हेल्दी सेक्स चाहिए तो सेक्स के दौरान करें ऐसी बातें

सेक्स के वक्त केवल सेक्स ही जरूरी नहीं है, बल्कि इस दौरान आप अपने पार्टनर के साथ कैसा वक्त बिताते हैं ये भी मायने रखता है. उस दौरान आप अपने पार्टनर के साथ कितना इंजौय करते हैं ये आपकी बातों पर भी खासा निर्भर करता है.

सेक्स केवल खानापूर्ति का तरीका नहीं हैं. अगर आप इसे खानापूर्ति मानते हैं तो इससे ना तो आपका सेक्स पार्टनर और न ही आप कुछ संतोषजनक परिणाम हासिल कर सकेंगे. अगर आप सेक्स के दौरान ज्यादा इंजौय करना चाहते हैं तो ये जरूरी है कि आप दोनों के बीच एक मजबूत संवाद हो, तभी आप एक बेहतर सेक्स लाइफ का आनंद ले सकेंगे.

  • क्यों जरूरी है सेक्स संवाद

सेक्स के दौरान बात से आप प्यार, अपनापन, आकर्षक और ज़रूरत को बेहतर ढ़ंग से समझा सकते हैं. इसलिये सेक्स को लेकर बिना किसी झिझक और शर्म के इसके हर पहलू पर संवाद होना चाहिए.

  • करें शरीर के बारे में बात

अपने दोनों एक दूसरे की पसंद के बारे में बता करें. एक दूसरे के शरीर को अपनाएं और बात करें कि आपको एक दूसरे के शरीर का कौंन सा हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद है और आप उसके बारे में क्या सोचते हैं.

  • नएपन के बारे में बात

लंबे वक्त तक सेक्स के बाद आपमें या आपके पार्टनर में सेक्स को ले के अरूचि हो सकती है. पर इससे घबराने की जरूरत नहीं है. जरूरी ये है कि इस विषय पर खुल कर बात करें. इसके लिए सेक्स लाइफ में एक्स्पेरिमेंट करें. पार्टनर के साथ ऐसे प्रयोग आपकी सेक्स लाइफ में ताजापन बनाए रखते हैं.

  • सेक्स के दौरान हंसी मजाक करें

सेक्स के दौरान करें हंसी मजाक बेहद जरूरी होता है. इस दौरान आप डबल मीनिंग वाले आपके नॉटी जोक्स उन पलों का मजा कई गुना बढ़ा देतें हैं.

  • मूव्स के बारे में बात

सेक्स के दौरान आपके मूव्स आपके लिए बहुत फायदेमंद है. इसलिए पार्टनर से पूछें कि उसे कौन सा मूव ज्यादा पसंद है और उस पर आप खुल के बाते करें.

  • परफार्मेंस और साइज

महिलाएं बेडरूम परफार्मेंस और खासतौर से अपने पार्टनर की साइज के बारे में विशेष रुची रखती हैं. वे अपनी सहेलियों से बेडरूम परफार्मेंस की कुछ मजेदार बातों और कामों को खुलकर शेयर करती हैं. साथ ही नए पोजिशन के बारे में भी बातें करती हैं. इस लिए आप भी इन मामलों पर खुल के बाते करें. इससे आपके पार्टनर को कौन्फिडेंस आएगा.

देशभर में फैला शातिर ठगों का जाल

भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बीमा पौलिसी कराना आम बात है. अपनी अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से ज्यादातर लोग बीमा पौलिसी खरीदते हैं. इस के लिए सरकारी, गैरसरकारी कंपनियां और बैंक अपने नियमों के हिसाब से पौलिसी करते हैं. उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के पल्लवपुरम निवासी अंबरीश गुप्ता ने भी एक नामी प्राइवेट बैंक से 14 बीमा पौलिसी करा रखी थीं, जिन की कीमत 54 लाख रुपए थी. 16 सितंबर, 2016 की एक शाम अंबरीश घर पर ही थे. अचानक उन के मोबाइल पर एक अंजान नंबर से फोन आया. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से एक व्यक्ति की आवाज सुनाई दी, ‘‘हैलो गुड इवनिंग सर, आप अंबरीशजी बोल रहे हैं न?’’

‘‘जी हां, आप कौन?’’

‘‘सर, मैं आईसीआईसीआई के फंड डिपार्टमैंट से औफीसर राहुल बात कर रहा हूं.’’ फोनकर्ता ने अपना परिचय दिया तो वह थोड़ा सतर्क हो गए, क्योंकि उन की बीमा पौलिसी इसी कंपनी में थी. उन्होंने जिज्ञासावश पूछा, ‘‘बताइए, राहुलजी.’’

‘‘सर, आप को बताना चाहता हूं कि आप की पौलिसी की कीमत अब 75 लाख रुपए हो गई है. अब आप को पूरे 21 लाख रुपए का मुनाफा होगा.’’ उस ने गर्मजोशी से बताया तो अंबरीश के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव उभर आए.

‘‘धन्यवाद, यह तो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है.’’

‘‘लेकिन एक प्रौब्लम है सर.’’

‘‘कैसी प्रौब्लम?’’ अंबरीश को एकाएक झटका सा लगा.

‘‘दरअसल सर, हमें आज रात शेयर मार्केट में गिरावट आने के संकेत मिले हैं. अगर ऐसा हुआ तो पौलिसी की वैल्यू 75 लाख से गिर कर केवल 43 लाख रह जाएगी. आप समझ सकते हैं कि शेयर बाजार का उतारचढ़ाव किसी के हाथ में नहीं होता.’’

‘‘यह तो वाकई परेशानी की बात है.’’

‘‘बिलकुल सर, लेकिन आप हमारे रौयल कस्टमर हैं. आप को सूचना देना हम ने अपना फर्ज समझा. हम चाहते हैं, आप को पौलिसी से भरपूर फायदा हो. आप अपनी पौलिसी को तत्काल बंद करने की अनुमति दें तो इस नुकसान से बच सकते हैं. 3 महीने के अंदर कंपनी आप को पूरे 75 लाख रुपए देगी.’’

उस की बात सुन कर अंबरीश ने तेजी से दिमाग दौड़ाया. इस में कोई बुराई नहीं थी. उन्हें 54 लाख के बदले 75 लाख रुपए मिल जाने थे. यानी उन्हें शुद्ध 21 लाख रुपए का फायदा हो रहा था. कुछ पल की खामोशी के बाद वह बोले, ‘‘पैसा तो मुझे मिल जाएगा, लेकिन मैं पौलिसी भी जारी रखना चाहता हूं.’’

‘‘आप इस की फिक्र न करें सर, हम आप को नई पौलिसी दे देंगे. बैंक से आप को कल फोन आ जाएगा.’’

‘‘ओके.’’ अंबरीश ने फोन रख दिया.

बैंक के औफीसर ने खुद काल की थी, जिस से यह बात साफ थी कि बैंक उन का हित चाहता था. वह सोच कर मन ही मन खुश हुए कि घाटे से बच गए. वाकई यह खुशी की ही बात थी.

अगले दिन बैंक से एक लड़की का फोन आया तो उस ने उन्हें कुछ आकर्षक लाभ वाली पौलिसियों के बारे में समझाया. साथ ही यह भी बताया कि उन्हें 21 लाख का जो मुनाफा होने जा रहा है, उतने रुपए उन्हें जमा कराने होंगे. यह रकम बैंक द्वारा उन्हें 3 महीनों में लौटा दी जाएगी. इस के बाद कई दिनों तक बातों का सिलसिला चलता रहा. मुनाफे के लालच में अंबरीश मोटी रकम का ख्वाब देख रहे थे. उन्होंने न केवल 21 लाख रुपए फोनकर्ताओं द्वारा बताए गए खातों में जमा किए बल्कि नई पौलिसी के रुपए भी जमा कर दिए.

अलगअलग समय पर कभी इनकम टैक्स, कभी सिक्योरिटी मनी तो कभी पौलिसी के नाम पर अंबरीश ने करीब 80 लाख रुपए जमा करा दिए. 2 महीने बाद दिसंबर में रकम वापसी की बात आई तो फोनकर्ता आश्वासन देने वाला अंदाज अपनाने लगे. जिन लोगों के फोन उन के पास आते रहे थे, उन्होंने धीरेधीरे उन से संपर्क करना छोड़ दिया. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अंबरीश ने कई लोगों से विचारविमर्श किया. जिस के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि उन्हें ठगा गया है.

इस बात का अहसास होते ही उन की रातों की नींद उड़ गई. मामला मोटी रकम का था. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह ठगी का शिकार हो जाएंगे. उन्होंने इस बारे में एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ से मुलाकात कर के शिकायत की.

मामला साइबर अपराध से जुड़ा हुआ था. निस्संदेह वह किसी पेशेवर रैकेट का शिकार हुए थे. यह भी तय था कि अंबरीश जैसे न जाने कितने लोग इस तरह ठगी का शिकार हुए होंगे. मामला गंभीर था, लिहाजा उन्होंने मुकदमा दर्ज कर के तत्काल काररवाई करने के निर्देश दिए. एसएसपी के निर्देश पर अंबरीश की तरफ से पल्लवपुरम थाने में ठगी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. अंबरीश ने जिन खातों में पैसा जमा किया था उन की और उन मोबाइल नंबरों की डिटेल्स थानाप्रभारी सतेंद्र प्रकाश को उपलब्ध करा दी, जिन पर उन की बात होती रही थी.

मामला चूंकि साइबर क्राइम का था लिहाजा एसपी (सिटी) आलोक प्रियदर्शी व सीओ (क्राइम) ज्ञानवती देवी के निर्देश पर यह केस साइबर सेल को स्थानांतरित कर दिया गया. साइबर सेल के प्रभारी कर्मवीर सिंह ने अपने साथी पुलिसकर्मियों सोनू कुमार, उमेश वर्मा, कपिल कुमार, विजय कुमार व केस के जांच अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी के साथ मामले की जांच शुरू कर दी.

पुलिस बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी करने वालों तक आसानी से पहुंच सकती थी, लिहाजा इसी दिशा में जांच आगे बढ़ाई गई. जिन खातों के जरिए पैसे लिए गए थे, उन में एक खाता गाजियाबाद जिले की बैंक शाखा में किसी हरलीन कौर के नाम पर था.

पुलिस टीम गाजियाबाद पहुंची और हरलीन का पता हासिल करने के साथ ही खाते की डिटेल्स भी प्राप्त कर ली. हरलीन के खाते में लाखों के लेनदेन का ब्यौरा दर्ज था. इस से यह बात साफ हो गई कि यह रैकेट बड़े पैमाने पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था.

पुलिस ने उन सभी मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स और पते हासिल कर लिए जिन से अंबरीश को फोन किए जाते थे. हालांकि ऐसे सभी नंबर बंद हो चुके थे. ये सभी नंबर फरजी आईडी पर लिए गए थे, लेकिन जिन मोबाइल हैंडसेट में वे नंबर इस्तेमाल हुए थे, उन पर अब दूसरे नंबर चल रहे थे. सर्विलांस की मदद से पुलिस ने ऐसे सभी नंबरों का इस्तेमाल करने वालों का ब्यौरा हासिल कर लिया.

6 जनवरी, 2017 को पुलिस टीम गाजियाबाद जा पहुंची. सादे कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मी राजनगर स्थित एक औफिस में पहुंचे. वहां कई युवक व एक युवती काम कर रहे थे. उन के अंदर दाखिल होते ही कुरसी पर बैठे एक युवक ने पूछा, ‘‘कहिए?’’

‘‘हमें आप के बौस से मिलना है?’’ एक पुलिस अफसर ने कहा.

‘‘क्या काम है?’’

‘‘काम बड़ा है, इसलिए हम उन्हें ही बताएंगे. वैसे क्या नाम है आप के बौस का?’’

‘‘जी, शमशेर सर.’’

कुछ ही देर में उस युवक ने उन लोगों को एक केबिन में भेज दिया. अंदर बैठे एक युवक ने रिवौल्विंग चेयर पर झूलते हुए पूछा, ‘‘बताइए, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’

‘‘हमें अपने रुपए वापस चाहिए.’’

‘‘मतलब?’’ वह चौंका.

‘‘हम मेरठ से आए हैं और अंबरीश के रिश्तेदार हैं. बीमा पौलिसी का रुपया है, इतना तो आप समझ ही गए होंगे.’’ यह सुन कर उस युवक को बिजली जैसा झटका लगा. वह उन्हें अर्थपूर्ण नजरों से देखने लगा. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ सा नजर आ रहा था.

‘‘मैं कुछ समझा नहीं…’’ उस ने अंजान बनने का नाटक किया.

‘‘हमारे साथ चलिए, हम सब समझा देंगे.’’ कहने के साथ ही पुलिस ने उसे और वहां मौजूद उस के साथियों को हिरासत में ले लिया. इस बीच वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी वहां आ गए थे.

औपचारिक पूछताछ में पुलिस ने सभी के नामपते मालूम किए. उन की बातों से यह साफ हो गया था कि वे लोग ठगी की कंपनी चला रहे थे. गिरफ्तार लोगों में शमशेर उर्फ बबलू, पंकज धरेजा, राज सिंघानिया, सुधांशु उर्फ रोहित, अजय शर्मा व हरलीन कौर शामिल थे. इन में शमशेर दिल्ली के मालवीय नगर, पंकज फरीदाबाद, हरियाणा और अन्य सभी गाजियाबाद के रहने वाले थे. पुलिस ने मौके से कई लैपटौप, 7 मोबाइल फोन, बैंकों की पासबुक, चैकबुक, कई एटीएम कार्ड और अन्य कई दस्तावेज बरामद किए.

पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर के मेरठ ले आई और उन से विस्तार से पूछताछ की. पूछताछ में एक ऐसे गिरोह की कहानी निकल कर सामने आई जो बीमा कराने वाले लोगों को सपने दिखा कर ठगी का गोरखधंधा कर रहा था. एक दसवीं पास युवक ने अपने साथियों के साथ मिल कर सपनों का ऐसा जाल बुना कि उस में कई लोग फंस गए.

दरअसल, शमशेर उर्फ बबलू महज 10वीं पास युवक था. समाज में ऐसे युवाओं की कोई कमी नहीं है, जो आधुनिकता की चकाचौंध से प्रभावित हो कर सोचने लगते हैं कि वे थोड़ी कोशिश करें तो बहुत कम समय में सफलताओं की इमारत खड़ी कर सकते हैं. उन की चाहत होती है कि उन के पास सभी भौतिक सुविधाएं और ढेर सारी दौलत हो. महत्त्वाकांक्षाओं की हवाएं जब दिलोदिमाग में सनसनाती हैं तो सोच खुदबखुद बदल जाती है. सोच की यह चाहत उन्हें इसलिए बुरी नहीं लगती, क्योंकि इसी के चलते उन्हें ख्वाबों में कल्पनाओं के खूबसूरत महल नजर आने लगते हैं.

शमशेर भी कुछ ऐसी ही सोच का शिकार था. उस का ख्वाब था कि किसी भी तरह उस के पास इतनी दौलत हो कि जिंदगी ऐशोआराम से बीते. वक्त के दरिया में तैराकी करते हुए उस ने दिनरात बहुत दिमाग दौड़ाया. यह अलग बात थी कि उसे कुछ समझ नहीं आया. नौकरी के लिए भी उस ने कई जगह हाथपैर मारे.

जब उसे मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली तो उस ने एक फाइनैंस कंपनी में बतौर क्लर्क नौकरी शुरू कर दी. यह कंपनी लोगों को बैंकों से लोन दिलाने का काम करती थी. इस के बदले वह उन लोगों से तयशुदा कमीशन लेती थी, जिन का लोन पास कराया जाता था. दरअसल, यह कंपनी लोगों को सपने दिखा कर ठगती थी. कुछ समय शमशेर ने एक बीमा कंपनी में भी नौकरी की.

शमशेर को ठगी की राह आसान लगी. उस ने कुछ ऐसा ही करने की ठान ली और नौकरी छोड़ दी. इंसान जैसा होता है, उसे वैसे ही लोग भी मिल जाते हैं. शमशेर ने इस मुद्दे पर कुछ दोस्तों से बात की तो उन लोगों ने बीमा पौलिसी कराने वाले लोगों को ठगने की योजना बनाई.

उस ने अपने साथी आशीष, सुमित, दिनेश, संजू चौहान के साथ मिल कर बीमा एजेंटों को लालच दे कर कुछ बीमा पौलिसी धारकों का ब्यौरा हासिल किया. इस के बाद वे उन्हें फोन कर के लालच के जाल में फंसाते और अपने खातों में पैसा जमा करा लेते. उन्हें कामयाबी मिली तो उन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

बाद में उन्होंने अपने साथी राज सिंघानिया, पंकज धरेजा, सुधांशु, अजय व हरलीन कौर को भी अपने साथ जोड़ लिया. सभी महत्त्वाकांक्षी थे और करोड़पति बनने का सपना संजोए हुए थे. इन में पंकज ने बीकौम व हरलीन ने बीटेक की शिक्षा हासिल की हुई थी. जबकि बाकी सभी 10वीं या 12वीं तक पढ़े थे. राज सिंघानिया खुद भी बीमा एजेंट था.

खास बात यह भी थी कि सुमित व दिनेश एक ऐसी कंपनी में नौकरी कर चुके थे, जिस के पास एक दरजन से ज्यादा पौलिसी करने वाली कंपनियां जुड़ी हुई थीं. इन लोगों ने शातिराना अंदाज में वहां से डाटा चोरी कर लिया.

शुरुआत में गिरोह की ठगी का शिकार हुए लोगों ने ठगी की शिकायत पुलिस से नहीं की तो उन के हौसले बढ़ गए. उन्हें लगा कि देश में लोगों को लालच दे कर ठगने का काम सब से आसान है. उन्होंने गाजियाबाद में अपना औफिस बना लिया. साथ ही फरजी पतों पर कई मोबाइल नंबर हासिल कर लिए. फिर वे फोन कर के अपने शिकार से बेहद लुभावनी बातें करते और उन्हें दिन में ही उन के ही पैसे से  जिंदगी को जन्नत बनाने के सुनहरे ख्वाब दिखाते. स्वार्थसिद्धि के लिए उन की बातें व योजनाएं इतनी लच्छेदार होती थीं कि अच्छेभले आदमी की सोच कुंद हो जाए.

उन का ठगी का धंधा चल निकला. उन का शिकार हुआ जो व्यक्ति अपनी रकम वापस पाने के लिए फोन कर के परेशान करता था, उस नंबर को वे हमेशा के लिए बंद कर देते थे. ऐसा कर के उन्हें मोबाइल नंबरों से पकड़े जाने का डर नहीं रहता था. कई बीमा पौलिसी धारक ऐसे भी होते थे जो 2 नंबर की रकम से मोटी पौलिसी खरीदते थे. भेद खुलने के डर से वे ठगी का शिकार हो कर भी चुप रह जाते थे. गिरोह के निशाने पर ऐसे लोग ही ज्यादा होते थे, जिन की पौलिसी लाखों में होती थी. इन ठगों ने खूब कमाई की. सभी लोग लग्जरी लाइफ जीते थे.

राज सिंघानिया जिस फ्लैट में रहता था, उस का किराया ही 20 हजार रुपए महीना था. इतना ही नहीं, वह अपने नौकर को 8 हजार रुपए महीना वेतन देता था. उस ने गाजियाबाद के पौश एरिया में अपना साइबर कैफे भी खोल लिया. दूसरी ओर शमशेर ने दिल्ली में भी अपना औफिस बना लिया. वह शानदार जिंदगी जीता था. शिकार बने लोगों का पैसा हरलीन के खाते में जमा कराया जाता था.

हरलीन कुल जमा रकम का 35 फीसदी कमीशन लेती थी. ठगी के खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज सिंघानिया के खाते में करीब एक साल में 4 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ था. इन लोगों का धंधा अनवरत चलता रहता, लेकिन अंबरीश ने शिकायत की तो इन की करतूतों का भंडाफोड़ हो गया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने लिखापढ़ी कर के सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस शेष आरोपियों की तलाश कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फिर वायरल हुआ जैड हदीद और आकांक्षा पुरी का Kiss video, लोगों ने किया ट्रोल

बिग बॉस ओटीटी 2 भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन कंटेस्टेंट अब भी चर्चा में बने हुए है. शो के बाद जैड-हदीद और आकांक्षा पुरी एक साथ एक पार्टी में नजर आए. जहां उन्होने एक बार फिर सबके सामने किस करते हुए देखा गया. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दोनों ही मीडिया के सामने किस करते दिखे है और लोग इनकी वीडियो देख उन्हे जमकर ट्रोल करते नजर आ रहे है.

आपको बता दें, कि जैड-हदीद ने और आकांक्षा पुरी ने शो में लगभग 30 सैकेंड का लिप-लॉक किस किया था. जो कि टेलिवीजन पर दिखाया गया था. दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे को किस करते रहे थे. जिसके बाद उन्हे सलमान खान से अच्छी खासी सुननी भी पड़ी थी. जिसके बाद जैड ने सभी से माफी भी मांगी थी, लेकिन अब एक फिर दोनों कंटेस्टेंट पलक पुरसवानी की बर्थ डे पार्टी में नजर आए. जहां उन्होने सबके सामने एक दूसरे किस किया. जो कि मीडिया की हेडलाइन बन चुकी है. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. ये किस उन्होने एक -दूसरे के गाल पर किया.

 

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इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग इस पर तरह-तरह के कमेंट करते दिखें, कुछ ने तारीफ की तो कई ने ट्रोल किया. हालांकि आपको बता दें, कि विदेशी कंटेस्टेंट जैड-हदीद एक बेटी के पिता है. वह तलाकशुदा है. जबकि आकांक्षा पुरी टीवी एक्ट्रर पारस छाबड़ा की एक्स गर्लफ्रेंड है. दोनों की सगाई तक हो चुकी थी. मगर बिग बॉस 13 के दौरान पारस ने एक्ट्रेस से अपना रिश्ता तोड़ दिया था.

उर्फी जावेद की ये फोटो देख लोगों ने पूछा – क्या लड़कियां पसंद है?

उर्फी जावेद टीवी की उन अदाकाराओं में से एक हैं जो कि आए दिन किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं. 15 अगस्त के मौके पर एक पोस्ट शेयर करके उर्फी जावेद ने सनसनी मचा दी थी. इसी बीच उर्फी जावेद को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. खबरों की मानें तो उर्फी जावेद बाइसेक्चुअल हैं. जी हां, सही सुना आपने, दावा किया जा रहा है कि उर्फी जावेद इस समय एक लड़की को डेट कर रही हैं. ये लड़की कोई और नहीं बल्कि उर्फी जावेद की खास दोस्त काजल है.

uorfi javed

कुछ समय पहले ही उर्फी जावेद ने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर में उर्फी जावेद अपनी इस खास दोस्त को किस करती नजर आ रही हैं. उर्फी जावेद की इस तस्वीर ने सोशल मीडिया को हिलाकर रख दिया है. लोगों को यकीन नहीं हो रहा है कि उर्फी जावेद एक लड़की को किस कर सकती हैं.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही उर्फी जावेद ने दावा किया था कि काफी समय से उन्होंने किसी लड़के को किस नहीं किया है. ऐसे में लोग कयास लगा रहे हैं कि उर्फी जावेद ने लड़कों की जगह लड़कियों को डेट करना शुरू कर दिया है. तस्वीर में उर्फी जावेद और उनकी दोस्त की केमिस्ट्री साफ नजर आ रही है. लोगों को सच में लगने लगा है कि उर्फी जावेद अपनी दोस्त को दिल दे बैठी हैं.

 

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बता दें, कि Uorfi Javed ने ट्विटर पर एक लड़की संग फोटो शेयर की. दोनों लिप किस कर रही हैं. इस फोटो को शेयर करते हुए उर्फी ने कैप्शन में लिखा, ‘लव या.’ ये तस्वीर देखने के बाद यूजर्स कई सारे सवाल पूछ रहे हैं.ये फोटो देखने के बाद एक यूजर ने कॉमेंट किया, ‘लड़के मर गए क्या?’ अन्य ने पूछा, ‘क्या ये बाइसेक्शुअल है?’ कई लोग एक्ट्रेस को ‘लेस्बियन’ भी कह रहे हैं.

Raksha Bandhan Special: बड़े भैया- क्यों स्मिता अपने भाई से डरती थी?

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मैं नौकरी करना चाहती हूं, लेकिन घर वाले नहीं मान रहे है मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 22 साल है. मैं एक गरीब घर की लड़की हूं और बीए पास हूं. मुझे एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल रही है, जो घर से दूर है. मैं वह नौकरी करना चाहती हूं, पर घर वाले बोल रहे हैं कि इतनी दूर नौकरी करने की कोई जरूरत नहीं है. मेरे घर वाले तो मेरी शादी के पीछे पड़े हैं, जबकि मुझे अभी शादी नहीं करनी है. मैं अपनी इस समस्या का समाधान कैसे करूं?

जवाब

आप घर वालों को समझाएं कि आजकल लड़कियों का नौकरी करना हर लिहाज से जरूरी है. इस से उन का भविष्य सुरक्षित रहता है. कमाऊ लड़कियों को पति भी अच्छा खाताकमाता मिल जाता है.

चिंता के साथसाथ घर वालों का एक डर यह भी हो सकता है कि बाहर रहने पर आप के कदम बहक न जाएं और आप अपनी मरजी से शादी न कर लें. आप उन से कहें कि अगर ज्यादा ही चिंता है तो घर का कोई सदस्य साथ रहने चले.

यह हमारे समाज का दोहरापन है कि लड़के कहीं भी जा कर नौकरी करने के लिए आजाद हैं लेकिन लड़कियों पर हजार बंदिशें थोप दी जाती हैं, जिस से देश और समाज दोनों पिछड़ते हैं.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें. मोबाइल नंबर : 08826099608

 

हवस के दरिंदों की करतूत

उत्तर प्रदेश का जाट बहुल जिला बागपत जिस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात से रूबरू हुआ, उसे वहां के बाशिंदे शायद ही कभी भुला सकें. कई धरनेप्रदर्शनों के बाद पुलिस के शिकंजे में गुनाहगार आ गए थे, लेकिन जो हकीकत खुल कर सामने आई, उस ने सभी को चौंका दिया.

10वीं जमात में पढ़ने वाली छात्रा साक्षी चौहान अपने पिता ईश्वर सिंह की हत्या के बाद अमीनगर सराय कसबे के नजदीक खिंदौड़ा गांव में अपने ननिहाल में रह कर पढ़ाई कर रही थी. 31 दिंसबर को वह स्कूल गई, लेकिन इस के बाद उस का कहीं पता नहीं चला, तो परिवार वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

आखिरकार 10 जनवरी को साक्षी की लाश नजदीक के गांव पूठड़ में ईंख के खेत में पड़ी मिली. वारदात वाली जगह पर हत्या का कोई निशान नहीं था. साक्षी स्कूली कपड़ों में थी. ऐसा लगता था कि उस की लाश को वहां ला कर फेंक दिया गया था.

साक्षी चौहान का अपहरण भले ही कई दिन पहले किया गया था, लेकिन उस की हत्या लाश मिलने से 24 घंटे पहले ही की गई थी. इस से  लोगों का गुस्सा और भी भड़क गया और पुलिस पर साक्षी चौहान की बरामदगी में तेजी न बरतने का आरोप लगाया.

पोस्टमार्टम के दौरान साक्षी के शरीर पर नोचे जाने और अंदरूनी हिस्सों पर चोटों के निशान पाए गए. चंद रोज की जांचपड़ताल में पुलिस ने इस मामले में 4 नौजवानों को गिरफ्तार कर लिया.

पकड़े गए आरोपियों में सैड़भर गांव के बिट्टू, मोनू, सौरभ व अन्नु शामिल थे. इन सभी की उम्र 20 से 24 साल के बीच थी. स्कूल जाते समय वे साक्षी को मोटरसाइकिल पर बैठा कर बिट्टू के घर ले गए. इस के बाद चारों आरोपियों ने उसे बंधक बना कर दरिंदगी की थी.

crime

यह सिलसिला 10 दिनों तक चला. वे साक्षी को नशीली चीज देते थे, ताकि वह बेहोश रहे. उन्हें डर था कि अगर साक्षी को छोड़ दिया गया, तो वे सभी फंस जाएंगे. पकड़े जाने के डर से उन्होंने गला दबा कर उस की बेरहमी से हत्या कर दी और मारुति कार में उस की लाश रख कर ईंख के खेत में फेंक गए.

उन चारों के सिर पर हवस का फुतूर सवार था. वे अकसर आनेजाने वाली छात्राओं पर फब्ति यां कसते थे और उन्हें अपना शिकार बनाने का घिनौना ख्वाब देखते थे.

इस तरह के मामलों में लड़कियां अकसर ऊंची जाति के लोगों की हैवानियत और हवस का शिकार होती हैं. हरियाणा के सोनीपत में कुछ दबंगों ने एक दलित लड़की को खेत में खींच कर उस के साथ गैंगरेप किया. बाद में पीडि़ता ने मौत को गले लगा लिया देहात के इलाकों में दलित बेचारे बेसहारा होते हैं. बैकवर्ड क्लासों में  दबंगों का बोलबाला होता है. लिहाजा, पुलिस भी ऐसे मामलों में लचीला बरताव करती है. होहल्ला होने पर कुरसी बचाने तक की सख्ती दिखाई जाती है. कितने मामले ऐसे भी होते हैं, जब दबंगों के डर से पीडि़त परिवार पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते.

पिछले साल हरदोई जिले में एक दलित लड़की के साथ हैवानियत की गई. मौत का मामला उछलने के बाद पुलिस हरकत में आई.

दबंगों की इस दरिंदगी का शिकार साक्षी चौहान कोई अकेली शिकार नहीं थी. उत्तर प्रदेश के ही सहारनपुर जनपद में भी एक दहलाने वाली वारदात हुई.

लेबर कालोनी की रहने वाली 11 साल की दलित लड़की तान्या 5 जनवरी को लापता हो गई. 2 दिन बाद तान्या की लाश पुलिस को झाडि़यों में मिली. उस के शरीर पर चोटों के निशान थे और उस के साथ रेप किया गया था.

इस मामले में 3 नौजवानों को गिरफ्तार किया गया. दरअसल, अंबेडकर कालोनी के रहने वाले इंद्रजीत, धर्मवीर और शिवकुमार शराब की लत के शिकार थे. उन तीनों ने खेतों में बनी एक झोंपड़ी को शराब का अड्डा बनाया हुआ था. वे अकसर वहां बैठ कर शराब पीते थे और सैक्स से जुड़ी बातें करते थे.

धीरेधीरे वे यह सोचने लगे कि किसी को अपना शिकार बनाया जाए. एक शाम उन तीनों ने जम कर शराब पी और तान्या को मोटरसाइकिल से अगवा कर लिया.

इंद्रजीत तान्या को पहले से जानता था. वह चाट खिलाने के बहाने उसे अपने साथ ले गया. झोंपड़ी में ले जा कर तीनों ने बारीबारी से उसे अपना शिकार बनाया. तान्या चीखीचिल्लाई, तो उन्होंने गला दबा कर उस की हत्या कर दी और उस की लाश को पुआल में छिपा दिया.

अगले दिन उन्होंने तान्या की लाश को तकरीबन 2 सौ मीटर दूर झाडि़यों में फेंक दिया. आरोपियों तक पहुंचने में ट्रैकर कुत्ते ने अहम भूमिका निभाई. लाश पर मिले फूस और गीली मिट्टी के सहारे ही कुत्ता झोंपड़ी तक पहुंच पाया.

बकौल एसएसपी आरपी सिंह, ‘‘आरोपियों पर पाक्सो ऐक्ट के तहत कार्यवाही की गई है. फौरैंसिक जांच के सुबूतों से भी आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी.’’

बरेली में 29 जनवरी को घुमंतू जाति की एक दलित लड़की के साथ सारी हदों को लांघ दिया गया. नवाबगंज इलाके के गांव आनंदापुर में महावट जाति की बस्ती है. हेमराज की बेटी आशा अपनी मां के साथ खेत में चारा लेने गई थी. आशा को चारा ले कर घर भेज दिया गया, पर घर में चारा रख कर वह दोबारा खेत पर जा रही थी, तो लापता हो गई.

crime

खोजबीन के बाद महेंद्रपाल नामक आदमी के खेत में आशा की बिना कपड़ों की लाश मिली. गला दबा कर उस की हत्या कर दी गई थी और अंग में लकड़ी ठूंस दी गई थी. उस के शरीर को भी नोचा गया था. मौके पर उसे घसीटे जाने के निशान भी थे.

पुलिस ने इस मामले में गांव के बिगड़ैल नौजवान की तलाश की, तो एक नौजवान मुरारी गंगवार का नाम सामने आया. पुलिस ने उसे उठा कर सख्ती से पूछताछ की, तो मामला खुल गया.

मुरारी और उस का दोस्त उमाकांत शराब पी कर खेतों की तरफ निकले थे. उन की नजर लड़की पर पड़ी, तो सिर पर हैवानियत सवार हो गई. वे दोनों उसे खेत में खींच कर ले गए. उस का मुंह दबा कर पहले उमाकांत ने उस के साथ बलात्कार किया और फिर मुरारी ने. उन दोनों ने उस के नाजुक अंगों पर हमला भी किया. उन के बीच काफी खींचतान हुई. लड़की मुरारी को पहचानती थी, इसलिए गला दबा कर उस की हत्या कर दी गई.

मुरारी पहले भी गांव के एक बच्चे और पशुओं के साथ गलत काम करने की कोशिश कर चुका था, जिस के बाद उस की पिटाई हुई थी.

जबरन सैक्स और हत्या के मामले समाज और कानून दोनों को ही दहलाने का काम करते हैं. हवस के ऐसे अपराधी हर जगह हैं, जो कब किस को अपना शिकार बना लें, कोई नहीं जानता.

इस तरह के मामलों में सामने आता है कि ऐसे नौजवान किसी लड़की को भोगने के बाद 2 वजह से हत्या करते हैं. पहली, अपने पहचाने जाने के डर से. दूसरी, चीखनेचिल्लाने और पकड़े जाने के डर से. इस तरह के नौजवान समाज और कानून के लिए खतरा बन जाते हैं.

डाक्टर आरवी सिंह कहते हैं कि ऐसा करने वाले सैक्सुअल डिसऔर्डर बीमारी का शिकार होते हैं. विरोध करने पर उन में गुस्सा पैदा हो जाता है. वे अपनी कुंठा को मनमुताबिक शांत करना चाहते हैं. ऐसे लोग सैडेस्टिक टैंडैंसी से भी पीडि़त होते हैं. ऐसे शख्स को किसी का खून बहता देख कर खुशी होती है. यह एक तरह की दिमागी बीमारी है.

दबंगों ने शराब पिला कर बनाया शिकार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में 27 जनवरी को कुछ दबंगों के सिर पर हवस का फुतूर सिर चढ़ कर बोला. कांधला थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दलित किशोरी अपनी मां के साथ चारा लेने खेत पर गई थी. किसी बात पर नाराजगी हुई, तो मां ने उसे वापस घर चले जाने को कहा. जब वह रास्ते में पहुंची, तो गांव के ही 3 दबंग नौजवानों ने उसे दबोच लिया. वे उसे खींच कर खेत में ले गए. पहले उन्होंने उसे जबरन शराब पिलाई और फिर उस के साथ रेप किया. रेप करने के बाद सभी आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए.

किशोरी जब शाम तक घर नहीं पहुंची, तो परिवार वालों ने उस की तलाश की. वह खेत में पड़ी मिली. होश में आने पर उस ने आपबीती सुनाई. बात यहीं खत्म नहीं हुई. आरोपी नौजवान ने दबंगई दिखाते हुए पुलिस कार्यवाही न करने का दबाव भी बनाया, लेकिन इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई. बाद में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उस के साथी फरार थे.

आखिर युवकों से वर्जिनिटी क्यों नहीं पूछते?

हर युवक या बौयफ्रैंड अपने लिए वर्जिन युवती या गर्लफ्रैंड ही चाहता है. भले ही वह खुद कितनी ही युवतियों की वर्जिनिटी भंग कर चुका हो. साथ ही यह माना जाता है कि यदि युवती वर्जिन है तो ही वह चरित्रवान है, लेकिन युवक के लिए ऐसी कोई शर्त ही नहीं है. उसे तो हमेशा ही वर्जिन माना गया है. आखिर वर्जिनिटी क्या है? युवक क्यों देते हैं इसे इतनी अहमियत? इस का युवती के चरित्र से क्या संबंध? ऐसे बहुत सारे सवालों के जवाब और गलतफहमियों को समझने की जरूरत है. पिछले साल की बहुचर्चित फिल्म ‘पिंक’ में जब वकील कोर्ट में खुलेआम तापसी पन्नू के किरदार से सवाल करता है कि उस की वर्जिनिटी कब खोई थी, तो वहां सन्नाटा पसर जाता है. भारत में युवकयुवती का फर्क सिर्फ लिंगभेद तक ही सीमित नहीं रहता  बल्कि वर्जिनिटी के सवाल को ले कर भी है.

सैक्स और वर्जिनिटी

गर्लफ्रैंड जब अपने बौयफ्रैंड से मिलती है तो जाहिर है कि आज की जनरेशन सैक्स से परहेज नहीं करती. इसलिए दोनों में उन्मुक्त सैक्स होता है और पारंपरिक रोमांस भी, जब तक दोनों का अफेयर चलता है, कायदे से दोनों ही अपनी वर्जिनिटी खो चुके होते हैं.

बौयफ्रैंड चाहे कितनी ही बार सैक्स कर ले, कितनी ही युवतियों का दिल तोड़े, उस से कभी उस की वर्जिनिटी को ले कर सवाल नहीं पूछा जाता. युवती की शादी में भी कई सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन युवक वर्जिन है या नहीं, इस सवाल को कोई नहीं उठाता. वहीं युवती का हर दूसरा बौयफ्रैंड यही उम्मीद रखता है कि उस की गर्लफ्रैंड वर्जिन हो यानी उस ने किसी के साथ सैक्स न किया हो. भले ही युवक ने अपनी ऐक्स गर्लफ्रैंड के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए हों पर युवती उसे वर्जिन चाहिए.

युवक भी वर्जिन होते हैं

 कालेज और क्लास में अकसर स्टूडैंट्स के बीच आम बहस का टौपिक होता है कि उन की गर्लफ्रैंड या क्लासमेट ने अपनी वर्जिनिटी कब खोई थी. बड़े दिलचस्प अंदाज में युवक अंदाजा लगाते हैं कि फलां युवती वर्जिन है या नहीं. अपनी गर्लफ्रैंड बनाने की पहली प्राथमिकता भी वह एक वर्जिन युवती को ही देते हैं, लेकिन वे खुद के गिरेबान में कभी झांक कर नहीं देखते कि वे वर्जिन कहां हैं?

अमिताभ बच्चन इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि अगर युवतियों से उन की वर्जिनिटी, कौमार्य या कुंआरेपन को ले कर सवाल पूछे जाते हैं तो युवकों से भी ये सवाल पूछे जाने चाहिए. इस में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. वे आगे कहते हैं कि अगर किसी युवती से कुछ पूछा जाता है तो उस पर सवालिया निशान लगता है जैसे उस ने कोई गलत काम कर दिया है, लेकिन जब युवकों का मामला हो तो सवाल विस्मयादिबोधक चिह्न के साथ आता है जैसे उन्होंने कोई महान काम कर दिया हो.

वर्जिनिटी टैस्ट में फेल तो…

 आएदिन अखबारों में इस तरह की खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं, जहां वर्जिनिटी टैस्ट करने के नाम पर युवती की शादी टूट जाती है या फिर उसे प्रताडि़त किया जाता है. गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड के रिश्ते भी इसी बात के आधार पर टूट जाते हैं. पिछले दिनों यह खबर आई थी कि महाराष्ट्र के नासिक में एक पति ने शादी के 2 दिन बाद ही अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि वह वर्जिनिटी टैस्ट में फेल हो गई.

इतना ही नहीं युवती वर्जिन है या नहीं इस का फैसला करने के लिए पंचायत के सदस्यों द्वारा शादीशुदा जोड़े को बिस्तर पर सफेद चादर बिछा कर सैक्स करने के लिए कहा जाता है. सैक्स के बाद अगर चादर पर खून के धब्बे नहीं मिलते, तो युवती को वर्जिन नहीं माना जाता. इस मामले में युवक ने अपनी पत्नी के वर्जिनिटी टैस्ट का प्रमाण पंचायत को सौंपा. युवक ने सुबूत के तौर पर वह चादर पंचायत के सामने पेश की. इस चादर पर खून के धब्बे न होने पर पंचायत के सदस्यों ने पति को शादी खत्म करने की अनुमति दे दी.

वर्जिन टैस्ट और भ्रम

 आम धारणा है कि जिस युवती ने पहली बार सैक्स कर लिया उस की फीमेल रिप्रोडक्टिव और्गन में पाई जाने वाली हाइमन झिल्ली फट जाती है और ब्लड निकल जाता है. अगर वह झिल्ली न फटे तो उसे वर्जिन होने की निशानी माना जाता है. बस, इसी बात को ले कर गलतफहमी है कि पहली बार सैक्स करते समय गर्लफ्रैंड को ब्लीडिंग हुई तो वह वर्जिन वरना नहीं, जबकि गाइनोकोलौजिस्ट और सैक्स ऐक्सपर्ट मानते हैं कि हाइमन झिल्ली का सैक्स संबंध और वर्जिनिटी से कोई वास्ता नहीं है. 90त्न युवतियों की यह झिल्ली साइकिलिंग, घुड़सवारी, डांस या अन्य शारीरिक क्रियाओं के दौरान फट जाती है. ऐसे में यह कहना कि युवती ने सैक्स किया है, गलत है.

बौयफ्रैंड की भी वर्जिनिटी जांचें

अगर बौयफ्रैंड बातबात पर वर्जिन होने का सुबूत मांगे तो उस का भी वर्जिनिटी का परीक्षण करना चाहिए. इस से न सिर्फ उसे सबक मिलेगा बल्कि वह वर्जिन जैसी बेमतलब की बातों को दोबारा नहीं पूछेगा. लेकिन यह कैसे पता करें? यदि आप को भी बौयफ्रैंड की वर्जिनिटी चैक करनी है तो उस से सवाल करें और उस के व्यवहार को समझें. मसलन, अगर बौयफ्रैंड वर्जिन है तो आप के साथ सैक्स करने में जल्दबाजी नहीं करेगा. सैक्स के दौरान भी काफी असहज दिखेगा. पहली बार संबंध बनाते समय घबराता है या फिर वह पोजीशन नहीं जमा पाता. वह आप के साथ संबध बनाने से कतराएगा, जबकि पहले से सैक्स संबंध बना चुका बौयफ्रैंड आसानी से सैक्स करेगा. वर्जिन बौयफ्रैंड गर्लफ्रैंड से एक दूरी बना कर बात करेगा और कई बार घबराएगा भी, जबकि वर्जिनिटी खो चुका बौयफ्रैंड खुल कर गर्लफ्रैंड को टच करेगा और जबतब सैक्स करने के मौके खोजेगा.

कुल मिला कर युवकयुवती का संबंध प्रेम पर टिका हो न कि सैक्स और वर्जिनिटी के सवाल पर. वर्जिन कोई नहीं होता. किसी ने सैक्स किया होता है और कोई पोर्न फिल्में देख कर खयाली सैक्स करता है इसलिए गर्लफ्रैंडबौयफ्रैंड का रिश्ता भरोसे पर टिका हो और जो युवक युवती से उस की वर्जिनिटी को ले कर सवाल करे उसे पहले युवती को अपनी वर्जिनिटी का सुबूत देना चाहिए.

विपक्ष की ऐतिहासिक एकता : सत्ता डरी हुई क्यो है

पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आह्वान पर राहुल गांधी, ममता बनर्जी, लालू यादव, शरद पवार और अन्य महत्त्वपूर्ण नेताओं की “विपक्षी एकता” को देखकर भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार के माथे पर साफ-साफ पसीना देखा जा सकता है. लोक तंत्र में सत्ता के विरुद्ध विपक्ष का एक होना एक सामान्य बात है. अब लोकसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं है ऐसे में अगर विपक्ष एक हो रहा है तो यह भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी सरकार के लिए स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय है. क्योंकि जब तक विपक्ष में एकता नहीं है भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रहेगी यह सच विपक्ष के सामने भी और सत्ता में बैठी भाजपा के नेताओं को भी पता है. यही कारण है कि जब पटना में विपक्ष के लगभग सारे राजनीतिक दलों में एक सुर में भारतीय जनता पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में उखाड़ फेंकने का ऐलान किया तो भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता तिलमिला गए उनके बयानों से दिखाई देता है कि उन्हें अपनी कुर्सी हिलती हुई दिखाई दे रही है . दरअसल ,भारतीय जनता पार्टी और आज की केंद्र सरकार का एजेंडा जगजाहिर हो चुका है. बड़े-बड़े नेता यह ऐलान कर चुके हैं कि हम तो 50 सालों तक सत्ता पर काबिज रहेंगे, यह बोल कर के इन भाजपा के नेताओं और सत्ता में बैठे चेहरों ने बता दिया है कि उनकी आस्था लोकतंत्र में नहीं है और सत्ता उन्हें कितनी प्यारी है. और उनकी मंशा क्या है यही कारण है कि आज एक वर्ग द्वारा लोकतंत्र को खतरे में माना जा रहा है. क्योंकि सत्ता में बैठे हुए अगर यह कहने लगे कि हम तो उसी छोड़ेंगे ही नहीं इसका मतलब यह है कि असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर काबिज रहने के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं. यही कारण है कि विपक्ष आरोप लगा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियां कुछ इस तरह की है जिससे चंद लोगों को लाभ है अदानी और अंबानी इसके बड़े उदाहरण हमारे सामने हैं. अब हालात यह है कि विपक्षी दलों के एकजुट होने की कोशिश की आलोचना करते हुए पटना की बैठक को ‘स्वार्थ का गठबंधन’, ‘नाटक’ और ‘तस्वीर खिंचवाने का अवसर बताकर भारतीय जनता पार्टी के नेता अपना बचाव कर रहे हैं.

भाजपा की बैचेनी जगजाहिर

बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दलों की ओर से साल 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर लड़ने की घोषणा के तत्काल बाद दिल्ली मे पार्टी मुख्यालय केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मोर्चा संभाला और कहा ” जो राजनीतिक दल कभी एक दूसरे को आंखों नहीं सुहाते थे, वे भारत को आर्थिक प्रगति से वंचित करने के संकल्प से एकत्रित हुए हैं.”
अपने चिर परिचित अंदाज में स्मृति ईरानी ने कहा, ‘कहा जाता है कि भेड़िये शिकार के लिए झुंड में आते हैं और यह राजनीतिक झुंड पटना में मिला. उनका ‘शिकार’ भारत का भविष्य है.’
महत्वपूर्ण बात या की पटना में विपक्षी एकता चल रही थी और केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह जम्मू मे थे उनसे भी नहीं रहा गया और बोल पड़े ” विपक्षी एकता लगभग असंभव है. उन्होंने कहा, ‘आज पटना में एक फोटो सेशन चल रहा है। सारे विपक्ष के नेता संदेश देना चाहते हैं कि हम भाजपा और मोदी को चुनौती देंगे मैं सारे विपक्ष के नेताओं को यह कहना चाहता हूं कि कितने भी हाथ मिला लो, आपकी एकता कभी संभव नहीं है और हो भी गई … कितने भी इकट्ठा हो जाइए और जनता के सामने आ जाइए…. 2024 में 300 से ज्यादा सीटों के साथ मोदी का प्रधानमंत्री बनना तय है.’
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा उड़ीसा कालाहांडी में थे, उन्होंने वहीं से कहा “आज जब सभी विपक्षी दल पटना में गलबहियां कर रहे हैं तो उन्हें आश्चर्य होता है कि कांग्रेस विरोध के साथ अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने वाले नेताओं की स्थिति क्या से क्या हो गई है. उन्होंने कहा, ‘यही लालू प्रसाद यादव पूरे 22 महीने जेल में रहे. कांग्रेस की इंदिरा … राहुल की दादी ने उन्हें जेल में डाला था. यही नीतीश कुमार पूरे 20 महीने जेल की सलाखों के पीछे रहे.”
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी चुप नही बैठे उन्होने विपक्षी दलों की बैठक को एक ‘तमाशा’ करार दिया. अब आप स्वयं देखें और विवेचना करें कि राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जो एकता कर रहे हैं वह कितना देश हित में है और भारतीय जनता पार्टी पर जो सत्ता का मद चढ़ा हुआ है उससे देश को किस तरह हानि हो रही है

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