Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

नीरज को पड़ोस में रहने वाले गहरे दोस्त विजय की बहन कोमल से प्यार हो गया तो दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. इस से कोमल के भाई विजय के दिल में इंतकाम की ऐसी आग भड़की कि…

उस दिन तारीख थी पहली जनवरी, 2021. नए साल का पहला दिन होने की वजह से लोग अपनेअपने अंदाज में सेलीब्रेशन में जुटे थे. पानीपत की बधावा राम कालोनी की रहने वाली कोमल वर्मा भी नए साल के सेलीब्रेशन की तैयारी में जुटी थी.

कोमल के सासससुर और जेठजेठानी उस का हाथ बंटा रहे थे. काम करतेकरते कोमल की नजर बारबार मुख्यद्वार की ओर चली जाती थी. वह पति नीरज के आने की बाट जोह रही थीं.

कोमल मन ही मन सोच रही थी, ‘अपनीअपनी ड्यूटी से जेठजी और ससुर घर आ गए, ये (नीरज) ही घर नहीं लौटे. आज तो जल्दी घर आने के लिए कह गए थे. कितने लापरवाह हो गए हैं, न ही काल कर के बताया कहां हैं.’

कोमल ने कई बार नीरज का फोन नंबर डायल किया, लेकिन फोन हर बार स्विच्ड औफ मिला. उस समय रात के करीब साढ़े 9 बज रहे थे. नीरज घर लौटने में कभी इतनी देर नहीं करता था. कोमल परेशान थी.

परेशान कोमल कमरे से निकली और ससुर के कमरे में जा कर उन्हें पूरी बात बताई तो वह भी परेशान हो गए. उन्होंने भी अपने फोन से नीरज के मोबाइल पर काल की तो उस का फोन बंद था.

पिता विकासचंद ने बड़े बेटे जगदीश को उस का पता लगाने के लिए भेजा. जगदीश बाइक ले कर अकेला ही भाई को ढूंढने निकल गया. उस समय रात के करीब 10 बज रहे थे.

वह घर से 500 मीटर दूर गया होगा, तभी भावना चौक मोड़ पर सड़क के बीच खून में डूबे एक युवक को देख जगदीश रुक गया. वह युवक उस का छोटा भाई नीरज था और उस की मौत हो चुकी थी.

पल भर के लिए जगदीश के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. बाइक से नीचे उतर कर वह भाई की लाश से लिपट गया और जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगा. जब थोड़ी देर बाद वह सामान्य हुआ तो फोन कर के पूरी बात पापा को बता दी. जगदीश के मुंह से नीरज की मौत की बात सुन कर पिता के हाथ से मोबाइल गिरतेगिरते बचा.

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बदहवास विकासचंद के मुंह से एक ही शब्द निकला,  ‘हाय! मेरे साथ इतना बड़ा अनर्थ क्यों हो गया?’ वह सिर पर हाथ रख फफकफफक कर रोने लगे.

अचानक विकासचंद को रोता देख घर वाले घबरा गए. आखिर ऐसा क्या हुआ जो वह दहाड़ मार कर रोने लगे. कोमल ने फोन उठा कर देखा तो पता चला काल उस के जेठ जगदीश ने की थी. कोमल ने जेठ को फोन मिला कर पूछा कि आप ने पापाजी से ऐसा क्या कह दिया तो उस ने कोमल को सब बता दिया.

जेठ की बात सुन कर कोमल जैसे काठ हो गई. उस के हाथ से फोन छूट कर फर्श पर जा गिरा. वह बदहवास हो कर गिर पड़ी और बेहोश हो गई. थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो दहाड़ मारमार कर रोने लगी.

जवान बेटे की मौत की खबर सुन कर विकासचंद इतना साहस नहीं जुटा पाए कि बेटे की लाश तक जा सकें. घर में कोहराम मच गया था. अचानक रोनेचिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी जुट गए.

जब उन्होंने नीरज की हत्या की बात सुनी तो वे भी दंग रह गए. पड़ोसी घटनास्थल पर पहुंच गए, जहां जगदीश भाई की लाश के पास बैठा रो रहा था.

पड़ोसियों ने घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी. घटना बधावा राम कालोनी के पास घटी थी. यह इलाका सिटी थाने में आता था. इसलिए कंट्रोलरूम ने घटना की सूचना वायरलैस के जरिए सिटी थाने को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी योगेश कटारिया अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. रात होने के बावजूद वहां काफी लोग जुट गए थे. थानाप्रभारी कटारिया ने लाश का निरीक्षण किया. हत्यारों ने नीरज के सीने और पेट में ताबड़तोड़ चाकू घोंप कर बड़ी बेरहमी से उस का कत्ल किया था.

जब थानाप्रभारी ने जगदीश से नीरज की किसी से दुश्मनी की बात पूछी तो वह चीखता हुआ बोला, ‘‘मेरे भाई को उन के सालों ने ही मार डाला. हमें जिस बात का डर था आखिरकार वहीं हुआ. भाई की सुरक्षा के लिए थाने में कई बार एप्लीकेशन भी दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अगर काररवाई हुई होती तो आज मेरा भाई जिंदा होता.’’ कह कर जगदीश रोने लगा.

बहरहाल, थानाप्रभारी योगेश कटारिया ने जगदीश की पूरी बात सुनी. उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त काररवाई का आश्वासन दिया और इस की सूचना डीएसपी वीरेंद्र सैनी, एसपी और एसएसपी को दे दी.

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सूचना मिलने के बाद आला अफसर मौके पर पहुंच गए. इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी कटारिया ने फटाफट लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी.

उस के बाद नीरज के भाई जगदीश की तहरीर पर पुलिस ने मृतक के साले विजय उर्फ छोटा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी. पुलिस को सारी काररवाई करतेकरते रात के 2 बज गए थे.

नए साल के पहले दिन ने ही विकासचंद वर्मा की खुशियों में ग्रहण लगा दिया था. कुछ क्षण पहले तक जहां घर वालों की खिलखिलाहट से घर गुलजार था, वहां पल भर में मातम छा गया था.

नीरज की मौत के गम में सब का बुरा हाल था. कोमल की आंखें रोरो कर सूज गई थीं. दोनों ने डेढ़ साल पहले ही लव मैरिज की थी. जिस दिन कोमल के साथ नीरज की शादी हुई थी, उसी दिन उस के भाई विजय ने नीरज को शहर छोड़ देने की धमकी दी थी. ऐसा न करने पर उस बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी.

खैर, मुकदमा दर्ज कर के पुलिस नीरज के कातिलों की सुरागरसी में जुट गई. घटनास्थल से थोड़ी दूर एक गली में एक घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगाला. फुटेज में मुंह ढंके 2 युवक तेजी से घटनास्थल से गली की ओर भागते दिख रहे थे.

उस फुटेज में भाग रहे युवकों की जब पुलिस ने जगदीश से शिनाख्त कराई तो वह पहचान गया. उन दोनों युवकों में से एक विजय उर्फ छोटा था, जबकि दूसरा उस का ममेरा भाई पवन था. दोनों ही विजय नगर के रहने वाले थे.

3 जनवरी, 2021 की सुबहसुबह सीआईए-2 सतीश कुमार वत्स के नेतृत्व में सिटी थाने की पुलिस ने विजय नगर में पवन और विजय के घर पर दबिश दे कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें थाने ले आई.

थाने ला कर पुलिस ने दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की तो विजय ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया, ‘‘वह और नीरज पड़ोसी थे. दोनों ही पचरंगा बाजार में हैंडलूम पर काम करते थे. नीरज ने विश्वासघात कर मेरी बहन कोमल से प्रेम विवाह कर लिया था.

‘‘कहता था उस का जीजा लगता है. यह बात कांटे की तरह मेरे सीने में चुभती थी. मैं ने उसे शहर छोड़ने के लिए कहा था लेकिन दोनों ने शहर नहीं छोड़ा. इस से समाज और दोस्तों में हमारी बदनामी हो रही थी, इसलिए मैं ने यह कदम उठाया और उसे मार डाला. मुझे इस का कोई मलाल नहीं है.’’

विस्तार से पूछने के बाद इस हत्याकांड की पूरी कहानी इस तरह सामने आई—

23 वर्षीय नीरज वर्मा मूलरूप से पानीपत के सिटी थाने के बधावा राम नगर मोहल्ले में परिवार के साथ रहता था. नीरज विकासचंद का दूसरे नंबर का बेटा था. नीरज से बड़ा जगदीश और उस से छोटी एक बेटी थी.  दोनों बेटे अपनी काबिलियत के बल पर अपने पैरों पर खड़े थे. विकासचंद को अपने दोनों बेटों पर बहुत नाज था. उन की एक आवाज पर दोनों बेटे तैयार खड़े रहते थे.

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शिवाकांत विकासचंद के पड़ोसी थे. दोनों पड़ोसियों में गहरी छनती थी. दोनों परिवारों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना था. दोनों ही परिवार एकदूसरे के सुखदुख में एकदूसरे की मदद करते थे. लगता ही नहीं था कि 2 अलगअलग परिवार हैं.

अगले भाग में पढ़ें- कोमल घर से अचानक गायब हो गई

Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

शिवाकांत एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे. उन के परिवार में कुल 5 सदस्य थे. पतिपत्नी और 3 बच्चे. 2 बेटे और एक बेटी. बेटों में सब से बड़ा विजय था. फिर बेटी कोमल, उस से छोटा एक और बेटा.

शिवाकांत का बड़ा बेटा विजय और विकासचंद का मझला बेटा नीरज दोनों हमउम्र थे. एकदूसरे के घर आतेजाते दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी. उठनाबैठना, खेलनाकूदना और पढ़नालिखना सब साथसाथ होता था. दोनों परिवार एकदूसरे के बच्चों पर, उन की दोस्ती पर फख्र करते थे.

आहिस्ताआहिस्ता कोमल बचपन को पीछे छोड़ जवानी की दहलीज पर आ खड़ी हुई थी. कोमल के दमकते चेहरे और महकते बदन की खुशबू से नीरज पिघल गया था.

रेशमी जुल्फों वाली खूबसूरत कोमल की मोहिनी सूरत उस के दिल में घर कर गई थी. कोमल भी छिपछिप कर नीरज को प्रेमिल नजरों से देखती थी.

कोमल नीरज को दिल की गहराई से प्यार करने लगी थी. प्यार की आग दोनों दिलों में सुलग रही थी. बस, थोड़ी सी हवा मिलने की जरूरत थी ताकि दोनों अपने प्यार का इजहार कर सकें.

एक दिन मौका देख कर दोनों ने अपने दिलों का हाल एकदूसरे के सामने बयान कर दिया. उस दिन के बाद से दोनों की दुनिया ही बदल गई. आलम यह हो गया था कि एकदूसरे को देखे बिना पल भर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. किसी न किसी बहाने दोनों मिल ही लेते थे.

नीरज और कोमल दोनों की मोहब्बत जवां हो रही थी. प्रेम के रथ पर सवार दोनों भविष्य की कल्पनाओं में रमे हुए थे. एक दिन दोपहर का वक्त था. नीरज कोमल के भाई विजय से मिलने उस के घर आया.

इत्तफाक से उस समय घर पर न तो विजय था और न ही उस के पापा. घर पर कोमल की मां और कोमल थी. नीरज को देख कर कोमल का चेहरा खिल उठा तो नीरज के होंठों पर भी मुसकान उतर आई.

नीरज ने कोमल से विजय के बारे में पूछा तो उस ने जवाब दिया ‘नहीं हैं’. यह सुन कर नीरज को बड़ी तसल्ली हुई कि आज वह कोमल से दिल खोल कर प्यारभरी बातें करेगा. कोमल की मां ने बेटी और नीरज को बात करते देखा तो वहां से उठ कर घर के कामों में जुट गई.

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वह जानती थी कि दोनों भले ही जवान हो गए हैं लेकिन उन के बीच के रिश्ते एकदम पाकसाफ हैं. उन्हें क्या पता था कि उन की बेटी उन की पीठ पीछे नीरज संग इश्क लड़ा रही है.

कोमल ने कमरे का दरवाजा भिड़ा दिया. कमरे में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था. कोमल की गोरी कलाइयों को नीरज अपने हाथों में लिए उस की आंखों में आंखें डाले उसे एकटक देख रहा था. तभी कोमल बोली, ‘‘ऐसे क्या देख रहे हो?’’

‘‘एकदम चुप रहो, कुछ मत कहो, इन झील सी आंखों में आज उतर जाने दो मुझे.’’ नीरज ने जवाब दिया.

‘‘ऐसे ही देखना है तो मुझ से शादी क्यों नहीं कर लेते?’’ वह बोली.

‘‘वह भी कर लूंगा. थोड़ा और सब्र करो.’’ नीरज ने कहा.

‘‘सब्र ही तो नहीं होता मुझ से अब. तुम्हारी दूरियां मुझ से बरदाश्त नहीं होतीं. रात को बिस्तर पर जाती हूं तो तुम्हारी यादें मुझे सोने नहीं देतीं, नश्तर बन कर दिल में चुभती हैं.’’

‘‘कुछ ऐसा ही मेरा भी हाल है लेकिन मैं चाहता हूं तुम्हें तुम्हारे घर से विदा करा कर ले जाऊं.’’

‘‘तब तो तुम्हारे सपने धरे के धरे रह जाएंगे.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘तुम तो जानते हो हमारे घर वाले इस रिश्ते के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे.’’ कोमल बोली.

‘‘क्यों राजी नहीं होंगे? आखिर क्या कमी है मुझ में?’’ नीरज की बात सुन कर कोमल उदास हो गई.

‘‘ऐसे भी नादान नहीं हो तुम. क्या तुम नहीं जानते कि हमारे घर वाले जातपात को ले कर कितने संजीदा हैं. हम दोनों की जाति अलग हैं. पापा और भैया इस रिश्ते के लिए कभी तैयार नहीं होंगे.’’

‘‘मैं तुम से वादा करता हूं कोमल कि मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी बना कर रहूंगा. हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता. यह मेरा तुम से वादा है.’’

इस के बाद दोनों घंटों प्यारभरी बातें करते रहे. फिर नीरज कोमल से साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा कर अपने घर वापस लौट आया, कोमल भी अपनी मां के पास दूसरे कमरे में चली आई. उस समय वह बहुत खुश थी.

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धीरेधीरे नीरज और कोमल के प्यार के चर्चे पूरी कालोनी में फैल गए. यह बात कोमल के भाई विजय तक पहुंची तो वह नीरज पर भड़क उठा.

उसे नीरज से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी कि वह दोस्ती की आड़ में विश्वासघात करेगा. उस दिन से विजय ने नीरज पर नजरें गड़ा दीं कि वह कब उस के घर आता है, कब बहन से मिलता है. वह उसे रंगेहाथ पकड़ना चाहता था.

विजय के रवैए से नीरज को लगा कि विजय उस के प्यार के बारे में जान चुका है. यह बात नीरज ने कोमल को बताई और उसे सावधान भी कर दिया. उस दिन के बाद से कोमल और नीरज दोनों सब की नजरों से बच कर मिलने लगे.

विजय के साथसाथ उस के मांबाप को भी दोनों पर शक हो गया था. शिवाकांत ने सोचा कि इस से पहले कि कोई ऊंचनीच हो जाए, उन्हें ठोस कदम उठाना होगा.

चूंकि विजय और नीरज दोनों के परिवार पड़ोसी थे और उन में संबंध भी गहरे थे. लेकिन नीरज के कारण उन के रिश्तों में खटास आ गई थी. नीरज के पिता विकासचंद बेटे की करतूत से शर्मसार थे. नीरज और कोमल के प्यार के रिश्ते ने दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी की दीवार खड़ी कर दी थी.

विजय के पिता शिवाकांत सुलझे हुए सिद्धांतवादी इंसान थे. समझदारी का परिचय देते हुए उन्होंने वहां से हटना ही मुनासिब समझा. उन्होंने वहां का मकान छोड़ दिया और परिवार सहित विजय नगर में आ कर रहने लगे. विजय भी यही चाहता था कि नीरज की परछाईं कोमल पर न पड़े.

पिता के फैसले से विजय बहुत खुश था. खुश इसलिए कि अब वह नीरज से खुल कर इंतकाम ले सकता था. क्योंकि नीरज की वजह से उस के परिवार की मोहल्ले में बदनामी हुई थी. बात घटना से 3 महीने पहले की है. कोमल घर से अचानक गायब हो गई. विजय को पूरा शक था कि कोमल को नीरज ही भगा ले गया है.

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अगले भाग में पढ़ें- नीरज ने कोमल से कोर्टमैरिज कर ली

Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

विजय नीरज की तलाश में जुटा तो नीरज अपने घर पर ही मिल गया लेकिन कोमल वहां नहीं मिली. इस पर उस ने नीरज से पूछा कि उस की बहन को कहां छिपा कर रखा है, बता दे नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा होगा. नीरज ने उस से साफ शब्दों में कह दिया कि न तो वह कोमल के बारे में जानता है और न ही उसे कहीं छिपाया है. उस से जो बन पड़े, कर ले. वह गीदड़भभकियों से डरने वाला नहीं है. उस के बाद विजय वहां से वापस घर लौट आया.

नीरज ने विजय से झूठ बोला था. जबकि उस ने कोमल को अपने घर में ही छिपा कर रखा था. उस के घर वालों को पता था कि कोमल और नीरज एकदूसरे से प्रेम करते हैं. उन्होंने नीरज को समझाया भी था कि वह जिद छोड़ दे. लेकिन नीरज ने मांबाप की बातों को दरकिनार करते हुए कह दिया कि वह कोमल से प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा. आखिरकार मांबाप को बेटे के सामने झुकना पड़ा.

घर वाले जानते थे कि कोमल को ज्यादा दिनों तक छिपा कर नहीं रख सकते. एक न एक दिन भेद खुल ही जाएगा. तब मामला बिगड़ सकता है.

कोमल की सुरक्षा को देखते हुए विकासचंद ने उसे हिसार में अपने एक परिचित के घर भेज दिया. इधर विजय कोमल को ढूंढता रहा, लेकिन कोमल का कहीं पता नहीं चला. इसी तरह डेढ़ महीना बीत गया.

समाज में बदमानी के डर से उस ने जानबूझ कर कोमल के गायब होने का मुकदमा दर्ज नहीं कराया था. वह जानता था कि अगर मामला पुलिस में चला गया तो इज्जत की धज्जियां उड़ जाएंगी. इसलिए उस के घर वाले अपने हिसाब से उस की तलाश करते रहे.

आखिरकार नीरज ने कोमल से कोर्टमैरिज कर ली. डेढ़ महीने बाद नवंबर, 2020 के आखिरी हफ्ते में विजय को कहीं से भनक लगी कि कोमल नीरज के साथ उस के घर में ही रह रही है. दोनों ने चंद दिनों पहले कोर्टमैरिज भी कर ली है.

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खबर सौ फीसदी सच थी. नीरज और कोमल कोर्टमैरिज कर चुके थे और पतिपत्नी के रूप में रह रहे थे. विजय को यह बात बरदाश्त नहीं हुई. उस ने नीरज और कोमल दोनों को रास्ते से हटाने की योजना बना ली.

अपनी योजना में विजय उर्फ छोटा ने अपने ममेरे भाई पवन को भी शामिल कर लिया. पवन अपने परिवार के साथ जावा कालोनी में रहता था.

पवन अपराधी प्रवृत्ति का था. उस के खिलाफ पानीपत के कई थानों में गंभीर अपराध के मुकदमे दर्ज थे. पुलिस के लिए वह वांछित था.

बेटी के घर छोड़ कर जाने से मांबाप दुखी थे. उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. उन का तर्क था कि जब बेटी ने ही उन की पगड़ी की लाज नहीं रखी तो वह उस के लिए चिंता क्यों करें. लेकिन विजय अपनी जिद पर

अड़ा था कि कोमल और नीरज ने जो भी किया है वह माफ करने लायक नहीं है. पहले वह नीरज को रास्ते से हटाएगा फिर कोमल को उस के किए की सजा देगा.

योजना बनाने के बाद विजय ने अपना काम छोड़ दिया और नीरज की निगरानी में जुट गया कि वह घर से कब निकलता है, कहांकहां जाता है, रात में नौकरी से घर कब लौटता है. डेढ़

महीने तक विजय और पवन ने नीरज की रेकी की. जब वे पूरी तरह आश्वस्त हो गए तो नए साल के पहले दिन नीरज की हत्या की योजना बनाई ताकि विकासचंद के घर की खुशियां मातम में बदल जाएं. पहली जनवरी, 2021 की रात विजय और पवन बधावा राम कालोनी की उस गली में घात लगा कर बैठ गए, जिस से नीरज अपनी बाइक से आताजाता था.

नीरज जैसे ही कालोनी के मोड़ पर पहुंचा विजय और पवन उस की बाइक के सामने आ खड़े हुए. अचानक दोनों ने धक्का दिया तो नीरज बाइक सहित नीचे गिर गया.

दोनों उस पर टूट पड़े और चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार कर उस की हत्या कर दी. फिर भावना चौक गली के रास्ते भाग निकले. ज्यादा खून बहने से कुछ ही पलों में नीरज की मौत हो गई.

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विजय और पवन दोनों भाग कर राजाखेड़ी गांव की तरफ एक खेत में जा कर छिप गए. फिर दोनों ने शराब पी और नीरज की मौत का जश्न मनाया. नीरज की वजह से उन की बदनामी हो रही थी.

बदनामी का एक विकेट गिर गया था. अब कोमल को मौत के घाट उतारने की बारी थी, जिस के चलते परिवार ने खून के आंसू रोए थे.

इस से पहले कि दोनों अपने इस खतरनाक मकसद में कामयाब हो पाते, थानाप्रभारी योगेश कटियार ने 3 जनवरी, 2021 को सेक्टर-24 के एमजेआर स्कूल के पास से दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल लिया और हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद करा दिया. विजय को नीरज की मौत का कोई अफसोस नहीं था. अफसोस इस बात का था कि कोमल जिंदा बच गई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

समझौता: क्या देवर की शादी में गई शिखा

Serial Story- समझौता: भाग 2

भाईभाई में, भाईबहनों में कहासुनी कहां नहीं होती. लेकिन इस का मतलब यह तो नहीं होता कि संबंध समाप्त कर लिए जाएं. मेरे साथ यही हुआ, जानेअनजाने मैं पंकज से ही नहीं, अपने  परिवार के अन्य सदस्यों से भी दूर होता चला गया.

सही माने में देखा जाए तो संपन्नता व कामयाबी के जिस शिखर पर बैठ कर मैं व मेरी पत्नी गर्व महसूस कर रहे थे, उस की जमीन मेरे लिए पंकज ने ही तैयार की थी. उस के पूर्ण सहयोग व प्रोत्साहन के बिना अपनी पत्नी के साथ मैं इस अजनबी शहर में आने व अल्प पूंजी से नए सिरे से व्यवसाय शुरू करने की बात सोच भी नहीं सकता था. उस का आभार मानने के बदले मैं ने उस रिश्ते को दफन कर दिया. मेरी उन्नति में मेरी ससुराल वालों का 1 प्रतिशत भी योगदान नहीं था, किंतु धीरेधीरे वही मेरे नजदीक होते गए. दोष शिखा का नहीं, मेरा था. मैं ही अपने निकटतम रिश्तों के प्रति ईमानदार नहीं रहा. जब मैं ने ही उन के प्रति उपेक्षा का भाव अपनाया तो मेरी पत्नी शिखा भला उन रिश्तों की कद्र क्यों करती?

समाज में साथ रहने वाले मित्र, पड़ोसी, परिचित सब हमारे हिसाब से नहीं चलते. हम में मतभेद भी होते हैं. एकदूसरे से नाखुश भी होते हैं, आगेपीछे एकदूसरे की आलोचना भी करते हैं, लेकिन फिर भी संबंधों का निर्वाह करते हैं. उन के दुखसुख में शामिल होते हैं. फिर अपनों के प्रति हम इतने कठोर क्यों हो जाते हैं? उन की जराजरा सी त्रुटियों को बढ़ाचढ़ा कर क्यों देखते हैं? कुछ बातों को नजरअंदाज क्यों नहीं कर पाते? तिल का ताड़ क्यों बना देते हैं?

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मैं सोचने लगा, पंकज मेरा सगा भाई है. यदि जानेअनजाने उस ने कुछ गलत किया या कहा भी है तो आपस में मिलबैठ कर मतभेद मिटाने का प्रयास भी तो कर सकते थे. गलतफहमियों को दूर करने के बदले हम रिश्तों को समाप्त करने के लिए कमर कस लें, यह तो समझदारी नहीं है. असलियत तो यह है कि कुछ शातिर लोगों ने दोस्ती का ढोंग रचाते हुए हमें एकदूसरे के विरुद्ध भड़काया, हमारे बीच की खाई को गहरा किया. हमारी नासमझी की वजह से वे अपनी कोशिश में कामयाब भी रहे, क्योंकि हम ने अपनों की तुलना में गैरों पर विश्वास किया.

मैं ने निर्णय कर लिया कि अपने फैसले मैं खुद लूंगा. पंकज की शादी में शिखा जाए या न जाए, किंतु मैं समय पर पहुंच कर भाई का फर्ज निभाऊंगा. उस की सगाई में भी शिखा की वजह से ही मैं तब पहुंचा, जब प्रोग्राम समाप्त हो चुका था.

सगाई वाले दिन मैं जल्दी ही दुकान बंद कर के घर आ गया था, लेकिन शिखा ने कलह शुरू कर दिया था. वह पंकज के प्रति शिकायतों का पुराना पुलिंदा खोल कर बैठ गई थी. उस ने मेरा मूड इतना खराब कर दिया था कि जाने का उत्साह ही ठंडा पड़ गया. मैं बिस्तर पर पड़ापड़ा सो गया था. जब नींद खुली तो रात के 10 बज रहे थे. मन अंदर से कहीं कचोट रहा था कि तेरे सगे भाई की सगाई है और तू यहां घर में पड़ा है. फिर मैं बिना कुछ विचार किए, देर से ही सही, पंकज के घर चला गया था.

मानव का स्वभाव है कि अपनी गलती न मान कर दोष दूसरे के सिर पर मढ़ देता है, जैसे कि वह दोष मैं ने शिखा के सिर पर मढ़ दिया. ठीक है, शिखा ने मुझे रोकने का प्रयास अवश्य किया था किंतु मेरे पैरों में बेड़ी तो नहीं डाली थी. दोषी मैं ही था. वह तो दूसरे घर से आई थी. नए रिश्तों में एकदम से लगाव नहीं होता. मुझे ही कड़ी बन कर उस को अपने परिवार से जोड़ना चाहिए था, जैसे उस ने मुझे अपने परिवार से जोड़ लिया था.

शिखा की सिसकियों की आवाज से मेरा ध्यान भंग हुआ. वह  बाहर वाले कमरे में थी. उसे मालूम नहीं था कि मैं नहा कर बाहर आ चुका हूं और फोन की पैरलेल लाइन पर मां व उस की पूरी बातें सुन चुका हूं. मैं सहजता से बाहर गया और उस से पूछा, ‘‘शिखा, रो क्यों रही हो?’’

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‘‘मुझे रुलाने का ठेका तो तुम्हारे घर वालों ने ले रखा है. अभी आप की मां का फोन आया था. आप को तो पता है न, मेरी भाभी ने आत्महत्या की थी. आप की मां ने आरोप लगाया है कि भाभी की हत्या की साजिश में मैं भी शामिल थी,’’ कह कर वह जोर से रोने लगी.

‘‘बस, यही आरोप लगाने के लिए उन्होंने फोन किया था?’’

‘‘उन के हिसाब से मैं ने रिश्तों को तोड़ा है. फिर भी वे चाहती हैं कि मैं पंकज की शादी में जाऊं. मैं इस शादी में हरगिज नहीं जाऊंगी, यह मेरा अंतिम फैसला है. तुम्हें भी वहां नहीं जाना चाहिए.’’

‘‘सुनो, हम दोनों अपनाअपना फैसला करने के लिए स्वतंत्र हैं. मैं चाहते हुए भी तुम्हें पंकज के यहां चलने के लिए बाध्य नहीं करना चाहता. किंतु अपना निर्णय लेने के लिए मैं स्वतंत्र हूं. मुझे तुम्हारी सलाह नहीं चाहिए.’’

‘‘तो तुम जाओगे? पंकज तुम्हारे व मेरे लिए जगहजगह इतना जहर उगलता फिरता है, फिर भी जाओगे?’’

Serial Story- समझौता: भाग 3

‘‘उस ने कभी मुझ से या मेरे सामने ऐसा नहीं कहा. लोगों के कहने पर हमें पूरी तरह विश्वास नहीं करना चाहिए. लोगों के कहने की परवा मैं ने की होती तो तुम को कभी भी वह प्यार न दे पाता, जो मैं ने तुम्हें दिया है. अभी तुम मांजी द्वारा आरोप लगाए जाने की बात कर रही थीं. पर वह उन्होंने नहीं लगाया. लोगों ने उन्हें ऐसा बताया होगा. आज तक मैं ने भी इस बारे में तुम से कुछ पूछा या कहा नहीं. आज कह रहा हूं… तुम्हारे ही कुछ परिचितों व रिश्तेदारों ने मुझ से भी कहा कि शिखा बहुत तेजमिजाज लड़की है. अपनी भाभी को इस ने कभी चैन से नहीं जीने दिया. इस के जुल्मों से परेशान हो कर भाभी की मौत हुई थी. पता नहीं वह हत्या थी या आत्महत्या…लेकिन मैं ने उन लोगों की परवा नहीं की…’’

‘‘पर तुम ने उन की बातों पर विश्वास कर लिया? क्या तुम भी मुझे अपराधी समझते हो?’’

‘‘मैं तुम्हें अपराधी नहीं समझता. न ही मैं ने उन लोगों की बातों पर विश्वास किया था. अगर विश्वास किया होता तो तुम से शादी न करता. तुम से बस एक सवाल करना चाहता हूं, लोग जब किसी के बारे में कुछ कहते हैं तो क्या हमें उस बात पर विश्वास कर लेना चाहिए.’’

‘‘मैं तो बस इतना जानती हूं कि वह सब झूठ है. हम से जलने वालों ने यह अफवाह फैलाई थी. इसी वजह से मेरी शादी में कई बार रुकावटें आईं.’’

‘‘मैं ने भी उसे सच नहीं माना, बस तुम्हें यह एहसास कराना चाहता हूं कि जैसे ये सब बातें झूठी हैं, वैसे ही पंकज के खिलाफ हमें भड़काने वालों की बातें भी झूठी हो सकती हैं. उन्हें हम सत्य क्यों मान रहे हैं?’’

‘‘लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे बातें झूठी हैं. खैर, लोगों ने सच कहा हो या झूठ, मैं तो नहीं जाऊंगी. एक बार भी उन्होंने मुझ से शादी में आने को नहीं कहा.’’

‘‘कैसे कहता, सगाई पर आने के लिए तुम से कितना आग्रह कर के गया था. यहां तक कि उस ने तुम से माफी भी मांगी थी. फिर भी तुम नहीं गईं. इतना घमंड अच्छा नहीं. उस की जगह मैं होता तो दोबारा बुलाने न आता.’’

‘‘सब नाटक था, लेकिन आज अचानक तुम्हें हो क्या गया है? आज तो पंकज की बड़ी तरफदारी की जा रही है?’’

तभी द्वार की घंटी बजी. पंकज आया था. उस ने शिखा से कहा, ‘‘भाभी, भैया से तो आप को साथ लाने को कह ही चुका हूं, आप से भी कह रहा हूं. आप आएंगी तो मुझे खुशी होगी. अब मैं चलता हूं, बहुत काम करने हैं.’’

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पंकज प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा किए बिना लौट गया. मैं ने पूछा, ‘‘अब तो तुम्हारी यह शिकायत भी दूर हो गई कि तुम से उस ने आने को नहीं कहा? अब क्या इरादा है?’’

‘‘इरादा क्या होना है, हमारे पड़ोसियों से तो एक सप्ताह पहले ही आने को कह गया था. मुझे एक दिन पहले न्योता देने आया है. असली बात तो यह है कि मेरा मन उन से इतना खट्टा हो गया है कि मैं जाना नहीं चाहती. मैं नहीं जाऊंगी.’’

‘‘तुम्हारी मरजी,’’ कह कर मैं दुकान चला गया.

थोड़ी देर बाद ही शिखा का फोन आया, ‘‘सुनो, एक खुशखबरी है. मेरे भाई हिमांशु की शादी तय हो गई है.

10 दिन बाद ही शादी है. उस के बाद कई महीने तक शादियां नहीं होंगी. इसीलिए जल्दी शादी करने का निर्णय लिया है.’’

‘‘बधाई हो, कब जा रही हो?’’

‘‘पूछ तो ऐसे रहे हो जैसे मैं अकेली ही जाऊंगी. तुम नहीं जाओगे?’’

‘‘तुम ने सही सोचा, तुम्हारे भाई की शादी है, तुम जाओ, मैं नहीं जाऊंगा.’’

‘‘यह क्या हो गया है तुम्हें, कैसी बातें कर रहे हो? मेरे मांबाप की जगहंसाई कराने का इरादा है क्या? सब पूछेंगे, दामाद क्यों नहीं आया तो

क्या जवाब देंगे? लोग कई तरह की बातें बनाएंगे…’’

‘‘बातें तो लोगों ने तब भी बनाई होंगी, जब एक ही शहर में रहते हुए, सगी भाभी हो कर भी तुम देवर की सगाई में नहीं गईं…और अब शादी में भी नहीं जाओगी. जगहंसाई क्या यहां नहीं होगी या फिर इज्जत का ठेका तुम्हारे खानदान ने ही ले रखा है, हमारे खानदान की तो कोई इज्जत ही नहीं है?’’

‘‘मत करो तुलना दोनों खानदानों की. मेरे घर वाले तुम्हें बहुत प्यार करते हैं. क्या तुम्हारे घर वाले मुझे वह इज्जत व प्यार दे पाए?’’

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‘‘हरेक को इज्जत व प्यार अपने व्यवहार से मिलता है.’’

‘‘तो क्या तुम्हारा अंतिम फैसला है कि तुम मेरे भाई की शादी में नहीं जाओगे?’’

‘‘अंतिम ही समझो. यदि तुम मेरे भाई की शादी में नहीं जाओगी तो मैं भला तुम्हारे भाई की शादी में क्यों जाऊंगा?’’

‘‘अच्छा, तो तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो?’’ कह कर शिखा ने फोन रख दिया. दूसरे दिन पंकज की शादी में शिखा को आया देख कर मांजी का चेहरा खुशी से खिल उठा था. पंकज भी बहुत खुश था.

मांजी ने स्नेह से शिखा की पीठ पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘बेटी, तुम आ गई, मैं बहुत खुश हूं. मुझे तुम से यही उम्मीद थी.’’

‘‘आती कैसे नहीं, मैं आप की बहुत इज्जत करती हूं. आप के आग्रह को कैसे टाल सकती थी?’’

मैं मन ही मन मुसकराया. शिखा किन परिस्थितियों के कारण यहां आई, यह तो बस मैं ही जानता था. उस के ये संवाद भले ही झूठे थे, पर अपने सफल अभिनय द्वारा उस ने मां को प्रसन्न कर दिया था. यह हमारे बीच हुए समझौते की एक सुखद सफलता थी.

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Crime Story- प्यार की कच्ची डोर: भाग 1

सौजन्य- मनोहर कहानियां

जिम ट्रेनर जिया ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस कसरती जवान से वह इश्क लड़ा रही है, जिस के साथ नया संसार बसाने के सपने देख रही है, वह 5 राज्यों का वांटेड और 5 लाख का ईनामी बदमाश है. जब यह बात उसे पता चली तब बहुत देर हो चुकी थी और उस के भी…

इसी साल जनवरी में सीनियर आईपीएस अधिकारी हवासिंह घुमरिया ने जब जयपुर रेंज आईजी का पदभार संभाला, तो उन के सामने पपला को पकड़ने की सब से बड़ी चुनौती थी. विक्रम गुर्जर उर्फ पपला कुख्यात बदमाश था, जिस पर पुलिस की ओर से 5 लाख रुपए का इनाम घोषित था.

करीब डेढ़ साल पहले 6 सितंबर, 2019 को अलवर जिले के बहरोड़ पुलिस थाने पर दिनदहाड़े एके 47 से अंधाधुंध फायरिंग कर हथियारबंद बदमाश उसे छुड़ा ले गए थे. तब से वह फरार था. इस से पहले 2017 में वह हरियाणा पुलिस की हिरासत से भाग गया था. इसलिए राजस्थान और हरियाणा पुलिस उस की तलाश कर रही थी, लेकिन उस का कुछ पता नहीं था.

आईजी घुमरिया ने बहरोड़ थाने से पपला की फाइल मंगवा कर उसे कई बार पढ़ा. उन्होंने पपला के बहरोड़ थाने से फरार होने के बाद पकड़े गए उस के गिरोह के साथियों की फाइलें भी पढ़ी. हरियाणा से भी मंगा कर पपला के अपराधों की कुंडलियां खंगाली गईं.

तमाम फाइलों को पढ़ने के बाद आईजी घुमरिया को पक्का विश्वास हो गया कि पपला की पहलवानी का शौक ही उसे पकड़वा सकता है. आईजी का मानना था कि पपला पहलवानी करता है. इसलिए किसी अखाड़े या जिम में जरूर जाता होगा.

इस आधार पर पुलिस ने राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में तमाम अखाड़े और जिम में पपला की तलाश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. अलबत्ता यह जरूर पता चला कि पपला प्रेम प्यार के मामले में कमजोर है. वह कोई न कोई गर्लफ्रैंड जरूर रखता है.

अब पुलिस के पास 2 क्लू थे. एक तो पपला का पहलवानी का शौक और दूसरा उस की इश्कबाजी. इस बीच, जनवरी के तीसरे सप्ताह में आईजी घुमरिया को महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर में रहने वाली युवती जिया उससहर सिगलीगर के बारे में कुछ सुराग मिले. पता चला कि जिया जिम भी चलाती है और पपला की गर्लफ्रैंड हो सकती है.

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जिम और गर्लफ्रैंड, इन 2 सुरागों पर आईजी घुमरिया को उम्मीद की किरण नजर आई. उन्होंने चुनिंदा पुलिस अफसरों की स्पैशल 26 टीम बना कर पपला को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी. एडिशनल एसपी सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में बनाई इस टीम में अलवर और भिवाड़ी पुलिस जिलों के अफसरों और कमांडो को भी शामिल किया गया.

स्पैशल 26 टीम के कुछ पुलिस अफसरों और कमांडो को कोल्हापुर भेजा गया. उन्होंने जिया और उस के जिम का पता लगाया. पुलिस टीम ने कई दिनों की जांचपड़ताल के बाद यह पता लगा लिया कि जिया वाकई पपला की गर्लफ्रैंड है. पपला उसी के साथ कोल्हापुर में रह रहा है.

यकीन हो जाने के बाद आईजी घुमरिया ने स्पैशल 26 टीम के बाकी पुलिस अफसरों और सशस्त्र कमांडो को भी कोल्हापुर भेज दिया. यह टीम अलगअलग हिस्सों में बंट गई. टीम के कुछ सदस्य जिया के जिम वाले मकान की कालोनी में किराएदार बन कर कमरा तलाशने लगे. कुछ सदस्य हैल्थवर्कर बन गए और कोरोना की जांच के बहाने आसपास के मकानों की रैकी करने लगे.

टीम के कुछ सदस्यों ने जिम जौइन करने के बहाने जिया के जिम में अलगअलग समय पर जा कर पूरी टोह ली. जिया जिस मकान में जिम चलाती थी, वह 3 मंजिला था.

3-4 दिन की रैकी और तमाम रूप बदलने के बाद 25 जनवरी को यह निश्चित हो गया कि पपला इसी मकान में रहता है. पपला कोई छोटामोटा अपराधी नहीं था. उस के पास अत्याधुनिक हथियार होने की पूरी संभावना थी. पुलिस टीम ने जिया के मकान और आसपास के इलाकों का वीडियो और फोटो बना कर आईजी घुमरिया को जयपुर भेजे.

आईजी ने स्पैशल 26 टीम के अफसरों से सारे हालात पर चर्चा करने के बाद नीमराना के एडिशनल एसपी राजेंद्र सिंह सिसोदिया को भी कोल्हापुर भेज दिया. औपरेशन पपला की तारीख तय हुई 27 जनवरी.

27 जनवरी की आधी रात के करीब स्पैशल 26 टीम ने सादा कपड़ों में जिया के मकान को घेर लिया. एक साथ 25-30 हथियारबंद लोगों को देख कर आसपास रहने वाले लोगों ने उन्हें डकैत समझ लिया और पथराव करना शुरू कर दिया.

हालात बिगड़ सकते थे और डेढ़ साल से आंखों में धूल झोंक रहा पपला फिर भाग सकता था. इसलिए टीम के एडिशनल एसपी सिद्धांत शर्मा ने जयपुर मोबाइल काल कर आईजी घुमरिया को सारी बात बताई. आईजी ने तुरंत कोल्हापुर एसपी से बात की.

कोल्हापुर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर कालोनी के लोगों को समझाया, तब तक स्पैशल 26 टीम के कुछ जवान जिया के मकान में तीसरी मंजिल तक पहुंच चुके थे.

हलचल सुन कर एक कमरे में सो रहा पपला जाग गया. हथियारबंद जवानों को देख वह समझ गया कि पुलिस वाले हैं. खुद को पुलिस से घिरा देख कर पपला ने अपनी गर्लफ्रैंड जिया को ही बचाव का हथियार बना लिया. उस ने जिया की गरदन पर चाकू लगा कर पुलिस वालों से कहा, ‘पीछे हट जाओ और मुझे जाने दो, नहीं तो इस लड़की की गरदन उड़ा दूंगा.’

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पहले से ही हर हालात का आंकलन कर पहुंची पुलिस की स्पैशल 26 टीम को इस पर कोई हैरानी नहीं हुई. पपला की धमकी पर पुलिस टीम ने पीछे हटने के बजाय उस पर चारों तरफ से शिकंजा बना लिया.

आखिर पुलिस से बचने के लिए वह जिया को छोड़ कर तीसरी मंजिल से नीचे कूद गया. नीचे और आसपास पहले ही पुलिस टीम के कमांडो पोजीशन लिए खड़े थे. उन्होंने पपला को दबोच लिया और उसे चारों तरफ से घेर कर स्टेनगन तान दी. इस बीच पुलिस ने जिया को अपनी हिरासत में ले लिया था.

तीसरी मंजिल से कूदने से पपला के बाएं पैर के घुटने की हड्डी टूट गई. वह जमीन से उठ नहीं सका, तो पुलिस टीम ने उसे सहारा दे कर खड़ा किया और कपड़ों की तलाशी ली. उस के पास कोई हथियार नहीं मिला.

मकान के अंदर पहुंची पुलिस टीम ने सभी कमरों की तलाशी ली. तलाशी में कोई हथियार तो नहीं मिला, लेकिन पपला का फरजी आधार कार्ड जरूर मिला. इस में उस का नाम उदल सिंह और पता कोल्हापुर दर्ज था.

पैर में फ्रैक्चर होने से पपला चलफिर नहीं सकता था. इसलिए पुलिस टीम ने 28 जनवरी को सब से पहले उस की मरहमपट्टी कराई. बहरोड़ पुलिस पपला से पहले धोखा खा चुकी थी. इसलिए उसे और उस की गर्लफ्रैंड जिया को राजस्थान लाने के लिए पुलिस की अलगअलग टीमें बनाई गईं ताकि उस के साथियों को यह पता न चल सके कि कौन सी टीम उसे ले कर कहां पहुंचेगी.

एक टीम हवाईजहाज से दिल्ली के लिए उड़ी और दूसरी टीम जयपुर के लिए. पपला जयपुर पहुंचा और जिया दिल्ली. 29 जनवरी को पुलिस ने जिया और व्हीलचेयर पर पपला को बहरोड़ की अदालत में पेश किया. अदालत ने पपला को शिनाख्तगी के लिए 2 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया, जबकि जिया को 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया.

थाने से छुड़ा लिया था पपला को

पपला को जेल भेजने से पहले नीमराना थाने में आईजी हवासिंह घुमरिया, भिवाड़ी एसपी राममूर्ति जोशी, अलवर एसपी तेजस्विनी गौतम, स्पैशल औपरेशन ग्रुप के एडिशनल एसपी सिद्धांत शर्मा और नीमराना के एडिशनल एसपी राजेंद्र सिंह सिसोदिया ने पपला और जिया से अलगअलग पूछताछ की.

पुलिस की पूछताछ और जांचपड़ताल में पपला के दुर्दांत अपराधी बनने और महाराष्ट्र के कोल्हापुर पहुंच कर प्यार का चक्कर चलाने की जो कहानी उभर कर सामने आई, उस से पहले पपला के बहरोड़ थाने से फरार होने की कहानी जान लीजिए.

5 सितंबर, 2019 की रात भिवाड़ी जिले की बहरोड़ थाना पुलिस ने पपला को दिल्लीजयपुर हाइवे पर एक कार में 32 लाख रुपए ले कर जाते हुए पकड़ा था. पुलिस ने पपला से 32 लाख रुपए के बारे में पूछताछ की, तो उस ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

उस समय तक बहरोड़ के तत्कालीन थानाप्रभारी सुगनसिंह को पपला के आपराधिक बैकग्राउंड का पता नहीं था. वह उसे कोई व्यापारी या छोटामोटा प्रौपर्टी डीलर समझ रहे थे.

पपला ने खुद के पकड़े जाने की सूचना मोबाइल से अपने साथियों को दे दी थी. पपला के पकड़े जाने पर कुछ लोगों ने पुलिस से लेदे कर उसे छोड़ने के लिए भी बात की थी, लेकिन बात नहीं बनी. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया.

अगले भाग में पढ़ें- पपला का खौफ खत्म करने के लिए जुलूस निकाला

Crime Story- प्यार की कच्ची डोर: भाग 2

सौजन्य- मनोहर कहानियां

कहा जाता है कि पपला अपने साथी जसराम पटेल की हत्या का बदला लेने के लिए बहरोड़ आया था. वह बहरोड़ में विक्रम उर्फ लादेन को मारना चाहता था. इस से पहले उस ने किसी बड़े व्यापारी से रंगदारी वसूली थी. उस के पास रंगदारी के वही 32 लाख रुपए थे. पकड़े जाने पर उस ने पुलिस से कहा था कि वह जमीन का सौदा करने आया था, लेकिन सौदा नहीं बना.

पपला के पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद ही 6 सितंबर को सुबह करीब 9 बजे 3 गाडि़यों में भर कर आए उस के साथियों ने बहरोड़ पुलिस थाने पर नक्सलियों की तरह दिनदहाड़े धावा बोल दिया. ये लोग एके 47 और एके 56 से करीब 50 राउंड गोलियां बरसा कर पपला को लौकअप से निकाल ले गए. बदमाशों की गोलियों से थानाप्रभारी के कमरे के गेट और थाने की दीवारों पर गोलियों के निशान बन गए थे, जो एक खतरनाक हमले की गवाही दे रहे थे.

जब पपला को उस के साथी थाने से छुड़ा ले गए, तब पुलिस को पता चला कि वह हरियाणा का दुर्दांत अपराधी विक्रम गुर्जर उर्फ पपला था. राजस्थान में इस तरह का यह पहला मामला था.

पुलिस थाने पर हमले की घटना ने राजस्थान सरकार को हिला दिया. इस से पुलिस की बदनामी भी हुई. पपला की फरारी पर अधिकारियों ने इसे पुलिस की लापरवाही मानते हुए कई पुलिस अफसरों पर काररवाई की. 2 पुलिस वालों को बर्खास्त किया गया. डीएसपी और थानाप्रभारी सहित 5 पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया. कुछ के तबादले और 69 पुलिस वाले लाइन हाजिर किए गए.

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पुलिस ने पपला को तलाश करने के लिए पहले तो जोरशोर से कई दिनों तक अभियान चलाया. जगहजगह छापे मार कर पूरे देश की खाक छान ली, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला.

पपला को अकेली राजस्थान की पुलिस ही तलाश नहीं कर रही थी, बल्कि हरियाणा पुलिस भी उस पर आंखें गड़ाए हुए थी. लेकिन सफलता दोनों राज्यों की पुलिस को नहीं मिल रही थी.

धीरेधीरे पुलिस के अभियान भी ठंडे पड़ गए. पपला के न पकड़े जाने से यह बात भी उठने लगी कि उसे राजनीतिक या जातिगत संरक्षण मिला हुआ है. इसीलिए पुलिस जानबूझ कर उसे नहीं पकड़ रही है. एक बार हरियाणा की पूर्व सरकार के एक मंत्री के बेटे की पपला से बातचीत का औडियो भी वायरल हुआ था.

हालांकि बहरोड़ पुलिस ने पपला को थाने से छुड़ा ले जाने और संरक्षण देने के मामले में 17 महीने के दौरान 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया. इन में अधिकांश लोग राजस्थान के अलवर और झुंझुनूं जिले के अलावा हरियाणा के महेंद्रगढ़, नारनौल और रेवाड़ी के रहने वाले थे.

पपला का खौफ खत्म करने के लिए जुलूस

राजस्थान पुलिस के स्पैशल औपरेशन ग्रुप और अलवर पुलिस ने 22 सितंबर, 2019 को पपला के गिरोह के 16 बदमाशों का बहरोड़ में केवल अंडरवियर और बनियान में सड़कों पर पैदल जुलूस निकाला था. पुलिस ने यह काम आमजन के मन से ऐसे बदमाशों का खौफ खत्म करने के लिए किया था. पहली बार राजस्थान में बदमाशों का इस तरह निकाला गया जुलूस चर्चा का विषय बन गया था.

पपला के 30 से ज्यादा साथी पकड़े गए और इन में से आधे से ज्यादा बदमाशों का बनियान अंडरवियर में जुलूस निकाला गया. इस के बावजूद पुलिस उन से यह नहीं उगलवा सकी कि पपला का पताठिकाना अब कहां है? कौन लोग उसे पैसा पहुंचा रहे हैं और कौन उसे शरण दे रहे हैं?

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राजस्थान पुलिस पर पपला की फरारी से लगा काला दाग अब उस के फिर पकड़े जाने से हालांकि मिट गया है, लेकिन 2 बार गच्चा दे कर भाग चुके पपला को ले कर पुलिस की चिंताएं अभी कम नहीं हुई हैं. इस का कारण यह है कि उस की मदद करने वाले उस के साथी अभी खुले घूम रहे हैं.

विक्रम गुर्जर उर्फ पपला हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के खैरोली गांव के रहने वाले मनोहरलाल के 2 बेटों में बड़ा है. उस ने 12वीं पास करने के बाद फौज में जाने का मन बना लिया था. इसी दौरान उसे पहलवानी का शौक लग गया. वह अपने गांव के ही शक्ति सिंह के पास पहलवानी सीखने लगा. शक्ति सिंह को वह गुरु मानता था.

खैरोली गांव के ही रहने वाले संदीप फौजी का पास के गांव की एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था. गांव के लोग इस से नाखुश थे. पंचायत ने फैसला किया कि संदीप फौजी उस युवती से नहीं मिलेगा. इस के बाद भी संदीप नहीं माना, तो शक्ति सिंह और पपला ने उसे पीट दिया. संदीप ने इसे अपना अपमान माना.

उस ने हरियाणा के चीकू बदमाश को सुपारी दे कर 4 फरवरी, 2014 को शक्ति सिंह की हत्या करवा दी. अपने गुरु शक्ति सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए विक्रम गुर्जर उर्फ पपला अपराध की दुनिया में कूद गया.

पपला हरियाणा के कुख्यात बदमाश कुलदीप उर्फ डाक्टर के गिरोह में शामिल हो गया. पपला ने बंदूक थाम कर एक साल में ही अपने गुरु की हत्या का बदला ले लिया. जनवरी, 2015 में उस ने संदीप फौजी की हत्या कर दी. इस के बाद उस ने संदीप की मां विमला, मामा महेश और नाना श्रीराम को भी मौत के घाट उतार दिया.

4 लोगों की हत्या के बाद पपला अपराध की दलदल में धंसता चला गया. पपला के खिलाफ हत्या, लूट और रंगदारी के करीब 2 दरजन से ज्यादा मामले दर्ज हुए. उस का दक्षिणी हरियाणा के जिलों खासकर रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल व धारूहेड़ा के अलावा राजस्थान के राठ और शेखावटी इलाके में आतंक था.

हरियाणा के अलावा वह राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस का भी वांटेड रहा. हरियाणा की नारनौल पुलिस ने उसे 2016 में पकड़ा था. इस के कुछ समय बाद 2017 में महेंद्रगढ़ की अदालत में उस के गिरोह के बदमाश पुलिस पर फायरिंग कर उसे छुड़ा ले गए थे. इस मामले में हरियाणा पुलिस के एक एसआई सहित 7 पुलिस वाले घायल हुए थे.

हरियाणा पुलिस ने पपला पर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था. पुलिस की हिरासत से पपला को छुड़ा ले जाने में उस का छोटा भाई मिंटू भी आरोपी था. वह जेल में 20 साल की सजा भुगत रहा है.

अब जिया की कहानी. जिया आयुर्वेद डाक्टर बनने की पढ़ाई कर रही थी. वह अभी दूसरे वर्ष की छात्रा थी. तलाकशुदा जिया के पिता डाक्टर हैं. जिया को पपला ने अपना नाम मानसिंह और काम व्यापार बता रखा था.

महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली 26 साल की जिया कोल्हापुर में 3 मंजिला मकान में जिम भी चलाती थी. वह फिजिकल ट्रेनर है. पपला ने अपने पहलवानी के शौक के कारण जिम जौइन किया था. वहां मासूम और फूल सी नाजुक जिया को देख कर वह उस पर लट्टू हो गया. जिया के तलाकशुदा होने का पता चलने पर पपला ने उस से नजदीकियां बढ़ाई. जिया भी कसरती बदन वाले पपला के प्यार में उलझ गई.

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पपला ने जिया की जिम वाली बिल्डिंग में ही 4500 रुपए में किराए पर कमरा ले लिया. फिर दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. पकड़े जाने से 2 दिन पहले ही पपला ने जिया के पिता से भी मुलाकात की थी. पपला जिया से शादी कर कोल्हापुर में बसना चाहता था, लेकिन उन के प्यार की कहानी 2 महीने से कम समय में ही खत्म हो गई.

अगले भाग में पढ़ें- पुलिस वाला ही खबरी था पपला का

Crime Story- प्यार की कच्ची डोर: भाग 3

सौजन्य- मनोहर कहानियां

पपला ने जिया से मुलाकात से पहले कोल्हापुर में ही एक मराठी महिला को अपने प्यार के जाल में फंसाया था. अकेली रहने वाली उस महिला का 4 साल का एक बेटा है. उस महिला के साथ भी वह कुछ दिन लिवइन रिलेशनशिप में रहा.

उस महिला से प्यार की पींगें आगे बढ़तीं, उस से पहले ही पपला की जिया से मुलाकात हो गई और उस का जिया पर दिल आ गया. पपला कोल्हापुर में 3-4 महीने से रह रहा था. इस दौरान उस ने कई ठिकाने भी बदले थे.

पपला के पकड़े जाने के बाद जिया पुलिस से उस की असलियत के बारे में पूछती रही. राजस्थान पुलिस की स्पैशल 26 टीम जब पपला और जिया को कोल्हापुर से राजस्थान ले जाने के लिए पुणे एयरपोर्ट पहुंची, तो आमनासामना होने पर जिया ने पपला से पूछा, ‘आखिर तुम हो कौन?’

तब पपला ने जवाब दिया, ‘मैं विक्रम गुर्जर उर्फ पपला हूं. राजस्थान और हरियाणा पुलिस ने मुझ पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा हुआ है. यूपी और दिल्ली की पुलिस भी मुझे तलाश कर रही है.’

पपला की असलियत जान कर जिया फूटफूट कर रोने लगी.

जेल में पपला की शिनाख्तगी होने के बाद पुलिस ने उसे अदालत से रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान पुलिस पूछताछ में सामने आया कि पपला बहरोड़ थाने से फरार होने के बाद करीब 2 महीने तक अलवर जिले के तिजारा, दिल्ली और हरियाणा के पलवल शहर में रहा. इस के बाद उस ने एनसीआर और उत्तर प्रदेश में अपना समय बिताया.

इस दौरान उस ने अपना मोबाइल बंद कर दिया. घर वालों, रिश्तेदारों और दोस्तों से वह सीधे तौर पर संपर्क में नहीं रहा. उस के फरार होने के करीब 6 महीने बाद कोरोना के कारण लौकडाउन लग गया. इस दौरान पुलिस भी ठंडी पड़ गई. बाद में जब अनलौक होना शुरू हुआ, तो पुलिस ने डाक्टर और हैल्थ वर्कर बन कर भी कई राज्यों में पपला की तलाश की.

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पुलिस ने पपला की तलाश में राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, बेंगलुरु, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पंजाब आदि 14 राज्यों की धूल छानी थी.

पपला के काली भक्त होने का पता चलने पर पुलिस पश्चिम बंगाल भी गई थी. महाकालेश्वर और शिरडी सहित देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर भी उस की तलाश की गई थी. नवंबर 2019 में भी पुलिस टीम कोल्हापुर गई थी.

जांच में यह भी पता चला कि पपला को पुलिस के छापे की जानकारी पहले मिल जाती थी. गहराई में जाने पर पता चला कि पपला को पकड़ने वाले एडिशनल एसपी सिद्धांत शर्मा का पहले गनमैन रहा सुधीर कुमार पुलिस की प्लानिंग की जानकारी पपला के साथियों तक पहुंचाता था.

पुलिस वाला ही खबरी था पपला का

सिद्धांत शर्मा 2017 में भिवाड़ी के डीएसपी थे, तब सुधीर कुमार उन का गनमैन था. बाद में सिद्धांत शर्मा का तबादला नीमराना डीएसपी के पद पर हो गया, तो सुधीर भी उन के साथ गनमैन के रूप में नीमराना आ गया. पपला की फरारी के दौरान सिद्धांत नीमराना में ही तैनात थे. बहरोड़ और नीमराना में केवल 20 किलोमीटर की दूरी है.

पपला को पकड़ने की सारी योजनाएं नीमराना थाने में ही बनती थी. इसलिए गनमैन सुधीर को सारी बातें पता चल जाती थीं. पुलिस की योजनाएं लीक होने से पपला पुलिस से और दूर हो जाता था. बाद में सिद्धांत शर्मा एडिशनल एसपी बन कर एसओजी में चले गए. इस दौरान सुधीर नीमराना थाने की क्यूआरटी की गाड़ी का ड्राइवर था.

पपला की गिरफ्तारी के 2 दिन बाद ही भेद खुलने पर 29 जनवरी को भिवाड़ी एसपी राममूर्ति जोशी ने सुधीर को निलंबित कर दिया.

पपला से पूछताछ में पुलिस को उस के कुछ साथियों और हथियारों के बारे में पता चला है. पुलिस उन की तलाश कर रही है. रिमांड अवधि पूरी होने पर जिया को अदालत ने 4 फरवरी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया.

पपला को भी अदालत ने 13 दिन का रिमांड पूरा होने पर जेल भेज दिया. जेल से अलवर जिले की मुंडावर थाना पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर ले गई.

अपने साथियों द्वारा एके 47 और एके 56 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग के बाद बहरोड़ थाने से भागा पपला अब बैसाखियों के सहारे चल रहा है. वह जिस बहरोड़ शहर से भागा था, उसी शहर की जेल में पहुंच गया. पुलिस को उस की सुरक्षा की ज्यादा चिंता है.

अभी उस के कई विश्वसनीय साथी फरार हैं. इस के अलावा हरियाणा का चीकू गैंग भी उस की जान का दुश्मन बना हुआ है. इसलिए पुलिस ड्रोन से पपला पर नजर रखे हुए है.

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पुलिस की तमाम चौकसी के बावजूद पपला के भागने का खतरा अभी मंडरा रहा है. 15 फरवरी को उसे बहरोड़ से अलवर जिले की किशनगढ़बास जेल में शिफ्ट किया जा रहा था, तभी 6 संदिग्ध कारें पुलिस के काफिले में घुस गईं. बाद में पुलिस ने इन कारों को पकड़ लिया.

इन में बहरोड़ थाने के हिस्ट्रीशीटर बचिया यादव सहित 24 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन लोगों का पपला से कोई संबंध तो नहीं है. 2 बार पहले फरार हो चुके पपला के फिर भागने की आशंका और उस पर दुश्मन गिरोह के मंडराते खतरे को देखते हुए अब उसे अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट कर दिया गया है.

पपला के घपले ने जिया को तोड़ दिया है. वह उबर नहीं पा रही है. तलाकशुदा जिया को दूसरी बार प्यार मिला, तो वह खुशियों का संसार बसाने के सपने देखने लगी थी. पपला के धोखे ने उस की दुनिया उजाड़ दी.

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Serial Story- समझौता: भाग 1

जब मां का फोन आया, तब मैं बाथरूम से बाहर निकल रहा था. मेरे रिसीवर उठाने से पहले ही शिखा ने फोन पर वार्त्तालाप आरंभ कर दिया था.

मां उस से कह रही थीं, ‘‘शिखा, मैं ने तुम्हें एक सलाह देने के लिए फोन किया है. मैं जो कुछ कहने जा रही हूं, वह सिर्फ मेरी सलाह है, सास होने के नाते आदेश नहीं. उम्मीद है तुम उस पर विचार करोगी और हो सका तो मानोगी भी…’’

‘‘बोलिए, मांजी?’’

‘‘बेटी, तुम्हारे देवर पंकज की शादी है. वह कोई गैर नहीं, तुम्हारे पति का सगा भाई है. तुम दोनों के व्यापार अलग हैं, घर अलग हैं, कुछ भी तो साझा नहीं है. फिर भी तुम लोगों के बीच मधुर संबंध नहीं हैं बल्कि यह कहना अधिक सही होगा कि संबंध टूट चुके हैं. मैं तो समझती हूं कि अलगअलग रह कर संबंधों को निभाना ज्यादा आसान हो जाता है.

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‘‘वैसे उस की गलती क्या है…बस यही कि उस ने तुम दोनों को इस नए शहर में बुलाया, अपने साथ रखा और नए सिरे से व्यापार शुरू करने को प्रोत्साहित किया. हो सकता है, उस के साथ रहने में तुम्हें कुछ परेशानी हुई हो, एकदूसरे से कुछ शिकायतें भी हों, किंतु इन बातों से क्या रिश्ते समाप्त हो जाते हैं? उस की सगाई में तो तुम नहीं आई थीं, किंतु शादी में जरूर आना. बहू का फर्ज परिवार को जोड़ना होना चाहिए.’’

‘‘तो क्या मैं ने रिश्तों को तोड़ा है? पंकज ही सब जगह हमारी बुराई करते फिरते हैं. लोगों से यहां तक कहा है, ‘मेरा बस चले तो भाभी को गोली मार दूं. उस ने आते ही हम दोनों भाइयों के बीच दरार डाल दी.’ मांजी, दरार डालने वाली मैं कौन होती हूं? असल में पंकज के भाई ही उन से खुश नहीं हैं. मुझे तो अपने पति की पसंद के हिसाब से चलना पड़ेगा. वे कहेंगे तो आ जाऊंगी.’’

‘‘देखो, मैं यह तो नहीं कहती कि तुम ने रिश्ते को तोड़ा है, लेकिन जोड़ने का प्रयास भी नहीं किया. रही बात लोगों के कहने की, तो कुछ लोगों का काम ही यही होता है. वे इधरउधर की झूठी बातें कर के परिवार में, संबंधों में फूट डालते रहते हैं और झगड़ा करा कर मजा लूटते हैं. तुम्हारी गलती बस इतनी है कि तुम ने दूसरों की बातों पर विश्वास कर लिया.

‘‘देखो शिखा, मैं ने आज तक कभी तुम्हारे सामने चर्चा नहीं की है, किंतु आज कह रही हूं. तुम्हारी शादी के बाद कई लोगों ने हम से कहा, ‘आप कैसी लड़की को बहू बना कर ले आए.  इस ने अपनी भाभी को चैन से नहीं जीने दिया, बहुत सताया. अपनी भाभी की हत्या के सिलसिले में इस का नाम भी पुलिस में दर्ज था. कुंआरी लड़की है, शादी में दिक्कतें आएंगी, यही सोच कर रिश्वत खिला कर उस का नाम, घर वालों ने उस केस से निकलवाया है.’

‘‘अगर शादी से पहले हमें यह समाचार मिलता तो शायद हम सचाई जानने के लिए प्रयास भी करते, लेकिन तब तक तुम बहू बन कर हमारे घर आ चुकी थीं. कहने वालों को हम ने फटकार कर भगा दिया था. यह सब बता कर मैं तुम्हें दुखी नहीं करना चाहती, बल्कि कहना यह चाहती हूं कि आंखें बंद कर के लोगों की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए. खैर, मैं ने तुम्हें शादी में आने की सलाह देने के लिए फोन किया है, मानना न मानना तुम्हारी मरजी पर निर्भर करता है,’’ इतना कह कर मां ने फोन काट दिया था.

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मां ने कई बार मुझे भी समझाने की कोशिश की थी, किंतु मैं ने उन की पूरी बात कभी नहीं सुनी. बल्कि,? उन पर यही दोषारोपण करता रहा कि वह मुझ से ज्यादा पंकज को प्यार करती हैं, इसलिए उन्हें मेरा ही दोष नजर आता है, पंकज का नहीं. इस पर वे हमेशा यहां से रोती हुई ही लौटी थीं.

लेकिन सचाई तो यह थी कि मैं खुद भी पंकज के खिलाफ था. हमेशा दूसरों की बातों पर विश्वास करता रहा. इस तरह हम दोनों भाइयों के बीच खाई चौड़ी होती चली गई. लेकिन फोन पर की गई मां की बातें सुन कर कुछ हद तक उन से सहमत ही हुआ.

मां यहां नहीं रहती थीं. शादी की वजह से ही पंकज के पास उस के घर आई हुई थीं. वे हम दोनों भाइयों के बीच अच्छे संबंध न होने की वजह से बहुत दुखी रहतीं इसीलिए यहां बहुत कम ही आतीं.

लोग सही कहते हैं, अधिकतर पति पारिवारिक रिश्तों को निभाने के मामले में पत्नी पर निर्भर हो जाते हैं. उस की नजरों से ही अपने रिश्तों का मूल्यांकन करने लगते हैं. शायद यही वजह है, पुरुष अपने मातापिता, भाईबहनों आदि से दूर होते जाते हैं और ससुराल वालों के नजदीक होते जाते हैं.

दूसरों शब्दों में यों भी कहा जा सकता है कि महिलाएं, पुरुषों की तुलना में अपने रक्त संबंधों के प्रति अधिक वफादार होती हैं. इसीलिए अपने मायके वालों से उन के संबंध मधुर बने रहते हैं. बल्कि कड़ी बन कर वे पतियों को भी अपने परिवार से जोड़ने का प्रयास करती रहती हैं. वैसे पुरुष का अपनी ससुराल से जुड़ना गलत नहीं है. गलत है तो यह कि पुरुष रिश्तों में संतुलन नहीं रख पाते, वे नए परिवार से तो जुड़ते हैं, किंतु धीरेधीरे अपने परिवार से दूर होते चले जाते हैं.

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