शराबी पिता, गुंडा भाई कैसे निभाए लड़की

मा नसी यादव नई दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में अपने मम्मीपापा और भाई के साथ रहती है. उस की उम्र 12 साल है. वह दिल्ली नगरनिगम के स्कूल में 8वीं क्लास में पढ़ती है. वे सब एक कमरे के किराए के घर में रहते हैं.
मानसी यादव के पापा एक कारखाने में काम करते हैं, जिन की तनख्वाह 15,000 रुपए महीना है. घर में खाने वाले 4 लोग हैं और कमाने वाला सिर्फ एक.
15,000 रुपए में उन का गुजारा बस किसी तरह हो रहा था कि मानसी यादव के पिता को शराब की लत लग गई. पहले तो वे कभीकभार ही शराब पी कर घर आते थे, लेकिन फिर कुछ दिनों बाद वे रोज शराब पी कर आने लगे. इस से उस के घर का माहौल पूरी तरह बदल गया.
मानसी के पापा शराब पी कर मानसी की मम्मी के साथ मारपीट करते हैं. कई बार वे उन के साथ जबरदस्ती सैक्स भी करते हैं. हालांकि यह भी सच है कि भारतीय समाज में शादी के बाद पति द्वारा पत्नी के साथ बनाए जबरन संबंधों को रेप नहीं माना जाता. इसे पति का हक मान लिया जाता है, जो एक औरत की गरिमा पर चोट है.
मानसी यादव का एक भाई भी है, जिस की उम्र 15 साल है. वह 10वीं क्लास में पढ़ता है. लेकिन पढ़ाई में उस का कम ही मन लगता है, इसलिए पिछले साल वह फेल भी हो गया था. इस की वजह है उस का गलत संगत में पड़ना.
वह दिनभर गलीमहल्ले के आवारा लड़कों के साथ इधरउधर घूमता रहता है. इन लोगों के साथ रहरह कर उसे जुए की लत लग गई. इस वजह से वह चोरी भी करने लगा.
कई बार वह अब मम्मी के पर्स से रुपए भी चुरा लेता है. आएदिन उस की कोई न कोई शिकायत करने आता है. मानसी की मम्मी उस के भविष्य को ले कर बहुत चिंतित हैं.
इस तरह के माहौल का बच्चों पर बहुत गहरा असर पड़ता है. वे इस से दिमागी तौर पर परेशान भी हो सकते हैं. इस का असर लंबे समय के लिए भी हो सकता है.
हो सकता है कि वे अपनी शादीशुदा जिंदगी में अपने पिता के जैसे ही बनें या यह भी हो सकता है कि वे इन सब बातों से सीख ले कर अपनी जिंदगी में ऐसी गलती न करें.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ मानसी के साथ ही ऐसा हो रहा है. इस देश में न जाने ऐसी कितनी ही मानसी होंगी, जो मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह से यह सब झेल रही हैं. उन की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की वजह उन का अपना ही परिवार है.
अगर शराबी लोगों की बात की जाए, तो ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है. भारत में तकरीबन 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं. इन में 95 फीसदी मर्द हैं, जिन की उम्र 18 से 49 साल के बीच है. देश में हर साल अरबों लिटर शराब की खपत होती है. इस से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे देश में शराब की चाह रखने वाले कितने ज्यादा लोग हैं. जितने ज्यादा शराब पीने वाले लोग उतनी ही ज्यादा औरतों के प्रति हिंसा.
औरतों पर घरेलू हिंसा के सब से ज्यादा मामलों में शराब एक बड़ी वजह है. औरतों को यह शिकायत रहती है कि पति ने शराब पी कर उन्हें मारापीटा है. गांवदेहात में इस तरह की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं.
नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के मुताबिक, भारत में 18 फीसदी मर्द शराब पीते हैं. इन में से 16.5 फीसदी जहां शहरी इलाकों से हैं, वहीं 19.9 फीसदी गांवदेहात के इलाकों के लोग हैं.
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि शहरों की तुलना में गांवों में शराब पीने वालों की तादाद ज्यादा है. शराब पीने वाले शौकीनों की तादाद 15 साल से ऊपर की उम्र को आधार बना कर मानी गई है.
भारत में साल 2015-2016 में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 6 के मुताबिक, 15-49 साल की उम्र की 31.1 फीसदी शादीशुदा औरतों ने अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार वैवाहिक हिंसा झेली है. 27.3 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हुई थी.
हाल ही में भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो ने बताया है कि साल 2000 में हर 24 घंटे में तकरीबन 125 औरतों को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता था. साल 2006 में यह आंकड़ा बढ़ कर 160 हो गया और तब से लगातार बढ़ रहा है.
शराबी के घर का माहौल
एक ऐसे घर में रहना बहुत मुश्किल होता है, जिस के मुखिया को शराब पीने की बुरी लत हो. लड़ाईझगड़ों का ऐसे घरों में होना आम बात है. ये शराबी लोग न सिर्फ लड़ाईझगड़ा करते हैं, बल्कि कई बार ये अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट भी करते हैं.
ये लोग शराब के नशे में जबरदस्ती अपनी पत्नी के साथ सैक्स करते हैं और जब उन की पत्नी इस से इनकार करती है, तो ये उन्हें बुरी तरह मारतेपीटते हैं.
पुलिस स्टेशनों में ऐसे कई केस दर्ज हैं. ऐसे केस को करने की असली वजह औरतों का अपने पति की हिंसा से बचना होती है, न कि उन से तलाक लेना.
गांवदेहात के इलाकों में शराब पीने वाले का उस के परिवार पर क्या असर पड़ता है, इसे ऐसे जाना जा सकता है.
राजस्थान के उदयपुर जिले से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर सलुंबर ब्लौक में एक गांव है मालपुर, जहां मर्दों में शराब की बढ़ती लत औरतों के लिए समस्या बन गई है. यहां के 60 फीसदी मर्द शराब पी कर घरेलू हिंसा करते हैं.
शराब ने इस गांव के माहौल को इस कदर खराब कर दिया है कि अब कम उम्र के बच्चे भी इसे पीने लगे हैं. इस वजह से वे न केवल घर में लड़ाईझगड़े करते हैं, बल्कि पढ़ाई से भी दूर हो चुके हैं.
शराब पीने के लिए कई नाबालिग बच्चे गलत संगत में पड़ कर अपनी कीमती जिंदगी बरबाद कर रहे हैं. शराब की बढ़ती लत से गांव की बदनामी होने लगी है और कई लड़कों के शादी के रिश्ते तक टूट गए हैं.
इसी गांव की 29 साल की बबीता (बदला हुआ नाम) का कहना है, ‘‘गांव के ज्यादातर मर्द कोई काम नहीं करते हैं. वे शराब पी कर हम औरतों के साथ मारपीट करते हैं. जब हम काम करने बाहर जाती हैं, तो वे हमारे साथ गालीगलौज करते हैं.
‘‘वे हमें चैन से खाना भी खाने नहीं देते हैं. शराब पी कर वे घर में बवाल मचा देते हैं. हम यह सबकुछ परिवार
की खातिर चुपचाप सहन करने को मजबूर हैं.’’
बच्चों पर असर
जिन घरों में पिता शराबी होते हैं, उन के बच्चों पर इस का क्या असर पड़ता है, इस मुद्दे पर मयंक सिंह (बदला हुआ नाम) कहता है, ‘‘जिन घरों में पिता को शराब पीने की लत होती है, उस घर के बच्चे हमेशा डर के साए में रहते हैं. उन्हें डर लगता है कि आज भी उन के पापा शराब पी कर आएंगे और उन की मम्मी के साथ मारपीट करेंगे. अगर वे अपनी मम्मी को बचाने की कोशिश करेंगे, तो पापा उन्हें भी मारेंगे.
‘‘इस के अलावा उन्हें पढ़ाई छूट जाने का भी डर सताता है कि न जाने कब उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ जाए. जब देर रात तक उन के पापा घर नहीं आते हैं, तो उन्हें यह डर लगता है कि कहीं उन्हें कुछ हो न गया हो. इस के अलावा ऐसे घरों के बच्चों को अपने सिर से पिता का साया हटने का भी डर सताता रहता है.’’
लाचार लड़की
अगर शराबी पिता वाले घरों में रहने वाली लड़कियों की बात करें, तो इन घरों की लड़कियां पहले ही मर्दवादी सोच से डरती हैं, ऊपर से शराबी पिता, ऐसे में उन का डर और ज्यादा बढ़ जाता है. पहले ही यह समाज उन पर सौ पाबंदी लगा देता है. ऊपर से शराबी पिता होने पर ये पाबंदियां कई गुना बढ़ जाती हैं.
ऐसे कई केस आते हैं, जिन में पिता ही अपनी बेटी की इज्जत से खिलवाड़ कर बैठता है. कई बार वह ऐसा शराब के नशे में चूर हो कर करता है. ऐसी लड़कियों की परेशानी की बात करें,
तो एक कमरे वाले घरों में रहने वाली ऐसी फैमिली के बच्चों का अपने मम्मीपापा को संबंध बनाते हुए देखना शर्मनाक और शर्मिंदगी भरा होता है.
कई बार जब ये संबंध जोरजबरदस्ती से बनाए जाते हैं, तो बच्चों पर इस का बुरा असर पड़ता है खासकर लड़कियों पर. वे इस से जिंदगीभर के लिए तनाव में भी जा सकती हैं.
ऐसी लड़कियां अपने भविष्य के खतरों से डरीसहमी रहती हैं. आगे चल कर अपने पति में पिता की छाया इन्हें भीतर तक झकझोर देती है. ये लड़कियां अपनी शादीशुदा जिंदगी का मजा नहीं उठा पाती हैं.
इन घर की लड़कियों का समाज में रहना दूभर हो जाता है. घर से बाहर आतेजाते इन्हें मनचले छेड़ते रहते हैं. इन पर भद्देभद्दे कमैंट किए जाते हैं. कई बार इन के नाजुक अंगों को भी छुआ जाता है.
ये मनचले लड़के जानते हैं कि इस लड़की को बचाने कोई नहीं आएगा. इस का खुद का पिता शराबी है, वह अपनी बेटी के लिए क्या ही कहेगा.
नीम चढ़ा करेला
शराबी पिता वाले घरों में अगर गुंडा भाई हो तो उस घर की लड़की के लिए यह किसी दुखद घटना से कम नहीं होगा. एक तरफ शराबी पिता, जो आएदिन शराब पी कर इधरउधर गिरतापड़ता रहता है, कभी कीचड़ में तो कभी नाले में,
वहीं अगर भाई गुंडा है, तो उस घर की लड़की को बहुतकुछ झेलना होगा. जैसे आएदिन उस के भाई से वसूली करने वाले गुंडे उस के घर आ कर उसे छेड़ेंगे. उन से पैसों की वसूली करेंगे और पैसा न देने पर मांबहन की गालियां देंगे. घर का सामान तोड़ देते हैं. कई बार सामान उठा कर ले जाते हैं.
अगर वह पुलिस में शिकायत करने की कोशिश करेंगे, तो हो सकता है
कि उन्हें और ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़े. ऐसे में ये चुप रहना ही सही समझती हैं.
गुंडा भाई हमेशा बहन के लिए मुसीबत ही रहा है. ऐसे भाई की वजह से बहन डरीडरी रहती है. उस का गलीमहल्ले में चलना मुश्किल हो जाता है. आतेजाते लोग उसे ‘गुंडे की बहन’ और ‘बेवड़े बाप की बेटी’ कहते हैं. अपना सिक्का ही खोटा हो, तो दूसरों से क्या शिकायत करें, यही सोच कर वे खुद को तसल्ली दे देती हैं.
लेकिन, क्या लड़कियों को यों ही मानसिक प्रताड़ना झेलते रहना चाहिए? इस मुद्दे पर मुंबई की रहने वाली सूर्यंका सारंगी, जो एक योग टीचर भी हैं, कहती हैं, ‘‘जिस घर में लड़की की इज्जत नहीं होती है, वह घर कभी भी तरक्की नहीं कर पाता. अकसर ऐसा उन घरों में होता है, जिन घरों का मुखिया अच्छे आचरण का नहीं होता.
‘‘जिस घर में पिता शराब पीता हो, मारपीट करता हो, उस घर की लड़कियों और औरतों के साथ अच्छा बरताव नहीं होता है. अपने पिता को ऐसा करता देख उस घर के लड़के भी ऐसा ही करते हैं. बहुत बार वह अपनी बहनों को मारते भी हैं. उन्हें अपने मर्द होने का घमंड होता है. ऐसे में उस घर की लड़की का वहां रहना मुश्किल हो जाता है.
‘‘इस से बचने के लिए हर लड़की का पढ़ना बहुत जरूरी है. वह किसी भी तरह अपनी पढ़ाई को रुकने न दें. साथ ही, उसे इतना सक्षम होना चाहिए कि अपना बचाव कर सकें. हिंसा करना बिलकुल भी सही नहीं है. लेकिन खुद के बचाव के लिए की जाने वाली
हिंसा को पूरी तरह से गलत भी नहीं कहा जा सकता. इसे सैल्फ डिफैंस कह सकते हैं.’’
शराब पीने वाले पिता अपने बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं. एक बार जब उन्हें इस की लत लग जाती है, तो वह बाकी सब भूल जाते हैं. इस से न सिर्फ सेहत व पैसों की बरबादी हो रही है, बल्कि उन के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा होता है. वे इस बात से अनजान होते हैं कि यह शराब उन का घरबार तबाह कर रही है.
ऐसे में अगर उस घर का लड़का भी गलत संगत में पड़ कर गुंडामवाली बन जाए, तो उस घर का बेड़ा गर्क होना तो तय है. जिस आदमी को शराब पीने और मारपीट करने की लत एक बार लग जाए, तो उस की लत छुड़ाना आसान नहीं होता है. ऐसे में उसे बदलना आसान तो बिलकुल भी नहीं है.
लेकिन कहा जाता है, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, इसलिए शराब पीने वाले की आदत छुड़ाने के लिए उसे नशा मुक्ति केंद्र भेजा जा सकता है. हालांकि यह उस शख्स पर कितना असरदार है, यह तो वहां जा कर ही पता चलता है.
जिस घर में शराबी पिता हो, भाई गुंडा हो, उस घर में लड़की को चाहिए कि वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगा दे. वह कोशिश करे कि घर के माहौल का उस की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े.
तालीम ही वह जरीया है, जो उस की जिंदगी बदल सकती है. इसलिए वह अपने घर की नैगेटिविटी को भुला कर सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दे.

बेहतर सेक्स लाइफ चाहते हैं तो अपनाएं ये टिप्स

कई दिनों से निशा की बढ़ती व्यस्तता नितिन की बेचैनी बढ़ा रही थी. जब भी नितिन सेक्स के मूड में होता वह उस की व्यस्तता के कारण यौनसुख प्राप्त नहीं कर पाता. यह नहीं कि निशा को इस की जरूरत महसूस नहीं होती, पर वह अपने काम को अपनी इस जरूरत से अधिक महत्त्व देती. इस से नितिन की यौन भावनाएं आहत होतीं.  धीरेधीरे वह यौन कुंठा का शिकार हो गया. अकसर व्यस्त दंपती अपनी सेक्सलाइफ का पूर्णरूप से आनंद नहीं उठा पाते, क्योंकि अगर वे सेक्स करते भी हैं तो किसी कार्य को निबटाने की तरह. न तो उन्हें एकदूसरे से रोमांटिक बातें करने की फुरसत होती, न ही वे परस्पर छेड़छाड़ का मजा ले पाते.

सेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्स में चरमसुख की प्राप्ति तभी हो पाती है जब पतिपत्नी दोनों पूरी तरह उत्तेजित हों और यह उत्तेजना उन में तभी आ सकती है, जब वे सेक्स से पहले आवश्यक क्रियाएं जैसे परस्पर छेड़छाड़, एकदूसरे के गुप्त अंगों को सहलाना, होंठ चूमना, आलिंगनबद्ध होना इत्यादि करें. इन क्रियाओं से सेक्सग्रंथियां तेजी से काम करना शुरू कर देती हैं व पतिपत्नी में अत्यधिक उत्तेजना पैदा हो जाती है, जो उन्हें चरमसुख प्रदान करने में सहायक होती है. पर जो दंपती अपने काम को सेक्स से ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानते हैं, वे ऐसा कदापि नहीं कर पाते.

घातक स्थिति है यह

राघव की जौब ऐसी है कि वह रात को 11 बजे से पहले घर नहीं लौट पाता. उस की पत्नी ट्विंकल भी नौकरी करती है. दोनों इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें एकदूसरे से ढंग से बात  करने तक की फुरसत नहीं मिलती. सेक्स को भी दोनों अपने जौबवर्क की तरह ही निबटाते हैं. नतीजा यह होता है कि वे कई सप्ताह तक शारीरिक तौर पर एकदूसरे के साथ जुड़ते ही नहीं, क्योंकि सेक्स में उन्हें बिलकुल भी आनंद नहीं आता और इसी कारण उन की इस में रुचि घटती जा रही है.

अधिक व्यस्त रहने के कारण पतिपत्नी लगातार अपनी यौनइच्छाओं को दबाते रहते हैं, क्योंकि कई बार ऐसी स्थिति भी आती है कि उन में से एक जल्दी फ्री हो जाता है व दूसरे के साथ अपना समय गुजारना चाहता है, शारीरिक सुख प्राप्त करना चाहता है परंतु उस की यह चाहत पूरी नहीं हो पाती, क्योंकि उस का साथी बिजी है. ऐसे में पतिपत्नी न तो कभी अपनी यौन भावनाओं को एकदूसरे से शेयर कर पाते हैं, न ही सेक्स के विषय पर एकदूसरे से खुल कर बातचीत करते हैं. या तो वे लगातार सेक्स को नजरअंदाज करते हैं या इसे सिर्फ निबटाते हैं. ऐसी स्थिति में उन के सेक्स संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ता है. धीरेधीरे सेक्स उन्हें बोर करने लगता है.

सेक्स में बोरियत होने से दोनों ही इस से विमुख होने लगते हैं. उन की सेक्स के प्रति अंदरूनी चाहत खत्म होने लगती है और पति का अंग शिथिल पड़ता चला जाता है, साथ ही पत्नी को भी उत्तेजित होने में अधिक समय लगता है. यह स्थिति दांपत्य संबंधों के लिए खतरे की घंटी है. सेक्स, जो सफल वैवाहिक जीवन का आधार है, अगर पतिपत्नी इस से ही विमुख हो जाएंगे तो उन्हें एकदूसरे के प्रति कोई आकर्षण नहीं रहेगा. ऐसे में विवाहेतर संबंध पनपते हैं, जो पतिपत्नी के आपसी रिश्ते की जड़ें खोखली करने में अहम भूमिका निभाते हैं. अगर पतिपत्नी दोनों मिल कर प्रयास करें तो वे अपने व्यस्त जीवन में से सेक्स में पूर्ण आनंद प्राप्त करने हेतु समय निकाल ही सकते हैं. बस, जरूरत है थोड़ी समझदारी व इच्छाशक्ति की. अपनी यौनइच्छाओं को दबाएं नहीं बल्कि मौका देख कर उन्हें जीवनसाथी के समक्ष उजागर करें.

नेहा और सूजल ऐसी स्थिति में एकदूसरे को पूर्ण सहयोग देते हैं. एक फ्री है तो उस ने दूसरे के काम निबटा दिए, दूसरा जल्दी फ्री हो जाता है तो वह अपने साथी के कार्यों में सहयोग देता है ताकि वे दोनों एकदूसरे के साथ कुछ वक्त बिता सकें. नेहा कहती है, ‘‘कई बार सूजल जल्दी फ्री हो जाते हैं तो वह नौकरानी को खाना बनाने संबंधी हिदायतें देते हैं, फिर अन्य काम जैसे प्रेस के कपड़े भिजवाना, बेडरूम को व्यवस्थित करना इत्यादि कार्य निबटा लेते हैं. मैं जब घर लौटती हूं तो वह जल्दी से मुझे फे्रश होने को कह खाना लगा देते हैं. ऐसे में हमारा शारीरिक व मानसिक रिश्ता अधिक मजबूत हो जाता है.’’ यह तो तय है कि जिन पतिपत्नी में परस्पर सहयोग की भावना होती है, वे मानसिक तथा शारीरिक तौर पर एकदूसरे के अधिक करीब होते हैं, क्योंकि एकदूसरे का सहयोग उन्हें मानसिक संबल प्रदान करने के साथसाथ आपसी लगाव, प्यार व विश्वास में भी वृद्धि करता है. ऐसे में वे शारीरिक तौर पर भी सहज ही एकदूसरे से जुड़ जाते हैं और उन्हें उत्तेजित होने में भी अधिक समय नहीं लगता.

इन्हीं सब बातों पर आप की सेक्सलाइफ निर्भर करती है. अगर आप चरमसुख की अनुभूति प्राप्त करना चाहते हैं तो परस्पर सहयोग तो करना ही होगा, क्योंकि सेक्स भी टैक्स मांगता है. तो फिर देर किस बात की, टैक्स चुकाइए व सेक्स का लुत्फ उठाइए.

नवीनता लाएं

अगर आप सदैव व्यस्तता का रोना रो कर सेक्स से कटते हैं तो आप के संबंध बेहद नीरस हो जाते हैं. ऐसी स्थिति पैदा होने पर आप को स्वयं में कुछ बदलाव लाने होंगे, तभी आप अपने संबंधों को चरमसुख के रस से सराबोर कर सकते हैं.

सेक्स का पूरा आनंद उठाने हेतु आप दोनों का पूर्णरूप से उत्तेजित होना बहुत आवश्यक है और यह उत्तेजना तभी आ सकती है, जब आप सेक्स से पूर्व एकदूसरे के साथ मीठीमीठी बातें, शरारतें, छेड़छाड़ करें.

कभीकभी रूटीन से हट कर कुछ नया करें. समय निकाल कर जीवनसाथी से मोबाइल पर मीठी बातें करें. अगर वह बिजी हो तो उसे रोमांटिक मैसेज भेजें.

अपने अंत:वस्त्रों में बदलाव लाएं. ऐसे रंग के अंत:वस्त्र पहनें, जो जीवनसाथी को बेहद पसंद हों.

डिनर के वक्त प्यार से एकदूसरे को निहारें. पैरों से शरारतें करें. कभी खाना लेते वक्त हलके से हाथों का स्पर्श करें या फिर अचानक उस अंग को छू दें, जिस से जीवनसाथी में उत्तेजना पैदा होती हो. रोमांटिक गाने सुनें.

आप का बेडरूम व्यवस्थित व खुशबूदार होना चाहिए. बेडरूम में भीगी महक वाला स्पे्र करें. यह महक आप को मदहोश कर देगी और आप मौका मिलते ही आलिंगनबद्ध हो जाएंगे और आप को पता भी नहीं चलेगा कि कब आप एकदूसरे में समा गए.

सावधान : सुरक्षित नहीं है आपके बच्चे

देशभर में जिस समस्या को ले कर आएदिन चर्चा होती रहती है और चिंता जताई जाती है उसे ले कर भोपाल के अभिभावक लंबे वक्त तक दहशत से उबर पाएंगे, ऐसा लग नहीं रहा. मार्च के महीने में एक के बाद एक 3 बड़े हादसे हुए जिन में मासूम बच्चियों को पुरुषों ने अपनी हवस का शिकार बनाया. ऐसे में शहर में हाहाकार मचना स्वाभाविक था. हालत यह थी कि मांएं अपनी बच्चियों को बारबार बेवजह अपने सीने से भींच रही थीं तो पिता उन्हें सख्ती से पकड़े थे. समानता बस इतनी थी कि मांबाप देनों किसी पर भरोसा नहीं कर रहे थे. चिड़ियों की तरह चहकने वाली बच्चियों को समझ ही नहीं आ रहा था कि क्यों मम्मीपापा एकाएक इतना लाड़प्यार जताते उन की निगरानी कर रहे हैं. समस्या देशव्यापी है. कहीं कोई चिड़िया किसी गिद्ध का शिकार बनती है तो स्वभाविक तौर पर सभी का ध्यान सब से पहले अपनी बच्ची पर जाता है और लोग तरहतरह की आशंकाओं से घिर जाते हैं. बच्चियों के प्रति दुष्कर्म एक ऐसा अपराध है जिस से बचने का कोई तरीका कारगर नहीं होता है.

कैसे सुलझेगी और क्या है समस्या, इसे समझने के लिए भोपाल के हालिया मामलों पर गौर करना जरूरी है कि वे किन हालात में और कैसे हुए.

किडजी स्कूल

भोपाल के कोलार इलाके का प्रतिष्ठित स्कूल है किडजी. किडजी में अपने बच्चों को दाखिला दिला कर मांबाप उन के भविष्य और सुरक्षा के प्रति निश्ंिचत हो जाते हैं.

उस प्ले स्कूल की संचालिका हेमनी सिंह हैं. एक छोटी बच्ची के मांबाप ने उस का नर्सरी में 8 फरवरी को ही ऐडमिशन कराया था. इस बच्ची का बदला नाम परी है. परी जब स्कूल यूनिफौर्म पहन पहली दफा स्कूल गई तो मांबाप दोनों ने उसे लाड़ से निहारा.

पर परी पर बुरी नजर लग गई थी हेमनी सिंह के पति अनुतोष प्रताप सिंह की, जो खुद एक ऐसी ही छोटी बच्ची का पिता है. 24 फरवरी को परी के पिता ने कोलार थाने में अनुतोष के खिलाफ परी के साथ दुष्कर्म किए जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई. परी के भविष्य, मांबाप की प्रतिष्ठा और कानूनी निर्देशों के चलते यहां पूरा विवरण नहीं दिया जा सकता पर परी के पिता की मानें तो परी दर्द होने की शिकायत कर रही थी.

परी एक पढ़ेलिखे और खुद को सभ्य समाज का नुमाइंदा व हिस्सा कहने वाले की हैवानियत का शिकार हुई है. अनुतोष प्रताप सिंह ने अपने रसूख और पहुंच के दम पर मामले को रफादफा करने और करवाने की कोशिश की.

उस के एक आईपीएस अधिकारी से पारिवारिक संबंध हैं, इसलिए पुलिस ने फौरन कोई कार्यवाही नहीं की. उलटे, थाने में उसे राजकीय अतिथियों जैसा ट्रीटमैंट दिया.

इस कांड पर हल्ला मचा और अखबारबाजी हुई, तब कहीं जा कर पुलिस हरकत में आई. उसे ससम्मान हिरासत में लिया गया. शुरुआत में पुलिस यह कह कर आरोपी को बचाने की कोशिश करती रही कि जांच चल रही है, मैडिकल परीक्षण हो गया है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं लेकिन चूंकि आरोप साबित नहीं हुआ है, इसलिए आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई है.

जब परी की मैडिकल जांच में दुष्कर्म की आधिकारिक पुष्टि हुई तो 28 फरवरी को पहली दफा पुलिस ने इस वहशी को यौनशोषण का आरोपी माना और उसे कोलार क्षेत्र के गिरधर परिसर स्थित किडजी प्ले स्कूल से गिरफ्तार किया.

परी के नाना ने मीडिया को बताया कि उन की नातिन के गुनहगार को महज इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि वह कोलार थाना प्रभारी गौरव सिंह बुंदेला का अच्छा दोस्त है. दबाव बढ़ता देख पुलिस विभाग को इस थाना प्रभारी को लाइन अटैच करना पड़ा.

आरोपी को अदालत में संदेह का लाभ मिले, इस बात के भी पूरे इंतजाम पुलिस वालों ने किए. मसलन, एफआईआर में आरोपी की पहचान व्हाट्सऐप के जरिए करवाई गई. 3 साल की एक बच्ची मुमकिन है घबराहट या डर के चलते पहचान में गड़बड़ा जाए और दुष्कर्मी को कानूनी शिकंजे से बचने का मौका मिल जाए, इस के लिए पुलिस ने कोई कसर नहीं छोड़ी जिसे ले कर पुलिस विभाग और सरकार आम लोगों के निशाने पर हैं.

अवधपुरी स्कूल

भोपाल के ही अवधपुरी इलाके के एक सरकारी स्कूल का 56 वर्षीय शिक्षक मोहन सिंह पिछले 4 महीनों से एक 11 वर्षीय छात्रा बबली (बदला नाम) का शारीरिक शोषण कर रहा था. इस का खुलासा 15 मार्च को हुआ.

बकौल बबली, उस के सर (मोहन सिंह) उसे बुलाते थे, फिर कान उमेठते थे और पीठ पर मारते थे. बबली ने यह बात मां को बताई थी पर उन्होंने यह कहते उस की बात पर ध्यान नहीं दिया कि वह पढ़ाई से जी चुराती होगी, इसलिए सर ऐसा करते हैं. बबली की मां मोहन सिंह के यहां नौकरानी थी, इसलिए उस ने कोई बात उन से नहीं की.

एक दिन सर ने बबली को अपने कमरे में झाड़ू लगाने के लिए बुलाया तो वह हैरान हुई कि जब इस काम के लिए मां हैं तो सर उसे क्यों बुला रहे हैं. वह तो पहले से ही उन्हें ले कर दहशत में थी. चूंकि मजबूरी थी, इसलिए वह डरतेडरते मोहन सिंह के कमरे में गई. पर साथ में एक सहेली को भी ले गई. लेकिन मोहन सिंह ने उस सहेली को भगा दिया.

सहेली चली गई तो मोहन सिंह ने अपना वहशी रंग दिखाते हुए कमरा अंदर से बंद कर लिया और जबरदस्ती बबली के कपड़े उतार दिए. इस के पहले वह अपने कपड़े उतार चुका था. इस के बाद उस ने बबली को अपनी तरफ खींच लिया. इसी दौरान किसी ने दरवाजा खटखटाया तो मोहन सिंह ने बबली को धमकी दी कि किसी को कुछ बताया तो स्कूल से निकाल दूंगा. डरीसहमी बबली खामोश रही क्योंकि वह पढ़ना चाहती थी.

मां ने बात नहीं सुनी तो बबली ने बूआ को सारी बात बताई. उन्होंने भाभी को समझाया तो दोनों बबली को ले कर मोहन सिंह के घर गईं जो भांप चुका था कि पोल खुल चुकी है, इसलिए इन्हें देखते ही भाग गया.

जब मामला उजागर हुआ तो पुलिस ने मोहन सिंह के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 376 और 342 के तहत मामला दर्ज कर लिया. 5 बच्चों के पिता मोहन सिंह की बड़ी बेटी की उम्र 30 साल है. अवधपुरी के प्राइमरी स्कूल में 15 बच्चियां पढ़ती हैं और 10 लड़के हैं. मोहन सिंह स्कूल का सर्वेसर्वा था. यह स्कूल 2 साल पहले शुरू हुआ है जिस में पढ़ने वाले छात्र गरीब घरों के हैं. बबली के पिता की मौत हो चुकी है और 7 भाईबहनों में यह छठे नंबर की है.

मोहन सिंह का मैडिकल देररात हुआ जबकि बबली और उस की मां, बूआ दोपहर साढ़े 4 बजे से देररात तक अवधपुरी थाने में भूखीप्यासी बैठी रहीं.

यानी पुलिस ने इस मामले में कोई गंभीरता नहीं दिखाई तो उस की मंशा पर सवालिया निशान लगना स्वभाविक है. दूसरी कक्षा में पढ़ रही छात्रा के साथ उस का शिक्षक अश्लील हरकतें करता था और दुष्कर्म भी किया, यह बात भी संवेदनशील पुलिस की निगाह में कतई नहीं थी.

शातिर दुष्कर्मी

15 मार्च के दिन एक और मासूम बच्ची, नाम आफिया, उम्र 6 वर्ष, ने फांसीं लगा कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. आफिया की 3 बड़ी बहनों के मुताबिक, हादसे की शाम मम्मी सब्जी लेने बाजार गई थीं तब उस ने ऊपर कमरे में जा कर फांसी लगा ली.

भोपाल के लालघाटी इलाके के नजदीक के गांव बरेला निवासी अफजल खान मंगलवारा इलाके में चिकन शौप चलते हैं. घर में उन की पत्नी और 4 बेटियां रहती हैं.

एक 6 साल की बच्ची फांसी लगा कर जान दे सकती है, यह बात किसी के गले उतरने वाली नहीं थी. मौके पर पुलिस पहुंची तो कमरे में बहुत से कपड़े बिखरे पड़े थे. लोगों का यह शक सच निकला कि परी और बबली की तरह आफिया भी दुष्कर्म की शिकार हुई है और जुर्म छिपाने की गरज से उस की हत्या कर दी गई है.

शौर्ट पीएम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में जख्म हैं और उस के साथ प्राकृतिक व अप्राकृतिक कृत्य हुआ है. जाहिर है उस की मौत को खुदकुशी का रंग देने की कोशिश की गई थी जबकि 6 साल की बच्ची फांसी के फंदे की उतनी मजबूत गांठ नहीं लगा सकती जितनी की लगी हुई थी और दरवाजा खोल कर खुदकुशी नहीं करती.

आफिया के मामले में भी पुलिस की कार्यप्रणाली लापरवाहीभरी और शक के दायरे में रही. 15 मार्च को पुलिस की तरफ से कहा गया कि संभवतया उस के साथ बलात्कार नहीं हुआ है क्योंकि उस के प्राइवेट पार्ट पर कोई जख्म नहीं था.

4 दिनों में रिपोर्ट बदल गई तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि मासूमों के असुरक्षित होने की बहुत सी वजहों में से एक, पुलिस की भूमिका भी है. 22 मार्च को पुलिस वालों ने साबित भी कर दिखाया कि इस अबोध ने खुदकुशी की थी. उस की हत्या नहीं की गई थी. और न ही किसी तरह का दुष्कर्म उस के साथ हुआ था.

इन तीनों मामलों से उजागर यह भी हुआ कि लड़कियां कहीं सुरक्षित नहीं हैं, किसी ब्रैंडेड स्कूल में भी नहीं, न ही सरकारी स्कूल में और उस जगह भी जो सुरक्षा की गारंटी माना जाता है यानी घर में.

अबोध लड़कियां मुजरिमों के लिए सौफ्ट टारगेट होती हैं और हैरत की बात है कि अधिकांश दुष्कर्मी अधेड़ होते हैं और बच्ची अकसर इन के नजदीक होती हैं. इन्हें जरूरत एक अदद मौके की होती है जिस के लिए वे किसी इमारत को ज्यादा महफूज मानते हैं. खुले पार्क, सुनसान या फिर हाइवे पर बच्चियों के साथ दुष्कर्म के हादसे अपेक्षाकृत कम होते हैं.

एकांत इस तरह के हादसों में एक बड़ा फैक्टर है तो जाहिर है भेडि़ए की तरह घात लगाए ये दुष्कर्मी काफी पहले अपने दिमाग में बलात्कार का नक्शा खींच चुके होते हैं.

जब भी एकांत मिलता है तब वे अपनी हवस पूरी कर डालते हैं. साफ यह भी दिख रहा है कि अबोध लड़कियों के दुष्कर्मियों को किसी श्रेणी में रखा जा सकता. वे सूटेडबूटेड सभ्य से ले कर गंवारजाहिल कहे और माने जाने वाले तक होते हैं. कुत्सित मानसिकता के स्तर पर इन में कोई फर्क नहीं किया जा सकता.

क्या करें 

भोपाल के हादसों से स्पष्ट हुआ कि मांबाप ने सावधानियां भी रखीं और लापरवाहियां भी की. परी और बबली के उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि अगर बच्ची किसी शिक्षक या दूसरे पुरुष के बाबत शिकायत कर रही है तो उसे किसी भी शर्त पर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए.

भोपाल में मार्च के पूरे महीने इन मामलों की चर्चा रही पर कोई हल नहीं निकला. सारी बहस पुलिस की कार्यप्रणाली और दुष्कर्मियों की मानसिकता के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई.

एक गृहिणी वंदना रवे की मानें तो वे 2 बेटियों की मां हैं और इन हादसों के बाद से व्यथित हैं. पर उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा.

क्या सरकार सभी बच्चियों की हिफाजत की गारंटी ले सकती है, इस सवाल का जवाब भी शीशे की तरह साफ है कि नहीं ले सकती. इस मसले पर सरकार के भरोसे रहना व्यावहारिक नहीं है.

एक व्यवसायी रितु कालरा का कहना है कि बलात्कारियों को तुरंत फांसी पर चढ़ाया जाना जरूरी है जिस से दूसरे लोगों में खौफ पैदा हो और वे दुष्कृत्य करने से डरें.

लेखिका विनीता राहुरकर इस बात से सहमति जताते कानूनी सख्ती पर जोर देती यूएई की मिसाल देती हैं कि वहां इस तरह के मामले न के बराबर होते हैं जबकि हमारे देश क्या, शहर में ही, यह आएदिन की बात हो चली है. कुछ महिलाओं ने पौर्न साइट्स के बढ़ते चलन को इस की वजह माना तो कइयों ने पुरुषों के कामुक स्वभाव को इस के लिए जिम्मेदार ठहराया.

एक कठिनाई यह है कि अब एकल परिवारों के चलते कामकाजी मांबाप हमेशा चौबीसों घंटे बच्चों से चिपके नहीं रह सकते. इसी बात का फायदा दुष्कर्मी उठाते हैं. उन में और घात लगाए बैठे हिंसक शिकारियों में वाकई कोई फर्क नहीं होता, इसलिए रितु और विनीता की बात में दम है.

अगर अनुतोष प्रताप सिंह को अपराध साबित होने के 72 घंटों के अंदर फांसी दे दी गई होती तो क्या मोहन सिंह की हिम्मत बबली के साथ दुष्कर्म करने की होती. हालांकि निर्णायक तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता पर संभावना इस बात की ज्यादा है कि हां, वह हिचकता.

3 साल की परी को क्यों अदालत ला कर बयान देना पड़े, यह बात भी विचारणीय है कि दुष्कर्म के ऐसे मामलों में मां के बयान ही काफी हों.

क्या यह सभ्य समाज की निशानी है कि 3 साल की एक मासूम बच्ची, जो दुष्कर्म जैसे घृणित अपराध का शिकार हुई, को ही मुजरिमों की तरह अदालत में जाना पड़ा जहां वह दीनदुनिया से बेखबर, कागज की नाव से खेलते प्रतीकात्मक तौर पर यह बताती रही कि औरत की जिंदगी तो दुनिया में आने के बाद से ही कागज की नाव सरीखी होती है. पुरुष की कुत्सित मानसिकता का जरा सा प्रवाह ही उसे डुबो देने के लिए काफी है.

अपराधी को अपनी बात कहने, बचाव करने या सफाई का मौका ही न देना मुमकिन है कानूनन और मानव अधिकारों के तहत ज्यादती लगे पर यह हर्ज की बात नहीं. एकाध बेगुनाह फांसी चढ़ भी जाए तो बात ‘कोई बात नहीं’ की तर्ज पर हुई मानी जानी चाहिए. बजाय इस के कि बच्ची का बलात्कार होने के बाद ‘ऐसा तो होता रहता है’ कह कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पूरी हुई मान ली जाए. एक मासूम के प्रति यह विचार नहीं रखना चाहिए कि वह किसी बदले, प्रतिशोध या किसी तरह के लालच के लिए पुरुष को फंसाने की बात सोच पाएगी.

कमजोरी, धर्म और महिलाएं

लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, इस का सीधा सा मतलब यह शाश्वत सत्य है कि औरतें शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर कमजोर हैं. भोपाल की महिलाएं मानने को तैयार नहीं और देश की अधिसंख्य महिलाएं भी इस बात से सहमत नहीं होंगी कि महिलाओं के प्रति असम्मान और अपमान की शाश्वत मानसिकता में धर्म का बड़ा हाथ है. औरतों को तरहतरह से बेइज्जत करने के मर्द के डीएनए धर्म की देन हैं.

धर्म कहता है, स्त्री भोग्या है, पांव की जूती है, शूद्र है. फिर यही धर्म नारीपूजा का ढोंग करने लगता है. उसे देवी बताने लगता है. बात छोटी बच्चियों की करें तो नवरात्र के दिनों में घरघर में उन का पूजन होता है. उन्हें हलवापूरी खिलाया जाता है और उपहार व नकदी भी दी जाती है.

यह विरोधाभास देख लगता है कि बलि का बकरा तैयार किया जा रहा है. भोपाल के दुष्कर्म के मामलों के संदर्भ में यही धर्मशोषित महिलाएं चाहती हैं कि कृपया धर्म को बीच में न घसीटें, क्योंकि यह आस्था का विषय है.

पारिवारिक, सामजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक वजहों से परे महिलाओं को अपनी दुर्दशा को धर्म के मद्देनजर भी देखना होगा, तभी बच्चियों की सुरक्षा को ले कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

आस्था की दुहाई देने वाली महिलाएं खुद दोयम दरजे की जिंदगी जी रही हैं तो क्या खाक  वे बच्चियों की सुरक्षा पर ठोस कुछ बोल पाएंगी. असल दोष पुरुष की मानसिकता का है जो कानून या राजनीति से नहीं, बल्कि धर्म से होते हुए समाज में आई है.

लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था और अब तकनीक होने के चलते कोख में ही उन की कब्र बना दी जाती है. इन बातों की धर्म के मद्देनजर खूब आलोचना हुई कि लोग लड़का इसलिए चाहते हैं कि वह तारता है. अब बारी यह सोचने की है कि अब कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं किया जा रहा कि मांबाप में यह डर बैठ गया हो कि जब वे बच्ची को सुरक्षित नहीं रख सकते तो उसे दुनिया में क्यों लाएं.

औरतें शिक्षित तो हुई हैं पर पर्याप्त जागरूक नहीं हो पाई हैं. अपने अधिकारों की उन की लड़ाई 8 मार्च के दिन ही शबाब पर होती है. वह भी शोपीस जैसी ही. न तो वे स्वाभिमानी हो पाई हैं और न ही आत्मनिर्भर हो गई हैं.

भोपाल के हादसों को ले कर कोई धरनाप्रदर्शन नहीं हुआ. खुद को मुख्यधारा में मानने वाली महिलाएं क्लबों और किटी पार्टी में व्यस्त रहीं. ऐसे में इन से क्या उम्मीद की जाए, सिवा इस के कि उन्हें इस समस्या से कोई सरोकार नहीं.

बच्चियां इस सांचे में इस लिहाज से फिट बैठती हैं कि उन्हें हिफाजत देने वाला पुरुष खुद बागड़ बन कर खेत को खा रहा है और कानून के नाम पर हायहाय मचाई जाती है जो आंशिक तौर पर सच भी है. पुरुष की सामंती और उद्दंड मानसिकता का धर्म के आगे नतमस्तक होना, मासूम बच्चियों को वासना की खाई में ढकेलने जैसी ही बात है.

कैसे हो हिफाजत 

क्या मासूमों को हवस के इन शिकारियों से बचाया जा सकता है, यह सवाल बेहद गंभीर है जिस का जवाब यह निकलता है कि नहीं, आप कुछ भी कर लें, पूरे तौर पर बच्चियों को इन से बचाया नहीं जा सकता.

यह निष्कर्ष जाहिर है बेहद निराशाजनक है. पर ऐसे हादसों की संख्या कम की जा सकती है, इस के लिए इन टिप्स को ध्यान में रखना चाहिए :

– बच्ची को अकेला कभी न छोड़ें.

– किसी परिचित या अपरिचित पर कतई भरोसा न करें.

– स्कूल में वक्तवक्त पर जा कर बच्ची की निगरानी करें.

– बच्ची भयभीत या गुमसुम दिखे तो तुरंत उसे भरोसे में ले कर प्यार से उसे टटोलने की कोशिश करें कि माजरा क्या है. ऐसी हालत में उस के प्राइवेट पार्ट देखे जाना भी हर्ज की बात नहीं.

– चाचा ने भतीजी से या मामा ने किया भांजी का बलात्कार, जैसी हिला देने वाली खबरें अब बेहद आम हैं. जिन के चलते नजदीकी रिश्तेदारों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है कि कहीं उन की निगाह बच्ची पर तो नहीं. उन की बौडी लैंग्वेज और हरकतें देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं इस तरह का कोई कीड़ा उन के दिमाग में तो नहीं कुलबुला रहा.

– उसे अकेला न खेलने दें, निगरानी करते रहें, अंधेरा होने के बाद घर से बाहर न जाने दें, जैसी सावधानियों के साथ अहम बात यह है कि स्कूल में उस की 6-8 घंटे की जिंदगी है. इसलिए स्कूल चाहे प्राइवेट हो या सरकारी, यह जरूर सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां महिला कर्मचारियों की संख्या ज्यादा हो और इमारत में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हों.

– स्कूल बस के कंडक्टर और ड्राइवरों की इस लिहाज से निगरानी करते रहना चाहिए कि इन्हें लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स से छेड़छाड़ करने का पूरा मौका मिलता है. अब जरूरत महसूस होने लगी है कि लड़कियां जिस वाहन में जाएं उस में एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य हो.

– लड़की को अगर होस्टल या झूलाघर में छोड़ना पड़े, तो उस की सतत निगरानी जरूरी है. बीते दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था जिस में होस्टल या अनाथाश्रम में एक महिला एक छोटी बच्ची को जानवरों की तरह पीट रही थी. यह किस देश की घटना है, वीडियो से स्पष्ट नहीं है पर महिला बेहद व्याभिचारी भी है, यह भी दिखता है कि परपीड़न में उसे सुख मिलता है.

मेरा बौयफ्रैंड फोन या मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं करता, ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए ?

सवाल

मेरी उम्र 25 वर्ष है. मेरा बौयफ्रैंड है और हम रिलेशनशिप में हैं. वैसे तो मेरे और बौयफ्रैंड के बीच सब ठीक है. हम जब भी मिलते हैं वह मुझ पर जी भर कर प्यार लुटाता है. मेरी सारी बातें मानता है. मुझे पूरा यकीन दिला देता है कि उस की जिंदगी में मैं बहुत इंर्पोटैंट हूं. लेकिन दोबारा मिलने का वादा कर के जैसे ही हम अलग हो अपनीअपनी राह चल पड़ते हैं मुझे ऐसा लगता है जैसे वह मुझे भूल गया है. न तो फोन करता है और न ही कोई मैसेज. मैं जब कोई मैसेज करती हूं तो उस का टू दी पौइंट जवाब दे देता है.

जब फोन पर मैं उस से यह शिकायत करती हूं कि अलग होते ही तुम्हारा बिहेवियर चेंज क्यों हो जाता है तो वह कहता है कि यह मेरी गलतफहमी है. उस का नेचर ही कुछ ऐसा है. फोन पर ज्यादा मैसेज और लंबी बात करने की उस की आदत नहीं है. जौब ऐसी है कि बिजी रहता हूं. दोबारा जब फिर मिलता है तो अपने प्यार और लुभावनी बातों से मेरा गुस्सा शांत कर देता है लेकिन दूर जाते ही फिर उसी ढर्रे पर आ जाता है. उस का ऐसा व्यवहार मुझे परेशान कर देता है. ऐसा लगता है जैसे मैं ही उस के प्यार में दीवानी हूं उसे मेरी परवाह ही नहीं. क्या मेरा ऐसा सोचना ठीक है?

जवाब

आप कुछ ज्यादा ही सोच रही हैं. आप खुद मानती हैं कि जब आप का बौयफ्रैंड आप से मिलता है तो पूरी तरह से आप का होता है. अपना 100 परसैंट बेस्ट देने की कोशिश करता है. रही बात उस के कम फोन करने की और मैसेज न करना तो हो सकता है वाकई वह अपने काम में बिजी रहता हो. आप खाली बैठे हों तो जरूरी नहीं कि वह भी खाली हो.

अगर आप उस का प्यार आजमाना ही चाहती हैं तो उस से कहें कि वह रात में या सुबह जागने के बाद एक बार आप को फोन करे, ऐसा पूरा एक हफ्ता करे. देखिए वह ऐसा करता है या नहीं. अगर करता है तो वाकई वह आप को खुश रखना चाहता है, वो दूसरी बात है कि वह सच में पूरा दिन काम में बिजी रहता हो.
रिलेशनशिप में अपने पार्टनर की स्थिति को समझना चाहिए. उस की नेचर के साथ थोड़ाबहुत समझौता करना पड़ता है. जो समझौता नहीं करते तो बात आखिर में बे्रकअप पर खत्म होती है. आप खुद थोड़ा समझदार बनिए. अपने बौयफ्रैंड की कंडीशन समझने की कोशिश करें.

प्यार के साथ जौब भी तो जरूरी है. फिर आगे चल कर अगर आप दोनों विवाह कर लेते हैं तो आप की यह शिकायत दूर हो जाएगी कि वह आप से अलग होने के बाद बिजी हो जाता है. विवाह के बाद तो सारा सिनेरियो ही चेंज हो जाएगा. प्यार तो वह आप से करता ही है. शादी के बाद वह आप के प्यार में कितना और कैसे डूबा रहे यह आप बेहतर जानती हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

हरियाली तीज पर पत्नी को दें ऐसे गिफ्ट्स, जिसे देखकर हो जाएंगी खुश

हरियाली तीज का पर्व इस बार 19 अगस्त को मनाया जा रहा है. ये दिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है तो अगर आप उनके इस दिन को और भी खास बनाना चाहते हैं तो उन्हें इस मौके पर कुछ यूजफुल गिफ्ट दे सकते हैं, तो हम आपके लिए कुछ ऐसे गिफ्ट ऑप्शन्स लेकर आए हैं.

1. मंगलसूत्र

आज के फैशनेबल दौर में महिलाएं यूनिक दिखने वाली जूलरी से खुद को सजाना पसंद करती हैं. ऐसे में मंगलसूत्र की भी कई तरह की वैरायटी मार्केट में देखने को मिल जाती है. आप अपनी पत्नी के लिए काले मोतियों से सजा पतली चेन वाला मंगलसूत्र बनवा सकते हैं, जिसका पेंडेंट कुंदन या रंगीन स्टोन्स से सजा हो. इन दिनों इस तरह के मंगलसूत्र काफी चलन में हैं, जो हर तरह के आउटफिट्स के साथ मैच कर जाते हैं.

2. ईयररिंग्स

हर उम्र की महिलाएं ईयररिंग्स की ढेरों वैराइटी अपने वॉर्डरोब में रखना चाहती हैं. ऐसे में इस बार आप अपनी पत्नी को सुंदर डिजाइन वाले आर्टिफिशियल ईयररिंग्स गिफ्ट कर सकते हैं. रोज़ गोल्ड प्लेटेड ईयररिंग्स में एंटीक स्टड्स या टियरड्रॉप स्टाइल में आपको ढेरों ऑप्शन मिल जाएंगे. वहीं क्लासिक पर्ल हूप ईयररिंग्स भी ले सकते हैं.

3. बैंगल्स

सिंगल जूलरी में आप खूबसूरत गोल्ड प्लेटेड बैंगल्स देकर भी पत्नी को खुश कर सकते हैं. इसमें अमेरिकन डायमंड से लेकर स्टोन वर्क वाले बैंगल्स हाथों में बेहद सुंदर लगते हैं. ये साड़ी या सूट के साथ पहनने में रॉयल लुक क्रिएट करते हैं. मार्केट में ये आपको अफोर्डेबल प्राइज पर मिल जाएंगे. हालांकि अगर आपकी पत्नी को गोल्ड जूलरी पहनना पसंद है, तो आर्टिफिशियल गोल्ड डिजाइन के कड़े भी खूब ट्रेंड में हैं, जो पत्नी की कलाइयों की खूबसूरती बढ़ा देंगे.

4. मीनाकारी रिंग

बाजार में अट्रैक्टिव रिंग्स की कमी नहीं है. सोने और हीरे की अंगूठी से हटकर आर्टिफिशियल रिंग्स का क्रेज भी महिलाओं में खूब बढ़ गया है. जिसमें मीनाकारी डिजाइन वाली रिंग बेस्ट रहेगी. पत्नी के लिए आप किसी भी कलर और हैवी डिजाइन में रिंग खरीद सकते है, जो साड़ी और सूट के साथ बेहद जंचते हैं.

5. फैंसी पायल

पायल या पाजेब सोलह श्रृंगार में से एक मानी जाती हैं. हालांकि चांदी की पायल की ढेरों वैराइटी महिलाओं के पास आमतौर पर मौजूद ही रहती हैं. ऐसे में आप रंगीन स्टोन, कुंदन या मीनाकारी से सजी पायल गिफ्ट कर सकते हैं, जो पहनने में काफी हल्की होती हैं और खूबसूरत भी लगती हैं.

Raksha Bandhan : सत्य असत्य- क्या निशा ने कर्ण को माफ किया?

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स्वत्रंता दिवस पर उर्फी जावेद ने पहनी ऐसी ड्रेस, ट्रोल्स के उड़ गए होश

कल भारत की आजादी का दिन था ऐसे में कई सिलेब्स नए नए लिबास में नजर आए. ऐसी ही फैशन आइकॉनिक उर्फी जावेद भी कुछ नए लिबास में नजर आई है जिसे देखने वाले हैरान है. उर्फी अपनी ड्रेसिंग स्टाइल के लिए जानी जाती है. उन्होने स्वत्रंता दिवस के मौके पर सलवार सूट पहन सबको हैरान कर दिया है. देखने वाले भरोसा नहीं कर पा रहे है.

 

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उर्फी जावेद ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से अपनी एक तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि उर्फी जावेद ने ग्रीन कलर का सूट पहना और इसके साथ ही फ्लोरल दुपट्टा कैरी किया हुआ है. इसमें वह काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं.उर्फी जावेद की इस तस्वीर को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं और कमेंट भी कर रहे हैं. उर्फी जावेद ने अपनी इस नई तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, ‘स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं. हमारे देश जैसा कोई देश नहीं है. मैं कहीं और कभी नहीं सकती.

 

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बताते चले की उर्फी जावेद की तस्वीर पर लोग रिएक्शन दे रहे हैं.एक फैन ने लिखा है, ‘उर्फी के लिए लाइक बनता है.’ एक फैन ने लिखा है, ‘सुंदर लग रही हो.’ एक फैन ने लिखा है, ‘आप अच्छी लग रही हो.’ एक फैन ने लिखा है, ‘बहुत सुंदर.’ वहीं, तमाम यूजर्स ने उन पर तंज कसने का मौका नहीं छोड़ा है. एक यूजर ने लिखा है, ‘फोटोशॉप किया लगता है.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘लगता है उर्फी जावेद का आईडी हैक हो गया है.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘चलो आज तो कुछ अच्छा ड्रेस पहन ली हो.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘एल्विश यादव के कहने पर ग्रीन सूट पहना है..’

 

 

यूक्रेन की सिंगर उमा शांति ने तिरंगे का किया अपमान, वीडियो हुआ वायरल

मंगलवार को पूरे देश में धूम-धाम से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, पूरे देश में कई जगह कार्यक्रम हुए. वहीं अब पुणे से तिरंगे का अपमान होने की खबर आ रही है. शांति पीपल बैंड की यूक्रेन की सिंगर उमा शांति के खिलाफ भारतीय तिरंगे का अपमान करने का मामला दर्ज किया गया है. सिंगर ने पुणे के मुंडवा में एक क्लब में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया और कानूनी अपराध किया, जिसकी कार्यवाही शुरू कर दी गई है.

दरअसल, यह घटना स्वतंत्रता दिवस की नहीं बल्कि रविवार रात की है. जो कैमरे में रिकॉर्ड हो गई.बाद में यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित अपराध का वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जंगल की आग की तरह फैलने के बाद हवलदार तानाजी देशमुख द्वारा बैंड शांति पीपल की प्रमुख गायिका उमा के खिलाफ मुंढवा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया.

 

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एफआईआर के अनुसार, यूक्रेनी सिंगर ओम शांति ने अपने दोनों हाथों में तिरंगे लेक डांस किया और बाद में झंडे दर्शकों की ओर फेंक दिए. भारत दौरे पर आए यूक्रेनी बैंड – शांति पीपल – ने पिछले हफ्ते बेंगलुरु और भोपाल मे पर्दशन किया था. रविवार को पुणे में इस बैंड की दूसरी प्रस्‍तुति हुई. पुणे शहर में इसने पिछले साल अक्टूबर में भी कार्यक्रम पेश किया था.

जानें पुरुषों के लिए कैसे फायदेमंद होता है बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा एक ऐसा इंग्रेडिएंट है जो हर तरह की प्रौब्लम में कामगार साबित होता है और ये आसानी से आप सभी के घरों में मिल जाता है अगर घर पर नहीं तो आसपास की दुकान पर भी आसानी से मिल जाता है. जिसका उपयोग सिर्फ खाना पकाने में ही नहीं किया जाता है बल्कि ऐसी कई चीजे है जहां इनका उपयोग करके कई तरह की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है. सोडा आपके बाल, स्किन, बॉडी और पूरी शरीर का स्वस्थ रखने के काम आता है.

1. बालों और स्कैल्प को करता है साफ

बेकिंग सोडा आपके बालों और स्कैल्प को गहराई से साफ करने में उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन एक शोध पत्र को छोड़कर इस दावे का कोई वैज्ञानिक समर्थन नहीं है. यह दानेदार सामग्री आपके बालों के रोम में जमा तेल, गंदगी, उत्पादों के अवशेष और अन्य अशुद्धियों को हटाने के लिए एक जेंटल स्क्रबिंग प्रदान कर सकती है.

2. नहाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है

बेकिंग सोडा में एक एल्कलाइन पीएच होता है, जो स्किन पर एसिड को बेअसर करने में मदद करता है. सबसे पहले, यह स्किन की सतह पर जमा पसीने, सीबम और डेड स्किन सेल्स को तोड़ता है. फिर, स्किन पर इसके छोटे-छोटे दानों की मालिश करने से इन अशुद्धियों को दूर करने में मदद मिलती है, आपके रोमछिद्र खुलते हैं और आपकी स्किन कोमल, चिकनी और चमकदार बनती है.

3. खुजली की समस्या में करता है मदद

एक्जिमा, डर्मेटाइटिस, सोरायसिस, इचिथोसिस और रोसैसिया जैसे पुराने रोगों की की स्थिति में सूजन एक खास विशेषता होती है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों पर खुजली, सूखी, पपड़ीदार, लाल और इरिटेड पैच के रूप में प्रकट होती है. बेकिंग सोडा अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इन लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकता है.

4. पीले दांतों को सफेद करता है

बेकिंग सोडा आपके दांतों पर जमा प्लाक और टैटार को घोलने और ढीला करने में मदद करता है और उन्हें इनेमल से हटाने के लिए एक स्क्रब के रूप में काम करता है. यह दांतों की गहरी सफाई करता है और दांतों के जिद्दी दागों से छुटकारा पाने में मदद करता है. इसका बार-बार इस्तेमाल करने पर यह आपके दांतों को सफेद बनाता है.

 

जानें क्यों सेक्स करते समय छेड़छाड़ करना है जरूरी, पढ़ें खबर

पतिपत्नी में छेड़छाड़ तो बहुत जरूरी है, इस के बिना तो जिंदगी में कोई रस ही नहीं, इसलिए यह जरूरी है कि पति की छेड़छाड़ का जवाब पत्नी पूरे जोश से दे और पत्नी की छेड़छाड़ का जवाब पति भी दोगुने मजे से दे. इस से जिंदगी में हमेशा नएपन का एहसास होता है.

अगर जिस्मानी रिश्ता कायम करने के दौरान या किसी दूसरे समय पर भी पति अपनी पत्नी को सहलाए और उस के जवाब में पत्नी पूरे जोश के साथ प्यार से पति के गालों को चूमते हुए अपने दांत गड़ा दे, तो उस मजे की कोई सीमा नहीं होती. पति तुरंत सेक्स सुख के सागर में डूबनेउतराने लगता है. इसी तरह पत्नी भी अगर जिस्मानी रिश्ता कायम करने से पहले या उस दौरान पति से छेड़छाड़ करते हुए उस के अंगों को सहला दे, तो कुदरती बात है कि पति जोश से भर उठेगा और उस के जोश की सीमा भी बढ़ जाएगी.

कभीकभी यह सवाल भी उठता है कि क्या जिस्मानी रिश्ता सिर्फ सेक्स सुख के लिए कायम किया जाता है? क्या दिमागी सुकून से उस का कोई लेनादेना नहीं होता? क्या जिस्मानी रिश्ते के दौरान छेड़छाड़ करना जरूरी है? क्या छेड़छाड़ सेक्स सुख में बढ़ोतरी करती है? क्या छेड़छाड़ से पतिपत्नी को सच्चा सुख मिलता है? इसी तरह और भी कई सवाल हैं, जो पतिपत्नी को बेचैन किए रहते हैं.

जवाब यह है कि जिस्मानी रिश्तों के दौरान छेड़छाड़ व कुछ रोमांटिक बातें बहुत जरूरी हैं. इस के बिना तो सेक्स सुख का मजा बिलकुल अधूरा है. जिस्मानी रिश्ता सिर्फ सेक्स सुख के लिए ही नहीं, बल्कि दिमागी सुकून के लिए भी किया जाता है.

कुछ पति ऐसे होते हैं, जो पत्नी की मरजी की बिलकुल भी परवाह नहीं करते, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. पत्नी की चाहत का भी पूरा खयाल रखना चाहिए, नहीं तो आप की पत्नी जिंदगीभर तड़पती ही रह जाएगी. कुछ औरतें बिलकुल ही सुस्त होती हैं. वे पति को अपना जिस्म सौंप कर फर्ज अदायगी कर लेती हैं.

उन्हें यह भी एहसास नहीं होता कि इस तरह वे अपने पति को अपने से दूर कर रही हैं. कुछ पति जिस्मानी रिश्ता तो कायम करते हैं और जल्दबाजी में अपनी मंजिल पर पहुंच भी जाते हैं, परंतु उन्हें इतना भी पता नहीं होता कि इस के पहले भी और कई काम होते हैं, जो उन के मजे को कई गुना बढ़ा सकते हैं.

कुछ औरतें शरमीली होती हैं. वे जिस्मानी रिश्तों से दूर तो होती ही हैं, छेड़छाड़ को भी बुरा मानती हैं. अब आप ही बताइए कि ऐसे हालात में क्या पत्नी पति से और पति पत्नी से खुश रह सकता है?

नहीं न… तो फिर ऐसे हालात ही क्यों पैदा किए जाएं, जिन से पतिपत्नी एकदूसरे से नाखुश रहें? इसलिए प्यार के सुनहरे पलों को छेड़छाड़, हंसीखुशी व रोमांटिक बातों में बिताइए, ताकि आने वाला कल आप के लिए और ज्यादा मजेदार बन जाए.

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