Father’s Day Special-पापा के लिए: सौतेली बेटी का त्याग

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YRKKH: सुरेखा करेंगी बड़ा तमाशा, अक्षरा देंगी करारा जवाब

इन दिनों ये रिश्ता क्या कहलाता है है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai)  में जबरदस्त ट्विस्ट देखने को मिल रहे है जिसकी वजह से शो की टीआरपी लिस्ट में चल रहा है शो में हर दिन नए मोड आ रहे है जो कि शो को ओर बेहतर बना रहे है जिसकी वजह से दर्शक शो देखने के लिए ओर एक्साइटेड हो रहे है. अबतक शो में दिखाया गया है कि मुस्कान से शादी की अगूंठी खो जाती है जिसका पता सुरेखा को पता चलेगा. जिसके बाद सुरेखा बड़ा तमाशा करती हुई दिखाई देंगी. हालांकि इसका जवाब अक्षरा देती हुई दिखाई देंगी.

 

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आपको बता दें, कि टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता के अपकमिंग एपिसोड में देखने के लिए मिलेगा कि सुरेखा घरवालों के सामने मुस्कान से सगाई की अंगूठी मांग लेगी और कहेगी कि उसे मैं थाली में सजा देती हूं. अभिनव अलग-अलग वजह बनाकर ये बात टालने की कोशिश करता है, लेकिन सुरेखा इस बात को छोड़ती नहीं है. इसी वजह से मुस्कान अचानक से बोल देती है कि उसने अंगूठी घूमा दी। ये बात सुनते ही सब लोग हैरान रह जाते हैं और सुरेखा उसे खरी-खोटी सुनाती है.

सीरियल में आगे देखने के लिए मिलेगा कि सुरेखा मुस्कान से बार-बार कहती है, ‘तुम इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकती हो, जो लड़की सगाई की अंगूठी नहीं संभाल सकती वह घर कैसे संभालेगी।’ इस दौरान सुरेखा अंगूठी चोरी की बात भी कह देती है। ये बातें जब अक्षरा सुनती हैं तो भड़क जाती है और सुरेखा को बताती है, ‘बेशक मेरे ससुरालवालों के पास हीरे नहीं है, लेकिन उनका दिल हीरे का ही है।’ इस पूरी बहस में अभिमन्यु आगे आता है और अक्षरा को खोई हुई अंगूठी लौटा देता है. बता दें कि अंगूठी रूही और अबीर के पास होती है.

ये रिश्ता क्या कहलाता है में आगे देखने के लिए मिलेगा कि इस पूरे तमाशे के बाद सब लोग अपने काम में लग जाते हैं और मंजरी अबीर के साथ खेलने लगती है. इसी दौरान शादी में आए कुछ लोग अबीर को शर्माजी का बेटा कहते हैं, जो मंजरी को पसंद नहीं आता. वहीं, सगाई के फंक्शन में भी अबीर को जूनियर शर्मा कहा जाता है. इस वजह से मंजरी भड़क जाती है और सबको बताने वाली होती है कि अबीर शर्मा नहीं बीरला है. हालांकि, अक्षरा बीच में आकर मंजरी को रोक देती है.

उर्फी जावेद ने पिज्जा को बना डाला आउटफिट, फैंस दे रहे है जबरदस्त रिएक्शन

अपने बोल्ड और यूनिक आउटफिट के लिए जानी जाने वाली एक्ट्रेस एक बार फिर चर्चा में है, उर्फी जावेद कभी कूड़ा-कचरा से अपना आउटफिट बना देती है तो कभी खाने-पीने की चीजों से ड्रेस बना लेती है अब हाल ही में उर्फी जावेद ने पिज्जा को अपनी ड्रेस बना लीं, जिसे देख लोग सकते में है और तरह-तरह के कमेंट कर रहे है.

 

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आपको बता दें, कि उर्फी जावेद ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है जिसमें उनके आउटफिट में पिज्जा लटके हुए नजर आ रह है वहीं वीडियो में उर्फी जावेद पिज्जा खाती हुई भी नजर आ रही है. दरअसल उर्फी ने पिज्जा से बना ब्रालेट पहना हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने ब्लैक कलर के शॉर्ट्स और साथ ही जालीदार पैंट पहनी हुई है. इस आउटफिट के साथ उर्फी ने अपने बालों का बन बनाया हुआ है. इसके साथ ही रेड लिपस्टिक उनके लुक को कंप्लीट कर रही है. इस आउटफिट में उर्फी बेहद ही बोल्ड लग रही हैं. उर्फी जावेद के इन फोटोज पर फैंस खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

 

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उर्फी जावेद के इस वीडियो पर लोग जबरदस्त रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “ये नकली पिज्जा है, असली होता तो टूट जाता अब तक.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “जब जब पिज्जा दिखेगा उर्फी का नाम याद आएगा.” तो वहीं एक और यूजर ने उर्फी जावेद को ट्रोल करते हुए लिखा, “पिज्जा ऑडर कर रही थी और ये देख लिया, अब नहीं खा पाऊंगी.”सोशल मीडिया सेंसेशन के इस वीडियो को अब तक इंस्टाग्राम पर 50 हजार से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं.

जब देखें लड़का तो कुछ बातें ध्यान में रखें

अब वह जमाना नहीं रहा जब युवकयुवती देखने जा कर अपनी पसंदनापसंद बताता था. बदलते दौर में अब न सिर्फ युवक बल्कि युवती भी लड़का देखने जाती है और दस तरह की बातें पौइंट आउट करती है जैसे वह दिखने में कैसा है? उस का वे औफ टौकिंग कैसा है? बौडी फिजिक बोल्ड है या नहीं ममाज बौय तो नहीं है? वगैरावगैरा.

आज बराबर की हिस्सेदारी के कारण युवतियां किसी चीज से समझौता करना पसंद नहीं करतीं. यह ठीक भी है कि जिस के साथ ताउम्र रहना है उस के बारे में जितना हो सके जान लेना चाहिए ताकि आगे किसी तरह का कोई डाउट न रहे.

ऐसे में आप जब लड़का देखने जाएं तो कुछ बातें ध्यान में रखें और खुद भी ऐसा कुछ न करें जो आप की नैगेटिव पर्सनैलिटी को दर्शाए.

  • जब भी आप युवक से पहली बार मिलें तो उस की बौडी लैंग्वेज पर खास ध्यान दें. इस से आप को उस की आधी पर्सनैलिटी का तो ऐसे ही अंदाजा हो जाएगा. बात करते हुए देख लें कि कहीं वह बात करने से ज्यादा अपने हाथपैर तो नहीं हिला रहा. बात करते हुए फेस पर अजीब से रिऐक्शन तो नहीं आ रहे. इस से आप को उसे जज करने में काफी आसानी होगी.
  •  बात करते समय इस बात पर गौर फरमाएं कि कहीं वह तू से बात करना तो शुरू नहीं करता कि यार, मुझे तो बिलकुल तेरे जैसी लड़की चाहिए, तू तो आज बहुत क्यूट लग रही है. अगर ऐसा कहे तो समझ जाएं कि वह आप के लायक युवक नहीं है, क्योंकि जो पहली बातचीत में ही तू तड़ाक पर आ जाए उस से भविष्य में रिस्पैक्ट की उम्मीद नहीं की जा सकती.
  • भले ही उस युवक का सैलरी पैकेज काफी अच्छा हो, लेकिन इस का यह मतलब तो नहीं कि उस की हर बात में सैलरी का ही जिक्र हो. जैसे अगर हम दोनों की शादी हो गई तो तुम ऐश करोगी, तुम्हें ब्रैंडेड चीजें यूज करने का मौका मिलेगा, क्योंकि मैं औफिस के काम से विदेश भी जाता रहता हूं. इस से आप को अंदाजा हो जाएगा कि उसे अपनी सैलरी पर घमंड है.
  • युवक को जानने के साथसाथ आप उस की फैमिली को भी एकनजर में जानने की कोशिश करें. आप को उन की बातचीत के तरीके से पता लग जाएगा कि वे कैसे विचारों के लोग हैं. लड़की को जौब करवाने के फेवर में हैं या नहीं. घर में लड़की से ज्यादा लड़के को तो महत्त्व नहीं देते. इन सारी बातों का पता होने पर आप को डिसीजन लेने में काफी आसानी होगी.
  • बातोंबातों में कहीं दहेज की ओर तो इशारा नहीं है. जैसे हमारी बड़ी बहू तो शादी में हर चीज लाई थी, हमारा लड़का तो 15 लाख रुपए सालाना कमाता है, हमारे यहां तो रिश्तेदारों का शादी में खास खातिरदारी का रिवाज है. आप को जो देना है अपनी लड़की को देना है, हमें कुछ नहीं चाहिए जैसी बातें अगर मीटिंग में की जा रही हैं तो समझ जाएं कि उन्हें लड़की से ज्यादा दहेज में इंट्रस्ट है.
  • आप की फैमिली लड़की को आप से बात करने के लिए कह रही है और वह इस के लिए मम्मी से परमिशन ले कर खुद को ममाज बौय दिखाने की कोशिश करे तो समझ जाएं कि लड़के की खुद की कोई पर्सनैलिटी नहीं है और वह हर बात के लिए मम्मी पर डिपैंड रहता है.
  • अगर थोड़ी सी सीरियस बात के बाद वह सीधा कपड़ों पर आ जाए जैसे मुझे तो सूट वगैरा बिलकुल पसंद नहीं हैं. मैं तो चाहता हूं कि मेरी लाइफ पार्टनर हमेशा हौट ड्रैसेज पहने, इस से आप को यह समझने में आसानी होगी कि उसे आप से ज्यादा छोटे कपड़ों में इंट्रस्ट है, जो हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए सही नहीं है.
  • कहीं ऐसा तो नहीं कि फर्स्ट मीटिंग में ही युवक आप से फ्यूचर प्लानिंग के बारे में बात करना शुरू कर दे कि हम तो शादी के बाद अकेले रहेंगे, इस तरह चीजों को मैनेज करेंगे, मुझे तो लड़के बहुत पसंद हैं इस से आप को उस की मैच्योरिटी के बारे में पता चल जाएगा.
  • जरूरी नहीं कि जब हम इस तरह की मीटिंग के लिए कहीं बाहर जाएं तो हमेशा लड़की वाले ही बिल पे करें. भले ही आप के पेरैंट्स उन्हें बिल पे न करने दें, लेकिन फिर भी यह बात जानने के लिए थोड़ी देर तक बिल पे न करें. अगर वह एक बार भी बिल पे करने का जिक्र न करे तो समझ जाएं कि वह सिर्फ फ्री में खानेपीने वाले सिद्धांत पर चलने वाला है.
  • भले ही आप काफी स्मार्ट हों, लेकिन इस का यह मतलब नहीं कि आप लड़के के गुणों को देखने के बजाय उस की स्मार्टनैस के बेस पर ही उसे पौइंट्स दें. एक बात मान कर चलें कि स्मार्टनैस थोड़े दिन ही अच्छी लगती है उस के बाद तो व्यक्ति के गुणों के बल पर ही जिंदगी चलती है. इसलिए आउटर के साथसाथ इनर पर्सनैलिटी को भी ध्यान में रखें.
  • हमारे घर में यह होता है, हम ऐसे रहते हैं, हम यह नहीं खाते, मौल्स के अलावा हम कहीं और से शौपिंग नहीं करते. भले ही आप का लिविंग स्टैंडर्ड काफी हाई हो, लेकिन अगर आप इस तरह की बातें लड़के से करेंगी तो वह चाहे आप कितनी भी सुंदर क्यों न हों, आप से शादी नहीं करेगा.
  • माना कि युवतियों को शौपिंग का शौक होता है, लेकिन इस का मतलब यह तो नहीं कि आप युवक से 20 मिनट में 15 मिनट शौपिंग को ले कर ही बात करें. जैसे मैं हफ्ते में जब तक एक बार शौपिंग नहीं कर लेती तब तक मुझे चैन नहीं आता, क्या तुम्हें शौपिंग पसंद है? अगर हमारी शादी हो गई तो क्या तुम मेरे साथ हर वीकैंड पर शौपिंग पर चला करोगे? ऐसी बातों से सिर्फ यही शो होगा कि आप को मैरिज से ज्यादा शौपिंग में इंट्रस्ट है जो आप की नैगेटिव पर्सनैलिटी को शो करेगा.

  • आज सोशल मीडिया का जमाना है, लेकिन इस का यह मतलब नहीं कि हर जगह सोशल मीडिया ही हावी हो. ऐसे में जब आप लड़के से बात कर रही हैं तो यह न पूछ बैठें कि आप सोशल साइट्स पर ऐक्टिव हैं कि नहीं. अगर हैं तो अपनी आईडी दीजिए ताकि मैं अपनी फ्रैंडलिस्ट में आप को ऐड कर सकूं. इस से लड़के तक यही मैसेज जाएगा कि आप सोशल मीडिया को ले कर कितनी क्रेजी हैं तभी इतनी सीरियस टौक में आप सोशल मीडिया को ले आई हैं.
  • जब भी आप लड़के से मिलने जाएं तो उस का बायोडाटा अच्छी तरह पढ़ लें कि वह कहां जौब करता है, इस से पहले उस ने किनकिन कंपनियों में जौब की है, उस की फैमिली में कितने मैंबर्स हैं और कौन क्या करता है. यहां तक कि उस की कंपनी व पद के बारे में भी जानकारी रखें. इस से जब वह अपनी कंपनी के बारे में बता रहा होगा तो आप की तरफ से भी अच्छा फीडबैक मिल पाएगा.पहली मुलाकात में ही आप उस से अपना नंबर शेयर न करें, क्योंकि आप को क्या पता कि बात बनेगी या नहीं. इसलिए इस बात को अपने
  • पेरैंट्स पर छोड़ दें, क्योंकि अगर आप का रिश्ता बना तो पेरैंट्स खुद ही आप को नंबर दिलवा देंगे ताकि आप को एक दूसरे को जानने का मौका मिल सके.
  • अगर बड़े किसी टौपिक पर बात कर रहे हैं कि जैसे हम शादी तो अपने होम टाउन से ही करेंगे तो ऐसे में आप बीच में टांग न अड़ाने लगें कि नहीं आंटी ऐसा नहीं होगा. आप के इस व्यवहार से आप की बदतमीजी ही शो होगी इसलिए जब तक जरूरी न हो तब तक बीच में न बोलें.
  • अगर आप को लड़के की कोई बात पसंद नहीं आ रही तो एकदम से गुस्से में न आ जाएं बल्कि शांत तरीके से अपनी बात रखें, इस से उस पर आप का अच्छा प्रभाव पड़ेगा और उसे लगेगा कि आप चीजों को अच्छे से ऐडजस्ट करना जानती हैं.

इस तरह आप को अपने लाइफ पार्टनर के सिलैक्शन में आसानी होगी.

मेरे मोहल्ले के एक दबंग ने मुझे धमकी दी है कि मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना छोड़ दूं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 22 साल की एक गरीब परिवार की लड़की हूं और अपने महल्ले के बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर परिवार की माली मदद करती हूं.

चूंकि मैं मेधावी छात्रा रही हूं, इसलिए मेरे पास कई बच्चे ट्यूशन पढ़ने के लिए आते हैं. इस से पास के ही एक ट्यूशन सैंटर, जो किसी दबंग का है, ने मुझे धमकी दी है कि मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना छोड़ दूं. इस धमकी से मेरे परिवार वाले डर गए हैं, पर मैं पैसा कमाने का यह मौका नहीं छोड़ना चाहती हूं. मैं क्या करूं?

जवाब-

आप उस दबंग शख्स से आसानी से नहीं निबट पाएंगी, क्योंकि आप की वजह से उस का धंधा मारा जा रहा है. इस के लिए आप को आसपास के लोगों का समर्थन जुटाना होगा और धमकी देने पर उस की रिपोर्ट भी पुलिस में दर्ज करानी होगी.

आप मेधावी हैं और अब हिम्मती भी बनिए. फिल्म ‘सुपर थर्टी’ तो आप ने देखी ही होगी. उस में भी कोचिंग माफिया की चालबाजियां बताई गई हैं. आनंद कुमार की तर्ज पर डटी रहिए. जिन बच्चों को आप पढ़ाती हैं, उन के मांबाप को सारी बातें बता कर उन से मदद मांगें. आज डर कर आप ट्यूशन पढ़ाना बंद कर देंगी, तो ऐसे गुंडों को शह ही मिलेगी.

इन 12 लक्षणों से रहें सतर्क, हो सकता है HIV

भारत की बात करें तो यहां एड्स के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. यहां सबसे ज्‍यादा एचआईवी एड्स के केस (13107) महाराष्‍ट्र में दर्ज हुए हैं. वहीं दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश है.

अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो संख्‍या लगातार बढ़ रही है. 2009-10 में 246,627 केस पूरे देश में आये, जबकि 2010-11 में यह संख्‍या बढ़कर 320,114 रही.

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सही तरीके से देखभाल न करने की दशा में यह बीमारी बढ़कर एड्स का रूप धारण कर लेती है. एक सर्वे के अनुसार, एच आई वी के शुरूआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्‍यक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है. इसीलिए आपको एच आई वी के शुरूआती 12 लक्षणों के बारे में पता होना जरूरी है.

बार-बार बुखार आना: हर दो तीन दिन में बुखार महसूस होना और कई बार तेजी से बुखार आना, एच आई वी का सबसे पहला लक्षण होता है.

थकान होना: पिछले कुछ दिनों से पहले से ज्‍यादा थकान होना या हर समय थकावट महसूस करना एच आई वी का शुरूआती लक्षण होता है.

मांसपेशियों में खिचावं: आपने किसी प्रकार का भी भारी काम नहीं किया या फिर आप शारीरिक मेहनत का कोई काम नहीं करते , फिर भी मांसपेशियों में हमेशा तनाव और अकड़न रहती है. यह भी एच आई वी का लक्षण होता है.

जोड़ों में दर्द व सूजन: ढ़लती उम्र से पहले ही अगर आपके जोड़ों में दर्द और सूजन हो जाती है तो आपको एच आई वी टेस्‍ट करवाने की जरूरत है.

गला पकना: अक्‍सर कम पानी पीने की वजह से गला पकने की शिकायत होती है लेकिन अगर आप पानी पर्याप्‍त मात्रा में पीते हैं और फिर भी आपके गले में भयंकर खराश और पकन महसूस हो, तो यह लक्षण अच्‍छा नहीं.

सिर में दर्द: सिर में हर समय हल्‍का – हल्‍का दर्द रहना, सुबह के समय दर्द में आराम और दिन के बढ़ने के साथ दर्द में भी बढ़ोत्‍तरी एच आई वी का सबसे बड़ा लक्षण है.

धीरे-धीरे वजन का कम होना: एच आई वी में मरीज का वजन एकदम से नहीं घटता है. हर दिन धीरे – धीरे बॉडी के सिस्‍टम पर प्रभाव पड़ता है और वजन में कमी होती है. अगर पिछले दो महीनों में बिना प्रयास के आपके वजन में गिरावट आई है तो चेक करवा लें.

स्‍कीन पर रेशैज होना: शरीर में हल्‍के लाल रंग के चक्‍त्‍ते पड़ना या रेशैज होना भी एच आई वी का लक्षण है.

बिना वजह के तनाव होना: आपके पास कोई प्रॉब्‍लम नहीं है लेकिन फिर भी आपको तनाव हो जाता है, बात-बात पर रोना आ जाता है तो नि:संदेह आपको एच आई वी की जांच करवाना जरूरी है.

मतली आना: हर समय मतली आना या फिर खाना खाने के तुरंत बाद उल्‍टी होना भी शरीर में एच आई वी के वायरस का होना इंडीकेट करते हैं.

हमेशा जुकाम रहना: मौसम आपके बेहद अनुकूल है लेकिन उस हालत में भी नाक बहती रहती है. हर समय छींक आती है और रूमाल का साथ हमेशा चाहिए होता है.

ड्राई कफ: आपको भयंकर खांसी नहीं हुई थी लेकिन हमेशा कफ आता रहता है. कफ में कोई ब्‍लड़ नहीं आता. मुंह का जायका खराब रहता है. अगर आपको इनमें से अधिकाशत: लक्षण अपने शरीर में लगते हैं तो आप एच आई वी टेस्‍ट जरूर करवाएं.

तंत्र मंत्र के नाम पर मासूमों की बलि

पंजाब के बठिंडा जिले के कोटफत्ता का एक इलाका है वड्डा खूह (बड़ा कुआं) यहीं के वार्ड नंबर- 3 के एक घर में 8 मार्च, 2017 को शाम करीब 5 बजे बड़ा ही भयावह और दिल दहला देने वाला मंजर था. मंजर भी ऐसा, जिसे देख कर पत्थरदिल इंसान की भी आत्मा कांप उठे. घर के एक कमरे का दृश्य बड़ा ही रहस्यमय और डरावना था. उस समय उस कमरे में कई लोग थे, उन के अलावा वहां पर 2 मासूम बच्चे भी बैठे थे. कमरे के बीचोंबीच एक धूना (हवनकुंड) था, जिस में आग जल रही थी. कमरे के दरवाजे और खिड़कियां सब बंद थे.

एक अधेड़ औरत जिस की उम्र करीब 55 साल थी, वह हवनकुंड के पास की एक गद्दी पर बैठी थी. वह शायद अंदर बैठे लोगों की मुखिया थी. वह औरत अपने सिर को इधरउधर झुलाते हुए जोरजोर से कोई मंत्र पढ़ कर उस हवनकुंड में सामग्री डाल रही थी. वहां मौजूद अन्य लोग भी उस का अनुसरण करते हुए मंत्रों के साथ धूने में हवन सामग्री डाल रहे थे. इस क्रिया के बीचबीच में वह औरत जोरजोर से ऊपर की ओर देखते हुए अट्टहास करने लगती.

उस के पास बैठा लगभग 30 वर्षीय पुरुष भी अपनी गरदन ऊंची कर के अपने मुंह से जोरजोर से सांप के फुफकारने जैसी शू..शू.. की आवाज निकालता.

धूनी में एक चिमटा रखा हुआ था जो आग से काफी गरम हो गया था. वह अधेड़ उम्र की महिला इस क्रिया के बीचबीच में उस गरम चिमटे से वहां बैठे 2 मासूम बच्चों को मारने लगती थी. उन दोनों बच्चों में एक की उम्र 5 साल और दूसरे की करीब 2 साल थी. गरम चिमटा लगते ही दोनों बच्चे पीड़ा से बिलबिला उठते थे.

दोनों बच्चों की पीड़ा पर वह औरत दुखी होने के बजाय खुश होती. वहां जो और लोग बैठे थे, वे जोश के साथ तांत्रिक क्रिया पूरी करने में लगे हुए थे इसलिए बच्चों के चिल्लाने की तरफ उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया.

वे लोग आगे क्या करने वाले थे, यह कहना मुश्किल था लेकिन उन के चेहरे के भाव और उन के क्रियाकलाप देख कर इतना अनुमान तो लगाया जा सकता था कि उन के इरादे नेक नहीं थे.

खिड़की की झिर्री से यह भयानक दृश्य देख कर 65 वर्षीय मुख्तियार सिंह की आत्मा सिहर उठी. कुछ देर तक वह खिड़की के पास गुमसुम सा खड़ा सोचता रहा कि उसे क्या करना चाहिए. 2 मासूम बच्चों की जिंदगी का सवाल था.

आखिर उस ने जोरजोर से कमरे का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया. काफी देर दरवाजा पीटने पर भी कमरे में बैठे लोग अपनीअपनी जगह से नहीं हिले तो उस ने अपनी बहू रोजी के कमरे की ओर देखा. पर उस के कमरे पर ताला लगा हुआ था.

मुख्तियार रोजी के बंद कमरे की खिड़की के पास गया तो उसे कमरे में रोजी बैठी दिखाई दी. रोजी उस के बेटे की पत्नी थी. वह उस से बोला, ‘‘तुम्हें यहां किस ने बंद किया है? ताले की चाबी कहां है?’’

‘‘मैं कमरे में लेटी थी तो पता नहीं कौन बंद कर के चला गया. बच्चे भी पता नहीं कहां हैं. उन के रोने और चीखने की आवाजें आ रही हैं. पता नहीं वे क्यों रो रहे हैं.’’ कहते हुए उस की आंखों में आंसू छलक आए.

रोजी को पता था कि उस की सास निर्मल कौर व परिवार के अन्य लोग उस के दोनों बच्चों के साथ 2 दिन से तांत्रिक क्रियाएं कर रहे थे. उसे डर था कि वे लोग कहीं आज भी बच्चों पर तांत्रिक क्रियाएं तो नहीं कर रहे.

दरअसल, जिस बंद कमरे में यह तांत्रिक अनुष्ठान हो रहा था, उस कमरे में रोजी की सास निर्मल कौर, पति कुलविंदर सिंह, देवर जसप्रीत, ननद गगन कौर तथा बठिंडा के ही गांव दयोन से 3-4 तांत्रिक आए हुए थे जोकि निर्मल कौर की तांत्रिक क्रियाएं संपन्न करवाने में मदद कर रहे थे.

निर्मल कौर पिछले 5-6 सालों से अपने घर पर तंत्रमंत्र द्वारा समस्याओं का समाधान करने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रही थी. गांव के अंधविश्वासी और भोलेभाले लोगों के अलावा शहर के पढ़ेलिखे लोग भी उस के पास आया करते थे. निर्मल कौर से पहले उस का पति मुख्तियार सिंह यह काम करता था. वैसे मुख्तियार सिंह बठिंडा की फौजी छावनी में नौकरी करता था.

लगभग 4-5 साल पहले वह अपने घर पर ही तंत्रमंत्र की क्रियाएं करता था. धीरेधीरे लोग अपनी समस्याएं ले कर उस के पास आने लगे. उन में से कुछ को फायदा हुआ तो वे उसे प्रसाद के लिए पैसे देने लगे थे. उन पैसों से उस के घर की कुछ जरूरतें पूरी हो जाया करती थीं.

पता नहीं मुख्तियार सिंह को क्या सूझी कि उस ने झाड़फूंक सब बंद कर दिया. इस के बाद उस की पत्नी निर्मल कौर ने उस की गद्दी संभाल कर झाड़फूंक करना शुरू कर दिया. वह बाकायदा व्यापारिक तरीके से काम करने लगी.

निर्मल कौर को 2 साल में ही बहुत अच्छा तजुर्बा हो गया. इस के बाद उस ने यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि उस की आत्मा परमात्मा से मिल कर एकाकार हो गई है. अब उस ने खुद को देवी घोषित कर दिया था.

निर्मल कौर अपने बड़े बेटे कुलविंदर सिंह उर्फ विक्की को भी अपने साथ रखती थी. वह भी मां के साथ अलग गद्दी पर बैठने लगा था. एक साल बाद उस ने खुद के बारे में यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि पूजापाठ से खुश हो कर भगवान विष्णु ने उसे अपने शेषनाग की आत्मा दे दी है.

अंधविश्वासी लोगों की वजह से मांबेटे का धंधा खूब फलफूल रहा था. जबकि वास्तविकता यह थी कि उन के पास न तो कोई सिद्धि थी और न ही उन्हें किसी तंत्रमंत्र के कखग का पता था.

बठिंडा के रहने वाले मल्ल सिंह बेहद गरीब इंसान थे. उन के 7 बेटे थे. जैसेतैसे मजदूरी कर के वह अपने परिवार को पाल रहे थे. गरीबी की वजह से वह बच्चों को पढ़ालिखा नहीं सके पर समय के साथ जैसेजैसे बच्चे बड़े होते गए, वह उन से भी मजदूरी कराने लगे. वह 2-3 बेटों की शादी कर पाए थे कि उन की मृत्यु हो गई. बाकी की शादी बाद में हो गई थी. उन का सब से बड़ा बेटा लाभ सिंह था और छोटा मुख्तियार सिंह. मुख्तियार की उम्र इस समय करीब 65 साल है.

लाभ सिंह और मुख्तियार सिंह दोनों के मकान सटे हुए थे. मुख्तियार के परिवार में पत्नी निर्मल कौर के अलावा 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. बड़े बेटे कुलविंदर उर्फ विक्की की शादी रोजी से हो गई थी. बाद में रोजी 2 बच्चों की मां बनी, जिस में 5 साल का बेटा रंजीत सिंह और 3 साल की बेटी अनामिका थी.

मुख्तियार सीधासादा आदमी था, इसलिए घर को निर्मल कौर ही संभाले हुए थी. उस ने अपनी दोनों बेटियों गगन कौर और अमन कौर की भी शादी कर दी थी. निर्मल कौर एक जिद्दी और दबंग प्रवृत्ति की महिला थी. दूसरे जब वह गद्दी पर बैठती तो खुद को देवी ही समझती थी, इसलिए लोग उसे बहुत सम्मान देते थे. निर्मल कौर का जेठ जोकि उस के एकदम बराबर में ही रहता था, वह निर्मल के क्रियाकलापों को ढोंग मानता था. इसी वजह से वह उस से कोई खास वास्ता नहीं रखता था.

निर्मल कौर की छोटी बहन प्रेमलता लुधियाना में दर्शन सिंह के साथ ब्याही थी. पिछले साल से वह लगातार बीमार चल रही थी. उस ने पीजीआई चंडीगढ़ में भी अपना इलाज करवाया था पर कोई फायदा नहीं हुआ था. डाक्टरों ने बताया था कि उसे कोई बीमारी नहीं है. वह एकदम फिट है. जबकि प्रेमलता का कहना था कि वह बीमार है.

दूसरे निर्मल कौर की बेटी गगन कौर शादी के 6 साल बाद भी मां नहीं बन सकी थी. डाक्टरों ने उस की व उस के पति की कई जांच करने के बाद पाया कि गगन और उसके पति शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं. स्वस्थ होने के बावजूद उन के आंगन में बच्चे की किलकारी नहीं गूंज रही थी.

तमाम लोग गगन की मां निर्मल कौर के पास अपनी समस्याएं ले कर आते थे. वे उसे देवी समझते थे. निर्मल कौर अपनी बहन और बेटी की समस्या भी दूर करना चाहती थी. एक दिन अपनी गद्दी पर बैठ कर निर्मल कुछ देर के लिए ध्यानमग्न हो गई.

कमरे में बहन प्रेमलता और बेटी गगन कौर बैठी थीं. कुछ देर बाद निर्मल ने अपनी आंखें खोल कर बताया, ‘‘मुझे सब साफसाफ दिखाई दे रहा है कि तुम्हारी दोनों की समस्या कैसे पैदा हुई और वह कैसे दूर होगी.’’

इतना सुनते ही गगन कौर और प्रेमलता उसे गौर से देखते हुए बोलीं, ‘‘अब क्या करना होगा बाबाजी?’’

जिस समय निर्मल कौर अपनी गद्दी पर बैठी होती थी, उस समय सभी उसे बाबाजी कह कर संबोधित करते थे. वह बोली, ‘‘बच्चा, तुम्हें कुछ नहीं करना है. अगले हफ्ते से हम खुद सभी काम संपूर्ण करेंगे. इस एक हफ्ते में हम पूरा इंतजाम कर लेंगे. दोनों के जीवन में खुशियां ही खुशियां होंगी. उस ने गगन कौर से भी कहा कि उस के 5 बेटे होंगे.’’

अगले दिन निर्मला अपने बेटे कुलविंदर को साथ ले कर हरियाणा के सिरसा जिले के गांव कालांवाली मंडी चली गई. वहां पर एक तथाकथित तांत्रिक लखविंदर सिंह उर्फ लक्की बाबा रहता था. पूरे दिन निर्मल कौर और लक्की बाबा की आपस में मंत्रणा चलती रही.

अगले दिन लक्की बाबा निर्मल कौर के घर आ गया. लक्की बाबा, निर्मल कौर और कुलविंदर उर्फ विक्की दिन भर गद्दी वाले कमरे में बैठ कर न जाने क्या पूजापाठ करते थे. यह बात 2 मार्च, 2017 की है.

पूजापाठ समाप्त कर के शाम को लक्की बाबा अपने गांव चला गया. इस के 2 दिन बाद निर्मल कौर ने पास के गांव दयोन से 4 अन्य तथाकथित तांत्रिकों को अपने घर बुलवाया और 2 दिनों तक उन के साथ पूजापाठ करती रही. सभी पूजापाठ की क्रियाओं में केवल निर्मल का बेटा कुलविंदर ही शामिल होता था. उस के अलावा घर के किसी अन्य सदस्य को गद्दी वाले कमरे में जाने की इजाजत नहीं थी.

6 मार्च को निर्मल ने अपनी बहन प्रेमलता और बेटी गगन को भी बुलवा लिया था. अगले दिन उस ने प्रेमलता को कुछ समझा कर वापस उस की ससुराल लुधियाना भेज दिया. जबकि गगन कौर अपनी मां के पास ही रुक गई थी.

इन सब से पहले 5 मार्च को निर्मल ने अपने दोनों पोतेपोती को अपने कमरे में कैद कर लिया था. पूजापाठ के दौरान ये लोग सभी बच्चों की झाड़फूंक करते और उत्तेजित हो कर कभी उन्हें थप्पड़ मारते, कभी बाल नोचते तो कभी चिमटे मारते थे. बच्चे जोरजोर से चीखते चिल्लाते थे.

निर्मल कौर के पड़ोसियों सहित बच्चों की मां रोजी भी जानती थी कि बंद कमरे में झाड़फूंक के नाम पर बच्चों के साथ अत्याचार हो रहा है पर किसी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि कोई इस अत्याचार को रोक सके. बड़ी बात तो यह थी कि खुद बच्चों का पिता कुलविंदर सिंह भी इस अत्याचार में शामिल था. यहां तक कि बच्चों के चाचा जसप्रीत, बुआ गगन कौर, अमन कौर और दादा मुख्तियार सिंह भी अच्छी तरह जानते थे कि बंद कमरे में दोनों मासूमों पर कैसेकैसे अत्याचार हो रहे हैं. लेकिन वे कुछ नहीं कर सकते थे.

8 मार्च को मुख्तियार सिंह ने जब खिड़की की झिर्री से कमरे के भीतर का दृश्य देखा तो उस की अंतरात्मा कांप उठी. हिम्मत कर के वह अपने बडे़ भाई लाभ सिंह के पास पहुंचा और उसे सारी बातें विस्तार से सुनाते हुए कहा, ‘‘वीरजी, मेरे को ऐसा लगता है कि कमरे में बैठे सभी लोग कोई नशा किए हुए हैं. उन के होशहवास कायम नहीं हैं. मैं तो दरवाजा बजाबजा कर हार गया हूं.’’

मुख्तियार सिंह और लाभ सिंह घर के बाहर खड़े आपस में बातें कर ही रहे थे कि तभी वहां कुछ पड़ोसी और गांव वाले भी जमा हो गए. अब उस बंद कमरे से दोनों बच्चों के चीखने की तेजतेज आवाजें आनी शुरू हो गई थीं. तभी लाभ सिंह व गांव के कुछ लोग उस बंद कमरे की ओर दौड़े.

जोर से धक्के मारमार कर उन्होंने खिड़की का एक पल्ला खोल लिया था. जब उन्होंने खिड़की से भीतर देखा तो उन के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई और सांसें जहां की तहां रुक सी गईं. अंदर का दृश्य दिल को दहला देने वाला था.

सब ने देखा कि मंत्रोच्चारण करते हुए निर्मल कौर और कुलविंदर सिंह दोनों बच्चों को गर्म चिमटे से बुरी तरह पीट रहे थे. अपने बचाव में दोनों बच्चे कमरे में इधरउधर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बारबार नीचे गिर पड़ते थे. अचानक मंत्र पढ़ते हुए निर्मल ने एक मुट्ठी सामग्री भर कर धूने में जोर से फेंकते हुए ‘फट्ट स्वाहा’ कहा और साथ ही बच्चों की ओर अपनी अंगुली उठा दी.

निर्मल कौर का संकेत मिलते ही कुलविंदर ने बारीबारी दोनों बच्चों को पकड़ कर जमीन पर औंधे मुंह लेटा दिया. दोनों मासूम बुरी तरह तड़प रहे थे और छूटने का असफल प्रयास कर रहे थे. एकाएक मंत्र पढ़ते हुए निर्मल कौर अपनी गद्दी से उठी और झूमते हुए किसी मस्त हाथी की तरह झूमते हुए औंधे मुंह जमीन पर पड़े मासूम की पीठ पर सवार हो कर जोरजोर से अट्टहास करने लगी. साथ ही उस ने बच्चे के सिर के बालों को पकड़ कर खींचते हुए उस का चेहरा जमीन पर जोरजोर से पटकना शुरू कर दिया. फिर उस ने कुलविंदर की ओर देखते हुए जोर से कहा, ‘‘शेषनाग… सवारी करो.’’

मां का आदेश मिलते ही कुलविंदर उलटा लेट गया और अपनी गरदन ऊंची कर सांप की तरह ही जमीन पर रेंगते हुए धीरेधीरे अपनी 3 वर्षीय बेटी अनामिका की ओर बढ़ने लगा. अनामिका के निकट पहुंच कर उस ने सांप की ही तरह जोर से फुफकारा और औंधे मुंह लेटी अपनी मासूम बच्ची की पीठ पर सवार हो कर जोरजोर से उछलने लगा.

यह सब देख कर लाभ सिंह और मुख्तियार सिंह सिहर उठे. कमरे के अंदर मौजूद लोग आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खोल रहे थे, इसलिए दोनों भाई गांव के कुछ लोगों के साथ थाना कोटफत्ता की ओर दौड़े. थाने पहुंच कर उन्होंने थानाप्रभारी कृष्णकुमार को सब कुछ बता दिया.

तंत्रमंत्र के नाम पर वे लोग बच्चों के साथ कुछ अनर्थ न कर दें, इसलिए थानाप्रभारी अपने साथ एएसआई दर्शन सिंह, गुरप्रीत सिंह, हैडकांस्टेबल राजवंत सिंह, अजैब सिंह, कांस्टेबल लखविंदर सिंह, लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर और मनप्रीत कौर को साथ ले कर तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. पर पुलिस टीम के पहुंचने के पहले ही दोनों मासूमों ने उन दरिंदों के अत्याचार न झेल पाने के कारण तड़पतड़प कर अपने प्राण त्याग दिए.

जिस समय लाभ सिंह और मुख्तियार सिंह पुलिस के साथ अपने घर पहुंचे, तब तक देर हो चुकी थी. निर्मल कौर और उस का बेटा कुलविंदर सिंह दोनों मृत मासूमों के मुंह में ट्यूबलाइट का कांच ठूंस रहे थे. थानाप्रभारी कृष्ण कुमार ने जब निर्मल को रोकना चाहा तो वह दहाड़ते हुए बोली, ‘‘खबरदार, नजदीक आने की कोशिश की तो मैं तेरा सर्वनाश कर दूंगी. मैं देवी हूं. अभी मैं इन दोनों को जिंदा कर दूंगी. इस के बाद न प्रेमलता कभी बीमार होगी और न ही गगन कौर संतानहीन रहेगी.’’

पुलिस के पहुंचने पर गांव के तमाम लोगों के अलावा महिलाएं भी इकट्ठी हो गई थीं. थानाप्रभारी के आदेश पर लेडी पुलिस ने गांव की ही कुछ महिलाओं की मदद से निर्मल कौर को काबू किया. पुलिस ने तुरंत दोनों बच्चों की लाशें अपने कब्जे में ले लीं. एएसआई दर्शन सिंह ने निर्मल कौर, कुलविंदर सिंह और अन्य लोगों को गाड़ी में बिठा लिया. तब तक यह खबर पूरे कोटफत्ते में फैल गई थी.

इस के बाद लोगों की भीड़ ने पुलिस की गाड़ी को घेर लिया. लोग उन दोनों मांबेटे को अपने हाथों से सजा देना चाहते थे. वास्तव में उस समय भीड़ इतनी आक्रोशित थी कि यदि वे दोनों भीड़ के हत्थे चढ़ जाते तो पीटपीट कर उन की हत्या कर दी जाती. थानाप्रभारी ने लोगों को समझाना चाहा पर लोग उन की कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे. लोगों की पुलिस से झड़प तक हो गई.

अतिरिक्त पुलिस बल मंगवा कर बड़ी मुश्किल से उन्हें निकाल कर थाने पहुंचाया तो पब्लिक ने थाने को घेर लिया. हालात बेकाबू होता देख थानाप्रभारी ने एसएसपी स्वप्न शर्मा को हालात से अवगत करा दिया. इस के बाद कुछ ही देर में कई थानों की पुलिस वहां पहुंच गई. एसएसपी स्वप्न शर्मा, एसपी विनोद कुमार, डीएसपी कुलदीप सिंह सोही सहित कई आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों के काफी समझानेबुझाने के बाद करीब आधी रात को मामला शांत हुआ. पुलिस कुलविंदर की बीवी रोजी को भी पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई.

तमाशा 8 तारीख की आधी रात तक चलता रहा. रात लगभग सवा 12 बजे इंसपेक्टर कृष्ण कुमार ने लाभ सिंह द्वारा पहले दी गई तहरीर के आधार पर भादंवि की धारा 302, 34 के अंतर्गत दोनों मासूम बच्चों रंजीत सिंह और अनामिका की बेरहमी से की गई हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

निर्मल कौर और कुलविंदर सिंह उर्फ विक्की तथा उस की पत्नी रोजी कौर को उसी समय गिरफ्तार कर के पूछताछ के लिए जिला मुख्यालय औफिस ले जाया गया. अगले दिन पूछताछ के बाद दोनों मांबेटे को तलवंडी साबो की जिला अदालत में पेश किया.

पुलिस ने निर्मल कौर के कमरे से तंत्रमंत्र का सामान, चिमटा आदि बरामद कर लिया. साथ ही कमरे से काफी मात्रा में नशीला पदार्थ भी बरामद किया.

अकाल गुरमति प्रचार कमेटी के मंजीत सिंह खालसा, सिख फेडरेशन के परणजीत सिंह जग्गी, भारतीय किसान क्रांतिकारी यूनियन के अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पंजाब प्रभारी तथा तर्कशील सोसायटी भूरा सिंह महमा व जीरक सिंह सहित शहर के अन्य लोगों ने एसपी कार्यालय का घेराव कर मांग की कि बच्चों की मां रोजी कौर को इस मामले से बाहर रखा जाए, क्योंकि वह निर्दोष है.

जबकि एसपी विनोद कुमार और डीएसपी कुलदीप सिंह सोही का कहना था कि पिछले 4 दिनों से यह सब तमाशा उस की आंखों के सामने चल रहा था. यदि वह चाहती तो पहले ही पुलिस की सहायता ले सकती थी. इस से दोनों बच्चों की जान बच जाती.

रोजी को उस के पति और सास ने 8 मार्च को शाम के समय कमरे में बंद किया था. बंद के दौरान भी उस के पास मोबाइल फोन था. यदि वह चाहती तो पुलिस को या दूसरे लोगों को सूचित कर सकती थी. पर उस ने ऐसा नहीं किया. पुलिस को अंदेशा है कि शायद वह भी इस साजिश में शामिल थी.

पुलिस इस बात की भी छानबीन कर रही है कि मृतक बच्चों के दादा मुख्तियार सिंह की इस मामले में कितनी संलिप्तता है. 2 निर्दोष मासूमों की तंत्रमंत्र के नाम पर हुई हत्या से शहर भर में तनाव जैसा माहौल हो गया. लोगों ने बाजार बंद कर विरोध प्रकट किया तथा शहर के अन्य तांत्रिकों व बाबाओं के खिलाफ काररवाई की मांग की. पुलिस ने भी जरूरी काररवाई करते हुए तांत्रिकों की धरपकड़ शुरू कर दी.

शहर की तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए चप्पेचप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गई. पोस्टमार्टम के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद पुन: भीड़ ने उग्र रूप धारण कर मांग उठाई कि सिरसा के तांत्रिक लक्की बाबा उर्फ लखविंदर को भी गिरफ्तार किया जाए.

हालांकि इस घटना के समय वह वहां नहीं था पर 2 दिन पहले वहां आया था. अत: पुलिस ने लक्की बाबा की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी. वह कहीं छिप गया था. अंत में पुलिस का दबाव बढ़ता देख कर उस ने खुद ही 19 मार्च, 2017 को थाना कोटफत्ता में आत्मसमर्पण कर दिया.

थानाप्रभारी लक्की बाबा को अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया. पूछताछ के बाद उसे अगले दिन पुन: अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

निर्मल कौर, कुलविंदर सिंह, रोजी कौर, प्रेमलता, गगन कौर, मुख्तियार सिंह, लक्की बाबा से की गई पूछताछ से निर्मल कौर के स्वयंभू देवी बनने की जो कहानी सामने आई, उस से पता चलता है कि लोगों के अनपढ़ और अंधविश्वासी होने का फायदा उठाते हुए वह समाज में अपना वर्चस्व कायम करना चाहती थी.

लगभग 6 साल पहले मुख्तियार सिंह पूजापाठ और झाड़फूंक करता था. वह यह काम बिना किसी लालच के करता था. कुछ लोगों को फायदा होने लगा तो उस के पास आने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई. उस की पत्नी निर्मल कौर उस से इस काम के बदले पैसे लेने की बात कहती. पति के मना करने पर वह उस से झगड़ती और आने वाले लोगों से पैसे देने के लिए खुद कहती.

मुख्तियार ने उस की एक न सुनी. तब मुख्तियार ने झाड़फूंक का काम बंद कर दिया. इस के बाद उस की पत्नी निर्मल ने गद्दी पर बैठना शुरू किया. उस ने अपने बेटे कुलविंदर सिंह को भी अपने साथ लगा लिया. फिर दोनों ने तंत्रमंत्र के नाम पर लोगों को लूटना शुरू कर दिया.

वह खुद तो नशा करती ही थी, साथ ही आने वाले लोगों को भी प्रसाद में नशा मिला कर देती थी. नशे की जद में आ कर खुद को शक्तिशाली दिखाने के चक्कर में वह खुद के ही पोतेपोती का कत्ल कर बैठी. जेल पहुंचने के बाद अपने ही हाथों अपना वंश उजाड़ने वाली निर्मल कौर और उस के बेटे कुलविंदर सिंह को अपने किए पर बहुत पछतावा है.

Father’s Day Special – बुलावा आएगा जरूर: क्या भाग्यश्री को माता-पिता का प्यार मिला?

तबीयत कैसी है मां?’’ दयनीय दृष्टि से देखती भाग्यश्री ने पूछा.

मां ने सिर हिला कर इशारा किया, ‘‘ठीक है.’’ कुछ पल मां जमीन की ओर देखती रही. अनायास आंखों से आंसू की  झड़ी  झड़ने लगी. सुस्त हाथों को धीरेधीरे ऊपर उठा कर अपने सिकुड़े कपोलों तक ले गई. आंसू पोंछ कर बोली, ‘‘प्रकृति की मरजी है बेटा.’’

परिवार के प्रति आक्रोश दबाती हुई भाग्यश्री ने कहा, ‘‘प्रकृति की मरजी कोई नहीं जानता, किंतु तुम्हारे लापरवाह बेटे को सभी जानते हैं और… और पिताजी की तानाशाही. दोनों के प्रति तुम्हारे समर्पित भाव का प्रतिदान तुम्हें यह मिला कि तुम दोनों की मानसिक चोट से आहत हो कर यहां तक  पहुंच गईं? जिंदगी जकड़ कर रखना चाहती है, लेकिन मौत तुम्हें अपनी ओर खींच रही है.’’

मां ने आहत स्वर में कहा, ‘‘क्या किया जाए, सब समय की बात है.’’

भाग्यश्री ने अपनी आर्द्र आंखों को पोंछ कर कहा, ‘‘दवा तो ठीक से ले रही हो न, कोई कमी तो नहीं है न?’’

पलभर मां चुप रही, फिर बोली, ‘‘नहीं, दवा तो लाता ही है.’’

‘‘कौन? बाबू?’’ भाग्यश्री ने पूछा.

‘‘और नहीं तो कौन, तुम्हारे पिताजी लाएंगे क्या, गोबर भी काम में आ जाता है, गोथठे के रूप में. लेकिन वे? इस से भी गएगुजरे हैं. वही ठीक रहते तो किस बात का रोना था?’’ कुछ आक्रोश में मां ने कहा.

भाग्यश्री सिर  झुका कर बातें सुनती रही.

‘‘और एक बेटा है, वह अपनेआप में लीन रहता है, कमरे में  झांक कर भी नहीं देखता. आने में देरी हो जाए, तो मन घबराता है. देरी का कारण पूछती हूं, तो बरस पड़ता है. घर में नहीं रहने पर इधर बाप की चिल्लाहट सुनो और आने पर कुछ पूछो, तो बेटे की  िझड़की सुनो. बस, ऐसे ही दिन काट रही हूं,’’ आंसू पोंछती हुई मां ने कहा, ‘‘हां, लेकिन सेवा तुम्हारे पिताजी करते हैं मूड ठीक रहा तो, ठीक नहीं तो चार बातें सुना कर ही सही, मगर करते हैं.’’

भाग्यश्री ने कई बार सोचा कि मां की सेवा के लिए एक आया रख दे, मगर इस में भी समस्याएं थीं. एक तो यह कि इस माहौल में आया रहेगी नहीं, हरवक्त तनाव की स्थिति, बापबेटे के बीच वाकयुद्ध, अशांति ही अशांति. स्वयं कुछ भी खा लें, मगर आया को तो ढंग से खिलाना पड़ेगा न. दूसरा यह कि भाग्यश्री की सहायता घरवाले स्वीकार करेंगे? इन सब कारणों से वह लाचार थी. वह मां के पास बैठी थी, तभी उस के पिताजी आए. औपचारिकतावश भाग्यश्री ने प्रणाम किया. फिर चुपचाप बैठी रही.

भाग्यश्री ने अपने पिताजी की ओर देखा. उन के चेहरे पर क्रोध का भाव था. निसंदेह वह भाग्यश्री के प्रति था.

पिछले 10 वर्षों में वह बहुत कम यहां आईर् थी. जब उस ने अपनी मरजी से शादी की, पिताजी ने उसे त्याग दिया. मां भी पिताजी का समर्थन करती, किंतु मां तो मां होती है. मां अपना मोह त्याग नहीं पाई थी. शादी भी एक संयोग था. स्नेहदीप के बिना जीवन अंधकारमय रहता है. प्रकाश की खोज करना हर व्यक्ति की प्रवृत्ति है.

व्यक्ति को यदि अपने परिवेश में स्नेह न मिले तो बूंदभर स्नेह की लालसा लिए उस की दृष्टि आकाश को निहारती है, शायद स्वाति बूंद उस पर गिर पड़े. जहां आशा बंधती है, वहां वह स्वयं भी बंध जाता है. भाग्यश्री के साथ भी ऐसी ही बात थी. नाम के विपरीत विधाता का लिखा. दोष किस का है- इस सर्वेक्षण का अब समय नहीं रहा, लेकिन एक ओर जहां भाग्यश्री का खूबसूरत न होना उस के बुरे समय का कारण बना, वहीं, दूसरी ओर पिता का गुस्सैल स्वभाव भी. कभी भी उन्होंने घर की परिस्थिति को देखा ही नहीं, बस, जो चाहिए, मिलना चाहिए अन्यथा घर सिर पर उठा लेते.

घर की विषम परिस्थितियों ने ही भाग्यश्री को सम झदार बना दिया. न कोई इच्छा, न शौक. बस, उदासीनता की चादर ओढ़ कर वह वर्तमान में जीती गई. परिश्रमी तो वह बचपन से ही थी. छोटे बच्चों को पढ़ा कर उस ने अपनी पढ़ाई पूरी की. उस का एक छोटा भाई था. बहुत मन्नत के बाद उस का जन्म हुआ था. इसलिए उसे पा कर मातापिता का दर्प आसमान छूने लगा था. पुत्र के प्रति आसक्ति और भाग्यश्री के प्रति विरक्ति यह इस घर की पहचान थी.

लेकिन, उसे अपने एकांत जीवन से कभी ऊब नहीं हुई, बल्कि अपने एकाकीपन को उस ने जीवन का पर्याय बना लिया था. कालांतर में हरदेव के आत्मीय संसर्ग के कारण उस के जीवन की दिशा ही नहीं बल्कि परिभाषा भी बदल गई. बहुत ही साधारण युवक था वह, लेकिन विचारउदात्त था. सादगी में विचित्र आकर्षण था.

भाग्यश्री न तो खूबसूरत थी, न पिता के पास रुपए थे और न ही वह सभ्य माहौल में पलीबढ़ी थी. किंतु पता नहीं, हरदेव ने उस के हृदय में कौन सा अमृतरस का स्रोत देखा, जिस के आजीवन पान के लिए वह परिणयसूत्र में बंध गया. हरदेव के मातापिता ने इस रिश्ते को सहर्ष स्वीकार किया. भाग्यश्री के मातापिता ने उस के सामने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की, मगर पीठपीछे बहुत कोसा. यहां तक कि वे लोग न इस से मिलने आए, न ही उन्होंने इसे घर बुलाया. खुश रह कर भी भाग्यश्री मायके के संभावित दुखद माहौल से दुखी हो जाती. उपेक्षा के बाद भी वह अपने मायके के प्रति लगाव को जब्त नहीं कर पाती और यदाकदा मांपिताजी, भाई से मिलने आती, किंतु लौटती तो अपमान के आंसू ले कर.

कुछ माह बाद ही भाग्यश्री को मालूम हुआ कि उस की मां लकवे का शिकार हो गई है. घबरा कर वह मायके आई. अपाहिज मां उसे देख कर रोने लगी, मानो बेटी के प्रति जितना भी दुर्भाव था, वह बह रहा हो. किंतु, पिताजी की मुद्रा कठोर थी. मां अपनी व्यथा सुनाती रही, लेकिन पिताजी मौन थे. आर्थिक तंगी तो घर में पहले से ही थी, अब तो कंगाली में आटा भी गीला हो गया था. मां के पास वह कुछ देर बैठी रही, फिर बहुत साहस जोड़ कर, मां को रुपए दे कर कहने लगी, ‘इलाज में कमी न करना मां. मैं तुम्हारा इलाज कराऊंगी, तुम चिंता न करना.’

उस की बातों को सुनते ही पिताजी का मौन भंग हुआ. बहुत ही उपेक्षित ढंग से उन्होंने कहा, ‘हम लोग यहां जैसे भी हैं, ठीक हैं. तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. मिट्टी में इज्जत मिला कर आई है जान बचाने.’ विकृत भाव चेहरे पर आच्छादित था. कुछ पल चुप रहे, फिर उन्होंने कहा, ‘तुम्हारे आने पर यह रोएगी ही, इसलिए न आओ तो अच्छा रहेगा.’

घर में उस की उपेक्षा नई बात नहीं थी. आंसूभरी आंखों से मां को देखती हुई उदासी के साथ वह लौट गई. मातापिता ने उसे त्याग दिया. मगर वह त्याग नहीं पाई थी. इस बार 5वीं बार वह सहमीसहमी मां के घर आई थी. इस बार न उसे उपेक्षा की चिंता थी, न पिताजी के क्रोध का भय था. और न आने पर संकोच. मां के दुख के आगे सभी मौन थे.

उसे याद आई. छोटे भाई के प्रति मातापिता का लगाव देख कर वह यही सम झ बैठी थी कि यह घर उस का नहीं. खिलौने आए तो उस भाई के लिए ही. उसे याद नहीं कि उस ने कभी खिलौने से खेला भी था. खीर बनी, तो पहले भाई ने ही खाई. उस के खाने के बाद ही उसे मिली. मां से पूछती, ‘हर बार उसी की सुनी जाती, मेरी बात क्यों नहीं? गलती अगर बाबू करे तो दोषी मैं ही हूं, क्यों?’

लापरवाही के साथ बड़े गर्व से मां कहती, ‘उस की बराबरी करोगी? वह बेटा है. मरने पर पिंडदान करेगा.’ मां के इस दुर्भाव को वह नहीं भूली. पति के घर में हर सुख होने के बाद भी वह अतीत से निकल नहीं पाई. बारबार उसे चुभन का एहसास होता रहा. लेकिन अब? मां की विवशता, लाचारी और कष्ट के सामने उस का अपना दुख तुच्छ था.

कुछ पल वह मां के पास बैठी रही. फिर बोली, ‘‘बाबू कहां है?’’ बचपन से ही, वह भाई को बाबू बोलती आई थी. यही उसे सिखाया गया था.

‘‘होगा अपने कमरे में,’’ विरक्तभाव से मां ने कहा.

भाग्यश्री कमरे में जा कर बाबू के पास बैठ गई. पत्थर पर फूल की क्यारी लगाने की लालसा में उसे कुछ पल अपलक देखती रही. फिर साहस समेट कर बोली, ‘‘आज तक इस घर ने मु झे कुछ नहीं दिया है. बहनबेटी को देना बड़ा पुण्य का काम होता है.’’

बाबू आश्चर्य से उसे देखने लगा, क्योंकि किसी से कुछ मांगना उस का स्वभाव नहीं था.

‘‘क्या कहती हो दीदी? क्या दूं,’’ बाबू ने पूछा.

‘‘मन का चैन,’’ याचक बन कर उस ने कहा.

बाबू चुप रहा. बाबू के चेहरे का भाव पढ़ कर उस ने आगे कहा, ‘‘देखो बाबू, हम दोनों यहीं पलेबढ़े. लेकिन, तुम्हें याद है? मांपिताजी का सारा ध्यान तुम्हीं पर रहता था. तुम्हीं उन के लिए सबकुछ हो. उन के विश्वास का मान रख लो. मु झे मेरे मन का चैन मिल जाएगा.’’ बोलतेबोलते उस का गला भर आया. कुछ रुक कर फिर बोली, ‘‘याद है न? मां तुम्हें छिप कर पैसा देती थीं जलेबियां खाने के लिए. मैं मांगती, तो कहतीं ‘इस की बराबरी करोगी? यह बेटा है, आजीवन मु झे देखेगा.’  और मैं चुप हो जाती. मां के इस प्रेम का मान रख लो बाबू. पहले उस के दुर्भाव पर दुख होता था और अब उस की विवशता पर. दुख मेरे समय में ही रहा.’’

‘‘तुम क्या कह रही हो, मैं सम झ नहीं पा रहा हूं,’’ कुछ खी झ कर बाबू ने कहा, ‘‘क्या कमी करता हूं? दवा, उचित खानापीना, सभी तो हो रहा है. क्या कमी है?’’

‘‘आत्मीयता की कमी है,’’ भाग्यश्री का संक्षिप्त उत्तर था. ‘चोर बोले जोर से’ यह लोकोक्ति प्रसिद्ध है. खी झ कर बाबू बोला, ‘‘हांहां, मैं गलत हूं. मगर तुम ने कौन सी आत्मीयता दिखाई? आज भी कोई पूछता है कि भाग्यश्री कैसी है, तो लगता है कि व्यंग्य से पूछ रहा है.’’

बाबू की यह बात उसे चुभ गई. आंखें नम हो गईं. मगर धीरे से कहने लगी, ‘‘हां, मैं ने गलत काम किया है. तुम लोगों के सताने पर भी मैं ने आत्माहत्या नहीं की, बल्कि जिंदगी को तलाशा है, यही गलती हुई है न?’’

बाबू चुप रहा.

‘‘देखो बाबू,’’ भरे हुए कंठ से उस ने कहा, ‘‘बहस नहीं करो. मैं इतना ही जानती हूं कि मांपिताजी, मांपिताजी होते हैं. मैं ने इतना अन्याय सह कर भी मन मैला न किया. फिर तुम्हें क्या शिकायत है कि इन के दुखसुख में हाल भी न पूछो? दवा से ज्यादा सद्भाव का असर होता है.’’

‘‘कौन कहता है?’’ बात का रुख बदलते हुए बाबू ने कहा, ‘‘कौन शिकायत करता है? क्या नहीं करता? तुम्हें पता है सारी बातें? कौन सा ऐसा दिन है, जब पिताजी मु झे नहीं कोसते? एक सरकारी नौकरी न मिली कि नालायक, निकम्मा विशेषणों से अलंकृत करते रहते हैं. बीती बातों को उखाड़उखाड़ कर घर में कुहराम मचाए रहते हैं. घर की शांति भंग हो गई है.’’ वह अपने आंसू पोंछने लगा.

बात जब पिताजी पर आई, तो कमरे में आ कर चीखते हुए भाग्यश्री को बोलने लगे, ‘‘हमारे घर के मामले में तुम कौन हो बोलने वाली? कौन तुम्हें यहां की बातें बताता है? यह मेरा बेटा है, मैं इसे कुछ बोलूं तो तुम्हें क्या? यह हमें लात मारे, तुम्हें क्या मतलब?’’

बात कहां से कहां पहुंच गई. भाग्यश्री को भी क्रोध आ गया. वह कुछ बोली नहीं, बस, आक्रोश से अपने पिताजी को देखती रही. पिताजी का चीखना जारी था, ‘‘तुम अपने घर में खुश रहो. हमारे घर के मामले में तुम्हें बोलने का अधिकार नहीं है.’’

‘हमारा घर?

‘पिताजी का घर?

‘बाबू का घर? मेरा नहीं? हां, पहले भी तो नहीं था. और अब? शादी के बाद?’ भाग्यश्री मन में सोच रही थी.

पिताजी को बोलते देख, मां ने आवाज लगाई. भाग्यश्री मां के पास चली गई. मां ने रोते हुए कहा, ‘‘समय तो किसी का कोई बदल नहीं सकता न बेटा? मेरे समय में ही दुख लिखा है, इसलिए तो बापबेटे की मत मारी गई. आपस में भिड़ कर एकदूसरे का सिर फोड़ते रहते हैं. तुम बेकार मेरी चिंता करती हो. तुम्हें यहां कोई नहीं सराहता, फिर क्यों आती हो.’’ यह कहती हुई वह फूटफूट कर रो पड़ी.

पिताजी के प्रति उत्पन्न आक्रोश ममता में घुल गया. कुछ देर तक भाग्यश्री सिर नीचे किए बैठी रही. आंखों से आंसू बहते रहे. अचानक उठी और बाबू से बोली, ‘‘मां, मेरी भी है. इस की हालत में सुधार यदि नहीं हुआ, तो बलपूर्वक मैं अपने साथ ले जाऊंगी,’’ कहती हुई वह चली गई.

महल्ले में ही उस का मुंहबोला एक भाई था, कुंदन. वह बाबू का दोस्त भी था. उदास हो कर लौटती भाग्यश्री को देख कर वह उस के पीछे दौड़ा, ‘‘दीदी, ओ दीदी.’’

भाग्यश्री ने पीछे मुड़ कर देखा. बनावटी मुसकान अधरों पर बिखेर कर हालचाल पूछने लगी. उसे मालूम हुआ कि फिजियोथेरैपी द्वारा वह इलाज करने लगा है. उस की उदास आंखें चमक उठीं. याचनाभरी आवाज में कहा, ‘‘भाई, मेरी मां को भी देख लो.’’

‘‘चाचीजी को? हां, स्थिति ठीक नहीं है, यह सुना, लेकिन किसी ने मु झ से कहा ही नहीं,’’ कुंदन ने कहा.

‘‘मैं कह रही हूं न,’’ व्यग्र होते हुए भाग्यश्री ने कहा.

दो पल दोनों चुप रहे. कुछ सोच कर भाग्यश्री ने फिर कहा, ‘‘लेकिन भाई, यह बताना नहीं कि मैं ने तुम्हें भेजा है. नहीं तो मां का इलाज करवाने नहीं देंगे सब.’’

‘‘लेकिन, लेकिन क्या कहूंगा?’’

‘‘यही कि, बाबू के मित्र हो, इसलिए इंसानियतवश. और हां,’’ भाग्यश्री ने अपने बटुए में से एक हजार रुपया निकाल कर देते हुए कहा, ‘‘तुम मेरा पता लिख लो, मेरे घर आ कर ही अपना मेहनताना ले लेना.’’

कुंदन उसे देखता रहा. भाग्यश्री की आंखों में कृतज्ञता छाई थी, बोली, ‘‘भाई, तुम्हारा एहसान मैं याद रखूंगी. बस, मेरी मां को ठीक कर दो.’’

कुंदन सिर हिला कर कह रहा था, ‘‘ठीक है.’’

दो माह बाद वह फिर से मायके आई. हालांकि कुंदन से उसे मालूम हो गया था कि मां की स्थिति में बहुत सुधार है, फिर भी वह देखना चाहती थी. भाग्यश्री के मन में एक अज्ञात भय था. जैसे कोई किसी दूसरे के घर में प्रवेश कर रहा हो वह भी चोरीचोरी. जैसेजैसे घर निकट आ रहा था, उस के कदम की गति धीमी होती जा रही थी और हृदय की धड़कन बढ़ती जा रही थी.

वहां पहुंच कर उस ने बरामदे में  झांका. मां, पिताजी और बाबू तीनों बैठ कर चाय पी रहे थे. सभी प्रसन्न थे. आपस में बातें करते हुए हंस रहे थे. भाग्यश्री ने शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखा होगा. भाग्यश्री वहीं ठहर गई. उस ने अपने भाई से ‘मन का चैन’ मांगा था, भाई ने उसे दे दिया. मायके से प्राप्त उपेक्षा, तो उस का दुख था ही, लेकिन यह ‘मन का चैन’ उस का सुख था.

‘ठीक ही है,’ उस ने सोचा, मैं तो इस घर के लिए कभी थी ही नहीं. फिर अपना स्थान क्यों ढूढ़ूं? आज मन का चैन मिला, इस से बड़ा मायके का उपहार क्या होगा. मन का चैन ले कर वह वहीं से लौट आई, बिन बुलाए कभी न जाने के लिए.

बाहर निकल कर नम आंखों से अपने मायके का घर देख रही थी. अनायास उस के अधरों पर वेदना के साथ एक मुसकान दौड़ आई. उंगली से इशारा करती हुई, भरे हुए कंठ से वह बुदबुदाई, ‘मु झे पता है पिताजी, एक दिन आप मु झे बुलाएंगे जरूर. मन का चैन पा कर वह प्रसन्न थी, किंतु मायके के विद्रोह से उस का अंतर्मन बिलख रहा था. उस ने मन से पूछा, ‘लेकिन कहां बुलाएंगे?’ मन ने उत्तर भी दे दिया, ‘जल्द ही बुलाएंगे.’

अपनी आंखों को पोंछती हुई वह एकाएक मुड़ी और अपने घर की ओर चल दी. मन में विश्वास था कि एक दिन बुलावा आएगा, हां, बुलावा आएगा जरूर.

Khatron ke Khiladi 13 में हुआ हादसा, नायरा बनर्जी को लगी गंभीर चोट

रोहित शेट्टी के स्टंट बेस्ड शो ‘खतरों के खिलाड़ी 13’ की शूटिंग साउथ अफ्रीका के केपटाउन में हो रही है. फिलहाल कंटेस्टेंट शूटिंग के दौरान खतरों का सामना कर रहे हैं. इन सबके बीच इस शो के कंटेस्टेंट फैंस से हर अपडेट सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं. वहीं शो के 14 प्रतियोगियों में से हाल ही में रोहित रॉय, अरिजीत तनेजा और ऐश्वर्या शर्मा स्टंट करते समय घायल होने के कारण चर्चा में थे. अब खबर आ रही है कि नायरा बनर्जी को भी स्टंट के दौरान चोट लग गई है.

 

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दरअसल, नायरा एम बनर्जी ने पानी वाला एक स्टंट परफॉर्म किया. इसी दौरान उनको चोट लग गई. एक रिपोर्ट के मुताबिक, नायरा एक नाव पर थी और स्टंट के लिए उनको एक छोर से दूसरे छोर पर जाना था. लेकिन इस बीच काफी बैरियर्स थे, जिनको उन्हें पार करना था.इस वक्त उन्होंने कोई भी सेफ्टी पैड्स नहीं पहने थे. न ही लंबे मोजे और न ही घुटने पर कोई बैंड.नतीजतन, उनके घुटनों पर भयंकर चोट लगी और उस निशान की तस्वीर एक्ट्रेस ने साझा की.

नायरा एम बनर्जी को एक वाटर बेस्ड स्टंट करने के दौरान चोट लग गई है.  कथित तौर पर, नायरा एक बोट पर थी और स्टंट को पूरा करने लिए उन्हें कई मुश्किलों को पार करना था. एक्ट्रेस ने इस दौरान नीपैड या लंबे मोजे नहीं पहने थे और इस वजह से वे चोटिल हो गईं लगी हालांकि, इससे उनके जोश में कोई कमी नहीं आई और एक्ट्रेस ने अपना स्टंट पूरा करके ही दम लिया, उनके डेडीकेशन और फ्लैक्सीबिलिटी की उनके को-कंटेस्टेंट ने भी तारीफ की.

 

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पिछले महीने, गुम है किसी के प्यार में की एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर अपलोड की थी जिसमें वह उदास चेहरे लिए हुए नजर आ रही थीं.  मिरर सेल्फी में उनका बायां हाथ बुरी तरह जख्मी दिख रहा था. वहीं कुछ दिन पहले अरिजीत तनेजा को मामूली चोट लगी थी. उन्होंने अपने घायल हाथ की एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें फफोले और खरोंच दिख रहे थे. उन्होंने इसे कैप्शन के साथ अपलोड किया, “दाग अच्छे हैं..”

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