ताकझांक: शालू को रणवीर से क्यों होने लगी नफरत?

वह नई स्मार्ट सी पड़ोसिन तरुण को भा रही थी. उसे अपनी खिड़की से छिपछिप कर देखता. नई पड़ोसिन प्रिया भी फैशनेबल तरुण से प्रभावित हो रही थी. वह अपने सिंपल पति रणवीर को तरुण जैसा फैशनेबल बनाने की चाह रखने लगी थी.

शाम को जब प्रिया बनसंवर कर बालकनी में पड़े झले पर आ बैठती तो तरुण चोरीछिपे उस की हर बात नोटिस करता. कितनी सलीके से साड़ी पहने चाय की चुसकियां लेते हुए किसी किताब में गुम रहती है मैडम. क्या करे मियांजी का इंतजार जो करना है और मियांजी हैं जो जरा भी खयाल नहीं रखते इस बात का. बेचारी को खूबसूरत शाम अकेले काटनी पड़ती है. काश वह उस का पति होता तो सब काम छोड़ फटाफट चला आता.

तरुण का मन गाना गाने को मचलने लगता, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए…’ कितने ही गाने हैं हसीन शाम के ‘ये शाम मस्तानी…’ ‘‘तरु कहां हो… समोसे ठंडे हो रहे हैं,’’ तभी उसे सपनों की दुनिया से वास्तविकता के धरातल पर पटकती उस की पत्नी शालू की आवाज सुनाई दी.

आ गई मेरी पत्नी की बेसुरी आवाज… इस के सामने तो बस एक ही गाना गा सकता हूं कि जब तक रहेगा समोसे में आलू तेरा रहूंगा ओ मेरी शालू…

‘‘बालकनी में हो तो वहीं ले आती हूं,’’ शालू कपों में चाय डालते हुए किचन से ही चीखी.

‘‘उफ… नहीं, मैं आया,’’ कह तरुण जल्दी यह सोचते हुए अंदर चल दिया, ‘कहां वह स्लिमट्रिम सी कैटरीना कैफ और कहां ये हमारी मोटी भैं…’

तरुण ने कदमों और विचारों को अचानक ब्रेक न लगाए होते तो चाय की ट्रे लाती शालू से टकरा गया होता.

तरुण रोज सुबह जौगिंग पर जाता तो प्रिया वहां दिख जाती. तरुण से रहा नहीं गया. जल्द ही उस ने अपना परिचय दे डाला, ‘‘माईसैल्फ तरुण… मैं आप के सामने वाले फ्लैट…’’

‘‘हांहां, मैं ने देखा है… मैं प्रिया और वे सामने जो पेपर पढ़ रहे हैं वे मेरे पति रणवीर हैं,’’ प्रिया उस की बात काटते हुए बोली.

‘‘कभी रणवीर को ले कर हमारे घर आएं.मैं और मेरी पत्नी शालू ही हैं… 2 साल ही हुएहैं हमारी शादी को,’’ तरुण बोला.

‘‘रियली? आप तो अभी बैचलर से ही दिखते हैं,’’ प्रिया ने तरुण के मजबूत बाजुओं पर उड़ती नजर डालते हुए कहा, ‘‘हमारी शादी को भी 2 ही साल हुए हैं.’’ अपनी तारीफ सुन कर तरुण उड़ने सा लगा.

‘‘रणवीर साहब अपना राउंड पूरा कर चुके?’’

‘‘अरे कहां… जबरदस्ती खींच कर लाती हूं इन्हें घर से… 1-2 राउंड भी बड़ी मुश्किल से पूरा करते हैं.’’

‘‘यहां पास ही जिम है. मैं यहां से सीधा वहीं जाता हूं 1 घंटे के लिए.’’

‘‘वंडरफुल… मैं भी जाती हूं उधर लेडीज विंग में…  ड्रौप कर के ये सीधे घर चले जाते हैं… सो बोरिंग… चलिए आप से मिलवाती हूं शायद आप को देख उन का भी दिल बौडीशौडी बनाने का करने लगे.’’

‘‘हांहां क्यों नहीं? मेरी पत्नी भी कुछ इसी टाइप की है… जौगिंग क्या वाक तक के लिए भी नहीं आती… आप मिलो न उस से. शायद आप को देख कर वह भी स्लिम ऐंड फिट बनना चाहे,’’ तरुण तारीफ करने का इतना अच्छा मौका नहीं खोना चाहता था.

‘‘कल अपनी वाइफ को भी यहीं पार्क की सैर पर लाइएगा.’’ फिर कल आप के पति से वाइफ के साथ ही मिलूंगा.

‘‘ओके बाय,’’ उस ने अपने हेयरबैंड को ठीक करते हुए बड़ी अदा से थ हिलाया.

‘‘बाय,’’ कह कर तरुण ने लंबी सांस भरी.

तरुण जानबूझ कर उलटे राउंड लगाने लगा ताकि वह प्रिया को बारबार सामने से आता देख पाएगा. पर यह क्या पास आतेआते खड़ूस से पति की बगल में बैठ गई. ‘चल देखता हूं क्या गुफ्तगू, गुटरगूं हो रही है,’ सोच वह झडि़यों के पीछे हो लिया. ऐसे जैसे कुछ ढूंढ़ रहा हो… किसी को शक न हो. वह कान खड़े कर सुनने लगा…

‘‘रणवीर आप तो बिलकुल ही ढीले हो कर बैठ जाते हो. अभी 1 ही राउंड तो हुआ आप का… वह देखो सामने से आ रहा है… अरे कहां गया… कितनी फिट की हुई है उस ने बौडी… लगातार मेरे साथ 5 चक्कर तो हो ही गए उस के अभी भी… हमारे सामने वाले घर में ही तो रहता है… आप ने देखा है क्या सौलिड बौडी है उस की…’’

‘अरे, यह तो मेरे बारे में ही बात कर रही है और वह भी तारीफ… क्या बात है…. तरु तुम तो छा गए,’ बड़बड़ा कर वह सीधा हो कर पीछे हो लिया. ‘खड़ूस माना नहीं… आलसी कहीं का… बेचारी रह गई मन मार कर… चल तरु तू भी चल जिम का टाइम हो गया है’ सोच वह जौगिंग करते हुए ही जिम पहुंच गया.

प्रिया को जिम के पास उतार कर रणवीर चला गया यह कहते हुए, ‘घंटे भर बाद लेने आ जाऊंगा… यहां वक्त बरबाद नहीं कर सकता.’

‘हां मत कर खड़ूस बरबाद… तू जा घर में बैठ और मरनेकटने की खबरें पढ़.’ मन ही मन बोलते हुए तरु ने बुरा सा मुंह बनाया, ‘और अपनी शालू रानी तो घी में तर आलू के परांठे खाखा कर सुबहसुबह टीवी सीरियल से फैशन सीखने की क्लास में मस्त खुद को निखारने में जुटी होंगी.’

दूसरे दिन तरुण शालू को जबरदस्ती प्रिया जैसा ट्रैक सूट पहना कर पार्क में ले आया.1 राउंड भी शालू बड़ी मुश्किल से पूरा कर पाई. थक कर वह साइड की डस्टबिन से टकरा कर गिर गई.

‘‘कहां हो शालू? कहां गई?’’ पुकार लोगों के हंसने की आवाजें सुन तरुण पलटा. शालू की ऐसी हालत देख उस की भी हंसी छूट गई पर प्रिया को उस ओर देखता देख खिसियाई सी हंसी हंसते हुए हाथ का सहारा दे उठा दिया.

प्रिया के आगे गोल होती जा रही शालू को देख तरुण को और भी शर्मिंदगी महसूस होती. घर पर उस ने साइक्लिंग मशीन भी ला कर रख दी पर उस पर शालू 10-15 बार चलती और फिर पलंग पर फैल जाती.

‘‘बस न तरु हो गया न आज के लिए… सुबह से कुछ नहीं खाने दिया, बहुत भूख लगी है. खाने दो  पहले आलू के परांठे प्लीज.’’ खाने के नाम से उस में इतनी फुरती आ जाती कि तरुण के छिपाए परांठे फटाफट उठा लाती और फटाफट खाने लगती.

‘‘तुम भी खा कर तो देखो मिर्च के अचार के साथ… बड़े टेस्टी लग रहे हैं… बाद में अपना घासफूस खा लेना,’’ परांठे का टुकड़ा उस की ओर बढ़ाते हुए शालू मुसकराई.

‘‘नो थैंक्स… तुम्हीं खाओ,’’ कह तरुण डाइनिंग टेबल पर रखे कौर्नफ्लैक्स दूध की ओर बढ़ गया.शालू टीवी खोल कर बैठ गई तो तरुण बाउल ले कर अपनी विंडो पर आ गया.

‘ओह आज तो सुबह से बड़ी चहलकदमी हो रही है… तैयार मैडम प्रिया सधे कदमों से हाईहील में खटखट करते इधरउधर आजा रही हैं,’ दिल में उस के जलतरंग सी उठने लगी. ‘लगता है किसी फंक्शन में जा रही है… उफ लो यह खड़ूस अपने जूते पहने यहीं आ मरा… बेटा, थ्री पीस सूट पहन कर हीरो नहीं बन जाएगा… बीवी की बात कभी तो मान लिया कर… थोड़ी बौडीशौडी बना ले,’ तरुण परदे के पीछे खड़ा बड़बड़ाए जारहा था.

‘काश, प्रिया जैसी मेरी बीवी होती… खटखट करते2 कदम आगे2 कदम पीछे करके मेरे साथ डांस करती… मैं उसे यों गोलगोल घुमाता,’ वह खयालों में खो गया.

एक दिन खयालों को सच करने के लिए तरुण शालू के नाप के हाईहील सैंडल ले आया. बड़े चाव से शालू को पहना कर उस ने म्यूजिक औन कर दिया. शालू को सहारा दे कर उस ने खड़ा किया. घुमाया तो शालू खिलखिला कर हंसते हुए बोली, ‘‘अरे तरु मुझ से नहीं होगा… गिर जाऊंगी,’’ फिर अपनेआप को संभालने के लिए उसने तरुण को जो खींचा तो दोनों बिस्तर पर जा गिरे. तरुण को भी हंसी आ गई. थोड़ी देर तक दोनों हंसते रहे.

प्रिया को अपनी बालकनी से ज्यादा कुछ तो दिखाई नहीं दिया पर दोनों की हंसी बड़ी देर तक सुनाई देती रही.

‘अकसर दोनों की हंसीखिलखिलाहट सुनाई देती है. कितना हंसमुख है तरुण… अपनी पत्नी को कितना खुश रखता है और एक ये हैं श्रीमान रणवीर हमेशा मुंह फुलाए बैठे रहते हैं जैसे दुनिया का सारा बोझ इन्हीं के कंधों पर हो,’ प्रिया के दिल में हूक सी उठी तो वह अंदर हो ली.

थोड़ी देर बाद ही तरुण उठा और शालू को भी उठा दिया, ‘‘चलो, थोड़ी प्रैक्टिस करते हैं… कल 35 नंबर कोठी वाले उमेशजी के बेटे की सगाई है. सारे पड़ोसियों को बुलाया है. हमें भी. और रणवीर फैमिली को भी. खूब डांसवांस होगा. बोला है खूब तैयार हो कर आना.’’

‘‘अच्छा तो यह बात है. तभी ये सैंडल…’’ शालू मुसकराई.

शालू फिर खड़ी हो गई. किसी तरह तरुण कमर में हाथ डाल कर डांस करवाने लगा. हंसते हुए शालू ने 2 राउंड लिए. फिर अचानक पैर ऐसा मुड़ा कि हील सैंडल से अलग जा पड़ी और शालू अलग.

‘‘तुम से कुछ नहीं होगा शालू… तुम ने अच्छेखासे सैंडल भी बेकार कर दिए.’’

‘‘ब्रैंडेड नहीं थे…  तो पहले ही लग रहा था पर आप को बुरा लगेगा इसलिए कहा नहीं. प्रिया को रणवीर हर चीज ब्रैंडेड ही दिलाते हैं. काश, मेरा पति भी इतना रईस होता,’’ कह शालू ने ठंडी आह भरी.

‘‘यह देखो क्या किया…’’ तरुण ने दोनों टुकड़े उसे थमा दिए.

शालू ने उन्हें क्विकफिक्स से चिपका दिया. बोली, ‘‘देखो तरु सैंडल बिलकुल सही हो गया. अब चलो पार्टी में.’’

‘‘हां पर डांसवांस तुम रहने ही देना… वहां तुम्हारे साथ कहीं मेरी भी भद्द न हो जाए,’’ तरुण बेरुखाई से बोला.

उधर रणवीर अपनी बालकनी में शालू की किचन से रोज आती आलू, पुदीने के परांठों की खुशबू से काफी प्रभावित था. पत्नी प्रिया के रोजरोज के उबले अंडे, दलिया के नाश्ते से त्रस्त था. कई बार चुपके से शालू की तारीफ भी कर चुका था और वह कई बार मेड के हाथों उसे भिजवा भी चुकी थी. आज सुबह भी उस ने परांठे भिजवाए थे.

शालू तरुण के साथ नीचे उतरी तो प्रिया और रणवीर भी आ चुके थे. रणवीर गाड़ी स्टार्ट कर रहा था.

‘‘आइए, साथ ही चलते हैं तरुणजी,’’ रणवीर ने कहा तो प्रिया ने भी इशारा किया. चारों बैठ गए.

रणवीर बोला, ‘‘परांठों के लिए थैंक्स शालूजी… आप के हाथों में जादू है… मैं अपनी बालकनी से रोज पकवानों की खुशबू का मजा लेता हूं… प्रिया को तो घी, तेल पसंद नहीं… न बनाती है न मु?ो खाने देना चाहती है. तरुणजी आप के तो मजे हैं. रोज बढि़याबढि़या पकवान खाने को मिलते हैं. काश…’’

‘अबे आगे 1 लफ्ज भी न बोलना… क्या बोलने जा रहा था तू,’ तरुण मुट्ठियां भींचते हुए मन ही मन बुदबुदा उठा.

इधर शालू महंगी बड़ी सी गाड़ी में बैठ एक रईस से अपनी तारीफ सुन कर निहाल हुई जा रही थी.

और प्रिया ‘हां फैट खूब खाओ और ऐक्सरसाइज मत करो. फिर थुलथुल बौडी लेकर घूमना इन्हीं यानी शालू के साथ… तरुणकी तारीफ में क्यों बोलोगे? क्या गठीली बौडीहै. काश मेरा हबी ऐसा होता,’ प्रिया मन हीमन बोली.

शालू पर उड़ती नजर पड़ी तो न जाने क्यों वह जलन सी महसूस करने लगी. गाड़ी के ब्रेक के साथ सभी के उठते विचारों को भी ब्रेक लगे. पार्टी स्थल आ गया था.

मेहमान आ चुके थे. फंक्शन जोरों पर था. मीठीमीठी धुन के साथ कोल्डड्रिंक्स, मौकटेल के दौर चल रहे थे. तभी वधू का प्रवेश हुआ. स्टेज से उतर लड़के ने उस का स्वागत किया और स्टेज पर ले आया. तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सगाई की रस्म पूरी की गई.

सभी ने बारीबारी से स्टेज पर आ कर बधाई दी. लड़कालड़की की शान में कुछ कहना भी था उन्हें चाहे गा कर चाहे वैसे ही. सभी ने कुछ न कुछ सुनाया.

तरुण और शालू स्टेज पर आए तो प्रिया की हसरत भरी नजरें डैशिंग तरुण पर ही जमी थीं. तरुण ने किसी गीत की मुश्किल से 2 लाइन ही गुनगुनाईं और फिर बधाई गिफ्ट थमा शालू का हाथ थामे शरमाते हुए स्टेज से उतर गया.

‘ओह तरुण की तो बस बौडी ही बौडी है. अंदर तो कुछ है ही नहीं… 2 शब्द भी नहीं बोल पाया लोगों के सामने. कितना शाई… गाना भी पूरा नहीं गा सका,’ तरुण को स्टेज पर चढ़ता देख प्रिया की आंखों में आई चमक की जगह अब निराशा झलक रही थी. आकर्षण कहीं काफूर हो रहा था.

‘शालू, आप ऐसे कैसे जा सकती हो बगैर डांस किए. मैं ने आप का बढि़या डांस देखा है… मेरे हाथों में… आइएआइए,’’ उमेशजी की पत्नी आशाजी ने आत्मीयता से उसे ऊपर बुला लिया.

शालू ने तरुण को इशारा किया. शालू ने तरुण को इशारे से ही तसल्ली दी और सैंडल उतार कर स्टेज पर आ गई.

फरमाइश का गाना बज उठा. फिर तो शालू ऐसी नाची कि सभी उस के साथ तालियां बजाते हुए मस्त हो थिरकने लगे. तरुण ने देखा वैस्टर्न डांस पर थिरकने वाले लोग भी ठुमकने लगे थे… वह नाहक ही घबरा रहा था… शालू तो छा गई…

गाना खत्म हुआ तो प्रिया के साथ रणवीर स्टेज पर आ गया. उस ने अपनी ठहरी हुई आवाज और धाराप्रवाह में चंद शेरों से सजे संक्षिप्त वक्तव्य के द्वारा सब को ऐसा मंत्रमुगध किया कि सभी वंसमोर वंसमोर कह उठे. प्रिया भी उसे गर्व से देखने लगी कि कितने शालीन ढंग से कितने खूबसूरती से शब्दों को पिरो कर बोलता है रणवीर. उस के इसी अंदाज पर तो वह मर मिटी थी. उस ने कुहनी के पास से रणवीर का बाजू प्यार से पकड़ लिया था. दोनों ने फिर किसी इंगलिश धुन पर डांस किया.

अब डांस फ्लोर पर सभी एकसाथ डांस का मजा लेने लगे. डांस का म्यूजिक चल पड़ा था. स्टेज पर वरवधू भी थिरकने लगे. सभी पेयर में नृत्य कर रहे थे. कभी पेयर बदल भी लिए जा रहे थे. शालू ने धीरेधीरे तरुण के साथ 1-2 स्टेप लिए पर पेयर बदलते ही वह घबरा उठी और किनारे लगी सीट में एक पर जा बैठी. तरुण थोड़ी देर नई रस्म में शामिल हो नाचता रहा.

एक बार प्रिया भी उस के पास आ गई पर दूसरे ही पल वह दूसरे की बांहों में थिरकती तीसरी के पास पहुंच गई. तरुण को झटका सा लगा. कुछ अजीब सा फील होने लगा, ‘कैसे हैं ये लोग… रणवीर अपने में मस्त किसी और की पत्नी के साथ और उस की पत्नी प्रिया किसी और के पति के साथ… अजब कल्चर है इन का. इस से अच्छी तो मेरी शालू है.’ उस ने दूर अकेली बैठी शालू की ओर देखा और फिर उस के पास चला गया.

रणवीर ने देख लिया था, ‘उफ, शालू ने न तो खुद ऐंजौय किया और न पति को ही मजे लेने दिए. अपने पास बुला लिया… ऐसी पार्टियों के लायक ही नहीं वे… उधर प्रिया को देखो. कैसे एक हीरोइन सी सब की नजरों का केंद्र बनी हुई है. आई जस्ट लव हर…’ उसे नशा चढ़ने लगा था. कदमों के साथ उस की आवाज भी लड़खड़ाने लगी थी. रणवीर ने प्रिया को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया तो उस के कदम भी लड़खड़ाए और फिर फर्श पर जा गिरी. हड़कंप मच गया. क्या हुआ? क्या हुआ?

प्रिया दर्द से कराह उठी थी. पैर में फ्रैक्चर हो गया था. रणवीर तो खुद उसे उठाने की हालत में न था. तरुण और शालू ने जैसेतैसे अस्पताल पहुंचाया.

उमेशजी अपने ड्राइवर को गाड़ी ड्राइव करने के लिए बोल रहे थे पर रणवीर माना नहीं. रास्ते भर तरुण, उस की इधरउधर भागती गाड़ी के स्टेयरिंग को मुश्किल से संभालता रहा. पर इस सब से बेखबर शालू महंगी गाड़ी में बैठी एक बार फिर अपने रईस पति की कल्पना में खो गई थी.

प्रिया घर आ गई थी. उस के पैर में प्लास्टर चढ़ गया था. लाते समय भी शालू और तरुण अस्पताल पहुंचे थे. तभी एक गरीब महिला रोती हुई आई और सब से अपने बच्चे के लिए खून देने के लिए गुहार करने लगी.

‘‘तुम प्रिया मैडम के पास चलो शालू. मैं अभी आता हूं,’’ कह तरुण ने शालू से कहा तो वह उस का आशय समझ गई.‘‘अभी 10 दिन भी नहीं हुए तुम्हें खून दिए तरुण,’’ शालू बोली.

तरुण नहीं माना. उस गरीब को खून दे आया. फिर प्रिया को उस के फ्लोर पर सहीसलामत पहुंचाया. अगले दिन बौस से डांट भी खानी पड़ी. औफिस पहुंचने में लेट जो हो गया था.

‘तरुण भी न दूसरों की खातिर अपनी परवाह नहीं करता,’ शालू औटो में बैठी सोच रही थी.

अपने ब्लौक के गेट के पास आने पर उसे एक संतरे की रेहड़ी वाला दिखा. उस ने औटो रुकवाया और उतर कर औटो वाले को पैसे देने लगी.

तभी वहां से हवा में बातें करती एक लंबी सी गाड़ी गुजरी. वह रोमांचित हो उठी. उस ने सिर उठा कर देखा, ‘अरे ये तो हमारे पड़ोसी रणवीर हैं. काश, उस का पति भी कोई बीएमडब्ल्यू जैसी गाड़ी वाला होता.’ शालू अभी यह सोच ही रही थी कि वही गाड़ी उलटी साइड से आ कर रेहड़ी वाले से जा टकराई. रेहड़ी उलट गई और रेहड़ी वाला छिटक कर दूर जा गिरा. उस के संतरे सड़क पर चारों ओर बिखर गए. शालू ने साफ देखा था. गाड़ी गलत साइड से आ कर रेहड़ी वाले से टकराई थी. फिर भी रणवीर ने तमाचे उस गरीब को जड़ दिए. फिर चीख कर बोला, ‘‘देख कर नहीं चल सकता?’’

‘‘साहबजी…’’ आंसू बन रेहड़ी वाले का दर्द आंखों में उतर आया. वह हाथ जोड़े इतना ही बोल सका.

‘‘ये पकड़ अपने नुकसान के रुपए… ज्यादा नाटक मत कर… कुछ नहीं हुआ… अब जल्दी सड़क साफ कर,’’ कह रणीवर ने उसे 2 हजार का 1 नोट दिया. शालू रणवीर का क्रूर व्यवहार देखती रह गई कि इतना अमानवीय बरताव…

उस की महंगी गाड़ी फिर तेजी से उस की आंखों से ओझल हो गई. शालू को इस समय कोई रोमांच न हुआ, बल्कि उसे अपनी आंखों में नमी सी महसूस होने लगी. उस ने पर्स से रुमाल निकाल कर रेहड़ी वाले के माथे से रिसता खून पोंछ कर बैंडएड चोट पर चिका दी. फिर संतरे उठवाने में उस की मदद करने लगी.

‘‘रहने दीजिए मैडमजी मैं उठा लूंगा,’’ रेहड़ी वाले के पैरों और हाथों में भी चोटें थीं.

शालू ने नजरों से ओझल हुई उस गाड़ी की ओर देखा. वहां सिर्फ धूल का गुबार था, जिस ने उस की सपनीली कल्पना को उड़ा कर रख दिया कि शुक्र है उस का तरुण महंगी बड़ी गाड़ी में घूमने वाले ऐसे छोटे दिल के घटिया इंसान की तरह नहीं है. न जाने उस ने कितनी बार तरुण को ऐसे जरूरतमंदों की मदद करते देखा है. रईस ही तो है वह. वास्तव में बड़े दिल वाला रईस. शालू को तरुण पर प्यार आने लगा और फिर वह तेज कदमों से घर की ओर बढ़ चली.

Cannes 2024 : मैच हुई अथिया शेट्टी और शोभिता धुलिपाला की ड्रेस, लोगों ने किया ट्रोल

इन दिनों कान्स फिल्म फेस्टिवल में सितारे अपना खूब जलवा बिखेर रहे हैं हर बार की तरह कान्स 2024 हौलीवुड और बौलीवुड दोनों के लिए रंगमंच भरा रहा है. जहां एक्ट्रेसेस एक से बढ़कर एक स्टाइलिश ड्रेसेस में अपनी खूबसूरती से लोगों का दिल जीत रही हैं. ऐसे ही कान्स में डेब्यू करने पहुंची शोभिता धुलिपाला भी शिरकत करती हुई नजर आई. जहां उनकी ड्रेस सुनील शेट्टी की बेटी से मैच करती हुई नजर आई.

 

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जी हां, रेड कार्पेट पर हसीनाओं ने खूबसूरती की लहर बहा दी. जहां कभी एक साल पहले सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी भी नजर आई थीं. लेकिन अब जैसा लुक अथिया ने कैरी किया था, वैसा ही शोभिता ने इस साल कैरी किया है. दोनों एक्ट्रेस की ड्रेस कपेंयर की जा रही है. हालांकि, शोभिता ने जिस अंदाज से अपने आउटफिट को पहना है, उसकी तारीफ करने वालों की भी कमी नहीं है.

एक लग्जरी आइसक्रीम ब्रांड को प्रमोट करने कान्स पहुंची शोभिता ने गाउन या किसी ड्रेस की बजाए जंपसूट पहना सही समझा. वह पर्पल और पिंक कलर के जंपसूट में नजर आईं. जिस पर सेक्विन सितारों से डीटेलिंग की गई थी. इसी जंपसूट में अथिया को लास्ट ईयर लैक्मे फैशन वीक में वॉक करते हुए देखा गया था. जिन्हें फेमस डिजाइनर नम्रता जोशीपुरा ने ही डिजाइन किया है. इंटरनेट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसकी कीमत 1.8 लाख रुपये है.

 

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शोभिता का ये ब्लिंगी जंपसूट उनके लुक में भी ब्लिंग लेकर आ रहा था. जिसे एक्ट्रेस ने शानदार तरीके से स्टाइल किया.हालांकि, उनका लुक बहुत हद तक अथिया के जैसा ही था. डीप वी नेकलाइन वाले इस जंपसूट को स्लीवलेस रखते हुए दोनों शोल्डर से नेट की ट्रेल दी गई, जो फ्लोर तक टच हो रही थी. वहीं, पैंट को बेल बॉटम स्टाइल में बनाया गया. जिसके आखिर में फ्लेयर्स डाली गई. पैंट को क्रॉप टॉप से एक सर्कुल डिजाइन की मदद से अटैच किया गया था.

इस पूरे आइटफिट का बेस पर्पल था, तो इस पर पिंक सेक्विन सितारों से क्रॉप टॉप पर विंग्स की तरह डिजाइन बनाया गया था. वहीं, पैंट में सितारों को लाइनों में लगाया गया, जो काफी अट्रैक्टिव लग रहा था. नेट की ट्रेल पर जिगजैग लाइन बनाकर बॉक्स स्टाइल डीटेलिंग की गई थी. पैंट के आखिर में पिंक कलर से ऐड की गई फ्लेयर्स कमाल की लग रही थी.

पवन सिंह के इस गाने ने लगाई यूट्यूब पर भीड़, मिले करोड़ों व्यूज

भोजपुरी के गाने सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करते है भोजपुरी गाने बौलीवुड को भी टक्कर देते है. ज्यादात्तर सुपरस्टार पवन सिंह के गानें लोगों को पसंद आते है. वही, पवन सिंह इन दिनों लोकसभा चुनावों को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रहे है, इसी बीच उनका गाना भी यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहा है. जी हां, चुनाव के बीच पवन सिंह का ‘लॉलीपॉप लागेलू’ खूब ट्रेंड कर रहा है जिसे अबतक इतने व्यूज मिल चुके है. जिसने यूट्यूब पर इतिहास रच दिया है.

 

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बता दें कि पवन सिंह आज जो कुछ भी है वो उनकी कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है. हालांकि इस गाने ने पवन सिंह की किस्मत एक बार में ही पलट दी थी. दरअसल आज से सालों पहले पवन सिंह का गाना ‘लॉलीपॉप लागेलू’ रिलीज हुआ था, जिसे लोगों ने जमकर प्यार दिया है. यह सॉन्ग केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पॉपुलर है. पवन सिंह के इस गाने ने अब यूट्यूब पर नया रिकॉर्ड बनाया है. सॉन्ग को अबतक 227 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं. यह सॉन्ग आज ही हर पार्टी और शादी में बजता है.

बताते चलें कि इस बार पवन सिंह को आसनसोल से टिकट मिला था. हालांकि किसी वजह से पवन सिंह ने यहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया. बता दें कि अब पवन सिंह काराकाट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मालूम हो कि भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने कई फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा हैं. उनकी एक्टिंग को लोग काफी पसंद करते हैं.

Loksabha Election 2024: बेहिसाब होता खर्च

भारत के संविधान निर्माताओं और आजादी की लड़ाई लड़ने वाले अमर शहीदों ने कभी सोचा ही नहीं होगा कि उन के आजाद देश में जब चुनाव होंगे, तो उन्हें पैसे के बूते कुछ लोग हाईजैक कर लेंगे. चुनावी खर्च जिस तरह बेलगाम होते जा रहे हैं, उस पर बृजेश माथुर की सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर यह एक टिप्पणी बहुत खास है:

‘बेहतर होगा कि चुनाव आयोग इन मामलों की खुद जांच करे. पता लगाए कि अवैध बरामदगी के पीछे कौन सा उम्मीदवार या दल है और फिर उस के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो. इस तरह की सख्ती के बिना चुनावों में धनबल का दखल नहीं रुकेगा.

‘यह सही है कि चुनाव में धनबल का इस्तेमाल रोकने के लिए चुनाव आयोग की सतर्कता बढ़ी है, लेकिन यह सिर्फ धरपकड़ तक सीमित है. ऐसे मामलों में सजा की दर बहुत कम है, क्योंकि चुनाव के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं लेते. अकसर असली सरगना छुटभैयों को फंसा कर बच जाते हैं.’

दरअसल, लोकतंत्र का महाकुंभ कहलाने वाले लोकसभा चुनाव में आज जिस तरह चुनाव में करोड़ों रुपए हर लोकसभा संसदीय क्षेत्र में खर्च हो रहे हैं, उस से यह तो साफ हो जाता है कि आम आदमी या कोई सामान्य काबिल इनसान संसद में पहुंचने के लिए सात जन्म लेगा तो भी नहीं पहुंच पाएगा.

लोकसभा चुनाव 2024 में माना जा रहा है कि खर्च के मामले में पिछले सारे रिकौर्ड टूट जाएंगे और दुनिया का सब से बड़ा लोकतांत्रिक देश कहलाने वाले भारत में चुनाव खर्च अपनी हद पर होंगे यानी भारत में दुनिया की सब से खर्चीली चुनावी व्यवस्था होगी.

चुनाव पर गंभीरता से नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2024 में अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है. अगर बात की जाए लोकसभा चुनाव 2019 में खर्च की तो 60,000 करोड़ रुपए से दोगुने से भी ज्यादा है.

दरअसल, इस में राजनीतिक दलों और संगठनों, उम्मीदवारों, सरकार और निर्वाचन आयोग समेत चुनावों से संबंधित सभी तरह के खर्च शामिल हैं. चुनाव संबंधी खर्चों पर बीते 40 साल से नजर रख रहे एक गैरलाभकारी संगठन के अध्यक्ष एन. भास्कर राव के दावे के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है.

माहिरों का मानना है कि भारत में चुनावी बौंड के खुलासे से साफ हो गया है कि पार्टियों के पास खुल कर खर्च करने के लिए पैसा है. राजनीतिक दलों ने उस पैसे को खर्च करने के रास्ते तैयार कर लिए हैं.

जैसा कि हम जानते हैं देश में काले धन की बात की जाती है, भ्रष्टाचार की बात की जाती है. यह सबकुछ चुनाव के दरमियान देखा जा सकता है और चौकचौराहे पर इस पर चर्चा होने लगी है कि आखिर प्रमुख राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवार जो करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं, वे आते कहां से हैं? मगर इस दिशा में न तो सरकार ध्यान दे रही है और न ही चुनाव आयोग या फिर सुप्रीम कोर्ट या सरकार की कोई जांच एजेंसी.

भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वह सबकुछ कर रही है, जो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. इस का आज की तारीख में अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.

हो सकता है कि आने वाले समय में इस का खुलासा हो पाए कि भाजपा ने लोकसभा 2024 में कितना पैसा खर्च किया. माना जा रहा है कि चुनाव प्रचार में हो रहे खर्च के मामले में यह पार्टी देश की विपक्षी पार्टियों को बहुत पीछे छोड़ देगी.

एक एनजीओ के जरीए से इस पर निगाह रखने वाले संगठन के पदाधिकारी के मुताबिक, उन्होंने शुरुआती खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा कर 1.35 लाख करोड़ रुपए कर दिया, जिस में चुनावी बौंड के खुलासे के बाद के आंकड़े और सभी चुनाव संबंधित खर्चों का हिसाब शामिल है.

एक और संगठन ने दावा किया कि साल 2004-05 से साल 2022-23 तक देश के 6 प्रमुख राजनीतिक दलों को कुल 19,083 करोड़ रुपए का तकरीबन 60 फीसदी योगदान अज्ञात स्रोतों से मिला, जिस में चुनावी बौंड से मिला पैसा भी शामिल था.

एक और संगठन ने बताया कि चुनाव से पहले की गतिविधियां पार्टियों और उम्मीदवारों के प्रचार खर्च का अटूट हिस्सा हैं, जिन में राजनीतिक रैलियां, परिवहन, कार्यकर्ताओं की बहाली और यहां तक कि नेताओं की विवादास्पद खरीदफरोख्त भी शामिल है.

इसी तरह विदेश में बैठे चुनाव पर निगाह रखने वाले एक संगठन के मुताबिक, भारत में 96.6 करोड़ वोटरों के साथ प्रति वोटर खर्च तकरीबन 1,400 रुपए होने का अंदाजा है. यह भी कहा गया कि यह खर्च साल 2020 के अमेरिकी चुनाव के खर्च से ज्यादा है, जो 14.4 अरब डौलर या तकरीबन 1.2 लाख करोड़ रुपए था.

एक विज्ञापन एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित वाधवा के मुताबिक, लोकसभा 2024 के इस  चुनाव में डिजिटल प्रचार बहुत ज्यादा हो रहा है. राजनीतिक दल कारपोरेट ब्रांड की तरह काम कर रहे हैं और पेशेवर एजेंसियों की सेवाएं ले रहे हैं.

इस तरह आज हमारे देश में जो लोकसभा चुनाव लड़ा जा रहा है, उस में राजनीतिक पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए तय सीमा से ज्यादा खर्च कर रही हैं.

ऐसे में अगर हम नैतिकता की बात करें, तो जब कोई पार्टी या उस के उम्मीदवार करोड़ों रुपए खर्च कर के चुनाव जीतते हैं, तो साफ है कि वे आम जनता के लिए जवाबदेह नहीं हो सकते. जिन लोगों ने उन्हें रुपएपैसे की मदद की है या गलत तरीकों से रुपया कमाया गया है, तो फिर चुने हुए प्रतिनिधि यकीनन अपने आकाओं के लिए काम करेंगे या फिर अपना फायदा पहले देखेंगे.

मकान मालिक को लगता है कि मेरा और उसकी बीवी का चक्कर चल रहा है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल का हूं और दिल्ली में अकेला किराए के घर में रहता हूं. मकान मालिक की बीवी मेरा खास खयाल रखती हैं और मुझे अपने छोटे भाई जैसा मानती हैं, पर मकान मालिक को लगता है कि हमारे बीच कुछ इश्क का चक्कर चल रहा है, क्योंकि वे अभी तक बेऔलाद हैं. इस बात से उन के घर में आएदिन क्लेश होता है. पर जब हमारे बीच में अच्छा रिश्ता है, तो मकान मालिक को क्यों नहीं समझ आता है. मुझे अब क्या करना चाहिए?

जवाब

यह समाज का दस्तूर है कि वह हर रिश्ते में खोट और कुछ न कुछ नाजायज ढूंढ़ता रहता है. यही आप दोनों के साथ हो रहा है. ऐसे में आप किसकिस को सफाई देंगे. चूंकि आप की मकान मालकिन बेऔलाद है, इसलिए उस के पति को शक हो रहा है कि वह आप से औलाद चाहने के लिए नजदीकियां बढ़ा रही है. अब यह खुद आप को तय करना है कि आप अपनी मुंहबोली बहन को क्लेश में पड़े देखना चाहते हैं या नहीं. मकान मालिक को सम   झा पाना अब आसान काम नहीं है, क्योंकि शक का इलाज तो लुकमान हकीम के पास भी नहीं था.

जिम जाएं पर जरा संभल कर

मुंबई में रहने वाले 26 साल के राकेश को जिम जाने का बहुत शौक था, क्योंकि उन्हें फिल्मों में हीरो के सिक्स पैक एब्स बहुत अच्छे लगते थे. उन्होंने जिम जौइन किया और एक दिन कुछ ज्यादा वजन उठा लिया, जिस से उन की कमर की मांसपेशी में दर्द शुरू हो गया.

डाक्टर ने राकेश को एक महीने का रैस्ट बताया. उन्होंने रैस्ट किया, पर मसल्स में दर्द अभी भी है, इसलिए उन्होंने जिम करना तकरीबन छोड़ रखा है.

वर्कआउट करने के शौकीन लोग आजकल ज्यादातर जिम में जाने से नहीं कतराते हैं, क्योंकि वहां का एयरकंडीशन और इंस्ट्रक्टर की ट्रेनिंग पसंद होती है. साथ ही, वहां रखी महंगी मशीनें भी लुभाती हैं, पर देखा जाए तो जिम में वर्कआउट करने की कई मशीनें होती हैं, जिन से हमें कई तरह के इंफैक्शन होने का खतरा बना रहता है.

आइए जानते हैं, जिम जाने से होने वाली बीमारियों के बारे में और हमें सावधानी बरतना जरूरी क्यों है :

हार्टअटैक आने का खतरा

एक रिसर्च में वर्कआउट के दौरान दिल को होने वाले नुकसान के संबंध में जानने की कोशिश की गई है. रिसर्च में उम्रदराज मर्द एथलीटों को शामिल किया गया. इस दौरान टीम ने पाया कि हैवी वर्कआउट से कोरोनरी ऐथेरोस्क्लेरोसिस नामक बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है.

दरअसल, इस बीमारी की वजह से आप के दिल की धमनियों के ऊपर और अंदर वसा व बैड कोलैस्ट्रौल जमा होने लगता है. इस हालत में हार्टअटैक होने का खतरा बढ़ जाता है.

रिसर्च में सामने आए नतीजों के मुताबिक, ये धमनियां पूरे शरीर में खून भेजती हैं और जब उन की भीतरी त्वचा ब्लौक होने लगती है तो खून का दौरा रुक जाता है. यही वजह है कि किसी शख्स को चलतेफिरते या फिर जिम करते हुए हार्टअटैक आ जाता है.

मांसपेशी में खिंचाव व दर्द

जिम में ज्यादा ऐक्सरसाइज करने से मांसपेशियों में खिंचाव व दर्द की समस्या हो सकती है. ज्यादा ऐक्सरसाइज करने से बौडी मसल्स पूरी तरह से ऐक्टिवेट हो जाते हैं. ऐसे में ओवर वर्कआउट करने से मसल्स में ज्यादा खिंचाव हो सकता है. बौडी पर ज्यादा दबाव डालने से दर्द या चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है.

भूख कम लगना

वर्कआउट करने के बाद आमतौर पर भूख ज्यादा लगती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐक्सरसाइज करने से भूख में कमी आ सकती है. इस के अलावा शरीर में हार्मोनल चैंजेज आने लगते हैं, जिस वजह से भूख कम हो जाती है. ओटीएस यानी ओवरट्रेनिंग सिंड्रोम भूख में कमी, थकावट और वजन कम होने की वजह बन सकता है.

नींद में परेशानी

जब बौडी के स्ट्रैस हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, तो बौडी सोते हुए भी तनाव महसूस करती है. तनाव में होने की वजह से सही नींद नहीं आती. ऐक्सरसाइज करने के बाद बौडी को रिकवरी की जरूरत होती है और नींद न आने की वजह से बौडी रिलैक्स नहीं हो पाती. कई बार पूरी नींद न आना थकान, मूड स्विंग और चिड़चिड़ेपन की वजह बन जाती है.

कमजोर इम्यूनिटी

ऐक्सरसाइज करने के बाद अगर थकान या कमजोरी महसूस हो रही है, तो सम?िए बौडी की इम्यूनिटी कमजोर हो रही है. ऐसा होने पर बौडी में इंफैक्शन और बीमारी आसानी से हो सकती है. ऐक्सरसाइज के साथ बौडी की इम्यूनिटी बढ़ाने पर भी जोर देना जरूरी होता है.

इतना ही नहीं, जिम में जाने से कई तरह की त्वचा संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं, जिस का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि एक शख्स के एक मशीन के इस्तेमाल के बाद दूसरा शख्स भी उसे इस्तेमाल करता है. कुछ बीमारियां इस तरह हैं :

* इंपैटिगो एक तरह का त्वचा से जुड़ा इंफैक्शन है, जो बैक्टीरिया के चलते होता है. इस इंफैक्शन से त्वचा लाल हो जाती है और प्रभावित जगह पर खुजली होनी शुरू हो जाती है. इस के बाद त्वचा पपड़ी छोड़ती है. यह इंफैक्शन एक इनसान से दूसरे इनसान में भी फैल सकता है.

* फंगस की वजह से अकसर स्किन पर दाद की समस्या हो जाती है. दाद इंफैक्शन वाली जगह या किसी शख्स को छूने पर फैलता है. रिंग की बनावट वाला यह इंफैक्शन लाल और पपड़ीदार होता है. दाद में खुजली और चुभन जैसी समस्या होती है.

* एथलीट फुट एक बेहद साधारण फंगल इंफैक्शन है और इसे ‘टिनिया पेडिस’ के नाम से जाना जाता है. यह पैरों में होता है और हाथ से खरोंचने पर हाथों में भी फैल सकता है.

* जिम में ह्यूमन पेपिलोमा वायरस का जोखिम भी होता है. जिम में नंगे पैर चलने से इस इंफैक्शन के होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए जिम करने के दौरान हमेशा जूते पहन कर चलें.

* जिम के अंदर हाईजीन का बहुत खयाल रखने की जरूरत होती है. किसी से भी किसी सामान को शेयर करने से बचें. मसलन, किसी का तौलिया, बोतल या दूसरे किसी भी निजी सामान का इस्तेमाल करने से बचें. किसी भी मशीन का इस्तेमाल करने से पहले उसे साफ करें.

 प्रोटीन की सही मात्रा

आम सोच यह है कि फैट और कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने से वजन बढ़ता है, इसलिए फिटनैस की दौड़ में शामिल लोग ज्यादा से ज्यादा ऐनर्जी, प्रोटीन वाला खाना लेना चाहते हैं. मैडिकल जर्नल नेचर मैटाबौलिज्म में पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, रोजाना शारीरिक जरूरत की 22 फीसदी से ज्यादा कैलोरी अगर प्रोटीन से ली जाए, तो यह इम्यून सेल्स को सक्रिय कर सकता है, शरीर में एमीनो एसिड बढ़ा सकता है. इस से आर्टरीज में ब्लौकेज आने लगती है, जो हार्टअटैक की वजह बन सकता है.

ऐक्सपर्ट की लें सलाह

मुंबई की कोकिलाबेन धीरूबाई हौस्पिटल की कंसल्टैंट स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट पूजा उदेशी समझाते हुए कहती हैं, ‘‘प्रोटीन पाउडर या सप्लीमैंट अपने शरीर और वजन के हिसाब से लेना पड़ता है. ज्यादा लेने पर उस का असर खराब हो सकता है. प्रोटीन के भी कई सारी वैराइटी वाले प्रोडक्ट होते हैं, जो मार्केट में मिलते हैं. इस के साइड इफैक्ट की अगर बात करें तो ज्यादा मात्रा में लेने पर किडनी की समस्या, कार्डिएक अरैस्ट या लिवर की समस्या वगैरह कुछ भी हो सकती है.

‘‘जिम करने वाले हर शख्स की प्रोटीन की जरूरत अलगअलग होती है, जिसे न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह ले कर लेना पड़ता है, ताकि शरीर को किसी तरह का नुकसान न हो.

‘‘एक किलोग्राम के वजन पर एक ग्राम प्रोटीन लिया जा सकता है. इस के अलावा किसी बीमारी, खेल खेलने या व्यायाम से प्रोटीन की जरूरत ज्यादा पड़ती है. शाकाहारी लोग जो ज्यादा प्रोटीन नहीं खा पाते, उन्हें प्रोटीन शेक लेने की जरूरत पड़ सकती है.

‘‘कितनी मात्रा में कोई शख्स प्रोटीन ले, इस की जानकारी ऐक्सपर्ट से ले लेना अच्छा होता है. नैचुरल प्रोडक्ट पर ज्यादा ध्यान देना अच्छा होता है, मसलन शाकाहारी लोग पनीर, अंकुरित दाल, सोयाबीन, ब्राउन राइस वगैरह ले सकते हैं, जबकि नौनवेज खाने वाले लोग अंडा, मछली, मांस वगैरह को नियमित खा सकते हैं.’’

जिम जाएं, पर कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें, ताकि आप की फिटनैस और सेहत दोनों बनी रहें. कुछ सुझाव ये हैं :

* वर्कआउट या ऐक्सरसाइज हमेशा डाक्टर या ट्रेनर की सलाह से ही करना बेहतर है.

* फिटनैस को मेंटेन रखने के लिए नौर्मल लैवल की ऐक्सरसाइज ही करनी चाहिए.

* हैवी ऐक्सरसाइज करने से बौडी और हार्ट दोनों पर नैगेटिव इफैक्ट पड़ने लगता है.

* ट्रेडमिल या किसी कार्डियो ऐक्सरसाइज करते समय एक बार में 10 मिनट से ज्यादा वक्त न बिताएं.

* हर कार्डियो ऐक्सरसाइज के बाद कम से कम 5 मिनट का ब्रेक जरूर लें, ताकि हार्ट को रिलैक्स फील हो.

* वर्कआउट के दौरान अगर छाती की लेफ्ट साइड में दर्द हो, तो तुरंत ऐक्सराइज रोक कर डाक्टर से मिलें.

पति की संतान : क्या पति को ठीक कर पाई सरिता

पहले सरिता घर के बहुत से काम निबटा लेती थी. लेकिन जब से पति बीमार हुए थे और बिस्तर पकड़ चुके थे तब से पार्ट टाइम कामवाली बाई से उस का काम नहीं चलता था. उसे परमानैंट नौकरानी की जरूरत थी जो पूरा घर संभाल सके.

सरिता को पति का मैडिकल स्टोर सुबह से रात तक चलाना होता था. दुकान में 3 नौकर थे. सरिता बीच में थोड़ी देर के लिए खाना खाने और फ्रैश होने घर आती थी. सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक उसे मैडिकल स्टोर पर बैठना पड़ता था. काम सारा नौकर ही करते थे लेकिन हिसाब उसे ही देखना पड़ता था.

काफी समय तक सरिता को बहुत समस्या हुई. घर में एक बेटा, एक बेटी थे जो 8वीं और 9वीं क्लास में पढ़ते थे. उन के लिए चाय, नाश्ता, सुबह का टिफिन तैयार कर के स्कूल भेजना और शाम की चाय के बाद भोजन तैयार करना और खिलाना सब हरीतिमा की जिम्मेदारी थी.

बीमार पति को समय पर दवाएं और डाक्टर के बताए मुताबिक भोजन देना… यह सब हरीतिमा के बिना मुमकिन नहीं था.

सरिता जब बहुत परेशान हो गई तब उस ने एजेंसी में जा कर कई बार परमानैंट नौकरानी का इंतजाम करने के लिए कहा.

एक दिन एजेंसी के मालिक ने कहा, ‘‘अभी तो कोई लड़की नहीं है. जल्द ही असम और बिहार से लड़कियां आने वाली हैं. मैं आप को बता दूंगा.’’

सरिता ने एजेंसी वाले से कहा, ‘‘आप ज्यादा कमीशन ले लेना. लड़की को अच्छी तनख्वाह के साथ रहनेखाने की सारी सुविधाएं भी दूंगी लेकिन मुझे उस की सख्त जरूरत है.’’

और जल्द ही एजेंसी वाले का फोन आ गया. एजेंसी से 13 साल की हरीतिमा को लाने के बाद सरिता की सारी मुसीबतों का हल हो गया.

हरीतिमा सुबह से रात तक चकरघिन्नी बनी रहती. पूरे घर का काम करती. घर के हर सदस्य का ध्यान रखती.

हर समय पूरा घर साफसुथरा रहता. हरीतिमा हमेशा काम करती नजर आती. न कोई नखरा, न कोई शिकायत और न कोई छुट्टी.

13 साल की खूबसूरत, गोरी, नाजुक, मेहनती हरीतिमा बिहार के एक छोटे से गांव की थी. घर की माली हालत खराब थी. मां बीमार थीं. घर में 2 छोटे भाई थे. उस के पिता बचपन में ही गुजर गए थे.

शुक्रवार को जब मैडिकल स्टोर बंद रहता तब सरिता उस से बात करती. उस से पूछती, ‘‘किसी चीज की कोई जरूरत हो तो बे?ि?ाक कहना. खाने में जो पसंद हो, बना कर खा लिया करो.’’

हरीतिमा को पढ़ने का शौक था. सरिता उस के लिए किताबें भी ला देती.

पति रतनलाल के एक के बाद एक 2-3 बड़े आपरेशन हुए थे. उन्हें आराम की सख्त जरूरत थी.

सरिता पति के कमरे में कम ही जाती थी. कमरे से आती दवाओं और गंदगी की बदबू से उसे उबकाई आती थी. पति की ऐसी बुरी दशा देखने का भी उस का मन नहीं करता था.

पति बिस्तर पर लेटे रहते. काफी समय तक तो उन के मलमूत्र का मार्ग बंद कर प्लास्टिक की थैलियां लटका दी गई थीं. उन्हें साफ करने का काम पहले तो एक नर्स करती थी, बाद में रतनलाल खुद करने लगे थे. लेकिन अब हरीतिमा ने इस जिम्मेदारी को संभाल लिया था.

सरिता को लगता था कि उस के पति की जिंदगी एक तरह से खत्म ही हो चुकी है. उन्हें बाकी जिंदगी बिस्तर पर ही गुजारनी है. ठीक हो भी गए तो पहले जैसे नहीं रहेंगे.

सरिता ने अपना कमरा अलग तैयार कर लिया था. अपनी जरूरतों के हिसाब से सबकुछ अपने कमरे में रख लिया था. बच्चे बड़े हो रहे थे. वह गलती से ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहती थी कि बच्चों की जिंदगी पर उस का बुरा असर पड़े.

सरिता की उम्र 40 साल थी और पति की उम्र 45 साल के आसपास. पिछले एक साल से वह पति की दुकान और घर सब देख रही थी.

आज रतनलाल को प्लास्टिक की थैली निकलवाने जाना था, लेकिन यह बहुत आसान काम नहीं था.

सरिता को साथ जाना था लेकिन उस ने कह दिया, ‘‘मैं जा कर क्या करूंगी? मु?ा से यह सब देखा नहीं जाता. तुम हरीतिमा को साथ ले जाओ. फिर मु?ो दुकान भी देखनी है. काम करूंगी तो पैसा आएगा. आप के इलाज में लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं.’’ तय हुआ कि हरीतिमा ही साथ जाएगी.

रतनलाल अस्पताल से 3 दिन बाद घर वापस आए. उन्हें परहेज के साथ दवाएं समय पर लेनी थीं.

हरीतिमा बोर न हो, इस वजह से सरिता शुक्रवार को उसे बच्चों के साथ बाहर घुमाने ले जाती. बच्चे जो खाते, हरीतिमा को भी खिलाया जाता. चाट, पकौड़े, गोलगप्पे. बच्चे पार्क में खेलते तो हरीतिमा भी साथ में खेलती. बच्चों के लिए कपड़े खरीदने जाते तो हरीतिमा के लिए भी खरीदे जाते.

चाट खाते समय एक लड़के ने हरीतिमा से बात की. सरिता को अच्छा नहीं लगा. लौटते समय सरिता ने उस से पूछा, ‘‘तुम इसे कैसे जानती हो?’’

‘‘मेरे मुल्क का है मैडम.’’

‘‘मुल्क के नहीं राज्य के. मुल्क तो हम सब का एक ही है,’’ सरिता ने हंसते हुए कहा, फिर उसे सम?ाया, ‘‘देखो हरीतिमा, तुम मेरी बेटी जैसी हो. इस उम्र में लड़कों से दोस्ती ठीक नहीं है. अभी तुम्हारी उम्र महज 15 साल है.’’

अब हरीतिमा को अकसर ऐसी हिदायतें मिलने लगी थीं.

रतनलाल लाठी के सहारे घर में ही टहलने लगे थे. एक बार वे लड़खड़ा

कर गिर गए. तब से सरिता ने हरीतिमा को हिदायत दी, ‘‘तुम अंकल को थोड़ा बाहर तक घुमा दिया करो. कहीं और कोई परेशानी न हो जाए.’’

तब से हरीतिमा घर से थोड़ी दूर बने पार्क में उन के साथ जाने लगी. वह पहले जैसी शांत और सहमी हुई नहीं थी. अब वह हंसने, बोलने लगी थी. खुश रहने लगी थी.

लेकिन हरीतिमा के खिलते शरीर और उस में आए बदलावों को देख कर सरिता जरूर चिंता में रहने लगी थी. उसे उस लड़के का चेहरा याद आया तो क्या बाहर जा कर इतनी उम्र में वह सब करने लगी थी हरीतिमा, जो उस की उम्र की लिहाज से गलत था? कहीं पेट में कुछ ठहर गया तो? सरिता ने एजेंसी वाले को सारी बात फोन पर बताई.

एजेंसी वाले ने कहा, ‘‘मैडम, यह उस का निजी मामला है. हम और आप इस में क्या कर सकते हैं? वह अपनी नौकरी से बेईमानी नहीं करती. आप के घर की देखभाल ईमानदारी से कर रही है. और आप को क्या चाहिए?’’

सरिता को लगा कि एजेंसी वाला ठीक ही कह रहा है. फिर हरीतिमा उस की जरूरत बन गई थी. जरूरी नहीं कि दूसरी लड़की इतनी ईमानदार हो, मेहनती हो.

सरिता इस बात को भूलने की कोशिश कर ही रही थी. 2-4 दिन ही गुजरे थे कि सरिता ने हरीतिमा को उलटी करते हुए देख लिया.

सरिता घबरा गई. उस ने प्यार से हरीतिमा के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा, ‘‘तुम ने आखिर बेवकूफी कर ही दी. जब यह सब कर रही थी तो सावधानी क्यों नहीं बरती? कितना समय हो गया? अभी जा कर अपने चाहने वाले के साथ मिल कर डाक्टर से अबौर्शन करा लो. बाद में मुसीबत में पड़ जाओगी और तुम्हारे आशिक को बलात्कार के जुर्म में जेल हो जाएगी. इतना तो सम?ाती होगी कि 18 साल से कम उम्र की लड़की से संबंध बनाना बलात्कार कहलाता है?’’

हरीतिमा ने कुछ नहीं कहा.

‘‘चुप रहने से काम नहीं चलेगा…’’ सरिता ने गुस्से में कहा, ‘‘मैं इस हालत में तुम्हें काम पर नहीं रख सकती. अभी इसी वक्त निकल जाओ मेरे घर से.’’

हरीतिमा रोने लगी. उस ने सरिता के पैर पकड़ते हुए कहा, ‘‘मैडम, गलती हो गई. मु?ो माफ कर दीजिए. आप ही कोई रास्ता निकालिए. मैं इस घर को छोड़ कर कहीं नहीं जाऊंगी.’’

सरिता को गुस्सा तो था लेकिन हरीतिमा की जरूरत भी थी. उस ने अपने परिचित डाक्टर को दिखाया. एक महीने का पेट था. 5,000 रुपए ले कर डाक्टर ने आसानी से पेट गिरा दिया.

सरिता ने फिर डांटा, सम?ाया और दोबारा ऐसी गलती न करने को कहा.

रात में उसे अपने पास बिठा कर प्यार से पूछा, ‘‘कौन है वह, जिस के साथ तुम्हारे संबंध बने? चाटपकौड़े की दुकान में मिला वह लड़का?’’

हरीतिमा चुप रही. सरिता समझ गई कि वह बताना नहीं चाहती.

रतनलाल की ठीक होती तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. उन्हें फिर अस्पताल ले जाया गया. डाक्टरों ने हालत गंभीर बताई. जिस कैंसर से वे उबर चुके थे, वही कैंसर उन्हें पूरी तरह अंदर ही अंदर खोखला कर चुका था.

अस्पताल में ही रतनलाल की मौत हो गई. उस दिन सरिता फूटफूट कर रोई और हरीतिमा अकेले में अपनी रुलाई रोकने की कोशिश करती रही.

पति के अंतिम संस्कार की सारी रस्में निबट चुकी थीं. सरिता की जिंदगी अपने ढर्रे पर आ चुकी थी. बच्चे अपनी पढ़ाई में लग चुके थे. दुख की परतें अब छंटने लगी थीं.

तभी फिर सरिता को हरीतिमा में वे सारे लक्षण दिखे जो एक गर्भवती औरत में दिखाई देते हैं. इस बार हरीतिमा अपने पेट को छिपाने की कोशिश करती नजर आ रही थी.

सरिता ने उसे गुस्से में थप्पड़ जड़ कर कहा, ‘‘फिर वही पाप…’’ इस बार हरीतिमा ने जवाब दिया, ‘‘पाप नहीं, मेरे प्यार की निशानी है.’’

हरीतिमा का जवाब सुन कर सरिता सन्न रह गई, ‘‘प्यार समझाती भी हो? यह प्यार नहीं हवस है, बलात्कार है. चलो, अभी डाक्टर के पास,’’ सरिता ने गुस्से में कहा.

‘‘मैं नहीं गिराऊंगी.’’

‘‘यह कानूनन अपराध है. जेल जाएगा तुम्हारा आशिक.’’

‘‘कुछ भी हो, मैं इस बच्चे को जन्म दूंगी.’’

‘‘तुम्हारा दिमाग खराब है क्या? समझाती क्यों नहीं हो?’’

‘‘हां, मेरा दिमाग खराब है. प्यार ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है.’’

‘‘बुलाओ इस बच्चे के बाप को.’’

‘‘वे अब इस दुनिया में नहीं हैं.’’

‘‘क्या… कौन है वह?’’

‘‘मैं उन्हें बदनाम नहीं करना चाहती.’’

‘‘चली जाओ यहां से.’’

हरीतिमा चली गई. सरिता ने एजेंसी वाले को फोन कर दिया.

एजेंसी वाले ने कहा, ‘‘आप निश्चिंत रहिए. मैं सब संभाल लूंगा.’’

सरिता निश्चिंत हो गई. कुछ दिन बीत गए. एक दिन वह घर की साफसफाई करने लगी. पति के कमरे का नंबर आया तो सरिता ने पति के सारे कपड़े, पलंग, बिस्तर सबकुछ दान कर दिया. वह एक अरसे बाद पति के कमरे में गई थी.

कमरा पूरी तरह खाली था. बस, एक पैन और डायरी रखी थी. सरिता ने डायरी के पन्ने पलटे. कुछ जगह हिसाब लिखा हुआ था. कुछ कागजों पर दवा लेने की नियमावली. एक पन्ने पर हरी स्याही से लिखा था हरीतिमा. यह नाम पढ़ कर वह चौंक गई. उस ने अपने कमरे में जा कर हरीतिमा के बाद पढ़ना शुरू किया…

‘सरिता, माना कि 15 साल की लड़की से प्यार करना गलत है. उस से संबंध बनाना अपराध है. लेकिन इस अपराध की हिस्सेदार तुम भी हो. मैं बीमार क्या हुआ, तुम ने मु?ो मरा ही सम?ा लिया. अपना कमरा बदल लिया. मेरे कमरे में आना, मु?ा से मिलना तक बंद कर दिया.

‘‘मेरे दिल पर क्या गुजरती होगी, तुम ने सोचा कभी? लेकिन तुम तो जिम्मेदारियां निभाने में लगी थीं. मैं तो जैसे अछूत हो चुका था तुम्हारे लिए.

‘सच कहूं तो मैं तुम्हारी बेरुखी देख कर ठीक होना ही नहीं चाहता था. लेकिन मैं ठीक हुआ हरीतिमा की देखभाल से. उस के प्यार से.

‘हां, मैं ने हरीतिमा से तुम्हारी शिकायतें कीं. उस से प्यार के वादे किए. उस के पैर पड़ा कि मेरी जिंदगी में तुम्हीं बहार ला सकती हो. मुझे तुम्हारी जरूरत है हरीतिमा. मैं तुम से प्यार करता हूं.

‘कम उम्र की नाजुक कोमल भावों से भरी लड़की मेरे प्यार में बह गई. उस ने मेरी जिस्मानी और दिमागी जरूरतें पूरी कीं.

‘हां, वह मेरे ही बच्चे की मां बनने वाली है. मैं उस के बच्चे को अपना नाम दूंगा. दुनिया इसे पाप कहे या अपराध, लेकिन वह मेरा प्यार है. मेरी पतझड़ भरी जिंदगी में वह हरियाली बन कर आई थी.

‘इस घर पर जितना तुम्हारा हक है, उतना ही हरीतिमा का भी है. लेकिन अब मुझे लगने लगा है कि मैं बचूंगा नहीं. अचानक से सारे शरीर में पहले की तरह भयंकर दर्द उठने लगा है.

‘मैं तुम से किसी बात के लिए माफी नहीं मांगूंगा. चिंता है तो बस हरीतिमा की. अपने होने वाले बच्चे की. उसे तुम्हारी दौलत नहीं चाहिए. तुम्हारा बंगला, तुम्हारा बैंक बैलैंस नहीं चाहिए. उसे बस सहारा चाहिए, प्यार चाहिए.’

डायरी खत्म हो चुकी थी. सरिता अवाक थी. उसे अपने पति पर गुस्सा आ रहा था और खुद पर शर्मिंदगी भी. किस तरह ?ाटक दिया था उस ने अपने पति को. बीमारी, लाचारी की हालत में. हां, वही जिम्मेदार है अपने पति की बेवफाई के लिए. इसे बेवफाई कहें या अकेले टूटे हुए इनसान की जरूरत.

सरिता को उसी एजेंसी से दूसरी लड़की मिल चुकी थी. उस ने पूछा, ‘‘तुम हरीतिमा को जानती हो?’’

‘‘नहीं मैडम, एजेंसी वाले जानते होंगे.’’

सरिता ने एजेंसी में फोन लगा कर बात की.

एजेंसी वाले ने कहा, ‘क्या बताएं मैडम, किस के प्यार में थी? बच्चा गिराने को भी तैयार नहीं थी. न ही मरते दम तक बच्चे के बाप का नाम बताया.’

‘‘मरते दम तक… मतलब?’’ सरिता ने पूछा.

‘हरीतिमा बच्चे को जन्म देते समय ही मर गई थी.’

‘‘क्या…’’ सरिता चौंक गई ‘‘और बच्चा…’’

‘‘वह अनाथाश्रम में है.’’

सरिता सोचने लगी, ‘एक मैं हूं जिस ने पति के बंगले, कारोबार, बैंक बैलैंस को अपना कर पति को छोड़ दिया बंद कमरे में. बीमार, लाचार पति. बच्चों तक को दूर कर दिया. और एक गरीब हरीतिमा, जिस ने न केवल बीमारी की हालत में पति की देखभाल की, अपना सबकुछ सौंप दिया. यह जानते हुए

भी कि उसे कुछ नहीं मिलेगा सिवा बदनामी के.

‘उस ने अपने प्यार की निशानी को जन्म दिया. वह चाहती तो क्या नहीं कर सकती थी? इस धनदौलत पर उस का भी हक बनता था. वह ले सकती थी लेकिन उस ने सबकुछ छोड़ दिया अपने प्यार की खातिर. उस ने एक बीमार मरते आदमी से प्यार किया और उसे निभाया भी और एक मैं हूं…

‘चाहे कुछ भी हो जाए, मैं हरीतिमा के प्यार की निशानी, अपने पति के बच्चे को इस घर में ला कर रहूंगी. मैं पत्नी का धर्म तो नहीं निभा सकी, पर उन की संतान के प्रति मां होने की जिम्मेदारी तो निभा ही सकती हूं.’ सारी कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद सरिता बच्चे को घर ले आई.

बिसात शतरंज की : कैसा था राठी का बेटा

राठीजी को अपने होनहार बेटे आरव पर बड़ा नाज था और होता भी क्यों नहीं, पूरे महल्ले में अकेला आरव ही तो था, जो राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामैंट जीत कर आया था और अब शहर की शतरंज एकेडमी में आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रहा था.

तकरीबन 6 फुट लंबा आरव बहुत हंसमुख था और सब से अच्छे से मिलता था. हर कोई उस के अच्छे बरताव का कायल हो जाता था. उसे अपनी कामयाबी पर बिलकुल भी घमंड नहीं था.

22 साल के आरव के घर में उस के मांबाप और एक बहन रूही रहते थे. राठीजी के इस परिवार में उस दिन खलबली मच गई, जब एक दिन दोपहर को 25 साल के आसपास की उम्र की एक लड़की ने उन के घर का दरवाजा खटखटाया.

मिसेज राठी ने दरवाजा खोला, तो सामने देखा कि एक लड़की आंसुओं में डूबी हुई खड़ी थी.

एक अनजान लड़की को सामने देख कर मिसेज राठी के चेहरे पर सवालिया निशान का भाव आ गया, जिसे पढ़ कर वह लड़की खुद ही बोलने लगी, ‘‘आंटीजी, मेरा नाम रीमा है. आप मु?ो नहीं जानतीं, पर मैं आप को जानती हूं.’’

मिसेज राठी ने रीमा को अंदर बुला कर बिठाया और पूछा कि वह किस से मिलने और किस काम से आई है?

यह बात सुन कर रीमा तेज आवाज में रोने लगी और आरव का नाम लेते हुए इलजाम लगा दिया कि आरव ने उस का रेप किया है.

‘‘क्या बकवास कर रही हो तुम? होश में तो हो न तुम, अभी दफा हो जाओ यहां से,’’ मिसेज राठी ने चिल्लाते हुए कहा.

मिसेज राठी की तेज आवाज सुन कर मिस्टर राठी और रूही भी वहां आ गए और सम?ाने में लग गए कि आखिर माजरा क्या है. रीमा अब भी रोए जा रही थी.

इतने में आरव भी वहां आ गया और रीमा को देख कर वह भी बुरी तरह से चौंक गया.

आरव को इस तरह से डरा हुआ देख कर उस के पापा ने रीमा से पूछा, ‘‘तुम जोकुछ भी कह रही हो, उस का कोई सुबूत है तुम्हारे पास?’’

इस बात को सुनते ही रीमा ने अपने बैग में से कुछ तसवीरें निकाल कर मिस्टर राठी की तरफ बढ़ा दीं, जिन में आरव और रीमा बेहद करीब दिखाई दे रहे थे. उन तसवीरों को देख कर साफ लग रहा था कि आरव ने रीमा का रेप किया है.

‘‘यह सब क्या है आरव?’’ पापा ने पूछा, तो आरव की जबान से एक शब्द न निकला और वह वहीं जड़ बन कर खड़ा हो गया.

पूरा परिवार खड़ा हुआ तमाशा देख रहा था. मिस्टर राठी ने पूछा कि आखिर यह सब हुआ कैसे, तो रीमा ने सुबकते हुए बताया, ‘‘मैं भी शतरंज की खिलाड़ी हूं और शतरंज में ही अपना कैरियर बनाना चाहती हूं. मैं ने आरव को शतरंज एकेडमी में देखा था और इसीलिए इस से कुछ टिप्स लिया करती थी.

‘‘मैं कभीकभार फोन कर के भी मदद लिया करती थी, आप चाहें तो आरव के मोबाइल में मेरे नंबर से आई हुईं काल्स चैक कर सकते हैं,’’ रीमा बहुत यकीन से सब बातें कह रही थी.

मिस्टर राठी को अपने होनहार बेटे से इस तरह की उम्मीद नहीं थी.

‘‘और वैसे भी मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है. अब मेरे सामने दो ही रास्ते हैं, या तो मैं खुदकुशी कर लूं या फिर पुलिस में जा कर आरव के खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दूं,’’ रीमा की आवाज में छिपी हुई धमकी थी, जिसे सुन कर राठी परिवार बदनामी के डर से घबरा गया.

‘‘नहींनहीं, पुलिस में मत जाओ. पुलिस हमारे घर पूछताछ करने आएगी, मीडिया का जमावड़ा होगा, हमारी तो बहुत बदनामी हो जाएगी,’’ आरव के पापा ने कहा.

‘‘तो आप ही बताइए कि मैं क्या करूं?’’ रीमा ने पूछा.

अपने बेटे को पुलिस से बचाने के लिए मिस्टर राठी ने दिमाग लगाया कि पुलिस के पास जाने से रोकने के लिए एक रास्ता है कि इस लड़की को यहीं घर में ही रोक लिया जाए.

चूंकि यह लड़की अनाथ है, इसलिए इसे कोई पूछने वाला तो होगा नहीं और कल को किसी बहाने से

इस का बच्चा गिरवा देंगे और इस को बहलाफुसला कर आरव के खिलाफ सुबूत गायब करा देंगे, तो सारा ?ां?ाट ही खत्म हो जाएगा.

‘‘आरव से गलती हो गई बेटी. वैसे, तुम चाहो तो यहीं हमारे घर में ही रुक जाओ,’’ मिस्टर राठी की इस बात पर भला रीमा को क्या एतराज होता, वह अपना सामान ला कर राठी परिवार में रहने लगी.

कुछ दिनों तक तो रीमा सहमीसहमी सी रही, पर कुछ दिनों के बाद एक रात को वह आरव के कमरे में सोने के लिए पहुंच गई.

आरव ने विरोध भी किया, तो रीमा ने जवाब दिया, ‘‘यह सब तब क्यों नहीं सोचा था, जब तुम मेरा रेप कर रहे थे. किसी भी तरह से तुम ने मेरे शरीर को छुआ है, तो तुम मेरे पति ही हुए, इसलिए मैं आज से तुम्हारे कमरे में ही सोऊंगी.’’

अगली सुबह आरव की उदासी देख कर मां ने वजह पूछी, तो आरव ने रात की बात बता दी. इस बात को जान कर मां गुस्से में आ गईं और आरव के कमरे में जा कर रीमा को डांटने लगीं, तो बदले में रीमा ने मां के पैर छू लिए. उस के इस बरताव से मां थोड़ा सकपका गईं.

‘‘चौंकिए मत मांजी, अब से मैं ही आप की बहू हूं, यह मान लीजिए, क्योंकि मैं मां बनने वाली हूं,’’ रीमा ने डाक्टर की रिपोर्ट मां की तरफ बढ़ाते हुए कहा.

रीमा पेट से थी और इस के बच्चे का बाप कोई और नहीं, बल्कि राठी परिवार का होनहार बेटा आरव था. मिसेज राठी का मन घबराने लगा था.

शाम को जब आरव के पापा घर आए, तो रीमा ने किसी आदर्श बहू की तरह उन के भी पैर छुए और एक प्लेट में रख कर उन की तरफ मिठाई बढ़ा दी. उन के पूछने से पहले ही उन्हें बता दिया कि वे दादा बनने वाले हैं.

‘‘अब आप लोगों को मु?ो अपनी बहू मानना ही पड़ेगा,’’ रीमा ने कहा.

मिस्टर राठी रीमा का यह अजीब बरताव और राठी परिवार की बहू कहलाने की जिद को सम?ा नहीं पा रहे थे, पर अगले दिन ही उन्हें ये बातें सम?ा में आने लगीं, जब रीमा ने उन से 10,000 रुपए मांगे.

‘‘तुम्हे भला इतने सारे पैसों की क्या जरूरत?’’

‘‘कमाल करते हैं… मैं बहू हूं इस घर की, मु?ो भी अपना कमरा सजाना है,’’ रीमा ने इठलाते हुए कहा.

राठी परिवार भले ही रीमा के ब्लैकमेल करने के चलते डरा हुआ जरूर था, पर इतना सम?ा गया था कि दाल में कुछ काला जरूर है.

आरव कई दिन से सदमे की हालत में था और अपने परिवार को कुछ बता नहीं पा रहा था, इसलिए आरव के पापा ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘और अगर मैं पैसे देने से मना कर दूं तो?’’

रीमा ने तुरंत ही उन तसवीरों की तरफ इशारा किया. उन तसवीरों और पुलिस का जिक्र आते ही मिस्टर राठी घबरा गए और उन्होंने पैसे दे दिए, पर 2 दिन बाद जब फिर से रीमा ने 5,000 रुपए की डिमांड की, तो उन्होंने पैसा देने से साफ मना कर दिया.

रीमा अपने असली रंग में आ गई और मिस्टर राठी को धमकी देते हुए बोली, ‘‘अगर आप पैसे नहीं दोगे तो मैं पैसों का अपनेआप ही इंतजाम कर लूंगी,’’ और इतना कहते ही उस ने अपने मोबाइल फोन से घर की कीमती चीजों की तसवीरें लेनी शुरू कर दीं और उन्हें औनलाइन बिक्री के लिए इंटरनैट की साइट्स पर अपलोड करने लगी.

रीमा की यह हरकत देख कर मिस्टर और मिसेज राठी घबरा गए और तुरंत ही उन लोगों ने रीमा से अपलोड की गई तसवीरों को डिलीट करने को कहा और उस के सामने हार मान ली. वे उसे पैसे देने को राजी हो गए.

रीमा इतने पर ही नहीं रुकी, बल्कि अब तो रोज रात को वह आरव को अपने कमरे में जबरदस्ती ले जाती और उस से अपने शरीर की मालिश करवाती और अपने नाजुक अंगों को सहलाने और मसलने के लिए कहती. अगर आरव उसे जिस्मानी सुख देने में आनाकानी करता, तो रीमा उसे धमकी देते हुए अपनी बात मनवा लेती.

आरव अपनेआप को बुरी तरह से फंसा हुआ महसूस कर रहा था. एक तरफ तो उस का खेल से ध्यान हट चुका था और वह आने वाली चैंपियनशिप की तैयारी नहीं कर पा रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ अपने ही परिवार के सामने उस की किरकिरी और बेइज्जती हो रही थी.

एक दिन की बात है. रीमा बाहर वाले पार्क में हवाखोरी करने के लिए गई हुई थी कि तभी आरव अपने पापा के पास आया और उन के गले से लिपट कर बोला, ‘‘मु?ो बचा लो पापा. मैं ने कुछ नहीं किया है. यह लड़की मु?ो बेवजह बदनाम कर रही है. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो मैं खुदकुशी कर लूंगा.’’

आरव की बात उस के पापा ने बड़े ध्यान से सुनी, फिर बोले, ‘‘पर बेटा, वे तसवीरें तो कुछ और ही बयान कर रही हैं.’’

‘‘पापा, रीमा की नजर बचा कर रूही रीमा की प्रेग्नैंसी की रिपोर्ट ले कर उसी क्लिनिक में गई थी, जहां का नाम उस रिपोर्ट पर लिखा हुआ था. रिपोर्ट देखने के बाद डाक्टर ने रूही को बताया कि यह रिपोर्ट नकली है.’’

रिपोर्ट नकली है, इस बात ने आरव को थोड़ी हिम्मत दी और वह ठंडे दिमाग से गुजरे हुए समय की कडि़यां जोड़ने में लग गया. वह तकरीबन 3 महीने पहले की एक बात को याद करने लगा. उस के फोन पर अकसर एक नंबर से किसी लड़की का फोन आता था. वह लड़की शतरंज के बारे में जिज्ञासा दिखाती थी और खेल के टिप्स पूछा करती थी.

एक खिलाड़ी होने के नाते आरव उसे शतरंज की बारीकियां बताता रहता था और एक दिन जब उस लड़की ने आरव से मिलने की इच्छा जाहिर की, तो आरव को इस में कोई बुराई नजर नहीं आई और वह शतरंज एकेडमी के बाहर उस लड़की से मिलने चला गया.

वह लड़की और कोई नहीं, बल्कि रीमा ही थी. दोनों ने जूस कौर्नर पर खड़े हो कर जूस पिया, फिर आरव से विदा ले कर रीमा अपनी स्कूटी की तरफ चल पड़ी, पर अचानक वह चक्कर खा कर गिर गई. उसे गिरा देख कर आरव उसे पास के एक अस्पताल में ले गया और उस के बाद रीमा ने उसे घर तक छोड़ कर आने को कहा.

रीमा को उस के घर पहुंचाने के बाद जब आरव वापस जाने के लिए मुड़ा, तब रीमा ने उसे चाय पी कर जाने को कहा.

आरव चाय पीते ही बेहोश हो गया और फिर शायद यही वह समय रहा होगा, जब रीमा ने उस के शरीर के साथ मनचाही हालत में तसवीरें अपने मोबाइल फोन से खींच ली होंगी और उस के कुछ दिन बाद ही रीमा बनेबनाए प्लान के साथ राठी परिवार को ब्लैकमेल कर रही थी.

‘‘पर बेटे, यह सब तुम पहले भी तो बता सकते थे.’’

‘‘हां पापा, बता तो सकता था, पर मैं खुद वे तसवीरें देख कर सदमे जैसी हालत में था, पर जब रूही ने रिपोर्ट के नकली होने का पता लगा लिया, तब मेरे अंदर हिम्मत आ गई और मैं सारी बातें आप से कह पा रहा हूं.’’

सारी बातें सुनने के बाद आरव के पिता ने उसे हिम्मत बंधाते हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं बेटा, पहली चोट तो रीमा ने की है, पर आखिरी चोट हम करेंगे,’’ इस के बाद पूरा राठी परिवार योजना बनाने में लग गया.

उस दिन जब रीमा घर लौटी तो पूरा राठी परिवार उस से सामान्य बरताव करता नजर आया, जिसे देख कर रीमा सम?ा गई कि ये सारे लोग उस की गीदड़भभकी में आ गए हैं और अब उसे उस की मनमरजी चलाने से कोई नहीं रोक सकता.

रात में रीमा औंधी हो कर बिस्तर पर लेट गई और आरव का इंतजार करने लगी कि वह आए और उस के जिस्म की मालिश करे.

थोड़ी देर में आरव अपने हाथ में एक महंगी वाली शराब की पूरी बोतल ले कर आया और रीमा के सामने रख कर उस के बदन को दबाने लगा.

रीमा की नजर शराब पर पड़ी, तो उस के मुंह में पानी आ गया और उस ने आरव से 2-4 पैग उसे भी पिलाने को कहा.

आरव को तो मानो इसी बात का इंतजार था. उस ने एक के बाद एक कई पैग रीमा को पिलाए और जब रीमा भरपूर नशे में हो गई, तो आरव ने उस की नंगी पीठ पर मसाज देना शुरू किया और पूछा, ‘‘अच्छा, यह तो बताओ कि जब मैं ने तुम्हारे शरीर को हाथ तक नहीं लगाया, तब तुम पेट से कैसे हो गई और वे तसवीरें तुम्हारे पास कहां से आ गईं?’’

रीमा पर नशा हावी हो रहा था. वह एक के बाद एक कई राज बताती चली गई कि वह छोटे कसबे से शहर में  मौडल बनने आई थी.

?1-2 छोटीमोटी कंपनियों के लिए काम करने का मौका मिला और वह मौडल बन भी गई, पर मौडलिंग में बढ़ते कंपीटिशन में वह टिक नहीं पाई और उस का रोजीरोटी कमाना मुश्किल हो रहा था, इसलिए उस ने भोलेभाले लड़कों को इसी तरह अपने जाल में फंसा कर, उन के घर में घुस कर तसवीरें और नकली प्रेग्नैंसी रिपोर्ट दिखा कर ब्लैकमेल करना शुरू किया.

अपनी इज्जत बचाने के लिए कोई भी परिवार पुलिस में नहीं जाता था और रीमा की कमाई बदस्तूर चलती रहती थी.

रीमा तो नींद के आगोश में चली गई, पर आरव को तो खुशी के मारे नींद ही नहीं आई, क्योंकि उस ने रीमा को अपने जुर्मों को खुद अपनी जबान से बताते हुए आरव ने उस की वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकौर्ड कर ली थी और अब वह इसे ले कर पुलिस में जाने वाला था.

सुबह जब रीमा जागी, तो रोज की तरह उस ने बिस्तर पर ही चाय मांगी.

‘‘अब तुम जेल में ही जा कर चाय पीना,’’ आरव ने इतना कह कर रात वाली वीडियो चला दी, जिसे देख कर रीमा के होश उड़ गए. वह माफी मांगने लगी, पर तब तक बहुत देर हो चुकी

थी. मिस्टर राठी पुलिस के साथ आ चुके थे और पुलिस ने सब की बात सुनने और सम?ाने के बाद रीमा को गिरफ्तार कर लिया.

राठी परिवार ने रीमा की चाल के खिलाफ अगर आवाज नहीं उठाई होती, तो न जाने कब तक वे रीमा को ढोते रहते और उस की नाजायज मांगें भी मानते रहते.

आरव अब नौर्मल हो चुका था और उस ने अपना पूरा ध्यान शतरंज चैंपियनशिप पर लगा रखा था. वह मन ही मन ठान चुका था कि शतरंज खेलेगा जरूर, पर आगे से किसी धोखेबाज की शतरंज की बिसात में नहीं फंसेगा.

News Kahani: सैक्स स्कैंडल और साजिश

उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के एक गांव रत्न खेड़ा में चौधरी सुमेर सिंह का दबदबा था. वे गांव के मुखिया थे और उन की अंटी भी मजबूत थी. घर क्या पूरी कोठी थी और नौकरचाकर भी हमेशा काम पर लगे रहते थे.

चौधरी सुमेर सिंह का एकलौता बेटा था सुमित, जो अपने घर के पीछे बने एक बड़े से कमरे में एनजीओ चलाता था, जहां गरीब दलित घरों की जवान लड़कियों को सिलाईकढ़ाई सिखाई जाती थी. पर यह सब काम लोगों को भरमाने के लिए किया जाता था. सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक एनजीओ का काम होता था, पर उस के बाद वही कमरा सैक्स का दंगल बन जाता था.

दरअसल, सुमित अपनी कुछ खास गरीब लड़कियों और चमचों के साथ मिल कर पोर्न फिल्में बनाता था और अपने परमानैंट ग्राहकों को भेजता था. वे ग्राहक देशी अनब्याही लड़कियों के पोर्न वीडियो देखने के शौकीन थे और सुमित को पैसा भी देते थे. फिर वे उन वीडियो को चाहे देश में बेचें या विदेश में, सुमित को इस बात से कोई मतलब नहीं था.

सुमित के पिता चौधरी सुमेर सिंह को इस धंधे की खबर थी या नहीं, यह वही बता सकते थे, पर यह जरूर था कि सुमित अपने पिताजी की बहुत इज्जत करता था. वह अपनी मां का लाड़ला था और दिखने में बड़ा हैंडसम था.

सुमित की टीम में 2 लड़कियां खास थीं, माला और सुनहरी. 21 साल की माला गोरी थी और उस के नैननैक्श भी अच्छे थे. 24 साल की सुनहरी के आने से पहले वही सुमित की चहेती थी, पर जब से सुनहरी आई थी, तब से माला के भाव कम हो गए थे.

माला माल थी, तो सुनहरी कमाल थी. वह भले ही गरीब घर की दलित लड़की थी और उस का रंग भी दबा हुआ था, पर देह की खरा सोना थी. बड़े उभार, लंबे बाल और मदमस्त चाल सुनहरी को गजब का रूप देते थे.

सुमित को भी सुनहरी बड़ी पसंद थी और वह उसे माला से भी ज्यादा पैसे देता था. यह बात माला को खाए जा रही थी. उसे सुनहरी से जलन होने लगी थी.

एक दिन माला ने सुमित से पूछा, ‘‘आप सुनहरी को इतना सिर पर क्यों चढ़ा रहे हो? आप और मैं ऊंची जाति के हैं और वह दलित घर की गरीब लड़की, फिर वह सब से ज्यादा पैसे क्यों लेती है? मुझ में क्या कोई कमी है?’’

‘‘तुम में कोई कमी नहीं है, पर वह बिस्तर पर एकदम खुल जाती है. उस का सैक्स वाला वीडियो एकदम असली लगता है और तुम बर्फ सी ठंडी पड़ी रहती हो. शूट करने में मजा ही नहीं आता है. और फिर उस के वीडियो की आज मार्केट में डिमांड है,’’ सुमित ने हकीकत बता दी.

माला को यह बात खल गई. उस ने सुनहरी को सबक सिखाने की सोच ली. उधर, जब से सुनहरी इस धंधे में आई थी, तब से उस की जिंदगी बदल गई थी. घर वाले खुश थे और अब भूखों मरने की नौबत नहीं आती थी.

सुनहरी की मां को वैसे तो घर आता पैसा बुरा नहीं लगता था, पर बेटी के लक्षण देख कर वे थोड़ा चिंतित थीं. एक दिन उन्होंने सुनहरी को टोक दिया, ‘‘बेटी, जब से तू एनजीओ में जाने लगी है, तब से हमें दो वक्त की रोटी तो वक्त पर मिल रही है, पर तू कोई गलत काम तो नहीं कर रही है न?’’

‘‘अरे मां, गलतसही के चक्कर में मत पड़ो और जिंदगी का मजा लो. आज से 6 महीने पहले कोई इस घर में    झांकता तक नहीं था और आज मेरे लिए रिश्ते आ रहे हैं. मां, यह सब पैसे की ही माया है और फिलहाल इस माया का मजा उठाओ,’’ सुनहरी ने इतना कहा और एनजीओ के लिए निकल गई.

एनजीओ में अभी सुमित नहीं आया था. माया को मौका मिल गया और उस ने सुनहरी को छेड़ते हुए कहा, ‘‘ऐसी क्या घुट्टी पिला दी, जो सुमित सर तेरे ही सुर में सुर मिला रहे हैं? यह चार दिन की चांदनी है मेरी जान, फिर कब उन की नजर से उतरेगी, तुझे पता भी नहीं चलेगा.’’

‘‘तू अपनी देख. मु   झे क्या करना है, मैं जानती हूं. बड़ी आई सलाह देने वाली,’’ सुनहरी भी मुंहफट थी, तो एकदम से बोल पड़ी.

यह सुन कर माला सुलग गई. हद तो तब हो गई, जब सुमित ने पीछे से आ कर यह बात सुन ली और माला को ही डांट दिया.

सब के सामने अपनी इज्जत उतरते देख कर माला को बड़ा गुस्सा आया और उस ने बदला लेने की ठान ली. वह जानती थी कि सुमित सारे वीडियो एक पैन ड्राइव में संभाल कर रखता है,

तो उस ने मौका ताड़ कर एक दिन वह पैन ड्राइव चुरा ली और चौधरी सुमेर सिंह के जानी दुश्मन जगत सेठ के यहां जा पहुंची.

जगत सेठ को सुमेर सिंह का दबदबा रास नहीं आता था. दरअसल, वह गांव का मुखिया बनना चाहता था, पर गांव वाले सुमेर सिंह पर आंख मूंद कर भरोसा करते थे. वह हमेशा इस फिराक में रहता था कि किसी तरह सुमेर सिंह को नीचा दिखा दे, पर उसे मौका नहीं मिल रहा था.

आज माला को अपने पास देख कर जगत सेठ पहले तो हैरान हुआ, फिर अपनी खीज मिटाते हुए बोला, ‘‘तुम इस समय यहां क्या कर रही हो? मैं ने तुम्हें मना किया है न कि ऐसे ही मेरे पास मत आया करो.’’

माला बड़ी बेचैन थी. वह सुनहरी की उस दिन की बात पर आज भी सूखी लकड़ी की तरह सुलग रही थी, ‘‘कल की आई यह कल्लो, मु   झे भाषण दे रही है. इस की औकात क्या है मेरे आगे. सुमित ने पता नहीं क्यों इस के इतने ज्यादा रेट बढ़ा रखे हैं. न शक्ल और न सूरत, बस इसे इज्जत की जरूरत.’’

‘‘मैं सम   झा नहीं कि तुम क्या कह रही हो. तुम तो सुमित की मुंहलगी हो, फिर आज मेरे दरवाजे पर कैसे आई?’’ जगत सेठ ने माला से पूछा.

‘‘देखो जगत सेठ, सारा गांव जानता है कि आप का और चौधरी सुमेर सिंह का छत्तीस का आंकड़ा है. आप को वह फूटी आंख नहीं सुहाता है. आप का बस चले तो आज ही उस के घर के दरवाजे पर कुर्की का परचा चिपकवा दो,’’ माला ने कहा.

‘‘तो तू क्या आज उस की कुर्की कराने यहां आई है?’’ जगत सेठ ने    झल्लाते हुए माला से पूछा.

‘‘उस से बड़ा कांड है जगत सेठजी, बस आप की मदद चाहिए. फिर देखना कि मैं कैसे इस सुनहरी का सारा सुनहरापन मिट्टी में मिलाती हूं,’’ माला जैसे बदले की आग में सुलग रही थी.

‘‘पहेलियां मत बु   झाओ. कोई अंदर की खबर है तो दो, वरना अपना रास्ता नापो. मेरे पास फालतू समय नहीं है तेरी राम कहानी सुनने का,’’ जगत सेठ ने दोटूक कहा.

माला ने समय न गंवाते हुए वह पैन ड्राइव जगत सेठ के हाथ में थमा दी, जिस में बेहूदा वीडियो की भरमार थी. माला इतनी शातिर थी कि उस ने अपने वीडियो पहले ही अलग कर दिए थे. इस पैन ड्राइव में दूसरी लड़कियों के वीडियो थे, जिन्हें सुमित और उस के चमचे शूट किया करते थे.

सारे वीडियो देख कर जगत सेठ की आंखों में चमक आ गई, ‘‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे…’’ वह बुदबुदाया और फिर माला से बोला, ‘‘वाह, मेरी जानेमन, आज तो तू ने मेरा दिल ही जीत लिया. अब मैं चौधरी सुमेर सिंह को कैसे कंगाल और अपनी माला को मालामाल बनाता हूं, बस तू देखती रहना.’’

माला उछल कर जगत सेठ से लिपट गई और उसे चूम लिया. जगत सेठ ने वह पैन ड्राइव अपनी इलैक्ट्रोनिक तिजोरी में रखी और माला को बैडरूम में ले गया.

अगले दिन जगत सेठ अपने खास दोस्त इंस्पैक्टर ताराचंद के साथ थाने में चाय पी रहा था. ताराचंद वह पैन ड्राइव देख चुका था. उस ने जगत सेठ से पूछा, ‘‘अब आगे क्या करना है? सुबूत तो एकदम पक्का है. सुमित एनजीओ की आड़ में लड़कियों के गंदे वीडियो बनाने का धंधा कर रहा है. उस के बाप को इस गोरखधंधे की भनक तो होगी, पर आंख बंद किए बैठा होगा.’’

‘‘ताराचंद, मुझे उन दोनों के चेहरे झुके देखने हैं तेरे थाने में. बड़ी अकड़ दिखाते हैं अपने चौधरी होने की. उन की सारी हेकड़ी न निकाल दी, तो मेरा नाम भी जगत सेठ नहीं.’’

उसी शाम को चौधरी सुमेर सिंह के घर पर पुलिस की रेड पड़ गई. सुमित को अंदाजा नहीं था कि माला उसे जहरीली नागिन की तरह डस लेगी. कोठी के उस खास कमरे का सारा सामान जब्त कर लिया, जहां पर सारे वीडियो शूट हुए थे.

सुनहरी और बाकी लड़कियों को उस कमरे से धर दबोचा था. सुमित का बाकी स्टाफ भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका था. चौधरी सुमेर सिंह उस समय कोठी में नहीं थे. उन्हें तो इस सारे कांड की भनक तक नहीं थी.

थोड़ी देर में सब थाने में थे. सुनहरी सम   झ चुकी थी कि माला ने ही यह मुखबिरी की है और हो न हो, इस में जगत सेठ का भी हाथ है. वे दोनों कई दिनों से एकसाथ देखे गए थे. पर माला यह कह कर टाल जाती थी कि जगत सेठ उसे अपनी रातें रंगीन करने के लिए बुलाता है और इनाम भी खूब देता है.

पुलिस इंस्पैक्टर ताराचंद ने सुमित को हड़काते हुए कहा, ‘‘यह क्या रायता फैला रखा है तुम ने… एनजीओ की आड़ में पोर्न वीडियो बनाए जा रहे हैं. अपने बाप की इज्जत का तो लिहाज कर लिया होता.’’

सुमित जानता था कि ताराचंद एक नंबर का घूसखोर है, पर फिलहाल उस के हाथ में सुमित की दुखती रग थी, तो उस ने कहा, ‘‘अरे थानेदार साहब, आप भी पता नहीं किस पैन ड्राइव की बात कर रहे हैं. वैसे भी हमारे यहां काम करने वाली सब लड़कियां बालिग हैं और अपनी मरजी से लोगों के मनोरंजन के लिए ऐसी फिल्में बनाती हैं.

‘‘पूछ लो किसी से भी कि हम ने किसी के साथ कोई जोरजबरदस्ती की हो. सब को अपनी मेहनत का पैसा एडवांस में मिल जाता है और किसी को इस काम से कोई शिकायत नहीं है.’’

‘‘हां भई, तुम तो पुण्यात्मा हो और समाज की भलाई का काम कर रहे हो. ये तुम्हारी साथी सब दूध की धुली हैं और देश की तरक्की के लिए नए रोजगार पैदा कर रही हैं. पैन ड्राइव में जो सैक्स का नंगा नाच दिख रहा है, वह तो आजकल बहुत मामूली बात है न,’’ इंस्पैक्टर ताराचंद ने सुमित पर ताना कसा.

‘‘साहब, आप चाहते क्या हो, यह बताओ? मु   झे पता है कि यह सब माला की करतूत है. लड़ाई मेरे और उस के बीच की थी, फिर वह हम सब के पेट पर क्यों लात मारना चाहती है…’’ सुमित कुछ बोलता, उस से पहले ही सुनहरी ने अपनी बात रख दी.

‘‘आप की तारीफ?’’ इंस्पैक्टर ताराचंद ने सुनहरी को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए देखा. सुनहरी का रंग जरूर काला था, पर उस के जिस्म में अजीब सी कसावट थी.

‘‘जी, मेरा नाम सुनहरी है और मैं दलित समाज की लड़की हूं. सुमित साहब ने हम से कभी कोई जबरदस्ती नहीं की है, बल्कि ये तो हमारे घरपरिवार का पेट पाल रहे हैं.’’

‘‘मतलब, जो तुम लोग कर रहे हो, वह कानूनन गलत नहीं है?’’ इंस्पैक्टर ताराचंद ने पूछा.

‘‘कानून का तो आप जानो, पर हम ने कुछ गलत नहीं किया है. यह तो हर जगह हो रहा है. न जाने कितने वीडियो बनाने वाले रोज पकड़े जाते हैं. हाल ही में कर्नाटक में एक तथाकथित बड़ा स्कैंडल सामने आया है, जिस में एचडी देवेगौड़ा के बेटे एचडी रेवन्ना और पोते प्रज्वल रेवन्ना का नाम शामिल है.’’

इंस्पैक्टर ताराचंद ने आंखें तरेरते हुए सुनहरी से पूछा, ‘‘तुझे पूरा मामला पता भी है?’’

सुनहरी बोली, ‘‘साहब, बेशक मैं इस धंधे में देह खपा रही हूं, पर दीनदुनिया में कौन सी खबर गरम तवे पर तेल सी उछल रही है, इस की पूरी तह में जाती हूं. 10वीं जमात पास हूं, इस का मतलब यह नहीं है कि मु   झ में पढ़ने की ललक नहीं है.’’

इंस्पैक्टर ताराचंद ने उबासी लेते हुए कहा, ‘‘ज्यादा ज्ञान मत बांच, खबर क्या जानती है यह बता…’’

सुनहरी ने बताया, ‘‘खबर में छपा था कि कार्तिक गौड़ा नाम का एक आदमी रेवन्ना परिवार का पुराना ड्राइवर हुआ करता था. उस ने तकरीबन 15 साल तक रेवन्ना परिवार की गाडि़यां चलाई थीं, पर फिर न जाने क्यों धीरेधीरे रेवन्ना परिवार से उस के रिश्ते खराब होने लगे.

‘‘इस के बाद कार्तिक ने नौकरी छोड़ दी. उस की मानें तो रेवन्ना परिवार ने उस की जमीन पर कब्जा कर लिया था और इस बात की खिलाफत करने पर प्रज्वल ने उस के और उस की पत्नी के साथ मारपीट भी की थी. वह अपने साथ हुई इस ज्यादती के खिलाफ इंसाफ चाहता था.

‘‘चूंकि कार्तिक को रेवन्ना परिवार की काली करतूतों की खबर थी, उस ने अलगअलग लड़कियों के साथ रेवन्ना के बेहूदा वीडियो से भरा एक पैन ड्राइव हासिल कर लिया. इस पैन ड्राइव के साथ उस ने भारतीय जनता पार्टी के एक नेता देवराज गौड़ा से मुलाकात की.

‘‘उधर, प्रज्वल ने 1 जून, 2023 को इसे ले कर अदालत में दस्तक दी थी और कहा था कि वीडियो के सहारे उस की इमेज खराब की जा रही है.’’

‘‘पर, प्रज्वल रेवन्ना को किसी का गंदा वीडियो बनाने की जरूरत ही क्यों पड़ी?’’ इंस्पैक्टर ताराचंद अब इस मामले की परतें प्याज की तरह खोलना चाहता था.

सुनहरी ने थूक गटका और बोली, ‘‘दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था, जब रेवन्ना परिवार में रसोइए के तौर पर काम कर चुकी एक औरत ने एफआईआर दर्ज करवाई है, जो एचडी रेवन्ना की पत्नी भवानी की रिश्तेदार बताई जाती है.

‘‘उस औरत ने अपनी शिकायत में बताया है कि जब उस ने रेवन्ना परिवार में रसोइए के तौर पर काम करने की शुरुआत की, उस के 4 महीने बाद उस का जिस्मानी शोषण शुरू हो गया था.

‘‘प्रज्वल रेवन्ना उस औरत की बेटी को फोन कर के उस के साथ गंदी बातें किया करता था. पीडि़ता ने बताया है कि साल 2019 में जब रेवन्ना परिवार के बेटे सूरज की शादी थी, तब उसे काम के लिए बुलाया गया था, लेकिन इस के बाद से जबजब मौका मिलता, रेवन्ना उसे अपने कमरे में अकेले बुलाया करते थे.

‘‘उस परिवार में 6 औरतें और काम करती थीं. सभी की सभी डरी होती थीं खासकर प्रज्वल रेवन्ना के घर आने पर औरतें सहम जाती थीं. यहां तक कि घर में काम करने वाले कुछ मर्द नौकरों ने भी उन्हें सावधान रहने को कहा था. इस तरह सभी डरेसहमे अपनी बारी का इंतजार किया करते थे.

‘‘पीडि़ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जब रेवन्ना की पत्नी घर पर नहीं होती थीं, तो वे उसे स्टोररूम में बुला कर फल देने के बहाने उस के साथ गलत हरकत करता था. उस का यौन शोषण करता था.

‘‘कई बार उस के किचन में काम करने के दौरान रेवन्ना ने उस के साथ ज्यादती की थी, जबकि प्रज्वल उस की बेटी को वीडियो काल कर उस से गंदी बातें करता था, जिस के बाद उस की बेटी ने उस का नंबर ब्लौक कर दिया था.’’

‘‘हो सकता है, उस औरत ने आपसी रजामंदी से यह सब किया हो और बाद में रेवन्ना परिवार से फायदा उठाने के लिए यह नाटक रचा हो?’’ इंस्पैक्टर ताराचंद को अब सुनहरी से अपने इस सवाल का जवाब चाहिए था.

‘‘देखो साहब, मुझे यह तो नहीं पता कि कौन सच्चा है और कौन    झूठा, पर इतना तो सम   झ में आता ही है कि दाल में कुछ तो काला है. इस मामले में आईपीसी की धारा 354 (ए) यानी यौन शोषण, 354 (डी) यानी पीछा करना, 506 यानी जान से मारने की धमकी देना और 509 यानी बातें या इशारों से महिला की गरिमा का अपमान करना जैसी धाराएं शामिल हैं.

‘‘पुलिस सूत्रों की मानें, तो रेवन्ना की शिकार लड़कियों और औरतों में ज्यादातर वे ही शामिल हैं, जो किसी राजनीतिक सपने को पूरा करने या फिर अपने किसी काम को ले कर उन से मिलने आया करती थीं.’’

‘‘कानून का बड़ा ज्ञान है तुझे तो. धाराएं रटी हुई हैं. इन का मतलब भी समझती है?’’ इंस्पैक्टर ताराचंद ने सुनहरी की जानकारी से कुढ़ कर कहा.

ताराचंद ऊंची जाति का था और जातिवाद उस की रगरग में भरा था. वह यह बात कैसे सहन कर लेता कि एक दलित लड़की थाने में खड़ी हो कर धड़ल्ले से अपनी बात रख दे.

‘‘साहब, आप ने पूछा तो बता दिया. वैसे भी हम लोगों के पढ़नेलिखने की कद्र ही कहां है. हमारे समाज में तो औरत को घर की जूती समझा जाता है. ऐसी जूती जिसे किसी भी समाज का कोई भी ऐरागैरा पहनना अपना जन्मजात हक सम   झता है.

‘‘आज हम जितनी भी लड़कियां पकड़ी गई हैं न, उन में से ज्यादातर वंचित समाज की हैं और उन की इज्जत तो कम उम्र में ही लुट जाती है. मुझे तो कई साल पहले ही एक दबंग की बिगड़ैल औलाद ने खेत में धर लिया था. मना किया तो लातघूंसों से मेरी खातिरदारी की थी, रेप किया सो अलग.’’

‘‘पर, अब तो तू अपनी मरजी से वीडियो बनवा रही थी न?’’

‘‘बिलकुल बनवा रही थी और मु   झे इस का कोई अफसोस भी नहीं है. पैसा इनसान की हर कमजोरी को ताकत में बदल देता है. चौधरी साहब के बेटे ने भले ही हमारी वीडियो बनवाई हैं, पर हमें इस का कोई मलाल नहीं है. पैसा भी तो दिया है. और फिर आज की तारीख में कोई भी हमें पैसे से कमजोर नहीं कह सकता है. घर में सुखसुविधा का सारा सामान है. छोटी बहन पढ़ रही है. मांबाप को दो वक्त की रोटी मिल रही है.

‘‘साहब, इस देश में जो औरतों और लड़कियों की तरक्की का ढोल पीटा जा रहा है न, उस की पोल तो वाराणसी का रैडलाइट एरिया मंडुआडीह ही खोल देता है. देश का सब से ताकतवर नेता वहां से लोकसभा का इलैक्शन लड़ता है, पर क्या यह सामाजिक कोढ़ खत्म हो पाया? नहीं न. और होगा भी नहीं.

‘‘प्रज्वल मामले में भी शायद लीपापोती कर दी जाए, तो क्यों न हमें भी शांति से जीने दिया जाए. सब खाकमा रहे हैं, तो किसी के बाप का क्या जाता है.’’

सुनहरी के मुंह से इतना सुन कर इंस्पैक्टर ताराचंद ने चौधरी सुमेर सिंह के बेटे सुमित की ओर देखा और बोला, ‘‘लड़की की बात में दम है. आज मामला थाने में और फिर कल कोर्ट में जाएगा, तो बदनामी तो इस गांव की ही होगी न. किसी को कुछ नहीं मिलेगा.

‘‘ऐसा करो कि इस मामले को यहीं रफादफा करने के 2 लाख रुपए दे दो. तुम लोग कुछ दिन शांत रहना और फिर दोबारा जुट जाना वीडियो बनाने के धंधे में.

‘‘पर, एक बात का खयाल रखना कि दोबारा अपनी निजी लड़ाई को इस तरह थाने में मत घसीटना, वरना मैं लिहाज नहीं करूंगा. बाकी हमें भी कभीकभार अपनी जवानी का रस चखा देना,’’ सुनहरी को ताड़ते हुए इंस्पैक्टर ताराचंद ने अपनी बात खत्म की.

सुनहरी ने एक आंख दबाते हुए कहा, ‘‘इस में कौन सी बड़ी बात है. आप हमारा खयाल रखें और हम आप का. आप की सेवा करने में तो अलग ही मजा है. जब भी फोन कर देंगे, आप की सेवा में हाजिर हो जाऊंगी.’’

सुमित ने थोड़ी देर में ही इंस्पैक्टर ताराचंद को 2 लाख रुपए पकड़ा दिए और अपनी लड़कियों और दूसरे स्टाफ को ले कर वहां से चला गया. अब उन्हें बेखौफ हो कर वीडियो जो बनाने थे.

घर का चिराग : क्यों रूठा गया था साकेत

मां की गोद में एक बेजान देह रखी थी, जिस के माथे को वे हौलेहौले सहला रही थीं, ‘‘मेरा बेटा… मेरा राजा बेटा… आंखें खोलो बेटा…’’

उस बेजान देह में मां के छूने का भी कोई असर नहीं पड़ रहा था. मां ने लोरी गानी शुरू कर दी थी, ‘‘उठ जा राजदुलारे… मेरा प्यारा बेटा… उठ जा बेटा…’’

देह खामोश थी. सारा माहौल गमगीन था. मां और बापू के घर का चिराग बु?ा गया था.

चारों ओर जमा भीड़ भारी मन से यह सब देख रही थी. किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह उस देह को अंतिम संस्कार के लिए मां की गोद से उठा सके. एक कोने में बूढ़ा पिता बेसुध पड़ा था. अंतिम संस्कार की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. इस परिवार में ऐसा कोई था भी नहीं, जिस के आने की राह देखी जा सके. एक बूढ़ी मां और एक बुजुर्ग पिता, बस इतना ही तो परिवार था.

साकेत अपने मांबाप की एकलौती औलाद था. मांबाप मजदूरी करते थे. साकेत की लाश आज ही शहर के बाहर एक पेड़ से लटकी मिली थी. पुलिस को शक था कि साकेत ने खुदकुशी की है, पर जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, तो साफ हो गया कि उस की हत्या कर के उस की लाश को पेड़ से लटका दिया गया था.

30 साल का साकेत एक प्राइवेट कंपनी में चीफ इंजीनियर था. वैसे तो उसे नौकरी करते हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था, पर उस की मेहनत और लगन के चलते उस की तरक्की जल्दी हो गई थी. मांबाप के दिन फिर गए थे.

साकेत अपने मांबाप का बहुत ध्यान रखता था. दूर शहर में होने के बावजूद वह महीने में एक बार अपने गांव जरूर आता था. घर आ कर वहां के सारे इंतजाम करता था. महीनेभर का राशन ला कर रख देता था. उस ने मांबाप को मजदूरी करने से रोक दिया था. वह ढेर सारे रुपए उन्हें दे जाता था, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो.

पिताजी बीमार रहने लगे थे. वह उन का इलाज एक बड़े अस्पताल में करा रहा था. मां भी कुछ ज्यादा ही बूढ़ी नजर आने लगी थीं. जिंदगीभर उन्होंने मेहनत जो की थी.

एक दिन की बात है, साकेत अपनी मां की गोद में सिर रख कर बोला था, ‘‘मां, आप बाबूजी को सम?ाओ न… मेरे साथ चलें… वहीं रहना. यहां अकेले रहने से क्या मतलब है.’’

‘‘तेरे बाबूजी भला मानते कहां हैं मेरी. उन्हें तो बस अपना यही गांव अच्छा लगता है. तू ही बोलना उन से,’’ मां ने साकेत का सिर सहलाया था. साकेत की बोलने की हिम्मत नहीं हुई थी. वैसे तो वह जब भी गांव आता था, हर बार अपने मांबाप के लिए नए कपड़े लाना नहीं भूलता था. इस बार भी वह नए कपड़े ले कर आया था.

‘‘बाबूजी, आप पुराने कपड़े क्यों पहनते हैं? आप इन्हें उतारिए और ये पहनें. देखो, कितने अच्छे लग रहे हैं.’’

‘‘अरे बेटा, अब इस उम्र में मैं ऐसे कपड़े पहन कर क्या करूंगा.’’

‘‘नहीं, आप को पहनने ही पड़ेंगे,’’ साकेत ने जिद की. पिताजी को उस की जिद के आगे ?ाकना पड़ा.

नए कपड़ों में बाबूजी बहुत अच्छे लग रहे थे. मां ने जब नई साड़ी पहनी, तो उन की आंखों में आंसू आ गए थे.

‘‘अरे मां, रो क्यों रही हो…? इतनी अच्छी लग रही हो… बिलकुल साकेत की मां ही लग रही हो… चीफ इंजीनियर साकेत,’’ साकेत ने मां की आंखों से आंसू पोंछ दिए थे.

‘‘बेटा, तू जब छोटा था, तो नए कपड़ों के लिए रूठ जाया करता था और हम दिला भी नहीं पाते थे. बस, यही सोच कर आंखें भर आईं.’’

‘‘तो क्या हुआ, मुझे तो आप ने कभी शर्ट कभी पैंट, ऐसे करकर के नए कपड़े तो पहनाए ही हैं, पर आप को तो मैं ने कभी नए कपड़े पहनते नहीं देखा,’’ आंसू की एक बूंद उस की आंखों से भी बह निकली थी.

एक बार रक्षाबंधन पर साकेत अड़ गया था, ‘‘मां देखो, सब बच्चों ने नए कपड़े पहने हैं, मुझे भी चाहिए.’’

मां ने समझाने की बहुत कोशिश की थी, पर वह माना नहीं था. मां सेठ के पास गई थीं और कुछ सामान गिरवी रख कर उस के लिए नया कपड़ा ले कर आई थीं. नए कपड़े पहन कर ही वह मुंहबोली बहन के घर राखी बंधवाने गया था.

‘‘तुझे याद है बेटा, तू दीवाली पर फुलझड़ी और मिठाई के लिए कितना रोया था,’’ मां उस घटना की कल्पना से ही सुबक पड़ी थीं. इस बार पिताजी के गालों पर भी आंसुओं की लड़ी दिखाई देने लगी थी.

‘‘हां मां, सच कहूं तो मुझे आज भी दीवाली केवल इसी वजह से अच्छी नहीं लगती. मां, आप कितनी परेशान हुई थीं उस दिन. धिक्कार है मुझे खुद पर मां.’’

मां ने साकेत को छाती से लगा लिया, ‘‘तब तू छोटा था बेटा. नासमझ.’’ साकेत के सामने वह दीवाली की रात कौंध गई थी. पटेल साहब का घर छोटेछोटे बल्बों से रोशन था. उन का बेटा गौरव नए कपड़े पहन कर एक हाथ में मिठाई और एक हाथ में पटाखे ले कर आया था.

‘‘चलो यार, पटाखे फोड़ते हैं,’’ गौरव ने कहा, तो साकेत उस के साथ चला गया था. साकेत गौरव को मिठाई खाते देख रहा था.

‘‘मिठाई बड़ी मीठी लगती है क्या?’’ साकेत ने कभी मिठाई नहीं चखी थी. एक बार गांव में एक तेरहवीं हुई तो उसे बेसन की बर्फी खाने को मिली थी. वह उसे मिठाई समझाता था, पर गौरव तो सफेद रस में डूबी मिठाई खा रहा था. ऐसी मिठाई उस ने खाने की तो छोड़ो देखी तक नहीं थी.

‘‘हां, बहुत मीठी लगती है. पर, मैं तुझे दे नहीं सकता, क्योंकि जूठी हो गई है न,’’ गौरव बोला था.

साकेत ललचाई निगाहों से गौरव को तब तक देखता रहा था, जब तक उस की मिठाई खत्म नहीं हो गई. मिठाई खत्म होने के बाद गौरव ने फुल?ाड़ी जलाई. फुल?ाड़ी ने रंगबिरंगी चिनगारियां छोड़नी शुरू कर दी थीं.

‘‘एक फुलझाड़ी मुझे भी दो न. मैं भी जलाऊंगा,’’ साकेत गिड़गिड़ाया था.

‘‘अपनी मां से बोलो,’’ गौरव बोला था. गौरव भी बच्चा ही था न और बड़े घर का होने के चलते उसे साकेत की लालसा की कद्र नहीं थी.

साकेत रूठ गया और घर आ कर वह मां के सामने यह बोलते हुए अड़ गया था, ‘‘मुझे वह वाली मिठाई ही चाहिए…’’

मां को तेज बुखार था. पिताजी ने साकेत को समझने की काफी कोशिश की थी, पर वह नहीं माना था. पिताजी उसे उंगली पकड़ कर मिठाई की दुकान पर ले गए थे, पर उस दुकान पर वह मिठाई नहीं थी. उस दिन वह बीमार मां की छाती से चिपक कर बहुत देर तक रोता रहा था.

‘‘आप ने मुझे मिठाई भी नहीं दिलाई और फुलझड़ी भी नहीं दिलाई. मैं आप से कभी बात नहीं करूंगा,’’ सुबक उठा था साकेत. साथ ही, दीवाली की रात में उस के मांबाप भी रोते रहे थे, रातभर अपनी बेबसी पर.

स्कूल जाने के लिए भी साकेत ऐसे ही अड़ा था. मांबाप को उस की जिद के आगे झाकना पड़ा था. पिताजी तो वैसे भी बहुत मेहनत करते ही थे, मां ने भी मजदूरी करनी शुरू कर दी थी. जैसेजैसे उस की पढ़ाई आगे बढ़ती गई, उस का खर्चा भी बढ़ता गया, वैसेवैसे ही मां और पिताजी की मेहनत भी बढ़ती चली गई. पेट काट कर पढ़ाया था उसे.

यादों का बवंडर खत्म ही नहीं हो रहा था. मां ने साकेत के आंसू पोंछे, ‘‘चलो, भूल जाओ. ये कपड़े देखो, मैं कैसी लग रही हूं?’’ मां बात को बदलना चाह रही थीं.

मां ने हलुआपूरी बनाई थी. उन के लिए खुशी में यही सब से बेहतर पकवान थे.

‘‘मां, याद है जब मैं इंजीनियरिंग का इम्तिहान दे कर आया था तो आप ने मेरी पुरानी पैंट में पैबंद लगाते हुए कहा था, ‘बेटा, हमेशा बड़े सपने देखो, वे जरूर पूरे होते हैं.’’’

‘‘हां, तू इतनी ऊंची पढ़ाई कर रहा था, तब भी हम तुझे एक जोड़ी कपड़े तक नहीं सिलवा पा रहे थे.’’

‘‘पुराने कपड़े पहनना तो मेरी आदत हो गई थी मां, पर मैं यह बोल रहा हूं कि मैं ने हमेशा ऊंचे सपने देखे और इसी वजह से ही तो आज चीफ इंजीनियर बन पाया हूं.’’ मां चुप थीं, तब पिताजी ने कहा था, ‘‘तुम हमेशा सचाई पर डटे रहना, तभी हमारी मेहनत कामयाब होगी.’’

‘‘पिताजी, आप लोगों ने मेरी वजह से बहुत परेशानियां झोली हैं, पर अब आप को इतना खुश रखूंगा कि आप अपने सारे दुख भूल जाएंगे,’’ साकेत भावुक हो गया था.

लौटते समय साकेत ने मां को बोल दिया था, ‘‘मां अगली बार जब आऊंगा, तो आप लोगों को साथ ले कर ही जाऊंगा. आप पिताजी को तैयार कर लेना. मैं किसी की बात नहीं मानूंगा.’’

पर साकेत इस हालत में ही वापस आया था बेजान बन कर. उस की देह को रखे बहुत देर हो चुकी थी. लोगों में अब बेसब्री नजर आने लगी थी. कुछ औरतों ने मां को जबरदस्ती अलग किया था.

‘‘मत छीनो मेरे बेटे को मुझसे. वह अभी सो रहा है. जाग जाएगा.’’

सैकड़ों आंखें नम थीं. वहां जुटे समूह को अब अंतिम क्रिया करनी ही थी, इस वजह से साकेत के शरीर को अर्थी पर रख दिया था.

साकेत की मौत खुदकुशी नहीं, बल्कि हत्या थी. साकेत उन लोगों की हैवानियत का शिकार बना था, जिन के बेईमानी वाले कामों को चीफ इंजीनियर होने के नाते वह मान नहीं रहा था.

वह कोई बड़ा ठेकेदार था, सत्ता से जुड़ा. साकेत ने उस के बनाए पुल के भुगतान के कागजों को फेंक दिया था और बोला था, ‘‘इस पुल से लाखों लोग आनाजाना करेंगे और तुम थोड़े से लालच में इसे कमजोर बना रहे हो. मैं तुम्हारा भुगतान नहीं कर सकता.’’

साकेत के इनकार से उस ठेकेदार का खून खौल गया था, ‘‘आप जानते नहीं हैं कि मेरी कितनी पकड़ है,’’ उस ने अपने  कुरतेपाजामे की सिलवटों को दूर करते हुए कमर में खुंसी पिस्तौल की ?ालक साकेत को दिखाते हुए कहा था.

साकेत डरा नहीं और बोला, ‘‘आप जो चाहें कर लें, पर मैं इस पुल को पास नहीं कर सकता.’’

इस के बाद साकेत के पास किसी नेता का भी फोन आया था, ‘क्यों अपनी जान गंवाना चाहते हो…’ पर वह कुछ नहीं बोला था.

बिल का भुगतान तो नहीं हुआ, पर एक दिन साकेत की लाश पेड़ से लटकती जरूर मिली.

मांबाप अपनी एकलौती औलाद के यों गुजर जाने से दुखी थे. साकेत के गुजरने के बहुत दिनों बाद तक माहौल गमगीन बना रहा था. उस के पिताजी बीमारी के शिकार हो चुके थे. मां ने अब साकेत के हत्यारों को पकड़वाने के लिए कमर कस ली थी. वे जानती थीं कि यह सब इतना आसान नहीं है, पर वे हिम्मत नहीं हारना चाह रही थीं.

एक बैनर को अपने शरीर से लपेटे मां शहर दर शहर घूम रही थीं. उस बैनर पर लिखा था, ‘इंजीनियर साकेत के हत्यारों को पकड़वाने में मदद करें’.

लोग उस बैनर को पढ़ते, बुजुर्ग मां की हालत पर दुख भी जताते, पर मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था. समाज पंगु जान पड़ रहा था. सभी के चेहरे पर एक खौफ दिखाई देता था.

वह बूढ़ी औरत समाज के इस खोखलेपन से नाराज नहीं थी. वह जानती थी कि कोई भी अपने साकेत को नहीं खोना चाहता और इसी खौफ से लोग मदद करने के लिए आगे नहीं आ रहे थे.

बूढ़ी मां इस सब की परवाह किए बगैर दौड़ रही थीं अनजान रास्ते पर बगैर किसी सहारे के. वे प्रदेश की राजधानी जा पहुंची थीं और विधानसभा के सामने खड़े हो कर अपने बेटे के हत्यारों को पकड़ने की अपील कर रही थीं.

चारों ओर से भारी भीड़ ने उन्हें घेर लिया था. वे रो रही थीं और अपील कर रही थीं कि कोई तो आगे आए उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए. भीड़ तो केवल तमाशा देख रही थी.

सिक्योरिटी वालों ने मां को गिरफ्तार कर लिया, पर उन का चिल्लाना जारी था. धीरेधीरे वे निढाल हो गईं और मर गईं अपने बेटे को इंसाफ दिलाए बगैर.

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