मोनोकिनी पहन समंदर किनारे नजर आई टीवी की अक्षरा, ट्रोलर्स का हुआ मुंह बंद

टीवी की फेमस एक्ट्रेस प्रणाली राठौड़ (Pranali Rathod)  इन दिनों समंदर किनारे का मजा लेते हुई नजर आ रही हैं.  पहले अपने शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में अक्षरा बन फेम पाया. फिर सोशल मीडिया पर अपनी हौट फोटो का तांता लगा. खबरों की हेडलाइन बन चुकी है. इन दिनों प्रणाली ने अपना बिकिनी लुक दिखाकर लोगों को हैरान कर दिया है.

 

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आपको बता दें कि प्रणाली की क्यूटनेस ने अक्षरा के रूप में फैंस का दिल जीता है. आज के समय में प्रणाली राठौड़ ये शो छोड़ चुकी हैं, लेकिन फैंस उन्हें शो के जरिए आज भी याद करते रहते हैं. इसी वजह से प्रणाली भी अपने फैंस से कनेक्ट होना नहीं भूलतीं. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट शेयर करके फैंस को खुश करती रहती हैं. वहीं, अब प्रणाली ने अपनी कुछ नई तस्वीरें शेयर की है, जिसमें वो मोनोकिनी पहनी हुई नजर आ रही है. ये फोटो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

बता दें कि रिश्ता क्या कहलाता है को अलविदा कहने के बाद प्रणाली राठौड़ ने साल 2024 की शुरुआत काफी धमाकेदार अंदाज में की दी. एक्ट्रेस नए साल के मौके पर अपनी बेस्ट फ्रेंड प्रतीका भोसले के साथ वेकेशन पर निकलीं है. इस मौके की फोटोज एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कीं है. वहीं, अब प्रणाली ने उसी वेकेशन की एक फोटो अब शेयर की है, जिसमें वह मोनोकिनी पहन कहर ढा रही हैं.


फोटो में देखा जा सकता है कि प्रणाली राठौड़ समंदर किनारे बैंच पर लेटी हुई हैं और एक्ट्रेस ने ब्लैक कलर की मोनोकिनी पहनी हुई है. एक्ट्रेस ने अपने सिर पर टॉपी पहनी हुई है और पूरा ध्यान फोन में है। इस फोटो में एक्ट्रेस ने अपनी बोल्डनेस को छुपाने के लिए श्रग का इस्तेमाल किया है, जो उन्होंने अपने पैर पर डाली हुई है.

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड : डांस, सैल्फी और ‘कहरवा’ का रहा जलवा

भोजपुरी सिनेमा में सब से बड़े ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ का 5वां साल कई माने में काफी खास रहा. इस साल भी इस का आयोजन उत्तर प्रदेश में ‘अयोध्या महोत्सव’ मंच पर 4 जनवरी, 2024 को किया गया.

विमल और माही की जोड़ी छाई रही

हीरो विमल पांडेय और हीरोइन माही खान ने इस अवार्ड शो के होस्ट की जिम्मेदारी संभाली. इन की जोड़ी पिंक और ब्लैक ड्रैस में बेहद खूबसूरत नजर आ रही थी. इन दोनों ने भोजपुरिया बोली में बेहद खास अंदाज से शुरुआत कर पूरे समय अपने चुलबुले और फनी मूमैंट्स द्वारा लोगों को आखिर तक बांधे रखा और बीचबीच में हलकेफुलके अंदाज में हंसीमजाक से लोगों का मनोरंजन करते रहे.

Saras salil award

खूब खिंची सैल्फी

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के प्रति दीवानगी केवल दर्शकों में ही नहीं, बल्कि भोजपुरी के तमाम बड़े हीरोहीरोइनों और टैक्निशियनों में भी दिखी. कलाकार अवार्ड पाने के बाद एकदूसरे के साथ खूब सैल्फी ले रहे थे.

कार्यक्रम को होस्ट कर रहे विमल पांडेय और माही खान की जोड़ी के साथ कई ऐक्टरों ने उन के शानदार अंदाज में ऐंकरिंग के लिए बधाई देते हुए सैल्फी ली. बहुत से ऐक्टरों ने उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा भी किया.

दर्शकों को नहीं किया निराश

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के दौरान एक ओर दर्शक भोजपुरी के सुपर स्टार हीरो और हीरोइनों को सामने पा कर गदगद थे, वहीं दूसरी ओर उन के साथ सैल्फी लेने की होड़ मची थी. दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ दर्शक सैल्फी लेते रहे, लेकिन एक बार भी ‘निरहुआ’ के चेहरे पर गुस्सा और झल्लाहट नहीं दिखी. कुछ यही हाल आम्रपाली दुबे, अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चैहान, पल्लवी गिरि के साथ हुआ. इन हसीनाओं ने अपने फैंस को खूब सैल्फी दी. अंजना सिंह और देव सिंह के साथ ही फिल्मों में विलेन का किरदार निभा कर पौपुलर हुए संजय पांडेय और अयाज खान के साथ भी सैल्फी लेने वालों की होड़ मची रही.

Saras salil award

आर्यन बाबू ने हीरोइनों को स्टेज पर नचाया

भोजपुरी फिल्मों में चाइल्ड ऐक्टर के तौर पर अपने हुनर और ऐक्टिंग की बदौलत मशहूर हुए आर्यन बाबू ने कड़ाके की ठंड में लोगों में एनर्जी भर दी और अपने निराले अंदाज में उन्हें खूब हंसाया. आर्यन बाबू यहीं नहीं रुके और उन्होंने माइक थाम कर जब गाना शुरू किया, तो दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे सहित सभी ऐक्टर दर्शकों के साथ तालियां बजाने लगे.

आर्यन बाबू ने अपने डांस में तब और ज्यादा ट्विस्ट ला दिया, जब उन्होंने ‘मिस जम्मू’ और फेमस ऐक्ट्रैस अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चैहान को स्टेज पर थिरकने को मजबूर कर दिया. चाइल्ड ऐक्टर आयुषी मिश्र ने भी लोगों को खूब गुदगुदाया.

देसी नाच ‘कहरवा’ में झूमे ऐक्टर

‘अयोध्या महोत्सव मंच’ पर आयोजित हुए ‘5वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में जो सब से खास रहा, वह था ‘कहरवा’. अवधी बोली में गाए जाने वाले गीत के साथ जब अवधी कलाकार राजेश गौड़ की अगुआई में तकरीबन 3 दर्जन लड़केलड़कियों की टीम स्टेज पर चढ़ी, तो लोगों की सांसें थम सी गईं. इन युवा कलाकारों ने खतरनाक स्टंट के साथ देसी अंदाज में जो डांस पेश किया, उस ने लोगों में रोमांच भर दिया.

सीमा कनौजिया – भद्दे डांस, चुटकुलिया बातचीत को किया मशहूर

Society News in Hindi: सोशल मीडिया (Social Media) पर इन्फ्लुएंसर (Influencer) सीमा कनौजिया अपने क्रिंज कंटैंट (cringe content) को ले कर खासा चर्चित रहती है. वह रील्स (Reels) के खेल को अच्छे से जानती है. स्किल्स (Skills) न होने के बावजूद उसे यह अच्छे से पता है कि सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की कमी नहीं जो उस के कंटैंट को पसंद कर ही लेंगे.

आज जिस को देखो वह मोबाइल फोन में आंखें गड़ाए बैठा रहता है. यह भी नहीं है कि लोग मोबाइल में कुछ नौलेजिबल कंटैंट देख रहे हों. वे देख रहे होते हैं नाली मे लेटते हुए आदमी को, वे देखते हैं मैट्रो में अजबगजब डांस करते हुए युवकयुवतियों को, वे देखते हैं भीड़भाड़ वाली मार्केट में घुस कर डांस व अजीबअजीब हरकतें करते युवाओं को.

इन सब से भी इन का पेट नहीं भरता तो ये लोग कच्ची हरीमिर्च खाने वाले और अपनी छाती पीटते हुए लोगों को देखते हैं. यही है आजकल का कंटैंट और इस तरह के कंटैंट को सोशल मीडिया की भाषा में क्रिंज कंटैंट कहते हैं.

असल में, क्रिंज कंटैंट का मतलब होता है कुछ ऐसी चीजें या वीडियो जिन्हें देख कर लोग अजीब महसूस करते हैं. इस तरह के कंटैंट आमतौर पर भद्दे डांस, चुटकुलिया बातचीत होते हैं. इन क्रिंज कंटैंट्स को देख कर लोग अनकम्फर्टेबल फील करते हैं. हालांकि इसे लोग मनोरंजन का एक साधन ही मानते हैं.
एक समय पर टिकटौक पर ऐसे वीडियोज खूब वायरल हुए थे, जिन्हें देख कर लोग क्रिंज फील करते थे. आजकल यही क्रिंज कंटैंट एक बार फिर अलगअलग सोशल प्लेटफौर्म्स पर वायरल हो रहे हैं.

इंडिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो क्रिंज कंटैंट पेश करते हैं, जैसे भुवन बाम (बीबी की वाइन्स), आशीष चंचलानी, कैरीमिनाटी, पुनीत सुपस्टार, जोगिंदर (थारा भाई जोगिंदर), दीपक कलाल, पूजा जैन (डिंचेक पूजा), एम सी स्टैन और सीमा कनौजिया.

लेकिन बात अभी यहां सीमा कनौजिया की करें तो वह अपनी वीडियोज में आखिर किस तरह का कंटैंट पेश करती है जो लोगों को क्रिंज लगता है. इंस्टाग्राम पर उस के डांस और दुलहन की तरह सजते हुए कई वीडियोज आप को देखने को मिल जाएंगे.

ऊटपटांग हरकतों के लिए चर्चित

बात करें अगर सीमा कनौजिया के वीडियोज की तो जहां कहीं भी कोई लड़की ऊटपटांग हरकतें करती हुई नजर आए तो समझ जाना चाहिए कि वह लड़की कोई और नहीं, बल्कि सीमा कनौजिया ही है.
वैसे, सीमा की एक खास पहचान भी है. वह पहचान है मुंह घुमा के ‘है है है है’ करते रहना, वह भी बेमतलब में, फालतू में. उस का यह ‘है है…’ करना अच्छेखासे इंसान को इरिटेट करने का दम रखता है. साथ ही, किसी भी व्यक्ति को गुस्सा दिला सकता है.

इस के अलावा उस का बेतुका डांस आप के सिरदर्द का कारण बन सकता है. उस के डांस और गाने के बीच में कोई तालमेल नहीं होता. तालमेल तो छोड़िए, उस के डांस में डांस ही नहीं.

वैसे तो टिकटौक के समय सीमा के बहुत से अजीबोगरीब वीडियोज वायरल हुए थे, जिन में कभी वह किचन में खाना बनाते हुए दिखती है और फिर एकदम से नाचने लगती है तो कभी किचन में खाना बनाते हुए कहती है, ‘है है, फ्रैंड्स लोग. आज मैं ने परांठे बनाए हैं, आओ खा लो. फ्रैंड्स लोग आज मैं भंडारे में जा रही हूं. क्या आप ने कभी भंडारे में खाना खाया है?’ कभी वह तरबूज और आम खाते हुए वीडियो बनाती है, वह भी भद्दे तरीके से.

वह इस से भी बाज नहीं आती तो गुसलखाने में कपड़े धोते हुए दिख जाती है तो कभी बरतन साफ करते हुए दिखती है. इतना ही नहीं, इन सब कामों को करते हुए वह हैलो फ्रैंड्स ‘है है है’ करना नहीं भूलती. उस के इस तरह के कंटैंट को ही लोग क्रिंज कहते हैं.

पब्लिक में ठुमके

आजकल लोग सीमा कनौजिया की एक वायरल वीडियो के बारे में बात कर रहे हैं. यह वीडियो दिल्ली मैट्रो की है. इस में सीमा मशहूर बौलीवुड गाने ‘अनदेखी अनजानी…’ पर डांस कर रही है. पहले वह मैट्रो के अंदर ठुमके लगाती है, फिर बाहर आ जाती है और प्लेटफौर्म पर नाचने लगती है. वीडियो में दिख रहा है कि कैसे उस के पीछे खड़े लोग उस का डांस देख कर हैरान हो रहे हैं. कई लोग तो उस का डांस देख कर अपनी हंसी तक नहीं रोक पा रहे हैं.

सीमा के इस डांस को देख कर कई लोगों ने कमैंट किया-

जिस में एक यूजर ने लिखा, ‘‘ये कौन सी बीमारी है.’’

एक और यूजर ने लिखा, ‘‘कृपया कोई इस को पागलखाने में डालो.’’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘ये नहीं सुधरने वाली.’’

एक और यूजर ने लिखा, ‘‘इसे कौन सा दौरा पड़ता है. मैं जा रहा हूं पुलिस स्टेशन कंप्लेन करवाने. मुझे सोशल पर मानसिक रूप से बहुत सताया गया है.’’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘मिरगी की बीमारी है, चप्पल सुंघाओ.’’

एक दूसरी वीडियो में सीमा रेलवे प्लेटफौर्म पर बौलीवुड के गाने ‘मेरा दिल तेरा दीवाना…’ पर लेटलेट कर डांस कर रही है. सीमा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर यह डांस वीडियो अपलोड किया था. इस वायरल वीडियो पर लोग तरहतरह के रिऐक्शन दे रहे हैं. कोई उस लड़की का ‘कौन्फिडैंस’ देख कर हैरान है तो कोई उसे अपने ‘दिमाग का इलाज’ कराने की सलाह दे रहा है.

एक यूजर ने लिखा, ‘‘कोई इसे उठा कर पटरी पर फेंक दो.’’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘इस ने तो लेटलेट कर पूरा प्लेटफौर्म ही साफ कर दिया है.’’

एक और यूजर ने लिखा, ‘‘जिगर होना चाहिए पब्लिकली ऐसा डांस करने के लिए.’’

सीमा के इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, ‘‘ईजी लगता है, ईजी लगता है, आर्ट है आर्ट ऐसा क्रिंज कंटैंट बनाना.’’

एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘कौन्फिडैंस होना चाहिए इतना बकवास डांस करने के लिए.’’एक अन्य यूजर ने कमैंट किया, ‘‘किसकिस को ये बावली या पागल लगती है, लाइक करो.’’

उस की एक और वीडियो है जिस में वह फेरीवाले को अपना वीडियो दिखा रही है. हालांकि, वह फेरीवाला उस की वीडियो में इंटरैस्ट नहीं ले रहा. ऐसी ही उस की कई और वीडियोज हैं जिन में वह बस घर के घरेलू काम करती हुई नजर आती है. वह अपने एक वीडियो में भद्दी तरह से खाना खाती हुई भी दिखती है. अगर कोई उस की यह वीडियो देख ले तो बिना खाना खाए ही टेबल से उठ जाएगा.

उस की फौलो लिस्ट की बात करें तो सीमा के इंस्टाग्राम पर 4 लाख 62 हजार से ज्यादा फौलोअर्स हैं. उस की 2 हजार 3 सौ पोस्ट हैं. इन सभी पोस्ट में सब से ज्यादा उस की बेहूदा हरकतें करती हुई वीडियोज हैं जिन का कोई सिरपैर नहीं है. ये वीडियोज उस के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड हैं.

वह अकसर फैशन शो में रैंप वाक करती हुई दिखाई देती है. इस के अलावा वह मेकअप आर्टिस्ट के शो में चीफ गेस्ट के तौर पर भी जाती है और अपनी स्किन पर मेकअप भी करवाती है. इस तरह वह उन का प्रमोशन कर के भी पैसा छापती है.

असल में, क्रिंज कंटैंट क्रिएटर केवल यह चाहते हैं कि लोग उन के द्वारा बनाए गए कंटैंट पर हंसें. उन्हें क्रिंज कंटैंट बनाने के लिए यही लोग प्रेरित करते हैं. आखिर, उन्हें पहचान मिल रही है. पैसा मिल रहा है फिर क्यों भला वे इस फेम को खोना चाहेंगे. ऐसे में हम और आप लोगों को ही इस तरह का कंटैंट देखना बंद करना होगा. आखिर हमारे पास भी तो खाली समय और फ्री डेटा नहीं है.

अगर हम कहें कि लोग आखिर क्रिंज कंटैंट क्यों बनाते हैं तो इस का जवाब बहुत साफ और सरल है. बारबार क्रिंज कंटैंट को देखना ही इन्हें बनाने वालों को बढ़ावा देता है. इसी कारण कंटैंट क्रिएटर क्रिंज कंटैंट बनाते हैं. वे बेवकूफ नहीं हैं, उन्हें पता है कि वे क्या कर रहे हैं. सच तो यह है कि वे बहुत स्मार्ट हैं. वे जानते हैं कि जनता जो देखती है वह बिकता है. हमारी आबादी एक अरब से ज्यादा है और लोग हर तरह के कंटैंट देखते हैं.

क्रिंज कंटैंट का कंज्यूमर

लोकप्रियता और पहचान एक बात है, पैसा बिलकुल दूसरी बात है. अब जब घटिया कंटैंट सच में पैसा कमाने का मौका बन रहा है तो क्या कोई इस मौके को छोड़ेगा? कोई इस तरह के मौके को अपने हाथ से जाने देगा? सभी लोग कम समय में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं. साथ ही, वे सोशल फेम भी चाहते हैं. इसीलिए लोग क्रिंज कंटैंट से पैसा कमाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. कोई भी टैलेंट को इम्पोर्टेंस नहीं देता है. सभी पैसे के पीछे भाग रहे हैं जिस के कारण वे क्रिंज कंटैंट लोगों के सामने परोस रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं.

इस के पीछे एक सामाजिक कारण भी है. वह है दूसरों के अजीब और शर्मनाक पल देख कर लोगों को खुशी मिलती है. इस के अलावा, एक टर्म है ‘शाडेनफ्रूड.’ यह एक जरमन शब्द है जिस का अर्थ है दूसरों के दुर्भाग्य या शर्मिंदगी में खुशी या मनोरंजन की तलाश करना. यह ज्यादा से ज्यादा कंटैंट देखने के लिए एक प्रेरणा हो सकता है.

दिमाग नहीं लगाना पड़ता

आखिर क्रिंज कंटैंट पर ज्यादा व्यूज क्यों आते हैं, इस का कारण है कि इस तरह के कंटैंट में जो दिखाया जाता है, कई बार हम वह सभी करना चाहते हैं लेकिन सोशल प्रैशर की वजह से हम यह सब नहीं कर पाते हैं. इस के अलावा हम लोग अपने दोस्तों से वाहवाही लूटना चाहते हैं. बहुत सारे लोग हैं जो कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं. यही लोग आजकल क्रिंज कंटैंट का सहारा ले रहे हैं. इस में ज्यादा दिमाग भी नहीं लगाना पड़ता या यह कहें कि दिमाग घर छोड़ कर ही आना होता है.

ये लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि युवाओं को ऊटपटांग हरकतें करना, जैसे अपने ऊपर नाली का पानी डालना, चीखनाचिल्लाना, उलटापुलटा डांस करना वगैरहवगैरह करना ही पसंद आ रहा है. वे लोग ऐसा ही कंटैंट देखना चाहते हैं और क्रिंज कंटैंटर को इस से पैसा भी मिलता है. इसलिए काफी लोग क्रिंज कंटैंट बना रहे हैं.

क्रिंज कंटैंट की बढ़ती संख्या को देखते हुए इंडियन इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट (आईआईएम) उदयपुर ने ‘क्रिंज कंटैंट की स्टडी के लिए एक टीम बनाई है. यह टीम कंटैंट बनाने वाले लोगों पर नजर रखेगी. आईआईएम उदयपुर की इस स्टडी में यह भी पता लगाया जाएगा कि रियल लाइफ में इन क्रिएटर्स को लोग कितना मानते हैं.

आईआईएम उदयपुर की यह स्टडी उत्तर प्रदेश के मैनपुरी, महाराष्ट्र के सांगली, पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, राजस्थान के उदयपुर और असम के लाखीपुर में की जाएगी.

अभी तक आईआईएम की टीम के मुताबिक सफलता और फेम पाना छोटे शहरों के इन क्रिएटर्स का लक्ष्य होता है, इसलिए वे क्रिंज कंटैंट बनाने से भी नहीं कतराते हैं क्योंकि ऐसा करने से लोग उन्हें याद रखते हैं.

मालती चौहान की आत्महत्या, चकाचौंधी इन्फ्लुएंसर्स को सबक

Crime News in Hindi: लाइक्स, सब्सक्राइब, बेल आइकन के खेल उत्तर प्रदेश की मालती चौहान के अंत की कहानी भी बन गए. इस से बाकी यूट्यूबर (YouTuber) कुछ समझों या न, पर मालती चौहान की आत्महत्या (Suicide) उन के लिए सबक जरूर है. डिजिटल वर्ल्ड (Digital World) ने एक चीज तबीयत से की कि इंसान भले स्मार्ट हो या न, लेकिन स्मार्टफोन (Smart Phone) हर हाथ में जरूर हो. इस ने एक का दूसरे तक एक्सैस आसान कर दिया है. वह चाहे दिल्ली (Delhi) के वसंत कुंज (Vasant Kunj) जैसी पौश कालोनी में रहने वाली धृति हो या उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संत कबीर नगर (Sant kabir Nagar) इलाके के किसी कच्चे मकान में रहने वाली मालती चौहान.

लेकिन भूख चाहे जितनी हो, निवाला तो तभी निगला जा सकता है जब जबान उस की गरमाहट झोलने लायक हो जाए. कभीकभी डिजिटल वर्ल्ड की चकाचौंध की गिरफ्त में इन्फ्लुएंसर इसे भूल जाते हैं और उन की जबान जल ही जाती है.

ईंट-बदरपुर से बने कच्चे मकान में रहने वाली मालती चौहान, जिस ने गरीबी देखी, टूटी खाट, टपकती छत, बिखरे सपने और बेतरतीब जीवन देखा, ने बहुत कम समय में यूट्यूब इन्फ्लुएंसर के तौर पर खासा नाम भी कमाया. लेकिन इन सब के बावजूद मालती ऐसी उदाहरण बन गई जिसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कभी नहीं चाहेंगे कि उन के साथ भी ऐसा हो क्योंकि इसी नेम, फेम और चरमोत्कर्ष पर पहुंच कर उसे आखिरकार मौत को गले लगाना पड़ा.

यह पूरा खेल डिजिटल चकाचौंध, कमाई की भूख, नेम, फेम और नंबरों का था. महज 4 साल में ही गरीब परिवार की मालती ने अपने पति विष्णु राज के साथ यूट्यूब पर नाम कमा कमा लिया. दोनों की शादी 2020 में हुई थी. 6 मिलियन यानी 60 लाख से ऊपर फौलोअर्स बना लिए और चैनल में ढेरों देसी रील्स व वीडियो बना लिए.

वीडियो हर एंगल से बनाए, मालती बिस्तर पर लेटी रहती, कभी बरतन धो रही होती, कभी बच्चों को खाना खिला रही होती, पति विष्णुराज उस के विशेष अंगों पर कैमरा जूम-इन और जूम-आउट करता. कभी होंठों की लाली दिखाता, कभी खिसके दुपट्टे को.

पैसों की गाड़ी चल पड़ी तो शादीविवाह, मुंडन पर इस कपल को इन्फ्लुएंसर के तौर पर बुलाया जाने लगा. भोजपुरी के बाजार में जहां अश्लीलता ही मेनस्ट्रीम है, वहां इस कपल के लिए थोड़ीबहुत अश्लीलता दिखा कर अपनी पहचान बनाना आसान न था. लेकिन फिर भी इस कपल ने अपनी कोशिश जारी रखी.

वीडियो चल पड़ी तो टीम बढ़ा ली. टीम में अर्जुन की एंट्री हो गई. अर्जुन के आते ही एक बच्चे की मां मालती उस से दिल लगा बैठी. जिस अश्लीलता से वीडियो में शुरुआत हुई थी वह अश्लीलता इन की निजी जिंदगी में घुस गई. वीडियो बनाने के नाम पर पतिपत्नी दोनों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चलने लगे. औडियंस को लगा स्क्रिप्टेड कंटैंट है. लेकिन रिश्तों के हर जायजनाजायज चीजों पर हिट, लाइक, कमैंट बटोरने की भूख रिश्तों को भी बाजार में नीलाम कर ही देते हैं.

पति ने सोचा कि इस पर भी व्यूज बटोरे जाएं. विष्णुराज ने पत्नी की शादी औन-कैमरा अपने ही चैनल पर चला कर अर्जुन से करवा दी. लेकिन जीवन कोई रेल की पटरी जैसी नहीं कि सीधी चलती रहे. एक बार फिर मालती का मन अर्जुन के साथ नहीं लगा तो उस ने विष्णुराज से पुनर्मिलन कर लिया.

लेकिन यह पुनर्मिलन प्यार और ग्लानी से कहीं आगे उस चकाचौंध की थी जो दोनों की एकदूसरे के बगैर अधूरी थी. डिजिटल दुनिया ने इन्हें वह जिंदगी दे दी थी जो ये सपने में भी नहीं सोच सकते थे लेकिन पेंच यह कि वफा की पिच में दोनों तरफ ही बेवफाई चल पड़ी थी. जब मालती वापस आई तो तकरार फिर से बढ़ने लगी. दोनों तरफ से आरोप लगने लगे.

लाइक्स, सब्सक्राइब, बेल आइकन के खेल में ये दोनों ऐसे उलझे कि यही इन के अंत की कहानी भी बन गई. मालती ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाली कि उस के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है. इस वीडियो को लोगों ने देखा और लाइक किया. लेकिन एक सुबह मालती की सास ज्ञानमती मालती के कमरे का बंद दरवाजा खोलने पहुंची तो मालती की लाश साड़ी के फंदे से लटकी मिली. मालती के पिता दीपचंद के अनुसार, उस की बेटी की हत्या हुई और विष्णुराज गुनाहगार है. ऊपरी तौर पर देखने में यह आत्महत्या का मामला है, लेकिन इस के पीछे सोशल मीडिया की वह क्रूर हकीकत जान पड़ती है जिसे लोग नजरअंदाज कर रहे हैं.

वजह चाहे जो हो, अब यूपीबिहार का हर दूसरा छछूंदर यूट्यूबर मौत के इस कंटैंट पर वीडियो बना कर लाखों व्यूज बटोरने के लिए मार्केट में बना हुआ है. हर कोई इस मौके को भुनाने पर लगा हुआ है. नंबरों का खेल यहां भी मालती का पीछा नहीं छोड़ रहा है. डेली ब्लौग के नाम पर मालती और उस का पति जो सौफ्ट पोर्न व्यूज बटोरने के लिए बनाते थे, अब उसी के फैलोअर्स यूट्यूबर उसी की कहानी को बेच खा रहे हैं.

सोशल मीडिया में चरित्र दिखाया जाता है और उधेड़ा भी जाता है, जैसे यहां अश्लीलता का बाजार है वैसे ही चरित्र हनन का भी बाजार है. मालती व विष्णु की कहानी सोशल मीडिया में पनपे लव, सैक्स व धोखा सरीखी है. जिस मालती के चलतेफिरते वीडियो बना करते थे, अब यूट्यूबरों में भी उस की मौत के बाद उस की निजी जिंदगी, औडियो कौल रिकार्डिंग, सुबूतों की लिस्ट सबकुछ दिखाने का कंपीटिशन चल चुका है. देश के ज्यादातर यूट्यूबरों के लिए यही ग्राउंड रिपोर्टिंग है, यही यूट्यूब जर्नलिज्म है.

एक युवक के पास मेरे कुछ फोटो हैं, वह मुझे ब्लैकमेल कर रहा है क्या करूं?

सवाल

मुझे एक युवक तंग कर रहा है. उस के पास मेरे कुछ फोटो हैं, जिन से वह मुझे और मेरे घर वालों को ब्लैकमेल कर रहा है. मैं क्या करूं? वह मुझ से जबरदस्ती शादी करना चाहता है पर मैं उस से शादी नहीं करना चाहती. वह मुझे कहता है कि अगर मैं ने उस से शादी नहीं की तो वह मुझे बदनाम कर देगा, प्लीज, मेरी हैल्प कीजिए?

जवाब

आप के पत्र से यह तो साफ है कि वह युवक सही नहीं है, लेकिन यह नहीं पता चला कि उस के पास आप के फोटोग्राफ कैसे पहुंचे और वह आप के पीछे क्यों पड़ा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप का उस के साथ पहले अफेयर रहा हो और ब्रेकअप के बाद वह आप को न छोड़ना चाह रहा हो.

खैर, कारण क्या है आप अच्छी तरह जानती हैं. बहरहाल, अगर वह आप को तंग करता है या आप के घर वालों को आप के फोटो दिखा कर ब्लैकमेल करता है तो आप बिना झिझक अपने घर वालों को पहले तो सारी हकीकत बताएं, कभीकभी एकतरफा प्यार में पड़ कर भी युवक ऐसा करते हैं इसलिए उस के पेरैंट्स से अपने पेरैंट्स के साथ जा कर मिलें और उन्हें हकीकत से अवगत करवाएं. अगर फिर भी बात न बने तो पुलिस का सहारा ले सकती हैं. यकीन मानिए, वह आप का पीछा छोड़ देगा.

फोरप्ले सैक्स बनाए रोमांचक, ऐसे मिटाएं हिचक

Sex News in Hindi: अकसर लोगों को सैक्स (Sex) का मतलब पता नहीं होता. भारत (India) में 50% से ज्यादा कपल्स के लिए सैक्स का मतलब है कपड़े उतारे, सैक्सुअल इंटरकोर्स (Sexual Intercourse) किया और मुंह घुमा कर सो गए. 48% लोग सैक्स से पहले जो फोरप्ले(Foreplay) करते हैं उस का मतलब होता है कि 2 किस किए, ब्रैस्ट को दबाया (जबकि महिलाओं का यह सब से मुख्य सैक्सुअली सैंसिटिव पार्ट है इसे केवल प्यार से सहलाया जाना चाहिए न कि दबाया जाना चाहिए) और सैक्सुअल इंटरकोर्स स्टार्ट और फिर वही मुंह घुमाओ और सो जाओ.

आप को यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में 98% औरतें सैक्स के बाद संतुष्ट ही नहीं होतीं यानी वे और्गेज्म तक नहीं पहुंचती हैं. कोई 100 में से 1 बार ऐसा होता होगा कि पुरुष से पहले महिला पार्टनर संतुष्ट हो जाए. यानी संतुष्ट का साइंटिफिक मीनिंग है और्गेज्म प्राप्त करना.

क्या होता है और्गेज्म

अब यह और्गेज्म क्या होता है यह जानने से पहले यह बता दूं कि औरत की बौडी में सैक्सुअल प्लैजर के लिए 7 सैंसिटिव होते हैं- लिप्स, निपल्स, गरदन के पीछे का हिस्सा, थाई, वैजाइना का ऊपर का हिस्सा, वैजाइना के अंदर का पिंक हिस्सा और हिप्स.

महिला को सैटिसफाई करने में पुरुष की भूमिका 99% होती है. लेकिन 98% कपल्स को सैक्स का तरीका ही नहीं पता होता. सैक्स से पहले कम से कम 30 मिनट फोरप्ले जरूरी होता है क्योंकि औरत को तैयार होने में टाइम लगता है क्योंकि एक सर्वे के अनुसार हर औरत सैक्स के लिए जब तक मैंटली तैयार होती है तब तक पुरुष डिस्चार्ज हो चुका होता है. बिना फोरप्ले के सैक्स में जब तक पुरुष उिस्चार्ज होता है तब तक महिला ऐक्साइट होनी शुरू होती है और जब तक महिला की वैजाइना में लूब्रिकेशन स्टार्ट होता है तब तक पुरुष डिस्चार्ज हो चुका होता है, जिस के कारण महिला और्गेज्म प्राप्त नहीं कर पाती. इस वजह से महिलाओं में डिप्रैशन की बीमारी भी हो जाती है, स्किन डल हो जाती है.

सैक्स से पहले पुरुष क्या करे

जब भी आप का सैक्स का मन हो तो पहले आप औरत के चेहरे पर हाथ रखें. उस के बालों को उंगलियों से पीछे करें. उस के होंठों पर हाथ फेरें. गरदन के पीछे उंगलियों से सहलाएं. फिर देखें आप की पार्टनर का मूड है या नहीं. अगर वह कोई अब्जैक्शन नहीं कर रही तो वहीं लेटेलेटे अपनी एक टांग उस के ऊपर रखें. एक हाथ उस के स्तनों पर रखें. धीरे से सहलाएं. अगर उसे आनंद मिल रहा हो तो उस के ऊपर आ कर उस के होंठों पर किस करें. किस धीरेधीरे करें.

उस की स्तनों के ऊपरी हिस्से में हलका किस करें. बदले में वह आंखें बंद कर ले तो समझ लें वह रैडी है. अब आप उसे उलटा घुमाएं और उस की ब्रा के हुक खोल दें और साइड में रख दें. फिर उस को सीधा करें. प्यार से उस के निपल के ब्राउन हिस्से को जीभ से टच करें और फिर 2 किस उस के पेट पर करते हुए उस की पैंटी उतार दें.

उस के बाद उस के पैरों के पास लेट कर उस की वैजाइना पर किस करें और आप के दोनों हाथ उस की दोनों स्तनों पर होने चाहिए. प्यार से स्तनों पर हाथ फेरें और वैज्ञाइना पर किस करते रहें.

चुंबन का महत्त्व

वैजाइना पर किस करते हुए बीचबीच में वैजाइना के पिंक हिस्से में उंगली से टच करते रहें. उंगली से टच करने पर उसे भी ऐक्साइटमैंट आएगा और आप को पता चलेगा कि उसे लूब्रिकेशन स्टार्ट हुआ या नहीं क्योंकि जब औरत ऐक्साइट होती है तो वैज्ञाइना गीली होनी शुरू हो जाती है. स्तनों का साइज भी बड़ा होने लगता है और निपल्स टाइट हो जाते हैं. जब गीलापन महसूस हो तो आप अच्छी तरह उस के प्राइवेट पार्ट के अंदर भी 2-4 किस करें.

उस के बाद स्तनों पर 20-25 किस करें. किस करतेकरते उस के प्राइवेट पार्ट को हथेली से मसलते रहें. अब वह सैक्सुअल इंटरकोर्स के लिए तैयार है. इंटरकोर्स से पहले आप अपने पेनिस को एक बार उस की दोनों स्तनों यानी बूब्स के बीच में ले जा कर उस की ब्रैस्ट सहलाएं और अपनी पार्टनर को अपने पेनिस पर किस करने को कहें.

महिला साथी हो जाएगी संतुष्ट

अब पेनेट्रेशन कीजिए. पेनिस अंदर डालने के बाद आप उस के स्तनों को किस करते रहें और अपने दिमाग को कहीं और लगाएं ताकि आप कम से कम 10 मिनट तक और सैक्स कर सकें.

आप देखेंगे कि आप की पार्टनर 2 मिनट में ही और्गेज्म अचीव कर लेगी. अब आप आराम से कीजिए. आप की महिला पार्टनर अगर आप से पहले सैटिस्फाई हो जाती है तो समझ लीजिए आप सक्सैसफुल पार्टनर हैं क्योंकि जिस सैक्सुअल इंटरकोर्स में औरत पहले और्गेज्म पर नहीं पहुंचती वह सैक्स फेल्ड परफौर्मैंस में आता है.

दुर्गाजी : बलदेव पर कौन सा दुखों का पहाड़ टूटा

शादी के 7-8 साल बाद रमिया के पैर भारी हुए थे. बलदेव ने तो आस ही छोड़ दी थी, मगर अब उस के कदम जमीन पर नहीं पड़ते थे.

दोनों पतिपत्नी मजदूरी करते थे. काम मिल जाता तो ठीक, नहीं तो कई बार फाका करने की नौबत आ जाती. मगर थे तो इनसान ही, उन के अंदर भी मांबाप बनने की चाह थी.

ब्याह के सालभर बाद ही बलदेव की अम्मां ने रमिया को ‘बांझ’ कहना शुरू कर दिया था. आतेजाते टोले की औरतें अम्मां से पूछतीं, ‘बलदेव की अम्मां, कोई खुशखबरी है क्या?’

यह बात सुन कर वे कुढ़ जातीं. घर में रोज कलह मचने लगा था. रमिया तो कुछ कहती न थी, चुपचाप सारी कड़वाहट झेल जाती, पर बलदेव उस के हक में मां से लड़ पड़ता.

तब मां उसे गाली देतीं, ‘कमबख्त, मेरी कोख का जना कैसे उस के लिए मुझ से ही लड़ रहा है. करमजली ने मेरे छोरे को मुझ से छीन लिया.’

जब बलदेव और रमिया के सब्र का पैमाना छलकने लगा, तो उन्होंने घर? छोड़ दिया और दूसरे शहर में जा कर मजदूरी करने लगे.

जचगी का समय नजदीक आता जा रहा था. उन की खुशी और चिंता का दिलों में संगम सा हो रहा था. रमिया ने बच्चे के लिए छोटेछोटे कपड़े तैयार कर रखे थे.

‘‘ओ रमिया, मुझे तो बेटी चाहिए, बिलकुल तेरे जैसी,’’ बलदेव अकसर उस से चुहल करता.

रमिया कहती, ‘‘अगर छोरा होगा, तो क्या उसे प्यार न करोगे?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘क्यों?’’ यह सुन कर रमिया रूठ जाती.

बलदेव कहता, ‘‘छोरे कमबख्त किसी की बात नहीं सुनते, दिनभर ऊधम मचाते हैं…’’

‘‘पर तुम भी तो मरद हो?’’

‘‘तभी तो कह रहा हूं कि छोरा नहीं चाहिए.’’

हलकीफुलकी नोकझोंक, प्यार व तकरार के साथ दिन बीत रहे थे. बलदेव अपनी पत्नी का खूब खयाल रखता. अब तो उस ने दारू पर भी रोक सी लगा दी थी और दोगुनी मेहनत करने लगा था.

आधी रात के वक्त रमिया के दर्द शुरू हो गया. बलदेव भाग कर शांति चाची को बुला लाया.

शांति चाची ने पड़ोस की 2 औरतों को साथ ले लिया. अस्पताल के बरामदे में बैठा बलदेव भीतर से आने वाली नन्ही आवाज का इंतजार कर रहा था.

जब सुबह होने को आई, तभी एक दर्दनाक चीख के साथ ही नन्ही सी आवाज सुनाई पड़ी.

डाक्टर ने दरवाजा खोला और शांति चाची को अंदर बुला लिया. 15-20 मिनट तक फुसफुसाहटें आती रहीं, फिर डाक्टर की आवाज आई, ‘‘तुम लोग पागल हो… करो जो मरजी हो.’’

‘‘अरे बलदेव, तेरी तो तकदीर खुल गई रे, तेरे घर में तो देवी मां खुद पधारी हैं. जा, दर्शन कर के आ,’’ शांति चाची बोलीं.

‘‘बेटी हुई है न?’’ बलदेव उतावला हो उठा.

‘‘बेटी नहीं, देवी है, चल जल्दी,’’ शांति चाची उसे खींचते हुए अंदर ले गईं.

बच्ची को देखते ही बलदेव भौचक्का रह गया. बच्ची के 4 हाथ थे, 3 पूरे और एक अधूरा. रमिया बेहोश थी और वह नवजात बच्ची टुकुरटुकुर उसे देख रही थी.

बलदेव ने सोचा कि नवरात्र के दिनों में दुर्गा मां उसे दर्शन देने खुद पधारी हैं. उस की हिम्मत न हुई कि बच्ची को गोद में उठाए. वह हैरानी से बस एकटक उसे देखे जा रहा था.

बचपन में कई बार उस ने सुना था कि किसी गांव में किसी के घर दुर्गाजी ने जन्म लिया, बाद में उन के नाम का मंदिर भी बना दिया गया.

खुद बलदेव अपनी तकदीर पर गर्व कर रहा था कि ‘मां’ ने उसे इस काबिल समझ. रमिया की कोख धन्य हो गई.

शांति चाची बोलीं, ‘‘डाक्टर कह रहा था कि बच्ची ठीक है, आपरेशन कर के फालतू हाथ हटा देंगे, पता तक न चलेगा. पर मैं ने कह दिया, यह देवी है, इसे हाथ भी न लगाना.’’

सुबह हो ही चुकी थी. थोड़ी देर में दूरदराज के गांवों तक में यह खबर फैल गई कि बलदेव के घर ‘मैया’ ने जन्म लिया है.

डाक्टरों ने रमिया को घर भेज दिया, घर में रमिया को तो कमरे में लिटा दिया गया. लोग आते, बच्ची के दर्शन करते, चढ़ावा चढ़ाते और मैया का गुणगान करते हुए चले जाते.

यह देख कर बच्ची लगातार रोए जा रही थी. इस से सब को लगा कि मैया नाराज हैं, इसलिए ढोलक, मंजीरे के साथ कीर्तन शुरू हो गया. मैया को खुश करने की कोशिश की जाने लगी.

कुछ देर बाद बच्ची शांत हो गई. तब तक दोपहर हो चुकी थी. देखभाल न होने के कारण बच्ची मर गई थी. मां के दूध के तो उसे दर्शन भी न हुए थे.

बच्ची के मरने के बाद कहा जाने लगा, ‘मां का काम पूरा हुआ, इसलिए वे चली गईं.’

एक बुजुर्ग ने नसीहत दी, ‘‘देख बलदेव, मैया के नाम पर पीपल के नीचे पत्थर रख देना या यहीं घर के बाहर उन की समाधि बनवा देना.’’

बलदेव एक मुद्दत के बाद पिता बना, लेकिन फिर से बेऔलाद हो गया. बच्ची के अंतिम संस्कार के बाद जब वह घर लौटा तो देखा कि रमिया फूटफूट कर रो रही है. उसे तो यही दुख था कि वह अपनी बच्ची को सीने से भी न लगा पाई, उसे दूध तक न पिला पाई, मां बनने का सुख भी न उठा पाई.

कुदरत ने उसे मां बना कर फिर से बांझ बना दिया.

‘‘अरी, रोती क्यों है?’’ बलदेव ने पूछा, तो वह और भी जोर से रोने लगी.

‘‘तुम लोगों ने मेरी बच्ची को मार दिया…’’ कुछ देर बाद शांत होने पर रमिया बोली, ‘‘उसे न दूध मिला, न कपड़ा. मेरी बेटी को उठा कर बाहर डाल दिया. तुम्हीं उस के हत्यारे हो,’’ रमिया चीख पड़ी.

‘‘अरे, वह देवी मैया थीं… देखा नहीं उन के 4 हाथ थे. क्या किसी साधारण बच्चे के 4 हाथ होते हैं? नवरात्र के दिनों में वे हमें दर्शन दे कर चली गईं… हमारी तकदीर खुल गई. तेरी कोख धन्य हो गई,’’ बलदेव खुश होता हुआ बोला, फिर रमिया को रोता छोड़ कर वह चढ़ावे की रकम गिनने लगा.

थोड़ी देर बाद वह बोला, ‘‘रमिया, देख तो कितने रुपए हैं… तू ने पहले कभी न देखे होंगे… पूरे 8 हजार रुपए हैं. एक दिन में इतना चढ़ावा… बाहर एक पत्थर आएगा… हमारे दिन फिर जाएंगे.’’

‘‘क्यों, देवी के नाम पर पैसा बटोरोगे…’’ रमिया सिसकते हुए बोली.

‘‘चुप कर, बड़ेबड़े पंडेपुजारी भी इसी तरह पैसा बटोरते हैं. अगर हम ने ऐसा कर लिया, तो भला कौन सा पाप लगेगा?’’

तभी उस ने रमिया की ओर देखा, वह आंचल में मुंह छिपाए रो रही थी. उसे एक नहीं कई दुख लग गए थे, कोख उजड़ने का, पति के लालच का और उस की बेटी के नाम किए जाने वाले पाप या जुर्म का…

रिश्वत: हैडमास्टर सीमा से क्यों पैसे लेना चाहते थे?

‘‘बाबूजी, आप मिठाई बांटिए,’’ सीमा ने खुश होते हुए कहा.

‘‘क्यों… क्या हुआ बेटी?’’

‘‘मेरी टीचर की नौकरी लगी है… पास के गांव में.’’

‘‘यह तो बहुत खुशी की बात है. आखिरकार मेरी बेटी जिंदगी में कुछ बन ही गई.’’

आज स्कूल का पहला दिन था. सीमा बहुत खुश थी. बाबूजी भी उन के साथ स्कूल में आए थे. पहला दिन तो ठीकठाक ही था. दूसरे दिन सीमा प्रार्थना में खड़ी थी, तभी हैडमास्टरजी मदन उस के पास आए और कहने लगे, ‘‘मैडमजी, बढ़िया नौकरी लगी है, चाय तो पिलाइए स्टाफ को.’’

‘‘जी, मैं ने तो अभी पहली तनख्वाह भी नहीं ली है. बाद में सब को चाय पिलाऊंगी,’’ सीमा ने कहा.

‘‘अरे मैडमजी, एक कप चाय के लिए महीनेभर का इंतजार करवाएंगी क्या?’’

‘‘सरजी, मैं ने कहा न कि पहली तनख्वाह मिलने के बाद चाय पिलाऊंगी. मुझे माफ कर दीजिए.’’

हैडमास्टरजी चले गए. अजीत सर पास में ही खड़े थे.

‘‘मै कुछ कहूं,’’ अजीत सर धीमी आवाज में बोले.

‘‘कहिए.’’

‘‘चाय पिला दीजिए. अगर पैसे नहीं हैं, तो मैं दिए देता हूं. तनख्वाह मिलने के बाद आप लौटा दीजिएगा.’’

‘‘मुझे किसी का उधार नहीं चाहिए.’’

इस के बाद सभी लोग क्लास में चले गए. सीमा की क्लास में 20 छात्र थे. 10 छात्र ठीकठाक पढ़ते थे, बाकी बचे 10 छात्रों को अलग से ज्यादा पढ़ाना पड़ता था.

सीमा जैसे ही स्टाफरूम में जाती थी, किसी न किसी बहाने दूसरे टीचर भी वहां आ जाते थे और उस का मजाक उड़ाते थे.

एक दिन सीमा का दिमाग गरम हो गया और वह बोल पड़ी, ‘‘क्यों एक कप चाय के लिए इतना मरे जा रहे हैं. अब तो मैं पहली तनख्वाह मिलने पर भी चाय नहीं पिलाऊंगी.’’

स्कूल के सारे टीचर और हैडमास्टर सीमा का यह जवाब सुन कर गुस्सा तो हुए, पर कोई भी कुछ नहीं बोला. लेकिन सीमा के इस करारे जवाब से उस के खिलाफ स्कूल में राजनीति शुरू हो गई.

एक दिन स्कूल में बड़े साहब आए. मदनजी फौरन नाश्ता ले कर आए. सीमा को भी बुलाया गया. उस ने एक समोसा खाया. बड़े साहब के स्कूल से जाते ही हैडमास्टरजी उस से 20 रुपए मांगने लगे.

‘‘एक समोसे के 20 रुपए?’’ सीमा ने हैरान हो कर पूछा.

‘‘मैडमजी, बड़े साहब के आने में गाड़ी का पैट्रोल नहीं लगा क्या,’’ राकेशजी बोले.

सीमा ने झट से 20 रुपए उन के मुंह पर फेंके और अपनी क्लास में लौट गई. उस के पीछेपीछे अजीत सर भी क्लास में पहुंच गए.’’

‘‘आप को पैसों की कोई दिक्कत है क्या?’’

‘‘नहीं तो.’’

‘‘तो फिर 20 रुपए के लिए इतना गुस्सा क्यों?’’

‘‘5 रुपए के समोसे के लिए 20 रुपए क्यों?’’

‘‘क्योंकि मदनजी, राकेशजी और प्रदीपजी पैसे नहीं देंगे. उन के पैसे आप से वसूले गए हैं. हैडमास्टरजी और बड़े साहब के पैसे मैं ने दिए हैं.’’

‘‘यह तो नाइंसाफी हुई न.’’

‘‘यहां पर ऐसे ही चलता है. किसी भी सरकारी स्कूल में ऐसे ही होता है. सीनियर लोग जैसा कहते हैं, वैसा ही करना पड़ता है. आप अभी नई हैं.’’

एक हफ्ते बाद औफिस से ट्रेनिंग की चिट्ठी आई. सीमा जानती थी कि उसे ही भेजी जाएगी. दूसरे हफ्ते फिर से ट्रेनिंग की चिट्ठी आई. फिर से उसे ही भेजी गई. कभी कोई मीटिंग हो तो भी उसे जाना पड़ता था. क्लास में 20 छात्र थे, लेकिन तकरीबन 12 छात्र ही रोज आते थे.

सीमा ने बहुत बार उन के घर के चक्कर लगाए. लेकिन जब तक उन्हें बुलाने कोई घर नहीं जाता था, तब तक वे स्कूल में आते नहीं थे. हर दिन उन छात्रों को बुलाना पड़ता था.

एक दिन सीमा के पड़ोस में रहने वाले राजू का पुराना स्कूल बैग उस ने अपने स्कूल की एक छात्रा को दे दिया. वह लड़की स्कूल में बैठती ही नहीं थी. अपनी किताबों वाली थैली क्लास में रख कर वह भाग जाती थी. लेकिन पुराना ही सही स्कूल बैग मिलने के बाद वह स्कूल में रोजाना आने लगी. यह देख कर सीमा को भी अच्छा लगने लगा था.

अब इस स्कूल में सीमा को 3 साल हो चुके थे. राकेशजी, मदनजी, प्रदीपजी और हैडमास्टरजी रोजाना एक न एक टेढ़ी बात तो बोलते ही थे, पर अजीत सर अपने शांत और मजाकिया स्वभाव से उसे शांत कर देते थे. अजीत सर का उस के प्रति प्यार भरा रवैया बाकी स्टाफ को पसंद नहीं आता था.

एक दिन अजीत सर और वे बाकी शैतान औफिस में एकसाथ बैठे थे.

‘‘क्यों भई, क्या मैडमजी से शादी करने का इरादा है?’’ राकेशजी ने पूछा.

‘‘नहीं तो,’’ अजीत सर बोले.

‘‘करना भी मत. मैडमजी हमारी बिरादरी से नहीं हैं और फिर स्कूल में ही लव मैरिज के चक्कर में सस्पैंड हो जाओगे. टीचर लोगों को लव मैरिज करना अलाउड नहीं होता. पता है न भैया,’’ मदनजी बोले.

अजीत सर ने कुछ नहीं कहा, क्योंकि मन ही मन तो वे सीमा से ही शादी के ख्वाब देख रहे थे.

एक दिन बड़े साहब सीमा की क्लास में आए. क्लास में छात्र कम थे.

‘‘20 में से सिर्फ 15 ही छात्र…’’ उन्होंने पूछा.

‘‘जी… रोज तो आते हैं.’’

‘‘आज मैं आया हूं, इसलिए नहीं आए हैं क्या?’’

‘‘जी…’’ जवाब में क्या कहा जाए, सीमा की समझ में नहीं आ रहा था.

‘‘उठो बेटे, तुम्हारा नाम क्या है?’’ बड़े साहब ने एक छात्र से पूछा.

‘‘जी, निखिल.’’

‘‘ब्लैक बोर्ड पर अपने किसी एक दोस्त का नाम लिखो.’’

निखिल ने अपने दोस्त का नाम पीयूष की जगह पिउष लिखा.

‘‘क्या पढ़ाती हैं मैडमजी आप बच्चों को. अच्छा, तुम उठो. तुम्हारा नाम क्या है?’’

‘‘जी, स्नेहल.’’

‘‘सूर्योदय और सूर्यास्त किस दिशा में होता है?’’

‘‘सूर्योदय पूरब दिशा से होता है और सूर्यास्त…’’ स्नेहल ने जवाब नहीं दिया.

बड़े साहब सीमा पर चिल्लाने लगे, ‘‘नोटिस दूं क्या आप को? दूं आप को नोटिस?’’

सीमा नजरें झुका कर खड़ी हो गई. दूर खड़े हैडमास्टरजी मुसकरा रहे थे. बड़े साहब क्लास से निकल गए. सीमा अजीत सर की क्लास में गई.

‘‘मुझे पता है, हैडमास्टरजी जानबूझ कर बड़े साहब को मेरी क्लास में ले कर आए थे. बड़े साहब ने मुझे डांटा तो उन के कलेजे को ठंडक पहुंची होगी.’’

‘‘अगर आप एक कप चाय पिला देतीं तो…’’

‘‘मुझ से ज्यादा तनख्वाह तो ये लोग लेते हैं और सारे काम मुझ से ही कराते हैं. ये किसी और को ट्रेनिंग में क्यों नहीं भेजते, क्योंकि वे सब बड़े साहब को और उन के बीवीबच्चों को महंगेमहंगे तोहफे देते हैं.’’

‘‘अगर आप भी अपनी तरफ से कुछ गिफ्ट दे देतीं तो…’’

सीमा को पता था कि अजीत सर के पास उस का मन शांत नहीं होगा. वह फिर से अपनी क्लास में चली गई. शाम को घर में बरतनों का बहुत शोर हो रहा था.

बाबूजी ने आवाज दी, ‘‘सीमा, क्यों इतना शोर मचा रही हो?’’

‘‘बड़े साहब आए थे स्कूल में. कहते हैं कि नोटिस देंगे,’’ सीमा ने कहा.

‘‘तो देने दो न. सरकारी नौकरी में तो यह रोज की बात होती है,’’ बाबूजी बोले.

‘‘कह रहे थे कि पढ़ाती नहीं हो तो तनख्वाह क्यों लेती हो? मैं तो रोजाना पढ़ाती हूं, बच्चे पढ़ते नहीं तो क्या करूं? रोजाना आने वाले बच्चे भी आज घर रह गए. मैं क्या करूं?’’

‘‘मेरी प्यारी बेटी, इतना उदास मत हो. एक दिन सब अच्छा हो जाएगा,’’ बाबूजी ने भरोसा जताया.

लेकिन बच्चों ने बड़े साहब के सामने जवाब क्यों नहीं दिए? नोटिस दूंगा जैसे शब्द अब भी सीमा के कानों में चुभ रहे थे. साथी टीचरों की मुसकराती शक्लें नजरों से हट नहीं रही थीं.

जो होता है, अच्छे के लिए होता है, यह सोच कर सीमा ने नई शुरुआत की. शायद उस के पढ़ानेलिखाने में ही कुछ कमी है. यह सोच कर सीमा ने नए जोश से पढ़ाना शुरू किया, पर एक दिन उस के ट्रांसफर का और्डर आ गया.

सीमा का आज इस स्कूल में आखिरी दिन था. हैडमास्टरजी बताने लगे, ‘‘आप के ट्रांसफर में मेरा कोई हाथ नहीं है. मैं ने तो बड़े साहब को बताया था कि बच्ची है, जाने दीजिए. लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी.’’

‘‘500 रुपए दे देतीं, तो यह नौबत नहीं आती,’’ मदनजी बोले.

‘‘हमारा बड़ा साहब इतना सस्ता है, वह मुझे पता नहीं था,’’ सीमा ने कहा.

‘‘जाओ अब जंगल में. जानवरों के बीच रहना. रोजाना एक घंटा बस से जाना होगा. उस के आगे 5 किलोमीटर पैदल जाना होगा. रात को घर लौटते वक्त 8 बजेंगे. हमारी बेटी जैसी हो, इसलिए बता रहे हैं. दुनियादारी सीख लो. रिश्वत देना आम बात है,’’ प्रदीपजी बोले.

‘‘आप जैसे इनसानों के साथ रहने से बेहतर है कि मैं जानवरों के साथ रहूं. अगर आप पहले ही दिन मुझे अपनी बेटी मान लेते तो आज हालात ऐसे न होते प्रदीपजी.’’

दफ्तर के बाहर अजीत सर सीमा का इंतजार कर रहे थे.

‘‘कभी कोई परेशानी हो तो फोन जरूर कीजिएगा.’’

‘‘जी जरूर. इस स्कूल में सिर्फ आप ही मुझे याद करेंगे, ऐसा लगता है,’’ कह कर सीमा वहां से चली गई.

दो नावों की सवारी : किसको पड़ी भारी

‘‘जब मैं उसे देखता हूं, तो अपने होश खो बैठता हूं. उस के बिना तो मेरा जीना मुश्किल हो गया है,’’ राकेश ने अपने दोस्त अजय से कहा.

अजय ने चेहरे पर हलकी सी मुसकान लाते हुए कहा, ‘‘यार राकेश, तू तो बड़ा छिपा रुस्तम निकला. तू ने आज तक कभी यह बात नहीं बताई.’’

राकेश बोला, ‘‘प्यार ऐसी चीज है, जिस के बारे में किसी को नहीं बताया जा सकता. तू मेरा बचपन का दोस्त है, इसलिए मैं ने तुझे यह बात बताने की हिम्मत की है.’’

राकेश और अजय एक झोंपड़ी में बैठे हुए ये बातें कर रहे थे, जो राकेश के खेत पर बनी हुई थी. यहीं पर खेतों में सिंचाई करने के लिए एक ट्यूबवैल लगा था.

राकेश ज्यादातर ट्यूबवैल पर ही रहता है. यहीं उस के कुछ दोस्त आ जाते थे, जिन से उस का मन लगा रहता था.

गांव की ज्यादातर औरतें इसी ट्यूबवैल पर पानी भरने आती थीं. क्या करें, उन की भी मजबूरी थी, क्योंकि गांव का पानी खारा था.

गीता भी यहां रोजाना पानी लेने आती थी. राकेश और गीता की प्रेम कहानी इसी ट्यूबवैल से शुरू हुई थी.

राकेश बीए में पढ़ता था. उस के 2 बड़े भाई थे. एक भाई नौकरी करता था और दूसरा भाई खेती संभालता था.

राकेश कालेज से पढ़ कर यहीं  झोंपड़ी में आ जाता था, क्योंकि यहां हरेभरे पेड़ थे और शांत माहौल था.

रोजाना की तरह गीता आज भी पानी भरने आई थी. वह अपना बरतन भरने वाली थी कि बिजली चली गई. वह सोच में पड़ गई कि अब क्या करे.

उधर राकेश पास में ही चारपाई पर बैठा किताबें पढ़ रहा था. अकेली लड़की, आसपास भी कोई नहीं, ऐसे में किसी का भी मन भटक सकता है. ऐसा ही राकेश के साथ भी हुआ. वह गीता को प्यारभरी नजरों से देखने लगा.

राकेश को देख कर गीता के मन में शक पैदा होने लगा और वह घबरा कर इधरउधर देखने लगी.

राकेश गीता से बातें करना चाह रहा था, पर उस की हिम्मत नहीं हो रही थी.

थोड़ी देर बाद राकेश हिम्मत बटोर कर चारपाई से उठा और गीता की तरफ बढ़ा, लेकिन उस के पास पहुंचते ही वह सबकुछ भूल गया.

गीता ने राकेश को देख कर अच्छी तरह पहचान लिया कि वह उस से बात करना चाहता है, पर घबराहट के चलते कुछ कह नहीं पा रहा है.

गीता का डर खत्म हुआ और उस के खूबसूरत चेहरे पर मुसकान आ गई.

गीता की इस मुसकान को देख कर राकेश के दिल में गुदगुदी होने लगी. इसी बीच बिजली आ गई. राकेश ने फौरन मोटर चला दी और गीता पानी भरने लगी.

पानी भर कर गीता गांव की तरफ जाने लगी, तो राकेश उसे तब तक देखता रहा, जब तक वह गांव में नहीं पहुंच गई.

एक दिन राकेश ने ठान लिया कि वह गीता से अपने प्यार का इजहार कर के ही रहेगा. उसी समय गीता रोजाना की तरह पानी भरने आई.

राकेश हिम्मत कर के गीता के पास गया और बोला, ‘‘गीता, मुझे तुम से कुछ कहना है.’’

गीता बोली, ‘‘क्या?’’

राकेश बोला, ‘‘तुम बुरा तो नहीं मानोगी?’’

गीता ने कहा, ‘‘बुरा क्यों मानूंगी?’’

राकेश हिम्मत कर के धीरे से बोला, ‘‘गीता, मैं तुम्हें चाहने लगा हूं. तुम मुझे अच्छी लगने लगी हो.’’

यह सुन कर गीता का चेहरा सुर्ख पड़ गया. यह देख राकेश डर गया.

गीता बिना कुछ बोले पानी का बरतन ले कर चली गई. रास्ते में वह राकेश के बारे में सोचती जा रही थी और बीचबीच में उस के चेहरे पर हलकी मुसकराहट भी आ जाती थी.

इस के बाद राकेश और गीता के बीच रोजाना बातें होती रहीं और दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा.

अजय को पता चला कि राकेश जिस लड़की से प्यार करता है, वह तो उसी की महबूबा है, तो वह उस से जलने लगा.

अजय का गीता से एक साल से इश्क का चक्कर चल रहा था. गीता भी अजय को प्यार करती थी, लेकिन राकेश को इस बारे में कुछ पता नहीं था.

गीता का खिंचाव अजय से हट कर राकेश की तरफ बढ़ने लगा, यह बात अजय को अच्छी नहीं लग रही थी.

एक दिन अजय ने गीता से पूछा, ‘‘तू राकेश से बात क्यों करती है?’’

गीता ने जवाब दिया, ‘‘तुझे क्या मतलब है? मैं किसी से भी बात करूं, मेरी मरजी.’’

यह सुन कर अजय के अंदर मानो ज्वालामुखी फट पड़ा था. वह मन ही मन राकेश से नफरत करने लगा. उस ने सोच लिया, ‘अगर गीता मेरी नहीं हुई, तो मैं किसी की भी नहीं होने दूंगा.’

अजय ने भोला से बात की. भोला एक नंबर का ऐयाश था. उस की कमजोरी लड़की औैर शराब थी.

‘‘भोला, अगर आज तेरी मदद मिले, तो तु  झे हुस्न और शराब दोनों मिल सकते हैं.’’

यह सुन कर भोला पागल भेडि़ए की तरह फड़फड़ाने लगा और बोला, ‘‘जल्दी बोल यार, क्या करना है?’’

अजय ने जैसे ही शराब की बोतल निकाली, भोला के मुंह में पानी आ गया.

अजय बोला, ‘‘आज जितनी पीना चाहे उतनी पी लेना, लेकिन अभी नहीं. काम हो जाने के बाद.’’

भोला अजय के साथ राकेश के ट्यूबवैल पर आ गया.

राकेश वहां चारपाई पर बैठ कर पढ़ाई कर रहा था. अजय और भोला उस के पास आ कर बैठ गए.

राकेश कुछ कहने वाला था कि अजय ने राकेश के गले में रस्सी डाली और उसे खींचने लगा. राकेश ने थोड़ी देर हाथपैर मारे, फिर शांत हो गया.

दोनों ने उसे झोंपड़ी में डाल दिया और झोंपड़ी के पीछे छिप गए. वहां दोनों ने खूब शराब पी.

थोड़ी देर बाद गीता पानी भरने आई. जब राकेश दिखाई नहीं दिया, तो वह   झोंपड़ी के अंदर चली गई. उस ने जैसे ही राकेश की लाश को देखा, तो वह डर के मारे कांपने लगी.

वह कुछ सोचती, उस से पहले ही अजय और भोला ने उसे दबोच लिया.

अजय गीता से बोला, ‘‘आज तेरी वजह से मेरे दोस्त की जान गई है. पहले तू ने मु  झ से प्यार किया और फिर राकेश से. तु  झे यह नहीं पता कि मेरे दिल पर क्या बीत रही थी.

‘‘तुम लड़कियों में यही कमी है. पहले प्यार का ढोंग करती हो, फिर किनारा कर जाती हो. आज तु  झे इस की सजा जरूर मिलेगी.’’

यह कह कर उन दोनों ने गीता को पकड़ लिया और बारीबारी से मुंह काला करने के बाद उसे जाने दिया.

बेचारी गीता अपने दुपट्टे को मुंह में दबाए रोती हुई गांव की तरफ चल दी. साथ ही, वह अपनेआप को कोसती जा रही थी कि आज अगर वह दोतरफा प्यार नहीं करती, तो शायद राकेश की जान और उस की इज्जत नहीं जाती.

प्यार की राह में : क्या पूरा हुआ अंशुला- सुनंदा का प्यार

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