सेक्स में नासमझ न रहें लड़कियां

आजकल के बच्चे सेक्स की जानकारी मोबाइल से या फिर इंटरनैट से प्राप्त करते हैं, जो आधीअधूरी होती है. इस का नतीजा उन्हें आगे चल कर भुगतना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि लड़कियों को सेक्स शिक्षा स्कूल में टीचर और घर में मां से मिले ताकि सेक्स उन के लिए कुतूहल का विषय न रहे.

15साल की नेहा हाईस्कूल में पढ़ती थी. स्कूल उस के घर से 3 किलोमीटर दूर था. वह साइकिल से स्कूल जाती थी. उस के साथ दूसरी लड़कियां और लड़के भी जाते थे. स्कूल जाते समय नेहा की मुलाकात बगल के गांव में रहने वाले 22 साल के सुरेश से हुई. सुरेश की कुछ दिनों पहले ही शादी हुई थी. शादी में सुरेश को एक मोटरसाइकिल मिली थी. वह रोज लड़कियों के आनेजाने के समय पर बाजार जाता था. एक दिन नेहा की साइकिल पंचर हो गई. वह पैदल स्कूल जा रही थी. इसी बीच सुरेश उसे मिला और बोला, ‘‘पैदल क्यों जा रही हो. आओ, मैं तुम्हें स्कूल तक छोड़ दूं.’’

नेहा पहली बार मोटरसाइकिल पर बैठी थी. उसे बहुत अच्छा लगा. सुरेश के साथ बैठ कर वह अपने को किसी फिल्मी हीरोइन सी समझने लगी थी. इस के बाद यह सिलसिला चलने लगा. सुरेश नेहा के आनेजाने के समय राह में मिलने लगा. नेहा भी घर से साइकिल ले कर आती, फिर एक दुकान पर साइकिल रख कर सुरेश के साथ मोटरसाइकिल से आतीजाती. इस से उस के घर वालों को पता नहीं चलता था.

सुरेश ने एक दिन घुमाने के बहाने नेहा के साथ देहसंबंध बना लिए. नेहा और सुरेश के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे. इन में जहां सुरेश की पहल तो थी ही लेकिन नेहा की भी स्वीकृति थी. उसे भी उस समय बहुत अच्छा लगता था जब सुरेश उस के नाजुक अंगों को सहलाता था. इसे जवां उम्र का फेर कह सकते हैं. उस का भी मन होता था कि वह सुरेश की बांहों में सिमट जाए. ऐसे में नेहा ने कभी सुरेश को आगे बढ़ने से नहीं रोका. दोनों की उम्र जवां थी. एकदूसरे में खो गए और एकांत में मिलने लगे. इस के बाद वह सब हो गया जो शादी के बाद होना चाहिए था.

नेहा को इन संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी. सुरेश ने भी यौनसंबंध बनाने से पहले ऐसी एहतियात नहीं बरती जिस से नेहा गर्भधारण न कर सके. एकदो माह गुजर जाने के बाद नेहा को पता चला कि वह प्रैग्नैंट हो गई है. घर में बहुत सारे ताने, लड़ाई और झगड़े के बाद घरवालों ने नेहा को दूसरे शहर अपने एक रिश्तेदार के पास भेज दिया. वहां नेहा का गर्भपात कराया गया. नेहा की बदनामी हुई और उस का कैरियर खराब हो गया. उस की पढ़ाई छूट गई. घरपरिवार का भरोसा टूट गया. नेहा को खुद अब महसूस होने लगा कि उस ने कितनी बड़ी गलती कर दी है.

सेक्स शिक्षा का अभाव

स्त्रीरोग विशेषज्ञ डा. रेनू मक्कड़ कहती हैं, ‘‘इस तरह के मामले कोई अचंभे वाली बातें नहीं हैं. बहुत सारी घटनाएं हम लोगों के सामने आती हैं जिन में लड़की को पता ही नहीं चलता है कि उस के साथ क्या हो गया है. इसलिए यह जरूरी है कि किशोर उम्र में ही लड़की को सेक्स शिक्षा दी जाए. घर में मां और स्कूल में टीचर ही यह काम सरलता से कर सकती हैं. मां और टीचर को पता होना चाहिए कि बच्चों को सेक्स की क्या और कितनी शिक्षा देनी चाहिए.’’

वे आगे कहती हैं, ‘‘जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं उन से पता चलता है कि कम उम्र में लड़कियों के साथ होने वाला शारीरिक शोषण उन के रिश्तेदारों या फिर घनिष्ठ दोस्तों द्वारा किया जाता है. इसलिए जरूरी है कि लड़की को 10 से 12 साल के बीच यह बता दिया जाए कि सेक्स क्या होता है और यह बहलाफुसला कर किस तरह किया जा सकता है. लड़कियों को बताया जाना चाहिए कि वे किसी के साथ एकांत में न जाएं. अगर कभी इस तरह की कोई घटना हो जाती है तो लड़की को समझाएं कि मां को सारी बात बता दे ताकि मां उस की मदद कर सके.’’

हो सकता है जानलेवा रोग

शहरों की लड़कियों को अब इस तरह की जानकारियां मिलने लगी हैं. लेकिन गांव की लड़कियां अभी भी इस से पूरी तरह से अनजान होती हैं. इन को यह नहीं पता होता कि शारीरिक संबंधों से यौनरोग हो सकते हैं. गांव के बहुत सारे लोग कमाई करने बाहर जाते हैं. वहां से वे एड्स जैसी जानलेवा बीमारियां ले आते हैं. ऐसे लोग जब किसी लड़की से संबंध बनाते हैं तो वे रोग इन लड़कियों को भी जकड़ लेते हैं. इन का स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज तक नहीं है.

सुल्तानपुर की रहने वाली दीपा के साथ उस के पड़ोसी ने सेक्स किया. दीपा का पड़ोसी दिवाकर एड्स से पीडि़त था. कुछ समय बाद दिवाकर की मृत्यु हो गई. इस के बाद दीपा भी बीमार रहने लगी. डाक्टरों से जांच कराई तो पता चला कि उस को एड्स था. घर के लोगों ने जब उस से पूछा तो उस ने दिवाकर के साथ सेक्स संबंधों की बात कही. कुछ दिनों बाद बीमारी के कारण दीपा की भी मृत्यु हो गई.

प्रेमजाल से सेक्स की राह

गांव हो या शहर, हर जगह लड़कियां अब अपने कैरियर को बनाने के लिए बाहर निकलने लगी हैं. ऐसे में नएनए लोग उन को मिलते हैं जो दोस्ती और प्यार के जरिए उन्हें नशे व सेक्स की दुनिया में घसीट रहे हैं. अपराध की घटनाएं देखें तो ऐसे मामले देखने को रोज मिल जाते हैं.

लखनऊ के महिला थाने पर हर माह ऐसे 10 से 15 मामले आ रहे हैं. कई मामलों में पारिवारिक सहमति से शादी करा कर मामले को रफादफा किया जा रहा है. लड़कियों के यौनशोषण के लिए पहले से शादीशुदा लोग तक कुंआरे बन कर 100 रुपए के स्टांपपेपर पर साइन कर के शादी करने का नाटक  कर के यौनशोषण करते हैं. बाद में लड़की को पता चलता है कि यहां तो उस के साथ धोखा हो गया.

मंदिर में शादी ऐसे ही कर ली जाती है. लड़कियों को गुमराह करने के लिए झूठी शादियां की जाती हैं. पुलिस के पास ऐसे मामलों से निबटने के तरीके नहीं होते. ऐसे में वह लड़कीलड़के को कभी दहेज तो कभी घरेलू हिंसा या यौनशोषण जैसे मामलों में जेल भेज देती है. लड़के का साथ देने वाले हमेशा बच निकलते हैं. इस का सब से बड़ा कारण है कि लड़कियां भी सेक्स संबंधों में उलझ रही हैं. इस के चलते कई दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि लड़कियों को सेक्स में नासमझ नहीं रहना चाहिए. उन को सेक्स से जुड़ी समस्याएं समझनी चाहिए.

परिवार और स्कूल मिल कर प्रयास करें

लड़कियों में सेक्स की शिक्षा देने के लिए जरूरी नहीं है कि सेक्स शिक्षा पाठ्यक्रम में ही शामिल की जाए. स्कूल में टीचर्स को चाहिए कि वे लड़कियों को बताएं कि गर्भनिरोधक गोलियां क्या होती हैं. इन का उपयोग क्यों किया जाता है. बहुत सारी लड़कियों के साथ बलात्कार जैसी घटना हो जाती है तो वे या तो मां बन जाती हैं या फिर आत्महत्या कर लेती हैं. ऐसी लड़कियों को इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए कि अब इस तरह की गोली भी आती है जिस के खाने से अनचाहे गर्भ को रोका जा सकता है.

डाक्टर रेनू मक्कड़ का कहना है, ‘‘अस्पतालों में महिला डाक्टरों को एक दिन के कुछ घंटे ऐसे रखने चाहिए जिस के दौरान किशोरियों की परेशानियों को हल किया जा सके. यहां पर परिवार नियोजन की बात होनी चाहिए. स्कूलों को भी समयसमय पर डाक्टरों को साथ ले कर ऐसी चर्चा करानी चाहिए जिस से छात्र और टीचर दोनों को सही जानकारी मिल सके. किशोर उम्र में सब से बड़ी परेशानी लड़कियों में माहवारी को ले कर होती है. आमतौर पर माहवारी आने की उम्र 12 साल से 15 साल के बीच की होती है. अगर इस बीच में माहवारी न आए तो डाक्टर से मिल कर पता करना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है.’’

लड़कियों की परेशानियों से निकलेगा हल

माहवारी में देरी का कारण खानपान में कमी, पारिवारिक इतिहास जैसे मां और बहन को अगर माहवारी देर से आई होगी तो उस के साथ भी देरी हो सकती है. इस के अलावा कुछ बीमारियों के चलते भी ऐसा होता है. गर्शय का न होना, उस का छोटा होना, अंडाशय में कमी होना, क्षय रोग और एनीमिया के कारण भी देरी हो सकती है.

डाक्टर के पास जा कर ही पता चल सकता है कि सही कारण क्या है. यह बात भी ध्यान देने के योग्य है कि कभीकभी लड़की उस समय भी गर्भधारण कर लेती है जब उस को माहवारी नहीं होती है. ऐसा तब होता है जब लड़की का शरीर गर्भधारण के योग्य हो जाता है लेकिन माहवारी किसी कारण से नहीं आती है. यह नहीं सोचना चाहिए कि जब तक माहवारी नहीं होगी गर्भ नहीं ठहर सकता है.

माहवारी में दूसरी तरह की परेशानी भी आती है. कभीकभी यह समय से शुरू तो हो जाती है लेकिन बीच में एकदो माह का गैप भी हो जाता है. शुरुआत में यह नौर्मल होती है लेकिन अगर यह परेशानी बारबार हो तो डाक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है.

कभीकभी माहवारी का समय तो ठीक होता है लेकिन यह ज्यादा मात्रा में होती है. अगर ध्यान न दिया जाए तो लड़की का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और उस का विकास रुक जाता है. परेशानी की बात यह है कि कुछ लोग अपनी लड़कियों को डाक्टर के पास लाने से घबराते हैं. उन का मानना होता है कि अविवाहित लड़की की जांच कराने से उस के अंग को नुकसान हो सकता है, जिस से पति उस पर शक कर सकता है. ऐसे लोगों को पता होना चाहिए कि अब ऐसा नहीं है. अल्ट्रासाउंड और दूसरे तरीकों से जांच बिना किसी नुकसान के की जा सकती है.

जानकारियां जो दी जानी चाहिए

सेक्स संबंधों से गर्भ से बचाव के तरीके बताए जाने चाहिए जिस से लड़कियां यौनरोगों से भी दूर रहें. अगर कुछ ऐसा हो जाए तो उस के बचाव के लिए गोली का सेवन कैसे करना चाहिए, यह भी बताना जरूरी होता है.

गर्भ ठहरने से क्या परेशानियां हो सकती हैं? गर्भपात कराना कितना मुश्किल होता है? उस का कैरियर और आगे के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? इन सब के बारे में भी बताया जाना चाहिए.

एनीमिया और माहवारी में ज्यादा स्राव होना खतरनाक होता है. इस को छिपाया नहीं जाना चाहिए. इसी उम्र में त्वचा संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं.

पढ़ाई का बोझ और नएनए दोस्त बनने से कुछ मनोवैज्ञानिक परेशानियां भी हो सकती हैं. इन को भी सलाहकारों के जरिए दूर कराना चाहिए.

मुंह बोला देवर मुझ पर लाइन मारता है, मेरा मन भी मचलने लगता है कहीं इन सब में मेरा घर ना टूट जाएं, मै क्या कंरू?

सवाल

मैं एक 38 साल की औरत हूं और 2 बच्चों की मां भी. पड़ोस का एक मुंहबोला देवर मुझ पर लाइन मारता है. एक दिन जब घर पर कोई नहीं थातब वह हमारे यहां दबे पैर चला आया और मुझे गले लगा कर चूम लिया.

मेरे पति अब मुझ पर ध्यान नहीं देते हैं. उस देवर ने मुझे चूम कर दिल के अरमान जगा दिए. पर कहीं इस सब से मेरा घर न टूट जाएइसलिए मैं कदम पीछे कर लेती हूं. लेकिन वह देवर जब मुझे कहीं बाहर घुमाने की बात कहता हैतो मेरा मन भी मचलने लगता है. मैं क्या करूं?

जवाब

पति ध्यान न दे तो पत्नी का ध्यान भटकना कुदरती बात हैलेकिन उस मुंहबोले देवर के चक्कर में पड़ने से आप को कुछ हासिल नहीं होगाउलटे राज खुलने पर हजार दुश्वारियां खड़ी हो जाएंगी. हंसनाबोलना हर्ज की बात नहीं और थोड़ीबहुत छूट भी उसे दे देंलेकिन मन को ज्यादा मचलने से रोकें और पति को रिझाने की कोशिश करें. उसे अपने दिल की बात समझाएं कि उम्र बढ़ जाने से अरमान छोटे नहीं हो जाते. खुद सजसंवर कर रहें और पति को बिस्तर पर आने के लिए उकसाएं.                     

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प्रगति मैदान सुरंग : 15 सैकंड में लाखों की लूट

मोदी सरकार के नए और भव्य संसद भवन से प्रगति मैदान सुरंग की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है. दिल्ली के रिंग रोड, मथुरा रोड और भैरों मार्ग का ट्रैफिक आसान बनाने के लिए इस सुरंग को लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाया गया है.

920 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली तकरीबन डेढ़ किलोमीटर लंबी इस सुरंग को बनाने में 4 साल लग गए थे, जिस का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून, 2022 में अपने हाथों से किया था.

पर ‘डबल इंजन’ सरकार की कामयाबियों का हल्ला मचाने वालों को कहां पता था कि एक साल बाद कुछ अपराधी महज 15 सैकंड में इसी नईनवेली सुरंग में लाखों रुपए की चोरी को अंजाम दे देंगे.

दिन था 24 जून, 2023 का. दोपहर के ढाई बजे थे. चांदनी चौक की ओमिया ऐंटरप्राइजेज में एक डिलिवरी एजेंट रुपयों से भरा बैग ले कर लालकिला चौक से पेमेंट करने गुरुग्राम जा रहा था. उस के साथ एक और मुलाजिम भी था. जैसे ही वे इस सुरंग में गाड़ी से दाखिल हुए कि तभी लूट की वारदात हो गई.

पीडि़तों ने तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में आ कर इस वारदात के संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. इस के बाद पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया, ‘उन्होंने (पीडि़तों) लालकिला से एक ओला कैब किराए पर ली और जब कैब सुरंग में दाखिल हुई, तो 2 मोटरसाइकिलों पर 4 लोगों ने उन की गाड़ी को रोका और बंदूक की नोक पर 2 लाख रुपए से भरा बैग लूट लिया.’

चूंकि यह मामला देश की सब से बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट के बेहद नजदीक हुआ था, तो पुलिस पर इसे सुलझाने का बहुत ज्यादा दबाव था. पुलिस ने मुस्तैदी भी दिखाई और इस मामले में अब तक 7 लोगों उस्मान अली उर्फ कल्लू, इरफान, सुमित उर्फ आकाश, अनुज मिश्रा उर्फ सैंकी, कुलदीप उर्फ लंगड़, प्रदीप उर्फ सोनू, अमित उर्फ बाला को गिरफ्तार किया है.

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इस लूट को अंजाम देने से पहले वीरवार और शुक्रवार को इलाके की रेकी की थी. इस के बाद शनिवार को लूट को अंजाम दिया था.

पुलिस के मुताबिक, उस्मान अली और प्रदीप इस वारदात के मास्टरमाइंड हैं. उस्मान अली को चांदनी चौक इलाके में नकदी की आवाजाही के बारे में जानकारी थी, क्योंकि वह वहां कई सालों तक एक ईकौमर्स कंपनी में कूरियर बौय के तौर पर काम कर चुका था.

उस्मान अली ने कई बैकों से कर्ज ले रखा था और वह क्रिकेट की सट्टेबाजी में भी पैसा हार गया था. उस ने अपना कर्ज चुकाने के लिए इस लूट की साजिश रची थी.

उस्मान अली को जानकारी थी कि चांदनी चौक में कैश ट्रांजैक्शन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होता है. ऐसे में उस ने टारगेट की पहचान कर उस की रेकी शुरू की. शनिवार को उस्मान अली ने अपने साथियों को बताया था कि हरियाणा नंबर की टैक्सी में नकदी ले जाई जा रही है.

अनुज मिश्रा जल बोर्ड में कौंट्रैक्ट पर मेकैनिक है, जबकि कुलदीप सब्जी बेचता है और उसी ने लूट के लिए पिस्टल और गोलियों का इंतजाम कराया था. इरफान हज्जाम है और वह अपने चचेरे भाई उस्मान के जरीए दूसरे आरोपियों से मिला था. सुमित भी सब्जी बेचता है.

पुलिस के मुताबिक, प्रदीप फिरौती के एक मामले में 8 साल तक न्यायिक हिरासत में रह चुका है. वह 2 साल पहले ही जेल से रिहा हुआ है. अमित प्रदीप के जरीए ही उस्मान अली से मिला था.

उस्मान अली के बुराड़ी के फ्लैट पर इस लूट कांड की साजिश रची गई. कुलदीप पर पहले से झपटमारी और डकैती के 16 मामले दर्ज हैं, वहीं अनुज मिश्रा पर 5 केस दर्ज हैं, जबकि प्रदीप 37 आपराधिक मामलों में शामिल रहा है.

पुलिस में दर्ज की गई रिपोर्ट में 2 लाख रुपए की लूट का जिक्र किया गया है, पर यह बात भी उठ रही है कि लूट तो 50 लाख रुपए की हुई थी. पुलिस ने आरोपियों से तकरीबन 5 लाख रुपए भी बरामद किए थे. अपराध बढ़े हैं राजधानी में आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में साल 2019 में लूट के 1,956 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2020 में यही मामले बढ़ कर 1,963 हो गए थे. साल 2021 में राजधानी में दिनदहाड़े लूटने के 2,333 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि साल 2022 के सिर्फ 15 जुलाई तक 1,221 मामले दर्ज किए जा चुके थे.

अगर प्रगति मैदान सुरंग कांड के इन आरोपियों पर नजर डालें, तो उस्मान अली कुरियर बौय का काम करता था. अनुज मिश्रा मेकैनिक था, तो इरफान हज्जाम, जबकि सुमित और कुलदीप सब्जी बेचते थे. ये सातों शातिर थे, पर कहीं न कहीं ऐसे अपराधों की जड़ में बेरोजगारी होती है. उसी की वजह से भटक कर नौजवान तबका जुर्म की राह पर चला जाता है.

पिछले कुछ सालों में और कोरोना के कहर के बाद लोगों का रोजगार छूटा है या फिर बहुतों को कोई काम मिला ही नहीं है. ऊंची पढ़ाई वाले भी एक अदद नौकरी की तलाश में जूते घिसते नजर आते हैं. फिर दिल्ली जैसे शहर में प्रवासियों का आनाजाना लगा रहता है. उन में से जो ढंग का काम पा लेते हैं, वे तो दिल्ली में जमे रहते हैं, बहुत से किसी अपराध को अंजाम दे कर भाग जाते हैं.

दिल्ली में बढ़ती आबादी, नौजवान तबके में नशे की लत और पुलिस के अपराधियों के प्रति कमजोर रवैए से भी जुर्म की दर में इजाफा हुआ है.

बीवी के सैक्स पर बहाने

कत्ल की यह गुत्थी सुलझाने में पुलिस को हालांकि 10 दिन लग गए, लेकिन जब वजह का खुलासा हुआ, तो हर कोई हैरान रह गया कि ऐसा भी होता है.

दरअसल, 24 साला जातवथ तरुण तेलंगाना के नगरकुरनूल में आटोरिकशा चलाता था. 2 साल पहले ही उस ने अपनी माशूका झांसी से लव मैरिज की थी. जल्द ही उन दोनों के प्यार की निशानी एक प्यारी सी बेटी पैदा हुई. जिंदगी मजे में नन्ही बच्ची के लिए सपने बुनती कट रही थी. 20 मई, 2023 को तरुण ने बड़े प्यार से हमबिस्तरी की ख्वाहिश जाहिर की, तो झांसी ने बेरुखी से मना कर दिया.

यह बेरुखी असल में थकान थी, जिस से तरुण ने कोई वास्ता नहीं रखा और जबरदस्ती करने लगा तो झांसी भी बिफर उठी. इसे विरोध या बचाव जो भी कह लें, पर तरुण को गुस्सा आ गया और वह थकीहारी झांसी को दबोचने लगा. इस पर भी वह काबू में नहीं आई, तो उस ने बीवी का मुंह अपने हाथ से दबा दिया और फिर देखते ही देखते गुस्से में झांसी का गला घोंट दिया.

बाद में घबराए तरुण ने अपने घर वालों को खबर दी, जो भागेभागे आए और झांसी को नजदीक के ओबेसी अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने झांसी को मरा बता दिया. लाश को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया अस्पताल ले जाया गया. मौत चूंकि शक के दायरे में थी, इसलिए अस्पताल वालों ने पुलिस को बुला लिया.

शुरुआती पूछताछ में तो तरुण और उस के घर वालों ने पुलिस को चकमा दे दिया, लेकिन झूठ 10 दिन ही टिक पाया. 1 जून, 2023 की पूछताछ में तरुण ने अपना गुनाह कबूलते हुए सच उगल दिया और झांसी की हत्या की वजह भी बता दी.

जाहिर है कि झांसी बहाना नहीं बना रही थी और तरुण की मंशा भी उसे जान से मार देने की नहीं थी, लेकिन इस से उस का गुनाह कमतर नहीं हो जाता.

यह थी बहानेबाजी

बीवी के बिस्तरबाजी के लिए राजी न होने पर हत्या की एक और वारदात तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से सामने आई थी, जब 34 साला श्रीनिवासन ने अपनी बीवी अम्मू की हत्या कर दी थी.

इस मामले में श्रीनिवासन की सैक्स की मांग अम्मू ने यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि वह सैक्स करेगी तो सिर्फ अपने आशिक से, तो श्रीनिवासन को मरनेमारने की हद तक गुस्सा आना कुदरती बात थी. उस ने चाकू से अम्मू को मार डाला.

अदालत में मामला गया, तो श्रीनिवासन के वकील की दलीलों से इत्तिफाक रखते हुए उस की उम्रकैद की सजा जज ने कम करते हुए 10 साल कर दी.

अदालत ने महसूस किया कि श्रीनिवासन का इरादा हत्या करने का नहीं था. अम्मू ने उसे बिस्तर से धक्का देते हुए उकसाया था और सैक्स करने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह दूसरे मर्द के साथ सैक्स करेगी. नतीजतन, मियांबीवी में झगड़ा हुआ.

क्या करें जब…

तरुण को चाहिए था कि वह झांसी के इनकार को दिल पर नहीं लेता, क्योंकि छोटे बच्चे की देखभाल में औरत बहुत थक जाती है और उस की सैक्स की इच्छा भी दम तोड़ने लगती है. यह हालत कुछ दिनों में ठीक भी हो जाती है और बीवी पहले की तरह सैक्स का मजा लेने और देने भी लगती है.

सैक्स करने की इच्छा पत्नी की नहीं थी, लेकिन पति की तो थी, लिहाजा उसे संतुष्ट करने के लिए वह उस के अंग की मालिश करते हुए उस का हस्तमैथुन कर सकती थी या मुख मैथुन से भी उसे संतुष्ट कर सकती थी, जो आजकल के नए शादीशुदा जोड़ों में आम बात है. इस से सांप भी मर जाता और लाठी भी नहीं टूटती.

श्रीनिवासन ने जो किया, कोई भी मर्द गुस्से में वही करता. इस मामले में पत्नी गलत थी, लेकिन श्रीनिवासन के इस जुर्म को सही नहीं ठहराया जा सकता.

जब बीवी बिलकुल मना कर दे

इन 2 मामलों से जाहिर होता है कि अगर बीवी बिस्तरबाजी के लिए बहाना बनाए या मना करे, तो नतीजे खतरनाक और जानलेवा भी हो सकते हैं. असल दिक्कत तो उन शौहरों को होती है, जिन की बीवी सैक्स के लिए बिना वजह उन्हें तरसाती हैं.

भोपाल के 28 साला मुकेश नामदेव (बदला हुआ नाम) की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिस की बीवी रंजना  (बदला हुआ नाम) हमबिस्तरी के लिए पिछले 2 साल से राजी नहीं हो रही है. वजह पूछने पर वह साफसाफ कुछ नहीं बताती, तो मुकेश की परेशानी और बढ़ जाती है.

रंजना घरगृहस्थी के बाकी कामकाज ठीक से करती है और पति व दोनों बच्चों का ध्यान भी बराबर रखती है, लेकिन जब कभी रात को मुकेश की इच्छा सैक्स की होती है, तो वह मना कर देती है.

शुरू में उस ने सिरदर्द, थकान और ‘आज मन नहीं कर रहा’ जैसे चलताऊ बहाने बनाए, तो मुकेश मान जाता था, पर बाद में मुकेश समझ गया कि बात कुछ और है. अब तो उस की पहल करने की भी इच्छा नहीं होती. सैक्स की अपनी भूख मिटाने के लिए वह हस्तमैथुन करने लगा है. लेकिन नाश्ते से पेट नहीं भरता.

वह आह सी भरते हुए बताता है, ‘खाना तो खाना ही पड़ता है और मेरी हालत तो नदी किनारे पड़े प्यासे जैसी हो गई है. जो पानी देख तो सकता है, पर उस से प्यास नहीं बुझा सकता.’

रंजना की बहानेबाजी की वजह मुकेश को पता चले तो वह कुछ करे, अब वह दिक्कत में है कि किस से परेशानी बता कर इस का हल पूछे. खुद फिट है या नहीं, इस के लिए 2 साल में वह 2 दफा कालगर्ल्स के पास जा चुका है, लेकिन वहां उसे मजा नहीं आया, क्योंकि एक तो कालगर्ल्स महंगी पड़ती हैं, दूसरे पुलिस और बीमारियों का डर भी सिर पर सवार रहता है. ‘जल्दी निबट लो’ की नसीहत का गर्ल्स पहले ही दे देती हैं और पूरी रात के लिए उन्हें रखने की मुकेश की हैसियत नहीं.

पति ध्यान दें

मुकेश अब दिमाग के डाक्टर या सैक्सोलाजिस्ट के पास जाने का विचार कर रहा है, जिस से रंजना के बाबत कुछ हो सके. दरअसल, वह कई औरतों की तरह ठंडेपन का शिकार हो चली है, लेकिन मुकेश को इस की जानकारी नहीं, जबकि छिंदवाड़ा के 30 साला राजेश पंवार (बदला हुआ नाम) ने समय रहते अपनी बीवी सलोनी (बदला हुआ नाम) की परेशानी को समझा और उसे डाक्टर के पास ले गया तो कुछ दिनों में ही सलोनी बिस्तरबाजी में पहले की तरह दिलचस्पी लेने लगी.

बकौल राजेश, डाक्टरनी ने कुछ दवाएं देते हुए बताया था कि कई बार औरतें कई कारणों से सैक्स में दिलचस्पी लेना कम या बंद कर देती हैं. इन में खास हैं सैक्स से डरने लगना, जिंदगी में कोई हादसा हो जाना जैसे किसी अपने की मौत, जरूरत से ज्यादा धर्मकर्म में लग जाना या फिर सैक्स को गलत ढंग से करना.

राजेश ने डाक्टरनी की दी टिप्स को अपनाया, तो नतीजे उस के हक में आए. उस ने पहले फोरप्ले पर ध्यान दिया कि इसे जितना हो सके लंबा खींचा जाए और जरूरी नहीं कि हर बार सैक्स किया ही जाए. जब तक पत्नी मना न

करे या कोई बहाना न बनाए तब तक फोरप्ले जारी रखा जाए. इस के अलावा सैक्स करते समय पोजीशन बदलना भी जरूरी है.

कई बार पत्नियों को कुछ अलग चाहिए रहता है, लेकिन वे शर्म और पति क्या सोचेगा के चलते सैक्स को मशीनी ढंग से करती रहती हैं और इस से न केवल बोर होने लगती हैं, बल्कि धीरेधीरे कतराने भी लगती हैं, जिस का पति को अंदाजा भी नहीं होता.

पहले बहाने को गंभीरता से लें

यही वह स्थिति होती है, जहां से बात बिगड़ती है, इसलिए जब बीवी पहली बार बहाना बनाए तो पति को अलर्ट हो जाना चाहिए और जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए. पत्नी से प्यार से इस की वजह जाननी चाहिए, लेकिन उसे उस के हाल पर नहीं छोड़ देना चाहिए.

बीवी सिरदर्द, बदनदर्द और आज मूड नहीं है जैसे बहाना बनाए, तो दर्द भगाने के बहाने उस के बदन की मालिश करना शुरू कर देना चाहिए, जिस से उसे लगे कि आप उस का ध्यान रखते हैं. इसी मालिश के चलते उस के नाजुक अंगों को सहलाते रहने से वह तैयार भी हो सकती है. लेकिन इस के लिए शौहर में सब्र का होना जरूरी है.

एकदम न टूट पड़ें

बीवी इसलिए भी बहाने बनाना शुरू कर देती है कि पति सैक्स का मूड बनते ही जानवरों की तरह उस पर टूट पड़ता है और खुद का काम निकलते ही करवट बदल कर सो जाता है.

पत्नी को नींद की गोली समझने वाले पति की पत्नी असंतुष्ट रह जाती है और ऐसा अगर बारबार होता है तो फिर वह बहाने गढ़ना शुरू कर देती है, इसलिए मौका पाते ही बीवी से छेड़छाड़, सैक्सी बातें जरूर करते रहना चाहिए और कभीकभी उस के साथ बैठ कर पोर्न फिल्में भी देखनी चाहिए.

शक से बचें

किसी भी शौहर के लिए पत्नी से न सुनना जिंदगी के वाहियात तजरबों में से एक होता है. ऐसे में ज्यादातर शौहर खुद की मर्दानगी और पत्नी के चालचलन पर शक करने लगते हैं. जरूरी नहीं कि पत्नी अगर बिस्तर में बहाने बना रही है, तो उस का कहीं और चक्कर शुरू हो गया हो.

हालांकि श्रीनिवासन के मामले से लगता है कि ऐसा होता होगा तभी तो बीवी मना कर रही है यानी अपनी जिस्मानी भूख कहीं और से मिटा रही है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है, इसलिए बिना सुबूत के बीवी के चालचलन

पर शक नहीं करना चाहिए और न ही खुद की फिटनैस को ले कर चिंतित होना चाहिए.

सैक्स के अलावा भी बहुतकुछ

गलत नहीं कहा जाता कि मियांबीवी गाड़ी के दो पहियों की तरह होते हैं, जिन की घरेलू और सामाजिक जिम्मेदारियां भी होती हैं. दोनों पहिए ठीकठाक चलते रहें, इस के लिए सैक्स के अलावा जमाने में और भी चीजें हैं.

पतिपत्नी की दीगर जरूरतों और सेहत का ध्यान रखें. खाली समय में उस से बातचीत करते रहें, उसे कभीकभार घुमानेफिराने ले जाएं, जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर उसे तोहफा दें और खानेपीने यानी किचन में भी दिलचस्पी लें तो पत्नी से बौंडिंग बढ़ती है और सैक्स कोई बड़ी समस्या नहीं रह जाती.

लेकिन इन का क्या

दिक्कत तब खड़ी होती है, जब मियांबीवी में किसी भी मसले पर तकरार होती है और दोनों में से कोई भी झुकने के लिए तैयार नहीं होता. तब पत्नी को लगता है कि वह सैक्स के लिए तरसा और तड़पा कर पति को सबक सिखा सकती है, तो भी वह बहाने बनाने लगती है. दोनों में कलह अगर होती है, तो भी पत्नी बिस्तरबाजी में नखरे दिखा कर बदला लेने पर उतारू हो आती है.

ऐसे में सैक्स होना तो दूर की बात है, रिश्ता ही टूटने के कगार पर आ जाता है और दोनों अदालत में एकदूसरे के खिलाफ सच्चे कम, झूठे इलजाम ज्यादा लगाते नजर आते हैं यानी बहाना बनाना जिंदगी के सुकून और गृहस्थी के सलामत बने रहने पर भी असर डालता है. किसी बात पर गुस्सा हो कर पत्नी लंबे समय के लिए मायके चली जाती है तो भी उस की सैक्स की इच्छा खत्म होने लगती है.

क्या कहती हैं अदालतें

सैक्स बेहद अहम है और शादी का एक बड़ा मकसद भी है, लेकिन जब मियांबीवी बिस्तर में करवट बदल कर सोने लगें तो कई विवाद और फसाद भी खड़े होने लगते हैं, जो अदालत की चौखट तक भी पहुंचते हैं.

जून के महीने में एक मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि पति या पत्नी द्वारा सैक्स के लिए मना करना क्रूरता नहीं है. हिंदू विवाह अधिनियम में क्रूरता को तलाक का आधार माना गया है, लेकिन जीवनसाथी द्वारा सैक्स से इनकार करना आईपीसी नियमों के तहत क्रूरता नहीं है.

लेकिन एक दूसरे मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ही तलाक की डिक्री दे दी थी. इस मामले में पत्नी ने कहा था कि उस का पति हमेशा ब्रह्मचर्य की वकालत करता है और आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी के वीडियो देखता है. इसी तरह के एक मामले में 25 मई, 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि बिना किसी पर्याप्त कारण के जीवनसाथी के साथ लंबे समय तक सैक्स से इनकार करना मानसिक क्रूरता के समान है.

यह मामला हालांकि उलझा हुआ है, जिस में शादी 1979 में हुई थी और 1994 में पंचायत ने पतिपत्नी का तलाक रजामंदी से करा दिया था. तब पति ने कहा था कि उस ने कई बार शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, लेकिन पत्नी ने इस से साफ इनकार कर दिया.

न झांसी बनें, न तरुण बनें

साफ दिख रहा है कि अदालतें भी इस मसले पर अभी एक राय नहीं हैं, लेकिन पति और खासतौर पर बहानेबाज पत्नियों को तो बिस्तर पर एक राय होना ही पड़ेगा, कि हां हम सैक्स के लिए इनकार नहीं करेंगे और इसे सबक सिखाने का हथियार नहीं बनाएंगे, नहीं तो हमारी हंसतीखेलती घरगृहस्थी खतरे में पड़ जाएगी और सैक्स का मजा भी हम से छिन जाएगा.

हां, पत्नी अगर कभीकभार यह कहे कि पहले साड़ी दिलाओ या सिनेमा ले जाओ या बाजार ले जा कर चाटपकौड़ी, मिठाई खिलाओ, तो इस को बहानेबाजी नहीं माना जाएगा. पति अपनी हैसियत के मुताबिक पत्नी की ऐसी मांगें पूरी करेगा. भलाई इसी में है कि पति तरुण और पत्नी झांसी जैसे कभी न बनें.

 

भांग का नशा है बड़ी सजा

सस्ता होने के चलते भांग का नशा बड़ी तेजी से नशेडि़यों के बीच मशहूर होता जा रहा है. वैसे तो भांग सरकारी ठेके से ही मिलती है, लेकिन बहुत बार लोग खुद ही भांग की पत्तियों को पीस कर, उन के गोले बना कर नशे के तौर पर इस्तेमाल करने लगते हैं.

आमतौर पर लोग सालभर भांग का नशा करते हैं, लेकिन होली के त्योहार में इस का शौकिया इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. कई बार लोग भांग को मस्ती से जोड़ कर देखते हैं, पर असल में यह नशा मजा नहीं, बल्कि बड़ी सजा होता है.

भांग एक तरह का पौधा होता है, जिस की पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है. भांग खासतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रचुरता से पाई जाती है.

भांग के पौधे 3-8 फुट ऊंचे होते हैं. इस के नर पौधे के पत्तों को सुखा कर भांग तैयार की जाती है. भांग के मादा पौधों के फूलों को सुखा कर गांजा तैयार किया जाता है. भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमी राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं.

भारत में भांग की खेती बहुत समय से की जाती रही है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने कुमाऊं, उत्तराखंड में शासन स्थापित होने से पहले ही भांग के व्यापार को अपने हाथ में ले लिया था. उस ने काशीपुर के नजदीक डिपो की स्थापना कर ली थी. दानपुर, दसौली और गंगोली की कुछ जातियां भांग के पौधे के रेशे से कुथले और कंबल बनाती थीं.

इन्होंने किया भांग का प्रचार

भांग के नशे का मस्ती वाला रंग कई फिल्मों और गानों में भी दिखाई देता है. इस को देख कर लोगों को लगता है कि भांग के नशे में मजा ही मजा होता है. भांग को पीसते, उस में ड्राईफ्रूट्स, दूध मिलाते और इस को ठंडाई के रूप में पीते दिखाया जाता है. इसी तरह कुछ लोग इस को प्रसाद के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.

असल में भांग का नशा अलग तरह का होता है. यह काफी हद तक शरीर के तंत्र पर मस्तिष्क की पकड़ को खत्म कर देता है. मेवों के साथ भांग को बारीक पीस कर बनाई गई ठंडाई स्वादिष्ठ होती है, जिस की वजह से लोग इस को ज्यादा पी जाते हैं.

नहीं रहता शरीर पर कंट्रोल

भांग का नशा करने वाला नशे के बाद जो भी काम करता है, उसी को बारबार करता रहता है. इस की वजह यह होती है कि भांग के नशे के चलते इनसान के दिमाग का कंट्रोल शरीर पर नहीं रहता है.

भांग के नशे के बाद मुंह और जीभ का स्वाद कड़वा सा हो जाता है. तब कुछ भी खाने पर उस का स्वाद महसूस नहीं होता. सोने पर ऐसा लगता है कि आप बिस्तर से ऊपर उठ कर उड़ते जा रहे हैं.

अगर भांग का ज्यादा नशा किया है, तो 2-3 दिनों तक इस का असर रहता है. कई बार हालत इतनी खतरनाक हो जाती है कि इनसान को अस्पताल तक ले जाना पड़ सकता है.

बना देता है मानसिक रोगी

‘द माइंड स्पेस’ क्लिनिक की साइकोलौजिस्ट डाक्टर अदिति जैन कहती हैं, ‘‘ये वे हालात हैं, जब दिमागी तौर पर शरीर का कंट्रोल खत्म होने लगता है. यह डिप्रैशन को बढ़ाने वाला होता है. इस वजह से ही भांग का नशा करने के बाद लोग या तो लगातार हंसते रहते हैं या फिर रोते रहते हैं.

‘‘भांग के लगातार सेवन से खतरे बढ़ जाते हैं. इस का असर दिमाग पर पड़ता है. यूफोरिया, एंजाइटी, याददाश्त का असंतुलित होना, साइकोमोटर परफौर्मेंस जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. इस के साथ ही भांग के सेवन से दिमाग पर खराब असर पड़ता है. गर्भवती महिलाओं के भ्रूण पर बुरा असर पड़ता है. इस की वजह से याददाश्त कमजोर होने लगती है. भांग का नशा आंखों और पाचन क्रिया के लिए भी अच्छा नहीं होता है.’’

कुछ लोग भांग की पत्तियों को चिलम में डाल कर धूम्रपान करते हैं, तब यह खून में सीधे प्रवेश करते हुए दिमाग और शरीर के दूसरे भागों में पहुंच जाती है. यह सोचनेसमझने की ताकत को प्रभावित करता है.

भांग के नियमित इस्तेमाल से साइकोटिक एपिसोड या सीजोफ्रेनिया होने का खतरा दोगुना हो सकता है. भूख में कमी, नींद आने में दिक्कत, वजन घटना, चिड़चिड़ापन, आक्रामकता, बेचैनी और गुस्सा बढ़ना जैसे लक्षण शुरू हो जाते हैं.

अगर कोई आदमी 15 दिन तक लगातार भांग का सेवन करे, तो वह आसानी से मानसिक रोगों का शिकार हो सकता है. लिहाजा, इस नशे से बचें.

पलक तिवारी के रैंप वॉक का लोगो ने बनाया मजाक, कहा- छपरी कैट वॉक

टीवी एक्टर्स और बिग बॉस विनर श्र्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी इन दिनों चर्चोओ में है.सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ से डेब्यू करने वाली पलक तिवारी लोगों को काफी पसंद है लेकिन कई बार उन्हे सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को निशाना बनना पड़ता है.ऐसा ही हाल में उन्हे रैप वॉक करते लोगों ने उनका मजाक बनाया है.

 

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आपको बता दें, कि पलक तिवारी एक फैशन इवेंट में पंहुची थी.उन्होने एक अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड के लिए रैंप वॉक किया. रैंप वॉक करते हुए उनका सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है.जिस वीडियो को देख लोगों ने उनका जमकर मजाक बनाया और उन्हे ट्रोल किया.इस रैंप वॉक दौरान पलक ने स्पोर्टस ब्रा और लूज पैंट कैरी किया हुआ था.उन्होने इस आउटफिट के साथ फोटोशूट भी कराया.

 

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बता दें, रैंप वॉक में पलक जिस तरह चल कर आती है वह लोगों को बिलकुल पसंद नही आया.लोगों ने उनकी वॉक को देखकर उन्हे बुरी तरह ट्रोल किया और कहा कि इन यंग बच्चो को इस तरह रैंप व़ॉक करना शर्मानाक है. दूसरे यूजर्स ने कहा कि छपरी कैट वॉक, तीसरे ने कहा कि वह नर्वस है .. ये काम उनसे अच्छा कोई भी कर सकता था. चौथे ने कहा कि ‘स्कूल की फेयरवेल वॉक कर रही है दीदी.’ तो वहीं एक ने लिखा है कि ये रैम्प पर रेस क्यों लगा रही है. वहीं एक अन्य ने लिखा है कि थोड़ा प्रैक्टिस करो, ट्रेनिंग लो फिर आना. इस तरह कई लोगों ने उन्हें रिहर्सल करने की भी सलाह दी है. इस तरह उनके इस वीडियो पर लगातार कमेंट आ रहे हैं.

पलक के वर्क फ्रंट की बात करें, तो ‘रोजी द केसर चैप्टर’ के साथ बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू करने के लिए तैयार हैं. उनकी इस फिल्म का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. वे पहले ही बिजली बिजली गानों से फैंस के बीच पॉपुलर हो चुकी हैं. यही नहीं, इब्राहिम अली खान के साथ उनकी दोस्ती भी चर्चा में रहती है. दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया है.

MTV Roadies 19: CBI को लेकर पूछा गया सवाल तो रिया चक्रवती ने दिया ऐसा रिएक्शन

MTV रोडीज 19 शो इन दिनों हिट चल रहा है शो इन दिनों सुर्खियो में बना हुआ है.शो की खास बात ये है कि रिया चक्रवती ने शो में वापसी कर ली है वह शो की लीडर है साथ ही प्रिंस नरुला और गौतम गुलाटी शो की मुख्य भूमिका में है. तीनों गैंग लीडर है. शो के मेंटॉर सोनू सूद है.बता दें, कि रिया सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से सुर्खियों में है अब शो में भी उनसे कई सवाल किए जा रहे है. शो का हाल ही में प्रोमो रिलीज हुआ है जिसमे गौतम गुलाटी सीबीआई को लेकर सवाल करते है इसपर रिया तुंरत अपना रिएक्शन देती हुई नजर आती है.

 

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आपको बता दें, कि प्रोमो वीडियो में दिखाया गया है कि गौतम गुलाटी एक कंटेस्टेंट से सीबीआई की फुल फॉर्म पूछते है इसपर रिया अपना कुर्सी से उछलते हुए कहती है कि मुझे पता है जबकि कंटेस्टेंट गलत जवाब देते है और रिया उन्हे सही करती है औऱ बताती है कि सीबीआई की फुल फॉर्म सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन है.

रिया चक्रवती ने कई लोगों की बाते सुनी है और सही है. इससे पहले एक कंटेस्टेंट के सामने रिया ने कहा था कि बहुत से लोगों ने काफी चीजे मेरे बारे में कही है मुझे बहुत से नाम दिए है और क्या कुछ नहीं कहा है. लेकिन क्या मैं उसे मान लू? क्या मैं उनकी वजह से अपनी लाइफ में रुकंगी. बिलकुल नहीं, कहने दो जिसे जो कहना है.

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव नतीजे : भारतीय जनता पार्टी के ‘मिशन 24’ पर गाज

अब से कुछ साल पहले तक ऐसा माना जाता था कि पंचायत चुनाव गांव की सरहद तक सीमित रहते हैं, पर अब ऐसा नहीं है. आज की तारीख में हर बड़ा सियासी दल पूरी ताकत से इन चुनाव में अपना दमखम दिखाता है और अगर लोकसभा चुनाव नजदीक हों तो पंचायत चुनाव नतीजों की अहमियत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.

इस बात को पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव से समझते हैं, जहां ममता बनर्जी को मिली बंपर जीत से पूरी तृणमूल कांग्रेस की बांछें खिली हुई हैं और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले बिखरे विपक्ष में थोड़ी उम्मीद जगी है कि केंद्र की ‘डबल इंजन’ सरकार की चूलें हिल सकती हैं, बशर्ते आपसी मतभेद भूल कर भारतीय जनता पार्टी के झूले में झूलते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का डट कर सामना किया जाए.

पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई, 2023 को एक चरण में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की कुल 73,887 सीटों के लिए चुनाव हुए. नतीजों में तृणमूल कांग्रेस सब पर भारी पड़ी. उस ने भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और वामपंथी दलों को रगड़ कर रख दिया.

ममता बनर्जी का जलवा बरकरार

कोई कुछ भी कहे, पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को टक्कर देना फिलहाल बड़ा मुश्किल दिख रहा है. इस की सब से बड़ी वजह ममता बनर्जी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए चलाई गई कल्‍याणकारी योजनाएं हैं, जिन का फायदा आम लोगों तक पहुंच रहा है.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, गांवदेहात के इलाकों में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी महिला सशक्तीकरण योजना ने महिला वोटरों को पार्टी से बांधे रखने में अहम रोल निभाया है. इस योजना के तहत सरकार सामान्य श्रेणी के परिवारों को 500 रुपए हर महीने और एससीएसटी श्रेणी के परिवारों को 1,000 रुपए हर महीने देती है.

इस के अलावा राज्य के लोगों को ममता बनर्जी के जुझारू तेवर पसंद आते हैं. वे सादगी से भरी जिंदगी जीती हैं और जनता की नब्ज पकड़ने में माहिर हैं. उन्होंने ‘मां, माटी, मानुष’ का जबरदस्त नारा द‍िया था और इसी के दम पर पश्चिम बंगाल में साल 2011 का विधानसभा चुनाव जीता था.

शिक्षकों की भरती और मवेशी व कोयला तस्करी रैकेट जैसे कई भ्रष्टाचार घोटालों के इलजाम लगने के बावजूद वोटरों ने तृणमूल कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा. याद रहे कि भ्रष्टाचार के इन मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एक प्रमुख कैबिनेट मंत्री, विधायकों, युवा नेताओं और सरकार के करीबी बड़े सरकारी अफसरों की गिरफ्तारी हुई थी.

भाजपा के साथ हुआ ‘खेला’

भारतीय जनता पार्टी को पंचायत चुनाव में भले ही पहले से ज्यादा सीटें मिली हों, पर नतीजे मनमुताबिक नहीं रहे. वहां पर राज्य भाजपा में टूट होती भी दिखी. पंचायत चुनाव से ठीक पहले भाजपा को बड़ा झटका देते हुए पार्टी विधायक सुमन कांजीलाल सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. अलीपुरद्वार निर्वाचन क्षेत्र की नुमाइंदगी करने वाले सुमन कांजीलाल को तृणमूल कांग्रेस पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता में एक समारोह में टीएमसी का झंडा सौंपा था.

पिछले कुछ समय से उत्तर बंगाल में मजबूत होती जा रही भाजपा को इस पंचायत चुनाव में झटका लगा. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर बंगाल में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था, जबकि इस बार के पंचायत चुनाव में उसे मनचाहे नतीजे नहीं मिले. कुछ जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद यह पार्टी उत्तर बंगाल में अच्छा रिजल्ट नहीं दे पाई.

साल 2019 के लोकसभा और साल 2021 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन को पैमाना मानें तो भारतीय जनता पार्टी को इस बार सीटों की तादाद में काफी बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. पूर्व मेदिनीपुर, कूचबिहार, उत्तर 24 परगना के मतुआ बहुल इलाकों और पूर्व मेदिनीपुर में नंदीग्राम छोड़ कर हर जगह उस के प्रदर्शन में काफी गिरावट आई.

दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की एकमात्र लोकसभा सीट पर भाजपा का लंबे समय से कब्जा रहा है, लेकिन इलाके में स्थानीय भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोरचा ने भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन को काफी पीछे छोड़ दिया. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोरचा के अध्यक्ष अनित थापा ने कहा, “यह जीत लोगों की जीत है. उन्होंने हमें काम करने का मौका दिया है और हम इसे पूरा करेंगे.”

भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगाए थे और सोचा था कि जनता इसे मुद्दा बना कर भाजपा के हक में वोट डालेगी, पर यहां भी उस की दाल नहीं गली. प्रदेश में भारीभरकम 81 फीसदी के आसपास वोट पड़े, जो तृणमूल कांग्रेस की झोली भर गए.

भाजपा जानती है कि पश्चिम बंगाल जैसे प्रदेश में सत्ता की चाबी गांवदेहात के वोटरों के हाथ में है और फिलहाल यह वोटर ममता बनर्जी के पक्ष में खड़ा है. यहीं से उस की चिंता बढ़नी शुरू हो जाती है, क्योंकि अब ममता बनर्जी और ज्यादा मजबूत हो गई हैं और देशभर में विपक्ष को एकसाथ करने में खासा रोल निभा सकती हैं. यह बात भाजपा के ‘मिशन 24’ के लिए खतरे की घंटी है.

मैं प्राइवेट नौकरी करता हूं और अब नौकरी छोड़ना चाहता हूं लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पा रहा हूं क्या करूं?

सवाल

मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 35 साल है. मैं भोपाल में एक प्राइवेट नौकरी करता हूं. दफ्तर का माहौल तो एकदम सही है, पर कुछ लोग बेवजह की राजनीति कर के बात का बतंगड़ कर देते हैं. इस वजह से मुझे तनाव रहने लगा है, रात को नींद नहीं आती है और नौकरी छोड़ने का मन करता है, पर परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से ऐसा नहीं कर पा रहा हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

दफ्तर की राजनीति यानी औफिस पौलिटिक्स से घबराएं नहीं, बल्कि इस का हिस्सा बनें अपनी नींद ख़राब करने के बजाय उन लोगों की नींद हराम करें जो बात का बतंगड़ बनातें हैं और चुगलखोरी किया करते हैं.

नौकरी छोड़ देना आप की समस्या का हल नहीं है, क्योंकि यह राजनीति हर जगह है. इस का लुत्फ उठाएं और सीखें कि कैसे बिना काम किए काम गिनाया जाता है, बौस और दूसरों के कान भरे जाते हैं, लेकिन अपना काम मेहनत और ईमानदारी से करते रहें, तभी आप में आत्मविश्वास आएगा.

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