12 लाख के पैकेज वाले बाल चोर

19 जून, 2017 को मनोज चौधरी की बेटी की शादी थी. वह रीयल एस्टेट के एक बड़े कारोबारी हैं. गुड़गांव में उन का औफिस है. उन्होंने बेटी की शादी एक संभ्रांत परिवार में तय की थी. अपनी और वरपक्ष की हैसियत को देखते हुए उन्होंने शादी के लिए दक्षिणपश्चिम दिल्ली के बिजवासन स्थित आलीशान फार्महाउस ‘काम्या पैलेस’ बुक कराया था.

बेटी की शादी के 3 दिनों बाद ही उन के बेटे की भी शादी थी. बेटे की लगन का दिन भी 19 जून को ही था, इसलिए उस का कार्यक्रम भी उन्होंने वहीं रखा था.

मनोज चौधरी की राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र के लोगों से अच्छी जानपहचान थी, इसलिए बेटे की लगन और बेटी की शादी में सैकड़ों लोग शामिल हुए थे. मेहमानों के लिए उन्होंने बहुत अच्छी व्यवस्था कर रखी थी. वह आने वाले मेहमानों का बड़ी ही गर्मजोशी से स्वागत कर रहे थे.

बारात के काम्या पैलेस में पहुंचने से पहले ही उन्होंने बेटे की लगन का कार्यक्रम निपटा दिया था. इस के बाद जैसे ही बारात पहुंची, मनोज चौधरी और उन के घर वालों ने धूमधाम से उस का स्वागत किया. रीतिरिवाज के अनुसार शादी की सभी रस्में पूरी होती रहीं. रात करीब पौने 12 बजे फेरे की रस्में चल रही थीं. उस समय तक बारात में आए ज्यादातर लोग सो चुके थे. ज्यादातर मेहमान खाना खा कर जा चुके थे. फेरों के समय केवल कन्या और वरपक्ष के खासखास लोग ही मंडप में बैठे थे. मंडप के नीचे बैठा पंडित मंत्रोच्चारण करते हुए अपना काम कर रहा था. जितने लोग मंडप में बैठे थे, पंडित ने सभी की कलाइयों में कलावा बांधना शुरू किया. वहां बैठे मनोज चौधरी ने भी अपना दाहिना हाथ पंडित की ओर बढ़ा दिया. कलावा बंधवाने के बाद उन्होंने पंडित को दक्षिणा दी. तभी उन का ध्यान बगल में रखे सूटकेस की तरफ गया. सूटकेस गायब था.

सूटकेस गायब होने के बारे में जान कर मनोज चौधरी हडबड़ा गए. वह इधरउधर सूटकेस को तलाशने लगे, क्योंकि उस सूटकेस में 19 लाख रुपए नकद और ढेर सारे गहने थे.

कलावा बंधवाने में उन्हें मात्र 4 मिनट लगे थे और उतनी ही देर में किसी ने उन का सूटकेस उड़ा दिया था. परेशान मनोज चौधरी मंडप से बाहर आ कर सूटकेस तलाशने लगे. इस काम में उन के घर वाले भी उन का साथ दे रहे थे. सभी हैरान थे कि जब मंडप में दरजनों महिलाएं और पुरुष बैठे थे तो ऐसा कौन आदमी आ गया, जो सब की आंखों में धूल झोंक कर सूटकेस उड़ा ले गया.

बहरहाल, वहां अफरातफरी जैसा माहौल बन गया. जब उन का सूटकेस नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देने के साथ लैपटौप से औनलाइन रिपोर्ट दर्ज करा दी. कुछ ही देर में पीसीआर की गाड़ी वहां पहुुंच गई. पुलिस कंट्रोल रूम से मिली सूचना के बाद थाना कापसहेड़ा से भी पुलिस काम्या पैलेस पहुंच गई. मनोज चौधरी ने पूरी बात पुलिस को बता दी.

चूंकि मामला एक अमीर परिवार का था, इसलिए पुलिस अगले दिन से गंभीर हो गई. दक्षिणपश्चिम जिले के डीसीपी सुरेंद्र कुमार ने थाना कापसहेड़ा पुलिस के साथ एंटी रौबरी सेल को भी लगा दिया. उन्होंने औपरेशन सेल के एसीपी राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की, जिस में इंसपेक्टर सतीश कुमार, सुबीर ओजस्वी, एसआई अरविंद कुमार, प्रदीप, एएसआई राजेश, महेंद्र यादव, राजेंद्र, हैडकांस्टेबल बृजलाल, उमेश कुमार, विक्रम, कांस्टेबल सुधीर, राजेंद्र आदि को शामिल किया गया.

पुलिस ने सब से पहले फार्महाउस काम्या पैलेस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी. इन में एक फुटेज में एक छोटा बच्चा मनोज चौधरी के पास से सूटकेस उठा कर बाहर गेट की ओर ले जाता दिखाई दिया. इस के कुछ सैकेंड बाद दूसरा बच्चा भी उस के पीछेपीछे जा रहा था. उस के बाद काले रंग की टीशर्ट पहने एक अन्य लड़का सीट से उठ कर उन दोनों के पीछे जाता दिखाई दिया. सभी फुरती से बाहरी गेट की तरफ जाते दिखाई दिए थे.

पुलिस ने उन तीनों बच्चों के बारे में मनोज चौधरी और उन के घर वालों से पूछा. सभी ने बताया कि ये तीनों लड़के उन के परिवार के नहीं थे. ये शाम 8 बजे के करीब काम्या पैलेस में आए थे. कार्यक्रम में ये बहुत ही बढ़चढ़ कर भाग ले रहे थे. डीजे पर भी ये ऐसे नाच रहे थे, जैसे शादी इन के परिवार में हो रही है. जब ये परिवार की लड़कियों और महिलाओं के डीजे पर जाने के बावजूद भी वहां से नहीं हटे तो परिवार के एक आदमी ने इन से डीजे से उतरने के लिए कहा था.

मनोज ने पुलिस को बताया कि छोटा वाला बच्चा महिलाओं के कमरे के पास भी देखा गया था. वह समझ रहे थे कि ये बच्चे शायद किसी मेहमान के साथ आए होंगे. बहरहाल, उन्होंने उन की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया था और उसी बच्चे ने उन का सूटकेस साफ कर दिया था. उन के कार्यक्रम में जो फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर थे, उन के द्वारा खींचे गए फोटो में भी वे बच्चे दिखाई दिए थे.

पुलिस टीम ने उन्हीं फोटो की मदद से सूटकेस चोरों का पता लगाना शुरू किया. पुलिस ने वे फोटो अलगअलग लोगों को दिखाए. उन फोटो को पहचान तो कोई नहीं सका, पर कुछ लोगों ने यह जरूर बता दिया कि ये बच्चे मध्य प्रदेश के हो सकते हैं.

इस के अलावा पुलिस की सर्विलांस टीम 19-20 जून की रात के डंप डाटा की जांच में जुट गई. पुलिस ने सब से पहले यह पता लगाया कि काम्या पैलेस का इलाका किनकिन मोबाइल टावरों के संपर्क में आता है. इस के बाद यह जानकारी हासिल की गई कि उस टावर के संपर्क में उस रात कितने फोन थे. पता चला कि उस रात कई हजार फोन वहां के फोन टावरों के संपर्क में थे. इसी को डंप डाटा कहा जाता है.

पुलिस को पता लग चुका था कि चोरी करने वाले लड़के मध्य प्रदेश के हो सकते हैं, इसलिए उस डंप डाटा से उन मोबाइल नंबरों को चिह्नित किया गया, जो उस रात मध्य प्रदेश के नंबरों के संपर्क में थे. ऐसे 300 फोन नंबर सामने आए. सर्विलांस टीम ने उन फोन नंबरों की जांच की. अब तक पुलिस को एक  नई जानकारी यह मिल गई थी कि मध्य प्रदेश के जिला राजगढ़ के थाना पचौड और बोड़ा के गुलखेड़ी और कडि़या ऐसे गांव हैं, जहां के गैंग बच्चों के सहयोग से शादी समारोह आदि के मौकों पर चोरियां करते हैं.

यह जानकारी मिलते ही एसीपी (औपरेशन) राजेंद्र सिंह ने 26 जून, 2017 को एक टीम मध्य प्रदेश के लिए भेज दी. टीम में इंसपेक्टर सतीश कुमार, एसआई अरविंद कुमार, एएसआई महेंद्र यादव आदि को शामिल किया गया था. टीम ने सब से पहले राजगढ़ जिले में रहने वाले मुखबिर को चोरों के फोटो दिखाए. उस मुखबिर ने 2-3 घंटे में ही पता लगा कर बता दिया कि ये लड़के गुलखेड़ी और कडि़या गांव के हैं और ये दोनों गांव थाना बोड़ा के अंतर्गत आते हैं.

यह जानकारी टीम के लिए अहम थी. इस जानकारी से उन्होंने एसीपी राजेंद्र सिंह को अवगत करा दिया. उन के निर्देश पर टीम थाना बोड़ा पहुंची. वहां के थानाप्रभारी को टीम ने दिल्ली में हुई घटना के बारे में बताते हुए अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में मदद मांगी. थानाप्रभारी ने बताया कि यहां पर कभी मुंबई की तो कभी पंजाब की तो कभी उत्तराखंड तो कभी यूपी की पुलिस आती रहती है. पर चाह कर भी वह इन गांवों में दबिश डालने नहीं जा सकते.

इस की वजह यह है कि इन गांवों में सांसी रहते हैं. जब पुलिस इन के यहां पहुंचती है तो गांव के आदमी और औरतें यहां तक कि बच्चे भी इकट्ठा हो कर पुलिस पर हमला कर देते हैं. महिलाएं पुलिस से भिड़ जाती हैं. कभीकभी ये लोग आपस में ही किसी के पैर पर देसी तमंचे से गोली चला देते हैं. इसलिए इन गांवों में पुलिस नहीं जाती.

थानाप्रभारी ने बताया कि कुछ दिनों पहले पंजाब पुलिस भी आई थी. पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के परिवार की शादी में किसी ने नकदी और ज्वैलरी का बैग उड़ा दिया था. पंजाब पुलिस भी ऐसे ही वापस लौट गई थी.

स्थानीय पुलिस की मदद के बिना किसी भी राज्य की पुलिस सीधे दबिश नहीं दे सकती. दिल्ली पुलिस की टीम असमंजस में पड़ गई कि ऐसी हालत में क्या किया जाए? सीधे दबिश दे कर दिल्ली पुलिस कोई लफड़ा नहीं करना चाहती थी. पुलिस टीम को यह तो पता चल ही गया था कि सूटकेस चुराने वाले बच्चे किस गांव के हैं. अब पुलिस टीम ने उसी मुखबिर की सहायता से उन चोरों के बारे में अन्य जानकारी निकलवाई.

मुखबिर ने बताया कि इन गांवों में चोरों के अनेक गैंग हैं. चूंकि बच्चों पर कोई शक नहीं करता, इसलिए ये लोग अपने रिश्तेदारों या गांव के दूसरे लोगों के बच्चों को साल भर या 6 महीने के कौंट्रैक्ट पर ले लेते हैं. यह कौंट्रैक्ट लाखों रुपए का होता है. उन बच्चों को ट्रेनिंग देने के बाद उन के सहयोग से ही विवाह पार्टियों में चोरियां करते हैं. दिल्ली में जिन बच्चों ने सूटकेस चुराया था, वे बच्चे राका और नीरज के गैंग में काम करते हैं और राका इस समय अपने घर पर नहीं है. वह दिल्ली के पौचनपुर में कहीं किराए पर रहता है.

यह जानकारी ले कर पुलिस टीम दिल्ली लौट आई. पौचनपुर गांव दक्षिणपश्चिम जिले के द्वारका सेक्टर-23 के पास है. अपने स्तर से पुलिस राका को खोजने लगी. कई दिनों की मशक्कत के बाद पहली जुलाई, 2017 को पुलिस ने उसे ढूंढ निकाला.

राका को हिरासत में ले कर पुलिस ने उस से काम्या पैलेस में हुई चोरी के बारे में सख्ती से पूछताछ की. पुलिस की सख्ती के आगे राका ने अपना मुंह खोल दिया. उस ने स्वीकार कर लिया कि काम्या पैलेस की शादी में उसी की गैंग के बच्चों ने सूटकेस चुराया था. बच्चों के अलावा नीरज भी गैंग में शामिल था. इस के बाद उस ने चोरी की जो कहानी बताई, वह दिलचस्प कहानी इस प्रकार थी—

मध्य प्रदेश के जिला राजगढ़ के थाना बोड़ा के अंतर्गत स्थित हैं कडि़या और गुलखेड़ी गांव. दोनों ही गांव की आबादी करीब 5-5 हजार है. राका गुलखेड़ी गांव का रहने वाला था, जबकि नीरज गांव कडि़या में रहता था. इन दोनों गांवों की विशेषता यह है कि यहां पर सांसी जाति के लोग रहते हैं. बताया जाता है कि यहां के ज्यादातर लोग चोरी करते हैं. इन के निशाने पर अकसर शादी समारोह होते हैं. एक खास बात यह होती है कि इन के गैंग में छोटे बच्चे या महिलाएं भी होती हैं.

चूंकि समारोह आदि में बच्चे आसानी से हर जगह पहुंच जाते हैं, जो आराम से बैग या सूटकेस चोरी कर गेट के बाहर पहुंचा देते हैं. ये बच्चे कोई ऐसेवैसे नहीं होते, उन्हें बाकायदा चोरी करने की ट्रेनिंग दी जाती है. जिन बच्चों को गैंग में रखा जाता है, उन के चुनाव का तरीका भी अलग है.

गैंग का मुखिया सब से पहले अपनी रिश्तेदारी या फिर जानने वाले के बच्चे को तलाशने की कोशिश करता है. वहां न मिलने पर गांव के ही किसी बच्चे का चुनाव करता है. गांव के लोग बचपन से ही अपने बच्चे को छोटीमोटी चोरी करने की प्रैक्टिस कराते हैं. चोरी की प्राथमिक पढ़ाई घर वालों से पढ़ने के बाद हाथ आजमाने के लिए घर वाले इन्हें गैंग के लोगों को 6 महीने या साल भर के लिए सौंप देते हैं.

इन बच्चों के हुनर के अनुसार, उन का पैकेज 6 लाख से 12 लाख रुपए तक होता है. बच्चों के घर वालों को 25 प्रतिशत धनराशि एडवांस में नकद दे दी जाती है, बाकी की हर महीने की किस्तों में. इस तरह यहां के बच्चे बड़े पैकेज पर काम करते हैं.

राका ने पुलिस को बताया कि काम की शुरुआत करने से पहले उन्हें 3 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है. ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया जाता है कि लड़की या लड़के की शादी में ज्वैलरी या कैश का बैग किस तरह उड़ाना है.

राका और नीरज, दोनों साझे में काम करते थे. नीरज ने गैंग में अपने बेटे को भी शामिल कर रखा था. इन्होंने गांव के ही बच्चे चीमा (परिवर्तित नाम) को 10 लाख रुपए साल के पैकेज पर अपने गैंग में शामिल किया था. इस के बाद इन्होंने चीमा को बातचीत करने, खानेपीने, कपड़े पहनने, डांस करने की ट्रेनिंग दी. उस की मदद के लिए इन्होंने गांव के ही कुलजीत को अपने गैंग में शामिल कर लिया था.

ये दिल्ली के अलगअलग इलाकों में किराए का कमरा ले कर रहते थे. ये अकसर मोटा हाथ मारने की फिराक में रहते थे. इन्हें पता था कि पैसे वाले लोग अपने बच्चों की शादियां कहां करते हैं. बच्चों को महंगे कपड़े पहना कर ये शाम होते ही औटोरिक्शा से छतरपुर, कापसहेड़ा, महरौली स्थित फार्महाउसों की तरफ घूम कर तलाश करते थे कि शादी कहां हो रही है. फार्महाउसों में ज्यादातर रईसों के बच्चों की ही शादियां होती हैं.

जिस फार्महाउस में शादी हो रही होती, उस के बाहर ही एक साइड में ये औटोरिक्शा खड़ा कर देते और तीनों बच्चे शादी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अंदर चले जाते, जबकि राका और नीरज औटो में ही बैठे रहते. औटो वाले को ये मुंहमांगा पैसा देते थे, इसलिए वह भी कुछ नहीं कहता था.

19 जून को भी इन्होंने ऐसा ही किया. राका और नीरज काम्या पैलेस के बाहर औटो में बैठे रहे और कुलजीत, चीमा तथा नीरज का बेटा मनोज चौधरी की बेटी की शादी समारोह में शामिल होने अंदर चले गए. वे उन के बेटे की लगन के कार्यक्रम में शामिल हुए.

लगन चढ़ने के बाद तीनों को 100-100 रुपए शगुन के तौर पर भी मिले थे. बेटी की शादी की वजह से मनोज चौधरी सूटकेस में अपने घर से कैश और ज्वैलरी ले आए थे. उस समय उन के सूटकेस में ज्वैलरी के अलावा 19 लाख रुपए नकद थे, इसलिए वह उस सूटकेस को अपने हाथ में ही लिए हुए थे.

तीनों बच्चों की टोली ने ताड़ लिया था कि माल इसी सूटकेस में है, इसलिए वे उस सूटकेस पर हाथ साफ करने के लिए उन के इर्दगिर्द ही मंडराते रहे.

शादी में आए मेहमानों की तरह उन्होंने खाना खाया और डीजे पर डांस भी किया. उन की गतिविधियां देख कर कोई शक भी नहीं कर सकता था कि बिन बुलाए मेहमान के रूप में ये चोर हैं.

जब कुलजीत डीजे पर डांस कर रही लड़कियों के साथ डांस कर रहा था, तब कन्यापक्ष के लोगों ने जरूर उस से डीजे से उतर जाने को कहा था. वह मनोज चौधरी का सूटकेस उड़ाने का मौका तलाशते रहे, पर उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी.

रात साढ़े 11 बजे के बाद जब फेरों का कार्यक्रम शुरू हुआ तो उस समय भी वे उन के मेहमानों के बीच बैठ गए तो चीमा मंडप के इर्दगिर्द घूमता रहा. उसी दौरान जैसे ही मनोज ने हाथ में कलावा बंधवाने के लिए हाथ पंडित के आगे किया, तभी चीमा उन के सूटकेस को ले कर फुरती से निकल गया. उस के पीछे कुलजीत और फिर नीरज का बेटा भी निकल गया.

काम्या पैलेस से निकल कर वे सीधे औटो के पास पहुंचे, जहां राका और नीरज इंतजार कर रहे थे. इस के बाद वे औटो से द्वारका स्थित अपने कमरे पर गए और अगले दिन मध्य प्रदेश स्थित अपने घर चले गए. उन्होंने चुराए पैसे आपस में बांट लिए. राका के हिस्से में 4 लाख रुपए आए थे. कुछ दिन गांव में रह कर राका पैसे ले कर दिल्ली में अपने कमरे पर लौट आया.

वारदात करने के बाद ये किसी दूसरे इलाके में कमरा ले लेते थे. पूछताछ में राका ने बताया कि उस ने मुंबई के एक कार्यक्रम में शिल्पा शेट्टी का बैग चुराया था. उस ने बताया कि उस के गांव के लोग देश के तमाम बड़े शहरों में यही काम करते हैं. किसी गैंग में छोटे बच्चों के साथ महिला को भी रखा जाता है. लेकिन सारा कमाल ये बच्चे ही करते हैं.

राका से विस्तार से पूछताछ के बाद एंटी रौबरी सेल ने उस की निशानदेही पर 4 लाख रुपए कैश और कुछ ज्वैलरी बरामद कर ली. इस के बाद उसे कापसहेड़ा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया, क्योंकि इस मामले की रिपोर्ट उसी थाने में दर्ज थी.

इस मामले की जांच एसआई प्रदीप को सौंपी गई थी. एसआई प्रदीप ने राका से पूछताछ की तो उस ने गुड़गांव की एक घटना का खुलासा किया है. कथा संकलन तक पुलिस उस से पूछताछ कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

15 अगस्त स्पेशल: फौजी के फोल्डर से एक सैनिक की कहानी

Story in Hindi

IFFI ने बेस्ट वेब सीरीज (OTT) पुरस्कार के पहले संस्करण के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित कीं

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसार मंत्रालय के अधीन भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आईएफएफआई सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कार के पहले संस्करण के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गए हैं, जिसकी शुरुआत गोवा में 20-28 नवंबर, 2023 को आयोजित होने वाले भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण में की जाएगी.

यह है उद्देश्य

सूचना और प्रसारण मंत्रालय नें जारी किये गए विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है की इस पुरस्कार का उद्देश्य समृद्ध ओटीटी कंटेंट और इसके निर्माताओं को स्वीकृति प्रदान करना, प्रोत्साहित करना और सम्मानित करना है. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्मित और प्रदर्शित वेब सीरीज कंटेंट को प्रोत्साहित करना और इसका उत्सव मनाकर भारतीय ओटीटी उद्योग में विकास एवं नवाचार को बढ़ावा देना चाहता है.
विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है की पुरस्कार का उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं में निर्मित कंटेंट सहित वेब सामग्री उद्योग में क्षेत्रीय विविधता एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देकर भारतीय भाषाओं में ओटीटी सामग्री को प्रोत्साहित करना है. यह पुरस्कार असाधारण प्रतिभा की पहचान करने के साथ उन्हें पुरस्कृत करेगा, जिसने देश में ओटीटी द्वारा प्रदान किए गए अवसरों के माध्यम से अपनी क्षमता का एहसास कराया है. विज्ञप्ति में यह भी जानकारी दी गई है कि भारत की बढ़ती रचनात्मक अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, इस पुरस्कार का उद्देश्य कंटेंट निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफार्मों को अपने काम का प्रदर्शन करने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करके भारत के ओटीटी क्षेत्र में निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना है.

आईएफएफआई के 54वें संस्करण में की जाएगी विजेता के नाम की घोषणा व सम्मान

इस पुरस्कार की घोषणा 18 जुलाई, 2023 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने की थी. इस बात को ध्यान में रखते हुए कि भारत में असाधारण प्रतिभाओं से परिपूर्ण हैं, अनुराग ठाकुर ने कंटेंट निर्माताओं को “एक उभरते और आकांक्षी नए भारत की कहानी बताने के लिए प्रोत्साहित किया – जो अरबों लोगों के सपनों और अरबों अनसुनी कहानियों के साथ दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है.” उन्होंने कहा कि भारत के 54वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इस वर्ष शुरू होने के बाद यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाएगा.

सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कार शुरू करने के पीछे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उद्देश्य पर बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “भारतीय मनोरंजन क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव देखे गए हैं. यह बहुत दिलचस्प है कि हाल ही में फिक्की-ईएनवाई द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 2022 में भारत में न केवल 3,000 घंटे की नई और मूल ओटीटी कंटेंट तैयार की गई बल्कि ओटीटी प्लेटफार्मों पर दर्शकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में 13.5 करोड़ से बढ़कर 18 करोड़ हो चुकी है. जबकि सिनेमा हॉल जाने वालों की संख्या 12.2 करोड़ है और यह ओटीटी प्लेटफॉर्म के दर्शकों से लगभग 6 करोड़ कम है. इसलिए भारतीय ओटीटी उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करने, बढ़ावा देने और क्षेत्रीय प्रतिभा को स्वीकार करने की आवश्यकता महसूस हुई, जिसमें भारत बहुत समृद्ध है.”

पुरस्कार के लिए यह होगी पात्रता

पुरस्कार के लिए पात्र होने के लिए, वेब सीरीज को मूल रूप से किसी भी भारतीय भाषा में निर्मित/ शूट किया गया होना चाहिए. यह केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने के उद्देश्य से निर्मित, सह-निर्मित, लाइसेंस प्राप्त या अधिग्रहित किया हुआ एक मूल कार्य होना चाहिए. प्रविष्टि करने वाले सभी एपिसोड (वेब सीरीज/सीजन) को 01 जनवरी, 2022 से 31 दिसंबर, 2022 के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया होना चाहिए. इसके अलावा, आवेदन के लिए वेब सीरीज/ सीज़न में कम से कम 180 मिनट का कुल रनटाइम होना चाहिए, कम से कम तीन एपिसोड होने चाहिए, प्रत्येक एपिसोड की अवधि 25 मिनट या उससे ज्यादा होनी चाहिए और एक ही शीर्षक या व्यापारिक नाम के अंतर्गत एक साथ जुड़ा होना चाहिए.
पुरस्कार के लिए कैसे करें आवेदन

आवेदन के इच्छुक लोगों को को निर्धारित ऑनलाइन प्रवेश फॉर्म के माध्यम से प्रविष्टि जमा करनी चाहिए, जो पुरस्कार वेबसाइट https://bestwebseriesaward.com/ पर उपलब्ध है. प्रविष्टियों को 25 अगस्त, 2023 को शाम 6 बजे तक ऑनलाइन जमा किया जा सकता है. प्रविष्टियों को ऑनलाइन जमा करने के अलावा, ऑनलाइन आवेदन की मुद्रित और हस्ताक्षरित हार्ड कॉपी संलग्न सामग्रियों के साथ 31 अगस्त, 2023 तक अधिकारिक कार्यालय पहुंच जानी चाहिए. अगर 31 अगस्त, 2023 को अवकाश घोषित किया जाता है, तो अगले कार्य दिवस को आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि माना जाएगा.

पुरस्कार में शामिल होंगी यह चीजें

सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज का पुरस्कार एक वेब श्रृंखला को उसकी कलात्मक योग्यता, कहानी प्रस्तुति, तकनीकी उत्कृष्टता और समग्र प्रभाव के लिए दिया जाएगा. इसमें 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिसे निर्देशक, रचयिता और निर्माता/ प्रोडक्शन हाउस / ओटीटी प्लेटफॉर्म (मूल निर्माण या सह-निर्माण मामले में) के बीच समान रूप से वितरित किया जाएगा. प्रमाणपत्र भी निर्देशक/ रचयिता या दोनों, निर्माता/ प्रोडक्शन हाउस/ ओटीटी प्लेटफॉर्म (मूल निर्माण या सह-उत्पादन मामले में) और वेब-सीरीज़ स्ट्रीमिंग करने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म को प्रदान किया जाएगा.

पुरस्कार हेतु चयन करने के लिए दो स्तरीय व्यवस्था होगी, जिसमें एक पूर्वावलोकन समिति और एक जूरी शामिल हैं. जूरी में पूरे देश से वेब-सीरीज़, सिनेमा और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में प्रशंसित प्रतिष्ठित फिल्म/ वेब सीरीज पेशेवर/ व्यक्तित्व शामिल होंगे. पूर्वावलोकन समिति और जूरी का गठन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया जाएगा.

पुरस्कार की पात्रता और अन्य विवरणों की विस्तृत जानकारी पुरस्कार की वेबसाइट https://bestwebseriesaward.com/ पर उपलब्ध है. पुरस्कार के नियम और अधिनियम को यहां से प्राप्त किया जा सकता है.

जब मॉल के बाहर अर्चना से टकराई ऐश्वर्या शर्मा, दोनों खुशी से हुए पागल

इन दिनों रोहित शेट्टी का शो खतरों के खिलाड़ी 13 टीवी पर टेलिकास्ट हो रहा है शो के चर्चे हो रहे है. इस शो की शूटिंग कुछ दिन पहले अर्जेनटीना में हुई थी. जहां अर्चना गौतम और ऐश्वर्या शर्मा भी कंटेस्टेंट है. इस शो की शूटिंग के दौरान दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई. सोशल मीडिया पर दोनों की ढेर सारी रील्स है जो कि शेयर होती रहती है. हाल ही में अर्चना गौतम और ऐश्वर्या को मुबंई मॉल के बाहर देखा गया. जहां दोनों एक-दूसरे को देख उछल पड़ी.

 

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आपको बता दें, कि पहले अर्चना गौतम ने ऐश्वर्या शर्मा को मॉल के बाहर देखा. देखते ही वो दोनों आपस में उछल पड़े. एक दूसरे को गले लगाया. दोनों का एक वीडियो विरल भयानी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में अर्चना गौतम पैपराजी को देखकर उनकी तरफ आने लगती हैं. रेड आउटफिट में अर्चना काफी सुंदर लग रही हैं. वह पैपराजी को देखते ही बोलती हैं कि अरे भाईया मैं तो आने में हमेशा लेट हो जाती हूं. इसके बाद वहीं पर अर्चना गौतम को ऐश्वर्या शर्मा दिख जाती हैं और वह भागकर अपनी दोस्त के गले लग जाती हैं. इस मौके पर दोनों ही एक दूसरे से हाल-चाल पूछती हैं. ऐश्वर्या शर्मा अर्चना को ‘हॉटी’ का टैग देते हुए पूछती हैं कि क्या तुम जिम जा रही हो? तब अर्चना बोलती हैं कि मैं रोज सोचती हूं कि कल से जिम जाऊंगी. कल से जाऊंगी.

 

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अर्चना गौतम और ऐश्वर्या शर्मा की दोस्ती को फैंस ने काफी पसंद किया है. दोनों का ये अंदाज देख फैंस उनकी तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने अर्चना की तारीफ करते हुए लिखा है, ‘मेरी क्यूटी पाई अर्चु.’ दूसरे ने लिखा, ‘अर्चु हमारी सब पर भारी.’ इसी तरह एक यूजर ने लिखा, ‘अरे भाईया दो दोस्त मिल गए.

बताते चले कि अर्चना गौतम को पॉपुलैरिटी बिग बॉस 16 से मिली. उन्होंने शो में एंटरटेनमेंट का तड़का लगाया था. अर्चना गौतम बिग बॉस में फिनाले तक पहुंचीं. उन्होंने शो में दोस्ती और लड़ाई सब कुछ किया. वहीं, अब बिग बॉस के 17वें सीजन में ऐश्वर्या शर्मा नजर आ सकती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिग बॉस के मेकर्स ने ऐश्वर्या को अप्रोच किया है. इसके अलावा, खतरों के खिलाड़ी 13 के एक प्रोमो में भी बिग बॉस और ऐश्वर्या शर्मा की बातचीत दिखी.

 

सोशल मीडिया पर छाई भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा, रेड बिकनी में दिखाया बोल्ड लुक

भोजपुरी इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक एक्ट्रेस जिनकी झलक पाने के लिए फैंस बेताब रहते है. ऐसे में भोजपुरी की हॉट क्वीन ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. जी हां, हम बात कर रहे है एक्ट्रेस श्वेता शर्मा की. जिन्होने हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर की है. जिसे देख फैंस घायल हो गए है.

 

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आपको बता दें, कि एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी वीडियो शेयर की है जिस वीडियो में वह रेड बिकनी में नजर आ रही है. साथ ही श्वेता ने गॉगल लगा रखे है और गले में नेकलेस पहना हुआ है जिसमें एक्ट्रेस बेहद ही कीलर लुक दे रही है. अब श्वेता शर्मा कि इस वीडियो पर फैंस जमकर प्यार बरसा रहे है. कमेंट करते दिख रहे है.

 

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बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहती हैं. एक्ट्रेस अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर कर उन्हें विजुअल ट्रीट देती नजर आती हैं. फैन फॉलोइंग के मामले में भी श्वेता शर्मा, बाकी एक्ट्रेसेस को कड़ी टक्कर देती हैं. एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम पर करीब 4 लाख लोग फॉलोअर्स हैं. श्वेता शर्मा सिर्फ एक्टिंग के लिए ही नहीं बल्कि डांस के लिए भी जानी जाती हैं. उन्होंने सुपरस्टार खेसारी लाल यादव के साथ भी काम किया है. श्वेता शर्मा के ठुमकों पर पूरा यूपी-बिहार फिदा हैं.

धार्मिक कट्टरवाद में पिसती जनता

धर्म का कट्टरपन कैसे लोगों का दिमाग खराब कर रहा है यह पिछले कुछ दिनों से देश लगातार देख रहा है. मणिपुर हिंसा के बाद इस मामले में नए अध्याय और जुड़ गए हैं, जो शर्मसार करते हैं. पहले मामले के आरोपी की तुलना अगर मुंबई आतंकवादी घटना के दोषी अजमल कसाब से की जाए तो गलत न होगा. धर्म की पताका लहराने और गैरधर्मी लोगों का कत्ल करने के जूनून ने इन दोनों घटनाओं के बीच कोई खास फर्क नहीं छोड़ा है.

घटना 31 जुलाई, 2023 की है. ‘जयपुरमुंबई सैंट्रल सुपरफास्ट’ ट्रेन अपने तय समय से पटरी पर दौड़ रही थी. ट्रेन पालघर रेलवे स्टेशन के नजदीक कहीं थी. सुबह का समय था तो ट्रेन की बोगियों में ज्यादातर मुसाफिर सो रहे थे.

अचानक 5 बजे ट्रेन से गोली चलने की आवाज आई. गोली चलाने वाला आरपीएफ का जवान चेतन कुमार चौधरी था, जो उत्तर प्रदेश के हाथरस का रहने वाला था और जिस पर गोली चली वह उस का सीनियर एएसआई टीकाराम मीणा था, जो राजस्थान के सवाई माधोपुर का रहने वाला था.

यह बात शायद यहीं खत्म हो जाती और इसे डिफैंस का निजी मामला कह कर दबा दिया जाता, लेकिन मामला तब आगे बढ़ा जब इस घटना से नए पहलू जुड़े और इस ने सांप्रदायिक रूप ले लिया. आरोपी चेतन कुमार चौधरी यहीं नहीं रुका. उस ने ट्रेन में सफर कर रहे 3 और मुसाफिरों, जो मुसलिम थे, को भी मौत के घाट उतार दिया.

इस मामले पर लीपापोती करते हुए यह कहा जाने लगा है कि आरोपी की दिमागी हालत खराब थी, इसलिए उस ने इस घटना को अंजाम दिया लेकिन घटना की वायरल वीडियो बताती है कि यह दिमागी हालत देश में चल रहे धार्मिक कट्टरपन के चलते खराब हो रही है, जिसे धर्मोदी मीडिया लगातार लोगों के बीच परोस रहा है.

अगर किसी वजह से चेतन कुमार चौधरी की दिमागी हालत सही नहीं होती तो वह किसी पर भी गोली चलाता, पर यहां चुन कर एक समुदाय के लोगों को बोगियों से ढूंढ़ कर मारा गया. ट्रेन लेआउट के हिसाब से 5 बजे उस ने अपने सीनियर को मारा, फिर उस ने 20 राउंड की अपनी आटोमैटिक असौल्ट राइफल से उसी बौगी में सफर कर रहे अब्दुल को मारा.

इस के बाद चेतन कुमार चौधरी अपनी बौगी बी4 से बी1 की तरफ गया यानी 4 बौगी दूर उस ने सदर मोहमद हुसैन को मारा. फिर वह 2 बौगी आगे एस6 गया और असगर अब्बास अली को मार दिया. यानी एक कथित मैंटल अनस्टेबल इनसान मारने के लिए बौगियों में दाढ़ी और टोपी वाले लोगों को ढूंढ़ रहा था. समझा जा सकता है कि यह किस तरह की मैंटल स्टेबिलिटी रही होगी.

चेतन कुमार चौधरी यहीं नहीं रुका, कत्ल करने के बाद उस ने अपनी राइफल जमीन पर रखी और बाकी मुसाफिरों से कहा कि उस की वीडियो बनाओ. वीडियो में वह बोला, “ये लोग (मुसलमान) पाकिस्तान से औपरेट हुए हैं. देश की मीडिया यही खबरें दिखा रही है. पता चल रहा है उन को, इन के आका हैं वहां. अगर हिंदुस्तान में रहना है तो मैं कहता हूं मोदी और योगी यही 2 हैं और आप के ठाकरे.”

अब चेतन कुमार चौधरी के इन शब्दों पर गौर करें तो समझ आएगा कि यह पूरा मामला उस उग्रधार्मिक जहर का नतीजा है जो पिछले एक दशक से लोगों के दिमाग में भरा जा रहा है. लेकिन इस घटना से किसे क्या हासिल हुआ यह सोचने वाली बात है. क्या इस से धर्म की पताका विश्वभर में लहरा गई? क्या देश का सम्मान बढ़ गया? क्या धार्मिक मसले सुलझ गए? क्या खुशहाली आ गई?

नहीं, बल्कि इस ने मरने और मारने वाले उन 5 लोगों का जीवन व उन के परिवारों को पूरी तरह से तहसनहस तो किया ही साथ में उन हजारों मुसाफिरों को जिंदगी भर की खौफनाक याद दे दी जिसे वे शायद ही कभी भुला पाएं.

इस में कोई हैरानी भी नहीं होगी कि चेतन कुमार चौधरी जैसे लोग देश में हजारों की संख्या में हों, क्योंकि सुबहशाम ह्वाट्सएप पर अधेड़ अंकलआंटी झूठ की बुनियाद पर खड़े नफरती मैसेज ठेलते दिख जाते हैं. वे खुद चेतन कुमार चौधरी जैसे लोगों को सही ठहराने वाले मैसेज अपने बच्चों के ग्रुप में भेज कर उन के दिमाग में भी जहर भरते हैं.

अब अगर इस के समानांतर घटित दूसरी घटना पर जाएं तो समझ आएगा कि यह नफरत पैदा कहां से हो रही है, इसे पालपोस कौन रहा है और हम तक यह पहुंच कैसे रहा है. पालघर में जिस जगह ट्रेन गोलीकांड की घटना घटी, उस से तकरीबन 1,300 किलोमीटर दूर हरियाणा के नूंह में सांप्रदायिक हिंसा हुई.

इन दोनों घटनाओं में यह तय करना मुश्किल है कि किसे ज्यादा खतनाक माना जाए. दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है, लेकिन जो सामान बात यह है इस का बीज वही धार्मिक पागलपन जो देश के कई लोगों को लील चुका है.

पथराव, आगजनी, गोलीबारी, हत्या, जली टूटीफूटी गाड़ियां, बिखरे कांच के टुकड़े, सड़क पर ईंटपत्थर, चेहरे पर मास्क, हाथ में डंडे और मुंह पर धार्मिक नारे. यह नजारा हर सांप्रदायिक हिंसा का रहता है, इसलिए दिल्ली से 86 किलोमीटर दूर हरियाणा का नूंह में भी इस नजारे से खुद को अलग नहीं कर पाया.

करता भी कैसे, दंगे कराने वाले जब एक पैटर्न से दंगे कराएं तो उस का जो कुल जमा होता है वह एक सा ही होता है. इस कहानी पर आएं उस से पहले यह समझना जरूरी है कि जिस जगह दंगे हुए वहां का भूगोल क्या है, क्यों वह इलाका माने रखता है और क्यों उस का चयन किया गया?

हरियाणा राज्य अपना बौर्डर दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और कुछ हिस्सा हिमाचल प्रदेश से साझा करता है. नूंह में जिस जगह दंगे हुए वह दिल्ली और राजस्थान से नजदीक है और मेवात रीजन में आती है. यह जिला साल 2005 में गुरुग्राम और फरीदाबाद जिले के कुछ हिस्से ले कर बनाया गया. यहां की 80 फीसदी के आसपास आबादी मुसलिम है. नई गणना का देश इंतजार कर रहा है, पर पिछली गणना कहती है कि यहां 11 लाख के करीब लोग रहते हैं.

वक्त के साथ देश आगे बढ़ा पर यह इलाका पिछड़ा रहा. यहां इंडस्ट्री आईं पर यहां के नागरिकों को आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया. न ठीक से शिक्षा पहुंच पाई इसलिए पुरुष साक्षरता दर 70 व महिला साक्षरता दर 37 फीसदी हो पाई. 2018 की नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि नूंह की गिनती देश के 721 जिलों में से चुनिंदा मुख्य पिछड़ों में आती है.

लेकिन जिस नूंह को सभी सरकारें भुलाती आई थीं, वह अचानक कुछ कारणों से सुर्खियों में क्यों आने लगी, खासतौर पर हरियाणा की राजनीति के लिए यह इलाका जरूरी क्यों होने लगा? कारण यहां से धर्म की खेती को पकाए जाने वाले मुद्दे बनाना और उस पर चढ़ाई कर राजनीतिक रोटियां सेंकना.

इस इलाके में पिछले कुछ समय से कथित गौवंश और गौरक्षा के मामले सुर्खियों में रहे. फिर इस में नया घटनाक्रम बीते दिनों दंगों की शक्ल में सामने आया. मसला एक यात्रा का था. यात्रा धार्मिक थी. हालांकि यह यात्रा ‘ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ के नाम से पिछले 3 साल से हो रही थी. इस बार 31 जुलाई को यात्रा निकलनी थी. इसे बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोग संयोजित कर रहे थे. यह मामला निबट जाता, लेकिन इस यात्रा के 2 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होती है. वीडियो मोनू मानेसर की थी.

मोनू मानेसर, जो कि बजरंग दल का कार्यकर्ता है और कथित तौर पर खुद को गौरक्षक बताता है, जिस पर हरियाणा के भिवानी में नासिर और जुनैद की हत्या का आरोप है और फिलहाल फरार है. इसे बजरंग दल बचाने पर लगा है और इस के हर काम का समर्थन करता है. अब चूंकि आर्टिफीशियल इंटैलिजैंस के जमाने में पुलिस तकनीक से वंचित है, पर अपराधी तकनीक से जुड़े हैं, इसलिए मोनू ने अपनी वीडियो में लोगों (हिंदुओं) से अपील की कि इस यात्रा में बढ़चढ़ कर शामिल हों और वह खुद भी अपने लोगों के साथ आएगा.

मोनू की इस वीडियो ने रहीसही कसर पूरी कर दी. इस वीडियो के आने के बाद 2 दिन तक माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. सरकार के पास समय था कि वह इस बीच उचित कार्यवाही करती लेकिन वह हाथ पर हाथ धर कर बैठी रही.

नतीजतन जिस इलाके से यात्रा निकली वहां लोग घरों में पहले से तैयार थे और यात्रा में आई भीड़ भी तलवारों और बंदूकों के साथ थी. यह सब होता रहा और पुलिस इंवैस्टिगेटिंग टीम सोती रही और इतनी बड़ी सांप्रदायिक हिंसा घटी. हिंसा में 3 लोगों की तत्काल मौत हुई, दोनों तरफ के उपद्रवियों ने कईयों गाड़ियों को पर आग लगी दी, साइबर थाने में तोड़फोड़ की, नूंह चौक के पास स्थित अलवर अस्पताल पर भी हमला किया गया. दुकानें जलाई गईं.

दंगों की आग सिर्फ नूंह तक सीमित नहीं रही, 31 जुलाई से 1 अगस्त तक यह हिंसा गुरुग्राम तक भी जा फैली. गुरुग्राम के सैक्टर 57 में एक मसजिद को आग के हवाले कर दिया गया. मसजिद में फायरिंग हुई और इमाम की गोली लगने से मौत हो गई. इस के अलावा सोहना में हिंसा हुई और कई वाहन आग के हवाले कर दिए गए.

इसी तरह की मिलतीजुलती घटना 29 जुलाई, 2023 को दिल्ली में हुई. जगह थी नांगलोई. मुहर्रम के दिन ताजिया जा रहा था. इस में झड़प हुई भीड़ की पुलिस से भिड़ंत हो गई. भीड़ की जिद थी कि उन्हें उस रूट से जाना है जहां से पुलिस उन्हें मना कर रही थी. इस से नाराज भीड़ आक्रोशित हो गई और आनेजाने वाले वाहनों पर पत्थरडंडे बरसाने लगी. कई वाहनों को तोड़ा गया. इसी तरह की घटना 30 जुलाई, 2023 को उत्तर प्रदेश की बरेली में घटित हुई. यहां 2 समुदाय महमूद और जोगी समुदाय आमनेसामने आ गए.

इन सभी घटनाओं को देखा जाए तो कहीं दंगे प्रायोजित रहे, कहीं खुद से फूट पड़े, कहीं नफरत हावी हो गई, लेकिन इस के कोर में धर्म की कट्टरता रही जिस ने लोगों से सोचनेसमझने की ताकत ही छीन ली. ये घटनाएं नई नहीं हैं लेकिन कुल जमा यह है कि इस धार्मिक कट्टरता से किसी को भी क्या हासिल होता है? यह कैसी भक्ति है कि किसी को मार कर ही साबित होती है?

इन सभी घटनाओं में जो चीजें सामने आई वह जानमाल की हानि की रही. सोचो उन के परिजनों के बारे में जिन की मौत इन धार्मिक हिंसाओं में हुई. सोचिए कितनी संपत्ति का नुकसान नागरिकों और सरकारों को उठाना पड़ा है.

हरियाणा में कई वाहन जला कर खाक कर दिए गए, यह वाहन आम लोगों के थे, वाहनों पर धर्म का ठप्पा नहीं लगा होता, इन वाहनों पर सरकार मुआवजा नहीं देती. इंश्योरैंस का क्लेम इतना आसान नहीं होता. इस का क्लेम तभी किया जा सकता है जब वाहन समयसीमा के भीतर हो. उस के बाद भी तमाम तरह की अड़चनें होती हैं. कई शर्तें होती हैं.

हमारे देश में कालोनियां भले धर्मजाति के नाम पर बंटी हों लेकिन बात जब धंधे की आती है तो सभी उसी जगह अपनी दुकानें लगाते हैं जहां व्यापार की अच्छी गुंजाइश हो. जितने भी दंगे होते हैं, उन दंगों में अनुपात में किसी समुदाय की दुकानें भले कमज्यादा जले लेकिन घाटा दोनों तरफ का होता है.

जितनी सांप्रदायिक घटना घटती हैं उन्हें सुलगाने वाले तो अपने घरों में रहते हैं, उन के बच्चे उन जुलूसों में नहीं दिखते, न ही उन के हाथ में लाठीडंडे होते हैं, क्योंकि वे प्राइवेट स्कूल में इंगलिश मीडियम की पढ़ाई कर रहे होते हैं लेकिन उन घटनाओं में लाठीडंडे, तलवार, पत्थर ले कर चलने वाले वे पिछड़े तबके के नौजवान होते हैं, जिन के लिए बुनियादी सवाल रोजगार, पढ़ाईलिखाई, सेहत के होने चाहिए थे. इस के उलट ये नौजवान धर्म के बहकावे में आम मासूम लोगों के दुश्मन बन बैठते हैं और फिर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते हैं.

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बारिश का मौसम जहां चिलचिलाती गर्मी से राहत देता है, वहीं उसके साथ स्किन की समस्याओं को भी लेकर आता है. अधिक नमी के कारण लोगों को अक्सर मुंहासे, ब्रेकआउट और कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ये सब हमारी स्किन से चमक को दूर करते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार मानसून में ह्यूमिडिटी के कारण स्किन पसीने से तर और ऑयली हो जाती है.इससे पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे ब्रेकआउट हो जाता है. कोविड के दौरान, जहां हम हर समय मास्क पहने रहते हैं, मुंहासों से परेशान स्किन के लिए स्थितियां और भी बदतर हो जाती हैं.

स्किन के लिए डाइट टिप्स

1. हाइड्रेट रहे

एक्सपर्ट्स के अनुसार, हैल्दी और ग्लोइंग स्किन की कुंजी है हाइड्रेशन. रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से हमारी स्किन कोमल और चमकदार दिखती है.  मानसून के दौरान हमें बहुत पसीना आता है. इससे हमारे शरीर से अत्यधिक पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाता है. अपनी डेली डाइट में ताजे फलों का रस और नींबू पानी शामिल करें. हर दिन 8-10 गिलास पानी का सेवन करें.

2. मौसमी फल खाएं

मानसून में कई ऐसे फल आते हैं, जो स्किन के लिए लाभकारी गुणों से भरपूर होते हैं. जामुन, आड़ू, चेरी आदि जैसे फल विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरे होते हैं, जो टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नैचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं.

3. तले हुए खाद्य पदार्थों से बचें

मानसून आते ही हम पकोड़े, भजिया और समोसे के बारे में सोचते हैं. रोजाना इन तले हुए खाद्य पदार्थों को खाने से पिंपल्स और मुंहासे हो सकते हैं, जिससे हमारी स्किन ड्राई हो जाती है. यही कारण है कि एक्सपर्ट्स इन पकोड़ों और भजिया से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं. इसके अलावा कैफीन के अत्यधिक सेवन से भी बचें.

हैल्दी स्कीन के लिए डिटौक्स ड्रिंक्स

1. ग्रीन टी

ग्रीन टी सबसे लोकप्रिय डिटॉक्स ड्रिंक्स में से एक है. यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों में समृद्ध है, जो हमारी स्किन (और हैल्थ) को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है.

2. नींबू पानी

नींबू पानी में सिर्फ हमें ठंडा और हाइड्रेटेड रखने के अलावा और भी बहुत कुछ है. नींबू विटामिन सी का भंडार है. यह न केवल कई कीटाणुओं और फंगल इंफेक्शन्स से लड़ता है, बल्कि हमारी स्किन के ग्लो को भी बहाल करता है.

3. हल्दी दूध

हल्दी दूध के लाभों को अलग से किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है. हल्दी और दूध की अच्छाइयों से भरपूर, यह पेय ओवरऑल हेल्थ के लिए एक औषधि के रूप में काम करता है.

4. तुलसी की चाय

हर भारतीय के घर में आसानी से उपलब्ध, तुलसी सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा रही है. यह एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-एजिंग गुणों से समृद्ध है, जो हमें कई मौसमी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद करती है. तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर छान लें और एक घूंट लें. आपके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने के अलावा, यह हर्बल चाय आपको लंबे और व्यस्त दिन के बाद आराम करने में मदद करेगी.

 

गुप्त रोग: रूबी और अजय के नजायज संबंधों का कैसे हुआ पर्दाफाश

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भांजे ने की मामा की हत्या

7 मई, 2017 की शाम 5 बजे गुड़गांव में नौकरी करने वाले देवेंद्र के फोन पर उस के भाई संदीप का मैसेज आया कि उस के मोबाइल फोन का स्पीकर खराब हो गया है, इसलिए वह बात नहीं कर सकता. वह रात को बस से निकलेगा, जिस से सुबह तक गुड़गांव पहुंच जाएगा. देवेंद्र खाना खा कर लेटा था कि संदीप का जो मैसेज रात 11 बजे उस के फोन पर आया, उस ने उस के होश उड़ा दिए. मैसेज में संदीप ने लिखा था कि वह कोसी के एक रेस्टोरेंट में खाना खा रहा था, तभी उस की तबीयत खराब हो गई. वह कुछ कर पाता, तभी कुछ लोगों ने उस का अपहरण कर लिया. इस समय वह एक वैन में कैद है. वैन में एक लाश भी रखी है. किसी तरह वह उसे छुड़ाने की कोशिश करे.

मैसेज पढ़ कर देवेंद्र के हाथपैर फूल गए थे. उस ने तुरंत गुड़गांव में ही रह रहे अपने करीबी धर्मेंद्र प्रताप सिंह को फोन कर के सारी बात बताई और किसी भी तरह भाई को मुक्त कराने के लिए कहा. देवेंद्र से बात होने के बाद धर्मेंद्र प्रताप सिंह उसे बाद में आने को कह कर खुद कोसी के लिए चल पड़े. रात में ही वह कोसी पहुंचे और थानाकोतवाली कोसी पुलिस को संदीप के अपहरण की सूचना दी.

कोतवाली प्रभारी ने तुरंत नाकाबंदी करा दी. सुबह 5 बजे देवेंद्र भी कोसी पहुंच गया. उस ने अपराध संख्या 129/2017 पर धारा 364 के तहत संदीप के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी. कोसी कोतवाली ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन जब देवेंद्र ने बताया कि संदीप आगरा आया था और वहीं से वह कोसी जा रहा था, तभी उस का अपहरण हुआ है. इस पर कोतवाली प्रभारी ने कहा कि उन्हें आगरा जा कर भी पता करना चाहिए, जहां वह ठहरा था. शायद वहीं से कोई सुराग मिल जाए. देवेंद्र धर्मेंद्र प्रताप सिंह के साथ आगरा के लिए चल पड़ा. संदीप आगरा के थाना सिकंदरा के अंतर्गत आने वाले मोहल्ला नीरव निकुंज में ठहरा था. देवेंद्र और धर्मेंद्र ने थाना सिकंदरा जा कर थानाप्रभारी राजेश कुमार को सारी बात बताई तो उन्होंने कहा, ‘‘आज सुबह ही बोदला रेलवे ट्रैक के पास तालाब में एक सिरकटी लाश मिली है. आप लोग जा कर उसे देख लें, कहीं वह आप के भाई की तो नहीं है?’’

लेकिन देवेंद्र ने कहा, ‘‘रात में 11 बजे तो भाई ने मुझे मैसेज किया था. उन के साथ ऐसी अनहोनी कैसे हो सकती है? फिर उन की हत्या कोई क्यों करेगा?’’

इस बीच देवेंद्र की सूचना पर घर के अन्य लोग भी रिश्तेदारों के साथ आगरा पहुंच गए थे. सभी लोग इस बात को ले कर परेशान थे कि कहीं संदीप के साथ कोई अनहोनी तो नहीं घट गई? सभी को शिवम ने अपने कमरे पर ठहराया था. शिवम संदीप और देवेंद्र का भांजा था. पूछताछ में संदीप के घर वालों ने थाना सिकंदरा पुलिस को बताया था कि संदीप जिस लड़की उमा (बदला हुआ नाम) से प्यार करता था, वह आगरा में ही रहती है. दोनों विवाह करना चाहते थे, लेकिन लड़की के घर वाले इस संबंध से खुश नहीं थे.

घर वालों की इस बात से पुलिस को उमा के घर वालों पर शक हुआ. लेकिन जब उमा को बुला कर पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस दिन दोपहर दोनों ने एक रेस्टोरेंट में साथसाथ खाना खाया था. उस समय संदीप की तबीयत काफी खराब थी.

उमा जिस तरह बातें कर रही थी, उस से किसी को भी नहीं लगा कि संदीप के साथ किसी भी तरह के हादसे में वह शामिल हो सकती थी. सभी शिवम के कमरे पर बैठे बातें कर रहे थे, तभी शिवम संदीप के बड़े भाई प्रदीप के साले कैलाश का फोन ले कर बाहर चला गया. वह काफी देर तक न जाने किस से बातें करता रहा. अंदर आ कर उस ने कैलाश का फोन वापस कर दिया. सुबह कैलाश ने अपना फोन देखा तो संयोग से उस में शिवम की बातें रिकौर्ड हो गई थीं. जब वह रिकौर्डिंग सुनी गई तो सभी अपनाअपना सिर थाम कर बैठ गए.

रिकौर्डिंग में शिवम अपने दोस्त आशीष से कह रहा था, ‘‘तुम अभी जा कर अपने मोबाइल फोन के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करा दो. उस के बाद किसी दूसरे सिम से संदीप मामा के भाई देवेंद्र को फोन कर के कहो कि संदीप मामा लड़की के चक्कर में मारे गए हैं. अब वे उन्हें ढूंढना बंद कर दें.’’

फिर क्या था, अब संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी. सभी शिवम को ले कर कोसी के लिए चल पड़े. रास्ते भर शिवम यही कहता रहा कि उस ने कुछ नहीं किया है. क्योंकि उसे पता नहीं था कि उस ने कैलाश के फोन से जो बातें की थीं, वे रिकौर्ड हो गई थीं और उन्हें सब ने सुन लिया था.

शिवम को थाना कोसी पुलिस के हवाले करने के साथ वह रिकौर्डिंग भी सुना दी गई, जो उस ने आशीष से कहा था. शिवम ने भी वह रिकौर्डिंग सुन ली तो फिर मना करने का सवाल ही नहीं रहा. उस ने अपने सगे मामा संदीप की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद की गई पूछताछ में उस ने संदीप की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज के थाना सहावर से कोई 7 किलोमीटर दूर बसा है गांव म्यासुर. इसी गांव में विजय अपने 3 भाइयों प्रदीप, संदीप और देवेंद्र के साथ रहता था. उस की 2 बहनें थीं, मंजू और शशिप्रभा. मंजू की शादी फिरोजाबाद में संजय के साथ हुई थी. वह सरस्वती विद्या मंदिर में अध्यापक था. उस ने अपनी एक न्यू एवन बैंड पार्टी भी बना रखी थी. मंजू से छोटी शशिप्रभा की शादी एटा में हुई थी.

विजय और प्रदीप ज्यादा नहीं पढ़ पाए थे. शादी के बाद दोनों भाई खेती करने के अलावा खर्चे के लिए गांव में ही घर की जरूरतों के सामानों की एक दुकान खोल ली थी. दोनों भाई भले ही नहीं पढ़ पाए थे, लेकिन वे अपने छोटे भाइयों संदीप और देवेंद्र की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दे रहे थे.

इसी का नतीजा था कि संदीप ने बीटेक कर लिया. इस के बाद उसे दिल्ली में नौकरी मिल गई तो वह देवेंद्र को भी अपने साथ दिल्ली ले आया. देवेंद्र नौकरी करने के साथसाथ सीए की तैयारी भी कर रहा था. विजय का अपना परिवार तो व्यवस्थित हो गया था, लेकिन बड़ी बहन मंजू के पति की मौत हो जाने से वह परेशानी में पड़ गई. उस के 3 बच्चे थे, 2 बेटे शिवम और दीपक तथा एक बेटी मानसी.

पति की मौत से मंजू को खर्चा चलाना मुश्किल हो गया तो विजय भांजों की पढ़ाई का नुकसान न हो, यह सोच कर उन्हें अपने घर ले आया. उधर मंजू को एक स्कूल में आया की नौकरी मिल गई तो उस की परेशानी थोड़ी कम हो गई.

शिवम ने मामा के घर रह कर इंटर तक की पढ़ाई की. बहन की परेशानी को देखते हुए विजय उसे अपने घर रख कर पढ़ा तो रहा था, लेकिन वह भांजे से खुश नहीं था. इस की वजह यह थी कि उस के खर्चे बहुत ज्यादा थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि वह रुपए कहां खर्च करता है.

जब तक शिवम ननिहाल में रहा, तब तक थोड़ाबहुत मामा के अंकुश में रहा. लेकिन 12वीं पास कर के वह मां के पास आ गया तो पूरी तरह से आजाद हो गया. फिरोजाबाद में उस ने बीएससी करने के लिए एक कालेज में दाखिला ले लिया.

ननिहाल से उसे पढ़ाई का खर्चा मिल रहा था, इस के बावजूद अपने अन्य खर्चों के लिए वह जब चाहता, घर का कोई न कोई सामान बेच देता. इसी तरह धीरेधीरे एकएक कर के उस ने पिता की बैंड पार्टी के सारे बाजे बेच दिए. उस की इन हरकतों से मां ही नहीं, मामा भी दुखी थे. लेकिन सब यही सोच रहे थे कि पढ़लिख कर वह कुछ करने लगेगा तो चिंता खत्म हो जाएगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

सब की अपनीअपनी परेशानियां थीं, ऐसे में शिवम पर नजर रखना आसान नहीं था. शिवम ने बीएससी कर लिया तो विजय ने गुड़गांव में अच्छी कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करने वाले अपने छोटे भाई संदीप से कहा कि वह शिवम को अपने साथ रख कर कहीं कोई काम दिला दे, वरना वह हाथ से निकल जाएगा.

संदीप गुड़गांव में छोटे भाई देवेंद्र के साथ रहता था. वह वहां एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर था. उसे बढि़या तनख्वाह मिल रही थी. वह अपनी रिश्तेदारी की एक लड़की उमा से प्यार करता था. वह आगरा के दयालबाग में परिवार के साथ रहती थी. लेकिन उमा के घर वाले संदीप से उस की शादी नहीं करना चाहते थे.

जबकि उमा ने घर वालों से साफ कह दिया था कि वह शादी संदीप से ही करेगी. यही नहीं, वह संदीप से खुलेआम मिलनेजुलने भी लगी थी. दोनों जल्दी ही शादी करने वाले थे.

भाई के कहने पर संदीप ने शिवम को अपने पास गुड़गांव बुला लिया और किसी प्राइवेट कंपनी में उस की नौकरी लगवा दी. सब को लगा कि अब शिवम सुधर जाएगा. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. उस ने करीब एक साल तक नौकरी की, लेकिन इस बीच एक पैसा उस ने न मां को दिया और न मामा को. देने की कौन कहे, वह उलटा मां या मामाओं से पैसे लेता रहा.

फिर एक दिन अचानक शिवम नौकरी छोड़ कर फिरोजाबाद चला गया. वहां वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगा. सब ने सोचा कि कुछ तो कर ही रहा है, इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा. लेकिन जब मंजू को पता चला कि शिवम जो कमाता है, वह जुए और शराब पर उड़ा देता है तो उसे चिंता हुई. उस ने यह बात भाइयों को बताई तो वे भी परेशान हो उठे.

मामा शिवम की जिंदगी बनाना चाहते थे. इस की वजह यह थी कि उन्हें बहन की चिंता थी. फिरोजाबाद में रहते हुए शिवम को किसी लड़की से प्यार हो गया. अब उस का एक खर्च और बढ़ गया. उस के इस प्यार की जानकारी संदीप को हुई तो उस ने उसे समझाया कि उस की कमाईधमाई है नहीं और वह लड़की के चक्कर में पड़ा है.

पर शिवम को कहां किस की फिक्र थी. वह तो अपने में ही मस्त था. उसी बीच एक दिन वह गुड़गांव पहुंचा और संदीप से कहा कि वह एक बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गया है.

उस की प्रेमिका गर्भवती हो गई है. अगर किसी को पता चल गया तो वह मुसीबत में फंस जाएगा. अगर वह उसे कुछ पैसे दे दें तो वह इस मुसीबत से छुटकारा पा ले.

शिवम की बात पर संदीप को गुस्सा तो बहुत आया, पर मरता क्या न करता. मुसीबत से बचने के लिए संदीप ने उसे 6 हजार रुपए दे दिए.

गुड़गांव में नौकरी करते हुए संदीप और देवेंद्र ने ब्राबो टेक्सटाइल्स नाम से एक कंपनी खोली. उन्हें उत्तर प्रदेश में मार्केटिंग के लिए एक तेजतर्रार आदमी की जरूरत थी. अब तक संदीप को पता चल चुका था कि शिवम ने प्रेमिका के गर्भवती होने की बात बता कर जो पैसे लिए थे, वह झूठी थी. इस के बावजूद उस ने सोचा कि अगर वह शिवम को उत्तर प्रदेश में मार्केटिंग में लगा दें तो शायद वह सुधर जाए.

संदीप ने शिवम को फोन कर के गुड़गांव बुलाया और ऊंचनीच समझा कर उस से अपने लिए काम करने को कहा. संदीप के कहने पर शिवम उस के लिए काम करने को तैयार हो गया. संदीप ने उसे 12 हजार रुपए प्रति महीना वेतन देने को कहा. कारोबार के लिए के.के. नगर, आगरा में एक कमरा भी ले लिया.

संदीप का सोचना था कि इसी बहाने वह आगरा आता रहेगा, जहां उसे प्रेमिका से मिलने में कोई परेशानी नहीं होगी. शिवम को लगभग 1 लाख रुपए के रेडीमेड कपड़े दिलवा दिए गए. जिस से कमा कर देने की कौन कहे, शिवम ने पूंजी भी गंवा दी. संदीप को गड़बड़ी का आभास हुआ तो वह देवेंद्र के साथ आगरा पहुंचा.

आगरा पहुंच कर दोनों भाइयों को पता चला कि शिवम ने व्यापारियों से पैसे ले कर जुए और शराब पर खर्च कर दिए हैं. यह जान कर संदीप ने शिवम की पिटाई तो की ही, फिरोजाबाद ले जा कर बहन से भी उस की शिकायत की. यही नहीं, उस की प्रेमिका को बुला कर उस से भी सारी बात बता दी. जब शिवम की प्रेमिका को पता चला कि उसे गर्भवती बता कर शिवम ने मामा से पैसे ठगे हैं तो उसे बहुत गुस्सा आया. उस ने उसी दिन शिवम से संबंध तोड़ लिए.

संदीप ने तो अपनी समझ से शिवम के लिए अच्छा किया था, पर उस की यह हरकत शिवम को ही नहीं, मंजू को भी नागवार गुजरी. बहन ने बेटे को समझाने के बजाय उस का पक्ष लिया. मां की शह मिलने से शिवम का हौसला और बुलंद हो गया. फिर क्या था, वह मामा से बदला लेने की सोचने लगा.

संदीप समझ गया कि अब शिवम कभी नहीं सुधरेगा, इसलिए उस ने सोच लिया कि अब वह उस की कोई मदद नहीं करेगा. दूसरी ओर शिवम मामा से अपने अपमान का बदला लेने की योजना बनाने लगा. इस के लिए उस ने आगरा के थाना सिकंदरा के मोहल्ला नीरव निकुंज में दीवानचंद ट्रांसपोर्टर के मकान में ऊपर की मंजिल में एक कमरा किराए पर लिया. अब वह इस बात पर विचार करने लगा कि मामा को कैसे गुड़गांव से आगरा बुलाया जाए, जिस से वह उस से बदला ले सके?

काफी सोचविचार कर उस ने एक कहानी गढ़ी और 6 मई, 2017 को गुड़गांव मामा के पास पहुंचा. क्योंकि उस दिन मकान मालिक परिवार के साथ कहीं बाहर गए हुए थे. घर खाली था. उसे देख कर न संदीप खुश हुआ और न देवेंद्र. इसलिए दोनों ने ही पूछा, ‘‘अब तुम यहां क्या करने आए हो?’’

‘‘मामा, मैं जानता हूं कि आप लोग मुझ से काफी नाराज हैं, इसीलिए मुझे आना पड़ा. क्योंकि मैं फोन करता तो आप लोग मेरी बात पर यकीन नहीं करते. एक व्यापारी ने पैसे देने को कहा है, मैं चाहता हूं कि आप खुद चल कर वह पैसा ले लें.’’ शिवम ने कहा.

‘‘भैया, इस की बात पर बिलकुल विश्वास मत करना.’’ देवेंद्र ने शिवम को घूरते हुए कहा.

लेकिन शिवम कसमें खाने लगा तो संदीप को उस की बात पर यकीन करना पड़ा. शिवम के झांसे में आ कर वह उसी दिन यानी 6 मई को शिवम के साथ चल पड़ा. शाम को संदीप शिवम के साथ उस के कमरे पर पहुंच गया. गुड़गांव से चलते समय संदीप ने उमा को फोन कर के आगरा आने की बात बता दी थी.

कमरे पर पहुंचते ही शिवम ने संदीप को कोल्डड्रिंक पिलाई, जिसे पीते ही उसे अजीब सा लगने लगा. कुछ देर बाद उमा आई तो उस ने यह बात उसे भी बताई. तब उमा ने शिवम से पूछा, ‘‘तुम ने कोल्डड्रिंक में कुछ मिलाया तो नहीं था?’’

उमा के इस सवाल पर शिवम एकदम से घबरा गया. लेकिन उस ने तुरंत खुद को संभाल कर कहा, ‘‘आप भी कैसी बातें कर रही हैं, मैं भला मामा के कोल्डड्रिंक में कुछ क्यों मिलाऊंगा?’’

इस के बाद यह बात यहीं खत्म हो गई. अगले दिन रेस्टोरेंट में मिलने का वादा कर के उमा चली गई. उस दिन शिवम सुबह ही से गायब हो गया. उस का मोबाइल फोन भी बंद हो गया. शिवम का कुछ पता नहीं चला तो संदीप ने उमा को फोन किया और कमलानगर स्थित एक रेस्टोरेंट में पहुंचने को कहा.

उमा के साथ खाना खाते हुए भी संदीप ने कहा कि अभी भी उस की तबीयत ठीक नहीं है. तब उमा ने कहा, ‘‘कहीं गरमी की वजह से तो ऐसा नहीं हो रहा?’’

‘‘जो कुछ भी हो, अब मैं कमरे पर जा कर आराम करना चाहता हूं.’’ संदीप ने कहा.

इस के बाद उमा अपने घर चली गई तो संदीप कमरे पर आ गया. संदीप कमरे पर पहुंचा तो शिवम कमरे पर ही मौजूद था. उस ने उसे डांटते हुए पूछा, ‘‘कहां था तू? तुझे पता था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है.’’

‘‘एक दोस्त से मिलने चला गया था.’’ शिवम ने कहा.

संदीप कुछ और कहता, उस के छोटे बहनोई कमल सिंह का फोन आ गया. उस ने बहनोई को बताया कि इस समय वह आगरा में शिवम के कमरे पर है. लेकिन उस की तबीयत ठीक नहीं है. ऐसा कोल्डड्रिंक पीने से हुआ है.

कमल सिंह ने उसे ग्लूकोन डी या नींबूपानी पीने की सलाह दी. शिवम तुरंत ग्लूकोन डी ले आया और पानी में घोल कर संदीप को पिला दिया. ग्लूकोन डी पीने के बाद संदीप की तबीयत ठीक होने की कौन कहे, वह बेहोश हो गया.

इस के बाद शिवम ने संदीप का ही नहीं, अपना फोन भी बंद कर दिया. वह बाजार गया और 2 नए ट्रौली बैग खरीद कर ले आया. ये बैग उस ने संदीप के पर्स से पैसे निकाल कर विशाल मेगामार्ट से खरीदे थे. चाकू उस ने पहले ही 2 सौ रुपए में खरीद कर रख लिया था. उस ने संदीप की कोल्डड्रिंक में भी नशीली दवा मिलाई थी और ग्लूकोन डी में भी. इसीलिए वह ग्लूकोन डी पीते ही बेहोश हो गया था. सारी तैयारी कर के पहले तो शिवम ने ईंट से संदीप के सिर पर वार किए, उस के बाद चाकू से उस का सिर धड़ से काट कर अलग कर दिया.

सिर को वह एक पौलीथिन में डाल कर बोदला रेलवे ट्रैक के पास की झाडि़यों में फेंक आया. इस के बाद धड़ से पैरों को अलग किया और ट्रौली बैग में भर कर बोदला रेलवे ट्रैक के पास तालाब में फेंक आया. चाकू भी उस ने उसी तालाब में फेंक दिया था.

वापस आ कर पहले उस ने कमरे का खून साफ किया, उस के बाद फिनायल से धोया. गद्दे में खून लगा था. उसे ठिकाने लगाने के लिए उस ने मकान मालिक से कहा कि उस के गद्दे में चूहा मर गया है, इसलिए वह उसे जलाने जा रहा है. इस के बाद पड़ोस के खाली पड़े प्लौट में गद्दे को ले जा कर जला दिया. इतना सब कर के वह निश्चिंत हो गया कि अब उस का कोई कुछ नहीं कर सकता.

लेकिन जिस तरह हर अपराधी कोई न कोई गलती कर के पकड़ा जाता है, उसी तरह शिवम भी कैलाश के फोन से आशीष को फोन करके पकड़ा गया. संदीप अब इस दुनिया में नहीं है, यह जान कर घर में कोहराम मच गया. पता चला कि थाना सिकंदरा द्वारा बरामद की गई लाश संदीप की ही थी. पुलिस को वह पौलीथिन तो मिल गई थी, जिस में संदीप का सिर रख कर फेंका गया था, लेकिन सिर नहीं मिला था. धड़ और पैर तालाब से बरामद हो गए थे.

पुलिस ने पोस्टमार्टम करा कर धड़ और पैर घर वालों को सौंप दिए थे. संदीप की मौत से पूरा गांव दुखी था, क्योंकि वह गांव का होनहार लड़का था. मंजू के लिए परेशानी यह है कि अब तक भाइयों से रिश्ता निभाए या बेटे की पैरवी करे. बड़े भाई विजय ने तो साफ कह दिया है कि वह बेटे की हो कर रहे या उन लोगों की. क्योंकि दोनों की हो कर वह नहीं रह सकती.

पूछताछ के बाद पुलिस ने शिवम को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. शिवम ने मामा की हत्या कर उस थाली में छेद किया है, जिस में खा कर वह इतना बड़ा हुआ है. ऐसे आदमी को जो भी सजा मिले, वह कम ही होगी.

मैं अपना नाजायज संबंध खत्म करना चाहता हूं, मैं क्या करूं?

सवाल 

मैं एक 23 साल का नौजवान हूं. 2 साल पहले मेरी शादी हो चुकी है. लेकिन मैं पिछले 4 साल से एक शादीशुदा औरत से प्यार करता हूं. हमारा कई बार जिस्मानी रिश्ता भी बन चुका है, पर अब मैं उस औरत से दूर रहना चाहता हूं. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

दरअसल, आप नाजायज संबंधों के दलदल में फंस गए?हैं जिन से निकल पाना आसान काम नहीं होता. आप का जी भले ही उस औरत से?भर चुका हो लेकिन उस का जी शायद ही कभी भरे. यह तो आप भी समझ गए होंगे कि इस तरह चोरीछिपे बनाए संबंधों में एक अलग ही मजा आता है. आप अब क्यों उस औरत से दूर होना चाहते हैं? अब जब तक हो, जो चल रहा हो, उसे चलने दें और धीरेधीरे उस औरत से दूरी बनाएं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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