जब बहन लगे बहकने तो क्या करें

बहन जब मरजी से किसी से प्यार करने लगती है, तो ज्यादातर भाई हैवान बन जाते हैं. विरले ही भाई ऐसे होंगे, जिन्होंने अपनी बहन के जज्बात समझते हुए उस की मुहब्बत को शादी में तबदील करने की पहल की होगी…

बि हार में पटना सिटी का गायघाट आएदिन होने वाली आपराधिक वारदात के लिए बदनाम है. ऐसी ही एक वारदात ज्यूडिशियल एकेडमी के नजदीक

26 अप्रैल, 2023 की रात को हुई, जिस में उस वक्त सनाका खिंच गया था, जब फिल्मी स्टाइल में एक नौजवान ने दूसरे नौजवान पर कट्टे से गोली दागते हुए उस की हत्या कर दी. जब तक लोग समझ पाते कि आखिर हुआ क्या है, तब तक अपराधी हवा में फायर करते हुए भाग खड़े हुए.

अफरातफरी मची और कुछ लोग हिम्मत करते हुए उस घायल नौजवान के पास पहुंचे और उसे नजदीक के एनएमसीएच अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान नौजवान ने दम तोड़ दिया.

पुलिस आई और जांच शुरू हुई, तो मामला इश्कबाजी का निकला. बाद में यह कहानी सामने आई : मरने वाले 22 साला नौजवान का नाम राजा कुमार था, जो गुड़ की मंडी मालसलामी का रहने वाला था और मारने वाले का नाम अभिषेक कुमार था. वे दोनों दोस्त तो नहीं थे, लेकिन एकदूसरे को जानते जरूर थे.

कुछ दिन पहले ही अभिषेक को भनक लगी थी कि राजा का चक्कर उस की बहन से चल रहा है. इस बाबत उस ने कई बार राजा को समझाया भी था कि वह उस की बहन से मिलनाजुलना छोड़ दे, वरना अंजाम अच्छा नहीं होगा.

समझाया तो अभिषेक ने अपनी बहन अर्चना (बदला हुआ नाम) को भी था, लेकिन राजा से उस का मिलनाजुलना बंद नहीं हो रहा था, इसलिए वह कुसूरवार राजा को ही मानता था और चाहता था कि वही मान जाए, फिर चाहे इस के लिए उंगली टेढ़ी भी करनी पड़े, तो बात हर्ज की नहीं, क्योंकि सवाल आखिर घर की इज्जत का था.

लेकिन राजा कहां मानने वाला था, जिसे यह एहसास था कि जब प्यार किया है, तो हजार रुकावटें भी आएंगी, जिन से डरने या भागने के बजाय उन का मुकाबला करना है.

मालसलामी का ही रहने वाला अभिषेक और राजा हमउम्र थे. लिहाजा, राजा को उम्मीद थी कि कभी आमनेसामने बैठ कर बात होगी, तो अभिषेक उस के जज्बात समझते हुए राजी हो जाएगा, क्योंकि अर्चना भी उसे चाहती थी.

वारदात के दिन अभिषेक ने राजा को चाय पीने के लिए ज्यूडिशियल अकेडमी के नजदीक के होटल पर बुलाया, तो

वह झट से राजी हो गया. उसे उम्मीद थी कि वह गुस्साए अभिषेक को मनाने में कामयाब हो जाएगा. लेकिन उसे क्या मालूम था कि अभिषेक कुछ और ही ठाने बैठा था.

रात को राजा अपने एक दोस्त सरवन को साथ ले कर होटल पर पहुंचा तो वहां मौत उस का इंतजार कर रही थी. अभिषेक ने कब कहां से आ कर उस पर गोलियां दागते हुए अपने घर की इज्जत का बदला ले लिया, यह उसे पता भी नहीं चला.

सरवन ने एक पहचान वाले संजीव कुमार की मदद से राजा को अस्पताल पहुंचाया और फिर पुलिस को राजा और अर्चना की लवस्टोरी के बारे में बताया, तो पुलिस ने अभिषेक को हिरासत में ले लिया, जिस ने अपना जुर्म कबूल करते हुए हत्या करने की वजह बता दी. विलेन बनते भाई यह कोई पहला या आखिरी मामला नहीं था, जिस में किसी भाई ने बहन के प्यार का खात्मा यों जानलेवा तरीके से न किया हो. यह रोग हर धर्म, जाति और तबके में बराबरी से है.

इसी साल फरवरी के महीने में मेरठ, उत्तर प्रदेश के लिसाड़ी इलाके में मैडिकल स्टोर चलाने वाले 24 साला साजिद सैफी की दिनदहाड़े हत्या उस की माशूका आयशा के भाइयों ने कर दी थी. साजिद और आयशा पड़ोसी थे और एकदूसरे से बेपनाह मुहब्बत करने लगे थे. यह मामला किसी से छिपा भी नहीं रह गया था. साजिद के घर वाले तो उस की जिद देखते हुए आयशा को घर की बहू बनाने को तैयार हो गए थे, लेकिन आयशा के घर वालों को किसी गैरजाति के नौजवान को दामाद बनाना गवारा न था.

साजिद ने कुछ महीने पहले ही बीफार्मा का कोर्स कर के अपना मैडिकल स्टोर खोला था और आयशा के साथ शादी कर अपने प्यार का जहां बनाने के सपने देखता था. वह दिनरात मेहनत भी कर रहा था.

जब लाख कोशिशों के बाद भी आयशा के घर वाले तैयार नहीं हुए, तो साजिद के घर वालों ने उस की शादी की बात दूसरी जगहों पर चलानी शुरू कर दी थी. वे अपने बेटे को उदास और परेशान नहीं देख पा रहे थे. हालांकि, इस से साजिद टैंशन में था, क्योंकि उस के दिलोदिमाग में तो आयशा गहरे तक बस चुकी थी.

11 फरवरी, 2023 की रात साजिद दुकान बंद करने की सोच ही रहा था कि तभी मोटरसाइकिल से 3 लोग नीचे उतरे. सभी के चेहरे कपड़े से ढके हुए थे. उन्होंने उस पर ताबड़तोड़ 5 गोलियां दाग दीं. साजिद गिर पड़ा, तो उन में से 2 नकाबपोशों ने उसे हिलाडुला कर उस के मरने की तसल्ली भी की. आसपास के लोग कुछ समझ पाते, इस के पहले ही वे तीनों लोग हवा में हथियार लहराते हुए भाग निकले. फिर वही हुआ, जो राजा के मामले में हुआ था कि तरहतरह की बातें, कानून व्यवस्था को कोसना, पोस्टमार्टम, पुलिस में रिपोर्ट, जांच और गवाही, लेकिन मुद्दे की बात हमेशा की तरह गायब है कि क्यों भाइयों से अपनी बहनों का प्यार करना बरदाश्त नहीं होता?

साजिद की मौत के बाद मेरठ में खूब हंगामा हुआ, लेकिन वह सियासी ज्यादा था सामाजिक कम. सैफी परिवार से हर किसी को हमदर्दी थी, क्योंकि साजिद बहुत होनहार और लायक होने के साथसाथ हंसमुख और हैंडसम भी था, जिस की मुहब्बत माशूका के भाइयों रिजवान और फुरकान को रास नहीं आई, तो उन्होंने उस का कत्ल ही कर दिया. इन लोगों ने पहले आयशा को भी

खूब समझायाबुझाया और मारापीटा भी था, लेकिन वह भी झुकने को तैयार नहीं हुई थी. बराबरी का दर्जा क्यों नहीं इन दोनों ही मामलों के आरोपियों की तकलीफ यह थी कि वे अपनी बहनों को नादान समझ रहे थे, साथ ही इस बात पर भी तिलमिलाए हुए थे कि आखिर उस की जुर्रत कैसे हुई किसी से प्यार करने की, जिस से इज्जत पर आंच आती है यानी दिक्कत यह मान लेने की है कि बहनें घर के कामकाज करें, पक्षी की तरह घर के पिंजरे में बंद रहें और हर सहीगलत फैसले को सिर झुका कर मान लें, तो ही सही माने में अच्छी लड़की हैं.

बहनों को अपनी मरजी से जीने और रहने देने का हक हमारे समाज में कभी नहीं मिला. उन की आजादी पर अंकुश लगाने को मर्द शान की बात समझते हैं. यह बात बुनियादी तौर पर सिखाई धर्म ने ही है कि औरत को बचपन में पिता और भाई के, जवानी में पति के और बुढ़ापे में बेटे के कंट्रोल में रहना चाहिए.

बहनभाई के रिश्ते को सब से प्यारा रिश्ता माना गया है. दोनों साथ हंसतेखेलते एकदूसरे का दुखदर्द समझते हुए बड़े होते हैं और जिंदगीभर इन खट्टीमीठी यादों को सीने से लगाए हुए जीते हैं.

शादी के बाद बहन अपनी ससुराल चली जाती है, तो उस की सब से ज्यादा फिक्र भाई ही करता है, लेकिन बहन जब मरजी से किसी से प्यार करने लगती है, तो यही भाई हैवान बन जाते हैं.

बिरले ही भाई ऐसे होंगे, जिन्होंने अपनी बहन के जज्बात समझते हुए उस की मुहब्बत को शादी में तबदील करने की पहल की होगी, क्योंकि उन के लिए जाति, समाज और धर्म से ज्यादा अहम बहन थी.

जिस तरह लड़कों को न केवल प्यार, बल्कि एक उम्र के बाद अपनी जिंदगी से जुड़े तमाम फैसले लेने का हक मिल जाता है, वैसा ही हक लड़कियों को भी मिलना चाहिए, नहीं तो साजिद और राजा जैसे बेकुसूर नौजवान मारे जाते रहेंगे और आयशा और अर्चना जैसी लड़कियां जिंदगीभर अपने भाइयों को कोसती रहेंगी, जो अब जेल में पड़े सड़ रहे हैं. मिला उन्हें भी कुछ नहीं है, सिवा इस झूठी शान और तसल्ली के कि उन्होंने घर की इज्जत बचा ली.

पर अगर यह इज्जत बहन के अरमानों की कब्र है तो यह इज्जत नहीं, बल्कि मर्दों के दबदबे वाले समाज की खोखली बुनियाद है, जिस का दरकना शुरू हो गया है. लेकिन यह बहुत ही छोटे पैमाने पर है.

जिस दिन लोग बेटियों को बेटों के बराबर का दर्जा और हक देने लगेंगे, उस दिन बेटियों को भी अपने इनसान होने का एहसास होगा और वे घर, समाज और देश की तरक्की में अहम रोल निभाएंगी, पर इस के लिए खुले दिल से पहल भाइयों को भी करनी पड़ेगी. उन्हें यह समझना होगा कि बहन को भी अपनी मरजी से रहने, खानेपीने, पहनने और प्यार करने का हक है.

Video: फैन पर भड़कीं यें एक्ट्रेस, बोलीं-डोंट टच मी

जानी-मानी एक्ट्रेस इन दिनों मुसीबत में आ गई है जब वह एक इवंट में पहुंचीं तो उनके फैन ने कुछ ऐसी हरकत कर डाली कि आहना कुमरा को फैन को लताड़ना पड़ा, जी हां, एक इवंट में पहुंची आहना कुमरा के साथ एक घटना घटी जिसके बाद वो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है, दरअसल, हुआ यूं कि एक फैन जब उनके पास आया तो, उसन अहाना की कमर पकड़ ली, जिसके बाद एक्ट्रेस फैन पर भड़ गई औऱ उसे अच्छे से फटकार लगाई.

आपको बता दें, कि आहना कुमरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें Aahana Kumra मुंबई में हुए एक इवेंट में मीडिया को पोज देती नजर आ रही हैं. तभी वहां पर फैन्स की भीड़ जुट जाती है और वो एक्ट्रेस के साथ बारी-बारी से फोटो क्लिक करने लगते हैं. लेकिन इसी दौरान एक फैन फोटो लेते वक्त आहना कुमरा की कमर पर टच कर देता है. इसी पर एक्ट्रेस बिफर गईं और उसे हाथ हटाने को कहा.

इस वीडियो को देख आहना कुमरा के फैन्स भी भड़क गए. उन्होंने वीडियो पर कमेंट बॉक्स में उस शख्स पर खूब गुस्सा निकाला, जिसने आहना को कमर पर छूआ था. एक फैन ने वीडियो पर कमेंट किया कि अगर एक लड़की ‘नो’ बोलती है तो इसका मतलब ‘नो’ होता है. एक और फैन ने लिखा है कि आत्मसम्मान बहुत बड़ी चीज है और आहना कुमरा ने एकदम सही किया.

 

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बता दें ,कि आहना कुमरा हाल ही रेवती की फिल्म ‘सलाम वेंकी’ में नजर आई थीं. इसमें काजोल और प्रकाश राज भी नजर आए थे. यह फिल्म दिसंबर 2022 में रिलीज हुई थी. आहना अब फिल्म ‘कैंसर’ में नजर आएंगी, जिसकी अभी अनाउंसमेंट होना बाकी है.

फिर चर्चा में आए सारा और शुभमन गिल, शेयर किया खास पोस्ट

सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर इन दिनों चर्चा में बनी हुई जिसकी वजह है उनक अकाउंट से शुभमन गिल का पोस्ट. जिसे देख फैंस बेहद खुश हो रहे है फैंस जमकर इस पोस्ट को शेयर कर रहे है साथ ही इस पोस्ट पर जमकर कमेंट कर रहे है. बता दें, सारा तेंदुलकर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है वो समय-समय पर पोस्ट औऱ वीडियो शेयर करती रहती है, और इन दिनों चल रहे है मैच से भी जुड़ी रहती है.

 

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आपको बता दें, कि सारा तेंदुलकर और शुभमन गिल को लेकर अफेयर्स की चर्चा होती रहती है लेकिन अभी तक इन के रिलेशन को लेकर कोई ऑफिशयल बात सामने नहीं आई है हालांकि अब सारा के फैन पेज से शुभमन गिल का पोस्ट शेयर हुआ जिसे देख फैंस जमकर कमेंट बरसा रहे है. इस पोस्ट में शुभमन गिल को धन्यवाद दिया गया है. इसके पीछे की वजह कल हुआ आईपीएल का मैच है. जिसे गुजरात टाइटन्स ने शुभमन गिल के शतक के दमपर जीत लिया. अगर गुजरात टाइटन्स कल हार जाती, तो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टॉप 4 टीम का हिस्सा बन जाती, लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की हार के बाद अब मुंबई इंडियंस टॉप 4 में पहुंच गई है. जानकारी के लिए बता दें कि मुंबई इंडियंस से सारा तेंदुलकर के भाई अर्जुन तेंदुलकर भी खेलते है. इसी वजह से सारा तेंदुलकर के फैन पेज से शुभमन गिल को धन्यवाद किया जा रहा है.

सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर के फैन पेज से शेयर की गई ये पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. सारा तेंदुलकर के फैन पेज की इस पोस्ट पर यूजर्स जमकर कमेंट करते हुए नजर आ रहे हैं. इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, ‘आ गया मजा. इसके अलावा भी अन्य यूजर्स सारा तेंदुलकर और शुभमन गिल को लेकर कमेंट करते दिखे.

अपहरण के चक्कर में फंस गया मुंबई का किंग

15 मई, 2017 की सुबह की बात है. समय 11-साढ़े 11 बजे सीकर जिले के शहर फतेहपुर के ज्वैलर ललित पोद्दार अपनी ज्वैलरी की दुकान पर थे. उन की पत्नी पार्वती और बेटा ध्रुव ही घर पर थे. बेटी वर्षा किसी काम से बाजार गई थी. उसी समय अच्छी कदकाठी का एक सुदर्शन युवक उन के घर पहुंचा. उस के हाथ में शादी के कुछ कार्ड थे. युवक ने ललित के घर के बाहर लगी डोरबेल बजाई तो पार्वती ने बाहर आ कर दरवाजा खोला. युवक ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘‘नमस्ते आंटीजी, पोद्दार अंकल घर पर हैं?’’

पार्वती ने शालीनता से जवाब देते हुए कहा, ‘‘नमस्ते भैया, पोद्दारजी तो इस समय दुकान पर हैं. बताइए क्या काम है?’’

‘‘आंटीजी, हमारे घर में शादी है. मैं कार्ड देने आया था.’’ युवक ने उसी शालीनता से कहा.

युवक के हाथ में शादी के कार्ड देख कर पार्वती ने उसे अंदर बुला लिया. युवक ने सोफे पर बैठ कर एक कार्ड पार्वती की ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘आंटीजी, यह कार्ड पोद्दार अंकल को दे दीजिएगा. आप लोगों को शादी में जरूर आना है. बच्चों को भी साथ लाइएगा.’’

पार्वती ने शादी का कार्ड देख कर कहा, ‘‘भैया आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘आंटीजी, आप नहीं पहचानतीं, लेकिन पोद्दार अंकल मुझे अच्छी तरह से पहचानते हैं.’’ युवक ने कहा.

पार्वती ने घर आए, उस मेहमान से चायपानी के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘चायपानी के तकल्लुफ की कोई जरूरत नहीं है, आंटीजी. अभी एक कार्ड आप के भांजे अश्विनी को भी देना है. मैं उन का घर नहीं जानता. आप अपने बेटे को मेरे साथ भेज देतीं तो वह उन का घर बता देता. कार्ड दे कर मैं आप के बेटे को छोड़ जाऊंगा.’’

बाहर तेज धूप थी. इसलिए पार्वती बेटे को बाहर नहीं भेजना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने टालने वाले अंदाज में कहा, ‘‘आप कार्ड हमें दे दीजिए. शाम को अश्विनी हमारे घर आएगा तो हम कार्ड दे देंगे.’’

पार्वती की बात सुन कर युवक ने मायूस होते हुए कहा, ‘‘कार्ड तो मैं आप को दे दूं, लेकिन पापा मुझे डांटेंगे. उन्होंने कहा है कि खुद ही जा कर अश्विनी को कार्ड देना.’’

युवक की बातें सुन कर पार्वती ने ड्राइंगरूम में ही वीडियो गेम खेल रहे अपने 13 साल के बेटे ध्रुव से कहा, ‘‘बेटा, अंकल के साथ जा कर इन्हें अश्विनी का घर बता दे.’’

ध्रुव मां का कहना टालना नहीं चाहता था, इसलिए वह अनमने मन से जाने को तैयार हो गया. वह युवक ध्रुव के साथ घर से निकलते हुए बोला, ‘‘थैंक्यू आंटीजी.’’

ध्रुव और उस युवक के जाने के बाद पार्वती घर के कामों में लग गईं. काम से जैसे ही फुरसत मिली उन्होंने घड़ी देखी. दोपहर के साढ़े 12 बज रहे थे. ध्रुव को कब का घर आ जाना चाहिए था. लेकिन वह अभी तक नहीं आया था. पार्वती ने सोचा कि ध्रुव वहां जा कर खेलने या चायपानी पीने में लग गया होगा. हो सकता है, अश्विनी ने उसे किसी काम से भेज दिया हो. यह सोच कर वह फिर काम में लग गईं.

थोड़ी देर बाद उन्हें जब फिर ध्रुव का ध्यान आया, तब दोपहर का सवा बज रहा था. ध्रुव को घर से गए हुए डेढ़ घंटे से ज्यादा हो गया था. पार्वती को चिंता होने लगी. 10-5 मिनट वह सेचती रहीं कि क्या करें. कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने पति ललित पोद्दार को फोन कर के सारी बात बता दी. पत्नी की बात सुन कर ललित को भी चिंता हुई. उन्होंने पत्नी को तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘ध्रुव कोई छोटा बच्चा नहीं है कि कहीं खो जाए या इधरउधर भटक जाए. फिर भी मैं अश्विनी को फोन कर के पता करता हूं.’’

ललित ने अश्विनी को फोन कर के ध्रुव के बारे में पूछा तो अश्विनी ने जवाब दिया, ‘‘मामाजी, मेरे यहां न तो ध्रुव आया था और ना ही कोई आदमी शादी का कार्ड देने आया था.’’

अश्विनी का जवाब सुन कर ललित भी चिंता में पड़ गए. वह तुरंत घर पहुंचे और पार्वती से सारी बातें पूछीं. उन्होंने वह शादी का कार्ड भी देखा, जो वह युवक दे गया था. कार्ड पर लियाकत सिवासर का नाम लिखा था. ललित को वह शादी का कार्ड अपने किसी परिचित का नहीं लगा. उन्होंने कार्ड पर लिखे मोबाइल नंबरों पर फोन किया तो वे नंबर फरजी निकले.

ललित को किसी अनहोनी की आशंका होने लगी. उन के मन में बुरे ख्याल आने लगे. उन्हें आशंका इस बात की थी कि कहीं किसी ने पैसों के लालच में ध्रुव का अपहरण न कर लिया हो. इस की वजह यह थी कि वह फतेहपुर के नामीगिरामी ज्वैलर थे. राजस्थान के शेखावटी इलाके में उन का अच्छाखासा रसूख था. बेटे के घर न आने से पार्वती का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

ललित ने अपने कुछ परिचितों से बात की तो सभी ने यही सलाह दी कि इस मामले की सूचना पुलिस को दे देनी चाहिए. इस के बाद दोपहर करीब ढाई बजे ललित ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी. पार्वती से पूछताछ की गई. शुरुआती जांच से यही नतीजा निकला कि ध्रुव का अपहरण किया गया है.

अपहर्त्ता प्रोफेशनल अपराधी हो सकते थे. क्योंकि रात तक फिरौती के लिए किसी अपहर्त्ता का फोन नहीं आया था. पुलिस को अनुमान हो गया था कि अपहर्त्ता ने ध्रुव के अपहरण का जो तरीका अपनाया था, उस से साफ लगता था कि उन्होंने रेकी कर के ललित पोद्दार के बारे में जानकारियां जुटाई थीं.

पुलिस ने फिरौती मांगे जाने की आशंका के मद्देनजर पोद्दार परिवार के सारे मोबाइल सर्विलांस पर लगवा दिए. लेकिन उस दिन रात तक ना तो किसी अपहर्त्ता का फोन आया और ना ही ध्रुव को साथ ले जाने वाले उस युवक के बारे में कोई जानकारी मिली. पुलिस ने ललित के घर के आसपास और लक्ष्मीनारायण मंदिर के करीब स्थित उस की दुकान के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन उन से पुलिस को कुछ हासिल नहीं हुआ.

पुलिस को अब तक केवल यही पता चला था कि ललित पोद्दार के घर जो युवक शादी का कार्ड देने आया था, उस की उम्र करीब 30 साल के आसपास थी. वह सफेद शर्ट पहने हुए था. अगले दिन सीकर के एसपी राठौड़ विनीत कुमार त्रिकमलाल ने ध्रुव का पता लगाने के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए. इस के बाद पुलिस ने उस शादी के कार्ड को आधार बना कर जांच आगे बढ़ाई.

परेशानी यह थी कि शादी के कार्ड पर किसी प्रिंटिंग प्रैस का नाम नहीं लिखा था, जबकि हर शादी के कार्ड पर प्रिंटिंग प्रैस का नाम जरूरी होता है. इस की वजह यह है कि राजस्थान सरकार ने बालविवाह की रोकथाम के लिए यह कानूनी रूप से जरूरी कर दिया है. पुलिस ने शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रैस मालिकों से बात की तो पता चला कि उस कार्ड में औफसेट पेंट का इस्तेमाल किया गया था.

उस पेंट का उपयोग फतेहपुर में नहीं होता था. सीकर में प्रिंटिंग प्रैस वाले उस का उपयोग करते थे. इस के बाद पुलिस ने सीकर, चुरू और झुंझुनूं के करीब डेढ़ सौ प्रैस वालों से पूछताछ की. इस जांच के दौरान एक नया तथ्य यह सामने आया कि ध्रुव के अपहरण से 4 दिन पहले से उसी के स्कूल में पढ़ने वाला छात्र अंकित भी लापता था. अंकित चुरू जिले के रतनगढ़ शहर का रहने वाला था. वह फतेहपुर के विवेकानंद पब्लिक स्कूल में पढ़ता था और हौस्टल में रहता था. गर्मी की छुट्टी में वह रतनगढ़ अपने घर गया था. वह 12 मई को दोपहर करीब सवा बारह बजे बाल कटवाने के लिए घर से निकला था, तब से लौट कर घर नहीं आया था.

तीसरे दिन आईजी हेमंत प्रियदर्शी एवं एसपी राठौड़ विनीत कुमार ने ध्रुव के घर वालों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि ध्रुव का जल्द से जल्द पता लगा लिया जाएगा. उसी दिन यानी 17 मई को अपहर्त्ता ने ललित पोद्दार को फोन कर के बताया कि उन के बेटे ध्रुव का अपहरण कर लिया गया है. उन्होंने ध्रुव की उन से बात करा कर 70 लाख रुपए की फिरौती मांगी.

उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर पुलिस को बताया तो बच्चे को मार दिया जाएगा. ललित ने समझदारी से बातें करते हुए अपहर्त्ता से कहा कि आप तो जानते ही हैं कि नोटबंदी को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है. भाइयों, परिवार वालों और रिश्तेदारों से पैसे जुटाने के लिए समय चाहिए. चाहे जितनी कोशिश कर लूं, 70 लाख रुपए इकट्ठे नहीं हो पाएंगे. बैंक से एक साथ ज्यादा पैसा निकाला तो पुलिस को शक हो जाएगा.

ललित ने अपहर्ता को अपनी मजबूरियां बता कर यह जता दिया कि वह 70 लाख रुपए नहीं दे सकते. बाद में अपहर्ता 45 लाख रुपए ले कर ध्रुव को सकुशल छोड़ने को राजी हो गए. अपहर्ताओं ने फिरौती की यह रकम कोलकाता में हावड़ा ब्रिज पर पहुंचाने को कहा. लेकिन बाद में वे फिरौती की रकम मुंबई में लेने को तैयार हो गए.

ललित का मोबाइल पहले से ही पुलिस सर्विलांस पर लगा रखा था. पुलिस को अपहर्ता और ललित के बीच हुई बातचीत का पता चल गया. इसी के साथ पुलिस को वह मोबाइल नंबर भी मिल गया, जिस से ललित को फोन किया गया था.

इसी बीच पुलिस ने शादी के उस कार्ड की जांच एक्सपर्ट से कराई तो पता चला कि वह एविडेक प्रिंटर से छपा था. शेखावटी के सीकर, चुरू व झुंझुनूं जिले में करीब 60 एविडेक प्रिंटर थे. इन प्रिंटर मालिकों से पूछताछ की गई तो पता चला कि वह कार्ड नवलगढ़ के एक प्रिंटर से छपवाया गया था. उस प्रिंटर के मालिक से पूछताछ में पता चला कि वह कार्ड फतेहपुर के किसी आदमी ने उस के प्रिंटर पर छपवाया था. उस आदमी से पूछताछ में पुलिस को अपहर्त्ता युवक के बारे में कुछ सुराग मिले.

इस के अलावा पुलिस ने 15 मई को ललित पोद्दार के मकान के आसपास घटना के समय हुई सभी मोबाइल कौल को ट्रेस किया. इस में मुंबई का एक नंबर मिला. यह नंबर साजिद बेग का था. काल डिटेल्स के आधार पर यह भी पता चल गया कि साजिद के तार फतेहपुर के रहने वाले अयाज से जुड़े थे.

जांच में यह बात भी सामने आ गई कि अपहर्ता मुंबई से जुड़ा है. इस पर पुलिस ने फतेहपुर से ले कर विभिन्न राज्यों के टोल नाकों पर जांच की और उन नाकों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. इस में सब से पहले शोभासर के टोल पर सफेद रंग की एसेंट कार पर जयपुर का नंबर मिला. अगले टोल नाके मौलासर पर इसी कार पर महाराष्ट्र की नंबर प्लेट लगी हुई पाई गई. आगे के टोल नाकों पर उसी कार पर अलगअलग नंबर प्लेट लगी हुई पाई गई. जांच में ये सारे नंबर फरजी पाए गए.

सीकर के एसपी ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर से बात कर के ध्रुव के अपहरण की पूरी जानकारी दे कर अपराधियों को पकड़ने में सहायता करने का आग्रह किया. इसी के साथ एसपी के दिशानिर्देश पर एडिशनल एसपी तेजपाल सिंह ने 3 टीमें गठित कर के 3 राज्यों में भेजी. सब से पहले रामगढ़ शेखावाटी के थानाप्रभारी रमेशचंद्र को टीम के साथ मुंबई भेजा गया. यह टीम मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच के साथ मिल कर आरोपियों की तलाश में जुट गई.

फतेहपुर कोतवाली के थानाप्रभारी महावीर सिंह ने लगातार जांच कर के ध्रुव के अपहरण में साजिद बेग और फतेहपुर के रहने वाले अयाज के साथ उस के संबंधों के बारे में पता लगाया.

एसपी ध्रुव के घर वालों को सांत्वना देने के साथ यह भी बताते रहे कि उन्हें अपहर्ता को किस तरह बातों में उलझा कर रखना है, ताकि पुलिस बच्चे तक पहुंच सके. पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश और एक टीम पश्चिम बंगाल भी भेजी गई. पुलिस को संकेत मिले थे कि अपहर्ता धु्रुव को ले कर मुंबई, कोलकाता या कानपुर जा सकते हैं.

लगातार भागदौड़ के बाद सीकर पुलिस ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की मदद से 21 मई की आधी रात के बाद मुंबई के बांद्रा  इलाके से ध्रुव को सकुशल बरामद कर लिया. पुलिस ने उस के अपहरण के आरोप में साजिद बेग को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था. इस के अलावा उस की 2 गर्लफ्रैंड्स को भी गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने वह एसेंट कार भी बरामद कर ली, जिस से ध्रुव का अपहरण किया गया था. सीकर पुलिस 22 मई की रात ध्रुव और आरोपियों को ले कर मुंबई से रवाना हुई और 23 मई को फतेहपुर आ गई.

पुलिस ने ध्रुव के अपहरण के मामले में मुंबई से साजिद बेग और उस की गर्लफ्रैंड्स यास्मीन जान और हालिमा मंडल को गिरफ्तार किया था. पूछताछ के बाद फतेहपुर के रहने वाले अयाज उल हसन उर्फ हयाज को गिरफ्तार किया गया. इस के बाद सभी आरोपियों से की गई पूछताछ में ध्रुव के अपहरण की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

साजिद बेग पेशे से सिविल इंजीनियर था. वह बांद्रा, मुंबई में मछली बाजार में रहता था. उसे हिंदी, अंग्रेजी व मारवाड़ी का अच्छा ज्ञान था. वह मूलरूप से फतेहपुर का ही रहने वाला था. उस के दादा और घर के अन्य लोग मुंबई जा कर बस गए थे. फतेहपुर में साजिद का 2 मंजिला आलीशान मकान था. वह फतेहपुर आताजाता रहता था. उस की पत्नी भी पढ़ीलिखी है. उस का एक बच्चा भी है.

मुंबई स्थित उस के घर पर नौकरचाकर काम करते हैं. उस के पिता के भाई और अन्य रिश्तेदार भी मुंबई में ही रहते हैं. इन के लोखंडवाला, बोरीवली सहित कई पौश इलाकों में आलीशान बंगले हैं. वह मुंबई में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का काम करता था. मौजमस्ती के गलत शौक और व्यापार में घाटा होने की वजह से साजिद कई महीनों से आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. उस पर करीब 30 लाख रुपए का कर्ज हो गया था. इसलिए वह जल्द से जल्द किसी भी तरीके से पैसे कमा कर अपना कर्ज उतारना चाहता था.

करीब 2 महीने पहले साजिद ने फतेहपुर के रहने वाले अपने बचपन के दोस्त अयाज उल हसन उर्फ हयाज को मुंबई बुलाया. वह 5 दिनों  तक मुंबई में रहा. इस बीच साजिद ने उस से पैसे कमाने के तौर तरीकों के बारे में बात की. इस पर अयाज ने कहा कि फतेहपुर में किसी का अपहरण कर के उस के बदले में अच्छीखासी फिरौती वसूली जा सकती है. हालांकि उस समय यह तय नहीं हुआ था कि अपहरण किस का किया जाएगा.

साजिद ने अयाज को यह कह कर फतेहपुर वापस भेज दिया कि वह किसी ऐसी पार्टी का चयन करे, जिस से मोटी रकम वसूली जा सके. अयाज फतेहपुर आ कर योजना बनाने लगा. अयाज ने पिछले साल फतेहपुर के ज्वैलर ललित पोद्दार के मकान पर पेंट का काम किया था. इसलिए उसे ललित के घरपरिवार की सारी जानकारी थी. उस ने साजिद को ललित के बारे में बताया.

इस के बाद दोनों ने ललित के बेटे ध्रुव के अपहण की योजना बना ली. उसी योजना के तहत शादी का फरजी कार्ड नवलगढ़ से छपवाया गया. इस के बाद कार्ड से कैमिकल द्वारा प्रिंटिंग प्रैस का नाम हटा दिया गया. योजनानुसार साजिद 10 मई को मुंबई से कार ले कर फतेहपुर आ गया और दरगाह एरिया में रहने वाले अपने दोस्त अयाज से मिला. इस के बाद ध्रुव के अपहरण की योजना को अंतिम रूप दिया गया.

15 मई को शादी का कार्ड देने के बहाने साजिद ललित के घर से उस के बेटे धु्रव को अश्विनी के घर ले जाने की बात कह कर साथ ले गया और उसे घर के बाहर खड़ी एसेंट कार में बैठा लिया. उस ने धु्रव से कहा कि गाड़ी में पैट्रोल नहीं है, इसलिए पहले पैट्रोल भरवा लें, फिर अश्विनी के घर चलेंगे.

फतेहपुर में पैट्रोल पंप से पहले ही साजिद ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी तो ध्रुव को शक हुआ. वह शीशा खोल कर ‘बचाओबचाओ’ चिल्लाने लगा. इस पर साजिद ने उसे कोई नशीली चीज सुंघा दी, जिस से वह बेहोश हो गया.

ध्रुव को बेहोशी की हालत में पीछे की सीट पर सुला कर साजिद अपनी कार से मुंबई ले गया. बीचबीच में टोलनाकों से पहले उस ने 5 बार कार की नंबर प्लेट बदलीं.

साजिद ने अपहृत ध्रुव को मुंबई में अपनी 2 गर्लफ्रैंड्स के पास रखा. इन में एक गर्लफ्रैंड यास्मीन जान मुंबई के चैंबूर में लोखंड मार्ग पर रहती थी. तलाकशुदा यास्मीन को साजिद ने बता रखा था कि वह कुंवारा है. उस ने उसे शादी करने का झांसा भी दे रखा था. साजिद ने यास्मीन को धु्रव के अपहरण के बारे में बता दिया था. यास्मीन फिरौती में मिलने वाली मोटी रकम से साजिद के साथ ऐशोआराम की जिंदगी गुजारने का सपना देख रही थी. इसलिए उस ने साजिद की मदद की और धु्रव को अपने पास रखा.

साजिद की दूसरी गर्लफ्रैंड हालिमा मंडल मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली थी. वह पिछले कई सालों से बांद्रा इलाके में बाजा रोड पर रहती थी. उस के 2 बच्चे हैं. साजिद मुंबई पहुंच कर ध्रुव को सीधे हलिमा के घर ले गया था. उस ने उसे ध्रुव के अपहरण के बारे में बता दिया था. हालिमा ने भी फिरौती में मोटी रकम मिलने के लालच में साजिद का साथ दिया और ध्रुव को अपने पास रखा. वह ध्रुव को नींद की गोलियां देती रही, ताकि वह शोर न मचा सके.

फेसबुक पर एक पोस्ट में खुद को मुंबई का किंग बताने वाला साजिद इतना शातिर था कि ललित पोद्दार से या अयाज से बात करने के बाद मोबाइल स्विच औफ कर लेता था, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके. ध्रुव को जहां रखा गया था, वहां से वह करीब सौ किलोमीटर दूर जा कर नए सिम से फोन करता था, ताकि अगर किसी तरह पुलिस मोबाइल नंबर ट्रेस भी कर ले तो उसी लोकेशन पर बच्चे को खोजती रहे.

साजिद के बताए अनुसार, टीवी पर आने वाले आपराधिक धारावाहिकों को देख कर उस ने ध्रुव के अपहरण की साजिश रची थी. सीरियलों को देख कर ही उस ने हर कदम पर सावधानी बरती, लेकिन पुलिस उस तक पहुंच ही गई. जबकि उस ने पुलिस से बचने के तमाम उपाय किए थे.

23 मई को पुलिस ध्रुव को ले कर फतेहपुर पहुंची तो पूरा शहर खुशी से नाच उठा. पुष्पवर्षा और आतिशबाजी की गई. 9 दिनों बाद बेटे को सकुशल देख कर पार्वती की आंखों से आंसू बह निकले. पिता ललित पोद्दार ने बेटे को गले से लगा कर माथा चूम लिया. सालासर मंदिर में लोगों ने फतेहपुर कोतवाली के थानाप्रभारी महावीर सिंह का सम्मान किया.

पुलिस ने ध्रुव के अपहरण के मामले में साजिद के अलावा यास्मीन जान, हालिमा मंडल और फतेहपुर निवासी अयाज को गिरफ्तार किया था. फतेहपुर के एक अन्य युवक की भी इस मामले में भूमिका संदिग्ध पाई गई. इस के अलावा उत्तर प्रदेश के एक गैंगस्टर नसरत उर्फ नागा उर्फ चाचा का नाम भी ध्रुव के अपहरण में सहयोगी के रूप में सामने आया है.

नसरत उर्फ नागा उत्तर प्रदेश के सिमौनी का रहने वाला था. वह फिलहाल मुंबई के गौरी खानपुर में रहता है. साजिद काफी समय से उस के संपर्क में था. उस के साथ नागा भी आया था. उस ने नागा को सीकर में ही छोड़ दिया था.

ध्रुव के अपहरण के बाद नागा साजिद के साथ हो गया था. दोनों ध्रुव को ले कर मुंबई गए थे. नागा पर उत्तर प्रदेश और मुंबई में हत्या के 3 मामले और लूट, चाकूबाजी, हथियार तस्करी, गुंडा एक्ट आदि के दर्जनों मामले दर्ज हैं. वह हिस्ट्रीशीटर है. कथा लिखे जाने तक सीकर पुलिस इस मामले में नागा की तलाश कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सेक्स को खास बनाने के ये हैं बेहतरीन उपाय

सेक्स विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन से पता चलता है कि सफल सेक्स लाइफ बिताने वाले दीर्घायु तो होते ही हैं, इनके जीवन में सफल होने के चांस भी अधिक होते हैं. रोजमर्रा की छोटी-छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर व्यक्ति अपनी सेक्स लाइफ को एंजॉय कर सकता है. सेक्स के दौरान अगर कुछ बातों का ध्यान रखें तो जीवन सुखमय और आनंददायक हो सकता है.

सेक्स के दौरान न तो आक्रामक रुख अपनाएं न ही अपने पार्टनर पर हावी होने की कोशिश करें. हां, उसके साथ सहजता से पेश आए साथ ही उसकी पसंद-नापंसद का भी खयाल रखें.

  • अपने पार्टनर से बातचीत करें और उससे सेक्सुअल प्रिफरेंस अवश्य पूछें. कभी भी उस पर अपनी इच्छा नहीं थोपें.
  • सेक्स की किसी भी क्रिया अथवा विविधता के लिए अपने साथी की इच्छा अथवा अनिच्छा का पूरा सम्मान करें. उसके साथ सहजता से पेश आएं. किसी भी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती आपको अपने साथी से दूर कर सकती है. साथ ही अगर प्यार से समझाया जाए तो धीरे-धीरे आपका पार्टनर भी आपका साथ देने के लिए तैयार हो जाएगा.
  • हमेशा याद रखें कि सेक्स का सुख दो पैरों के बीच नहीं बल्कि दो कानों के बीच अर्थात मस्तिष्क में होता है. शारीरिक संतु‍ष्टि के लिए ऐसी कोई भी हरकत न करें, जिससे आपका पार्टनर नाराज हो जाए अथवा तनावग्रस्त हो जाए. साथ ही अपने पार्टनर की संतुष्टि का भी पूरा ख्याल रखें, अगर वो संतुष्ट होगा तो आपकी संतुष्टि का लेवल दुगना हो जाएगा.
  • सहवास के पहले हलका और सुपाच्य भोजन लें और यह भी ध्यान रखें कि भोजन और सेक्स के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर हो.
  • सेक्स से पहले कोई भी ऐसी चीज न खाएं जिससे शरीर से दुर्गन्ध या कोई अन्य तेज गंध आती हो, हो सकें तो स्नान या कम से कम ब्रश कर के ही सेक्स की शुरूआत करें.

मैं अपनी चाची के साथ संबंध बनाना चाहता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 20 साल का हूं. मम्मी पापा बाकी भाई बहनों के साथ दूसरे शहर में रहते हैं. चाचा एयरफोर्स में हैं और बाहर रहते हैं. मैं चाची व उन के 2 साल के बेटे के साथ गांव में रहता हूं. मैं चाची के साथ सेक्स करना चाहता हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप को गांव में चाची व बच्चे की देखभाल के लिए छोड़ा गया है और आप खुद चाचा बनना चाहते हैं. अगर आप के इरादों का किसी को पता चलेगा, तो आप की खूब फजीहत होगी. आप चाची पर बुरी नजर रखने के बजाय शराफत से रहें. खुद पर काबू न हो, तो गांव छोड़ कर कहीं और चले जाएं.

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क्या आप भी सेक्स के समय उत्तेजित नहीं हो पाती

कई स्त्रियां ऐसी होती हैं, जो सहवास के दौरान उत्तेजित नहीं हो पाती हैं, जिस से वे सहवास के दौरान पति को सहयोग भी नहीं दे पाती हैं. ऐसी स्त्रियां ‘फ्रिजिड’ अर्थात ‘ठंडी’ स्त्री के रूप में जानी जाती हैं. फ्रिजिड स्त्री की व्यथा को न कोई जान सकता है और न ही समझ सकता है. वह स्वयं भी इस बात को जान नहीं पाती कि वह यौन सुख से वंचित क्यों है? जिस प्रकार छप्पन पकवानों से सजी थाली का भोजन नलिका द्वारा पेट में पहुंचाए जाने पर व्यक्ति को स्वाद का पता नहीं चलता, ठीक उसी प्रकार फ्रिजिड स्त्री संतान तो उत्पन्न कर सकती है, लेकिन यौनसुख का अनुभव नहीं कर सकती. पति उस की फ्रिजिडिटी (ठंडेपन) से तंग आ कर पत्नी को मानसिक रूप से प्रताडि़त करता है और उसे शारीरिक पीड़ा भी पहुंचाता है. वह समझता है कि उस की पत्नी उसे जानबूझ कर सहयोग नहीं देती है या कोई अनैतिक संबंध रख कर उस से बेवफाई कर रही है. इस से पतिपत्नी के बीच दीवार खड़ी हो जाती है और पत्नी को स्वयं को कोसने के सिवा कोई चारा नहीं रह जाता है.

मेरे पास ऐसी कई स्त्रियां आई हैं, जिन में से कुछ की ‘केस हिस्ट्री’ आप को बताना चाहूंगा ताकि आप लोगों को फ्रिजिड स्त्रियों की व्यथा का पता चल सके. 23 वर्षीय मध्यवर्गीय वैशाली मासूमियत की प्रतीक थी. खुले दिल से हंसना, तत्परता से काम करना व कपटरहित व्यवहार उस का स्वभाव था. जब एक बड़े घराने में उस की शादी हुई तो वह खुशी से नाच उठी. उस ने सोचा कि अब उसे किसी प्रकार की कमी नहीं रहेगी, लेकिन कुछ दिनों में उस का यह भ्रम टूट गया. उस की हंसी, उछलकूद, सब से हिलनामिलना आदि पर पाबंदी लग गई, क्योंकि उस बड़े घराने में इसे अशिष्ट माना जाता था. हमेशा सास और ननद उस की हंसी उड़ाया करती थीं, जिस से वह धीरेधीरे स्वयं में खोने लगी. यहां तक की पति के साथ सहवास के समय पर अत्यंत आनंद के क्षणों में मुंह से निकले हुए उद्गार अथवा सिसकारी को दबाने लगी, क्योंकि उसे डर था कि पति उसे बदचलन या अशिष्ट स्त्री न समझ ले. धीरेधीरे वह भावशून्य होने लगी. बच्चे होने पर वह बच्चों में ही अधिक समय बिताने लगी और पति की मांग के कारण केवल एक फर्ज के रूप में यौन संबंध रखने लगी. वह यह भी भूल गई कि इस संबंध में सुख भी मिलता है.

हादसे की शिकार

उर्वशी की समस्या कुछ अलग ही है. विवेक जैसे शिक्षित, सुशील और होनहार युवक से उस का विवाह हुआ था, जो उस के कालेज जीवन का प्रेमी था. विवाह से पहले उर्वशी अपने प्रेमी विवेक से मिलने के लिए हमेशा आतुर रहती थी. वह अधिक से अधिक समय उस के साथ बिताना चाहती थी. जब दोनों का विवाह हुआ तो उस रात बड़ी देर तक विवेक दोस्तों से छुटकारा नहीं पा सका. उर्वशी उस की राह देखतेदेखते थक कर अपने कमरे में सो गई. जब विवेक बहुत देर बाद कमरे में पहुंचा तो उर्वशी की सुंदरता देख कर मुग्ध हो गया. उस ने धीरे से उस का सिर उठा कर एक चुंबन ले लिया, जिस से उर्वशी घबरा कर उठ गई और सिसकसिसक कर रोने लगी. उस का सारा शरीर कांप रहा था और वह पसीने से तरबतर हो गई. यह देख कर विवेक बहुत डर गया, क्योंकि उस ने ऐसा उर्वशी को डराने के लिए नहीं किया था. वह उर्वशी से बारबार माफी मांगने लगा. थोड़ी देर बाद उर्वशी सामान्य हुई तो घबराहट के कारण हुई गलतियों पर शर्मिंदा होने लगी. जब दोनों पतिपत्नी हनीमून के लिए गए, तब सहवास के दौरान उर्वशी को निश्चेष्ट और बर्फ समान ठंडा पा कर विवेक को बहुत परेशानी हुई, क्योंकि वह तृप्ति से वंचित रह जाती थी.

विवेक को कुछ समझ में नहीं आया कि दिन भर प्यार करने वाली उर्वशी सहवास के दौरान ऐसा बरताव क्यों करती है? डाक्टरी जांच कराने पर पता चला कि 14 साल की उम्र में जब वह मामा के घर किसी की शादी में गई थी, एक दिन दोपहर के समय वह सो गई थी, तब एक लड़का छिप कर उस के कमरे में आ गया और उस से जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा. उर्वशी ने किसी तरह वहां से भाग कर अपनी लाज बचाई. जैसेजैसे दिन बीतते गए उर्वशी उस हादसे को भूल गई, लेकिन विवेक द्वारा लिए गए प्रथम चुंबन ने उस के अवचेतन मन में छिपे इस पुराने डर को ताजा कर दिया, जिस से उस की भावनाएं आहत हुईं और वह फ्रिजिड हो गई.

शर्म व तनाव के कारण

रीता शर्मीले स्वभाव की लड़की थी. उस की सगाई सुदेश के साथ हो गई थी. एक दिन जब घर में कोई नहीं था, तो रीता को अकेली पा कर सुदेश उत्तेजित हो उठा और उस ने रीता से सहवास की मांग की, जिस से वह सहम गई. वह सोचने लगी कि यदि वह सुदेश को मना करती है तो वह नाराज हो जाएगा. अगर वह उस की बात मान लेती है तो उस की बदनामी हो जाएगी और उस के मन में गर्भवती होने का डर भी उत्पन्न हो गया. इस बीच सुदेश ने रीता के मौन को सहमति समझ कर सहवास कर ही लिया. इस के बाद रीता हताश और बेचैनी की अवस्था में मासिकधर्म की राह देख कर दिन बिताने लगी. जिस दिन रीता को मासिकधर्म शुरू हुआ उस ने चैन की सांस ली और आराम की नींद सोने लगी. लेकिन उस के कुछ समय बाद ही सुदेश ने उसे फ्रिजिड लड़की कह कर सगाई तोड़ दी. दुनिया की कोई भी स्त्री जन्म से फ्रिजिड नहीं होती. वह फ्रिजिड अपने घर के वातावरण, समाज और किसी भी हादसे के कारण जैसे- बलात्कार आदि से बन सकती है.

फ्रिजिडिटी मानसिक और शारीरिक कारणों से आती है, जिन में शारीरिक कारण तो बहुत कम होते हैं, लेकिन मानसिक कारण अधिक होते हैं. इसलिए उपरोक्त उपायों को अपना कर फ्रिजिडिटी दूर की जा सकती है और दांपत्य जीवन को सहज और सुखद बनाया जा सकता है.

शारीरिक कारण

शारीरिक विकलांग अवस्था में योनि का न होना. वैसे यह कारण बहुत कम स्त्रियों में होता है.

दुखद यौन संबंध, योनि शोथ, गर्भाशय शोथ, रजोनिवृत्ति हो जाना, अंडाशय और यकृत रोग भी इस का कारण हो सकते हैं.

गर्भवती और गुप्तरोग हो जाने की शंकाएं भी स्त्री को फ्रिजिड बना देती हैं.

रक्तचाप कम करने वाली दवाओं का सेवन, नींद की गोलियां, ट्रैंक्विलाइजर्स और 3-4 साल से लगातार गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी फ्रिजिडिटी उत्पन्न कर सकता है.

मानसिक कारण

जब बच्चे बचपन में अनजाने में अपने शरीर को समझने के लिए यौनांगों को छूते हैं, तब उन्हें इस के लिए डांटा जाता है और कभीकभी तो मातापिता उन्हें सजा भी दे देते हैं.

बचपन से ही कड़े अनुशासनपूर्ण माहौल में परवरिश होने के कारण, जिस में सैक्स को बुरा या गंदा मानने वाले विचारों का बच्चे के मन में घर कर जाना, बच्चों द्वारा किए गए सैक्स संबंधित सवालों का जवाब न देना या डांट देना भी फ्रिजिडिटी का कारण होता है.

भावनाओं को दबाना, लड़के और लड़की से किए जाने वाले व्यवहार में भिन्नता, जिस में लड़की की उपेक्षा करना लड़की की आयु बढ़ने पर उस में फ्रिजिडिटी उत्पन्न कर देता है. इसे मूल कारण समझा जा सकता है.

धार्मिक शिक्षा, जो सैक्स को पाप मानती है और सहवास को केवल पुत्र प्राप्ति का साधन मात्र मानती है.

कई बार पुरुष अपने शीघ्रपतन और नपुंसकता की समस्या को छिपाने के लिए भी पत्नी को फ्रिजिड कह देता है, जिस से उस का मन आहत हो उठता है और वह फ्रिजिड बन जाती है.

मानसिक रोग जैसे डिप्रैशन, तनाव, चिंता आदि भी फ्रिजिडिटी पैदा करते हैं.

फ्रिजिडिटी दूर करने के उपाय

यदि पतिपत्नी एकदूसरे को समझने का प्रयास करें व पति अपनी पत्नी को उचित प्यार व सहयोग दे तो यह समस्या हल हो सकती है.

पत्नी के मन में भी इसे दूर करने की तीव्र इच्छा होनी चाहिए. पतिपत्नी के बीच उत्पन्न तनाव के कारणों को दूर करना चाहिए.

पतिपत्नी युगल चिकित्सा का सहारा ले कर भी इसे दूर कर सकते हैं.

प्रेम, स्पर्श, आलिंगन व रसभरी बातों से भी इसे दूर किया जा सकता है.

इस के अलावा ‘सैक्स पावर’ बढ़ाने वाली एक्सरसाइज द्वारा भी आप इसे दूर कर सकते हैं.

इस में सम्मोहन चिकित्सा बहुत ही लाभकारी होती है, जो मन में बैठे हुए अज्ञात भय को निकालती है.

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ब्रेस्ट कैंसर से उबरी छवी मित्तल, 42 की उम्र में ऐसे उड़ाएं सबके होश

एक्ट्रेस छवी मित्तल इन दिनों बैंकॉग और फुकेत में टाइम स्पैंड कर रही है, हाल ही में छवी मित्तल को ब्रेस्ट कैंसर हुआ था, जिसके बाद उनकी ये पहली झलक है जो कि सोशल मीडिया पर नजर आई है उन्हे देखकर इस बात को अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि हाल फिलहाल में कैंसर से उबरी है उनका जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन देख फैंस के होश उड़ गए है.

 

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आपको बता दें, कि छवी मित्तल पिछले कुछ दिनों में अपनी जर्नी की झलक दिखाते हुए कई तस्वीरें और वीडियोज शेयर किए. रंग-बिरंगी बिकिनी में सब उन्हें देखकर दंग रह गए. एक पोस्ट में छवि ने लिखा, ‘जब आपकी वेकेशन पहले वाली वेकेशन से अच्छी हो, मतलब आप जिंदगी जी रहे हैं. कोई शिकायत नहीं है, अब जिम में हिट करने का एक और लक्ष्य है. मैं बैंकॉक गई थी, आप छुट्टियों के मौसम में कहां छुट्टियां मना रहे हैं?’

 

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एक दूसरे वीडियो में छवी मित्तल को बिकिनी में अपनी टोन्ड बॉडी फ्लॉन्ट करते हुए देखा जा सकता है. उन्हों अपनी छुट्टी खास तरह से एंजॉय की. 42 की उम्र में उन्हें समंदर में करतब दिखाते भी देखा जा सकता है. छवि ने अपने फॉलोअर्स के साथ एक ब्यूटी टिप के बारे में भी शेयर किया, जिसे वो वर्षों से फॉलो कर रही हैं. उन्होंने कभी भी सनस्क्रीन न लगाने और इसके बजाय नारियल का तेल लगाने के बारे में लिखा. उन्होंने लिखा, ‘मैंने पिछले 30 सालों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं किया है. केवल नारियल का तेल!’ इसके साथ कई यूजर्स ने सनस्क्रीन के बजाय नारियल तेल का उपयोग करने के फायदे और नुकसान शेयर किए.

 

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छवी ने अपने रिसॉर्ट से लुभावने सीन की एक झलक दिखाई है. ब्रेस्ट कैंसर से बचने के बाद कई फैंस छवि के फिट लुक से हैरान हैं. कई लोगों ने इस बात की भी सराहना की कि कैसे उन्होंने अपने डाउन फेज को गले लगाया और इसे छुपाया नहीं. एक यूजर ने लिखा, ‘आप एक प्रेरणा हैं, मैं घुटने की समस्या से जूझ रहा हूं, लेकिन एक बार इससे उबरने के बाद मैं आपकी तरह फिट और स्वस्थ बनना चाहता हूं.’ एक ने लिखा, ‘माई गॉड, देखो उसको 2 बच्चों की मां, अविश्वसनीय फिटनेस.’

पाकिस्तानी शो Tere Bin में दिखाया गया मैरिटल रेप, गुस्से में आए फैंस

इन दिनों सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी शो Tere Bin खूब ट्रेंड़ कर रहा है. शो में हर दिन ऐसे मोड़ दिखाए जा रहे है जिसे देख फैंस गुस्से में आ गए है ये शो यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है शो को अबतक 12 मिलियन लोग देख चुके है लेकिन शो में कुछ ऐसा दिखाया गया है कि फैंस शो देखना छोड़ने की बात कर रहे है.

आपको बता दें, कि पाकिस्तानी शो ‘तेरे बिन’ इंडिया में भी छाया हुआ है. इसमें युमना जैदी ने ‘मीरब’ और वहाज अली ने ‘मुर्तसिम’ का किरदार निभाया है. दोनों की दमदार एक्टिंग ने इस शो को दर्शकों के दिलों में बसा दिया. इसकी कहानी को भी बहुत पसंद किया जा रहा था, लेकिन बीते एपिसोड में कुछ ऐसा हुआ कि आज सुबह से ही सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. वो इस शो के मेकर्स और वहाज के किरदार पर भड़ास निकाल रहे हैं.

18 मई, गुरुवार को Tere Bin सीरियल का 46वां एपिसोड यूट्यूब चैनल पर टेलिकास्ट हुआ. इसमें दिखाया गया कि मीरब ऐसे परिवार में पली-बढ़ी, जहां माता-पिता ने उसे भरपूर प्यार दिया और खूब संस्कार दिए. उसे अपने सपने पूरे करने की आजादी दी. मीरब की जिंदगी में तब तूफान आता है, जब जबरन मुर्तसिम से उसका निकाह करा दिया जाता है. मीरब और मुर्तसिम दोनों ही एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं, लेकिन जब वो एक-दूसरे को जानने लगते हैं तो करीब आने लगते हैं. इनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को बहुत पसंद आ रही थी. वे चाहते थे कि मीरब और मुर्तसिम के बीच की सारी दूरियां मिट जाएं और दोनों एक हो जाएं.

इससे पहले एपिसोड में दिखाया गया था कि मुर्तसिम की बहन मरियम की वजह से मीरब को घर छोड़कर जाना पड़ता है. मुर्तसिम और मीरब के बीच गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं. इसके बावजूद मीरब, मरियम के निकाह में शामिल होने के लिए ससुराल आती है, लेकिन वहां पर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है. ये लड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि मुर्तसिम पर मीरब हाथ उठा देती है. मुर्तसिम ये बर्दाश्त नहीं कर पाता है और मीरब के साथ कुछ गलत कर बैठता है. हालांकि, कुछ लोगों का ये भी कहना है कि मुर्तसिम ने मीरब को छुआ भी नहीं होगा.

शो के अपकमिंग एपिसोड के प्रोमो में जो दिखाया गया है, वो देखकर फैंस शॉक्ड हैं. प्रोमो में दिखाया गया है कि मीरब बेड के पास बैठी हुई है और बदहवास है. उसे हया (सबीना फारूक) समझाती है कि उसके ही पति ने उसके साथ ऐसा काम किया है तो उसे हमेशा के लिए उससे दूर चले जाना चाहिए. उधर, मुर्तसिम भी अपने बर्ताव को लेकर हैरान-परेशान नजर आता है. यहां बता दें कि मीरब और मुर्तसिम के बीच हुए इस झगड़े की वजह हया ही थी, क्योंकि वो मुर्तसिम से बहुत मोहब्बत करती है और हर हाल में उसे पाना चाहती है.अब ये सब देखने के बाद लोग शो छोड़ देने की बात कर रहे है.

तांत्रिकों के मायाजाल से रहें सावधान

सौतन से छुटकारा पाएं, पति या प्रेमी को वश में करें. गृहक्लेश, व्यापार में घाटा, संतान न होना आदि समस्याओं से समाधान’ के स्टीकर सार्वजनिक स्थानों, ट्रेनों, बसों आदि में चिपके दिख जाते हैं. इतना ही नहीं, इस तरह के विज्ञापन विभिन्न समाचारपत्रों में भी छपते रहते हैं.

विज्ञापन छपवाने वाले तथाकथित तांत्रिक खुद को बाबा हुसैनजी, बाबा बंगाली, बाबा मिर्जा, बाबा अमित सूफी आदि बताते हुए चंद घंटों में समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं. कुछ तो खुद को गोल्ड मैडलिस्ट, वशीकरण स्पैशलिस्ट बताते हैं. इंसानी जीवन की कोई ऐसी समस्या नहीं होगी, जिस के समाधान का दावा ये तांत्रिक न करते हों.

गाजियाबाद के विजयनगर का रहने वाला मिथुन सिंह पेशे से ट्रक ड्राइवर था. एक दिन वह ट्रक ले कर मेरठ जा रहा था तो गाजियाबाद में ही एक लालबत्ती पर उसे अपना ट्रक रोकना पड़ा. लालबत्ती होते ही चौराहे पर सामान बेचने वाले वहां रुकी गाडि़यों के पास जाजा कर सामान बेचते हैं.

उन्हीं में 18-19 साल का एक लड़का वहां रुकी हर गाड़ी में विजिटिंग कार्ड फेंक रहा था. जिस कार के खिड़कियों के शीशे बंद मिलते, वह विजिटिंग कार्ड कार के आगे के वाइपर में फंसा देता. लड़का अपना काम बड़ी फुरती से कर रहा था. ट्रक में बैठा मिथुन सिंह उसे देख रहा था.

वह लड़का मिथुन के ट्रक के पास आया और एक विजिटिंग कार्ड उस की केबिन में फेंक कर चला गया. उसी वक्त हरी बत्ती जल गई तो मिथुन ने अपना ट्रक आगे बढ़ा दिया. इस से पहले उस ने उस लड़के द्वारा फेंका गया विजिटिंग कार्ड उठा कर अपनी जेब में रख लिया था.

करीब घंटे भर बाद मिथुन ने कुछ खानेपीने के लिए ट्रक एक ढाबे पर रोका. खाने के लिए आता, उस के पहले वह शर्ट की जेब से वह विजिटिंग कार्ड निकाल कर देखा. वह कार्ड बाबा आमिल सूफी नाम के किसी तांत्रिक का था. उस में उस ने हर तरह की समस्या का समाधान करने की बात कही थी.

विजिटिंग कार्ड पढ़ कर कुछ देर तक मिथुन सोचता रहा. उस की भी एक समस्या थी, जिस की वजह से वह काफी परेशान था. दरअसल, मिथुन की अपनी पत्नी से पट नहीं रही थी. कई ऐसी वजहें थीं, जिन की वजह से पतिपत्नी में मतभेद थे. मिथुन थोड़ा जिद्दी स्वभाव का था, इसलिए पत्नी की हर बात को गंभीरता से नहीं लेता था.

मिथुन समझ नहीं पा रहा था कि उस के घर में शांति कैसे आए? विजिटिंग कार्ड पढ़ कर उसे लगा कि बाबा आमिल सूफी उस की समस्या का समाधान कर देंगे. कार्ड में बाबा के मिलने का कोई पता तो नहीं था, केवल 2 मोबाइल नंबर 8447703333 और 9891413333 लिखे थे.

मिथुन ने उसी समय अपने मोबाइल से कार्ड पर लिखा एक नंबर मिला दिया. दूसरी ओर से किसी ने फोन रिसीव कर के कहा, ‘‘हैलो कौन?’’

‘‘मैं गाजियाबाद से मिथुन सिंह बोल रहा हूं. मुझे बाबा आमिल सूफीजी से बात करनी थी.’’ मिथुन ने कहा.

‘‘देखिए, बाबा तो अभीअभी बाहर से आए हैं. वह 2-3 भक्तों की समस्या का समाधान करने में लगे हैं. मैं रिसैप्शन से बोल रहा हूं. आप की क्या समस्या है, मुझे बता दीजिए.’’ दूसरी तरफ से कहा गया.

मिथुन ने रिसैप्शनिस्ट को बताया कि उस का पत्नी से अकसर झगड़ा होता रहता है, जिस की वजह से घर में अकसर कलह बनी रहती है. वह घर में शांति चाहता है.

‘‘बाबा आप की समस्या का समाधान अवश्य कर देंगे. मैं उन से आप की बात करा दूंगा, पर इस के लिए पहले आप को रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए 251 रुपए आप को बैंक एकाउंट में जमा कराने होंगे.’’ उस व्यक्ति ने कहा.

‘‘अभी तो मैं कहीं जा रहा हूं, आप एकाउंट नंबर दे दीजिए, जब भी समय मिलेगा, मैं पैसे जमा करा दूंगा.’’ मिथुन ने कहा.

मोबाइल पर चल रही बातचीत खत्म होते ही मिथुन के मोबाइल पर एक मैसेज आ गया, जिस में बैंक का खाता नंबर दिया हुआ था. वहां आसपास कोई बैंक भी नहीं था और न ही उस समय उस के पास पैसे जमा करने का समय था, इसलिए ढाबे से ट्रक ले कर आगे बढ़ गया.

मेरठ से लौटने के बाद उस ने उस खाते में 251 रुपए रजिस्ट्रेशन के जमा करा दिए. इस के बाद उस ने तांत्रिक के फोन नंबर पर फोन कर के पैसे जमा कराने की जानकारी दी. तब रिसैप्शन पर बैठे व्यक्ति ने बाबा से बात कराने के लिए 2 घंटे बाद का समय दे दिया.

2 घंटे बाद मिथुन ने बाबा आमिल सूफी को अपने गृहक्लेश की सारी बात बता कर कहा, ‘‘बाबा, काफी दिनों से पत्नी से मेरी बन नहीं रही है.’’

उस की बात सुन कर बाबा ने कहा, ‘‘तुम्हारी इस समस्या का समाधान हो जाएगा, पर इस के लिए पूजा करनी पड़ेगी. उस पूजा में करीब 5200 रुपए का खर्च आएगा.’’

मिथुन को बाबा की बातों पर भरोसा था, इसलिए उस ने पूछा, ‘‘बाबा, पूजा हमारे घर में करेंगे या फिर कहीं और?’’

‘‘हम पूजा अपने यहां ही करेंगे. यहीं से उस का असर हो जाएगा, तुम उसे खुद महसूस करोगे. जितनी जल्दी तुम पैसे भेज दोगे, उतनी जल्दी हम पूजा शुरू कर देंगे.’’ बाबा ने कहा.

‘‘बाबा, मैं पैसे अभी भेज देता हूं. उसी एकाउंट में जमा करा दूं, जिस में पहले जमा कराए थे?’’ मिथुन ने पूछा.

‘‘नहीं, उस में नहीं. तुम खाता नंबर 34241983333 में जमा करा दो.’’ बाबा ने कहा.

मिथुन ने उसी दिन बाबा द्वारा दिए गए एकाउंट नंबर में 5200 रुपए जमा करा दिए और फोन कर के उन्हें बता दिया. पैसे जमा कराने के बाद मिथुन को तसल्ली हो गई कि अब उस के घर के सारे क्लेश दूर हो जाएंगे. पर 15 दिन बाद भी घर के माहौल में कोई फर्क नहीं पड़ा. पत्नी का व्यवहार पहले की तरह ही रहा तो मिथुन ने बाबा आमिल सूफी से इस बारे में बात की.

बाबा आमिल सूफी ने कहा, ‘‘दरअसल, तुम्हारी समस्या बड़ी विकट है. इस का निवारण अब बड़ी पूजा से होगा. एक पूजा और करनी पड़ेगी. उस पूजा का खर्च 5100 रुपए आएगा. तुम्हारे नाम की एक पूजा हो ही चुकी है. यह पूजा और करा लोगे तो जल्द लाभ मिल सकता है.’’

मिथुन और पैसे जमा करने को तैयार हो गया. तब बाबा ने उसे पंजाब नेशनल बैंक का एकाउंट नंबर 4021000100173333 दे कर 5100 रुपए जमा कराने को कहा. मिथुन ने फटाफट रुपए जमा करा दिए.

ये पैसे जमा कराने के महीने भर बाद भी मिथुन के हालात जस के तस रहे. न तो पत्नी के स्वभाव में कोई अंतर आया और न ही उस के घर की कलह दूर हुई. मिथुन ने बाबा से फिर बात की. उस ने कहा कि अभी तक की गई पूजा से घर में कोई फर्क नहीं पड़ा है. पत्नी का स्वभाव आज भी पहले की ही तरह है. चूंकि वह बाबा द्वारा बताए गए खातों में 10 हजार से ज्यादा रुपए जमा कर चुका था, इसलिए उस की बातों में कुछ गुस्सा भी था.

बाबा ने उसे शांति से समझा कर गुस्सा न करने को कहा. बाबा ने उस से कहा कि 4 रातें जागजाग कर उस ने खुद पूजा की है. पूजा का परिणाम कोई इंजेक्शन की तरह तो होता नहीं है, धीरेधीरे होगा. और यदि जल्दी परिणाम चाहते हो तो महाकाल की पूजा करानी होगी. इस में तुम्हारा 5100 रुपए का खर्च और आएगा. आज अमावस्या है. पैसे आज ही जमा करा दोगे तो आज रात ही पूजा शुरू कर दूंगा.

मिथुन सिंह बाबा को 10 हजार रुपए से ज्यादा दे चुका था और फादा उसे रत्ती भर नहीं हुआ था. अगर उसे इस का थोड़ा सा भी लाभ मिल गया होता तो वह फिर से पैसे जमा करने की बात एक बार सोचता. उस ने पैसे जमा न करने की बात तो नहीं कही, पर अभी पास में पैसे न होने का बहाना कर दिया.

मिथुन को लगा कि बाबा आमिल सूफी ने समस्या दूर करने के नाम पर उस से ठगी की है. वह एक बार बाबा से मिल कर यह देखना चाहता था कि वह बाबा है भी या नहीं? इसलिए उस ने फिर से बाबा को फोन किया. तभी बाबा ने उस से 5100 रुपए जमा कराने की बात कही.

‘‘बाबा, मैं आप के दर्शन करना चाहता हूं. पैसे मैं उसी समय नकद दे दूंगा. आप बस अपना पता बता दीजिए.’’ मिथुन ने कहा.

‘‘हम से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि हमारा कोई निश्चित ठिकाना नहीं है. हम इधरउधर आतेजाते रहते हैं. आप का काम जब घर बैठे हो रहा है तो मिलने की क्या जरूरत है?’’ बाबा ने कहा.

‘‘बाबा, आप के दर्शन करने की मेरी अभिलाषा है.’’ मिथुन ने कहा तो बाबा ने फोन काट दिया. इस के बाद उस ने बाबा के नंबर पर कई बार फोन किया, पर बात नहीं हो सकी. बाबा ने शायद उस का नंबर रिजेक्ट लिस्ट में डाल दिया था.

मिथुन ने अगले दिन भी बाबा से बात करने की कोशिश की, लेकिन उस के किसी भी नंबर पर बात नहीं हो सकी. अब उसे पूरा विश्वास हो गया कि उस के साथ ठगी हुई है. उस ने इस बात की शिकायत गाजियाबाद के एसपी से की. मिथुन ने तांत्रिक बाबा आमिल सूफी के जिन मोबाइल नंबरों पर बात की थी, एसपी ने उन नंबरों की जांच सर्विलांस टीम से कराई.

इस जांच में पता चला कि वे फोन नंबर साहिबाबाद थाने के अंतर्गत अर्थला में एक्टिव हैं. लिहाजा मिथुन सिंह की शिकायत पर 15 मई, 2017 को थाना साहिबाबाद में अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 417 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

थानाप्रभारी सुधीर कुमार त्यागी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई, जिस में एसएसआई अखिलेश गौड़, एसआई मनोज कुमार, हैडकांस्टेबल छीतर सिंह, कांस्टेबल मंगत सिंह, पंकज शर्मा, सुनील कुमार, विपिन सिंह, नारायण राय आदि को शामिल किया गया.

तथाकथित तांत्रिक के फोन नंबरों की जांच में उन की लोकेशन अर्थला की मिल रही थी. अर्थला थाने से पूरब दिशा में करीब 3 किलोमीटर दूर था. उसी लोकेशन के सहारे पुलिस ने एक मकान में छापा मारा तो ग्राउंड फ्लोर पर एक औफिस बना मिला, जिस में 8 युवक बैठे थे.

औफिस का जो बौस था, उस की मेज पर 20 मोबाइल फोन रखे थे. पुलिस ने उन युवकों से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि वह तांत्रिक दिलशाद का कालसेंटर था. औफिस की तलाशी में तथाकथित तांत्रिक के तमाम विजिटिंग कार्ड, स्टीकर आदि मिले. इस के अलावा दिलशाद की केबिन से 6 लाख 72 हजार 3 सौ रुपए नकद बरामद हुए.

पुलिस की मौजूदगी में ही वहां रखे मोबाइल फोनों पर कई समस्याग्रस्त लोगों के फोन आए. पुलिस ने फोन रिसीव किए तो फोन करने वाले लोग तांत्रिक से अपनी समस्या का निदान पूछ रहे थे. पुलिस सभी को थाने ले आई.

थाने में उन सभी से पूछताछ की गई तो पता चला कि दिलशाद योजनाबद्ध तरीके से कालसैंटर चला कर उस के जरिए पूरे देश में ठगी का अपना धंधा चला रहा था.

मिथुन से जो 10 हजार रुपए से ज्यादा की ठगी की गई थी, वह दिलशाद और उस के साथियों ने ही की थी. इसी कालसैंटर के जरिए लोगों को बेवकूफ बना कर ये लोग महीने में लगभग 20 लाख रुपए की ठगी कर रहे थे. आखिर एक मामूली सा पढ़ालिखा दिलशाद तथाकथित तांत्रिक कैसे बना और उस ने पूरे देश में अपना नेटवर्क कैसे तैयार किया? इस की एक दिलचस्प कहानी है.

गाजियाबाद के थाना साहिबाबाद के अंतर्गत आती है अर्थला कालोनी. दिलशाद इसी कालोनी के रहने वाली अल्लानूर का बेटा था. वह जूनियर हाईस्कूल से आगे नहीं पढ़ सका तो पिता ने उसे एक दुकान पर लगवा दिया. साल, दो साल नौकरी करने के बाद वह घर बैठ गया.

वह पढ़ालिखा भले ज्यादा नहीं था, लेकिन खूब पैसे कमाने के सपने देखता था, इसलिए उसे दुकान पर काम करना पसंद नहीं आया. दिलशाद के घर बैठने पर उस के पिता को जो पैसे मिलते थे, वे बंद हो गए. इसलिए उन्हें उस का घर बैठना पसंद नहीं आया.

उन्होंने किसी से कह कर उस की नौकरी एक फैक्ट्री में लगवा दी. वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, पर ख्वाब अमीरों के देखता था. वह चाहता था कि उस के पास भी सभी तरह की सुखसुविधाएं हों. इन्हीं ख्वाबों की वजह से फैक्ट्री में भी वह ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका.

फैक्ट्री की नौकरी छोड़ कर वह अपने यारदोस्तों के साथ घूमता रहता. उस का खाली घूमना उस के पिता को अच्छा नहीं लगा. वह बारबार उसे कोई न कोई काम करने को कहते. काम तो दिलशाद भी करना चाहता था, पर उसे उस के मन के मुताबिक काम नहीं मिल रहा था.

उसी दौरान वह अपने एक परिचित के साथ मेरठ चला गया. वह परिचित मेरठ में तथाकथित तांत्रिक बन कर अपना धंधा चला रहा था. दिलशाद उस के औफिस में बैठने लगा. वहां पर दिलशाद का मन लगने लगा. वह बड़े गौर से देखता था कि ग्राहक से कैसे बात की जाती है और किस तरह से उन की जेब से पैसा निकाला जाता है. एकएक कर के सारा काम वह एक साल के अंदर सीख गया.

अब वह खुद का सैंटर चलाना चाहता था, ताकि मोटी कमाई की जा सके. घर लौट कर दिलशाद ने सब से पहले विजिटिंग कार्ड्स छपवाए. विजिटिंग कार्ड में उस ने सभी तरह की समस्याओं का समाधान करने का दावा करते हुए अपने 2 मोबाइल नंबर लिख दिए और खुद को बाबा आमिल सूफी बताया. कार्ड में पता नहीं लिखा था, केवल फोन पर ही समस्या बताने को कहा गया था.

आजकल ज्यादातर लोग किसी न किसी वजह से परेशान हैं. इसी का फायदा यह तथाकथित तांत्रिक उठाते हैं. कुछ ही दिनों में दिलशाद उर्फ बाबा आमिल सूफी के पास लोगों के फोन आने लगे. वह उन लोगों से रजिस्ट्रेशन के 251 रुपए अपने एकाउंट में जमा कराने को कहता. रजिस्ट्रेशन के पैसे जमा कराने के बाद वह पूजा आदि के नाम पर 5100 या ज्यादा रुपए खाते में जमा करा लेता.

जो लोग खाते में पैसे जमा कराते, उन में से कुछ की समस्याएं खुदबखुद कम या खत्म हो जातीं तो वे बाबा का खुद ही प्रचार करते और जिन की समस्या जस की तस रहती, वे उसे दोबारा फोन करते तो दिलशाद उस का फोन नंबर रिजेक्ट लिस्ट में डाल देता.

इस तरह दिलशाद का धंधा चलने लगा तो उस ने बाबा आमिल सूफी, बाबा हुसैनजी, बाबा मिर्जा, बाबा बंगाली आदि कई फरजी नामों से आकर्षक स्टीकर छपवा कर सार्वजनिक स्थानों, ट्रेनों, बसों आदि में चिपकवा दिए. इस का उसे अच्छा रेस्पांस मिलना शुरू हुआ. उस की कमाई बढ़ी तो उस ने अपने भाई इरशाद को भी अपने साथ जोड़ लिया. दिलशाद लोगों को अपनी चिकनीचुपड़ी बातों में फंसा कर उन से मोटी कमाई करने लगा. उसी कमाई से उस ने अर्थला में ही अपना तीनमंजिला आलीशान घर बनवा लिया.

अब दिलशाद इस क्षेत्र का माहिर खिलाड़ी बन चुका था. हिंदी के अलावा उस ने देश की विभिन्न भाषाओं में अपने स्टीकर छपवाने शुरू कर विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवा दिए. इस का नतीजा यह निकला कि उस के पास सैकड़ों फोन आने लगे. इस के बाद दिलशाद अपने गांव के ही रहने वाले शाहरुख, नासिर, आसिफ, नसीरुद्दीन, शाहरुख पुत्र मंसूर और आसिफ को अपने यहां नौकरी पर रख लिया. ये सभी युवक कुछ ही दिनों में इतने ट्रेंड हो गए कि कस्टमर की दुखती रग पर बातों का मरहम लगा कर उस की जेब ढीली करा लेते.

अलगअलग बैंकों में इन्होंने 20 एकाउंट खुलवा रखे थे. जैसे ही कस्टमर पैसा जमा करता, दिलशाद तुरंत ही एटीएम से पैसे निकलवा लेता. चूंकि दिलशाद अखबारों, केबल टीवी आदि पर दिए जाने वाले विज्ञापन पर मोटा पैसा खर्च करता था, इसलिए गोविंदपुरम, गाजियाबाद और नोएडा के रहने वाले जयवीर और शीतला प्रसाद ने दिलशाद से संपर्क किया. ये दोनों विज्ञापन एजेंसी चलाते थे. बातचीत के बाद जयवीर और शीतला प्रसाद ने ही दिलशाद के धंधे के विज्ञापन की जिम्मेदारी ले ली.

दिलशाद की महीने भर में जो भी कमाई होती थी, उस का आधा वह विज्ञापन पर खर्च करता था. दिलशाद के कालसैंटर में काम करने वाले सभी लोग दिन भर व्यस्त रहते थे. रोजाना ही उस के कालसैंटर में करीब एक हजार फोन आते थे, जिन से उसे लगभग 20 लाख रुपए की आमदनी होती थी. इस में से 10 लाख रुपए वह विज्ञापन पर खर्च करता था. इस तरह उस का धंधा दिनोंदिन फलफूल रहा था. मिथुन सिंह की तरह ज्यादा घरों में लोग किसी न किसी वजह से परेशान रहते हैं, ऐसे ही लोग तथाकथित तांत्रिकों के चक्कर में फंसते हैं.

दिलशाद और उस के 7 साथियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गाजियाबाद के गोविंदपुरम से जयवीर और सैक्टर-25 नोएडा से शीतला प्रसाद को भी गिरफ्तार कर लिया था. सभी 10 अभियुक्तों से व्यापक पूछताछ के बाद 18 जुलाई, 2017 को उन्हें गाजियाबाद के सीजेएम की अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया.  मामले की आगे की विवेचना एसआई मनोज बालियान को सौंप दी गई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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