स्ट्रीट जस्टिस : सजा देने का नया तरीका

पंजाब में पिछले लंबे अरसे से नशा भारी परेशानी का सबब बना हुआ है. इस बार सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के पीछे का मुख्य कारण भी यही था. क्योंकि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पंजाब से नशे को समूल खत्म करने का वादा किया था.

17 मार्च, 2017 को पंजाब राजभवन में प्रदेश के 26वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस की इस घोषणा को एक बार फिर से दोहराया था कि आने वाले एक महीने में उन की सरकार पंजाब से नशे का नामोनिशान मिटा देगी.

इस के बाद जल्दी ही एडीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू की अगुवाई में एक स्पैशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया, जिस में करीब 2 दर्जन आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों के अलावा अन्य अफसरों को शामिल किया गया. इन का काम युद्धस्तर पर काररवाई कर के नशा कारोबारियों को काबू कर के पंजाब से ड्रग्स के धंधे को पूरी तरह मिटाना था.

एसटीएफ को मुखबिरों से इस तरह की जानकारी मिलती रहती थी कि पंजाब में ड्रग्स के धंधे के पीछे न केवल एक बड़ा माफिया काम कर रहा है, बल्कि कई बड़े कारोबारी और पुलिसकर्मी भी इस काम में लगे हैं. बीते 3 सालों में पंजाब पुलिस के ही 61 कर्मचारी नशे का धंधा करने के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं. इन में इंटेलीजेंस के कर्मचारियों के अलावा होमगार्ड के जवान, सिपाही, हवलदार और डीएसपी जैसे अधिकारी तक शामिल थे.

लेकिन मुख्यमंत्री के आदेश पर बनी हाईप्रोफाइल एसटीएफ के हत्थे अभी तक कोई भी नशा कारोबारी नहीं चढ़ा. थाना पुलिस द्वारा नशे के छोटेमोटे धंधेबाजों को नशे की थोड़ीबहुत खेप के साथ अलगअलग जगहों से धरपकड़ जरूर चल रही थी. पर एसटीएफ का कोई कारनामा अभी सामने नहीं आया.

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शायद ये लोग छोटी मछलियों के बजाय किसी बड़े मगरमच्छ पर जाल फेंकने की फिराक में थे. जो भी हो, आम लोग इस बुरी लत से परेशान थे. पुलिस पर से भी लोगों का विश्वास उठता जा रहा था. बड़ेबड़े कथित ड्रग स्मगलर अदालत से बाइज्जत बरी हो रहे थे. इस समस्या का कोई सीधा समाधान नजर नहीं आ रहा था. जबकि नशे की चपेट में आ कर घर के घर बरबाद हो रहे थे.

बरसों पहले पंजाब में पनपे आतंकवाद पर जब काबू पाना मुश्किल हो गया था तो लोगों ने अपने दम पर आतंकियों से लोहा ले कर उन्हें धराशाई करना शुरू कर दिया था. इस का बहुत ही अच्छा परिणाम भी सामने आया था. जागरूक एवं दिलेर किस्म के लोगों द्वारा उठाए गए इस कदम ने आतंकवाद के ताबूत में आखिरी कील का काम किया था.

अब नशे के मुद्दे पर भी तमाम लोगों की सोच इसी तरह की बनने लगी थी. यहां हम जिस युवक का जिक्र कर रहे हैं, उस का नाम विनोद कुमार उर्फ सोनू अरोड़ा था. उस पर नशे का कारोबार करने का आरोप था.

बताया जाता है कि बठिंडा के कस्बा तलवंडी साबो और आसपास के इलाकों में नशा सप्लाई कर के उस ने तमाम युवकों को नशे की लत लगा दी थी. इन इलाकों के लोग उस से बहुत परेशान थे और उसे समझासमझा कर थक चुके थे. उस पर किसी के कहने का कोई असर नहीं हो रहा था. धमकाने पर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था.

पास ही के गांव भागीवांदर के लोग तो उस से बेहद खफा थे. वहां के कई आदमी उस के खिलाफ शिकायतें ले कर पुलिस के पास गए थे. पुलिस उस के खिलाफ केस दर्ज कर भी लेती थी, लेकिन वह अदालत से जमानत पर छूट जाता था. नशा तस्करी के 5 केस उस पर दर्ज थे.

विनोद कई बार जेल जा चुका था, लेकिन जमानत पर छूटते ही फिर से इस गलीज धंधे में लग जाता था. 22 मई, 2017 को पुलिस ने उस के पिता विजय कुमार पर भी स्मैक का केस दर्ज किया था, जिस के बाद से वह मौडर्न जेल, गोबिंदपुरा में बंद था.

8 जून, 2017 की बात है. सुबह करीब 9 बजे का वक्त था. विनोद अपनी मोटरसाइकिल पर तलवंडी साबो से अपने गांव लेलेवाल जा रहा था. इस गांव में जाने के लिए मुख्य सड़क से लिंक रोड मुड़ती है. विनोद उसी लिंक रोड पर पहुंचा था कि स्कौर्पियो गाड़ी व टै्रक्टर ट्रौली पर सवार दर्जनों लोगों ने पास आ कर उसे चारों तरफ से घेर लिया. उन के पास पिस्तौलें, लोहे की मोटीमोटी छड़ें, हैंडपंप के हत्थे और गंडासे वगैरह थे.

अनहोनी को भांप कर विनोद फिल्मी अंदाज से बचताबचाता लेलेवाल की ओर भागा. पीछा कर रहे लोग उधर भी उस का पीछा करते रहे. उस समय उस की मोटरसाइकिल की रफ्तार बहुत तेज थी, जिस की वजह से वह अपने घर पहुंच गया. लेकिन मोटरसाइकिल से उतर कर विनोद घर के भीतर घुस पाता, उस के पहले ही लोगों ने उसे पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया. इस के बाद उसे स्कौर्पियो में डाल कर गांव भागीवांदर ले गए.

वहां खुले रास्ते पर लिटा कर पहले तो उन्होंने उस की जम कर बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी. उस के बाद गंडासे से उस का एक हाथ और दोनों पैर काट दिए. यह सब करते समय कई लोगों ने इस घटना की वीडियो बना कर इस चेतावनी के साथ सोशल मीडिया पर डाल दिया कि आगे से जो भी नशे के धंधे में लिप्त पाया जाएगा, उस का ऐसा ही हश्र होगा. क्योंकि पंजाब से नशा मिटाने का अब और कोई रास्ता नहीं बचा है.

इस बीच जमीन पर लहूलुहान पड़ा विनोद उन लोगों से दया की भीख मांगता रहा, लेकिन किसी को उस पर दया नहीं आई. लोग उस पर फब्तियां कस रहे थे कि अब वह अपने उन आकाओं को क्यों नहीं बुलाता, जिन के साथ मिल कर ड्रग्स का धंधा कर के उन की नौजवान पीढ़ी को नशे के अग्निकुंड में झोंक रहा था.

विनोद पर तरस खाना तो दूर की बात, पूरा गांव यही चाह रहा था कि वह तिलतिल कर के मौत के आगोश में समाए और उस के इस लोमहर्षक अंत का नजारा वे लोग भी देखें, जो नशे के हक में हैं. जमीन पर लहूलुहान पड़ा विनोद शायद कुछ देर बाद वहीं दम तोड़ भी देता, लेकिन किसी तरह बात पुलिस तक पहुंच गई.

पुलिस की एक टीम ने मौके पर पहुंच कर बिना देर किए एंबुलेंस बुला कर जल्दी से जल्दी विनोद को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की. लेकिन लोगों के भारी विरोध के चलते पुलिस को इस काम में एक घंटे का समय लग गया. इस बीच विनोद के शरीर से लगातार खून बहता रहा. हालांकि उस हालत में भी वह पुलिस वालों को घटना के बारे में बताता रहा, जिसे एएसआई गुरमेज सिंह दर्ज करते रहे.

ठीक एक घंटे बाद एंबुलेंस विनोद को ले कर तलवंडी साबो के सरकारी अस्पताल के लिए रवाना हुई तो लोगों का समूह उस के पहुंचने से पहले ही वहां पहुंच कर अस्पताल के मुख्य गेट को घेर कर खड़ा हो गया. यहां भी एंबुलेंस का घेराव कर के विनोद को अस्पताल के भीतर नहीं जाने दिया गया. लोगों ने एंबुलेंस को लगातार 3 घंटे तक घेरे रखा.

काफी मशक्कत के बाद पुलिस किसी तरह विनोद को फरीदकोट के सरकारी मैडिकल कालेज एवं अस्पताल ले जाने में सफल हो पाई. लेकिन तब तक विनोद ने दम तोड़ दिया था. एएसआई गुरमेज सिंह के पास उस का बयान दर्ज था. उसी बयान को तहरीर के रूप में ले कर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ कत्ल का मुकदमा दर्ज कर लिया.

अगली सुबह पुलिस मामले की जांच के लिए गांव भागीवांदर पहुंची तो वहां अजीब नजारा सामने आया. 4 हजार की आबादी वाले इस गांव के तमाम लोग इस अपराध की स्वीकृति के साथ आत्मसमर्पण को तैयार थे कि ड्रग सप्लायर विनोद का कत्ल उन सब ने मिल कर किया था.

उन लोगों में बुजुर्ग, जवान, पुरुषमहिलाओं के अलावा किशोर और छोटेछोटे बच्चे तक शामिल थे. सभी अपनी गिरफ्तारी देने को तो तैयार थे. उन का कहना था कि एक ड्रग सप्लायर को इस तरह मारने का उन्हें कोई अफसोस नहीं है. आगे भी इस इलाके में नशा बेचने वाले का यही हश्र होगा.

स्थिति को देखते हुए पुलिस के लिए गांव के किसी शख्स से पूछताछ करना तो दूर की बात, मामले की जांच तक करना मुश्किल हो गया. इस के बाद पुलिस ने गांव लेलेवाल पहुंच कर विनोद के परिवार वालों से संपर्क किया. वे सभी अपने घर में दुबके बैठे थे. हालांकि पुलिस वालों पर उन्होंने अपनी भड़ास खूब निकाली. उन लोगों को डर था कि कहीं उन पर भी जानलेवा हमला न हो जाए.

उन लोगों की आशंका जायज थी. लिहाजा उन के घर पर पुलिस का सशस्त्र दस्ता तैनात कर दिया गया. उसी दिन फरीदकोट मैडिकल कालेज में डाक्टरों के एक पैनल ने विनोद की लाश का पोस्टमार्टम कर के उसे पुलिस वालों को सौंप दिया.

पुलिस ने लाश लेने का संदेश विनोद के घर वालों तक पहुंचा दिया, लेकिन उन लोगों ने यह कह कर शव लेने से इनकार कर दिया कि पुलिस उन्हें न्याय दिलाने की जरा भी कोशिश नहीं कर रही है.

एएसआई गुरमेज सिंह को दिए अपने बयान में विनोद ने उस पर हमला करने वालों के नाम स्पष्ट बताए थे. वे अच्छीखासी संख्या में इकट्ठा हो कर आए थे. उन के पास मारक हथियार भी थे. जबकि पुलिस ने केवल धारा 302 (हत्या) का मुकदमा अज्ञात हमलावरों के खिलाफ दर्ज किया था और अब इस लोमहर्षक हत्याकांड के असली मुजरिमों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है.

पुलिस ने इस बारे में समझाने की कोशिश की तो वे भड़क उठे थे. बाद में उन का कहना था कि समुद्र में रह कर मगरमच्छों से बैर न रखने वाले मुहावरे का हवाला दे कर पुलिस ने उन्हें कथित आरोपियों से समझौता कर लेने की सलाह दी थी. विनोद की 3 बहनों बबली, वीरपाल और अमनदीप कौर ने पहले तो रोरो कर आसमान सिर पर उठाया, उस के बाद पंखों से लटक कर आत्महत्या करने की कोशिश भी की.

पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए उन की यह कोशिश नाकाम कर दी. पर यह मामला घर वालों की ओर से कुछ ज्यादा ही गंभीर होने लगा था. अब तक तमाम लोग उन की हिमायत में भी आ गए थे और पुलिस के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगे थे.

उन का कहना था कि किसी को इस तरह सरेआम मार दिया गया तो पुलिस को हत्यारों के दबाव में न आ कर अपनी काररवाई करनी चाहिए. कायदे से मुकदमा दर्ज कर के वांछित अभियुक्तों को नामजद कर उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए. इस तरह तो दबंग लोग कानून को धता दिखा कर कुछ भी मनमानी करने लगेंगे.

मामला बढ़ता देख आखिर बठिंडा के एसपी (हैडक्वार्टर) भूपेंद्र सिंह और ड्यूटी मजिस्ट्रैट के रूप में रामपुराफुल के एसडीएम-1 सुभाष चंदर खटके विनोद के घर वालों से मिले. बातचीत करने के साथसाथ इन अधिकारियों ने उन के बयान भी दर्ज किए, साथ ही भरोसा भी दिया कि इस मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज कर घटना के जिम्मेदार लोगों को नामजद करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर के उन पर बाकायदा मुकदमा चलाया जाएगा.

इस भरोसे के बाद शांत हो कर उन लोगों ने विनोद का शव ले तो लिया, लेकिन एक शर्त भी रख दी. शर्त यह थी कि नई एफआईआर दर्ज करने के बाद जब तक पुलिस उन्हें उस की अधिकृत प्रति नहीं दे देगी, तब तक वे विनोद का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.

यह शर्त भी मान ली गई. उसी दिन विनोद के भाई कुलदीप अरोड़ा के बयान के आधार पर पुलिस ने भादंवि की धाराओं 364/341/186/120बी/148 एवं 149 के तहत नई एफआईआर दर्ज कर के उस में 13 लोगों को नामजद किया.

वे 13 लोग थे, गांव की सरपंच चरणजीत कौर, अमरिंदर सिंह राजू, भिंदर सिंह, पूर्ण सिंह, बड़ा सिंह, दर्शन सिंह, मनदीप कौर, गुरप्रीत सिंह, जगदेव सिंह, निम्मा सिंह, हरपाल सिंह, सीरा सिंह और गुरसेवक सिंह. ये सभी लोग गांव भागीवांदर के रहने वाले थे. इन के अलावा पुलिस ने दर्जन भर अज्ञात लोगों के इस कांड में शामिल होने का जिक्र किया था.

मामला दर्ज होने के बाद एफआईआर की प्रति शिकायतकर्ता कुलदीप अरोड़ा को दे दी गई. इस के बाद 10 जून की शाम तलवंडी साबो की लेलेवाल रोड पर स्थित श्मशान घाट में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच विनोद का अंतिम संस्कार कर दिया गया. बेटे के अंतिम दर्शन के लिए विनोद के पिता विजय अरोड़ा को भी पुलिस सुरक्षा में गोबिंदपुरा मौडर्न जेल से वहां लाया गया था.

इलाके में पुलिस की गश्त लगातार जारी थी. दरअसल, इस घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से यह मामला पूरी दुनिया में फैल गया था. कोई इस कदम को सराह रहा था तो कोई इसे पंजाब में कानूनव्यवस्था की नाकामी बता रहा था.

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस हत्याकांड के लिए पंजाब की मौजूदा कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया. मीडिया में अपना बयान जारी करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री बनने पर शपथ लेते समय पंजाब से एक महीने के भीतर नशे को पूरी तरह खत्म करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा कर पाने में वह पूरी तरह नाकाम रहे हैं.

यही वजह थी कि भागीवांदर में नशा बेचने वाले 25 साल के युवक का लोगों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया. पुलिस ने गांव वालों की शिकायत पर ड्रग तस्करों के खिलाफ समय रहते सख्त एवं व्यापक काररवाई की होती तो नशे से बरबाद हो रहे युवकों के घर वालों को इस तरह कानून अपने हाथों में लेने की नौबत न आती. राजनेताओं को उतने ही वादे करने चाहिए, जो व्यावहारिक रूप से निभाए जा सकें.

यहां यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि इस घटना के बाद पंजाब की एसटीएफ की टीम ने तेजी से नशा तस्करों को पकड़ने में अपनी अहम भूमिका निभानी शुरू कर दी है. इन में पुरुष, महिलाएं सभी तरह के लोग हैं. इन से करोड़ों का नशीला पदार्थ भी बरामद किया गया है.

यों तो यह एक लंबी सूची बनती जा रही है, लेकिन इस समय सब से चर्चित मामला पुलिस इंसपेक्टर इंदरजीत सिंह का है. उन पर आरोप है कि नशा तस्करों को पकड़तेपकड़ते वह खुद ही ड्रग्स डौन बन गए.

खाकी वर्दी पहन कर और सीने पर गैलेंट्री अवार्ड का तमगा लगा कर वह समानांतर ड्रग्स किंग बन गए. लंबे पुलिस रिमांड पर ले कर एसटीएफ उन से सघन एवं व्यापक पूछताछ कर रही है. एसटीएफ प्रमुख का दावा है कि वर्दी वाले इस गुंडे से गहन पूछताछ के बाद पंजाब के ड्रग तस्करी में एक नया अविश्वसनीय, लेकिन बौलीवुड की फिल्मों सरीखा रोचक अध्याय जुड़ने वाला है.

आगे खतरा यह भी है कि स्ट्रीट जस्टिस के नाम पर लोग खाकी कौलर वाले इस कथित अपराधी को अदालत में ही घेर कर मार न दें. नशा तस्करों को घेर कर लोगों द्वारा मार डालने के कुछ अन्य अपुष्ट समाचार भी प्रकाश में आए हैं. इन में 18 जून, 2017 को पटियाला के कस्बा समाना में शराब तस्कर सतनाम सिंह को पीटपीट कर मौत के घाट उतारने व उस के साथी को बुरी तरह घायल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हो चुकी है.

थाना सदर समाना के थानाप्रभारी हरमनप्रीत सिंह चीमा के बताए अनुसार, 17 जून, 2017 की रात 10 बजे 2 व्यक्ति अपनी स्विफ्ट कार से देशी शराब की 30 पेटियां ले कर पंजाब की सीमा में दाखिल हुए थे. गांव रामनगर के पास पहले से खड़े कुछ लोगों ने उन्हें रुकने का इशारा किया. न रुकने पर उन लोगों ने अपनी स्कौर्पियो से पीछा कर कार को टक्कर मार कर खाईं में पलट दी.

शराब की तमाम पेटियां इधरउधर बिखर गईं. कार में सवार दोनों लोग घायल हो कर बाहर आ गिरे तो उन लोगों ने लोहे की छड़ों और लाठियों से उन की जम कर पिटाई कर दी और भाग गए. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. बुरी तरह घायल काका सिंह के बयान पर अज्ञात लोगों के खिलाफ कत्ल एवं कत्ल के इरादे वगैरह की धाराओं पर एफआईआर दर्ज की गई. काका सिंह का साथी सतनाम सिंह इस मामले में मारा गया, जिस के घर वालों ने अस्पताल में हंगामा किया तो मामले में 5 लोगों हरदीप सिंह, सरबजीत सिंह, परगट सिंह, मंगतराम और अशोक सिंगला को नामजद किया गया.

बहरहाल, विनोद उर्फ सोनू अरोड़ा के मामले में जहां उस के घर वाले अभियुक्तों की गिरफ्तारी को ले कर धरना दिए बैठे हैं, वहीं भागीवांदर गांव के लोगों का कहना है कि गिरफ्तारी होगी तो पूरे गांव की होगी, वरना 13 लोगों को गिरफ्तार करने पुलिस भूल कर भी गांव में न आए.

सरपंच चरणजीत कौर के बताए अनुसार, गांव की 3 पीढि़यों को नशे की दलदल में धकेलने वाले विनोद उर्फ सोनू और उस के साथियों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा था. गांव के नौजवानों को नशा सप्लाई करने के साथ उन्हें इस धंधे में शामिल कर उन का जीवन तबाह कर रहा था. पुलिस भी इस मामले में कुछ खास नहीं कर रही थी.

समय रहते अगर गांव वालों की शिकायत पर पुलिस ने ठीक से कारवाई की होती तो शायद ऐसा कदम उठाने की नौबत न आती. दोनों पक्षों की ओर से रोजरोज मिलने वाली चेतावनियों के बीच पुलिस वाले खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. ऐसे में अभी तक नामजद अभियुक्तों में से किसी एक की भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है.

सैलून जाएं बिना घर पर ऐसे बनाएं हेयर स्टाइल

अक्सर आपको अपना हेयर स्टाइल बनवाने के लिए सैलून जाना पड़ता हो, लेकिन आज हम आपके लिए कुछ ऐसे टिप्स लेकर आए है जिससे आप अपना हेयर स्टाइल घर पर ही तैयार कर सकेंगे. जी हां, हेयर स्टाइल हमारी ब्यूटी का सबसे अहम हिस्सा होता है जो जितना अच्छा बनें, हम उतना ही स्मार्ट दिखते है. तो आज हम जो आपको टिप्स बताने जा रहे है उनसे आप घर पर ही अपना हेयर स्टाइल बना कर खूबसूरत दिख सकते है जिसके लिए बस आपको करने होंगे कुछ आसान काम.

1. सबसे आसान कब

किस तरह के हेयर कट में कटिंग आसान होती है. वो भी तब जब आप खुद ऐसा कर रहे हों तो इसमें मीडियम लेंथ के हेयर स्टाइल शामिल हैं. मीडियम लेंथ हेयर स्टाइल में कुछ खास नाम शामिल किए जा सकते हैं जैसे क्रू कट या आइवी लीग.

2. किनारे से शुरू करें

बाल जब भी खुद काटें तो किनारे से ऐसा करना शुरू करें. इसके बाद बालों के निचले तरफ कटिंग करें. इसके बाद ऊपर के बाल काटने की शुरुआत करें. यहां भी एक बार में बहुत ज्यादा बाल काटने से बचें.

3. नेकलाइन की शेविंग

बाल जब कटते हैं तो नेकलाइन बिलकुल साफ और बेहतरीन हो जाती है. इसके बाद जब बाल बढ़ते जाते हैं तो यही नेकलाइन सबसे फले बताती है कि आपको हेयर कट की जरूरत है. अगर इस नेकलाइन को फिर से क्लियर लुक दे दिया जाए तो आपका हेयर कट फिर से रिफ्रेश हो जाएगा. इसके लिए आपको सिर्फ एक रेजर की जरूरत है. हालंकि ऐसा करते हुए आपको काफी सावधानी बरतनी होगी. इस वक्त एक अच्छा और साफ़ मिरर भी आपके काम आएगा. इस दौरान ध्यान रखें कि रेजर को वर्टिकल एंगल पर चलाएं. कान तक ऐसा करें लेकिन ध्यान से.

4. हेयर प्रोडक्ट बदलेंगे स्टाइल

बाजार में कई तरह के हेयर प्रोडक्ट मौजूद हैं जो आपके स्टाइल को अचानक से पूरी तरह से बदल देंगे. जैसे कुछ प्रोडक्ट बालों में शाइन देने के लिए आते हैं. इसके अलावा अगर आपने अभी तक जेल नहीं इस्तेमाल किया है तो आप अब जेल का इस्तेमाल करके भी अपना लुक बदल सकते हैं.

अनियंत्रित मधुमेह से छिन सकती है आंखों की रोशनी

55 वर्षीय सुशीलकांत 10 वर्षों से मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीज हैं. पिछले कई दिनों से उन की शुगर भी नियंत्रण में नहीं है. एक शाम उन को लगा कि उन की आंखों के आगे अंधेरा सा छा रहा है, फिर कुछ देर ठीक रहा और थोड़ी देर बाद फिर वही स्थिति हो गई. 2 दिनों के बाद अचानक उन्हें लगा कि उन्हें नहीं के बराबर यानी बहुत ही कम दिख रहा है. तुरंत चिकित्सक से संपर्क किया गया.

जांच से मालूम हुआ कि मधुमेह का असर आंख पर पड़ा है और उन का रेटिना क्षतिग्रस्त हो गया है. चिकित्सक की सलाह पर शहर के बाहर विशेषज्ञ रेटिना सर्जन से संपर्क किया गया. रेटिना सर्जन के इलाज से उन की आंखों की रोशनी को बचाया जा सका वरना वे नेत्रहीन हो जाते.

मधुमेह यदि ज्यादा पुराना हो या अनियंत्रित हो तो उस का कुप्रभाव आंखों पर अवश्य पड़ता है. इसे चिकित्सा शास्त्र में ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ कहा गया है. इस जटिलता, जो मधुमेहजन्य है, में आंखों के परदे, जिसे ‘रेटिना’ कहा गया है, की रक्तवाहिनियां नष्ट हो जाती हैं और इस से रक्त बहने लगता है या रिसाव होने लगता है. यह जटिलता समाज के  उच्चवर्ग में अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में हरेक मधुमेह रोगी को चाहिए कि वह वर्ष में 2 बार अपना नेत्रपरीक्षण अवश्य करवाएं.

दृष्टि पर प्रभाव : कैसे कैसे

एक तरह की रेटिनोपैथी तो अधिकतर लोगों में देखने को मिलती है. इस का कोई लक्षण या संकेत नहीं मिलता. इस में रेटिना में सूजन आ सकती है तथा आंखों के पास गंदगी या मैल जमा हो सकता है. चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, आंख की इस छोटी से रक्तवाहिनी को काफी नुकसान झेलना पड़ता है. यह रेटिनोपैथी फैलती नहीं है.

दूसरी तरह की रेटिनोपैथी में नई रक्तवाहिनियां रेटिना के आसपास बनने लगती हैं, जिस से रक्तस्राव होने लगता है. इस में कई बार व्यक्ति की दृष्टि चली जाती है. नई रक्तवाहिनियों के पनपने से रेटिना पर खिंचाव आ सकता है जिस से वह अलग भी हो सकती है. रेटिना की आगे की जैली में भी खून आ सकता है.

जब रेटिना से द्रव्य बाहर निकलता है तो वह रेटिना के बीच ‘मैक्यूला’ पर आने लगता है. इसे ‘मैक्युलोपैथी’ कहा जाता है.

इस के अलावा मधुमेह के रोगियों में मोतियाबिंद भी जल्दी पनपता है. अल्पआय वर्ग में यह ज्यादा देखने को मिलता है क्योंकि उन का ज्यादातर कार्य सूर्य की रोशनी में होता है. रक्त संचार अव्यवस्थित व अपूर्ण होने के कारण आंखों को लकवा भी मार सकता है.

मधुमेह के पुराने मरीजों की दृष्टि में शुरूशुरू में धुंधलापन आता है, रेटिना की सतह तथा दृष्टि के लिए उत्तरदायी मुख्य नाड़ी ‘औप्टिक नर्व’ पर नई रक्त वाहिनियां बनने लगती हैं.

बचाव : कैसे हो मजबूत

-मधुमेह हो या उच्च रक्तचाप या दोनों, इन्हें हर हालत में नियंत्रित रखें. चाहे     दवा से या परहेज से.

-अपने रक्तशर्करा व रक्तचाप की नियमित जांच कराएं.

-धूम्रपान या तंबाकू का सेवन त्याग दें.

-हरी सब्जियों का अधिक सेवन करें.

-खुराक में विटामिन ए, विटामिन सी व विटामीन ई आदि का भरपूर सेवन करें.

-फिश या फिशऔयल का सेवन करें.

प्रमुख कारण

-आंख की रेटिना पर कुप्रभाव का पहला महत्त्वपूर्ण कारण है मधुमेह कितने समय से है. एक चिकित्सकीय आंकड़े के अनुसार, करीब 10 वर्षों से मधुमेह के रोगी पर इस के होने की संभावना 50 फीसदी, 20 वर्षों से मधुमेह के रोगी पर 70 फीसदी तथा 30 वर्षों से मधुमेह के रोगी पर 90 फीसदी संभावना रहती है.

-यदि मधुमेह के साथ उच्च रक्तचाप भी है तो संभावना और अधिक बढ़ जाती है.

-गर्भावस्था में भी इस की संभावना बढ़ जाती है.

-यह स्थिति वंशानुगत भी होती है.

-स्त्रियों में पुरुषों की अपेक्षा यह स्थिति अधिक पाईर् जाती है.

निदान तकनीकें

-रक्त शर्करा स्तर की नियमित जांच कराते रहें.

-‘फंडस फ्लोरिसीन एजिंयोग्राफी’ नामक विशिष्ट जांच से यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि लेजर तकनीक द्वारा उपचार की जरूरत कहांकहां है.

-‘औफ्थालमोस्कोप’ नामक उपकरण द्वारा आंखों की नियमित जांच करवाएं.

इस प्रकार, इस वैज्ञानिक जानकारी के साथ मधुमेह के रोगी अपनी आंखों की रोशनी को बचा सकते हैं क्योंकि अंधेपन के कारणों में इस स्थिति की विशेष भूमिका रहती है.

लेजर पद्धति से उपचार

लेजर फोटो कोएगुलेशन द्वारा लेजर बीम प्रभावित रेटिना पर डाली जाती है जिस से रक्तस्राव या रिसाव बंद हो जाता है, साथ ही, दूसरी असामान्य रक्तवाहिनियों का बनना भी बंद हो जाता है. यह उपचार यदि रोगी को समय पर मिल जाए तो परिणाम अच्छे रहते हैं.

यदि रोग काफी ज्यादा बढ़ गया हो तो शल्यक्रिया द्वारा उपचार संभव है, जिसे ‘वीट्रेक्टौमी सर्जरी’ कहा गया है. इस में अलग हुए रेटिना को फिर जोड़ा जाता है.

एक नया इंजैक्शन वीईजीएफ आंखों में लगाया जाता है, जिस के प्रभाव से इस के अतिरिक्त अन्य खामियां भी ठीक हो जाती हैं. इस के साथसाथ लेजर द्वारा भी उपचार लिए जाने के अच्छे परिणाम आते हैं.

सेक्स लाइफ में बदलाव का कारण आपकी उम्र तो नहीं

सेक्स एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में आज भी लोग अपने से छोटे या बड़े से बात करते हुए कतराते हैं।लेकिन सेक्स के बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी हैं क्योंकि सही जानकारी हमें कई परेशानियों व बिमारियों से बचा सकती है।सेक्स हमारे जीवन का अहम हिस्सा है फिर चाहे अविवाहित हो या विवाहित। क्योंकि ख़ुशहाल जीवन जीने के लिए आनंददायक सेक्स ज़रूरी है,हमारी उम्र के अनुसार सेक्स की चाहत में भी बदलाव आते रहते हैं। इस का कारण हार्मोन्स मे बदलाव, बढ़ती उम्र,आपसी संबंध या जिमदारियों का बोझ भी हो सकता है। विवाह के बाद सेक्स आपके रिश्ते को मजबूती देता है इसलिए सुखी विवाहिक जीवन में इसका बहुत बड़ा रोल है। तो चलिए जानते हैं किस उम्र में सेक्स की इच्छा जागरूक होती है व किस तरह उम्र के अनुसार इसके पड़ाव में बदलाव आते हैं।

किशोरवस्था में सेक्स की तरफ झुकाव (14-18 वर्ष )

किशोर अवस्था में ना सिर्फ शरारिक बदलाव होते हैं बल्कि मानसिक बदलाव भी होते हैं इस उम्र में बॉडी में सेक्स हार्मोंस का स्तर काफ़ी तेज़ी से बढ़ता है यही वह उम्र है जिसमें हार्मोनल बदलाव के कारण सेक्स को लेकर उत्सुकता बढ़ती है इस उम्र की लड़कियों में अपने पार्टनर के प्रति भावनात्मक लगाव अधिक रहता है और लड़को में सेक्स के प्रति भावनत्मक से ज्यादा फिजिकल होने की इच्छा अधिक होती है जिसके लिए वह सेक्स से संबंधित फिल्मे देखना व किताबें पढना अधिक पसंद करते हैं।इसलिए सेक्स को लेकर सबसे ज्यादा एक्सपेरिमेेंट्स, फैंटेसी और ड्रीमिंग भी इसी उम्र में होती है।

प्रारंभिक वयस्कता में सेक्स की तरफ झुकाव (18-35 वर्ष )

18 से 35 साल की आयु के बीच पुरषों में कामोत्तेजना के लिए जरूरी हार्मोन सामान्य रूप से अधिक होते हैं क्योंकि वे टेस्टोस्टेरॉन की वजह से हायर सेक्स ड्राइव का अनुभव करते है।युवाओं में सेक्स को लेकर उनमें कई तरह की जिज्ञासाएं व उत्तेजनाएं उमड़ने लगती हैं।वहीं महिलाए उम्र के इस पड़ाव में सबसे ज्यादा फर्टाइल होती हैं. उनके गर्भ ठहरने की उम्मीद इस उम्र में सबसे अधिक होती हैं।उनके मन में भी सेक्स को लेकर बहुत ज्यादा उत्साह व उत्तेजना रहती है अधिकतर लड़कियां सेक्सुअल रिलेशन बनाने से पहले अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिता कर उसे समझने , प्रेम भरी बातें करने,की चाह रखती हैं और साथ हीं लड़कियां सेक्सुअली इन्वॉल्व होना उसी के साथ पसंद करती हैं जिससे उनकी सोच मिलती हुई हो और वह उनके साथ आगे चल कर रिश्ता निभा सके लेकिन यदि उनका पार्टनर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता तो यह उनके लिए तनाव और डिप्रेशन का कारण बनने लगता है, जो विभिन्न प्रकार की मानसिक-शारीरिक परेशानियों का कारण बन जाता हैं वहीं लड़कों में ऐसी सोच कुछ में हीं होती है क्योंकि लड़के इमोशनली कम बल्कि सेक्सुअल रिलेशन बनाने की इच्छा अधिक रखते हैं।

मध्य वयस्कता में सेक्स के प्रति लोगों की झुकाव (35-50 वर्ष )

यह उम्र का वो दौर होता हैं जब दोनों पार्टनर्स पर बहुत सी ज़िम्मेवारियां होती हैं इस स्टेज में बहुत से पुरुष और महिला जब 35 की उम्र तक पहुंचते हैं, तो उनका सेक्स के प्रति झुकाव कम होने लगता है। लेकिन सेक्स की क्वॉलिटी पहले से बेहतर ज़रूर हो जाता है, क्योंकि दोनों पार्टनर काफ़ी मैच्योर होने के साथ साथ दोनों एक-दूसरे को समझ चुके होते हैं। जिस कारण उनका रिश्ता फिजिकल से ज्यादा भावनात्मक रूप से मजबूत हो जाता है इस दौरान समय की कमी, ऑफिस का वर्क प्रेशर, घर परिवार की जिम्मेदारियों के चलते सेक्स लाइफ भी काफ़ी हद तक प्रभावित होती है। वैसे 35 से 45 की उम्र की महिलाएं सेक्स को ज्यादा एन्जॉय करती हैं 45 के बाद महिलाओं में मेनोपॉज़ की समस्या होने लगती हैं। जिस कारण मूड स्विंग व सेहत संबंधी परेशानियां होने लगती हैं। जिस करण सेक्स लाइफ पर काफ़ी असर पड़ता है।
50 की उम्र से प्रोढ़अवस्था में सेक्स की तरफ झुकाव जिन पार्टनर्स की लाइफ स्टाइल और फिजिकल फिटनेस अच्छी होती है वो 50 की उम्र में भी सेक्स को एन्जॉय करते हैं लेकिन ऐसे जोड़े कम हीं होतें हैं क्योंकि इस उम्र तक आते आते एनर्जी लेवल कम हो जाता है लोग बिमारियों की गिरफ्त में आ जाते हैं जिस करण वे सेक्स से दुरी बनाने लगते हैं। इस उम्र तक लोग सास-ससुर और दादा-दादी बन जाते हैं, जिस कारण पार्टनर आपस में इस बारे में बात करने तक में हिचकते है और सेक्स से दुरी बना लेते हैं।

Funny Video: राखी सावंत की वजह से Chandrayaan 3 मिशन हुआ पूरा!

बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन हमेशा ही अपने अटपटे बयानों और हरकतों को लेकर सुर्खियों में रहती है कभी वो अपने सर पर अंडे फोड़ कर लोगों को एंटरटेन करती है तो कभी अजीबो-गरीब डांस करके सबको खुश करती है. जिसकी वजह से कई बार उन्हे ट्रोल भी होना पड़ता है. लेकिन इसके बावजूद वह अपनी अटपटी हरकते करना नहीं छोड़ती है. ऐसा ही अब उन्होने सबको हंसाने वाला बयान दिया है और कहा ही कि चंद्रयान 3 मिशन उनकी वजह से पूरा हुआ है.

 

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आपको बता दें, कि शुक्रवार को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर इसरो ने ‘चंद्रयान 3’ (Chandrayaan 3) मिशन लॉन्च किया. इसरो के इस सक्सेसफुल लॉन्चिंग मिशन को देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. अब हाल ही में राखी सावंत ने ‘चंद्रयान 3’ के सक्सेसफुल लॉन्च होने पर रिएक्ट किया है. उन्होंने पैपराजी को दिए इंटरव्यू में ‘चंद्रयान 3’ मिशन को लेकर देश को बधाई दी लेकिन इसे के साथ उन्होंने इसरो के इस मिशन का क्रेडिट भी खुद को ही दे दिया.

 

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राखी का ये Funny  video वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में राखी सावंत व्हाइट कलर की साड़ी पहनें नजर आ रही हैं और इसी के साथ उन्होंने व्हाइट ज्वैलरी और चूड़ियां भी पहनी हुई हैं. वीडियो में राखी सावंत कह रही हैं, “चांद की चांदगी आई है और देश की आमदनी आई है. मुबारक हो सबको, चंद्रयान 3 लॉन्च हो चुका है, वो भी केवल मेरी वजह से. मैंने आज ये व्हाइट पहना, इसलिए चंद्रयान लॉन्च हो गया है.” इसके साथ ही राखी सावंत वीडियो में यह भी बता रही हैं कि जब चंद्रयान लॉन्च हुआ तो नीचे से कैसे उसमें फायर हुआ था. राखी सावंत के इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस को जमकर ट्रोल कर रहे हैं.

लोगों ने किए Funny कमेंट

राखी सावंत के इस वीडियो पर लोग जमकर रिएक्ट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “इसको भी चंद्रयान पर बिठाकर लॉन्च कर देना था.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “इसरो से मेरी रिक्वेस्ट है, आप जब फिर से चंद्रयान 4 बनाएंगे, राखीजी को उसके आगे बांधकर भेज देना. उधर ही वो अपने मनपसंद लड़के से शादी कर लेंगी क्योंकि यहां पर कोई भी अच्छा नहीं है.” एक और यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “राखी का तो इससे दूर दूर से नाता कोई नहीं है तो ये कैसे तारीफें झोंक रही है.”

जब अमीषा की वजह से सनी देओल के भाई से बोले लोग, ‘ये भाई की अमानत है’

इन दिनों सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म गदर 2 की चर्चाएं जोरो-शोरो से हो रही है. दोनों फिल्म के प्रोमोशन में काफी बीजी चल रहे है. लोग इसकी रिलीजिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे है. अब दोनों अपनी फिल्म का प्रमोशन करने कपिल शर्मा के शो पर पहुंचे है. कपिल शर्मा शो का प्रोमो रिलीज हुआ है जिसमें सनी देओल और अमीषा पटेल दिखाई दिए है.इस दौरान अमीषा पटेल ने अपनी फिल्म हमराज का एक मजेदार किस्सा शेयर किया है. जिससे सुन लोग हैरान हो रहे है.

आपको बता दें, कि सोनी टीवी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से ‘द कपिल शर्मा शो’ का प्रोमो वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि फिल्म ‘गदर 2’ के लीड स्टार्स सनी देओल और अमीषा पटेल से कपिल शर्मा और कृष्णा अभिषेक मस्ती-मजाक करते हैं. इस दौरान अमीषा पटेल सनी देओल की तरफ इशारा करके बताती हैं, ‘मैं एक बार इनके भाई बॉबी देओल के साथ फिल्म हमराज की शूटिंग कर रही थीं. वहां पर बहुत संख्या में लोग मौजूद थे और शूटिंग देख रहे थे. मैं और बॉबी देओल एक साथ नीचे शूट कर रहे थे और वह लोग ऊपर से देख रहे थे. इस दौरान एक सीन में बॉबी देओल को मुझे गले लगाना था और जेसे ही बॉबी देओल ने मुझे गले लगाया कि लोग वहां पर चिल्लाने लगे. लोग कह रहे थे कि अरे छोड़ो इसे ये तो तेरे भाई की अमानत है.तारा सिंह इसको पाकिस्तान से लेकर आया है.’ इस बात को सुनकर शो पर सभी लोग जमकर ठहाके लगाते हैं.

सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म ‘गदर 2’ 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. अनिल शर्मा के डायरेक्शन में बनने वाली इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल के अलावा कई और स्टार्स नजर आएंगे. गौरतलब है कि सनी देओल और अमीषा पटेल की ये फिल्म साल 2001 में रिलीज हुई उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर’ की रीमेक है. सनी देओल की फिल्म ‘गदर 2’ बॉक्स ऑफिस पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘ओएमजी 2’ से टकराएगी. अक्षय कुमार की ये फिल्म भी 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.

 

Girlfriend को चैटिंग पर करना हो इंप्रेस, तो करने होंगे बस ये काम

अपनी गर्लफ्रैंड को इंप्रेस करने के तो कई तरीके है लेकिन डेट पर जाने से पहले ही चैटिंग पर इंप्रेस करना इतना आसान नहीं है उसके लिए कुछ ऐसे टिप्स है जिन्हे आप अपनाकर लड़की को इंप्रेस कर सकते है और उसके लिए ज़रुरी है कि आप किसी भी बात से डरे नहीं, आत्मविश्वास की कोई कमी कभी भी  नहीं हो.

ऐसा कई बार होता है कि आप चैटिंग से अपनी बात शुरु करते है जिसके लिए जरुरी है आप इंप्रेसिव चैटिंग करें, जो किसी डेट से कम ना हो. तो क्या आप जानते है चैटिंग के वो टिप्स जिनसे आप अपनी गर्लफ्रेंड को इंप्रेस कर सकते है. तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ आसान और प्रभावी टिप्स, जिससे आप चैट के दौरान किसी लड़की को इंप्रेस कर सकते हैं.

1. उसे बात करने दें

चैट करने के दौरान ये ज़रुरी है कि लड़की को पहले अपनी पूरी बात करने दें, यदि आप बीच में ही रोक देते है या कुछ कह देते है तो वह आगे अपनी बात करने से संकोच फील करेगी. इसके लिए जरुरी है कि पहले आप उसकी बात सुन लें वो, अपनी पूरी बात कह दें, तब आप कुछ बोलिए और अगर आप अपनी ही बात करने में लगे रहेंगे तो, उसे लगेगा कि आपको उसमें बात करने में रुचि नहीं है. इसलिए लड़की को पूरी बात करने का मौका ज़रुर दें.

2. मजेदार टॉपिक्स पर बात करें

आप उससे उसके पसंदीदा टीवी शो या मजेदार मनोरंजक चीजों के बारे में बात कर सकते हैं या कुछ मजेदार विषयों के बारे में सोच सकते हैं, जो उसे उत्साहित करेंगे. यह पता करने की कोशिश करें कि क्या वह साहसी किस्म की है, जिसे रॉक क्लाइम्बिंग या बंजी जंपिंग पसंद है या वो अपना वीकेंड बिस्तर पर चुपके से बिताना पसंद करती है. यदि वह ट्रैवल करना पसंद करती है, तो केवल उन सभी स्थानों के बारे में बात न करें जहां आप गए हैं, इसके बजाय उसे शामिल करें और इस बारे में बात करें कि आप उन सभी स्थानों के बारे में कितने उत्साहित हैं, जिन्हें आप भविष्य में उसके साथ देखना चाहते हैं.

3. धैर्य रखे

अपनी पहली चैट पर किसी लड़की को प्रभावित करने की कुंजी है, धैर्य रखना. आपके लिए अपने मन की बात कहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उसके मन की बात सुनना. उसे पूरी तरह खुलने का मौका देना भी महत्वपूर्ण है. हो सकता है कि आप दोनों पहली बार में नर्वस हों, इसलिए उसे जवाब देने के लिए स्पेस और टाइम दें.

4. ज्यादा घमंड ना करें

चैट की शुरुआत में अधिकांश पुरुष सबसे बड़ी गलती जो करते हैं, वो है अपने बारे में झूठ बोलना ताकि सामने वाले पहला इंप्रेशन जबरदस्त हो. यह एक छोटा सा झूठ बाद के वर्षों में बड़ी समस्याओं में बदल सकता है. किसी भी रिश्ते में झूठ बोलना आपके लिए समस्या हो सकता है और अंततः परेशानी का कारण बन सकता है. इसलिए ईमानदार रास्ता चुनें. अगर बात आगे बढ़नी ही है, तो आपके सच से भी बढ़ेगी और आपका रिश्ता बिना कुछ किए ही खिल उठेगा.

मुझे सिलाई करने का शौक है मेरे घरवाले सिलाई मशीन नहीं दिला रहे है मैं क्या कंरू?

सवाल

मेरी उम्र 22 साल है. मैं एक गरीब और दलित घर की लड़की हूं. मैं ने 12वीं तक पढ़ाई की है. मुझे सिलाईकढ़ाई करने का शौक है, पर घर वाले मुझे सिलाई मशीन नहीं दिला रहे हैं. वे बोल रहे हैं दहेज में दे देंगे, फिर अपनी ससुराल में खूब सिलाई करना.

मुझे अभी शादी नहीं करनी है. मैं पहले अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं. मैं अपनी इस समस्या का समाधान कैसे करूं?

जवाब

आप के घर वाले गलती कर रहे हैं जो लड़की को भार समझते हुए जैसेतैसे शादी कर के उसे टरका देने में यकीन करते हैं. आप प्यार से उन्हें समझाएं कि आजकल लड़की का अपने पैरों पर खड़ा रहना कितना जरूरी और अहम है. सिलाई से चार पैसे आएंगे और आप का भी समय एक अच्छे काम में कटता रहेगा. ससुराल जा कर भी आप जिम्मेदारियों में हाथ बंटा पाएंगी.

शादी कर लेने में हर्ज नहीं है, बशर्ते अच्छा घर और वर मिल रहा हो. अच्छा होगा कि आप अपने घर वालों को जमाने की ऊंचनीच समझाएं कि लड़कियों भी अब लड़कों से कम नहीं हैं, उन की अपनी भी कुछ इच्छाएं और भविष्य की योजनाएं होती हैं.

जागरूकता : पूजापाठी नहीं कामकाजी बनें

आमतौर पर लोगों को बचपन से एक ही बात सिखाई जाती है कि मंदिर जाओ, जोत जला कर धूपबत्ती करो और फिर भगवान से जो भी मांगो वह मिल जाएगा. सवाल उठता है कि अपने मतलब के लिए मंदिर जा कर फलफूल और प्रसाद चढ़ा कर भगवान से इस तरह मांगने वालों को हम क्या कहेंगे? रिश्वत के नाम पर कुछ फलफूल, अगरबत्ती, मिठाई और सिक्के दे कर क्या आप भगवान से अपनी बात मनवा लेंगे? कभी नहीं.

रिश्वत देना तो वैसे भी अपराध होता है. फिर यहां इसे अपराध क्यों न माना जाए? बिना किसी मतलब के कौन है जो मंदिरों के चक्कर लगाता है? यह तो एक तरह का कारोबार बन गया है. कुछ हासिल करना है तो पूजा करने पहुंच जाओ या घर में ही आंख बंद कर के भगवान की मूर्ति के आगे अपनी बात दोहराते रहो.

हमें बचपन से कर्म यानी काम करने की सीख क्यों नहीं दी जाती है? अपनी मेहनत, लगन और काबिलीयत से मनचाही चीज हासिल करने की सलाह क्यों नहीं दी जाती है? कर्म की अहमियत क्यों नहीं समझाई जाती है? कामकाजी बनने से बढ़ कर कामयाबी के लिए और क्या चाहिए? बचपन से बच्चों को कर्मप्रधान बनने के बारे में सिखाया क्यों नहीं जाता है?

कितने ही लोग दिनरात मंदिर में पूजापाठ में लगे रहते हैं. कभी सावन, कभी नरक चतुर्दशी, कभी पूर्णमासी, कभी नवरात्र, कभी मंगलवार, कभी शनिवार और इसी तरह कितने ही खास दिन आते रहते हैं यानी पूजा के लिए जरूरी दिनों की कोई कमी नहीं है. इन सब के पीछे चाहे काम का कुछ भी नुकसान क्यों न हो जाए, सब चलता है.

किराने की दुकान चलाने वाले 50 साल के आनंद दास बताते हैं, “मेरे एक दोस्त हैं जिन से कामकाज के लिए बात करने को मिलने के लिए बोलो तो कहेंगे कि अभी नहाधो कर मंदिर जाना है, वहां एक घंटे का समय पूजापाठ में लगेगा और फिर पंडित से मिल कर व्रतउपवास और कर्मकांड से जुड़ी कुछ जरूरी बात करनी है, कुछ दानदक्षिणा भी देनी है. वहां से निबट कर घर जाऊंगा और फिर नाश्ता करूंगा. इन सब में 2-3 घंटे तो लग ही जाएंगे.

“अपने दोस्त की ये बातें सुन कर मैं यही सोचता हूं कि इस इनसान के पास काम करने का समय कहां रह जाता होगा?”

काम से होता है सब हासिल

सच है कि इनसान जिंदगीभर तरक्की खोजता रहता है, पर शायद उसे यह नहीं मालूम कि आप अगर कर्मशील बनेंगे तो सब हासिल किया जा सकता है. इनसान को जिंदगी में अच्छा ज्ञान हासिल करना चाहिए, ताकि उस के बल पर वह हुनरमंद बन सके और अपनी गुजरबसर अच्छे तरीके से कर पाए. कामधंधे की तालीम ले कर, अपने हुनर में पक्का हो कर अगर इनसान मन लगा कर काम करेगा तो उसे मनचाहा फायदा जरूर मिलेगा.

हमारे काम या व्यापार को बढ़ाने के लिए दिमाग में अचानक आने वाले विचार को तुरंत अपने व्यवसाय पर लागू कर दें और फिर देखें कमाल. पैसों की बरसात होगी.

इस तरह से इनसान अपने ज्ञान और अपनी मेहनत के बल पर धन खूब कमा सकता है और मन की मुरादें पूरी कर सकता है. इस के उलट 3-4 घंटे मंत्रजाप, भजनकीर्तन, दिनरात धूपबत्ती कर के या पंडितों और बाबाओं के बताए उपाय आजमा कर वह कभी भी तरक्की के रास्ते पर आगे नहीं पहुंचता है.

मेहनत है असली दौलत

जो इनसान अपने घर से कमाई करने के लिए निकलेगा उस का धूप से तो वास्ता पड़ेगा, मगर जब वह मेहनत कर और धूलमिट्टी फांक कर घर आएगा तो भले ही उस का रंग सांवला हो जाए, मगर शरीर मजबूत और कारोबार में कामयाबी जरूर मिलेगी.

अकसर लोग ज्योतिषी से अपना भविष्य पूछने जाते हैं. वह बताता है कि आप के ग्रहनक्षत्र ठीक नहीं हैं और इन को साधारण उपायों द्वारा ठीक किया जा सकता है. ग्रहनक्षत्र ठीक होते ही आप का शरीर अच्छा काम करेगा, आप की योजनाएं सही रूप में कामयाब होंगी और आप खूब धन कमा सकेंगे. आप की इज्जत बढ़ेगी, आप का परिवार सुखी रहेगा और घर में खुशहाली आएगी.

याद रखिए कि ग्रहनक्षत्र खराब नहीं होते. यह तो ज्योतिषियों का धन ऐंठने का तरीका है. आप उन के बहकावे में आ कर उपाय करवाते हैं और अपने पास मौजूद रकम भी गंवा बैठते हैं. इस के उलट अपनी मेहनत पर यकीन रखिए और फिर देखिए नतीजा. कोई राहुकेतु आप का कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा.

कर्म ही पूजा है

एक सैनिक जो महीनों तक सीमा की रक्षा करता है, वह किसी मंदिरमसजिद के चक्कर नहीं लगाता. उस का काम ही उसे इज्जत के काबिल बनाता है. इसी तरह किसी डाक्टर को कोई जरुरी सर्जरी करनी है, मगर वह उसे छोड़ कर यह कहे कि उस की पूजा का समय हो गया है या मंदिर जाए बिना वह सर्जरी नहीं करेगा, तो ऐसे डाक्टर को हम क्या कहेंगे?

याद रखें कि एक इनसान जो अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करता है, उसे किसी से डरने की कोई जरूरत नहीं है. नौकरी वाले दफ्तर जाते हैं, किसान और मजदूर खेतों में जाते हैं, सिपाही लड़ाई के मैदान में जाते हैं, डाक्टर अस्पताल जाते हैं और वकील कोर्ट जाते हैं.

हर कोई अपनेअपने क्षेत्र में काम करता है. काम, जैसा कि हम सभी जानते हैं, वह है जो हमें अपनी रोजीरोटी चलाने के लिए, अपने चहेतों की जरूरतों को पूरा करने के लिए करना जरूरी होता है.

जिंदगी की सच्ची सीख यह है कि हम क्या करते हैं और कितने बेहतर तरीके से करते हैं, लेकिन यह नहीं कि हम भगवान की पूजा करने में कितना समय देते हैं.

चंपारण में रहने वाले निकुंज कहते हैं, “हमारे गांव में 2 दोस्त रहते थे. एक गरीब मगर मेहनती लोहार था, जबकि दूसरा मंदिर का एक आलसी पुजारी था. उसे काम किए बिना खाने की आदत थी.

“पुजारी अकसर उस लोहार से मजाक में कहता था कि चाहे वह जितनी मेहनत कर ले भगवान सुख उसे ही देंगे, क्योंकि वह नियमित रूप से पूजा करता है.

“लोहार अपने रोजमर्रा के काम में इतना मस्त रहता था कि उसे कभी भी मंदिर जाने का समय नहीं मिल पाता था. इन दोनों की मुलाकात कभी किसी त्योहार के समय हो जाती थी. समय बीतने के साथ और सालों की कड़ी मेहनत के बाद लोहार गांव का सब से अमीर आदमी बन चुका था, जबकि पुजारी वैसे ही मांग कर या दान के रुपयों से गुजारा कर रहा था. वह बीमार भी रहने लगा था.

“इधर लोहार ने गांव में एक स्कूल खोला और इस के लिए एक छोटा सा समारोह रखा. वहां वह अपने पुराने दोस्त यानी उस पुजारी से मिला. जब लोहार से उस की कामयाबी के राज के बारे में पूछा गया तो उस ने सिर्फ चार शब्द कहे कि कर्म ही पूजा है.

“लोहार की बात सुन कर पहली दफा पुजारी को अपनी गलती का अहसास हुआ. उस की नजरों में लोहार का कद बहुत ऊंचा हो चुका था और अब उसे जिंदगी की हकीकत समझ में आ गई थी.

ज्यादा पूजापाठ समय की बरबादी

दरअसल, हम खुद को ही इस बात से भरम में रखते हैं कि हमारी असली समस्या क्या है. हम नहीं जानते हैं कि हमारी परेशानी क्या है और उस परेशानी का हल क्या है. हम इस के बजाय मंदिरमसजिद के चक्कर लगाते हैं और पाते हैं कि वे चीजें काम नहीं आ रही हैं और कोई नतीजा नहीं निकल रहा है.

उदाहरण के लिए किसी को लोगों से बातचीत करने में शर्म आती है या वह इंगलिश नहीं बोल पाता, उसे डर या झिझक होती है और ऐसे में वह सुबहशाम पूजापाठ करे तो क्या उस की इस समस्या का हल हो जाएगा? नहीं, बल्कि उस की समस्या तो तभी हल होगी न जब वह लोगों से बातचीत करने की हिम्मत करेगा, किसी इंगलिश स्पीकिंग कोर्स में दाखिला लेगा और बोलने का अभ्यास करेगा.

इस के उलट अगर वह दिन का बहुत सारा समय पूजापाठ या भजनकीर्तन में लगाएगा, मंदिर की भीड़ में एक लोटा जल ले कर घंटों लाइन में लगा रहेगा या व्रतउपवास करेगा, तो कोई फायदा नहीं मिलेगा.

जाहिर है कि सुबहशाम पूजा करने के बाद भी ज्यादातर लोगों की जिंदगी और मन में कुछ खास बदलाव नहीं आता, इसलिए पूजापाठ के बजाय मेहनत करें.

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