेरी फैमिली के साथ एडजस्ट कर पाएगी ?

सवाल
मुझे एक युवती से प्यार हो गया है. वह भी मुझ से प्यार करती है पर वह बहुत बोल्ड है. हमारी फैमिली पुराने खयालों की है. मैं चाहता हूं कि वह शादी के बाद मेरे परिवार के अनुसार चले. क्या करें?

जवाब
आप की प्रेमिका बोल्ड है यह तो अच्छी बात है, लेकिन आप भौंदुओं वाली बात क्यों करते हैं. अपनी आजादी हरेक को प्यारी होती है क्या आप को नहीं? फिर पुराने खयालों में ही जीते रहने का क्या फायदा, रही बात संस्कार की तो बोल्ड होने का मतलब संस्कारहीन होना नहीं.

आजकल युवतियां समय अनुसार चलने, आगे बढ़ने पर जोर देती हैं, जो अच्छी बात है फिर आप तो उस से प्यार करते हैं. उस के लिए खुद को बदलिए, पेरैंट्स को पुराने खयालों से नए विचारों की ओर मोडि़ए. वह युवती आप के घर आ कर आप की व आप के परिवार की तरक्की की राह ही खोलेगी, हां, उस की रिस्पैक्ट जरूर कीजिए, क्योंकि वह जमाने के अनुसार ताल से ताल मिला कर चलने वाली है, तो तरक्की के रास्ते खोलेगी.

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वर्जिनिटी : भ्रम न पालें

किसी भी युवती के लिए पहले सैक्स के दौरान उस की वर्जिनिटी सब से ज्यादा माने रखती है. युवती की योनि के ऊपरी हिस्से में पतली झिल्ली होती है जो उस के वर्जिन होने का प्रमाण देती है, लेकिन किसी भी युवती की योनि और उस के ऊपरी सिरे में स्थित हाइमन झिल्ली को देख कर यह पता लगाना कि वह वर्जिन है कि नहीं न तो संभव है न ही ठीक.

सैक्स के दौरान अकसर पार्टनर द्वारा युवती की योनि से रक्तस्राव की उम्मीद की जाती है लेकिन ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि पहली बार सैक्स के दौरान युवती के वर्जिन होने के बावजूद उस की योनि से रक्तस्राव नहीं होता, फिर भी साथी  द्वारा यह मान लिया जाता है कि युवती पहले भी सैक्स कर चुकी है, जबकि पहली बार सैक्स के दौरान युवती की योनि से स्राव होने या न होने को उस के वर्जिन होने का सुबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि पहली बार में बहुत सी युवतियों को इसलिए रक्तस्राव नहीं होता, क्योंकि खेलकूद, साइकिल चलाना आदि की वजह से उन की योनि में स्थित झिल्ली कब फट जाती है उन्हें स्वयं नहीं पता चलता.

इस का कारण हाइमन झिल्ली का बहुत पतला व लचीला होना है. कभीकभी युवती में जन्म के समय से ही यह झिल्ली मौजूद नहीं होती. ऐसे में पहले सैक्स के दौरान योनि से रक्तस्राव न होने के आधार पर युवती के चरित्र पर संदेह करना गलत होता है.

पहली बार सैक्स के दौरान युवक अपने साथी से उस के कुंआरी होने का सुबूत भी मांगते हैं, जबकि वह खुद के कुंआरे होने का सुबूत देना उचित नहीं समझते. इस वजह से पहला सैक्स जिसे हम वर्जिनिटी का नाम देते हैं, आगे चल कर सैक्स संबंधों में बाधा बन जाता है. युवती की वर्जिनिटी पर शक की वजह से कई तरह की गलतफहमियां जन्म लेती हैं. इस का प्रमुख कारण कुंआरेपन को ले कर लोगों से सुनीसुनाई बातें हैं.

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किसी भी युवक या युवती के लिए पहली बार किए जाने वाले सैक्स का जो रोमांच होता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह एक ऐसी स्टेज है जहां युवकयुवती एकदूसरे के सामने अपने सारे कपड़े उतारने और सैक्स को ले कर होने वाली झिझक को दूर करने की शुरुआत करते हैं. यहीं से युवकयुवती के कुंआरेपन की समाप्ति होती है और यही वह स्टेज है जहां दोनों अपनी वर्जिनिटी खोते हैं.

युवती को अपने कुंआरेपन का सुबूत देने के लिए कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है जोकि सरासर गलत है. अगर युवती पुरुष से कुंआरे होने का सुबूत नहीं मांगती तो उसे भी चाहिए कि अपने साथी पर विश्वास करते हुए उस के कुंआरेपन पर सवाल खड़ा न करे. अकसर युवती के कुंआरेपन को ले कर घरेलू ंिहंसा व तलाक जैसी नौबत भी आ जाती है. अपने चरित्र का प्रमाण देने के लिए युवती को तमाम तरह के सुबूत पेश करने के लिए कहा जाता है.

सैक्स के दौरान वर्जिनिटी को ले कर आने वाले खून की कुछ बूंदों के प्रति पुरुषवर्ग इतना गंभीर होता है कि वह वर्षों से चले आ रहे इस दकियानूसी खयाल से बाहर आने की सोच भी नहीं सकता, जबकि अपने कुंआरेपन को गृहस्थी के बीच का मुद्दा बनाना गलत है. इसलिए युवकयुवतियों को चाहिए कि वे पहले सैक्स को यादगार बनाएं न कि वर्जिनिटी के चक्कर में पड़ कर संबंधों में दरार पैदा करें.

प्यार और भरोसे से करें शुरुआत

नीरज की अरेंज्ड मैरिज थी, अत: वह अपनी होने वाली पत्नी से कभी मिला नहीं था. ऐसे में नीरज के दोस्त शादी की पहली रात को ले कर नीरज को तमाम तरह की सलाह देने में लगे हुए थे. उस के एक दोस्त ने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ पहली रात के सैक्स यानी सुहागरात में पत्नी के वर्जिन होने का पता लगाने के लिए योनि से रक्तस्राव होने पर जरूर ध्यान दे. अगर रक्तस्राव हुआ तो समझ ले कि पत्नी ने किसी के साथ सैक्स नहीं किया है, अगर नहीं हुआ तो वह पहले सैक्स कर चुकी है.

लेकिन नीरज ने दोस्त की इस बात पर ध्यान न दिया, क्योंकि वह जानता था कि पहले सैक्स में रक्तस्राव होना जरूरी नहीं. इस से यह पता चलता है कि वर्जिन होने के लिए सुबूत देने की जरूरत नहीं होती बल्कि पहली बार किए जाने वाले सैक्स की शुरुआत प्यार और भरोसे के साथ की जाए तो यह न केवल ज्यादा मजा देने वाला होता है, बल्कि इस से रिश्ता और भी गहरा व विश्वसनीय बन जाता है.

बातचीत है जरूरी

सैक्स व मनोरोग विशेषज्ञ डा. मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि कौमार्य खोने के पहले एकदूसरे के बारे में अच्छी तरह से जान लें, क्योंकि सैक्स आनंद के लिए किया जाता है न कि भूख मिटाने के लिए. इसलिए सैक्स को मजेदार बनाने की कोशिश करें, आपस में कामुक बातचीत की शुरुआत हो और धीरेधीरे यह बातचीत शर्म से ऊपर उठ कर सैक्स संबंध के रूप में आगे बढे़. इस तरह सैक्स का मजा दोगुना हो जाता है और पतिपत्नी के बीच शर्म का परदा भी उठ जाता है.

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पहले सैक्स को ज्यादा मजेदार व यादगार बनाने के लिए वर्जिनिटी जैसे दकियानूसी खयाल से ऊपर उठ कर शारीरिक व मानसिक संतुष्टि को ज्यादा महत्त्व देना चाहिए. इस के अलावा किसी तरह की अजीबोगरीब उम्मीदें नहीं पालनी चाहिए जिन से जीवन साथी को किसी तरह की ठेस पहुंचे.

कैसी प्रेमिका की चाहत

एक सर्वे के अनुसार 51त्न युवा प्रेमियों को प्रेमिका की ब्यूटी, 36त्न को ब्रेन और 15त्न को प्रेमिका की ब्यूटी विद ब्रेन दोनों का कौंबिनेशन प्रभावित करता है.

प्रेमी प्रेमिका की तरह अपनी पसंद और नापसंद के आधार पर प्रेमिका को चुनते हैं.

आइए जानें वे क्या पसंद करते हैं अपनी प्रेमिका में :

–       युवा प्रेमी को साफसफाई का खयाल रखने वाली प्रेमिका अधिक पसंद आती है.

–       युवा प्रेमी को प्रेमिका की बौडी लैंग्वेज, बाल, आंखें, मुसकराहट भी अपनी ओर आकर्षित करती है.

–       युवा प्रेमी बहुत होनहार प्रेमिका की चाहत नहीं रखते बल्कि उन्हें हर सामान्य कार्य में रुचि रखने वाली प्रेमिका ज्यादा पसंद आती है.

–       51% युवाओं का मानना है कि उन्हें प्रेमिका की खूबसूरती के अलावा उस का केयरिंग नेचर बहुत प्रभावित करता है.

–       आत्मविश्वासी प्रेमिका युवा प्रेमी को ज्यादा पसंद आती है.

–       अकसर युवक ऐसी प्रेमिका को पसंद करते हैं जो अपना अधिकांश समय उन्हें ही दे.

–       बातबात पर इमोशनल होने वाली पे्रमिका से वे दूरी बनाने में ही भलाई समझते हैं.

–       युवा प्रेमी अकसर ऐसी प्रेमिका चाहते हैं, जो सैक्सी और कौपरेट करती हो.

गहरी पैठ: चुनाव और जाति के नाम पर बंटवारा

चुनावों के टिकटों के बंटवारे में जाति को कितना भाव दिया गया है, यह किसी से छिपा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट हर माह एकदो फैसले अवश्य ऐसे देती है जिन में जाति का सवाल उठाया जाता है पर जब दुनियाभर में लिंग, रंग, धर्म या क्षेत्र पर भेदभाव की बात होती है तो भारत सरकार बारबार कहती है कि जाति तो कोई भेदभाव वाली बात ही नहीं है.

अब अमेरिका की कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी की सीनेट ने फैसला किया है कि जाति के सवाल को लिंग, धर्म, भाषा वगैरह के मामलों की तरह लिया जाएगा और किसी की जाति को ले कर किसी को कुछ कहने, कोई चीज या सेवा देने में आनाकानी करने, उन्हें ज्यादा सुविधाएं देने पर सवाल उठाने का हक न होगा.

मजेदार बात यह है कि स्टेट यानी सरकार के फंड से चलती इस यूनिवर्सिटी के 80 भारतीय रंग वाले शिक्षकों ने इस की जम कर खिलाफत की. अमेरिका की 4,85,000 छात्रों वाली इस यूनिवर्सिटी में 55,000 पढ़ाने वाले हैं जिन में काफी भारतीय भी हैं. ये भारतीय ज्यादातर ऊंची जातियों के हैं जो बारबार दोहराते हैं कि भारत तो एक है, भारतीयों में जाति को ले कर कोई भेदभाव नहीं है.

जाति के सवाल को नकारने का मतलब यही होता है कि कहीं पिछड़े और दलित यूनिवर्सिटी में कोटों का फायदा न उठा लें और वहां पढ़ाने का काम न मिलने लगे. अगर वे साथ उठनेबैठने लगेंगे तो उन में आपस में लेनदेन भी होगा और एकदूसरे के घर जाना पड़ेगा. आज भी विदेशों में दशकों नहीं पीढि़यों तक हिंदुस्तान से बाहर रहने के बावजूद घर में भारतीय जाति देख कर ही एकदूसरे को बुलाते हैं. गोरा आ रहा हो तो कोई बात नहीं, चीनीजापानी चलेगा पर मुसलिम, पिछड़ा या दलित नहीं होना चाहिए.

अगर ऊंची जाति के घरों के बच्चों ने कहीं दलितपिछड़ों में प्रेम का बीज बो लिया तो आफत आ जाएगी, इसलिए भारतीय मूल के मातापिता अपने बच्चों के भारतीय मूल के दोस्तों के नाम के साथ जाति पर सवाल करने में देर नहीं लगाते. अमेरिका में बराबरी की मांग करने वाले अकसर इस सवाल को खड़ाकरते रहते हैं. भारत सरकार और वहां की कट्टर हिंदू संस्थाएं इस की जम कर खिलाफत करती हैं, क्योंकि हमेशा की तरह यहां जाति, जो पूरी तरह रगरग में फैली है, नकारा जाता है. एक देश, एक लोग का नारा लगाने वाले जाति के सवाल पर एकदम कान खड़े कर लेते हैं. बैकवर्ड और दलित सेवाकरते रहे हैं, एक हो कर और ऊंचों को वोट देते रहें, बस यही गुंजाइश छोड़ना चाहते हैं.

अमेरिका ही नहीं यूरोप में भी जाति के नाम पर अत्याचारों के सवाल उठाए जाते रहते हैं पर हर कहीं मौजूद ऊंची जातियों के भारतीय मूल के लोग इस पर अपना गुस्सा दिखाते हैं और अपनी बोलने की कला का फायदा उठा कर मुंह बंद कर देते हैं.

दलित और पिछड़ों के साथ दिक्कत है कि स्कूलकालेजों में पढ़ने के बाद भी वे न बोलना सीख रहे हैं, न पढ़ना. वे पढ़ते तो वही हैं जो ऊंची जातियों वाले पढ़ाते हैं, सुनते हैं तो वही जो ऊंची जातियों के सुनाते हैं, देखते हैं तो वही जो ऊंची जातियों वाले दिखाते हैं और आखिर में करते हैं तो वही जो ऊंची जातियों वाले कराते हैं. कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी की बीमारी दूसरे विश्वविद्यालयों में न फैल जाए यह फिक्र होनी चाहिए वहां की हिंदू संस्थाओं को जहां ज्यादातर ब्राह्मण और बनिया का गठजोड़ चलता है.

भोजपुरी एक्ट्रेस श्रुति राव ने बताई अपने दिल की बात- ‘मुझे जेंटलमैन लड़के पसंद हैं’

 बृहस्पति कुमार पांडेय

भोजपुरी सिनेमा के चर्चित हीरो दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ और खेसारीलाल यादव के अपोजिट काम कर चुकी हीरोइन श्रुति राव इन दिनों काफी चर्चा में हैं. खेसारीलाल यादव के साथ हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘लिट्टीचोखा’ में उन की ऐक्टिंग को काफी सराहा गया है.

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श्रुति राव ने अभी तक दर्जनों फिल्मों में बतौर हीरोइन काम किया है. इन सभी फिल्मों में वे अलगअलग लुक में नजर आई हैं. उन की ऐक्टिंग में निखरने की झलक साफ दिखाई पड़ती है. यही वजह है कि उन्हें बड़े बैनर और बड़े ऐक्टरों के साथ काम करने का औफर मिलता रहा है. उन के फिल्मी कैरियर को ले कर हुई बातचीत में उन्होंने अपने बारे में खुल कर बात की. पेश हैं, उसी के खास अंश :

आप दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ और खेसारीलाल यादव जैसे कलाकारों के साथ काम कर चुकी हैं. दोनों कलाकारों की नेचर में क्या अंतर पाती हैं?

खेसारीलाल यादव के साथ काम कर के मुझे जो सब से बड़ी सीख मिली, वह है कि अपने काम के प्रति जुनूनी होना. उन का कैरियर के पीछे पागलपन और लक्ष्य को पाने के लिए एक कर देना मुझे सब से ज्यादा प्रभावित करने वाला लगा.

ये सारी चीजें दिनेशलाल यादव में भी हैं, लेकिन उन में जो चीज है, सब से अलग हट कर है, वे अपने सीनियर और जूनियर दोनों की इज्जत करना जानते हैं.

आप को क्या लगता है कि भोजपुरी इंडस्ट्री में लड़कियां मर्दों के बराबर हैं?

फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं का काम, सहयोग और योगदान पुरुषों से जरा भी कमतर नहीं है. यह सिर्फ सिनेमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की लड़कियां हर क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवा रही हैं. कई मामलों में तो वह पुरुषों से भी बेहतर कर पाने में सक्षम हुई हैं. लेकिन इस सब के बावजूद भोजपुरी सिनेमा में जो मेहनताना हीरो को मिलता है, उस से काफी कम हीरोइन को दिया जाता है, इसलिए इस मामले में भी बराबरी होनी ही चाहिए.

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क्या आप मानती हैं कि भोजपुरी सिनेमा में लव स्टोरी हमेशा बिकने वाला विषय रहा है?

ऐसा पहले था, जब लव स्टोरी वाली फिल्में ज्यादा पसंद की जाती थीं. लेकिन अब समय बदल चुका है.

हाल के दशकों में कई ऐसी फिल्में आईं, जिन में हीरोहीरोइन के इश्क वाली कहानियां नहीं थीं, फिर भी इन फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और कमाई के रिकौर्ड भी टूटे.

आप का हीरोइन बनने का शौक था या सपना या इत्तिफाक ने आप को हीरोइन बना दिया?

मैं ने कभी सोचा ही नहीं था कि मैं हीरोइन बनूंगी और न ही मेरा परिवार फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा था. मेरा सपना तो यह था कि मैं आईपीएस अफसर बनूं. हां, यह जरूर था कि मैं शौकिया गाती थी.

एक बार ऐसा हुआ कि मैं एक स्टेज शो के कार्यक्रम में गई थी और वहां फीमेल सिंगर नहीं आई थी. ऐसे में मैं ने उस दिन परफौर्मैंस किया, तो लोगों को बहुत पसंद आया. इस के बाद मैं स्टेज शो करने लगी. इसी दौरान मैं ने कई अलबमों में भी काम किया और काम के दौरान मुझे फिल्मों का औफर आने लगा. फिर मुझे लगा कि फिल्मों में काम करना चाहिए.

अकसर फिल्मों में यह देखा जाता है कि हीरोइन हीरो के ऐक्शन देख कर प्रभावित हो जाती है, आप असल जिंदगी में लड़कों की किनकिन चीजों से प्रभावित होती हैं?

फिल्मों में हीरो का ऐक्शन सीन तो कहानी के मुताबिक होता है, लेकिन मैं इस पर बेबाकी से जवाब देना चाहूंगी कि मैं ने असल जिंदगी में किसी को डेट नहीं किया. जहां तक मेरी चौइस के हिसाब से देखा जाए, तो मुझे जेंटलमैन लड़के ज्यादा पसंद हैं.

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मैं ऐसा मानती हूं कि लड़कों का पढ़ालिखा होना, उन का बौडी लैंग्वेज सही हो, क्योंकि मुझे रफटफ टाइप से इतर साधारण लड़के ज्यादा अच्छे लगते हैं, जो अपने काम से मतलब रखते हैं और मैच्योर सोच के लड़के ज्यादा अच्छे होते हैं. लेकिन इस तरह का कोई लड़का अभी तक मेरी जिंदगी में नहीं आया है. जब भी ऐसा लड़का मेरी जिंदगी में आएगा, तो जरूर बताऊंगी.

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ दिखावा बन कर रह गई है. आप राजनीति में महिलाओं के हालात को ले कर किस तरह के बदलाव की उम्मीद करती हैं?

अगर कोई महिला राजनीति में आती है, तो लोग उसे और जिम्मेदारी सौंपते हैं. उसे आजाद हो कर काम करना चाहिए. अभी भी राजनीति में आजादी से काम करने वाली महिलाएं बहुत कम हैं, फिर भी मायावती इस का अच्छा उदाहरण हैं.

आप की जिंदगी में उलट हालात कब आए और उन पर किस तरह जीत हासिल की?

मेरे जीवन में 2 बार ऐसे हालात आए, जिन को ले कर मैं काफी असहज हो गई थी. पहला, जब मैं भोजपुरिया में ‘दम बा’ की शूटिंग कर रही थी, तब मेरी दादी की डैथ हो गई थी. ऐसे में मेरे सामने असमंजस की हालत बनी हुई थी. लेकिन मैं ने अपने दिल की सुनी और फिल्म को एक दिन के लिए छोड़ कर घर जाना ज्यादा उचित समझा

दूसरा तब हुआ, जब मैं ने अच्छी कहानियों वाली 5 फिल्में साइन की थीं, लेकिन अचानक ही ये सभी फिल्में हाथ से चली गईं. इस वजह से मुझे दिमागी रूप से अपसैट भी होना पड़ा. इस के बावजूद मैं ने खुद को नैगेटिव चीजों पर काबू किया और फिर से वापसी की.

क्या हासिल करने की जिद में आप ने कुछ खोया भी है?

मेरी सोच थी कि मैं कहीं भी काम करूं तो 8 घंटे की ड्यूटी के बाद खुद के परिवार को समय दूं. लेकिन फिल्मों में आने के बाद समय की बेहद कमी हो गई है. ऐसे में मेरा मानना है कि फिल्मों में आने के बाद मैं परिवार को पूरा समय नहीं दे पाती हूं.

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जो लोग छोटे शहरों से निकल कर सिनेमा से जुड़े वह मुंबई जैसे शहरों के हो कर रह गए हैं. ऐसे में अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए आप क्या कोशिश करती हैं?

मेरा मानना है कि जहां से आप ने उठ कर इतनी बड़ी इमेज बनाई है, उस से जुड़ाव रखना बहुत जरूरी है. यह जरूरी ही नहीं, बल्कि अपनी जन्मभूमि, अपनी मिट्टी के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए. मैं बलिया के एक गांव से हूं. लेकिन मैं जितना समय मुंबई और दिल्ली में देती हूं, उस से ज्यादा समय अपने गांव को भी देती हूं.

क्या कारण है कि कुछ पुरुष पिता नही बन पाते ?

पिता बनना सभी पुरुषों के लिए उन खास एहसास में से एक है जिसका इंतजार वो मेसबरी से करते है. पर जब कोई इस एहसास का अनुभव नही कर पाता तो उनपर क्या बीतती है इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता.बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान और तनाव के कारण पुरुष कई समस्याओं का शिकार हो जाते हैं और उनका पिता बनने का सपना भी टूट जाता है. दरअसल पुरुषों के शरीर में इन कारणों से कुछ ऐसी चीजों की कमी हो जाती हैं, जिसके कारण उन्हें पिता बनने में कई प्रकार कि दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

इसलिए आज हम आपको पुरुषों के शरीर में होने वाली कुछ ऐसे चीजों की कमी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके कारण पुरुष पिता बनने में महरूम रह जाते हैं. आपको बता दें कि शरीर में इन तीन चीजों की कमी पुरुषों को पिता बनने से रोकती है.

टेस्टोस्टेरौन की कमी के चलते…

टेस्टोस्टेटरौन एक प्रकार का हार्मोन है, जो पुरुषों के टेस्टिकल्स में मौजूद होता है. इस हार्मोन के कारण ही पुरुषों में यौन इच्छा जागती है. इस हार्मोन का संबंध यौन क्रियाओं, रक्त संचार, मांसपेशियों की मजबूती, एकाग्रता और स्मृ्ति से भी जुड़ा होता है. पुरुषों में चिड़चिड़ापन या फिर जरा-जरा सी बातों पर गुस्सा आना टेस्टोस्टेरौन की कमी के कारण होता है. पुरुषों के पिता बनने में इन टेस्टोस्टेरोन हार्मोन्स की बेहद अहम भूमिका होती है. लेकिन इन हार्मोन्स की कमी के कारण पुरुष चाह कर भी पिता नहीं बन पाता. हालांकि डाक्टर से सलाह और अपने सेहत व खान-पान पर ध्यान देने से इन हार्मोन को बढ़ाया जा सकता है.

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एस्ट्रोजन की कमी भी हो सकती है कारण

एस्ट्रोजन, स्टेरोएड हार्मोन का एक समूह है, जो महिला व पुरुष दोनों में पाया जाता है लेकिन यह अधिकतर महिलाओं में पाया जाता है,  इसके कारण उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है. एस्ट्रजेन हार्मोन के कारण ही महिलाओं और पुरुषों में भिन्नताएं पाई जाती है. शरीर में एस्ट्रोजन की कमी के कारण पुरुषों के शुक्राणु कमजोर हो जाते हैं, जिसके कारण वह महिलाओं के एग को फर्टलाइज नहीं कर पाते. इस कारण से भी पुरुषों को पिता बनने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है. इतना ही नहीं इन हार्मोन की कमी से पुरुषों की सेहत पर भी खराब असर पड़ता है. एस्ट्रोजन हार्मोन्स को सामान्य रखने के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है.

कैल्शियम की कमी से बचे

पुरुषों के लिए शरीर में कैल्शियम की कमी होना ठीक नहीं है. अमेरिकन हेल्थ ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययव के मुताबिक, कैल्शियम की कमी होने से पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता खराब हो जाती हैं, जिसके कारण उन्हें पिता बनने में परेशानी होती हैं. इसलिए अगर किसी पुरुष को पिता बनने में परेशानी हो रही हैं तो उसे कैल्शियम युक्त आहार का सेवन करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. ऐसा करने से उनकी ये समस्या धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी.

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मेरे पति बहुत शक्की स्वभाव के हैं, मैं किसी भी पुरुष से बात करूं तो वे मुझ से लड़ने झगड़ने लगते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 32 वर्षीय विवाहित महिला हूं. विवाह को 5 वर्ष हो चुके हैं. मेरे पति के साथ एक समस्या है कि वे बहुत शक्की स्वभाव के हैं. मैं किसी भी पुरुष से बात करूं, फिर चाहे वह सेल्सबौय ही क्यों न हो तो वे मुझ से लड़नेझगड़ने लगते हैं. किसी से फोन पर भी बात करूं तो पूछते हैं किस का फोन था, क्या बात हुई. मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं लेकिन उन का मेरे प्रति यह रवैया मुझे दुखी कर देता है. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की है कि मैं उन के अलावा और किसी को नहीं चाहती लेकिन उन की शक कर ने की आदत मुझे परेशान करती है.

जवाब
देखिए, शक का कोई इलाज नहीं होता. आप के पति के साथ भी ऐसा ही है. सामान्यतया शक वही लोग करते हैं जिन्हें अपने ऊपर विश्वास नहीं होता और वे दूसरों से खुद को कमतर समझते हैं. आप अपने पति के गुणों की तारीफ करें और जताएं कि वे संपूर्ण हैं और उन के अलावा आप किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकतीं. आप का यह व्यवहार धीरेधीरे उन के शक्की स्वभाव को बदल देगा.

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सनकी पति

कल्लू को अकेला घर आया देख कर घर वालों में से किसी ने पूछा कि अंजू कहां है तो उस ने बेहद इत्मीनान से जवाब दिया कि उस की तो उस ने हत्या कर दी है. पहले तो चौंक कर सभी ने कल्लू की ओर देखा. लेकिन उस के हावभाव देख कर सभी को यकीन हो गया कि इस सिरफिरे का कोई भरोसा नहीं कि यह जो कह रहा है, उसे कर चुका हो. भोपाल के कोटरा इलाके के बापूनगर में मामूली खातेपीते लोग रहते हैं. उन्हीं में एक कल्लू विश्वकर्मा भी था. पेशे से वेल्डर कल्लू की एक पहचान निहायत ही सनकी आदमी की भी थी, जो अड़ोसपड़ोस में हर किसी से झगड़ बैठता था, इसलिए लोग उस से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझते थे.

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30 साल की अंजू कल्लू की पत्नी थी, जो उस के 5 बच्चों की मां थी. पतिपत्नी में आए दिन झगड़ा होता रहता था, जिस के न केवल उन के बच्चे, बल्कि पड़ोसी भी आदी हो चुके थे. 5 बच्चों की मां होने के बावजूद अंजू जवान और आकर्षक दिखती थी. लेकिन इस बात पर खुश होने के बजाय कल्लू को उस पर शक हो चला था कि उस के किसी से अवैधसंबंध हैं. पतियों के इस तरह के शक की न कोई वजह होती है और न ही इस का कोई इलाज है, जिस की मार बेकसूर पत्नियों को झेलनी पड़ती है. अंजू भी उस में से एक थी, जो पति की बातों और तानों को सुनसुन कर परेशान रहती थी. जब कभी वह उस का शक दूर करने की कोशिश करती, कल्लू समझने के बजाय और भड़क उठता था.

26 अक्तूबर, 2016 को जब सभी लोग दिवाली की तैयारियां कर रहे थे, दोपहर कोई एक बजे कल्लू ने अंजू से कहीं घूमने चलने को कहा. पति की इस पेशकश पर पहले तो वह चौंकी, लेकिन जल्द ही खुश भी हो गई. पति शक्की था, झक्की था, लेकिन कभीकभी उस का प्यार उमड़ता था तो अंजू पुराना सब कुछ भूल जाती थी. उस दिन भी जब कल्लू ने अपनी मारुति कार से कलियासोत डैम घूमने चलने को कहा तो वह झटपट यह सोच कर तैयार हो गई कि कहीं ऐसा न हो कि पति का इरादा बदल जाए. दोनों कार में सवार हो कर कलियासोत डैम पहुचे, जहां पतिपत्नी में किसी बात को ले कर विवाद शुरू हो गया. जब दोनों लड़तेझगड़ते डैम के गेट नंबर 13 पर पहुंचे तो कल्लू ने अंजू को काबू कर के उस का गला दबाना शुरू कर दिया. उस समय वहां सुनसान था. क्योंकि आमतौर पर कम लोग ही उतनी दूर तक घूमने जाते हैं. गुस्साए कल्लू ने तब तक पत्नी की गरदन नहीं छोड़ी, जब तक वह लाश बन कर उस की बांहों में नहीं झूल गई. जब पत्नी के मरने की तसल्ली हो गई तो कल्लू ने इत्मीनान से उस की लाश को डैम के बहते पानी में फेंक दिया. लेकिन फरार होने के बजाय वह सीधे घर जा पहुंचा और पत्नी की हत्या की बात दो टूक कह दी. घर वालों ने सकपका कर आसपड़ोस वालों से यह बात कही तो मोहल्ले वालों ने पहले तो जम कर उस की धुनाई की, उस के बाद उसे रस्सी से बांध दिया और पुलिस को खबर कर दी. खबर मिलते ही पुलिस कल्लू के घर पहुंच गई.

एएसपी आर.डी. भारद्वाज ने जब कल्लू से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद गोताखोरों की मदद से अंजू की लाश और टूटी हुई चूडि़यां भी घटनास्थल से बरामद कर ली गईं. इस के बाद औपचारिक काररवाई पूरी कर के अंजू के शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भिजवा दिया गया. पुलिस के बारबार पूछने पर कल्लू एक ही बात दोहराता रहा कि अंजू बहुत बकबक करती थी, इसलिए उस ने उसे मार डाला. लेकिन इस मामले से यह उजागर हुआ है कि पतिपत्नी के बीच रोजमर्रा की कलह कभीकभी जानलेवा साबित हो जाती है. सनकी और शक्की पति की अक्ल पर इस कदर परदा पड़ जाता है कि वह अपना अंजाम तो दूर की बात, बच्चों के भविष्य की भी परवाह नहीं करता.

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लगता तो यही है कि मामूली शक्ल सूरत वाला कल्लू वेल्डिंग के धंधे से कमा तो अच्छा लेता था, पर अपनी जवान और खूबसूरत पत्नी को ले कर हीनभावना से ग्रस्त था, जिस के चलते उस ने उसे हमेशा के लिए ठिकाने लगा कर खुद अपने हाथों अपनी जमीजमाई गृहस्थी उजाड़ दी.

हिप हॉप क्वीन राजा कुमारी ने रिलीज किया अपने हिट गानों का कलेक्शन

राजा कुमारी विश्व स्तर पर सबसे अधिक दिखाई देने वाली हिप-हॉप आवाज के रूप में अपनी जगह बनाई हुई हैं और वह संगीत बनाने के लिए जानी जाती हैं जो उनकी अमेरिकी परवरिश को उनकी भारतीय जड़ों के साथ जोड़ती है. राजा कुमारी ने एक बैंड के साथ प्रस्तुत अपने पिछले गीतों का संकलित संस्करण जारी किया है. द कैटलॉग रीइमेजिनेड शीर्षक से, राजा कुमारी आपको 30 मिनट की एक बहुत ही मधुर और प्रेरक अनुभव यात्रा की ओर ले जाएगी. ग्रैमी-नॉमिनेटेड रैपर पूरे भारत के दर्शकों के लिए गोवा में लाइव परफॉर्म करती नजर आएंगी.

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वीडियो में, राजा कुमारी एक रेशमी सफेद रंग की स्लिट ड्रेस पहने हुए दिखाई दे रही है, इसे सफेद फूलों के साथ बालों में एक्सेसरीज की तरह लगाया गया है। अपने सफ़ेद पहनावे में रंग जोड़ते हुए, राजा कुमारी ने इसे नीले झुमके और एक स्टेटमेंट बिंदी के साथ पूरा किया है. राजा कुमारी के कई उल्लेखनीय गीत हैं जिसमें जजमेंटल है क्या से द वखरा स्वैग, ज़ीरो से हुस्न परचम, द कम अप से द सिटी स्लम्स, जिन्होंने हम सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया है. नवीनतम वीडियो गीत में द कम अप, आई डिड इट, कौन है तू, शांति, मीरा, बिंदी और चूड़ियां, एनआरआई, अटेंशन एवरीबॉडी, कर्मा, बिलीव इन यू, म्यूट, शुक और सिटी स्लम सहित उनके हिट गाने शामिल हैं.

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अपने उत्साह को व्यक्त करते हुए, राजा कुमारी कहती हैं, “यह एक कठिन समय था जब कोई संगीत कार्यक्रम नहीं हो रहा था, मुझे लगा कि दूसरा लॉकडाउन होने से पहले दुनिया कोई संगीत का उपहार देना चहिए.

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संगीत रिकॉर्ड किया गया था और लॉकडाउन के दौरान हम एडिटिंग और मिक्सिंग में जुटे हुए थे. यह मेरे पसंदीदा गानों में से एक है, गोवा में एक लाइव बैंड के साथ प्रदर्शन करने का एक अद्भुत अनुभव था. 30-मिनट में वे हिट शामिल हैं जिन्हें दुनिया भर के श्रोताओं ने पसंद किया है. मैं इसी बैंड के साथ पूरे भारत में अपने लाइव कॉन्सर्ट टूर की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है. मैं स्टूडियो अलंकरण के बिना श्रोताओं के साथ लाइव संगीत साझा करने में सक्षम होने के लिए खुश और आभारी हूं। यह एक संगीतमय भेंट हैं।”

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