किन तरीकों से बोरिंग सेक्स लाइफ को बनाएं मजेदार

सुखी जीवन का सेक्स अभिन्न अंग है. अगर पार्टनर के साथ सेक्स के में मजा नहीं आता तो जाहिर है की आप की सेक्स लाइफ एक ही ढर्रे पर चलती आ रही है. इस लिए जरुरी हो जाता है की सेक्स लाइफ को मजेदार बनाने के लिए सेक्स के नए तरीकों को समय-समय पर अपनाते रहें. सेक्स के ऐसे ही मजेदार तरीकों में शामिल है किंक सेक्स. यह सेक्स का ऐसा तरीका है जिसे अजमा कर न केवल सेक्स के चरम सुख की प्राप्ति की जा सकती है बल्कि सेक्स के दौरान रोमांच भी कई गुना बढ़ जाता है.

किंक सेक्स उन जोड़ों के लिए ज्यादा मजेदार साबित हो सकता है जो वर्षों से ही ढर्रे पर सेक्स करते- करते ऊब चुके है. इस तरह के सेक्स में सेक्स के दौरान नाजुक अंगों को काटना,चाटना हल्का थप्पड़ मारना , दबाना आदि शामिल है. हाल के वर्षों में देश के कई बड़े शहरों में किंक सेक्स को लेकर लोगों में रूचि बढ़ रही है. किंक सेक्स में रूचि रखने वालों में महिला और पुरुष दोनों शामिल है. कुछ शहरों में तो किंक सेक्स की चाहत रखने वाले लोगों ने बाकायदा अपनी कम्युनिटी बना रखी है. जो अक्सर सप्ताह के तय समय को एक जगह मिलते है. इन्हें बीडीएसएम कम्युनिटी के नाम से जाना जाता है.

बीडीएसएम का मतलब होता है बाँडेज यानी बाँध कर डोमिनेंस यानी पार्टनर पर हावी होकर सैडिजम यानी पार्टनर को तकलीफ देकर खुश होना, मैसकिजम यानी दूसरे को पीड़ा पहुँचाना. सेक्स के दौरान यह सब ऐसे किया जाता है की पार्टनर को किसी तरह का शारीरिक नुकसान नहीं होता है बल्कि सेक्स का मजा कई गुना बढ जाता है.

कैसे करें शुरुआत

कई लोगों के लिए किंक सेक्स शब्द ही नया हो सकता है. ऐसे में इस तरह के सेक्स तरीकों को अजमाने से पहले इसके बारे में जान लेना बेहतर होगा. वैसे किंक सेक्स के शौकीन लोगों के अनुसार किंक सेक्स संतुष्टि पाने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका है. जिसको अजमाने से सेक्स का मजा कई गुना बढ़ जाता है. इसमें फैंटेसी शामिल होता है. सेक्स में किंक तरीकों अजमाने से पहले पार्टनर की सहमति जरुरी है. साथ ही एक सीमारेखा भी तय किया जाना जरुरी हो जाता है. इससे सेक्स को लेकर आप के कल्पनाओं को पर लग जातें हैं.

आप किंक सेक्स का मजा लेने के लिए शुरुआत पार्टनर की आँखों पर पट्टी बाँध करके कर सकते हैं, या कमरे के अँधेरे कोनों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इसके बाद पार्टनर के नाजुक अंगों के साथ छेड़-छाड़ के साथ हल्के में काटना या नोचना शुरू कर सकते हैं. आखिर वह सेक्स ही क्या जिसमें मीठा दर्द न हों और मजा ना आये. आप पार्टनर को बेड पर बाँध सकते है. अलग-अलग पोजीशन का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें कई तरह के एनीमल पोजीशन भी शामिल किये जा सकते हैं. और ध्यान रखें इन सबके पहले अपने बेडरूम को हल्के परफ्यूम की खुशबू से सरोबार करना न भूलें. साथ ही बेडरूम की लाइट का ख्याल जरुर रखें. किंक सेक्स के दौरान बेडरूम की लाइट हल्की नीली, पीली और गाढ़ी लाल होना सेक्स का मजा और बढ़ा देता है.

किंक सेक्स के दौरान आप पूरी तरह से बोल्ड हो जाएँ। हल्की मीठी आवाजें निकालें, सिसकारियों से अपने पार्टनर को मदहोस कर दें. जिससे आप का पार्टनर पूरी तरह से आप के ऊपर हावी होने की कोशिस करेगा. ड्रेस तो ऐसा पहनें की आप का साथी देखते ही आप पर रीझ जाएँ. कभी भी सेक्स की शुरुआत जल्दबाजी में न करें इसकी शुरुआत जितनी धीमी होगी मजा उतना ही ज्यादा आयेगा.

दर्द ऐसा दें जिसमें मजा आये-किंक सेक्स के दौरान काटना, नोचना, हथकड़ी लगाना, हल्के चाबुक का इस्तेमाल करना आम बात हो सकती है. लेकिन इन सब तरीकों का इस्तेमाल वही तक सही है जहाँ तक यह सेक्स के दौरान मजे लेने का एहसास कराये. किंक सेक्स के दौरान कभी इतना आगे न निकल जाएँ आप का पार्टनर दर्द से तड़पने या चिल्लाने लगे. इससे हो सकता है आप को मजा आये लेकिन सामने वाले के नाजुक अंगो के साथ शरीर को नुकसान पहुँच सकता है.

सेक्स प्ले के दौरान यह ख्याल रखें की अत्यधिक उत्तेजना में कहीं आप ऐसा ना काट लें की आप के साथी को किसी तरह का जख्म हो जाए या ऐसे बांधने का ख्याल भी मन में न लायें जिसमें पार्टनर को चोट लगने का डर हो. किंक सेक्स के तरीकों इस्तेमाल जरुर करें लेकिन उसमें प्यार शामिल हो.

गंदगी से रहें दूर

कई बार हम किंक सेक्स के दौरान इतना आगे निकल जाते हैं की सेक्स के दौरान घृणा आने वाली हरकतें भी करने की कोशिश करने लगते है. इससे कई बार सामने वाले पार्टनर का मूड खराब हो सकता है. पार्टनर को उबकाई आ सकती है. पार्टनर का सेक्स से मन ऊब सकता है. कई बार गंदा सेक्स कई तरह की गम्भीर बिमारियों का कारण बन जाता है. ऐसे में किंक सेक्स का तरीका अजमाने से पहले यह जरुर तय कर लें की किंक सेक्स में आपका पार्टनर किन तरीकों को अपनाना ज्यादा पसंद करता है.

अगर आप ऐसा करते हैं तो आप का और आपके साथी का मजा सेक्स के दौरान बढ़ जाएगा. अगर आप भी सेक्स के एक ही ढर्रे से ऊब चुकें है तो किंकी तरीकों को अजमा सकते हैं. बस आप के लिए ध्यान रखने वाली बात यह होगी की इसमें दर्द न शामिल हो बल्कि मजा शामिल हो. इसके लिए आप बताये गए सेफ्टी के तरीकों को अजमा सकते हैं.

जानिए क्या होता है फोबिया और उसके प्रकार

भय किसी वास्तविक या आभासी खतरे की एक मानसिक प्रतिक्रिया है. लोगों में भय होना आम बात है और यह अकसर सामान्य ही होता है यानी किसी वस्तु या घटना को देख कर उपजी इस स्थिति में कोई नुकसान नहीं होता. मसलन, कई लोग मकड़ी को देख कर डर जाते हैं, इसे देख कर उन में हलकीफुलकी उत्तेजना का अनुभव होता है.

फोबिया यानी खौफ वाकई एक भयंकर डर है लेकिन भय और फोबिया के बीच अंतर को महज इस की तीव्रता से नहीं आंका जा सकता. फोबिया किसी व्यक्ति की मानसिकता पर इतना गहरा असर डालता है कि बहुत कम समय के लिए उस का मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है. यह एक बेवजह का तात्कालिक भय है.

भय सामान्य होता है और असल में यह हमारे रक्षातंत्र का ही एक हिस्सा होता है. कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन से हमें डर लगता है, इसलिए हम भाग खड़े होते हैं या ऐसे हालात की अनदेखी कर देते हैं. मसलन, किसी वास्तविक खतरे को देख कर भय का एहसास होना लाजिमी है. यदि कोई व्यक्ति आप के ऊपर बंदूक तान दे तो जाहिर है कि आप डर जाएंगे. लेकिन इस भय का आलम उतना खौफनाक नहीं होता. यदि हम वाकई किसी खतरे का एहसास करते हैं तो भय होना स्वाभाविक है.

लेकिन फोबिया की स्थिति में भय का स्तर खौफनाक होता है, इसलिए इस की तीव्रता अतार्किक होती है. यह फोबिया वास्तविक खतरे पर आधारित नहीं होता, इसलिए इस के प्रति इतनी जबरदस्त प्रतिक्रिया व्यक्त करने का कोई वास्तविक आधार नहीं होता.

फोबिया के प्रकार

फोबिया को 3 प्रकार से बांटा जा सकता है – सोशल फोबिया, स्पेसिफिक फोबिया, एगोराफोबिया.

सोशल फोबिया

सोशल फोबिया के दौरान पीडि़त कुछ हालात से डरने लगता है. वह उन सामाजिक कार्यों को नजरअंदाज करता है और कभीकभी ऐसे हालात में उसे शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है.

इस में पीडि़त को हमेशा ऐसा लगता है कि लोग उस के बारे में बुरा सोचते हैं और उसे बहुत बुरा समझते हैं. लोग उस के पीठपीछे उस की बुराइयां करते रहते हैं. उस के ऊपर हंसते हैं. पीडि़त खुद को बहुत निम्न समझने लगता है. उस का आत्मविश्वास खो जाता है. किसी भी इंटरव्यू या फिर पब्लिक मीटिंग में वह बोल भी नहीं पाता है. उसे वहां खड़े होने में भी लड़खड़ाहट होने लगती है. हालांकि पीडि़त को यह पता होता है कि यह डर बेबुनियाद है लेकिन तब भी बेचैनी और घबराहट उस का पीछा नहीं छोड़ती है.

पीडि़त को किसी से बात करने और मिलने में भी डर लगता है. अगर वह किसी से बात कर ले तो उस के दिमाग में यही चलता रहता है कि अब तो लोग उस का मजाक उड़ाएंगे और दूसरों के साथ उस की तुलना करेंगे. बढ़तेबढ़ते हालात यहां तक पहुंच जाते हैं कि पीडि़त किसी शादीब्याह, मीटिंग या इंटरव्यू में जाना ही नहीं चाहता. ऐसे कार्यों को वह नजरअंदाज करने लगता है, जैसे नए लोगों से मिलना, सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करना, कक्षा में अपना नाम बुलाए जाने पर, डेट पर जाना, किसी को फोन करना, औफिस में सब के सामने चुप रहना, अपनी बात को भी सब के सामने व्यक्त न कर पाना आदि.

स्पेसिफिक फोबिया

स्पेसिफिक फोबिया में किसी खास वस्तु या व्यक्ति या हालात से डर लगता है. ऐसे में व्यक्ति कभीकभी जरूरत से ज्यादा खुश भी हो सकता है या अधिक दुखी भी.

यह एक ऐसा साधारण डर होता है जोकि किसी निर्धारित वस्तु या फिर हालात को देख कर पैदा होता है. जैसे ही पीडि़त उन हालात के बारे में सोचता है, परेशान सा होने लगता है. उसे अत्यंत घबराहट होने लगती है. इन हालात में पीडि़त काम भी नहीं कर पाता है. उस की कार्यशैली प्रभावित होने लगती है. कुछ विशिष्ट प्रकार के फोबिया ये हैं :

एनिमल फोबिया : जानवरों से लगने वाला डर यानी कुछ लोगों को कुत्तों, बिल्लियों, सांप, कीड़ेमकोड़ों आदि से बेहद डर लगता है.

सिचुएशनल फोबिया : कुछ खास हालात जैसे उड़ना, घुड़सवारी करना, गाड़ी चलाना, किसी एक जगह पर अकेले हो जाना आदि कुछ लोगों को भयभीत कर देता है.

नैचुरल एनवायरमैंट फोबिया : पानी, तूफान, ऊंचाई आदि से डरना.

ब्लड, इंजैक्शन, चोट आदि से फोबिया : कई लोगों को खून देनालेना, अपना या किसी का खून निकलते हुए देख लेने से भी चक्कर आ जाते हैं. इंजैक्शन देख कर ही उन के पसीने छूट जाते हैं.

एगोराफोबिया

एगोराफोबिया में पीडि़त को भीड़ में भी अकेलेपन का एहसास होता है. वह किसी भी सुपरमार्केट में अकेला महसूस करने लगता है और यह एहसास व्यक्ति को बेहद कचोटने लगता है. इस स्थिति को एगोराफोबिया कहते हैं. यह भयाक्रांत हुए मरीजों में से एकतिहाई को प्रभावित करता है.

कभीकभी एगोराफोबिया से ग्रस्त मरीज अकेला घर से बाहर नहीं निकल पाता और परिवार के किसी खास सदस्य या मित्र के साथ ही कहीं जाता है. अपनेआप को सुरक्षित क्षेत्र में कैद कर लेने के बावजूद एगोराफोबिया से पीडि़त बहुत से लोगों को कई बार दौरा पड़ ही जाता है.

एगोराफोबिया से ग्रस्त मरीज अपनी स्थिति के चलते गंभीर रूप से पंगु बन जाते हैं. कुछ मरीज अपना काम नहीं कर पाते और अपने परिवार के दूसरे सदस्यों पर पूरी तरह से आश्रित होने पर मजबूर हो सकते हैं जो उन के लिए न सिर्फ खरीदारी करते हैं और उन की पारिवारिक समस्याओं को न समझते हैं बल्कि उस के द्वारा बनाए गए सुरक्षित क्षेत्र से बाहर भी उस के साथ जाते हैं. इस तरह एगोराफोबिया से ग्रस्त व्यक्ति परजीवी हो जाता है और बड़ी ही परेशानी में अपना जीवनयापन करता है.

फोबिया के कारण

शोधकर्ता अभी फोबिया के सही कारणों के बारे में आश्वस्त नहीं हैं. हालांकि आम धारणा यही है कि जब कोई फोबिया होता है तो कुछ खास प्रकार के कारकों की समानता देखी जा सकती है. इन कारकों में शामिल हैं :

आनुवंशिक : शोध से पता चला है कि परिवार में किसी खास प्रकार का फोबिया होता है. मसलन, अलगअलग जगह पलेबढ़े बच्चों में एक ही प्रकार का फोबिया हो सकता है. हालांकि एक प्रकार के फोबिया वाले कई लोगों की परिस्थितियों का आपस में कोई संबंध नहीं होता.

सांस्कृतिक कारक : कुछ फोबिया किसी खास प्रकार के सांस्कृतिक समूहों में ही पाए जाते हैं. यह एक ऐसा भय है जिस में लोग सामाजिक परिस्थितियों के कारण दूसरों पर हमला करते हैं या उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं. यह परंपरागत सोशल फोबिया से बिलकुल अलग होता है क्योंकि सोशल फोबिया में पीडि़त व्यक्ति अपमानित होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी झेलने की आशंका से ग्रसित रहता है. सो संभव है कि फोबिया विकसित करने में संस्कृति की भूमिका हो.

जिंदगी के अनुभव : कई प्रकार के फोबिया वास्तविक जिंदगी की घटनाओं से जुड़े होते हैं जिन्हें होशोहवास में याद किया भी जा सकता है और नहीं भी. मसलन, किसी कुत्ते का फोबिया, यह व्यक्ति को उसी वक्त से हो सकता है जब बहुत छोटी उम्र में वह कुत्ते का हमला झेल चुका हो. सोशल फोबिया नाबालिग उम्र के अल्हड़पन या बचपन की शैतानी से विकसित हो सकता है.

हो सकता है कि इन कारकों का एक मिश्रित रूप किसी फोबिया के विकसित होने का कारण बना हो लेकिन निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अभी और ज्यादा शोध की आवश्यकता है. किसी व्यक्ति में कोई फोबिया बचपन से ही होता है या किसी को बाद की उम्र में पनप सकता है. कोई भी फोबिया बचपन, जवानी या किशोरावस्था के दौरान विकसित हो सकता है. फोबिया से ग्रस्त लोगों का ताल्लुक अकसर किसी डरावनी घटना या तनावपूर्ण माहौल से रहा है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कुछ खास प्रकार के फोबिया क्यों विकसित होते हैं.

फोबिया के इलाज

फोबिया से पीडि़त व्यक्ति की सोच में बदलाव लाने में मदद करते हुए उन के फोबिक लक्षणों को कौग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी यानी सीबीटी से कमी लाने में बहुत हद तक सफलता मिली है. यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सीबीटी का इस्तेमाल 3 तकनीकों से किया जाता है :

शिक्षाप्रद सामग्री : इस चरण में व्यक्ति को फोबिया व इस के इलाज के बारे में शिक्षित किया जाता है और उसे उपचार के लिए सकारात्मक उम्मीद बनाए रखने में मदद की जाती है. इस के अलावा फोबिया से पीडि़त व्यक्ति को सहयोग देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है.

संज्ञानात्मक अवयव : इस से विचारों तथा कल्पनाओं की पहचान करने में मदद मिलती है, जिस से व्यक्ति का बरताव प्रभावित होता है, खासकर ऐसे लोगों का जो पहले से ही खुद को फोबियाग्रस्त होने की धारणा पाल बैठते हैं.

व्यावहारिक अवयव : इस के तहत फोबियाग्रस्त व्यक्ति को समस्याओं से अधिक प्रभावी रणनीतियों के साथ निबटने की शिक्षा देने के लिए व्यवहार संशोधन तकनीक इस्तेमाल की जाती है.

फोबिया कई बार अवसादरोधी या उत्तेजनारोधी उपचार से भी ठीक किया जाता है, जिस से प्रतिकूल स्थिति पैदा करने वाले शारीरिक लक्षणों में कमी लाई जाती है और शरीर में उत्तेजना का प्रभाव अवरुद्ध किया जाता है.

 

सुष्मिता सेन की ‘ताली’ के पोस्टर पर लोगों ने किए भद्दे कमेंट, एक्ट्रेस ने किया ये काम

एक्ट्रेस सुष्मिता सेन लंबे समय से पर्दे से दूर रही है लेकिन कई समय से वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर छाई हुई है जिससे लेकर वो अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है. उनकी ओटीटी फिल्म आर्य को लोगों ने खूब स्पोर्ट किया, लेकिन इन दिनों एक्ट्रेस अपनी आने वाली सीरीज ताली को लेकर खबरों में है जिसका पोस्टर सबके सामने आ चुका है. जिससे लेकर लोगों ने नेगेटिव कमेंट किया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by JioCinema (@officialjiocinema)

आपको बता दें, कि सुष्मिता सेन की ताली 15 अगस्त को जियो सिनेमा पर रीलिज होगी. एक इंटरव्यू में उन्होने बताया कि ताली के पोस्टर को देख लोग कैसे कमेंट कर रहे है जिसकी वजह से उन्हे कई लोगों को ब्लॉक कर दिया. सुष्मिता सेन ने कहा कि उनके चारों तरफ नेगेटिविटी फैली हुई है. Taali से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट्स पर बिना असल नाम के लोग कमेंट सेक्शन में ‘छक्का’ कहकर जाते हैं. एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने ये सब बहुत पर्सनली लिया क्योंकि ये सब उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर हो रहा था. इसलिए उन्होंने ट्रोल करने वाले सभी लोगों को ब्लॉक कर दिया.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Sushmita Sen (@sushmitasen47)

सुष्मिता सेन ने कहा कि जब वो गौरी सावंत के किरदार को निभाकर ये सब बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं, उनकी लाइफ को निभाने पर उन्हें काफी कुछ कहा जा रहा है, तो खुद गौरी को रियल लाइफ में कितना कुछ झेलना पड़ता होगा. वो तो इन पलों को अपनी लाइफ के साथ जी रही हैं.

‘सिंगल रहना पसंद है’ सुष्मिता सेन

सुष्मिता सेन को हालांकि ये पहली बार ट्रोलिंग का सामना नहीं करना पड़ा. जब ललित मोदी के साथ उनके रिश्ते की बातें हुई थीं, तब भी लोगों ने काफी कुछ कहा था. इतना ही नहीं, उनको गोल्ड डिगर तक कह दिया गया था.एक इंटरव्यू में कहा था, ‘बेइज्जती तब होती है, जब आप लेते हो. मैंने तो कभी ली ही नहीं. तो ये उल्टे पैर लोट गई. कई सारी चीजें ऐसी होती हैं, जिनका मतलब किसी से नहीं होता है. मैं फिलहाल सिंगल हूं और इससे किसी को कोई मतलब नहीं होना चाहिए.’

BB OTT2: बिग बॉस को मिले टॉप 6 कंटेस्टेंट, दो कंटेस्टेंट हुए घर से बेघर

बिग बॉस इन दिनों शो के फिनाले में पहुंचने वाला है लेकिन उससे पहले शो में कई धमाकेदार चीजे हो रही है शो में कभी मस्ती तो, तो कभी शॉकिंग एविक्शन हो रहा है अब बीते एपिसोड में देखने को मिला कि सलमान खान ने अभिषेक मल्हान को जमकर फटकार लगाई थी. साथ ही एल्विश यादव के साथ उनकी दोस्ती में फूट भी डाल दी थी. वही पूजा भट्ट इमोशनल नजर आई. जिसका कारण उन्होने अभिषेक को बताया. हालांकि वीकेंड के वार का माहौल थोड़ा अलग रहा. घऱ में ढेर सारे महमान आए तो, दो एलिमिनेशन हुए.

आपको बता दे, कि बिग बॉस को फिनाले 14 अगस्त को होगा. लेकिन इससे पहले सलमान खान ने सभी घऱ वालों से मजेदार सवाल किए. उन्होने कई से पूछा कि जितने पर क्या स्पीच दोंगे, तो कई से पूछा की हारने पर कैसा महसूस करेंगे, सभी ने इस पर अपने तरीकों से जवाब दिए. इसके बाद सलमान खान ने सबसे टास्क कराया जो कि फ्रेंडशिप डे को लेकर था. इस टास्ट मे घरवालों को बताना था कि कौन किस घर वाले से मिलना नहीं चाहते है, उस शख्स की फोटो निकाल कर फोटो शेडर में नष्ट करनी है.

घर से बाहर हुए ये कंटेस्टेंट

शो में आगे रैपर रफ्तार उनकी स्टारकास्ट टीम आई जिसमें माहिरा शर्मा भी साथ आई. जहा सभी पंहुचकर घर वालों के साथ टास्ट करते है जिसमें एक-दूसरे को थप्पड़ मारने होते है. इस शो में खास बात थी कि घर से कौन बेघर होगा. तो ये जानना सबके लिए हैरान कर देने वाला था. सलमान खान ने जद हदीद और अविनाश को घर से बेघर कर दिया. पहल तो घर वालों से पूछा गया कि कौन निकलेगा तो सबने जद हदीद को नाम लिया, इसके बाद सलमान ने एविक्शन किया.

नेहा कक्कड़ की हुई एंट्री

नेहा कक्कड़ की भी एंट्री हुई. उन्होंने बताया कि उनके तीन फेवरेट कंटेस्टेंट हैं- एल्विश, अभिषेक और मनीषा. इसके बाद वो घर में जाती हैं और टास्क करवाती हैं. यहां वो घरवालों को अवॉर्ड देती हैं.पूजा भट्ट को ज्ञान गर्ल अवॉर्ड मिलता है. इसके बाद एल्विश यादव को मिला लोलबाज (Lolbaaz) अवॉर्ड। इसके बाद रोमांटिक रानी का अवॉर्ड मनीषा रानी को मिला. इसके बाद बेबिका को बोटी-बोटी अवॉर्ड मिला. फिर अभिषेक मल्हान को Know It All Insaan अवॉर्ड मिला. वहीं, जिया शंकर को Say Cheese अवॉर्ड मिला. इसके बाद बीबी वर्स को एक्टिवेट किया गया. दो-दो का जोड़ा बनाया गया और उनकी आंख पर पट्टी बांधी गई. इस दौरान उन्हें कुछ खाने को दिया गया, जिसके बाद 15 सेकेंड में वो चखकर बताना था कि वो क्या था. पहली जोड़ी एल्विश और अभिषेक की बनाई गई.इसमें अभिषेक ने पता लगा लिया कि क्या डिश थी लेकिन एल्विश असफल रहे. फिर जिया और मनीषा को बुलाया गया। और ये दोनों भी असफल रहीं. इसके बाद पूजा और बेबिका आते हैं और वो भी इस टास्क को पूरा नहीं कर पाते. बावजूद इसके नेहा सभी को खाने की चीजें देकर जाती हैं क्योंकि आखिरी 7 दिन बचे हैं.

 

फिल्म रिव्यू : लोमड़ – औरोशिखा डे व हेमवंत तिवारी का जानदार अभिनय

  • रेटिंग: पांच में से तीन स्टार
  • निर्माता: हेमवंत तिवारी
  • लेखक निर्देशक: हेमवंत तिवारी
  • कलाकार:हेमवंत तिवारी,औरोशिखा डे,परमिल आलोक, नवनीत शर्मा,रोशन सजवान,मेाहित कुलश्रेष्ठ,शिल्पा शभलोक तीर्था मुरबाडकर
  • अवधि: एक घंटा 37 मिनट

 

इन दिनों भारतीय सिनेमा काफी कठिन दौर से गुजर रहा है.फिल्में सिनेमाघरों में सफलता दर्ज नही करा पा रही है.ऐसे ही दौर में  हौलीवुड कलाकार एरिक रॉबर्ट्स और नताशा हेनस्ट्रिज के साथ इंटरनेशनल वेब सीरीज ‘‘मदीनाह’’ में अभिनय कर चुके अभिनेता हेमवंत तिवारी बतौर लेखक व निर्देशक विश्व की पहली ‘‘वन शौट ब्लैक एंड व्हाइट’’ फिल्म ‘‘लोमड़’’ लेकर आए हैं.यानी कि यह फिल्म बिना रूके लगातार शूटिंग करते हुए एक घंटे 37 मिनट में ही फिल्मायी गयी है.इसमें एडीटिंग नही हुई है.रोमांचक क्राइम फिल्म ‘‘लोमड़’’ चार अगस्त को सिनेमाघरों में पहुॅच चुकी है.

 

कहानीः

अभय तिवारी (हेमवंत तिवारी) एक अच्छा युवक है.उसकी अपनी गार्मेंट फैक्टरी है.उसे याद है कि भ्रष्ट,कुख्यात और एक मंत्री  की शह पर किसी की भी हत्याएं करने वाले पुलिसकर्मी (परिमल आलोक) ने ही छह साल पहले उसके पिता की हत्या की थी,जिसके सदमें से उसकी मां पैरलाइज है.अभय की पत्नी नैना, बेटी शताक्षी व बेटा पृथ्वी है.अभय का स्कूल दिनों में रिया  (औरोशिका डे) संग इश्क था.मगर बाद में रिया को मजबूरन अपनी उम्र से दस साल बड़े रोनित से विवाह करना पड़ा.अब दस साल बाद सोशल मीडिया के माध्यम से आकाश व रिया मिले हैं तथा वह दोनों नैना को सरप्राइज देने जा रहे हैं.पर अचानक सुनसान जंगल की सड़क पर उनकी कार खराब हो जाती है.कुछ देर में स्कूटर से उसी सड़क से गुजर रहे राहुल ( मोहित कुलश्रेष्ठ) नामक युवक का एक्सीडेंट हो जाता है.रिया की इच्छा के विपरीत जाकर अभय उस युवक को बचाने की कोशिश करता है.इसके लिए वह रिया के साथ खुद को मुसीबत में डालने के लिए भी तैयार है.इतना ही नही उसी वक्त वहां पहुॅचे भ्रष्ट और कुख्यात पुलिसकर्मी (परिमल आलोक) को भी नुकसान पहुंचाने से इनकार कर देता है.उधर रिया हर स्थिति में खुद को पहले स्थान पर रखती है.रिया, अभय के साथ पकड़े जाने से बचने के लिए किसी मरते हुए आदमी को सड़क के  किनारे छोड़ने या किसी की हत्या करने से नहीं हिचकिचाती. यही बात अभय की पत्नी नैना (तीर्था मुरबादकर) पर भी लागू होती है, जिसका क्षमाप्रार्थी और विनम्र व्यवहार तब गायब हो जाता है,जब वह खुद को दोषी महसूस करती है, भले ही वह गलती हो.वास्तव में राहुल,नैना का प्रेमी है.यानी कि नैना अपने पति अभय को धोखा देते हुए राहुल संग रंगरेलियंा मना रही थी.अभय के अंदर का अजनबी इंसान जागता है.फिर कहानी में कई घटनाक्रम बड़ी तेजी से बदलते हैं.

 

लेखन निर्देशनः

रंगीन फिल्मों के जमाने में फिल्मकार हेमवंत तिवारी श्वेत श्याम फिल्म लेकर आए हैं,पर यह ‘वन शाॅट श्वेत श्याम’ फिल्म है.विश्व में कुछ वन शाॅट फिल्में बनी हैं,पर वह सभी रंगीन बनी हैं.मगर हेमवंत ने श्वेत श्याम बनायी है. अपनी पटकथा के बल पर हेमवंत तिवारी इस बात को रेखांकित करने मंे सफल रहे हें.क हर इंसान के अंदर लोमड़ /लोमड़ी छिपा होता है,जो कि अजनबी जगह पर अनचाहे मोड़ पर बाहर आता है.यॅूं तो यह बेहतरीन रोमांचक कहानी है.मगर पटकथा में कुछ गड़बड़ी है,जिसके चलते कुछ दृश्य असंगत नजर आते हैं.फिल्म में उसी सुनसान जंगल के रास्ते से गुजरती गर्भवती महिला के दृश्य से फिल्म की कहानी में गतिरोध पैदा होता है.इसका कहानी से कोई संबंध नही है.इसे यदि न रखा गया होता तो फिल्म काफी कसी हुई होती.वैसे पूरी फिल्म देखने के बाद यह अहसास नही होता कि इसे पहली बार निर्देशक बने निर्देशक ने निर्देशित किया है और वह भी वन शाॅट फिल्म को.कुछ दृश्यों को बेवजह रबर की तरह खींचा गया है.शायद वन शाॅट फिल्म होने के चलते व ख्ुाद अभिनय भी करने के चलते निर्देशक बीच में कट नही कर सके.और फिल्म की प्रकृति के चलते इसे एडीटिंग टेबल पर ले जाना नहीं था.फिल्मकार ने कहानी को वर्तमान से एक वर्ष बाद मंे ले जाते समय जिस खूबसूरती से इसे चित्रित किया है,उससे उनकी लेखन व निर्देशकीय काबीलियत उभर कर आती है.हर मिनट कहानी में अतीत के खुलने से जो रहस्यमयता व रोमांच बढ़ता है,वह संुदर लेखन का परिचायक है.बीच बीच में दो तीन जगह दृश्य धीमी गति से चलते हैं,जो कि आवश्यक है.इन दृश्यों को ‘48 फ्रेंम प्रति सेकंड’ पर रखा गया है.अन्यथा पूरी फिल्म ‘24 फ्रेम प्रति सेकंड’ पर है.यह तकनीक पहली बार अपनायी गयी है.निर्देशक ने इस बारे में बताया कि यह पहली बार हुआ है,जब किसी फिल्म को नई तकनीक अपनाते हुए ‘24 फ्रेम प्रति सेकंड ’ की बजाय ‘48 फ्रेम प्रति सेकंड’ में फिल्माने के फिल्म के कुछ दृश्यों को छोड़कर पूरी फिल्म को ‘‘24 फ्रेम प्रति सेकंड’ में बदला है.

फिल्मकार हेमवंत तिवारी के साथ ही कैमरामैन सुप्रतिम भोल ने अपनी खास कलात्मक प्रतिभा के प्रदर्शन से फिल्म को रोचक,मनोरंजक व देखने योग्य बनाया है.

 

अभिनयः

एक असहाय व पीड़ित युवक,वफादार पति,दयालु पिता,उसूलो ंपर चलने वाले आकाश,जो रिया के अचानक गुस्से से भ्रमित हो जाता है,के किरदार को हेमवंत तिवारी अपने अभिनय से संवारने में सफल रहे हैं.अपने पति से खुश न होने के बावजूद अपनी शादी को बचाने के लिए फिक्र मंद रिया के किरदार में ‘‘द वाॅरियर क्वीन आफ झांसी’’सहित तीन इंटरनेशनल फिल्मों व कई सीरियलों में अपने अभिनय का परचम लहरा चुकी अभिनेत्री औरोशिखा डे जानदार अभिनय किया है.मंत्री की षह पर खुद को सर्वेसर्वा मानने वाले कुख्यात व भ्रष्ट पुलिस कर्मी के किरदार में परिमल आलोक अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं.मोहित कुलश्रेष्ठ, नवनीत शर्मा,रोशन सजवान और शिल्पा शभलोक के हिस्से करने को कुछ आया ही नहीं.अपने पति को धोखा देने वाली अभरय की पत्नी के छोटे किरदार में तीर्था मुरबाडकर अपने अभिनय की छाप छोड़ जाती हैं.

 

एक फोन के लिए जिगर का टुकड़ा बेच दिया

24 जून, 2010 को आई फोन 4 लौंच किया गया था. इस फोन का नई पीढ़ी पर इतना ज्यादा क्रेज हुआ था कि चीन के एक 17 साल के लड़के ने यह फोन खरीदने के लिए अपनी एक किडनी काला बाजार में बेच दी थी.

उस लड़के का नाम शिआओ वांग था और महज अपने दोस्तों पर रोब जमाने के लिए उस ने यह जानलेवा कांड कर दिया था. हद तो यह थी कि शिआओ वांग ने अपने आपरेशन के लिए एक ऐसा अस्पताल चुना था, जहां किडनी निकालने का काम गैरकानूनी तरीके से होता था और वहां साफसफाई का भी खयाल नहीं रखा जाता था.

इस से पहले सोशल मीडिया पर आई फोन खरीदने को ले कर किडनी बेचने के मीम्स तो खूब बनते थे, पर चीन के लड़के ने उसे सच साबित कर दिया. बाद में इस सब का अंजाम यह हुआ कि शिआओ वांग को लकवा मार गया और वह हमेशा के लिए अपाहिज हो गया.

अब चीन के पड़ोसी देश भारत की बात करते हैं. अब 2023 में आई फोन 14 लौंच हो चुका है. यकीनन यह आई फोन 4 से बहुत ज्यादा अच्छा होगा और इस के फीचर भी लेटैस्ट होंगे. कीमत के तो कहने ही क्या.

इस का एक फीचर है इस का कैमरा, जो सोशल मीडिया पर रील बनाने वालों को अपना दीवाना बना देता है. हम आप को एक ऐसे जोड़े से मिलवाते हैं, जिस ने यह फोन खरीदने के लिए इतनी ज्यादा घटिया हरकत कर दी कि इनसानियत भी शरमा जाए.

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक ऐसा मामला सामने आया, जिस में एक जोड़े ने कथित रूप से आईफोन खरीदने के लिए अपना 8 महीने का बच्चा 2 लाख रुपए में बेच दिया. उन दोनों पर यह भी आरोप है कि बच्चा बेचने के बाद पतिपत्नी ने मिल कर आईफोन तो खरीदा ही, बचे हुए पैसों से दीघा और मंदारमणि घूमने गए, जहां उन्होंने कथित रूप से ढेर सारी खरीदारी की और सोशल मीडिया के लिए रील बनाईं.

खबरों के मुताबिक, आरोपी पति जयदेव चौधरी और उस की पत्नी साथी चौधरी की माली हालत ठीक नहीं थी. रविवार, 23 जुलाई, 2023 को साथी चौधरी का अपने सासससुर से झगड़ा हो गया था, जिस के बाद पुलिस ने सासससुर को गिरफ्तार कर लिया था.

इसी बीच कुछ पड़ोसियों ने साथी चौधरी के हाथ में महंगा फोन देखा. उन्होंने यह भी ने गौर किया कि इस जोड़े का 8 महीने का बच्चा भी कई दिनों से नजर नहीं आ रहा है.

जब इस बारे में ज्यादा चर्चा होने लगी तो पुलिस ने साथी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, उस ने पुलिस के सामने कबूल किया कि दोनों पतिपत्नी ने बच्चे को बेचा. लेकिन इस की वजह हैरान करने वाली थी. आरोपी ने बताया कि उन्होंने इन पैसों से आईफोन खरीदा, कई इलाकों में घूमने गए और इंस्टाग्राम रील भी बनाईं.

अब आप सोच सकते हैं कि सोशल मीडिया पर रातोंरात स्टार बन जाने की लत कितनी ज्यादा खतरनाक हो गई है कि एक मां ने अपने 8 महीने के बच्चे को बेच डाला. यह कोई मैट्रो शहर की घटना नहीं है, जहां आई फोन रखना स्टेटस सिंबल है या जरूरत है, बल्कि एक अदना सी रील बनाने की खातिर कोई गांवदेहात का जोड़ा इतना घिनौना काम कर सकता है, यह बड़ा गंभीर मुद्दा है.

आज की तारीख में सोशल मीडिया बड़ा ताकतवर हथियार बन कर सामने आया है. पर यह एक ऐसी दोधारी तलवार है, जो खुद का बड़ा नुकसान कर सकती है. इस की लत हमें मानसिक रूप से बीमार कर सकती है. एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले अनिद्रा का शिकार हो रहे हैं, जो और दूसरी कई गंभीर बीमारियों की जड़ है.

सोशल मीडिया पर दूसरों की शानदार जिंदगी के बारे में देखसुन कर लोग हीन भावना का शिकार हो रहे हैं. उन्हें लगता कि सामने वाला कितना ज्यादा खुश है और हम किसी काम के नहीं. इसी वजह से बहुत से लोग अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं. औनलाइन ठगी इसी समस्या की उपज है, जबकि लोग भूल जाते हैं कि जो सोशल मीडिया पर दिख रहा है, वह पूरा सच नहीं है.

यहां लोग शिआओ वांग की तरह इस वर्चुअल दुनिया में इतने ज्यादा घुस जाते हैं कि एक मोबाइल फोन खरीदने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं और इनाम में उन्हें मिलती है एक अपाहिज जिंदगी जो उन्हें किसी काम का नहीं छोड़ती.

प्रेगनेंसी में सेक्स का आनंद उठाने के लिए ट्राय करें ये 6 टिप्स

पत्नी के प्रेगनेंट होते ही दोनों के मन में ये सवाल आने स्वाभाविक हैं कि क्या इस अवस्था में सेक्स करना ठीक है, क्या इससे गर्भस्थ शिशु को कोई हानि हो सकती है या गर्भवती स्त्री को कोई तकलीफ हो सकती है?

जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती जाती है महिला की शारीरिक परेशानी बढ़ने लगती है और सेक्स के सामान्य तरीके अपनाना इसलिए कठिन हो जाता है. प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला के उदर पर किसी प्रकार का दबाव उसके तथा भ्रूण दोनों के लिए कष्टदायी तथा नुकसानदेह हो सकता है.

वैसे छठे या सातवें माह तक की गर्भावस्था में सेक्स किया जा सकता है, लेकिन विशेष सावधानी के साथ. इसके लिए डौक्टर की सलाह पर विशेष प्रकार के आसन अपनाए जा सकते हैं.

गर्भावस्था में सेक्स के उपाय

पत्नी के गर्भावती होने का पता चलते ही प्रथम दो माह तक सम्बन्धों का त्याग करने का प्रयास करें. अन्तिम एक माह में भी सेक्स से दूर रहने का प्रयास करें. प्रसव के पश्चात् लगभग चार सप्ताह तो वैसे ही निकल जाते हैं. इसमें अधिकांश व्यक्ति सेक्स के प्रति इच्छुक भी नहीं रहता है.

  • गर्भ की स्थिति के प्रथम तथा अन्तिम सप्ताह में योनि प्रवेश से बचना चाहिए. हां सप्ताह में 2-3 बार शारीरिक छेड़छाड़ द्वारा आनन्द प्राप्त किया जा सकता है. ऐसे समय पत्नी अपनी हथेलियों द्वारा स्खलन में मदद कर सकती है. अनेक स्थितियों में व्यक्ति को इसमें शारीरिक सम्बन्धों जितना आनन्द प्राप्त हो जाता है. यहां इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्नी पर दबाव नहीं डालें. पति को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गर्भ के समय पत्नी के साथ ऐसा कोई व्यवहार नहीं करें जिससे उसके मन-मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ें.
  • लिंग प्रवेश पूरी तरह न करके सिर्फ आधा प्रवेश करें. कोहनियों को नीचे टिकायें और बहुत धीरे-धीरे घर्षण करें. शिश्न मुण्ड सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है. स्खलन में लिंग मुण्ड की संवेदनशीलता प्रमुख भूमिका निभाती है. इसलिए केवल शिश्न मुण्ड ही प्रवेश करके धीरे-धीरे घर्षण किये जायें तो भी व्यक्ति पूर्ण आनन्द प्राप्त कर सकता है. ध्यान रहे कि लिंग का पूरा प्रवेश नहीं होना चाहिए और न घर्षणों में तीव्रता होनी चाहिए. अपने शरीर का भार कोहनियों पर रखें. स्त्री शरीर पर बोझ नहीं पड़ना चाहिए.
  • गर्भावस्था के अन्तिम तीन महीनों मे स्थिति को थोड़ा बदलें. अभी भी लिंग का प्रवेश पूरा नहीं करना है. केवल शिश्न मुण्ड ही प्रवेश करायें. हथेलियों को नीचे टिकायें और हाथ एकदम सीधे रखें. ऐसा करने से आपका शरीर स्त्री शरीर से काफी ऊंचा रहेगा. इस अवस्था में गर्भ अपने समय की पूर्णता को प्राप्त कर रहा होता है. पेट का उभार काफी बढ़ जाता है, ऐसे में अपने शरीर जितना सम्भव हो, उतना दूर रखने का ही प्रयास करें. हथेलियां नीचे टिकाकर हाथों को एकदम सीधा करने से पुरुष का शरीर पर्याप्त रूप से ऊंचा उठा रहेगा. इस स्थिति में भूलकर भी लिंग को पूरी तरह से प्रविष्ठ नहीं करना है.
  • गर्भावस्था में करवट बदल कर भी सम्बन्ध बनाए जा सकते हैं. ऐसे में कुछ व्यक्तियों के साथ समस्या हो सकती है, लिंग प्रवेश में कठिनाई हो सकती है, फिर भी आधा अथवा केवल शिश्न मुण्ड का प्रवेश किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में पुरुष शरीर का भार स्त्री पर नहीं पड़ता है.
  • कुछ विद्वानों का मानना है कि लिंग प्रवेश से बचने के लिए उत्तेजित लिंग को योनि पर रगड़ने मात्र से भी स्खलन किया जा सकता है. स्त्री की वेजाइना को हाथों द्वारा सहलाकर उसे भी आनन्दित किया जा सकता है. विद्वानों का ऐसा भी मानना है कि गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाने का मुख्य उद्देश्य मात्र स्खलन होता है. यह स्खलन योनि पर रगड़कर किया जा सकता है. बहुत से व्यक्ति ऐसे समय में हस्तमैथुन को भी सहीं मानते हैं किन्तु विवाह के बाद हस्तमैथुन के लिए व्यक्ति तुरन्त तैयार नहीं हो पाता. खासकर उस समय तो बिल्कुल नहीं जब पत्नी उपस्थित हो.
  • इसके अलावा व्यक्ति यदि उचित समझे तो अपने चिकित्सक से राय ले सकता है. सम्भव है कि वह कुछ अन्य सही आसनों के बारे में राय दे सके अथवा व्यक्ति स्वयं अपनी सूझ-बूझ एवं विचार कर रास्ता निकाल सकता है.

एलईडी बल्ब का काला कारोबार

भले ही देश में लाइट एमिटिंग डियोड्स यानी एलईडी बल्ब का बाजार 10 हजार करोड़ रुपए से ऊपर चला गया है, लेकिन घीरेधीरे यह काले कारोबार में तबदील हो रहा है, जो निश्चितरूप से चिंता की बात है. मौजूदा समय में एलईडी बल्ब का बाजार नकली उत्पादों से भरा पड़ा है. कंपनियां इसे मुनाफा कमाने का एक बड़ा साधन मान कर चल रही हैं.

इलैक्ट्रिक लैंप ऐंड कंपोनैंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एलकोमा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2010 में एलईडी लाइटिंग का भारतीय बाजार महज 500 करोड़ रुपए का था, जो अब बढ़ कर 10 हजार करोड़  रुपए का हो गया है. यह 22 हजार करोड़ रुपए की पूरी लाइटिंग इंडस्ट्री का लगभग 45 प्रतिशत से भी ज्यादा है. दरअसल, एलईडी बल्ब में विद्युत ऊर्जा की कम खपत होती है और इस की रोशनी पारंपरिक बल्ब से ज्यादा होती है, फिर भी यह आंखों को नहीं चुभती है, जिस के कारण इस की लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है.

वैश्विक स्तर की ख्यातिप्राप्त एजेंसी नीलसन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि घरेलू बाजार में उलब्ध एलईडी बल्ब के 76 और एलईडी डाउनलाइटर के 71 प्रतिशत ब्रैंड सुरक्षामानकों के अनुकूल नहीं हैं. गौरतलब है कि ये मानक भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस और इलैक्ट्रौनिक्स एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय ने तैयार किए हैं. नीलसन ने अपने सर्वेक्षण में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में बिजली के उत्पादों की खुदरा बिक्री करने वाली 200 दुकानों के एलईडी बल्बों को नमूने के तौर पर शामिल किया था.

एलकोमा के अनुसार, बीआईएस मानकों के उल्लंघन के सब से ज्यादा मामले दिल्ली में देखे गए हैं. एलकोमा की मानी जाए तो अधिकृत मापदंडों पर खरा नहीं उतरने वाले उत्पादों से उपभोक्ता गंभीररूप से बीमार हो सकते हैं.

अमेरिकन मैडिकल एसोसिएशन यानी एएमए द्वारा 14 जून, 2016 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार एलईडी द्वारा निकलने वाली रोशनी मानवस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. नकली उत्पाद से जोखिम की गंभीरता और भी ज्यादा बढ़ जाती है.

दूसरी तरफ नकली उत्पादों को बेचने से सरकार को भारीभरकम राजस्व का नुकसान हो रहा है क्योंकि ऐसे उत्पादों का निर्माण व उन की बिक्री गैरकानूनी तरीके से की जा रही है. देखा जाए तो नकली एलईडी बल्ब के कारोबार से सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ संकल्पना को भी नुकसान हो रहा है.

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2017 में बीआईएस ने एलईडी बल्ब निर्माताओं को उन के उत्पाद की सुरक्षा जांच के लिए बीआईएस में पंजीकृत कराने का निर्देश दिया था, लेकिन कंपनियां इस आदेश की अनदेखी कर रही हैं. एलईडी बल्ब के काले कारोबार में बढ़ोतरी का एक बहुत बड़ा कारण भारतीय बाजार का चीन के उत्पादों से भरा हुआ होना भी है. आज की तारीख में एलईडी बल्ब बड़े पैमाने पर चीन से भारत गैरकानूनी तरीके से लाए जा रहे हैं.

सर्वेक्षण के मुताबिक, एलईडी बल्ब के 48 प्रतिशत ब्रैंडों पर बनाने वाली कंपनी का पता दर्ज नहीं है, जबकि 31 प्रतिशत ब्रैंडों की पैकिंग पर कंपनी का नाम नहीं लिखा है. साफ है, इन का निर्माण गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा है. इसी तरह एलईडी डाउनलाइटर्स के मामले में भी 45 प्रतिशत ब्रैंडों की पैकिंग पर निर्माता का नाम दर्ज नहीं है और 51 प्रतिशत ब्रैंडों के उत्पादों पर कंपनी का नाम नहीं लिखा हुआ है.

नीलसन की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल दिल्ली में बिकने वाले एलईडी बल्ब के तकरीबन तीनचौथाई ब्रैंड बीआईएस मानकों के अनुरूप नहीं हैं. एलईडी डाउनलाइटर्स के मामले की भी लगभग ऐसी ही स्थिति है. वर्तमान में घर, बाजार और दफ्तर में धड़ल्ले से एलईडी बल्बों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी वजह से रोशनी के बाजार में इस की हिस्सेदारी बढ़ कर आज 50 प्रतिशत हो गई है.

हाल ही में सरकार ने ‘उजाला’ योजना के तहत देशभर में 77 करोड़ पारंरिक बल्बों की जगह एलईडी बल्ब इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है. इस आलोक में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने आपूर्ति करने वाले निर्माताओं या डीलरों को स्टार रेटिंग वाले एलईडी बल्ब की आपूर्ति करने का निर्देश दिया है ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े.

बहरहाल, मौजूदा परिदृश्य में सरकार को नकली एलईडी बल्बों के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए, खासकर चीन से गैरकानूनी तरीके से आने वाले नकली व बिना ब्रैंड वाले उत्पादों को. नकली या बिना ब्रैंड वाले एलईडी बल्ब ईमानदार कारोबारियों, सरकार व उपभोक्ताओं सभी के लिए नुकसानदेह हैं.

आजकल मेरी पत्नी मुझ से उखड़ी सी रहती है कुछ पूछने पर नाराज हो जाती है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं. पिछले कुछ समय से मेरी पत्नी मुझ से उखड़ीउखड़ी सी रहती है और पूछने पर कुछ बताती नहीं है. जब मैं ज्यादा जोर देता हूं तो वह नाराज हो कर गुस्सा कर बैठती है. इस से घर में अजीब सा माहौल बन गया है. मैं क्या करूं?

जवाब-

जरूर आप की पत्नी किसी परेशानी या गलतफहमी का शिकार हो गई हैं, इसलिए सब्र से काम लें. मुमकिन है कि मायके की किसी बात से उन्हें परेशानी हो या वे किसी उलझन में फंस गई हों. ऐसे में आप की यह जिम्मेदारी बनती है कि आप उस की मदद करें और प्यार से बात जानने की कोशिश करें. अगर इस वक्त में आप उस के मन की बात नहीं जान पाए तो आगे चल कर तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है.

मुमकिन यह भी है कि ऐसी कोई बात ही न हो, क्योंकि कई बार औरतें सेहत की खराबी के चलते भी उखड़ीउखड़ी सी रहने लगती हैं. आप उन से प्यार से पेश आते रहिए, आज नहीं तो कल वे खुद आप को बात बताएंगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पुरुषों की ये आदतें पार्टनर को नहीं आती पसंद, तुरंत सुधारें

पुरुषों की ऐसी कई आदतें होती है जो महिलाओं को बिलकुल पसंद नहीं होती है. तो आज हम इस आर्टिकल में उन्ही आदतों की बात करेंगे. ये ज़रुरी नहीं कि सिर्फ ये बाते गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के बीच लागू होती हो, बल्कि पति-पत्नी के बीच भी ऐसी कई बातें होती है जो महिलाओं को पुरुषो की नहीं पसंद आती है. रिश्ते में ये ज़रुरी है कि दोनों तरफ से स्पोर्ट किया जाए. वरना रिश्ता कमजोर हो जाता है और  उसका सबसे बड़ा कारण होता है कि महिलाओं को ना पसंद आने वाली आदतों को उपयोग करना.

  • इमोशनली कनेक्टेड ना रहना – महिलाएं अक्सर चाहती हैं कि उनका पार्टनर उन्हें सुने, उन्हें साहनुभूति दे और इमोशनली तौर पर भी सपोर्ट करे. वहीं कई बार लड़के इन बातों को अनदेखा करके उन्हें समझने की कोशिश नहीं करते और जब भी वे आपसे कुछ शेयर करने  की कोशिश करती हैं तो पुरुष समझते नहीं हैं, ऐसा होने से महिलाएं निराश हो सकती हैं.
  • जिम्मेदारियों को गंभीरता से ना लेना- महिलाएं अक्सर अपने परिवार और घर की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठा लेती हैं लेकिन अगर घर के किसी काम में उनके पार्टनर की जरूरत हैऔर अगर ऐसे में वह घरेलू कामों में कुछ मदद नहीं करेंगे तो महिलाओं को वह बात अच्छी नहीं आएगी. मानकर चलें आप मार्केट जा रहे हैं . आपकी पार्टनर आपसे कुछ सामान लाने के लिए कह देती है और अगर आप ऐसा करना भूल जाते हैं तो क्या होगा ये आपको अच्छे से पता है.
  • टॉक्सिक रिलेशनशिप – कोई भी रिलेशन प्यार से चलता है ना कि टॉक्सिसिटी से. दरअसल, कुछ पुरुष शुरू से ही स्ट्रिक्ट, फीलिंग ना दिखाने वाले होते हैं. जिससे रिलेशन पर नेगेटिव असर होता है. कुछ महिलाओं को आपका ऐसा व्यवहार करना पसंद नहीं आएगा और वे इमोशनली रूप से आपसे कनेक्टेड नहीं हो पाएंगी.

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें