धर्म की आड़ में छिपाते थे दरिंदगी

यूपी, बिहार, हरियाणा और राजस्थान में संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले एक्सल गैंग के चार वहशी दरिंदों को कानून का डर भले ही न हो. लेकिन भगवान में आस्था का ड्रामा यह बखूबी करते थे.

इन दरिंदों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि साल के 365 दिनों में से 20 दिन गुनाहों की दुनिया से दूर रह कर सात्विक जीवन जीने का ढोंग करते थे. यही कारण है कि यह चारों दरिंदें नवरात्रों में कन्या का पूजन करना नहीं भूलते थे. लूट में अच्छा माल मिलने हर देवी पर बलि चढ़ाते थे. लूट में भगवान का हिस्सा भी निकाल कर रखते थे. यह लोग जो पैसा लूट का बचता था उससे साल में दो बार कन्या पूजन करते थे.

एक्सल गैंग के सदस्यों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह वारदातों को अंजाम देने से पूर्व और बाद में भगवान का धन्यवाद करना नहीं भूलते थे. नवरात्रों में यह गैंग वारदातों को अंजाम नहीं देता था. इसके साथ मांस और मदिरा का सेवन भी नहीं करते थे. धमरु ने बताया कि एक एक बार नवरात्रों में उसके एक साथी ने होटल में मुर्गे का आर्डर दिया था. जिसे नवरात्र का हवाला देते हुए उस ऑर्डर को रद्द कर दिया था.

हरियाणा के दरोगा को धमकी

तेरह सितंबर को जब गुरुग्रामपुलिस ने हाईवे पर रेप-लूट करने वाले एक्सल गैंग को पकड़ा था तो सबसे पहले यूपी पुलिस और एसटीएफ को खबर की थी. गैंग का पर्दाफाश करने वाले दरोगा को यूपी पुलिस ने दो टूक जवाब दिया था कि वह दरोगा है और वही बनकर रहे, ज्यादा आगे न बढ़े.

यूपी पुलिस से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तो हरियाणा पुलिस ने पूरे मामले को सीबीआई के संज्ञान में डाला. इसके बाद ही पूरे प्रकरण का खुलासा हो सका.

हरियाणा के बिलासपुर क्राइम ब्रांच के प्रभारी सुरेंद्र सिंह और खेड़की दौला एसएचओ यशवंत सिंह की टीम ने एक साल की कड़ी मेहनत के बाद 13 सितंबर को एक्सल गैंग के सात गुर्गे गिरफ्तार किए थे. यूपी में एक्सल गैंग द्वारा किए गए बड़े मामलों की जानकारी देते हुए यूपी पुलिस को गुरुग्राम आकर आरोपियों से पूछताछ करने का न्योता दिया.

क्राइम सीन बताने पर भरोसा

यूपी पुलिस के रिस्पांस नहीं देने पर हरियाणा पुलिस के आला अधिकारियों ने पूरा मामला सीबीआई के संज्ञान में डाला. सीबीआई टीम ने गुड़गांव पहुंचकर आरोपियों से पूछताछ की. आरोपियों ने दोनों वारदातों का क्राइम ऑफ सीन सीबीआई को विस्तार से बताया.

पलटवार : स्वरा के भरोसे पर किस ने लगाई सेंध

Story in Hindi

SDM ज्योति मौर्य-अलोक पर बना भोजपुरी सॉन्ग, मिले 10 लाख से ज्यादा व्यूज

इन दिनों भोजपुरी गाने हिट चल रहे है भोजपुरी गानों में नए क्रिएटिव गाने सुनने को मिल रहे है जी हां, इन दिनों भोजपुरी सिंगर एसडीएम ज्योति मौर्य और उनके पति अलोक मौर्य के विवादों पर गाने बना रहे है अबतक 10 से ज्यादा गाने आलोक के स्पोर्ट में गाए जा चुके है तो कही, ज्योति के खिलाफ गाए जा चुके है. जिनपर अच्छे व्यूज देखने को भी मिल रहे है.

आपको बता दें, कि भोजपुरी गाने अब ऐसे आ रहे है जिसे सुनकर आप ये जान पाएंगे कि आस-पास क्या हो रहा है ऐसे में ज्योति मौर्य और अलोक मौर्य के रिश्ते में जो विवाद चल रहा है उसे भी भोजपुरी गाने पर बनाया गया है. कुछ गानों पर अलोक मोर्य को स्पोर्ट किया गया है तो, कुछ गानों पर उनके बीच की दूरियों पर बनाया गया है. एसडीएम ज्योति मौर्य और अलोक मौर्य के ऊपर चालीसा बनाई गई है. जिसे चंदा शर्मा ने अपना अवाज दी है. ये गाना 5 जुलाई को रिलीज हुआ था. जिसे अबतक 12 लाख बार देखा जा चुका है.

दूसरे नंबर पर ‘एसडीएम बनते ही भूलगईलु’ गाना चल रहा है जिसे अबतक 6 लाख व्यूज मिल चुके है बता दें, इस गाने को रितीका पांडे ने गाया है. गाने के लिरिक्स गुरु देव ने लिखे है, तो वही म्यूजिक अमन रॉक ने दिया है. इंटरनेट पर ‘बेवफा एसडीएम ज्योति उर्फ आलोक मौर्या को इंसाफ’ गाने की भी काफी चर्चा है. इसे ओम प्रकाश ने गाया है.भोजपुरी ट्रेंडिंग सॉन्ग में ‘राजा एसडीएम बना दा धोखा ना देहम’ का खुमार भी लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. इस गाने को शिवानी सिंह ने अपनी आवाज दी है.

क्या है ज्योति मौर्य- अलोक मौर्य का विवाद

ज्योति मौर्य उत्तर प्रदेश, बरेली की एसडीएम हैं. वहीं उनके पति आलोक पंचायत राज विभाग में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करते हैं. एक तरफ जहां ज्योति ग्रेड-ए की अफसर हैं. वहीं उनके पति सफाई कर्मचारी हैं. इस वजह से दोनों के बीच दूरियां बढ़ी और ज्योति कोर्ट में तलाक की अर्जी लेकर पहुंच गईं. ज्योति के पति का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ा-लिखा कर SDM बनाया. जब वो अच्छे पद पर पहुंच गईं. ज्योति के पति का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ा-लिखा कर SDM बनाया. जब वो अच्छे पद पर पहुंच गईं,  तो उनका  होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे के साथ अफयेर हो गया. यही वजह है कि उनकी पत्नि ने उन्हें धोखा दिया.

वहीं ज्योति मौर्य का कहना है कि आलोक उनके परिवार से फॉर्च्यूनर कार की मांग कर रहे थे. SDM ने पति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की शिकायत भी दर्ज कराई है.  इस कहानी में हर रोज एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है, जिस पर तेजी से भोजपुरी गाने बनाए जा रहे हैं.

अनन्या पांडे से हुई अनन्या रॉय कपूर! Dating की तस्वीरें हुई वायरल

इन दिनों अनन्या पांडे सुर्खियों में है और इन दिनों अपनी छुट्टियां लिस्बन में मना रही है लेकिन अनन्या यहां अकेली नहीं पहुंची है बल्कि वह एक्टर आदित्य रॉय कपूर के साथ पहुंची है यहां तक कि उनकी कुछ रोमांटिक फोटो भी वायरल हो रही है जिसमें अनन्या, आदित्य से गले मिल रही है इनकी तस्वीरों को देखकर इनके अफेयर की खबर तेजी से वायरल हो रही है. उनके रोमांटिक पोज लोगों को खूब पसंद आ रहे है. इतना ही नहीं, अनन्या पांडे का सोशल मीडिया पर नाम भी बदल चुका है पांडे से , कपूर हो गया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Manav Manglani (@manav.manglani)

आपको बता दें, कि अगर कोई अनन्या पांडे को सर्च करेगा तो विकिपीडिया पर उन्हें ‘अनन्या रॉय कपूर’ के नाम से दिखाएगा. यह उनकी तस्वीरों के इंटरनेट पर छा जाने के ठीक बाद हुआ. ये बॉलीवुड का नया कपल है जो कि इंटरनेट की दुनिया में छा रहे है. इतना ही नहीं, इनकी ये तस्वीरें सेलिब्रिटी फोटोग्राफर मानव मंगलानी ने ली है. जिसके साथ ही फोटो कुछ ऐसे कैप्शन के साथ शेयर किया, ‘ब्रांड न्यू कपल अलर्ट, आदित्य रॉय कपूर और अनन्या पांडे ने लिस्बन में एक साथ कुछ क्वालिटी टाइम बिताया. पुर्तगाल में फैंस के साथ पोज़ देते हुए प्यारी मुस्कान के साथ उनकी केमिस्ट्री को सभी पसंद कर रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Ananya 💛💫 (@ananyapanday)

इन तस्वीरों ने आदित्य रॉय कपूर और अनन्या पांडे की डेटिंग की अफवाहों को हवा दे दी है. नेटिज़न्स ने तस्वीरों पर कई तरह के रिएक्शन दिए हैं. उनमें से एक ने लिखा, ‘आदी, तुम श्रद्धा की जगह किसी को नहीं दे सकते।.’ दूसरे ने कहा, ‘आदित्य से और भी उम्मीद थी.’ तीसरे ने कहा, ‘अब हर किसी को हमेशा की तरह आदित्य के लिए बुरा लगेगा. क्या आप नहीं देख सकते कि वह एक मेच्योर आदमी है और वह अपने से आधी उम्र की लड़की को डेट कर रहा है. आप लोगों को आदित्य के लिए दुखी होने की जरूरत नहीं है. वह मेच्योर हैं.’ एक ने अनन्या के लिए कहा, ‘वह बहुत लकी है.

 

मुझे एक लड़की पसंद है मैं उससे दोस्ती करना चाहता हूं, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

मैं 19 साल का एक कुंआरा लड़का हूं. मैं कालेज के दूसरे साल में पढ़ रहा हूं. मैं अपने कालेज सरकारी बस से जाता हूं. इसी बस में एक लड़की भी चढ़ती है, जो मुझे पसंद है. वह भरेपूरे बदन की है और हर किसी की निगाह उस के उभारों पर ही टिकी रहती है. पर वह किसी की परवाह नहीं करती है और शायद किसी लड़के से फोन पर बात भी करती है. लेकिन साथ ही मुझे देख कर मुसकराती भी है.

मुझे उस लड़की से दोस्ती करनी है, पर डर लगता है कि कहीं वह मना न कर दे. उस का बदन मुझे सपनों में भी सताता है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

एक पुरानी कहावत है, हंसी सो फंसी. अब बस जरूरत आप की तरफ से पहल की है, जिस की आप हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. रोजरोज उस अनजान लड़की के उभारों और भरेपूरे बदन को देख कर आहें भरते रहने से तो बेहतर है कि आप हिम्मत कर के दोस्ती के लिए प्रपोज कर ही दें. लेकिन जरा ड्रामेटिक स्टाइल में करें. वह मना कर भी देगी तो आप का कोई नुकसान नहीं है. वैसे पढ़ाईलिखाई की तरफ ज्यादा ध्यान देंगे तो फायदे में रहेंगे. इस उम्र में लड़कियों के प्रति आकर्षण होना कुदरती बात है, लेकिन इस से पढ़ाई और कैरियर पर फर्क न पड़े, इस का भी ध्यान रखें.

जब सड़कों पर उतरते हैं बड़े घरों के लाडले

सेक्टर-8 की सेंट्रल रोड से होते हुए वर्णिका कुंडू सेक्टर-7 के पेट्रोल पंप के पास पहुंची तो उस के किसी दोस्त का फोन आ गया. कार को सड़क किनारे रोक कर वह फोन सुनने लगी. तभी उस ने देखा कि एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) पीछे आ कर रुकी और उस में से 2 युवक उतर कर उस की कार की ओर बढ़ने लगे. सफेद रंग की यह एसयूवी गाड़ी तभी से उस का पीछा कर रही थी, जब वह सेक्टर-8 से निकली थी. तब उस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था.

उस रोज शुक्रवार था और तारीख थी 4 अगस्त, 2017. देर रात सवा 12 बजे वर्णिका अपनी कार से सेक्टर-8 की मार्केट से पंचकूला स्थित अपने घर जा रही थी. हरियाणा का यह शहर चंडीगढ़ से एकदम सटा है. उस जगह से घर पहुंचने में उसे 10-15 मिनट से ज्यादा का वक्त नहीं लगना था.

पहले भी वह करीबकरीब रोजाना चंडीगढ़ से पंचकूला इसी तरह अकेली जाती थी, वक्त भी यही होता था. चंडीगढ़ उसे हर तरह से सुरक्षित लगता था. लेकिन उस रात पीछे आने वाले युवकों का अलग सा अंदाज देख कर उस के मन में अनहोनी की आशंका हुई. उस ने फोन बंद कर के वहां से कार दौड़ा दी.

कार को वहां से भगाते समय उस ने फ्रंट मिरर में देखा कि उन लड़कों ने भी जल्दी से अपनी एसयूवी में बैठ कर उस की कार के पीछे दौड़ा दी. उन्हें देख कर साफ पता चल रहा था कि उन्हें एक अकेली लड़की को देख कर परेशान करने में बहुत मजा आ रहा था. वे बारबार हौर्न बजाते हुए डिपर का भी इस्तेमाल करते रहे. वर्णिका को एक बारगी लगा कि वे उस की कार में टक्कर मारेंगे. उन के हावभाव से शराब पिए होने की आशंका भी लग रही थी. साथ ही वे गलत इशारे भी कर रहे थे.

society

नीली शर्ट वाले लड़के की बदमाशी

पूरी तरह चौकन्नी हो कर अपनी कर को तेज रफ्तार से भगाते हुए वर्णिका सेक्टर-26 स्थित सेंट जौन स्कूल के पास उस जगह पहुंच गई, जहां न्योन लाइट्स की काफी रोशनी थी. उसे लगा कि अगर लड़कों की नीयत ठीक न हुई तो भी वे भरपूर रोशनी में उस के साथ कोई शरारत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे. वर्णिका ने सोचा कि वहां रुक कर उसे अपने घर वालों को सारी स्थिति बता देनी चाहिए ताकि वे लोग उसे लेने वहां आ जाएं.

लेकिन उन लड़कों को जैसे किसी तरह का कोई डर नहीं था. वर्णिका के किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले ही उन्होंने भरपूर रोशनी में भी अपनी गाड़ी वर्णिका की कार के आगे लगा कर उसे रुकने को मजबूर कर दिया.

उन के इस कृत्य से वर्णिका बुरी तरह घबरा गई, मगर उस ने धैर्य नहीं छोड़ा. लगातार हौर्न बजाते हुए उस ने कार को रिवर्स गीयर में डाला और वहां से भागने को हुई. तभी एसयूवी में से नीली टीशर्ट पहने एक युवक उतर कर अजीब तरह से हाथपैर हिलाते हुए उस की कार के पास आ पहुंचा.

उस ने जैसे ही कार को रोकने की कोशिश की, वर्णिका ने कार रोकने के बजाए उल्टी दिशा में भगा दी और ट्रैफिक लाइट पर पहुंच कर दाईं ओर मोड़ने की कोशिश की. तभी यूएसवी उस के पास से तेजी से निकल कर घूमी और आगे आ कर उस का रास्ता रोक लिया.

वर्णिका ने होशियारी से काम लिया और कार सेक्टर-26 की ओर घुमा कर मध्यमार्ग पर ले जाने की कोशिश की. उसे यकीन था कि अगर उस की कार मध्यमार्ग पर पहुंच गई तो वह पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी. लेकिन यहां भी लड़कों की गाड़ी ने फिर से उस का रास्ता रोक लिया.

इस बार भी पहले वाले लड़के ने अपनी गाड़ी से उतर कर उसे कार रोकने का इशारा किया और वर्णिका की ओर भागा. वर्णिका ने अपनी कार फिर से रिवर्स गीयर में डाल कर उल्टी दिशा में दौड़ा दी. जैसेतैसे वह मध्यमार्ग पर पहुंचने में सफल हो गई. यहां से उस ने गीयर बदल कर अपनी कार पंचकूला जाने वाले रास्ते पर दौड़ा दी.

इसी बीच वर्णिका ने 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) को फोन कर के इस मामले की जानकारी देते हुए मदद मांगी. पुलिस ने उस की सही लोकेशन पूछी और जल्दी पहुंचने का आश्वासन दिया. इस के बाद कुछ दूर तक एसयूवी नजर नहीं आई. वर्णिका को लगा कि लड़कों ने उसे फोन करते देख लिया होगा और वे समझ गए होंगे कि उस ने पुलिस को फोन कर दिया है.

अपनी समझ के मुताबिक वर्णिका यह सोच कर आश्वस्त हो गई कि उस का पीछा करने वाले लड़कों ने डर कर रास्ता बदल दिया होगा और पीछे मुड़ गए होंगे, अब एसयूवी उस के पीछे नहीं आएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मिनट भर का अंतराल भी नहीं हुआ था कि वह गाड़ी तेज रफ्तार से वर्णिका की कार के पीछे आती नजर आई.

उस वक्त वर्णिका करीब 6 किलोमीटर लंबी सीधी रोड पर थी. इस पूरे रास्ते भर एसयूवी निरंतर उस का पीछा करती रही. कार में सवार लड़के उसे रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे. यह स्थिति देख वर्णिका को अपना हौंसला पस्त होता नजर आने लगा था. उसे पुलिस का बेसब्री से इंतजार था.

वर्णिका का डर

वह सोच रही थी कि अगर वक्त रहते पुलिस ने आ कर उन लड़कों को काबू न किया और वह उन के हत्थे चढ़ गई तो पता नहीं उस का क्या होगा? इस में कोई शक नहीं था कि उस का पीछा करने वाले शोहदे थे. उन के इरादे खतरनाक भी हो सकते थे, दिमाग में उमडतीघुमड़ती इस तरह की बातें वर्णिका को परेशान करने लगी थीं. फिर अभी यह भी स्पष्ट नहीं था कि वे लोग इस तरह उस के पीछे क्यों पड़ गए थे.

जो भी था, निरंतर 5 किलोमीटर तक वर्णिका ने अपनी कार पूरी रफ्तार से भगाई. उस का पीछा करती एसयूवी भी उसी रफ्तार से उसे फौलो करती हुई उस तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी.

घिर गई वर्णिका

पंचकूला-चंडीगढ़ को जोड़ने वाला हाऊसिंग बोर्ड चौक ज्यादा दूर नहीं रहा था. मगर वहां तक पहुंचने से पहले ही लड़कों ने अपनी गाड़ी और भी तेज रफ्तार से भगाते हुए वर्णिका की कार को घेर कर रोक लिया. इस बार भी पहले वाला युवक दौड़ता हुआ वर्णिका की कार के पास आया और उस की कर की खिड़की खोलने का प्रयास करने लगा. दरवाजे का हैंडिल मजबूती से पकड़ कर वह बारबार इस तरह झटक रहा था जैसे उसे तोड़ कर ही मानेगा.

वर्णिका के पास इस के अलावा बचाव का अन्य कोई रास्ता नहीं था कि निरंतर हौर्न बजाती गाड़ी को फिर से रिवर्स गीयर में डाल कर वहां से निकलने का प्रयास करे. उस ने ऐसा ही किया भी.

लेकिन यह सड़क सुनसान नहीं थी. उस वक्त भी वाहनों की अच्छीखासी आवाजाही जारी थी. जरा सी देर में वहां काफी वाहन एकत्र हो गए, जिस की वजह से रास्ता अवरुद्ध हो गया. वर्णिका की कार के साथसाथ लड़कों की एसयूवी भी घिर गई. लोगों को स्थिति मालूम नहीं थी. वे अपने वाहनों से निकल कर इन लोगों को बुराभला कहते हुए अपनी गाडि़यां वहां से हटाने को कहने लगे. अगर ऐसा हो जाता तो वर्णिका निश्चित रूप से उन लड़कों के हत्थे चढ़ जाती.

अभी कुछ ही पल गुजरे थे कि सायरन बजाती पीसीआर वैन वहां आ पहुंची. इस में से उतरे पुलिसकर्मियों ने दोनों युवकों को उन की एसयूवी समेत काबू कर के थाना ईस्ट पहुंचा दिया. थाने में वर्णिका से लिखित शिकायत ले कर उसे घर जाने दिया गया.

वर्णिका वरिंदर सिंह कुंडू की बेटी थी. वरिंदर सिंह कुंडू हरियाणा में 1986 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. कुंडू साहब के बारे में मशहूर है कि अपने पद पर रहते हुए उन्होंने अपना काम पूरी ईमानदारी और कुशलता से किया और वह कभी किसी के दबाव में नहीं आए. अन्याय तो वह कभी सहन नहीं करते थे. पीडि़त व्यक्ति को न्याय दिलवाने के लिए वह बड़े से बड़े शख्स से भी टकराने को तैयार हो जाते थे.

शायद यही वजह थी कि वह अब तक 30 तबादलों का दंश झेल चुके थे, जबकि उन्हें नौकरी में आए अभी कुल  31 बरस भी नहीं हुए थे. इन दिनों वह हरियाणा सरकार के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे.

कुंडू साहब के परिवार में उन की धर्मपत्नी सुचेता कुंडू के अलावा 2 बेटियां हैं, वर्णिका एवं सत्विका. सत्विका को मार्शल आर्ट सीखने का शौक था. इस संबंध मे उस ने एक सेंटर ज्वाइन किया तो देखते ही देखते उस का पूरा परिवार ही मार्शल आर्ट सीखने लगा.

कालांतर में कुंडू साहब इस फील्ड में सेकेंड डिग्री ब्लैकबेल्ट होल्डर बन गए. उन की बेटी वर्णिका ताईक्वांडो की प्रथम श्रेणी ब्लैकबेल्ट हासिल कर चुकी थी. सुचेता पंचकूला के बालनिकेतन व बाल सदन में रहने वाले बच्चों को मार्शल आर्ट का नि:शुल्क प्रशिक्षण देती थीं. वर्तमान में पी.एस. कूंडू ताईक्वांडो फेडरेशन औफ इंडिया के अध्यक्ष हैं.

स्कूली दिनों से ही वर्णिका को गीतसंगीत का शौक था. उस का सपना था कि बड़ी हो कर वह संगीतकार बने. ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद उस ने अपना एक डीजे (डिस्को जौकी) खोल लिया. बाद में वह अन्य जगहों पर भी परफौर्म करने लगी. इस क्षेत्र में वह काफी लोकप्रिय होती जा रही थी. उस का अगला लक्ष्य मुंबई था.

society

चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में एक बार है स्विस सिटी पब, जहां उस की परफोर्मेंस बहुत पसंद की जाती है. यहां से फारिग होने में उसे अकसर रात 12 बज जाया करते थे. लेकिन रात में यहां से घर के लिए अकेले निकलने में उसे कभी कोई परेशानी नहीं हुई थी. उस की नजर में चंडीगढ़ लड़कियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित शहर था.

लेकिन 4 अगस्त, 2017 की आधी रात में उस की यह खुशफहमी तब निराशा में बदल गई, जब उसे अकेली देख 2 शोहदों ने गुंडागर्दी कर के उस की कार रोकने की कोशिश की थी. यह वर्णिका की बहादुरी भरी होशियारी ही थी कि वह उन के हत्थे चढ़ने से बच गई थी और पुलिस उन्हें उन की गाड़ी समेत थाना ले गई थी.

वर्णिका ने पिता को बताया

बदहवासी की सी स्थिति में घर पहुंच कर वर्णिका ने अपने साथ घटी इस घटना के बारे में परिवार के सदस्यों को बताया तो उस के पिता वरिंदर सिंह कुंडू उसे साथ ले कर उसी वक्त थाना सेक्टर-26 के लिए निकल गए. उन्होंने अपने एक परिचित वकील को भी फोन कर के थाने पहुंचने को कह दिया था, ताकि पुलिस इस मामले में कोई ढिलाई न बरत सके.

इस बात का अनुमान तो सहज ही लगाया जा सकता था कि जिन लड़कों ने बिना किसी खौफ के इतनी गुंडागर्दी दिखाई थी, वे कोई छोटेमोटे अपराधी नहीं हो सकते थे. कुंडू साहब ने सोचा कि पुलिस ने अगर उन के खिलाफ काररवाई नहीं की तो उन के हौसले और बुलंद हो सकते हैं.

थाने पहुंच कर पता चला कि दोनों लड़के कोई अपराधी न हो कर बड़े घरों के लाडले थे. इन में से एक था हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का बेटा विकास और दूसरा उस का दोस्त आशीष. पुलिस ने दोनों के खिलाफ छेड़छाड़ और रास्ता रोकने की कोशिश के अलावा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर के दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था, मगर इन धाराओं के तहत उन्हें थाने से ही जमानत पर छोड़ा जा सकता था.

अभी तक न तो पुलिस वालों को मालूम था और न ही उन दोनों लड़कों को कि इस मामले में शिकायतकर्ता हरियाणा के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की बेटी थी. बाद में जब यह परिचय सामने आया तो पुलिस वालों के पैरों तले की जमीन तो सरकी ही, दोनों आरोपी भी वर्णिका को बहन कहते हुए उस के व उस के पिता के सामने गिड़गिड़ा कर माफी मांगने लगे.

इस के बाद वी.एस. कुंडू के पास क्षेत्र के नेताओं के फोन आने लगे. सभी उन पर दबाव डाल कर इस मामले में समझौता करने को कह रहे थे. पुलिस पर भी दबाव था कि समझौता नहीं हो पाया तो जितनी धाराएं लगाई गई हैं, उन से आगे मत बढ़ना और लड़कों को थाने से ही जमानत दे कर घर भेज देना.

फेसबुक की पोस्ट रंग लाई

थाने में अभी यह सब चल ही रहा था कि वर्णिका ने एक ओर बैठ कर अपने स्मार्टफोन के माध्यम से फेसबुक एकाउंट पर इस घटना के खुलासे की पोस्ट डालते हुए अंत में अपना दर्द इस तरह से उजागर कर दिया ‘मुझे नहीं मालूम था कि मेरे साथ क्या हो सकता था. आरोपी मेरा रेप कर के मेरी हत्या भी कर सकते थे. चंडीगढ़ पुलिस द्वारा तुरंत एक्शन लिए जाने के कारण मैं आरोपियों की शिकार नहीं बनी. मगर हर लड़की मेरे जैसी लकी नहीं हो सकती.’

इस के बाद वर्णिका ने चंडीगढ़ पुलिस को दिल से धन्यवाद भी दिया.

लेकिन फिलहाल मामला ज्यों का त्यों रहा. पुलिस ने दोनों लड़कों का मेडिकल करवाया, जिस में उन के शराब पीने की पुष्टि हुई. सीआरपीसी की धारा 164 के तहत ड्यूटी मजिस्टे्रेट के सामने वर्णिका के बयान भी दर्ज करवाए गए. लेकिन इस के बाद 5 अगस्त को दोपहर बाद करीब 4 बजे दोनों आरोेपियों को थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया.

यह देख हरियाणा की पूरी अफसरशाही वर्णिका के साथ आ खड़ी हुई. इन अधिकारियों ने मामला देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की तैयारी कर ली थी. सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को ले कर अलग बहस छिड़ गई, जिस में देश भर के आईएएस अधिकारी रुचि लेते हुए अपनी टिप्पणी करने लगे.

देखतेदेखते इस मामले पर राजनीति की रंगत भी चढ़ने लगी. विरोधी पार्टियों द्वारा बराला से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगा जाने लगा. चंडीगढ़ पुलिस की पहले ही से किरकिरी हो रही थी. जमानती धाराओं में केस दर्ज कर अभियुक्तों को थाने से ही जमानत देने पर सवाल उठ रहे थे. कानून विशेषज्ञों का कहना था कि इस केस में किडनैपिंग के प्रयास की धारा 365, 511 लगनी चाहिए थी.

आखिर, चडीगढ़ का यह हाईप्रोफाइल मामला प्रधानमंत्री के नोटिस में भी आ गया, जिन्होंने इस घटना पर बेहद नाराजगी जाहिर की. प्रधानमंत्री मोदी के कहने पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मामले का संज्ञान लेते हुए सुभाष बराला को दिल्ली तलब कर लिया. उन्होंने शाह के सामने जहां अपना पक्ष रखा.

बराला को भाजपा का अभयदान

दूसरी ओर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि सुभाष बराला का इस प्रकरण से कोई लेनादेना नहीं है. यह मामला चंडीगढ़ पुलिस का है, जिस में हरियाणा सरकार का कोई दखल नहीं है. इसी बीच किरण बेदी का यह बयान कई सवाल खडे़ कर गया कि पुलिस को बिना इंटरोगेशन के अपराधियों को बेल नहीं देनी चाहिए थी.

7 अगस्त को इस प्रकरण पर रोष प्रकट करने के लिए चंडीगढ़ की लड़कियों ने हाथों में बैनर ले कर मुख्य सड़कों पर प्रदर्शन किया. इन बैनर्स पर लिखा था, ‘शेम फौर चंडीगढ़’ और ‘वी डिजर्व टू बी सेफ औन रोड्स’ (हमें सड़कों पर सुरक्षा का अधिकार चाहिए) वगैरह.

अब तक की पुलिस काररवाई में यही बात सामने आ रही थी कि सीसीटीवी कैमरों को खंगालते हुए केस में कानून की अन्य किसी धारा के जोड़ने अथवा न जोड़ने पर लीगल राय ली जा रही है. 7 अगस्त को घटना का सीन भी रिक्रिएट करवाया गया. मगर पुलिस का एक्शन अभी तक वहीं का वहीं था.

देखतेदेखते यह मुद्दा न केवल गरमा गया, बल्कि घरघर की चर्चा भी बन गया. शहर के अनेक जिम्मेवार लोग लौजिक के साथ अपनीअपनी राय देने लगे. चंडीगढ़ के सीनियर एडवोकेट ए.एस. सुखीजा ने केस को ले कर अपना तर्क देते हुए कहा कि इंसान झूठ बोल सकता है, लेकिन हालातों पर अविश्वास नहीं किया जा सकता. जिस वक्त यह घटना घटी, लड़की न केवल तनाव में थी बल्कि एक तरह का जबरदस्त मानसिक आघात भी झेल रही थी.

ऐसे में उस की कार गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो सकती थी, जिस में उस की जान भी जा सकती थी. उसे अपनी इज्जत खोने का खतरा नजर आ रहा था, ऐसी स्थिति में वह आत्महत्या का प्रयास भी कर सकती थी.

‘आप बात कर रहे हैं अपहरण के प्रयास का केस दर्ज करने की, मेरी नजर में यह हत्या के प्रयास का मामला है. पुलिस को इसे इस तरह हलकेपन से कतई नहीं लेना चाहिए.’ एडवोकेट सुखीजा का कहना था.

राजनीतिक पैंतरा

मामला उछलते और अपना दामन दागदार होते देख सुभाष बराला ने इस प्रकरण को लेकर 8 अगस्त को पहली दफा अपना बयान दिया कि इस केस को प्रभावित करने के लिए वह किसी भी तरह से अपने राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल नहीं कर रहे. वर्णिका कुंडू केस में उन के बेटे विकास के खिलाफ जो भी जरूरी कदम हैं, वो उठाए जाने चाहिए. बीजेपी बेटियों की स्वतंत्रता की बात करती है और वर्णिका उन की बेटी जैसी है.

दूसरी ओर मामला ठंडा पड़ता दिखाई नहीं दे रहा था. इस मुद्दे पर चंडीगढ़ में तो रोजाना रोष प्रदर्शन हो ही रहे थे, 9 अगस्त को रोहतक की कुंडू खाप ने वर्णिका के समर्थन में रोहतक-जींद रोड पर कई घंटे का जाम लगाया.

कई साल पहले हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी एसपीएस राठौर के मामले में रुचिका के हक में आवाज उठा कर उसे इंसाफ दिलवाने वाले आनंद प्रकाश व उन की पत्नी मधु आनंद ने भी वर्णिका को इंसाफ दिलवाने में उस का साथ देने की घोषणा कर दी. कई जगह सुभाष बराला का पुतला जलाने की भी घटनाएं हुईं.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपना बयान जारी करते हुए साफ कह डाला कि केंद्र सरकार के इशारे पर इस मामले को रफादफा करने की कोशिश हो रही है.

9 अगस्त को सुभाष बराला ने इस प्रकरण पर बात करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर के पत्रकारों को बुलवाया. प्रैस कान्फ्रैंस शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट गुजरे होंगे कि सुभाष बराला को किसी का फोन आ गया. उन्होंने फोन क्या सुना कि बिना पत्रकारों से कुछ कहे वहां से चले गए.

बाद में मालूम पड़ा कि मिनिस्ट्री औफ होम अफेयर्स से यूनियन होम सेके्रटरी राजीव महर्षि के दखल के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने विकास बराला व उस के साथी पर दर्ज एफआईआर में किडनैपिंग की कोशिश की धारा 365, 511 का समावेश कर दिया है. साथ ही पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर के सेक्टर-26 स्थित ईस्ट थाना की हवालात में बंद कर दिया है. इसी सब की सूचना सुभाष बराला को मिली थी.

सामने आई करतूत

इस दफा पुलिस ने दोनों अभियुक्तों का 2 दिन का कस्टडी रिमांड ले कर उन से व्यापक पूछताछ की. विकास बराला कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और उस का दोस्त आशीष इसी साल अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका था. दोनों का संबंध प्रभावशाली घरों से था और इन की आपस में बनती भी खूब थी.

भले ही इन युवकों पर गैरजमानती धाराएं लगा कर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर के अदालत से इन का कस्टडी रिमांड ले लिया था, मगर पावर का नशा जैसे अभी भी उन के सिर चढ़ कर बोल रहा था. पुलिस की पूछताछ में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकारते हुए दोनों ने बयान दिया कि विकास बराला को एलांते मौल से अपने जूते बदलवाने थे, जिस के लिए वह अपने दोस्त आशीष को साथ ले गया था.

बकौल विकास बराला, उन दोनों ने सेक्टर-8 की मार्केट की एक वाइन शौप से बीयर ले कर कार में बैठ कर 1-1 बोतल पी थी.

वर्णिका कुंडू को पहले से जानने की बाबत पूछने पर दोनों ने कहा कि वे उसे नहीं जानते और न ही उन लोगों ने उस का पीछा कर के उसे रोकने की कोशिश की थी. लेकिन इस बात को दोनों ने माना कि सेक्टर-7 में उन्होंने वर्णिका जैसी कार पर एक अकेली लड़की को जाते देखा था.

‘सीसीटीवी में साफ दिख रहा था कि तुम लोगों की गाड़ी वर्णिका की कार के पीछे जा रही है.’ पूछे जाने पर विकास बराला का जवाब था कि उन की गाड़ी भी हाउसिंग बोर्ड की तरफ गई थी. लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि वे लोग उस का पीछा कर रहे थे. फिर उन्होंने उस के साथ ऐसी कोई आपराधिक वारदात तो की नहीं थी.

‘मुझे और मेरे दोस्त को यूं ही बलि का बकरा बना लिया गया है. हम ने अपराध जैसा कुछ नहीं किया.’ विकास बराला ने कहा.

आधी रात में पुलिस ने इन दोनों को साथ ले जा कर क्राइम सीन दोहराया. इस से सारी असलियत सामने आ गई. थोड़ी सख्ती से की गई पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने इस केस में विकास बराला को मुख्य अभियुक्त और उस के दोस्त आशीष को सह अभियुक्त बनाया.

मुंह खोलना पड़ा

पुलिस की व्यापक पूछताछ में जो कुछ विकास बराला ने बताया, वह कुछ इस तरह से था—‘दरअसल किडनैपिंग हमारा मकसद किसी भी हाल में नहीं था. हम लोग अपनी गाड़ी में बैठे बीयर पी रहे थे. इतने में एक कार हमारे पास आ कर हल्की सी स्लो हो गई और उस में बैठी लड़की ने हमारी तरफ देखा.’

आशीष ने कहा, ‘लड़की देख कर गई है, गाड़ी उस के पीछे लगाओ. मैं ने गाड़ी उस कार के पीछे लगा दी. दरअसल, हम सिर्फ लड़की की शक्ल देखना चाहते थे. जानना चाहते थे कि वह जानपहचान की तो नहीं है. लड़की घबरा गई और नशे में हमें भी पता नहीं चला कि अखिर क्या हो रहा है. इस के बाद हम कभी लड़की की कार के आगे अपनी गाड़ी लगाते रहे और कभी पीछे. लड़की घबरा गई थी और नशे में होने की वजह से हमें इस का इल्म नहीं था.’

कस्टडी रिमांड की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने विकास और आशीष को ड्यूटी मजिस्ट्रेट गौरव दत्ता की कोर्ट पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में बुडै़ल जेल भेज दिया गया.

28 अगस्त को दोनों अभियुक्तों की ओर से एसीजेएम बलजिंदर पाल सिंह की अदालत में जमानत की अर्जी लगाई गई. 29 अगस्त को सक्षम दंडाधिकारी ने इस टिप्पणी के साथ उन की जमानत याचिका खारिज कर दी कि उस रात इन लोगों का व्यवहार बीस्ट इन लस्ट सरीखा था.

8 सितंबर को इन की ओर से जमानत की अर्जी एडिशनल सैशन जज रजनीश कुमार शर्मा की अदालत में लगाई गई. 12 सितंबर को विद्वान एडीजे ने भी अपनी इस टिप्पणी के साथ इन अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार कर दिया कि दोनों की हरकतें रोडसाइड रोमियो सरीखी सामने आई है.

ठीक इसी रोज एक और बात हुई. वी.एस. कुंडू पर फिर से तबादले की गाज गिरी. उन्हें एक अहम विभाग से हटा कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में नियुक्त कर दिया गया. 14 सितंबर को वर्णिका की जिंदगी फिर से डीजे ट्रैक पर आ गई, मतलब वह अपने काम पर लौट आई थी.

दूसरी ओर चंडीगढ़ पुलिस ने 21 सितंबर, 2017 को विकास बराला व आशीष के खिलाफ 40 गवाहों की सूची के साथ 300 पेज का चालान अदालत में पेश कर दिया था. यह चालान भादंवि की धारा 341, 354डी, 365, 511 और 34 के अलावा 185 मोटर वेहिकल एक्ट के तहत दाखिल किया गया.

बहरहाल, यह पहला मौका नहीं है जब राजनीति से जुड़े बड़े घरों के ये लाडले अपनी करतूत की वह से सलाखों के पीछे पहुंचे हैं. कतिपय उदारहण काबिलेगौर है, बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी व उन के बाहुबली बेटे व एमएलए अमनमणि त्रिपाठी दोनों ही पत्नी की हत्या के मामले में फंसे. अमरमणि जहां अपनी पत्नी की हत्या के मामले में फंसे. वहीं अमनमणि पर भी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या का मुकदमा चल रहा है.

उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव का बेटा विकास यादव नीतिश कटारा की हत्या के मामले में सजा काट रहा है. तूणमूल कांग्रेस के नेता एस.डी. सोहराब के बेटे सांबिया सोहराब पर हिट एंड रन केस में वायुसेना अधिकारी अभिमन्यु गौड़ की हत्या का आरोप लगा था.

चश्मदीदों के मुताबिक सांबिया ने शराब के नशे में अपनी औडी कार उस समय उक्त वायुसेना अधिकारी अभिमन्यु गौड़ पर चढ़ा दी थी, जब वह गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा ले रहे थे.

हरियाणा जनचेतना पार्टी के फाउंडर एवं कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को मौडल जेसिका लाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिली थी.

स्थानीय स्तर पर कथित बड़े घरों के लाडलों की दबंगई के इस कदर मामले होते रहते हैं कि गिनती करना मुश्किल है. चिंता का विषय यही है कि क्या कभी इन की मानसिकता में बदलाव आएगा.

मेरा बौयफ्रेंड मौका मिलते ही मुझे चूमने लगता है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 18 साल की एक लड़की हूं. मेरा 21 साल का बौयफ्रैंड है. वह किसी न किसी बहाने मेरे बदन को पाने की कोशिश करता है. मना करती हूं, तो रिश्ता तोड़ने की धमकी देता है. मौका मिलते ही मुझे चूमने लगता है और मुझ से लिपट कर अपनी हवस पूरी करता है. मैं क्या करूं?

जवाब-

आप को संभल कर रहने की जरूरत है और यह समझने की भी कि इस उम्र में लड़का और लड़की दोनों में सैक्स के प्रति कुदरती जिज्ञासा होती है, लिहाजा वे अपने पार्टनर से इसे पूरा कर लेना चाहते हैं.

दोनों की मरजी और रजामंदी हो तो यह हर्ज की भी बात नहीं, लेकिन नासमझी के चलते कई बार कई अनचाही झंझटें भी खड़ी हो जाती हैं.

आप अपने बौयफ्रैंड को समझाएं कि चूमाचाटी बुरी बात नहीं, पर इस के बाद के लिए दोनों को ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए. मसलन, आप का प्यार सिर्फ मौजमस्ती के लिए है या आगे शादी का भी इरादा है. ऐसी हालत में लड़कियां भी अपनेआप को ज्यादा दिनों तक रोक नहीं पातीं, क्योंकि उन्हें भी इस में मजा आने लगता है, इसलिए जो भी करें काफी सोचसमझ कर करें और रिश्ता तोड़ने की धमकी से डरें नहीं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पैरों से बदबू दूर करने के ये है कुछ आसान उपाय

अक्सर गर्मियों में ऐसा होता है कि पुरुष के पैरों से बदबू आने लगती है जिसके लिए ना जाने क्या क्या उपाय करने पड़ते है तो आज हम कुछ ऐसे ही उपाय लेकर आए है जिससे आप पैरों की बदबू को बाय-बाय कह सकेंगे.

1. पैरों को सही तरीके से धोएं

आप सोच रहे होंगे कि अपने पैर धोना में ऐसा क्या नया है. ये तो आप रोजाना करते हैं, लेकिन वास्तव में आपकी तकनीक गलत हो सकती है. एक खूशबूदार साबुन आपके लिए उपयोगी साबित नहीं हो सकता है. इसलिए आपको एक मेडिकेटेड साबुन की आवश्यकता होती है. अपने पैर की उंगलियों के बीच में विशेष ध्यान दें, क्योंकि यहां अधिकांश नमी जमा हो जाती है. इसके अलावा पूरे दिन आराम से रहने के लिए अपने पैरों को कुछ फुट स्प्रे पाउडर से स्प्रे करें.

बूंदें और एक एंटीसेप्टिक घोल को मिलाएं. अब अपने पैरों को पानी में कम से कम 10 मिनट के लिए अच्छे से भिगो दें, ताकि जमा हुई गंदगी नरम हो जाए. आप चाहें तो अपने पैर के नाखूनों को साफ करने के लिए नेल ब्रश या पुराने टूथ ब्रश का इस्तेमाल कर सकते हैं. एड़ियों और पैरों के तलवों के लिए फुट स्क्रबर का इस्तेमाल करें. जोर-जोर से न रगड़ें, क्योंकि इससे आपको चोट लग सकती है.

2. सिरके का करें उपयोग

एक उपाय है विनेगर बाथ, जिसमें आपको टब में गर्म पानी भरकर उसमें सिरका को अच्छी तरह मिलाना है. इसमें अपने पैरों को डुबोएं और 30 मिनट तक ऐसे ही रखें. इसमें मौजूद ऐसिडिक कंटेंट बैक्टीरिया को खत्म करता है और बदबू को रोकता है. एक बार कोशिश करके देखें.

आपको बता दें कि सिरका के बहुत सारे हैल्थ बैनिफिट्स भी हैं. सिरका में नैचुरल एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे बैक्टीरिया को आपकी स्किन पर बढ़ने में मुश्किल होती है. इतना ही नहीं, इस आसान से उपाय को अपनाकर आप पैरों के दर्द से भी राहत पा सकते हैं.

3. हाइजीन मेनटेन करें

आज से ही छोटे-छोटे उपाय करना शुरू करें, जिनका निश्चित रूप से बड़ा असर होगा. सर्दियों में सूती मोजे का प्रयोग करें और सांस लेने और साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोजाना बदलने की आदत डालें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे पहले कि आप मोजे पहनें, अपने तलुओं में नमी को बनाए रखने के लिए टैल्कम और कॉर्नस्टार्च का प्रयोग करना न भूलें.

इसके अलावा आप जब भी बाहर से घर आएं, तो सबसे पहले अपने जूते और मोजे उतार कर ही घर में आएं.इसके बाद पैर को अच्‍छी तरह से साफ करें. सर्दियों में आप इसके लिए गुनगुने पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

4. पेडीक्योर लें

पुरुष भी पेडीक्योर करवा सकते हैं और हर बार खुद को बेहतर महसूस कर सकते हैं. पेडीक्योर के माध्यम से आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके पैरों से बदबू नहीं आ रही है और अगर आप एक्सपर्ट की मदद लेते हैं, तो आपकी समस्या का समाधान भी हो जाएगा. पेडीक्योर से आप गर्मियों में अपने पैर की उंगलियों के बीच जमा होने वाली डेड स्किन से भी खुद को बचा सकते हैं.

आखिर क्या है सेक्स फैंटेसी, पढ़ें खबर

शारीरिक संबंधों में अनावश्यक सहना या अपनेआप समय गुजरने के साथ उन में तबदीली हो जाने की गुंजाइश मान कर चलना भ्रम है. यह इन संबंधों के सहज आनंद को कम करता है. कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें पति की आक्रामकता पसंद नहीं आती थी. लेकिन लज्जा या संकोचवश कुछ कहना अच्छा नहीं लगता था.

कुछ महिलाओं का कहना है कि पति को खुद भी समझना चाहिए कि पत्नी को क्या पसंद आ रहा है, क्या नहीं. मगर इस पसंदनापसंद के निश्चित मानदंड तो हैं नहीं, जिन से कोई अपनेआप ही समझ जाए और आनंद के क्षण जल्दी और ज्यादा मिल जाएं.

सेक्स को ले कर जितने आतुर मर्द रहते हैं उतनी महिलाएं भी होती हैं. हां यह बात अलग है कि वे इस का जिक्र कभी किसी से नहीं करती हैं. बात अगर स्पैशल रात की हो तो मर्दों से ज्यादा महिलाओं में ऐक्साइटमैंट होता है. यह कहानी सिर्फ हीरो का इंतजार करती हीरोइन की नहीं, बल्कि हर उस लड़की की है जो बेसब्री से इंतजार करती है.

कोई रिश्ता परफैक्ट नहीं

सचाई यह है कि कोईर् भी रिश्ता परफैक्ट नहीं होता. यदि आप यह सोचती हैं कि रिश्ते में सब कुछ आप की मरजी के अनुसार या किसी फिल्मी कहानी की तरह होना चाहिए, तो चोट लगनी लाजिम है. हर रिश्ता अलग होता है. यही नहीं हर रिश्ते को आप के प्यार, समर्पण, श्रम और साथ के खादपानी की जरूरत होती है. कई बार रिश्ता टूटने की वजह बेमानी ही होती है.

वह हमेशा सही बातें करेगा

ऐसा नहीं होगा और न ही आप उस से ऐसी उम्मीद रखें. वह परफैक्ट नहीं है और न ही वह किसी रोमानी फिल्म का हीरो है, जो हमेशा सही और अच्छी बातें ही करेगा. वह भी इंसान है और आम इंसानों की तरह वह भी गलतियां करेगा. वह ऐसी बातें कर सकता है, जो उसे नहीं करनी चाहिए.

और्गैज्म

पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी भी एक का तरीका यदि आक्रामक व नैगेटिव हो तो उस के भावों पर ध्यान देना चाहिए. बहुत सी पत्नियां अपने पति से कहतीं कि तुम स्वार्थी हो, तुम्हें सिर्फ अपने आनंद की पड़ी होती है, तुम्हें मेरी परवाह नहीं. इस का सीधा मतलब है अभी उस का और्गैज्म पर पहुंचना बाकी है या आप उस के और्गैज्म पर पहुंचने की परवाह नहीं करते. जल्दीजल्दी और बारबार कही गई बात चिढ़ाने और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली हो सकती है.

इसलिए जब भी जितना कुछ कहा जाए वह किया भी जाए. तभी वह सार्थक और असरदार बदलाव लाने वाला होता है. निजी संबंधों को कहनेसुनने की कुशलता सिर्फ बैडरूम तक ही सीमित नहीं रहती. वह जीवन में घरबाहर भी सार्थक बातचीत का सिस्टम पैदा करती है और उसे बढ़ावा देती है.

सेक्स कोरी क्रिया नहीं, एक खूबसूरत कला है. इसे सदियों से काम कला का स्थान प्राप्त है. इस में हर बार कुछ नया, कुछ अनोखा किए जाने का स्कोप रहता है. पतिपत्नी के रिश्ते में प्यार और सेक्स दांपत्य की इमारत को खड़ा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मजबूत पिलर हैं.

काला अतीत: क्या पूरा हुआ देवेन का बदला

Story in hindi

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें