पति शराबी है, मैं बेटे की शादी के लिए पैसे नहीं जुटा पा रही हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरे बेटे की उम्र शादी की हो गई है, लेकिन हम उस की शादी नहीं करा पा रहे हैं. उस के पापा आए दिन शराब पीते हैं व कभीकभी कर्ज तक ले लेते हैं जिस से उन की तनख्वाह घर में आने की जगह उन के ही खर्चों में निबट जाती है. हम बेहद परेशान हो चुके हैं. बेटे की शादी के लिए पैसा नहीं है, उस की तनख्वाह से ही घर चलता है, इसलिए शादी के लिए उस के पास भी पैसे जमा नहीं हैं. हमारा एकलौता बेटा है, हम उस की कौर्ट मैरिज कराएंगे तो लोग क्या कहेंगे? क्या करें, समझ नहीं आता.

जवाब

आप की सब से बड़ी परेशानी तो यह है कि आप यह सोच रही हैं कि लोग क्या कहेंगे. लोग आप का घर नहीं चला रहे हैं, न ही आप के दुखदर्द से उन का कुछ लेनादेना है. इस दिखावे की दुनिया से बाहर निकलिए. आप देख रहे होंगे कि किस तरह लोग कोरोना के चलते 15-20 लोगों में ही शादी कर रहे हैं.

अपनी हैसियत के हिसाब से शादी करने में आखिर परेशानी ही क्या है. कोर्ट मैरिज तो शादी का सब से सुलभ और शांतिपूर्ण तरीका है. लोग क्या कहेंगे जैसी बातें पीछे छोड़ आगे बढ़ने में ही सब की भलाई है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

बीड़ीसिगरेट के धुएं में दम तोड़ती जिंदगी

आप जानते हैं कि बीड़ीसिगरेट पीने के चलते भारत में हर साल 10 लाख लोगों की जानें चली जाती हैं? नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे 4 के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में 13 राज्यों में कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि तंबाकू खाने वालों की तादाद 47 फीसदी है.

दुनियाभर में तकरीबन 60 लाख लोग हर साल तंबाकू की बलि चढ़ते हैं, जिन में से 10 फीसदी यानी 6 लाख लोग नौनस्मोकर होने के बावजूद पैसिव स्मोकिंग का शिकार होते हैं.

नयति सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मथुरा द्वारा कराई गई एक रिसर्च के मुताबिक, अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तकरीबन 21 फीसदी आबादी तंबाकू की लत की शिकार है. यह भी पाया गया है कि 45 साल या इस से ज्यादा की उम्र के लोगों में तंबाकू का प्रयोग आम है, जबकि नौजवान पीढ़ी धूम्रपान की गिरफ्त में है. धूम्रपान करने वाली 55 फीसदी आबादी की उम्र 25 से 45 साल के बीच पाई गई.

दिल्ली के बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की डाक्टर तपस्विनी शर्मा के मुताबिक, तंबाकू की लत ओरल कैविटी, कंठ नली, ग्रास नली, पेनक्रियाज, आंत और किडनी व फेफड़ों के कैंसर की वजह बनती है.

तंबाकू की लत का सीधा संबंध सभी तरह के कैंसर से होने वाली तकरीबन 30 फीसदी मौतों से होता है. बीड़ीसिगरेट पीने वाले ऐसा नहीं करने वालों की तुलना में औसतन 15 साल पहले मौत के मुंह में चले जाते हैं. सिगरेट, पाइप, सिगार, हुक्का पीने और तंबाकू चबाने व सूंघने जैसे तंबाकू सेवन के दूसरे तरीके खतरनाक होते हैं.

तंबाकू में मौजूद निकोटिन दिमाग में डोपामाइन व एंड्रोफाइन जैसे कैमिकलों का लैवल बढ़ा देता है, जिस से इस की लत लग जाती है. ये कैमिकल मजे का एहसास कराते हैं और इसलिए तंबाकू पीने या चबाने की तलब बढ़ जाती है. अगर कोई शख्स इस लत को छोड़ना भी चाहता है, तो उसे चिड़चिड़ाहट, बेचैनी, तनाव और एकाग्रता की कमी जैसी परेशानियों से गुजरना पड़ता है.

तंबाकू और तंबाकू के धुएं में तकरीबन 4 हजार तरह के कैमिकल पाए जाते हैं, जिन में से 250 कैमिकल जहरीले होते हैं और 60 केमिकल कैंसर के होने की वजह बनते हैं.

तंबाकू का धुआं खून की नलियों को सख्त बना देता है, जिस से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. इस में कार्बनमोनोआक्साइड तत्त्व भी होता है, जो खून में आक्सिजन की मात्रा घटा देता है.

आमतौर पर सिगरेट नहीं पीने वालों के मुकाबले सिगरेट पीने वालों में कोरोनरी आर्टरी संबंधी बीमारियों से होने वाली मौत की दर 70 फीसदी ज्यादा रहती है.

बीड़ीसिगरेट पीने की लत के चलते औरतें समय से पहले ही बच्चे को जन्म दे देती हैं या उन्हें बारबार बच्चा गिरने की समस्या से जूझना पड़ता है. साथ ही, मरा हुआ बच्चा पैदा होना या बच्चे के कम वजन होने का खतरा रहता है.

बीड़ीसिगरेट पीने के चलते मर्दों में फेफड़े के कैंसर के 90 फीसदी मामले हैं, जबकि औरतों में 80 फीसदी मामले देखे गए हैं. तंबाकू का धुआं नौनस्मोकरों खासकर बच्चों के लिए भी खतरनाक होता है.

society

बीड़सिगरेट पीने वाला कोई शख्स न सिर्फ खुद की सेहत को खतरे में डालता है, बल्कि अपने आसपास मौजूद लोगों, मसलन काम करने वालों और परिवार के दूसरे सदस्यों की जिंदगी भी खतरे में डाल देता है.

बीड़ीसिगरेट पीने की लत अमूमन किशोरावस्था में ही लगती है और जवान होतेहोते लोग इस के आदी हो जाते हैं. इस की लत की चपेट में आने वालों को इस बात का एहसास नहीं होता कि वे क्या कर रहे हैं या किस चीज का इस्तेमाल कर रहे हैं.

ऐसे छोड़ें तंबाकू की लत

अगर एक बार किसी को तंबाकू की लत लग जाती है, तो इसे छोड़ पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. उसे सिरदर्द, नींद न आना, तनाव, बेचैनी, हाथपैर कांपने और भूख न लगने की शिकायत या खून की उलटी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

लेकिन कुछ तरीके ऐसे हैं, जिन को अपनाने से इस लत से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती है:

– तंबाकू छोड़ने के लिए सब से जरूरी है कि इसे छोड़ने का पक्का फैसला करें.

– तंबाकू एक झटके में छोड़ना मुश्किल है. धीरेधीरे मात्रा कम करते हुए छोड़ें.

-अपने दोस्तों, परिचितों व रिश्तेदारों को भी बता दें कि आप ने नशा छोड़ दिया है और वे आप को नशा करने के लिए मजबूर न करें.

-अपने पास सिगरेट, तंबाकू, गुटका, माचिस वगैरह रखना छोड़ दें.

-जब आप खुद को सारा दिन मसरूफ रखते हैं, तो आप का ध्यान तंबाकू की तरफ जाएगा ही नहीं.

-अच्छा खानपान और समय पर आराम जैसी बातों का खयाल रखें.

-नशा करने वाले दोस्तों की संगत छोड़ दें.

-तंबाकू छोड़ने के लिए आप बिना शुगर वाली चुइंगम चबाते रहें, फिर आप को तंबाकू की तलब नहीं लगेगी.

-जब भी सिगरेट पीने की इच्छा हो, तो जीभ पर थोड़ा नमक रख लें.

डाक्टर तपस्विनी शर्मा कहती हैं कि बीड़ीसिगरेट पीने से छुटकारा पाने के लिए दवाएं और व्यवहार थैरैपी भी इलाज करने का एक रास्ता हो सकता है. जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मजबूत एंटीस्मोकिंग मीडिया कैंपेन अच्छा प्लेटफौर्म हो सकता है.

स्कूलों में धूम्रपान न करने की सीख भी दी जानी चाहिए. अपने घरों, सार्वजनिक जगहों पर बीड़ीसिगरेट पीने या तंबाकू खाने पर बैन करने जैसी सामाजिक पहल से जागरूकता बढ़ाई जा सकती है.

वैसे, सरकार ने नाबालिगों को धूम्रपान, तंबाकू और गुटके के नुकसान से बचाने के लिए इन्हें बेचना गंभीर अपराध घोषित किया है. दिसंबर, 2015 में भारतीय संसद में पास हुए नए जुवैनाइल जस्टिस ऐक्ट में किसी नाबालिग को तंबाकू या उस से संबंधित चीजें बेचना दंडनीय अपराध माना जाएगा और कुसूरवार को 7 साल तक की जेल व एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा.

मलाइका अरोड़ा का अर्जुन कपूर के साथ डांस हुआ वायरल, फैंस हो गए दीवाने

हिंदी फिल्मों की ‘आइटम गर्ल’ मलाइका अरोड़ा अकसर अपनी फिटनैस वीडियो को ले कर भी सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. उन के वीडियो आते ही सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो जाते हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Arjun Kapoor (@arjunkapoor)


इन दिनों ऐसा ही एक ओर वीडियो जम कर वायरल हो रहा है, जिस में मलाइका अरोड़ा अपने बौयफ्रैंड अर्जुन कपूर के साथ हैं और अपने ही एक आइटम डांस पर ठुमकती नजर आ रही हैं.

आप को बता दें कि इस वीडियो में मलाइका अरोड़ा अर्जुन कपूर के साथ जम कर डांस करती दिख रही हैं. इस वीडियो को मलाइका अरोड़ा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया है. इस वीडियो में मलाइका अरोड़ा ने मैरून और ब्लैक कलर की शौर्ट ड्रैस पहनी है तो वहीं अर्जुन कपूर ब्लैक कलर की शौर्ट आउटफिट में नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर ‘होंठ रसीले’ गाने पर जबरदस्त अंदाज में डांस कर रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)


इस वीडियो को देख कर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं. एक यूजर ने कमैंट करते हुए लिखा, ‘ये तब तक ऐसे रहेंगे, जब तक शादी नहीं करेंगे.’ वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, ‘ये दोनों बहुत क्यूट हैं.’ एक और यूजर ने लिखा, ‘मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर के एक्सप्रैशंस काफी क्यूट लग रहे हैं.’ मलाइका और अर्जुन के इस वीडियो पर एक दूसरे यूजर ने लिखा, ‘उम्र मिले न मिले, लेकिन वाइब जरूर मिलनी चाहिए.’

बता दें कि मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर काफी लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं. हाल ही में दोनों के ब्रेकअप की खबरें सामने आई थीं, लेकिन बाद में अर्जुन और मलाइका ने इन खबरों को खारिज कर दिया था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Arjun Kapoor (@arjunkapoor)


गौरतलब है कि साल 2019 में मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर ने अपने रिश्ते को औफिशियल किया था. ये दोनों अकसर सोशल मीडिया पोस्ट के जरीए एकदूसरे पर प्यार बरसाते भी नजर आ जाते हैं.

मोनालिसा और पवन सिंह ने बारिश में किया खुल्लमखुल्ला प्यार, वीडियो देख कर बेताब हुए फैंस

भोजपुरी इंडस्ट्री के जानेमाने सुपरस्टार हीरो पवन सिंह इन दिनों सुर्खियों में हैं, क्योंकि उन का और हीरोइन मोनालिसा का डांस वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है. दोनों इस वायरल वीडियो में जम कर रोमांस करते नजर आ रहे हैं. दोनों ने काफी बोल्ड सीन दिए हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Pawan Singh (@singhpawan999)


पवन सिंह ने वैसे तो कई हीरोइनों के साथ काम किया है, लेकिन उन की और मोनालिसा की जोड़ी सब से ज्यादा हिट है. अब फैंस इस वीडियो को देख कर पानीपानी हो रहे हैं.

आप को बता दें कि पवन सिंह और मोनालिसा का पुराना गाना फिर से वायरल होने लगा है. इस गाने में पवन और मोनालिसा ने ऐसा रोमांस किया है कि देखने वाले सभी लोग घायल हो गए हैं और आहें भरने लगे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by MONALISA (@aslimonalisa)


भोजपुरी स्टार पवन सिंह और मोनालिसा का बोल्ड गाना ‘जग है पा जाता’ यूट्यूब पर धमाल मचा रहा है. इस गाने में पवन सिंह और मोनालिसा भरी बारिश में जम कर रोमांस करते नजर आ रहे हैं. छोटी स्कर्ट और सफेद साड़ी में मोनालिसा को देख पवन सिंह घायल हो जाते हैं, जिस के बाद दोनों जम कर ठुमके लगाते हैं.

बता दें कि इस गाने में मोनालिसा ने पवन सिंह पर दिल खोल कर प्यार बरसाया है. मालूम हो कि पवन सिंह और मोनालिसा के इस गाने को 85 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. बात करें मोनालिसा कि तो अब वे टीवी की दुनिया में धमाल मचा रही हैं. पहले मोनालिसा सलमान खान के शो ‘बिग बौस 10’ में नजर आई थीं. इस के बाद अब वे टीवी शो कर रही हैं.

मोनालिसा का बेबाक अंदाज फैंस को काफी पसंद आता है. बताते चलें कि मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहती हैं और अकसर अपने फैंस के साथ तसवीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं.

मेरी शादी होने वाली है, पर मैं किसी और लड़के से प्यार करती हूं तो ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए ?

सवाल

मैं अजीब दुविधा में हूं. मेरी उम्र 26 साल की है. लौकडाउन से पहले इसी साल दीदी की शादी में अपने जीजा के दोस्त को अपना दिल दे बैठी हूं. शादी के दौरान हम दोनों के बीच खूब हंसीमजाक हुआ. अब मुझे रातदिन उस का खयाल आता रहता है. लेकिन मुझे यह नहीं पता कि वह भी मेरे बारे में वही महसूस कर रहा है जो मैं कर रही हूं. क्या मुझे घर वालों से बात करनी चाहिए क्योंकि वे अब मेरे विवाह के लिए लड़का ढूंढ़ने लगे हैं?

जवाब

इस में मुश्किल क्या है. आप सब से पहले अपनी दीदी से बात कीजिए. वह आप के जीजा से बात कर के पहले उस लड़के के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ले. वह आप के जीजा का दोस्त है तो उन्हें पता ही होगा कि कहीं उस का पहले से कोई अफेयर तो नहीं या शादी के बारे में उस का क्या खयाल है और आप के बारे में क्या विचार हैं.

2 बातें हो सकती हैं- पहली यह कि वह लड़का भी आप को पसंद करने लगा हो या दूसरी यह कि उस का हंसीमजाक, आप से बातें करना दीदी की शादी तक ही सीमित हो. पहले दीदीजीजा को उस लड़के से बात करने दीजिए. सब ठीक रहा तो वे ही घर वालों से बात कर लेंगे. अगर उस लड़के की तरफ से आप के लिए उन्हें कोई सिग्नल नहीं मिला तो आप भी उस लड़के को भूलने की कोशिश करें, समझदारी इसी में है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

भ्रामक उपचार का प्रचार : शर्तिया इलाज के साइड इफैक्ट

पिछले कुछ सालों से बाजारवाद के चलते जनता सेहत के प्रति बहुत जागरूक हुई है. जागरूक होना अच्छी पहल है, लेकिन इस जागरूकता के पीछे बाजारवाद का होना खतरनाक है.

टैलीविजन चैनलों पर देशी नुसखे और 100 फीसदी फायदे की गारंटी के साथ इश्तिहार दिखाए जाते हैं. इन में 7 दिनों में सिर पर बाल आना, 10 दिनों में डायबिटीज की बीमारी ठीक होना और 7 दिनों में चेहरे की झुर्रियां गायब कर देने की देशी दवाएं बताई जाती हैं. बाद में एक बात कही जाती है कि

इसे सब्सक्राइब करें यानी इन का यह सब्सक्राइब हजार से ऊपर होने पर चैनल उस पर उसी हिसाब से इश्तिहार डालता है और हर इश्तिहार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा फर्जी लोगों के पास चला जाता है.

कुछ लोगों के इंटरव्यू भी दिखाए जाते हैं. उसी के साथ एक झूठी कहानी भी बताई जाती है कि किस तरह अफ्रीका के घने जंगलों में फलां फल को खोजा गया और उस का इस्तेमाल किया गया, जिस से शर्तिया फायदा मिल गया.

कौन सा फल? उस के रासायनिक गुण क्या हैं? उस के साइड इफैक्ट क्या हैं? इस बारे में कुछ भी नहीं बताया जाता है, जो ड्रग ऐेंड कंट्रोल के कायदे के मुताबिक कंपनी द्वारा बताया जाना जरूरी है.

पिछले दिनों शुगर की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए एक ऐसा ही तकरीबन 2,000 रुपए का प्रोडक्ट आया. हैरानी की बात यह है कि उसे लाखों लोगों ने खरीदा, जिस से कंपनी करोड़पति बन गई. पर उस प्रोडक्ट में जो दवाएं मिलाई गई थीं वे कितनी मात्रा में थीं, इस का कहीं भी जिक्र नहीं था और उस का भी प्रचार अफ्रीका के जंगलों और हिमालय पर्वत की घाटियों से लाई गई जड़ीबूटियों के नाम से किया गया था.

न तो 7 दिनों में झुर्रियां जाती हैं और न ही सिर पर 7 दिनों में बाल उगते हैं, लेकिन चैनल पर बैठे वैद्य या डाक्टर खुद के मरीजों द्वारा फायदा दिए जाने की दुहाई देते हैं और आखिर में यह कहते सुनाई देते हैं कि इस जानकारी को जनहित में प्रचारित कीजिए, जितने लाइक और सब्सक्राइब बढ़ेंगे, चैनल पर उस के भाव और बढ़ेंगे, लेकिन इस नीमहकीमी से जो परेशानियां होंगी उन्हें कैसे दूर करना है, इस का कोई जिक्र नहीं होता है.

कुछ कंपनियों के बनाए सामान को आप नहीं जानते हैं, जबकि उन की कीमत लोकल ब्रांडेड कंपनियों के बनाए गए सामान से 50 से 80 गुना ज्यादा होती है. आप को सिर्फ फोन करना होता है, दवा घर पहुंच जाती है. अगर वीपीआर नहीं छुड़वाया तो उन्हें कुछ नुकसान नहीं होता है क्योंकि पहले ही वे कई गुना ज्यादा किसी से वसूल चुके होते हैं, इसलिए अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें. आप के फैमिली डाक्टर जो सलाह दें उसी के मुताबिक दवाओं का सेवन करें.

अगर टैलीविजन चैनल की दवा खाने से कुछ साइड इफैक्ट हो गया तो आप भी परेशान होंगे और आप का डाक्टर भी.

बहुत सी दवाओं का ऐंटी डोज दवा में रखे कागज पर होता है लेकिन इन  दवाओं का ऐंटी डोज क्या लेना है, ऐसा कुछ लिखा नहीं होता है. ये लोग अपना सामान बेच कर कई गुना फायदा कमाते हैं, ऊपर से इश्तिहार से भी आमदनी हासिल करते हैं. नुकसान में ग्राहक ही रहते हैं जो रुपयों के अलावा सेहत भी खोते हैं, इसलिए टैलीविजन चैनल पर घर बैठे शर्तिया इलाज के उपयोग से बचें और अपनी सेहत को महफूज रखें.

डौक्टर टोनी बोगार्ट ने खोले महिलाओं के सैक्सी होने के राज

आप शाम की डेट के लिए तैयार हो रही हैं. आज आप ने अपनी पसंदीदा ड्रैस पहनी है और बाल भी बेहद खूबसूरती से बनाए हैं. मेकअप के बाद तो आप को पता चल चुका है कि आज तो आप बिजलियां गिरा रही हैं. जब आप रेस्टोरेंटमें पहुंचती है तो आप का साथी वहां पहले से मौजूद है और आप के वहां कदम रखते ही आप को एहसास हो जाता है कि उस की नजर आप पर से हट नहीं पा रही है. आप अपने आप से कहती हैं, ‘आज तो यह मुझ पर बिलकुल लट्टू हो गया है’, और यह खयाल आते ही आप के मन में कामुकता हिलोरें लेने लगती है.

कामना की वस्तु

शोधकर्ता मानते हैं कि यौन आकर्षण देखने वाले की आंखों में होता है. लैंगिक विशेषज्ञ डौक्टर टोनी बोगार्ट के अनुसार जब कोई आप की तरफ देखता है, निहारता है या फिर आप की तारीफ कर रहा होता है तो उस के हावभाव से आप के अंदर यह सोच बन सकती है कि आप उस के लिए कामना की वस्तु हैं.

सच क्या है यह जानने के लिए डौक्टर बोगार्ट लगभग 200 महिलाओं और पुरुषों से उन की यौन कल्पनाओं के बारे में पूछा. आप की कल्पनाओं से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सैक्स के बारे में आप मन ही मन क्या चाह रखते हैं. मतलब यह कि अगर आप कल्पना करते हैं कि आप एक से ज्यादा थी के साथ सैक्स कर रहे हैं तो शायद आप असल जिंदगी में भी यही चाहते हैं.

सैक्सी हालात

सहभागियों को एक प्रश्नावली भरने को कहा गया जिन में उन्हें यह बताना था कि अलगअलग हालात में वे कितने कामोत्तेजक होंगे. अब कुछ लोग कहें कि मेरे साथी का यह कहना कि मुझे देखते ही वो उत्तेजित हो जाता है, मुझे भी उत्तेजित करता है तो शोधकर्ताओं को यह पता चल जाता कि यह लोग अपने अंदर मौजूद यौन आकर्षण  के बारे में सचेत हैं.

अब बारी थी किसी उत्तेजित करने वाले दृश्य के बारे में कुछ पंक्तियां पढ़ने की, जैसे किसी एक रात के रिश्ते का वर्णन या घूमने के लिए किसी रूमानी जगह जाना. उन्हें एक वाक्य दिया गया जिसे उन्हें पूरा करना था. वो वाक्य था ‘मैं इस बात से बेहद उत्तेजित होता/होती हूं..’ और उन्हें यह वाक्य पूरा करने के लिए 2 विकल्प दिए गए जो यह थे: पहला विकल्प – ‘कि मेरे शरीर को देख कर मेरा साथी कितना उत्तेजित हो जाता/जाती है’. दूसरा विकल्प – ‘जब मेरा ध्यान इस बात पर जाता है कि मेरे अंदर मेरे साथी के लिए कितनी लालसा है.’

आखिर में सहभागियों को उन की किसी यौन कल्पना के बारे में पूरा ब्यौरा देने को कहा गया.

महिलाओं को क्या उत्तेजित करता है

नतीजों से वही बात सामने आई या और साफ हो गई जिस के बारे में शोधकर्ताओं को पहले से ही अंदाजा था कि यह एहसास कि कोई आप को सैक्सी समझ रहा है, पुरुषों की तुलना में औरतों को अधित उत्तेजित करता है. तीनों ही परीक्षणों से यह साफ था औरतें अपने यौन आकर्षण और शारीरिक खूबसूरती के प्रति जितनी अधिक जागरूक होंगी, यह बात उन्हें उतनी ही उत्तेजित करेगी.

यह बात सिर्फ उन्ही महिलाओं तक सीमित नहीं थी जो यह मानती थीं कि वे सुंदर हैं, बल्कि शोध से पता चला कि जो महिलाएं अपने आप को सुंदर और सैक्सी नहीं समझती वे भी इस एहसास से उत्तेजित होती हैं कि कोई उन्हें सैक्सी समझता है.

यह पता चलना कि आप के अंदर यौन आकर्षण है महिलाओं को उत्तेजित क्यों करता है? इस का एक कारण है कि काम वासना और कामोत्तेजना को देखने का नजरिया, महिलाओं और पुरुषों में अलग होता है. महिलाओं के लिए यह प्रतिक्रियाशील होता है. इस का मतलब यह है कि उन का उत्तेजित होना किसी यौनिक क्रिया की प्रतिक्रियास्वरूप होता है, जैसे फोरेप्ले या किसी का उन्हें ऊपर से नीचे तक निहारना. दूसरी तरफ पुरुष कभी भी उत्तेजित हो सकते हैं और झट से सैक्स के लिए तैयार हो सकते हैं.

सैक्सी दिखने का दबाव

लेकिन इस का एक और कारण भी हो सकता है, ऐसा मानना है डौक्टर बोगार्ट का. जिस तरह से आजकल मीडिया में सैक्सी मुद्राओं में खड़ी/बैठी/लेटी महिलाओं की अनगिनत तसवीरें दिखाई जाती हैं उस से महिलाओं के मन में यह बात घर कर सकती है कि उन की कामुकता इस बात पर निर्भर करती है कि और लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं. शायद इसीलिए जब कोई उन्हें यह एहसास दिलाता है कि वे आकर्षक दिख रही हैं वे उत्तेजित हो जाती हैं. लेकिन इस का एक नकारात्मक पहलू यह भी है कि विज्ञापनों और सोशल मीडिया में प्रकट उस ‘आदर्श सैक्सी छवि’ को पाने का लालच महिलाओं को तनावग्रस्त भी कर सकता है.

यहां यह ध्यान में रखना बेहद जरूरी है कि महिलाओं का उत्तेजित होना इस पर भी निर्भर करता है कि बात किस संदर्भ में कही जा रही है और उस समय के हालात क्या हैं. जब एक महिला किसी ऐसे लड़के के साथ हो जिसे वह पसंद करती हो तो उस समय उस के द्वारा कही गई उस के शरीर से संबंधित टिप्पणियों को सुन कर वह उत्तेजित हो सकती है लेकिन अगर कोई राह चलता लड़का यह सोचे कि वह एक महिला के शरीर पर टिप्पणी करेगा और इस से वो उस पर लट्टू हो जाएगी तो जनाब आप को यह बता दें कि उस महिला के लिए वह घृणास्पद और और अपमानजनक होगा. उस की नजर में यह यौन उत्पीड़न से कम नहीं होगा तो ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है.

सैक्सीपन: शरीर तक सीमित?

अगर आप एक रिश्ते में हैं और आप के साथी की आंखों में अपने लिए लालसा देखकर आप उत्तेजित होते हैं तो यह एक अच्छी बात है – लेकिन तभी जब सिर्फ इसी बात की वजह से आप उत्तेजित नहीं होते. डौक्टर बोगार्ट कहते हैं कि लालसा होना अच्छी बात है लेकिन इस का आधार सिर्फ आप का शरीर नहीं होना चाहिए. आप के साथी का आकर्षण और आप के रिश्ते में मौजूद अच्छी बातें भी एक अच्छे सैक्स जीवन और उत्तेजना के लिए महत्त्वपूर्ण हैं.

एक हत्या ऐसी भी : फिर पुलिस भी चकमा खा गई

मेरी पोस्टिंग सरगोधा थाने में थी. मैं अपने औफिस में बैठा था, तभी नंबरदार, चौकीदार और 2-3 आदमी खबर लाए कि गांव से 5-6 फर्लांग दूर टीलों पर एक आदमी की लाश पड़ी है. यह सूचना मिलते ही मैं घटनास्थल पर गया. लाश पर चादर डली थी, मैं ने चादर हटाई तो नंबरदार और चौकीदार ने उसे पहचान लिया. वह पड़ोस के गांव का रहने वाला मंजूर था. मरने वाले की गरदन, चेहरा और कंधे ठीक थे लेकिन नीचे का अधिकतर हिस्सा जंगली जानवरों ने खा लिया था. मैं ने लाश उलटी कराई तो उस की गरदन कटी हुई मिली. वह घाव कुल्हाड़ी, तलवार या किसी धारदार हथियार का था.

मैं ने कागज तैयार कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने का इंतजाम किया. लाश के आसपास पैरों के कोई निशान नहीं थे, लेकिन मिट्टी से पता लगता था कि मृतक तड़पता रहा था. खून 2-3 गज दूर तक बिखरा हुआ था.

इधरउधर टीले टीकरियां थीं. कहीं सूखे सरकंडे थे तो कहीं बंजर जमीन. घटनास्थल से लगभग डेढ़ सौ गज दूर बरसाती नाला था, जिस में कहींकहीं पानी रुका हुआ था. मैं ने यह सोच कर वहां जा कर देखा कि हो न हो हत्यारे ने वहां जा कर हथियार धोए हों. लेकिन वहां कोई निशानी नहीं मिली.

मैं मृतक मंजूर के गांव चला गया. नंबरदार ने चौपाल में चारपाई बिछवाई. मैं मंजूर के मांबाप को बुलवाना चाहता था, लेकिन वे पहले ही मर चुके थे. 2 भाई थे वे भी मर गए थे. मृतक अकेला था. एक चाचा और उस के 2 बेटे थे. मैं ने नंबरदार से पूछा कि क्या मंजूर की किसी से दुश्मनी थी.

पारिवारिक दुश्मनी तो नहीं थी, लेकिन पारिवारिक झगड़ा जरूर था. नंबरदार ने बताया, मंजूर की उस के चाचा के साथ जमीन मिलीजुली थी, पर एक साल पहले जमीन का बंटवारा हो गया था. मंजूर का कहना था कि चाचा ने उस का हिस्सा मार लिया है, इस पर उन का झगड़ा रहता था.

‘‘उन की आपस में कभी लड़ाई हुई थी?’’

नंबरदार ने बताया, ‘‘मामूली कहासुनी और हाथापाई हुई थी. मृतक अकेला था. उस का साथ देने वाला कोई नहीं था. दूसरी ओर चाचा और उस के 3 बेटे थे, इसलिए वह उन का मुकाबला नहीं कर सकता था.’’

‘‘क्या ऐसा नहीं हो सकता था कि मंजूर ने उन से झगड़ा मोल लिया हो और उन्होंने उस की हत्या कर दी हो?’’

अगर झगड़ा होता तो गांव में सब को नहीं तो किसी को तो पता चलता. नंबरदार ने जवाब दिया, ‘‘मैं गांव की पूरी खबर रखता हूं. हालफिलहाल उन में कोई झगड़ा नहीं हुआ.’’

‘‘मंजूर के चाचा के लड़के कैसे हैं, क्या वह किसी की हत्या करा सकते हैं?’’

‘‘उस परिवार में कभी कोई ऐसी घटना नहीं हुई. लेकिन किसी के दिल की कोई क्या बता सकता है.’’ नंबरदार ने आगे कहा, ‘‘आप कयूम पर ध्यान दें. वह 25-26 साल का है. वह रोज उन के घर जाता है. मंजूर की पत्नी के कारण वह उस के घर जाता है. लोग कहते हैं कि मंजूर की पत्नी के साथ कयूम के अवैध संबंध हैं. लेकिन कुछ लोग यह भी कहते हैं कि वे दोनों मुंहबोले बहनभाई की तरह हैं.’’

‘‘कयूम शादीशुदा है?’’

‘‘नहीं,’’ नंबरदार ने बताया, ‘‘उस की पूरी उमर इसी तरह बीतेगी. उसे किसी लड़की का रिश्ता नहीं मिल सकता. एक रिश्ता आया भी था लेकिन कयूम ने मना कर दिया था.’’

‘‘रिश्ता क्यों नहीं मिल सकता?’’

‘‘देखने में तो ठीक लगता है, लेकिन उस के दिमाग में कुछ कमी है. कभी बैठेबैठे अपने आप से बातें करता रहता है. उस का बाप है, 3 भाई हैं 2 बहनें हैं. चौबारा है, अच्छा धनी जमींदार का बेटा है.’’

‘‘क्या तुम विश्वास के साथ कह सकते हो कि कयूम के मंजूर की बीवी के साथ अवैध संबंध थे?’’ मैं ने पूछा, ‘‘मैं शकशुबहे की बात नहीं सुनना चाहता.’’

‘‘मैं यकीन से नहीं कह सकता.’’

‘‘इस से तो यह लगता है कि कयूम ने मृतक को दोस्त बना रखा था.’’

‘‘बात यह भी नहीं है,’’ नंबरदार ने कहा, ‘‘मैं ने मंजूर से कहा था कि इस आदमी को मित्र मत बनाओ. कोई उलटीसीधी हरकत कर बैठेगा. वैसे भी लोग तरहतरह की बातें बनाते हैं.’’

‘‘उस की पत्नी का कयूम के साथ कैसा व्यवहार होता था?’’ मैं ने पूछा.

नंबरदार ने कहा, ‘‘मंजूर ने मुझे बताया था कि उस की पत्नी कयूम से बात कर लेती है. वास्तव में बात यह है जी, मंजूर कयूम के परिवार के मुकाबले में कमजोर था और अकेला भी, इसलिए वह कयूम को अपने घर से निकाल नहीं सकता था.’’

‘‘मृतक के कितने बच्चे हैं?’’

‘‘शादी को 10 साल हो गए हैं, लेकिन एक भी औलाद नहीं हुई.’’ नंबरदार ने बताया.

यह बात सुन कर मेरे कान खड़े हो गए, ‘‘10 साल हो गए लेकिन संतान नहीं हुई. कयूम उन के घर जाता है, मृतक को यह भी पता था कि कयूम उस की पत्नी से कुछ ज्यादा ही घुलामिला है. लेकिन मृतक में इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपने घर में कयूम का आनाजाना बंद कर देता.’’

मैं ने इस बात से यह नतीजा निकाला कि मृतक कायर और ढीलाढाला आदमी था और इसीलिए उस की पत्नी उसे पसंद नहीं करती थी. पत्नी कयूम को चाहती थी और कयूम उस पर मरता था. दोनों ने मृतक को रास्ते से हटाने का यह तरीका इस्तेमाल किया कि कयूम उस की हत्या कर दे.

2 आदमियों ने विश्वास के साथ बताया कि मृतक की पत्नी के साथ उस के अवैध संबंध थे और उन दोनों ने मृतक को धोखे में रखा हुआ था. मैं ने अपना पूरा ध्यान कयूम पर केंद्रित कर लिया, उस की दिमागी हालत से मेरा शक पक्का हो गया.

मैं ने कयूम से पहले मृतक की पत्नी से पूछताछ करनी जरूरी समझी.

मेरे बुलाने पर वह आई तो उस की आंखें सूजी हुई थीं. नाक लाल हो गई थी. वह हलके सांवले रंग की थी, लेकिन चेहरे के कट्स अच्छे थे. आंखें मोटी थीं. कुल मिला कर वह अच्छी लगती थी. उस की कदकाठी में भी आकर्षण था.

मैं ने उसे दिलासा दिया. हमदर्दी की बातें कीं और पूछा कि उसे किस पर शक है?

उस ने सिर हिला कर कहा, ‘‘पता नहीं, मैं नहीं जानती कि यह सब कैसे हुआ, किस ने किया.’’

‘‘मंजूर का कोई दुश्मन हो सकता है?’’

‘‘नहीं, उस का कोई दुश्मन नहीं था.

न ही वह दुश्मनी रखने वाला आदमी था.’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘मंजूर घर से कब निकला?’’

‘‘शाम को घर से निकला था.’’

‘‘कुछ बता कर नहीं गया था?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘क्या शाम को हर दिन इसी तरह जाया करता था?’’

‘‘कभीकभी, लेकिन उस ने कभी नहीं बताया कि वह कहां जा रहा है.’’

‘‘तुम्हें यह तो पता होगा कि कहां जाता था?’’ मैं ने पूछा, ‘‘दोस्तोंयारों में जाता होगा. वह जुआ तो नहीं खेलता था?’’

‘‘नहीं, उस में कोई बुरी आदत नहीं थी.’’

‘‘आमना,’’ मैं ने कहा, ‘‘तुम्हारे पति की हत्या हो गई है. यह मेरा फर्ज है कि मैं उस के हत्यारे को पकड़ूं. तुम मेरी जितनी मदद कर सकती हो, दूसरा कोई नहीं कर सकता. अगर तुम यह नहीं चाहती कि हत्यारा पकड़ा जाए तो भी मैं अपना फर्ज नहीं भूल सकता. अगर कोई राज की बात है तो अभी बता दो. इस वक्त बता दोगी तो मैं परदा डाल दूंगा. आज का दिन गुजर गया तो फिर मैं मजबूर हो जाऊंगा.’’

‘‘आप अफसर हैं, जो चाहे कह सकते हैं. लेकिन आप ने यह गलत कहा कि मैं अपने पति के हत्यारे को पकड़वाना नहीं चाहती. मैं ने आप से पहले ही कह दिया है कि मुझे कुछ पता नहीं, यह सब किस ने और क्यों किया है?’’

‘‘एक बात बताओ, मंजूर ने किसी और औरत से तो रिश्ते नहीं बना लिए थे. कहीं ऐसा तो नहीं कि उस औरत के रिश्तेदारों ने उन्हें कहीं देख लिया हो?’’

‘‘नहीं, वह ऐसा आदमी नहीं था?’’ आमना ने जवाब दिया.

‘‘तुम यह बात पूरे यकीन के साथ कह सकती हो?’’

‘‘हां, वह इस तरह की हरकत करने वाला आदमी नहीं था.’’

मेरे पूछने पर उस ने 3 आदमियों के नाम बताए, जिन्हें मैं ने पूछताछ के लिए बुलवा लिया. उन तीनों से मैं ने कहा कि जो मृतक का सब से गहरा दोस्त हो, वह मेरे सामने बैठ जाए.

मैं ने दूसरों से बाहर बैठने को कहा. जब वे चले गए तो मैं ने उस से कहा, ‘‘तुम्हारे खास दोस्त की हत्या हो गई. जब तुम्हें उस की हत्या की सूचना मिली तो तुम ने सोचा होगा कि हत्यारा कौन हो सकता है?’’

‘‘यह तो स्वाभाविक है. लेकिन मंजूर ऐसा आदमी था कि दुश्मनी को दबा लेता था. कोशिश करता था कि किसी के साथ लड़ाईझगड़ा न हो.’’

‘‘क्या तुम बता सकते हो कि उस के दुश्मन कौनकौन थे?’’

‘‘इतनी गहरी दुश्मनी तो उस की किसी के साथ नहीं थी, लेकिन मंजूर मुझ से एक ही आदमी की बात करता था और उस के दिल में उस आदमी से दुश्मनी बैठी हुई थी. वह उस के चाचा का लड़का है. वे 3 भाई हैं, वह बीच का है.’’

‘‘उस के साथ क्या दुश्मनी थी?’’

‘‘यह दुश्मनी जमीन के बंटवारे पर हुई थी. सब जानते हैं कि उन्होंने मंजूर की जमीन का कुछ हिस्सा धांधली से हड़प लिया था. मंजूर ने चाचा को बताया था, चाचा मान गया था कि मंजूर ठीक कहता है. उस का बड़ा बेटा भी मान गया था लेकिन बीच वाला, जिस का नाम रशीद है, वह नहीं माना था. यहां तक कि वह मरनेमारने पर उतर आया था.

‘‘मंजूर अपना यह दुखड़ा मुझे सुनाता रहता था. उस के दादा का एक बाग है, जिस में उस के बाप ने कुआं, रेहट भी लगवाई थी. उस ने इस बाग में बहुत मेहनत की थी. बाप मर गया तो मंजूर ने बाग में जाना शुरू कर दिया. रशीद भी जाने लगा और धीरेधीरे बाग पर कब्जा कर लिया. मंजूर की मजबूरी यह थी कि वह अकेला था, 2-3 भाई होते तो किसी की हिम्मत नहीं होती.’’

उस ने बताया कि रशीद मंजूर को छेड़ता रहता था. 2-3 बार मंजूर सीधा हुआ तो उस ने रशीद से कहा कि मैं परिवार की इज्जत की वजह से चुप रहता हूं, अगर तुम ने अपनी जबान बंद नहीं की तो मैं तुम्हारी जबान बंद कर के दिखा दूंगा.

उन की दुश्मनी का एक और कारण था. बिरादरी के एक परिवार ने अपनी बेटी का रिश्ता मंजूर को दे दिया. बात पक्की हो गई. मंजूर ने लड़की को कपड़े और अंगूठी भेज दी. 8-10 दिन बाद अंगूठी वापस आ गई, साथ ही कपड़े भी. यह भी कहा गया था कि मंगनी तोड़ दी गई है. 2-3 दिन बाद उस की मंगेतर के घर वालों ने उस की शादी रशीद से कर दी और कुछ दिन बाद मंजूर की शादी आमना से हो गई.

‘‘आमना का चालचलन कैसा है?’’

उस ने कहा, ‘‘सर, वह चालचलन की बहुत अच्छी है.’’

‘‘यह कयूम का क्या चक्कर है?’’

‘‘कोई चक्कर नहीं है सर, उस के घर में आने पर और काफीकाफी देर तक बैठने पर न तो आमना को ऐतराज था और न मंजूर को.’’

‘‘आमना के साथ कयूम का कैसा संबंध था?’’

‘‘सर, संबंध एकदम पाक था. उस के अच्छे चरित्र का एक उदाहरण सुनाता हूं. 10 साल तक जब उसे कोई बच्चा नहीं हुआ तो आमना गामे शाह के पास गई. गामे शाह चरित्रहीन व्यक्ति है. उस के पास चरित्रहीन औरतें आती हैं और उन औरतों ने ही गामे शाह को मशहूर कर रखा है कि वह बेऔलाद औरतों को औलाद देता है.

‘‘आमना भी गामे शाह के घर पहुंच गई. उस ने आमना की इज्जत पर हाथ डाला तो वह गालीगलौज कर के चली आई. अगर वह चरित्रहीन होती तो उस से औलाद ले कर आ जाती और मंजूर उसे अपनी औलाद समझ कर पाल लेता.’’

‘‘यह घटना कब की है?’’

‘‘4-5 दिन पहले की बात है. जब आमना ने गामे शाह की बात मंजूर को बताई तब कयूम वहीं बैठा हुआ था. कयूम भड़क गया, वे दोनों उस के घर गए और उसे बाहर बुला कर इतना पीटा कि वह बहुत देर तक उठ नहीं सका. उस के पास 2-3 जुआरीशराबी रहते थे. वे गामे शाह को बचाने आए तो दोनों ने उन्हें भी पीटा.’’

‘‘अगर मैं कहूं कि मंजूर का हत्यारा कयूम है तो तुम क्या कहोगे?’’ मैं ने मंजूर के दोस्त से कहा.

‘‘मैं नहीं मानूंगा,’’ उस ने जवाब दिया, ‘‘मुझ से अगर पूछोगे तो मैं 2 आदमियों के नाम लूंगा. एक तो गामे शाह और दूसरा रशीद.’’

मैं इस सोच में पड़ गया कि हो सकता है मंजूर और रशीद का कहीं आमनासामना हो गया हो और उन का झगड़ा हुआ हो. इसी झगड़े में रशीद ने उसे मार डाला हो. यह घटना ऐसी थी, जिस का कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं था.

सूरज डूबने वाला था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई थी. उस में हत्या का समय लगभग सूरज छिपने के डेढ़-2 घंटे बाद का लिखा था. सर्जन ने सिर पर 2 ही घाव लिखे थे, जो मैं ने देखे थे. उस ने यह भी लिखा था कि वह इन घावों के कारण ही मरा था.

मैं ने कयूम को बुलाने के लिए कहा. कुछ देर बाद एक सुंदर जवान मेरे सामने लाया गया. नंबरदार ने बताया कि यही कयूम है.

‘‘आओ जवान,’’ मैं ने दोस्ताना तौर पर कहा, ‘‘हमें तुम्हारी जरूरत थी.’’

मैं ने नंबरदार को इशारा किया तो वह बाहर चला गया.

मेरे पूछने पर उस ने रशीद के बारे में वही सब बातें कहीं जो मंजूर के दोस्त ने सुनाई थी. मैं ने उस से सवाल किया, ‘‘एक बात बताओ कयूम, मंजूर ने कभी यह कहा था कि वह रशीद की हत्या कर देगा?’’

कयूम ने तुरंत जवाब नहीं दिया. पहले उस ने दाएंबाएं फिर ऊपर देखा. फिर मेरी ओर देख कर ऐसे सिर हिलाया, जैसे उसे पता न हो. ‘‘शायद कभी कहा हो.’’ उस ने मरी सी आवाज में कहा. फिर बोला, ‘‘मंजूर, उस से बहुत परेशान था. सरकार, उसे तो मैं ही पार लगाने वाला था, लेकिन आमना भाभी ने रोक लिया.’’

‘‘कोई खास बात हुई थी या पुरानी बातों पर तुम उसे खत्म करना चाहते थे?’’

‘‘बड़ी खास बात थी सरकार. कोई डेढ़-2 महीने पहले की बात है. रशीद मंजूर के घर किसी काम से गया था. उस कमीने ने आमना भाभी को अकेला देख कर उन्हें फांसने की कोशिश शुरू कर दी थी. आमना भाभी ने उसे उसी समय भलाबुरा कह कर घर से बाहर कर दिया था.

‘‘2-3 दिन बाद आमना भाभी खेतों में गईं तो रशीद उन्हें रोक कर बोला, ‘‘पता नहीं, तुम मंजूर जैसे कमजोर और कायर आदमी के साथ कैसे गुजर कर रही हो.’’

आमना भाभी ने कहा, ‘‘शायद तुम जिंदा नहीं रहना चाहते हो. तुम तो दुनिया में नहीं रहोगे लेकिन तुम्हारे पीछे रहने वाले लोग मान जाएंगे कि मंजूर कमजोर नहीं था.’’

मंजूर से मैं ने यह बात बहुत बाद में सुनी. मैं ने उस से कहा कि उस ने यह बात पहले क्यों नहीं बताई. जवाब में मंजूर ने कहा, ‘‘मुझे जो करना था, कर दिया.’’

मैं ने उस से पूछा कि उस ने क्या किया था. उस ने बताया कि उस ने रशीद की गरदन अपनी बांहों में ऐसे दबा ली थी कि उस की आंखें बाहर निकल आई थीं. फिर उस की गरदन छोड़ कर कहा, ‘‘जा इस बार छोड़ दिया.’’

रशीद ने दूर जा कर कहा मंजूरे, ‘‘मैं तुझ से बदला जरूर लूंगा.’’

‘‘उस के बाद रशीद ने तो कोई हरकत नहीं की?’’

‘‘अगर करता तो आज मैं आप के सामने नहीं होता और न रशीद दुनिया में होता. मैं ने एक दिन खेत में उस का कंधा हिला कर कहा था, गांव में सिर उठा कर मत चलना. और हां, मंजूर को कमजोर मत समझना. तेरी मौत उसी के हाथों लिखी है.’’

‘‘उस ने कुछ जवाब दिया?’’

‘‘वह कांपने लगा, ऐसा लगा जैसे माफी मांग रहा हो. वास्तव में मंजूर और आमना में बहुत मोहब्बत थी.’’

‘‘आमना तो तुम से भी मोहब्बत करती थी,’’ मैं ने कहा.

‘‘सरकार, किस बहन और भाई में मोहब्बत नहीं होती. अंतर यह है कि हम दोनों के मांबाप अलगअलग थे, लेकिन मैं महसूस करता हूं कि हम दोनों एक ही मां के पेट से पैदा हुए थे.’’

‘‘मुझे किसी ने बताया था कि कोई तुम्हें अपनी बेटी का रिश्ता नहीं देता?’’

‘‘कोई रिश्ता देगा भी तो मैं कबूल नहीं करूंगा. जब तक आमना मेरे सामने मौजूद है, मैं किसी और औरत का रिश्ता कबूल नहीं करूंगा.’’

मैं ने उस का मतलब यह निकाला कि उस का और आमना का संबंध दूसरी तरह का था. मतलब आमना को बहन कहना परदा डालने जैसा था.

मंजूर के घर से रोने और चीखने की आवाजें आ रही थीं. आमना की चीख सुनाई दी तो कयूम ने कहा, ‘‘थानेदार साहब, आप मुझे इजाजत दें, जब आप बुलाएंगे मैं हाजिर हो जाऊंगा.’’ मैं ने उसे जाने दिया.

रात आधी से अधिक बीत चुकी थी. मेरे सामने एक जटिल विवेचना थी. मैं थोड़ा सा आराम करने के लिए लेट गया. मेरे बुलाए गामे शाह के तीनों आदमी आ गए थे. उन से भी मुझे पूछताछ करनी थी. ऐसे लोगों से जांच थाने में ही होती है. मैं ने उन्हें यह कह कर थाने भेज दिया कि मेरा इंतजार करें.

सुबह मेरी आंख खुली. नाश्ते के बाद मैं ने सब से पहले रशीद को बुलवाया. वह भी सुंदर जवान था. मैं ने उसे अपने सामने बिठाया, वह घबराया हुआ था. उस की आंखें जैसे बाहर को आ रही थीं.

मैं ने कहा, ‘‘तुम ही कुछ बताओ रशीद, मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं. मंजूर की हत्या किस ने की है?’’

‘‘मैं क्या बता सकता हूं सर,’’ उस के मुंह से ये शब्द मुश्किल से निकले थे.

‘‘इतना मत घबराओ, जो कुछ तुम्हें पता है, सचसच बता दो. मुझे जो दूसरों से पता चलेगा वह तुम ही बता दो. फिर देखो, मैं तुम्हें कितना फायदा पहुंचाता हूं.’’

‘‘मैं कुछ नहीं जानता सर,’’ उस ने आंखें झुका लीं.

‘‘ऊपर देखो, तुम सब कुछ जानते हो. तुम्हें बोलना ही पड़ेगा. मंजूर अपना हिस्सा लेने की कोशिश कर रहा था, तुम ने सोचा इसे दुनिया से ही उठा दो.’’

‘‘नहीं सर,’’ वह तड़प कर बोला, जैसे उस में जान आ गई हो. वह अपने आप को निर्दोष साबित करने लगा.

हत्या के जितने भी कारण बताए गए थे. मैं ने एकएक कर के उस के सामने रखे. वह सब से इनकार करता रहा. मैं ने जब उस से पूछा कि हत्या के समय वह कहां था तो उस ने बताया कि वह घर पर ही था.

‘‘सूरज डूबने के कितनी देर बाद घर आए थे?’’

‘‘मैं तो सूरज डूबते ही घर आ गया था.’’

‘‘इस से पहले कहां थे?’’

‘‘बाग में.’’

चूंकि वह मेरी नजरों में संदिग्ध था, इसलिए मैं ने उस से खास तरह की पूछताछ की. रशीद से जो बातें हुईं, मैं ने उन्हें अपने दिमाग में रखा और बाहर आ कर चौकीदार से कहा कि रशीद के बाग में जो मजदूर काम करता है, उसे और उस की पत्नी को ले आए.

रशीद को मैं ने बाहर बिठा दिया और उस के बाप को बुलाया. बाप आ गया तो मैं ने उस से पूछा, ‘‘हत्या के दिन रशीद घर किस समय आया था?’’

उस ने बताया कि वह सूरज डूबने के बाद आया था.

‘‘एक घंटा या 2 घंटे बाद?’’

‘‘डेढ़ घंटा समझ लें.’’

यह रशीद का बाप था, इसलिए मैं उस से उम्मीद नहीं रख सकता था कि वह सच बोलेगा.

रशीद का नौकर जो बाग में रहता था, मैं ने उस से कहा, ‘‘तुम इन लोगों के रिश्तेदार नहीं हो, नौकर हो. इन के गले की फांसी का फंदा अपने गले में मत डलवाना. मैं जो पूछूं, सचसच बताना. तुम जानते हो कल रात मंजूर की हत्या हुई है. शाम को रशीद बाग में था, क्या यह सही है?’’

‘‘हां हुजूर, वह बाग में ही था.’’

‘‘पहले तो वह अकेला ही था,’’ मजदूर ने जवाब दिया, ‘‘पनेरी लगानी थी. रशीद हमारे साथ था, फिर मंजूर आ गया था.’’

‘‘कौन मंजूर?’’ मैं ने हैरानी से कहा.

‘‘वही मंजूर सर, जिस की हत्या हुई है.’’

मुझे ऐसा लगा, जैसे अंधेरे में रोशनी की किरन दिखाई दी हो.

‘‘हां, फिर क्या हुआ?’’ मैं ने इस आशा से पूछा कि वह यह कहेगा कि उन की लड़ाई हुई थी.

‘‘मंजूर रशीद को अलग ले गया.’’ मजदूर ने कहा, ‘‘फिर वे चारपाई पर बैठे रहे.’’

‘‘कितनी देर बैठे रहे?’’

‘‘सूरज डूबने तक बैठे रहे.’’

‘‘तुम में से किसी ने उन की बातें सुनीं?’’

‘‘नहीं हुजूर, हम दूर क्यारियों में पनेरी लगा रहे थे. जब अंधेरा हो गया तो हम काम छोड़ कर अपने कोठों में चले गए.’’

‘‘ये बताओ, क्या वे ऊंची आवाज में बातें कर रहे थे? मेरा मतलब क्या वे झगड़ रहे थे?’’

‘‘नहीं हुजूर, वे तो बड़े आराम से बातें कर रहे थे. जब अंधेरा हुआ तो दोनों ने हाथ मिलाया और मंजूर चला गया.’’

‘‘…और रशीद?’’

‘‘वह कुछ देर बाग में रहा, उस ने हम से पनेरी के बारे में पूछा और फिर वह भी चला गया.’’

‘‘तुम ने उसे जाते हुए देखा था? उस के हाथ में कुल्हाड़ी थी?’’

‘‘नहीं हुजूर,’’ उस ने जवाब दिया, ‘‘जाने से पहले वह कमरे में गया था. जब वापस आया तो अंधेरा हो गया था. उस के हाथ में क्या था, हमें दिखाई नहीं दिया.’’

मैं ने उस की पत्नी को बुला कर उस से पूछा कि क्या मंजूर पहले कभी बाग में आया था. उस ने बताया कि परसों से पहले वह तब आया था, जब उन का झगड़ा चल रहा था. मैं ने उस से पूछा कि रशीद जब बाग से निकल रहा था तो क्या उस के हाथ में कुल्हाड़ी थी?

‘‘हां थी हुजूर.’’

‘‘अंधेरे में तुम्हें कैसे पता चला कि उस के हाथ में कुल्हाड़ी है?’’

‘‘डंडा होगा या कुल्हाड़ी होगी. अंधेरे में साफसाफ नहीं दिखा.’’

मैं ने मजदूर को अंदर बुलाया और कुछ बातें पूछ कर जाने दिया. उस के बाद मेरे 2 मुखबिर आ गए. उन्होंने वही बातें बताईं जो मुझे पहले पता लग गई थीं. उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि आमना चरित्रवान औरत है. कयूम के बारे में बताया कि वह दिमागी तौर पर कमजोर है, लेकिन बात खरी करता है. उन्होंने भी रशीद पर शक किया.

उन में से एक ने कहा, ‘‘जनाब, आप गामे शाह को भी सामने रखें. कयूम और मंजूर ने उसे ऐसी फैंटी लगाई थी कि वह काफी देर तक बेहोश पड़ा रहा था. वह बहुत जहरीला आदमी है, बदला जरूर लेता है.’’

‘‘लेकिन उस ने कयूम से तो बदला नहीं लिया?’’

‘‘वह कहता था कि मंजूर को ठिकाने लगा कर उस की बीवी का अपहरण करेगा.’’

उस समय तक मृतक का अंतिम संस्कार हो चुका था. मैं ने मंजूर की पत्नी को बुलवाया. उस की आंखें सूजी हुई थीं. लेकिन मुझे पूछताछ करनी थी. अभी तक मुझे आमना और कयूम पर ही शक था.

‘‘मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहता आमना. यह समय पूछने का तो नहीं है, लेकिन मैं केस की जांच कर रहा हूं. मैं चाहता हूं कि तुम से यहीं कुछ पूछ लूं, नहीं तो तुम्हें थाने में आना पड़ता, जो अच्छा नहीं होता. तुम जरा अपने आप को संभालो और मुझे बताओ कि मंजूर और रशीद की दुश्मनी का क्या मामला था?’’

उस ने वही बातें बताईं जो पहले बता चुकी थी.

‘‘क्या रशीद ने तुम्हारे साथ कोई छेड़छाड़ की थी?’’ मैं ने आमना से पूछा. उस ने बताया कि 2 बार की थी. मैं ने तंग आ कर यह बात अपने पति को बता दी थी. कयूम को भी पता लग गया. दोनों उस का वही हाल करना चाहते थे जो उन्होंने गामे शाह का किया था.

‘‘मैं ने सुना है कि वह रशीद के बाग में गया था. वह वहां से निकला तो लेकिन घर नहीं पहुंचा. क्या तुम्हें पता है कि वह रशीद के बाग में गया था?’’

आमना ने जवाब दिया, ‘‘नहीं, वह बताता भी कैसे. आप के कहने के मुताबिक वह वहां से निकला तो लेकिन घर नहीं पहुंच सका. जाहिर है, रशीद ने उस की हत्या कर दी थी.’’

‘‘यह तो तुम कभी नहीं बताओगी कि कयूम के साथ तुम्हारे संबंध कैसे थे?’’

उस कहा, ‘‘मैं तो बता दूंगी, लेकिन आप यकीन नहीं करेंगे. वह मेरा भाई है.’’

‘‘आमना…सच्ची बात कहनी है तो खुल कर कहो. कयूम के साथ तुम्हारे संबंध कैसे हैं, मेरा इस से कुछ लेनादेना नहीं. मैं ने मंजूर के हत्यारे को पकड़ना है. क्या तुम्हारे दिल में वैसी ही मोहब्बत है, जैसी कयूम के दिल में तुम्हारे लिए है.’’

‘‘नहीं,’’ आमना ने कहा, ‘‘जब वह महज 12-13 साल का था, तभी से हमारे यहां आता था. अब वह जवान हो गया है. मुझे डर था कि मेरा शौहर आपत्ति करेगा, लेकिन उस ने कोई आपत्ति नहीं की. मैं ने कयूम से कहा था, जवान औरत से जवान आदमी की मोहब्बत किसी और तरह की होती है. कयूम ने मेरी ओर हैरानी से देखा और देखते ही देखते उस की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘वह मुझ से 4-5 साल छोटा है. मैं ने उसे अपने गले से लगा लिया तो वह हिचकियां ले कर रोने लगा. मैं ने उसे चुप कराया. वह बोला, ‘आमना, यह कहने से पहले मुझे जहर दे देती.’ इस मोहब्बत को देख कर लोगों ने उसे रिश्ते देने बंद कर दिए.

‘‘मैं ने उस से कहा, मैं तुम्हारा किसी और जगह रिश्ता करवा दूंगी. उस ने दोटूक जवाब दिया, जब तक तुम जिंदा हो, मैं कहीं शादी नहीं कर सकता. अगर किसी लड़की से मेरी शादी हो भी जाती है और वह मुझे अच्छी लगती है तो मैं उसे पत्नी नहीं समझूंगा, क्योंकि उस में मुझे तुम दिखाई दोगी और मैं तुम्हें बहुत पवित्र समझता हूं.’’

मैं ने आमना को जाने की इजाजत दे दी, लेकिन अपने दिमाग में उसे संदिग्ध ही रखा.

रात को मैं थाने आ गया, जिन की जरूरत थी, उन सब को थाने ले आया. उन में रशीद भी था. रशीद मेरे लिए बहुत खास संदिग्ध था.

रात काफी हो चुकी थी. मैं आराम करने नहीं गया, बल्कि रशीद को लपेट लिया. उस की ऐसी हालत हो गई जैसे बेहोश हो जाएगा. मैं ने अपना सवाल दोहराया, तो उस की हालत और बिगड़ गई. मैं ने उस का सिर पकड़ कर झिंझोड दिया, ‘‘तुम मंजूर के जाने के बाद जब बाग से निकले तो तुम्हारे हाथ में कुल्हाड़ी थी और तुम ने मुझे बताया कि सूरज डूबते ही तुम घर आ गए थे. मुझे इन सवालों का संतोषजनक जवाब दे दो और जाओ, फिर मैं कभी तुम्हें थाने नहीं बुलाऊंगा.’’

उस ने बताया, ‘‘हत्या करने से मुझे कुछ नहीं मिलना था. हुआ यूं था कि वह सूरज डूबने से थोड़ा पहले मेरे पास आया था. मैं उसे देख कर हैरान हो गया. मुझे यह खतरा नहीं था कि वह मेरे साथ झगड़ा करने आया था, सच बात यह है कि मंजूर झगड़ालू नहीं था.’’

‘‘क्या वह कायर या निर्लज्ज था?’’ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं, वह बहुत शरीफ आदमी था. अब मुझे दुख हो रहा है कि मैं ने उस के साथ बहुत ज्यादती की थी. परसों वह मेरे पास आया था, मैं क्यारियों में पानी लगा रहा था. मंजूर ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे कमरे के ऊपर ले गया. मैं समझा कि वह मुझ से बंटवारे की बात करने आया है.

मैं ने सोच लिया था कि उस ने उल्टीसीधी बात की तो मैं उसे बहुत पीटूंगा, लेकिन उस ने मुझ से बहुत नरमी से बात की.

‘‘उस ने कहा, ‘हम लोग एक ही दादा की संतान हैं. हमें लड़ता देख कर दूसरे लोग हंसते हैं. मैं चाहता हूं कि हम सब भाइयों की तरह से रहें.’ मैं ने उस से कहा कि बाद में फिर झगड़ा करोगे तो उस ने कहा, ‘नहीं, मैं ये सब बातें भूल चुका हूं.’ वह रात होने तक बैठा रहा और जाते समय हाथ मिला कर चला गया.

‘‘मैं उस के जाने के आधे घंटे बाद बाग से निकला. उस वक्त मेरे हाथ में एक डंडा था, वह मैं आप को दिखा सकता हूं. मेरा रास्ता वही था, जहां मंजूर की लाश पड़ी थी. मैं उस जगह पहुंचा और माचिस जला कर देखा तो वह मंजूर की लाश थी. हर ओर खून ही खून फैला था.

‘‘मैं ने माचिस जला कर दोबारा देखा तो मुझे पूरा यकीन हो गया. दूर जहां से घाटी ऊपर चढ़ती है, मैं ने वहां एक आदमी को देखा. मैं उस के पीछे दौड़ा, हत्यारा वही हो सकता था. लेकिन वह अंधेरे में गायब हो चुका था. आगे खेत थे, मुझे इतना यकीन है कि वह आदमी गांव से ही आया था.’’

‘‘तुम ने यह बात पहले क्यों नहीं बताई?’’

‘‘यही बात तो मुझे फंसा रही है,’’ उस ने कहा, ‘‘मेरा फर्ज था कि मैं आमना को बताता, फिर अपने घर वालों को बताता. शोर मचाता, थाने जा कर रिपोर्ट करता, लेकिन मुझे एक खतरा था कि मंजूर की मेरे साथ लड़ाई हुई थी. सब यही समझते कि मैं ने उसे मारा है.

‘‘पैदा करने वाले की कसम, हुजूर मैं ने सारी रात जागते हुए गुजारी है. जब आप ने बुलाया तो मेरा खून सूख गया कि आप को पता लग गया है कि मरने से पहले मंजूर मेरे पास आया था.’’

मैं ने कहा, ‘‘दुश्मनी के कारण बहुत से होते हैं, हत्याएं हो जाती हैं.’’

‘‘हां हुजूर, जमीन के बंटवारे के अलावा मैं ने आमना पर भी बुरी नजर रखी थी. उस की इज्जत पर भी हाथ डाला था. मंजूर की जगह कोई और होता तो मेरी हत्या कर देता. सच बात तो यह है कि हत्या मेरी होनी थी, लेकिन मंजूर की हो गई.’’

मैं उठ कर बाहर गया और एक कांस्टेबल से कहा कि वह आमना को ले कर आ जाए. फिर अंदर जा कर रशीद का बयान सुनने लगा. वह सब बातें खुल कर कर रहा था. मुझे आमना से यह पूछना था कि वास्तव में उस ने मंजूर को रशीद के पास भेजा था, जबकि उस ने यह कहा था कि उसे पता ही नहीं था कि मंजूर कहां गया था.

‘‘एक बात सचसच बता दो रशीद, आमना कैसे चरित्र की है?’’

‘‘आप ने लोगों से पूछा होगा आमना के बारे में, सब ने उसे सज्जन ही बताया होगा. मेरी नजरों में भी आमना एक सज्जन महिला है, क्योंकि उस ने मुझे दुत्कार दिया था. लेकिन उस ने अपनी संतुष्टि के लिए एक आदमी रखा हुआ है, वह है कयूम.’’

‘‘कयूम तो पागल है.’’

‘‘पागल बना रखा है,’’ उस ने कहा, ‘‘लेकिन अपने मतलब भर का.’’

‘‘मैं ने सुना है कि उसे कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता नहीं देता, क्योंकि वह पागल है?’’

‘‘यह बात नहीं है हुजूर, बेटियों वाले इसी गांव में हैं. वे देख रहे हैं कि कयूम आमना के जाल में फंसा हुआ है.’’

बहुत से सवालों के जवाब के बाद मुझे यह लगा कि रशीद सच बोल रहा है, लेकिन फिर भी मुझे इधरउधर से पुष्टि करनी थी. रशीद यह भी कह रहा था कि उसे हवालात में बंद कर के तफ्तीश करें.

गामे के 3 आदमी थाने में बैठे थे, मैं ने उन्हें बारीबारी बुला कर पूछा कि हत्या की पहली रात गामे कहां था और क्या उन्हें पता है कि मंजूर की हत्या गामे शाह या तुम में से किसी ने की है.

मैं ने पहले भी बताया था कि ऐसे लोगों से थाने में पूछताछ दूसरे तरीके से होती है. ये तीनों तो पहले ही थाने के रिकौर्ड पर थे. मैं ने एक कांस्टेबल और एक एएसआई बिठा रखा था. मैं एक से सवाल करता था और फिर उन्हें इशारा कर देता था, वे उसे थोड़ी फैंटी लगा देते थे.

सुबह तक यह बात सामने आई कि गामे शाह दूसरी औरतों की तरह आमना को भी खराब करना चाहता था. गामे शाह ने उन तीनों को तैयार करना चाहा था कि वे मंजूर की हत्या कर दें, लेकिन वे तैयार नहीं हुए. उस के बाद वह आमना का अपहरण कर के उसे बहुत दूर पहुंचाना चाहता था, लेकिन हत्या कोई मामूली बात नहीं थी, जो ये छोटेमोटे जुआरी करते.

कोई भी तैयार नहीं हुआ तो गामे शाह ने कहा कि वह खुद बदला लेगा. तीनों ने बताया कि उस शाम जब वे गामे शाह के मकान पर गए तो वह घर पर नहीं मिला. वे वहीं बैठ गए. बहुत देर बाद गामे शाह आया तो उस के हाथ में कुल्हाड़ी थी. उन्होंने उस से पूछा कि वह कहां गया था, उस ने कहा कि एक शिकार के पीछे गया था. इस के अलावा उस ने कुछ नहीं बताया.

मैं 2 घंटे बाद अपने औफिस आया, गामे शाह अभी नहीं आया था. आमना आ चुकी थी. मैं ने उस से कहा, ‘‘आमना, मेरे दिल में तुम्हारे लिए हमदर्दी पैदा हो गई थी, लेकिन तुम ने सच फिर भी नहीं बोला और कहा कि पता नहीं मंजूर कहां गया था. जबकि तुम ने ही उसे रशीद के पास भेजा था.’’

आमना की हालत रशीद की तरह हो गई. मैं ने उस का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘आमना, अब भी समय है. सच बता दो. मैं मामले को गोल कर दूंगा.’’

‘‘अब यह बताओ, तुम्हारा पति अपने दुश्मन के पास गया था, वह सारी रात वापस नहीं लौटा. क्या तुम ने पता करने की कोशिश की कि वह कहां गया है और क्या रशीद ने उस की हत्या कर के कहीं फेंक न दिया हो?’’

आमना का चेहरा लाश की तरह सफेद पड़ गया. मैं ने उस से 2-3 बार कहा लेकिन उस ने कोई जवाब नहीं दिया.

‘‘तुम कयूम को बुला कर उस से कह सकती थी कि मंजूर बाग में गया है और वापस नहीं आया. वह उसे जा कर देखे.’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने ऐसा क्यों किया?’’

मुझे उस की हालत देख कर ऐसा लगा जैसे उस का दम निकल जाएगा.

‘‘तुम ने मंजूर को सलाह दी थी कि वह शाम को बाग में जाए. उस की हत्या के लिए तुम ने रास्ते में एक आदमी बिठा रखा था ताकि जब वह लौटे तो वह मंजूर की हत्या कर दे. वह आदमी था कयूम.’’

वह चीख पड़ी, ‘‘नहीं…नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है.’’

‘‘क्या रशीद ने उस की हत्या की है?’’

‘‘नहीं…’’ यह कह कर वह चौंक पड़ी.

कुछ देर चुप रही. फिर बोली, ‘‘मैं घर पर थी, मुझे क्या पता उस की हत्या किस ने की?’’

‘‘मेरी एक बात सुनो आमना,’’ मैं ने उस से प्यार से कहा, ‘‘मुझे तुम से हमदर्दी है. तुम औरत हो, अच्छे परिवार की हो. मैं तुम्हारी इज्जत का पूरा खयाल रखूंगा. मुझे पता है कि हत्या तुम ने नहीं की है. आज का दिन मैं तुम्हें अलग किए देता हूं. खूब सोच लो और मुझे सचसच बता दो. तुम्हें इस केस में बिलकुल अलग कर दूंगा. तुम्हें गवाही में भी नहीं बुलाऊंगा.’’

उस की हालत पतली हो चुकी थी. उस ने मेरी किसी बात का भी जवाब नहीं दिया. मैं ने कांस्टेबल को बुला कर कहा, इस बीबी को अंदर ले जाओ और बहुत आदर से बिठाओ. किसी बात की कमी नहीं आने देना. पुलिस वाले इशारा समझते थे कि उस औरत को हिरासत में रखना है.

गामे शाह आ गया. मेरा अनुभव कहता था कि हत्या उस ने नहीं की है. लेकिन हत्या के समय वह कुल्हाड़ी ले कर कहां गया था? मैं ने उसे अंदर बुला कर पूछा कि कुल्हाड़ी ले कर कहां गया था.

उस ने एक गांव का नाम ले कर बताया कि वह वहां अपने एक चेले के पास गया था. मैं ने एक कांस्टेबल को बुलाया और गामे शाह के चेले का और गांव का नाम बता कर कहा कि वह उस आदमी को ले कर आ जाए.

‘‘जरा ठहरना हुजूर, मैं उस गांव नहीं गया था. बात कुछ और थी.’’ उस ने कहा.

वह बेंच पर बैठा था. मैं औफिस में टहल रहा था. मैं ने उस के मुंह पर उलटा हाथ मारा और सीधे हाथ से थप्पड़ जड़ दिया. वह बेंच से नीचे गिर गया और हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया.

असल बात उस ने यह बताई कि वह उस गांव की एक औरत से मिलने गया था, जिसे उस से गांव से बाहर मिलना था. कुल्हाड़ी वह अपनी सुरक्षा के लिए ले गया था. अब हुजूर का काम है, उस औरत को यहां बुला लें या उस से किसी और तरह से पूछ लें. मैं उस का नाम बताए देता हूं. किसी की हत्या कर के मैं अपने कारोबार पर लात थोड़े ही मारूंगा.

दिन का पिछला पहर था. मैं यह सोच रहा था कि आमना को बुलाऊं, इतने में एक आदमी तेजी से आंधी की तरह आया और कुरसी पर गिर गया. वह मेज पर हाथ मार कर बोला, ‘‘आमना को हवालात से बाहर निकालो और मुझे बंद कर दो. यह हत्या मैं ने की है.’’

वह कयूम था.

वह खुशी और कामयाबी का ऐसा धचका था, जैसे कयूम ने मेरे सिर पर एक डंडा मारा हो. यकीन करें, मुझ जैसा कठोर दिल आदमी भी कांप कर रह गया.

मैं ने कहा, ‘‘कयूम भाई, थोड़ा आराम कर लो. तुम गांव से दौड़े हुए आए हो.’’

उस ने कहा, ‘‘नहीं, मैं घोड़ी पर आया हूं, मेरी घोड़ी सरपट दौड़ी है. तुम आमना को छोड़ दो.’’

वह और कोई बात न तो सुन रहा था और न कर रहा था. मैं ने प्यारमोहब्बत की बातें कर के उस से काम की बातें निकलवाई. पता यह चला कि मैं ने आमना को जब हिरासत में बिठाया था तो किसी कांस्टेबल ने गांव वालों से कह दिया था कि आमना ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. गांव का कोई आदमी आमना के घर पहुंचा और आमना के पकड़े जाने की सूचना दी. कयूम तुरंत घोड़ी पर बैठ कर थाने आ गया.

‘‘कयूम भाई, अगर अपने होश में हो तो अकल की बात करो.’’

उस ने कहा, ‘‘मैं पागल नहीं हूं, मुझे लोगों ने पागल बना रखा है. आप मेरी बात सुनें और आमना को छोड़ दें. मुझे गिरफ्तार कर लें.’’

कयूम के अपराध स्वीकार करने की कहानी बहुत लंबी है. कुछ पहले सुना चुका हूं और कुछ अब सुना रहा हूं. मंजूर रशीद से बहुत तंग आ चुका था. वह गुस्सा अपने अंदर रोके हुए था. एक दिन आमना ने कयूम से कहा कि रशीद की हत्या करनी है. उसे खूब भड़काया और कहा कि अगर रशीद की हत्या नहीं हुई तो वह मंजूर की हत्या कर देगा.

कयूम आमना के इशारों पर नाचता था. वह तैयार हो गया. मंजूर से बात हुई तो योजना यह बनी कि रशीद बाग से शाम होने से कुछ देर पहले घर आता है. अगर वह रात को आए तो रास्ते में उस की हत्या की जा सकती है. उस का तरीका यह सोचा गया कि मंजूर रशीद के बाग में जा कर नाटक खेले कि वह दुश्मनी खत्म करने आया है और उसे बातों में इतनी देर कर दे कि रात हो जाए. कयूम रास्ते में टीलों के इलाके में छिप कर बैठ जाएगा और जैसे ही रशीद गुजरेगा तो कयूम उस पर कुल्हाड़ी से वार कर देगा.

यह योजना बना कर ही मंजूर रशीद के पास बाग में गया था. कयूम जा कर छिप गया. अंधेरा बहुत हो गया था. एक आदमी वहां से गुजरा, जहां कयूम छिपा हुआ था. अंधेरे में सूरत तो पहचानी नहीं जा सकती थी, कदकाठी रशीद जैसी थी.

कयूम ने कुल्हाड़ी का पहला वार गरदन पर किया. वह आदमी झुका, कयूम ने दूसरा वार उस के सिर पर किया और वह गिर कर तड़पने लगा.

कयूम को अंदाजा था कि वह जल्दी ही मर जाएगा, क्योंकि उस के दोनों वार बहुत जोरदार थे. पहले वह साथ वाले बरसाती नाले में गया और कुल्हाड़ी धोई. फिर उस पर रेत मली. फिर उसे धोया और मंजूर के घर चला गया.

वहां उस ने अपने कपड़े देखे, कमीज पर खून के कुछ धब्बे थे जो आमना ने तुरंत धो डाले. कुल्हाड़ी मंजूर की थी. आमना और कयूम बहुत खुश थे कि उन्होंने दुश्मन को मार गिराया.

उस समय तक तो मंजूर को वापस आ जाना चाहिए था. तय यह हुआ था कि मंजूर दूसरे रास्ते से घर आएगा. वह अभी तक घर नहीं पहुंचा था. 2-3 घंटे बीत गए. तब आमना ने कयूम से पूछा कि उस ने रशीद को पहचान कर ही हमला किया था. उस ने कहा कि वहां से तो रशीद को ही आना था, ऐसी कोई बात नहीं है कि वह गलती से किसी और को मार आया हो.

जब और समय हो गया तो उस ने कयूम से कहा कि जा कर देखो गलती से किसी और को न मारा हो. वह माचिस ले कर चल पड़ा. जा कर उस का चेहरा देखा तो वह मंजूर ही था.

कयूम दौड़ता हुआ आमना के पास पहुंचा और उसे बताया कि गलती से मंजूर मारा गया. आमना का जो हाल होना था वह हुआ, लेकिन उस ने कयूम को बचाने की तरकीब सोच ली.

उस ने कयूम से कहा कि वह अपने घर चला जाए और बिलकुल चुप रहे. लोगों को पता ही है कि रशीद की मंजूर से गहरी दुश्मनी है. मैं भी अपने बयान में यही कहूंगी कि मंजूर को रशीद ने ही मारा है.

कयूम को गिरफ्तार कर के मैं ने आमना को बुलाया और उसे कयूम का बयान सुनाया. कुछ बहस के बाद उस ने भी बयान दे दिया.

उन्होंने जो योजना बनाई थी, वह विफल हो गई. आमना का सुहाग लुट गया. लेकिन उस ने इतने बड़े दुख में भी कयूम को बचाने की योजना बनाई. मंजूर को लगा था कि वह रशीद की इस तरह से हत्या कराएगा तो किसी को पता नहीं चलेगा कि हत्यारा कौन है.

मैं ने आमना और कयूम के बयान को ध्यान से देखा तो पाया कि आमना ने पति की मौत के दुख के बावजूद अपने दिमाग को दुरुस्त रखा और मुझे गुमराह किया. कयूम को लोग पागल समझते थे, लेकिन उस ने कितनी होशियारी से झूठ बोला.

मैं ने हत्या का मुकदमा कायम किया. कयूम ने मजिस्ट्रैट के सामने अपराध स्वीकार कर लिया. मैं ने आमना को गिरफ्तार नहीं किया था और कयूम से कहा था कि आमना का नाम न ले. यह कहे कि उसे मंजूर ने हत्या करने पर उकसाया था.

कयूम को सेशन कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे शक का लाभ दे कर बरी कर दिया.

रिश्तेदार: अकेली सौम्या, अनजान शहर और अनदेखे चेहरे

Story in Hindi

लेट नाइट रैड बौडिकून ड्रैस में स्पौट हुईं दीपिका पादुकोण, अपनी अदाओं से लूटी महफिल

हिंदी फिल्मों की शाइनिंग स्टार दीपिका पादुकोण अपनी फिल्मों और विज्ञापनों को ले कर चर्चा में बनी रहती है. उन के फैशन स्टाइल के तो कहने ही क्या, तभी तो वे हर बात पर सुर्खियां बटोर लेती हैं.

ऐसा ही कुछ मुंबई की एक पार्टी में भी हुआ, जहां दीपिका पादुकोण ने महफिल ही लूट ली. उस पार्टी में पहनी अपनी रैड ड्रैस में दीपिका पादुकोण काफी हौट लग रही थीं.इस पार्टी की एक और खास बात यह थी कि दीपिका पादुकोण वहां अकेले ही नजर आईं. उन के पति रणवीर सिंह इस पार्टी का हिस्सा नहीं बने थे. पर इस बात का असर दीपिका पर बिलकुल भी नहीं पड़ा था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Instant Bollywood (@instantbollywood)


हीरोइन दीपिका पादुकोण ने जैसे ही कार से उतर कर आगे कदम बढ़ाए, वहां मौजूद पैपराजी ने उन की एकएक तसवीर कैमरे में कैद कर ली. यही तसवीरें सोशल मीडिया पर आते ही छाने और लोगों को अपना दीवाना बनाने लगीं. उस पार्टी में दीपिका पादुकोण को देखते ही लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई. वे दीपिका की एक झलक पाने को बेताब थे. दीपिका ने भी अपने फैंस पर जम कर प्यार लुटाया और पैपराजी को अलगअलग अंदाज में पोज दिए.

इस दौरान फिल्म स्टार दीपिका पादुकोण बेहद ही बोल्ड लग रही थीं. उन की तसवीरें सोशल मीडिया पर आते ही वायरल होने लगी हैं. दीपिका पादुकोण ने वैट हेयर लुक कैरी किया हुआ था, जिस में वे बेहद स्टाइलिश लग रही थीं. दीपिका ने हाई हील पहनी हुई थीं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Deepika Padukone (@deepikanpadukone)


‘जवान’ और ‘पठान’ फिल्मों से तहलका मचा चुकीं दीपिका पादुकोण की ये तसवीरें फैंस के बीच आते ही आग की तरह वायरल हो गईं. अब जल्दी ही वे रोहित शेट्टी की नई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में लेडी पुलिस वाली के रोल में दिखेंगी.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें