साइबर ठगी का शिकार हुआ शिवम, 8-9 लाख का बैंक खाते से हुआ फ्रौड

मध्य प्रदेश के जिला नरसिंहपुर का गोटेगांव कस्बा जिस का नाम श्रीधाम है, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तपोस्थली के रूप में पूरे देश में जाना जाता है. 9 मई, 2023 की बात है. श्रीधाम रेलवे स्टेशन से चंद कदमों की दूरी पर ही पुलिस स्टेशन गोटेगांव में टीआई हिमलेंद्र पटेल अपने कक्ष में बैठे एक पुराने केस की फाइल पलट रहे थे, तभी एक 20-21 साल के नवयुवक ने उन के कमरे के सामने दस्तक देते हुए कहा, “सर, क्या मैं अंदर आ सकता हूं?”

“हां, आ जाइए.” टीआई ने कहा.

वह युवक कमरे में दाखिल हुआ और टीआई के इशारे पर कुरसी पर बैठ गया.

“बोलो क्या काम है?” फाइल से नजरें हटाते हुए टीआई बोले.

“सर, मेरा नाम शिवम कहार है. मेरे पिताजी सुनील कहार इस दुनिया में नहीं हैं. मैं बैलहाई इलाके में रहता हूं. सर, मेरे साथ बैलहाई में रहने वाले कमलेश पटेल और उस के साथियों ने मारपीट की है, मैं इस की रिपोर्ट लिखाने आया हूं.” घबराते हुए युवक बोला.

“आखिर मारपीट की कोई वजह भी तो होगी, राह चलते कोई किसी के साथ भला मारपीट क्यों करेगा?” टीआई पटेल ने उस से पूछा.

“सर, वजह कोई खास नहीं, पैसों के लेनदेन की वजह से कहासुनी हुई तो कमलेश और उस के दोस्त ब्रजेश, छोटू और अमन हाथापाई पर उतर आए.” शिवम ने बताया.

“किस तरह का लेनदेन था? क्या तुम ने उन लोगों से पैसे उधार लिए थे? उधारी का पैसा देने में कोताही कर रहे होगे?” टीआई पटेल सख्त हो कर बोले.

“नहीं सर, मैं ने किसी से पैसे उधार नहीं लिए थे. मुझे पैसों की जरूरत थी तो मैं ने अपने बैंक का एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम कमलेश पटेल को दिया था. जब मैं ने अपने अकाउंट की डिटेल निकलवाई तो मुझे पता चला कि इस में 8-9 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है. जब मैं ने कमलेश से अपना एटीएम वापस मांगा तो वह गालियां देने लगा. तभी उस के दोस्त भी वहां आ गए और सभी ने मिल कर मुझे खूब पीटा.” शिवम रोते हुए बोला.

टीआई हिमलेंद्र पटेल ने शिवम कहार की शिकायत नोट करते हुए इस की जांच के लिए अधीनस्थ स्टाफ को निर्देशित कर दिया.

ठगों ने शिवम के खाते में की 8-9 लाख की ट्रांजैक्शन

गोटेगांव में रहने वाले 21 साल के शिवम कहार की रिपोर्ट की जांच करने पर पता चला कि कमलेश पटेल निवासी गोटेगांव द्वारा लोन दिलाने एवं सिबिल स्कोर अच्छा करने का लालच दे कर शिवम से यूनियन बैंक औफ इंडिया और एक्सिस बैंक में खाते खुलवाए गए थे. बाद में कमलेश ने शिवम का खाता नंबर, एटीएम कार्ड और पिन ले कर उस के एक्सिस बैंक के खाते से 8-9 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन कमलेश पटेल और उस के साथियों द्वारा मिल कर किया गया था.

पुलिस थाना गोटेगांव में शिवम कहार की रिपोर्ट पर कमलेश और उस के साथियों के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 467, 120बी का अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया. इस मामले की सूचना एसपी अमित कुमार को मिली तो उन्होंने आरोपियों की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए एडिशनल एसपी सुनील शिवहरे के निर्देशन और एसडीओपी (गोटेगांव) भावना मरावी की अध्यक्षता में विशेष पुलिस टीम गठित की गई.

पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में जुट गई और स्थानीय मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया. जानकारी एकत्रित की गई. पुलिस टीम ने रिपोर्टकर्ता शिवम कहार से एक बार फिर पूछताछ की तो उस ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जो कहानी बताई, उस से पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए.

दोस्त के जरिए ठग गैंग से हुआ संपर्क

बैलहाई आजाद वार्ड, गोटेगांव का रहने वाला शिवम कहार कुल जमा नौवीं जमात तक पढ़ा है. शिवम के पिता की साल 2020 में कोरोना से मौत हो गई थी. घर में मां और छोटी बहन को पालने की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई थी. भाईबहन दोनों ही अविवाहित हैं. पिछले 3 सालों से वह चायनाश्ते की दुकान पर काम कर रहा है.

5 महीने पहले दिसंबर, 2022 में शिवम की मम्मी की तबीयत खराब हुई तो वह अपने दोस्त सरदार पटेल वार्ड में रहने वाले जय मुडिय़ा के पास पहुंच कर बोला, “यार जय, घर में मम्मी की तबीयत खराब है और मेरे पास उन की दवाइयों के लिए पैसे भी नहीं है. कुछ रुपए मुझे उधार दे दे, मैं जल्द तुझे लौटा दूंगा.”

“मेरे भाई, तुझे तो पता है कि मेरी माली हालत इतनी अच्छी नहीं है कि तुझे रुपए उधार दे सकूं. लेकिन एक शख्स है जो तुझे रुपए उधार दे सकता है.” जय ने शिवम को समस्या का हल बताते हुए कहा.

“बता यार कौन है वो, जो मुझे इस बुरे वक्त में रुपए उधार दे सकता है?” शिवम उतावला हो कर बोला.

“2-3 महीने पहले मुझे भी पैसों की जरूरत थी, तब मेरा संपर्क गोटेगांव के एक लडक़े से हुआ था जिस का नाम कमलेश पटेल है. उस ने मुझ से बैंक का एटीएम कार्ड, बैंक से लिंक सिम कार्ड लिया था. इस के एवज में उस ने मुझे 3 हजार रुपए दिए थे.

तभी उस ने कहा था कि यदि किसी और को पैसे कमाने हो तो उस से भी बैंक अकाउंट मांग लेना.” जय ने पूरी बात शिवम को समझाते हुए कहा.

“लेकिन इस में कोई गड़बड़ तो नहीं होगी?” आशंका जताते हुए शिवम ने पूछा.

“काहे की गड़बड़… हमारे अकाउंट में कहां के लाख रुपए जमा हैं.” भरोसा दिलाते हुए जय बोला.

जय ने शिवम की तसल्ली के लिए स्पीकर औन कर के कमलेश से बात की.

जय ने पूछा, “कमलेश भाई मेरा एक दोस्त शिवम है, जो अपना अकाउंट आप को देना चाहता है, लेकिन वह जानना चाहता है कि आप इस अकाउंट का क्या उपयोग करते हो?”

इस पर कमलेश ने फोन पर ही बताया, “मैं इस तरह कई लोगों से खाते ले कर आगे दूसरे व्यक्तियों को भेजता हूं. वे लोग इन

खातों में 3-4 लाख रुपए ओटीपी और लिंक के माध्यम से जमा कराते हैं. इस के बाद एटीएम और सिम के जरिए रुपए अकाउंट से निकाल लेते हैं. कुछ समय बाद फिर बैंक अकाउंट का उपयोग बंद कर देते हैं.”

साइबर कैफे वाला भी शामिल था ठग गैंग में

जय मुडिय़ा और कमलेश पटेल की बातों पर भरोसा करते हुए शिवम ने जय की मार्फत अपना यूनियन बैंक औफ इंडिया का एटीएम कार्ड व खाते से जुड़ा सिम कार्ड कमलेश को दे दिया. कमलेश से इस के बदले में उसे 2 हजार रुपए मिल गए. करीब 10 दिनों बाद शिवम के पास कमलेश पटेल का फोन आया.

उस ने जय का हवाला देते हुए बताया कि जो एटीएम कार्ड और सिम उस ने दिया है, वह सही ढंग से काम नहीं कर रहा है. उस ने दूसरा एटीएम जारी कराने और अकाउंट से दूसरा मोबाइल नंबर भी रजिस्टर्ड करवाने के लिए कहा.

इस काम के लिए कमलेश ने उसे रिपटा के पास साइबर पौइंट दुकान पर भेजा, जहां उस दुकानदार ने उस के नाम पर दूसरी सिम एक्टिवेट कर खुद रख ली और नंबर दे कर उसे बैंक खाते में लिंक कराने के लिए कहा.

साइबर पौइंट संचालक के कहे अनुसार शिवम ने बैंक जा कर अपने अकाउंट से नया मोबाइल नंबर लिंक करा कर दूसरा एटीएम कार्ड जारी करवा लिया और उसी साइबर पौइंट वाली दुकान के संचालक को दे दिया.

इस के एक सप्ताह बाद फिर कमलेश का फोन आया. उस ने शिवम से कहा, “और रुपयों की जरूरत हो तो दूसरे बैंक का एटीएम कार्ड और दूसरा सिम कार्ड लिंक करा कर दे सकते हो.”

कमलेश की बातों से शिवम के मन में लालच आ गया. कमलेश के कहे अनुसार शिवम ने एक्सिस बैंक का एटीएम कार्ड साइबर पौइंट दुकान पर दे दिया और दूसरी सिम भी लिंक करा दी. लेकिन इस बार दुकानदार ने 2 हजार रुपए नहीं दिए. इस के कुछ दिन बाद उस ने बैंक जा कर वह एटीएम कार्ड ब्लौक करा दिया. जब शिवम ने कमलेश से रुपए न मिलने की शिकायत की तो इस के बाद कमलेश ने संपर्क करना बंद कर दिया.

8 मई को वह कमलेश को दिए गए एक्सिस बैंक खाते की डिटेल पता करने बैंक गया तो पता चला कि उस के खाते में 9 लाख रुपए से अधिक का लेनदेन हुआ है. उस के खाते से लगातार लेनदेन किया जा रहा था, जबकि उस ने खाता खुलवाने के बाद खुद कभी एक भी रुपया जमा नहीं किया था. इस बात का उलाहना जब शिवम ने कमलेश और उस के साथियों को दिया तो वे हाथापाई पर उतर आए.

साइबर ठगों तक पहुंच गई पुलिस

शिवम की बात सुन कर पुलिस समझ गई कि यह एक गैंग है जो सुनियोजित तरीके से धंधा कर रहा है. पुलिस टीम को अब उस गैंग तक पहुंचना था. पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि कमलेश पटेल ने इस तरह की डील और भी कई लोगों के साथ की हुई है. एसडीओपी भावना मरावी और गोटेगांव टीआई हिमलेंद्र पटेल ने जब इस की कडिय़ां जोड़ीं तो एक बड़े साइबर ठग गिरोह की जानकारी सामने आई.

जांच के दौरान पता चला कि शिवम जैसे ही कई लोगों के साथ कमलेश पटेल और उस की गैंग ने बैंक अकाउंट में धोखाधड़ी की है. पुलिस ने जब एकएक कर के 35 बैंक खातों की डिटेल खंगाली तो पता चला कि पिछले 5 महीने के दौरान इन बैंक खातों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों के लोगों के साथ धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपयों का लेनदेन किया गया है.

बैंक अकाउंट को किराए पर लेने वाला यह गिरोह गोटेगांव और आसपास के लोगों को यह बोल कर बैंक खाते खुलवाते थे कि वे उन्हें आसानी से लोन दिलवाएंगे. इस के लिए उन का सिबिल स्कोर बढ़ाएंगे, जिस से ज्यादा लोन मिल सके. इस के लिए वे लोगों के बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और खाते से लिंक मोबाइल का सिम कार्ड खुद रख लेते थे.

फिर यह लोग ऐसे बैंक अकाउंट आकाश राजपूत नाम के ठग को बेचते थे. आकाश इन बैंक खातों को जामताड़ा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली के साइबर फ्रौड करने वाले गिरोह को बेच देता था. ज्यादातर खाताधारकों को यह पता ही नहीं चलता था कि उन के खातों में लाखों का लेनदेन किया जा रहा है.

डिजिटल टेक्नोलौजी के दौर में देश में साइबर क्राइम जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, पुलिस के सामने चुनौतियां भी बढ़ी हैं. पढ़ेलिखे नौजवानों को सरकार नौकरी नहीं दे पा रही. ऐसे में युवा पीढ़ी अपराध की ओर बढ़ रही है. साइबर क्राइम की घटनाएं केवल अब बड़े शहरो में ही नहीं, छोटेछोटे गांवकस्बों में तेजी से बढ़ रही हैं.

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में साइबर क्राइम का यह अनूठा मामला था, जिस में साइबर ठग बैंक अकाउंट को किराए पर दे कर उन अकाउंट में करोड़ों रुपए का लेनदेन करते थे.

मध्य प्रदेश के तमाम लोगों के अकाउंट ले रखे थे किराए पर

साइबर ठगों को किराए पर बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले इस गैंग ने नरसिंहपुर, बैतूल, जबलपुर समेत दूसरे शहरों के लोगों को टारगेट कर रखा था. इस के पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी और गुना में यह गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ चुका था.

पुलिस ने जिन साइबर ठगी करने वाले लोगों को हिरासत में लिया है, उन में से एक आकाश सिंह राजपूत गैंग का सरगना है.

27 साल का आकाश गोसलपुर जबलपुर का रहने वाला है. उस के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के शिमला, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में साइबर फ्रौड और अन्य मामलों के 25 अपराध दर्ज हैं. जबलपुर पुलिस उसे जिलाबदर कर चुकी है.

ग्रेजुएट आकाश ने साइबर ठगी से एक महीने में 20 लाख रुपए कमीशन के जरिए कमाए थे. उस के पास से जब्त की गई कार इसी रकम से खरीदी गई थी.

दूसरा आरोपी शिवम उर्फ ब्रजेश राजपूत का काम लोगों से बैंक खाता खुलवाना था. वह पशु चिकित्सालय गोटेगांव के सामने रहता है और साइबर कैफे चलाता है. कैफे में आने वाले कम उम्र के लडक़ों को वह रुपयों का लालच दे कर बैंक में अकाउंट खुलवाता था. फिर अकाउंट का एटीएम कार्ड और सिम कार्ड को अपने पास रख कर युवाओं को 2-3 हजार रुपए दे देता था. इस के खिलाफ मारपीट के मामले भी दर्ज हैं.

पकड़ा गया एक आरोपी अश्विन पटेल गोटेगांव के कुम्हड़ाखेड़ा का रहने वाला है, जो आकाश का खास साथी है. यह बैंक खाता नंबर, पैसे, फरजी सिम आदि पहुंचाने कई बार पश्चिम बंगाल के हावड़ा जा चुका है. इसे इस ठगी के नेटवर्क के बारे में काफी कुछ पता है. अनिल उर्फ छोटू पटेल गोटेगांव के बैलहाई का रहने वाला है, जो लोगों के बैंक खाते खुलवाता था और उन की डिटेल्स आकाश और अश्विन को देता था.

वाट्सऐप ग्रुप में बोली लगती थी बैंक अकाउंट की

एक और आरोपी आजाद वार्ड गोटेगांव का रहने वाला अमन गोरिया है, जिस का काम भी बैंक खातों की व्यवस्था करना था. यह लोगों को उन का सिबिल स्कोर बेहतर बनाने का झांसा देता था तथा बैंक से लोन दिलाता था. पकड़ा गया छठवां आरोपी अवधेश उर्फ राणा राजपूत गोटेगांव के समीप गांव गोहचर का रहने वाला है. राणा भी ग्रामीणों के बीच जा कर लोन दिलाने का झांसा दे कर बैंक खाते खुलवाता था.

जीतने का लालच देते हैं और फिर लौटरी का अमाउंट ट्रांसफर करने के नाम पर लोगों के बैंक खाते की सीक्रेट डिटेल्स जैसे- कार्ड नंबर, सीवीवी कोड, ओटीपी आदि हासिल कर के उन के बैंक खाते में मौजूद सारे पैसे उड़ा लेते हैं.

ऐसे धोखेबाजों और साइबर फ्रौड से बचे रहने के लिए सरकार लगातार लोगों को जागरूक करती रहती है. लोगों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि कोई भी अनजान व्यक्ति आप के बैंक अकाउंट की डिटेल के लिए फोन, एसएमएस या ईमेल करे तो इसे इग्नोर कर दें. इस के बावजूद भी यदि कोई साइबर फ्रौड का शिकार हो तो सब से पहले बैंक को सूचना दे कर नजदीकी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत अवश्य दर्ज कराएं.

—भावना मरावी

एसडीओपी (गोटेगांव) नरसिंहपुर

प्यार में चली ऐसी चाल कि बना दिया खून

बिल्हौर मार्ग पर एक कस्बा है ककवन. इसी कस्बे से सटा एक गांव है नदीहा धामू. यहीं पर रामदयाल गौतम अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी कुसुमा के अलावा 2 बेटे सर्वेश, उमेश तथा 2 बेटियां राधा व सुधा थीं. रामदयाल गांव का संपन्न किसान था. उस का बेटा सर्वेश गांव में डेयरी चलाता था. संपन्न होने के कारण जातिबिरादरी में रामदयाल की हनक थी.

रामदयाल की छोटी बेटी सुधा 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी, जबकि बड़ी बेटी ने 12वीं पास कर के पढ़ाई छोड़ दी थी. रामदयाल उसे पढ़ालिखा कर मास्टर बनाना चाहता था, लेकिन राधा के पढ़ाई छोड़ देने से उस का यह सपना पूरा नहीं हो सका. पढ़ाई छोड़ कर वह मां के साथ घरेलू काम में मदद करने लगी थी.

गांव के हिसाब से राधा कुछ ज्यादा ही सुंदर थी. जवानी में कदम रखा तो उस की सुंदरता में और निखार आ गया. उस का गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें और कंधों तक लहराते बाल, हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे. अपनी इस खूबसूरती पर राधा को भी नाज था.

यही वजह थी कि जब कोई लड़का उसे चाहत भरी नजरों से देखता तो वह इस तरह घूरती मानो खा जाएगी. उस की इन खा जाने वाली नजरों से ही लड़के डर जाते थे.लेकिन आलोक राजपूत राधा की इन नजरों से जरा भी नहीं डरा था. वह राधा के घर से कुछ ही दूरी पर रहता था. आलोक के पिता राजकुमार राजपूत प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे. लेकिन रिटायर हो चुके थे. उन की एक बेटी तथा एक बेटा आलोक था. बेटी का वह विवाह कर चुके थे.

पिता के रिटायर हो जाने के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी आलोक पर आ गई थी. बीए करने के बाद वह नौकरी की तलाश में था. लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो उस ने अपनी खेती संभाल ली थी. इस के अलावा उस ने घर में किराने की दुकान भी खोल ली थी. इस से उसे अतिरिक्त आमदनी हो जाती थी.

राधा के भाई सर्वेश की आलोक से खूब पटती थी. आसपड़ोस में रहने की वजह से दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना था. आलोक जब भी सर्वेश के घर आता था, राधा उसे घर के कार्यों में लगी नजर आती थी. वैसे तो वह उसे बचपन से देखता आया था, लेकिन पहले वाली राधा में और अब की राधा में काफी फर्क आ गया था.

पहले जहां वह बच्ची लगती थी, अब वही जवान होने पर ऐसी हो गई थी कि उस पर से नजर हटाने का मन ही नहीं होता था.एक दिन आलोक राधा के घर पहुंचा तो सामने वही पड़ गई. उस ने पूछा, ‘‘सर्वेश कहां है?’ ‘‘मम्मी और भैया तो कस्बे में गए हैं. कोई काम था क्या?’’ राधा बोली.

‘‘नहीं, कोेई खास काम नहीं था. बस ऐसे ही आ गया था. सर्वेश आए तो बता देना कि मैं आया था.’’‘‘बैठो, भैया आते ही होंगे.’’ राधा ने कहा तो आलोक वहीं पड़ी चारपाई पर बैठ गया.  आलोक बैठा तो राधा रसोई की ओर बढ़ी. उसे रसोई की ओर जाते देख आलोक ने कहा, ‘‘राधा, चाय बनाने की जरूरत नहीं है. मैं चाय पी कर आया हूं.’’

‘‘कोई बात नहीं, मैं ने अपने लिए चाय भी चढ़ा रखी है. उसी में थोड़ा दूध और डाल देती हूं.’’ कह कर राधा रसोेई में चली गई.थोड़ी देर बाद वह 2 गिलासों में चाय ले आई. एक गिलास उस ने आलोक को थमा दिया, तो दूसरा खुद ले कर बैठ गई. चाय पीते हुए आलोक ने कहा, ‘‘राधा, बुरा न मानो तो मैं एक बात कहूं.’’

‘‘कहो.’’ उत्सुक नजरों से देखते हुए राधा बोली.‘‘अगर तुम जैसी खूबसूरत और ढंग से घर का काम करने वाली पत्नी मुझे मिल जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए.’’ आलोक ने कहा.आलोक की इस बात का जवाब देने के बजाय राधा उठी और रसोई में चली गई. उसे इस तरह जाते देख आलोक को लगा, वह उस से नाराज हो गई है, इसलिए उस ने कहा, ‘‘राधा लगता है मेरी बात तुम्हें बुरी लग गई. मेरी बात का कोई गलत अर्थ मत लगाना. मैं ने तो यूं ही कह दिया था.’’

इतना कह आलोक वहां से चला गया. लेकिन इस के बाद वह जब भी सर्वेश के घर जाता, मौका मिलने पर राधा से 2-4 बातें जरूर करता. उन की इस बातचीत पर घरवालों को कोई ऐतराज भी न था. क्योंकि मोहल्ले के नाते रिश्ते में दोनों भाईबहन लगते थे. गांवों में तो वैसे भी रिश्तों को काफी अहमियत दी जाती है.

लेकिन आलोक और राधा रिश्तों की मर्यादा निभा नहीं पाए. मेलमुलाकात और बातचीत से आलोक के दिलोदिमाग पर राधा की खूबसूरती और बातव्यवहार का ऐसा असर हुआ कि वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने के सपने देखने लगा. लेकिन अपने मन की बात वह राधा से कह नहीं पाता था.

वह सोचता था कि कहीं राधा बुरा मान गई और उस ने यह बात घर वालों से बता दी तो वह मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएगा. लेकिन यह उस का भ्रम था. राधा के मन में भी वही सब था, जो उस के मन में था.जब दोनों ओर ही चाहत के दीए जल रहे हों तो मौका मिलने पर उस का इजहार भी हो जाता है. ऐसा ही राधा और आलोक के साथ भी हुआ. फिर एक दिन उन्होंने अपने मन की बात जाहिर भी कर दी.

दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया तो उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. आए दिन होने वाली मुलाकातों ने दोनों को जल्द ही करीब ला दिया. वे भूल गए कि उन का रिश्ता नाजुक है. आलोक राधा के प्यार के गाने गाने लगा. इस तरह दोनों मोहब्बत की नाव में सवार हो कर काफी आगे निकल गए.

राधा और आलोक के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो मनों में शारीरिक सुख पाने की कामना भी पैदा होने लगी. इस के बाद मौका मिला तो दोनों सारी मर्यादाएं तोड़ कर एकदूसरे की बांहों में समा गए. इस के बाद तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते.

इस का नतीजा यह निकला कि कुछ दिनों बाद ही दोनों गांव वालों की नजरों में आ गए. उन के प्यार के चर्चे पूरे गांव में होने लगे. उड़तेउड़ते यह खबर राधा के पिता रामदयाल के कानों में पड़ी तो सुन कर उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे एकाएक विश्वास नहीं हुआ कि आलोक उस की इज्जत पर हाथ डाल सकता है. वह तो उसे अपने बेटों की तरह मानता था.यह सब जान कर उस ने राधा पर तो पाबंदी लगा ही दी, साथ ही आलोक से भी कह दिया कि वह उस के घर न आया करे.

बात इज्जत की थी, इसलिए राधा के भाई सर्वेश को दोस्त की यह हरकत अच्छी नहीं लगी. उस ने आलोक को समझाया ही नहीं, धमकी भी दी कि अगर उस ने अब उस की बहन पर नजर डाली तो वह भूल जाएगा कि वह उस का दोस्त है. इज्जत के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है.

इस के बाद उस ने राधा की पिटाई भी की और उसे समझाया कि उस की वजह से गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया है. वह ठीक से रहे अन्यथा अनर्थ हो जाएगा.

रामदयाल जानता था कि बात बढ़ाने पर उसी की बदनामी होगी, इसलिए बात बढ़ाने के बजाय वह पत्नी व बेटों से सलाह कर के राधा के लिए लड़के की तलाश करने लगा. इस बात की जानकारी राधा को हुई तो वह बेचैन हो उठी.

एक शाम वह मौका निकाल कर आलोक से मिली और रोते हुए बोली, ‘‘घर वाले मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे हैं. जबकि मैं तुम्हारे अलावा किसी और से शादी नहीं करना चाहती.’’ ‘‘इस में रोने की क्या बात है? हमारा प्यार सच्चा है, इसलिए दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’ राधा को रोते देख आलोक भावुक हो उठा. वह राधा के आंसू पोंछ उस का चेहरा हथेलियों में ले कर उसे विश्वास दिलाते हुए बोला, ‘‘तुम मुझ पर भरोसा करो, मैं तुम्हारे साथ हूं. मेरे रोमरोम में तुम्हारा प्यार रचा बसा है. तुम्हें क्या लगता है कि तुम से अलग हो कर मैं जी पाऊंगा, बिलकुल नहीं.’’

उस की आंखों में आंखें डाल कर राधा बोली, ‘‘मुझे पता है कि हमारा प्यार सच्चा है, तुम दगा नहीं दोगे. फिर भी न जाने क्यों मेरा दिल घबरा रहा है. अच्छा, अब मैं चलती हूं. कोई खोजते हुए कहीं आ न जाए.’’

‘‘ठीक है, मैं कोई योजना बना कर तुम्हें बताता हूं.’’ कह कर आलोक अपने घर की तरफ चल पड़ा तो मुसकराती हुई राधा भी अपने घर चली गई.रामदयाल राधा के लिए लड़का ढूंढढूंढ कर थक गया, लेकिन कहीं उपयुक्त लड़का नहीं मिला. इस से राधा के घर वाले परेशान थे, वहीं राधा और आलोक खुश थे. इस बीच घर वाले थोड़ा लापरवाह हो गए तो वे फिर से चोरीछिपे मिलने लगे थे.

एक दिन सर्वेश ने खेतों पर राधा और आलोक को हंसीमजाक करते देख लिया तो उस ने राधा की ही नहीं, आलोक की भी पिटाई की. इसी के साथ धमकी भी दी कि अगर फिर कभी उस ने दोनों को इस तरह देख लिया तो अंजाम अच्छा न होगा.सर्वेश ने आलोक की शिकायत उस के घर वालों से की तो घर वालों ने उसे भरोसा दिया कि वे आलोक को समझाएंगे. इस के बाद सर्वेश घर आ गया. इधर शाम को आलोक घर पहुंचा तो पिता राजकुमार ने टोका, ‘‘सर्वेश उलाहना देने आया था. तुम्हारी शिकायत कर रहा था कि तुम उस की बहन के पीछे पड़े हो. सच्चाई क्या है?’’

‘पिताजी, मैं और राधा एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’  ‘‘तुम्हारा दिमाग फिर गया है क्या? जो उस लड़की से शादी करना चाहते हो. क्या तुम्हें मालूम नहीं कि राधा दूसरी जाति की है और हम राजपूत हैं. यदि तुम ने उस से ब्याह रचाया तो समाज में हम मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. बिरादरी के लोग हमारा हुक्कापानी बंद कर देंगे. इसलिए कान खोल कर सुन लो, उस लड़की से तुम्हारा रिश्ता हरगिज नहीं हो सकता. भूल जाओ उसे.’’ राजकुमार ने कहा.

पिता की फटकार और स्पष्ट चेतावनी से आलोक परेशान हो उठा. उस का एक दोस्त छोटू उर्फ नीलू था. उस ने इस बारे में छोटू से बात की तो उस ने उस के पिता की बात को जायज ठहराया और राधा से संबंध तोड़ लेने का सुझाव दिया.आलोक ने अपनी मां का दिल टटोला तो उस ने भी साफ कह दिया कि जिस दिन राधा की डोली उस के घर आएगी, उसी दिन उस की अर्थी उठेगी.

मां की इस धमकी से आलोक कांप उठा. उस पर सवार राधा के प्यार का भूत उतरने लगा. मातापिता और दोस्त की नसीहत उसे भली लगने लगी. अत: उस ने निश्चय किया कि वह राधा से दूरी बनाएगा और प्यारमोहब्बत की बात नहीं करेगा. अब उस ने राधा से ब्याह रचाने की बात दिमाग से निकाल दी.

इस के बाद जब कभी आलोक का सामना राधा से होता, तो वह उस से बेमन से मिलता. बेरुखी से बात करता. न होंठों पर मुसकराहट, न चेहरे पर दमक होती. राधा नजदीकियां बढ़ाने की पहल करती, तो वह मना कर देता.फोन पर भी उस ने बात करना एक तरह से बंद ही कर दिया था. राधा दस बार फोन करती तो वह मुश्किल से एक बार रिसीव करता, उस पर भी ज्यादा बात न करता और फोन कट कर देता.

आलोक के इस रूखे व्यवहार से राधा परेशान हो उठी. उसे शक होने लगा कि आलोक किसी दूसरी लड़की के चक्कर में तो नहीं पड़ गया. अत: वह आलोक पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. वह जब भी मिलती या फोन पर बात करती तो शादी की ही बात करती. इधर कुछ समय से राधा आलोक को धमकाने भी लगी थी कि यदि उस ने शादी नहीं की तो वह पुलिस में उस की शिकायत कर देगी, तब उसे जेल भी हो सकती है.

24 अगस्त, 2020 की शाम 4 बजे राधा घर से गायब हो गई. वह देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी तो रामदयाल को चिंता हुई. उस ने अपने बेटे सर्वेश व उमेश को साथ लिया और रात भर उस की खोज करता रहा.

लेकिन राधा का कुछ भी पता न चला. रामदयाल को शक हुआ कि कहीं आलोक उसे भगा तो नहीं ले गया. वह आलोक के घर पहुंचा, तो आलोक घर पर ही मिला.26 अगस्त की सुबह गांव का ही किसान विमल अपने खेत पर पानी लगाने पहुंचा तो उस ने अपने खेत की मेड़ के पास पीपल के पेड़ के नीचे राधा का शव देखा. उस ने खबर राधा के घर वालों को दी. उस के बाद तो रामदयाल के घर में रोनापीटना शुरू हो गया.

घर के सभी लोग घटनास्थल पहुंच गए. लाश मिलते ही आलोक का परिवार घर से गुपचुप तरीके से फरार हो गया.रामदयाल गौतम ने थाना ककवन पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी अमित कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन की सूचना पर एसपी केशव कुमार चौधरी तथा एएसपी अनूप कुमार आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उस के गले में दुपट्टा था. इस से अंदाजा लगाया गया कि राधा की हत्या दुपट्टे से गला घोंट कर की गई होगी. उस की उम्र 19 वर्ष के आसपास थी.

घटनास्थल पर मृतका का पिता रामदयाल तथा भाई सर्वेश मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने उन दोनों से पूछताछ की तो सर्वेश ने उन्हें बताया कि उस की बहन की हत्या गांव के आलोक व उस के दोस्त छोटू ने की है.

पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने राधा के शव को पोेस्टमार्टम हेतु माती स्थित अस्पताल भिजवा दिया तथा थानाप्रभारी अमित मिश्रा को आदेश दिया कि वह मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करें.

आदेश पाते ही अमित कुमार मिश्रा ने मृतका के भाई सर्वेश की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत आलोक व छोटू के खिलाफ रिपोेर्ट दर्ज कर ली और उन्हें गिरफ्तार करने में जुट गए. इस के लिए उन्होंने मुखबिरों को भी लगा दिया.

29 अगस्त, 2020 की रात 10 बजे अमित कुमार मिश्रा ने मुखबिर की सूचना पर आलोक व छोटू को ककवन मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें थाना ककवन लाया गया. थाने पर जब दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने राधा की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

पूछताछ में आलोक ने बताया कि राधा उस पर शादी का दबाव बना रही थी, जबकि वह राधा से शादी नहीं करना चाहता था. उस ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी दी, तो उस ने राधा को ही मिटाने की योजना बनाई. इस में उस ने अपने दोस्त छोटू को शामिल कर लिया.

योजना के तहत उस ने 24 अगस्त की शाम 4 बजे राधा को खेतों पर बुलाया फिर उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया.

30 सितंबर, 2020 को पुलिस ने अभियुक्त आलोक राजपूत व छोटू को कानपुर देहात की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.

‘सिंघम अगेन’ है सभी सीरीज का बाप, 1 नंवबर को सिनेमाघरों में लेगी धांसू एंट्री

सिंघम फिल्म का तीसरा पार्ट अब जल्द लोगों को देखने को सिंघम अगेन के नाम से मिलेगा जो जल्द ही सिनेमाघरों में 1 नंवबर को रिलीज होने के बाद लगेगी. फिल्म का ट्रैलर आउट हो चुका है. इस फिल्म में पहले बनी सिंघम सीरीज की मूवीज से ज्यादा मस्ती, एक्शन, रोमांस देखने को मिलने वाला है. यह एक एक्शन, थ्रिलर और रोमांस से भरपूर फिल्म है. फिल्म में कई सारे एक्टर्स और एक्ट्रेसैस हैं. इन्हें साथ में देखना भी जबरदस्त एक्सपीरियंस साबित होगा.

 

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लेकिन सिंघम अगेन से पहले भी इस मूवी की दो सीरीज पहले आ चुकी है जिनके बारे में आज यहां बात करेंगे. किस सिंघम ने बौक्स औफिस पर क्या कमाल दिखाया या इस सीरीज की किस मूवी को लोगों का सबसे ज्यादा प्यार मिला.

इन सितारो से भरी है फिल्म ‘सिंघम अगेन’

इस एक्शन पैक्ड एक्शन मूवी में अजय देवगन, करीना कपूर, अक्षय कुमार, दीपिका पादुकोण, टाइगर श्राफ, अर्जुन कपूर, जैकी श्राफ सभी अपने धांसू स्टाइल और परफौर्मेंस के साथ नजर आएंगे.

फिल्म ‘सिंघम अगेन’ की कहानी

सिंघम अगेन की कहानी को राम, सीता और रावण से कनेक्ट करने की कोशिश की गई है. ट्रेलर की शुरुआत में भी दिखाया गया था कि अजय देवगन और करीना कपूर के साथ उनका बेटा है, जो कहता है कि सीता के लिए राम हजारों किलोमीटर दूर लंका चले गए थे. इस सीन को मूवी का आधार बनाया गया है और इस सीन को करीना कपूर की किडनैपिंग से जोड़ने का काम किया गया है . कहानी के मुताबिक, सिंघम अगेन में अजय देवगन यानी बाजीराव सिंघम अपनी पत्नी के करीना के लिए विलेन अर्जुन कपूर से लड़ते दिखाई देंगे. इस वजह से रोहित शेट्टी की मूवीज वाले एक्शन के सभी दांवपेंच नजर आएंगे.

फिल्म ‘सिंघम अगेन’ का बजट

सिंघम अगेन का बजट 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जा रहा है. लेकिन यहां हम सिर्फ सिंघम अगेन का जिक्र नहीं करेंगे बल्कि अजय देवगन की उस फिल्म का जिक्र करेंगे जिसका बजट कभी सिर्फ 70 करोड़ रुपये था लेकिन इसने बौक्स औफिस पर 343 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. जिसकी ताबड़तोड़ कमाई की वजह से ही सिंघम के ओर सीरीज देखने को मिल रहे है.

‘सिंघम’ सीरीज की पहली मूवी

सिंघम सिनेमा पर एक सक्सेसफुल मूवी रही है. पहली सिंघम साल 2011 में आई थी. जो पर्दे पर हिट साबित हुई थी. अपने बजट से ज्यादा की कमाई कर फिल्म दूसरी सीरीज बनाने पर आई थी. हालांकि पहली फिल्म सिंघम मलयाली फिल्म की कहानी पर बनी थी. इस फिल्म की कहानी शिवगढ़ (गोवा-महाराष्ट्र सीमा पर एक शहर) के ईमानदार डीसीपी बाजीराव सिंघम पर केंद्रित थी . इस फिल्म का निर्देशन रोहित शेट्टी ने किया था, इसमें अजय देवगन, काजल अग्रवाल और प्रकाश राज अहम रोल में नजर आए थे.

सिंघम फिल्म की कहानी

फ़िल्म की शुरुआत एक ईमानदार पुलिस अफसर राकेश कदम (सुधांशु पांडे) की आत्महत्या करने से होती है क्योंकि उसपर रिश्वत लेने का झूठा आरोप राजनेता जयकांत शिकरे (प्रकाश राज) ने लगाया गया था जो गोवा का एक गुंडा राजनेता है. कदम की पत्नी मेघा कदम (सोनाली कुलकर्णी) इस बात का बदला लेने की कसम खाती है. इस फिल्म का बजट जिसे अजय देवगन की वो फिल्म जिसने 70 करोड़ के बजट में कमाए थे 343 करोड़. फिल्म की सक्सेस के बाद ही फिल्म की बाकी दो सीरीज आई. सिंघम रिटर्न्स और सिंघम अगेन.

‘सिंघम रिटर्न्स’

जब फिल्म सिंघम सुपरहिट साबित हुई. उसके बाद फिल्म की दूसरी सीरीज सिंघम रिटर्न्स बनी. ये एक भारतीय एक्शन फिल्म रही. इसका निर्देशन भी रोहित शेट्टी ने ही किया. यह फिल्म साल 2011 में आई सिंघम नामक सीरीज की दूसरी मूवी है, इसके लीड एक्टर अजय देवगन थे जो इस फिल्म के सह-निर्माता भी रहे, इनके साथ एक्ट्रैस करीना कपूर खान भी थी.

यह फिल्म 15 अगस्त 2014 स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हुई. यह फिल्म दर्शकों के अनुसार खूब धमाल मचा रही थी. इसने दुनिया भर में करीब 90-100 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

फिल्म सिंघम रिटर्न्स की कहानी

2011 की सुपरहिट सिंघम के ही बाद, ईमानदार और निडर बाजीराव सिंहम डीसीपी मुंबई पुलिस बनकर मुंबई लौटता है. जिसके बाद सिंघम रिटर्न्स में कहानी मारधाड़ में तक हो जाती है. इस फिल्म में सिंघम की ही सेना का एक पुलिस कांस्‍टेबल मरा हुआ मिलता है और उसके ऊपर गैरकानूनी रूप से पैसे रखने का आरोप लगता है और भ्रष्‍ट करार दिया जाता है. इसी कहानी का पर्दाफाश करने के लिए राजनीति तरीके से काला बाजारी करने वाले को पकड़ने के लिए एक नई खोज शुरू की जाती है. पूरी कहानी काला बजारी और भ्रष्ट लोगों की खोज पर बनीं है.

ब्यूटीशियन का कोर्स किया है, गांव में रहती हूं जौब करना चाहती हूं पर घरवाले शादी के बाद कहते है?

सवाल

मैं 23 साल की हूं और उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहती हूं. मैं गांव की जिंदगी से अब ऊब चुकी हूं और किसी बड़े शहर में जा कर नौकरी या अपना कामधंधा शुरू करना चाहती हूं.

मैं ने अपने कसबे से ब्यूटीशियन का कोर्स किया है और इसी फील्ड में आगे बढ़ना चाहती हूं, पर मेरे घर वाले शादी करने पर जोर दे रहे हैं और बोलते हैं कि अपने पति के घर जा कर कुछ भी कर लेना, पर अभी नौकरी की सोचना भी मत. पर क्या गारंटी है कि मेरे ससुराल वाले मुझे काम करने की इजाजत देंगे?

इन्हीं सब बातों से मेरा मन करता है कि घर से भाग जाऊं और किसी बड़े शहर में जा कर अपने सपने पूरे करूं. क्या ऐसा करना सही होगा?

जवाब

नहीं, यह सही नहीं होगा. भागना आप की समस्या का हल नहीं, क्योंकि अभी आप ने गांव के बाहर की दुनिया देखी नहीं है कि वहां पगपग पर आप जैसी लड़कियों के इंतजार में दलाल और लुटेरे बैठे हैं.

आप गांव में ही रह कर अपने ब्यूटीपार्लर का कारोबार बढ़ाएं. शहरों में तो गलीगली छोटेबड़े ब्यूटीपार्लर हैं, जिन्हें चलाने वाली ज्यादातर औरतें जैसेतैसे गुजारा कर पा रही हैं. अकसर बड़े शहरों में जा कर सपने टूट जाते हैं, पूरे नहीं हो पाते. घुटन वहां की जिंदगी में भी कम नहीं है, जो चमकदमक के चलते नजर नहीं आती. जब भी, जहां भी शादी की बात चले, तो साफतौर पर लड़के और उस के घर वालों को बता दें कि आप यह बिजनैस करेंगी. मुमकिन है कि वे तैयार हो जाएं, क्योंकि आजकल हर किसी को कमाऊ बहू चाहिए.

पिछला प्रेम और सेक्स

‘लव, सैक्स और धोखा’ यह सिर्फ फिल्मी लफ्फाजी नहीं, आजकल युवाओं की जिंदगी इन्हीं 3 शब्दों के इर्दगिर्द है. रिश्तों की जरूरत को न समझने की आदत अब हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है, जिस से रिश्ते कमजोर हो रहे हैं.

प्रेम, विछोह और पुनर्मिलन के परंपरागत कौन्सैप्ट से दूर रंगीन परदे पर अब लव, सैक्स और धोखे का तड़का ही ज्यादा नजर आता है. आजकल इंस्टैंट लव और उस के बाद इंस्टैंट सैक्स नैटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो के जरखरीद प्लेटफौर्मों का ट्रैंड बन गया है.

प्रेम आधारित शो में वासना, कामुकता, स्वार्थ और धोखे का रंग ज्यादा नजर आता है. उन में समर्पण, विश्वास, संयम, प्रेम जैसी भावनाएं नहीं बल्कि बिंदासपन हावी है.

हिंदी सिनेमा ने प्यार पर आधारित बेहतरीन फिल्में दी हैं. ‘मुगलेआजम’, ‘पाकीजा’, ‘लैला मजनू’, ‘सोनी महिवाल’ जैसी फिल्मों को याद करिए. उस परंपरा से बिलकुल अलहदा आज की फिल्में या धारावाहिक प्यार और सैक्स की सीमाओं को तोड़ते नजर आते हैं.

प्यार का अर्थ है सैक्स और तृप्ति, जो बैडरूम की सीमा से बाहर भी कहीं भी हो सकता है. अब हर शो में कन्फ्यूज्ड प्रेमियों की कहानी परोसी जा रही है, जो तार्किक रूप से रिश्तों के साथ इंसाफ नहीं कर पाती. असलियत यह है कि आज की फिल्में व शो रिश्तों को ज्यादा छिछला बना रहे हैं. ये प्यार और सैक्स जैसी बेशकीमती भावना को बहुत हलका कर रहे हैं.

‘मनमरजियां’ ऐसी हिंदी फिल्म थी जिस में प्यार की कहानी टिंडर और फेसबुक से शुरू हुई थी. उस के बाद प्रेमीप्रेमिका छिपछिप कर मिलने लगते हैं. उन का मिलन अपनी सारी हदें लांघ जाता है. विवाहपूर्व शारीरिक संबंधों पर दोनों को कोई एतराज नहीं, बल्कि वे इसे ही प्यार समझते हैं. लड़की के परिवार वाले उसे रंगेहाथों पकड़ भी लेते हैं, लेकिन प्यार को हलके में लेने वाले, गैरजिम्मेदार और लापरवाह लड़के के लिए शादी कर के जिम्मेदारी लेना एक आफत होती है. इस तरह के लड़के कहते हैं कि प्यार के लिए शादी की क्या जरूरत. मगर लड़कियां आज भी प्रेमी से कमिटमैंट चाहती हैं. कमिटमैंट पर वे उस के साथ भागने को भी तैयार हो जाती हैं.

लड़कियों को जब एहसास होता है कि प्रेमी जिम्मेदार साथी बनने के लायक नहीं है क्योंकि उस की जेब खाली है और भविष्य में उसे जीवनयापन के लिए क्या करना है, इस की भी कोई रूपरेखा उस ने तैयार नहीं की है, तो उसे छोड़ कर उन्हें वापस लौटना पड़ता है.

इस के बाद उन के जीवन पर काला धब्बा पड़ा रहता है. उन्हें अपनी गलती का एहसास रहता है. उन्हें किसी भी नए जने से मिलने में हिचकिचाहट होती है. जिस रिश्ते में सीमाओं की गरिमा और परिवार की इज्जत की कोई परवा न हो और लड़की बिंदास जीवन जीने की आदी हो तो वह हमेशा उसी मोल्ड में वापस जाने को बेचैन रहती है जिस में पहला प्रेमी मिला था. परिवार तो साथ देते ही हैं चाहे उन की संतान कैसी भी हो.

शारीरिक सुख पाने की हवस में लड़की की आंखों पर ऐसा परदा पड़ जाता है कि वह अपने प्रेमी की असलियत नहीं समझ पाती.उस में इंसान की परख करने की क्षमता नहीं रहती है. वह बारबार नए आदमी के साथ हमबिस्तर होती है, वह भी खुलेआम. जबकि, लड़का उस से शादी कर के परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं है और जो व्यक्ति उस से शादी कर के जिम्मेदारी उठाने को तैयार है, यानी पुराने साथी के प्रति भी वह वफादार नहीं रह पाती है.

हालांकि उस की और उस के प्रेमी के बीच शारीरिक संबंधों की जानकारी होने पर ‘कोई बात नहीं’ कह कर वह स्वीकार कर ले मगर जिस वफादारी की उसे अपने साथी से उम्मीद हो, वह उस पर भी खरा न उतरे तो जिंदगी फिर एक बो  झ बन जाती है.

लड़कियों को ध्यान रखना चाहिए कि जिस के लिए प्यार का मतलब सिर्फ सैक्स है, वह उन के मतलब का नहीं. जिम्मेदारी लेना, रिश्तों को निभाना उस के बस में होना चाहिए. ऐसे लड़के कम होते हैं जो बेवफाई देख कर भी खामोशी ओढ़े रहें, उस के खून में जैसे कोई गरमी ही न हो, जैसे उस की रीढ़ की हड्डी न हो. दब्बू और कायर प्रेमी, जो अपनी प्रेमिका की तमाम गलत हरकतें देखते हुए भी खामोशी ओढ़े रहें, कम ही होते हैं. हर हाल में माफ करने और उस के साथ रहने को लालायित प्रेमी भी नहीं मिलते, याद रखें.

हमारे पुराण ऐसी कहानियों से भरे हैं जिन में ऋषिमुनि शारीरिक मिलन की बेताबी के आगे जगह और वक्त भी नहीं देखते, पर उस का खमियाजा ही लड़कियां भोगती रही हैं. आज भी वह बात बेटों में मौजूद है और ऐसे लड़कों की कमी नहीं. उन का प्रेम शारीरिक संबंध बनाने भर पर खत्म होता है.

प्रेमी महज डीजे है, जिस की कोई स्थायी कमाई नहीं है. बस ‘खाओ, खेलो’ के सिद्धांत पर चलने वाले लक्ष्यहीन और लापरवाह प्रेमी बहुत हैं. फिर भी उन्हें प्रेमिकाएं मिल जाती हैं. यहां तक कि उन्हें अपनी दूसरी प्रेमी के सामने प्यार का इजहार करने में कोई डर,  ि झ  झक या शर्मिंदगी नहीं होती. ऐसी लड़कियां भी कम नहीं हैं जो स्वार्थी हों और सिर्फ अपने मन की करने में विश्वास रखती हों, जिन्हें अपने परिवार की इज्जत की कोई परवा न हो. उन के आगे लौजिक की कोई लाइन नहीं खिंची है. उन्हें, दरअसल, लड़कों की परख नहीं है. यही वजह है कि वे बारबार अपने प्रेमियों से धोखा खाती हैं पर बारबार उन के साथ हमबिस्तर भी होती हैं क्योंकि उन्हें वही मोमैंट अच्छे लगते हैं.

कितनी ही लड़कियां प्रेमी के चक्कर से नहीं छूटना चाहतीं. वे चोरीछिपे मिलती रहती हैं और शारीरिक संबंध बनाती रहती हैं चाहे दूसरा प्रेमी भी हो या शादी हो गई हो. दरअसल, उन्हें ट्रौफी गर्ल, जो ड्राइंगरूम की शोभा बनती है, रैस्तरां में दूसरे लड़कों में ईर्ष्या पैदा करती हैं, बनना अच्छा लगता है और वे इसे मानती हैं कि जीवन सफल हो गया. प्यार की जटिलताओं को सम  झने में सैक्स का तड़का ठीक नहीं, इस से जीवन स्थिर नहीं होता.

आज ऐसे परिवारों की गिनती बढ़ती जा रही है जहां परिवार के बुजुर्ग अपनी मनमरजी करने वाली बेटी या बेटे के कारण बारबार निराश व अपमानित होते हैं. अनिश्चितता से घिरी एक लड़की, जो सैक्स और प्रेम में विभेद न जाने, जिस के लिए परिवार की इज्जत और जिम्मेदारी कोई माने नहीं रखती है,  कितनी दूर तक जीवन के पक्के रिश्ते को निभा पाएगी, यह सवाल उठ खड़ा हो जाता है.

एक नए समाज की शुरुआत तो हो गई है. पर न मर्ज पता है, न इलाज. अब यह आम है, बस इसे स्वीकार कर लो. इस के परिणाम की चिंता न करो. पतिपत्नी बन जाओ तो कैसे तनाव से दिन गुजरेंगे, तलाक होंगे, बच्चे भटकेंगे आदि की चिंता युवाओं को नहीं है. यह गलती है, भटकाव है क्योंकि आज की थोड़ी सेफ जिंदगी में भी जवानी 40-50 में ढलने लगेगी ही. उस के बाद के सालों में क्या होगा, यह 15-20 साल वालों को आज एहसास नहीं है.

सजा ए मौत : क्या हत्यारे को मिल पाई फांसी

‘हत्यारे को फांसी दो… फांसी दो… फांसी दो…’ भीड़ में लगातार नारे बुलंद हो रहे थे. ऐसा लग रहा था कि लोगों में गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था?

थाने के सामने प्रदर्शन होते देख वहां पत्रकारों की फौज जमा हो गई थी, जिस में प्रिंट मीडिया के कई पत्रकार धड़ाधड़ प्रदर्शनकारियों के फोटो खींच रहे थे, तो इलैक्ट्रौनिक मीडिया के बहुत से पत्रकार विजुअल ले कर माइक आईडी लगा कर प्रदर्शनकारियों के बयान ले रहे थे. कुछ पत्रकारों का कैमरा उस की ओर भी घूमता दिखाई दे रहा था.

जान मोहम्मद हंगामा देख कर थाने के गेट के सामने ही खड़ा हो कर प्रदर्शनकारियों को हैरानी से देख रहा था. प्रदर्शनकारियों के हंगामे की खबर सुन कर किसी भी अनहोनी के डर को ले कर एसपी साहब के आदेश पर सिक्योरिटी के नजरिए से कई थानों की पुलिस उस के थाने पर भेज दी गई थी.

‘‘जान मोहम्मद, तुम्हारी एक नादानी की वजह से आज यह हंगामा हो रहा है. तुम्हें कितनी बार सम?ाया है कि तुम एक तो मुसलिम हो और साथ ही, तुम ज्यादा ईमानदार और इमोशनल हो कर ड्यूटी मत किया करो, लेकिन तुम मानते ही नहीं. देख लिया इस का नतीजा.

अब भुगतो,’’ जान मोहम्मद का दारोगा साथी फिरोज उस से नाराजगी जाहिर करते हुए बोला.

फिरोज की बात को सुन कर जान मोहम्मद खामोश ही रहा. वह अच्छी तरह जानता था कि यह हंगामा उसी के लिए हो रहा है. सुबह से ही इस छोटे से कसबे में कर्फ्यू लगने जैसा माहौल हो गया था. एक पनवाड़ी की दुकान भी नहीं खुली हुई थी कि कोई पान भी खरीद कर खा ले. पूरे कसबे में घूमघूम कर इन प्रदर्शनकारियों ने ही दुकानदारों से बोल कर दुकानें बंद करा दी थीं.

जान मोहम्मद यह तो समझ गया था कि यह सब उस विधायक नेतराम के इशारों पर हो रहा है, वरना एक अपराधी की मौत पर यह सब नहीं हो रहा होता, बल्कि लोग खुशियां मना रहे होते. प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए थाने पर ड्यूटी कर रहे उस के सभी सहयोगी लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे लोग मान ही नहीं रहे थे.

‘‘आप सभी लोग शांत हो जाएं. बस, कुछ ही देर में एसपी साहब पहुंच रहे हैं. वे आप से बात करेंगे. आप सभी लोग तब तक सभागार में जा कर बैठें,’’

तभी सिपाही बलवंत ने बाहर आ कर प्रदर्शनकारियों से कहा.

‘‘हत्यारे को फांसी दो…’’ तभी प्रदर्शनकारियों की भीड़ में से एक आवाज दोबारा हवा में गूंज उठी.

जान मोहम्मद ने देखा कि सामने संदीप खड़ा था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि समय बदलने के साथसाथ इनसान की सोच क्या से क्या हो गई है. पैसों के आगे लोगों की सोचनेसमझाने की ताकत खत्म हो जाती है और फिर उन को जिस तरह से चाहो, इस्तेमाल कर लो. वह यह बात बखूबी सम?ा रहा था कि पैसे के लालच के आगे भीमा जैसे अपराधी को हीरो बनाने में ये सब कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.

पुलिस की ट्रेनिंग में अकसर जहां उन को ईमानदारी से अपने फर्ज को अंजाम देना सिखाया जाता था, वहीं इस के अलावा अकसर सम?ाया जाता था कि अपराधी एक दीमक की तरह होता है, उसे अगर समय रहते खत्म न करो, तो वह समाज को अंदर से खोखला बना देता है और 2 दिन पहले उस ने भी यही किया था. एक अपराधी का ऐनकाउंटर कर समाज को खोखला होने से बचा लिया था.

जान मोहम्मद को अचरज हो रहा था कि कुछ महीने पहले ही संदीप की बहन के साथ उसी अपराधी ने रेप जैसी घिनौनी हरकत की थी और आज वही संदीप अपराधी भीमा की मौत को ले कर प्रदर्शन कर रहा था.

यही नहीं, प्रदर्शनकारियों की उस भीड़ में वे चेहरे ही उसे ज्यादा दिखाई दे रहे थे, जिन्हें भीमा सब से ज्यादा परेशान करता था.

जब से जान मोहम्मद इस कसबे में पोस्टिंग हो कर आया था, तभी से उस ने कसबे में अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए थे और कसबे में अपराध न के बराबर हो गए थे, क्योंकि उस ने ज्यादातर अपराधियों को जेल की हवा खिला दी थी, तो कुछ अपराधी उस के खौफ से कसबे से भागने पर मजबूर हो गए थे.

और हां, कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने मामले को निबटाने को ले कर जान मोहम्मद को रिश्वत देनी चाही थी, पर उन्हें भी उस ने अच्छा सबक सिखाया था, जिस के चलते वह अब कुछ लोगों की आंखों में कांटे की तरह चुभने लगा था.

जान मोहम्मद को इतना समय हो गया था पुलिस की ड्यूटी करते हुए, लेकिन आज तक उस की वरदी पर रिश्वत खाने जैसा भद्दा दाग नहीं लगा था. जहां उस के साथी छोटेमोटे झगड़े निबटाने के एवज में भी मोटी रकम दोनों पक्षों से वसूल करते थे. एक वह था, जो छोटेमोटे झगड़ों को आपस में ही समझाबुझा कर निबटा देता था. गंभीर मामलों में वह बहुत ही सख्त रहता था और आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही करता था.

‘यार जान मोहम्मद, तुम ज्यादा ईमानदार न बना करो, क्योंकि आजकल ईमानदारी में कुछ नहीं मिलता. हमें देखो… मोटा पैसा भी कमाते हैं और साहब लोगों की ज्यादा झिकझिक भी नहीं सुननी पड़ती…’ एक बार जब जान मोहम्मद ने पड़ोसियों के आपसी झगड़े को बिना कुछ लिएदिए ही निबटा दिया था, तो यह देख कर उस के साथी दारोगा विजय ने उस से कहा था.

लेकिन जान मोहम्मद चुप ही रहा था. कुछ लोग उसे वैसे भी ‘सनकी दारोगा’ कहने लगे थे, जिस के चलते उस के ज्यादातर तो ट्रांसफर ही होते रहे थे. पहले उस की पोस्टिंग शहर के थाने में हुई थी.

हर रोज की तरह जान मोहम्मद उस दिन भी अपने औफिस में बैठा हुआ था कि तभी किसी अनजान नौजवान का उस के पास फोन आया कि कुछ गुंडे एक लड़के की बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं. उस ने उस नौजवान से जगह का नाम पूछा और फौरन 2 सिपाहियों के साथ मौके पर जा पहुंचा.

जान मोहम्मद के पहुंचते ही उन लोगों ने उस लड़के को पीटना बंद कर दिया, लेकिन तब तक उस की मौत हो चुकी थी.

जान मोहम्मद ने देखा, यह वही लड़का राहुल था, जो हर समय लोगों की मदद करता नजर आता था. राहुल की पिटाई होते देख कर भी कोई उस की मदद करने नहीं आया था.

जान मोहम्मद राहुल की लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के कागजात तैयार कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर थाने ले आया था. बाद में उसे पता चला कि वे सभी आरोपी किसी बड़े नेता के गुंडे थे.

जान मोहम्मद के सीनियर दारोगा साथी ने उसे आरोपियों को छोड़ने के लिए कहा था, वरना बेवजह ही उस का ट्रांसफर यहां से कहीं दूर कर दिया जाएगा, लेकिन उस ने आरोपियों को छोड़ने से मना कर दिया और जल्द ही राहुल के परिवार द्वारा मिली तहरीर के आधार पर सभी आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर कागजी कार्यवाही भी पूरी कर दी.

लेकिन, जान मोहम्मद आरोपियों को जेल भेजने की कवायद पूरी करता, इस के पहले ही उस का ट्रांसफर इस छोटे से कसबे पलिया में कर दिया गया था.

यहां आ कर भी जान मोहम्मद ने अपराध को काबू में करने के लिए अहम रोल निभाया था, लेकिन अपराध और अपराधियों के लिए इतना सख्ती बरतने के बावजूद अभी भी विधायक नेतराम का दायां हाथ भीमा जैसा खतरनाक अपराधी उस की पकड़ से दूर था. उस ने कई बार भीमा को गिरफ्तार करने की सोचा था, लेकिन उस के खिलाफ कोई भी मामला नहीं मिल पाया था.

अभी हाल ही में जान मोहम्मद ने रेप जैसे संगीन मामले में भीमा को गिरफ्तार भी किया था. राधेश्याम नाम के एक आदमी की बेटी के साथ भीमा ने घर में घुस कर रेप किया था, जिस की तहरीर भीमा के खिलाफ थाने में दी गई थी.

जान मोहम्मद को भीमा को गिरफ्तार किए कुछ ही समय हुआ था कि उस के पास साहब लोगों के फोन आने शुरू हो गए और उसे मजबूरी में भीमा को छोड़ना पड़ा था. यहीं नहीं, पीड़िता द्वारा की गई शिकायत को भी चंद घंटे में वापस करा लिया गया था और जब शिकायत वापस लेने आए राधेश्याम से उस ने मना किया था, तो उस के सीनियर दारोगा ने उसे बताया कि विधायक नेतराम ने मामले को लेदे कर निबटा लिया है.

यह सुन कर जान मोहम्मद हैरान रह गया, लेकिन 2 दिन बाद ही उसे सूचना मिली कि राधेश्याम की बेटी ने खुदकुशी कर ली है.

इस कांड के बाद न जाने क्यों विधायक नेतराम के प्रति जान मोहम्मद का गुस्सा बढ़ता जा रहा है कि भीमा जैसे अपराधियों का वह साथ दे रहा था. उसे तो यह समझ नहीं आ रहा था कि ये कैसे नेता हैं, जो एक वोट लेने के लिए जनता से बड़ेबड़े दावे करते हैं और जिस जनता के दिए हुए वोटों से चुने जाते हैं, उसी जनता को बाद में कुछ नहीं समझाते हैं, क्योंकि राजनीति का दंश जान मोहम्मद के पूरे परिवार ने भी झोला था.

जब जान मोहम्मद छोटा ही था कि एक जमीनी झगड़े में उस के अम्मीअब्बू और बड़ी बहन की हत्या करा दी गई थी, लेकिन कुछ नेता उस के परिवार की हत्या करने वालों को बहुत ही सफाई से बचा ले गए थे. मुकदमे में धाराएं इतनी हलकी करा दी गई थीं कि 3-4 महीने में ही सब की जमानत हो गई थी.

अम्मीअब्बू के इंतकाल के बाद जान मोहम्मद को रफीक चाचा ने पालपोस कर बड़ा किया था. वह बड़ा हो कर पुलिस अफसर बनना चाहता था, जिस से कि वह अपराध और अपराधी को खत्म कर सके और उस के इस सपने को पूरा करने के लिए उस के चाचा ने पूरा जोर लगा दिया था. पढ़ाई में पैसा कम पड़ा, तो चाचा ने अपनी जमीन भी बेच दी थी.

जब जान मोहम्मद पुलिस अफसर बना तो महकमे में फैले भ्रष्टाचार को देख कर उसे एक बार लगा कि शायद उस ने नौकरी जौइन कर के गलत किया है, लेकिन उसे अपने वादे को पूरा करना था और इस के लिए उसे वरदी पहनना जरूरी था.

ड्यूटी जौइन करने के बाद जान मोहम्मद अपना फर्ज बखूबी निभाने लगा. जल्द ही उस कीचर्चा दूरदूर तक होने लगी और अपराधी तो जैसे उस के नाम से कांप से जाते थे. उस की कड़ी कार्यवाही को देखते हुए शासन के आदेश पर उस का ट्रांसफर जल्द ही एक थाने से दूसरे थाने पर कर दिया जाता था, जिस के चलते आज वह पलिया कसबे में पहुंचा था.

अभी 2 दिन पहले ही जान मोहम्मद के मुखबिर ने सूचना दी थी कि भीमा एक लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा है. यह सुन कर उस का खून खौल उठा और वह सिपाहियों के साथ गाड़ी ले कर मौके पर पहुंच गया.

जान मोहम्मद ने देखा कि भीमा कसबे की ही एक 17-18 साल की लड़की को उठा लाया था. यह देख कर उस ने भीमा को लड़की को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन भीमा के मना करने पर उस ने गुस्से में आ कर भीमा को अपनी पिस्तौल से गोली मार दी, जिस से उस की मौके पर ही मौत हो गई थी.

भीमा की जान मोहम्मद द्वारा ऐनकाउंटर किए जाने की खबर कुछ पलों में ही कसबे में आग की तरह फैल गई. तभी से विधायक के इशारे पर यह सब बवाल होना शुरू हो गया था.

‘‘जय हिंद सर,’’ तभी किसी की आवाज पर जान मोहम्मद की सोच भंग हो गई. उस ने देखा कि एसपी साहब पहुंच गए थे, जिन को देख कर सिपाही कुलदीप ने सैल्यूट किया था.

जान मोहम्मद ने भी एसपी साहब को देख कर तुरंत ही सैल्यूट किया. एसपी साहब ने उसे एक नजर देखा और सभागार की ओर बढ़ गए.

एसपी साहब को देख कर जान मोहम्मद को सुकून मिला था कि वे जायज ही फैसला करेंगे, क्योंकि उन के बारे में अकसर यह कहा जाता था कि वे अपराधियों के प्रति काफी कठोर हैं, उन्हें अपराध और अपराधियों से सख्त नफरत है.

‘‘सर, आप को सस्पैंड कर दिया गया है और आप पर हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया है,’’ कुछ देर के बाद सिपाही बलवंत ने आ कर जान मोहम्मद को बताया.

यह सुन कर जान मोहम्मद को ऐसा लगा कि उसे अपने फर्ज की कीमत चुकानी पड़ी है और उसे सजा ए मौत दी जा रही है.

बस, और नहीं : क्या रीमा कभी समझ पाई शादीशुदा जिंदगी को

रीमा के ब्याह को 2 साल होने जा रहे थे, लेकिन आज तक वह खुद को इस सोच से बाहर नहीं निकाल पाई थी कि आखिर उस का पति रोशन उस से प्यार करता भी है या नहीं या फिर सिर्फ प्यार और पति धर्म निभाने की महज ऐक्टिंग ही करता है, क्योंकि अगर रोशन सचमुच उस से प्यार करता, तो कभी भी वह छोटीछोटी बातों पर उसे खरीखोटी नहीं सुनाता, जराजरा सी बात पर वह अपना आपा नहीं खोता.

कभीकभार की बात होती तो शायद रीमा के मन में यह विचार आता ही नहीं, लेकिन अब आएदिन गालीगलौज, लड़ाई?ागड़ा यह सब तो रोशन की आदत में ही शुमार हो गया था.

अपने पति से प्यार पाने की चाह में रीमा ने क्याकुछ नहीं किया. उस ने वह सब किया, जो अकसर ज्यादातर पत्नियां कभी खुशी से, तो कभी मजबूरी में किया करती हैं.

रीमा ने भी घर की सुखशांति, पति का प्यार और अपनी शादीशुदा जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए पूजा, हवन, व्रत जिस ने जो कहा, जैसा करने को कहा, इन 2 सालों में वह सारे जतन कर डाले, लेकिन नतीजा ज्यों का त्यों ही बना रहा. रोशन के बरताव में रत्तीभर भी कोई बदलाव नहीं हुआ.

अलबत्ता, समय के साथसाथ रोशन का बरताव रीमा के संग और ज्यादा खराब होने लगा था. रीमा भी इसे अपनी किस्मत मान कर सम?ाता करती चली जा रही थी. वह रोशन के जोरजुल्म को चुपचाप सहती जा रही थी.

आमतौर पर देखा गया है कि हर दुख, जोरजुल्म सहने के बाद भी औरतें अपने पति के खिलाफ आवाज नहीं उठाती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उन का बसाबसाया घर टूट जाएगा, उन की जगहंसाई होगी और इस समाज में उन का इज्जत से जीना दूभर हो जाएगा.

रीमा पढ़ीलिखी और कामकाजी होने के बावजूद इसी सोच के तले दबी हुई थी और यही वजह थी कि वह रोशन की जीवनसंगिनी और बराबर की हकदार होने के बावजूद रोशन के लिए पैर की जूती से ज्यादा कुछ नहीं थी.

रोशन का जब मन करता, वह रीमा पर चीखनेचिल्लाने लगता. यहां तक कि कभीकभार वह हाथ चलाने से भी गुरेज न करता, लेकिन इतना था कि हाथापाई के दौरान अगर कभी रीमा को चोट लग जाती या कभी अचानक उस की तबीयत खराब हो जाती, तो वह रीमा को फौरन डाक्टर के पास ले कर जाता, उस की मरहमपट्टी कराता, उस का पूरा इलाज कराता. रीमा का पूरा खयाल रखता.

इसे देख कर आसपड़ोस के लोग कहते, ‘रीमा का पति भले ही गुस्से वाला है, लेकिन रीमा का कितना ध्यान रखता है, उस से कितना प्यार करता है.’

आसपास के लोगों की बातें सुन कर रीमा खुद भी यह मान बैठती कि उस का पति चाहे उस पर कितना भी जुल्म क्यों न करता हो, पर खयाल भी तो वही रखता है. उस से प्यार भी करता है.

रीमा के मन में जब भी ऐसे विचार आते, तब उस का दिमाग उस से कहता, ‘तेरा पति तु?ो से कैसा प्यार करता है? उस का जब जी चाहता है, गालीगलौज करता है, मारतापीटता है. रात को तेरा मन रहे या न रहे, पर वह अपनी मर्दानगी तुझ पर दिखाता है, तु?ो नोंचताखसोटता है.

‘छि:… क्या इसे ही प्यार कहते हैं. अगर यही प्यार है तो वह तु?ो प्यार न करे, वही अच्छा है. प्यार करना और खयाल रखना दोनों अलगअलग है…’

रीमा के दिल और दिमाग के सामने यह सवाल फन फैलाए खड़ा हो जाता कि उस का पति उस से प्यार करता भी है या नहीं?

आज सुबहसुबह घर के सारे काम निबटा कर रीमा आईने के सामने खड़ी स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी कि अचानक रोशन उस के सामने आ खड़ा हुआ और उस पर चिल्लाने लगा, ‘‘तुम स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाती हो या फैशन परेड में… या फिर अपने जिस्म की नुमाइश करने? इतना ज्यादा चेहरे को लीपपोत कर और बनठन कर स्कूल जाने की जरूरत ही क्या है? किस को दिखाने के लिए यह सारा ताम?ाम है?’’

रोशन से यह सब सुन कर रीमा कुछ सम?ा ही नहीं पाई कि वह क्या कहे. वह तो रोज ऐसे ही तैयार होती है, फिर आज ऐसा क्या हो गया?

रीमा शांत भाव से बोली, ‘‘क्यों, क्या हुआ…? मैं तो रोज ऐसे ही स्कूल जाती हूं.’’

रीमा का इतना कहना था कि रोशन उस पर भड़क गया और रीमा के सिर के बालों को अपनी मुट्ठी में लेते हुए बोला, ‘‘वही तो मैं कह रहा हूं कि तुम रोज इतना मेकअप कर के स्कूल क्यों जाती हो?’’

रीमा खुद को छुड़ाते हुए बोली, ‘‘अरे, कैसी बातें करते हैं? मैं ने कहां मेकअप किया है. वर्क प्लेस में थोड़ा तो प्रैजेंटेबल दिखना पड़ेगा न. ऐसे ही मुंह उठा कर तो मैं स्कूल नहीं जा सकती न.’’

रोशन शायद रीमा से यही सुनना चाहता था, क्योंकि रीमा के ऐसा कहते ही रोशन बोला, ‘‘अगर वर्क प्लेस में प्रैजेंटेबल दिखना जरूरी है, तो तुम नौकरी छोड़ क्यों नहीं देती हो? मैं अच्छाखासा कमाता हूं, तो तुम्हें नौकरी करने की क्या जरूरत है?’’

शादी के बाद से ही रोशन लगातार इसी बात पर जोर दे रहा था कि रीमा अपनी नौकरी छोड़ दे, लेकिन रीमा अपनी जिद पर अड़ी हुई थी कि वह किसी भी हालत में नौकरी नहीं छोड़ेगी. आज इसी बात को ले कर दोनों के बीच फिर ?ागड़ा छिड़ गया और रोशन गालीगलौज पर उतर आया था.

स्कूल के लिए देरी हो रही थी, इसलिए रीमा इस समय बेकार के ?ागड़े में पड़ कर अपना समय खराब नहीं करना चाहती थी और रोशन के हाथों को ?ाटक कर वह घर से स्कूल के लिए निकल गई. रोशन चिल्लाता रह गया.

सारे रास्ते रीमा का मन बस उसे यही सम?ाने में लगा हुआ था कि आखिर उस की नौकरी कौन सी सरकारी है? वह प्राइवेट स्कूल में एक टीचर ही तो है, फिर घर की शांति और पति से बढ़ कर नौकरी थोड़े होती है. वह नौकरी छोड़ क्यों नहीं देती? वह क्यों बेकार में नौकरी करने की हठ पकड़े हुए है? नौकरी थोड़े ही घर पर आएदिन हो रहे ?ागड़ों पर रोक लग जाएगी और वह सुकून से जिंदगी जी पाएगी.

बारबार रीमा का मन नौकरी छोड़ने का कर रहा था, इसलिए हार कर रीमा ने नौकरी से इस्तीफा देने का मन बना लिया. उस ने सोचा कि अगर नौकरी छोड़ने से घर की शांति, मन का सुकून और पति का प्यार सब मिल सकता है, तो हायहाय कर के नौकरी करने का क्या फायदा?

नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला ले कर रीमा स्कूल पहुंची. जब वह स्टाफरूम पहुंची, तो उस ने पाया कि सभी टीचर अपनीअपनी क्लास लेने जा चुके हैं. केवल रीमा की पक्की सहेली श्रावणी बैठी हुई थी, क्योंकि उस का क्लास ब्रेक था.

रीमा को देखते ही श्रावणी को यह सम?ाने में समय नहीं लगा कि रीमा का अपने पति के संग ?ागड़ा हुआ है.

रीमा के बैठते ही श्रावणी बोली, ‘‘चेहरे पर बारह क्यों बजे हैं? आज फिर हो गया क्या पति से ?ागड़ा?’’

श्रावणी के ऐसा कहने पर लंबी सांसें लेते हुए रीमा बोली, ‘‘अब मैं तु?ो क्या बताऊं यार, आज फिर रोशन बेवजह मु?ा पर नाराज होने लगे, गालीगलौज करने लगे और मेरे बालों को पकड़ कर

इतना जोर से खींचा कि अब तक मेरे सिर में दर्द हो रहा है. मैं तो सम?ा ही नहीं पाती हूं कि आखिर रोशन मु?ा से चाहते क्या हैं?

‘‘लेकिन, अब मैं ने भी सोच लिया है कि इस रोजरोज के ?ां?ाट से छुटकारा पाने का बस एक ही रास्ता है कि मैं यह नौकरी ही छोड़ दूं. कम से कम रोशन से मेरा रिश्ता तो सुधर जाएगा.’’

रीमा की बातें सुन कर श्रावणी ने अपना सिर पकड़ लिया और उसे डांटते हुए बोली, ‘‘तेरा दिमाग तो ठिकाने पर है न… नौकरी छोड़ने की बात तेरे दिमाग में आई तो आई कैसे… और, तु?ो क्या लगता है कि तू नौकरी छोड़ देगी, तो तेरा पति तु?ो गाली देना बंद कर देगा? तु?ो पीटना छोड़ देगा? तू अपने पति की प्रेमिका बन जाएगी?

‘‘ऐसा कुछ भी नहीं होगा. अभी भी समय है कि अपनी आंखें खोल. अपने साथ हो रही इस नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठा. इस तरह कब तक तू अपने पति के हाथों की कठपुतली बनी रहेगी?’’

श्रावणी के इतना सब कहने के बावजूद रीमा पर इस का कोई असर नहीं हुआ और वह अपनी शादीशुदा जिंदगी को बचाए रखने के लिए नौकरी छोड़ने के लिए तैयार थी.

असल में रीमा के दिलोदिमाग में अपनी मां की कही वे बातें बैठी हुई थीं, जो सालों से सुनती आ रही थी, ‘‘अपने घरपरिवार के लिए औरत को सबकुछ सहना ही पड़ता है. घर उसी औरत का बनता है, जो अपनी खुशियों को छोड़ कर हर तरह के दुखों और मुसीबतों को सहती है.’’

रीमा पढ़ीलिखी, कामकाजी और अपने पैरों पर खड़ी होने के बावजूद सदियों से खींची गई उस लक्ष्मण रेखा को लांघ नहीं पा रही थी, जो समाज द्वारा केवल और केवल औरत को अपने काबू में रखने के लिए बनाई गई थी.

शाम को जब रीमा घर पहुंची, तो रोशन शराब के नशे में चूर उस के स्कूल से लौटने का इंतजार कर रहा था, क्योंकि रीमा सुबह उस का हाथ ?ाटक कर जो घर से निकल गई थी.

रीमा के घर के भीतर आते ही रोशन उस पर भड़क उठा, उसे भलाबुरा कहने लगा और गंदीगंदी गालियां देने लगा.

कुछ देर तक तो रीमा सुनती रही, लेकिन जब उस के बरदाश्त से बाहर हो गया, तो वह भी पलट कर जवाब देने लगी और दोनों के बीच ?ागड़ा बढ़ता चला गया. तभी अचानक रोशन रीमा को उस के बालों से पकड़ कर खींचता हुआ घर के आंगन में ले आया, उसे भद्दी और गंदी गालियां देने लगा, जिसे सुन कर आसपड़ोस के लोग वहां इकट्ठा हो गए, जिन में कुछ बड़ी, तो कुछ छोटी लड़कियां भी थीं.

कुछ ही देर बाद देखते ही देखते रोशन ने अपनी बैल्ट निकाल ली और रीमा को पीटने लगा, जिसे देख कर वहां खड़ी लड़कियां सहम गईं. उन की आंखों में डर साफ नजर आ रहा था.

यह देख कर अचानक रीमा ने रोशन के हाथों से बैल्ट छीन ली और रोशन पर पलटवार कर दिया, क्योंकि रीमा वहां पर खड़ी डरीसहमी लड़कियों के सामने यह उदाहरण पेश नहीं करना चाहती थी कि पति चाहे जो करे, सहना करना पत्नी का धर्म है.

रोशन की पिटाई होते देख वहां जमा छोटीबड़ी लड़कियों की आंखों में चमक आ गई और कुछ ऐसी औरतें जो मर्दों के जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने में खुद को कमजोर पाती थीं, के होंठों पर भी दबी हुई मुसकान उभर आई.

कई मर्दऔरत ऐसे भी वहां मौजूद थे, जो रीमा की इस हरकत पर बुदबुदा रहे थे, कानाफूसी कर रहे थे, रीमा को बेशर्म और न जाने क्याक्या कह रहे थे, लेकिन रीमा उन सभी की परवाह किए बगैर आज अपने पति रोशन के जोरजुल्म के खिलाफ पूरे दमखम के साथ खड़ी थी.

साथ ही साथ, रीमा अब यह फैसला भी ले चुकी थी कि वह रोशन के लिए, अपने घरपरिवार को एकतरफा बचाने की जद्दोजेहद और समाज द्वारा बनाए गए दकियानूसी नियमों को बस और नहीं सहेगी और न ही इन सभी के लिए अपनी नौकरी छोड़ेगी. वह अब दुनिया को एक मजबूत औरत बन कर दिखाएगी.

कॉलगर्ल: होटल में उस रात क्या हुआ

मैं दफ्तर के टूर पर मुंबई गया था. कंपनी का काम तो 2 दिन का ही था, पर मैं ने बौस से मुंबई में एक दिन की छुट्टी बिताने की इजाजत ले ली थी. तीसरे दिन शाम की फ्लाइट से मुझे कोलकाता लौटना था. कंपनी ने मेरे ठहरने के लिए एक चारसितारा होटल बुक कर दिया था. होटल काफी अच्छा था. मैं चैकइन कर 10वीं मंजिल पर अपने कमरे की ओर गया.

मेरा कमरा काफी बड़ा था. कमरे के दूसरे छोर पर शीशे के दरवाजे के उस पार लहरा रहा था अरब सागर.

थोड़ी देर बाद ही मैं होटल की लौबी में सोफे पर जा बैठा.

मैं ने वेटर से कौफी लाने को कहा और एक मैगजीन उठा कर उस के पन्ने यों ही तसवीरें देखने के लिए पलटने लगा. थोड़ी देर में कौफी आ गई, तो मैं ने चुसकी ली.

तभी एक खूबसूरत लड़की मेरे बगल में आ कर बैठी. वह अपनेआप से कुछ बके जा रही थी. उसे देख कर कोई भी कह सकता था कि वह गुस्से में थी.

मैं ने थोड़ी हिम्मत जुटा कर उस से पूछा, ‘‘कोई दिक्कत?’’

‘‘आप को इस से क्या लेनादेना? आप अपना काम कीजिए,’’ उस ने रूखा सा जवाब दिया.

कुछ देर में उस का बड़बड़ाना बंद हो गया था. थोड़ी देर बाद मैं ने ही दोबारा कहा, ‘‘बगल में मैं कौफी पी रहा हूं और तुम ऐसे ही उदास बैठी हो, अच्छा नहीं लग रहा है. पर मैं ने ‘तुम’ कहा, तुम्हें बुरा लगा हो, तो माफ करना.’’

‘‘नहीं, मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा. माफी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैं थोड़ा ज्यादा बोल गई आप से.’’

इस बार उस की बोली में थोड़ा अदब लगा, तो मैं ने कहा, ‘‘इस का मतलब कौफी पीने में तुम मेरा साथ दोगी.’’

और उस के कुछ बोलने के पहले ही मैं ने वेटर को इशारा कर के उस के लिए भी कौफी लाने को कहा. वह मेरी ओर देख कर मुसकराई.

मुझे लगा कि मुझे शुक्रिया करने का उस का यही अंदाज था. वेटर उस के सामने कौफी रख कर चला गया. उस ने कौफी पीना भी शुरू कर दिया था.

लड़की बोली, ‘‘कौफी अच्छी है.’’

उस ने जल्दी से कप खाली करते हुए कहा, ‘‘मुझे चाय या कौफी गरम ही अच्छी लगती है.’’

मैं भी अपनी कौफी खत्म कर चुका था. मैं ने पूछा, ‘‘किसी का इंतजार कर रही हो?’’

उस ने कहा, ‘‘हां भी, न भी. बस समझ लीजिए कि आप ही का इंतजार है,’’ और बोल कर वह हंस पड़ी.

मैं उस के जवाब पर थोड़ा चौंक गया. उसी समय वेटर कप लेने आया, तो मुसकरा कर कुछ इशारा किया, जो मैं नहीं समझ पाया था.

मैं ने लड़की से कहा, ‘‘तुम्हारा मतलब मैं कुछ समझा नहीं.’’

‘‘सबकुछ यहीं जान लेंगे. क्यों न आराम से चल कर बातें करें,’’ बोल कर वह खड़ी हो गई.

फिर जब हम लिफ्ट में थे, तब मैं ने फिर पूछा, ‘‘तुम गुस्से में क्यों थीं?’’

‘‘पहले रूम में चलें, फिर बातें होंगी.’’

हम दोनों कमरे में आ गए थे. वह अपना बैग और मोबाइल फोन टेबल पर रख कर सोफे पर आराम से बैठ गई.

मैं ने फिर उस से पूछा कि शुरू में वह गुस्से में क्यों थी, तो जवाब मिला, ‘‘इसी फ्लोर पर दूसरे छोर के रूम में एक बूढ़े ने मूड खराब कर दिया.’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘बूढ़ा 50 के ऊपर का होगा. मुझ से अननैचुरल डिमांड कर रहा था. उस ने कहा कि इस के लिए मुझे ऐक्स्ट्रा पैसे देगा. यह मेरे लिए नामुमकिन बात थी और मैं ने उस के पैसे भी फेंक दिए.’’

मुझे तो उस की बातें सुन कर एक जोर का झटका लगा और मुझे लौबी में वेटर का इशारा समझ में आने लगा था.

फिर भी उस से नाम पूछा, तो वह उलटे मुझ से ही पूछ बैठी, ‘‘आप मुंबई के तो नहीं लगते. आप यहां किसलिए आए हैं और मुझ से क्या चाहते हैं?’’

‘‘मैं तो बस टाइम पास करना चाहता हूं. कंपनी के काम से आया था. वह पूरा हो गया. अब जो मरजी वह करूं. मुझे कल शाम की फ्लाइट से लौटना है. पर अपना नाम तो बताओ?’’

‘‘मुझे कालगर्ल कहते हैं.’’

‘‘वह तो मैं समझ सकता हूं, फिर भी तुम्हारा नाम तो होगा. हर बार कालगर्ल कह कर तो नहीं पुकार सकता. लड़की दिलचस्प लगती हो. जी चाहता है कि तुम से ढेर सारी बातें करूं… रातभर.’’

‘‘आप मुझे प्रिया नाम से पुकार सकते हैं, पर आप रातभर बातें करें या जो भी, रेट तो वही होगा. पर बूढ़े वाली बात नहीं, पहले ही बोल देती हूं,’’ लड़की बोली.

मैं भी अब उसे समझने लगा था. मुझे तो सिर्फ टाइम पास करना था और थोड़ा ऐसी लड़कियों के बारे में जानने की जिज्ञासा थी. मैं ने उस से पूछा, ‘‘कुछ कोल्डड्रिंक वगैरह मंगाऊं?’’

‘‘मंगा लो,’’ प्रिया बोली, ‘‘हां, कुछ सींक कबाब भी चलेगा. तब तक मैं नहा लेती हूं.’’

‘‘बाथरूम में गाउन भी है. यह तो और अच्छी बात है, क्योंकि हमाम से निकल कर लड़कियां अच्छी लगती हैं.’’

‘‘क्यों, अभी अच्छी नहीं लग रही क्या?’’ प्रिया ने पूछा.

‘‘नहीं, वह बात नहीं है. नहाने के बाद और अच्छी लगोगी.’’

मैं ने रूम बौय को बुला कर कबाब लाने को कहा. प्रिया बाथरूम में थी.

थोड़ी देर बाद ही रूम बौय कबाब ले कर आ गया था. मैं ने 2 लोगों के लिए डिनर भी और्डर कर दिया.

इस के बाद मैं न्यूज देखने लगा, तभी बाथरूम से प्रिया निकली. दूधिया सफेद गाउन में वह सच में और अच्छी दिख रही थी. गाउन तो थोड़ा छोटा था ही, साथ में प्रिया ने उसे कुछ इस तरह ढीला बांधा था कि उस के उभार दिख रहे थे.

प्रिया सोफे पर आ कर बैठ गई.

‘‘मैं ने कहा था न कि तुम नहाने के बाद और भी खूबसूरत लगोगी.’’

प्रिया और मैं ने कोल्डड्रिंक ली और बीचबीच में हम कबाब भी ले रहे थे.

मैं ने कहा, ‘‘कबाब है और शबाब है, तो समां भी लाजवाब है.’’

‘‘अगर आप की पत्नी को पता चले कि यहां क्या समां है, तो फिर क्या होगा?’’

‘‘सवाल तो डरावना है, पर इस के लिए मुझे काफी सफर तय करना होगा. हो सकता है ताउम्र.’’

‘‘कल शाम की फ्लाइट से आप जा ही रहे हैं. मैं जानना चाहती हूं कि आखिर मर्दों के ऐसे चलन पर पत्नी की सोच क्या होती है.’’

‘‘पर, मेरे साथ ऐसी नौबत नहीं आएगी.’’

‘‘क्यों?’’

मैं ने कहा, ‘‘क्योंकि मैं अपनी पत्नी को खो चुका हूं. 27 साल का था, जब मेरी शादी हुई थी और 5 साल बाद ही उस की मौत हो गई थी, पीलिया के कारण. उस को गए 2 साल हो गए हैं.’’

‘‘ओह, सो सौरी,’’ बोल कर अपनी प्लेट छोड़ कर वह मेरे ठीक सामने आ कर खड़ी हो गई थी और आगे कहा, ‘‘तब तो मुझे आप का मूड ठीक करना ही होगा.’’

प्रिया ने अपने गाउन की डोरी की गांठ जैसे ही ढीला भर किया था कि जो कुछ मेरी आंखों के सामने था, देख कर मेरा मन कुछ पल के लिए बहुत विचलित हो गया था.

मैं ने इस पल की कल्पना नहीं की थी, न ही मैं ऐसे हालात के लिए तैयार था. फिर भी अपनेआप पर काबू रखा.

तभी डोर बैल बजी, तो प्रिया ने अपने को कंबल से ढक लिया था. डिनर आ गया था. रूम बौय डिनर टेबल पर रख कर चला गया.

प्रिया ने कंबल हटाया, तो गाउन का अगला हिस्सा वैसे ही खुला था.

प्रिया ने कहा, ‘‘टेबल पर मेरे बैग में कुछ सामान पड़े हैं, आप को यहीं से दिखता होगा. आप जब चाहें इस का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप का मूड भी तरोताजा हो जाएगा और आप के मन को शायद इस से थोड़ी राहत मिले.’’

‘‘जल्दी क्या है. सारी रात पड़ी है. हां, अगर कल दोपहर तक फ्री हो तो और अच्छा रहेगा.’’

इतना कह कर मैं भी खड़ा हो कर उस के गाउन की डोर बांधने लगा, तो वह बोली, ‘‘मेरा क्या, मुझे पैसे मिल गए. आप पहले आदमी हैं, जो शबाब को ठुकरा रहे हैं. वैसे, आप ने दोबारा शादी की? और आप का कोई बच्चा?’’

वह बहुत पर्सनल हो चली थी, पर मुझे बुरा नहीं लगा था. मैं ने उस से पूछा, ‘‘डिनर लोगी?’’

‘‘क्या अभी थोड़ा रुक सकते हैं? तब तक कुछ बातें करते हैं.’’

‘‘ओके. अब पहले तुम बताओ. तुम्हारी उम्र क्या है? और तुम यह सब क्यों करती हो?’’

‘‘पहली बात, लड़कियों से कभी उम्र नहीं पूछते हैं…’’

मैं थोड़ा हंस पड़ा, तभी उस ने कहना शुरू किया, ‘‘ठीक है, आप को मैं अपनी सही उम्र बता ही देती हूं. अभी मैं 21 साल की हूं. मैं सच बता रही हूं.’’

‘‘और कुछ लोगी?’’

‘‘अभी और नहीं. आप के दूसरे सवाल का जवाब थोड़ा लंबा होगा. वह भी बता दूंगी, पर पहले आप बताएं कि आप ने फिर शादी की? आप की उम्र भी ज्यादा नहीं लगती है.’’

मैं ने उस का हाथ अपने हाथ में ले लिया और कहा, ‘‘मैं अभी 34 साल का हूं. मेरा कोई बच्चा नहीं है. डाक्टरों ने सारे टैस्ट ले कर के बता दिया है कि मुझ में पिता बनने की ताकत ही नहीं है. अब दूसरी शादी कर के मैं किसी औरत को मां बनने के सुख के लिए तरसता नहीं छोड़ सकता.’’

इस बार प्रिया मुझ से गले मिली और कहा, ‘‘यह तो बहुत बुरा हुआ.’’

मैं ने उस की पीठ थपथपाई और कहा, ‘‘दुनिया में सब को सबकुछ नहीं मिलता. पर कोई बात नहीं, दफ्तर के बाद मैं कुछ समय एक एनजीओ को देता हूं. मन को थोड़ी शांति मिलती है. चलो, डिनर लेते हैं.’’

डिनर के बाद मुझे आराम करने का मन किया, तो मैं बैड पर लेट गया. प्रिया भी मेरे साथ ही बैड पर आ कर कंबल लपेट कर बैठ गई थी. वह मेरे बालों को सहलाने लगी.

‘‘तुम यह सब क्यों करती हो?’’ मैं ने पूछा.

‘‘कोई अपनी मरजी से यह सब नहीं करता. कोई न कोई मजबूरी या वजह इस के पीछे होती है. मेरे पापा एक प्राइवेट मिल में काम करते थे. एक एक्सीडैंट में उन का दायां हाथ कट गया था. कंपनी ने कुछ मुआवजा दे कर उन की छुट्टी कर दी. मां भी कुछ पढ़ीलिखी नहीं थीं. मैं और मेरी छोटी बहन स्कूल जाते थे.

‘‘मां 3-4 घरों में खाना बना कर कुछ कमा लेती थीं. किसी तरह गुजर हो जाती थी, पर पापा को घर बैठे शराब पीने की आदत पड़ गई थी. जमा पैसे खत्म हो चले थे…’’ इसी बीच रूम बौय डिनर के बरतन लेने आया और दिनभर के बिल के साथसाथ रूम के बिलों पर भी साइन करा कर ले गया.

प्रिया ने आगे कहा, ‘‘शराब के कारण मेरे पापा का लिवर खराब हुआ और वे चल बसे. मेरी मां की मौत भी एक साल के अंदर हो गई. मैं उस समय 10वीं जमात पास कर चुकी थी. छोटी बहन तब छठी जमात में थी. पर मैं ने पढ़ाई के साथसाथ ब्यूटीशियन का भी कोर्स कर लिया था.

‘‘हम एक छोटी चाल में रहते थे. मेरे एक रिश्तेदार ने ही मुझे ब्यूटीपार्लर में नौकरी लगवा दी और शाम को एक घर में, जहां मां काम करती थी, खाना बनाती थी. पर उस पार्लर में मसाज के नाम पर जिस्मफरोशी भी होती थी. मैं भी उस की शिकार हुई और इस दुनिया में मैं ने पहला कदम रखा था,’’ बोलतेबोलते प्रिया की आंखों से आंसू बहने लगे थे.

मैं ने टिशू पेपर से उस के आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘सौरी, मैं ने तुम्हारी दुखती रगों को बेमतलब ही छेड़ दिया.’’

‘‘नहीं, आप ने मुझे कोई दुख नहीं पहुंचाया है. आंसू निकलने से कुछ दिल का दर्द कम हो गया,’’ बोल कर प्रिया ने आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘पर, यह सब मैं अपनी छोटी बहन को सैटल करने के लिए कर रही हूं. वह भी 10वीं जमात पास कर चुकी है और सिलाईकढ़ाई की ट्रेनिंग भी पूरी कर ली है. अभी तो एक बिजली से चलने वाली सिलाई मशीन दे रखी है. घर बैठेबैठे कुछ पैसे वह भी कमा लेती है.

‘‘मैं ने एक लेडीज टेलर की दुकान देखी है, पर सेठ बहुत पगड़ी मांग रहा है. उसी की जुगाड़ में लगी हूं. यह काम हो जाए, तो दोनों बहनें उसी बिजनेस में रहेंगी…’’ फिर एक अंगड़ाई ले कर उस ने कहा, ‘‘मैं आप को बोर कर रही हूं न? आप ने तो मुझे छुआ भी नहीं. आप को मुझ से कुछ चाहिए तो कहें.’’

मैं ने कहा, ‘‘अभी सारी रात पड़ी है, मुझे अभी कोई जल्दी नहीं. जब कोई जरूरत होगी कहूंगा. पर पार्लर से होटल तक तुम कैसे पहुंचीं?’’

‘‘पार्लर वाले ने ही कहा था कि मैं औरों से थोड़ी अच्छी और स्मार्ट हूं, थोड़ी अंगरेजी भी बोल लेती हूं. उसी ने कहा था कि यहां ज्यादा पैसा कमा सकती हो. और पार्लरों में पुलिस की रेड का डर बना रहता है. फिर मैं होटलों में जाने लगी.’’

इस के बाद प्रिया ने ढेर सारी बातें बताईं. होटलों की रंगीन रातों के बारे में कुछ बातें तो मैं ने पहले भी सुनी थीं, पर एक जीतेजागते इनसान, जो खुद ऐसी जिंदगी जी रहा है, के मुंह से सुन कर कुछ अजीब सा लग रहा था.

इसी तरह की बातों में ही आधी रात बीत गई, तब प्रिया ने कहा, ‘‘मुझे अब जोरों की नींद आ रही है. आप को कुछ करना हो…’’

प्रिया अभी तक गाउन में ही थी. मैं ने बीच में ही बात काटते हुए कहा, ‘‘तुम दूसरे बैड पर जा कर आराम करो. और हां, बाथरूम में जा कर पहले अपने कपड़े पहन लो. बाकी बातें जब तुम्हारी नींद खुले तब. तुम कल दिन में क्या कर रही हो?’’

‘‘मुझ से कोई गुस्ताखी तो नहीं हुई. सर, आप ने मुझ पर इतना पैसा खर्च किया और…’’

‘‘नहींनहीं, मैं तो तुम से बहुत खुश हूं. अब जाओ अपने कपड़े बदल लो.’’

मैं ने देखा कि जिस लड़की में मेरे सामने बिना कुछ कहे गाउन खोलने में जरा भी संकोच नहीं था, वही अब कपड़े पहनने के लिए शर्मसार हो रही थी.

प्रिया ने गाउन के ऊपर चादर में अपने पूरे शरीर को इतनी सावधानी से लपेटा कि उस का शरीर पूरी तरह ढक गया था और वह बाथरूम में कपड़े पहनने चली गई.

थोड़ी देर बाद वह कपड़े बदल कर आई और मेरे माथे पर किस कर ‘गुडनाइट’ कह कर अपने बैड पर जा कर सो गई.

सुबह जब तक मेरी नींद खुली, प्रिया फ्रैश हो कर सोफे पर बैठी अखबार पढ़ रही थी.

मुझे देखा, तो ‘गुड मौर्निंग’ कह कर बोली, ‘‘सर, आप फ्रैश हो जाएं या पहले चाय लाऊं?’’

‘‘हां, पहले चाय ही बना दो, मुझे बैड टी की आदत है. और क्या तुम शाम 5 बजे तक फ्री हो? तुम्हें इस के लिए मैं ऐक्स्ट्रा पैसे दूंगा.’’

‘‘सर, मुझे आप और ज्यादा शर्मिंदा न करें. मैं फ्री नहीं भी हुई तो भी पहले आप का साथ दूंगी. बस, मैं अपनी बहन को फोन कर के बता देती हूं कि मैं दिन में नहीं आ सकती.’’

प्रिया ने अपनी बहन को फोन किया और मैं बाथरूम में चला गया. जातेजाते प्रिया को बोल दिया कि फोन कर के नाश्ता भी रूम में ही मंगा ले.

नाश्ता करने के बाद मैं ने प्रिया से कहा, ‘‘मैं ने ऐलीफैंटा की गुफाएं नहीं देखी हैं. क्या तुम मेरा साथ दोगी?’’

‘‘बेशक दूंगी.’’

थोड़ी देर में हम ऐलीफैंटा में थे. वहां तकरीबन 2 घंटे हम साथ रहे थे. मैं ने उसे अपना कार्ड दिया और कहा, ‘‘तुम मुझ से संपर्क में रहना. मैं जिस एनजीओ से जुड़ा हूं, उस से तुम्हारी मदद के लिए कोशिश करूंगा. यह संस्था तुम जैसी लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होने में जरूर मदद करेगी.

‘‘मैं तो कोलकाता में हूं, पर हमारी ब्रांच का हैडक्वार्टर यहां पर है. थोड़ा समय लग सकता है, पर कुछ न कुछ अच्छा ही होगा.’’

प्रिया ने भरे गले से कहा, ‘‘मेरे पास आप को धन्यवाद देने के सिवा कुछ नहीं है. इसी दुनिया में रात वाले बूढ़े की तरह दोपाया जानवर भी हैं और आप जैसे दयावान भी.’’

प्रिया ने भी अपना कार्ड मुझे दिया. हम दोनों लौट कर होटल आए. मैं ने रूम में ही दोनों का लंच मंगा लिया. लंच के बाद मैं ने होटल से चैकआउट कर एयरपोर्ट के लिए टैक्सी बुलाई.

सामान डिक्की में रखा जा चुका था. जब मैं चलने लगा, तो उस की ओर देख कर बोला, ‘‘प्रिया, मुझे तुम्हें और पैसे देने हैं.’’

मैं पर्स से पैसे निकाल रहा था कि इसी बीच टैक्सी का दूसरा दरवाजा खोल कर वह मुझ से पहले जा बैठी और कहा, ‘‘थोड़ी दूर तक मुझे लिफ्ट नहीं देंगे?’’

‘‘क्यों नहीं. चलो, कहां जाओगी?’’

‘‘एयरपोर्ट.’’

मैं ने चौंक कर पूछा, ‘‘एयरपोर्ट?’’

‘‘क्यों, क्या मैं एयर ट्रैवल नहीं कर सकती? और आगे से आप मुझे मेरे असली नाम से पुकारेंगे. मैं पायल हूं.’’

और कुछ देर बाद हम एयरपोर्ट पर थे. अभी फ्लाइट में कुछ वक्त था. उस से पूछा, ‘‘तुम्हें कहां जाना है?’’

‘‘बस यहीं तक आप को छोड़ने आई हूं,’’ पायल ने मुसकरा कर कहा.

मैं ने उसे और पैसे दिए, तो वह रोतेरोते बोली, ‘‘मैं तो आप के कुछ काम न आ सकी. यह पैसे आप रख लें.’’

‘‘पायल, तुम ने मुझे बहुत खुशी दी है. सब का भला तो मेरे बस की बात नहीं है. अगर मैं एनजीओ की मदद से तुम्हारे कुछ काम आऊं, तो वह खुशी शानदार होगी. ये पैसे तुम मेरा आशीर्वाद समझ कर रख लो.’’

और मैं एयरपोर्ट के अंदर जाने लगा, तो उस ने झुक कर मेरे पैरों को छुआ. उस की आंखों से आंसू बह रहे थे, जिन की 2 बूंदें मेरे पैरों पर भी गिरीं.

मैं कोलकाता पहुंच कर मुंबई और कोलकाता दोनों जगह के एनजीओ से लगातार पायल के लिए कोशिश करता रहा. बीचबीच में पायल से भी बात होती थी. तकरीबन 6 महीने बाद मुझे पता चला कि एनजीओ से पायल को कुछ पैसे ग्रांट हुए हैं और कुछ उन्होंने बैंक से कम ब्याज पर कर्ज दिलवाया है.

एक दिन पायल का फोन आया. वह भर्राई आवाज में बोली, ‘सर, आप के पैर फिर छूने का जी कर रहा है. परसों मेरी दुकान का उद्घाटन है. यह सब आप की वजह से हुआ है. आप आते तो दोनों बहनों को आप के पैर छूने का एक और मौका मिलता.’

‘‘इस बार तो मैं नहीं आ सकता, पर अगली बार जरूर मुंबई आऊंगा, तो सब से पहले तुम दोनों बहनों से मिलूंगा.’’

आज मुझे पायल से बात कर के बेशुमार खुशी का एहसास हो रहा है और मन थोड़ा संतुष्ट लग रहा है.

उम्र के हर पड़ाव पर लें सेक्स का मजा

शादी के बाद सेक्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको एक दूसरे के घर पर छिप-छिपकर अजीबोगरीब समय पर जाने की या खामोशी से और्गेज्म पाने की जरूरत नहीं होती. हालांकि छुपकर किए जानेवाले सेक्स से रोमांचक कुछ और हो ही नहीं सकता, लेकिन कई बार सेक्स करने का मन होने पर उचित जगह की कमी अच्छे हार्मोन्स को व्यर्थ कर सकती है. यदि आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने के लिए लोगों की मदद पर आश्रित हैं तो यहां हम बता रहे हैं कि एक खुशनुमा शादी के बाद किन चीजों की उम्मीद करें.

1. शादी की रात

आपने न अपनी शादी में सफेद गाउन पहना और ऐसा भी नहीं है कि आप पहली बार सेक्स करने जा रही हैं. लेकिन तब भी शादी की रात तो शादी की रात होती है. यह बतौर पति-पत्नी आपकी पहली रात है और इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने पति के शरीर के हर निशान, तिल और टैटू से परिचित हैं. शादी का सर्टिफिकेट पाने के बाद बतौर विवाहित जोड़ा सेक्स करने का अपना अलग मजा होता है. हर पुरुष की कल्पना होती है, अपनी दुल्हन के साथ उसके सफेद गाउन या लाल रंग की साड़ी में सेक्स करना. चाहे आप शादी के दिन कितनी ही थकी हुई क्यों न हो, आप अपने जोश पर काबू नहीं पा सकती हैं.

2. हनीमून

क्या क्रुगर नेशनल पार्क, दक्षिण अफ्रीका के पास किसी टेंट में मिशनरी मुद्रा में संबंध बनाना भी अलहदा हो सकता है? शर्तिया अलग होगा. लेकिन हम आपको नोट्स बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं. बस कुछ खुशनुमा हार्मोन्स जो आपके दिमाग पर छाए हुए हैं उन्हें अपना काम करने दें. टूर गाइड की बकबक के बीच कुछ किस चुरा लें, टूर ग्रुप से अलग हो जाएं, अफ्रीका की धूप में कुछ यादें बनाएं और सुनसान जगहों की तलाश कर वहां प्यार की नई दास्तां लिखें.

3. हमने एक दिन सेक्स नहीं किया

आपकी रोजमर्रा की जिंदगी अच्छी तरह चल रही थी, लेकिन एक दिन औफिस के लिए कैब पकड़ते वक्त अचानक ही आपने महसूस किया कि आपने आज सेक्स नहीं किया. आप ख़ुद से वादा करती हैं कि आगे से ऐसा कभी नहीं होगा और पिछली रात की भूल को सुधारने के लिए औफिस के लंच समय का इस्तेमाल करती हैं. अपने पति को फोन करती हैं और दोपहर के रोमांस के लिए किसी करीब होटल में एक कमरा बुक करती हैं.

4. जब हो व्यस्तता

यह वह समय है जब आपकी टु-डू लिस्ट कुछ इस तरह की होती है: प्रिया का संगीत, सास को एयरपोर्ट छोड़ना, टपकते हुए बेसिन के नल को ठीक कराना, सेक्स, छुट्टियों के लिए टिकट्स बुक करना. आपने एक निश्चित दिनचर्या बना ली है, जिसमें सेक्स के लिए एक निश्चित समय, जैसे-सप्ताह में दो बार या दिन में एक बार तय कर लिया है! आपको मालूम होता है कि आप वास्तव में कब सेक्स करनेवाली हैं.

5. प्रेग्नेंसी के दौरान

सेक्स करना कोई भूलता नहीं. निस्संदेह गर्भवती महिलाएं भी नहीं. हो सकता है आप मां बननेवाली हों, लेकिन अचानक ही आपके हार्मोन्स आपको पुराने रोमांचपूर्ण दिनों को फिर से जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. आपके पति नहीं समझ पाते कि अचानक आपको क्या हो गया है, लेकिन वे आपकी सेक्स करने की इच्छा से इतने खुश हैं कि वे आपको हमेशा गर्भवती रखना चाहते हैं. वे फुटबौल भी नहीं देख रहे, केवल एक नादान मुस्कान के साथ यहां-वहां घूम रहे हैं. क्रुगर की यादों में.

6. जब ढर्रे पर चले दिनचर्या

सुबह उठते ही आप अपने मुंह पर कुछ गीला महसूस करती हैं और आपको पता लगता है कि आप जो सोच रही हैं यह वह नहीं है. आपके कुत्ते को आपका सुबह का चेहरा पसंद आया और उसने खुद को आपके दो बच्चों, सॉफ़्ट टौय और मखमली चादर के बीच फिट बिठा लिया है. आपके पति जो कुछ ही देर पहले आपसे एक हाथ दूर लेटे थे, अब हौल के काउच पर खर्राटे ले रहे हैं. आपके बच्चे इस बात का सबूत हैं कि आप दोनों के बीच कभी गर्मजोशीभरा सेक्स हुआ करता था. लेकिन आप बहुत ज्यादा निश्चिंत नहीं हो सकतीं.

7. नीरसता को कहें अलविदा

रूखे दिन काफी लंबे खिंच गए हैं और आपने इसे खत्म करने का निश्चय कर लिया है. आप औफिस के प्रसाधन गृह में जाती हैं और अपने फोन पर एनएसफडब्ल्यू (नौट सेफ फौर वर्क) पेज पर जाती हैं और अपनी कल्पनाओं के लिए जल्दी-जल्दी देखती हैं. क्या आप केवल ट्रेंच कोट और हील्स में अपने पति के औफिस अचानक मिलने के लिए पहुंच सकती हैं? या उनके घर आने के बाद सरप्राइज की योजना बना सकती हैं? या दोनों? अपने बच्चों को उस दोस्त के यहां सोने के लिए कहें, जिसपर आपकी मदद उधार हो, तुरंत सलून जाएं, नई लॉन्जरी, खाने की अपनी पसंदीदा चीजें खरीदें. हम मानते हैं कि नीरस दिनों के बाद सेक्स करना आपातकालीन जरूरत है. क्या आपका बहाना समय की कमी है? या शरीर में आए बदलाव आपको हतोत्सिहित कर रहे हैं? विश्वास करें, आप अब भी तैयार हैं. इन सभी कारणों को भूल जाएं और इस दूरी को मिटाने के लिए सेक्स के लिए तैयार हो जाएं. सेक्स के बाद साथ में लिपटकर सोने का मजा ही कुछ और होता है.

8. अब भी वक्त है

जब आप दोनों ही सही फौर्म में हों तो आपको क्रोशिया पकड़ने और उन्हें क्रौसवर्ड हल करके समय बिताने की तरूरत क्या है? यदि आपको यह करना ही है तो उनके साथ नटखट क्रौसवर्ड खेलें और रोमांचपूर्ण अंदाज में क्रोशिया थामें. उम्र के चौथे, पांचवे और छठें दशक में रसिक न होने का कोई कारण नहीं है. खुद को आजाद छोड़ दें, रोकने की कोशिश न करें.

एक लड़की : प्यार के नाम से क्यों चिढ़ती थी शबनम?

मैंने पकौड़ा खा कर चाय का पहला घूंट भरा ही था कि बाहर से शबनम की किसी पर बिगड़ने की तेज आवाज सुनाई दी. वह लगातार किसी को डांटे जा रही थी. उत्सुकतावश मैं बाहर निकली तो देखा कि वह गार्ड से उलझ रही है.

एक घायल लड़के को अपने कंधे पर एक तरह से लादे हुए वह अंदर दाखिल होने की कोशिश में थी और गार्ड लड़के को अंदर ले जाने से मना कर रहा था.

‘‘भैया, होस्टल के नियम तो तुम मुझे सिखाओ मत. कोई सड़क पर मर रहा है, तो क्या उसे मर जाने दूं? क्या होस्टल प्रशासन आएगा उसे बचाने? नहीं न. अरे, इंसानियत की तो बात ही छोड़ दो, यह बताओ किस कानून में लिखा है कि एक घायल को होस्टल में ला कर दवा लगाना मना है? मैं इसे कमरे में तो ले जा नहीं रही. बाहर ग्राउंड में जो बैंच है, उसी पर लिटाऊंगी. फिर तुम्हें क्या प्रौब्लम हो रही है? लड़कियां अपने बौयफ्रैंड को ले कर अंदर घुसती हैं तब तो तुम से कुछ बोला नहीं जाता,’’ शबनम झल्लाती हुई कह रही थी.

गार्ड ने झेंपते हुए दरवाजा खोल दिया और शबनम बड़बड़ाती हुई अंदर दाखिल हुई. उस ने किसी तरह लड़के को बैंच पर लिटाया और जोर से चीखी, ‘‘अरे, कोई है? ओ बाजी, देख क्या रही हो? जाओ, जरा पानी ले कर आओ.’’ फिर मुझ पर नजर पड़ते ही उस ने कहा, ‘‘नेहा, प्लीज डिटोल ला देना. इस के घाव पोंछ दूं और हां, कौटन भी लेती आना.’’

मैं ने अपनी अलमारी से डिटोल निकाला और बाहर आई. देखा, शबनम अब उस लड़के पर बरस रही है, ‘‘कर ली खुदकुशी? मिल गया मजा? तेरे जैसे लाखों लड़के देखे हैं. लड़की ने बात नहीं की तो या फेल हुए तो जान देने चल दिए. पैसा नहीं है, तो जी कर क्या करना है? अरे मरो, पर यहां आ कर क्यों मरते हो?’’

शबनम उसे लगातार डांट रही थी और वह खामोशी से शबनम को देखे जा रहा था. उस का दायां हाथ काफी जख्मी हो गया था. एक तरफ चेहरे और पैरों पर भी चोट लगी थी. माथे से भी खून बह रहा था.

बाजी बालटी में पानी भर लाईं और शबनम उस में रुई डुबाडुबा कर उस के घाव पोंछने लगी. फिर घाव पर डिटोल लगा कर पट्टी बांध दी और मुझ से बोली, ‘‘तू जरा इसे ठंडा पानी पिला दे, तब तक मैं इस के घर वालों को खबर कर देती हूं.’’

‘‘तू इसे पहले से जानती थी शबनम?’’ मैं ने पूछा तो वह मुसकराई.

‘‘अरे नहीं, मैं औफिस से आ रही थी, तो देखा यह लड़का जानबूझ कर गाड़ी के नीचे आ गया. इस के सिर पर चोट लगी थी, इसलिए यहां उठा लाई. अब घर वाले आ कर इसे अस्पताल ले जाएं या घर, उन की मरजी,’’ कह कर उस ने लड़के से उस के पिता का नंबर पूछा और उन्हें बुला लिया.

इधर मैं अपने कमरे में आ कर शबनम के बारे में सोचने लगी. आज कितना अलग रूप देखा था मैं ने उस का. उस लड़के के घाव पोंछते वक्त वह कितनी सहज थी. लड़कियां चाहे कुछ भी कहें, आज मैं ने महसूस किया था कि वह दिल की कितनी अच्छी है.

पूरे होस्टल में अक्खड़, मुंहफट और घमंडी कही जाने वाली शबनम की बुराई करने से कोई नहीं चूकता. लड़कियां हों या गार्ड या फिर कामवाली, हर किसी की यही शिकायत थी कि शबनम कभी सीधे मुंह बात नहीं करती है. अकड़ दिखाती है. टीवी देखने आती है तो जबरदस्ती वही चैनल लगाती है, जो उसे देखना हो. दूसरों की नहीं सुनती. वैसे ही उस की जिद रहती है कि काम वाली सुबह सब से पहले उस का कमरा साफ करे.

पहनावे में भी दूसरों से बिलकुल अलग दिखती थी वह. गरमी हो या सर्दी, हमेशा पूरी बाजू के कपड़े पहनती, जिस की नैक भी ऊपर तब बंद होती. उस की इस अटपटी ड्रैस की वजह से लड़कियां अकसर उस का मजाक उड़ाती थीं पर वह इस पर ध्यान नहीं देती थी.

देखने में वह खूबसूरत थी पर नाम के विपरीत चेहरे पर कोमलता नहीं सख्ती के भाव होते थे. डीलडौल भी काफी अच्छा था और आवाज काफी सख्त थी, जो उस की पर्सनैलिटी को दबंग बनाती थी और सामने वाला उस से पंगे लेने से बचता था.

वह मेरे कमरे के साथ वाले कमरे में रहती थी, इसलिए मुझ से उस की थोड़ीबहुत बातचीत होती रहती थी. हम 1-2 दफा साथ घूमने भी गए थे, पर हमेशा ही मुझे वह ऐसी बंद किताब लगी जिसे चाह कर भी पढ़ना मुमकिन नहीं था.

8-10 दिन बाद की बात है, मैं ने देखा, शबनम ग्राउंड में बैंच पर बैठी किसी लड़के से बात कर रही है. उस वक्त शबनम की आवाज इतनी तेज थी कि लग रहा था, वह उस लड़के को डांट रही है. 2-3 लड़कियां उधर से शबनम का मजाक उड़ाती हुई आ रही थीं.

एक कह रही थी, ‘‘लो आ गई उस लड़के की शामत. उसे नहीं पता कि किस लड़की से पाला पड़ा है उस का.’’

दूसरी ने कमैंट किया, ‘‘लड़का कह रहा होगा, मुझ पर करो न यों सितम…’’

मैं ने गौर से देखा, यह तो वही लड़का था, जिस की उस दिन शबनम ने मरहमपट्टी की थी. लड़का अब काफी हद तक ठीक हो चुका था पर माथे और हाथ पर अभी भी पट्टी बंधी थी.

बाद में जब मैं ने शबनम से उस के बारे में पूछा तो वह बोली, ‘‘धन्यवाद कहने आया था और हिम्मत तो देखो, मुझ से दोस्ती करना चाहता था. कह रहा था, फिर मिलने आऊंगा.’’

‘‘तो तुम ने क्या कहा?’’

‘‘अरे, मुझे क्या कहना था, अच्छी तरह समझा दिया कि मैं दोस्तीवोस्ती के चक्कर में नहीं पड़ने वाली. रोजरोज मेरा दिमाग खाने के लिए आने की जरूरत नहीं. लड़कों की फितरत अच्छी तरह समझती हूं मैं.’’

आगे उस लड़के का हश्र क्या होगा, यह मैं अच्छी तरह समझ सकती थी, इसलिए शबनम को और न छेड़ते हुए मैं मुसकराती हुई अपने कमरे में चली आई.

उस दिन के बाद 2-3 बार और भी मैं ने उस लड़के को शबनम से बातें करते देखा और हमेशा शबनम उसे झिड़कती हुई ही दिखी. एक दिन उस ने बताया कि वह लड़का हाथ धो कर पीछे पड़ गया है. फोन भी करने लगा है कि मैं तुम्हें पसंद करता हूं. अरे यार, बदतमीजी की भी हद होती है. घाव पर मरहम क्या लगाया, वह तो हाथ पकड़ने पर आमादा हो गया है.

‘‘तो इस में बुराई क्या है यार. वह तुझे इतना चाहता है, देखने में भी हैंडसम है. अच्छा कमाता है, घरपरिवार भी अच्छा है, तू ने ही बताया है. तो तू मना क्यों कर रही है? क्या कोई और है तेरी जिंदगी में?’’ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं, कोई और नहीं है. जरूरत भी नहीं है मुझे. और वह जैसा भी है उस से मुझे क्या लेनादेना? आज पीछे पड़ा है, तो हो सकता है कल देखना भी न चाहे, अजनबी बन जाए. हजारों कमियां निकाले मुझ में. इतना ही अच्छा है तो ढूंढ़ ले न कोई अच्छी लड़की. मैं ने क्या मना किया है? मैं क्यों अपनी खुशियां किसी और के आसरे छोड़ूं? जैसी भी हूं, ठीक हूं…’’ कहतेकहते उस की आंखें नम हो उठीं.

‘‘शबनम, प्यार बहुत खूबसूरत होता है. वह वीरान जिंदगी में खुशियों की बहार ले कर आता है. किसी से हो जाए तो सूरत, उम्र, जाति कुछ नहीं दिखता. इंसान इस प्यार को पाने के लिए हर कुरबानी देने को तैयार रहता है.’’ मैं ने समझाना चाहा.

पर वह अकड़ती हुई बोली, ‘‘बहुत देखे हैं प्यार करने वाले. मैं इन झमेलों से दूर सही…’’ और अपने कमरे में चली गई.

अगले दिन वह लड़का मुझे होस्टल के गेट पर मिल गया. मुझ से विनती करता हुआ बोला, ‘‘प्लीज नेहाजी, आप ही समझाओ न शबनमजी को. वे मुझ से मिलना नहीं चाहतीं.’’

‘‘तुम प्यार करते हो उस से?’’ में ने सीधा प्रश्न किया तो चकित नजरों से उस ने मेरी तरफ देखा फिर सिर हिलाता हुआ बोला, ‘‘बहुत ज्यादा. जिंदगी में पहली दफा ऐसी लड़की देखी. खुद पर निर्भर, दूसरों के लिए लड़ने वाली, आत्मविश्वास से भरपूर. उस ने मुझे जीना सिखाया है. मुश्किलों से हार मानने के बजाय लड़ने का जज्बा पैदा किया है. मैं ने तो औरतों को सिर्फ पति के इशारों पर चलते, रोतेसुबकते और घरेलू काम करते देखा था. पर वह बहुत अलग है. जितना ही उसे देखता हूं, उसे पाने की तमन्ना बढ़ती जाती है. प्लीज, आप मेरी मदद करें. मेरे मन की बातें उस तक पहुंचा दें.’’

‘‘मैं कोशिश करती हूं,’’ मैं ने कहा तो उस के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई. मुझे नमस्ते कर के वह चला गया.

रात को मैं फिर से शबनम के कमरे में दाखिल हुई. वह अकेली थी. ‘‘आज वह गेट पर मिला था,’’ मैं ने कहा.

‘‘जानती हूं. मुझे बाहर बुला रहा था लेकिन मैं नहीं गई.’’

मैं ने उसे कुरेदा, ‘‘तू प्यार से भाग क्यों रही है? जानती है, प्यार हर दर्द मिटा देता है?’’

वह हंसी, ‘‘प्यार दर्द मिटाता नहीं, नए जख्म पैदा करता है. बहुत स्वार्थी होता है प्यार.’’

‘‘मैं आज वजह जान कर रहूंगी कि आखिर क्यों भागती है तू प्यार से? या तो मुझे हकीकत बता दे या फिर उस लड़के को अपना ले जो सिर्फ तेरी राह देख रहा है.’’

‘‘मैं ने भी देखी थी किसी की राह पर उस ने…,’’ कहते हुए अचानक उस की आंखें भीग गईं.

मैं ने प्यार से उस का माथा सहलाते हुए कहा, ‘‘शबनम, अपने दिल का दर्द बाहर निकाल. तभी तू खुश रह सकेगी. मुझे सबकुछ बता दे. मैं जानती हूं, तू दिल की बहुत अच्छी है. पर कुछ तो ऐसा है जो तेरे दिल को तड़पाता है. यह पीड़ा तुझे सामान्य नहीं रहने देती. तेरे चेहरे, तेरे व्यवहार में झलकने लगती है. यकीन रख, तू जो भी बताएगी, वह सिर्फ मुझ तक रहेगा. पर मुझ से कुछ मत छिपा. किस ने चोट पहुंचाई है तुझे?’’

वह थोड़ी नौर्मल हुई तो बिस्तर पर पीठ टिका कर बैठ गई और कहने लगी, ‘‘नेहा,

4 साल पहले तक मैं भी एक ऐसी लड़की थी जिस का दिल किसी के लिए धड़कता था. मैं भी प्यार को बहुत खूबसूरत मानती थी. मेरी भी तमन्नाएं थीं, कुछ सपने थे. दूसरों से प्रेम से बातें करना, मिल कर रहना अच्छा लगता था मुझे. जिसे प्यार किया, उसी के साथ पूरी उम्र गुजारना चाहती थी और उस की यानी विक्रम की भी यही मरजी थी. उस ने मुझे हमेशा ऐतबार दिलाया था कि वह मुझे प्यार करता है, मेरे साथ घर बसाना चाहता है. हमारी जोड़ी कालेज में भी मशहूर थी. पर वक्त की चोट ने उस की असलियत मेरे सामने ला कर रख दी.’’

‘‘एक दिन मैं ने देखा कि मेरी बांह और पीठ पर सफेद निशान हो गए हैं. मैं घबरा गई. डाक्टरों के चक्कर लगाने लगी पर दाग बढ़ते ही गए. जब मैं ने यह राज विक्रम के आगे खोला तो उस के चेहरे के भाव ही बदल गए और 2-4 दिनों के अंदर ही उस का व्यवहार भी बदलने लगा. अब वह मुझ से दूर रहने की कोशिश करता. हालांकि 1-2 दफा मेरे कहने पर वह मेरे साथ डाक्टर के यहां भी गया पर कुछ अनमना सा रहता था. धीरेधीरे वह मिलने से भी कतराने लगा.

‘‘उधर हमारी पढ़ाई पूरी हो गई और पापा को मेरी शादी की फिक्र होने लगी. मैं ने विक्रम से इस बारे में चर्चा की तो वह शादी से बिलकुल मुकर गया. मैं तड़प उठी. उस के आगे रोई, गिड़गिड़ाई पर सिर्फ इस सफेद दाग की वजह से वह मुझ से जुड़ने को तैयार नहीं हुआ.’’ कहते हुए उस ने अपने कुरते की बाजू ऊपर उठाई. उस की बांह पर कई जगह सफेद दाग थे.

शून्य की तरफ देखते हुए वह बोली, ‘‘मैं आज भी उसे भुला नहीं सकी पर कहां जानती थी कि उस का प्यार सिर्फ मेरे शरीर से जुड़ा था. शरीर में दोष उत्पन्न हुआ तो उस ने राहें बदल लीं. किसी और से शादी कर ली. तभी मैं ने समझा कितना स्वार्थी, कितना संकीर्ण होता है यह प्यार.

‘‘मैं ने तो विक्रम की शक्ल नहीं देखी थी. देखने में बिलकुल ऐवरेज था. सांवला, मोटा. मैं उस से बहुत खूबसूरत थी. मैं चाहती तो उस की कमियां गिना कर उसे ठुकरा सकती थी. पर मैं ने तो प्यार किया था और उस ने ऐसी चोट दी कि सारे जज्बात ही खत्म कर डाले. तभी से मुझ में एक तरह की जिद आ गई. मैं समझ गई कि जिंदगी में मांगने पर कुछ नहीं मिलता. मुझे जो चाहिए होता वह जबरदस्ती दूसरों से छीनने लगी. खुद को कमजोर महसूस नहीं कर सकती मैं. किसी की सहानुभूति भरी नजरें भी नहीं चाहिए. न ही किसी का इनकार सह पाती हूं. यही जिद मेरे व्यवहार में नजर आने लगा है. और शायद यही वजह है कि मैं 35 की हो गई पर शादी के नाम से दूर भागती हूं.’’

‘‘यह सब बहुत ही स्वाभाविक है शबनम. पर सच तो यह है कि विक्रम का प्यार मैच्योर नहीं था. वह दिल से तुझ से जुड़ ही नहीं सका था, इसीलिए तुम्हारे रिश्ते का धागा बहुत कमजोर था. वह हलकी सी चोट भी सह नहीं सका. पर अर्पण की आंखों में देखा है मैं ने, वाकई उस के दिल में सिर्फ तुम हो, क्योंकि उस ने सूरत देख कर नहीं, तुम्हारे गुण देख कर तुम्हें चाहा है. इसलिए वह तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ेगा. किसी स्वार्थी इंसान की वजह से खुद को खुशियों से बेजार रखना कहां की अक्लमंदी है?

‘‘शबनम, यदि ठंडी हवा के झोंके सा अर्पण का प्यार तुम्हारे जख्मों पर मरहम लगा सकता है, तो दिल की खिड़कियां बंद कर लेना सही नहीं.’’

‘‘मैं कैसे मान लूं कि अर्पण का प्यार सच्चा है, स्वार्थी नहीं.’’

‘‘ऐसा कर, उसे हर बात बता दे. फिर देख, वह क्या कहता है. मैं जानती हूं, उस का जवाब निश्चित रूप से हां होगा.’’

शबनम ने उसी वक्त फोन उठाया और बोली, ‘‘ठीक है, यह भी कर के देख लेती हूं. अभी तेरे सामने बताती हूं उसे सब कुछ.’’

फिर उस ने फोन मिलाया और स्पीकर औन कर बोली, ‘‘अर्पण, मैं तुम से बात करना चाहती हूं अभी, इसी वक्त. समय है तुम्हारे पास?’’

‘‘बिलकुल, आप कहिए तो,’’ अर्पण ने जवाब दिया.

‘‘अर्पण, तुम्हारे दिल की बात नेहा ने मुझ तक पहुंचा दी है. अब मैं अपनी जिंदगी की असलियत तुम तक पहुंचाना चाहती हूं. बस एक हकीकत, जिसे सुन कर तुम्हारा सारा प्यार काफूर हो जाएगा…’’

‘‘ऐसा क्या है शबनमजी?’’

‘‘बात यह है कि मेरे पूरे शरीर पर सफेद दाग हैं, जो ठीक नहीं हो सकते. गले पर, पीठ पर, बांहों पर और आगे… हर जगह. अब बताओ, क्या है तुम्हारा फैसला?’’

‘‘फैसला क्यों बदलेगा शबनमजी? और दूसरी बात यह कि किस ने कहा दाग ठीक नहीं हो सकते? मेरे अंकल डाक्टर हैं, उन्हें दिखाएंगे हम. वक्त लगता है, पर ऐेसे दाग ठीक हो जाते हैं. मान लीजिए, ठीक न हुए तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मैं आप को चाहता हूं. कमियां तो मुझ में भी हैं, पर उस से क्या? एकदूसरे को अपनाने का मतलब एकदूसरे की खूबियों और कमियों को स्वीकारना ही तो होता है. कल को मेरे शरीर पर कुछ हो जाए या मुझे कोई बीमारी हो जाए तो क्या आप मुझे छोड़ देंगी? नहीं न शबनमजी, बताइए? मेरी मम्मी पास ही बैठी हैं, उन्होंने सब कुछ सुन लिया है और उन की तरफ से भी हां है. आप बस मेरा साथ दीजिए. आप नहीं जानतीं, मैं ने बहुत कुछ सीखा है आप से. आप मेरे साथ रहेंगी तो मैं खुद को बेहतर ढंग से पहचान सकूंगा. जी सकूंगा अपनी जिंदगी. आई लव यू…’’

शबनम ने मेरी तरफ देखा. मैं ने उस से हां कहने का इशारा किया तो वह धीरे से बोल उठी, ‘‘आई लव यू टू…’’

फिर शबनम ने तुरंत फोन काट दिया और मेरे गले लग कर रोने लगी. मैं जानती थी. आज उस की आंखें भले ही रो रही हों पर दिल पहली दफा पूरी तरह प्यार में डूबा मुसकरा रहा था.

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