Top 15 Prem Kahani in hindi, प्रेम कहानियां हिंदी में

Top 15 Prem Kahani in hindi of 2023, आज हम आपके लिए लेकर कुछ दिलचस्प प्रेम कहानियां (Hindi Prem Kahani) जिन्हे पढ़कर आप इन कहानियों से जुड़ पाएंगे, साथ ही नई – नई जानकारियां हासिल कर पाएंगे, इन हिन्दी प्रेम कहानियों में प्यार भरी स्टोरी को पढ़कर आप इनका आनंद ले पाएंगे. साथ ही दो लोगों में प्रेम कैसे होता है ये जान पाएंगे. तो पढ़े, Top Prem Kahani in Hindi.

1. जूलियट की अनोखी मुहब्बत

जय अपने घूमनेफिरने के शौक को पूरा करने के लिए गाइड बन गया था. उस ने इतिहास औनर्स से ग्रेजुएशन की थी. उस के पास अपने पुरखों की खूब सारी दौलत थी.

जय के पिता एक किसान थे. पूरे इलाके में सब से ज्यादा जमीन उन्हीं के पास थी. उन्होंने खेती की देखभाल के लिए नौकर रखे हुए थे. जय 3 बहनों में अकेला भाई था. तीनों बहनों की नामी खानदान में शादी हुई थी. जय की मां एक घरेलू औरत थी.

भारत के बहुत से ऐतिहासिक पर्यटक  स्थलों के मुलाजिम, वहां के दुकानदार और तमाम लोग जय को पहचानते थे. इस बार जय गाइड के रूप में बोधगया  गया हुआ था. विदेशी पर्यटकों में उस की मुलाकात जूलियट और उस की मां से हुई.

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2. फौजी का प्यार: क्या हो पाया सफलPrem Kahani

हमारी यह कहानी एक फौजी के प्यार पर बुनी गई है, जिस का नाम रमन था. वह बिलासपुर गांव का रहने वाला था. उस के सपने बहुत बड़े थे. वह अपनी जिंदगी में बहुतकुछ करना चाहता था. एक दिन रमन सो रहा था. उस ने एक सपना देखा कि वह अपने देश के लिए शहीद हो गया. तभी से उस ने फौजी बनने की ठान ली. जब उस ने यह बात अपने मांबाप को बताई, तो वे चिंतित हो गए. उन्हें लगा कि अगर उन का बेटा फौजी बन कर उन से दूर चला गया, तो वे अकेले कैसे रहेंगे?लेकिन रमन का यही कहना था कि उसे अपने देश के लिए फौजी बनना ही है, क्योंकि वह अपने देश से बहुत प्यार करता है.

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3. अनकहा प्यार: एक दूजे के लिएPrem kahani

मुक्ता और महत्त्व की मुलाकात औफिस जाने के दौरान एक बस में हुई थी, फिर उन का मेलजोल बढ़ने लगा. एक दिन तेज बारिश के समय महत्त्व ने मुक्ता को औफिस न जाने को कहा और अपनी बाइक पर उसे घुमाने ले गया. आगे क्या हुआ? कालेकाले बादलों ने आसमान में डेरा डाल दिया. मुक्ता तेजी से लौन की तरफ दौड़ी सूखे हुए कपड़ों को हटाने के लिए. बूंदों ने झमाझम बरसना शुरू कर दिया.

कपड़े उतारतेउतारते मुक्ता काफी भीग चुकी थी. अंदर आते ही उस ने छींकना शुरू कर दिया.

मां बड़बड़ाते हुए बोलीं, ‘‘मुक्ता, मैं ने तुझ से कितनी बार कहा है कि भीगा मत कर, लेकिन तू मानती ही नहीं.’’ मुक्ता ने शांत भाव से कहा, ‘‘मां, आप सो रही थीं, इसलिए मैं खुद ही चली गई. मां, अगर आप जातीं, तो आप भी तो भीग जातीं न.’’ मां दुलारते हुए बोलीं, ‘‘मेरी बेटी मां को इतना प्यार करती है…’’

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4. दूसरी शादी: कैसे एक हुई विनोद बाबू और मंजुला की राहेंprem kahani

साधारण कदकाठी के विनोद बाबू पहले जैसेतैसे रहते थे, लेकिन दूसरी शादी के बाद वे सलीके से कपड़े वगैरह पहनने लगे थे. वे चेहरे की बेतरतीब बढ़ी हुई दाढ़ीमूंछ को क्लीन शेव में बदल चुके थे. उन की आंखों पर खूबसूरत फ्रेम का चश्मा भी चढ़ गया था. इतना ही नहीं, सिर के खिचड़ी बालों को भी वे समयसमय पर डाई करवाना नहीं भूलते थे.

वैसे तो विनोद बाबू की उम्र 48 के करीब पहुंच गई थी, लेकिन जब से उन की मंजुला से दूसरी शादी हुई थी, तब से वे सजसंवर कर रहने लगे थे. इस का सुखद नतीजा यह हुआ है कि वे अब 38 साल के आसपास दिखने लगे थे.

इसी साल नवरात्र के बाद अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में विनोद बाबू मंजुला से कोर्ट मैरिज कर चुके थे. तब से उन की जिंदगी में अलग ही बदलाव दिखने लगा था. पहले वे छुट्टी के बाद भी किसी बहाने देर तक अपने स्कूल में जमे रहने की कोशिश करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं था.

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5. अधूरी प्रेम कहानी : रजिया किस बात का जिक्र करने पर असहज हो जाती थीprem kahani

रजिया और आफताब का खातापीता और सुखी परिवार था. आज उन की शादी की 25वीं सालगिरह थी. आफताब और रजिया ने केक काटने के बाद सब से पहले अशोक बाबूजी को खिलाया. अशोक बाबूजी भी इसी परिवार का हिस्सा थे. रजिया और आफताब की 20 साल की बेटी आसमां आज भी अशोक बाबूजी से 5 साल की बच्ची की तरह लाड़ दिखाती है. आफताब के एक स्कूटर हादसे पर अशोक बाबूजी ने किसी फरिश्ते की तरह इस परिवार की मदद की थी. उस हादसे में अपनी टांग गंवाने के बाद आफताब की निर्भरता अशोक बाबूजी पर और ज्यादा बढ़ गई थी. इधर आसमां की शादी की बात चल रही थी. वह बहुत खूबसूरत और पढ़ीलिखी थी. उस के लिए एक से बढ़ कर एक परिवारों के रिश्ते आ रहे थे. आफताब की खाला की सख्त हिदायत थी कि उन के समाज में ज्यादा दूर के लोगों से रिश्ते नहीं किए जाते और उन्हें अपनी बेटी का निकाह अपने ही किसी एक परिचित परिवार में करना चाहिए.

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6. मुहब्बत पर फतवा: रजिया की कहानी prem kahani

रजिया को छोड़ कर उस के वालिद ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उस समय रजिया की उम्र तकरीबन 2 साल की रही होगी. रजिया को पालने, बेहतर तालीम दिलाने का जिम्मा उस की मां नुसरत बानो पर आ पड़ा.

खानदान में सिर्फ रजिया के चाचा, चाची और एक लड़का नफीस था. माली हालत बेहतर थी. घर में 2 बच्चों की परवरिश बेहतर ढंग से हो सके, इस का माकूल इंतजाम था. अपने शौहर की बात को गांठ बांध कर नुसरत बानो ने दूसरे निकाह का ख्वाब पाला ही नहीं. वे रजिया को खूब पढ़ालिखा कर डाक्टर बनाने का सपना देखने लगीं.

‘‘देखो बेटी, तुम्हारी प्राइमरी की पढ़ाई यहां हो चुकी है. तुम्हें आगे पढ़ना है, तो शहर जा कर पढ़ाई करनी पड़ेगी. शहर भी पास में ही है. तुम्हारे रहनेपढ़ाने का इंतजाम हम करा देंगे, पर मन लगा कर पढ़ना होगा… समझी?’’ यह बात रजिया के चाचा रहमत ने कही थी.

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7. प्यार असफल है तुम नहींprem kahani

एक हार्ट केयर हौस्पिटल के शुभारंभ का आमंत्रण कार्ड कोरियर से आया था. मानसी ने पढ़ कर उसे काव्य के हाथ में दे दिया. काव्य ने उसे पढना शुरू किया और अतीत में खोता चला गया…

उस ने रक्षित का दरवाजा खटखटाया. वह उस का बचपन का दोस्त था. बाद में दोनों कालेज अलगअलग होने के कारण बहुत ही मुश्किल से मिलते थे. काव्य इंजीनियरिंग कर रहा था और रक्षित डाक्टरी की पढ़ाई. आज काव्य अपने मामा के यहां शादी में अहमदाबाद आया हुआ था, तो सोचा कि अपने खास दोस्त रक्षित से मिल लूं, क्योंकि शादी का फंक्शन शाम को होना था. अभी दोपहर के 3-4 घंटे दोस्त के साथ गुजार लूं. जीभर कर मस्ती करेंगे और ढेर सारी बातें करेंगे. वह रक्षित को सरप्राइज देना चाहता था.

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8. प्यार चढ़ा परवान : हवस के मारे प्रमिला और शंकरprem kahani

प्रमिला और शंकर के बीच अवैध संबंध हैं, यह बात रामनगर थाने के लगभग सभी कर्मचारियों को पता था. मगर इन सब से बेखबर प्रमिला और शंकर एकदूसरे के प्यार में इस कदर खो गए थे कि अपने बारे में होने वाली चर्चाओं की तरफ जरा भी ध्यान नहीं जा रहा था.

शंकर थाने के इंचार्ज थे तो प्रमिला एक महिला कौंस्टेबल थी. थाने के सर्वेसर्वा अर्थात इंचार्ज होने के कारण शंकर पर किसी इंस्पैक्टर, हवलदार या स्टाफ की उन के सामने चूं तक करने की हिम्मत नहीं होती थी.

थाने की सब से खूबसूरत महिला कौंस्टेबल प्रमिला थाने में शेरनी बनी हुई थी, क्योंकि थाने का प्रभारी उस पर लट्टू था और वह उसे अपनी उंगलियों पर नचाती थी.

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9. वहां आकाश और है: आकाश और मानसी के बीच कौन-सा रिश्ता थाprem kahani

अचानक शुरू हुई रिमझिम ने मौसम खुशगवार कर दिया था. मानसी ने एक नजर खिड़की के बाहर डाली. पेड़पौधों पर झरझर गिरता पानी उन का रूप संवार रहा था. इस मदमाते मौसम में मानसी का मन हुआ कि इस रिमझिम में वह भी अपना तनमन भिगो ले.

मगर उस की दिनचर्या ने उसे रोकना चाहा. मानो कह रही हो हमें छोड़ कर कहां चली. पहले हम से तो रूबरू हो लो.

रोज वही ढाक के तीन पात. मैं ऊब गई हूं इन सब से. सुबहशाम बंधन ही बंधन. कभी तन के, कभी मन के. जाओ मैं अभी नहीं मिलूंगी तुम से. मन ही मन निश्चय कर मानसी ने कामकाज छोड़ कर बारिश में भीगने का मन बना लिया.

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10. सच्चा प्यार : जब दो दिल मिलेprem kahani

अनुपम और शिखा दोनों इंगलिश मीडियम के सैंट जेवियर्स स्कूल में पढ़ते थे. दोनों ही उच्चमध्यवर्गीय परिवार से थे. शिखा मातापिता की इकलौती संतान थी जबकि अनुपम की एक छोटी बहन थी. धनसंपत्ति के मामले में शिखा का परिवार अनुपम के परिवार की तुलना में काफी बेहतर था. शिखा के पिता पुलिस इंस्पैक्टर थे. उन की ऊपरी आमदनी काफी थी. शहर में उन का रुतबा था. अनुपम और शिखा दोनों पहली कक्षा से ही साथ पढ़ते आए थे, इसलिए वे अच्छे दोस्त बन गए थे. दोनों के परिवारों में भी अच्छी दोस्ती थी.

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11. प्यासी नदी : क्या थी नौकरानी की कहानीprem kahani

मेरे पतिदेव को चलतेफिरते मुझे छेड़ते हुए शरारत करने की आदत है. वे कभी गाल छू लेते हैं, तो कभी कमर पर चुटकी ले लेते हैं. यह भी नहीं देखते कि आसपास कोई है या नहीं. बस, मेरे प्रति अपना ढेर सारे प्यार को सरेआम जता देते हैं.  मेरे मना करने पर या ‘शर्म करो’ कहने पर कहते हैं, ‘अरे यार, अपनी खुद की बाकायदा बीवी को छेड़ रहा हूं, कोई राह चलती लड़की को नहीं और प्यार जता रहा हूं, सता नहीं रहा… समझी जानू…’

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12.  प्यार का धागा : कैसे धारावी की डौल बन गई डौलीprem kahani

सांझ ढलते ही थिरकने लगते थे उस के कदम. मचने लगता था शोर, ‘डौली… डौली… डौली…’

उस के एकएक ठुमके पर बरसने लगते थे नोट. फिर गड़ जाती थीं सब की ललचाई नजरें उस के मचलते अंगों पर. लोग उसे चारों ओर घेर कर अपने अंदर का उबाल जाहिर करते थे.

…और 7 साल बाद वह फिर दिख गई. मेरी उम्मीद के बिलकुल उलट. सोचा था कि जब अगली बार मुलाकात होगी, तो वह जरूर मराठी धोती पहने होगी और बालों का जूड़ा बांध कर उन में लगा दिए होंगे चमेली के फूल या पहले की तरह जींसटीशर्ट में, मेरी राह ताकती, उतनी ही हसीन… उतनी ही कमसिन…

लेकिन आज नजारा बदला हुआ था. यह क्या… मेरे बचपन की डौल यहां आ कर डौली बन गई थी.

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13. विश्वास: क्या बीमार नीता को मिला उस का हमदमprem kahani

उस रात नीता बहुत खुश थी. जब वह घर लौटी तो पुरानी यादों में ऐसी खोई कि उस की आंखों की नींद न जाने कहां गायब हो गई. उसे समीर ही समीर दिखाई दे रहा था. जब वह पहली बार समीर से मिली थी, तब उसे देखते ही उस का दिल धड़क उठा था.

समीर एम. टैक. फाइनल ईयर का छात्र था और नीता फाइन आर्ट्स की. दोनों एक अनजाने आकर्षण से एकदूसरे की ओर खिंचे चले जा रहे थे. दोनों रोज मिलते. प्रेम के सागर में डूबे दोनों को एकदूसरे के बिना जीवन निरर्थक लगने लगा था. समीर नीता के सौंदर्य और उस के मधुर स्वभाव पर मुग्ध था और नीता… नीता तो समीर की दीवानी थी. जब कभी अपने सपनों के शहजादे की कल्पना करती तो उस की आंखों में समीर का ही चेहरा आता.

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14. बेवफा सनम: जब कुंआरी लड़की पर फिसला शादीशुदा अनिलprem kahani

कई तरह के पकवान बनाने मे माहिर नीलिमा एक बहुत अच्छी डांसर भी थी. वे दोनों एकदूसरे पर जान छिड़कते थे. दोनों की शादीशुदा जिंदगी पिछले 10 साल से बेहद सुकून और प्यार से चल रही थी.इधर, अनीता ने हाल ही में एमए और कंप्यूटर कोर्स किया था. वह किसी नौकरी की तलाश में थी. वह एक मिडिल क्लास परिवार से थी. पिछले कई दिनों से वह स्कूटी चलाने की प्रैक्टिस कर रही थी.

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15. कैलेंडर गर्ल : कैसी हकीकत से रूबरू हुई मोहनाprem kahani

‘‘श्री…मुझे माफ कर दो…’’ श्रीधर के गले लग कर आंखों से आंसुओं की बहती धारा के साथ सिसकियां लेते हुए मोहना बोल रही थी.

मोहना अभी मौरीशस से आई थी. एक महीना पहले वह पूना से ‘स्कायलार्क कलेंडर गर्ल प्रतियोगिता’ में शामिल होने के लिए गई थी. वहां जाने से पहले एक दिन वह श्री को मिली थी.

वही यादें उस की आंखों के सामने चलचित्र की भांति घूम रही थीं.

‘‘श्री, आई एम सो ऐक्साइटेड. इमैजिन, जस्ट इमैजिन, अगर मैं स्कायलार्क कलेंडर के 12 महीने के एक पेज पर रहूंगी दैन आई विल बी सो पौपुलर. फिर क्या, मौडलिंग के औफर्स, लैक्मे और विल्स फैशन वीक में भी शिरकत करूंगी…’’ बस, मोहना सपनों में खोई हुई बातें करती जा रही थी.

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नसबंदी से भरम

साल 2017 में एक हिंदी फिल्म आई थी ‘पोस्टर बौयज’. यह फिल्म ज्यादा तो नहीं चली थी, पर इस फिल्म में उठाया गया मुद्दा बड़ा ही दिलचस्प था.

इस फिल्म में 3 नौजवान सनी देओल, बौबी देओल और श्रेयस तलपड़े तब मुश्किल हालात में फंस जाते हैं, जब उन की तसवीरें मर्दों की नसबंदी के लिए दिए गए एक सरकारी इश्तिहार में छप जाती हैं, जबकि उन की नसबंदी हुई ही नहीं होती है.

जैसेजैसे कहानी आगे बढ़ती है, तो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा बेइज्जत होने के बाद वे तीनों दोस्त व्यवस्था के खिलाफ लड़ते हैं. हालांकि यह फिल्म कौमेडी से भरपूर थी, पर इस में दिखाया गया था कि नसबंदी को ले कर समाज में किस तरह का डर और भरम फैला हुआ है. इतना ज्यादा कि इसे मर्दानगी की कमी से जोड़ दिया जाता है, तभी तो आज भी भारत में मर्दों के अनुपात में औरतें ज्यादा नसबंदी कराती हैं.

मध्य प्रदेश में नसबंदी के आंकड़ों से यह बात समझते हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए स्क्रीनिंग प्रोग्राम और आंकड़ों में खुलासा हुआ कि साल 2017 में सिर्फ 200 मर्दों ने नसबंदी कराई थी, जबकि 18,000 औरतों की नसबंदी की गई थी.

इस का मतलब साफ है कि जब भी ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की बात पर अमल करना होता है, तब पति अपनी पत्नी को आगे कर देता है. उसे शुक्रवाहिका नामक अपनी 2 ट्यूब कटवाने में आफत आती है, जबकि ऐसा करना एक आसान और महफूज तरीके से मुमकिन है. इस के लिए अस्पताल में भरती होने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.

मध्य प्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ में मर्द को नसबंदी कराने के एवज में 3,000 रुपए दिए जाते हैं, जो उस के बैंक खाते में जमा होते हैं. नसबंदी के लिए

4 पात्रताएं होनी चाहिए. पहली, मर्द शादीशुदा होना चाहिए. दूसरी, उस की उम्र 60 साल या उस से कम हो. तीसरी, पतिपत्नी के पास कम से कम एक बच्चा हो, जिस की उम्र एक साल से ज्यादा हो. चौथी, पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है.

इतना ही नहीं, अगर किसी की नसबंदी नाकाम हो जाती है, तो मुआवजे के तौर पर 60 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है. नसबंदी के बाद 7 दिनों के अंदर मौत हो जाने पर 4 लाख रुपए की राशि दी जाती है. नसबंदी के 8 से 30 दिन के अंदर मौत हो जाने पर एक लाख रुपए की राशि दी जाती है. नसबंदी के बाद

60 दिनों के अंदर बड़ी दिक्कत पैदा होने पर इलाज के लिए 50,000 रुपए तक की राशि दी जाती है.

भरम न पालें

मर्द नसबंदी, जिसे वैसेक्टोमी भी कहते हैं, में इजैकुलेशन के दौरान स्पर्म रिलीज नहीं होते हैं. इस में मर्दों के शरीर में मौजूद अंडकोष से स्पर्म को ले कर यूरेथ्रा तक ले जानी वाली नली को या तो सील कर दिया जाता है या फिर काट दिया जाता है.

मर्दों में नसबंदी से जुड़ा सब से बड़ा भरम यह होता है कि इस से कमजोरी आती है और बीमार भी हो सकते हैं. पर यह सच नहीं है. मर्द पहले जैसा ही दिखता है और उस में किसी तरह की मर्दाना कमजोरी नहीं आती है. वह पहले की तरह सैक्स का भरपूर मजा ले सकता है. वह मेहनत के दूसरे काम भी बिना किसी थकावट के पूरे कर सकता है.

अमूमन ऐसा मान लिया जाता है कि नसबंदी करना जोखिम से भरा और तकलीफदेह होता है, पर हकीकत में लोकल एनेस्थीसिया दे कर मर्दों की नसबंदी का आपरेशन किया जाता है और इस में सिर्फ कुछ मिनट का समय लगता है. यह बेहद कम रिस्क वाली सर्जरी है और इस में ज्यादातर मरीजों को थोड़ीबहुत सूजन या अंडकोष में बेहद हलका दर्द महसूस होता है.

1-3 हफ्ते के अंदर सूजन और दर्द की यह समस्या अपनेआप ठीक हो जाती है. अगले 10-15 दिनों तक मरीज को भारी चीजें उठाने या ज्यादा मेहनत वाले काम न करने की सलाह दी जाती है.

नसबंदी करवाने वाले के मन में यह डर होता है कि इस से प्रोस्टैट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन एक स्टडी में बताया गया है कि मर्द नसबंदी और प्रोस्टैट कैंसर होने के बीच संबंध बेहद कमजोर है. साथ ही, नसबंदी को टैस्टिकुलर कैंसर का जोखिम कारक भी नहीं माना जाता है.

इन बातों का रखें खयाल

* मर्दों में नसबंदी करवाना एक परमानैंट फैसला माना जाता है, क्योंकि इसे पलटना 100 फीसदी पक्का नहीं है. जब आगे बच्चे न पैदा करने हों, तभी नसबंदी कराएं.

* नसबंदी करवाने के कुछ दिन बाद तक गर्भ निरोध के दूसरे तरीके इस्तेमाल करने पड़ सकते हैं. टैस्ट द्वारा पुख्ता होने पर कि आप के वीर्य में शुक्राणु नहीं हैं, तब वे तरीके इस्तेमाल करने बंद किए जा सकते हैं.

* नसबंदी के बाद अंडकोष में खून इकट्ठा होना, शुक्राणु इकट्ठा होना, संक्रमण और अंडकोष में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इस पर डाक्टर की सलाह जरूर लें.

* मर्दों में नसबंदी करवाने के बाद भी सैक्स से फैलने वाली बीमारियों से बचाव नहीं होता है, इसलिए आप को कंडोम का इस्तेमाल करना पड़ता है.

याद रखें कि बढ़ती आबादी पर काबू पाने के लिए नसबंदी एक जरूरी और कारगर उपाय है, पर इसे करवाने से पहले और बाद में डाक्टर की कही बातों पर अमल जरूर करें.

शादी से पहले खाना शुरु करें ये चीजें चेहरे पर आएगा ग्लो

शादी के दिन हर कोई चाहता है कि वो सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए दुल्हा-दुल्हन कई तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते हैं ताकि उनके चेहरे पर निखार बना रहे. लेकिन आज हम आपको ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे जिससे आपके फेस पर नैचुरल ग्लो आएगा. ऐसे कई चीजे है जो शादी से पहले आपके चहरे का चमका सकती है. तो आइए जानते है.

अंजीर खाने के फायदे

1- अगर आप अंजीर खाना शुरू कर देते हैं तो आप एनर्जेटिक रहेंगे. अगर आपकी शरीर एनर्जेटिक होगी तो आपके फेस पर नैचुरल ग्लो नजर आने लग जाएगा. अंजीर में कैल्शियम, पोटैसियम, फास्फोरस, मैंग्नीज, कॉपर जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं. अंजीर खाने से शरीर में कब्ज की परेशानी नहीं होगी. यह आपके पाचन तंत्र को ठीक रखने में मदद करेगा. इसके अलावा यह आपकी दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. अंजीर डायबिटीज में भी असरदार होता है. हर दिन आप 2 से 3 अंजीर खा लेते हैं तो आपको लिए पर्याप्त है.

एक बात का ध्यान रखें गर्मी के मौसम में इसे भिगोकर खाना ज्यादा लाभकारी होता है. सर्दियों में आप इसे सूखा खा सकते हैं. यह सूखा मेवा विटामिन और मिनरल्स से भरा होता है. इसमें विटामिन बी 6, पेंटोथेनिक एसिड और कॉपर होता है.

 सीड्स बढ़ाते हैं निखार

2- मक्का (स्वीट कोर्न के रूप में),, चिरौंजी, सूरजमुखी के बीज, खरबूजे के बीज, ड्राई फ्रूट्स ये सभी चीजें आपकी त्वचा में निखार बढ़ाने का काम करती हैं. क्योंकि ये स्किन को जरूरी असेंशियल ऑइल्स के साथ ही विटमिन और मिनरल्स का पोषण भी देती हैं. इससे त्वचा में कोलेजन का निर्माण बढ़ता है और स्किन बेदाग, प्लंपी और जवां बनती है.

फल लाते है ग्लो

3- केला, अनानास, ऐवकाडो, सेब, पपीता, अनार, संतरा, ये ऐसे फल होते हैं, जो आपकी त्वचा को बहुत जल्दी रिपेयर करने का काम करते हैं और स्किन सेल्स को स्मूद बनाते हैं. इन फलों के नाम बताते समय हमने इनसे मिलने वाले पोषक तत्वों के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा है कि ये आपकी पॉकेट पर भारी ना पड़ें.

मां के लिए बेटियां बनी अपराधी

‘अम्मा, यह बेटा है या बेटी?’’ एक युवती ने समीना से पूछा. अस्पताल के वार्ड में एक स्टूल पर बैठी समीना ने कहा, ‘‘अरी लाली, यह मेरा पोता है. आज सुबह ही पैदा हुआ है.’’

‘‘अम्मा, पोता होने से तेरी तो मौज हो गई,’’ उस युवती ने समीना को बातें में लगाते हुए कहा.

‘‘हां लाली, सब अल्लाह की मेहर है,’’ समीना आसमान की ओर हाथ उठा कर बोली.

‘‘अम्मा, तेरा पोता बड़ा खूबसूरत और गोलमटोल है,’’ युवती ने नवजात बच्चे को दुलारते हुए कहा, ‘‘अम्मा, तू कहे तो मैं इसे गोद में ले कर खिला लूं.’’

‘‘ले तेरा मन बालक को गोद में खिलाने की है तो खिला ले.’’ समीना ने अपने पोते को युवती की गोद में देते हुए कहा.

युवती नवजात को गोद में ले कर दुलारने, प्यार करने लगी. उसे अपने पोते पर इतना प्यार बरसाते देख कर समीना ने पूछा, ‘‘लाली, तू यहां क्या कर रही है?’’

‘‘अम्मा, मेरी चाची के औपरेशन से बच्चा हुआ है. वह इसी अस्पताल के बच्चा वार्ड में मशीन में रखा है.’’ युवती ने समीना को बताया, ‘‘मैं तो चाची की मदद के लिए आई थी, लेकिन बालक मशीन में रखा है, इसलिए इधर आ गई. मुझे बच्चा खिलाना अच्छा लगता है.’’

समीना ने उस युवती को आशीर्वाद दिया.

यह बीती 10 जनवरी की बात है. भरतपुर जिले की पहाड़ी तहसील के हैवतका गांव के निवासी तारीफ की पत्नी मनीषा ने तड़के 4 बज कर 20 मिनट पर पहाड़ी के राजकीय अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था. प्रसव के दौरान मनीषा को चूंकि अधिक रक्तस्राव हुआ था और वह एनीमिक भी थी, इसलिए डाक्टरों ने उसे जिला मुख्यालय भरतपुर के जनाना अस्पताल रेफर कर दिया था.

मनीषा के परिवार वाले उसे पहाड़ी से भरतपुर के राजकीय जनाना अस्पताल ले आए. भरतपुर, राजस्थान का संभाग मुख्यालय है. वहां अच्छी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं.

मनीषा दोपहर करीब 12 बज कर 28 मिनट पर अस्पताल पहुंची. कागजी खानापूर्ति के बाद उसे 12 बज कर 50 मिनट पर अस्पताल के पोस्ट नैटल केयर वार्ड नंबर-1 में बैड नंबर 7 पर भरती कर लिया गया.

अस्पताल में भरती होने पर प्रसूता मनीषा बैड पर लेट गई. मनीषा के साथ उस की सास समीना और समीना की सास जुम्मी सहित गांव के कई पुरुष भी भरतपुर आए थे. मनीषा का पति तारीफ साथ नहीं था. वह ट्रक चलाता था और ट्रक ले कर दिल्ली से मुंबई गया हुआ था. मनीषा की शादी करीब डेढ़ साल पहले हुई थी. पहली संतान के रूप में उसे बेटा हुआ था.

SOCIETY

मनीषा के नवजात बेटे को समीना गोद में ले कर खिला रही थी, तभी वह युवती वहां आ गई थी. उस ने समीना और मनीषा को बातों में लगा लिया. हंसहंस कर बात करते हुए उस ने समीना से उस का पोता अपनी गोद में ले लिया.

वह युवती जब नवजात को गोद में ले कर दुलार रही थी, तभी डाक्टर ने मनीषा को ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई. इस पर मनीषा का जेठ मुफीद और ताया ससुर सद्दीक भरतपुर के ही आरबीएम अस्पताल से ब्लड लेने चले गए. अस्पताल में भरती मनीषा, उस की सास समीना और दादी सास जुम्मी अस्पताल में रह गईं.

उस युवती को अपने पोते के साथ खेलता देख कर समीना ने उस से कहा, ‘‘लाली, हम ने सुबह से चाय तक नहीं पी है. तू हमारी बहू के पास बैठ कर बच्चे को खिला, हम अस्पताल के बाहर कैंटीन पर चायनाश्ता कर आते हैं.’’

इस के लिए वह युवती खुशीखुशी तैयार हो गई. दोपहर करीब 2 बजे युवती को वहां बैठा छोड़ कर समीना और उस की सास जुम्मी चाय पीने अस्पताल के बाहर चली गईं.

समीना और उस की सास के बाहर जाने के बाद उस युवती ने मनीषा से कहा कि तुम्हें शौचालय जाना हो तो मैं ले चलती हूं. मनीषा के हां कहने पर वह युवती उस का हाथ पकड़ कर उसे शौचालय ले गई. मनीषा का बेटा युवती की गोद में ही था. मनीषा शौचालय के अंदर चली गई.

कुछ देर बाद मनीषा शौचालय से बाहर निकली तो वहां वह युवती नहीं थी. मनीषा ने सोचा कि शायद वह बैड पर जा कर बैठ गई होगी.

मनीषा जैसेतैसे सहारा ले कर अपने बैड तक आई, लेकिन वह वहां भी नहीं थी. इस पर मनीषा ने शोर मचाया तो वार्ड में भरती अन्य प्रसूताओं के घर वाले एकत्र हो गए.

उधर अस्पताल के बाहर मनीषा की सास समीना जब चाय पी रही थी तो उस ने उस युवती को बच्चे को कंबल में लपेट कर ले जाते हुए देखा. समीना ने कंबल देख कर युवती को टोका भी लेकिन वह रुकी नहीं.

वह तेज कदमों से चली गई. इस से समीना को संदेह हुआ. वह वार्ड में बहू के पास आई तो वह रो रही थी. मनीषा ने बताया कि जो युवती बच्चे को गोद में ले कर खिला रही थी, वह उसे ले कर भाग गई है.

समीना तुरंत अस्पताल के बाहर आई, लेकिन युवती वहां कहीं नहीं थी. तब तक अस्पताल में भरती प्रसूताओं के घर वाले भी बाहर आ गए थे. लोगों ने पूछताछ की तो पता चला, कंबल में बच्चे को लपेटे हुए एक युवती सफेद रंग की स्कूटी पर गई है. उस स्कूटी के पास पहले से ही एक और युवती खड़ी थी. दोनों स्कूटी से गई हैं.

करीब 10 घंटे पहले कोख से जन्मा कलेजे का टुकड़ा चोरी हो जाने से मनीषा पीली पड़ गई. उस की तबीयत खराब होने लगी तो उसे डाक्टरों ने संभाला.

भरतपुर के सरकारी अस्पताल से नवजात लड़का चोरी होने की घटना से पूरे अस्पताल में सनसनी फैल गई. मनीषा के ताया ससुर सद्दीक ने इस की सूचना मथुरा गेट थाना पुलिस को दी. पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

पुलिस ने अस्पताल पहुंच कर जांचपड़ताल की. अस्पताल के बाहर वाहन पार्किंग वाले से पूछताछ में पता चला कि जिस स्कूटी पर दोनों युवतियां गई हैं, उस का नंबर 1361 है. यह नंबर पार्किंग वाले के पास रहने वाली आधी पर्ची पर लिखा मिला.

पार्किंग वाले ने वाहन की सीरीज व जिले का कोड नंबर नहीं लिखा था. पुलिस ने अस्पताल के अंदरबाहर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग खंगाली. कैमरों की फुटेज में एक युवती गोद में बच्चा लिए हुए जाती नजर आई.

पुलिस के पास जांच करने के लिए केवल सफेद रंग की स्कूटी का नंबर 1361 था. पुलिस को इसी के सहारे अपनी जांच करनी थी. भरतपुर के एसपी अनिल कुमार टांक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीशनल एसपी सुरेश खींची और डीएसपी (सिटी) आवड़दान रत्नू के नेतृत्व में कई पुलिस टीमें गठित कीं.

पुलिस टीमों ने स्कूटी के अलावा रंजिशवश ऐसी वारदात करने और दूसरे कारणों को भी ध्यान में रखा. पुलिस को यह भी शक हुआ कि किसी पारिवारिक रंजिशवश तो बच्चे का अपहरण नहीं हुआ. इसी अस्पताल में उसी दिन एक प्रसूता के 2 जुड़वां नवजात बच्चों की मौत हो गई थी, इस एंगल पर भी बच्चा चोरी की आशंका को ध्यान में रख कर जांच की गई.

SOCIETY

पुलिस का ध्यान इस बात पर भी गया कि युवती जब बच्चा ले जा रही थी तो उसे समीना ने देख लिया था. इस से घबरा कर उस ने कहीं नवजात को भरतपुर की सुजानगंगा नहर में न फेंक दिया हो.

पुलिस की एक टीम ने परिवहन कार्यालय जा कर जांचपड़ताल की तो भरतपुर में 1361 नंबर की 2 स्कूटी मिलीं. ये दोनों स्कूटी लाल रंग की थीं, जबकि बच्चा चोरी में इस्तेमाल की गई स्कूटी सफेद रंग की थी. इस पर आसपास के जिलों के परिवहन कार्यालयों की मदद लेने का निर्णय लिया गया.

मथुरा गेट थानाप्रभारी राजेश पाठक के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने सुजानगंगा नहर और आसपास के इलाकों में नवजात की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस ने प्रसूता मनीषा के गांव से भी जानकारी कराई कि कोई आपसी रंजिश का ऐसा मामला तो नहीं है, जिस के चलते नवजात का अपरहण कर लिया जाए.

दूसरे दिन पुलिस ने भरतपुर और आसपास के अस्पतालों व निजी नर्सिंगहोमों में बच्चे की तलाश की. पुलिस का मानना था कि नवजात की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए उसे किसी अस्पताल या नर्सिंगहोम में भरती कराया जा सकता है. लेकिन पुलिस को इस भागदौड़ में भी सफलता नहीं मिली.

जांच में एक तथ्य यह जरूर सामने आया कि बच्चे की अपहर्त्ता युवती एक दिन पहले और उस से पहले भी कई बार अस्पताल में रैकी करने आई थी. एक संभावना यह भी थी कि किसी की सूनी गोद भरने के लिए बच्चे की चोरी की गई हो.

पुलिस की एक टीम भरतपुर जिले के कुम्हेर भी भेजी गई. वहां 2 मृत बच्चों को जन्म देने वाली महिला बदहवास स्थिति में थी, इसलिए बच्चा चोरी की आशंका जताई गई थी, लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं मिला. फतेहपुर सीकरी में भी पुलिस टीम जांच करने गई, लेकिन नवजात का कोई सुराग नहीं मिला.

मामला उछलने पर दूसरे दिन पुलिस के साथ इस मामले की जांच बाल कल्याण समिति एवं अस्पताल प्रशासन ने भी शुरू की. अस्पताल प्रशासन ने जनाना अस्पताल की प्रभारी डा. ऊषा गुप्ता के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई.

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन रास्तों पर जांच शुरू की, जहां से बच्चे को ले जाया गया था. इसी क्रम में पुलिस की टीमें जांच के लिए मथुरा और आगरा भेजी गईं. भरतपुर के पास सब से बड़ा शहर मथुरा और आगरा है. पुलिस की एक टीम ने भरतपुर के वाहन शोरूमों पर पहुंच कर सफेद रंग की स्कूटी की बिक्री के रिकौर्ड की पड़ताल की. इस के अलावा निस्संतान दंपतियों और बावरिया बस्ती में भी नवजात की खोजबीन की गई.

तीसरे दिन अस्पताल प्रशासन ने प्रसूता मनीषा, उस की सास समीना, दादी सास, देवर व अन्य परिजनों से कई घंटे पूछताछ की. उधर नवजात बेटे का कोई अतापता नहीं मिलने पर मनीषा रोरो कर बेहाल हो गई थी.

भरतपुर से मथुरा गई पुलिस टीम को 12 जनवरी को वहां के परिवहन कार्यालय का रिकौर्ड देखने के बाद 1361 नंबर की सफेद रंग की एक स्कूटी के बारे में पता चला. यह स्कूटी यूपी85 सीरीज की थी. पुलिस को इस स्कूटी के मालिक का नामपता मिल गया.

इस बीच, 12 जनवरी को ही पूरे भरतपुर जिले में यह अफवाह तेजी से फैल गई कि अस्पताल से चोरी हुआ नवजात भरतपुर शहर के पास सरसों के एक खेत में पड़ा मिल गया है. यह अफवाह पुलिस तक पहुंची तो जांचपड़ताल की गई.

कई लोगों की काल डिटेल्स निकलवाई गईं. जांच में सामने आया कि मनीषा के मायके से फोन आया था. उन लोगों को भी यह बात किसी और ने बताई थी.

घटना के चौथे दिन यानी 13 जनवरी की सुबह भरतपुर से 15 किलोमीटर दूर सांतरुक की सड़क पर गोवर्धन नहर के किनारे झाडि़यों में कंबल में लिपटा एक नवजात बालक मिला. यह नवजात मनीषा का ही बेटा था, जो 10 जनवरी को भरतपुर के अस्पताल से चोरी हुआ था.

झाडि़यों में पड़े इस नवजात को 2 बाइक सवार युवकों ने देखा था. उन्होंने शोर मचाया तो आसपास के लोग एकत्र हो गए.

कंबल में लिपटे नवजात के पास दूध की बोतल रखी थी. उस के सिर पर गर्म टोपा और पैरों में गर्म पायजामी थी. बच्चे के फुल स्लीव स्वेटर पर सेफ्टी पिन से एक पत्र लगा हुआ था. पत्र पर लिखा था, ‘यह बच्चा भरतपुर के जनाना अस्पताल से चोरी हुआ है, कृपया इसे इस के मांबाप को सौंप दें.’

लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. नवजात को एंबूलेंस से भरतपुर के जनाना अस्पताल लाया गया. अस्पताल में 4 दिन से बदहवास पड़ी मनीषा ने अपने कलेजे के टुकड़े को देखते ही पहचान लिया.

मनीषा और उस की सास समीना ने बच्चे की बलाइयां लीं और उसे जी भर के दुलार किया. डाक्टरों ने नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर के उसे आईसीयू में भरती करा दिया.

SOCIETY

दूसरी ओर भरतपुर पुलिस ने मथुरा में 1361 नंबर की सफेद स्कूटी के मालिक का पता लगा कर स्कूटी जब्त कर ली. यह स्कूटी मथुरा के रामवीर नगर निवासी सेना के सूबेदार की पत्नी मीना देवी के नाम पर थी. पूछताछ के बाद पुलिस ने मीना देवी की शिक्षिका बेटी शिवानी को हिरासत में ले लिया.

शिवानी को पुलिस भरतपुर ले आई और उस से व्यापक पूछताछ की. पूछताछ के आधार पर पुलिस शिवानी की बहन प्रियंका को भी आगरा से भरतपुर ले आई.

भरतपुर की मथुरा गेट थाना पुलिस ने 14 जनवरी को दोनों बहनों को बच्चे के अपरहण के मामले में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में दोनों बहनों से जो कहानी पता चली, वह कुछ इस तरह थी—

मथुरा के रहने वाले सेना के सूबेदार लक्ष्मण सिंह जाट की शादी मीना देवी से हुई थी. कालांतर में उन के 4 बच्चे हुए. 3 बेटियां और 1 बेटा. उन्होंने 2 बेटियों की शादी कर दी थी, जबकि 14 साल के एकलौते बेटे की 2016 में असामयिक मौत हो गई थी. तीसरी 15 वर्षीय बेटी खुशबू मथुरा में मातापिता के पास रहती थी.

एकलौते भाई की मौत से दोनों बड़ी बहनों को तो झटका लगा ही, उन की मां मीना देवी डिप्रेशन में आ गई थीं. लक्ष्मण सिंह को बेटे की चाहत थी. इस के लिए रिश्तेदार और करीबी लक्ष्मण सिंह पर दूसरी शादी के लिए दबाव बना रहे थे. क्योंकि मीना देवी फिर गर्भवती नहीं हो पा रही थीं.

डिप्रेशन की हालत में मीना देवी ने एक बार सुसाइड करने का भी प्रयास किया था. उन्होंने कोई बेटा गोद लेने की भी कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली थी. मां का घर न उजड़े, इस के लिए दोनों बड़ी बेटियां शिवानी व प्रियंका तरकीब सोचने लगीं. दोनों बहनों के नाना लाल सिंह भी चाहते थे कि उन की बेटी मीना का घर बसा रहे. इस बीच दोनों बहनों ने पिता व अन्य घर वालों के बीच यह बात फैला दी कि उन की मां गर्भवती है.

दोनों बहनों ने किसी नवजात को खरीदने के लिए मथुरा व आगरा के निजी अस्पतालों में भी बात की थी. एक नर्स के माध्यम से बच्चा खरीदने की बात तय भी हो गई थी, लेकिन जिस प्रसूता का बच्चा लेना था, उस की मौत हो गई. इस से दोनों बहनों को अपनी मां के गर्भवती बताने की योजना पर पानी फिरता नजर आया.

इस के बाद मीना देवी के पिता लाल सिंह कई दिनों तक हरियाणा के मेवात इलाके में नवजात खरीदने के लिए घूमे. उन्हें किसी नर्स ने बताया था कि मेवात इलाके में गरीब लोग सक्षम न होने के कारण नवजात बच्चा बेच सकते हैं.

काफी प्रयासों के बाद भी जब किसी नवजात का इंतजाम नहीं हुआ तो दोनों बहनों शिवानी व प्रियंका ने अपनी मां के लिए बच्चा चोरी करने की योजना बनाई. इस के लिए उन्हें भरतपुर का सरकारी अस्पताल सुरक्षित जगह लगी. इस पर दोनों बहनें 9 जनवरी को भरतपुर आईं और अस्पताल में किसी नवजात बच्चे की तलाश की, लेकिन वे किसी बच्चे को ले जाने में कामयाब नहीं हुईं.

इस के अगले दिन 10 जनवरी को दोनों बहनें मां की स्कूटी से मथुरा से भरपुर आईं. उन्होंने अपनी स्कूटी जनाना अस्पताल के बाहर पार्किंग में खड़ी की. शिवानी अस्पताल में अंदर चली गई, जबकि प्रियंका अस्पताल के अंदरबाहर चक्कर लगा कर शिवानी पर नजर रखती रही.

शिवानी ने अस्पताल के वार्ड में भरती मनीषा की सास की गोद में नवजात को देख कर सब से पहले यही पूछा कि लड़का है या लड़की.

समीना ने जब उसे बताया कि लड़का है तो शिवानी को अपनी योजना सफल होती नजर आई. उस ने समीना और मनीषा को बातों में लगा कर बच्चे को अपनी गोद में ले लिया. इस बीच समीना जब चायनाश्ता करने अस्पताल से बाहर चली गई तो शिवानी ने मनीषा को शौचालय चलने की बात कही. मनीषा के शौचालय में घुसते ही शिवानी बच्चे को ले कर तेजी से अस्पताल से बाहर निकल आई.

प्रियंका ने उसे बच्चे के साथ आता देख कर पार्किंग से स्कूटी निकाल ली. इस दौरान समीना ने अपने पोते का कंबल पहचान कर शिवानी को टोका तो वह रुकने के बजाय बाहर स्कूटी ले कर तैयार खड़ी प्रियंका के साथ भाग निकली.

दोनों बहनें स्कूटी से बच्चे को ले कर भरतपुर से सीधे मथुरा पहुंचीं. मथुरा से उन्होंने मां मीना देवी और आगरा में नाना लाल सिंह को बच्चा खरीद कर लाने की बात बताई. बाद में प्रियंका अपनी ससुराल आगरा चली गई.

जांच में सामने आया कि वारदात के बाद दोनों बहनें पुलिस की गतिविधि पर नजर रखे हुए थीं. पुलिस का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था. यह देख कर दोनों बहनें 13 जनवरी की सुबह बच्चे को भरतपुर सीमा में रारह में सांतरुक स्थित नहर के पास लावारिस छोड़ कर लौट आई थीं.

दोनों बहनों में 20 साल की प्रियंका छोटी है और 23 साल की शिवानी बड़ी. मथुरा के रहने वाले पुष्पेंद्र जाट की पत्नी शिवानी एक निजी स्कूल में शिक्षिका है, जबकि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के हाथरस के सरूपा नौगावां निवासी और आजकल आगरा में रह रहे भूपेंद्र सिंह जाट की पत्नी प्रियंका बीए की पढ़ाई कर रही है.

शिवानी को औपरेशन से बेटी हुई थी. उसे डाक्टरों ने 2 साल तक बच्चा पैदा नहीं करने की सलाह दी थी. प्रियंका शादी के तुरंत बाद गर्भवती हो गई थी, लेकिन परीक्षा होने के कारण उस ने गर्भपात करा दिया था. इस से उस के ससुराल वाले नाराज थे. वारदात के दौरान वह 15 दिन से मायके में थी.

पुलिस ने शिवानी व प्रियंका को 15 जनवरी, 2018 को अदालत में पेश किया. अदालत ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. शिक्षा के पेशे से जुड़ी और एक बेटी की मां शिवानी ने पढ़ीलिखी छोटी बहन के साथ मिल कर अपनी मां का टूटता घर बसाए रखने के लिए बच्चे को चुरा कर एक मां को जो यातना दी, उस अपराध के लिए कानून उन्हें सजा देगा. लेकिन इस वारदात ने दोनों के घर वालों व ससुराल वालों के सिर भी शर्म से झुका दिए.

मेरे पति को इरैक्शन की प्रौब्लम आ रही है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 45 वर्षीय नौनवर्किंग, विवाहित महिला हूं. मेरे पति मुझ से 2 वर्ष बड़े हैं. वे अच्छी प्राइवेट जौब में हैं, शारीरिक रूप से बलिष्ठ हैं. उन्हें कोई बीमारी नहीं है. किसी तरह की दवाई का सेवन भी नहीं करते. आजकल उन के साथ इरैक्शन की प्रौब्लम आ रही है. इस से उदास हो जाते हैं. इस का हमारे वैवाहिक जीवन पर असर पड़ रहा है. क्या करूं?

जवाब

सब से पहले जानने की कोशिश करें कि पति को कोई परेशानी तो नहीं है जो वे आप से शेयर नहीं कर रहे. हो सकता है औफिस की कोई प्रौब्लम चल रही हो जो वे आप से छिपा रहे हों.

यदि उपरोक्त बात न हो तो कुछ अपनेआप पर भी ध्यान दें. पति के सामने जरा बनसंवर कर रहें. कुछ सैक्सी कपड़े पहनें और पति से खुल कर जानें कि उन्हें क्या चाहिए. अपने शरीर पर ध्यान दें, उसे आकर्षक बनाएं. रोज सैर पर जाएं. एक्सरसाइज करें और पति को भी करवाएं. गरिष्ठ भोजन के बजाय हैल्दी फूड खाएं.

आप पतिपत्नी साथ बैठ कर रात में अपने कमरे में रोमांटिक फिल्म देखें तो आप की समस्या 90 फीसदी हल हो सकती है. पत्नियों को वैसे भी पतियों को लुभा कर रखना चाहिए. हमारी राय मान कर देखिए. फिर भी, कुछ फर्क नजर न आए तो डाक्टरी परामर्श ले सकती हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

जानिए शेरपा अमिताभ कांत के बारे में

हाल ही में दिल्ली में जी-20 का सम्मेलन किया गया था. इस सम्मेलन में भारत के रवैए और कूटनीति पर कांग्रेस के बड़े नेता शशि थरूर का बड़ा ही पौजिटिव कमैंट आया था और उन्होंने सरकार से ज्यादा एक आदमी की तारीफ की थी, जिन का नाम है शेरपा अमिताभ कांत.
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने अपनी एक पोस्ट में कहा था, ‘बहुत अच्छे अमिताभ कांत. ऐसा लगता है कि जब आप ने आईएएस बनना चुना तो आईएफएस ने एक बहुत अच्छा राजनयिक खो दिया. जी-20 शेरपा ने कहा कि रूस और चीन के साथ बातचीत की और कल रात ही अंतिम ड्राफ्ट मिला. यह भारत के लिए जी-20 में एक गौरवपूर्ण क्षण है.’
याद रहे कि भारत के जी-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद अमिताभ कांत को भारत की तरफ से शेरपा नियुक्त किया गया था. अमिताभ कांत से पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जी-20 में भारत के शेरपा थे.
जी-20 में शेरपा की अहम जिम्मेदारी होती है. इन का सब से अहम काम जी-20 सदस्य देशों के बीच तालमेल बिठाना और बातचीत करना होता है.
शेरपा ही सदस्य देशों के साथ बैठकें करते हैं, जी-20 के काम की जानकारी साझा करते हैं और आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनवाते हैं.
सवाल उठता है कि शेरपा शब्द जी-20 के साथ कैसे जुड़ गया? दरअसल, यह शब्द आया है नेपाल और तिब्बत की पहाड़ियों में रहने वाले एक समुदाय के नाम से. इन लोगों को उन की जीवटता और मुश्किल हालात में हिम्मत दिखाने के लिए जाना जाता है. इतना ही नहीं, शेरपा पर्वतारोहियों को शिखर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
शेरपा अमिताभ कांत ने भी एक तरह से जी-20 के शिखर सम्मेलन में भारत की शिखर पर पहुंचाया है.
भारत सरकार के कार्यक्रमों स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, इंक्रेडिबिल इंडिया में अहम भूमिका निभाने वाले अमिताभ कांत का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था और वे 1980 बैच के आईएएस हैं. वे केरल के कोझीकोड के कलक्टर रहे हैं. इस के अलावा वे केरल सरकार के पर्यटन विभाग के सचिव भी रहे हैं.
अमिताभ कांत भारत सरकार के पर्यटन विभाग के संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम  के वे भारत में ग्रामीण पर्यटन के नैशनल प्रोजैक्ट डायरैक्टर भी रह चुके हैं. जून, 2022 तक वे नीति आयोग के चेयरमैन भी थे.

अक्षरा सिंह ने क्या कर ली शादी? फैंस पूछा रहे है कौन है पतिदेव!

भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह इन दिनों सुर्खियों में है. अक्षरा का हाल में एक वीडियो सामने आया है जिसे देख उनके फैंस हैरान हो रहे है और उनसे तरह-तरह के सवाल कर रहे है. उनके पोस्ट ने सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है फैंस उनके नए लुक को देखकर काफी कन्फ्यूज हो रहे है. दरअसल, अक्षरा ने ब्राइडल लुक कैरी किया हुआ है साथ में सिंदुर भी लगाया हुआ है.

 

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आपको बता दें, कि अक्षरा सिंह ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट अपडेट करते हुए जो पोस्ट किया है उसे देख उनके फैंस काफी दंग रह गए है. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है जो देख रह है वह हैरान है कि अक्षरा सिंह ने कब शादी कर ली है. दरअसल, जो वीडियो अक्षरा ने शेयर किया है उसमें वह नई नवेली दुल्हन की तरह तैयार हुई दिख रही है.उनका ये वीडियो देख लोग कह रहे हैं कि अक्षरा सिंह ने शादी कब कर ली? एक यूजर ने लिखा, ‘ आपने शादी कब कर ली अक्षरा जी’ दूसरे ने लिखा, ‘आपके पतिदेव कौन हैं आजतक पता नहीं चला.’ हालांकि अक्षरा सिंह का ये क्लिप किसी गाने का सीन है. भोजपुरी एक्ट्रेस ने अबतक शादी नहीं की है.

 

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भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. एक्ट्रेस अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. अक्षरा की हर पोस्ट पर लोग दिल खोलकर प्यार देते हैं. अक्षरा ने बिग बॉस ओटीटी में धमाल मचाया था. अब लोग ये चाहते हैं कि अक्षरा सिंह, सलमान खान के शो’ बिग बॉस 17′ में शामिल हो. हालांकि अबतक इसको लेकर कोई अपडेट सामने नहीं आया है.

 

क्या Bigg Boss 17 में नजर आएंगी भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी, एक्ट्रेस ने तोड़ी चुप्पी

इन दिनों बिग बॉस 17 को लेकर खबरे तेज हो रही है. सलमान खान लोकप्रिय शो का हाल ही में प्रोमो रीलिज किया गया था. जिसे देख फैंस काफी एक्साइटेड और बिग बॉस से जुड़ी हर खबर पर उनकी निगाहे टिकी है.क्योकि शो जल्द ही टीवी पर आने वाला है ऐसे में शो में कौन -कौन सेलिब्रिटी आने वाला है या वाली है इसकी खबरे तुल पकड़ रही है. अब इस बार शो में भोजपुरी एक्ट्रेस के आने के भी चर्चे हो रहे है. कि एक्ट्रेस रानी चटर्जी इस शो में नजर आएंगी की नहीं.

आपको बता दें, हाल में भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होने कई सारे बातें की है, इन बातों के बीच में उन्होने बिग बॉस में आने ना आने के बारे में चर्चा की है. जिसे जानने के लिए दर्शक काफी बेताब है. एक्ट्रेस ने कहा है कि ‘मुझे बिग बॉस ओटीटी 2 का ऑफर आया था. लेकिन इसके लिए मुझे अप्रोच नहीं किया गया है. मुझे इस शो में जाने की इच्छा नहीं है.’ हालांकि वे बिग बॉस 17 में आएंगी की नहीं ये सवाल अब भी बना हुआ है. वही, शो अगले महीने से 15 अक्टूबर को शुरु होने जा रहा है.

 

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बताते चले की रानी चटर्जी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है वह अक्सर सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो शेयर करती रहती है.रानी को हर पोस्ट पर लाइक और शेयर मिलते है.रानी की फैन फ्लोइंग काफी तगड़ी है.इस बात की गवाही उनका इंस्टाग्राम अकाउंट देता है. रानी चटर्जी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1.7 मिलियन फोलोअर्स है.उनकी कोई भी तस्वीर आते ही इंटरनेट पर छा जाती है. एक समय रानी चटर्जी को उनके बढ़ते वजन के कारण काफी ट्रोल किया जाता था. लेकिन रानी ने सभी को मुंहतोड़ जवाब दिया है. उन्होंने अपने आपको पूरी तरह से बदल दिया है.अब भोजपुरी क्वीन हर रोज जिम में पसीना बहाती हैं. खूबसूरती और एक्टिंग के मामले में भोजपुरी की रानी चटर्जी, बॉलीवुड से लेकर टीवी तक की एक्ट्रेसेस को कड़ी टक्कर देती हैं.

भोजपुरी फिल्म ‘सिंह साहब द राइजिंग’ में दमदार दिख रहे हैं देव सिंह

कुछ साल पहले भोजपुरी सिनेमा में एक सह कलाकार के रूप में कदम रखने वाले देव सिंह ने अपनी उम्दा अदाकारी से न केवल भोजपुरी फिल्मों, बल्कि छोटे परदे के साथसाथ हिंदी फिल्मों में भी अपने हुनर का जौहर दिखाया है.

उन्होंने जब भोजपुरी की दर्जनों फिल्मों में विलेन का रोल किया तो भोजपुरी के दूसरे विलेन उन के आगे बौने लगने लगे. पर उन के अभिनय का सफर और ऐक्टिंग की भूख सिर्फ फिल्मों में विलेन बन कर रहने तक सीमित नहीं थी, इसलिए वे कई फिल्मों में पौजिटिव रोल में भी अपनी छाप छोड़ते आए हैं. इसी के साथसाथ वे छोटे परदे के कई हिट सीरियलों में भी खूब नजर आए हैं.

इस बायोपिक फिल्म से बड़े अभिनेताओं को पछाड़ा

अभिनेता देव सिंह को उन की अलहदा भूमिकाओं के लिए ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ सहित कई दूसरे अवार्डों भी से नवाजा जा चुका है. लेकिन इन दिनों वे अपनी एक खास फिल्म की वजह से काफी सुर्खियों में हैं.

वे भोजपुरी की बायोपिक फिल्म ‘सिंह साहब : द राइजिंग में खूबसूरत ऐक्ट्रैस अंजना सिंह के साथ नजर आने वाले हैं. यह फिल्म उत्तर प्रदेश के मूल निवासी समाजसेवक और बिजनेसमैन आरएन सिंह के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पहले खुद को मुंबई में स्थापित किया और फिर लाखों लोगों को रोजीरोटी देने का काम किया.

इस फिल्म का ट्रेलर ‘इंटर10 रंगीला’ पर रिलीज हो चुका है और जो लोग भी ट्रेलर को देख रहे हैं, उन का मानना है कि इस फिल्म में देव सिंह ने आरएन सिंह के रूप में अभिनय कर उन के किरदार को फिर से जिंदा कर दिया है. इस फिल्म में अंजना सिंह ने देव सिंह की पत्नी का किरदार निभा कर फिल्म में जान डाल दी है.

हर एंगल से फिट है यह फिल्म

फिल्म समीक्षकों का मानना है कि भोजपुरी सिनेमा में जिस तरह की फिल्मों के निर्माण की जरूरत थी उस पर बायोपिक फिल्म ‘सिंह साहब द राइजिंग’ खरी उतरती है. अभी तक भोजपुरी में बन रही फिल्में एक ही ढर्रे की कहानियों, गानों और फिल्मांकन के रास्ते पर चल रही थीं, लेकिन इस फिल्म में आरएन सिंह की उस वास्तविक जिंदगी और उस से जुड़े संघर्ष को फिल्माया गया है, जिसबसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं.

इस फिल्म को इस की कहानी के हिसाब से ही फिल्माया गया है. फिल्म की लोकेशन, ड्रैस, बैकग्राउंड इत्यादि को समय के अनुसार फिल्माने की कोशिश की गई है. इस फिल्म के संवाद भी काफी असरदार हैं.

इस फिल्म में जहां एक तरफ इमोशन का जबरदस्त तड़का लगा है, वहीं दूसरी तरफ फिल्म के ऐक्शन सीन भी दर्शकों में रोमांच पैदा करने वाले दिख हैं. इस फिल्म के कर्णप्रिय गाने लिखे हैं मुसाफिर जौनपुरी ने तो गानों को अपने संगीत से सजाया है अरविंद लाल यादव ने.

इन कलाकारों की मौजूदगी भी असरदार

भोजपुरी सिनेमा में चुनिंदा कहानियों पर फिल्में करने वाले अभिनेता सुशील सिंह ने इस फिल्म में सिंह साहब के बड़े भाई अवध नारायण सिंह की भूमिका निभाई है, जो अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठते नजर आते हैं. इस के अलावा इस फिल्म मे जेपी सिंह, रिंकू भारती, वीना पांडेय, मनोज नारायण, दिवाकर श्रीवास्तव, संतोष पहलवान, अरुण सिंह (भोजपुरिया काका), राज मौर्या सहित दूसरे कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं को जीवंत कर दिया है.

निर्देशन की कसावट

युवा फिल्म निर्देशक धीरज पंडित भोजपुरी सिनेमा में अलग प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने निर्देशन में दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ हाल ही में ‘पूर्वांचल’ वैब सीरीज को पूरा किया है. निर्देशक ने समाजसेवक और बिजनेसमैन आरएन सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म को परदे पर उतार यह साबित कर दिया की वे आने वाले दिनों में भोजपुरी सिनेमा को अलगअलग मिजाज की और भी फिल्में देने वाले हैं.

फिल्म निर्माण की जिम्मेदारी

इस फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी गीता सिंह, चंदा सिंह और नीतू सिंह ने संभाली है, जबकि सहनिर्माता संजू सिंह और उदय भगत हैं. कहानी लिखी है शुभम सिंह ने जबकि पटकथा शुभम सिंह और धीरज पंडित ने लिखी है. फिल्म में संवाद भी धीरज पंडित ने दिए हैं. फिल्म का छायांकन सनी और रणविजय सिंह ने संभाला है, जबकि कला निर्देशक महेंद्र सिंह, संकलन रंजीत प्रसाद और प्रोडक्शन मैनेजर की जिम्मेदारी राजेश भगत ने निभाई है. फिल्म का निर्माण रामसखी रामनिवास फिल्म्स प्रा. लिमिटेड के बैनर तले किया गया है.

मैं सस्ता सामान बेचता हूं फिर भी ग्राहक कम आते हैं, क्या करूं?

सवाल

लौकडाउन खत्म होने के बाद इसी वर्ष मैं ने जून के महीने में एक दुकान खरीदी थी. मैं अपने आसपास के दुकान वालों से सस्ता सामान बेचता हूं. फिर भी ग्राहक कम आते हैं. क्या करूं?

जवाब

चमकती चीज हर किसी को लुभाती है. इस बात से आप भी वाकिफ होंगे. इसलिए सब से पहले तो अपनी दुकान को आकर्षक बनाएं. दुकान में सामान ऐसा रखा होना चाहिए कि वह भरीभरी लगे और व्यवस्थित भी. एक ग्राहक सिर्फ सामान के लिए नहीं आता, बल्कि उसे ग्राहक वाली इज्जत भी चाहिए होती है. इसलिए ग्राहक का सम्मान करें तथा उन से मीठे बोल बोलिए. आसपास के एरिया में होम डिलीवरी की सुविधा दीजिए.

यदि दुकान पर महिला अपने छोटे बच्चे के साथ आती है तो बच्चे को छोटा सा उपहार टौफी, चौकलेट आदि दे कर खुश करें. समयसमय पर कुछ स्कीम निकालें, जिस से लगे कि आप कुछ अलग कर रहे हैं. और हां, सब से जरूरी बात, धैर्य से काम कीजिए. किसी भी काम को सफलता मिलने में वक्त लगता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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