इन्फेक्शन से बचना है तो सेक्स के बाद करें ये काम

जब शारीरिक संबंध आपसी रजामंदी से बनाया जाता है तो यह एक सुखद आनंद की अनुभूति कराता है। लेकिन यदि यह आनद समस्या में बदल जाए तो यह पीड़ादायक लगने लगता है। अधिकतर महिलाएं शारीरिक संबंध बनाने के बाद शौचालय का रुख करती है  मन जाता है की शररिक संबंध के तुरंत बाद यदि महिला शौचालय जाती है तो जल्दी से गर्भ नहीं ठहरता. जो महिलाएं माँ नहीं बनना चाहती वह ऐसा करती भी हैं लेकिन मेडिकल साइंस की माने तो शारीरिक संबंध के बाद शौच जाने से उनका ब्लैडर साफ़ हो जाता हैं जिस वजह से उन्हें  इन्फेक्शन होने का खतरा कम होता है  साथ ही यदि पुरुष भी इसे अपनाते है तो उन्हें भी कई तरह की परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है इसलिए इन्फेक्शन से बचना हैं तो निम्नलिखित काम अवश्य करें और अपनी सेक्स लाइफ का भरपूर मजा ले सकें.

पानी पीना ना भूले

सेक्स के बाद पानी पीना ना भूलें क्योंकि पानी पीने से  ज्यादा पेशाब जा सकेंगे जिससे पेशाब के जरिए  शरीर के अधिक बैक्टीरिया  बाहर निकल सकेंगे और इन्फेक्शन होने का खतरा नहीं रहेगा.

हाथ थोए व साफ तौलिए का इस्तेमाल करें

सेक्स के  दौरान अपने या अपने साथी के जननांगों को छूने से आपके हाथों मे  बैक्टीरिया लग जाते हैं  जिस से संक्रमण  होने का खतरा हो सकता है इसलिए हाथों को अच्छे से डिस इंफेक्ट करें व साफ तौलिए का इस्तेमाल करें.

ढीले कपड़े पहने

सेक्स के बाद टाइट अंडर गारमेंट्स का उपयोग ना करें, क्योंकि सेक्स के बाद त्वचा पर नमी आ जाती हैं जिस कारण खुजली जैसी समस्या हो सकती हैं और आपको रेशेज भी हो सकते हैं  , इसलिए सूती अंडर गार्मेंट्स पहने.साथ ही टाइट कपड़ों की जगह ढीले या कॉटन के कपडे पहन कर सोएं.

शावर लेने से बचें

कई  लोगो को गर्मियों मे रात मे सोने से पहले नहाने की आदत होती हैं लेकिन अगर आप सेक्स करने के बाद नाहते हैं तो आपके लिए यह आदत समस्या बन सकती हैं क्योंकि सेक्स के बाद हमारा शरीर थोड़ा गर्म होता हैं ऐसे मे सेक्स के तुरंत बाद नहाने से गर्म और नम वातावरण होने से बैक्टीरिया का विकास होता हैं , जिससे संक्रमण हो सकता है. इसलिए सेक्स के तुरंत बाद नहाना आपकी सेहत के लिए नुकसादेह साबित हो सकता है.

सुगंधित उत्पादों से करें परहेज

सेक्स के बाद किसी भी प्रकार का सुगंधित स्प्रे, परफ्यूम या डियो का उपयोग ना करें. तुरंत बाद इनके उपयोग से आपको प्राइवेट पार्ट में जलन या  संक्रमण की समस्या हो सकती है। बेहतर होगा की आप सेक्स करने से पहले इनका प्रयोग करें जिससे  आप इन्फेक्शन से सुरक्षित भी रह सकें साथ ही आपका पार्टनर भी आपकी तरफ  आकर्षित होगा.

मोबाइल बैंकिंग : आपका बैंक आपके हाथ

मोबाइल बैंकिंग आज बैंकिंग व्यवस्था का प्रमुख अंग हो गया है. बैंकिंग के क्षेत्र में यह मील का पत्थर है. ग्राहकों को कहीं भी, कभी भी बैंकिंग और व्यवसाय के लिए एक सुरक्षित व सुविधाजनक माध्यम मिल गया है.  मोबाइल बैंकिंग पैसों के भुगतान करने का एक सुरक्षित माध्यम है क्योंकि डैबिट कार्ड नंबर या पिन जैसी जानकारी के कारण यह ग्राहकों को जोखिम में नहीं डालता है. मोबाइल बैंकिंग से बहुत सारी बैंकसेवाएं सुरक्षित तरह से मिल जाती हैं. फं ड ट्रांसफ र से ले कर बहुत सारे लेनदेन इस के जरिए सुलभ तरीके से होने लगे हैं. खाते में बची शेष राशि की और मिनी स्टेटमैंट से ले कर पासवर्ड व अकाउंट संबंधी तमाम जानकारियां मोबाइल से ही मिल जाती हैं.

बैंकिंग की शुद्ध सेवाओं के साथ ही साथ मोबाइल रिचार्ज, हवाईजहाज के टिकट बुक कराना, बिल का भुगतान करना, चैकबुक का अनुरोध करना, चैक भुगतान रोकने जैसी तमाम सुविधाएं भी इस के जरिए हासिल की जा सकती हैं. मोबाइल बैंकिंग में लगातार सुधार किया जा रहा है. मोबाइल बैंकिंग उन ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सक्षम बनती जा रही है जिन के पास निम्न स्तर के या जावा रहित हैंडसैट हैं. काफी सेवाएं एसएमएस आधारित मोबाइल बैंकिंग सेवा द्वारा भी प्रदान की जाती हैं.

दुनियाभर में लोकप्रिय

2001 में फिलीपींस में सीमित स्तर पर शुरू हुई मोबाइल बैंकिंग ने दशक के अंत तक तकरीबन सारी दुनिया में बैंक के विकल्प के रूप में अपनी जगह बना ली है. पाकिस्तान में वित्तीय सेवाएं देने वाली अग्रणी कंपनी मोनेट ने अपनी मोबाइल बैंकिंग के दम पर वहां के प्रमुख बैंकों व वित्तीय संस्थानों को पछाड़ दिया है.

ग्लोबल स्तर पर नौर्वे की कंपनी टेलीनौर की गिनती दुनिया के अग्रणी मोबाइल बैंकिंग सेवाप्रदाता के रूप में की जाती है. स्टौकहोम की बर्ग इनसाइट इंडस्ट्री रिसर्च कंपनी के अनुसार, 2009 में ग्लोबल स्तर पर पैर पसारने वाली मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या वर्ष 2020 में 40 गुना तक बढ़ जाएगी. उस समय दुनिया में मोबाइल बैंकिंग के 189.4 करोड़ ग्राहक होंगे, जिन में से 78 फीसदी ग्राहक एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभरते हुए बाजारों वाले देशों के होंगे.

अफ्रीकी देशों में इंटरनैट और बैंकों की व्यापक पहुंच नहीं होने के कारण वहां मोबाइल बैंकिंग की सेवा खासी लोकप्रिय है और तेजी से बढ़ रही है. मोबाइल बैंकिंग के मौजूदा विस्तार से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह है कि विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में मोबाइल फोन औपरेटर वित्तीय सेवाएं देने का प्रमुख जरिया बन रहे हैं.  इस का सब से बड़ा उदाहरण हाल के वर्षों में अफ्रीकी देशों में आई मोबाइल ट्रांसफर की क्रांति है, जिस के चलते भारत की मोबाइल कंपनी एयरटैल सहित दुनिया के कई दिग्गज मोबाइल औपरेटर और वैल्यू एडेड सेवाप्रदाता अफ्रीका का रुख कर रहे हैं.

मोबाइल मनी सर्विसेज का उपयोग करने के मामले में केन्या दुनिया का सब से अग्रणी देश है. कम्यूनिकेशंस कमीशन औफ केन्या के जुलाई 2012 तक के आंकड़ों के अनुसार, केन्या के करीब 2.9 करोड़ मोबाइलधारकों में से

65 फीसदी यानी करीब 1.9 करोड़ यूजर मोबाइल मनी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. केन्या में मोबाइल मनी सेवाओं के जरिए उपयोगी बिलों का भुगतान, स्कूल फीस भरने, स्टोर पर खरीदारी करने, एमटिकटिंग, फोन टौपअप्स, एटीएम से नकदी निकालने आदि कार्य भी किए जाते हैं. सफारीकौम केन्या में मोबाइल मनी ‘एम पैसा सर्विस’ शुरू करने वाली पहली कंपनी है. करीब 5 साल पहले इस की शुरुआत हुई और फिलहाल एमपैसा के करीब 1.5 करोड़ ग्राहक हैं.

जेब में बचत बैंक

बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग सेवा के लिए कई सारे विकल्प दे रहे हैं. आप अपने बैंक खाते को मोबाइल नंबर से जोड़ सकते हैं. इस के तहत, बैंक आप को 7 अंकों वाला एमएमआईडी (मोबाइल मनी आईडैंटिफायर) नंबर और मोबाइल पिन (एमपिन) देगा. एमपिन पासवर्ड की तरह इस्तेमाल होगा. इस के जरिए आप अपनी पूंजी को दूसरे खाते में ट्रांसफ र कर सकते हैं, जैसे कि अभी दूसरे खाते में राशि का ट्रांसफर नैटबैंकिंग या बैंक शाखा जा कर करते हैं. इस के अलावा, बैंक अपने मोबाइल एप्लीकेशन सौफ्टवेयर भी देते हैं जिसे आप बैंक को एसएमएस या बैंक जा कर अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकते हैं.

अब बैंकों ने अलगअलग नामों से अपनी मोबाइल बैंकिंग सेवा भी शुरू कर दी है. भारतीय स्टेट बैंक का एप्लीकेशन एसबीआई फ्रीडम, आईडीबीआई बैंक की गो मोबाइल, और आईसीआईसीआई बैंक का आईमोबाइल नाम से है. इसी तरह से दूसरे तमाम बैंकों की मोबाइल सर्विस के अलगअलग नाम हैं. ऐसे ग्राहक जो नैटबैंकिंग का इस्तेमाल लैपटौप या डैस्कटौप आदि के जरिए करते हैं, बैंक उन्हें मोबाइल बैंकिंग के लिए खुद ही पंजीकृत कर लेते हैं. यानी, ग्राहक अपने स्मार्टफोन पर इंटरनैट के जरिए बैंकिंग सेवाएं प्राप्त कर सकता है.

मोबाइल बैंकिंग को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाने के लिए बैंक मौजूदा ग्राहकों को चुनिंदा एटीएम के जरिए भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा दे रहे हैं. इस के अलावा, ग्राहक बैंक की शाखा में जा कर अपने पहचानपत्र के साथ मोबाइल बैंकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं. मोबाइल बैंकिंग का भी दायरा बढ़ा है. बिना बैंक गए और कोई लिखतपढ़त किए बगैर घर बैठे मोबाइल के जरिए बैंकिंग की सहूलियत ने इसे काफी तेजी से लोकप्रिय बनाया है.

सावधानी जरूरी

मोबाइल बैंकिंग के लोकप्रिय होने के साथ ही साथ इस के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं. इन से थोड़ा सतर्क रह कर और कुछ सावधानियां बरत कर बचा जा सकता है. मोबाइल बैंकिंग करने वालों को इन का ध्यान रखना जरूरी होता है.

मोबाइल बैंकिंग ऐक्टिवेट कराने के बाद सब से पहले यह देखें कि आप के फोन का औटोलौक काम कर रहा है या नहीं. यदि यह ऐक्टिवेट नहीं है तो सब से पहले मोबाइल में औटोलौक को चालू करें, ताकि जब फ ोन यूज में नहीं होगा तो लौक अपनेआप लग जाएगा. लौक खोलने के लिए पासवर्ड ऐसा चुनें जिसे कै्रक कर पाना मुमकिन न हो. इस के लिए 8 या इस से ज्यादा कैरेक्टर वाले पासवर्ड में आप कैरेक्टर (अक्षर), न्यूमेरिकल्स (अंक) और स्पैशल कैरेक्टर्स को यूज कर स्ट्रौंग पासवर्ड तैयार कर सकते हैं.

टैक्स्ट मैसेज द्वारा बैंकिंग संबंधी कोई भी अहम या गोपनीय सूचना, मसलन अकाउंट नंबर, पासवर्ड, पैनकार्ड और जन्मतिथि आदि का खुलासा न करें. हैकर्स इन सूचनाओं का इस्तेमाल आप के बैंक अकाउंट को हैक करने में कर सकते हैं. मोबाइल बैंकिंग संबंधी धोखाधड़ी से बचने के लिए यह भी जरूरी है कि अपने मोबाइल को सिक्योरिटी सौफ्टवेयर से प्रोटैक्ट करें.

मोबाइल में कोई नया एप्लीकेशन, गेम, पिक्चर, म्यूजिक या वीडियो आदि डाउनलोड करते समय ध्यान रखें कि जहां से आप डाउनलोड कर रहे हैं, वह साइट भरोसेमंद हो. कई बार ऐसी फाइलों के जरिए अकसर आप का फोन हैकिंग का शिकार हो जाता है या उस में वायरस भी भेजा जा सकता है.

अपने स्मार्टफोन को वायरस से बचाए रखने के लिए जरूरी है कि जब आप ब्लूटूथ का इस्तेमाल न करें तो उसे स्विच औफ  कर दें. ब्लूटूथ औन रहने से हैकर्स को आप के मोबाइल तक पहुंचने का मौका मिल सकता है. मोबाइल को हैकिंग और वायरस से बचाए रखने के लिए लगातार फायरबौल व सैफ्टी सौफ्टवेयर को अपडेट करते रहना चाहिए.

मोबाइल फोन बनाने वाली या कुछ सौफ्टवेयर कंपनियां इन का समयसमय पर अपडेटड वर्जन मुहैया कराती रहती हैं, जिन्हें इंस्टौल करते रहना चाहिए. अपने मोबाइल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखने के लिए रोजाना ब्राउजिंग हिस्ट्री को डिलीट करते रहने की आदत बना लेना अच्छा रहता है. यह आदत आप के लिए फायदेमंद ही रहेगी.

नया संसद भवन : नरेंद्र मोदी की टेढ़ी चाल

बिना किसी मांग के,देश में आवश्यकता के, एक तरह से रातों-रात देश में एक नया संसद भवन बना दिया गया है. जी हां यह सच्चाई है कि फिलहाल यह मांग उठी  ही नहीं थी कि देश को नवीन संसद भवन चाहिए और ना ही इसकी आवश्यकता महसूस की गई थी . मगर जैसे कभी राजा महाराजाओं को सपना आता था और सुबह घोषणा हो जाती थी भारत जैसे हमारे विकासशील एक गरीब देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अचानक संसद भवन का निर्माण कराना शुरू कर दिया. शायद उन्हें पहले के जमाने के राजा महाराजाओं  के कैसे नए नए शौक चराते हैं . जैसे मुगल बादशाहों ने ताजमहल बनवाया लाल किला बनवाया और इतिहास में अमर हो गए प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी भी इतिहास में अमर होना चाहते हैं. यही कारण है कि संसद भवन का उद्घाटन भी देश की संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करवाने की बजाय स्वयं करने के लिए लालायित है.

नए संसद भवन का उद्घाटन को लेकर  विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमले तेज कर दिए है सबसे पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अब विपक्ष के नेता एक सुर में मांग कर रहे हैं कि उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से ही किया जाना चाहिए. यह मांग एक तरह से देश के संविधानिक प्रमुख होने के कारण राष्ट्रपति से कराया जाना गरिमा मय  लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाली होगी. क्योंकि संविधान के अनुसार हमारे देश में राष्ट्रपति ही सर्व प्रमुख है उन्हीं के नाम से प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार काम करती है.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रपति से ही नई संसद का उद्घाटन कराने की मांग दोहराई  और कहा कि ऐसा होने पर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सरकार को प्रतिबद्धता दिखेगी. आज  राष्ट्रपति का पद महज प्रतीकात्मक बन कर रह गया है.”

खड़गे ने ट्वीट कर कहा ,” ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार ने दलित और आदिवासी समुदायों से राष्ट्रपति इसलिए चुना ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके.”

दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है. और अब मौजूदा राष्ट्रपति को भी समारोह के लिए आमंत्रित नहीं किया जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने कहा, ” संसद भारतीय गणराज्य की सर्वोच्च विधायी संस्था है और राष्ट्रपति सर्वोच्च संवैधानिक पद है.राष्ट्रपति सरकार, विपक्ष और हर नागरिक का प्रतिनिधित्व करती है. वह भारत की प्रथम नागरिक है.उन्होंने आगे कहा  अगर संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति करती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रतिबिबित करेगा.”

क्या यह राष्ट्रपति पद का अवमान नहीं है

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी देश की जनता या सवाल कर रही है की देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद पर आसीन द्रोपदी मुर्मू के साथ उनके पद का अपमान नहीं है .  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर चीज में मैं मैं करना शोभा नहीं देता.  दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टियों में भी इस मुद्दे पर सवाल उठाने खड़े कर दिए हैं.

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा, ” नवनिर्मित संसद भवन के उद्घाटन के लिए राष्ट्रपति की जगह प्रधानमंत्री को आमंत्रित करना न केवल राष्ट्रपति का अपमान है बल्कि ये पूरे आदिवासी समाज का अपमान है. साथ ही यह फैसला दर्शाता है कि भारतीय जनता पार्टी की मानसिकता आदिवासी विरोधी, दलित विरोधी और पिछड़ी विरोधी है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा, ” संसद के शिलान्यास से लेकर अब उद्घाटन तक राष्ट्रपति को छोड़ कर बड़ा फैसला लेना संवैधानिक रूप से सही नहीं है. उन्होंने कहा कि संसद के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित करना चाहिए.  प्रधानमंत्री के लिए संसद के नए भवन का उद्घाटन करना संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा. ऐसा किसी बड़े लोकतंत्र ने ऐसा नहीं किया है. हमारा मत है कि संविधान का सम्मान नहीं हो रहा और ये न्यायोचित नहीं है.”

तृणमूल सांसद सौगत राय के  मुताबिक  राहुल गांधी ने जो मांग उठाई है, उससे हम भी सहमत हैं. नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री की बजाय भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए. ससद में लोकसभा और राज्यसभा दोनों है. प्रधानमंत्री है पार्टी के नेता हैं, जिनके पास सदन में बहुमत है और राष्ट्रपति संसद का प्रतिनिधित्व करते हैं. जहां तक बात वर्तमान राष्ट्रपति जो पति मुर्मू की है अनुसूचित जनजाति का प्रयोग करती हैं जिसका ढोल भाजपा ने उन्हें राष्ट्रपति बनाते समय खूब बजाया  था और आज जब उनसे संसद का उद्घाटन नहीं करवाने का नाटक जारी है और यही आवाज उठ रही है कि यह राष्ट्रपति पद का अपमान है ऐसे में अगर राष्ट्र पति महामहिम मुर्मू राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे देती हैं तो जहां नरेंद्र दामोदरदास मोदी की बड़ी किरकिरी होगी वही इस ऐतिहासिक समय में द्रोपदी मुर्मू का कद बढ़कर इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा. अनुसूचित जनजाति का आप गौरव बन जाएंगी.

Top 20 Erotic Stories in Hindi इरोटिक स्टोरी हिन्दी में

Top 20 Erotic Stories in Hindi. आज हम आपके लिए लेकर आए है कुछ ऐसी कहानियां जिन्हे पढ़ कर आप इनसे खुद को जोड़ पाएंगे, साथ ही इन कहानियों से जुड़कर नई-नई जानकारियां हासिल कर पाएंगे. तो पढ़े Hindi Erotic Stories. 

1. बारिश : फुहार इश्क की

मेरी शक्लसूरत कुछ ऐसी थी कि 2-4 लड़कियों के दिल में गुदगुदी जरूर पैदा कर देती थी. कालेज की कुछ लड़कियां मुझे देखते हुए आपस में फब्तियां कसतीं, ‘देख अर्चना, कितना भोला है. हमें देख कर अपनी नजरें नीची कर के एक ओर जाने लगता है, जैसे हमारी हवा भी न लगने पाए. डरता है कि कहीं हम लोग उसे पकड़ न लें.’

‘हाय, कितना हैंडसम है. जी चाहता है कि अकेले में उस से लिपट जाऊं.’

‘ऐसा मत करना, वरना दूसरे लड़के भी तुम को ही लिपटाने लगेंगे.’

धीरेधीरे समय बीतने लगा था. मैं ने ऐसा कोई सबक नहीं पढ़ा था, जिस में हवस की आग धधकती हो. मैं जिस्म का पुजारी न था, लेकिन खूबसूरती जरूर पसंद करने लगा था.

एक दिन उस ने खूब सजधज कर चारबत्ती के पास मेरी साइकिल के अगले पहिए से अपनी साइकिल का पिछला पहिया भिड़ा दिया था. शायद वह मुझ से आगे निकलना चाहती थी.

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2. प्यासा सावन : जब पारो ने अमर को रिझायाErotic Story

रात के 2 बजे थे. अमर अपने कमरे में बेसुध सोया हुआ था कि तभी दरवाजे पर ठकठक हुई. ठकठक की आवाज से अमर की नींद खुल गई. लेकिन उस ने सोचा कि शायद यह आवाज उस के मन का भरम है, इसलिए वह करवट बदल कर फिर सो गया.

लेकिन कुछ देर बाद फिर ठकठक की आवाज आई. ‘लगता है कोई है,’ उस ने मन ही मन सोचा, फिर उठ कर लाइट जलाई और दरवाजा खोलने लगा. तभी उस के मन में खयाल आया कि कहीं बाहर कोई चोर तो नहीं है.

यह खयाल आते ही वह थोड़ा सहम सा गया. फिर उस ने धीरे से पूछा, ‘‘कौन है?’’

‘‘मैं हूं,’’ बाहर से किसी लड़की की मीठी सी आवाज आई. अमर ने दरवाजा खोल दिया. सामने पारो को खड़ा देख कर वह हैरान हो कर बोला, ‘‘अरे तुम?’’

‘‘क्यों, कोई अनहोनी हो गई क्या?’’ पारो मुसकराते हुए बोली. अमर ने देखा कि पारो नारंगी रंग का सलवारसूट पहने हुए थी. दुपट्टा न होने से उस के उभरे अंग दिख रहे थे.

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3. प्यासी नदी : क्या थी नौकरानी की कहानीErotic story

मेरे पतिदेव को चलतेफिरते मुझे छेड़ते हुए शरारत करने की आदत है. वे कभी गाल छू लेते हैं, तो कभी कमर पर चुटकी ले लेते हैं. यह भी नहीं देखते कि आसपास कोई है या नहीं. बस, मेरे प्रति अपना ढेर सारे प्यार को सरेआम जता देते हैं.  मेरे मना करने पर या ‘शर्म करो’ कहने पर कहते हैं, ‘अरे यार, अपनी खुद की बाकायदा बीवी को छेड़ रहा हूं, कोई राह चलती लड़की को नहीं और प्यार जता रहा हूं, सता नहीं रहा… समझी जानू…’

बेशक, मुझे भी उन का यों प्यार जताना गुदगुदा जाता है. कभी चुपके से मैं भी इन की पप्पी ले लेती हूं… हम मियांबीवी जो हैं.  पर, 1-2 बार मैं ने नोटिस किया है कि मेरी कामवाली गीता हम पतिपत्नी की ये अठखेलियां दरवाजे के पीछे खड़ी रह कर छिपछिप कर देखती है. पहले तो मुझे लगा कि यह मेरा भरम है, पर अब तो गीता ऐसी हरकतें बारबार करने लगी थी. वैसे, गीता बहुत अच्छी है. स्वभाव भी मिलनसार और काम भी परफैक्ट, कभी शिकायत का मौका नहीं देती.

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4. खूबसूरत लम्हे – भाग 1 : क्या शेखर को मिला उसका प्यार    Erotic story                   

शेखर इस नए शहर में जिंदगी की नई शुरुआत करने आ पहुंचा था. आईएएस पूरी करने के बाद उस की पत्नी की पोस्टिंग इसी शहर में हुई. वैसे भी अमृतसर आ कर वह काफी खुश था. इस शहर में वह पहली बार आया था, पर उसे ऐसा लगता कि वह अरसे से इस शहर को जानता है. आज वह बाजार की तरफ निकला ताकि अपनी जरूरत का सामान खरीद सके. अचानक एक डिपार्टमैंटल स्टोर में शेखर को एक जानापहचाना चेहरा नजर आया. हां, वह संगीता थी और साथ में था शायद उस का पति. शेखर गौर से उसे देखता रहा. संगीता शायद उसे देख नहीं पाई या फिर जानबूझ कर उस ने देख कर भी अनदेखी कर दी. वह जब तक संगीता के करीब पहुंचा, संगीता स्टोर से निकल कर अपनी कार में जा बैठी और चली गई. शेखर उसे देख कर अतीत में खो गया.

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5. दिल की दहलीज पर: मधुरा का सपना क्यों चकनाचूर हो गया?Erotic story

‘‘आहा,चूड़े माशाअल्लाह, क्या जंच रही हो,’’ नवविवाहिता मधुरा की कलाइयों पर सजे चूड़े देख दफ्तर के सहकर्मी, दोस्त आह्लादित थे. मधुरा का चेहरा शर्म से सुर्ख पड़ रहा था. शादी के 15 दिनों में ही उस का रूप सौंदर्य और निखर गया था. गुलाबी रंगत वाले चेहरे पर बड़ीबड़ी कजरारी आंखें और लाल रंगे होंठ…

कुछ गहने अवश्य पहने थे मधुरा ने, लेकिन उस के सौंदर्य को किसी कृत्रिम आवरण की आवश्यकता न थी. नए प्यार का खुमार उस की खूबसूरती को चार चांद लगा चुका था.

‘‘और यार, कैसी चल रही है शादीशुदा जिंदगी कूल या हौट?’’ सहेलियां आंखें मटकामटका कर उसे छेड़ने लगीं. सच में मनचाहा जीवनसाथी पा मानों उसे दुनिया की सारी खुशियां मिल गई थीं. मातापिता के चयन और निर्णय से उस का जीवन खिल उठा था.

‘‘वैसे क्या बढि़या टाइम चुना तुम ने अपनी शादी का. क्रिसमस के समय वैसे भी काम कम रहता है… सभी जैसे त्योहार को पूरी तरह ऐंजौय करने के मूड में होते हैं,’’ सहेलियां बोलीं.

‘‘इसीलिए तो इतनी आसानी से छुट्टी मिल गई 15 दिनों की,’’ मधुरा की हंसी के साथसाथ सभी सहकर्मियों की हंसी के ठहाकों से सारा दफ्तर गुंजायमान हो उठा.

तभी बौस आ गए. उन्हें देख सभी चुप हो अपनीअपनी सीट पर चले गए.

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6. वह सुंदर लड़की: दोस्त की बड़ी बहन पर आया दिलErotic story

मेरा घर सहारनपुर में था. 10वीं का इम्तिहान देने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए पिताजी ने मुझे मेरे काकाजी के पास भेज दिया, जो दिल्ली के सब्जी मंडी नामक महल्ले में रहते थे.

जेबखर्च के लिए पिताजी हर महीने मुझे 2,000 रुपए भेजा करते थे. दिल्ली जैसा इतना बड़ा शहर और खुली आजादी, मेरे तो मजे हो गए. कालेज जाने के बजाय वे रुपए मैं फिल्में देखने और दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने में खर्च कर देता था.

मैं जहां रहता था, उस महल्ले में मेरी उम्र के और भी कई लड़के थे, जिन से बहुत जल्द मेरी दोस्ती हो गई. उन में मेरा सब से अच्छा दोस्त था अविनाश. रोज शाम के समय हम सब क्रिकेट खेलते थे. अपने काकाजी को जब मैं गली में घुसते हुए देखता तब मैं तुरंत किसी दीवार की आड़ में छिप जाता.

अगर वे देख लेते कि शाम के समय पढ़ाई करने के बजाय मैं क्रिकेट खेल रहा हूं, तब फोन कर के पिताजी को बता देते और फिर पिताजी मुझे सहारनपुर बुला लेते.

7. कठपुतली: निखिल से क्यों टूटने लगा मीता का मोहErotic story

जैसे ही मीता के विवाह की बात निखिल से चली वह लजाई सी मुसकरा उठी. निखिल उस के पिताजी के दोस्त का इकलौता बेटा था. दोनों ही बचपन से एकदूसरे को जानते थे. घरपरिवार सब तो देखाभाला था, सो जैसे ही निखिल ने इस रिश्ते के लिए रजामंदी दी, दोनों को सगाई की रस्म के साथ एक रिश्ते में बांध दिया गया.

मीता एक सौफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी और निखिल अपने पिताजी के व्यापार को आगे बढ़ा रहा था.

2 महीने बाद दोनों परिणयसूत्र में बंध कर पतिपत्नी बन गए. निखिल के घर में खुशियों का सावन बरस रहा था और मीता उस की फुहारों में भीग रही थी.

वैसे तो वे भलीभांति एकदूसरे के व्यवहार से परिचित थे, कोई मुश्किल नहीं थी, फिर भी विवाह सिर्फ 2 जिस्मों का ही नहीं 2 मनों का मिलन भी तो होता है.

विवाह को 1 महीना पूरा हुआ. उन का हनीमून भी पूरा हुआ. अब निखिल ने फिर काम पर जाना शुरू कर दिया. मीता की भी छुट्टियां समाप्त हो गईं.

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8. नया जमाना: क्या बदल गई थी सुरभिErotic story

डरबन की चमचमाती सड़कों पर सरपट दौड़ती इम्पाला तेजी से आगे बढ़ी जा रही थी. कुलवंत गाड़ी ड्राइविंग करते हिंदी फिल्म का एक गीत गुनगुनाने में मस्त थे. सुरभि उन के पास वाली सीट पर चुपचाप बैठी कनखियों से उन्हें निहारे जा रही थी. इम्पाला जब शहर के भीड़भाड़ वाले बाजार से गुजरने लगी तो सुरभि ने एक चुभती नजर कुलवंत पर डाली और बोली, ‘‘अंकल, कहीं मैडिकल की शौप नजर आए तो गाड़ी साइड में कर के रोक देना, मुझे दवा लेनी है.’’

कुलवंत के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभर आए. सुरभि की तरफ देख कर बोले, ‘‘क्यों, क्या हुआ? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है न?’’

‘‘हां, तबीयत तो ठीक है.’’

‘‘फिर दवा किस के लिए लेनी है?’’

‘‘आप के लिए.’’

‘‘मेरे लिए, क्यों? मुझे क्या हुआ है? एकदम भलाचंगा तो हूं.’’

‘‘आप बड़े नादान हैं. नहीं समझेंगे. अब आप अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाना बंद कीजिए. मैडिकल शौप नजर आए तो वहां गाड़ी रोक देना. मैं 1 मिनट में वापस आ जाऊंगी.’’

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9. यादों के सहारे: क्या प्रकाश और नीलू एक हो पाएErotic story

वह बीते हुए पलों की यादों को भूल जाना चाहता था. और दिनों के बजाय वह आज  ज्यादा गुमसुम था. वह सविता सिनेमा के सामने वाले मैदान में अकेला बैठा था. उस के दोस्त उसे अकेला छोड़ कर जा चुके थे. उस ने घंटों से कुछ खाया तक नहीं था, ताकि भूख से उस लड़की की यादों को भूल जाए. पर यादें जाती ही नहीं दिल से, क्या करे. कैसे भुलाए, उस की समझ में नहीं आया.

उस ने उठने की कोशिश की, तो कमजोरी से पैर लड़खड़ा रहे थे. अगलबगल वाले लोग आपस में बतिया रहे थे, ‘भले घर का लगता है. जरूर किसी से प्यार का चक्कर होगा.

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10. कैलेंडर गर्ल : कैसी हकीकत से रूबरू हुई मोहनाErotic story

‘‘श्री…मुझे माफ कर दो…’’ श्रीधर के गले लग कर आंखों से आंसुओं की बहती धारा के साथ सिसकियां लेते हुए मोहना बोल रही थी.

मोहना अभी मौरीशस से आई थी. एक महीना पहले वह पूना से ‘स्कायलार्क कलेंडर गर्ल प्रतियोगिता’ में शामिल होने के लिए गई थी. वहां जाने से पहले एक दिन वह श्री को मिली थी.

वही यादें उस की आंखों के सामने चलचित्र की भांति घूम रही थीं.

‘‘श्री, आई एम सो ऐक्साइटेड. इमैजिन, जस्ट इमैजिन, अगर मैं स्कायलार्क कलेंडर के 12 महीने के एक पेज पर रहूंगी दैन आई विल बी सो पौपुलर. फिर क्या, मौडलिंग के औफर्स, लैक्मे और विल्स फैशन वीक में भी शिरकत करूंगी…’’ बस, मोहना सपनों में खोई हुई बातें करती जा रही थी.

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11. सबसे हसीन वह: भाग 1Erotic story

इन दिनों अनुजा की स्थिति ‘कहां फंस गई मैं’ वाली थी. कहीं ऐसा भी होता है भला? वह अपनेआप में कसमसा रही थी.

ऊपर से बर्फ का ढेला बनी बैठी थी और भीतर उस के ज्वालामुखी दहक रहा था. ‘क्या मेरे मातापिता तब अंधेबहरे थे? क्या वे इतने निष्ठुर हैं? अगर नहीं, तो बिना परखे ऐसे लड़के से क्यों बांध दिया मु झे जो किसी अन्य की खातिर मु झे छोड़ भागा है, जाने कहां? अभी तो अपनी सुहागरात तक भी नहीं हुई है. जाने कहां भटक रहा होगा. फिर, पता नहीं वह लौटेगा भी या नहीं.’

उस की विचारशृंखला में इसी तरह के सैकड़ों सवाल उमड़तेघुमड़ते रहे थे. और वह इन सवालों को  झेल भी रही थी.  झेल क्या रही थी, तड़प रही थी वह तो.

लेकिन जब उसे उस के घर से भाग जाने के कारण की जानकारी हुई, झटका लगा था उसे. उस की बाट जोहने में 15 दिन कब निकल गए. क्या बीती होगी उस पर, कोई तो पूछे उस से आ कर.

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12. बेवफाई: नैना को कैसे हुआ अपनी गलती का अहसासErotic story

नैना रसोईघर में रात का खाना पकाने की तैयारी कर रही थी. उस के मोबाइल फोन पर काल आ रहा था. रिंगटोन नहीं बजे, इसलिए उस ने मोबाइल फोन को साइलैंट मोड पर रखा था. वह नहीं चाहती थी कि उस के पति मुकेश को काल करने वाले के बारे में पता चले.

नैना ने मोबाइल फोन उठा कर देखा तो पाया कि उस का आशिक दीपक काल कर रहा था. हालांकि वह अभी उसे कुछ दिन तक काल करने से मना कर चुकी थी, फिर भी उस का बारबार काल आ रहा था. वह मुकेश के डर से कई दिनों से उस का काल नहीं रिसीव कर पा रही थी.

मुकेश कई सालों से गुजरात में प्राइवेट नौकरी कर रहा था. वह 3 महीने पहले घर वापस आ चुका था. कोरोना के वायरस से जितना लोगों को नुकसान नहीं हो रहा था, उस से ज्यादा नैना के लिए उस के पति की घर वापसी से आफत आई हुई थी. वह अपने आशिक दीपक से बात नहीं कर पा रही थी.

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13. निशि डाक: अंधेरी रात में किसने भूपेस को पुकाराErotic story

आज खेत से लौटने में रात हो गई थी. भूपेश ने इस बार अपने खेत में गेहूं की फसल बोई थी. आवारा जानवरों से फसल को उजड़ने से बचाना था, सो रातरातभर जाग कर रखवाली करनी पड़ती थी. बाड़ लगाने का भी कोई ज्यादा फायदा नहीं था, क्योंकि आवारा पशु उसे भी काट डालते थे.  आज तो खेत में पानी भी लगाना था, सो भूपेश को लौटने में बहुत रात हो गई थी.

अगलबगल के खेतों वाले बाकी साथी भी चले गए थे. भूपेश को रात में अकेले ही लौटना पड़ा. घर पर मां इंतजार कर रही थी. रात सायंसायं कर रही थी. खेतोंखेतों होता हुआ भूपेश चला आ रहा था. पीपल, नीम, आम, बबूल के पेड़ों की छाया ऐसी लग रही थी जैसे प्रेतात्माएं आ कर खड़ी हो गई हों. बीचबीच में किसी पक्षी की आवाज सन्नाटे को चीर जाती थी. ‘ऐसी गहरी काली रात में ही अकेले आदमी को प्रेतात्माएं घेरने की कोशिश करती हैं. वे अकसर खूबसूरत औरत का वेश बना कर आती हैं और बड़ी ही मीठी आवाज में बुलाती हैं.

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14. उपहार: क्या मोहिनी का दिल जीत पाया सत्याErotic story

मोहिनी थी कि उसे एक भी तोहफा न पसंद आता. आखिर में जब सत्या की मेहनत की कमाई से खरीदे छाते को भी नापसंद कर के मोहिनी ने फेंका तो…

‘‘सिर्फ एक बार, प्लीज…’’

‘‘ऊं…हूं…’’

‘‘मोहिनी, जानती हो मेरे दिल की धड़कनें क्या कहती हैं? लव…लव… लेकिन तुम, लगता है मुझे जीतेजी ही मार डालोगी. मेरे साथ समुद्र किनारे चलते हुए या फिर म्यूजियम देखते समय एकांत के किसी कोने में तुम्हारा स्पर्श करते ही तुम सिहर कर धीमे से मेरा हाथ हटा देती हो. एक बार थिएटर में…’’

‘‘सत्या प्लीज…’’

‘‘मैं ने ऐसी कौन सी अनहोनी बात कह दी. मैं तो केवल इतना चाहता हूं कि तुम एक बार, सिर्फ एक बार ‘आई लव यू’ कह दो. अच्छा यह बताओ कि तुम मुझे प्यार करती हो या नहीं?’’

‘‘नहीं जानती.’’

‘‘यह भी क्या जवाब हुआ भला? हम दोनों एक ही बिरादरी के हैं. हैसियत भी एक जैसी ही है. तुम्हारी और मेरी मां इस रिश्ते के लिए मना भी नहीं करेंगी. हां, तुम मना कर दोगी, दिल तोड़ दोगी, तो मैं…तो मर जाऊंगा, मोहिनी.’’

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15. कांटे गुलाब के – भाग 1 : अमरेश और मिताली की प्रेम कहानी Erotic story

सुबह के 8 बज रहे थे. किचन में व्यस्त थी. तभी मोबाइल की घंटी बज उठी. मन में यह सोच कर खुशी की लहर दौड़ गई कि अमरेश का फोन होगा. फिर अचानक मन ने प्रतिवाद किया. वह अभी फोन क्यों करेगा? वह तो प्रतिदिन रात के 8 बजे के बाद फोन करता है.

अमरेश मेरा पति था. दुबई में नौकरी करता था. मोबाइल पर नंबर देखा, तो झट से उठा लिया. फोन मेरी प्रिय सहेली स्वाति ने किया था. बात करने पर पता चला कि कल उस की शादी होने वाली है. शादी में उस ने हर हाल में आने के लिए कहा. शादी अचानक क्यों हो रही है, यह बात उस ने नहीं बताई. दरअसल, उस की शादी 2 महीने बाद होने वाली थी. जिस लड़के से शादी होने वाली थी, उस की दादी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गईर् थी. डाक्टर ने उसे 2-3 दिनों की मेहमान बताया था. इसीलिए घर वाले दादी की मौजूदगी में ही उस की शादी कर देना चाहते थे.

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16. हवस का नतीजा : देवर और भाभी की रासलीलाErotic story in Hindi

मुग्धा का बदन बुखार से तप रहा था. ऊपर से रसोई की जिम्मेदारी. किसी तरह सब्जी चलाए जा रही थी तभी उस का देवर राज वहां पानी पीने आया. उस ने मुग्धा के हावभाव देखे तो उस के माथे पर हाथ रखा और बोला, ‘‘भाभी, आप को तो तेज बुखार है.’’

‘‘हां…’’ मुग्धा ने कमजोर आवाज में कहा, ‘‘सुबह कुछ नहीं था. दोपहर से अचानक…’’

‘‘भैया को बताया?’’

‘‘नहीं, वे तो परसों आने ही वाले हैं वैसे भी… बेकार परेशान होंगे. आज तो रात हो ही गई… बस कल की बात है.’’

‘‘अरे, लेकिन…’’ राज की फिक्र कम नहीं हुई थी. मगर मुग्धा ने उसे दिलासा देते हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं. मामूली बुखार ही तो है. तुम जा कर पढ़ाई करो, खाना बनते ही बुला लूंगी.’’

‘‘खाना बनते ही बुला लूंगी…’’ मुग्धा की नकल उतार कर चिढ़ाते हुए राज ने उस के हाथ से बेलन छीना और बोला, ‘‘लाइए, मैं बना देता हूं. आप जा कर आराम कीजिए.’’

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17. बंद किताब : रत्ना के लिए क्या करना चाहता था अभिषेकErotic story in Hindi

बनो मत. मैं ने जोकुछ कहा है, वह तुम्हारे ही मन की बात है. तुम्हारी उम्र इस समय 30 साल से ज्यादा नहीं है, जबकि तुम्हारे पति 60 से ऊपर के हैं. औरत को सिर्फ दौलत ही नहीं चाहिए, उस की कुछ जिस्मानी जरूरतें भी होती हैं, जो तुम्हारे बूढ़े प्रोफैसर कभी पूरी नहीं कर सके.

‘‘10 साल पहले किन हालात में तुम्हारी शादी हुई थी, वह भी मैं जानता हूं. उस समय तुम 20 साल की थीं और प्रोफैसर साहब 50 के थे. शादी से ले कर आज तक मैं ने तुम्हारी आंखों में खुशी नहीं देखी है. तुम्हारी हर मुसकराहट में मजबूरी होती है.’’

‘‘वह तो अपनाअपना नसीब है.’’

‘‘देखो, नसीब, किस्मत, भाग्य का कोई मतलब नहीं होता. 2 विश्व युद्ध हुए, जिन में करोड़ों आदमी मार दिए गए. इस देश ने 4 युद्ध झेले हैं. उन में भी लाखों लोग मारे गए. बंगलादेश की आजादी की लड़ाई में 20 लाख बेगुनाह लोगों की हत्याएं हुईं. क्या यह मान लिया जाए कि सब की किस्मत.

18. मिस्टर बेचारा : क्या पूरा हो पाया चंद्रम का प्यारErotic story in Hindi

दरवाजा खुला. जिस ने दरवाजा खोला, उसे देख कर चंद्रम हैरान रह गया. वह अपने आने की वजह भूल गया. वह उसे ही देखता रह गया.

वह नींद में उठ कर आई थी. आंखों में नींद की खुमारी थी. उस के ब्लाउज से उभार दिख रहे थे. साड़ी का पल्लू नीचे गिरा जा रहा था.

उस का पल्लू हाथ में था. साड़ी फिसल गई. इस से उस की नाभि दिखने लगी. उस की पतली कमर मानो रस से भरी थी.

थोड़ी देर में चंद्रम संभल गया, मगर आंखों के सामने खुली पड़ी खूबसूरती को देखे बिना कैसे छोड़ेगा? उस की उम्र 25 साल से ऊपर थी. वह कुंआरा था. उस के दिल में गुदगुदी सी पैदा हुई.

वह साड़ी का पल्लू कंधे पर डालते हुए बोली, ‘‘आइए, आप अंदर आइए.’’

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19. क्या जादू कर दिया : चंपा बनी ‘चंपालाल’Erotic story in Hindi

चंपा अपने गांव के बसअड्डे पर बस से उतर कर गलियां पार कर के अपने घर की ओर जा रही थी. वह रोजाना सुबह कालेज जाती थी, फिर दोपहर तक वापस आ जाती थी.

चंपा इस गांव के बाशिंदे भवानीराम की बेटी थी. वे चंपा को कालेज पढ़ाना नहीं चाहते थे, मगर चंपा की इच्छा थी और उस के टीचरों के दबाव देने पर वे उसे पढ़ाने के लिए शहर भेजने को राजी हो गए.

जैसे ही चंपा का कालेज में दाखिला हुआ, उस की सहेलियों ने खुशियां मनाईं. वे सब चंपा को पढ़ाकू सम झती थीं और उसे चाहती भी खूब थीं.

जब चंपा गांव के हायर सैकेंडरी स्कूल में पढ़ती थी, तब पूरी जमात में उस का दबदबा था. अगर कोई लड़का ऊंची आवाज में बोल देता था, तब वह उसे ऐसी नसीहत देती थी कि वह चुप हो जाता था. इसी वजह से वह अपनी सहेलियों की चहेती बनी हुई थी.

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20. प्यार के राही : हवस भरे रिश्तेErotic story in Hindi

उस दिन गजाला और मासूम राही की शादी बड़ी धूमधाम से हो रही थी. सभी लोग निकाह के वक्त का इंतजार कर रहे थे. मासूम राही दोस्तों के बीच सेहरा बांधे गपें मार रहे थे, तभी मौलवी साहब आए और निकाह की तैयारी होने लगी.

मौलवी साहब बोलते गए और मासूम राही निकाह कबूल करते गए. सारी रस्में खत्म होने के बाद सभी लोग मजे ले कर खाना खाने लगे.

अगली रात गजाला और मासूम राही अपने सुहागरात के कमरे में एकदूसरे के आगोश में खोए हुए थे और गरम तूफान की आग में जल रहे थे. कुछ मिनटों के बाद वह आग ठंडी हुई, तो वे एकदूसरे से अलग हुए.

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मौनी रॉय ने Cannes में ब्लैक ड्रेस से किया डेब्यू, काला चश्मे में ढाया कहर

टीवी इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड में पहचान बनाने वाली मौनी रॉय इन दिनों Cannes में डेब्यू करती नजर आ रही है जिसे लेकर मौनी रॉय इन दिनों चर्चा के विषय में आ गई है. सोशल मीडिया में अब वो जमकर वायरल हो रही है. ब्लैक ड्रेस में मौनी रॉय ने काला चश्मा भी लगा रखा है. जिसमें वह बेहद खूबसूरत नजर आ रही है.

 

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आपको बता दे, कि मौनी रॉय के लिए ये पहली दफा है जब वे Cannes फिल्म फेस्टिवल में पहुंची है. जहां उन्होने कर्वी फिगर फ्लॉन्ट करती हुई नजर आ रही है ब्लैक ड्रेस में मौनी रॉ कहर ढाती हुई नजर आ रही है साथ में उन्होंने काला चश्मा भी लगी रखा है. लोग मौनी रॉय के इस लुक बेहद पसंद कर रहे है साथ ही जमकर कमेंट बरसा रहे है. मौनी रॉय इस ब्लैक ड्रेस में मीडियो को जबरदस्त पोज देती हुई नजर आ रही है. इस लुक में मौनी रॉय बेहद ही सिंपल लुक कैरी किया है. जिसमें उनके फैंस काफी पसंद कर रहे है.

 

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इस वायरल हो रही तस्वीर में मौनी रॉय अपना कर्वी फिगर फ्लॉन्ट करती हुई नजर आ रही हैं. मौनी रॉय के कर्वी फिगर पर फैंस लट्टू हो गए. मौनी रॉय इस तस्वीर में काला चश्मा लगाए पोज देती हुई नजर आ रही हैं. मौनी रॉय का ये स्वैग फैंस का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है. मौनी रॉय की इस डीपनेक ड्रेस की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही हैं. मौनी रॉय इस तस्वीर में अपनी कातिलाना अदाएं दिखाती हुई नजर आ रही हैं. मौनी रॉय की इस अदा पर लोग फिदा हो गए. इस तस्वीर में मौनी रॉय के फेस पर एक प्यारी सी स्माइल नजर आ रही हैं. मौनी रॉय की इस स्माइल पर फैंस दिल हार बैठे.

 

GHKKPM: क्या पाखी के बाद सई कहेंगी शो को अलविदा!

इन दिनों गुम है किसी के प्यार में शो काफी एंटरटेन कर रहा है शो में काफी सारें ट्वीस्ट देखने को मिल रहे है शो में अबतक की कहानी में दिखाया गया है कि सत्या और विराट दोनों ही सई के प्यार में पागल हो गए है हालांकि खबर कहानी को लेकर नहीं है बल्कि शो को स्टार्स अलविदा कह रहे है इस बात पर है. जी हां, एश्वर्या शर्मा के बाद शो के लीड ऱोल में रहे कुछ कलाकर शो को जल्द ही अलविदा कहेंगे.

 

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आपको बता दें, कि शो की कहानी में 20 साल की लीप आ गया है जिसमें कलाकार बूढे नहीं दिखना चाहते है साथ ही वो मेकर्स ने अपनी फीस भी बढ़वाना चाहते है लेकिन इस पर कुछ बात ना बनने पर शो के लीड रोल में नजर आने वाले स्टार्स शो को टाटा-बाय-बाय कहने वाले है जी हां, इनमें शामिल है आयशा सिंह, नील भट्ट और हर्षद अरोड़ा शामिल है और अब इन्होने शो छोड़ने का फैसला किया है. खुद आयशा सिंह ने इस पर चुप्पी तोड़ी है.

 

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आयशा सिंह ने एक इंटरव्यू में इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज किया है. लेकिन उन्होंने शो छोड़ने की बात की पुष्टि की है. आयशा सिंह ने सभी दावों को झुठलाते हुए कहा, “नहीं, ये आरोप बिल्कुल भी सच नहीं हैं. हां लेकिन कहानी का आगे बढ़ना तय है. बस यही सब है.” बता दें कि आयशा सिंह, नील भट्ट और हर्षद अरोड़ा से पहले एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने ‘गुम है किसी के प्यार में’ को बाय-बाय कहा था. उनका कहना था कि वह अपने करियर में नई चीजें आजमाना चाहती हैं. खास बात तो यह है कि ‘गुम है किसी के प्यार में’ से निकलते ही उनके हाथ ‘खतरों के खिलाड़ी 13’ लगा. अभी तक योगेंद्र विक्रम सिंह, आदिश वैद्य, यामिनी मल्होत्रा, मिताली नाग, सचिन श्रॉफ, संजय नारवेकर और ऐश्वर्या शर्मा जैसे सितारे ‘गुम है किसी के प्यार में’ से किनारा कर चुके हैं.

दलित नौजवान: शादी के दस्तूर और दर्द

जब भी देश में जातिगत जनगणना की बात छिड़ती है, तब सब से पहले उन लोगों का खयाल आता है, जो बहुजन समाज के हैं. देश की वह कमेरी आबादी, जो आज भी अपनी मरजी से शादी के जश्न का मजा नहीं ले पाती है. यह तबका इतना ज्यादा पिछड़ा और अंधविश्वास के जाल में उलझा हुआ है कि जो पंडेपुजारी और अगड़ी जमात के दबंग फरमान सुना देते हैं, वह इन के लिए पत्थर की लकीर हो जाता है.

यही वजह है कि इस बहुजन समाज के नौजवान अपनी शादी में घोड़ी पर नहीं बैठ पाते हैं, क्योंकि इस से अगड़े समाज की शान पर बट्टा जो लग जाता है. वे डीजे के म्यूजिक पर ठुमके नहीं लगा सकते, क्योंकि फिल्मी गानों पर अपने यार की शादी में खुशी जाहिर करना उन का हक नहीं है.

चूंकि एक साजिश के तहत इन लोगों को पढ़ाईलिखाई से दूर रखा जाता है, तो ये बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर होते हैं और फिर छोटेमोटे काम कर के एक साधारण सी जिंदगी गुजार देते हैं. वे अगर गलती से थोड़ाबहुत पढ़लिख भी गए, तो शादी के लायक साथी नहीं मिल पाता है. लड़कियों के लिए ज्यादा पढ़ाईलिखाई ही उन की दुश्मन बन जाती है. उन्हें अपने समाज में लायक लड़का नहीं मिलता और कहीं दूसरी तथाकथित बड़ी जाति के लड़के से ब्याह रचा लिया, तो उम्रभर डर के साए में जिंदगी गुजारने को मजबूर होना पड़ता है.

लड़कियों के लिए एक और समस्या होती है 18 साल से कम उम्र में ही शादी करा देना. तब तक वे न तन से और न ही मन से शादी की जिम्मेदारी निभाने के लायक हो पाती हैं. जो खुद कमजोर हो, वह क्या सेहतमंद बच्चे को जन्म दे पाएगी. नतीजतन, उन्हें बीमारियों से जूझना पड़ता है. कोढ़ पर खाज है शादी के वे दस्तूर, जो इतना धीरेधीरे बदल रहे हैं कि उम्मीद की किरण बड़ी हलकी नजर आ रही है.

उत्तर प्रदेश में रामदासपुर गांव की रहने वाली शिवानी की शादी तय हो रही थी. शिवानी ने 12वीं जमात पास कर ली थी. घर वालों का कहना था कि लड़का अच्छा है. उस की अपनी दुकान है, इसलिए आगे की पढ़ाई शिवानी ससुराल से भी कर सकती है.

शिवानी दलित जाति की थी. उस के लिए शादी के बाद पढ़ाई जारी रखना उतना आसान नहीं था, जितना अगड़ी जाति की लड़कियों के लिए रहता है. शिवानी ने पढ़ाई देर से शुरू की थी. वह बदले जमाने की लड़की थी. उस की अपनी सोच थी और उसे मातापिता का साथ मिला था, जो उस की बात सुनते थे, नहीं तो आमतौर पर लड़कियों से उन की इच्छा के बारे में पूछा ही नहीं जाता है.

शादी के रिवाजों में एक बदलाव यह भी था कि शिवानी की बरात आएगी. आमतौर पर दलित लड़कियों की शादी में पहले उलटा रिवाज था. लड़की को ले कर उस के घर वाले लड़के के घर जाते थे. इस को ‘पैपूंजी’ कहा जाता है.

सामंती व्यवस्था में यह नियम था कि जो काम अगड़ी जाति के करते थे, उन्हें करने का हक नीची जाति के लोगों को नहीं था. इन में से ही एक नियम यह भी था कि दलितों में लड़की की शादी में बरात नहीं आएगी.

‘बरात आने’ और ‘पैपूंजी जाने’ में शान का फर्क था. अगड़ी जाति के लोगों को यह पसंद नहीं था. अब कुछ सालों से यह व्यवस्था बदल चुकी है. अब दलित लड़की की भी बरात आने लगी है. इस के बावजूद अभी भी कई जगहों पर यह विवाद हो जाता है कि दलित समाज का दूल्हा घोड़ी चढ़ कर कैसे आया? छिटपुट रूप से ऐसे विवाद होते रहते हैं. इस की वजह यही है कि पहले दलित लड़कियों की बरात नहीं आती थी, बल्कि ‘पैपूंजी’ जाती थी.

यह बदलाव अगड़ी जाति के लोगों को जहां पसंद नहीं आता है, वहां विवाद हो जाते हैं. वैसे, बड़े लैवल पर अब माहौल बदल चुका है. अब गांव में भी दलित लड़कियों की बरात आने लगी है. न केवल बरात आती है, बल्कि पूरी धूमधाम से आती है. परिवार की जैसी माली हालत होती है, वैसा इंतजाम होता है.

बदल रहे हैं रीतिरिवाज

राजस्थान में ऊंची जाति की लड़कियां आमतौर पर अपनी शादी में घोड़ी पर बैठती हैं. उन के परिवार ऐसा कर के ‘बेटा और बेटी एकसमान’ का संदेश देना चाहते हैं. अब दलित लड़कियां भी घोड़ी पर बैठने का रिवाज करने लगी हैं. इस के खिलाफ उन के समाज के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगते हैं.

राजस्थान की एक प्रथा है बिंदोली. इस में शादी से एक दिन पहले लड़की को घोड़ी पर बैठा कर पूजा करने के लिए ले जाया जाता है.

घोड़ा हमेशा से आन, बान और शान, गौरव, शौर्य और सामंतवाद का प्रतीक है. दूल्हा पहले बग्गी पर जाता था. हाथीघोड़े की सवारी स्टेटस को भी दिखाता है. अब शाही बग्गियां खत्म सी हो गई हैं, क्योंकि उन की साजसज्जा और रखरखाव मुश्किल होता है. तो फिर हम घोड़ी पर बरात निकालने पर आ गए.

पिछले कुछ सालों से दलितों ने भी बिंदोली प्रथा निभानी शुरू कर दी है, जिस का खुद दलितों में विरोध होने लगा है. केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के इलाकों में इस तरह के तमाम उदाहरण मिल जाते हैं.

राजस्थान में बाड़मेर जिले के मेली गांव में कुछ ऐसा ही हुआ. 2 दलित बहनों को घोड़ी पर बैठा कर बिंदोली की रस्म निभाई गई. शादी के 2 महीनेके बाद ही घोड़ी पर बैठने का विवाद बढ़ने लगा. दरअसल, बिंदोली नाम की रस्म शादी के एक दिन पहले निभाई जाती है. इस में लड़कियां अपनी कुलदेवी के पूजन के लिए जाती हैं.

दलित लड़कियां दोहरे शोषण से गुजरती हैं. बाहर जाति की वजह से सताई जाती हैं और घरपरिवार और समाज में पितृसत्तात्मक सोच से सताई जाती हैं.

बाड़मेर में सिवानाकल्याणपुर सड़क पर बसा है मेली गांव. तकरीबन 4,000 आबादी वाले इस गांव में कोई 300 परिवार दलित मेघवाल समाज के हैं. इस गांव में पहली बार शादी से पहले लड़कियों को घोड़ी पर बैठाया गया.

इन बहनों की शादी के तकरीबन2 महीने बाद मेघवाल समाज के 12 गांवों के पंचों की पंचायत हुई. दोनों बहनों को घोड़ी पर बैठाने के लिए परिवार पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया. पैसा न देने पर उन्हें समाज से बाहर कर दिया गया.

पैसे से बदले हालात

जैसेजैसे गांवों में पढ़ाईलिखाई का प्रचारप्रसार हुआ और दलित तबके में पैसा आया, वैसेवैसे हालात बदलते दिखे. दलितों में अच्छी और पढ़ीलिखी लड़कियों की कमी है. ऐसे में कई बार पढ़ीलिखी लड़की के लिए अमीर घरों से अच्छे रिश्ते आ जाते हैं. वे भी चाहते हैं कि शादी नए रंगढंग में हो. अगर लड़की वाले गरीब हैं, तो लड़के वाले शादी के आयोजन में मदद भी कर देते हैं. उत्तर प्रदेश में सीतापुर के रहने वाले रमेश कुमार की नौकरी लग गई थी.

उसे शादी के लिए कविता नामक जो लड़की पसंद थी, वह अपनी जाति की थी, पर गरीब थी. ऐसे में रमेश और उस के परिवार ने पैसे से मदद कर के शादी कराई. दलित लड़कियों की शादी में अब पुराने रीतिरिवाज बदलने लगे हैं. अब उन की शादियां भी ऊंची जाति की लड़कियों जैसी होती हैं. गांव में भी बरात, बैंडबाजा, मेहंदी, जयमाल और फेरे का रिवाज बढ़ गया है. अब न्योते के लिए कार्ड बंटने लगे हैं. डीजे पर डांस और बढि़या दावत होने लगी है. शादी में दुलहन ही नहीं, बल्कि उस के परिवार का पहनावा भी बदलने लगा है. कपड़े सस्ते भले हों, पर फैशन के मुताबिक होने लगे हैं. पर इस बदलाव की रफ्तार बड़ी धीमी है.

पढ़ीलिखी गरीब लड़कियों में अपनी ही जाति में काबिल लड़के कम मिलते हैं, जिस की वजह से वे गैरबिरादरी में शादियां करने लगी हैं. कुछ मामलों में अभी भी गैरबिरादरी में शादी करने पर जातीय पंचायतों या खाप पंचायतों का रोल देखने को मिलता है.

पढ़ाई- लिखाई से बदली सोच

दलित लड़कियों में पढ़ाईलिखाई और शादी दोनों ही बदलाव दिखा रहे हैं. ये दोनों ही मुद्दे एकदूसरे से जुड़े हैं. दलितों में पैठी पुरानी सोच से लड़कियों की पढ़ाई और शादी दोनों का टकराव होने लगा है. दलितों में भी पितृसत्तात्मक सोच हावी है. वहां के मर्द किसी भी तरह से लड़कियों को पढ़ाईलिखाई और शादी में आजादी नहीं देना चाहते हैं.

दलितों में ज्यादा गरीबी होने के चलते लड़कियां पढ़ने में पिछड़ जाती हैं. ज्यादातर दलित परिवार अपनी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में ही परेशान रहते हैं. इस का सीधा दबाव लड़कियों पर पड़ता है.

लड़कियों के पास बाहर जा कर पढ़ाई करने का कोई औप्शन नहीं होता, जिस के चलते उन्हें घर में ही रह कर सारा काम संभालना होता है. इस के बाद बहुत ही कम लड़कियां आगे बढ़ पाती हैं.

गांव में टीचरों की तादाद में कमी और खराब माहौल के चलते लड़कियों में पढ़ाई को ले कर कोई खास जोश नहीं होता. साथ ही, घर में रोजमर्रा के काम के दबाव के चलते लड़कियां पढ़ाई पर कम ध्यान दे पाती हैं.

घरपरिवार की सोच यह होती है कि लड़की के लिए घर में रह कर काम करना ही सही है, बाहर जाएगी तो दस लोगों से मिलेगीजुलेगी, घर में क्लेश होगा और अगर कुछ उलटासीधा हो गया, तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पहली से 12वीं जमात तक के दाखिले में दलित लड़कियों की तादाद ज्यादा होती है, पर ऊंची तालीम में वे पीछे हो जाती हैं. ऊंची तालीम हासिल करने वालों का राष्ट्रीय औसत तकरीबन 24.3 फीसदी है, जबकि दलितों में यह औसत 19.1 फीसदी है.

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में पढ़ाईलिखाई के क्षेत्र में पुरुषों की साक्षरता दर 83.5 फीसदी रही और महिलाओं की साक्षरता दर 68.2 फीसदी रही, लेकिन अनुसूचित जाति में महिलाओं की साक्षरता दर केवल 56.5 फीसदी ही रही, वहीं अनुसूचित जनजाति में महिलाओं की साक्षरता दर 49.4 फीसदी रही.

तादाद में कम ही सही, पर अब हालात बदल रहे हैं. दलित लड़कियां भी सरकारी एग्जाम की तैयारी करने लगी हैं. कुछ लड़कियां तो गांव से शहरों में जा कर कोचिंग भी करने लगी हैं. कई लड़कियां तो बड़े शहरी स्कूलों में पढ़ने भी लगी हैं.

जिन दलित परिवारों में रिजर्वेशन के तहत सरकारी नौकरी मिलने या राजनीति में आने के बाद पैसा आ गया है, उन की लड़कियों को ऊंची जाति के लोगों जैसे मौके मिलने लगे हैं. इस तरह की लड़कियां समाज के बाहर दूसरी जाति के लड़कों से भी शादी कर लेती हैं. ज्यादातर मामलों में परिवार इन की बात मान लेते हैं.

दूसरी जाति में शादी करने वाली ज्यादातर लड़कियां अपने शहर या गांव से दूर चली जाती हैं. वे अपनी पहचान भी छिपा लेती हैं. जिस जाति का

पति होता है, उसी जाति की वे भी हो जाती हैं.

गैरबिरादरी में शादी करने वाली ज्यादातर दलित लड़कियां अतिपिछड़े वर्ग में शादी करती हैं. इस के बाद पिछड़े और मुसलिम समाज में ऐसे ब्याह ज्यादा होते हैं.

कमजोर लड़कियां हैं परेशान

गांव में रहने वाली गरीब दलित परिवारों में लड़कियां शादी कर के अपना घरपरिवार संभाल रही हैं. ज्यादातर लड़कियों की शादी कम उम्र में ही हो जाती है. इस की सब से बड़ी वजह दलित परिवारों में पुरानी सोच का होना है.

लड़कियों के साथ हिंसक बरताव, सैक्स से जुड़ी हिंसा, जातिगत हिंसा और अलगअलग तरह के शोषण होना कोई नई बात नहीं है. उन्हें सताने वालों में अपनी ही जाति और परिवार के लोग भी शामिल होते है. इन में से बहुत कम ही मामले सामने आते हैं.

आमतौर पर लड़कियों और औरतों को डराधमका कर चुप करा दिया जाता है. ऐसी लड़कियां जब गैरबिरादरी में शादी करती हैं, तो उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

उत्तर प्रदेश के इटावा सिविल लाइंस के विजयपुरा गांव की रहने वाली डिंपल का उन्नाव जिले में रहने वाले ऊंची जाति के दिवाकर शुक्ला से प्रेम हो गया.

दिवाकर ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखता था. ऐसे में दलित जाति की डिंपल से उस का प्रेम घर वालों को पसंद नहीं था. इस के बाद भी जब उन दोनों ने शादी कर ली, तो दिवाकर शुक्ला के घर वालों ने बेटे और बहू को घर से ही निकाल दिया.

घर में इज्जत न मिलने पर उस जोड़े ने पुलिस की मदद ली. महिला थानाध्यक्ष सुभद्रा वर्मा ने उन दोनों के परिवार वालों को बुलाया और समझाया. थानाध्यक्ष की बात उन्होंने मान ली और फिर महिला थाने के अंदर डिंपल और दिवाकर की हिंदू रीतिरिवाज के साथ शादी करा दी गई.

इंटरकास्ट शादी में सरकारी मदद

इंटरकास्ट शादी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा एक योजना चलाई जाती है. इस योजना का नाम डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन है. इस सरकारी योजना के तहत नए शादीशुदा जोड़े को सरकार द्वारा पैसे की मदद दी जाती है, जिस से उन की माली हालत में बदलाव के साथसाथ सामाजिक सोच बदलने में भी मदद मिलती है.

डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन की इस योजना के तहत जो लोग इंटरकास्ट शादी करते हैं, उन्हें यह माली मदद दी जाती है. इस योजना को डाक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा गया है.

डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन योजना का फायदा लेने के लिए जरूरी है कि लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र कम से कम

21 साल हो. इस के साथ ही इन में से कोई एक दलित समुदाय से हो और दूसरा दलित समुदाय से बाहर का होना चाहिए.

इस के साथ ही लड़कालड़की ने अपनी शादी हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 के तहत रजिस्टर की हो. अगर दोनों दलित समुदाय के हैं या दोनों ही दलित समुदाय के नहीं हैं, तो उन्हें फायदा नहीं मिल सकता है.

इस योजना का फायदा केवल वे जोड़े उठा सकते हैं, जिन्होंने पहली शादी की है. पत्नी या पति में से किसी की भी दूसरी शादी होने पर आप इस योजना का फायदा नहीं उठा सकते हैं.

अपनी शादी रजिस्टर करवा कर नएनवेले जोड़े को मैरिज सर्टिफिकेट जमा करना होगा. इस के बाद ही वह जोड़ा डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन के लिए अर्जी दे सकता है. इस योजना का फायदा शादी के एक साल के भीतर ही लिया जा सकता है.

प्यार ही है सच्ची मर्दानगी

सुहागरात शादीशुदा जोड़ों के लिए एक मीठी शुरुआत होती है और इस का इंतजार भी बड़ी बेसब्री से रहता है. पर साथ ही यह बात भी ध्यान रखें कि यह पति के लिए ‘मर्दाना ताकत’ दिखाने का समय तो बिलकुल भी नहीं होता है, लेकिन ज्यादातर मर्द साथी अपने अधकचरे ज्ञान की वजह से सुहागरात की मस्ती को बेमजा कर देते हैं.

खून आना और बदचलनी

अभी पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक खबर आई थी, जिस में 19 साल की एक लड़की की हत्या इसलिए कर दी गई थी, क्योंकि वह कुंआरी नहीं साबित हो सकी थी.

काफी लोग इस खबर को ले कर चौंके होंगे कि आज के मौडर्न जमाने में ऐसे लोग भी दुनिया में पाए जाते हैं, जो शादी की पहली रात पर हमबिस्तरी के दौरान खून निकलने को ही लड़की का कुंआरापन मानते हैं.

अभी भी अनगिनत लोग हैं, जो इस तरह की सोच रखते हैं कि शादी की पहली रात खून नहीं निकला तो लड़की चालू है. हैरान करने वाली बात यह है कि शादी और बीवी को ऐसे लोग क्या समझते हैं? वे ऐसे नौजवान हैं, जिन्हें शादी के बाद बीवी सील पैक चाहिए और उस के लिए जो पैमाना तय किया है, वह है सुहागरात पर खून निकलना.

इन लोगों को समझने की जरूरत है कि बचपन या लड़कपन में खेलकूद के दौरान रस्सी कूदते समय या साइकिल चलाते हुए वह बारीक झिल्ली फट सकती है, जिस से खून निकल सकता है.

लेकिन शादी की पहली रात अगर पत्नी का खून नहीं निकला, तो ज्यादातर पति यह मान लेते हैं कि बीवी गलत है. पर अगर आप को इतना ही शक था, तो तफतीश कर के शादी करते. अब उस का जीना मुहाल क्यों कर रहे हैं?

मर्दानगी का जौहर

दूसरी किस्म के लोग वे होते हैं, जो शादी की पहली रात बीवी को ज्यादा से ज्यादा तकलीफ देने में मर्दानगी समझते हैं. अगर पहली रात हमबिस्तरी के दौरान बीवी को तकलीफ से रोने पर मजबूर न किया तो उन से बड़ा मर्द कोई नहीं.

ऐसा अगर हो भी जाए, तो वे लोग अगले दिन अपने दोस्तों को बढ़ाचढ़ा कर किस्से सुनाते पाए जाते हैं. पर ऐसे मर्दों को समझने की जरूरत है कि औरत भी इनसान है. आप की बीवी भी किसी की बहनबेटी है. वह अगर सैक्स में सहज नहीं है, तो उसे कुछ समय दो. पहली रात को ही सैक्स करना जरूरी नहीं है. आप अगर उसे ज्यादा तकलीफ में देखें तो ठहर जाएं.

यह कैसी मर्दानगी

तीसरे लोग वे हैं, जो सैक्स के दौरान ज्यादा देर तक टिकने को ही मर्दानगी मानते हैं. अगर शादी की पहली रात सैक्स में एक घंटे से कम समय लगाया तो आप मर्द नहीं.

मेरे एक दोस्त की शादी जैसे ही करीब आई, तो पहली रात में एक मिनट या उस से कम समय में ही पस्त होने के डर से उन्होंने डाक्टर से दवाएं लेना शुरू कर दिया. शादी की पहली रात में 40 मिनट सैक्स करने के बादही उन की बीवी की सेहत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा.

सैक्स में भड़ास

कुछ लोगों के लिए सैक्स करना भड़ास निकालने के बराबर है. यह चौथी किस्म उन लोगों की है, जिन के लिए शादी की पहली रात कम से कम 5 या 6 बार सैक्स करना उम्रभर की भड़ास निकाल देने के बराबर है.

ऐसे लोगों के दोस्त भी फिर उसी सोच के मालिक होते हैं. यह इज्जत का पैमाना है कि जितनी ज्यादा बार सैक्स होगा, सोसाइटी में आप की उतनी इज्जत की जाएगी, जबकि यह समझने की जरूरत है कि अपनी बीवी के लिए इस तरह की बातें सोचना ही गलत है.

जहर घोलती ब्लू फिल्में

5वीं किस्म उन लोगों की है, जिन की सारी उम्र ब्लू फिल्में देखते गुजरी है. उन के दिमाग पर ब्लू फिल्मों के सीन सवार रहते हैं. उन्हें शादी की पहली रात का शिद्दत से इंतजार होता है कि सारे सीन खुद कर के अपनेआप को मर्द मनवाया जाए.

लेकिन ऐसे लोगों को समझने की जरूरत है कि इन फिल्मों में काम करने वाले सारे प्रोफैशनल होते हैं, जो आधा घंटे की फिल्म बनाने में एक हफ्ता भी लगा देते हैं.

सैक्स मशीन नहीं है साथी

इस किस्म के मर्द अपनी बीवी को बच्चे पैदा करने और सैक्स करने की मशीन के अलावा कुछ नहीं समझते हैं, जबकि सुहागरात के दिन होना तो यह चाहिए कि सब से पहले आप को अपनी पत्नी को अपने घर के माहौल और सदस्यों वगैरह के बारे में बताना चाहिए, जिस से उसे सब के साथ रहने में किसी बात की परेशानी न हो.

मैं एक विवाहित अध्यापक के साथ हर हफ्ते शारीरिक संबंध बनाती हूं. क्या शादी होने तक मैं इसे जारी रख सकती हूं?

सवाल
मैं 25 वर्षीय अविवाहित लड़की हूं. एक स्कूल में अध्यापिका हूं. स्कूल के ही एक विवाहित अध्यापक के साथ शारीरिक संबंध हैं. हर हफ्ते हम संबंध बनाते हैं. मैं जानना चाहती हूं कि क्या अपनी शादी होने तक मैं इस सिलसिले को जारी रख सकती हूं? इस से कोई परेशानी तो नहीं होगी?

जवाब
आप की उम्र विवाह योग्य है, इसलिए आप को उपयुक्त व्यक्ति से विवाह कर लेना चाहिए. किसी विवाहित पुरुष से अवैध संबंधों की बात ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह सकती. कभी न कभी अवैध संबंधों की भनक उक्त अध्यापक के परिवार को लग जाएगी. इस से उस का दांपत्य तो प्रभावित होगा ही, आप की भी समाज में बदनामी होगी. तब हो सकता है आप को अपने लिए उपयुक्त वर न मिले.
इस के अलावा आप अध्यापिका हैं और अध्यापक अपने विद्यार्थियों के लिए रोल मौडल होता है. आप के अनैतिक आचरण का उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, आप सोच सकती हैं. अत: तुरंत इस सिलसिले को बंद कर दें.

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4 सहेलियां कुछ अरसे बाद मिली थीं. 2 की जल्दी शादी हुई थी तो 2 कुछ बरसों का वैवाहिक जीवन बिता चुकी थीं. ऐसा नहीं कि उन में और किसी विषय पर बात नहीं हुई. बात हुई, लेकिन बहुत जल्द ही वह पहली बार के अनुभव पर आ टिकी.

पहली सहेली ने पूछा, ‘‘तुम फोन पर ट्रेन वाली क्या बात बता रही थी? मेरी समझ में नहीं आई.’’

दूसरी बोली, ‘‘चलो हटो, दोबारा सुनना चाह रही हो.’’

तीसरी ने कहा, ‘‘क्या? कौन सी बात? हमें तो पता ही नहीं है. बता न.’’

दूसरी बोली, ‘‘अरे यार, कुछ नहीं. पहली रात की बात बता रही थी. हनीमून के लिए गोआ जाते वक्त हमारी सुहागरात तो ट्रेन में ही मन गई थी.’’

तीसरी यह सुन कर चौंकी, ‘‘हाउ, रोमांटिक यार. पहली बार दर्द नहीं हुआ?’’

दूसरी ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ खास तो नहीं.’’

तीसरी बोली, ‘‘चल झूठी, मेरी तो पहली बार जान ही निकल गई थी. सच में बड़ा दर्द होता है. क्यों, है न? तू क्यों चुप बैठी है? बता न?’’

चौथी सहेली ने कहा, ‘‘हां, वह तो है. दर्द तो सह लो पर आदमी भी तो मनमानी करते हैं. इन्होंने तो पहली रात को चांटा ही मार दिया था.’’

बाकी सभी बोलीं, ‘‘अरेअरे, क्यों?’’

चौथी ने बताया, ‘‘वे अपने मन की नहीं कर पा रहे थे और मुझे बहुत दर्द हो रहा था.’’

पहली बोली, ‘‘ओह नो. सच में दर्द का होना न होना, आदमी पर बहुत डिपैंड करता है. तुम विश्वास नहीं करोगी, हम ने तो शादी के डेढ़ महीने बाद यह सबकुछ किया था.’’

दूसरी और तीसरी बोलीं, ‘‘क्यों झूठ बोल रही हो?’’

पहली सहेली बोली, ‘‘मायके में बड़ी बहनों ने भी सुन कर यही कहा था, उन्होंने यह भी कहा कि लगता है मुझे कोई धैर्यवान मिल गया है, लेकिन मेरे पति ने बताया कि उन्होंने शादी से पहले ही तय कर लिया था कि पहले मन के तार जोडूंगा, फिर तन के.

‘‘मुझे भी आश्चर्य होता था कि ये चुंबन, आलिंगन और प्यार भरी बातें तो करते थे, पर उस से आगे नहीं बढ़ते थे. बीच में एक महीने के लिए मैं मायके आ गई. ससुराल लौटी तो हम मन से काफी करीब आ चुके थे. वैसे भी मैं स्कूली दिनों में खूब खेलतीकूदती थी और साइकिल भी चलाती थी. पति भी धैर्य वाला मिल गया. इसलिए दर्द नहीं हुआ. हुआ भी तो जोश और आनंद में पता ही नहीं चला.’’

पतिपत्नी के पहले मिलन को ले कर अनेक तरह के किस्से, आशंकाएं और भ्रांतियां सुनने को मिलती हैं. पुरुषों को अपने सफल होने की आशंका के बीच यह उत्सुकता भी रहती है कि पत्नी वर्जिन है या नहीं. उधर, स्त्री के मन में पहली बार के दर्द को ले कर डर बना रहता है.

आजकल युवतियां घर में ही नहीं बैठी रहतीं. वे साइकिल चलाती हैं, खेलकूद में भाग लेती हैं, घरबाहर के बहुत सारे काम करती हैं. ऐक्सरसाइज करती हैं, नृत्य करती हैं. ऐसे में जरूरी नहीं कि तथाकथित कुंआरेपन की निशानी यानी उन के यौनांग के शुरू में पाई जाने वाली त्वचा की झिल्ली शादी होने तक कायम ही रहे. कई तरह के शारीरिक कार्यों के दौरान पैरों के खुलने और जननांगों पर जोर पड़ने से यह झिल्ली फट जाती है, इसलिए जरूरी नहीं कि पहले मिलन के दौरान खून का रिसाव हो ही. रक्त न निकले तो पुरुष को पत्नी पर शक नहीं करना चाहिए.

अब सवाल यह उठता है कि जिन युवतियों के यौनांग में यह झिल्ली विवाह के समय तक कायम रहती है, उन्हें दर्द होता है या नहीं. दर्द का कम या ज्यादा होना झिल्ली के होने न होने और पुरुष के व्यवहार पर निर्भर करता है. कई युवतियों में शारीरिक कार्यों के दौरान झिल्ली पूरी तरह हटी हो सकती है तो कई में यह थोड़ी हटी और थोड़ी उसी जगह पर उलझी हो सकती है. कई में यह त्वचा की पतली परत वाली होती है तो कई में मोटी होती है.

स्थिति कैसी भी हो, पुरुष का व्यवहार महत्त्वपूर्ण होता है. जो पुरुष लड़ाई के मैदान में जंग जीतने जैसा व्यवहार करते हैं, वे जोर से प्रहार करते हैं, जो स्त्री के लिए तीखे दर्द का कारण बन जाता है. ऐसे पुरुष यह भी नहीं देखते कि संसर्ग के लिए राह पर्याप्त रूप से नम और स्निग्ध भी हुई है या नहीं. उन के कानों को तो बस स्त्री की चीख सुनाई देनी चाहिए और आंखों को स्त्री के यौनांग से रक्त का रिसाव दिखना चाहिए. ऐसे पुरुष, स्त्री का मन नहीं जीत पाते. मन वही जीतते हैं जो धैर्यवान होते हैं और तन के जुड़ने से पहले मन के तार जोड़ते हैं व स्त्री के संसर्ग हेतु तैयार होने का इंतजार करते हैं.

भले ही आप पहली सहेली के पति की तरह महीना, डेढ़ महीना इंतजार न करें पर एकदम से संसर्ग की शुरुआत भी न करें. पत्नी से खूब बातें करें. उस के मन को जानने और अपने दिल को खोलने की कोशिश करें. पर्याप्त चुंबन, आलिंगन करें. यह भी देखें कि पत्नी के जननांग में पर्याप्त गीलापन है या नहीं. दर्द के डर से भी अकसर गीलापन गायब हो जाता है. ऐेसे में किसी अच्छे लुब्रीकैंट, तेल या घी का इस्तेमाल करना सही रहता है. शुरुआत में धीरेधीरे कदम आगे बढ़ाएं. इस से आप को भी आनंद आएगा और पत्नी को दर्द भी कम होगा.

कई युवतियों के लिए सहवास आनंद के बजाय दर्द का सबब बन जाता है. ऐसा कई कारणों से होता है, जैसे :

कुछ युवतियों में वल्वा यानी जांघों के बीच का वह स्थान जो हमें बाहर से दिखाई देता है और जिस में वेजाइनल ओपनिंग, यूरिथ्रा और क्लीटोरिस आदि दिखाई देते हैं, की त्वचा अलग प्रकार की होती है, जो उन्हें इस क्रिया के दौरान पीड़ा पहुंचाती है. त्वचा में गड़बड़ी से इस स्थान पर सूजन, खुजली, त्वचा का लाल पड़ जाना और दर्द होने जैसे लक्षण उभरते हैं. त्वचा में यह समस्या एलर्जी की तरह होती है और यह किसी साबुन, मूत्र, पसीना, मल या पुरुष के वीर्य के संपर्क में आने से हो सकती है.

सहवास के दौरान दर्द होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए. सहवास से पहले पर्याप्त लुब्रीकेशन करना चाहिए. पुरुष को यौनांग आघात में बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए. वही काम मुद्राएं अपनानी चाहिए जिन में स्त्री को कम दर्द होता हो. इस से भी जरूरी बात यह है कि पहले मन के तार जोडि़ए. ये तार जुड़ गए तो तन के तार बहुत अच्छे और स्थायी रूप से जुड़ जाएंगे.    – सहवास के दौरान पर्याप्त लुब्रीकेशन न होने से भी महिला को दर्द का एहसास हो सकता है.

– महिला यौनांग में यीस्ट या बैक्टीरिया का इन्फैक्शन भी सहवास में दर्द का कारण बनता है.

– एक बीमारी एंडोमेट्रिआसिस होती है, जिस में गर्भाशय की लाइनिंग शरीर के दूसरे हिस्सों में बनने लगती है. ऐसा होने पर भी सहवास दर्दनाक हो जाता है.

– महिला के यौनांग की दीवारों के बहुत पतला होने से भी दर्द होता है.

– यूरिथ्रा में सूजन आ जाने से भी सहवास के दौरान दर्द होता है.

प्यार में हत्या का पागलपन

लखनऊ के पारा इलाके की रामविहार कालोनी में रिटायर्ड सूबेदार लालबहादुर सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी रेनू के अलावा 2 बेटियां आरती, अंतिमा और बेटा आशुतोष था. वैसे वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले थे. 24 साल का आशुतोष रामस्वरूप कालेज से बीबीए करने के बाद बाराबंकी जिले में एल एंड टी कंपनी में नौकरी करता था. 26 साल की आरती बीटेक की पढ़ाई पूरी कर के बीटीसी के दूसरे साल में पढ़ रही थी. जबकि 17 साल की अंतिमा सेंट मैरी स्कूल में इंटरमीडिएट की छात्रा थी.

लालबहादुर सिंह आर्मी में सूबेदार के पद से एक महीने पहले ही रिटायर हुए थे. वह राजस्थान के जोधपुर छावनी में तैनात थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सब से पहले बड़ी बेटी की शादी करने की योजना बनाई.

9 मई, 2017 को सुबह 8 बजे के करीब लालबहादुर सिंह की पत्नी रेनू की तबीयत अचानक खराब हो गई. वह उन्हें ले कर कैंट एरिया स्थित कमांड अस्पताल गए. दोनों बेटियों को वह घर पर ही छोड़ गए थे. डाक्टर ने रेनू का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी, पर उस दिन अस्पताल में सीटी स्कैन की मशीन खराब थी. वह एकडेढ़ घंटे में ही घर आ गए.

करीब साढ़े 9 बजे जब वह पत्नी के साथ घर पहुंचे तो घर का मेनगेट खुला था. अंदर दाखिल होते हुए वह बड़बड़ाए, ‘बच्चियां कितनी लापरवाह हैं, गेट भी बंद नहीं किया.’ जब वे अंदर पहुंचे तो घर में खून ही खून फैला दिखाई दिया. खून देख कर पतिपत्नी घबरा गए.

बेटियों को आवाज देते हुए लालबहादुर सिंह आगे बढे तो उन्होंने देखा ड्राइंगरूम से गैलरी तक खून ही खून फैला है. सहमे हुए वह किचन की ओर बढे़ तो पता चला आरती और अंतिमा किचन में खून से लथपथ घायल पड़ी थीं.

बेटियों की हालत देख कर रेनू चीख पड़ीं, जबकि लालबहादुर सिंह घर से बाहर आ कर मदद के लिए चिल्लाने लगे. पड़ोस में रहने वाला रवि सब से पहले उन की आवाज सुन कर अपने घर से निकला तो उन्होंने उस से रोते हुए कहा, ‘मेरा तो सब कुछ तबाह हो गया.’

रवि समझ गया कि जरूर इन के घर कोई अनहोनी हुई है. कमरे से उन की पत्नी के रोने की आवाज आ रही थी. रवि उन के घर के अंदर गया तो देखा, दोनों बेटियां लहूलुहान पड़ी हैं. तब तक मोहल्ले के और लोग भी आ गए थे. रवि के पास स्विफ्ट डिजायर कार थी. लोगों की सहायता से उस ने दोनों बहनों को अपनी कार में डाला और लालबहादुर सिंह को साथ ले कर कमांड अस्पताल गया.

अस्पताल में डाक्टरों ने अंतिमा को तुरंत मृत घोषित कर दिया, जबकि आरती का इलाज शुरू कर दिया. पर इलाज के दौरान ही उस की भी मौत हो गई. पुलिस केस देखते हुए अस्पताल प्रशासन की तरफ से पुलिस को इत्तिला दी गई. सूचना पा कर तालकटोरा थाने की पुलिस कमांड अस्पताल पहुंच गई.

मामला 2 सगी बहनों की हत्या का था, इसलिए खबर मिलने पर आईजी सतीश गणेश, डीआईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी दीपक कुमार भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो लालबहादुर सिंह और आरती के कमरे का सामान बिखरा पड़ा था. लग रहा था कि हत्याएं लूट के लिए की गई थीं. लेकिन जब लालबहादुर सिंह और उन की पत्नी ने घर का सामान देखा तो वहां से कुछ भी गायब नहीं था.

घटनास्थल को देखने से ही लग रहा था कि दोनों बहनों ने मरने से पहले हत्यारे के साथ जम कर मुकाबला किया था. किचन में भगौना, परात और गिलास जमीन पर गिरे पड़े थे. आरती चश्मा लगाती थी, उस का चश्मा टूटा पड़ा था. उस की मुट्ठी में किसी पुरुष के बाल भी मिले थे. आरती और अंतिमा को जिस तरह से शिकार बनाया गया था, उस से साफ लग रहा था कि हमलावर केवल उन की हत्या करने के इरादे से ही आया था.

दोनों ही बहनों की कनपटी और गरदन के पास धारदार हथियार से वार किए गए थे. अंतिमा के हाथ की नस भी काटी गई थी. हत्यारे ने बाथरूम में जा कर अपने हाथ आदि पर लगा खून साफ किया था, जिस से वहां के फर्श और दीवार पर भी खून लग गया था.

पुलिस को वहां मिले दोनों मोबाइल फोन चालू हालत में थे, पर उन पर भी खून लगा था. एक मोबाइल से एसएमएस, काल लौग्स और वाट्सऐप मैसेज डिलीट किए गए थे, जिस से साफ लग रहा था कि हमलावर दोनों का परिचित था.

आरती की शादी तय हो चुकी थी. इस बात को भी ध्यान में रखा गया. लालबहादुर सिंह के मकान के निचले हिस्से में 2 छात्र किराए पर रहते थे. पुलिस ने डौग स्क्वायड के जरिए कुछ सुराग तलाशने की कोशिश की, पर कुछ भी हाथ नहीं लगा. इस दोहरी हत्या से बौखलाए लोगों ने स्थानीय विधायक सुरेशचंद्र श्रीवास्तव के घर पर प्रदर्शन भी किया.

पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी. एसएसपी दीपक कुमार ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक टीम बनाई, जिस में थाना पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया गया. टीम में क्राइम ब्रांच के एएसपी संजय कुमार, सीओ (आलमबाग) मीनाक्षी गुप्ता, स्वाट टीम के प्रभारी फजलुर्रहमान, सर्विलांस प्रभारी अमरेश त्रिपाठी, एसआई संजय कुमार द्विवेदी आदि को शामिल किया गया.

पुलिस कई ऐंगल से जांच कर रही थी. एएसपी क्राइम संजय कुमार ने हर पहलू को पैनी नजरों से देखना शुरू किया. आरती के फोन की काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर वह देर तक बातें करती थी. उस नंबर की जांच की गई तो वह नंबर किसी इंद्रजीत का था. पता चला कि उस से ही आरती की शादी होने वाली थी.

हत्या के कुछ देर पहले आरती की जिस नंबर पर बात हुई थी, वह अखिलेश यादव का था. पुलिस ने अखिलेश से बात की तो उस ने आरती से दोस्ती की बात तो स्वीकारी, लेकिन किसी तरह के झगड़े या विवाद से इनकार कर दिया.

अखिलेश ने पुलिस को बताया कि आरती का अपने घर के सामने रहने वाले सौरभ शर्मा से विवाद हुआ था. उस ने कई बार इस का जिक्र उस से किया था. इस से पहले आरती के भाई आशुतोष ने भी सौरभ पर अपना शक जताया था.

क्राइम ब्रांच की टीम सौरभ शर्मा को रात में उस के घर से उठा लाई. पुलिस को उस के लंबे बाल देख कर शक हुआ. उस के हाथ में वैसी ही चोट लगी थी, जैसी उन दोनों बहनों के हाथ में लगी थी. पुलिस ने सौरभ से पूछताछ शुरू की तो पहले वह इधरउधर की बातें करता रहा.

लेकिन जब पुलिस ने उस के कपड़े उतार कर देखा तो उस के शरीर पर कई चोटें लगी दिखीं. सिर के पिछले हिस्से के बाल भी उखड़े मिले. ऐसे में पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो वह टूट गया. फिर उस ने दोनों बहनों की हत्या की बात स्वीकार कर के जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

सौरभ और आरती आमनेसामने के मकानों में रहते थे. इसी वजह से दोनों का एकदूसरे के यहां उठनाबैठना था. दोनों पढ़ाई में एकदूसरे का सहयोग भी लेते थे. दोनों साथ ही कोचिंग भी जाते थे, जिस से उन के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी.

बीटेक सैकेंड सेमेस्टर परीक्षा के दौरान आरती के हाथ में चोट लग गई थी, जिस की वजह से आरती एग्जाम में लिखने में असमर्थ थी. ऐसे में सौरभ उस का राइटर बना था. कालेज से अनुमति के बाद सौरभ ने उस का पेपर दिया था.

आरती सौरभ को अपना अच्छा दोस्त मानती थी. जबकि सौरभ इस दोस्ती को प्यार मान बैठा था. सौरभ पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि उसे आरती का किसी के साथ घूमना या बातचीत करना अच्छा नहीं लगता था. सौरभ के अलावा आरती की दोस्ती इंद्रजीत और अखिलेश से भी थी. सौरभ ने जब उसे उन के साथ बातचीत करते देखा तो उसे बहुत बुरा लगा. इस बात को ले कर आरती और सौरभ के बीच कई बार झगड़ा भी हुआ, जिस से दोनों के बीच होने वाली बातचीत भी बंद हो गई.

इस के बाद भी सौरभ ने कई बार आरती को इंद्रजीत और अखिलेश के साथ अलगअलग देखा. इस से उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. सोमवार 8 मई को शाम के समय आरती और अखिलेश को सौरभ ने फीनिक्स मौल में देख लिया. दोनों ही बाहुबली-2 देख कर निकले थे. उसी समय सौरभ के मन में आरती से बदला लेने का खयाल आ गया.

सौरभ ने बीकौम की पढ़ाई की थी और बैंक औफिसर बनने की तैयारी कर रहा था. रात भर सौरभ गुस्से में जलता रहा. सुबह के समय जब उस ने देखा कि आरती के मातापिता घर से बाहर चले गए हैं तो वह उस के घर जा धमका. सौरभ को पता था कि आरती की छोटी बहन अंतिमा सुबह 7 बजे स्कूल चली गई होगी, इसलिए आरती घर में अकेली होगी.

यही सोच कर उस ने उस दिन आरती को सबक सिखाने की ठान ली. इस के लिए उस ने अपने पास एक कैंची रख ली थी. आरती के घर पर पहुंच कर उस ने कालबैल बजाई तो आरती की छोटी बहन अंतिमा ने दरवाजा खोला. वह उस से बोली कि मम्मीपापा अस्पताल गए हैं और दीदी बाथरूम में हैं.

सौरभ ने बिना कुछ बोले अंतिमा पर कैंची से हमला कर दिया. वह चीखती हुई किचन की तरफ भागी. बहन की चीख सुन कर आरती ने फटाफट कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर  आ गई. तब तक सौरभ ने अंतिमा पर अनगिनत वार कर दिए थे.

सौरभ ने जैसे ही आरती को देखा, वह उस पर टूट पड़ा. आरती ने अपना बचाव करने की कोशिश भी की, पर उस की कोशिश सफल नहीं हो सकी. जब उसे लगा कि आरती मर चुकी है तो उस ने खून के निशान आरती के पिता की शर्ट पर लगा दिए, जिस से लोग यह शक करें कि लालबहादुर सिंह ने ही अपनी बेटियों को मार दिया होगा. इस के बाद बाथरूम में हाथ धो कर वह अपने घर चला गया.

लालबहादुर सिंह घर आए और बेटियों को ले कर अस्पताल गए तो उन के साथ सौरभ भी अस्पताल गया था. वह लोगों से ऐसे पेश आ रहा था, जैसे उसे कुछ पता ही न हो. हत्याकांड के बाद विधायक सुरेशचंद्र श्रीवास्तव के घर पर लोग नारेबाजी करने गए तो सौरभ भी उस में था. वह इस बात की भी मोहल्ले में हवा दे रहा था कि दोनों बहनों में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ होगा, जिस से यह घटना घट गई.

सौरभ ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि आरती की जान लेने का उसे कोई पछतावा नहीं है. आरती के लिए उस ने क्याक्या नहीं किया. वह छिपछिप कर उसे देखा करता था. कालेज और कोचिंग साथ जाता था. उस के  आनेजाने का इंतजार करता था. इस के बावजूद भी उस ने किसी और से शादी करने का फैसला कर लिया था.

सौरभ का परिवार दबंग किस्म का था. लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि सौरभ के पिता मुकुंदीलाल शर्मा ट्रांसपोर्टर हैं. घर पर उस के चाचा भी रहते हैं. इन की दबंगई की वजह से मोहल्ले वाले उन से दूर रहते हैं.

एएसपी क्राइम डा. संजय कुमार ने बताया कि सौरभ को कोर्ट में गुनहगार साबित करने के लिए पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं. आरती की मुट्ठी में बाल और नाखूनों में सौरभ की स्किन के टुकड़े मिले हैं. उन्हें डीएनए टेस्ट के लिए भेजा जाएगा.

इस के अलावा हत्या में प्रयुक्त कैंची और खून सने कपड़े व तमाम वैज्ञानिक साक्ष्य उसे गुनहगार साबित करने के लिए काफी हैं. पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए 2 दिन में ही इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा कर दिया था. एसएसपी दीपक कुमार ने केस को खोलने वाली पुलिस टीम की सराहना की है. पुलिस ने सौरभ से पूछताछ कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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