मनोहर कहानियां: 1 मोक्ष, 5 मौतें

  भारत भूषण श्रीवास्तव

बात 20 दिसंबर, 2021 की सुबह के समय की है. हरियाणा के हिसार जिले की बरवाला-अग्रोहा रोड पर गांव वालों ने एक अधेड़ व्यक्ति की लाश पड़ी देखी. पहली नजर में लग रहा था कि किसी गाड़ी ने कुचला है. यानी यह सड़क हादसे का मामला लग रहा था. कुछ ही देर में वहां आनेजाने वालों की भीड़ जमा हो गई.

आसपास के गांवों के लोग भी वहां जमा हो गए. भीड़ में से किसी व्यक्ति ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. वहां मौजूद लोगों में कुछ लोगों ने मृतक को पहचान लिया. वह पास के ही नंगथला गांव का रहने वाला 45 वर्षीय रमेश था.

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रमेश का समाज में मानसम्मान था. इसलिए आसपास के गांवों के लोग उसे अच्छी तरह जानते थे. तभी तो उस की इतनी जल्द शिनाख्त हो गई. सूचना पा कर पुलिस कुछ ही देर में वहां पहुंच गई और घटनास्थल की जांच करने लगी.

इधर कुछ लोग यह खबर देने के लिए रमेश के घर की तरफ दौड़े, लेकिन जब वह घर पर पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर और सन्न रह गए. क्योंकि घर पर 4 और लाशें पड़ी थीं. इस के बाद गांव में ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में सनसनी फैल गई. क्योंकि एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत बहुत बड़ी घटना थी.

रोड पर रमेश के एक्सीडेंट के मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को जब पता चला कि रमेश के घर में 4 सदस्यों की लहूलुहान लाशें पड़ी हैं तो वे भी सन्न रह गए. उन्हें मामला जरूरत से ज्यादा संगीन लगा, लिहाजा इस की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को देने के बाद वहां से कुछ पुलिसकर्मी रमेश के घर की तरफ चल दिए. उन के पीछेपीछे भीड़ भी चल दी.

पुलिस जब रमेश के घर पहुंची तो घर के अंदर का दृश्य दख कर हक्कीबक्की रह गई. जितने मुंह थे, उतनी बातें भी हुईं लेकिन कोई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका. एक हैरानी जरूर सभी को थी कि यह क्या हो गया. रमेश तो बहुत सीधासादा और धार्मिक प्रवृत्ति वाला था, जिस की किसी से दुश्मनी होने का सवाल ही नहीं उठता था और हर तरह के नशापत्ती से वह दूर रहता था.

बैडरूम में 2 पलंगों पर 4 लाशें पड़ी थीं, जिन्हें देखने पर साफ लग रहा था कि उन की बेरहमी से हत्या की गई है. साथ ही समझ यह भी आ रहा था कि मृतकों ने कोई विरोध नहीं किया था.

हाथापाई के निशान वहां कहीं नजर नहीं आ रहे थे. ये लाशें रमेश की 38 वर्षीय पत्नी सुनीता, 14 साल की बेटी अनुष्का, 12 साल की दीपिका और 11 साल के इकलौते बेटे केशव की थीं. जिस ने भी यह नजारा देखा, वह सिहर उठा क्योंकि एक अच्छाखासा घर उजड़ चुका था.

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मामला सनसनीखेज तो निकला पर वैसा नहीं जैसा कि आमतौर पर ऐसी वारदातों में होता है. पुलिस टीम को ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ी, क्योंकि रमेश इस केस की खुद ही गुत्थी सुलझा कर गया था.

कागजों पर उतरी काली कथा

पुलिस जांच शुरू करती, इस के पहले ही उस के हाथ एक नोटबुक लग गई जोकि रमेश का सुसाइड नोट था. यह नोटबुक केशव के स्कूल की थी, जो रखी इस तरह गई थी कि आसानी से पुलिस को नजर आ जाए.

नोटबुक क्या थी रमेश की परेशानियों, मूर्खताओं और वहशीपन का पुलिंदा थी जिसे टुकड़ोंटुकड़ों में लिखा गया था. इस के बाद भी इस के 11 पेज भर गए थे.

अब हर कोई यह जानना चाह रहा था कि अगर अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या रमेश ने ही की है तो इस की वजह क्या है.

अधिकृत रूप से यह वजह दोपहर को लोगों को पता चली, जब डीआईजी (हिसार) बलवान सिंह राणा ने इस बारे में जानकारी दी. इस के पहले वह डीएसपी नारायण सिंह और अग्रोहा थानाप्रभारी के साथ घटनास्थलों पर पहुंचे थे.

शुरुआती जांच के बाद पांचों शव अग्रोहा मैडिकल कालेज पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए थे. अब तक इस वारदात की खबर जंगल की आग की तरह देश भर में फैल चुकी थी. रमेश ने अपने सुसाइड नोट में आत्महत्या करने की जो वजह बताई, उसे जान कर हर कोई हैरान था कि एक पढ़ालिखा और सभ्य आदमी भला यह कैसे कर सकता है. पता चला कि उन्होंने यह सब मोक्ष पाने के लिए किया.

हरियाणा के हिसार जिले की अग्रोहा तहसील का छोटा सा गांव है नंगथला. कहने को और सरकारी कागजों में ही यह अब गांव रह गया है नहीं तो अग्रोहा से महज 4 किलोमीटर दूर होने से यह उसी का ही हिस्सा बन गया है. 700 साल पुराने इस गांव में दाखिल होते ही लोगों की नजरें एक घर पर जरूर ठहर जाती हैं जिस की दीवारों पर पक्षियों के लिए कोई एकदो नहीं बल्कि 50 इको फ्रैंडली घोंसले बने हुए हैं.

घर पर बना रखे थे पक्षियों के घोंसले

पक्षी संरक्षण के इस अनूठे तरीके से देश भर के लोग प्रभावित थे और आए दिन इस बाबत रमेश वर्मा को फोन किया करते थे.

45 वर्षीय रमेश वर्मा अब इस दुनिया में नहीं है. पक्षियों के लिए बसाया उस का छोटा सा संसार भी अब उजड़ रहा है, जहां कुछ दिन पहले तक 100 से भी ज्यादा चिडि़या चहचहाया करती थीं. रमेश बच्चों की तरह उन का ध्यान रखता था और उन्हें वक्त पर दानापानी दिया करता था. इस मिशन में उस का परिवार भी उस का साथ देता था.

इन घोंसलों को देख कर कुछ लोग उसे सनकी भी कहते थे लेकिन रमेश किसी और धुन या सनक में ही पिछले कुछ दिनों से जी रहा था, जिस के बीज तो किशोरावस्था में ही उस के दिलोदिमाग में पड़ चुके थे.

उन में से एक बीज कैक्टस से भी ज्यादा कंटीला और विषैला पेड़ कब बन गया, यह न तो वह समझ पाया और न ही कोई उसे ढंग से समझा पाया. दिसंबर की हड्डी गला देने वाली ठंडी रातों में जब सारी दुनिया कंबलों, रजाइयों में दुबकी सो रही होती थी, तब रमेश एक कशमकश में डूबा कुछ सोच रहा होता था.

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एक निरर्थक सी बात पर कोई जितना खुद से लड़ सकता है रमेश उस से ज्यादा खुद से लड़ चुका था. आखिरकार 20 दिसंबर को उस की हिम्मत जबाब दे गई. ऐसा नहीं कि उस के पास किसी चीज की कमी थी, बल्कि वह तो दुनिया के उन खुशकिस्मत लोगों में से एक था, जिन के पास सब कुछ था.

परिवार में एक सीधीसादी आज्ञाकारी पत्नी, 2 हंसमुख सुंदर बेटियां और उन के बाद हुआ मासूम सा दिखने वाला बेटा, जिस का नाम उस ने कृष्ण के नाम पर प्यार से केशव रखा था.

नंगथला में प्रिंटिंग प्रैस चलाने वाले रमेश की कमाई इतनी थी कि घर खर्च आराम से चलने के बाद पैसा बच भी जाता था, जिस का बड़ा हिस्सा वह कारोबार बढ़ाने में लगा भी रहा था.

शादी के कार्ड छाप कर खासी कमाई कर लेने वाले इस तजुर्बेकार कारोबारी ने फ्लेक्स प्रिंटिंग का भी काम शुरू कर दिया था. इस के पहले वह पेंटिंग भी किया करता था.

फिर किस चीज की कमी थी रमेश के पास, जो उसे मुंहअंधेरे आत्महत्या कर लेनी पड़ी? इस बात को समझने से पहले और भी बहुत सी बातें समझ लेनी जरूरी हैं, जो आए दिन हर किसी के दिमाग में उमड़तीघुमड़ती रहती हैं.

मैं कौन हूं कहां से आया हूं मरने के बाद कहां जाऊंगा, क्या मेरी आत्मा को मुक्ति मिलेगी या मुझे भी 84 लाख योनियों में भटकना पड़ेगा और नर्क की सजा भुगतनी पड़ेगी, जैसे दरजनों सवाल रमेश को आज से नहीं बल्कि सालों से परेशान कर रहे थे.

इन्हीं सवालों से आजिज आ कर वह संन्यास लेना चाहता था, यानी घर से पलायन करना चाहता था. लेकिन घर वालों ने शादी कर उसे घरगृहस्थी के बंधन में बांध दिया.

धर्म के दुकानदारों के पैदा किए इन सवालों के कोई माने नहीं हैं इसलिए समझदार लोग इन्हें दिमाग से झटक कर अपने काम में लग जाते हैं और थोड़ी सी दक्षिणा पंडे, पुजारियों, पुरोहितों को दे कर अपना परलोक सुधरने की झूठी तसल्ली और मौखिक गारंटी ले कर अपनी जिम्मेदारियां निभाने में जुट जाते हैं और जिंदगी का पूरा लुत्फ उठाते हैं.

लोगों को धर्म के धंधेबाजों के हाथों ठगा कर एक अजीब सा सुख मिलता है, जिस की कीमत रमेश जैसे लोगों को मर कर चुकानी पड़ती है, जो पाखंडों के चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह फंस कर दम तोड़ देते हैं.

क्या कोई धार्मिक व्यक्ति ऐसे जघन्य हत्या कांड को अंजाम दे सकता है? इस सवाल का जवाब हर कोई न में देना चाहेगा लेकिन हकीकत में यह धार्मिक सनक थी.

हैवान बनने की है अनोखी कहानी

रमेश ने हैवान बनने की कहानी भी खुद अपने हाथों से इस भूमिका के साथ लिखी कि यह दुनिया रहने लायक नहीं है. मैं इस दुनिया में नहीं रहना चाहता, लेकिन सोचता हूं कि मेरी मौत के बाद मेरे घर वालों का क्या होगा. मैं उन से बहुत प्यार करता हूं मैं कोई मानसिक रोगी नहीं हूं.

सुसाइड नोट में आगे रमेश ने लिखा, ‘मैं ने जिंदगी के आखिरी दिनों में बहुत मन लगाने की कोशिश की थी. मशीनें खरीदीं, दुकान भी खरीद ली थी. 2 लाख रुपए दे भी दिए थे और भी बहुत पैसा आ रहा था. चुनाव में कई लाख रुपए आए थे लेकिन शरीर और दिमाग हार मान चुके हैं. मन अब आजाद होना चाहता था कोई सुख, कोई बात अब रोक नहीं सकती. रोज रात को सब सोचता हूं. 3 दिन से पूरी रात जागा हूं आखों में नींद नहीं है. मन को बहुत लालच दिए, लेकिन बहुत देर हो चुकी है. अब रुकना मुश्किल था. कोई अफसोस कोई दुख नहीं.’

अपनी बात जारी रखते रमेश जैसे इस हादसे का आंखों देखा हाल बता देना चाहता था. इस के बाद उस ने लिखा, ‘सुबह के 4 बज चुके हैं घर से निकल चुका हूं. इतनी सर्दी में सब को परेशान कर के जा रहा हूं, माफ करना. सब से माफी.’ जाहिर है कि रमेश ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपने प्यार करने वालों के मर्डर का प्लान किया था.

खीर में मिला दी थीं नींद की गोलियां

19 दिसंबर को उस ने अपनी दुकान दोपहर 3 बजे ही बंद कर दी थी जबकि आमतौर वह रात 10 बजे दुकान बढ़ाता था, इस दिन बेटा केशव भी उस के साथ था. दूसरे दुकानदारों से वह कम ही बातचीत करता था, इसलिए किसी ने यह नहीं पूछा कि आज इतनी जल्दी घर क्यों जा रहे हो.

कोई भी उसे देख कर अंदाजा नहीं लगा सकता था कि इस आदमी के दिमाग में क्या खुराफात चल रही है. घर पहुंच कर उस ने अपने हाथों से खीर बनाई और पत्नी सहित तीनों बच्चों को बड़े प्यार से खिला दी. फिर वह उन के सोने का इंतजार करने लगा, क्योंकि खीर में उस ने नींद की गोलियां मिला दी थीं.

इन चारों के नींद की गोलियों के असर में आ जाने के बाद उस ने उन सभी के सो जाने का इंतजार किया. सो जाने की तसल्ली हो जाने के बाद कुछ धार्मिक अनुष्ठान किए और फिर कुदाल उठा कर एकएक कर सभी की हत्या कर दी, जो वे बेचारे सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि माली ही अपनी बगिया उजाड़ रहा है.

जन्ममरण के चक्र से मुक्त होने की इच्छा लिए इस धार्मिक आदमी को यह एहसास तक नहीं हुआ कि वह 4 बेकुसूर लोगों को महज मोक्ष की अपनी सनक पूरी करने के लिए बलि चढ़ा रहा है.

अपनी दिमागी परेशानी की चर्चा उस ने सुनीता से की भी थी, इस पर सुनीता ने हथियार डालते हुए आदर्श पत्नियों की तरह यह वादा किया था कि साथ जिए हैं तो मरेंगे भी साथसाथ ही. पति के पागलपन को बेहतर तरीके से समझने लगी.

सुनीता कितनी हताशनिराश हो चुकी थी, यह समझना बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं. जब चारों ने दम तोड़ दिया तो इस पगलाए जुनूनी रमेश ने खुद को भी मारने की गरज से बिजली का नंगा तार अपनी जीभ पर रख लिया लेकिन इस से वह मरा नहीं, क्योंकि बिजली का करंट उस पर असर नहीं करता था, इस बात का जिक्र भी उस ने अपने सुसाइड नोट में किया था.

अब तक रमेश की सोचनेसमझने की ताकत पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और जैसे भी हो वह मर जाना चाहता था, क्योंकि सूरज उगने में कुछ वक्त बाकी था फिर खुदकुशी करना आसान नहीं रह जाता और 4 हत्याओं के अपराध में वह हवालात में होता.

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अब उस ने घर से निकल कर सड़क पर आ कर किसी वाहन के नीचे आ कर मरने का फैसला कर लिया और जातेजाते यह बात भी सुसाइड नोट में लिख दी. इस के बाद क्या हुआ, इस के बारे में पुलिस का अंदाजा है कि वह झाडि़यों में छिप कर बैठ गया होगा और तेज रफ्तार से आती किसी गाड़ी के सामने आ गया, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई.

काफी कोशिशों के बाद भी उस गाड़ी का अतापता नहीं चला, जिस के पहियों ने रमेश की मोक्ष की सनक को पूरा किया.

बुराड़ी कांड का दोहराव

एक और दुखद कहानी का अंत हुआ, जिस की तुलना दिल्ली के 21 जुलाई, 2018 को हुए बुराड़ी कांड से की गई. क्योंकि उस में भी मोक्ष के चक्कर में एक ही घर के 11 सदस्यों ने थोक में आत्महत्या कर ली थी.

मोक्ष नाम के पाखंड का स्याह और वीभत्स सच सामने आने के बाद भी अधिकतर लोगों ने इस बात से इत्तफाक नहीं रखा कि मोक्ष बकवास है बल्कि कहा यह कि रमेश को अगर मोक्ष चाहिए था तो खुद मर जाता, बीवीबच्चों की हत्या न करता. और जिन लोगों ने यह माना कि रमेश को मोक्ष के लिए आत्महत्या नहीं करना चाहिए थी, वे भी मोक्ष की औचित्यता पर सवाल नहीं कर पा रहे.

सवाल यह है कि मोक्ष का इतना फरजी गुणगान क्यों किया जाता है कि लोग अच्छीखासी हंसतीखेलती जिंदगी छोड़ आत्महत्या करने पर उतारू हो जाते हैं और इस के लिए अपने घर वालों की हत्या तक करने लगे हैं. पंडेपुजारियों और मोक्ष का महिमामंडित कर दक्षिणा बटोरने वालों पर गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज क्यों नहीं किया जाता.

रमेश ने गलत किया, यह कहने वाले तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन धार्मिक अंधविश्वास और दहशत फैलाने वाले कौन सा सही काम करते हैं. यह कहने वाले जब तक इनेगिने हैं, तब तक इस प्रवृत्ति पर रोक लगने की उम्मीद करना एक बेकार की बात है. रमेश मानसिक कम धार्मिक रोगी ज्यादा था.

मेरी उम्र 38 साल है. मां बनने के सुख से वंचित हूं, बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल
मेरी उम्र 38 साल है. शादी को 10 साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन मां बनने के सुख से वंचित हूं. डाक्टर ने बताया कि मेरे अंडे कमजोर हैं. इसी वजह से एक बार मेरा 3 माह का गर्भ भी गिर चुका है. बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
इस उम्र में गर्भधारण करना आमतौर पर थोड़ा मुश्किल हो जाता है. आप का 3 माह का गर्भ गिरना भी यही साबित करता है कि आप के अंडे कमजोर हैं. लेकिन आप को निराश होने की आवश्यकता नहीं है. अगर आप के पति में कोई कमी नहीं है तो आप एग डोनेशन तकनीक का सहारा ले सकती हैं. किसी अन्य महिला के अंडे आप के गर्भाशय में ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं. इस के लिए आवश्यक है कि उक्त महिला शादीशुदा हो और बच्चे को जन्म दे चुकी हो.

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हैप्पी प्रैगनैंसी

मांबनना महिला के जीवन का सब से खूबसूरत पल होता है. लेकिन कई बार कुछ कारणों के चलते कोई महिला मां नहीं बन पाती है. ऐसी स्थिति में निराश होना स्वाभाविक है. मगर कई मामलों में कुछ बातों का ध्यान रख कर और डाक्टरी सलाह ले कर कमियों को दूर कर मां बनने का सुख हासिल किया जा सकता है.

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जानतें हैं, प्रैगनैंसी के लिए किनकिन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही, प्रैगनैंसी प्रोसेस और उस से जुड़े कौंप्लिकेशंस पर भी एक नजर:

जरूरी सावधानियां

– 32 साल के बाद महिलाओं की गर्भधारण करने की क्षमता कम होने लगती है. इसलिए अगर किसी महिला की उम्र 32 साल हो गई है, तो उसे गर्भधारण में देर नहीं करनी चाहिए. अगर प्राकृतिक तौर पर वह गर्भवती नहीं हो पा रही है तो उसे तुरंत किसी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए.

– धूम्रपान करने से भी मां बनने की क्षमता प्रभावित होती है. इतना ही नहीं, इस से गर्भपात का भी खतरा बना रहता है, इसलिए महिलाओं को धूम्रपान नहीं करना चाहिए.

– बहुत ज्यादा वजन होना भी मां बनने में बाधक होता है. अगर आप मोटी हैं और आप को गर्भधारण में परेशानी आ रही है, तो आप अपना वजन कम करें.

– जो महिलाएं शाकाहारी होती हैं, उन्हें अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में फौलिक ऐसिड, जिंक और विटामिन बी12 लेने की जरूरत होती है. शरीर में इन पोषक तत्त्वों की कमी भी गर्भधारण में रुकावट पैदा करती है.

– अगर आप 1 सप्ताह में 7 घंटे से ज्यादा ऐक्सरसाइज करती हैं, तो इसे कम करने

की जरूरत है. जरूरत से ज्यादा ऐक्सरसाइज के कारण ओव्युलेशन प्रौब्लम हो जाती है, जिस से गर्भधारण करने में परेशानी आती है.

– फिजिकल इनऐक्टिविटी भी कई बार गर्भधारण करने में बाधा उत्पन्न करती है. अगर आप बहुत ज्यादा सुस्त रहती हैं, फिजिकली इनऐक्टिव रहती हैं, तो आप को ऐक्टिव होना होगा.

– एसटीआई यानी सैक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के कारण भी गर्भधारण करने की क्षमता प्रभावित होती है. अगर आप को ऐसी किसी भी तरह की परेशानी है, तो तुरंत उस का इलाज करवाएं.

– पेस्टिसाइड्स, हर्बिसाइड्स, मैटल जैसे लेड सहित कुछ रासायनिक तत्त्व ऐसे होते हैं, जिन के संपर्क में आने से गर्भधारण की क्षमता प्रभावित होती है. इसलिए जहां तक हो सके इन के सीधे संपर्क में आने से बचें.

– मानसिक तनाव भी गर्भधारण की क्षमता को प्रभावित करता है. इसलिए अगर आप बहुत ज्यादा स्ट्रैस लेती हैं, तो उस से बचें.

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कैसे होता है गर्भधारण

एक महिला जिसे हर महीने मासिक चक्र होता है, वही गर्भधारण कर सकती है. असल में 2 मैंस्ट्रुअल साइकिल के बीच ओव्युलेशन पीरियड होता है. यह वह पीरियड होता है जब ओवरी से एग रिलीज होते हैं यानी अंडे निकलते हैं. सामान्य अवस्था में एक महिला में ओव्युलेशन की प्रक्रिया अगले मैंस्ट्रुअल साइकिल के 2 सप्ताह पहले शुरू हो जाती है. ओव्युलेशन के दौरान रिलीज होने वाले एग 24 घंटे तक जीवित रहते हैं, उस के बाद मर जाते हैं. ओव्युलेशन के दौरान जब पतिपत्नी के बीच शारीरिक संबंध बनता है, तो एग और स्पर्म एकदूसरे के संपर्क में आते हैं. इसी समय स्पर्म द्वारा एग को फर्टिलाइज्ड यानी निशेचित करने से एक महिला गर्भधारण करती है.

गर्भधारण का सर्वोत्तम समय

गर्भधारण करने का सब से सही समय ओव्युलेशन के समय शारीरिक संबंध बनाना होता है. एक सामान्य महिला में ओव्युलेशन की अवधि 6 दिनों की होती है. ओव्युलेशन के बाद जहां एग्स मात्र 1 दिन ही जीवित रह पाते हैं, वहीं स्पर्म 1 सप्ताह तक जीवित रहते हैं. इस प्रकार ओव्युलेशन के बाद के 5 दिन गर्भधारण के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओव्युलेशन के 1-2 दिन पहले शारीरिक संबंध बनाया जाए तो गर्भधारण की क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि इस से स्पर्म को एग के संपर्क में रहने का ज्यादा समय मिलता है.

गर्भधारण के समय होने वाली परेशानी

गर्भधारण के बाद महिला को काफी सावधानी बरतनी होती है. ऐसा न करने पर उसे कई समस्याएं हो सकती हैं.

हाई ब्लडप्रैशर: कई महिलाओं में प्रैगनैंसी के दौरान हाई बीपी की शिकायत देखी जाती है. ऐसे में नियमित जांच कराते रहना चाहिए.

ऐनीमिया: जब एक गर्भवती महिला पर्याप्त मात्रा में आयरन का सेवन नहीं करती है, तो उस के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है. इस स्थिति में लापरवाही बरतने पर मां और बच्चा दोनों की जान जा सकती है.

संक्रमण: एक गर्भवती महिला को संक्रमण से होने वाली बीमारियां जैसे, इन्फ्लुएंजा, हैपेटाइटिस ई, हर्पिस सिंपलैक्स, मलेरिया आदि से ग्रस्त होने का ज्यादा खतरा रहता है. इन बीमारियों का समय पर इलाज बहुत जरूरी है वरना मां और बच्चा दोनों की मृत्यु हो सकती है.

यूरिनरी इनकौंटिनैंस: गर्भावस्था के दौरान यूरिनरी इनकौंटिनैंस यानी मूत्र संबंधी विकार के मामले भी काफी देखने को मिलते हैं. इस प्रौब्लम के होने पर डाक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.

स्ट्रैस: गर्भावस्था के दौरान और उस के बाद कई महिलाएं बेहद मानसिक तनाव में आ जाती हैं. इस तनाव का असर मां और बच्चे दोनों पर पड़ता है. इसलिए जितना जल्दी हो सके इस से बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए.

– डा. साधना सिंघल, गायनेकोलौजिस्ट, श्री बालाजी ऐक्शन मैडिकल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली

राकेश से ब्रेकअप की खबरों पर शमिता शेट्टी ने दिया ये रिएक्शन

‘Bigg Boss15’ न सिर्फ अपने टास्क और लड़ाई-झगड़ों के लिए बल्कि शो में बनी लव स्टोरीज को लेकर भी चर्चा में रहा. बिग बॉस के इस सीजन में दो रोमांटिक रिलेशनशिप देखे गए – करण कुंद्रा-तेजस्वी प्रकाश और शमिता शेट्टी-राकेश बापट. ‘Bigg Boss15’ के घर में ‘तेजरन’ का जन्म हुआ, वहीं बिग बॉस ओटीटी में ‘शारा’ के रोमांटिक पल देखे गए. बिग बॉस 15 से बाहर निकलने के बाद शमिता ने राकेश के साथ खूब मस्ती की. इसकी तस्वीरें-वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर भी शेयर कीं.

 

भले ही सोशल मीडिया पर शमिता शेट्टी और राकेश बापट की प्यार भरी तस्वीरों और वीडियो आती रहती हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से शमिता और राकेश के ब्रेक-अप की खबरें सामने आर रही हैं. जिससे उनके फैंस हैरान हैं. लोगों को उनकी जोड़ी खूब पसंद आई लेकिन ब्रेकअप की खबरों ने उनका दिल तोड़ दिया.

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शमिता शेट्टी  के पास जब उनके और राकेश बापट की ब्रेक-अप  की खबरें पहुंची, तो उन्होंने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपनी इंस्टा स्टोरी पर एक बयान जारी किया. इस बयान में उन्होंने राकेश और अपने ब्रेकअप की खबरों को अफवाह बताया है. उन्होंने लोगों से ऐसी किसी भी रिपोर्ट पर विश्वास न करने की भी अपील की और कहा कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है.

शमिता शेट्टी ने एक न्यूज पोर्टल की खबर को शेयर करते हुए लिखा, “हम आपसे अपील करते हैं कि आप हमारे रिलेशनशिप से संबंधित किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें. इसमें कोई सच्चाई नहीं है. सभी को प्यार और सही दिशा मिले. ”

पैरेंट्स के साथ तेजस्वी के घर पहुंचे करण तो फैंस ने पूछा शादी का सवाल

टीवी की खूबसूरत नागिन तेजस्वी प्रकाश एक बार फिर से अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर लाइमलाइट में आ गई है.बीती रात करण कुंद्रा तेजस्वी प्रकाश के घर से बाहर आते हुए स्पॉट किए गए, फिर क्या था मीडिया को इसकी भनक लग चुकी थी ,बाहर आते ही मीडिया ने करण को घेर लिया और दोनों की चोरी पकड़ी गई. वहीं मीडिया के डर से तेजस्वी प्रकाश तो अपने घर से बाहर ही नहीं आईं. सोशल मीडिया पर तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा की ये तस्वीरें तेजी से वायरल हो गई हैं.

यूँ तो तेजरन की जोड़ी हमेशा सुर्ख़ियों में छाई रहती है, इन दोनों को देखकर साफ पता चलता है कि दोनों एक दूसरे के प्यार में किस कदर डूबे हुए हैं. लेकिन करण का आधी रात को अपने मम्मी पापा को लेकर तेजस्वी के घर जाना कई सवाल पैदा करता है. सोशल मीडिया पर करण की वायरल हुई तस्वीरें देखकर फैंस कयास लगा रहे हैं कि शायद करण और तेजा का रिश्ता पक्का हो गया है. करण कुंद्रा, तेजस्वी प्रकाश के घर अकेले नहीं पहुंचे थे. इस दौरान करण कुंद्रा के साथ उनके माता पिता भी नजर आए.

करण कुंद्रा और तेजस्वी के माथे पर तिलक देखकर फैंस ने पूछे सवाल

करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश दोनों के माथे पर तिलक लगा हुआ था. फैंस को लग रहा है कि करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश का रिश्ता पक्का हो गया. इस खबर की सच्चाई जानने के लिए फैंस करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश से तरह तरह से सवाल पूछ रहे हैं. घर से बाहर निकलते समय करण ने तेजा के मम्मी पापा के पैर भी  छुए ,करण कुंद्रा के इस अंदाज ने फैंस का दिल जीत लिया है. तेजस्वी ने भी करण के मम्मी पापा को गले लगाकर आशीर्वाद लिया.

सोशल मीडिया पर इन दोनों की फोटोज़ वायरल हो रही हैं ,फैंस भी लगातार इनकी फोटोज़ पर अपना रिएक्शन दे रहे हैं.

इस वजह से तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) के घर पहुंचे थे करण कुंद्रा (Karan Kundrra)

हालाँकि करण ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि तेजस्वी के माता पिता की शादी की एनिवर्सरी सेलेब्रेट करने के लिए ही वो अपने पेरेंट्स के साथ यहाँ आए हैं.

लेकिन फैंस तो अब बस करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश की शादी पक्की होने का इंतजार कर रहे हैं. फैंस को लग रहा है कि अब करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश को जल्द से जल्द शादी कर लेनी चाहिए.

 

कुछ दिनों से मैं स्वप्नदोष की समस्या से पीड़ित हूं, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल
मैं 18 वर्षीय बीए प्रथम वर्ष का छात्र हूं. कुछ दिनों से लगभग हर सप्ताह मुझे 1-2 बार रात में स्वप्नदोष हो जाता है. मेरे मित्र का कहना है कि मुझे जल्द से जल्द किसी डाक्टर से संपर्क करना चाहिए, नहीं तो मेरी सेहत पर बुरा असर पड़ेगा. क्या यह समस्या सचमुच इतनी गंभीर है? इस के लिए मुझे किस डाक्टर के पास जाना चाहिए? मैं ने कुछ वैद्यहकीमों के विज्ञापन भी देखे हैं जिन में स्वप्नदोष के इलाज का दावा किया जाता है. मेरा मन काफी विचलित है. राय दें कि मुझे क्या करना चाहिए?

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जवाब
आप परेशान न हों. किशोर अवस्था से युवा उम्र में पांव रखते हुए जब हमारा शरीर सयाना हो जाता है, शरीर में सैक्स हारमोन का संचार होने लगता है, अंड ग्रंथियां शुक्राणु बनाने लगती हैं, प्रजनन प्रणाली में वीर्य बनने लगता है और पुरुषत्व के दूसरे शारीरिक गुण प्रकट हो जाते हैं. उस अवस्था में कुछ किशोरों और युवाओं में सोते समय यौन उत्तेजना जागृत होने पर स्वत: विसर्जित हो जाना बिलकुल सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है. आम बोलचाल की भाषा में लोग इसे स्वप्नदोष के नाम से जानते हैं.

सच तो यह है कि यह कोई विकार नहीं है और इसे सामान्य शारीरिक क्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए. तरूणाई से ले कर वृद्धावस्था तक यह शारीरिक घटना हर उम्र के पुरुष में देखी जाती है. असल में तो इसे स्वप्नमैथुन कहना अधिक उचित होगा. चूंकि इस का जुड़ाव कामुक सपनों से होता है, जो नींद से उठने पर प्राय: याद नहीं रहते. मनोविज्ञानी इसे कामेच्छाओं की निकासी का कुदरती रास्ता भी मानते हैं.

ध्यान रहे कि भूल कर भी वैद्यहकीमों के चक्कर में न पड़ें. कई वैद्यहकीम अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में अनावश्यक ही भ्रामक बातों में फंसा अनेक युवाओं का यौन जीवन खराब कर देते हैं.

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संगृहीत नहीं होता वीर्य क्योंकि वीर्य का गुणधर्म है बहना

आलोक के सासससुर व मातापिता परेशान हो गए. आलोक की बीवी उस के घर आने को तैयार नहीं थी. उसे बहुत समझाया, मगर वह मानी नहीं. इस की पूरी पड़ताल की गई. तब सचाई का पता चला कि आलोक अपनी बीवी के साथ हमबिस्तरी करने से दूर भागता था, इस कारण उस की बीवी उस के पास रहना नहीं चाहती थी.

आलोक के दोस्तों से बात करने पर पता चला कि आलोक अपनी ताकत नहीं खोना चाहता था. इस कारण वह अपनी बीवी से दूर भागता था.

उस का कहना था, ‘‘वीर्य बहुत कीमती होता है. उसे नष्ट नहीं करना चाहिए. इस के संग्रह से ताकत बढ़ती है.’’ यह जान कर आलोक के मातापिता ने अपना सिर पीट लिया.

ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जिन में हमें इस बात का पता चलता है कि यह भ्रम कितनी व्यापकता से फैला हुआ है, इस भ्रम की वजह से कई खुशहाल परिवार उजड़ जाते हैं. इन उजड़े हुए अधिकांश परिवारों के व्यक्तियों का मानना होता है कि वीर्य संगृहीत किया जा सकता है. क्या इस के संग्रह से ताकत आती है? क्या वाकई यह भ्रम है या यह हकीकत है. हम यहां इस को समझने का प्रयास करते हैं.

आलोक के मातापिता समझदार थे. वे आलोक को डाक्टर के पास ले गए. डाक्टर यह सुन कर मुसकराया. उन्होंने आलोक से कहा, ‘‘तुम्हारी तरह यह भ्रम कइयों को होता है.’’

डाक्टर ने आलोक को कई उदाहरण दे कर समझाया तब उस की समझ में आया कि उस ने वास्तव में एक भ्रम पाल रखा था, जिस के कारण उस का परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया था. उस के परिवार और उस की खुशहाल जिंदगी को डाक्टर साहब और उस के मातापिता ने अपनी सूझबूझ से बचा लिया. नतीजतन, वह आज अपनी बीवी और 2 बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहा है.

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शरीर विज्ञान और प्राकृतिक विज्ञान के अपने नियम हैं. उन के अपने सिद्धांत हैं. वे उन्हीं का पालन करते हैं. नियम कहता है कि वीर्य को संगृहीत नहीं किया जा सकता है. जिस तरह एक भरे हुए गिलास में और पानी नहीं भरा जा सकता है वैसे ही वीर्यग्रंथि में एक सीमा के बाद और वीर्य नहीं भरा जा सकता है. यदि शरीर में वीर्य बनना जारी रहा तो वह किसी न किसी तरह शरीर से बाहर निकल जाता है.

वीर्य का गुणधर्म है बहना

वीर्य शरीर से बहने और बाहर निकलने के लिए शरीर में बनता है. वह किसी न किसी तरह बहेगा ही. यदि आप हमबिस्तरी कर के पत्नी के साथ आनंददायक तरीके से बहा दें तो ठीक से बह जाएगा, यदि ऐसा नहीं करोगे तो वह स्वप्नदोष के जरिए बह कर निकल जाएगा.

वीर्य का कार्य प्रजनन चक्र को पूरा करना होता है. बस, वहीं उस का कार्य और वही उस की उम्र होती है. उस में उपस्थित शुक्राणु औरत के शरीर में जाने और वहां अंडाणु से मिल कर शिशु उत्पन्न करने के लिए ही बनते हैं. उन की उम्र 2 से 3 दिन के लगभग होती है. यदि उस दौरान उन का उपयोग कर लिया जाए तो वे अपना कार्य कर लेते हैं अन्यथा वे मृत हो जाते हैं.

मृत शुक्राणु अन्य शुक्राणु को मारने का काम भी करते हैं. इसलिए इस को जितना बहाया जाए, शरीर में उतने स्वस्थ शुक्राणु पैदा होते हैं. शरीर मृत शुक्राणुओं को शरीर से बाहर निकालता रहता है. इस से शरीर की क्रिया बाधित नहीं होती है.

शरीर को ताकत यानी ऊर्जा वसा और कार्बोहाइड्रेट से मिलती है. हम शरीर की मांसपेशियों को जितना मजबूत करेंगे, हम उतने ताकतवर होते जाएंगे. यही शरीर का गुणधर्म है. इसी वजह से शारीरिक मेहनत करने वाला 40 किलो का एक हम्माल 100 किलोग्राम की बोरी उठा लेता है जबकि 100 किलोग्राम का एक व्यक्ति 40 किलोग्राम की बोरी नहीं उठा पाता. इसलिए यह सोचना कि वीर्य संग्रह से ताकत आती है, कोरा भ्रम है.

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Smart Jodi: अपनी शादी को लेकर मोनालिसा ने कही ये बात

स्टार प्लस के नए रिएलिटी शो ‘स्मार्ट जोड़ी’ की शुरुआत हो चुकी है। अपने यूनिक कॉन्सेप्ट की वजह से ये शो सुर्ख़ियों में छाया है. इस शो में टीवी के 10 सेलेब्रिटी कपल्स हैं जो अलग-अलग एंटरटेनमेंट टास्क के जरिये एक-दूसरे को टक्कर दे रहे है. इस शो में कंटेस्टेंट के बीच समझ, बॉन्डिंग और कम्पेटिबिलिटी को टेस्ट किया जायेगा.

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हाल ही में इस शो के प्रोमो में भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अपने पति विक्रांत सिंह के साथ मंच पर दिखाई दे रही हैं. इस शो में एक्ट्रेस मोनालिसा  ने अपनी शादी में आईं दिक्कतों के बारे में खुलकर बात भी की. अपनी शादी के दिनों याद करते हुए एक्ट्रेस इमोशनल हो जाती हैं. मोनालिसा ने बताया, ‘मेरी रील लाइफ देखकर लोग मुझे जज करने लगे, सोचते थे की रील लाइफ में जैसी है, रियल लाइफ में भी ऐसी ही होगी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘जिस तरह से लोग मुझे लेकर सोचते थे… हालात ही ऐसे हो गई थी मनीष की शायद मेरी शादी ही ना हो.’

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मोनालिसा के इस बयान को सुनकर उनके पति विक्रांत की आँखों में आंसू आ जाते हैं. यही नहीं शो के दूसरे कंटेस्टेंट भी काफी हैरान और भावुक हो जाते हैं.

सनी लिओनी ने सोशल मीडिया पर दिखाए अपने जख्म

बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी एक बार फिर से ओटीटी पर धमाकेदार वापसी करने जा रही हैं. सनी लियोनी की वेब सीरीज अनामिका 10 मार्च को रिलीज़ हो रही है.

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‘अनामिका’ ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम की जाएगी.फिल्म रिलीज़ से पहले सनी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम पर ‘अनामिका’ का जमकर प्रमोशन किया है.

हाल ही में एक्ट्रेस ने अनामिका की ऐसी तस्वीर शेयर की है जिसे देखकर आपके रोंगटे ख़ड़े हो जाएंगे. एक्ट्रेस लगातार अपने इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसी फोटोज़ शेयर कर रही हैं जिनमें उनके शरीर और चेहरे पर जख्मों के निशान दिख रहे हैं.

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एक फोटो में सनी हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई हैं और उनके चेहरे से लेकर पीठ तक पर चोट के निशान नज़र आ रहे हैं.

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सनी लियोनी की ‘अनामिका’ वेब सीरीज के 8 एपिसोड स्ट्रीम किए जाने हैं, जिसमें उनके साथ समीर सोनी , सोनाली सहगल , राहुल देव , शहज़ाद शेख और अयाज़ खान जैसे स्टार्स लीड रोल में नजर आएंगे.

Holi Special: पैर की जूती

मेरे मम्मी पापा हर वक्त मुझ पर शक करते हैं, क्या करूं?

सवाल
मैं 18 वर्षीय कालेज में पढ़ने वाली छात्रा हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरे मम्मी पापा हर वक्त मुझ पर शक करते हैं. हर समय मुझ पर निगरानी रखते हैं कि मैं फोन पर किस से बात कर रही हूं. बात बात में जानने की कोशिश करती हैं कि कालेज में मैं किन दोस्तों के साथ रहती हूं. मेरे कितने दोस्त लड़के हैं और वे कौन हैं? मुझे उन का यह व्यवहार परेशान करता है. मैं क्या करूं कि वे मुझ पर शक न करें?

जवाब

देखिए, एक माता पिता होने के नाते आप के बारे में जानना आप के माता पिता का हक व जिम्मेदारी भी है. आप अपनी समस्या के समाधान के लिए उन से अपनी हर बात शेयर करें, अपने दोस्तों को उन से मिलवाएं, उन से कुछ भी छिपाएं नहीं. जब ऐसा होगा तो वे आप पर विश्वास करने लगेंगे और बात बात पर आप पर निगरानी नहीं रखेंगे. दरअसल वे आप की परवाह करते हैं इसलिए आप पर निगरानी रखते हैं..

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