KGF स्टार Yash ने बाहुबली की शिवगामी के साथ किया डांंस, देखें Video

kGF से हिट हुए yash इन दिनों सुर्खियों में है. यश हाल ही एक्टर अभिषेक अंबरीश की शादी में शामिल हुए. इसकी तस्वीरें और वीडियो अभी तक सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. यहां यश डांस करते हुए वीडियो वायरल हो रही है

यश ने अभिषेक अंबरीश की शादी में खूब इंजॉय किया. यहां वह अपने ‘केजीएफ’ के ‘रॉकी भाई’ वाले हेयरस्टाइल में नजर आए. जहां यश के स्टाइल और स्वैग ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, वहीं उनके डांस मूव्स ने सबको दीवाना बना दिया. अभिषेक अंबरीश की शादी से यश का एक डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

 

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आपको बता दें, कि इस वीडियो में यश, ‘बाहुबली’ की शिवगामी यानी राम्या कृष्णन के साथ Antamma Antamma गाने पर गजब का डांस कर रहे हैं. Yash ने जैसे ही डांस फ्लोर पर अपने मूव्स दिखाने शुरू किए, हर कोई बस उन्हें देखता ही रह गया. पार्टी में यश ने कन्नड़ एक्टर दर्शन के साथ भी धमाकेदार डांस किया. इस पार्टी में यश और दर्शन के डांस के साथ-साथ उनकी बॉन्डिंग की भी खूब चर्चा रही. दोनों साथ में खूब मस्ती और गप्पे मारते दिखे। फैन्स यश के डांस वीडियो देख क्रेजी हो गए हैं. मालूम हो कि अभिषेक अंबरीश कन्नड़ सुपरस्टार और नेता अंबरीश के बेटे हैं. अंबरीश का 2018 में निधन हो गया था.

प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें, तो यश 2022 में ‘केजीएफ 2’ में नजर आए थे, और तभी से फैन्स उनके अगले प्रोजेक्ट की अनाउंसमेंट का इंतजार कर रहे हैं. यश ‘केजीएफ 3’ में भी नजर आएंगे, पर फिलहाल इस फिल्म की रिलीज अनाउंस नहीं की गई है. इसके डायरेक्टर प्रशांत नील अभी ‘सालार’ में बिजी हैं, जिसमें प्रभास लीड रोल में हैं. हालांकि पिछले कुछ समय से खबरे हैं कि यश फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र 2’ में नजर आ सकते हैं. लेकिन अभी कुछ कन्फर्म नहीं है.

गोरखधंधा : मर्दानगी बेचने वालों से सावधान

‘यह लीजिए साहब… पुश्तैनी जोड़ों के दर्द को जड़ से मिटा देगी… यह जड़ीबूटी डायबिटीज, पेट की खराबी, सुस्ती, थकावट सब दूर कर देगी… काम में मन न लगना, मन अशांत रहना, हर मर्ज की दवा है हमारे पास,’ जैसी बातें कह कर ठग ग्राहकों को खूब लूटते हैं.

‘यह दवा आप को किसी डाक्टर के पास या मैडिकल स्टोर में नहीं मिलेगी.

‘साहब, हम इसे जंगल से ढूंढ़ ढूंढ़ कर लाते हैं. हमारे खानदान के लोगों को ही इस जड़ी के बारे में मालूम है. यह हिमालय की चोटी पर उगती है, बर्फ में ढूंढ़नी पड़ती है. बहुत महंगी बिकती है. इसे खाने के बाद सामने वाला चारों खाने चित नहीं हुआ, तो सारा पैसा वापस.’

ऐसी ही बातें सुन कर खदान में काम करने वाले एक मजदूर ने सड़क किनारे तंबू लगा कर दवा बेचने वाले से तेल लिया. उसे अंग पर लगाने के थोड़ी देर बाद तकलीफ होनी शुरू हो गई. अंग फूल कर मोटा हो गया. उस में जलन व दर्द होने लगा. धीरे धीरे तकलीफ इतनी बढ़ गई कि वह छटपटाने लगा.

उस मजदूर की बीवी ने पड़ोसियों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया. डाक्टरों ने फौरन इलाज कर के दर्द व जलन दूर कर दी. पर तेल लगाने से जो छूत की बीमारी हुई थी, उसे ठीक होने में डेढ़ महीना लग गया.

इसी तरह एक आदमी ने सैक्स ताकत बढ़ाने के लिए सड़क किनारे दवा बेचने वाले से दवा ली. दवा खाने के थोड़ी देर बाद हाथपैरों में ऐंठन शुरू हो गई. उस की बीवी पति की हालत देख कर घबरा गई. उस ने पड़ोसियों को बुलाया, जो उसे अस्पताल ले गए. डाक्टर ने इलाज किया, जहां वह काफी समय बाद ठीक हुआ.

जब उस आदमी ने डाक्टर से ताकत की दवा लेने के बारे में बताया, तो डाक्टर ने उसे बताया कि ऐसी दवाओं में नशीली चीजें होती हैं. उन्हीं के असर से उसे ऐसी तकलीफ हो गई थी.

सारणी में सड़क के किनारे तंबू लगा कर दवा बेचने वाले तथाकथित वैद्य के पास एक आदमी पहुंचा. बाहर से साधारण दिखने वाले तंबू के अंदर का नजारा चकाचौंध कर देने वाला था. सामने सैकड़ों शीशियों में गोलियां, चूर्ण, कैप्सूल, जड़ीबूटियां वगैरह रखी हुई थीं.

उस ने मरीज के रूप में अपना हाथ दिखाया, तो उस वैद्य ने हाथ की नाड़ी को पकड़ कर कहा, ‘शरीर में गरमी हो गई है. इस से शरीर का धातु पतला हो कर बाहर चला जा रहा है. शरीर में पानी की मात्रा बढ़ रही है, जिस से वह फूल गया है.’

वैद्य ने 750 रुपए की एक महीने की दवा लेने को कहा और पौष्टिक चीजें खाने की राय दी. जब उस से कहा गया कि मैं तो पूछताछ करने आया हूं, तो वह वैद्य घबरा गया. अपनेआप को संभालते हुए उस ने कहा कि मैं तो मजाक कर रहा था. इतने रुपए की दवा नहीं लगेगी.

जब उस से पूछा कि धातु क्या होता है? दवा से अंग कैसे मोटा हो जाता है? जवानी की ताकत बढ़ाने वाली दवा में क्याक्या मिलाते हैं? तो उस ने सवालों के जवाब देने से मना कर दिया और कहा कि वह कल अपने गुरु से इन सवालों के जवाब मालूम कर के बता देगा.

दूसरे दिन वहां पर तंबू नहीं था. वैसे, उस तंबू वाले तथाकथित वैद्य की कमाई का अंदाजा उस के पास मौजूदा रंगीन टैलीविजन, मोटरसाइकिल, मेटाडोर वगैरह से लगाया जा सकता है.

खानदानी इलाज करने वाले तथाकथित वैद्यों की जवान पीढ़ी भी इसी काम में लगी हुई है. इस काम में लगे ज्यादातर नौजवान नासमझ हैं. उस की वजह यह है कि एक ही जगह पर अधिक दिनों तक तंबू लगा कर न रहने से बच्चे स्कूली पढ़ाई नहीं कर पाते हैं.

उन का कहना है कि पढ़लिख कर उन्हें कौन सी नौकरी करनी है. उन्हें तो बाप दादाओं से मिले हुनर का ही काम करना है. जड़ीबूटी बेचना उन की विरासत है. वह इसे छोड़ना नहीं चाहते हैं. उन की औरतें भी इसी काम में लगी रहती हैं. मर्दों को बुला कर सैक्स की दवा बेचने में उन्हें शर्म या झिझक महसूस नहीं होती.

इन के पास केवल आदमी ही इलाज के लिए जाते हैं, ऐसा नहीं है. तमाम औरतें व स्कूली छात्राएं छाती बढ़ाने, ढीली छाती को कसने, पेट गिराने, बांझपन, ल्यूकोरिया, माहवारी संबंधी बीमारियां, ठंडापन, बालों का झड़ना, कीलमुहांसे वगैरह की शिकायतें ले कर इन तंबुओं में पहुंचती हैं.

पिछले दिनों एक मामला सामने आया. जब एक कालेज की छात्रा कीलमुहांसे के इलाज के लिए तंबू में पहुंची, तब तंबू के तथाकथित वैद्य ने उसे छेड़ दिया. जब बात कालेज के छात्रों को पता चली, तो उन्होंने आ कर तंबू उखाड़ दिया. तथाकथित वैद्य वहां से फरार हो गया.

सैक्स मामलों के जानकार डाक्टर का कहना है कि सड़क के किनारे तंबू लगा कर दवा बेचने वालों से किसी भी तरह का इलाज नहीं कराना चाहिए. इन्हें दवाओं के बारे में सही जानकारी नहीं होती, जिस की वजह से इन की दी हुई दवाएं इस्तेमाल करने पर फायदा होने के बजाय नुकसान होता है.

इन के द्वारा दी गई जवानी बढ़ाने वाली दवाओं में नशीली चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर को काफी नुकसान पहुंचाती हैं.

रहस्यमय हत्या की कहानी

छोटे शहरों से बड़े सपने ले कर सैकड़ों लड़कियां आए दिन सपनों की नगरी मुंबई पहुंचती हैं. लेकिन इन में से गिनीचुनी लड़कियों को ही कामयाबी मिलती है. दरअसल, फिल्म इंडस्ट्री भूलभुलैया की तरह है, जहां प्रवेश करना तो आसान है, लेकिन बाहर निकलना बहुत मुश्किल. क्योंकि यहां कदमकदम पर दिगभ्रमित करने वाले मोड़ों पर गलत राह बताने वाले मौजूद रहते हैं, जिन के अपनेअपने स्वार्थ होते हैं.

फिल्म इंडस्ट्री में एक तरफ जहां श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, हेमामालिनी, काजोल, जैसी अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय का परचम लहराया, वहीं दूसरी ओर दिव्या भारती, स्मिता पाटिल, जिया खान, नफीसा जोसेफ, शिखा जोशी, विवेका बाबा, मीनाक्षी थापा और प्रत्यूषा बनर्जी जैसी सुंदर व प्रतिभावान छोटे व बड़े परदे की अभिनेत्रियों ने भावनाओं में बह कर अथवा अपनी नाकामयाबी की वजह से जान गंवाई.

सच तो यह है कि प्राण गंवाने वाली किसी भी अभिनेत्री की मौत का सच कभी सामने नहीं आया. अब ऐसी अभिनेत्रियों में एक और नाम जुड़ गया है कृतिका उर्फ ज्योति चौधरी का.

घटना 12 जून, 2017 की है. सुबह के करीब 10 बजे का समय था. मुंबई के उपनगर अंधेरी (वेस्ट) स्थित अंबोली पुलिस थाने के चार्जरूम में तैनात ड्यूटी अधिकारी को फोन पर खबर मिली कि चारबंगला स्थित एसआरए भैरवनाथ हाउसिंग सोसाइटी की 5वीं मंजिल के फ्लैट नंबर 503 में से दुर्गंध आ रही है.

ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने मामले की डायरी बना कर इस की जानकारी सीनियर क्राइम इंसपेक्टर दयानायक को दी. इंसपेक्टर दयानायक मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपने साथ पुलिस टीम ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. उन्होंने इस मामले की जानकारी थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़ और वरिष्ठ अधिकारियों के साथसाथ पुलिस कंट्रोल रूम को भी दे दी थी.

जब पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची, तब तक वहां काफी लोगों की भीड़ एकत्र हो गई थी. भीड़ को हटा कर पुलिस टीम कमरे के सामने पहुंची. पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि उस फ्लैट में 2-3 सालों से फिल्म और टीवी अभिनेत्री कृतिका उर्फ ज्योति चौधरी किराए पर रह रही थी. लेकिन वह अपने फ्लैट में कब आती थी और जाती थी, इस की जानकारी किसी को नहीं थी. चूंकि उस का काम ही ऐसा था, इसलिए किसी ने उस के आनेजाने पर ध्यान नहीं दिया था. पासपड़ोस के लोगों से भी उस का संबंध नाममात्र का था. पता चला कि कई बार तो वह शूटिंग पर चली जाती थी तो कईकई दिन नहीं लौटती थी.

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फ्लैट की चाबी किसी के पास नहीं थी. जबकि फ्लैट बंद था. इंसपेक्टर दया नायक ने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर के फ्लैट का दरवाजा तोड़वा दिया. दरवाजा टूटते ही अंदर से बदबू का ऐसा झोंका आया कि वहां खड़े लोगों को सांस लेना कठिन हो गया. नाक पर रूमाल रख कर जब पुलिस टीम फ्लैट के अंदर दाखिल हुई तो कमरे का एसी 19 डिग्री टंप्रेचर पर चल रहा था. संभवत: हत्यारा काफी चालाक और शातिर था. लाश लंबे समय तक सुरक्षित रहे और सड़न की बदबू बाहर न जाए, यह सोच कर उस ने एसी चालू छोड़ दिया था. लाश की स्थिति से लग रहा था कि कृतिका की 3-4 दिनों पहले ही मौत हो गई थी.

इंसपेक्टर दया नायक अभी अपनी टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण और मृतका कृतिका के पड़ोसियों से पूछताछ कर रहे थे कि अंबोली पुलिस थाने के थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़, डीसीपी परमजीत सिंह दहिया, एसीपी अरुण चव्हाण, क्राइम ब्रांच सीआईडी यूनिट-9 के अधिकारी और फौरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई. फौरेंसिक टीम का काम खत्म हो जाने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का सरसरी निगाह से निरीक्षण किया. थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़ से जरूरी बातें कर के अधिकारी अपने औफिस लौट गए.

अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़ ने इंसपेक्टर दया नायक और सहयोगियों के साथ मिल कर घटनास्थल और मृतका कृतिका के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. कृतिका का शव उस के बैडरूम में बैड पर चित पड़ा था. शव के पास ही उस का मोबाइल फोन और ड्रग्स जैसा दिखने वाले पाउडर का एक पैकेट पड़ा था. पुलिस ने कृतिका का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया और पाउडर के पैकेट को जांच के लिए सांताकु्रज के कालिया लैब भेज दिया. फोन से कृतिका के घर वालों का नंबर निकाल कर उन्हें इस मामले की जानकारी दे दी गई.

घटनास्थल की जांच में कृतिका के बर्थडे का एक नया फोटो भी मिला, जिस में वह 2 युवकों और 3 युवतियों के बीच पीले रंग की ड्रेस में खड़ी थी और काफी खुश नजर आ रही थी. वह फोटो संभवत: 5 और 8 जून, 2017 के बीच खींची गई थी. कृतिका की हत्या बड़ी ही बेरहमी से की गई थी. उस के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था, साथ ही उस की हत्या में अंगुलियों में पहने जाने वाले नुकीले पंजों का इस्तेमाल किया गया था. कृतिका के शरीर पर कई तरह के जख्मों के निशान थे, जिस से लगता था कि हत्या के पूर्व कृतिका के और हत्यारों के बीच काफी मारपीट हुई थी. हत्या में इस्तेमाल चीजों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया.

बैड पर कृतिका का खून बह कर बिस्तर पर सूख गया था और उसकी लाश धीरेधीरे सड़नी शुरू हो गई थी. घटनास्थल की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस टीम ने कृतिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए विलेपार्ले स्थित कूपर अस्पताल भेज दिया. घटनास्थल की प्राथमिक काररवाई पूरी कर

के पुलिस टीम थाने लौट आई. थाने आ कर थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़ ने इस मामले पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचारविमर्श किया और तफ्तीश का काम इंसपेक्टर दया नायक को सौंप दिया.

उधर कृतिका की मौत का समाचार मिलते ही उस के परिवार वाले मुंबई के लिए रवाना हो गए. कृतिका की हत्या हो सकती है, यह वे लोग सोच भी नहीं सकते थे. मुंबई पहुंच कर उन्होंने कृतिका का शव देखा तो दहाड़ें मार कर रोने लगे. पुलिस की जांच टीम ने उन्हें बड़ी मुश्किल से संभाला. पोस्टमार्टम के बाद कृतिका का शव उन्हें सौंप दिया गया.

इंसपेक्टर दया नायक ने कृतिका के परिवार वालों के बयान लेने के बाद थानाप्रभारी वी.एस. गायकवाड़ के दिशानिर्देशन में अपनी जांच की रूपरेखा तैयार की, ताकि उस के हत्यारे तक पहुंचा जा सके. एक तरफ इंसपेक्टर दया नायक अपनी तफ्तीश का तानाबाना तैयार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस कमिश्नर दत्तात्रय पड़सलगीकर और जौइंट पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के निर्देश पर क्राइम ब्रांच सीआईडी यूनिट-9 के इंसपेक्टर महेश देसाई भी इस मामले की छानबीन में जुट गए थे.

फिल्मों, सीरियल अथवा मौडलिंग करने वाली लड़कियों पर पासपड़ोस के लोगों, सोसायटी में काम करने वालों, ड्राइवरों और गार्डों वगैरह की नजर रहती है. उदाहरणस्वरूप वडाला की रहने वाली पल्लवी पुरकायस्थ को ले सकते हैं, जिस की हत्या इमारत के कश्मीरी सिक्योरिटी गार्ड ने उस की सुंदरता पर फिदा हो कर दी थी.

ऐसी ही एक और घटना अक्तूबर, 2016 में गोवा के पणजी में घटी थी. वहां सुप्रसिद्ध ब्यूटी फोटोग्राफर और जानी मानी परफ्यूमर मोनिका घुर्डे का शव सांगोल्डा विलेज की सपना राजवैली इमारत की दूसरी मंजिल पर मिला था.

उस की हत्या में भी इमारत के सिक्योरिटी गार्ड राजकुमार का हाथ था. इसी थ्योरी के आधार पर इंसपेक्टर दया नायक ने अपनी टीम के साथ तफ्तीश उसी इमारत से शुरू की, जिस में कृतिका रहती थी. उन्होंने इमारत के आसपास रहने वालों से पूछताछ की, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, वहां के सिक्योरिटी गार्डों से पूछताछ की और संदेह के आधार पर उसे हिरासत में भी लिया. उस इमारत का दूसरा सिक्योरिटी गार्ड लखनऊ गया हुआ था. उस की तलाश में पुलिस की एक टीम लखनऊ भी भेजी गई. लेकिन वहां से उसे खाली हाथ लौटना पड़ा.

27 वर्षीया मौडल और अभिनेत्री कृतिका उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली थी. उस के पिता हरिद्वार के सम्मानित व्यक्ति थे. ऐशोआराम में पलीबढ़ी कृतिका खूबसूरत भी थी और महत्वाकांक्षी भी. वह ग्लैमर की लाइन में जाना चाहती थी. जबकि उस का परिवार चाहता था कि वह पढ़लिख कर कोई अच्छी नौकरी करे. कृतिका के सिर पर अभिनय और बौलीवुड का भूत कुछ इस तरह सवार था कि उसे मांबाप की कोई भी सलाह अच्छी नहीं लगती थी. वह बौलीवुड में जाने के लिए स्कूल और कालेजों के हर प्रोग्राम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. इसी के चलते उसे अनेक पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र मिल चुके थे.

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अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कृतिका बौलीवुड की रंगीन दुनिया में काम पाने के लिए प्रयास करने लगी. इस के लिए उस ने अपना फोटो प्रोफाइल तैयार करा लिया था, जिसे वह विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों को भेजती रहती थी. कुछ एक एजेंसियों ने उसे रिस्पौंस भी दिया और उसे औडिशन के लिए भी बुलाया. मौडलिंग की दुनिया में वह कुछ हद तक कामयाब भी हो गई थी. इस से उस का हौसला काफी हद तक बढ़ गया. उसे मौडलिंग के औफर मिलने लगे थे.

वैसे बता दें कि कृतिका मौडल नहीं बनना चाहती थी, क्योंकि शरीर के कपड़े उतार कर देह की नुमाइश करना उसे अच्छा नहीं लगता था. पर फिल्मों में काम करने की ललक उसे ऐसे विज्ञापनों में काम करने को मजबूर करती रही और इन्हीं के सहारे वह मुंबई जा पहुंची.

सन 2009 में कृतिका मायानगरी मुंबई आ गई और मौडलिंग करने लगी. मौडलिंग के साथसाथ वह बौलीवुड की दुनिया में भी अपनी किस्मत आजमाती रही. इसी चक्कर में उस ने मौडलिंग एजेंसियों के कई औफर भी ठुकराए. परिणाम यह हुआ कि उस के पास मौडलिंग एजेसियों के औफर आने बंद हो गए. इस बीच वह कई फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों से भी मिली. लेकिन उन से उसे आश्वासन तो मिले, पर काम नहीं.

इस सब के चलते एक तरह से वह निराशा से घिर गई थी. तभी एक पार्टी में उस की मुलाकात दिल्ली के बिजनैसमैन राज त्रिवेदी से हुई. जल्दी ही राज त्रिवेदी और कृतिका ने शादी कर ली. शादी के बाद दोनों दिल्ली आ गए. लेकिन कृतिका अपनी शादीशुदा जिंदगी में अधिक दिनों तक खुश नहीं रह पाई और एक साल में ही राज त्रिवेदी से तलाक ले कर आजाद हो गई. अपनी शादी की असफलता से कृतिका टूट सी गई थी, लेकिन उस ने अपने सपनों को नहीं टूटने दिया था.

दिल्ली में रहते हुए कृतिका की मुलाकात शातिर ठग विजय द्विवेदी से हुई. विजय द्विवेदी मुंबई के कई बड़े फिल्मी सितारों और राजनेताओं को चूना लगा चुका था. जिन में फिल्म जगत के जानेमाने अभिनेता गोविंदा, टीवी और भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री श्वेता तिवारी तथा बालाजी टेलीफिल्म्स की मालिक एकता कपूर और कांग्रेस के कद्दावर नेता अमरीश पटेल शामिल थे.

30 वर्षीय विजय द्विवेदी मूलरूप से दिल्ली का रहने वाला था. वह मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखता था, साथ ही सुंदर और आकर्षण व्यक्तित्व का मालिक था. खुद को वह कांग्रेस के कद्दावर नेता जनार्दन द्विवेदी का भतीजा बता कर लोगों को अपना परिचय बड़े ही रौब रुतबे वाले अंदाज में देता था. इस से लोग उस के प्रभाव में आ जाते थे. उस ने कृतिका को भी अपना परिचय इसी तरह दिया था. महत्वाकांक्षी कृतिका उस के प्रभाव में आ गई.

विजय द्विवेदी ने कृतिका को जब दिल्ली के एक मौल में शौपिंग करते देखा था, तभी उस ने सोच लिया था कि उसे किसी भी कीमत पर पाना है. वह कृतिका की सुंदरता पर कुछ इस तरह रीझा था कि जबतब कृतिका के आसपास शिकारी चील की तरह चक्कर लगाने लगा. आखिर एक दिन उसे कृतिका के करीब आने का मौका मिल ही गया.

कृतिका के करीब आते ही वह उस की तारीफों के पुल बांधने लगा, साथ ही उस ने उस की दुखती रगों पर हाथ भी रख दिया.उस ने कहा कि उस के जैसी युवती को मौडल, टीवी एक्ट्रेस या फिर फिल्म अभिनेत्री होना चाहिए. उस का यह तीर निशाने पर लगा. नतीजा यह हुआ कि शादी और फिर तलाक होने के बाद भी कृतिका के दिल में बौलीवुड के जो सपने बरकरार थे, उन्हें हवा मिल गई.

आखिरकार विजय द्विवेदी ने कृतिका को अपनी झूठी बातों से अपने प्रेमजाल में फांस लिया. कृतिका की नजदीकियां पाने के लिए उस ने उस की कमजोरी पकड़ी थी. उसे करीब लाने के लिए ही उस ने हाईप्रोफाइल अभिनेताओं और राजनीतिक रसूखदारों के नाम लिए थे. बात बढ़ी तो दोनों की मुलाकातें भी बढ़ गईं. कृतिका को भी विजय द्विवेदी से प्यार हो गया. कृतिका को अपनी मुट्ठी में करने के बाद विजय द्विवेदी ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और कृतिका से शादी कर ली.

सन 2011 में कृतिका विजय द्विवेदी के साथ अपनी किस्मत आजमाने वापस मुंबई आ गई. दोनों अंधेरी वेस्ट के लोखंडवाला कौंपलेक्स इलाके में किराए के एक फ्लैट में साथसाथ रहने लगे. मुंबई आने के बाद कृतिका फिर से बौलीवुड की गलियों में संघर्ष करने लगी. दूसरी ओर विजय द्विवेदी अपने शिकार ढूंढने लगा था. बहरहाल, इस बार एक तरफ कृतिका उर्फ ज्योति चौधरी की किस्मत रंग लाई, वही दूसरी ओर विजय द्विवेदी की किस्मत के सितारे गर्दिश में आ गए.

कृतिका को जल्द ही फिल्म ‘रज्जो’ में कंगना रनौत के साथ एक बड़ा मौका मिल गया. यह फिल्म सन 2013 में बन कर रिलीज हुई तो दर्शकों को कृतिका का अभिनय पसंद आया. इस के बाद कृतिका के सितारे चमकने लगे. फिल्म ‘रज्जो’ के बाद टीवी धारावाहिक ‘परिचय’ से उस की एंट्री एकता कपूर की कंपनी में हो गई.

इस के साथ ही उसे क्राइम धारावाहिक ‘सावधान इंडिया’ में भी काम मिलने लगा. जहां सन 2013 से कृतिका का कैरियर संवरना शुरू हुआ, वहीं विजय द्विवेदी के कैरियर का सितारा सन 2012 डूब गया था. कांग्रेस नेता अमरीश पटेल को ठगने के बाद उस के कैरियर की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी.

कांग्रेस नेता अमरीश पटेल के ठगे जाने की खबर जब उन की पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी को मिली तो वह सन्न रह गए थे. उन्होंने इस मामले का संज्ञान लेते हुए इस की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से कर दी कि कोई उन्हें अपना चाचा बता कर उन की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है. मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया.

क्राइम ब्रांच विजय द्विवेदी के पीछे लग गई. फलस्वरूप सन 2012 के शुरुआती दौर में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उस वक्त वह कांग्रेसी नेता सुरेश कलमाड़ी को अपना शिकार बनाने की कोशिश कर रहा था. कलमाड़ी से भी उस ने खुद को जनार्दन द्विवेदी का भतीजा बताया था. क्राइम ब्रांच ने उसे अपनी कस्डटी में ले कर पूछताछ की तो सारा मामला सामने आ गया.

यह बात जब कृतिका को पता चली तो वह स्तब्ध रह गई. विजय द्विवेदी के संपर्क और एक साल तक उस के साथ रहने के बावजूद भी वह उस की हकीकत नहीं जान पाई थी. दरअसल, वह उस से भी बड़ा ऐक्टर था. बहरहाल, विजय द्विवेदी के ठगी का परदा उठा नहीं कि कृतिका ने उस से तलाक ले लिया. उस का साथ छोड़ कर वह अलग रहने लगी. वह अपनी जिंदगी अपनी तरह से बिता रही थी. छोटे पर्दे पर उस के लिए काम की कोई कमी नहीं थी. हत्या के पहले उस ने खुशीखुशी अपना बर्थडे मनाया था. उस के 2-3 दिनों बाद ही उस की हत्या हो गई थी.

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धीरेधीरे इस घटना को घटे लगभग एक माह के करीब हो गया. लेकिन अभी तक अभियुक्तों के बारे में पुलिस को कोई जानकारी नहीं मिली थी. पुलिस अपनी तफ्तीश की कोई दिशा तय करती, तभी सांताकु्रज के कालिया लैब की रिपोर्ट देख कर उन का ध्यान एमडी ड्रग्स की तरफ गया. इसी बीच कृतिका के परिवार वालों ने बताया कि अपनी पहली शादी और तलाक के बाद वह काफी दुखी थी, जिस के चलते वह ड्रग्स लेने लगी थी.

जांच अधिकारियों ने उन के इसी बयान को आधार बना कर जांच करने का फैसला किया. एसीपी अरुण चव्हाण ने एक नई टीम का गठन किया. इस टीम में उन्होंने क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर उदय राजशिर्के, नंदकुमार गोपाल, खार पुलिस थाने के असिस्टैंट इंसपेक्टर जोगदंड, वैशाली चव्हाण, दयानायक और सावले आदि को शामिल किया. टीम के लोगों को अलगअलग जिम्मेदारी सौंपी गई.

सीनियर इंसपेक्टर सी.एस. गायकवाड़ के निर्देशन में जांच टीम ने पुन: घटनास्थल का निरीक्षण किया और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. इस कोशिश में पुलिस को एक फुटेज में 2 संदिग्ध युवकों की परछाइयां नजर आईं. लेकिन उन का चेहरा स्पष्ट नहीं था. इस के अलावा पुलिस ने करीब 200 लोगों से पूछताछ करने के अलावा कृतिका के फोन की 2-3 सालों की काल डिटेल्स और डाटा निकलवाया. इस के बाद पुलिस को तफ्तीश की एक हल्की सी किरण नजर आई. इसी के सहारे पुलिस कृतिका के हत्यारे ड्रग्स सप्लायर तक पहुंचने में कामयाब हो गई.

दरअसल, कृतिका को ड्रग्स लेने की आदत पड़ गई थी. उसे ड्रग्स आसिफ अली उर्फ सन्नी सप्लाई करता था. वह सिर्फ कृतिका को ही नहीं, बल्कि और भी कई फिल्मी हस्तियों को ड्रग्स सप्लाई किया करता था. इस चक्कर में वह जेल भी गया था. पूछताछ में उस ने बताया कि वह जेल जाने के पहले कृतिका को ड्रग्स सप्लाई करता था, लेकिन उस के जेल जाने के बाद कृतिका उस के दोस्त शकील उर्फ बौडी बिल्डर से ड्रग्स लेने लगी थी.

शकील उर्फ बौडी बिल्डर थाणे पालघर जनपद के उपनगर नालासोपारा (वेस्ट) की एक इमारत में किराए की काफी मोटी रकम दे कर रहता था. ड्रग्स सप्लाई के दौरान कृतिका और शकील खान की अच्छी दोस्ती हो गई थी. इसी के चलते वह कई बार कृतिका को उधारी में ड्रग्स दे देता था. फलस्वरूप कृतिका पर उस के 6 हजार रुपए बकाया रह गए थे. कृतिका उस का पैसा दे पाती, उस के पहले ही वह अगस्त, 2016 के पहले हफ्ते में जेल चला गया था.

शकील नसीम खान के अपने गिनेचुने ग्राहक थे. उन लोगों को ड्रग्स सप्लाई करने के लिए शकील खान बादशाह उर्फ साधवी लालदास से ड्रग्स लेता था. दोनों के बीच उधारी चलती रहती थी. नवंबर, 2016 में जब शकील जेल से बाहर आया तो उस के दोस्त बादशाह ने उस से अपने पैसों की मांग की. कृतिका पर उस के 6 हजार रुपए बाकी थे. दरअसल, एक ही धंधे में होने के कारण शकील खान ने बादशाह से ड्रग्स ले कर कृतिका को सप्लाई किया था. बादशाह ने जब शकील खान पर दबाव बनाया तो उस ने कृतिका से अपने बकाया  पैसों की मांग शुरू कर दी. लेकिन कृतिका उस का पैसा देने में आनाकानी कर रही थी. इस बीच करीब 6 महीने का समय निकल गया.

घटना के दिन शकील खान अपने दोस्त बादशाह को यह कह कर कृतिका के घर ले गया कि पैसा वह कृतिका के घर पर देगा. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. रात का खानापीना करने के बाद चलते समय जब शकील खान ने कृतिका से अपने पैसे मांगे तो उस ने पैसे देने में मजबूरी जताई. इस की वजह से दोनों में विवाद बढ़ गया.

कृतिका ने चिल्ला कर लोगों को एकत्र करने की धमकी दी तो शकील खान को गुस्सा आ गया. उस ने कृतिका के साथ मारपीट शुरू कर दी. शकील खान के पास लोहे का पंच था, जिस से उस ने कृतिका पर कई वार किए. इस के अलावा उस ने पास पड़ी किसी भारी चीज से भी उस के सिर पर वार कर दिया, जिस से उस की मौत हो गई. इस बीच उस का दोस्त बादशाह उन दोनों का बीच बचाव करता रहा. लेकिन कृतिका की जान नहीं बच सकी.

कृतिका की हत्या करने के बाद शकील खान ने कमरे का एसी चालू कर दिया. उस के बाद कृतिका के बदन के सारे जेवर और 22 सौ रुपए नकद ले कर बादशाह के साथ वहां से चला गया. बहरहाल, इन दोनों अभियुक्तों को पुलिस टीम ने 8 जुलाई को रात को नालासोपारा और पनवेल से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया है.

विस्तृत पूछताछ के बाद उन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के उन्हें अदालत पर पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में आर्थर जेल भेज दिया गया. दोनों अभियुक्त अभी जेल में हैं. लेकिन जांच अधिकारियों के सामने अभी भी एक प्रश्न मुंह बाए खड़ा है कि क्या मात्र 6 हजार रुपए के लिए कृतिका की हत्या की गई. ऐसा लगता तो नहीं है. क्योंकि 6 हजार रुपए न तो ड्रग्स सप्लायरों के लिए बड़ी रकम थी और न ही कृतिका के लिए. बहरहाल मामले की जांच अभी जारी है.

मुझे लड़कियों के कपड़े पहनने और उन की तरह सजने संवरने का शौक है, मैं क्या करूं?

सवाल –

मैं 24 साल का लड़का हूं, लेकिन मुझे लड़कियों के कपड़े पहनने और उन की तरह सजने संवरने का शौक है. मैं औरतों जैसी जिंदगी जीना चाहता हूं. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब –

आप ने लड़के के रूप में जन्म लिया है. लिहाजा, आप को लड़कों की तरह ही रहना चाहिए. वैसे, आप किसी माहिर डाक्टर से अपनी जांच कराएं, क्योंकि आप के हारमोनों में खलल हो सकता है, जो इलाज से ठीक हो जाएगा.

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सिर्फ बदन चाहिए प्यार नहीं

मैं एक ट्रांसजैंडर सैक्स वर्कर हूं. यह मेरी अपनी खुद की कहानी है. 12 जून, 1992 को आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के एक मिडिल क्लास परिवार में मेरा जन्म हुआ. हमारा बड़ा सा परिवार था. प्यार करने वाली मां और रोब दिखाने वाले पिता. चाचा, ताऊ, बूआ और ढेर सारे भाईबहन.

मैं पैदा हुआ तो सब ने यही समझा कि घर में लड़का पैदा हुआ है. मुझे लड़कों की तरह पाला गया, लड़कों जैसे बाल कटवाए, लड़कों जैसे कपड़े पहनाए, बहनों ने भाई मान कर ही राखियां बांधीं और मां ने बेटा समझ कर हमेशा बेटियों से ज्यादा प्यार दिया.

हमारे घरों में ऐसा ही होता है. बेटा आंखों का तारा होता है और बेटी आंख की किरकिरी.

सबकुछ ठीक ही चल रहा था कि अचानक एक दिन ऐसा हुआ कि कुछ भी ठीक नहीं रहा. मैं जैसेजैसे बड़ा हो रहा था, वैसेवैसे मेरे भीतर एक दूसरी दुनिया जन्म ले रही थी.

घर में ढेर सारी बहनें थीं. बहनें सजतींसंवरतीं, लड़कियों वाले काम करतीं तो मैं भी उन की नकल करता. चुपके से बहन की लिपस्टिक लगाता, उस का दुपट्टा ओढ़ कर नाचता.

मेरा मन करता कि मैं भी उन की ही तरह सजूं, उन की ही तरह दिखूं, उन की तरह रहूं. लेकिन हर बार एक मजबूत थप्पड़ मेरी ओर बढ़ता.

छोटा था तो बचपना समझ कर माफ कर दिया जाता. थोड़ा बड़ा हुआ तो कभी थप्पड़ पड़ जाता तो कभी बहनें मार खाने से बचा लेतीं. बहनें सब के सामने बचातीं और अकेले में समझातीं कि मैं लड़का हूं. मुझे लड़कों के बीच रहना चाहिए, घर से बाहर जा कर उन के साथ खेलना चाहिए.

लेकिन मुझे तो बहनों के बीच रहना अच्छा लगता था. बाहर मैदान में जहां सारे लड़के खेलते थे, वहां जाने में मुझे बहुत डर लगता. पता नहीं, क्यों वे भी मुझे अजीब नजरों से देखते और तंग करते थे. उन की अजीब नजरें वक्त के साथसाथ और भी डरावनी होती गईं.

मैं स्कूल में ही था, जब वह घटना घटी. दिसंबर की शाम थी. अंधेरा घिर रहा था. तभी उस दिन स्कूल के पास एक खाली मैदान में कुछ लड़कों ने मुझे घेर लिया. उन्हें लगता था कि मैं लड़की हूं. वे जबरदस्ती मुझे पकड़ रहे थे और मैं रो रहा था.

मैं खुद को छुड़ाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा था. उन्होंने जबरदस्ती मेरे कपड़े उतारे और यह देख कर छोड़ दिया कि मेरे शरीर का निचला हिस्सा तो लड़कों जैसा ही था.

इस हाथापाई में मेरे पेट में एक सरिया लग गया. मेरी पैंट खुली थी और पेट से खून बह रहा था. वे लड़के मुझे उसी हालत में अंधेरे में छोड़ कर भाग गए.

मैं पता नहीं, कितनी देर तक वहां पड़ा रहा. फिर किसी तरह हिम्मत जुटा कर घर आया. मैं ने किसी को कुछ नहीं बताया. चोट के लिए कुछ बहाना बना दिया. घर वाले मुझे अस्पताल ले गए. मैं ठीक हो कर घर आ गया.

दुनिया से अलग मेरे भीतर जो दुनिया बन रही थी, वह वक्त के साथ और गहरी होती चली गई. मेरी दुनिया में मैं अकेला था. सब से अपना सच छिपाता, कई बार तो अपनेआप से भी. मैं अंदर से डरा हुआ था और बाहर से जिद्दी होता जा रहा था.

घर में सब मुझे प्यार करते थे, मां और बहन सब से ज्यादा. लेकिन जब बड़ा हो रहा था तो लगा कि उन का प्यार काफी नहीं है. स्कूल में एक लड़का था सनी. वह मेरा पहला बौयफ्रैंड था, मेरा पहला प्यार.

लेकिन बचपन का प्यार बचपन के साथ ही गुम हो गया. जैसेजैसे हम बड़े होते हैं, दुनिया देखते हैं, हमें लगता है कि हम इस से ज्यादा के हकदार हैं, इस से ज्यादा पैसे के, इस से ज्यादा खुशी के, इस से ज्यादा प्यार के. जब साइकिल थी तो मैं उस में ही खुश था. स्कूटी आई तो लगा कि स्कूटी की खुशी इस के आगे कुछ नहीं. साइकिल से मैं कुछ ही किलोमीटर जाता था और स्कूटी से दसियों किलोमीटर. लगा कि आगे भी रास्ते में और प्यार मिलेगा और खुशी.

मैं दौड़ता चला गया. लेकिन जब आंख खुली तो देखा कि रास्ता तो बहुत तय कर लिया था, पर न तो प्यार मिला, न खुशी. मेरे 9 बौयफ्रैंड रहे. हर बार मुझे लगता था कि यह प्यार ही मेरी मंजिल है, लेकिन हर बार मंजिल साथ छोड़ देती. सब ने मेरा इस्तेमाल किया, शरीर से, पैसों से, मन से. लेकिन हाथ किसी ने नहीं थामा.

सब को मुझ से सिर्फ सैक्स चाहिए था. सब ने शरीर को छुआ, मन को नहीं. सब ने कमर में हाथ डाला, सिर पर किसी ने नहीं रखा.

फिर एक दिन मैं ने फैसला किया कि अगर यही करना है तो पैसे ले कर ही क्यों न किया जाए.

मैं बाकी लड़कों की तरह पढ़लिख कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था, अपना कैरियर बनाना चाहता था. मैं ने कानपुर यूनिवर्सिटी से एमकौम किया और सीए का इम्तिहान भी दिया.

अब तक जिंदगी उस मुकाम पर पहुंच चुकी थी कि मैं घर वालों और आसपास के लोगों के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया था. मैं समाज में, कालेज में मिसफिट था.

मैं लड़का था, लेकिन लड़कियों जैसा दिखता था. मर्द था, लेकिन औरत जैसा महसूस करता था. मेरा दिल औरत का था, लेकिन उस में बहुत सारी कड़वाहट भर गई थी.

प्यार की तलाश मुझे जिंदगी के सब से अंधेरे कोनों में ले गई. बदले में मिली कड़वाहट और गुस्सा.

अपनी पहचान छिपाने के लिए मैं दिल्ली आ गया. नौकरी ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन मिली नहीं. शायद उस के लिए भी डिगरी से ज्यादा यह पहचान जरूरी थी कि तुम औरत हो या मर्द. मुझे यह खुद भी नहीं पता कि मैं क्या था.

यहां मैं कुछ ऐसे लोगों से मिला, जो मेरे जैसे थे. उन्हें भी नहीं पता था कि वे औरत हैं या मर्द. अजनबी शहर में रास्ता भूल गए मुसाफिर को मानो एक नया घर मिल गया.

कोई तो मिला, जिसे पता है कि मेरे जैसा होने का मतलब क्या होता है. कोई तो मिला, जो सैक्स नहीं करना चाहता था, लेकिन उस ने सिर पर हाथ रखा. थोड़ी करुणा मिली तो मन की सारी कड़वाहट आंखों के रास्ते बह निकली.

इन नए दोस्तों ने मुझे खुद को स्वीकार करना सिखाया, शर्म से नहीं सिर उठा कर. मैं ने उन के साथ एनजीओ में काम किया, अपने जैसे लोगों की काउंसिलिंग की, उन के मांबाप की काउंसिलिंग की.

सबकुछ ठीक होने लगा था. लेकिन दिल के किसी कोने में अब भी कोई कांटा चुभा था. प्यार की तलाश अब भी जारी थी. कुछ था, जिसे सिर्फ दोस्त नहीं भर सकते थे.

प्यार किया, फिर धोखा खाया. जिस को भी चाहा, वह रात के अंधेरे में प्यार करता और दिन की रोशनी में पहचानने से इनकार कर देता. और फिर मैं ने तय किया कि यह काम अब मैं पैसों के लिए करूंगा. शरीर लो और पैसे दो.

मुझे आज भी याद है मेरा पहला काम. एक सैक्स साइट पर तन्मय राजपूत के नाम से मेरा प्रोफाइल बना था. उसी के जरीए मुझे पहला काम मिला. नोएडा सैक्टर 11 में मैट्रो अस्पताल के ठीक सामने वाली गली में मैं एक आदमी के पास गया. वह आदमी मुझ से सिर्फ 4-5 साल बड़ा था.

मैं ने पहली बार पैसों के लिए सैक्स किया. उन की भाषा में इसे सैक्स नहीं, सर्विस कहते हैं. मैं ने उसे सर्विस दी, उस ने मुझे 1,500 रुपए. तब मेरी उम्र 22 साल थी.

उस दिन वे 1,500 रुपए हाथ में ले कर मैं सोच रहा था कि जेरी, तू ने जो रास्ता चुना है, उस में हो सकता है तुझे बदनामी मिले, लेकिन पैसा खूब मिलेगा. लेकिन हुआ यह कि बदनामी और गंदगी तो मिली, लेकिन पैसा नहीं.

इस रास्ते से कमाए गए पैसों का कोई हिसाब नहीं होता. यह जैसे आता है, वैसे ही चला जाता है. यह सिर उठा कर की गई कमाई नहीं होती, सिर छिपा कर अंधेरे में की गई कमाई होती है.

एक बार जो मैं उस रास्ते पर चल पड़ा तो पीछे लौटने के सारे रास्ते बंद हो गए. अब हर रात यही मेरी जिंदगी है. एक शादीशुदा आदमी की जिंदगी में कुछ दिनों या हफ्तों का अंतराल हो सकता है, लेकिन मेरी जिंदगी में नहीं. हर रात हमें तैयार रहना होता है. 15 ग्राहक हैं मेरे. कोई न कोई तो मुझे बुलाता ही है.

आप को लगता है कि सैक्स बहुत सुंदर चीज है, जैसे फिल्मों में दिखाते हैं. लेकिन मेरे लिए वह प्यार नहीं, सर्विस है. और सर्विस मेहनत और तकलीफ का काम है. हमारी लाइन में सैक्स ऐसे होता है कि जो पैसे दे रहा है, उस के लिए वह खुशी है और जो पैसे ले रहा है, उस के लिए तकलीफ.

ग्राहक जो डिमांड करे, हमें पूरी करनी होती है. जितना ज्यादा पैसा, उतनी ज्यादा तकलीफ. लोग वाइल्ड सैक्स करते हैं, डर्टी सैक्स करते हैं, मारते हैं, कट लगाते हैं. लोगों की अजीबअजीब फैंटैसी हैं. किसी को तकलीफ पहुंचा कर ही मजा मिलता है. किसी को तब तक मजा नहीं आता, जब तक सामने वाले के शरीर से खून न निकल जाए.

मैं यह सबकुछ बिना किसी नशे के पूरे होशोहवास में करता हूं. जो कर रहा हूं, उस से मेरे शरीर को काफी नुकसान हो रहा है. अगर नशा करूंगा, तो मैं अच्छी सर्विस नहीं दे पाऊंगा.

ग्राहक नशा करते हैं और मैडिकल स्टोर से सैक्स पावर बढ़ाने की दवा ले कर आते हैं और मैं पूरे होश में होता हूं. कई बार पूरीपूरी रात यह सब चलता है.

दिन के उजाले में शहर की सड़कों पर बड़ीबड़ी गाडि़यों में जो इज्जतदार चेहरे घूम रहे हैं, कोई नहीं जानता कि रात के अंधेरे में वही हमारे ग्राहक होते हैं. बड़ेबड़े अफसर, नेता, पुलिस वाले… मैं नाम गिनाने लग जाऊं तो आप की आंखें फटी की फटी रह जाएं.

क्या पता कि आप के हाईफाई दफ्तर में घूमने वाली कुरसी पर बैठा सूटबूट वाला आदती रात के अंधेरे में हमारा ग्राहक हो.

एक बार मैं कनाट प्लेस में एक औफिस में इंटरव्यू देने गया. वह एक वक्त था, जब मैं इस जिंदगी से बाहर आना चाहता था. वहां जो आदमी मेरा इंटरव्यू लेने के लिए बैठा था, वह मेरा क्लाइंट रह चुका था.

उस ने कहा, ‘‘इंटरव्यू छोड़ो, यह बताओ, फिर कब मिल रहे हो?’’

मैं कोई जवाब नहीं दे पाया. पता नहीं, मुझे क्यों इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई थी. मैं उस का सामना नहीं कर पाया या अपना. मैं बिना इंटरव्यू दिए ही वापस लौट आया.

मेरी नजर में सैक्स शरीर की भूख है. प्यार कुछ नहीं होता. जहां प्यार हो, सैक्स जरूरी नहीं. दुनिया में जो प्यार का खेल चलता है, उस का सच कभी हमारी दुनिया में आ कर देखिए. अच्छेखासे शादीशुदा इज्जतदार लोग आते हैं हमारे पास अपनी भूख मिटाने.

एक बार एक आदमी मेरे पास आया और बोला, ‘‘मेरी बीवी पेट से है. मुझे रिलीज होना है.’’

मैं ने उस आदमी के साथ ओरल सैक्स किया था. यह सब क्या है? एक औरत जो तुम्हारी पत्नी है, उस के पेट में तुम्हारा ही बच्चा पल रहा है, वह तुम्हें सैक्स नहीं दे सकती तो तुम सैक्स वर्कर के पास जाओगे?

ज्यादातर मर्दों के लिए औरत के सिर्फ 2 ही काम हैं कि वह उन के साथ सोए और उन के मां बाप की सेवा करे. 90 फीसदी मर्दों की यही हकीकत है. ज्यादातर लोग अपनी बीवी से प्यार नहीं करते हैं.

बेहतर सेक्स के लिए आज ही शुरू करें कीगल ऐक्सरसाइज

सेक्स में कीगल ऐक्सरसाइज का अपना महत्त्व है. कीगल ऐक्सरसाइज को पेल्विक फ्लोर ऐक्सरसाइज भी कहा जाता है. पेल्विक एरिया को मजबूत बनाने के लिए कीगल ऐक्सरसाइज सब से अच्छा तरीका है. महिलाओं में कमर के आसपास के एरिया में दर्द की शिकायत होती है. पेल्विक फ्लोर मसल्स के कमजोर होने से यह दर्द होता है. इन मसल्स को मजबूत करने के लिए महिलाएं कीगल ऐक्सरसाइज करती हैं, जिस से यह एरिया मजबूत होता है.

सेक्स से भी ठीक यही अनुभूति होती है, जो कीगल ऐक्सरसाइज से होती है और महिलाओं को काफी आराम मिलता है. इस से और्गेज्म प्राप्त करने में मदद मिलती है. पेल्विक एरिया मजबूत होने से महिलाएं अपनी पेल्विक मसल्स और और्गेज्म को अच्छी तरह कंट्रोल कर पाती हैं.

कीगल ऐक्सरसाइज करना आसान है. इस के लिए आप को बस अपने पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को कौंट्रैक्ट और रिलैक्स करना है. इस से न सिर्फ आप का यूरिनरी ट्रैक्ट मजबूत होगा, बल्कि इस से महिलाएं यूरिन और बाउल मूवमैंट को भी कंट्रोल कर पाती हैं.

पेल्विक मसल्स कमजोर होने के कई कारण हैं जैसे कि- प्रैगनैंसी, वैजाइनल बर्थ, मोटापा, खांसी यहां तक कि बढ़ती उम्र की वजह से भी ये मसल्स कमजोर हो जाती हैं. इस की वजह से यूरिनरी ब्लैडर पर कंट्रोल नहीं रह पाता और यूरिन कभी भी निकल जाता है. कीगल ऐक्सरसाइज करने से महिलाओं को सेक्स के समय अच्छी अनुभूति होती है, जिस का प्रभाव पतिपत्नी की सेक्स लाइफ पर पड़ता है. बेहतर सेक्स के लिए कीगल ऐक्सरसाइज बहुत ही जरूरी होती है.

कीगल एक्‍सरसाइज के 10 प्रकार हैं- 

– द पेल्विक टिल्ट (The Pelvic Tilt)

– क्लासिक कीगल (Classic Kegal)

– पेल्विक पुश-अप्स (Pelvic Push-Ups)

– शोल्डर ब्रिज (Shoulder Bridge)

– साइड लेग लाइंग लिफ्ट (Side Leg Lying Lift)

– द बटरफ्लाई (The Butterfly)

– डीप ब्रीदिंग (Deep Breathing)

– स्पाइनल ट्विस्ट (Spinal Twist)

– रोलिंग नीज (Rolling Knees)

– लेग-पेल्विक स्ट्रेच (Leg Pelvic Stretch)

जानें 18 से लेकर 70 साल तक का फुल लाइफ डाइट प्लान

अगर आप हमेशा हेल्दी रहना चाहते है तो आपको अपने खान पान का ख्याल रखना चाहिए. शरीर में चुस्ती फुरथी बनाए रखने के लिए जितना व्यायाम और कसरत जरुरी है उतना ही  अपनी डाइट का भी ख्याल रखना जरुरी है. कुछ लोगों को लगता है कि अच्छे खानपान का मतलब यह है कि आप अपनी मनपसंद चीजें ना  खाएं, मगर ऐसा नहीं है. अगर आप Balanced Diet लेते है तो इसके जरीए आप खुद को लंबी उम्र तक स्वस्थ रख सकते हैं. इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए है 18 साल की उम्र से लेकर 70 साल की उम्र तक आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, यानी पूरा डाइट प्लान. जिसकी बदद से आप खुद और भी स्वस्थ रख सकते है.

Diet Plan for Age 18-30

आपका मेटाबौलिज्म उम्र के साथ-साथ घटता जाता है. आमतौर पर ये घटाव 18 साल के बाद शुरू हो जाता है, इसलिए इस उम्र से आपको अपने खानपान पर थोड़ा ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए. 18-30 साल की उम्र के बीच आपके शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत आयरन और कैल्शियम की होती है. इस उम्र में 11.3 मिलीग्राम आयरन लड़कों के लिए और 14.8 मिलीग्राम आयरन लड़कियों के लिए जरूरी है. इसके अलावा सभी को 800 से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है.

इसलिए आपको खाने में ऐसी चीजे लेनी चाहिए जो ये जरूरत पूरी कर सकें, जैसे- कैल्शियम के लिए दूध पिएं और दूध से बनी चीजें, दही, पनीर, चीज़, योगर्ट आदि खाएं. इसके अलावा आयरन की जरूरत पूरी करने के लिए सप्ताह में 3-4 दिन हरी सब्जियां, दालें खाएं और रोजाना 1-2 कटोरी फल खाएं. इसके अलावा रोजाना नाश्ते या लंच में 2 अंडे खाना भी अच्छा होगा. रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें.

Diet Plan for Age 30-40

30 से 40 साल की उम्र में आमतौर पर व्यक्ति अपना पूरा फोकस अपने करियर पर रखता है. ऐसे में तनाव और चिंता का उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इसलिए इस उम्र में आपको प्रोटीन, विटामिन्स और एंटीऔक्सीडेंट्स से भरपूर आहार लेने चाहिए. सुबह के नाश्ते में अंडे, फल, ओट्स, शेक, स्मूदी आदि लें. औयली फूड्स (तेल में छने-पके फूड्स) को सेवन बहुत ज्यादा न करें. चीनी और नमक की मात्रा खाने में थोड़ा-थोड़ा घटाते रहें, जिससे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोग न हों.

इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि आप रात में बहुत ज्यादा खाना न खाएं. बाकी खाने में आपको दाल, रोटी, चावल, सब्जी, ग्रिल्ड चिकन, फल, मोटे अनाज, अंडे, दूध का सेवन करना चाहिए. रोजाना अखरोट, बादाम, काजू, किशमिश आदि का सेवन करना भी आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज और थोड़ा पैदल चलना जरूरी है.

Diet Plan for Age 40-50

40-50 साल की उम्र old age का पहला पायदान होता है. इस उम्र तक आपका शरीर धीरे-धीरे ढलने लगता है और रोगों की शुरुआत होने लगती है. इस उम्र में आप अपने खानपान को जितना ज्यादा संतुलित रखेंगे, आप उतना स्वस्थ रहेंगे, क्योंकि ज्यादातर रोग इसी उम्र में लोगों को परेशान करते हैं. रोगों से बचने के लिए आपको अपने खाने में नट्स (अखरोट, बादाम, पिस्ता आदि) को शामिल करना चाहिए.

इसके अलावा खाने के तेल में बदलाव करना चाहिए. खाना बनाने के लिए आप औलिव औयल, नारियल का तेल आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. डाक्टर से सलाह लेकर आप फिश औयल सप्लीमेंट (मछली के तेल का कैप्सूल) भी ले सकते हैं. इसके अलावा आपका नाश्ता कार्बोहाइड्रेट्स से कम, प्रोटीन से ज्यादा भरा होना चाहिए. इसलिए आप मल्टीग्रेन आटा, होल व्हीट ब्रेड, होल व्हीट टोस्ट और मोटे अनाज आदि खा सकते हैं.

Diet Plan for Age 50-60

महिलाओं में इस उम्र तक मेनोपौज हो जाती है और पुरुषों में भी कई तरह के बदलाव हो जाते हैं. इसलिए ये उम्र भी स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. इस उम्र तक इंसान की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए साल में 2 बार अपने स्वास्थ्य की जांच करवाते रहना चाहिए. इस उम्र तक आपको चाय, कौफी, एल्कोहल का सेवन बिल्कुल छोड़ देना चाहिए.

50 साल की उम्र के बाद सोडियम वाले आहारों का सेवन बहुत कम कर देना चाहिए. नमक बहुत कम मात्रा में खाना चाहिए और तेल में पकाने के बजाय सब्जियों को भाप में पकाकर खाना चाहिए. कमजोरी से बचने के लिए आपको फलों, कच्ची सब्जियों, सलाद, मोटे अनाज आदि का सेवन करते रहना चाहिए.

Diet Plan for Age 60-70

इस उम्र तक ज्यादातर लोग काम से रिटायरमेंट ले लेते हैं. इस उम्र में आपकी हड्डियों, आंखों और हृदय रोगों का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसलिए इनसे बचे रहने के लिए आपको गाजर, आंवला, ब्रोकली, संतरे, पालक, अंडे आदि का सेवन करना चाहिए, ताकि आपके शरीर को पर्याप्त कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऔक्सीडेंट्स मिल सकें. आपको पहले की अपेक्षा कम खाना खाना चाहिए और ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो आसानी से पच जाएं.

तो ये फुल लाइफ डाइट प्लान जिसे आप खुद पर और आपने बच्चों पर ट्राय कर स्वस्थ रह सकते है.

राजीव सेन-चारु असोपा ने 4 साल बाद लिया तलाक, कहा- प्यार यू हीं बना रहेगा

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से फेम हुई जोड़ी चारु असोपा और राजीव सेन का तलाक हो गया है 8 जून को दोनों की तलाक की आखिरी सुनवाई हुई. जिसके बाद दोनों का तलाक हो गया है. 4 साल की शादी को दोनों ने आखिर अब खत्म कर दी है. इस बात की जानकारी खुद राजीव सेन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दी है. अपनी और चारु की फोटो इंस्टाग्राम पर एक साथ पोस्ट की और कैप्शन भी दिया. और बताया किवे जियाना के माता-पिता के तौर पर आगे भी साथ रहेंगे.

 

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आपको बता दें, कि चारू असोपा संग तलाक के बाद राजीव सेन ने इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट की. उन्होंने चारू असोपा संग फोटो शेयर कर लिखा, “यहां कोई भी अलविदा नहीं. बस दो लोग जो एक-दूसरे के साथ नहीं रह पाए. प्यार यूं ही बना रहेगा. हम अपनी बेटी के मां-बाप बनकर जियेंगे.” बता दें कि चारू असोपा और राजीव सेन के तलाक की सुनवाई साल के शुरुआत से ही चल रही थी.

 

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राजीव सेन ने अपने और चारू असोपा के तलाक का अपडेट देते हुए कहा, “हमारा तलाक हो गया है.” जहां राजीव सेन ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी. वहीं तलाक के बाद अभी तक चारू असोपा का कोई बयान सामने नहीं आया है. यहां तक कि उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कोई पोस्ट शेयर नहीं की है. बता दें कि चारू असोपा और राजीव सेन की शादी में बीते कई वक्त से खटपट चल रही है. कई बार दोनों ने अपनी बेटी की वजह से साथ आने का भी फैसला किया था, लेकिन बात नहीं बन पाई. बीते साल चारू और राजीव ने एक-दूजे पर संगीन आरोप भी लगाए थे. राजीव ने बताया था कि चारू ने अपनी पहली शादी उनसे छुपाई. जबकी चारू का कहना था कि राजीव ने उनपर हाथ उठाया है

उर्फी जावेद ने पहना अतंरगी लिबास, लोगों ने कहा – जादू लग रही हो

उर्फी जावेद एक ऐसा नाम है जो अपने फैशन सेंस के लिए जानी जाती है उनके अतरंगी फैशन को लोग खूब पसंद करते है तो कभी उन्हे ट्रोल भी करते है उर्फी हमेशा ही कुछ यूनिक ट्राएं करती है जो उनके फैशन में चार-चांद लगा देता है ऐसे में एक बार फिर उर्फी ने कुछ  ऐसा कैरी किया है लोग अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे है. ब्लू कलर के आउटफिट में उर्फी को लोग स्पाइडर मैन की मौसी कह रहे है.

 

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आपको बता दें, कि उर्फी ने इस बार ब्लू कलर का ड्रेस कैरी किया है जिसमें उर्फी ने हाथ, मुंह का डिजाइन दिया है साथ में रेड कलर की हील्स कैरी की हुई है. इसे देख लोग स्पाइडर मैन की मौसी बता रहे है. एक तस्वीर में टीवी की ड्रामा क्वीन बिल्ली से खेलती नजर आ रही हैं. इन फोटोज को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, “मास्क ऑन.

 

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इन तस्वीरों के सामने आने के बाद लोग उर्फी जावेद का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “एक मस्क्कली थी और एक ये छपकली है.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने तो उर्फी को ‘कोई मिल गया’ का ‘जादू’ ही बता दिया। यूजर ने लिखा, “जादू बन गईं आप तो. उर्फी जावेद ने इस आउटफिट में पैप्स से बातचीत भी की  हैं. फोटोज में एक्ट्रेस का यह यूनिक लुक देखकर फैंस भी क्लीन बोल्ड हो गए हैं.  उर्फी जावेद के इस आउटफिट के लोग जमकर मजे ले रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “रोज इतना ओपन रहता है, आज उसका अपोजिट है.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “उर्फी दीदी ये क्या हुलिया बना रखा है.

 

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बता दें कि एक्ट्रेस उर्फी जावेद ‘बिग बॉस ओटीटी’ से फेमस हुई थीं. उर्फी ने करण जौहर के शो में कदम रखते ही अपने अतरंगी फैशन आइडियाज से तहलका मचा दिया था. हालांकि इस घर में उर्फी केवल एक हफ्ते तक ही टिक पाई थीं.

चोरी छिपे शादी, बनी बरबादी

भरेपूरे परिवार की 28 साला प्रीति रघुवंशी को अपने ही कसबे उदयपुरा के 30 साला गिरजेश प्रताप सिंह से तकरीबन 6 साल पहले प्यार हो गया था. उन के घर भी आमने सामने थे.

प्रीति के पिता चंदन सिंह रघुवंशी खातेपीते किसान हैं और उदयपुरा में उन की अच्छी पूछपरख है. गिरजेश के पिता ठाकुर रामपाल सिंह मध्य प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं.

कर ली शादी

दोनों को मालूम था कि घर वाले आसानी से उन की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे, लिहाजा उन्होंने पिछले साल 20 जून, 2017 की चिलचिलाती गरमी में भोपाल आ कर नेहरू नगर के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. मंदिर के कर्ताधर्ता प्रमोद वर्मा ने शादी कराई और गिरजेश को शादी का सर्टिफिकेट भी दे दिया.

प्रीति घर वालों से इलाज की कह कर भोपाल आई थी. उस के साथ उस का छोटा भाई नीरज सिंह भी था जो शादी में भी शामिल हुआ था.

नीरज को प्रीति ने भरोसे में ले कर सारी बात बता दी थी. गिरजेश की तरफ से शादी में उस के कुछ नजदीकी दोस्त शामिल हुए थे.

शादी के बाद प्रीति घर वापस आ गई और उस दिन का इंतजार करने लगी जब गिरजेश और उस के घर वाले उसे लेने आएंगे.

नीरज ज्यादा देर तक अपनी बहन की शादी की बात पचा नहीं पाया और उस ने घर में यह बात बता दी. इस पर पूरा घर सनाके में आ गया. पर वे सभी मुनासिब वक्त का इंतजार करने लगे.

बेवफाई बनी फंदा

उदयपुरा में प्रीति का एकएक दिन एकएक साल के बराबर गुजर रहा था. कभीकभार गिरजेश से फोन पर बात होती थी तो वह खुश और बेचैन भी हो उठती थी. गिरजेश हमेशा की तरह उसे हिम्मत बंधाता था कि बस कुछ दिन की बात और है, फिर सबकुछ ठीक हो जाएगा.

लेकिन वह दिन कभी नहीं आया. अलबत्ता, होली के बाद कहीं से प्रीति को खबर लगी कि गिरजेश की सगाई उस के घर वालों ने कहीं और कर दी है. खबर गलत नहीं थी. वाकई गिरजेश की सगाई टीकमगढ़ जिले में हो चुकी थी और फलदान भी हो चुका था.

16 मार्च, 2018 की रात गिरजेश उदयपुरा आया तो प्रीति की बांछें खिल उठीं. रात में ही उस ने गिरजेश से फोन पर बात की जो ठीक उस के घर के सामने रुका था. क्या बातें हुईं थीं, यह बताने के लिए प्रीति तो अब जिंदा नहीं है और गिरजेश मुंह छिपाता फिर रहा है. सुबह 5 बजे प्रीति ने अपने गले में फांसी का फंदा डाल कर खुदकुशी कर ली.

सियासत तले मुहब्बत

सुबह के तकरीबन 10 बजे सोशल मीडिया पर यह मैसेज वायरल हुआ कि उदयपुरा में प्रीति रघुवंशी नाम की लड़की ने खुदकुशी कर ली है और वह राज्य के रसूखदार मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह की बहू है, तो हड़कंप मच गया.

जल्द ही सारी कहानी सामने आ गई. प्रीति का लिखा सुसाइड नोट भी वायरल हुआ जिस में उस ने अपनी गलती के बाबत बारबार मम्मीपापा से माफी मांगते हुए किसी को परेशान न किए जाने की बात लिखी थी. अपने आशिक या शौहर गिरजेश का उस ने अपने सुसाइड नोट में जिक्र तक नहीं किया था.

8 महीने से सब्र कर रहे प्रीति के घर वाले भी अब खामोश नहीं रह पाए और उन्होंने ठाकुर रामपाल सिंह और गिरजेश पर इलजाम लगाया कि ये दोनों प्रीति को दिमागी तौर पर परेशान कर रहे थे, इसलिए प्रीति ने खुदकुशी कर ली.

बात चूंकि ठाकुर रामपाल सिंह सरीखे रसूखदार और दिग्गज मंत्री के बेटे की थी, इसलिए कांग्रेसियों ने मौका भुनाने की भूल नहीं की और गिरजेश की गिरफ्तारी और रामपाल सिंह को मंत्रिमंडल से बरखास्त करने की मांग पर वे अड़ गए.

चौतरफा समर्थन मिलता देख कर प्रीति के पिता चंदन सिंह रघुवंशी इस जिद पर अड़ गए कि ठाकुर रामपाल सिंह प्रीति को बहू का दर्जा दें और गिरजेश उस का अंतिम संस्कार करे तभी वे प्रीति की लाश लेंगे नहीं तो प्रीति की लाश नैशनल हाईवे पर रख कर प्रदर्शन किया जाएगा.

चंदन सिंह रघुवंशी ने ठाकुर रामपाल सिंह और गिरजेश के खिलाफ उदयपुरा थाने में शिकायत भी दर्ज कराई.

उधर ठाकुर रामपाल सिंह ने दोटूक कह दिया कि उन के बेटे गिरजेश को फंसाया जा रहा है और प्रीति उन की बहू नहीं है तो पूरा रघुवंशी समाज उदयपुरा में इकट्ठा हो कर विरोध करने लगा.

बात इतनी बिगड़ी कि उदयपुरा छावनी में तबदील हो गया और रायसेन की कलक्टर और एसपी समेत दूसरे आला अफसर मामला सुलझाने की कोशिश में जुट गए.

जैसेतैसे बड़ेबूढ़ों के समझाने पर प्रीति के घर वालों ने उस का दाह संस्कार किया लेकिन जांच की मांग नहीं छोड़ी तो पाला बदलते ठाकुर रामपाल सिंह प्रीति को बहू का दर्जा देने के लिए तैयार हो गए.

इस से बात सुलझती नजर आई लेकिन फिर जल्द ही बिगड़ भी गई क्योंकि जांच के नाम पर पुलिस प्रीति के घर वालों को ही परेशान करने लगी थी और गिरजेश के खिलाफ रिपोर्ट नहीं लिख रही थी.

25 मार्च, 2018 को जैसेतैसे प्रीति के पिता चंदन सिंह रघुवंशी के बयान दर्ज हुए, पर तब तक भी पुलिस ने गिरजेश के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी.

जातपांत का फेर

गिरजेश ने सरासर बुजदिली दिखाई और भोलीभाली प्रीति को धोखा दिया. उस की शादी की खबर ठाकुर रामपाल सिंह को थी लेकिन वे जातिगत ठसक और जिद के चलते बेटे की चोरीछिपे की शादी को मंजूरी नहीं दे पाए.

प्रीति की गलती यह थी कि उस ने गिरजेश पर आंखें मूंद कर भरोसा किया और चोरी से शादी भी कर ली. लेकिन गिरजेश वादे से मुकर गया तो वह घबरा उठी.

प्रीति अगर मरने के बजाय दिलेरी से अपनी शादी का राज खोल कर अपना हक मांगती तो नजारा कुछ और होता.

प्रीति की मौत एक सबक है कि आशिक पर भरोसा कर उस से चोरीछिपे शादी करना जिंदगी दांव पर लगाने जैसी बात है. वजह, जो शख्स चोरी से शादी कर रहा हो उस के पास मुकरने और धोखा देने का पूरा मौका रहता है.

कई लड़कियां तो चोरी से शादी कर पेट से हो आती हैं और दोहरी परेशानी और जिल्लत झेलती हैं. वे शादी का सुबूत दें तो भी उस पर कोई तवज्जुह नहीं देता.

यह भी साफ दिख रहा है कि जातपांत में जकड़ा समाज कहने भर को मौडर्न हुआ है, नहीं तो हकीकत प्रीति के मामले से सामने है कि बदला कुछ खास नहीं है.

शादी से पहले मैं एक लड़के से प्यार करती थी और वह अब मुझ से शादी करना चाहता है, मैं क्या करूं?

सवाल –

मैं 25 साल की हूं. शादी के 2 साल बाद ही पति की मौत हो गई. शादी से पहले मैं एक लड़के से प्यार करती थी. वह अब मुझ से शादी करना चाहता है. मैं क्या करूं?

जवाब-

अगर अब भी वह आप से शादी करना चाहता है, तो उस से कहें कि वह आप के मातापिता से बात करे. इस बात का खयाल रखें कि कहीं वह शादी का झांसा तो नहीं दे रहा.

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सेक्स रिलेशनशिप: मजा कम, मुसीबतें ज्यादा

अमेरिकी यूनिवर्सिटी के एक शोध से पता चला है कि कम उम्र में सेक्स संबंध बनाने वाली युवतियां, युवकों के मुकाबले ज्यादा परेशान होती हैं जबकि बड़ी उम्र की युवतियां सेक्स में ऐक्टिव होती हैं, पर उन के साथ धोखे की आशंका कम होती है. फिल्म ‘दृश्यम’ में युवक द्वारा युवती को ब्लैकमेल करने का सीन फिल्म का केंद्रबिंदु है, जिस पर पूरी फिल्म की कहानी बुनी हुई है.

फिल्म में भले ही युवकयुवती एकदूसरे से प्यार नहीं करते पर सहपाठी व हमउम्र जरूर है. यहां बात युवक और युवती के रिलेशनशिप को ले कर हो रही है कि कैसे एक युवक युवती की मजबूरी का फायदा उठाना चाहता है. एमएमएस या अश्लील  वीडियो नैट पर डालने वाली बातें ज्यादातर युवकों का हथियार बन चुकी हैं. युवती को न केवल ब्लैकमेलिंग का डर सताता रहता है बल्कि एक बार संबंध बन जाने पर अनेक मुसीबतों से खुद ही निबटना पड़ता है.

डेट पर जाना पड़ता है भारी

गर्लफ्रैंडबौयफ्रैंड का डेट पर जाना कोई नई बात नहीं, लेकिन उस दौरान पार्टनर के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है. डेटिंग के दौरान वे एकदूसरे के बेहद नजदीक आ जाते हैं. केवल मौजमस्ती के लिए बनाया गया संबंध आगे चल कर युवतियों के लिए मुसीबतों का सबब बन जाता है. यदि बिना सावधानी बरते सेक्स करते हैं तो बाद में युवतियों को ही कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि युवकों को तो सिर्फ ऐंजौयमैंट से मतलब होता है और वे बाद में इस से युवतियों के समक्ष आने वाली परेशानियों से पल्ला झाड़ लेते हैं. इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है.

आइए, जानें क्या हैं वे मुसीबतें

अनचाहे गर्भ का डर

सेक्स के दौरान गर्भनिरोधी उपाय अपनाएं, अन्यथा आप को यह डर जीने नहीं देगा कि कहीं डेट न मिस हो जाए, इस बार गर्भ न ठहरे, अगली बार मैं अवश्य इस दौरान सावधानी बरतूंगी. इस के अलावा आईपिल का प्रैशर डालेंगी. अगर बौयफ्रैंड ने ला कर नहीं दी तो आप तो फंस गई समझो. खुद खरीदने जाएंगी नहीं. डेट मिस होने पर आप ऐबौर्शन किट का प्रयोग करेंगी पर उस को खरीदने में भी आप को कई तरह का गणित लगाना पड़ेगा.

संक्रमण का खतरा

असुरक्षित सेक्स से संक्रमण का खतरा बना रहता है. जल्दबाजी के चक्कर में तमाम युवा असुरक्षित सेक्स करने के आदी हो जाते हैं. उन का बजट इतना नहीं होता कि वे अच्छे होटल में जाएं. सस्ते होटल में जाने से वहां का गंदा टौयलेट, गंदा बिस्तर और तमाम तरह की अन्य चीजों से आप को इन्फैक्शन का खतरा हमेशा बना रहता है. अगर बौयफ्रैंड के घर जा रही हैं और वह अकेला रहता है तो भी आप को गंदगी का सामना करना पड़ेगा और आप चाह कर भी इस गंदगी से अपनेआप को बचा नहीं पाएंगी. असुरक्षित सेक्स से आप को एसटीडी (सैक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) होने का खतरा भी रहता है.

डिप्रैशन का शिकार

असुरक्षित सेक्स के साथ छिप कर बौयफ्रैंड के साथ कहीं जाने का प्लान हो या फिर परिचितों के मिलने से भेद खुलने का डर, इन सभी बातों से आप का मन कभी शांत नहीं रह पाएगा. इस के साथ ही आप को बारबार लगेगा कि कहीं आप प्रैगनैंट तो नहीं. यह खयाल आप को डिप्रैशन का शिकार भी बना सकता है.

असुरक्षा का डर सताता है

बौयफ्रैंड के साथ रिलेशनशिप जरूरी नहीं कि अच्छी ही हो, हो सकता है वह आप को किसी और के लिए चीट या झूठ बोल रहा हो. यह डर आप के मन में चौबीसों घंटे कौंधता होगा, इसलिए जल्द से जल्द ऐसी रिलेशनशिप से बाहर निकलें या फिर अपने मन का वहम खत्म करें.

कंगाल न हो जाएं आप

यह जरूरी नहीं कि बौयफ्रैंड को ही खर्च करना पड़ता है. समयसमय पर गर्लफ्रैंड बौयफ्रैंड की जेबें भी भरती है. अगर युवती कामकाजी है और युवक बेरोजगार तो वहां भी गर्लफ्रैंड को कई बार अपने बौयफ्रैंड को पैसे देने पड़ेंगे. कुछ बौयफ्रैंड अकसर पौकेटमनी खत्म होने का बहाना बना कर, उधारी की जिंदगी काटना चाहते हैं. ऐसे में तब गर्लफ्रैंड को अपनी पौकेट खाली करनी पड़ जाती है. अगर आप ने गलती से अपने बौयफ्रैंड को हजारों रुपए उधार दिए हैं तो समझो बे्रकअप के बाद वह भी नहीं मिलेंगे. इसलिए सोचसमझ कर ही कदम उठाएं.

पेरैंट्स से झूठ छिपाना पड़ता है भारी

एक झूठ छिपाने के लिए हजार झूठ बोलने पड़ते हैं. पहले तो बौयफ्रैंड के साथ रात बिताने के लिए आप अपने पेरैंट्स से झूठ बोलती हैं कि आज आप और आप की सहेली रात भर पढ़ेंगे इसलिए आप उस के घर जा रही हैं. मान लीजिए, वहां पहुंच कर कुछ अनहोनी हो जाए तो पेरैंट्स से उस बात को छिपाने का फैसला भारी लगने लगता है. साथ ही पेरैंट्स से तमाम तरह के झूठ बोल कर आप हमेशा शर्मिंदगी भी महसूस करेंगी इसलिए अच्छा है कि सच को छिपाएं नहीं.

पलपल होती ब्लैकमेलिंग का शिकार

आप का एमएमएस बन जाने पर आप को पलपल ब्लैकमेलिंग का शिकार होना पड़ सकता है. हो सकता है कि आप का बौयफ्रैंड ऐसा न करे, पर होटल में लगे छिपे कैमरे या कुछ अराजक तत्त्व मिल कर आप को ब्लैकमेल कर पैसा और आप की आबरू दोनों को अपना हथियार बना सकते हैं. इस मुसीबत का सामना करने वाली कुछ युवतियां सुसाइड तक कर लेती हैं या कुछ अपने हक के लिए ताउम्र अपनी लाइफ कानूनी पचड़ों में पड़ कर खराब कर देती हैं. इस से बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है.

सिंगल रहने के फायदे

  • पहरेदारी से आप को छुटकारा मिलेगा. कोई रोकेगाटोकेगा नहीं. आप अपनी लाइफ खुल कर जी सकेंगी.
  • बौयफ्रैंड से देर रात तक चैट या बात करने से छुटकारा मिलता है. आप जब चाहें जागें और जब चाहे सोएं.
  • अपनेआप को जानने का मौका मिलेगा. आप के पास इतना समय होगा कि आप अपने लक्ष्य, अपनी पर्सनैलिटी, कमजोरी व स्टै्रंथ को पहचान पाएंगी. इस से आप को एक नई राह मिलेगी.
  • सिंगल रहने पर आप को कोई झूठ या बहाना नहीं मारना पड़ेगा. इस से आप का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. हिम्मत आएगी और आप का फोकस सिर्फ आप के कैरियर और परिवार पर ही रहेगा.
  • आप हमेशा बिजी नहीं रहेंगे. इस से आप ज्यादा से ज्यादा बाहर जा कर अपने दोस्तों व परिचितों से मिल पाएंगे और सोशल बनेंगे.

सिंगल रहने के वैज्ञानिक तर्क

हैल्दी हार्ट

जनरल औफ मैरिज ऐंड फैमिली 2006 में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, ‘‘9 हजार मध्यम आयुवर्ग के वयस्कों पर एक रिसर्च की गई जिस में पाया गया कि कुंआरे लोगों को सब से कम दिल की बीमारियां होती हैं.’’

बौडी फिट तो आप हिट

अमेरिकी जनरल औफ प्रिवैनटेटिव मैडिसन में हुए शोध के मुताबिक 13 हजार पुरुषों और महिलाओं पर जिन की उम्र 18 से 64 वर्ष के बीच है, एक सर्वे हुआ. सर्वे के नतीजों से पता चला कि जिन की शादी नहीं हुई वे अपने काम में फिट रहते हैं और उन की बौडी भी आकर्षक दिखती है.

समझौता नहीं करना पड़ेगा

मनोवैज्ञानिक और ऐजिंग की प्रकाशित 1,649 लोगों पर हुई स्टडी के अनुसार, ‘सिंगल लोगों को कम समझौते करने पड़ते हैं, जिन की वैवाहिक जिंदगी अच्छी नहीं चलती, उन्हें तमाम समझौते करने पड़ते हैं व तनाव से गुजरना पड़ता है और उन की उम्र भी अधिक लगने लगती है.’

बौलीवुड सैलिब्रिटीज की बात

हम अकसर फिल्में देख कर ऐक्टर व ऐक्ट्रैस के स्टाइल को कौपी करते हैं, लेकिन उन की लाइफ को नजरअंदाज कर देते हैं. आइए, जानें वह सिंगल रह कर अपनी लाइफ किस तरह ऐंजौय कर रहे हैं : बौलीवुड स्टार सलमान खान का कहना है, ‘‘मैं सिंगल ही ठीक हूं. डबल रह कर मुझे मुसीबत नहीं लेनी.’’ यह सिंगल रहने वाली बात सलमान खान ने ‘प्रेम रतन धन पायो’ फिल्म के प्रमोशन के दौरान एक इंटरव्यू में कही थी. ऐक्ट्रैस अदिति राव हैदरी ने भी एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि मुझे सिंगल रह कर अपनी लाइफ को ऐंजौय करना ज्यादा पसंद है इसलिए फिलहाल मेरा शादी का कोई प्लान नहीं है. ऐक्ट्रैस बिपाशा बसु का ही उदाहरण लें. अपने सीरियस रिलेशनशिप से बे्रकअप के बाद फिल्मों में जल्द मूवऔन करने की उन की कोशिश भी काबिलेतारीफ है. वे अब अपनी लाइफ को अधिक ऐंजौय कर पा रही हैं. हालांकि अब उन्होंने शादी कर ली है.

अभिनेता रितिक रोशन पत्नी सुजैन से तलाक के बाद सिंगल हैं. वैसे रितिक और सुजैन अब अपनी लाइफ को ज्यादा खुल कर ऐंजौय कर रहे हैं. शायद सिंगल रहने वाली बात दोनों को देर से समझ आई. घुटघुट कर जीने से बेहतर है कि अकेले रहें और अपनी लाइफ को अपने अनुसार चलाएं.

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